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  • SAIL की जमीन पर बना था TMC नेता का ऑफिस, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर अभियान

    SAIL की जमीन पर बना था TMC नेता का ऑफिस, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर अभियान

    कोलकाता

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्यभर में अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के बर्नपुर इलाके में एक और तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पर बुलडोजर चलाया गया। 

    शनिवार को बर्नपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित टीएमसी पार्षद अशोक रुद्र के पार्टी कार्यालय को ध्वस्त कर दिया गया. बताया जा रहा है कि ये दफ्तर सेल-आईएसपी (इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी) की जमीन पर बना हुआ था। 

    स्थानीय प्रशासन और सेल अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा. पिछले कुछ दिनों में बर्नपुर इलाके में ये चौथा टीएमसी पार्टी दफ्तर है जिसे बुलडोजर चलाकर हटाया गया है। 

    टीएमसी ने लगाया 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप
    इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर 'टारगेट पॉलिटिक्स' का आरोप लगाया है. टीएमसी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों के दफ्तरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि सेल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है. अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन अवैध कब्जा नहीं हटाया गया. इसके बाद मजबूरन बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी। 

    सेल अधिकारियों ने ये भी कहा कि अब प्रशासन का सहयोग मिलने से अवैध कब्जों को हटाने का अभियान तेज किया गया है और आगे भी ये कार्रवाई जारी रहेगी. उनका कहना है कि किसी विशेष दल को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। 

    इससे पहले मंगलवार को बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ स्थित तृणमूल युवा कांग्रेस के एक पार्टी दफ्तर पर भी बुलडोजर कार्रवाई की गई थी. IISCO प्रबंधन ने आरोप लगाए थे कि ये पार्टी दफ्तर उनकी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था और जमीन खाली करने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, नोटिस को अनदेखा कर दिया गया जिसके बाद दफ्तर पर बुलडोजर चलाया गया। 

    आसनसोल में टीएमसी के अवैध ऑफिस को तोड़ा

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई चीजों में बदलाव देखने को मिल रहा है। शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद अवैध कब्जा हटाने के लिए लगातार बुलडोजर गरज रहा है। आसनसोल के बर्नपुर में सेल की जमीन से अवैध कब्जा को हटाया गया। यहां कब्जा कर टीएमसी का ऑफिस भी बनाया गया था, जिसे तोड़ दिया गया है।

    टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस जमींदोज
    दरअसल, कोलकाता और हावड़ा के बाद आसनसोल के बर्नपुर में बुलडोजर की दहाड़ सुनाई दी है। त्रिवेणी मोड़ के करीब सेल की जमीन पर टीएमसी यूथ विंग का ऑफिस बना हुआ था। इस्को की तरफ से कई बार अवैध ऑफिस को हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। टीएमसी सत्ता में थी तो यूथ विंग के लोग जबरदस्ती वहां निर्माण कर लिया। सत्ता बदलते ही भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में उस ऑफिस को तोड़ दिया गया है।

    बदले की भावना से कार्रवाई
    वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद टीएमसी के स्थानीय नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। बिना किसी बातचीत के इस ऑफिस को तोड़ दिया गया है। टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि सेल की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर कई अन्य लोग भी व्यवसाय चला रहे हैं। मगर कार्रवाई सिर्फ टीएमसी ऑफिस पर की गई है।

    रेलवे की जमीनों से भी हटाया गया अतिक्रमण
    इसके साथ ही आसनसोल रेल मंडल की अतिक्रमित जमीनों से भी कब्जा हटाया गया है। अवैध क्वार्टर और घरों को बुलडोजर से तोड़ा गया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद वहां हड़कंप मच गया।

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु अधिकारी
    गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। कोलकाता, हावड़ा और नंदीग्राम में भी यह कार्रवाई हो रही है। यह कार्रवाई अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ है।

  • ट्रंप का स्पेशल मैसेज लेकर PM मोदी से मिले मार्को रुबियो, जानें किन मुद्दों पर हुई बातचीत

    ट्रंप का स्पेशल मैसेज लेकर PM मोदी से मिले मार्को रुबियो, जानें किन मुद्दों पर हुई बातचीत

    नई दिल्ली

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को पीएम मोदी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटें तक चर्चा चलती रही है. इस बैठक में विदेश मंत्री एस जय शंकर के अलावा एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद रहे हैं. हालांकि, कूटनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि रूबियो की दिल्ली यात्रा भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है. अपनी इस अहम कूटनीतिक यात्रा के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर रक्षा, व्यापार, इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. इस उच्च स्तरीय मुलाकात का सबसे बड़ा आकर्षण वह निमंत्रण रहा, जो रूबियो वाशिंगटन से अपने साथ लेकर आए थे. रूबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का विशेष न्योता दिया। 

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर हैं. उन्होंने आज प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. इस दौरान मार्को रुबियो ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है। 

    बैठक काफी सकारात्मक रही- रुबियो
    रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि यह बैठक काफी सकारात्मक और उपयोगी रही. दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. अमेरिका ने साफ तौर पर भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला और उभरती टेक्नोलॉजी क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। 

    रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न सिर्फ दोनों देशों को मजबूत करेगा, बल्कि एक मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित होगा। 

    बैठक के बाद पीएम मोदी ने शेयर कीं तस्वीरें
    प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद X पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगति पर विस्तार से बातचीत हुई. इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि भारत और अमेरिका वैश्विक हितों को ध्यान में रखते हुए आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे. दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भविष्य में और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। 

    करीब 14 वर्षों बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा हुआ. इससे पहले वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने शहर का दौरा किया था. ऐसे समय में रुबियो का आगमन राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रुबियो के आगमन की जानकारी देते हुए कहा कि यह उनकी पहली भारत यात्रा है. उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात होगी, जिसमें व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और क्वाड समेत कई रणनीतिक विषयों पर चर्चा की जाएगी. रुबियो का भारत दौरा 23 से 26 मई तक प्रस्तावित है. इस दौरान वह कोलकाता के अलावा नई दिल्ली, आगरा और जयपुर भी जाएंगे. माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा। 

    इन बातों पर रहेगा फोकस
    दौरे से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत को जितनी अधिक एनर्जी (तेल, गैस) बेच सकेगा, उतना बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है. भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने भारत को महान साझेदार बताया. इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को प्रस्तावित क्वाड देशों की बैठक मानी जा रही है. बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे. इसमें भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar मेजबानी करेंगे, जबकि ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Motegi Toshimitsu भी शामिल होंगे। 

    पीएम मोदी ने मार्को रूबियो से मुलाकात पर दी जानकारी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस बैठक की अहम जानकारी साझा की है. पीएम मोदी ने रूबियो का भारत में स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की और बताया कि इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत-अमेरिका ‘व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में हो रही निरंतर प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके अलावा, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दों पर भी गहरा मंथन किया. अपनी पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई और साझा हितों के लिए भविष्य में भी मजबूती से एक साथ मिलकर कार्य करते रहेंगे। 

     भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत बनाने पर मोदी-रूबियो की चर्चा- सर्जियो गोर
    मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद मीडिया से बात कर बैठक के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच एक घंटे के करीब चली बैठक काफी सकारात्मक रही. बैठक में सुरक्षा, व्यापार और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. गोर ने भारत को अमेरिका का एक अहम साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश मिलकर फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। 

     अब और मजबूत होगी भारत-US रणनीतिक साझेदारी, MEA ने किया जोरदार स्वागत
    मार्को रुबियो भारत यात्रा लाइव: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी किया है. MEA ने नई दिल्ली पहुंचने पर तस्वीर शेयर करते हुए रूबियो का हार्दिक अभिनंदन किया है. मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ये यात्रा दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में मील का पत्थर साबित होगी. मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया कि रूबियो का यह दौरा भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा ‘व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Global Strategic Partnership) को एक नई दिशा देगा और इसे और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। 

    प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो का स्वागत करते हुए इस रिश्ते को वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए अहम बताया। 

    रूबियो के भारत दौरे के कार्यक्रम

    23 मई, 2026

        सुबह 7:05 बजे कलकत्ता आगमन
        मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी
        दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान
        दोपहर 2:30 से 4 बजे तक – अमेरिकी दूतावास का कार्यक्रम
        शाम 4 बजे – अमेरिकी दूतावास में रेड कार्पेट

    24 मई

        सुबह 11:30 बजे से – जयशंकर/रुबियो वार्ता
        शाम 6 से 9 बजे तक – भारत मंडपम में 250वीं वर्षगांठ का स्वागत समारोह

    25 मई

        पहला भाग संभवतः आगरा में
        दोपहर 2 बजे जयपुर आगमन
        दोपहर 3 से 4:15 बजे तक आमेर किला
        शाम 4:45 बजे – रामबाग होटल

    26 मई

        सुबह 6:15 बजे – दिल्ली के लिए प्रस्थान
        सुबह 9:30 बजे – क्वाड शिखर सम्मेलन
        सुबह 11:00 बजे – क्वाड में प्रेस कॉन्फ्रेंस

     

  • दो राज्यों में चुनावी हलचल तेज, महाराष्ट्र-तमिलनाडु उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान

    दो राज्यों में चुनावी हलचल तेज, महाराष्ट्र-तमिलनाडु उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान

    नई दिल्ली
    राज्यसभा की 24
    खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है. चुनाव आयोग ने आज द्विवार्षिक चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. दस राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान होगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह रिटायर हो रहे हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं। 

    18 जून को होगी वोटिंग 
    चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक एक जून को नोटिफिकेशन जारी होगा. 8 जून तक नामांकन भरा जा सकेगा. 9 जून को नामांकन की जांच होगी. 11 जून को नामांकन वापस लिया जा सकेगा. अगर जरूरी हुई तो 18 जून को वोटिंग होगी. वोटिंग सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगी. 18 जून को मतगणना होगी और 20 जून तक राज्यसभा का चुनाव पूरा कर लिया जाएगा। 

    11 बीजेपी से और 4 कांग्रेस के सांसद हो रहे रिटायर
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन, और रवनीत सिंह बिट्टू आदि का कार्यकाल हो रहा है समाप्त। 

    कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात से चार-चार सीटें होंगी खाली हो रही हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश से तीन-तीन सीटें खाली होने जा रही हैं. मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड से एक-एक सीट खाली होंगी . इनके अलावा झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से एक-एक सीटों पर उपचुनाव भी हो सकता है. 22 रिटायर होने वाले सांसदों में 11 बीजेपी के हैं जबकि कांग्रेस के चार सांसद हैं। 

    चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा. किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी. साथ ही चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी ताकि मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जा सके। 

    राजनीतिक तौर पर इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में संख्या बल कई बड़े विधेयकों और राजनीतिक रणनीतियों पर असर डालता है. ऐसे में आने वाले दिनों में विभिन्न दल उम्मीदवारों के चयन और समर्थन जुटाने की कवायद तेज कर सकते हैं। 

    किस राज्य की कितनी सीटों पर चुनाव?

    आंध्र प्रदेश: 4
    गुजरात: 4
    कर्नाटक: 4
    मध्य प्रदेश: 3
    राजस्थान: 3
    झारखंड: 2
    मणिपुर: 1
    मेघालय: 1
    अरुणाचल प्रदेश :
    मिजोरम :1

    नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है.

    केंद्रीय मंत्रियों पर तलवार लटकी
    केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसी तरह अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन मध्य प्रदेश से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो रहा है. माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रवनीत सिंह को पार्टी दोबारा राज्य सभा भेज सकती है। 

    वहीं कूरियन को केरल चुनाव के मद्देनजर सरकार में लाया गया था. अब देखना होगा कि बीजेपी उन्हें फिर से राज्य सभा भेजती है या नहीं. केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इन दोनों मंत्रियों का बना रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि वे फिर से राज्य सभा में आते हैं या नहीं। 

    खरगे और दिग्विजय का क्या होगा?
    कर्नाटक से संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को तीन सीटें मिल सकती हैं. इनमें से एक पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का चुना जाना तय माना जा रहा है. वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक सीट जीतने के लिए जोर लगाना पड़ेगा. हालांकि उसके पास केवल छह सरप्लस वोट हैं. ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता पर दांव लगाया जा सकता है. खुद दिग्विजय सिंह फिर से राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं. राज्य में दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस को मिल सकती है. बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन भी दौड़ में हैं. राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा का नाम चल रहा है। 

    गुजरात में कांग्रेस जीरो
    कांग्रेस को बड़ा झटका गुजरात में लगने जा रहा है. अभी गुजरात से राज्यसभा की 11 सीटों में कांग्रेस के केवल एक ही सदस्य हैं. शक्तिसिंह गोहिल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं. वे 21 जून को रिटायर हो रहे हैं. वर्तमान में एक सीट जीतने के लिए 46 वोट चाहिए जबकि कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक हैं. यानी कांग्रेस का गुजरात से अपना कोई भी उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में नहीं जीत सकता. यह पहली बार होगा जब गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य से कांग्रेस का राज्य सभा में कोई भी सदस्य नहीं होगा. हालांकि झारखंड में कांग्रेस की उम्मीदें सत्तारूढ़ जेएमएम पर टिकी हैं. पार्टी को उम्मीद है कि जेएमएम यह सीट कांग्रेस को दे देगा. इस चुनाव में एनडीए की स्थिति वर्तमान स्तर पर ही रहने की संभावना है. हालांकि टीडीपी की सीटें बढ़ सकती हैं. बीजेपी के अभी राज्य सभा में 113 सांसद हैं और एनडीए के 148 सांसद हैं. इस दौर के चुनाव के बाद बीजेपी की संख्या कमोबेश इसी के आसपास रहेगा। 

    बीजेपी के 11 सांसद हो रहे रिटायर
    केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू समेत 11 बीजेपी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके अलावा कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी कार्यकाल समाप्त होने को है। ऐसे में कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में चार-चार सीटें खाली हो रही हैं। झारखँड, तमिलनाडुऔर महाराष्ट्र की एक-एक सीटों पर उपचुनाव हो सकताहै। 11 सांसदों में से 11 बीजेपी के और चार कांग्रेस के सांसद रिटायर हो रहे हैं।

    रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री हैं। 21 जून को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिट्टू को फिर से राज्यसभा भेजा जा सकता है। फिलहाल वह राजस्थान से सांसद हैं। वहीं जॉर्च कूरियन की वापसी पक्की नहीं बताई जा रही है।

    मल्लिकार्जुन खरगे और दिग्विजय सिंह
    कर्नाटक से कांग्रेस को तीन सीटें मिल सकती हैं। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का राज्यसभा के लिए चुना जाना तय है। वहीं मध्य प्रदेश की सीट जीतने के लिए कांग्रेस के मेहनत करनी होगी। कांग्रेस के पास यहां 6 सरप्लस वोट हैं। वहीं दिग्विजय सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह राज्यसभा नहीं जानाचाहते। मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के खाते में दो-दो सीटें जा सकती हैं।

     

  • पश्चिम बंगाल में ED एक्शन मोड में, बंद मकान का ताला तोड़कर की जांच

    पश्चिम बंगाल में ED एक्शन मोड में, बंद मकान का ताला तोड़कर की जांच

     कोलकाता

    पश्चिम बंगाल में कथित रंगदारी रैकेट की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह बड़े पैमाने पर छापेमारी की है. मुर्शिदाबाद ज़िले के कांडी शहर में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) शांतनु सिन्हा विश्वास के आलीशान पैतृक आवास पर ईडी की टीम ने ताला तोड़कर धावा बोला. यह घर कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है और पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह बंद पड़ा था। 

    शांतनु सिन्हा विश्वास कोलकाता के कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) और डिप्टी कमिश्नर (DC) रह चुके हैं और फिलहाल ज़मीन से जुड़े एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में ED की हिरासत में हैं। 

    शांतनु सिन्हा विश्वास का कांडी में एक आलीशान घर है जो कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है. यह घर पिछले सात दिनों से बंद पड़ा है. शांतनु सिन्हा विश्वास की बहन, गौरी सिन्हा विश्वास, फिलहाल कांडी नगर पालिका की उपाध्यक्ष हैं. छापेमारी के दौरान वह भी घर पर मौजूद नहीं थी. चूंकि घर बंद था, इसलिए ED के अधिकारियों ने घर के बाहर से ही अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर दी और स्थानीय लोगों से बातचीत की और इसके बाद ताला तोड़कर घर में घुसे। 

    सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित तौर पर ‘सोना पप्पू’ नाम से जुड़े उगाही नेटवर्क और शांतनु सिन्हा बिस्वास से संबंधित जांच के तहत की जा रही है. जानकारी के अनुसार, ED की टीमों ने सुबह करीब 6 बजे एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी। 

    कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक होटल और एक कारोबारी के घर पर छापेमारी की गई. इसके अलावा कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर भी जांच एजेंसी पहुंची. एजेंसी कथित उगाही, अवैध लेनदेन और पुलिस अधिकारियों से जुड़े संभावित आर्थिक नेटवर्क की जांच कर रही है। 

    हालांकि ED की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक कार्रवाई का फोकस कथित जबरन वसूली गिरोह और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन पर है. जांच एजेंसी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत जुटाने में लगी हुई है। 

    बंगाल में एक साथ कई जगहों पर हुई इस कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। 

  • तमिलनाडु की राजनीति में हलचल, विजय कैबिनेट में 23 विधायकों ने ली शपथ

    तमिलनाडु की राजनीति में हलचल, विजय कैबिनेट में 23 विधायकों ने ली शपथ

    चेन्नई

    तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हो गया है। नई सरकार में विजय की टीवीके पार्टी के 21 और सहयोगी दल कांग्रेस के 2 विधायकों ने मंत्री के रूप में शपथ ली।

    टीवीके सरकार के बहुमत के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले दो अहम सहयोगी दल, आईयूएमएल और वीसीके फिलहाल इस कैबिनेट विस्तार का हिस्सा नहीं हैं। दोनों दलों के पास 2-2 विधायक हैं।

    एनडीटीवी के अनुसार, IUML और VCK दोनों के लिए कैबिनेट में एक-एक पद आरक्षित रखा गया है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने मंत्रियों के नाम तय नहीं किए हैं। इन दोनों सहयोगी दलों को बाद के चरण में सरकार में शामिल किया जाएगा।

    सहयोगियों को सरकार में शामिल होने का न्यौता
    टीवीके नेतृत्व लगातार वीसीके, सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल को औपचारिक रूप से गठबंधन सरकार में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहा है, जो फिलहाल सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं।

    तमिलनाडु के लोक निर्माण और खेल मंत्री आधव अर्जुन ने मंगलवार को कहा था कि मुख्यमंत्री ने इस बात को दोहराया है। यह उनकी इच्छा और सपना भी है। हमें अच्छी खबर की उम्मीद है। हम चाहेंगे कि वीसीके प्रमुख थोल तिरुमावलवन भी मंत्रिमंडल में शामिल हों।

    सीएम विजय ने 10 मई को 9 मंत्रियों के साथ पद की शपथ ली थी। उनके मंत्रिमंडल में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं। आज 23 नए मंत्रियों के शामिल होने से विजय सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 32 हो गई है। ऐसे में वीसीके और आईयूएमएल जैसे सहयोगी दलों के लिए अभी भी 3 पद खाली हैं।

    थलापति विजय के नेतृत्व वाली सरकार में शपथ लेने वाले दो कांग्रेस विधायक राजेश कुमार और थिरु पी. विश्वनाथन हैं. शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में ‘वंदे मातरम’ और अंत में तमिल गान बजाया गया. टीवीके ने सीपीआई, सीपीएम को गठबंधन सरकार में शामिल होने का न्योता दिया। 

    टीवीके नेतृत्व ने वीसीके, सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल को, जो फिलहाल सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं, औपचारिक रूप से गठबंधन सरकार में शामिल होने का न्योता दिया है. तमिलनाडु के लोक निर्माण और खेल मंत्री आधव अर्जुना ने मंगलवार को कहा, ‘मुख्यमंत्री ने इसे दोहराया है. यही उनकी इच्छा और सपना भी है. हमें अच्छी खबर की उम्मीद है. हम चाहते हैं कि वीसीके प्रमुख थोल तिरुमावलवन भी कैबिनेट में शामिल हों.’
    10 मई को विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उनके साथ नौ मंत्रियों ने भी शपथ ली थी. संविधान के प्रावधानों के अनुसार, वे अधिकतम 35 मंत्रियों की नियुक्ति कर सकते हैं, जो विधानसभा की कुल संख्या का 15% है। 

    आज 23 और मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्री परिषद की संख्या 32 हो गई है. इससे तीन पद खाली हैं, जिन्हें वीसीके और आईयूएमएल जैसे सहयोगियों को दिया जा सकता है. मंत्रिमंडल में कांग्रेस विधायकों की एंट्री तमिलनाडु के लिए एक बड़ा राजनीतिक क्षण है. लगभग 60 साल बाद पहली बार कांग्रेस राज्य सरकार का हिस्सा बनी है. पार्टी ने आखिरी बार पूर्व मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम के कार्यकाल में राज्य में सरकार चलाई थी, जो मार्च 1967 में खत्म हुआ था। 

    ऐतिहासिक 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सी. एन. अन्नादुरै के नेतृत्व वाली डीएमके ने सत्ता से बाहर कर दिया था. तब से अब तक कांग्रेस राज्य सरकार से बाहर रही थी, लेकिन अब विजय के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गई है। 

    थलापति विजय सरका कैबिनेट मिनिस्टर्स लिस्ट:

        श्रीनाथ (थूथुकुडी)
        कमाली एस (अविनाशी)
        सी. विजयलक्ष्मी (कुमारपालयम)
        आर.वी. रंजीतकुमार (कांचीपुरम)
        विनोद (कुंभकोणम)
        राजीव (तिरुवदनाई)
        बी. राजकुमार (कुड्डालोर)
        वी. गांधीराज (अरक्कोणम)
        मथन राजा पी (ओट्टापिडारम)
        जगदेश्वरी के (राजपालयम)
        एम. विजय बालाजी (इरोड पूर्व)
        लोगेश तमिलसेल्वन डी (रासीपुरम)
        विजय तमिलन पार्थिबन ए (सेलम दक्षिण)
        रमेश (श्रीरंगम)
        कुमार आर (वेलाचेरी)
        थेन्नारासु के (श्रीपेरुम्बुदूर)
        वी. संपत कुमार (कोयंबटूर उत्तर)
        मोहम्मद फरवास जे (अरंथांगी)
        डी. सरथकुमार (तांबरम)
        एन. मैरी विल्सन (डॉ. राधाकृष्णन नगर)
        विग्नेश के (किनाथुकडावु)

    शपथ लेने वाले विधायकों की सूची
    शपथ लेने वाले विधायकों में 21 टीवीके से हैं, जिनमें श्रीनाथ, कमली एस, सी विजयलक्ष्मी, आरवी रंजीतकुमार, विनोद, राजीव, बी राजकुमार, वी गांधीराज, मथन राजा पी, जगदेश्वरी के, राजेश कुमार एस, एम विजय बालाजी, लोगेश तमिलसेल्वन डी, विजय तमिलन पार्थीबन ए, रमेश, पी विश्वनाथन, कुमार आर, थेन्नारासु के, वी संपत कुमार, मोहम्मद फरवास जे, डी सरथकुमार, एन मैरी विल्सन और विग्नेश के शामिल हैं।

    छह दशक बाद तमिलनाडु की सत्ता में कांग्रेस की वापसी
    विजय के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने वाले दो कांग्रेस विधायक राजेश कुमार और तिरु पी. विश्वनाथन हैं। लगभग छह दशकों में यह पहली बार है जब कांग्रेस तमिलनाडु में सरकार का हिस्सा बनने जा रही है।

    पिछली बार कांग्रेस ने एम. भक्तवत्सलम के नेतृत्व में सरकार चलाई थी, जो राज्य में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री थे और उनका कार्यकाल मार्च 1967 में समाप्त हुआ था।

    1967 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों में सीएन अन्नादुरई के नेतृत्व वाले डीएमके ने कांग्रेस पार्टी को हरा दिया था। तब से लेकर अब तक कांग्रेस राज्य में किसी भी सरकार का हिस्सा नहीं रही थी। अब विजय के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल होकर पार्टी ने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की है।

     

  • शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, बंगाल के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ जरूरी

    शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, बंगाल के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ जरूरी

    कोलकाता
     पश्चिम बंगाल की शुभेदु अधिकारी सरकार ने बड़ा आदेश जारी किया है। सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान ‘ वंदे मातरम ’ गाना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। इससे पहले यह नियम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू था। राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों की तरह अब मान्यता प्राप्त मदरसों में भी ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य होगा।

    मंत्री ने आगे क्या बताया
    तुडू ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई संताली भाषा में होती है। जब उन स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य है, तो मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे अनिवार्य क्यों नहीं किया जा सकता? इस संबंध में पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा निदेशालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर राज्य के सभी सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है।

    पश्चिम बंगाल में कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई संताली भाषा में होती है। जब उन स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य है, तो मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे अनिवार्य क्यों नहीं किया जा सकता?

    आदेश में क्या
    मदरसा शिक्षा निदेशक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जारी सभी आदेशों और प्रथाओं को निरस्त करते हुए अब पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी मॉडल मदरसे (अंग्रेजी माध्यम), मान्यता प्राप्त सहायता प्राप्त मदरसे, स्वीकृत एमएसके, स्वीकृत एसएसके और मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ तत्काल प्रभाव से अनिवार्य किया जाता है।

    शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के लिए जारी की थी अधिसूचना
    इससे पहले 13 मई की शाम को पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने भी राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य करने संबंधी अधिसूचना जारी की थी। राज्य के नए और नौवें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 14 मई को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर शिक्षा विभाग की अधिसूचना साझा की थी। अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ गाना तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया है।

    मुख्यमंत्री बनते ही शुभेंदु अधिकारी ने लिया ये बड़ा फैसला

    पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से नई-नवेली भाजपा सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चिकन नेक कॉरिडोर क्षेत्र में करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को हस्तांरित करने का फैसला किया है. बता दें, चिकन नेक का आधिकारिक नाम सिलिगुड़ी कॉरिडोर है. ये भारत के प्रमुख भाग को पूर्वी राज्यों से जोड़ने वाला बहुत ही संकरा रास्ता है। 

    मंगलवार को एक रिपोर्ट सामने आई, जिसके अनुसार जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. रणनीतिक रूप से चिकन नेक भारत के लिए बहुत अहम माना जाता है. क्योंकि चिकन नेक के आस-पास बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे देशों की सीमाएं हैं. वहीं, चीनी सीमा की दूरी भी बहुत ज्यादा दूर नहीं है। 

    रक्षा योजनाओं में ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की अहम भूमिका
    एक्सपर्ट्स की मानें तो कॉरिडोर के कुछ हिस्सों की चौड़ाई सिर्फ 20 से 22 किलोमीटर तक है, जिस वजह से ये इलाका संकट की स्थिति में बहुत संवेदनशील बन जाता है. भारतीय सुरक्षा रणनीति और रक्षा योजनाओं में चिकन नेक कॉरिडोर की भूमिका बहुत अधिक है। 

    बता दें, केंद्र सरकार ने पूर्ववर्ती टीएमसी और ममता बनर्जी सरकार से अनुरोध किया था कि जमीन हस्तांतरण किया जा सके. लेकिन ये प्रक्रिया लंबे वक्त तक ठंडे बस्ते में पड़ी थी. लेकिन जैसे ही राज्य में भाजपा की सरकार आई, वैसे ही चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर काम शुरू हो गया है। 

    पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के लिए देश की जीवनरेखा है चिकन नेक
    चिकन नेक को पूर्वी आठ राज्यों के लिए देश की जीवनरेखा के समान है. सड़क, रेल, सैन्य आपूर्ति, व्यापारिक गतिविधियों और रसद संचालन के लिए यही मुख्य संपर्क मार्ग है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की भूमि उपलब्धता को राष्ट्रीय महत्व माना जाता है।  

    राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या होगा असर?
    जमीन हस्तांतरण से चिनक नेक में भारत की सामरिक क्षमता और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. इस इलाके में सैन्य ढांचा और लॉजिस्टिक नेटवर्क को विकसित किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सेना की त्वरित तैनाती और आपूर्ति व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगी। 

    केंद्र के साथ राज्य सरकार का समन्वय तेज
    बता दें, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 2026 के विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल की और भाजपा ने पहली बार प्रदेश में सरकार बनाई. पहली बार राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बना है. शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश के मुखिया की शपथ ग्रहण करते ही केंद्र सरकार के साथ राजनीतिक समन्वय तेज कर दिया है. सत्ता में आते ही शुभेंदु सरकार ने कानून व्यवस्था, प्रशासनिक फेरबदल और कथित भ्रष्टाचार की जांच तेज कर दी है। 

     

  • इटली की सड़कों पर छाई ‘मेलोडी’, PM मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां

    इटली की सड़कों पर छाई ‘मेलोडी’, PM मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के अहम कूटनीतिक दौरे के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को इटली की राजधानी रोम पहुंचे। रोम पहुंचने पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद खास अंदाज में उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने डिनर के बाद रोम के ऐतिहासिक 'कोलोसियम' का एक साथ दौरा किया है। इसके बाद, सोशल मीडिया पर एक बार फिर 'मेलोडी' (Meloni+Modi = Melodi) ट्रेंड कर रहा है।

    तस्वीरों में 'मेलोडी' का खास अंदाज
    पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन तस्वीरों को शेयर किया है। इन खास तस्वीरों में भारत-इटली की मजबूत होती दोस्ती और दोनों नेताओं के बीच की सहजता साफ देखी जा सकती है। पहली दो तस्वीरों में पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी एक बालकनी से रोम शहर के खूबसूरत नजारों को निहारते और गहरी बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी अपने चिर-परिचित नीले रंग के लिबास में हैं, जबकि मेलोनी पीच रंग के खूबसूरत और सौम्य परिधान में हैं।

    एक तस्वीर में दोनों नेता कार की पिछली सीट पर बैठे हैं और कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे हैं। यह तस्वीर दोनों के बीच की बेहतरीन व्यक्तिगत बॉन्डिंग को दर्शाती है।

    कोलोसियम का ऐतिहासिक नजारा: एक अन्य तस्वीर रात के समय की है, जहां दोनों नेता रोम की सबसे भव्य और प्राचीन इमारत 'कोलोसियम' के सामने खड़े होकर पोज दे रहे हैं।

    पीएम मोदी ने क्या कहा?
    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "रोम में उतरने के बाद, मुझे प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ रात्रिभोज पर मिलने का अवसर मिला, जिसके बाद मैंने मशहूर कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने विचार साझा किए। आज होने वाली हमारी बातचीत का मुझे बेसब्री से इंतजार है, जिसमें हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत बनाने के विषय पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे।"

    मेलोनी ने क्या कहा?
    जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोम पहुंचने पर उनका स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर पीएम मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वेलकम टू रोम, माय फ्रेंड!"

    पहले भी वायरल हुईं मोदी-मेलोनी की तस्वीरें
    यह पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले साल 2023 में दुबई में हुए COP28 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी की 'Good friends at COP28' वाली सेल्फी काफी वायरल हुई थी।

    वहीं, साल 2024 में इटली के अपुलिया में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान 'मेलोडी टीम की तरफ से हैलो' वीडियो ने भी दुनियाभर में चर्चा बटोरी थी।

    दोनों नेताओं की यह आठवीं मुलाकात
    विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, साल 2023 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच यह आठवीं मुलाकात है। मार्च 2023 में मेलोनी की भारत यात्रा और जी-20 शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी थी।

     

    पीएम मोदी और मेलोनी का संदेश
    इन पलों को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "रोम में उतरने के बाद, प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर पर मुलाकात का अवसर मिला, जिसके बाद ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। आज होने वाली हमारी वार्ता को लेकर उत्सुक हूं, जहां हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत करने के तरीकों पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे।

    वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी पीएम मोदी के साथ की तस्वीर साझा करते हुए गर्मजोशी से लिखा- रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त! इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जहां पीएम मेलोनी पीएम मोदी को रोम शहर के बारे में बता रही हैं।

    आज की द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य एजेंडा
    यह यात्रा केवल इन शानदार तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए मुकाम पर ले जाने का एक बड़ा अवसर है। ताज़ा जानकारियों के अनुसार, आज होने वाली आधिकारिक मुलाकातों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

    रणनीतिक साझेदारी (2025-2029): दोनों देश 'जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029' की समीक्षा करेंगे। इसके तहत व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया जाएगा। (आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16.77 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है)।

    IMEC पर जोर: इस द्विपक्षीय वार्ता में 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) को लेकर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है।

    FAO मुख्यालय का दौरा: पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र के 'खाद्य और कृषि संगठन' (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    राष्ट्रपति से मुलाकात: पीएम मोदी इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मुलाकात करेंगे।

    प्रवासी भारतीयों द्वारा भव्य स्वागत
    रोम पहुंचने पर पीएम मोदी का भारतीय समुदाय ने बेहद शानदार स्वागत किया। इस दौरान इतालवी कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत (राग हंसध्वनि) और कथक नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने बच्चों को ऑटोग्राफ दिए, वाराणसी के घाटों की एक पेंटिंग देखी और भारतीय मूल के लोगों से खास बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने 'सनातन धर्म संघ' की इटली में आधिकारिक मान्यता को लेकर आध्यात्मिक गुरुओं से भी मुलाकात की।

    यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के सफल दौरे के बाद, इटली में पीएम मोदी का यह स्वागत भारत की मजबूत होती वैश्विक पकड़ और इटली के साथ गहरी होती साझेदारी का एक स्पष्ट संकेत है। इन तस्वीरों ने कूटनीति के साथ-साथ दो वैश्विक नेताओं की व्यक्तिगत दोस्ती को भी बखूबी बयां किया है।

  • मोदी-मेलोनी की बढ़ती केमिस्ट्री! साथ में डिनर, कोलोसियम की सैर और मजबूत होते भारत-इटली संबंध

    मोदी-मेलोनी की बढ़ती केमिस्ट्री! साथ में डिनर, कोलोसियम की सैर और मजबूत होते भारत-इटली संबंध

     नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को इटली पहुंचे। रोम पहुंचने के बाद उन्हें PM जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। PM मोदी ने X पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं ने साथ में डिनर भी किया। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद मोदी और मेलोनी ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा भी किया।

    इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मोदी के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘वेलकम टु रोम, माय फ्रेंड।’

    PM मोदी ने कहा कि आज होने वाली औपचारिक बातचीत में भारत-इटली दोस्ती को और मजबूत करने पर चर्चा जारी रहेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोदी इटली में कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से भी मुलाकात करेंगे।

    अपनी पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को वह रोम पहुंचे, जहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. मेलोनी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "Welcome my friend ."

    दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी और इटली पीएम मेलोनी की मुलाकातें औपचारिक कूटनीतिक मुलाकातों से कहीं ज्यादा अहमीयत रखता है. पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को एक नई दिशा दी है. कभी सीमित व्यापारिक रिश्तों तक सिमटे दोनों देशों के संबंध अब रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, AI और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे बड़े रणनीतिक मुद्दों तक पहुंच चुके हैं। 

    प्रधानमंत्री मोदी रोम पहुंचते ही अपना एजेंडा भी बताया. उन्होंने एक एक्स पोस्ट में बताया, "इस दौरे में भारत और इटली के बीच सहयोग को कैसे मजबूत किया जाए, इस पर फोकस किया जाएगा, जिसमें इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर खास ध्यान दिया जाएगा। 

    मोदी-मेलोनी की पहली मुलाकात बाली में
    इस नई साझेदारी की शुरुआत नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में हुए G20 शिखर सम्मेलन से मानी जाती है. उस वक्त मेलोनी हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री बनी थीं. दोनों नेताओं की पहली मुलाकात में यह साफ हो गया था कि भारत और इटली नए दौर की शुरुआत करना चाहते हैं. इसी बैठक में ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और इटैलियन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की भारत में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी। 

    भारत-इटली में स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप
    इसके बाद मार्च 2023 में मेलोनी भारत आईं और रायसीना डायलॉग में चीफ गेस्ट बनीं. यही वह मोड़ था जहां दोनों देशों के रिश्तों को आधिकारिक तौर पर "स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप" का दर्जा मिला. इस दौरान रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इसके तहत दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, सिक्योर इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. इटली की बड़ी रक्षा कंपनियों को भारत में सैन्य उपकरणों के को-प्रोडक्शन का रास्ता भी खुला। 

    भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा इटली
    सितंबर 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के रिश्ते एक और स्तर ऊपर पहुंच गए. इटली भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर यानी IMEC का हिस्सा बना. इस कॉरिडोर का मकसद भारत को यूरोप से जोड़ने वाला नया व्यापारिक और समुद्री नेटवर्क तैयार करना है. इसी दौरान माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट भी फाइनल हुआ, जिससे भारतीय छात्रों, रिसर्चर्स और स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए इटली में अवसर बढ़े। 

    AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स पर करार
    जून 2024 में इटली में आयोजित G7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की फिर मुलाकात हुई. यहां बातचीत का फोकस भविष्य की टेक्नोलॉजी पर रहा. दोनों देशों ने AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, टेलीकॉम और क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन को लेकर सहयोग बढ़ाने का फैसला किया. साथ ही इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी राइट्स यानी पेटेंट और डिजाइन से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए। 

    जी-20 में मेलोनी-मोदी की मुलाकात
    इसके बाद नवंबर 2024 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में हुए G20 सम्मेलन में दोनों देशों ने 2025-2029 के लिए फाइव ईयर जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान लॉन्च किया. यह अब तक का सबसे बड़ा रोडमैप माना गया, जिसमें रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, शिक्षा, व्यापार और वैश्विक सहयोग समेत 10 बड़े सेक्टर शामिल किए गए। 

    नवंबर 2025 में साउथ अफ्रीका के जोहोन्सबर्ग में हुए G20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी की मुलाकात में आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद अहम समझौता हुआ. दोनों देशों ने "इंडिया-इटली जॉइंट इनीशियेटिव टू काउंटर फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म" लॉन्च किया, जिसका मकसद आतंकवादी संगठनों की फंडिंग पर लगाम लगाना था। 

    दिल्ली में हुए हाई-प्रोफाइल आतंकी हमले के बाद मेलोनी ने भारत के साथ खुलकर एकजुटता दिखाई थी. इस पहल के तहत दोनों देशों ने आतंकियों को मिलने वाली अवैध फंडिंग और क्रॉस-बॉर्डर वित्तीय नेटवर्क को रोकने, संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर निगरानी बढ़ाने और एफएटीएफ और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी तालमेल मजबूत करने पर सहमति जताई। 

    "इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर" पर करार
    अब मई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की यह रोम यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने वाली मानी जा रही है. इस दौरान "इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर" की अवधारणा को औपचारिक रूप दिया गया है. इसका मकसद हिंद महासागर से लेकर यूरोप तक समुद्री व्यापार और रणनीतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है. साथ ही AI को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ है, जिसमें इटली के "एल्गोर-एथिक्स" मॉडल और भारत की "ह्युमन सेंट्रिक एआई" सोच को साथ लाने की कोशिश की गई है। 

    विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और इटली की यह बढ़ती नजदीकी सिर्फ दो देशों के रिश्तों की कहानी नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है. एक तरफ भारत यूरोप में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है, वहीं इटली एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में देखता है। 

  • सान्या ने बदला इतिहास, 93 साल का रिकॉर्ड तोड़ भारतीय वायुसेना में हासिल की नई पहचान

    सान्या ने बदला इतिहास, 93 साल का रिकॉर्ड तोड़ भारतीय वायुसेना में हासिल की नई पहचान

    नई दिल्ली

    भारतीय वायुसेना में महिलाओं का दम लगातार बढ़ता जा रहा है. अब स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो आज तक कोई महिला अधिकारी हासिल नहीं कर सकी थी. सान्या भारतीय वायुसेना की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें सबसे प्रतिष्ठित कैट ए क्‍वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (Cat-A Qualified Flying Instructor, QFI) रेटिंग मिली है. यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं की बदलती भूमिका और बढ़ते भरोसे की बड़ी तस्वीर भी है। 

    IAF ने बताया ऐतिहासिक पल
    भारतीय वायुसेना (IAF) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए लिखा-उत्कृष्टता को नई उड़ान मिली है. स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने इतिहास रचते हुए Cat-A Qualified Flying Instructor की प्रतिष्ठित योग्यता हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है.वायुसेना ने इसे देशभर के युवा एविएटर्स के लिए प्रेरणादायक बताया.IAF ने कहा कि सान्या की यह उपलब्धि समर्पण, कड़ी मेहनत और उत्कृष्टता हासिल करने की निरंतर कोशिश की मिसाल है। 

    क्या होता है कैट ए क्‍वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर?
    भारतीय वायुसेना अपने पायलट इंस्ट्रक्टर्स की क्षमता को अलग-अलग कैटेगरी में बांटती है. इसमें Cat-C सबसे शुरुआती स्तर होता है जहां प्रशिक्षु या प्रोबेशनरी इंस्ट्रक्टर्स होते हैं. इसके बाद Cat-B आता है, जिसमें सामान्य फ्लाइंग ट्रेनिंग देने वाले इंस्ट्रक्टर्स शामिल होते हैं, लेकिन Cat-A इस पूरी प्रणाली का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है. इस रेटिंग को हासिल करने वाले पायलट सिर्फ नए पायलटों को ही नहीं, बल्कि दूसरे फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को भी ट्रेन कर सकते हैं. उन्हें एडवांस फ्लाइंग स्किल्स को परखने और एयर कॉम्बैट के लिए पायलट तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाती है। 

    नई पीढ़ी के फाइटर पायलट तैयार करेंगे ऐसे इंस्ट्रक्टर
    Cat-A QFI की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. ऐसे इंस्ट्रक्टर्स युवा पायलटों को ट्रेन करते हैं, उनकी गलतियों को सुधारते हैं.उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें जटिल एयर कॉम्बैट स्किल्स के लिए तैयार करते हैं.इस भूमिका के लिए सिर्फ बेहतरीन उड़ान कौशल ही नहीं, बल्कि धैर्य, तकनीकी समझ, स्पष्ट निर्णय क्षमता और मानसिक संतुलन की भी जरूरत होती है. यही वजह है कि Cat-A रेटिंग को IAF में बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। 

    2015 में हुई थी कमीशन
    सार्वजनिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक स्क्वाड्रन लीडर सान्या को 20 जून 2015 को 42 SSC (W) FP Course के जरिए भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन मिला था.उन्हें 2017 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट और फिर 2021 में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर प्रमोट किया गया. पिछले 10 सालों में उन्होंने खुद को एक शानदार ट्रांसपोर्ट पायलट के रूप में साबित किया है। 

    महिलाओं के लिए बड़ा माइलस्टोन
    IAF के 93 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी महिला अधिकारी ने Cat-A QFI रेटिंग हासिल की है. इसे भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का बड़ा संकेत माना जा रहा है। 

    आज महिला अधिकारी फाइटर जेट उड़ा रही हैं. हेलिकॉप्टर यूनिट्स संभाल रही हैं. फ्लाइट टेस्टिंग कर रही हैं और कमांड रोल्स में भी दिखाई दे रही हैं. अब फ्लाइंग इंस्ट्रक्शन जैसे सबसे कठिन क्षेत्रों में भी महिलाएं अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। 

    शिवांगी सिंह के बाद एक और बड़ी उपलब्धि
    यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब कुछ महीने पहले ही स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनी थीं जिन्होंने QFI बैज हासिल किया था. उन्होंने तमिलनाडु के तांबरम स्थित Flying Instructors’ School में छह महीने का कठिन कोर्स पूरा किया था हालांकि इससे पहले महिला ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर पायलटों को QFI बैज मिल चुका था लेकिन Cat-A रेटिंग हासिल करने वाली सान्या पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। 

    बदल रही है भारतीय सेना की तस्वीर
    1990 के दशक में भारतीय सेना ने महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए शामिल करना शुरू किया था. तब महिलाओं की भूमिका सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.आज महिलाएं फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं.युद्धपोतों पर तैनात हैं.फ्रंटलाइन यूनिट्स संभाल रही हैं. स्थायी कमीशन पा रही हैं और NDA जैसी प्रतिष्ठित सैन्य अकादमियों में ट्रेनिंग भी ले रही हैं हालांकि भारतीय सेना में अब भी टैंक और इन्फैंट्री की कुछ कॉम्बैट पोजिशन महिलाओं के लिए खुली नहीं हैं, लेकिन लगातार बदलाव की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। 

    देशभर की लड़कियों के लिए बनीं प्रेरणा
    स्क्वाड्रन लीडर सान्या की यह उपलब्धि सिर्फ एक सैन्य रिकॉर्ड नहीं है. यह उन लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखती हैं और कठिन रास्तों पर आगे बढ़ना चाहती हैं.भारतीय वायुसेना ने भी कहा कि सान्या की सफलता आने वाली पीढ़ियों के एविएटर्स के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। 

  • आरजी कर केस में नया मोड़, मनी लॉन्डिंग जांच के लिए पूर्व प्रिंसिपल पर कार्रवाई को मंजूरी

    आरजी कर केस में नया मोड़, मनी लॉन्डिंग जांच के लिए पूर्व प्रिंसिपल पर कार्रवाई को मंजूरी

     कोलकाता

    बंगाल सरकार ने सोमवार को वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित जांच में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दे दी। 

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई क्रूर हत्या और बलात्कार के मामले में, ईडी को तत्कालीन आरजीकर अधीक्षक संदीप घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति मिल गई है। 

    शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस मामले की जांच प्रक्रिया को लंबे समय तक जबरन और अनैतिक रूप से रोके रखा। 

    उन्होंने आगे कहा कि, हमारा मानना ​​है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता. मैं चाहता हूं कि असली दोषियों की जल्द से जल्द पहचान हो, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले, बंगाल की जनता को न्याय मिले। 

    आरजी कर मामला क्या है?
    कोलकाता के राधागोविंद कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 9 अगस्त 2024 की रात 31 साल की महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था. ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल से बरामद हुआ था. इसके बाद इस मामले में कोलकाता पुलिस ने मुख्य आरोपी सिविल वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया।

    अस्पताल परिसर में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया. घटना के विरोध में पश्चिम बंगाल समेत देशभर में डॉक्टरों ने प्रदर्शन और हड़ताल देखने को मिली. कोलकाता के कई प्रमुख अस्पतालों में डॉक्टर करीब 42 दिनों तक काम पर नहीं लौटे। 

    मामले की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. जांच के बाद सीबीआई ने गैंगरेप के आरोपों से इनकार किया. मामले में संजय रॉय को दोषी पाया गया. इसके बाद जनवरी 2025 में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। 

    केंद्रीय एजेंसियों को सौंपे 7 राष्ट्रीय राजमार्ग
    इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में 7 राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने की मंजूरी दे दी है, जिससे करीब एक साल से लंबित प्रक्रिया पूरी हो गई। 

    ये हाईवे पहले राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन थे, लेकिन अब इन्हें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) संभालेंगे. करीब एक साल तक प्रस्ताव लंबित रहने की वजह से इन मार्गों पर विकास और निर्माण कार्य पूरी तरह रुके हुए थे।