Category: देश

  • PM मोदी ने 51 हजार युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- सफलता के पीछे परिवार की भी तपस्या

    PM मोदी ने 51 हजार युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- सफलता के पीछे परिवार की भी तपस्या

    नईदिल्ली 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 20वें रोजगार मेले में 51 हजार से अधिक नवनियुक्त युवाओं को सरकारी सेवाओं के नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि वे ऐसे समय में भारत सरकार से जुड़ रहे हैं, जब देश 2047 तक विकसित भारत बनाने के बड़े लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवाओं को सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसे फैसले लेने चाहिए, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को मजबूत करें. उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं से कहा कि इस उपलब्धि के पीछे उनकी मेहनत के साथ-साथ माता-पिता और परिवार के सदस्यों की भी तपस्या और योगदान है। 

    पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय युवाओं की प्रतिभा और कौशल ने पूरी दुनिया का भरोसा जीता है. दुनिया को भारत के इनोवेटर्स, उद्यमियों और युवा शक्ति से काफी उम्मीदें हैं. उन्होंने हाल में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे, बल्कि उद्यमी, किसान, महिलाएं और युवा भी इसके सक्रिय भागीदार बनें. इसी सोच के तहत ब्रिक्स कनेक्ट और ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल जैसी पहल की गई है। 

    40 देशों के साथ FTA
    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं. उनके मुताबिक, इन समझौतों से भारतीय उद्यमियों के लिए नई साझेदारियों और बाजारों के रास्ते खुल रहे हैं तथा युवाओं के लिए करियर के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने पर लगातार जोर दे रही है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्किल इंडिया मिशन और अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने की पहल इसी दिशा में हैं. प्रधानमंत्री ने पीएम सेतु योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एक हजार सरकारी आईटीआई को आधुनिक बनाया जा रहा है और इसमें उद्योग जगत की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। 

    तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
    पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और करीब आधे मान्यता प्राप्त स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसके जरिए करीब दो करोड़ युवाओं को पहली बार कार्यबल का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा. पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को 15 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन देने और नए रोजगार पैदा करने वाले नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहित करने की व्यवस्था का उन्होंने जिक्र किया। 

    जीडीपी और निवेश में वृद्धि
    प्रधानमंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है और निवेश में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि के पीछे पिछले वर्षों में किए गए सुधारों का बड़ा योगदान है. नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों से उन्होंने सुधारों की गति को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. पीएम मोदी ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों का हर फैसला और फाइल पर किया गया हस्ताक्षर युवाओं की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र का उद्देश्य युवाओं के रास्ते की बाधाएं हटाना, उनके विचारों को अवसर देना और नवाचार के जरिए निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करना होना चाहिए। 

    स्किल को लगातार बेहतर बनाने की सलाह
    प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त कर्मचारियों से अपनी स्किल लगातार बेहतर करने और नई तकनीक तथा प्रणालियों को समझने की अपील की. उन्होंने मिशन कर्मयोगी का जिक्र करते हुए कहा कि आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म से 1.70 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़ चुके हैं और नए कर्मचारियों के लिए कर्मयोगी प्रारंभ को विशेष रूप से तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार की असली ताकत देश के नागरिकों का विश्वास है. किसी भी मंत्रालय या विभाग में काम करने वाला कर्मचारी किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है. किसी बुजुर्ग की पेंशन, विद्यार्थी की छात्रवृत्ति या किसान को मिलने वाली सुविधा में सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी जुड़ी होती है. प्रधानमंत्री ने युवाओं से इसी जिम्मेदारी को समझते हुए देशसेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। 

  • IIT रुड़की में अजित डोभाल का बड़ा बयान, भारत की GDP को लेकर बताया 20 साल का अनुमान

    IIT रुड़की में अजित डोभाल का बड़ा बयान, भारत की GDP को लेकर बताया 20 साल का अनुमान

    रुड़की
    भारत की GDP अगले 20 साल में कितनी हो सकती है, इसका अनुमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने बताया है. IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में छात्रों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. मौजूदा GDP 4.015 ट्रिलियन डॉलर है, जो अगले 20 साल में बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. उन्होंने कहा कि छात्र ऐसे दौर में रह रहे हैं, जब उनके भविष्य में काफी संभावनाएं हैं। 

    दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए अजित डोभाल ने कहा कि छात्र भाग्यशाली हैं कि वे बदलाव के ऐसे दौर में रह रहे हैं. उनके मुताबिक, भारत में बड़े बदलाव हो रहे हैं और देश एक शानदार भविष्य की ओर बढ़ रहा है। 

    इस दौरान अजित डोभाल ने 2047 तक के समय को 'अमृत काल' कहे जाने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह वाकई एक शानदार अमृत काल है. डोभाल ने बताया कि भारत की मौजूदा GDP 4.015 ट्रिलियन डॉलर है, जो अगले 20 साल में बढ़कर 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। 

    भगवान राम के साहस की दी मिसाल
    छात्रों को जिंदगी में साहसी बनने की सलाह देते हुए अजित डोभाल ने भगवान राम का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि ऋषि विश्वामित्र ने राक्षसों का संहार करने के लिए भगवान राम को चुना था. इसकी वजह उनका साहसी स्वभाव था। 

    सिक्किम के शेरपा से सीखे थे सफलता के 3 मंत्र
    अपने भाषण में डोभाल ने करियर के शुरुआती दिनों का एक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि जब वह सिक्किम में तैनात थे, तब एक शेरपा से उन्हें जीवन में सफलता के तीन मंत्र मिले थे। 

    पहला मंत्र था कि आपको पता होना चाहिए कि आप नक्शे पर कहां खड़े हैं. दूसरा यह कि आपको पता होना चाहिए कि आपको जाना कहां है. तीसरा मंत्र था कि वहां पहुंचने का रास्ता क्या है और वापस कैसे आना है. डोभाल ने छात्रों के साथ सफलता के ये तीन मंत्र साझा किए। 

  • DUSU Election 2026: ABVP ने जीते 3 पद, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत

    DUSU Election 2026: ABVP ने जीते 3 पद, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत

    नई दिल्ली

    दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने बाजी मार ली है. ABVP ने अध्यक्ष सहित तीन पदों पर जीत हासिल की है. वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की है. शुरुआत में 10 राउंड तक ABVP और NSUI की फाइट देखी गई. अध्यक्ष पद पर शुरू में कभी ABVP तो कभी NSUI आगे चल रही थी. इसके बाद एबीवीपी के यश डबास फिर आगे निकल गए। 

    मालूम हो कि शुक्रवार को छात्रसंघ चुनाव में 40.46 प्रतिशत मतदान हुआ था. चुनाव में RSS समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस समर्थित भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के बीच मुख्य मुकाबला था. भारतीय राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव पर सबकी निगाहें टिकी रहती हैं. इस बार का चुनाव और खास था, क्योंकि यह जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद हो रहा था. चुनाव के दौरान ही सत्य निकेतन में पीजी गिरने का मामला भी खूब सुर्खियों में रहा था, जिसमें कई बच्चों की मौत हुई थी। 

    यश बने अध्यक्ष
    अध्यक्ष पद के लिए ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा.  मतगणना के कई राउंड में दोनों उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही. अंतिम नतीजे में यश डबास ने अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया। 

    यश डबास के साथ ABVP के पैनल से सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने भी जीत दर्ज की। इस तरह ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर कब्जा किया। 

    अध्यक्ष पद के लिए ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा. मतगणना के कई राउंड में दोनों उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही. अंतिम नतीजे में यश डबास ने अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया। 

    यश डबास के साथ ABVP के पैनल से सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने भी जीत दर्ज की। इस तरह ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर कब्जा किया। 

    उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत
    उपाध्यक्ष पद का नतीजा ABVP और NSUI से अलग रहा. इस पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की है. मतगणना के दौरान शौकीन लगातार मजबूत बढ़त बनाए हुए थे और आखिरकार उन्होंने उपाध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया। 

    चारों पदों की तस्वीर 

        अध्यक्ष: यश डबास (ABVP)
        उपाध्यक्ष: दीपांशु शौकीन (निर्दलीय)
        सचिव: रिया छाबड़ी (ABVP)
        संयुक्त सचिव: लक्ष्य राज सिंह (ABVP)

    अध्यक्ष पद

    यश डबास (एबीवीपी)- 18786 वोट

    विजय शंकर मीना (एनएसयूआई)- 18707 वोट
    उपाध्यक्ष पद

    ईशू मौर्य (एबीवीपी)- 12739 वोट

    वीर चतरथ (एनएसयूआई)- 3496 वोट

    दीपांशु शौकीन (निर्दलीय)- 24943 वोट
    सचिव पद

    रिया छावड़ी (एबीवीपी)- 16145 वोट

    नम्रता चौधरी (एनएसयूआई)- 12223 वोट
    संयुक्त सचिव पद

    लक्ष्य राज सिंह (एबीवीपी)- 12435 वोट

    गोपाल चौधरी (एनएसयूआई)- 12647 वोट

    विशेष यादव (एससीएस)- 12638 वोट

    डूसू चुनाव 2026 की मतगणना के 16वें राउंड के नतीजे
    अध्यक्ष पद

    यश डबास (एबीवीपी)- 1471

    विजय शंकर मीना (एनएसयूआई)- 1686
    उपाध्यक्ष पद

    ईशू मौर्य (एबीवीपी)- 1069

    वीर चतरथ (एनएसयूआई)- 223

    दीपांशु शौकीन (स्वतंत्र)- 2261
    सचिव पद

    रिया छावड़ी (एबीवीपी)- 1414

    नम्रता चौधरी (एनएसयूआई)- 922
    संयुक्त सचिव पद

    लक्ष्य राज सिंह (एबीवीपी)- 1020

    गोपाल चौधरी (एनएसयूआई)- 735

    विशेष यादव (एससीएस)- 1510

     डूसू चुनाव 2026 की मतगणना के 15 राउंड के बाद ABVP के यश डबास निकले आगे

    कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ मतगणना 
    DUSU चुनाव की मतगणना आद सुबह 8 बजे शुरू हो गई थी. मिली जानकारियों  के मुताबिक, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2,000 से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती की गई है. मतगणना केंद्र के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के साथ प्रमुख सड़कों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. अलग-अलग जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी और वैलिड आईडी कार्ड के बिना छात्रों को कॉलेज परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। 

  • प्रसाद के घी पर उठे सवाल, तिरुपति लड्डू में पाम ऑयल की कथित मिलावट

    प्रसाद के घी पर उठे सवाल, तिरुपति लड्डू में पाम ऑयल की कथित मिलावट

    तिरुमला

    तिरुपति के मशहूर लड्डू प्रसाद को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जिस घी को गाय का शुद्ध घी बताकर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी टीटीडी को सप्लाई किया जाता था, उसके बारे में प्रवर्तन निदेशालय ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं. ED के मुताबिक इस कथित घी में असली दूध की मलाई से निकले घी की जगह रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया. इतना ही नहीं, इसे घी जैसा बनाने के लिए कई रसायन भी मिलाए जाने का आरोप है. मामला 2019 से 2024 के बीच टीटीडी को कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति से जुड़ा है. जांच एजेंसी के अनुसार इस दौरान करीब 230 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी वाली सप्लाई हुई। 

    मामला तब और गंभीर हो गया जब ED ने इस केस में सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड केप्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया. एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी अवधि में करीब 96 करोड़ रुपए मूल्य का कथित मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की कंपनी ने तैयार किया था. यानी मामला सिर्फ किसी छोटे स्तर की मिलावट का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर आपूर्ति और कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है. हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि ये ED की जांच में सामने आए आरोप हैं. अदालत में इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित मिलावटी घी कैसे तैयार हुआ, किस तरह सप्लाई किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। 

    घी में क्या-क्या मिलाने का आरोप?
    ED के मुताबिक कथित मिलावटी घी तैयार करने में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन का इस्तेमाल किया गया. ये सभी वनस्पति तेल हैं और असली गाय के घी से अलग होते हैं. एजेंसी का आरोप है कि इनका इस्तेमाल करके ऐसा पदार्थ तैयार किया गया, जिसे घी के रूप में टीटीडी तक पहुंचाया गया. यही इस मामले का सबसे अहम हिस्सा है. क्योंकि तिरुपति का लड्डू सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद है. हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु तिरुमला मंदिर पहुंचते हैं और लड्डू प्रसाद लेकर जाते हैं. ऐसे में घी की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल सीधे श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता दोनों से जुड़े हैं। 

    सिर्फ तेल नहीं, केमिकल्स के इस्तेमाल का भी आरोप
    ED ने अपनी जांच में कुछ खास केमिकल्स के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है. एजेंसी के मुताबिक कथित मिलावटी घी बनाने की प्रक्रिया में एमजी-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवेसिट सॉफ्ट 400 और एसीटिक एसिड एस्टर जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसी का दावा है कि इन चीजों की मदद से वनस्पति तेलों से ऐसा मिश्रण तैयार किया गया, जिसे घी की तरह सप्लाई किया जा सके। 

    2019 से 2024 तक की सप्लाई पर जांच
    यह पूरा मामला 2019 से 2024 के बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को कथित तौर पर की गई घी की आपूर्ति से जुड़ा है. ED के अनुसार इस अवधि में कथित फर्जी या मिलावटी घी की सप्लाई का कुल मूल्य करीब 230 करोड़ रुपए था. इनमें से लगभग 96 करोड़ रुपए का कथित मिलावटी घी सुकृति फूड्स से जुड़ा बताया गया है. अब जांच का फोकस सिर्फ एक कंपनी पर नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर भी हो सकता है. किसी बड़े धार्मिक संस्थान तक इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री पहुंचने के लिए खरीद, गुणवत्ता जांच, परिवहन और भुगतान जैसी कई प्रक्रियाएं होती हैं. इसलिए जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि कथित मिलावट किस स्तर पर हुई और निगरानी की व्यवस्था में क्या हुआ। 

    कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी हलचल
    ED ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड केप्रमोटर कैलाश चंद मंगला को इस मामले में गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद जांच में कंपनी की भूमिका और कथित आपूर्ति की प्रक्रिया पर ध्यान बढ़ गया है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कंपनी ने कथित तौर पर किस तरह का घी तैयार किया और उसे गाय के घी के तौर पर कैसे सप्लाई किया गया. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित उत्पाद की खरीद और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं. फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि ED ने मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं और गिरफ्तारी जांच का हिस्सा है. अंतिम जिम्मेदारी अदालत में सबूतों के आधार पर तय होगी। 

    तिरुपति लड्डू से क्यों जुड़ा है इतना बड़ा मामला?
    तिरुपति बालाजी मंदिर का लड्डू प्रसाद देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. श्रद्धालुओं के लिए इसकी धार्मिक और भावनात्मक अहमियत बहुत ज्यादा है. इसलिए प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कोई भी सवाल सामान्य खाद्य मिलावट के मामले से कहीं बड़ा असर पैदा करता है. अगर जांच में ED के आरोप साबित होते हैं, तो यह सवाल भी उठेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित मिलावटी घी की आपूर्ति लंबे समय तक कैसे चलती रही। 

    अब जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?
    इस मामले में सबसे बड़े सवाल हैं कि कथित मिलावटी घी की असली मात्रा कितनी थी, इसे किस-किस स्तर पर तैयार और सप्लाई किया गया और गुणवत्ता जांच के दौरान यह सामने क्यों नहीं आया. इसके अलावा यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि सप्लाई से जुड़े अन्य कारोबारी या संस्थान किस भूमिका में थे. ED की कार्रवाई के बाद मामले में आगे और गिरफ्तारियां या दस्तावेजी जांच हो सकती है. फिलहाल एजेंसी का दावा है कि 2019 से 2024 के बीच करीब 230 करोड़ रुपए की कथित संदिग्ध सप्लाई हुई और उसमें 96 करोड़ रुपए का कथित मिलावटी घी सुकृति फूड्स से जुड़ा था. इन आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। 

  • पेट्रोल पंपों पर UPI को लेकर नया विवाद, ऑनलाइन पेमेंट से दूरी और कैश पर जोर

    पेट्रोल पंपों पर UPI को लेकर नया विवाद, ऑनलाइन पेमेंट से दूरी और कैश पर जोर

    नई दिल्ली
     देशभर में UPI पर चार्ज के खिलाफ अब विरोध तेज होता जा रहा है। दिल्ली-NCR समेत देशभर में कई जगहों पर अब "No UPI, Only Cash" के पोस्टर लगा दिए गए हैं। दिल्ली के कई पेट्रोल और सीएनजी पंप से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां पर ये पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। ग्राहकों से पेमेंट कैश या कार्ड में लेने की मांग की जा रही है। आपको बता दें कि पेट्रोल पंप एसोसिएशन ट्रेड यूनियन समेत कई संगठनों ने इस चार्ज का विरोध किया है और कहा है कि चार्ज लगेगा तो धीरे-धीरे सभी जगहों पर "No UPI, Only Cash" का बोर्ड लग जाएगा।

    दिल्ली के व्यापारियों ने किया विरोध
    दिल्ली के कश्मीरी गेट मार्केट के व्यापारियों ने यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने के सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए अपनी दुकानों पर 'नो यूपीआई' के पोस्टर लगाए हैं। व्यापारियों का ये विरोध प्रदर्शन गुरुवार को चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अध्यक्ष बृजेश गोयल के नेतृत्व में हुआ। पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने क्लियर कर दिया है कि इस चार्ज से ग्राहकों की ही परेशानी बढ़ेगी। क्योंकि पहले से ही काफी कम मार्जिन मिलता है। एक और बोझ पेट्रोप पंप मालिक नहीं संभाल पाएंगे और यूपीआई का ट्रांजेक्शन कम करना पड़ जाएगा।

    होलसेल कारोबारी भी खिलाफ
    दिल्ली के होलसेल मार्केट के कारोबारी भी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज के खिलाफ हैं। दुकानदारों ने 'नो यूपीआई' के पोस्टर लगा दिए हैं। नए चार्ज के खिलाफ प्रोटेस्ट किया गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष ने कहा कि ये फैसला डिजिटल इंडिया की मुहिम को बड़ा झटका साबित हो सकता है। ग्रेटर नोएडा के एक सीएनजी पंप से भी नो यूपीआई ओनली कैश के पोस्टर लगा वीडियो सामने आया है। जहां यूपीआई से पेमेंट लेने पर पेट्रोल पंप की ओर मना करते हुए सिर्फ कैश देने की अपील की गई। व्यापारियों ने कहा कि सरकार को चार्ज लगाने के बजाय UPI ट्रांजैक्शन के लिए सब्सिडी देनी चाहिए और चेतावनी दी कि अगर प्रस्तावित MDR लागू किया गया तो वे आंदोलन करेंगे। 

    उत्तराखंड में भी व्यापारियों का विरोध
    दून उद्योग व्यापार मंडल और अन्य स्थानीय व्यापारी संगठनों ने कहा कि व्यापारी पहले से ही इनकम टैक्स और GST दे रहे हैं और UPI ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त लागत उठाने को तैयार नहीं होंगे। पलटन बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष पारस गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों ने सरकार के डिजिटल ट्रांजैक्शन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के बाद UPI पेमेंट अपनाना शुरू किया था। उन्होंने कहा, "जैसा कि सरकार शुरू से कहती आ रही है, हम पारदर्शिता लाने के लिए UPI पेमेंट स्वीकार करेंगे, ऑनलाइन काम करेंगे और ऑनलाइन पेमेंट लेंगे। लेकिन इसके बावजूद, अगर टैक्स सिर्फ हम कारोबारियों पर लगाया जाएगा और इसका नुकसान कारोबारियों को ही उठाना पड़ेगा। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं।"

    UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज
    बता दें कि जगह-जगह से ये प्रतिक्रियाएं तब आई हैं, जब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क पेश किया, जिसके तहत 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा, जबकि ग्राहक UPI का इस्तेमाल करके मुफ़्त में ट्रांजैक्शन करते रहेंगे। संशोधित UPI MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा और यह केवल चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। नए फ्रेमवर्क के तहत, 2,000 रुपये से ज़्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा, जिसमें प्रति ट्रांजैक्शन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। 

  • भारतीय वायुसेना को बड़ी मजबूती, तेजस विमानों का बेड़ा पूरा; बढ़ी हवाई क्षमता

    भारतीय वायुसेना को बड़ी मजबूती, तेजस विमानों का बेड़ा पूरा; बढ़ी हवाई क्षमता

    नई दिल्ली

    हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को पूरी तरह स्वदेशी 20 तेजस विमानों की डिलीवरी का अनुबंध पूरा कर लिया। अंतिम खेप में दो सीट वाले दो तेजस प्रशिक्षण विमान वायुसेना को सौंपे गए। इसके साथ ही एचएएल ने वायुसेना के लिए 70 एचटीटी-40 बेसिक प्रशिक्षण विमानों की डिलीवरी के अनुबंध की भी शुरुआत की। निजी विमानन कंपनी पवनहंस को चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर भी सौंपे गए।

    बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू की मौजूदगी में विमानों और हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी की गई। अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2010 में रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच हुए एफओसी अनुबंध के तहत 20 तेजस विमानों की आपूर्ति होनी थी। इनमें 16 एक सीट वाले लड़ाकू विमान और चार दो सीट वाले प्रशिक्षण विमान शामिल थे।

    पहले ही दिए जा चुके हैं 16 लड़ाकू विमान
    सभी 16 लड़ाकू विमानों और दो प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी थी। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए स्वदेश में विकसित प्रौद्योगिकियां समय की मांग हैं। अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

    क्या है इन विमानों की खासियत
    एचटीटी-40 (हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40) स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया प्रशिक्षक विमान है, जिसे भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। एचएएल के एक बयान के अनुसार, एलसीए एफओसी प्रिशक्षु विमान एक हल्का, हर मौसम में काम करने वाला और कई तरह की भूमिकाएं निभाने वाला 4.5-जेनरेशन का विमान है, जिसे मुख्य रूप से वायुसेना की प्रशिक्षण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    बयान के अनुसार, '' इन तकनीकों ने भारत को एक उन्नत दो-सीट वाला लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करने और उसे संचालित करने में सक्षम बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो असैन्य और सैन्य विमानन दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा कर सके। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक संगठनों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखना चाहिए।' अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए सिंह ने वैज्ञानिकों और अभियंताओं से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

  • PM Kisan की 24वीं किस्त का इंतजार? ये 3 काम नहीं किए तो अटक सकता है ₹2,000

    PM Kisan की 24वीं किस्त का इंतजार? ये 3 काम नहीं किए तो अटक सकता है ₹2,000

     नई दिल्ली
    आप भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं? अगर चाहते हैं कि ₹2,000 की ये किस्त बिना किसी रुकावट के आपके खाते में पहुंचे, तो सिर्फ तारीख का इंतजार न करें. इसके लिए अभी कुछ जरूरी चीजें चेक कर लें. ई-केवाईसी (e-KYC), जमीन का सत्यापन और आधार से बैंक अकाउंट की लिंकिंग में कोई कमी रह गई तो किस्त अटक सकती है। 

    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तें आम तौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं. 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी. ऐसे में अगली यानी 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी सरकार की ओर से 24वीं किस्त जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। 

    इसलिए किसानों को आधिकारिक तारीख का इंतजार करने के साथ-साथ अपने रिकॉर्ड भी चेक कर लेने चाहिए. अगर योजना से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं है, तो किस्त के भुगतान में परेशानी हो सकती है। 

    पहला काम: ई-केवाईसी जरूर करा लें
    अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, तो इसे जल्द पूरा कर लें. पीएम किसान योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी जरूरी है. ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर किस्त का भुगतान अटक सकता है. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए ई-केवाईसी की स्थिति चेक कर सकते हैं. अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की मदद भी ले सकते हैं। 

    दूसरा काम: लैंड वेरिफिकेशन चेक करें
    किस्त के लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सही होना भी जरूरी है. पीएम किसान के तहत लाभ उन्हीं किसान परिवारों को मिलता है जिनके नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड दर्ज है. इसलिए किसान यह जांच लें कि योजना में दर्ज जमीन की जानकारी सही है या नहीं और जमीन का सत्यापन पूरा हुआ है या नहीं। 

    अगर जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खाता या दूसरी जानकारी को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो उसे संबंधित राज्य के राजस्व विभाग या संबंधित अधिकारी के जरिए ठीक कराया जा सकता है. जमीन से जुड़ी जानकारी का सत्यापन पूरा नहीं होने पर भी किस्त प्रभावित हो सकती है। 

    तीसरा काम: आधार-बैंक खाता लिंकिंग
    पीएम किसान की रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इसके लिए बैंक खाते का आधार से लिंक यानी आधार सीडेड होना जरूरी है. अगर आपका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है, तो किस्त के भुगतान में दिक्कत आ सकती है. किसान अपने बैंक में जाकर आधार लिंकिंग की स्थिति चेक करा सकते हैं. साथ ही यह भी देख लें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में दर्ज बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं. खाते में नाम या दूसरे विवरण में गलती होने पर भी भुगतान अटक सकता है। 

    पैसा नहीं आया तो ऐसे चेक करें स्टेटस
    अगर 24वीं किस्त जारी होने के बाद आपके खाते में पैसा नहीं आता है, तो सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना लाभार्थी स्टेटस चेक करें. वहां भुगतान की स्थिति और बैंक से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है. किसान यह भी जांच सकते हैं कि उनका नाम बेनिफिशियरी लिस्ट (लाभार्थी सूची) में है या नहीं. अगर कोई जानकारी गलत है या जरूरी प्रक्रिया अधूरी है, तो उसे संबंधित विभाग के जरिए ठीक कराया जा सकता है। 

    क्या है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि?
    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना यानी PM-KISAN फरवरी 2019 में शुरू की गई थी. इस योजना का उद्देश्य पात्र किसान परिवारों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना है. शुरुआत में यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ाकर खेती योग्य जमीन रखने वाले सभी पात्र किसान परिवारों तक किया गया. इसके तहत पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 दिए जाते हैं. यह रकम ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान परिवार के नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड होना चाहिए और लाभार्थी का सत्यापन राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की ओर से किया जाता है। 

    कुछ श्रेणियों के लोगों को योजना से बाहर रखा गया है, जैसे कुछ संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी और आयकर देने वाले लोग. लाभ लेने के लिए आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाता, जमीन का रिकॉर्ड और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. 20 जून 2026 को जारी 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को करीब ₹18,880 करोड़ की राशि दी गई थी. योजना की शुरुआत से 23 किस्तों में अब तक ₹4.46 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम किसानों को दी जा चुकी है। 

     

  • दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, पैरासिटामोल और टेल्मिसार्टन टेस्ट में फेल; अस्पतालों ने लगाई रोक

    दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, पैरासिटामोल और टेल्मिसार्टन टेस्ट में फेल; अस्पतालों ने लगाई रोक

    नागपुर
    नागपुर में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की क्वालिटी टेस्ट में दो आम इस्तेमाल होने वाली दवाएं पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक दवा फेल हो गई हैं. इसके बाद सरकारी अस्पतालों ने इनको मरीजों को देने पर रोक लगा दी है औरस्टॉक को वापस मंगा लिया है. ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को सप्लाई की गई थीं. इस घटना ने दवाओं की क्वालिटी और उन्हें लेने से पहले टैबलेट की जांच करने की अहमियत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, FDA ने रूटीन टेस्टिंग के दौरान सैंपल लिए थे. टेस्ट के नतीजों के बाद प्रभावित स्टॉक का डिस्ट्रीब्यूशन रोकने और उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए. इन दवाओं में पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg शामिल थीं, जिसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दवाएं इंदौर की एक दवा कंपनी ने बनाई थी। 

    1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं

    TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को FDA से सूचना मिलने के बाद लगभग 1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं. ये टैबलेट जुलाई में सप्लाई की गई थीं और टेस्ट के नतीजे मिलने के बाद अस्पताल ने इनका मरीजों को देने पर रोक लगा दी है. जिन पैरासिटामोल टैबलेट की बात हो रही है, उन्हें 'Parasev 500' के नाम से बेचा गया था और वे बैच नंबर PTTC-108 की थीं. सैंपल के ज़रूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा न उतरने के बाद, एहतियात के तौर पर बाकी स्टॉक वापस मंगा लिया गया. दोनों अस्पतालों ने कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा टैबलेट खरीदी थीं, जबकि अकेले GMCH के पास वापस मंगाए जाने के समय प्रभावित स्टॉक में से लगभग 25,000 टैबलेट मौजूद थीं। 

    दूसरी दवा टेल्मिसार्टन 40 mg थी, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है. प्रभावित बैच की पहचान CHPLT 416 के तौर पर की गई. टैबलेट पर दिखने वाले दागों के अलावा, यह दवा डिसोल्यूशन टेस्ट में भी फेल हो गई. यह जरूरी है क्योंकि दवा के सही ढंग से काम करने के लिए टैबलेट का अपना एक्टिव इंग्रीडिएंट ठीक से रिलीज करना ज़रूरी होता है. अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे इसका वितरण रोक दें और वार्ड व फार्मेसी से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लें.इन दवाओं को खराब क्लालिटी का बताया गया है, हालांकि ये नकली नहीं है। 

    घटिया और नकली दवा में होता है अंतर
    घटिया दवा एक असली दवा होती है जो जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरती. इसमें दवा के रूप-रंग, असर, शुद्धता, घुलने की क्षमता, स्टेबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स में कमी हो सकती है, 
    वहीं, नकली दवा में गलत इंग्रीडिएंट हो सकता है, एक्टिव इंग्रीडिएंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है, या फिर उसकी पहचान या बनाने वाली कंपनी के बारे में गलत जानकारी हो सकती है। 

  • UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत! ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर शुल्क लगेगा, फिर भी ग्राहक रहेंगे बेफिक्र

    UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत! ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर शुल्क लगेगा, फिर भी ग्राहक रहेंगे बेफिक्र

    नई दिल्ली

    यूपीआई चार्ज को लेकर सियासी घमासान है. सरकार साफ कर चुकी है कि यूपीआई फीस का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ेगा. बावजूद इसके गफलत की स्थिति है. लोगों को डर सता रहा है कि आखिरकार इसका असर आम आदमी पर ही पड़ेगा. यूपीआई फीस भले ही मर्चेंट पर लागू हो, मगर यूजर्स से ही इसकी वसूली होगी. यही कारण है कि यूपीआई चार्ज को लेकर सरकार के इस फैसले पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. बहरहाल, 2000 रुपए से अधिक के कमर्शियल यूपीआई पेमेंट पर चार्ज का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए सरकार पूरी कोशिश में लगी है. सूत्रों की मानें तो सरकार पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि यूपीआई फीस का बोझ आम ग्राहकों पर न पड़े। 

    दरअसल, नया नियम यह है कि अब ₹2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा. यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा. सरकार यह साफ कर चुकी है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, कारोबारियों से लिया जाएगा. यानी आम यूजर्स के लिए पेमेंट सिस्टम पहले की तरह ही होगा. उसके ऊपर फीस का कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है. मगर अब क्योंकि लोगों में डर है कि कंपनियां इस चार्ज की वसूली आम यूजर्स से कर सकती है. इसलिए सरकार अब यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था बना रही है कि दुकानदार या कारोबारी यूपीआई फीस का यह बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया
    सरकारी सूत्रों ने  बताया कि केंद्र सरकार ने यूपीआई इकोसिस्टम में पेमेंट एग्रीगेटर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है. इसका मकसद यह पक्का करना है कि हाल ही में लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। 

    मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रही सरकार
    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय एक मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार कर रहा है ताकि यह देखा जा सके कि मर्चेंट इस फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें. ऐसी चिंताएं हैं कि नए चार्ज से बड़े पेमेंट के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों की लागत बढ़ सकती है। 

    15 अक्टूबर से बदल रहा यूपीआई पेमेंट नियम
    दरअसल, नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा. यह फीस मर्चेंट यानी कारोबारी देंगे, ग्राहक नहीं. 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन के लिए यह चार्ज ज़्यादा से ज़्यादा 300 रुपये होगा। 

    वित्त मंत्रालय का क्या अनुमान
    इस बीच वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू होने से नकदी लेनदेन नहीं बढ़ेगा. सूत्रों ने कहा कि इस फैसले से यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का सिर्फ चार प्रतिशत प्रभावित होगा और इससे यूपीआई के इस्तेमाल में कमी आने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन किसी भी राशि के लिए पूरी तरह निशुल्क हैं। 

  • नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, EPF वेज लिमिट ₹25 हजार हुई; कर्मचारियों को मिलेंगे 5 बड़े लाभ

    नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, EPF वेज लिमिट ₹25 हजार हुई; कर्मचारियों को मिलेंगे 5 बड़े लाभ

     नई दिल्ली

    हर महीने सैलरी से होने वाला PF डिडक्शन कई कर्मचारियों को हाथ में आने वाले वेतन से अनचाही कटौती जैसा लगता है. लेकिन यही रकम समय के साथ रिटायरमेंट की बड़ी बचत बन सकती है. अब ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ने वाली है, जिन्हें नौकरी के साथ PF, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिल सकेगा। 

    सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के दायरे को बढ़ाने के लिए वेज लिमिट में बड़ा बदलाव किया है. इसका असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी मंथली सैलरी अब तक तय सीमा से ज्यादा होने की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाती थी। 

    ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई वेज लिमिट

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) की वेज लिमिट (Wage Limit) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 मंथली कर दिया गया है. यानी अब ₹15,000 से ₹25,000 तक की मंथली सैलरी वाले सभी कर्मचारियों को EPF के दायरे में लाया जा सकेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आएंगे. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोगों को औपचारिक सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा. अब सवाल है कि एक कर्मचारी के लिए इसका सीधा असर क्या होगा? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के इस फैसले से कर्मचारियों को होने वाले 5 बड़े फायदे समझिए…

    1. रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स फंड
    एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड का सबसे बड़ा फायदा लंबी अवधि की बचत है. कर्मचारी की नौकरी के दौरान हर महीने PF में योगदान जमा होता रहता है. इस रकम पर सरकार की तरफ से 8.25% सालाना की दर से ब्याज भी मिलता है. हालांकि, ब्याज की दर फिक्स नहीं है और सरकार समय-समय पर इसे बढ़ा या घटा सकती है. इसके बावजूद EPF पर मिलने वाली ब्याज बैंकों की एफडी से अच्छी ही रहती है. आपकी सैलरी से हर महीने कटने वाली पीएफ की रकम लंबे समय तक जमा रहने पर एक बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार होता है. वेज लिमिट बढ़ने से अब ज्यादा कर्मचारी इस सिस्टम में शामिल हो सकेंगे. खास तौर पर वे कर्मचारी जो पहले ₹15,000 की सीमा से ऊपर वेतन होने के कारण अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे, उन्हें नियमित रिटायरमेंट सेविंग का रास्ता मिल सकता है। 

    2. EPS के जरिए पेंशन का फायदा
    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ने का दूसरा बड़ा फायदा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) से जुड़ा है. पात्र कर्मचारियों को नियमों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ मिल सकता है. EPS सिर्फ रिटायरमेंट तक सीमित नहीं है. तय नियमों और पात्रता के तहत इसमें दिव्यांगता पेंशन और परिवार के लिए पेंशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं. यानी EPFO की सदस्यता नौकरी खत्म होने के बाद भी वित्तीय सुरक्षा का एक आधार दे सकती है। 

    3. नौकरी के साथ इंश्योरेंस कवर भी
    EPFO की सदस्यता के साथ एम्प्लॉई डिपॉजिट लिं
    क्ड इंश्योरेंस (EDLI) का कवर भी जुड़ा होता है. यह कर्मचारी को जीवन बीमा से जुड़ी वित्तीय सुरक्षा देता है. इसका मतलब है कि EPF में शामिल होने वाला कर्मचारी सिर्फ अपनी रिटायरमेंट सेविंग नहीं बनाता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सुरक्षा का इंतजाम होता है. वेज लिमिट बढ़ने से यह सुरक्षा ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंच सकती है। 

    4. सोशल सिक्योरिटी सिस्टम का दायरा बढ़ेगा
    वेज लिमिट बढ़ने का एक बड़ा असर यह है कि ज्यादा कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे. पहले ₹15,000 से ज्यादा वेतन के साथ नई नौकरी शुरू करने वाले कई कर्मचारी अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे. अब ₹15,000 से ₹25,000 की वेज सीमा के बीच आने वाले कर्मचारियों के लिए कवरेज का दायरा बढ़ेगा. इससे नौकरीपेशा लोगों को बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुविधाओं के एक ही सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा। 

    5. भविष्य की वित्तीय सुरक्षा और मजबूत होगी
    इस बदलाव का फायदा सिर्फ आज की सैलरी या PF कटौती तक सीमित नहीं है. EPF, EPS और EDLI मिलकर कर्मचारी को लंबी अवधि में कई तरह की वित्तीय सुरक्षा देते हैं. नियमित PF योगदान से रिटायरमेंट के लिए फंड बनता है, EPS के जरिए पात्रता के अनुसार पेंशन का रास्ता खुलता है और EDLI के जरिए इंश्योरेंस कवर मिलता है. यानी एक कर्मचारी के लिए यह व्यवस्था नौकरी के दौरान बचत और भविष्य की सुरक्षा, दोनों का आधार बन सकती है। 

    किन कर्मचारियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
    अगर आपकी मंथली सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और आप अब तक वेज लिमिट की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर थे, तो यह बदलाव आपके लिए खास मायने रखता है. नई व्यवस्था के तहत ऐसे सभी कर्मचारी अब EPFO के दायरे में आ जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि वेज लिमिट बढ़ने से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ेंगे. EPFO ने भी कहा है कि बदलती सैलरी और कर्मचारी ढांचे को देखते हुए कवरेज का दायरा बढ़ाना जरूरी है. सीधी बात यह है कि वेज लिमिट बढ़ने से सिर्फ EPF में शामिल होने वाले कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ेगी, बल्कि ज्यादा नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुरक्षा का फायदा मिल सकता है।