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  • जोसेफ विजय की नई कैबिनेट: एन आनंद से लेकर कीर्तना एस तक 9 मंत्री शामिल, बहुमत साबित करने की चुनौती

    जोसेफ विजय की नई कैबिनेट: एन आनंद से लेकर कीर्तना एस तक 9 मंत्री शामिल, बहुमत साबित करने की चुनौती

     तमिलनाडु

    तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नया युग की शुरूआत हो गई है। 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के संस्थापक जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। यह राज्य में पहली बार है जब किसी गैर-द्रविड़ पार्टी ने सरकार बनाई है। नई सरकार के गठन के साथ ही डीएमके और एआईएडीएमके का दशकों पुराना दबदबा खत्म हो गया है। विजय के साथ में  9 और मंत्रियों ने सपथ ली है। अब विजय को 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। विजय के साथ जिन नौ मंत्रियों ने सपथ ली है आइये उनके बार में हम आपको बताते है।

    एन आनंद
    61 साल के एन आनंद को लोग 'बुसी आनंद' के नाम से भी जानते हैं। वह विजय के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। साल 2006 में वह पुडुचेरी से विधायक चुने गए थे। अब उन्होंने चेन्नई की टी नगर सीट से जीत हासिल की है। वह टीवीके के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और पहले विजय रसिगर मंदरम के प्रमुख  के तौर पर काम कर चुके हैं।

    आधव अर्जुना
    बास्केटबॉल खिलाड़ी और बिजनेसमैन रहे आधव अर्जुना अब राजनीति में सक्रिय हैं। वह बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। वह वीसीके पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल हुए थे। पार्टी के महासचिव के रूप में उन्होंने चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाई और चेन्नई की विल्लिवाक्कम सीट से जीत दर्ज की।

    राजमोहन अरुमुगम
    डिजिटल प्लेटफॉर्म 'पुट चटनी' से मशहूर हुए राजमोहन ने युवाओं और नए वोटरों को पार्टी से जोड़ने में मदद की। प्रचार सचिव के तौर पर उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब वीडियो के जरिए पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाया। उनके मजाकिया अंदाज और रील्स को युवाओं ने काफी पसंद किया।

    सी टी आर निर्मल कुमार
    44 साल के निर्मल कुमार टीवीके की डिजिटल रणनीति के मुख्य चेहरा हैं। उनके पास बीजेपी और एआईएडीएमके के सोशल मीडिया सेल में काम करने का अनुभव है। उन्होंने व्हाट्सएप और मीम नेटवर्क का एक बड़ा जाल तैयार किया, जिससे 2025 और 2026 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का दबदबा बना रहा।

    के जी अरुणराज
    पूर्व आईआरएस अधिकारी और डॉक्टर अरुणराज ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर टीवीके जॉइन की। वह पार्टी में प्रचार और नीति के महासचिव हैं। उन्होंने तमिलनाडु, बिहार और महाराष्ट्र में आयकर विभाग में सेवा दी है। उन्होंने तिरुचेंगोडु सीट से चुनाव जीता है।

    के ए सेंगोट्टैयन
    50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव रखने वाले सेंगोट्टैयन पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वह एआईएडीएमके के दिग्गज नेता रहे हैं और नवंबर 2025 में टीवीके में शामिल हुए। उन्होंने गोबीचेट्टीपलयम सीट से नौवीं बार जीत हासिल की है। वह पार्टी की कार्यकारी समिति के मुख्य समन्वयक हैं।

    कीर्तना एस
    कीर्तना एस विजय की कैबिनेट में फिलहाल इकलौती महिला मंत्री हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास 22.6 लाख रुपये की संपत्ति और 12.8 लाख रुपये की देनदारी है। उनकी सालाना कमाई 6.4 लाख रुपये है और उन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

    पी वेंकटरमणन
    48 साल के वेंकटरमणन ने मायलापुर सीट से 70,070 वोटों के साथ जीत दर्ज की है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। उनके पास कुल 5.4 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 3.2 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है।

    केटी प्रभु
    पेशे से डेंटिस्ट डॉ. केटी प्रभु ने शिवगंगा की करैकुडी सीट से चुनाव जीता है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 11.4 करोड़ रुपये है। उनकी सालाना आय 54.6 लाख रुपये है और उन पर 3.3 करोड़ रुपये की देनदारी है।

  • विजय का विपक्ष पर बड़ा हमला, बोले- खाली खजाने और भारी कर्ज के बीच संभाली सत्ता

    विजय का विपक्ष पर बड़ा हमला, बोले- खाली खजाने और भारी कर्ज के बीच संभाली सत्ता

    तमिलनाडु

     तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में रविवार को शपथ लेने के बाद विजय ने अपने पहले आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, नशीली दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे अहम फैसले शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले आधिकारिक आदेश में (टीवीके) के प्रमुख विजय ने राज्य में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। इसके साथ ही, नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक हेल्पलाइन के साथ विशेष बल के गठन का निर्देश दिया।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर रहेगा। विजय ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसानों और मछुआरों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सब कुछ अच्छा होगा।

    भाषण से जीता जनता का दिल
    विजय ने अपने जोशीले और भावुक भाषण की शुरुआत अपने चिर-परिचित तमिल वाक्यांश एन नेंजिल कुदियिरुक्कुम से की। वह अपने अभिनय करियर के दौरान भी अक्सर प्रशंसकों को संबोधित करने के लिए इस वाक्य का इस्तेमाल करते रहे हैं।
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    अपने संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक सहायक निर्देशक का बेटा अब मुख्यमंत्री बन गया है। मैं गरीबी और भूख को करीब से जानता हूं, मैं किसी शाही परिवार से नहीं आता।

    मैंने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया है और कई लोगों ने मुझे अपमानित भी किया। मैं आपके बेटे, आपके भाई जैसा हूं। आपने मुझे अपने दिल में जगह दी है और मुझे स्वीकार किया है।

    विपक्ष पर साधा निशाना
    जनता से झूठे वादे न करने का आश्वासन देते हुए विजय ने पिछली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि DMK सरकार ने राज्य का खजाना पूरी तरह खाली कर दिया है और हमने 10 लाख करोड़ रुपये के भारी कर्ज के साथ सत्ता संभाली है। हम जनता के पैसे से एक फूटी कौड़ी भी नहीं लेंगे और न ही किसी को राज्य को लूटने की इजाजत देंगे।

    राज्य में वास्तविक, धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय के एक नए युग की शुरुआत का वादा करते हुए, मुख्यमंत्री विजय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रवीण चक्रवर्ती, वामपंथी नेता एम.ए. बेबी सहित अपने सभी राजनीतिक सहयोगियों का उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना, रोजाना 1000Cr का घाटा झेल रही सरकार

    पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना, रोजाना 1000Cr का घाटा झेल रही सरकार

     नई दिल्‍ली

    ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं। 

    क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। 

    सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। 

    स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन 
    स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। 

    हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं। 

    कई देशों में इमरजेंसी लागू 
    कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं। 

    भारत ने उठाए सख्‍त कदम 
    सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की। 

    सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार 
    उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं। 

    उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। 

    100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम 
    भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

  • कमान बदली का समय: वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन बने अगले नौसेना प्रमुख

    कमान बदली का समय: वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन बने अगले नौसेना प्रमुख

    नई दिल्ली
      सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नया नौसेना प्रमुख (Chief of Naval Staff) नियुक्त किया है। वह एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की जगह लेंगे, जो 31 मई को सेवा से रिटायर होने वाले हैं। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने पिछले साल 31 जुलाई को पश्चिमी नौसेना कमान के 34वें फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला था।

    इस फ्लैग ऑफिसर को 1 जुलाई, 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था और वह संचार (Communication) और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) के विशेषज्ञ हैं। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला, जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रिवेनहैम, यूनाइटेड किंगडम; कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर, करंजा; और यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड के पूर्व छात्र हैं।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित इस एडमिरल ने अपने नौसेना करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल, स्टाफ और प्रशिक्षण पदों पर काम किया है। इनमें मिसाइल वेसल INS विद्युत और विनाश; मिसाइल कॉर्वेट INS कुलिश; गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS मैसूर और विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य की कमान संभालना शामिल है।

    रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि के मुख्यालय में मुख्य स्टाफ अधिकारी (traning) के रूप में कार्य किया और पूरी भारतीय नौसेना में प्रशिक्षण के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    मंत्रालय ने बताया कि वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने भारतीय नौसेना सुरक्षा टीम (Indian Naval Safety Team) की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई, जो नौसेना के सभी विभागों में ऑपरेशनल सुरक्षा की देखरेख करती है। इसके बाद उन्होंने फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग के रूप में नौसेना के 'वर्क अप ऑर्गनाइजेशन' का नेतृत्व किया, और बाद में उन्हें पश्चिमी बेड़े का फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया।

    'स्वॉर्ड आर्म' (Sword Arm) की कमान संभालने के बाद, उन्हें फ्लैग ऑफिसर ऑफशोर डिफेंस एडवाइजरी ग्रुप और भारत सरकार के लिए ऑफशोर सुरक्षा और रक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया।

    वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद, यह फ्लैग ऑफिसर पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ, कार्मिक सेवाओं के नियंत्रक (Controller of Personnel Services) और नौसेना मुख्यालय (NHQ) में कार्मिक प्रमुख (Chief of Personnel) रहे। अपनी वर्तमान नियुक्ति से पहले, उन्होंने नौसेना मुख्यालय में नौसेना स्टाफ के उप-प्रमुख के रूप में कार्य किया।

    वाइस एडमिरल स्वामिनाथन की शैक्षणिक योग्यताओं में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से BSc की डिग्री; कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्चि से दूरसंचार में MSc  किंग्स कॉलेज, लंदन से रक्षा अध्ययन में MA मुंबई विश्वविद्यालय से रणनीतिक अध्ययन में MPhil  और मुंबई विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में PhD शामिल हैं। 
     

  • राज्यपाल की कार्रवाई: ममता मंत्रिमंडल हटाया, विधानसभा को किया खारिज

    राज्यपाल की कार्रवाई: ममता मंत्रिमंडल हटाया, विधानसभा को किया खारिज

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं। 

    अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट
    यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है। 

    पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स
    · ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है। 

    · संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है। 

    · अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। 

    · संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है। 

    · आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। 

    सवाल-जवाब
    राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है। 

    पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है। 

    क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं। 

    मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। 

  • इक्रा रिपोर्ट: 2026-27 में बिजली की मांग में तेजी, 5-5.5% तक बढ़ोतरी संभव

    इक्रा रिपोर्ट: 2026-27 में बिजली की मांग में तेजी, 5-5.5% तक बढ़ोतरी संभव

    नई दिल्ली 
     औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के निरंतर बढ़ने से 2026-27 में बिजली की मांग 5.0-5.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। 2025-26 में यह वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही थी. साख निर्धारण करने वाली एजेंसी इक्रा ने यह बात कही। 

    इक्रा ने बयान में कहा कि संभावित ‘एल नीनो’ के बीच सामान्य से कम वर्षा के आसार से वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों से भी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. साथ ही उद्योगों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों एवं डाटा सेंटर जैसे उभरते स्रोतों से भी मांग बढ़ेगी। 

    देश में तापीय बिजली संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (पीएलएफ या क्षमता उपयोग) 2025-26 में मांग में कमी के कारण घटकर 65-66 प्रतिशत रह गया. यह 2026-27 में करीब 65 प्रतिशत पर आ सकता है. नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन में अच्छी वृद्धि और तापीय क्षेत्र में छह गीगावाट क्षमता वृद्धि की संभावना इसकी मुख्य वजह रहेगी। 

    इक्रा के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) अंकित जैन ने कहा कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है जबकि नवीकरणीय क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है। 

    उन्होंने साथ ही बताया कि आठ अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के वास्ते कोयला भंडार लगभग 19 दिन के लिए पर्याप्त था। 

    समूचे भारत में वितरण कंपनियों के बही-खाता घाटे में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में सुधार हुआ. मार्च 2025 तक राज्य-स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2024 में 7.4 लाख करोड़ रुपये था। 

    वर्तमान राजस्व और लाभप्रदता को देखते हुए हालांकि इतना उच्च ऋण स्तर कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है। 

    अप्रैल 2026 तक 28 में से 17 राज्यों में 2026-27 के लिए शुल्क आदेश जारी किए जा चुके हैं। 

    बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में काम करने के बावजूद अधिकतर राज्यों में 2026-27 के लिए स्वीकृत शुल्क वृद्धि सीमित रही है। 

    इक्रा का अनुमान है कि सीमित शुल्क वृद्धि और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क वाली क्षमताओं के जुड़ने से बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में 2026-27 में प्रति इकाई नकद अंतर 30-33 पैसे के उच्च स्तर पर बना रह सकता है। 

    इक्रा ने कहा कि सीमित शुल्क वृद्धि और लगातार घाटे के कारण बिजली वितरण क्षेत्र के लिए उसका दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है। 

  • नए नियम: वंदे मातरम् उल्लंघन पर जेल, मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया

    नए नियम: वंदे मातरम् उल्लंघन पर जेल, मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सम्मान को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव के बाद अब वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना या उसका अपमान करना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। अब राष्ट्रीय गीत को भी वही कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा जो राष्ट्रगान जन गण मन को मिला हुआ है।

    तीन साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान
    मौजूदा कानून के तहत अभी तक केवल राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर ही सजा का प्रावधान था। झंडे को जलाने, विकृत करने या राष्ट्रगान में जानबूझकर बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना लगाया जा सकता है। अब नए संशोधन के बाद, वंदे मातरम के साथ भी ऐसी ही हरकत करने पर समान सजा का सामना करना पड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, संसद की मुहर लगते ही यह नया कानून प्रभावी हो जाएगा।

    सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा की ओर कदम
    पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए इसे करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया। ठाकुर ने कहा कि वह लंबे समय से वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा देने की मांग कर रहे थे। उन्होंने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाया था। उनका मानना है कि इस कदम से हमारी सांस्कृतिक विरासत पर होने वाले जानबूझकर हमलों को रोका जा सकेगा।

    गायन के लिए नया प्रोटोकॉल तय
    इसी साल जनवरी में गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम के लिए एक विस्तृत प्रोटोकॉल भी जारी किया था। इसके अनुसार, आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम की छह पंक्तियां गाई जाएंगी, जिनकी अवधि तीन मिनट 10 सेकंड होगी। महत्वपूर्ण यह है कि किसी भी समारोह में जहां राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों होने हों, वहां वंदे मातरम पहले गाया जाएगा। राष्ट्रपति के आगमन और ध्वजारोहण जैसे मौकों पर वंदे मातरम के समय सभी को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा। 

    कानून में बदलाव और सजा का प्रावधान
    सरकार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह बदलाव कर रही है। इसके लिए कानून की धारा 3 में संशोधन किया जाएगा। इस धारा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने में बाधा डालता है या उसे रोकता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

    दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है। संशोधन के बाद यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू होंगे।

    सरकार ने जारी की गाइड लाइन
    केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल के लिए गाइडलाइन जारी की। गाइड लाइन के अनुसार, वंदे मातरम का संपूर्ण आधिकारिक वर्जन, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है, प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए।

    इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं।

    पहले ‘राष्ट्रगीत’ गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’
    अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’।दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें।

    वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह
    गृह मंत्रालय ने स्कूल-कॉलेज और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है।इस कदम का उद्देश्य स्टूडेट्स और आम जनता के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता और सम्मान को प्रोत्साहित करना है। यह भी बताया गया है कि जब वंदे मातरम का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए।

    सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए छूट
    साथ ही, मंत्रालय ने सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है। निर्देश के अनुसार, फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि मनोरंजन स्थलों में दर्शकों को खड़े होने के लिए मजबूर करने से देखने का अनुभव बाधित हो सकता है और संभावित रूप से दर्शकों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।

    चुनाव में ‘वंदे मातरम्' बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
    बजट सत्र के समापन पर संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का पाठ किया गया। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा ने वंदे मातरम को बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में पेश किया था। पार्टी ने इसके 150 वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया।साथ ही, बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाया गया।

    बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
    भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

    1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।

    ‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

    केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।

    ये अधिनियम क्या कहता है?
    1971 के राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम में राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के साथ राष्ट्रगान के लिए नियम हैं. इनमें राष्ट्रगान के लिए कहा गया है कि जो कोई व्यक्ति जानबूझकर भारतीय राष्ट्रीय गान को गाए जाने से रोकता है या ऐसा गायन कर रही किसी सभा में व्यवधान पैदा करता है उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा। 

    अगर कोई दूसरी बार ये अपराध करता है तो उसके लिए जेल का प्रावधान है. अधिनियम के अनुसार, जो कोई व्यक्ति, जिसे धारा 2 या धारा 3 के अंतर्गत किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध ठहराया गया हो, ऐसे किसी अपराध के लिए फिर से दोषसिद्ध ठहराया जाता है तो उसे दूसरी बार के या उसके बाद के हर बार के अपराध के लिए कम से कम एक वर्ष के कारावास से दंडित किया जा सकेगा। 

    वंदे मातरम् की स्थिति में क्या होगा?
    अब जब वंदे मातरम् भी इस अधिनियम में शामिल हो जाएगा तो राष्ट्रगान वाले नियम इस पर लागू होंगे. यानी इसके अपमान पर सजा का भी प्रावधान है.  अब जानते हैं कि इसे लेकर नियम क्या है…

    – दिशा-निर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम् का संपूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है. इसे प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए. इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं। 

    – एक जरूरी बात यह है कि अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’. दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें। 

    – जब वंदे मातरम् का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए। 

    – सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है. फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम् बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी। 

  • भारतीय वायुसेना का शौर्य,ऑपरेशन सिंदूर की गाथा अब अंबाला म्यूजियम में दर्ज

    भारतीय वायुसेना का शौर्य,ऑपरेशन सिंदूर की गाथा अब अंबाला म्यूजियम में दर्ज

    अंबाला

    भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद राफेल लड़ाकू विमानों ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी पहली ही अग्निपरीक्षा दी। इसमें सफलता प्राप्त करते हुए वायु वीरों ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अंबाला स्थित 17 स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर न केवल आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया, बल्कि उनके सैन्य एयरबेस और डिफेंसिव एयर पावर को भी पूरी तरह पंगु बना दिया। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन के म्यूजियम में अब इस शौर्य गाथा को ऑपरेशन सिंदूर वॉल के जरिए सार्वजनिक किया गया है।

    जल, थल और नभ का संयुक्त प्रहार
    22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों समेत 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस बर्बरता का जवाब देने के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन सिंदूर का बिगुल फूंका। रणनीति के तहत अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को फ्रंटलाइन बेस बनाया गया, जहां से राफेल और जगुआर विमानों ने दुश्मन पर गहरा प्रहार करने की कमान संभाली।

    राफेल और गोल्डन ऐरो की पहली जंग
    वायुसेना में शामिल होने के बाद राफेल का यह किसी युद्ध जैसी स्थिति में पहला मुकाबला था। एयर कमोडोर बी. सतीश (वीएम) के नेतृत्व में गोल्डन ऐरो स्क्वाड्रन ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में सटीक लक्षित हमले किए। राफेल की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लंबी दूरी की मिसाइलों के आगे दुश्मन का रडार तंत्र फेल हो गया। स्क्वाड्रन ने पाकिस्तानी सैन्य एयरबेस और उनके महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे पर लंबे समय तक हमले जारी रखे, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई की क्षमता ध्वस्त हो गई।

    पदकों से चमकी अंबाला की वीर धरा
    इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में अदम्य साहस दिखाने के लिए अंबाला वायुसेना स्टेशन को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कुल 26 राष्ट्रपति पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनमें वीर चक्र ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू और स्क्वाड्रन लीडर सार्थक कुमार के नाम हुआ। युद्ध सेवा पदक ग्रुप कैप्टन विकास वर्मा को मिला। वहीं वायु सेना पदक से ग्रुप कैप्टन दीपक चौहान, स्क्वाड्रन लीडर कौस्तुभ नलबड़े, मिहिर विवेक चौधरी और अमन सिंह नवाजे गए। मेंशन-इन-डिस्पैचेस से ग्रुप कैप्टन इंद्रजीत सिंह और विंग कमांडर एमआई संचिया समेत 19 जांबाज को सम्मानित किया गया। सभी वायु वीरों को दिल्ली में सम्मान मिला।

    म्यूजियम में दर्ज हुआ इतिहास
    अंबाला एयरबेस के म्यूजियम में बनी विशेष दीवार अब इन वीरों के नाम और उनके बलिदान की गवाह बन गई है। यह दीवार न केवल राफेल की मारक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि उन तकनीकी श्रेष्ठताओं (उन्नत मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम) का भी विवरण देती है, जिन्होंने इस मिशन को सफल बनाया। अंबाला ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह देश की रक्षा पंक्ति का सबसे मजबूत और अभेद्य किला है।

     

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    बीड

    महाराष्ट्र के बीड़ जिले में फर्जी शादी कराकर युवाओं को लूटने वाला एक बड़ा गैंग सामने आया है. इस गैंग ने ग्रामीण इलाकों के कई युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाया. ताजा मामला गेवराई तहसील के उमापुर गांव से सामने आया है, जहां एक युवती ने आठ बार शादी करने के बाद नौवीं बार उमापुर के एक युवक को अपने जाल में फंसाया और उससे लाखों रुपये ऐंठ लिए। 

    उमापुर के रहने वाले युवक की शादी के लिए कुछ एजेंटों ने मध्यस्थता की. शादी तय करने के नाम पर युवक से लाखों रुपये लिए गए. इसके बाद बाकायदा शादी हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद दुल्हन और उसके साथ आए एजेंटों का असली चेहरा सामने आ गया. जांच में यह खुलासा हुआ कि जिस लड़की से युवक की शादी हुई, वह पहले आठ अलग-अलग लोगों से शादी कर चुकी थी. हर बार यह गैंग शादी के कुछ दिनों बाद पैसे और जेवर लेकर फरार हो जाता था। 

    इस धोखाधड़ी का शिकार हुआ उमापुर का युवक अब परेशान हो रहा है. उसने इस मामले की शिकायत एसपी से की. एसपी को जो एप्लिकेशन युवक ने दिया है, उसमें कहा है कि मेरे साथ लाखों की धोखाधड़ी हुई है. अब मेरे सामने कोई रास्ता नहीं बचा है. मुझे न्याय चाहिए। 

    युवक ने कहा कि उसे अंधेरे में रखकर शादी कराई गई थी. जिस युवती से शादी हुई, उसकी यह नौवीं शादी थी. इस पूरे मामले को लेकर चकलांबा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई है. युवक का कहना है कि दुल्हन एक और दूल्हे अनेक बनाकर यह गिरोह युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। 

    यह गैंग खासतौर पर ग्रामीण इलाकों के उन युवकों को निशाना बनाता था, जिन्हें शादी के लिए दुल्हन ढूंढने में परेशानी होती है. यह गैंग एजेंटों के जरिए युवकों को निशाना बनाया जाता है. गरीबी का हवाला देकर लाखों रुपये वसूले जाते हैं और शादी के कुछ दिन बाद दुल्हन गायब हो जाती है. शिकायत के आधार पर पुलिस अब इस गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। 

  • बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल: भीड़ ने मचाई तोड़-फोड़, कांग्रेस ने किया TMC दफ्तर पर कब्जा

    बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल: भीड़ ने मचाई तोड़-फोड़, कांग्रेस ने किया TMC दफ्तर पर कब्जा

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज इलाके में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान आरोपियों ने नारेबाजी भी की। पुलिस के अनुसार आरोपियों की अभी पहचान नहीं हो सकती है। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है।

    रात के अंधेरे में तोड़फोड़
    यह घटना श्रीपत सिंह कॉलेज के सामने स्थित जियागंज-अजीमगंज नगर पालिका के वार्ड नंबर 2 में मंगलवार रात करीब 10:30 बजे हुई। इस घटना का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें कुछ लोग मूर्ति को नुकसान पहुंचाते हुए नजर आ रहे हैं, वीडियो में लोग जय श्री राम के नारे लगाते हुए भी दिख रहे हैं। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    जानकारी के अनुसार, जब पुलिस को घटना की सूचना मिली तो मौके पर जियागंज थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उससे पहले ही घटना में शामिल लोग वहां से फरार हो गए। पुलिस ने बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आम लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    तोड़ी गई लेनिन की प्रतिमा
    पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के जियागंज में एक घटना सामने आई है, जहां लेनिन की दशकों पुरानी प्रतिमा को तोड़ दिया गया. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को गिराया और उसकी जगह दूसरी प्रतिमा लगाने की योजना बनाई. तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इस तोड़फोड़ में बीजेपी समर्थकों का हाथ है। 

    वहीं, बीजेपी का कहना है कि इस घटना में उसके कार्यकर्ताओं या समर्थकों की कोई भूमिका नहीं थी. पार्टी का दावा है कि चुनाव के बाद के जश्न के दौरान वहां अलग-अलग समूहों के लोग मौजूद थे, और हो सकता है कि किसी अज्ञात शख्स ने यह हरकत की हो। 

    कांग्रेस ने नदिया में टीएमसी कार्यालय परकब्ज़ा कर लिया है. यह घटना नदिया जिले के करीमपुर 2 ब्लॉक की नतिडांगा ग्राम पंचायत में हुई. कांग्रेस का कहना है कि यह दफ्तर पहले उसी का था, टीएमसी ने इस पर कब्जा कर लिया था

    TMC दफ्तर पर बुलडोजर
    मंगलवार रात को मध्य कोलकाता में उस वक्त तनाव फैल गया, जब बुलडोजरों के साथ आए लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर ऐतिहासिक हॉग मार्केट इलाके के पास तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक दफ़्तर को निशाना बनाया. इस घटना से दुकानदारों में दहशत फैल गई और उन्हें अपनी दुकानें अचानक बंद करनी पड़ीं। 

    टीएमसी का न्यू मार्केट में यूनियन दफ़्तर लोगों का मुख्य निशाना था और उसे पूरी तरह से ढहा दिया गया. इलाके में हुई तोड़-फोड़ और अफरा-तफरी की तस्वीरें तेज़ी से फैल गईं, जिससे स्थानीय दुकानदारों की चिंता और बढ़ गई. कोलकाता के सबसे व्यस्त कारोबारी केंद्रों में से एक में जब हालात बिगड़ने लगे, तो घबराए हुए व्यापारियों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए और वहां से भाग निकले। 

    न्यू मार्केट इलाके में हिंसा और बुलडोजर एक्शन को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्र ने सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कोलकाता का ऐतिहासिक न्यू मार्केट. बंगाली परिवर्तन का आनंद ले रहे हैं। 

    TMC के सीनियर लीडर डेरेक ओ'ब्रायन ने यह भी आरोप लगाया कि यह तोड़फोड़ सरकारी निगरानी में की गई. उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मध्य कोलकाता में न्यू मार्केट के पास पुलिस की अनुमति से जीत के जश्न के हिस्से के तौर पर मीट की दुकानों को गिराने के लिए एक बुलडोजर लाया गया. CAPF के जवान आस-पास खड़े थे.” उन्होंने आगे कहा, “यही है बीजेपी. दुनिया इन तस्वीरों को देखे। 

    टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने लिखा, "जगतबल्लभपुर में TMC पार्टी के दफ़्तर को कथित तौर पर बीजेपी के उपद्रवियों ने आग लगा दी है. यह उस स्थिति का एक चिंताजनक आईना है, जिसे झेलने के लिए अब बंगाल के लोग मजबूर हैं। 

    'बीजेपी का परिवर्तन बुलडोजर के साथ…'
    ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को बीजेपी पर मध्य कोलकाता में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया. पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने न्यू मार्केट इलाके के पास दुकानों और एक पार्टी दफ़्तर में तोड़फोड़ की। 

    सोशल मीडिया पर जारी एक कड़े बयान में टीएमसी ने दावा किया कि 'बीजेपी समर्थकों की भीड़' ने जमकर उत्पात मचाया. टीएमसी ने इस घटना को 'खुली गुंडागर्दी और अराजकता' करार दिया है. पार्टी ने आरोप लगाया कि इस हिंसा में स्थानीय कारोबारियों और तृणमूल कांग्रेस के दफ़्तर को निशाना बनाया गया, जिससे व्यापारियों में दहशत फैल गई। 

    टीएमसी ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी के सीनियर नेता पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई ऐसी हरकतों को बढ़ावा दे रहे हैं. इन नेताओं में नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी शामिल हैं. बढ़ते तनाव पर चेतावनी देते हुए टीएमसी ने कहा कि यह घटना एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है, जिसे पार्टी ने 'बुलडोजर की राजनीति' का नाम दिया है। 

    TMC और BJP वर्कर की हत्या
    बंगाल में जारी हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है. एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल पुलिस ने बताया कि मंगलवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को दिन में बीरभूम के नानूर में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई। 

    वहीं, मंगलवार शाम न्यू टाउन इलाके में जीत के जुलूस के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ता मधु मंडल की मौत हो गई। 

    चुनाव आयोग ने दिए कार्रवाई के निर्देश…
    निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुखों को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद किसी भी किस्म की और किसी के भी हिंसा फैलाने या भड़काने को कतई बर्दाश्त नहीं करने का निर्देश दिया. आयोग ने हिंसक घटनाओं के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाने को कहा है. यानी हिंसा भड़काने और तोड़फोड़ करने वाले तुरंत गिरफ्तार होंगे। 

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल में हिंसा भड़काने वालों और तोड़फोड़ करने वालों पर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बंगाल के मुख्य सचिव, DGP, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों सहित सभी जिलाधिकारियों, कप्तानों और पुलिस अधिकारियों को लगातार गश्त पर रहने के आदेश दिए हैं। 

    घटना के बाद सियासत गरम
    इस घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया है। CPI(M) ने आरोप लगाया है कि यह तोड़फोड़ BJP से जुड़े लोगों ने की, खासतौर पर वे लोग जो “जय श्री राम” के नारे लगा रहे थे। पार्टी का कहना है कि यह घटना पार्टी की चुनावी जीत के तुरंत बाद हुई। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और इलाके में एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने कहा है कि मामले में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।