Category: खेल

  • ICC टी20 रैंकिंग के टॉप-5 में स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा को बड़ा फायदा; श्री चरणी ने रचा इतिहास

    ICC टी20 रैंकिंग के टॉप-5 में स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा को बड़ा फायदा; श्री चरणी ने रचा इतिहास

    नई दिल्ली

    इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने मंगलवार को महिला टी20 प्लेयर्स की ताजा रैंकिंग जारी की है। भारत की युवा स्पिनर श्री चरणी ने इतिहास रच डाला है। वह महिला T20I बॉलर्स की रैंकिंग में 800 रेटिंग अंक हासिल करने वाली पहली भारतीय गेंदबाज बन गई हैं। चरणी 804 अंकों के साथ शीर्ष पर कायम है। उनसे ज्यादा सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की मेगन शुट्ट की रेटिंग (806) रही है। तीसरे नंबर पर इंग्लैंड की सोफी एक्लेस्टोन (802) हैं। इन तीनों के अलावा और कोई महिला गेंदबाज 800 अंकों तक नहीं पहुंची। 22 वर्षीय चरणी ने हाल ही में समाप्त महिला एशिया कप 2026 में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने टूर्नामेंट में पांच मैचों में 12 विकेट चटकाए। चरणी ने श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 20 रन देकर चार शिकार किए। भारत ने 72 रनों से फाइनल जीता और रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

    दीप्ति शर्मा ने लगाई छलांग
    स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने महिला गेंदबाजों की लिस्ट में चार स्थान की छलांग लगाई है। वह दूसरे नंबर पर पहुंच गई हैं। दीप्ति और चरणी में 75 अंकों का अंतर है। दीप्ति के खाते में फिलहाल 729 अंक हैं। उन्होंने महिला एशिया कप में पांच मैचों में सर्वाधिक 14 विकेट झटके। उन्होंने खिताबी मुकाबले में 19 रन खर्च किए और तीन विकेट लिए। बांग्लादेश की कई गेंदबाजों को फायदा हुआ है। मारुफा अख्तर (तीन पायदान ऊपर 15वें पर), राबेया खान (तीन पायदान ऊपर 18वें पर), सुल्ताना खातून (पांच पायदान ऊपर 32वें पर) और फहीमा खातून (छह पायदान ऊपर 49वें पर) एशिया कप के बाद रैंकिंग में आगे बढ़ी हैं।

    टॉप 5 में स्मृति मंधाना मौजूद
    वहीं, T20I बल्लेबाजों की रैंकिंग में भारत की युवा ओपनर शेफाली वर्मा (741 अंक) को एक स्थान का लाभ मिला है। वह छठे नंबर पर आ गई हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में 47.20 की औसत से सबसे ज्यादा 236 रन बनाए। शेफाली इसके अलावा ऑलराउंडर्स की लिस्ट में पांच स्थान चढ़कर 15वें नंबर पर चली गई हैं। स्मृति मंधाना (745) बैटर्स की फेहरिस्त में पांचवें नंबर पर बरकरार हैं। वह टूर्नामेंट में दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली प्लेयर रहीं। स्टार सलामी बल्लेबाज मंधाना ने 213 के औसत से 213 रन जुटाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर (657) दसवें नंबर पर हैं।

    ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी का दबदबा
    बैटर्स की रैंकिंग में टॉप 2 में ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी बेथ मूनी और जॉर्जिया वोल का दबदबा बना हुआ है। मूनी 785 अंकों के साथ नंबर-1 बल्लेबाज हैं। वोल (779) दूसरे स्थान पर हैं। वहीं, बांग्लादेश की निगार सुल्ताना (एक पायदान ऊपर 20वें पर), शर्मिन अख्तर सुप्ता (तीन पायदान ऊपर 40वें पर), श्रीलंका की इमेशा दुलानी (दो पायदान ऊपर 20वें पर) और पाकिस्तान की शवाल जुल्फिकार (चार पायदान ऊपर 45वें पर) की रैंकिंग में एशिया कप के बाद सुधार हुआ है।

  • श्रीलंका के खेल मंत्री ने नुकसान का पूरा खर्च उठाने और एथलीट के सपनों का समर्थन करने की घोषणा की

    श्रीलंका के खेल मंत्री ने नुकसान का पूरा खर्च उठाने और एथलीट के सपनों का समर्थन करने की घोषणा की

    नई दिल्ली
    श्रीलंकाई भाला फेंक एथलीट रुमेश थरंगा के साथ हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने देश लौट रहे 23 वर्षीय थरंगा के भाले एयरलाइन की लापरवाही के चलते टूट गए। इस घटना के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और उनके फैंस में काफी नाराजगी देखने को मिली, क्योंकि ये भाले किसी भी एथलीट की सफलता का सबसे अहम हिस्सा होते हैं।

    थरंगा को हुआ भारी नुकसान
    हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित वर्ल्ड अल्टीमेट चैंपियनशिप में 91.09 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद जब वह वापस श्रीलंका लौट रहे थे तब ट्रांजिट के दौरान टर्किश एयरलाइंस के विमान में उनके भालों को भारी नुकसान पहुंचा। थरंगा ने इंस्टाग्राम पर टूटे हुए भालों की तस्वीर शेयर करते हुए एयरलाइन के प्रति अपना असंतोष जताया। उन्होंने इस स्थिति पर तंज कसते हुए फोटो पर बैड लक और फिर थैंक यू टर्किश एयरलाइंस लिखा।

    श्रीलंका के खेल मंत्री का बयान
    श्रीलंका के खेल मंत्री सुनील कुमारा गमागे ने भी इस मामले की पुष्टि की है। उन्होंने जानकारी दी कि यात्रा के दौरान थरंगा के कुल पांच भालों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आगे कहा, 'हमारी सरकार अपने एथलेटिक्स स्टार और उनके ओलंपिक के सपने के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।' खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि एथलीट को नए और बेहतर उपकरण उपलब्ध कराने के लिए सरकार भालों के नुकसान का पूरा खर्च खुद उठाएगी।

    शानदार रहा थरंगा के लिए 2026
    रुमेश थरंगा इस समय शानदार फॉर्म में चल रहे हैं और साल 2026 में लगातार बड़ी सफलताएं हासिल कर रहे हैं। जून 2026 में रोम में आयोजित गोल्डन गाला के दौरान 92.62 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड थ्रो करके वह दुनिया में पहले नंबर पर पहुंचे थे। इसके अलावा उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स और डायमंड लीग जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भी भारत और अन्य देशों के मजबूत दावेदारों को पछाड़कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।

    इस घटना के बावजूद थरंगा का अगला लक्ष्य आगामी एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करना है। उनका सबसे बड़ा सपना 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स ओलंपिक में श्रीलंका के लिए पहला ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतना है

  • जिम्बाब्वे के लिए खेलते हुए टेलर ने तोड़ा महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का यह कीर्तिमान

    जिम्बाब्वे के लिए खेलते हुए टेलर ने तोड़ा महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का यह कीर्तिमान

    हरारे
    जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज ब्रेंडन टेलर ने में नया इतिहास लिख दिया है। टेलर का वनडे करियर इंटरनेशनल क्रिकेट इतिहास में सबसे लंबा हो गया है। जिम्बाब्वे की टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज खेल रही है। हरारे स्पोर्ट्स क्लब मैदान पर सीरीज का पहला मैच हो रही है। इसमें ब्रेंडन टेलर जिम्बाब्वे की प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हैं।

    टेलर ने 2004 में डेब्यू किया था
    40 साल के ब्रेंडन टेलर ने 20 अप्रैल 2004 को अपना वनडे डेब्यू किया था। 31 अगस्त 2025 के बाद अब वह 15 सितंबर 2026 को जिम्बाब्वे के लिए मैच खेल रहे हैं। अभी तक सबसे लंबे वनडे करियर के मामले में वह तीसरे नंबर पर थे लेकिन अब टॉप पर आ गए हैं। ब्रेंडन टेलर का वनडे करियर 22 साल और 146 दिन लंबा हो गया है।

    सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड टूटा
    अभी तक सबसे लंबे वनडे करियर का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज था। उनका करियर 22 साल और 91 दिन का था। सचिन ने 18 दिसंबर 1989 को अपना पहला मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। उनके वनडे करियर का आखिरी मैच 18 मार्च 2012 को हुआ था। श्रीलंका के दिग्गज ओपनर सनथ जयसूर्या तीसरे और पाकिस्तान के जावेद मियांदाद चौथे नंबर पर हैं।

    पुरुष वनडे क्रिकेट में सबसे लंबा करियर
    22 साल 146 दिन – ब्रेंडन टेलर (जिम्बाब्वे, 2004–)
    22 साल 91 दिन – सचिन तेंदुलकर (भारत, 1989-2012)
    21 साल 184 दिन – सनथ जयसूर्या (श्रीलंका, 1989-2011)
    20 साल 272 दिन – जावेद मियांदाद (पाकिस्तान, 1975-96)
    20 साल 187 दिन – सीन विलियम्स (जिम्बाब्वे, 2005-25)

    • 2022 में ब्रेंडन टेलर पर आईसीसी की एंटी-करप्शन यूनिट ने साढ़े तीन साल का बैन लगा दिया था।
    • टेलर पर कार्रवाई कथित भ्रष्ट लोगों से मिले प्रस्ताव की जानकारी तुरंत न देने के कारण की गई थी।
    • बैन खत्म होने के बाद उन्होंने 2025 में फिर से इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की।

    सचिन और जयसूर्या से आधे मैच भी नहीं खेले
    ब्रेंडन टेलर का वनडे करियर का यह 208वां मैच है। सचिन ने 463 जबकि जयसूर्या ने 445 वनडे मैच खेले थे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले से पहले खेले 207 वनडे की 2025 पारियों में ब्रेंडन टेलर के नाम 6704 रन हैं। वह 11 शतक और 39 फिफ्टी लगा चुके हैं। उनका औसत 35.28 जबकि स्ट्राइक रेट 76.52 का है। 2015 में कोलपैक डील साइन करने के बाद उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास भी ले लिया था। लेकिन 2017 में काउंटी डील से रिलीज होने के बाद उन्होंने एक बार फिर इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी का फैसला किया।

  • नोवाक जोकोविक के पांचवें से 12वें स्थान पर खिसकने के बाद टेनिस रैंकिंग में हुआ ऐतिहासिक बदलाव

    नोवाक जोकोविक के पांचवें से 12वें स्थान पर खिसकने के बाद टेनिस रैंकिंग में हुआ ऐतिहासिक बदलाव

    नई दिल्ली
    असली रोनाल्डो के नाम से मशहूर ब्राजील के रोनाल्डो नजारियो ने जब अपने देश को उनके पांच में से आखिरी विश्व कप जिताया था, उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और पुरुष टेनिस रैंकिंग में नंबर वन ऑस्ट्रेलिया के लेटन हेविट थे।

    इन तीनों महापुरुषों को अपने क्षेत्रों से संन्यास लिए लंबा वक्त हुआ, कई अन्य लोगों ने इनकी जगह ले ली लेकिन साल 2002 से अब तक एक लिस्ट ऐसी रही जहां तीन महापुरुष डटे ही रहे, अब वो लिस्ट भी बदल गई।

    रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच बाहर
    साल 2002 के बाद पहली बार पुरुष टेनिस रैंकिंग के शीर्ष-दस में बिग थ्री यानी रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविक का नाम नहीं होगा। 39 वर्षीय जोकोविक सोमवार को आई रैंकिंग में पांचवें स्थान से खिसककर 12वें स्थान पर आ गए हैं।

    अक्टूबर 2002 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। फेडरर साल 2022 और नडाल 2024 में संन्यास ले चुके हैं लेकिन जोकोविक लगातार शीर्ष दस में बने हुए थे। एक दिलचस्प बात ये भी है कि लेटन हेविट के 17 वर्षीय बेटे क्रूज हेविट बहुत तेजी से पेशेवर टेनिस में आगे बढ़ रहे हैं।

  • रियलिटी शो में दिए गए बयान पर आलोचना के बाद जारी हुआ माफीनामा

    रियलिटी शो में दिए गए बयान पर आलोचना के बाद जारी हुआ माफीनामा

    नई दिल्‍ली
    महान मुक्‍केबाज एमसी मैरीकॉम के एक बयान ने हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद उनकी टीम को सोशल मीडिया के जरिये माफी मांगनी पड़ी। छह बार की वर्ल्‍ड चैंपियन मुक्‍केबाज एमसी मैरीकॉम इस समय रिएलिटी शो बिग बॉस 20 में हिस्‍सा ले रही हैं।

    ओलिंपिक मेडलिस्‍ट मैरीकॉम का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बिग बॉस 20 में मैरीकॉम के सहभागी काजी तौकीर ने उन भारतीय महिलाओं की तारीफ की, जिन्‍होंने देश का नाम रोशन किया। काजी ने कहा, 'हमारे यहां स्‍पोर्ट्स में कौन-कौन लड़की ने कमाल किया है। सानिया मिर्जा ने अच्‍छा किया। साइना नेहवाल ने बढ़‍िया काम किया।

    मैरीकॉम की हुई आलोचना
    इस पर मैरीकॉम ने जवाब दिया, 'लेकिन मेरे जैसा कोई हासिल नहीं कर पाया।' मैरीकॉम के इस बयान की जमकर आलोचना हुई, जिसके बाद मुक्‍केबाज की टीम ने माफीनामा पेश किया।

    मैरीकॉम की टीम ने पोस्‍ट किया, 'अगर मैरी के शब्‍दों को अन्‍यथा लिया गया, तो हम उसके लिए माफी मांगते हैं। उनका इरादा दूसरे एथलीट की यात्रा से तुलना या उसे हानी पहुंचाने का नहीं था। मैरी उन प्रत्‍येक एथलीट्स की इज्‍जत करती हैं, जिन्‍होंने भारत का प्रतिनिधित्‍व किया और खेल को अपना दिल व आत्‍मा दी। प्रत्‍येक यात्रा अनोखी है। प्रत्‍येक उपलब्धि मायने रखती है और प्रत्‍येक मेडल भारत को गौरव दिलाता है।'

    मैरीकॉम को इस बात का मलाल
    बहरहाल, अपनी उपलब्धियों और आकांक्षओं के बीच मैरी ने मणिपुर के हालातों के बारे में बात की और कहा कि उन्‍हें इस बात का मलाल है कि वो राज्‍य के लिए कुछ कर नहीं पाईं। उन्‍होंने कहा, 'मणिपुर की सुरक्षा के लिए मैं कुछ नहीं कर पाईं। मणिपुर में कई प्रजातियां हैं, सभी में एकता होनी चाहिए। हर किसी को शांति और अमन से जीना चाहिए।'

    भारतीय मुक्‍केबाज ने आगे कहा, 'मैं क्‍या कर सकती हूं? मैं बेबस हूं। मैं शक्तिशाली व्‍यक्ति नहीं। मैंने देश के लिए बहुत कुछ हासिल किया, लेकिन राज्‍य के लिए कुछ नहीं कर सकी। मुझे बहुत शर्म आती है।'

  • नकवी को सब पता था कि भारत ट्रॉफी नहीं लेगा, फिर भी दुबई पहुंचे

    नकवी को सब पता था कि भारत ट्रॉफी नहीं लेगा, फिर भी दुबई पहुंचे

    नई दिल्ली
     महिला एशिया कप का फाइनल भारत ने जीत लिया. श्रीलंका को 72 रनों से हराकर भारतीय टीम चैम्पियन बनी, लेकिन मैच खत्म होते ही कहानी क्रिकेट के मैदान से निकलकर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और राजनीति तक पहुंच गई. वजह थी ट्रॉफी प्रेजेंटेशन और उस मंच पर मौजूद मोहसिन नकवी.

    एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन नकवी ट्रॉफी लेकर प्रेजेंटेशन के लिए पहुंचे थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी उनके हाथों से ट्रॉफी लेने के लिए आगे नहीं बढ़ीं. ट्रॉफी भारत ने स्वीकार ही नहीं की. बाद में नकवी ने श्रीलंका को रनर-अप का चेक दिया और वहां से चले गए.
    लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल अब यह नहीं है कि भारत ने ट्रॉफी क्यों नहीं ली.
    बड़ा सवाल यह है कि जब नकवी को पहले से पता था कि भारतीय टीम उनके हाथों से ट्रॉफी नहीं लेगी, तो फिर वह प्रेजेंटेशन के लिए पहुंचे ही क्यों?

    नकवी को पहले ही बता दिया गया था भारत का फैसला
    अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस पूरे मामले पर अहम जानकारी दी है. बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने दिल्ली पहुंचने के बाद बताया कि भारतीय बोर्ड ने आपस में चर्चा करके फैसला किया था कि टीम नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. इस फैसले की जानकारी संबंधित लोगों को पहले ही दे दी गई थी.

    यानी दुबई में जो हुआ, वह अचानक पैदा हुआ विवाद नहीं था. भारत का फैसला पहले से तय था. ACC को इसकी जानकारी थी. नकवी भी इस रुख से अनजान नहीं थे. फिर भी वह प्रेजेंटेशन मंच पर पहुंचे. और वहां वही हुआ जिसकी पहले से जानकारी थी- भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया.
     
    2025 में भी यही कहानी दोहराई गई थी
    इस घटनाक्रम को और दिलचस्प बनाता है 2025 का एशिया कप. पुरुष टीम के एशिया कप फाइनल के बाद भी भारत ने नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी. यानी नकवी के लिए यह कोई बिल्कुल नया घटनाक्रम नहीं था.

    इस बार तो स्थिति और भी साफ थी. पिछले साल का उदाहरण सामने था और BCCI ने फाइनल से पहले ही अपना स्टैंड ACC को बता दिया था.

    इसके बावजूद नकवी प्रेजेंटेशन के लिए पहुंचे. यहीं से सवाल और बड़ा हो जाता है- क्या यह सिर्फ प्रोटोकॉल था? या नकवी के लिए इस मंच पर मौजूद रहना भी अपने आप में महत्वपूर्ण था?

    इस सवाल का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है. इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि नकवी किसी खास राजनीतिक रणनीति के तहत वहां पहुंचे थे. लेकिन इतना जरूर है कि उन्हें भारत के रुख की जानकारी थी और इसके बावजूद वह प्रेजेंटेशन में मौजूद रहे.

    नकवी ने कोई विरोध भी नहीं किया
    दुबई में भारत के इनकार के बाद कोई बड़ा टकराव नहीं हुआ. राजीव शुक्ला ने बताया कि नकवी ने इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई. उन्होंने जिसे ट्रॉफी देनी थी, उसे दी और इसके बाद वहां से चले गए. यानी तस्वीर कुछ ऐसी बनी- भारत ने अपना फैसला नहीं बदला और नकवी ने भी मंच पर कोई विरोध नहीं किया.

    न ट्रॉफी भारत ने नकवी के हाथों से ली, न नकवी ने इस पर सार्वजनिक तौर पर आपत्ति जताई. लेकिन इस शांत घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया- अगर अंत यही होना था, तो फिर नकवी के वहां पहुंचने की जरूरत क्या थी?

    पाकिस्तान फाइनल में था ही नहीं, फिर भी नकवी केंद्र में आ गए. इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है.

    फाइनल भारत और श्रीलंका के बीच था. पाकिस्तान मुकाबले में था ही नहीं. लेकिन मैच खत्म होते-होते पाकिस्तान का सबसे चर्चित क्रिकेट चेहरा पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आ गया. नकवी इस समय सिर्फ ACC के अध्यक्ष नहीं हैं. वह पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन और पाकिस्तान सरकार में गृह मंत्री भी हैं.

    इसलिए भारतीय टीम का उनके हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार सिर्फ क्रिकेट प्रशासन से जुड़ी सामान्य घटना नहीं रह जाता. भारत-पाकिस्तान के मौजूदा रिश्तों के संदर्भ में इसका राजनीतिक अर्थ भी निकाला जाना स्वाभाविक है.

    यही वजह है कि एक एशिया कप फाइनल की ट्रॉफी प्रेजेंटेशन देखते ही देखते भारत-पाकिस्तान की पुरानी कहानी में बदल गई.

    पाकिस्तान में नकवी की हैसियत भी समझिए
    नकवी पाकिस्तान की सत्ता और क्रिकेट- दोनों जगह प्रभावशाली स्थिति में हैं. उन्हें पाकिस्तान के ताकतवर सत्ता प्रतिष्ठान के करीब माना जाता है. PCB की कमान भी उनके पास है और सरकार में गृह मंत्री का पद भी. लेकिन ताकतवर पद पर होना और हर मोर्चे पर निर्विवाद होना अलग बात है.

    पाकिस्तान क्रिकेट में उनके कार्यकाल के दौरान टीम के प्रदर्शन, चयन, खिलाड़ियों से जुड़े फैसलों और प्रशासनिक बदलावों को लेकर लगातार बहस होती रही है. यानी क्रिकेट के मोर्चे पर नकवी के सामने पहले से कई सवाल हैं.

    ऐसे में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट का कोई भी टकराव उनके लिए सिर्फ खेल की खबर नहीं रहता. वह तुरंत राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी बहस का हिस्सा बन जाता है.

    भारत के लिए विरोध, नकवी के लिए नया नैरेटिव?
    यहीं इस पूरे विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू सामने आता है. भारत की तरफ से संदेश साफ था- नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार नहीं करनी… लेकिन किसी भी राजनीतिक विवाद की तरह इस घटना की व्याख्या दोनों तरफ अलग-अलग हो सकती है.

    भारत में तस्वीर को इस रूप में देखा जाएगा कि भारतीय टीम ने अपने स्टैंड पर कायम रहते हुए नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया.

    वहीं पाकिस्तान में इसी घटना को दूसरे नैरेटिव के साथ पेश किए जाने की गुंजाइश है- भारत ने विरोध किया, लेकिन नकवी अपनी जगह मौजूद रहे, उन्होंने अपना काम किया और बिना किसी आपत्ति के वहां से चले गए.

    यानी एक ही तस्वीर के दो राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं. यही वह जगह है जहां यह मामला सिर्फ ट्रॉफी का नहीं रह जाता.

    क्या नकवी को इससे राजनीतिक फायदा मिला?
    यह कहना जल्दबाजी होगी कि नकवी जानबूझकर इसी फायदे के लिए प्रेजेंटेशन में पहुंचे थे. इसका कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं है. लेकिन यह भी सच है कि इस घटनाक्रम ने उन्हें फिर भारत-पाकिस्तान टकराव के केंद्र में ला दिया.

    भारत ने जिस फैसले के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया, उसी फैसले ने नकवी को पाकिस्तान में एक ऐसे किरदार के तौर पर पेश किए जाने का मौका भी दिया, जो भारत के सामने खड़ा रहा और विवाद के बावजूद पीछे नहीं हटा.

    यानी भारत का संदेश अपनी जगह था, लेकिन विवाद का राजनीतिक नैरेटिव दूसरी तरफ भी बनाया जा सकता है. और राजनीति में नैरेटिव की कीमत कम नहीं होती.

    सैकिया और नकवी की बातचीत पर भी हुई चर्चा
    फाइनल के दौरान BCCI सचिव देवजीत सैकिया और नकवी की बातचीत की तस्वीरें भी सामने आई थीं. इसके बाद सवाल उठा कि अगर भारत ने नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने का फैसला किया था, तो फिर BCCI अधिकारी उनसे बातचीत क्यों कर रहे थे?

    राजीव शुक्ला ने इसे सामान्य पेशेवर बातचीत बताया. उनके मुताबिक मैच के दौरान अधिकारी एक-दूसरे से मिलते-जुलते और बातचीत करते हैं. इसलिए सैकिया और नकवी की बातचीत को किसी विशेष संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

    इससे BCCI ने अपनी स्थिति भी साफ कर दी- बातचीत और प्रोटोकॉल अपनी जगह हैं, लेकिन ट्रॉफी स्वीकार करने का फैसला अपनी जगह था.

    असली जीत किसकी हुई?
    मैदान पर इसका जवाब बिल्कुल साफ है.भारत की. भारत ने श्रीलंका को हराया और एशिया कप अपने नाम किया. लेकिन ट्रॉफी प्रेजेंटेशन में भारत ने नकवी से ट्रॉफी नहीं ली. यानी चैम्पियन बनने के बावजूद भारतीय टीम उस ट्रॉफी को मंच से उठाकर ले जाने की औपचारिकता में शामिल नहीं हुई.

    नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए. लेकिन वह इस पूरे विवाद के सबसे बड़े किरदार जरूर बन गए. यही इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट है. भारत ट्रॉफी जीतकर चैम्पियन बना. नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए. लेकिन विवाद ने नकवी को फिर भारत-पाकिस्तान टकराव के केंद्र में ला खड़ा किया.

    और अब जब यह साफ हो चुका है कि भारत का फैसला पहले से तय था और इसकी जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी, तो सवाल और चुभता है. इसका जवाब अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है.

    लेकिन महिला एशिया कप की इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है- भारत ने ट्रॉफी नहीं ली, नकवी ट्रॉफी नहीं दे पाए… मगर दोनों के बीच का विवाद एक बार फिर सुर्खियों की ट्रॉफी जरूर ले गया.

  • टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज पर कब्जा जमाना चाहेगी

    टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज पर कब्जा जमाना चाहेगी

    नई दिल्ली
    पहले मैच में बड़ी जीत से उत्साहित भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज का आगाज किया। अरुण जेटली स्टेडियम में मेजबान अफगानिस्तान भारतीय टीम को टक्कर भी नहीं दे पाया। यह टी20 सीरीज तीन मैचों की है। दूसरे मैच को अपने नाम करके भारतीय टीम सीरीज पर कब्जा जमाना चाहेगी। भारत टी20 का विश्व चैंपियन है लेकिन अफगानिस्तान को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

    भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा टी20 मैच कब खेला जाएगा?
    भारत और अफगानिस्तान के बीच दूसरा टी20 मुकाबला 15 सितंबर (मंगलवार) को खेला जाएगा।

    भारत और अफगानिस्तान का दूसरा टी20 मैच कहां खेला जाएगा?
    भारत और अफगानिस्तान का दूसरा टी20 मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में ही खेला जाएगा।

    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 मैच की शुरुआत कितने बजे से होगी?
    भारत और अफगानिस्तान का दूसरा टी20 मैच शाम 7 बजकर 30 बजे शुरू हो जाएगा।

    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 का लाइव टेलीकास्ट कहां देखें?
    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 मैच की लाइव स्ट्रीमिंग सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगी।

    भारत और अफगानिस्तान के दूसरे टी20 मैच की लाइव स्ट्रीमिंग किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं?
    भारत और अफगानिस्तान दूसरे टी20 मैच की लाइव स्ट्रीमिंग देखने के लिए फैंस फैनकोड ऐप पर जा सकते हैं।

    इस प्रकार हैं दोनों टीमों का स्क्वाड
    भारत: संजू सैमसन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, वैभव सूर्यवंशी, वाशिंगटन सुंदर, यश ठाकुर, रवि बिश्नोई।

    अफगानिस्तान: रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), इब्राहिम जादरान (कप्तान), सेदिकुल्लाह अटल, गुलबदीन नैब, दरविश रसूली, अजमतुल्लाह उमरजई, मोहम्मद नबी, राशिद खान, नूर अहमद, मुजीब उर रहमान, फजलहक फारूकी, नवीन-उल-हक, नांगेयालिया खरोती, अब्दुल्ला अहमदजई, नूर उल रहमान।

     

  • महिला एशिया कप विवाद में नकवी को झटका या फायदा? दूसरा टर्म मुश्किल, BCCI के अगले कदम पर नजर

    महिला एशिया कप विवाद में नकवी को झटका या फायदा? दूसरा टर्म मुश्किल, BCCI के अगले कदम पर नजर

     नई दिल्ली

    पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चीफ मोहसिन नकवी के लिए एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) में आगे का सफर आसान नहीं रहने वाला है. एसीसी चेयरमैन के तौर पर नकवी का मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2027 में खत्म हो रहा है. एसीसी चेयरमैन के कार्यकाल को बढ़ाने का प्रावधान मौजूद है, लेकिन दूसरे कार्यकाल के लिए सदस्य बोर्ड्स का समर्थन जरूरी होगा। 

    ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मोहसिन नकवी को दोबारा इस पद पर बने रहने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल पाएगा. मौजूदा हालात में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) की तरफ से उनके लिए समर्थन मिलने की संभावना नहीं मानी जा रही है. इतना ही नहीं, एसीसी के दूसरे सदस्य बोर्डों के बीच भी नकवी को एक और कार्यकाल दिलाने को लेकर उत्साह नजर नहीं आ रहा है। 

    एसीसीस में चेयरमैन का पद दो साल के रोटेशन सिस्टम के तहत चलता है. इसी व्यवस्था के मुताबिक नकवी ने 2025 में एसीसी की कमान संभाली थी और उनका कार्यकाल अप्रैल 2027 में समाप्त होगा. इसका मतलब है कि नकवी के पास अब करीब सात महीने का समय बचा है. इसके बाद एसीसी को नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया से गुजरना होगा. हालांकि, कार्यकाल बढ़ाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसके लिए सदस्य देशों के बीच सहमति और समर्थन अहम होगा। 

     महिला एशिया कप विवाद का खेल समझिए

    महिला एशिया कप के फाइनल में भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया. लेकिन मैच खत्म होते ही कहानी क्रिकेट से निकलकर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और राजनीति तक पहुंच गई. ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के लिए मंच पर मौजूद एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) अध्यक्ष मोहसिन नकवी से भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। 

    दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान फाइनल में था ही नहीं. फिर भी उसका एक सबसे ताकतवर चेहरा पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आ गया। 

    मोहसिन नकवी इस समय एसीसी अध्यक्ष, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री हैं. यानी जिस शख्स के हाथों भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से इनकार किया, वह सिर्फ क्रिकेट प्रशासक नहीं, बल्कि पाकिस्तान सरकार का भी बेहद अहम चेहरा है। 

    जय शाह को मिला था एक्सटेंशन
    उदाहरण के लिए आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के मौजूदा चेयरमैन जय शाह का बतौर एसीसी चीफ कार्यकाल बढ़ाया गया था. उन्होंने जनवरी 2021 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के तत्कालीन प्रमुख नजमुल हसन से यह जिम्मेदारी संभाली थी. बाद में सदस्य देशों की सहमति से शाह का कार्यकाल 2024 तक बढ़ाया गया था. जय शाह का कार्यकाल चार साल तक चला और वह एसीसी के सबसे लंबे समय तक चेयरमैन रहने वाले पदाधिकारियों में शामिल हुए। 

    दिसंबर 2024 में जय शाह के चेयरमैन बनने के बाद श्रीलंका के शम्मी सिल्वा ने कुछ समय के लिए एसीसी में सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभाली. 2025 में यह जिम्मेदारी पाकिस्तान के मोहसिन नकवी को मिली. अब अप्रैल 2027 में उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद एसीसी के सामने अगला चेयरमैन चुनने का सवाल होगा। 

    भारत कब आएगी दोनों ट्रॉफी?
    मोहसिन नकवी का नाम पिछले दो सीनियर एशिया कप के ट्रॉफी विवादों से जुड़ चुका है. 2025 में पाकिस्तान को हराकर भारत मेन्स एशिया कप में चैम्पियन बना था. लेकिन भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की. इसके बाद खिलाड़ियों ने चैम्पियन बैनर के साथ जश्न मनाया और ट्रॉफी के बिना ही अपनी जीत का जश्न पूरा किया। 

    विमेंस एशिया कप 2026 में भी भारत ने यही रुख अपनाया. मैच खत्म होने के बाद भारतीय टीम ने काफी देर तक मैदान पर इंतजार किया, बीसीसीआई अधिकारियों के साथ चर्चा की और फिर ड्रेसिंग रूम लौट गई. इसके बाद पुरस्कार समारोह भारतीय टीम की मौजूदगी के बिना ही समाप्त हुआ. इन दोनों घटनाओं ने एसीसी चेयरमैन के तौर पर मोहसिन नकवी की भूमिका को लेकर लगातार बहस को जन्म दिया है. ऐसे माहौल में नकवी के अगले कार्यकाल के लिए बीसीसीआई का समर्थन मिलना मुश्किल माना जा रहा है। 

    फिलहाल बीसीसीआई की तरफ से मोहसिन नकवी के कार्यकाल या उनके संभावित विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है. बीसीसीआई अभी इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर कुछ कहने से बच रहा है. लेकिन अप्रैल 2027 में जब नए एसीसी चेयरमैन को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, तब सदस्य देशों का रुख अहम होगा. मौजूदा समीकरणों को देखते हुए नकवी के लिए एक और कार्यकाल हासिल करना आसान नहीं दिख रहा  है। 

    पाकिस्तान में कितनी चलती है नकवी की?
    मोहसिन नकवी पाकिस्तान में ताकतवर माने जाते हैं. उन्हें सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के करीबी लोगों में गिना जाता है. यानी पाकिस्तान की सत्ता के शीर्ष गलियारों में उनकी पहुंच और प्रभाव दोनों मजबूत माने जाते हैं. लेकिन सत्ता के करीब होना और जनता के बीच लोकप्रिय होना दो अलग बातें हैं। 

    पाकिस्तान क्रिकेट में नकवी के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठे हैं. टीम के प्रदर्शन से लेकर चयन और खिलाड़ियों से जुड़े विवादों तक पीसीबी लगातार चर्चा में रहा है. हालिया इंग्लैंड दौरे में सात खिलाड़ियों को बाहर किए जाने और कोचिंग स्टाफ में बदलाव ने भी पाकिस्तान क्रिकेट की अंदरूनी उथल-पुथल को सामने रखा। 

    यानी जिस क्रिकेट बोर्ड की कमान नकवी के हाथ में है, वहां सवाल लगातार बने हुए हैं. टीम के प्रदर्शन से लेकर चयन और फैसलों तक उठ रही उंगलियों का सियासी और प्रशासनिक दबाव आखिरकार पीसीबी चेयरमैन के तौर पर नकवी पर भी आता है। 

    क्रिकेट से बाहर भी मुश्किलें कम नहीं
    नकवी की मुश्किलें सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं. पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उनके हालिया बयानों ने भी राजनीतिक बहस छेड़ दी है. उन्होंने मौजूदा सिस्टम में बदलाव और नए प्रशासनिक यूनिट बनाने की जरूरत पर जोर दिया. इस पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी समेत कई राजनीतिक हलकों में विरोध के सुर उठे और सवाल भी खड़े हुए। 

    नकवी ने बाद में साफ किया कि नए प्रशासनिक यूनिट लोगों की इच्छा और राजनीतिक सहमति से ही बनाए जाने चाहिए। 

    यानी एक तरफ क्रिकेट का संकट, दूसरी तरफ राजनीतिक विवाद. ऐसे माहौल में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट से जुड़ा कोई भी विवाद नकवी के लिए सिर्फ क्रिकेट का मामला नहीं रह जाता. और यहीं से महिला एशिया कप की ट्रॉफी कंट्रोवर्सी दिलचस्प हो जाती है। 

    क्या नकवी को पहले से अंदाजा था?
    यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ. 2025 पुरुष एशिया कप के फाइनल के बाद भी भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था. यानी इस बार संभावित टकराव का उदाहरण पहले से मौजूद था। 

    और इस बार बीसीसीआई ने टूर्नामेंट से पहले ही एसीसी को अपना रुख बता दिया था कि अगर नकवी ट्रॉफी देने के लिए मौजूद रहे, तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बाद में इसे सोच-समझकर लिया गया फैसला बताया। 

    फिर भी नकवी ACC अध्यक्ष की हैसियत से प्रेजेंटेशन में मौजूद रहे. नतीजा सामने था- भारतीय टीम मंच पर ट्रॉफी लेने नहीं आई। 

    यहां सवाल यह नहीं कि नकवी को भारतीय टीम का रुख पता था या नहीं. सवाल यह है कि जब 2025 में ऐसा हो चुका था और इस बार भी बीसीसीआई ने पहले ही अपना स्टैंड साफ कर दिया था, तब इस टकराव का राजनीतिक असर क्या हो सकता था?

    भारत ने स्टैंड लिया, नकवी को मिला नया नैरेटिव
    भारत ने अपना संदेश साफ कर दिया- नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार नहीं करनी है. लेकिन राजनीति में किसी घटना का असर सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि घटना हुई क्या. यह भी मायने रखता है कि उसे किस तरह पेश किया जाता है। 

    भारत में यह तस्वीर नकवी की किरकिरी के तौर पर देखी जा सकती है. लेकिन पाकिस्तान में उनके समर्थकों के लिए यही घटना अलग कहानी बन सकती है- 'भारत ने विरोध किया, लेकिन नकवी अपनी जगह डटे रहे। 

    यही वह बिंदु है जहां क्रिकेट का विवाद राजनीतिक नैरेटिव में बदल जाता है. और यह सिर्फ कल्पना नहीं है कि पाकिस्तान में इस घटना की अलग व्याख्या हो सकती है। 

    नकवी के लिए यह विवाद क्यों अहम है?
    नकवी के सामने इस समय पाकिस्तान क्रिकेट को लेकर सवाल हैं. ऐसे में भारत-पाकिस्तान का कोई भी टकराव बहस की दिशा बदल सकता है. चर्चा अचानक यह नहीं रह जाती कि पाकिस्तान क्रिकेट की हालत कैसी है, चयन में क्या हो रहा है या टीम का प्रदर्शन कैसा है। 

    चर्चा बन जाती है- भारत ने नकवी के हाथों ट्रॉफी क्यों नहीं ली? नकवी ने क्या किया? यही राजनीति का खेल है. भारत में जो घटनाक्रम नकवी के खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है, वही पाकिस्तान में उनके समर्थकों के लिए 'भारत के सामने नहीं झुकने' का नैरेटिव बन सकता है। 

    हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि नकवी ने जानबूझकर इसी राजनीतिक फायदे के लिए यह पूरा घटनाक्रम रचा. इसका कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि विवाद ने उन्हें वह मंच दे दिया, जिस पर वह भारत-पाकिस्तान टकराव के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर फिर नजर आए। 

  • WTC अभियान में पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं, ICC ने काटे 11 अंक और लगाया जुर्माना; अब श्रीलंका से होगी भिड़ंत

    WTC अभियान में पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं, ICC ने काटे 11 अंक और लगाया जुर्माना; अब श्रीलंका से होगी भिड़ंत

    करांची 

    इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान को 0-3 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. बर्मिंघम के एजबेस्ट मैदान पर खेले गए सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच में पाकिस्तानी टीम ने कुछ संघर्ष किया, लेकिन वो जीत दिलाने के लिए काफी नहीं था. इंग्लैंड ने वो मुकाबला 8 विकेट से जीतकर पाकिस्तान का सीरीज में 0-3 से सफाया किया था। 

    अब पाकिस्तानी टीम पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने तगड़ा एक्शन लिया है. एजबेस्टन टेस्ट में धीमा ओवर रेट पाकिस्तान को भारी पड़ गया. आईसीसी ने पाकिस्तानी टीम पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगाया है, साथ ही वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 में उसके खाते से 11 अंक भी काट दिए हैं। 

    समय की तय छूट को शामिल करने के बाद भी पाकिस्तान की टीम निर्धारित लक्ष्य से 11 ओवर पीछे रही. इसी वजह से टीम पर यह कार्रवाई हुई. आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी रंजन मदुगले ने मामले में सजा सुनाई. मैदानी अंपायर्स पॉल राइफल और क्रिस गैफनी, थर्ड अंपायर अल्लाहुद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर रसेल वॉरेन ने धीमे ओवर रेट का आरोप लगाया था। 

    आईसीसी के नियम के अनुसार, निर्धारित समय में कम कराए गए प्रत्येक ओवर पर खिलाड़ियों की मैच फीस का 5 फीसदी जुर्माना लगाया जाता है. हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 50 फीसदी है. पाकिस्तान के 11 ओवर कम रहने के कारण उस पर अधिकतम 50 फीसदी जुर्माना लगाया गया। 

    आर्थिक जुर्माने से ज्यादा बड़ा झटका पाकिस्तान को डब्ल्यूटीसी में लगा है. नियमों के मुताबिक, प्रत्येक कम ओवर के लिए एक डब्ल्यूटीसी अंक काटा जाता है. लिहाजा 11 ओवर कम रहने के कारण पाकिस्तान के खाते से सीधे 11 अंक घटा दिए गए. पाकिस्तान WTC तालिका में पहले ही सबसे नीचे था. इस कटौती के बाद उसकी हालत और खराब हो गई है. उसका अंक प्रतिशत घटकर 4.63 रह गया है. इंग्लैंड के खिलाफ 0-3 की हार के बाद टीम के लिए यह दोहरी मुश्किल है। 

  • सचिन तेंदुलकर से हुई 15 साल के वैभव की तुलना, 2 साल में दोगुनी हो सकती है कमाई

    सचिन तेंदुलकर से हुई 15 साल के वैभव की तुलना, 2 साल में दोगुनी हो सकती है कमाई

    नई दिल्ली
    मौजूदा समय में वैभव सूर्यवंशी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने फ्रेंचाइजी क्रिकेट से लेकर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खुद की शुरुआती प्रतिभा का परिचय दिया है। मात्र 15 साल की उम्र में उन्होंने वह सब हासिल कर लिया है, जिसके लिए कई लोगों की पूरी जिंदगी बीत जाती है। आईपीएल 2026 में दमदार प्रदर्शन करने और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट, मोस्ट वैल्यूवल प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट और ऑरेंज कैप जीतने के बाद उनकी ब्रांड वैल्यू में भी काफी इजाफा हुआ है। बिहार के समस्तीपुर से आने वाले वैभव सूर्यवंशी अब रोजाना 1.5 करोड़ से अधिक रुपये कमा रहे हैं। आईपीएल 2026 में वैभव सूर्यवंशी के बल्ले से इतने रिकॉर्ड टूटे कि इससे क्रिकेट के सभी ट्रेडिशनल रूल धरे के धरे रह गए। आईपीएल सीजन 2026 के बीच में ही सूर्यवंशी की कहानी सिर्फ बल्ले से उनके प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि बाजार में उनकी कीमत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई।

    हौलिहान लोके की आईपीएल वैल्यूएशन स्टडी 2026 (Houlihan Lokey’s IPL Valuation Study 2026) के अनुसार, वैभव सूर्यवंशी की लोकप्रिया सचिन तेंदुलकर के बराबर है। यह आम तौर पर पूरी फ्रेंचाइजी का मूल्यांकन करने के लिए बनाई गई रिपोर्ट है। इसने 15 वर्षीय खिलाड़ी के लिए तर्क दिया है कि प्रसारण के दौरान उसकी लोकप्रियता सचिन तेंदुलकर के बराबर है। इसने एक और अहम बात भी कही है। वह यह कि आज सूर्यवंशी को साइन करने वाला कोई भी ब्रांड असल में एक दशक की अप्रमाणित क्षमता को दांव पर लगा रहा है।

    लंबे निवेश का कोई निश्चित आधार नहीं है
    हालांकि, वैभव पर एक दशक तक दांव लगाने के लिए शर्तें, दर, संरचना, कानूनी आधार और निकास खंड की आवश्यकता होती है। एचटी डिजिटल ने पिछले महीने इस प्रस्ताव की जांच की और पाया कि यह फिलहाल एक जोखिम ज्ञापन के करीब है। इसके नियम अभी बाजार में नहीं लिखे गए हैं।

    सूर्यवंशी के लिए यह बात बन सकती है असुरक्षा
    कागज पर सूर्यवंशी का रेट कार्ड उन खिलाड़ियों के रेट कार्ड के बराबर है जो अपने करियर के दस साल पूरे कर चुके हैं। लेकिन अभी तक उनके पास इस वैल्यू को बनाए रखने का कोई निश्चित आधार नहीं है। सूर्यवंशी के पास फिलहाल, इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि 18 साल के होने पर उनके अनुबंधों का क्या होगा और न ही इस बात की कोई स्पष्ट जवाबदेही है कि अगर उन्हें सलाह देने वाले लोग गलत साबित होते हैं तो क्या होगा। जिस तरह से उनका मूल्य बढ़ रहा है उस तरीके से व्यावसायिक ढ़ांचा अभी तक नहीं बन पा रहा है। सूर्यवंशी फिलहाल प्रतिदिन 1.5-2 करोड़ रुपये कमाते हैं।

    फिलहाल सूर्यवंशी की कमाई 1.5 से दो करोड़ प्रतिदिन
    एएमपी स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट के संस्थापक और सीईओ इंद्रनील दास ब्लाह ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि "आईपीएल से पहले वास्तव में कोई तय स्टैंडर्ड नहीं था। यह बिल्कुल नया है कि वह (वैभव सूर्यवंशी) प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ रुपये चार्ज कर रहे हैं।" साल 2025 में शानदार प्रदर्शन के बाद सूर्यवंशी की तुलना तेंदुलकर से पहले ही की जा रही थी। इस साल की शुरुआत में अंडर-19 विश्व कप फाइनल में उनके 175 रनों ने इस तुलना को और भी पुख्ता कर दिया। आयरलैंड और जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत द्वारा खेली गई सीरीज में वैभव सूर्यवंशी की उपस्थिति ने टिकटों की बिक्री में भी होड़ लगा दी।

    दो साल तक यही प्रदर्शन रहा तो कमाई दोगुनी
    दास ब्लाह ने उन्हें पहले ही शुभमन गिल, ऋषभ पंत और केएल राहुल जैसे बड़े क्रिकेटरों की लिस्ट में रखा है। हालांकि, वह यह भी मानते हैं कि सूर्यवंशी की बल्लेबाजी शैली इन सबसे उन्हें अलग भी बनाती है। अगर अगले दो वर्षों में उनका प्रदर्शन बरकरार रहता है, तो दास ब्लाह को उम्मीद है कि एंडोर्समेंट से होने वाली कमाई दोगुनी होकर 3-4 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो जाएगी। ऐसे में वह देश के सबसे बड़े सेलिब्रिटीज के बराबर हो जाएंगे। फिलहाल, ब्रांड किसी व्यक्ति के पूरे करियर के काम पर दांव नहीं लगा रहे हैं, बल्कि लगभग एक असाधारण सीजन और वर्तमान मूल्यों पर दांव लगा रहे हैं।

    परिवार और राजस्थान रॉयल्स पर है देखरेख की जिम्मेदारी
    बता दें कि 1.5 करोड़ प्रतिदिन की फीस लेने वाले सूर्यवंशी का अभी तक कोई औपचारिक एजेंट नहीं है। उनका परिवार उनके व्यावसायिक मामलों को संभालता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें राजस्थान रॉयल्स के अपने व्यावसायिक सिस्टम का पूरा समर्थन मिला हुआ है। इसी फ्रेंचाइजी ने उन्हें खोजा, उनका पालन-पोषण किया और दुनिया के सामने एक उभरता हुआ सितारा बनाया। दास ब्लाह ने कहा, "राजस्थान रॉयल्स के सिस्टम ने उनका ख्याल रखा है। ऐसा लगता है कि उन्हें खुद को जरूरत से ज्यादा उजागर न करने के बारे में सही सलाह मिल रही है।" फिलहाल, दास ब्लाह को इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती। जेएसडब्ल्यू और मुंबई इंडियंस के आरआईएसई ने भी पहले इसी फ्रेंचाइजी के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया है। वैभव सूर्यवंशी अभी 18 साल के नहीं हुए हैं ऐसे में उनके पैरेंट्स को सहयोग और साथ अपेक्षित है।