Category: देश

  • ममता बनर्जी को लेकर पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज नाराज, चुनाव हार और अदालत जाने पर दिया बड़ा बयान

    ममता बनर्जी को लेकर पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज नाराज, चुनाव हार और अदालत जाने पर दिया बड़ा बयान

    कोलकत्ता 

    पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काला कोट पहनकर कोर्ट जाने को लेकर बवाल छिड़ गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने आरोप लगाए हैं कि बनर्जी ने सुर्खियों में बने रहने के लिए अदालत को चुना है। साथ ही उन्होंने कहा है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद वह ऐसा कर रहीं हैं। इधर, BCI यानी भारतीय विधिज्ञ परिषद ने भी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख से जवाब तलब किया है।

    जस्टिस काटजू ने लिखा, 'ममता बनर्जी हाई कोर्ट क्यों गईं? जाहिर है क्योंकि वह अपना खुद का चुनाव हार गई हैं और इसलिए वह विधानसभा में चिल्ला नहीं सकतीं। लेकिन उनके पास ऐसी जगह होनी चाहिए जहां वह चिल्ला सकें, ताकि उन्हें पब्लिसिटी मिले और वह सुर्खियों में बनी रहें। इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट को चुना है।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'ममता बनर्जी ने तो हद कर दी थी।'

    ममता बनर्जी काले कोट में कोर्ट पहुंचीं
    बनर्जी गुरुवार को वकील का गाउन पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची। बनर्जी ने चुनाव के बाद कथित हिंसा और पार्टी दफ्तरों पर हमलों के मामले में अपनी दलील में कहा कि ‘बंगाल कोई बुल्डोजर राज्य नहीं है। अदालत से बाहर निकलते समय कुछ लोगों ने ममता के खिलाफ नारे भी लगाए। मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया।

    बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी थे। यह मामला टीएमसी की ओर से वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय की दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमलों और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया है।

    BCI ने मांगा जवाब
    BCI ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से बनर्जी के पंजीकरण और पेशेवर वकालत की स्थिति के संबंध में 48 घंटों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा। दरअसल, कोई भी व्यक्ति, जो संवैधानिक पद पर है या लाभकारी रूप से नियोजित है, उसे अपना बार लाइसेंस सेवा के दौरान निलंबित करवाना पड़ता है और फिर से वकालत करने के लिए इसे दोबारा चालू कराना होता है।

    पत्र में कहा गया है, 'ममता बनर्जी ने 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उक्त अवधि के दौरान उनके संवैधानिक सार्वजनिक पद को ध्यान में रखते हुए और इस समय पर इस बात पर कोई राय व्यक्त किए बिना कि ऐसी उपस्थिति की अनुमति है या नहीं, बीसीआई को उनके पंजीकरण, वकालत, निलंबन और दोबारा प्रारंभ की तथ्यात्मक स्थिति आपके रिकॉर्ड से सत्यापित करने की आवश्यकता है।' बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से बनर्जी की पंजीकरण संख्या और राज्य बार काउंसिल में उनके नामांकन की तारीख भी बताने को कहा है।

  • NEET UG 2026 अपडेट: कंप्यूटर बेस्ड ऑनलाइन परीक्षा पर सरकार का फैसला, पारदर्शिता पर जोर

    NEET UG 2026 अपडेट: कंप्यूटर बेस्ड ऑनलाइन परीक्षा पर सरकार का फैसला, पारदर्शिता पर जोर

    नई दिल्ली

    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद अब पुनर्परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी है. एजेंसी के अनुसार, परीक्षा अब 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए NTA ने कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है. साथ ही अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की गई है कि वे किसी भी जानकारी के लिए केवल NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें.

    OMR शीट की जगह ऑनलाइन होगी परीक्षा
    इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया के आगे कई बातें साफ कीं. सबसे पहले उन्होंने बताया कि पेपर लीक के इस प्रकरण को देखते हुए अगले साल से NEET  की परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर बेस्ड और ऑनलाइन होगी. ओएमआर शीट की जगह छात्रों को कंप्यूटर के सामने बैठाया जाएगा जिससे पारदर्शिता रहे.

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा-  एनटीए ने NEET UG की नई तारीख की घोषणा कर दी है. 21 जून को पुनर्परीक्षा होगी. हमारी प्राथमिकता छात्रों का भविष्य है. उन्होंने कहा- इससे पहले 3 मई को परीक्षा हुई थी और 7 मई तक एनटीए के  कंपलेंट सिस्टम में कुछ चिंताएं उठाई गईं और आंतरिक जांच भी हुई.  फिर मामला संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया गया, जिसमें कई राज्य शामिल थे. इस केस में 12 मई तक स्थिति स्पष्ट हो गई थी.  हमें 12 मई तक पता चला कि शिक्षा माफियाओं के माध्यम से गेस पेपर जारी हुए थे जो परीक्षा में आए पेपर से मेल खा रहे थे.

    21 जून को रि-एग्जाम, 14 जून को एडमिट कार्ड
    उन्होंने आगे कहा- हम छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं करना चाहते. इसलिए हमने परीक्षा के लिए नई तारीख 21 जून तय की है . इसके लिए 14 जून को एडमिट कार्ड जारी हो जाएंगे. अनियमितताओं के प्रति हमारी ज़ीरो टॉलरेंस नीति है. सीबीआई की कार्रवाई और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ लड़ाई शुरू हो चुकी है

    'किसी माफिया को नहीं छीनने देंगे सीट'
    उन्होंने कहा- राधाकृष्ण समिति की सिफारिशों का पालन करने के बावजूद यह उल्लंघन कैसे हुआ? ऐसे में सरकारी मशीनरी यह सुनिश्चित करेगी कि इस बार कोई अनियमितता न हो. हम किसी भी माफिया को पैसों के बल पर आपकी सीट छीनने नहीं देंगे. मंत्री के रूप में, अभिभावक के रूप में, अधिकारी के रूप में – हमें यह कठिन निर्णय लेना पड़ा. हमें सुधारों के लिए कई सुझाव मिले हैं.

    'री-एग्जाम के लिए कोई फीस नहीं, सेंटर भी पसंद का'
    प्रधान ने कहा-  एनटीए का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हुआ था और वह बहुत ही सक्षम नेतृत्व में है. प्रत्येक वर्ष 1 करोड़ उम्मीदवार एनटीए परीक्षाओं में शामिल होते हैं. एनईईटी परीक्षा रद्द होने के दिन एनटीए ने दो निर्णय लिए- सबसे पहले तो एनईटी स्नातक परीक्षा शुल्क वापस किया जाएगा, दूसरा पुनर्परीक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसको लेकर एनटीए शाम तक एक और सूचना जारी करेगा.

    उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों को री- एग्जाम में शामिल होने के लिए अपनी पसंद का शहर चुनने का अवसर मिलेगा. इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा. ओएमआर शीट में छात्रों का विवरण भरने के लिए 15 मिनट एक्सट्रा दिए जाएंगे.

    'अफवाहों पर विश्वास न करें छात्र'
    प्रधान ने कहा कि इसके अलावा मैं उम्मीदवारों के परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों से बात करूंगा. चुंकी जून की परीक्षा में मानसून रहेगा, हम खराब मौसम के प्रभाव पर विचार कर रहे हैं. छात्रों से अपील है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें. आखिर में प्रधान ने कहा- पूरे केस में सीबीआई गहन जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा
     

  • पंचायत चुनाव की तैयारियों में अड़चन: 400 बसों की मांग पर HRTC का साफ जवाब- पहले पैसा, फिर सेवा

    पंचायत चुनाव की तैयारियों में अड़चन: 400 बसों की मांग पर HRTC का साफ जवाब- पहले पैसा, फिर सेवा

     शिमला
     हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। पहले चरण का मतदान 26 मई को होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव में पोलिंग पार्टियों और मत पेटियों को पहुंचाने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) से 400 बसों की मांग की है। एचआरटीसी ने आयोग को स्पष्ट किया है कि बसों की बुकिंग तभी की जाएगी जब 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किया जाएगा। इस संबंध में प्रबंधन ने नियमों का हवाला दिया है।
    बस बुकिंग पर कितना खर्च आएगा

    बसों की बुकिंग पर लगभग सात करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। अग्रिम बुकिंग के लिए आयोग ने निगम से साढ़े तीन करोड़ रुपये की मांग की है। आयोग ने निगम को पत्र लिखकर बसों की मांग की है, जिसमें यह भी कहा गया है कि बसें अच्छी स्थिति में होनी चाहिए, ताकि यात्रा के दौरान कोई समस्या न आए।

    पहले चरण का मतदान 26 मई को होगा, और पोलिंग पार्टियों को 24 और 25 मई को रवाना किया जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद बसें मत पेटियों के साथ वापस लौटेंगी। 

    लोगों को पेश आ सकती है दिक्कत
    हालांकि, एचआरटीसी की बसों के चुनावी ड्यूटी पर जाने से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कई रूट बाधित हो सकते हैं, क्योंकि एचआरटीसी के पास पहले से ही बसों की कमी है। अक्सर बसें रूट पर खराब हो जाती हैं, और एक साथ 400 बसों का चुनावी ड्यूटी पर जाना रूट को प्रभावित कर सकता है। 

    तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव

    हिमाचल प्रदेश में 31182 पदों के लिए तीन चरणों में पंचायत चुनाव होंगे। कुल 3754 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान, सदस्य, बीडीसी और जिला परिषद के लिए चुनाव होंगे। पहले चरण का मतदान 26 मई को, दूसरे चरण का मतदान 28 मई को और तीसरे चरण का मतदान 30 मई को होगा। मतदान के दिन ही चुनावों की गणना होगी और प्रधान उप प्रधान तथा वार्ड सदस्यों के नतीजे उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे। 

    तीन नवंबर, 2024 को बदला था नियम
    एचआरटीसी ने तीन नवंबर, 2024 को नियमों में बदलाव किया था। इसके अनुसार, बसें किसी समारोह, कार्यक्रम या रैली के लिए तभी बुक की जाएंगी जब 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किया जाए। पहले सरकारी कार्यक्रमों और चुनावी रैलियों के लिए बसें बुक की जाती थीं, लेकिन भुगतान नहीं होता था। वित्तीय स्थिति ठीक न होने के बावजूद निगम बसें भेज देता था, लेकिन कई महीनों तक पैसा न आने के कारण निगम को समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

     

  • कनाडा के कानून में फंसा तहव्वुर राणा मामला, आखिर क्यों नहीं रद्द हो रही नागरिकता?

    कनाडा के कानून में फंसा तहव्वुर राणा मामला, आखिर क्यों नहीं रद्द हो रही नागरिकता?

     टोरंटो

    भारतीय समेत दुनियाभर के कई लोग बसने के लिए कनाडा को इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि एक बार यहां की नागरिकता हासिल कर ली जाए तो इस देश से निकाले जाने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है और फिर यहां के मूल निवासियों की तरह यहां के अधिकार भी हासिल किए जा सकते हैं. कुछ मिलाकर कनाडा में नागरिकता छीनी जानी इतनी आसान नहीं है. इसका बड़ा उदाहरण मुंबई 26/11 आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का केस है। 

    अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद अब उस पर भारत में मुकदमा चलने की तैयारी है लेकिन इसी बीच कनाडा में उससे जुड़ा एक दूसरा बड़ा सवाल भी लगातार उठ रहा है. अगर कनाडाई एजेंसियों को सालों पहले ही शक हो गया था कि राणा ने झूठ बोलकर नागरिकता हासिल की थी, तो उसकी नागरिकता अब तक रद्द क्यों नहीं हुई?

    यह सवाल केवल राणा तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ सालों में सामने आए मामलों से पता चलता है कि कनाडा में एक बार नागरिकता मिलने के बाद उसे वापस लेना बेहद लंबी, जटिल और धीमी प्रक्रिया बन जाती है. कई मामलों में सरकार को 10 से 20 साल तक लग जाते हैं। 

    तहव्वुर राणा पर क्या हैं आरोप?
    तहव्वुर हुसैन राणा पर आरोप है कि उसने 2000 में कनाडाई नागरिकता के लिए आवेदन करते समय गलत जानकारी दी थी. उसने दावा किया था कि वह ओटावा में रह रहा है और कनाडा में लगातार मौजूद था. लेकिन बाद में RCMP और अमेरिकी एजेंसियों की जांच में ऐसे दस्तावेज सामने आए जिनसे पता चला कि वह उस दौरान अमेरिका के शिकागो में रह रहा था. कनाडा में दिए गए उसके पते पर दूसरे लोग रहते थे और पड़ोसियों ने भी कहा कि उन्होंने राणा को वहां कभी नहीं देखा। 

    जांच में यह भी सामने आया कि राणा शिकागो में कई कारोबार चला रहा था. इसके बावजूद उसे 2001 में कनाडाई नागरिकता और पासपोर्ट दोनों मिल गए. बाद में भारतीय एजेंसियों ने आरोप लगाया कि उसने इसी कनाडाई पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए मुंबई हमले से पहले भारत की यात्रा की थी। 

    आखिर कनाडा में नागरिकता रद्द करना इतना मुश्किल क्यों?

    नागरिकता “अधिकार” बन जाती है
    कनाडा में एक बार नागरिकता मिलने के बाद व्यक्ति को लगभग वही संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा मिलती है जो जन्म से कनाडाई नागरिकों को मिलती है. यही वजह है कि सरकार किसी की नागरिकता बिना मजबूत कानूनी प्रक्रिया के नहीं छीन सकती. अदालतें यह सुनिश्चित करती हैं कि हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिले। 

    इसी वजह से नागरिकता रद्द करने के मामलों में विस्तृत जांच होती है, अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड जुटाए जाते हैं, अदालत में सबूत पेश होते हैं और अपील की कई परतें होती हैं. इन सबमें सालों लग जाते हैं। 

    बार-बार बदलते रहे कानून
    यह देरी सिर्फ कानूनी प्रक्रिया की वजह से नहीं हुई. कनाडा में नागरिकता कानून खुद कई बार बदले गए. 2015 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Stephen Harper की कंजर्वेटिव सरकार ने कानून बदलकर आतंकवाद, जासूसी और राजद्रोह जैसे मामलों में नागरिकता रद्द करना आसान बना दिया था. सरकार का तर्क था कि जो व्यक्ति कनाडा के खिलाफ गंभीर अपराध करे, उसे नागरिकता रखने का अधिकार नहीं होना चाहिए। 

    लेकिन 2015 चुनाव में जस्टिन ट्रूडो और लिबरल पार्टी ने इसका विरोध किया. उनका प्रसिद्ध नारा था- “A Canadian is a Canadian is a Canadian.” लिबरल सरकार का कहना था कि दोहरी नागरिकता रखने वालों को अलग तरीके से ट्रीट करना गलत है। 

    इसके बाद 2017-18 में नियम फिर बदले गए. अब कनाडा में नागरिकता केवल इन आधारों पर छीनी जा सकती है:

        धोखाधड़ी
        गलत जानकारी
        तथ्यों को छिपाना

    यानी आतंकवाद में दोषी ठहराया जाना अपने आप नागरिकता खत्म करने का आधार नहीं रह गया.

    सरकार के पास सीमित संसाधन
    इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा के पास ऐसे मामलों को तेजी से निपटाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. हर मामले में विदेशों से रिकॉर्ड मंगाने पड़ते हैं, पुराने दस्तावेजों की जांच होती है, गवाहों से पूछताछ होती है और अदालत में लंबी सुनवाई चलती है. राणा केस में जांच 2009 में शुरू हुई थी, लेकिन 2024 में जाकर सरकार ने संघीय अदालत से अंतिम फैसला मांगा। 

    आरोपी के बचाव का हिस्सा बन जाती है लंबी देरी

    दिलचस्प बात यह है कि सालों की देरी बाद में आरोपियों के लिए कानूनी बचाव भी बन जाती है. राणा ने भी अदालत में कहा कि इतने पुराने मामलों की घटनाएं अब उसे याद नहीं हैं. कई मामलों में आरोपी यह दलील देते हैं कि सबूत पुराने हो चुके हैं, गवाह उपलब्ध नहीं हैं और सरकार ने कार्रवाई में अत्यधिक देरी की. इससे प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। 

    सुरक्षा और अधिकारों के बीच फंस गया कनाडा
    तहव्वुर राणा केस ने कनाडा के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या देश नागरिक अधिकारों की रक्षा करते-करते राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में बहुत धीमा हो गया है?

    मानवाधिकार विशेषज्ञ कहते हैं कि नागरिकता छीनना बेहद गंभीर कदम है और इसमें जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए. दूसरी तरफ आलोचकों का तर्क है कि अगर किसी ने धोखे से नागरिकता हासिल की हो, तो कार्रवाई दशकों तक नहीं चलनी चाहिए. यही कारण है कि यह मामला अब केवल एक आतंकी आरोपी का नहीं, बल्कि कनाडा की पूरी इमिग्रेशन और नागरिकता प्रणाली की परीक्षा बन चुका है। 

    दूसरे देशों से कनाडा कितना अलग?
        ब्रिटेन ने 2010 के बाद से 1,500 से ज्यादा लोगों की नागरिकता रद्द की है, जिनमें बड़ी संख्या आतंकवाद और धोखाधड़ी के मामलों की थी। 
        अमेरिका भी हाल के सालों में ऐसे मामलों में आक्रामक रुख दिखा रहा है.

    इसके मुकाबले कनाडा में नागरिकता रद्द करने के मामले बेहद कम हैं. 2024 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक-

        दो दर्जन मामलों में कार्रवाई हुई
        सात मामले अदालत में लंबित हैं
        90 से ज्यादा मामलों में सरकार ने कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई

    अब आगे क्या होगा?
    राणा की नागरिकता रद्द करने का मामला अभी भी कनाडा की संघीय अदालत में लंबित है. अगर अदालत सरकार के पक्ष में फैसला देती है, तो उसकी कनाडाई नागरिकता समाप्त हो सकती है लेकिन इसमें अभी और समय लग सकता है. इस बीच भारत में उस पर 26/11 मुंबई हमले की साजिश में मुकदमा चलेगा। 

  • बारामती बना विमान हादसों का केंद्र? फिर क्रैश हुआ एयरक्राफ्ट, पुराना हादसा आया याद

    बारामती बना विमान हादसों का केंद्र? फिर क्रैश हुआ एयरक्राफ्ट, पुराना हादसा आया याद

    बारामती 

    महाराष्ट्र के बारामती में एक बार फिर बड़े विमान हादसे की खबर सामने आई है. जानकारी के मुताबिक यह ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया गया टू सीटर विमान था, जो बारामती के गोजूबाबी गांव में जा गिरा. इससे पहले अजित पवार का प्लेन भी यहीं क्रैश हुआ था। 

    शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रेड बर्ड कंपनी का यह दो सीटर ट्रेनिंग विमान तकनीकी खराबी के बाद गोजूबाबी गांव के पास क्रैश लैंड किया. बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई थी. इसके बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को सुरक्षित उतारने की कोशिश की और बारामती के गोजूबाबी इलाके में हार्ड लैंडिंग की गई. शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। 

    पुलिस ने क्या बताया?
    पुणे ग्रामीण पुलिस के एसपी संदीप सिंह गिल ने बताया, ‘आज सुबह करीब 8:50 बजे, रेड बर्ड एविएशन का एक ट्रेनिंग विमान बारामती हवाई अड्डे के पास गोजुबावी गांव में क्रैश लैंड हो गया. मौके पर मौजूद चश्मदीदों से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कम ऊंचाई पर उड़ते समय विमान में कोई तकनीकी खराबी आ गई थी. क्रैश लैंडिंग के दौरान, विमान का एक हिस्सा बिजली के खंभे से टकरा गया और उसके बाद विमान ज़मीन पर जा गिरा. विमान में केवल एक ट्रेनी पायलट सवार था. गनीमत रही कि पायलट को कोई गंभीर चोट नहीं आई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे, और अब ज़रूरी जांच-पड़ताल के साथ-साथ आगे की कार्रवाई भी की जा रही है. जैसे ही कोई और जानकारी मिलेगी, उसे साझा किया जाएगा। 

    बारामती में इससे पहले इसी साल जनवरी में भी एक विमान क्रैश कर गया. उस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया था. ऐसे में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने विमानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है. शुरुआती तौर पर इंजन फेल होना दुर्घटना की मुख्य वजह माना जा रहा है। 

  • पूर्वी भारत का सबसे बड़ा रोड प्रोजेक्ट तेज: वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के मेगा प्लान पर काम शुरू

    पूर्वी भारत का सबसे बड़ा रोड प्रोजेक्ट तेज: वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के मेगा प्लान पर काम शुरू

    कलकत्ता
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार जो हुआ, उसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सबको चौंका दिया. कभी बंगाल की राजनीति पर पूरी पकड़ रखने वाली ममता बनर्जी की पार्टी TMC को बड़ा झटका लगा और BJP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर दी. अब शुभेंदु अधिकारी सूबे के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं. इस बदलाव का असर सिर्फ सत्ता बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से अटके पड़े बड़े प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ते नजर आ रहे हैं. इन्हीं में सबसे बड़ा नाम है 'वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे'. जिस प्रोजेक्ट की फाइलें सालों से मंजूरियों, रूट बदलाव और पर्यावरणीय अड़चनों में फंसी थीं, अब उसे तेजी से पूरा करने की तैयारी हो रही है।

    देश के पूर्वी हिस्से में रोड कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार अब वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेसवे को लेकर सरकार काफी गंभीर नजर आ रही है. हालांकि पश्चिम बंगाल में पर्यावरण मंजूरी और रूट बदलाव से जुड़ी दिक्कतों की वजह से परियोजना के कुछ हिस्सों में अभी भी देरी जरूर है. लेकिन केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय पर पूरा करने के प्रयास कर रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को झारखंड और पश्चिम बंगाल के हिस्सों में 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबे हिस्से के निर्माण की मंजूरी दे दी है. इस क्लियरेंस के बाद एक्सप्रेसवे के रुके हुए हिस्सों पर काम तेज होने की उम्मीद है और इस मेगा प्रोजेक्ट को बड़ा बूस्ट मिला है. माना जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नई रफ्तार देगा, हालांकि इसके लिए पश्चिम बंगाल में 103 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि का डायवर्जन भी करना होगा।

    6 घंटे में वाराणसी से कोलकाता!
    करीब 610 किलोमीटर लंबे इस 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को काशी-बंगाल एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके शुरू होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक का सफर, जो अभी 12 से 14 घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब 6 से 7 घंटे का रह जाएगा. इससे माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

    बिजनेस टुडे को सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस परियोजना का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. वहीं बिहार में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और झारखंड में वन विभाग से जरूरी मंजूरियां भी मिल चुकी हैं. इन राज्यों में प्रोजेक्ट की रफ्तार थोड़ी बताई जा रही है।

    कहां अटक रहा प्रोजेक्ट?
    दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में यह परियोजना अभी धीमी गति से आगे बढ़ रही है. इसकी बड़ी वजह रूट अलाइनमेंट में बदलाव, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और पर्यावरण मंजूरियों में देरी बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार अगर वन्यजीवों से जुड़ी चिंताओं का जल्द समाधान नहीं निकला तो केंद्र सरकार बंगाल वाले हिस्से के रूट में कुछ बदलाव भी कर सकती है।

    यह मुद्दा हाल ही में संसद में भी उठाया गया था. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा था कि, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में निर्माण कार्य के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मूल रूट में बदलाव की मांग किए जाने के बाद वहां काम की रफ्तार धीमी पड़ गई. उन्होंने बताया कि वाराणसी-रांची-कोलकाता वाले मूल रूट को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी और 3 जनवरी 2023 को पश्चिम बंगाल सरकार की सहमति भी मिल गई थी. लेकिन राज्य सरकार की ओर से मांगे गए संशोधित रूट को अक्टूबर 2024 में मंजूरी मिली, जिससे आगे की प्रक्रिया में देरी हुई।

    इन इलाकों में वन्यजीवों के लिए अंडरपास
    अधिकारियों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा जिलों से गुजरने वाले हिस्सों में वन और वन्यजीवों की सेफ्टी एक बड़ी चिंता है. वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक्सप्रेसवे पर कई वन्यजीव अंडरपास बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि जानवरों की आवाजाही प्रभावित न हो।

  • पेपर लीक कांड में बड़ा एक्शन: NEET UG परीक्षा निरस्त, CBI करेगी पूरे मामले की जांच

    पेपर लीक कांड में बड़ा एक्शन: NEET UG परीक्षा निरस्त, CBI करेगी पूरे मामले की जांच

     नई दिल्ली

    एनटीए ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 रद्द कर दी है। पेपर लीक होने के शक के चलते एनटीए ने यह फैसला लिया। नई तिथि का ऐलान बाद में किया जाएगा। पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई करेगी। देश भर में नीट परीक्षा का आयोजन 3 मई 2026 को किया गया था। नेशनल एनटीए ने नोटिस में कहा, 'राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने भारत सरकार की मंजूरी से, 3 मई 2026 को आयोजित NEET (UG) 2026 परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। इस परीक्षा की नई तारीखों की सूचना अलग से दी जाएगी।' आपको बता दें कि नीट यूजी परीक्षा से ही देश के मेडिकल, डेंटल व आयुष कॉेलजों में चलाए जा रहे एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस जैसे विभिन्न कोर्सेज में दाखिला मिलता है। एमबीबीएस कर डॉक्टर बनने का ख्वाब देख रहे 22.05 लाख विद्यार्थियों ने यह परीक्षा दी थी।

    3 मई को नीट यूजी परीक्षा होने के चार दिन बाद 7 मई को एनटीए को इसके पेपर लीक से जुड़े कुछ इनपुट मिले थे। 8 मई को इनके सत्यापन व कार्रवाई के लिए इन्हें केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया था।

    पेपर लीक की जांच करेगी सीबीआई
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि उन्हें जांच एजेंसियों से जो इनपुट मिले, उनके आधार पर पता चला कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी नहीं रखा जा सकता। परीक्षा की नई तारीखें, एडमिट कार्ड का शेड्यूल आदि जल्द ही एजेंसी के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से बता दिया जाएगा। एनटीए ने बताया कि सरकार ने अब इस संभावित पेपर लीक की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी।

    करीब 23 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा
    NEET (UG) 2026 परीक्षा में इस बार देशभर से करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

    गेस पेपर से मैच हुए थे नीट पेपर के 120 प्रश्न

    आपको बता दें कि राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के खुलासे के बाद नीट यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक का शक और गहरा गया था। राजस्थान पुलिस एसओजी ने सोमवार को बताया था कि नीट यूजी परीक्षा से 15 से 1 महीने पहले से एक गैस पेपर नीट अभ्यर्थियों के बीच सर्कुलेट हो रहा था। इस गेस पेपर में करीब 410 सवाल हैं जिसमें से 120 सवाल नीट एग्जाम के केमिस्ट्री सेक्शन में हूबहू आए हैं। पूरे मैच होते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 720 में से 600 अंक के प्रश्न गेस पेपर से आए थे जो पहले ही स्टूडेंट्स के पास पहुंच चुका था।
    केरल से आउट, राजस्थान के सीकर तक पहुंचा

    नीट यूजी पेपर लीक मामले में कहा जा रहा है कि जो गेस पेपर नीट अभ्यर्थियों के बीच पहुंच रहा था, वह केरल से आउट हुआ था और राजस्थान तक पहुंचा था। राजस्थान के सीकर में कंसलटेंसी चलाने वाले झुंझुनूं के एक शख्स के पास परीक्षा से करीब 1 महीना पहला गैस पेपर आया था।
    कई संदिग्धों को पकड़ा

    एसओजी ने ने पिछले चार दिन में देहरादून, सीकर व झुंझुनूं से 20 से ज्यादा संदिग्धों को पकड़ा है। एजेंसी से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की है। जिन्हें पकड़ा है, उनमें से ज्यादातर करियर काउंसलर हैं। देहरादून से पकड़े गए संदिग्धों में एक सीकर का राकेश मंडावरिया है। उसका पीपराली रोड पर एक नामी कोचिंग संस्थान के सामने कंसल्टेंसी का ऑफिस है। राकेश की निशानदेही पर देहरादून से शनिवार देर शाम 4 और लोगों को पकड़ा है।

  • मुनीर का कुनबा खतरे में, लाहौर से कराची तक एक ही अटैक में असर, चीन पर भी पसीना

    मुनीर का कुनबा खतरे में, लाहौर से कराची तक एक ही अटैक में असर, चीन पर भी पसीना

    नई दिल्ली

    भारत ने पिछले दिनों ओडिशा के तट पर एक विनाशकारी मिसाइल का सफल ट्रायल किया है. इससे पहले डीआरडीओ की तरफ से तीन हजार किलोमीटर से भी ज्‍यादा के क्षेत्र के लिए हवाई कर्फ्यू यानी NOTAM जारी किया था. अब इसको लेकर विस्‍तृत जानकारी सामने आई है. दरअसल, भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया है, जो 5000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. खास बात यह है कि इस मिसाइल में ऐसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जो एक साथ अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग टार्गेट को एक साथ तबाह करने में सक्षम है. इस मिसाइल की जद में पूरा पाकिस्‍तान है, ज‍बकि उसके यार चीन के कई महत्‍वपूर्ण ठिकाने भी इस मिसाइल की नोंक पर होंगे. इसका मतलब यह हुआ कि इस मिसाइल से लाहौर से लेकर इस्‍लामाबाद, रावलपिंडी, कराची, पेशावर जैसे शहरों को कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्‍दील किया जा सकता है। 

    दरअसल, डीआरडीओ ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल यानी MIRV टेक्‍नोलॉजी से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया है. हालांकि, डीआरडीओ की तरफ से अग्नि मिसाइल के इस वैरिएंट के बारे में कुछ नहीं बताया गया है, लेकिन मुद्दे की बात यह है कि यह मिसाइल MIRV तकनीक से लैस है. MIRV टेक्‍नोलॉजी की मदद से एक ही मिसाइल से कई टार्गेट पर निशाना साधा जा सकता है. इस तकनीक से लैस मिसाइल को इसी वजह से ‘मिसाइल बस’ भी कहा जाता है. भारत ने 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर सामरिक मोर्चे पर बड़ा संदेश दिया है. इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की MIRV क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं। 

    हिन्‍द महासागर में बादशाहत!
    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 9 मई को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परीक्षण की सफलता की पुष्टि की. बाद में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग स्टेशनों से प्राप्त टेलीमेट्री डेटा ने मिसाइल की पूरी ऑपरेशनल ट्रैजेक्टरी को सफल बताया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण को भारत की बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि देश बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रहा है. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि परीक्षण अग्नि-5 का था या अग्नि-6 संस्करण का, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अग्नि-5 परिवार का एडवांस MIRV अपग्रेड मान रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है. माना जा रहा है कि यह मिसाइल हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग लक्ष्यों को साधने में सक्षम है, जिससे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और ‘सेकेंड स्ट्राइक’ क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं। 

    MIRV से लैस मिसाइल इस वजह से खास

    •     भारत ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल किया.
    •     रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल में MIRV (Multiple Independently Targeted Reentry Vehicle) तकनीक का इस्तेमाल किया गया.
    •     इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है.
    •     परीक्षण में मिसाइल ने कई पेलोड को अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया.
    •     सभी लक्ष्यों को हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक दायरे में चुना गया था.
    •     मिसाइल की पूरी उड़ान पर ग्राउंड और जहाज आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई.
    •     रक्षा मंत्रालय ने कहा कि लॉन्च से लेकर सभी पेलोड के लक्ष्य पर पहुंचने तक मिशन सफल रहा.
    •     इस परीक्षण के साथ भारत ने फिर साबित किया कि वह एक मिसाइल से कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है.
    •     मिसाइल का विकास DRDO की लैब्स ने देश की विभिन्न इंडस्ट्रीज के सहयोग से किया है.
    •     परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौजूद रहे.
    •     इससे पहले 11 मार्च 2024 को भारत ने पहली बार स्वदेशी अग्नि-5 मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ सफल परीक्षण किया था.
    •     हालांकि सरकार ने मिसाइल की आधिकारिक रेंज नहीं बताई, लेकिन NOTMAR नोटिस के आधार पर इसकी मारक क्षमता करीब 3,600 किलोमीटर मानी जा रही है.

    MIRV टेक्‍नोलॉजी के क्‍या फायदे?
    MIRV तकनीक रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल जहां एक वारहेड ले जाती है, वहीं MIRV तकनीक वाली मिसाइल एक साथ कई वारहेड लेकर अलग-अलग दिशाओं में हमला कर सकती है. इसमें डिकॉय और पेनिट्रेशन एड्स का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो जाता है. यही वजह है कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने इस तकनीक को अपनी रणनीतिक क्षमता का अहम हिस्सा बनाया हुआ है. अब भारत भी इस श्रेणी में मजबूती से शामिल होता दिखाई दे रहा है. यह परीक्षण मुख्य रूप से चीन को रणनीतिक संदेश देने वाला है. हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम में तेजी लाई है. शिनजियांग क्षेत्र में मिसाइल साइलो निर्माण, DF-41 जैसी MIRV मिसाइलों की तैनाती, हाइपरसोनिक हथियारों का विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं. ऐसे में भारत का यह परीक्षण सामरिक संतुलन कायम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

    MIRV तकनीक आखिर होती क्या है?
    MIRV यानी Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle ऐसी मिसाइल तकनीक है, जिसमें एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु वारहेड लेकर जाती है. अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद ये वारहेड अलग-अलग दिशाओं में जाकर अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं. यानी एक मिसाइल से कई ठिकानों पर हमला संभव हो जाता है.

    भारत के हालिया परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत क्या रही?
    भारत ने उन्नत अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए MIRV तकनीक का सफल परीक्षण किया है. इस परीक्षण ने दिखाया कि भारत अब लंबी दूरी तक कई लक्ष्यों पर एक साथ सटीक हमला करने की क्षमता हासिल कर चुका है. इसे भारत की सामरिक ताकत में बड़ा इजाफा माना जा रहा है.

    चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में यह तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है?
    चीन पहले से ही MIRV क्षमता वाली मिसाइलें तैनात कर चुका है, जबकि पाकिस्तान भी अपनी परमाणु क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है. ऐसे में भारत का यह परीक्षण क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन बनाए रखने और अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

    MIRV तकनीक से सैन्य रणनीति में क्या बदलाव आता है?
    इस तकनीक से दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो जाता है. क्योंकि एक ही मिसाइल से कई वारहेड अलग-अलग दिशाओं में जाते हैं, इसलिए उन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. इससे किसी देश की ‘सेकेंड स्ट्राइक क्षमता’ यानी जवाबी हमले की ताकत और मजबूत होती है.

    किन देशों के पास पहले से MIRV तकनीक मौजूद है?
    अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के पास पहले से MIRV तकनीक है. अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है, जिससे वैश्विक सामरिक मंच पर उसकी स्थिति और मजबूत मानी जा रही है.

    पाकिस्‍तान की क्‍या स्थिति?
    भारत की नो फर्स्ट यूज नीति के तहत यह तकनीक प्रतिशोधात्मक हमले की विश्वसनीयता बढ़ाती है. यदि किसी परमाणु हमले की स्थिति बनती है तो भारत के पास जवाबी कार्रवाई में अधिक प्रभावी क्षमता होगी. MIRV तकनीक सीमित मिसाइल भंडार के बावजूद अधिकतम प्रभाव पैदा करने में मदद करती है और कम लॉन्चरों से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है. इस परीक्षण का असर पाकिस्तान पर भी पड़ना तय माना जा रहा है. पाकिस्तान पहले से अपने ‘अबाबील’ MIRV कार्यक्रम पर काम कर रहा है. भारत की इस सफलता के बाद पाकिस्तान अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम में और तेजी ला सकता है. हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को गाइडेंस सिस्टम, इंजीनियरिंग, टेलीमेट्री और सर्वाइवेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट बढ़त हासिल है.

    चीन को जवाब
    हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग लक्ष्यों पर परीक्षण को भारत की समुद्री रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. यह क्षेत्र ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों और नौसैनिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति के बीच भारत अब समुद्री प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत कर रहा है. भारत का यह कदम केवल सैन्य शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का भी प्रतीक है. DRDO, घरेलू रक्षा उद्योग और निजी कंपनियों जैसे Tata Group और Larsen & Toubro की भागीदारी ने रणनीतिक हथियार निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता को नई पहचान दी है.

    मार्च 2024 को पहला परीक्षण
    भारत ने मार्च 2024 में मिशन दिव्यास्त्र के जरिए MIRV तकनीक का पहला प्रदर्शन किया था. अब ताजा परीक्षण ने यह संकेत दे दिया है कि भारत तेजी से उन्नत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता की दिशा में आगे बढ़ रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार अग्नि-5I या उसके उन्नत संस्करण में तीन से छह वारहेड ले जाने की क्षमता हो सकती है और यह कैनिस्टर आधारित कोल्ड लॉन्च तकनीक से लैस है, जिससे इसे तेजी से तैनात किया जा सकता है. रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह परीक्षण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन की नई बहस को जन्म देगा. चीन और पाकिस्तान जहां अपने परमाणु आधुनिकीकरण को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं भारत भी अब बहुस्तरीय प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है.

  • LPG सिलेंडर की डिलीवरी को लेकर प्रमुख गैस कंपनियों का नया अपडेट

    LPG सिलेंडर की डिलीवरी को लेकर प्रमुख गैस कंपनियों का नया अपडेट

    नई दिल्ली

    एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी अब 100 पर्सेंट DAC कोड के जरिए होने लगी है। इससे एक भी सिलेंडर का दाएं-बाएं होना अब मुश्किल है। LPG सिलेंडर के डिस्ट्रीब्यूशन और सही उपभोक्ता तक उसकी पहुंच के लिए यह सिस्टम बेहद सुरक्षित है। हालांकि, फेक DAC कोड के जरिए लोगों को लूटने के लिए साइबर फ्रॉड भी सक्रिय हो गए हैं। LPG सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनियों ने DAC को लेकर अपडेट जारी की हैं। आइए देखें किसने क्या कहा और आगे खबर में यह भी जानेंगे कि असली और फेक DAC की पहचान कैसे करें?

    असली और फेक DAC कोड की कैसे करें पहचान
    LPG डिलीवरी मैसेज की पहचान को लेकर एचपीसीएल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि स्कैमर्स LPG डिलीवरी के नाम पर फर्जी मैसेज भेज सकते हैं, लेकिन असली HP Gas मैसेज की पहचान जानकर आप सुरक्षित रह सकते हैं।

    Delivery Authentication Code साझा करने से पहले हमेशा जांच करें। इस पोस्ट में कंपनी ने आगे लिखा है, "मैसेज आधिकारिक sender name “VM-HPGASc-S” से आया हो। उसमें 4 अंकों का OTP हो और OTP केवल सिलेंडर डिलीवरी के समय ही इस्तेमाल किया जाए।

    ध्यान रखें, HP Gas के कर्मचारी कभी भी फोन कॉल, WhatsApp या किसी संदिग्ध लिंक के जरिए OTP नहीं मांगते। अगर मैसेज जल्दबाजी में कार्रवाई करने को कहे, अजीब लगे या अलग फॉर्मेट में हो, तो उस पर भरोसा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। HP Gas के साथ साइबर फ्रॉड से बचें।" इसी तरह की अपील भारत गैस ने भी की है।
    इंडेन के उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी

    साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह बताते हैं कि इंडेन के मैसेज को उदाहरण के साथ बताते हैं कि सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने सिलेंडर बुक कराया था या नहीं। अगर बिना बुक कराए कोई डिलीवरी मैसेज है तो उसपर ध्यान न दें। अगर बुक कराया तो यह देखें कि मैसेज किसी आधिकारिक सेंडर ID (जैसे VK-INDANE, VM-INDANE आदि) से आया हैं कि नहीं।

    इसके बाद यह देखें कि मैसेज में बुकिंग या इनवायस नंबर दिया गया है या नहीं और 6 अंकों का DAC Code है और इसे केवल डिलीवरी बॉय को शेयर करने की बात कही गई है या नहीं। अंत में Indane का नाम है या नहीं। DAC/OTP केवल तब शेयर करें जब डिलीवरी बॉय आपके घर सिलेंडर लेकर पहुंच जाए। उससे पहले कभी साझा न करें।

    एलपीजी सिलेंडर के क्या हैं आज के रेट
    इंडेन के मुताबिक बेंगलुरु में घरेलू ₹915.50 और कमर्शियल ₹3152 में बिक रहा है। हैदराबाद में घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट ₹965 और कमर्शियल ₹3315 है। इंदौर में घरेलू सिलेंडर 941 रुपये का है और कमर्शियल 3176.5 रुपये का। रायपुर में घरेलू सिलेंडर 984.5 रुपये और कमर्शियल 3294.5 रुपये में है। पटना में आज घरेलू सिलेंडर ₹1002.50 और कमर्शियल ₹3346.5 का है।

    जयपुर में एलपीजी घरेलू सिलेंडर ₹916.5 और 19 किलो वाला कमर्शियल ₹3099 में बिक रहा है। देहरादून में घरेलू सिलेंडर ₹932 और कमर्शियल ₹3129 का है। अंडमान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट ₹989 हैं तो कमर्शियल के ₹3490 है।

  • चंबा में दुर्घटना: गुजरात से आए पर्यटकों का वाहन खाई में गिरा, 6 की गई जान

    चंबा में दुर्घटना: गुजरात से आए पर्यटकों का वाहन खाई में गिरा, 6 की गई जान

     चंबा

    हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया. जिसमें छह पर्यटकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा चंबा जिले के ककीरा क्षेत्र में उस वक्त हुआ, जब गुजरात से आए पर्यटकों का वाहन अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए मौके पर पहुंचे। 

    जानकारी के मुताबिक पर्यटक हिमाचल प्रदेश घूमने आए थे और ककीरा क्षेत्र से गुजर रहे थे. इसी दौरान पहाड़ी रास्ते पर एक मोड़ के पास चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा. देखते ही देखते गाड़ी सड़क से नीचे सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी. हादसा इतना भीषण था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। 

    कुछ घायलों की हालत है गंभीर
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव टीम मौके पर पहुंच गई. स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. काफी मशक्कत के बाद घायलों और मृतकों को खाई से बाहर निकाला गया. घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है. डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। 

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है. सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी है. प्राथमिक जांच में माना जा रहा है कि पहाड़ी रास्ते पर तेज रफ्तार और मोड़ पर संतुलन बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ. हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. दुर्घटना के बाद कुछ समय के लिए सड़क मार्ग भी बाधित रहा। 

    हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है. वहीं, पुलिस ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सावधानी बरतने और निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने की अपील की है।