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  • सिरिंज-ग्लव्स से लेकर मेडिकल उपकरणों तक, कीमतों में 20 गुना अंतर पर केंद्र ने उठाया कदम

    सिरिंज-ग्लव्स से लेकर मेडिकल उपकरणों तक, कीमतों में 20 गुना अंतर पर केंद्र ने उठाया कदम

    नई दिल्ली
     अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की मममानी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। सरकार ने मेडिकल उपकरणों की कीमतों को तर्कसंगत बनाने के मुद्दे पर मेडिकल सेक्टर और प्राइवेट अस्पतालों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

    गौरतलब है कि हाल ही में महाराष्ट्र ड्रग एंड फूड एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की जांच में सामने आया कि प्राइवेट अस्पताल लोगों से मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमत वसूलते हैं।

    एफडीए आयुक्त ने अस्पताल के मेडिकल उपकरणों की कीमतों और एमआरपी के बीच भारी अंतर को लेकर सवाल उठाया था। इससे पहले अगस्त में, स्वास्थ्य संबंधी संसदीय समिति ने भी प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए ली जानी वाली की रकम की सीमा तय करने की सिफारिश की थी।

    सूत्रों ने बताया, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव के साथ बैठक के बाद निर्देश दिया है कि मेडिकल सेक्टर और अस्पतालों के साथ बैठकें और संवाद किया जाए।

    हाल ही में एएनआई को दिए साक्षात्कार में दवाओं की कीमतों के नियमन के बारे में मुल्तानी फार्मास्युटिकल्स के सीईओ डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए है।

    केंद्र सरकार ने ड्रग प्राइसेस कंट्रोल ऑर्डर के जरिये इस पर काम करना शुरू कर दिया है ताकि दवाओं को बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा सके।

    एम्स कल्याणी के अध्यक्ष डॉ. वाईके. गुप्ता ने कहा, नेशनल लिस्ट आफ एसेंशियल मेडिसिंस (एलएलईएम) में शामिल दवाएं शेड्यूल्ड दवाओं की श्रेणी में आ जाती हैं और उनकी कीमतें नियंत्रित की जाती हैं।

    हालांकि, कुछ नॉन-शेड्यूल्ड दवाएं भी होती हैं जिनकी कीमतें फार्मास्युटिकल कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार तय कर सकती हैं। इसी तरह, कई मेडिकल इस्तेमाल की वस्तुओं और उपकरणों, जैसे सिरिंज और ग्लव्स, की कीमतों पर भी कोई असरदार नियंत्रण नहीं है।

    नतीजतन, उत्पादन लागत, अस्पताल की लागत और मरीज से ली जाने वाली कीमत में बहुत ज़्यादा अंतर होता है।

    उन्होंने कहा, हमारा मकसद गुणवत्ता से समझौता किए बिना मरीजों को शोषण से बचाना है। अस्पतालों का वाजिब मुनाफा कमाना तो ठीक है, लेकिन बेवजह ज़्यादा मुनाफा कमाना गलत है।

    मरीज से जो भी कीमत मांगी जाती है, उसे चुकाने के लिए मजबूर होते हैं। पता चला है कि एक जैसी वस्तुओं की कीमत में बाज़ार की एमआरपी के मुकाबले 10 से 20 गुना तक का फर्क होता है। ऐसी हरकतों पर असरदार तरीके से रोक लगनी चाहिए।

     

  • 2025 रहा नदियों के लिए सबसे सूखा साल, 36% नदी क्षेत्रों में सामान्य से कम रहा जल प्रवाह

    2025 रहा नदियों के लिए सबसे सूखा साल, 36% नदी क्षेत्रों में सामान्य से कम रहा जल प्रवाह

    नई दिल्ली
     दुनियाभर में भूजल का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर 34 प्रतिशत भूजल निगरानी केंद्रों पर जल स्तर सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत था।

    इस प्रकार महज एक साल के भीतर इस संकट में 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां भूजल स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच चुका है।

    तीन साल में तेजी से बिगड़े हालात
    वैश्विक स्तर पर पिछले तीन वर्षों के दौरान भूजल की स्थिति तेजी से खराब हुई है। वर्तमान में दुनिया के 65 प्रतिशत भूजल निगरानी केंद्रों पर जल स्तर सामान्य सीमा से बाहर चला गया है।

    वर्ष 2022 से 2025 के बीच भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप, मेक्सिको, चिली, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भूजल में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

    ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभाव से पिछले तीन वर्षों में दुनिया भर के ग्लेशियरों से 1400 गीगाटन बर्फ पिघलकर नष्ट हो चुकी है। पिछले पांच वर्षों में पानी की किल्लत और उससे जुड़ी समस्याओं के कारण हुई कुल मौतों में से 80 प्रतिशत मौतें एशिया और अफ्रीका में दर्ज की गईं।

    वहीं वर्ष 2021 से 2025 के चार वर्षों के दौरान गंगा और सिंधु नदी के ऊपरी बेसिन क्षेत्रों में जमीन के नीचे जमा पानी में लगातार कमी देखी गई है।

    नदियों के लिए सबसे सूखा वर्ष रहा 2025
    वर्ष 2025 नदियों के जल प्रवाह के लिहाज से भी अत्यंत प्रतिकूल साबित हुआ है। इस दौरान दुनिया के 36 प्रतिशत नदी क्षेत्रों में पानी का बहाव सामान्य से कम रहा।

    आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1991 से लेकर 2025 तक की समयावधि में यह नदियों के लिए अब तक का सबसे सूखा वर्ष दर्ज किया गया।

  • भारत में बढ़ रही अत्यधिक गर्मी और बारिश, वैज्ञानिक ने मौसम पूर्वानुमान में AI के इस्तेमाल पर दिया जोर

    भारत में बढ़ रही अत्यधिक गर्मी और बारिश, वैज्ञानिक ने मौसम पूर्वानुमान में AI के इस्तेमाल पर दिया जोर

    नई दिल्ली
    जलवायु वैज्ञानिक टापियो श्नाइडर ने कहा है कि शुरुआती चेतावनी प्रणालियों का दायरा केवल बारिश की घटनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें नेपाल में अचानक आई बाढ़ जैसी आपदाओं की वजहों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ मिनट पहले भी चेतावनी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की जान बचा सकती है।

    अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) में पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग के प्रोफेसर श्नाइडर छात्रों को संबोधित करने और एक परिचर्चा में हिस्सा लेने के लिए अशोक विश्वविद्यालय पहुंचे थे।

    नेपाल बाढ़ में 1200 से अधिक लोगों की मौत
    नेपाल में 26 अगस्त को ऊंचाई वाले क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद आई भीषण बाढ़ के कारण मलबा तिब्बत से बहकर मध्य नेपाल तक पहुंचा, जिससे 1,200 से अधिक लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग अब भी लापता हैं।

    श्नाइडर ने कहा, 'शुरुआती चेतावनी प्रणालियां महत्वपूर्ण हैं। हमें शायद इनका दायरा बारिश के कारण होने वाली घटनाओं से आगे बढ़ाकर ऐसी घटनाओं तक भी करना चाहिए, ताकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को कम से कम कुछ मिनट पहले चेतावनी मिल सके और इस तरह कुछ लोगों की जान बचाई जा सके।'

    उन्होंने कहा कि जलवायु गर्म होने के साथ बर्फ पिघल रही है और ऐसी घटनाएं और बढ़ने की आशंका है 'हालांकि हर घटना के तात्कालिक कारण अलग-अलग होंगे।'

    वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि
    जलवायु वैज्ञानिक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है और यह 'अपरिहार्य' है कि दुनिया को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि वाले एक दशक का सामना करना पड़ेगा।

    श्नाइडर 'क्लाइमेट मॉडलिंग अलायंस' का भी नेतृत्व करते हैं। यह कैलटेक, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा अप्लाइड गणितज्ञों का गठबंधन है, जो पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का एक नया मॉडल विकसित कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की टीम 'आधुनिक कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर का अधिकतम उपयोग करने और उपलब्ध आंकड़ों का ज्यादा व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करने' की दिशा में काम कर रही है।

    भारत में वैश्विक तापमान वृद्धि का दिख रहा प्रभाव
    श्नाइडर ने कहा कि वायु गुणवत्ता में सुधार के प्रयास तेज होने के बावजूद भारत में वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभाव और अधिक देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में पहले ही अत्यधिक गर्म दिनों और अत्यधिक बारिश की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।

    भारत में बारिश का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल होने के मुद्दे पर उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जिन्हें अन्य बड़े पैमाने के मॉडल की तुलना में चलाना काफी सस्ता हो। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के समूह ऐसे मॉडल विकसित कर सकते हैं और उन्हें भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के साथ इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

  • तेजस में उड़ान भरकर गदगद हुए जापानी एयर चीफ, भारत-जापान दोस्ती को बताया भरोसे का शक्तिशाली प्रतीक

    तेजस में उड़ान भरकर गदगद हुए जापानी एयर चीफ, भारत-जापान दोस्ती को बताया भरोसे का शक्तिशाली प्रतीक

    नई दिल्ली
     भारत-जापान द्विपक्षीय वायु रक्षा अभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' के तहत जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरी। इस बीच जापान के एयर चीफ ने इंडियन आर्मी के चीफ का आभार व्यक्त किया है।

    मेरे लिए सम्मान की बात
    जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने कहा कि एयर चीफ मार्शल सिंह, आज आपके साथ होना मेरे लिए सम्मान की बात है, और मैं आपके गर्मजोशी भरे स्वागत और मेहमाननवाज़ी के लिए अपना आभार व्यक्त करना चाहता हूं। तेजस में उड़ान भरने के इस अमूल्य अवसर के लिए मैं बहुत आभारी हूं।

    तकनीकी नवाचार का प्रतीक
    उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी रक्षा क्षमताओं से बना विमान होने के नाते, तेजस भारत के तकनीकी नवाचार का प्रतीक है और 'मेक इन इंडिया' पहल को साकार करता है। उड़ान के दौरान, मैंने उन कई लोगों के प्रयासों के बारे में सोचा सेना और उद्योग दोनों में जिन्होंने इसके विकास में योगदान दिया।

    शक्तिशाली प्रतीक के रूप में भी याद रखूंगा
    उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव के माध्यम से, मुझे भारतीय वायु सेना में उपलब्ध उत्कृष्ट प्रशिक्षण वातावरण और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (कोकू जीताई) के लिए इस अभ्यास से मिलने वाले जबरदस्त लाभ का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ। मैं इसे न केवल एक वास्तव में अमूल्य अनुभव के रूप में याद रखूंगा, बल्कि हमारे दोनों वायु सेनाओं के बीच कई वर्षों से बने भरोसे, विश्वास और दोस्ती के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में भी याद रखूंगा।

    दूसरा द्विपक्षीय लड़ाकू अभ्यास
    उन्होंने आगे कहा कि 'वीर गार्जियन' हमारी सेनाओं के बीच दूसरा द्विपक्षीय लड़ाकू अभ्यास है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह भारत में कोकू जीताई लड़ाकू विमानों की पहली तैनाती है। कई वर्षों से, हमने रक्षा सहयोग और अभ्यासों का लगातार विस्तार किया है। 2018 में यहां आयोजित हमारे पहले द्विपक्षीय अभ्यास 'शिन्यू मैत्री' के बाद से, भारत में हमारे लड़ाकू विमानों की तैनाती एक लंबे समय से चली आ रही इच्छा रही है।

  • आज फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, राजस्थान-MP समेत कई राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट; पहाड़ों में लैंडस्लाइड का खतरा

    आज फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, राजस्थान-MP समेत कई राज्यों में बारिश-आंधी का अलर्ट; पहाड़ों में लैंडस्लाइड का खतरा

     नई दिल्ली
    मानसून के जाते-जाते मौसम विभाग ने एक बार फिर से मुश्किल बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज  यानी 21 सितंबर को यूपी, दिल्ली समेत 13 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। वहीं, पहाड़ी राज्यों के कुछ इलाकों में लैंडस्लाइड की चेतावनी दी गई है। वहीं, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। किसानों और मछुआरों को अलर्ट रहने की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा इस तेज आंधी के चलते कुछ इलाकों में बड़े-बड़े वृक्ष धाराशायी हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ राज्यों में किसानों के फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

    इस बीच बंगाल की खाड़ी से चलने वाली तूफानी हवाएं पूर्वी भारत के राज्यों में लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। वहीं, राजस्थान के लोगों के लिए आज विशेष अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के इलाकों में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेस मौजूद है। इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे पूर्वी राजस्थान के ऊपर ऊपरी हवाओं में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। तो चलिए आपलोगों को बताते हैं देश के अन्य राज्यों में आज  यानी 21 सितंबर को मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम जिलावार भी मौसम का हाल बताने जा रहे हैं…

    देश के 13 राज्यों में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी
    मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज  यानी 21 सितंबर को देश के 13 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक की तेज आंधी चलने का अलर्ट है। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों की यात्रा से पहले मौसम विभाग का अपडेट जरूर पढ़ लीजिए नहीं तो परेशानी में फंस सकते हैं।

    दिल्ली में आज  मौसम कैसा रहेगा
    दिल्ली(21 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक दिल्ली में आज  यानी 21 सितंबर को दिल्ली में हल्की बारिश और मध्यम गति की हवा की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, दिल्ली में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस जाएगा।

    यूपी में आज  मौसम कैसा रहेगा
    यूपी(21 सितंबर-हल्की बारिश का अलर्ट): गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, मथुरा, मोरादाबाद, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, मिर्जापुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, जौनपुर, सोनभद्र, कुशीनगर, महाराजगंज, प्रयागराज और सुल्तानपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, लखनऊ में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    बिहार में आज  मौसम कैसा रहेगा
    बिहार (21 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, गया, जहानाबाद, भोजपुर, पटना, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, भागलपुर, किशनगंज, मुंगेर और खगड़िया में बारिश और आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। वहीं, पटना में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    झारखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा
    झारखंड (21-22 सितंबर-तेज बारिश-आंधी का अलर्ट): रांची, रामगढ़, खूंटी, बोकारो, चतरा, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू, दुमका, पलामू, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह और गुमला में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    उत्तराखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा
    उत्तराखंड (21 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, ऋषिकेश, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, हरिद्वार और टिहरी गढ़वाल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है। देहरादून में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    हिमाचल में आज  मौसम कैसा रहेगा
    हिमाचल (21 सितंबर-बारिश-तूफान का अलर्ट): किन्नौर, मंडी, ऊना, चंबा, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कांगड़ा में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, मनाली में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    जम्मू-कश्मीर में आज  मौसम कैसा रहेगा
    जम्मू-कश्मीर (21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): पुंछ, बारामूला, किश्तवाड़, रियासी, गांदरबल, उधमपुर, रामबन, शोपियां, बांदीपोरा और जम्मू में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, श्रीनगर में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमा 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    पश्चिम बंगाल में आज  का मौसम कैसा रहेगा
    पश्चिम बंगाल(21-22 सितंबर-बारिश-आंधी की संभावना): हावड़ा, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, अलीपुर द्वार, दार्जिलिंग, कूचबिहार, दुर्गापुर, बीरभूम और कोलकाता में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का अलर्ट है। वहीं, कोलकाता में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक पहुंचेगा और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    पंजाब में आज  मौसम कैसा रहेगा
    पंजाब (21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): फिरोजपुर, संगरूर, होशियारपुर, कपूरथला, चंडीगढ़, संगरूर, लुधियाना, अमृतसर, गुरदासपुर, बठिंडा, बरनाला और फरीदकोट में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे।

    राजस्थान में आज  मौसम कैसा रहेगा
    राजस्थान (21 सितंबर-भारी बारिश की संभावना): जयपुर, उदयपुर, चुरू, बारां, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, दौसा, चुरू, भरतपुर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जैसलमेर और अलवर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, जयपुर में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस जाएगा।

    मध्य प्रदेश में आज  मौसम कैसा रहेगा
    मध्य प्रदेश (21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): अनूपपुर, दमोह, बालाघाट, विदिशा, होशंगाबाद, कटनी, बेतुल, रतलाम, मांडला, खंडवा, नरसिंहपुर, देवास, हर्दा और इंदौर में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, भोपाल में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    छत्तीसगढ़ में आज  मौसम कैसा रहेगा
    छत्तीसगढ़(21 सितंबर- बारिश-आंधी का अलर्ट): रायपुर, मनेंद्रगढ़, सूरजपुर, बिलासपुर, धमतरी, जांजगीर, कोरबा और महासमुंद में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चल सकते हैं।

    ओडिशा में आज  मौसम कैसा रहेगा
    ओडिशा(21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): पुरी, क्योंझर, बलांगिर, भुवनेश्वर, सुंदरगढ़, भद्रक, मयूरभंज, बालासोर और जाजपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है।

  • तिब्बत से दलाई लामा तक, क्यों बिगड़े भारत-चीन के रिश्ते? पूर्व IFS ने बताई पूरी कहानी

    तिब्बत से दलाई लामा तक, क्यों बिगड़े भारत-चीन के रिश्ते? पूर्व IFS ने बताई पूरी कहानी

    नई दिल्ली
     एक दौर था जब 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' के नारे दिए जाते थे। आज के समय में परिस्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। दोनों ही देशों के संबंध काफी खराब हो चुके हैं। आखिर ऐसी क्या वजह रही जिसके कारण दोनों देशों के रिश्ते ऐसे हो गए कि सात वर्षों के बाद चीन के राष्ट्रपति अपने पड़ोसी देश की यात्रा पर आए। ऐसा कहा जाता है कि दोनों देशों के संबंधों में खटास की शुरुआत दलाई लामा की वजह से होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दलाई लामा (Dalai Lama) ने दुनिभर के मंचों से तिब्बत की आवाज बुलंद की है। यह बात चीन को रास नहीं आती है।

    यूट्यूबर शुभांकर मिश्रा के साथ एक पॉडकास्ट के दौरान भारत के पूर्व डिप्लोमैट रिटायर आईएफएस ऑफिसर अशोक सज्जनहार ने इस मुद्दे को विस्तार से समझाया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या तिब्बत के कारण से भारत और चीन के संबंध बिगड़े हैं तो उन्होंने विस्तार से जवाब दिया है। उन्होंने कहा, भारत-चीन के रिश्ते पहले ऐसे नहीं थे। तिब्बत कभी भी चीन का हिस्सा नहीं था। 1954 में एक समझौते के तहत चीन ने इसे हथिया लिया। आज भी वह अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से को तिब्बत का बताकर उसपर अपना अधिकार जमाने की कोशिश करता है।

    इसके पीछे के कारणों के समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब चीन की आर्थिक स्थिति मजबूत होती जाती है, तब-तब वह अपनी विस्तारवाद की नीति को बढ़ावा देता है। आज के समय में चीन की जीडीपी भारत की तुलना में पांच गुना अधिक है।

    असुरक्षित महसूस करता है चीन
    अशोक सज्जनहार कहते हैं कि- दोनों देशों के बीच तिब्बत एक मसला है। भारत ने दलाई लामा को पनाह दी हुई है। चीन दलाई लामा को अलगाववादी नेता मानता है। चीन का मानना है कि दलाई लामा तिब्बत को चीन से अलग करना चाहते हैं। जबकि दलाई लामा ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। दलाई लामा बस चाहते हैं कि उनकी सभ्यता, संस्कृति और भाषा को संरक्षित किया जाए जो कि ऐसा हो नहीं हो रहा है। चीन तिब्बत की पहचान को ही खत्म करना चाहता है चीन। दलाई लामा इसका विरोध कर रहे हैं। चीन खुद को लेकर बहुत असुरक्षित महसूस करता है। इसलिए वह विस्तारवाद की नीति अपनाए हुए है।

    जिनपिंग और मोदी में क्या हुई बात?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि यह समय की मांग थी और तीनों ही देशों को इसकी जरूरत थी। जब उनसे पूछा गया कि जब बड़े कार्यक्रमों में दुनिया के दिग्गज नेताओं की मुलाकात होती है तो कैसा माहौल होता है। उन्होंने समझाते हुए कहा- जब कार्यक्रम की शुरुआत होती है तो होस्ट ओपनिग स्टेटमेंट देता है। इसके बाद आगंतुकों को बुलाया जाता है। मुद्दों पर निर्भर करता है कि आखिर माहौल कैसा होता है। सामान्य रूप से तो दोनों देशों के मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर आपसी सहमति बन जाती है। अगर उनसे कुछ मुद्दों का समाधान नहीं हो पाता है तो दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष उसपर बात करते हैं और समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। उसमें सियासी पहलुओं पर भी ध्यान देना पड़ता है

    उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर ट्रंप जैसे नेताओं के साथ बैठक होती हैं तो उस दौरान कुछ भी हो सकता है। सामान्यत: बैठक काफी शांति माहौल में होती है। मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाती है।

    डिनर में क्यों नहीं आए जिनपिंग?
    शी जिनपिंग की यात्रा पर उन्होंने कहा कि डिनर में नहीं आना सामान्य बात है। वह थके हुए थे। वह उसी दिन आए और सीधे ही भारत मंडपम गए। उन्हें आराम का मौका नहीं मिला। दिनभर मीटिंग चलती रही। मैसेजिंग देने की बात होती तो चीन की तरफ से कुछ न कुछ कहा जाता। अगर ऐसा होता तो वह भारत की यात्रा पर ही नहीं आते।

  • फरक्का जल संधि पर बिहार का विरोध तेज, गाद और बाढ़ के मुद्दे पर नई व्यवस्था की मांग

    फरक्का जल संधि पर बिहार का विरोध तेज, गाद और बाढ़ के मुद्दे पर नई व्यवस्था की मांग

    नई दिल्ली
    पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश को भी जल का मुद्दा भारी पड़ सकता है। इस साल के आखिर में पूरी हो रही फरक्का जल संधि को भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ा सकता है। इससे पड़ोसी को दिक्कत हो सकती हैं। दरअसल, भारत की नीति पड़ोसी देशों के साथ समन्वय की रही है, लेकिन कई देशों की राजनीति ने अक्सर भारत के लिए दिक्कतें खड़ी की हैं। इनमें बांग्लादेश भी शामिल है, जिसने कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति पैदा की है।

    तड़प रहा है पाकिस्तान
    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया था। इसके बाद से पाक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुहार लगा रहा है। वहीं, अब बांग्लादेश का भारत के प्रति रुख रक्षात्मकहै। इसकी वजह फरक्का जल संधि है। गंगा पर भारत, बांग्लादेश के बीच यह संधि बेहद खास है। संधि पर 12 दिसंबर, 1996 को हस्ताक्षर हुए थे, जो एक जनवरी से 31 मई के दौरान फरक्का बैराज से गंगाजल का वितरण तय करती है। यह संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। अब भारत पर निर्भर है कि वह इसे कैसे आगे बढ़ाएगा, क्योंकि बिहार में इस संधि का विरोध हो रहा है।

    बिहार बाढ़ और सूखा दोनों झेल रहा
    बिहार सरकार और भाजपा की सहयोगी जेडीयू का तर्क है कि फरक्का बैराज की वजह से गंगा में गाद जमा हो गई है, जिससे नदी का तल ऊंचा हो गया है। इससे मानसून में बिहार में बाढ़ का खतरा रहता है। गर्मियों में जलस्तर घटने से जल की कमी का सामना करना पड़ता है। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का कहना है कि संधि खत्म होने के बाद बिहार सहित गंगा बेसिन के राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल की जरूरतों का आकलन कर नई व्यवस्था बनाई जाए। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा उठा था। तब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि सरकार बिहार की जरूरतों-चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सही फैसला लेगी।

    जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कई वर्षों से गाद प्रबंधन, फरक्का बराज, गंगा की अविरलता और बिहार के जल अधिकारों का मुद्दा उठाते रहे हैं। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की ओर से हाल में राज्यसभा में फरक्का जल संधि के नवीनीकरण के विरोध में दिए गए बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार गंगा में गाद के जमाव को बिहार में बाढ़ की गंभीर समस्या के प्रमुख कारणों में एक मानते रहे हैं। गाद के कारण नदी की जलधारण क्षमता और प्रवाह की गहराई घटती है, जिससे अधिक पानी आने पर नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि श्री कुमार ने अगस्त 2016 में भी स्पष्ट किया था कि गाद प्रबंधन की समस्या का समाधान किए बिना नमामि गंगे जैसी योजनाओं का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।

  • जलवायु परिवर्तन से मौलिक अधिकार प्रभावित, CJI सूर्यकांत ने पर्यावरण न्याय पर जोर दिया

    जलवायु परिवर्तन से मौलिक अधिकार प्रभावित, CJI सूर्यकांत ने पर्यावरण न्याय पर जोर दिया

    नई दिल्ली
    पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका का जिक्र करते हुए CJI सूर्यकांत ने शनिवार को शीर्ष अदालत को पर्यावरण न्याय का ‘बरगद का पेड़’ बताया। उन्होंने कहा कि संरक्षण और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ( NGT ) की ओर से आयोजित ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए CJI ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और न्यायपालिका की भूमिका पर विस्तार से बात की।

    CJI सूर्य कांत ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए संविधान में प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन संविधान के शब्द केवल बीज की तरह हैं। इन्हें अंकुरित होने और जीवन पाने के लिए न्यायिक समझ के पोषण की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी भूमिका को निभाया है। उनके मुताबिक, शीर्ष अदालत पर्यावरण न्याय के ‘बरगद के पेड़’ की तरह मजबूती से खड़ी रही है, जिसकी जड़ें भारत के सभ्यतागत मूल्यों में गहरी हैं और जिसकी शाखाएं आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करती हैं।

    ‘संरक्षण के बिना प्रगति मृगतृष्णा’
    CJI ने कहा कि दशकों से सुप्रीम कोर्ट इस विचार का समर्थन करता रहा है कि संरक्षण के बिना प्रगति एक ऐसी मृगतृष्णा है, जो पारिस्थितिक विनाश के रेगिस्तान में गायब हो जाती है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसलों में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रकृति की रक्षा करना केवल परोपकार का कार्य नहीं, बल्कि आत्म-संरक्षण है। यह जीवन की निरंतरता में किया जाने वाला निवेश है।

    अनुच्छेद 21 के तहत प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार
    सुप्रीम कोर्ट के सक्रिय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के अधिकार को अनुच्छेद 21 में सीधे शामिल करके इसे मौलिक अधिकार बनाया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े न्यायिक दृष्टिकोण का यही क्रम आज तक आगे बढ़ा है और हाल में सुप्रीम कोर्ट ने ‘पारिस्थितिकी-केंद्रित आनुपातिकता’ की अवधारणा को स्पष्ट किया है।

    विकास की अनुमति, लेकिन शर्तों और जवाबदेही के साथ
    CJI ने कहा कि ‘पारिस्थितिकी-केंद्रित आनुपातिकता’ का अर्थ यह है कि पर्यावरण संरक्षण मजबूत होना चाहिए, लेकिन इतना विवेकपूर्ण भी होना चाहिए कि वह दुनिया के मौजूदा स्वरूप के साथ तालमेल बैठा सके। उन्होंने कहा कि इस अवधारणा के तहत विकास की अनुमति देने का व्यावहारिक तरीका यह है कि उसके साथ लागू करने योग्य शर्तें, विशेषज्ञों की निगरानी, बहाली, क्षतिपूरक वनीकरण और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

    जलवायु परिवर्तन से मौलिक अधिकार भी प्रभावित
    CJI सूर्यकांत ने कहा कि हालिया भारतीय जलवायु न्यायशास्त्र ने इस मुद्दे को संवैधानिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायशास्त्र यह मानता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव समानता, आजीविका और स्वास्थ्य जैसे मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही यह उन आवश्यक परिस्थितियों को भी प्रभावित कर सकता है, जो इन अधिकारों का सार्थक रूप से आनंद लेने के लिए जरूरी हैं।

     

  • मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल में बड़ा बदलाव, पहले B28 फिर 350 kmph वाली स्वदेशी B35 ट्रेनें

    मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल में बड़ा बदलाव, पहले B28 फिर 350 kmph वाली स्वदेशी B35 ट्रेनें

    नई दिल्ली
     भारत 2030 तक 350 किमी/घंटा (B35) की डिजाइन स्पीड वाली स्वदेशी हाई-स्पीड या बुलेट ट्रेन बनाएगा। ये ट्रेनें जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज की ट्रेनों जैसी होंगी, जिनका प्रोडक्शन भी उसी साल शुरू होना है। यह प्रस्ताव मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी देने के लिए था।

    रेलवे मंत्रालय के कैबिनेट ने प्रोजेक्ट की बदली हुई लागत को मंजूरी दे दी है और ये लागत 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह 2015 में तैयार किए गए शुरुआती अनुमान से लगभग दोगुना है। बढ़ी हुई लागत में से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च बजट से पूरा किया जाएगा।

    ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू
    कैबिनेट को बताया है कि उसने B35 ट्रेनें बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया जब जापान ने दिसंबर 2024 में बताया कि मौजूदा E5 सीरीज की ट्रेनों का प्रोडक्शन धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है।

    इसमें बताया गया है कि जापान ने संकेत दिया है कि E10 ट्रेनों का प्रोडक्शन 2030 में शुरू होगा और वे 2034 तक ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि E10 ट्रेनों के उपलब्ध होने पर उन्हें चलाने पर विचार किया जाएगा।

    भारत खुद डेवलप करेगा अपना सिस्टम
    मंत्रालय ने कहा है कि देश में बनी B28 हाई-स्पीड ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी गई है और भारत अपना खुद का भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) भी विकसित करेगा। यह कदम चीन के अपने CTCS सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम जैसा ही है, जो पारंपरिक और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पर स्पीड, ट्रेनों के बीच की दूरी और सुरक्षा को मैनेज करता है।

    लागत में बढ़ोतरी की वजह क्या है?
    मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट की लागत में पहले के 1.1 लाख करोड़ रुपये से जो भारी बढ़ोतरी हुई है, उसकी मुख्य वजहें-
        जमीन अधिग्रहण की लागत का तीन गुना से ज्यादा बढ़कर लगभग 19,700 करोड़ रुपये हो जाना।
        इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत में लगभग 50% की बढ़ोतरी के साथ यह 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाना।
        2015 के अनुमान की तुलना में ट्रेनों और सिग्नलिंग सिस्टम पर होने वाले खर्च में लगभग 100% की बढ़ोतरी।

    शुरुआत में चलेंगी बी28 ट्रेनें
    भविष्य में आने वाली जापानी ट्रेनों को छोड़कर, प्रोजेक्ट की मौजूदा लागत लगभग 399 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है। शुरुआत में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर B28 ट्रेनें चलेंगी जिनकी डिजाइन स्पीड 280 kmph होगी, जबकि उनकी ज्यादा से ज्यादा ऑपरेटिंग स्पीड 249 kmph होगी।

    BEML को 32 B28 ट्रेनें बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। उम्मीद है कि 2027 की पहली तिमाही तक ट्रायल रन के लिए दो प्रोटोटाइप ट्रेनें तैयार हो जाएंगी। BEML ने शुक्रवार को BSE को बताया कि उसे 15 और B28 ट्रेनें बनाने के लिए 5,400 करोड़ रुपये का एक अलग कॉन्ट्रैक्ट मिला है। पूरे 508 किमी. लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • भारत दौरे पर आ सकते हैं बालेन शाह, दिल्ली में व्यापार-निवेश और रोजगार पर होगी चर्चा

    भारत दौरे पर आ सकते हैं बालेन शाह, दिल्ली में व्यापार-निवेश और रोजगार पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली
    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के भारत दौरे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। माना जा रहा कि इस साल के आखिर तक बालेन शाह दिल्ली की अपनी पहली यात्रा कर सकते हैं। इस दौरान आपसी रिश्तों को और मजबूती देने के साथ साझेदारी के नए रास्ते खुलेंगे। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने भारत दौरे पर ये बात कही है। दिल्ली दौरे पर उन्होंने भारत और नेपाल के बीच इंडस्ट्री-टू-इंडस्ट्री सहयोग और बालेन शाह सरकार के रोजगार सृजन और उद्योग पर फोकस के बारे में भी बात की।

    बालेन शाह इसी साल आ सकते हैं भारत
    पिछले साल नेपाल में बड़े पैमाने पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद पिछली सरकार गिर गई थी। इसके बाद 2026 की शुरुआत में संसदीय चुनाव जीतकर बालेन शाह नेपाल के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने पहले ऐलान किया था कि वे प्रधानमंत्री के तौर पर विदेश यात्रा 2027 से ही शुरू करेंगे। हालांकि, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने हमारे सहयोगी अखबार ईटी को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण के बाद बालेन शाह नवंबर में नई दिल्ली आ सकते हैं।

    नेपाल के वित्त मंत्री ने दिल्ली दौरे पर दी जानकारी
    नेपाल के वित्त मंत्री के तौर पर अपनी पहली भारत यात्रा पर आए स्वर्णिम वागले ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के कार्यक्रम को लेकर अहम अपडेट दिया। स्वर्णिम वागले, दिल्ली स्थित RIS में विशेषज्ञों और थिंक-टैंक के सदस्यों के एक चुनिंदा समूह से बात कर रहे थे। मंत्री ने भारत और नेपाल के बीच इंडस्ट्री-टू-इंडस्ट्री सहयोग और शाह सरकार के रोजगार सृजन और उद्योग पर फोकस के बारे में भी बात की। खास बात यह है कि भारत से नेपाल में निजी निवेश की पिछली लहर लगभग 25 साल पहले आई थी। काठमांडू अब निवेश का एक नया दौर चाहता है।

    द्विपक्षीय व्यापार और ट्रांजिट संधि पर फोकस
    नेपाल द्विपक्षीय व्यापार और ट्रांजिट संधि को आधुनिक बनाने का भी इच्छुक है। ट्रांजिट संधि में 1 जून, 2023 को सात साल की अवधि के लिए संशोधन किया गया था। इसके बाद पिछले नवंबर में रेल-आधारित माल ढुलाई और बल्क कार्गो कनेक्टिविटी का विस्तार करने के लिए एक अतिरिक्त लेटर ऑफ एक्सचेंज पर सहमति बनी थी। वागले ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठकों में अगस्त में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद नेपाल में पुनर्निर्माण कार्यों और भारत से संभावित मदद पर भी फोकस किया गया।

    वागले के भारत दौरे पर क्या कह रहे एक्सपर्ट
    नेपाल मामलों के जानकारों का कहना है कि वागले ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए भारत को इसलिए चुना क्योंकि दोनों देशों के बीच करीबी द्विपक्षीय संबंध हैं। हाल ही में आई आपदा के बाद बचाव और राहत कार्यों में नई दिल्ली ने तेजी से मदद की थी। इससे पहले पिछले कुछ महीनों में नेपाल के विदेश मंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष ने भारत का दौरा किया था। इस बीच, भारत ने शनिवार को हिमालयी देश को आपदा से उबरने के प्रयासों में मदद के लिए 11 टन और राहत सामग्री भेजी।