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  • वंदे भारत स्लीपर को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरी ट्रेन की तैयारी पूरी; प्रयागराज स्टॉपेज के साथ जानें रूट

    वंदे भारत स्लीपर को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरी ट्रेन की तैयारी पूरी; प्रयागराज स्टॉपेज के साथ जानें रूट

    नई दिल्ली

    भारतीय रेलवे दूसरी स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने की योजना बना रही है। यह हाई स्पीड ट्रेन दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी जो कि प्रयागराज और कानपुर से होकर गुजरेगी। इस बात की संभावना है कि दीवाली से पहले इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा सकती है। इसका ट्रायल इसी महीने शुरू होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन वाराणसी कैंट से रात 9:20 बजे चलेगी और रात 10:45 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। यह कानपुर सेंट्रल से रात 12:35 बजे पहुंचेगी और सुबह 5 बजे नई दिल्ली।

    वापसी की यात्रा में यह नई दिल्ली से रात 9:20 बजे चलेगी और सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंचेगी। इस ट्रेन की स्पीड 130 किमी/घंटा से 160 किमी/घंटा के बीच होने की उम्मीद है। इसकी वजह से दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

    इस नई चमचमाती ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे। वहीं, इसमें 823 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसमें 11 AC थ्री-टियर कोच, चार AC टू-टियर कोच और एक फर्स्ट AC कोच शामिल होंगे। ट्रेन में वंदे भारत सर्विस वाली आधुनिक सुविधाएं होंगी।

    आपको बता दें कि हावड़ा-कामाख्या रूट के बाद भारतीय रेलवे की योजना के अनुसार यह दूसरी स्लीपर वंदे भारत सर्विस होगी। रेलवे बोर्ड ने अभी तक ट्रेन नंबर, किराया और सर्विस शुरू होने की तारीख की घोषणा नहीं की है।

    पुतिन ने वंदे भारत के स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा

    आपको बता दें कि वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेल का एक सफल मॉडल है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत मंडपम में आयोजित 'इन्नोप्रोम' प्रदर्शनी में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के स्टॉल का दौरा किया और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा। आरवीएनएल और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग (टीएमएच) ने मिलकर 'किनेट रेलवे सॉल्यूशंस लिमिटेड' नाम का एक भारत-रूस संयुक्त उपक्रम बनाया है। यह कंपनी महाराष्ट्र में अपनी मराठवाड़ा फैक्टरी में 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 16 डिब्बे होंगे।

    भविष्य में 160 किमी की रफ्तार से चलेगी ट्रेन
    शुरुआती चरण में इस हाई तकनीक ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तय की गई है। अमर उजाला की खबर के अनुसार, मिशन रफ्तार प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भविष्य में इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा की जाएगी। इस आधुनिक ट्रेन का ठहराव सफर के दौरान प्रयागराज के अलावा कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर भी होगा। ट्रेन की प्राइमरी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे संभालेगा।

    वाराणसी और नई दिल्ली से रात 9.20 बजे चले ट्रेन
    वाराणसी और नई दिल्ली से इसे रात 9:20 बजे चलाया जा सकता है। दोनों ही स्टेशनों पर पहुंचने का समय भी सुबह पांच बजे प्रस्तावित है।

    16 कोच की ट्रेन में 823 यात्री करेंगे सफर
    यह ट्रेन 16 कोच की होगी, जिसमें में 823 यात्री कर सफर सकेंगे। इसमें एसी थर्ड टियर के 11, एसी सेकंड टियर के चार और फर्स्ट एसी का एक कोच रहेगा। क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (जेडआरयूसीसी) एनसीआर के सदस्य सांसद प्रवीण पटेल का कहना है इससे यात्रियों का सफर और ज्यादा आरामदायक हो जाएगा।

  • UPI यूजर्स के लिए जरूरी खबर, ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज को लेकर क्या है नया प्लान?

    UPI यूजर्स के लिए जरूरी खबर, ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज को लेकर क्या है नया प्लान?

    नई दिल्ली
    क्या 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI पेमेंट पर लगने वाला MDR (Merchant Discount Rate) आखिरकार ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा? कुछ कॉरपोरेट और बिजनेस एनालिस्ट्स का मानना है कि मर्चेंट इस लागत को खुद उठाने के बजाय ग्राहक से वसूलने की कोशिश कर सकते हैं. एक्सपर्ट्स आशंका जता रहे हैं कि दुकानदार UPI से पेमेंट लेने से मना कर सकता है, ग्राहक से MDR अलग से देने को कह सकता है या फिर कैश में भुगतान करने के लिए कह सकता है। 

    क्रेडिट कार्ड पेमेंट में ग्राहकों को कई जगहों पर ऐसे चार्ज का अनुभव पहले भी देखने को मिलता रहा है. इस तरह की प्रैक्टिस को रोकने के लिए क्या उपाय हैं, इसे लेकर सरकार ने अपना स्टैंड क्लियर किया है. सरकार ने साफ किया है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर डालने की इजाजत नहीं होगी और इसके रोलआउट के बाद मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर उनके संबंधित बैंको द्वारा कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि वे एमडीआर चार्ज की वसूली ग्राहकों से न कर सकें। 

    सरकार कैसे रोकेगी ग्राहकों पर MDR का बोझ?

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ इस मुद्दे पर बातचीत हो चुकी है. सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि 15 अक्टूबर से MDR लागू होने के बाद कारोबारी इसकी लागत ग्राहकों से न वसूलें. सूत्रों ने कहा कि जहां एमडीआर नियमों का उल्लंघन दिखाई देगा, वहां इसे सुधारने और दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. सरकार यह भी देखेगी कि UPI पेमेंट के नाम पर ग्राहकों से कोई अतिरिक्त चार्ज न लिया जाए। 

    ₹2000 से ज्यादा के किन UPI पेमेंट पर MDR?
    नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी. इसके तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगेगा. यह चार्ज ग्राहक के बजाय कारोबारी को देना होगा. ₹75,000 या उससे ज्यादा के ऐसे ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है. यानी भुगतान की रकम कितनी भी ज्यादा हो, इस कैटेगरी में कारोबारी से ₹300 से अधिक MDR नहीं लिया जाएगा। 

    हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज
    यहां एक बात समझना जरूरी है कि 15 अक्टूबर से हर UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा. पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन और 2000 रुपये तक के ज्यादातर सामान्य मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पहले की तरह फ्री रहेंगे. अगर आप अपने परिवार, दोस्तों या किसी व्यक्ति के अकाउंट में यूपीआई से पेमेंट करते हैं, तो यह पहले की तरह बिल्कुल फ्री रहेगा. इस तरह के पेमेंट पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा. रेलवे, टेलीकम्युनिकेशन, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी कोर सर्विसेज के लिए अलग व्यवस्था है. इनमें ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर ₹5 का एक समान एमडीआर चार्ज लगेगा। 

    कैपिटल मार्केट के लिए अलग MDR
    कैपिटल मार्केट से जुड़े यूपीआई पेमेंट, जैसे म्यूचुअल फंड और स्टॉकब्रोकिंग सेवाओं के लिए MDR की दर 0.02% रखी गई है. यहां भी अधिकतम चार्ज ₹300 होगा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, स्टॉक मार्केट से जुड़े भुगतानों पर यह दर SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और दूसरे संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के बाद तय की गई है. यहां ये ध्यान देने वाली बात है कि इंश्योरेंस प्रीमियम, एसआईपी या अन्य ऑटो डेबिट पेमेंट पर कोई MDR चार्ज नहीं लगाया गया है। 

    छोटे दुकानदारों को दी गई है छूट
    छोटे कारोबारियों के लिए भी इस व्यवस्था में राहत रखी गई है. UPI QR कोड के जरिए महीने में ₹1 लाख तक का भुगतान लेने वाले छोटे विक्रेताओं पर यह अतिरिक्त MDR नहीं लगेगा. अधिकारियों के मुताबिक, यह छूट करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शंस को कवर करती है. यानी बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों को इस नए चार्ज से बाहर रखा गया है। 

    UPI पर GST को लेकर क्या कहा?
    सरकार ने UPI पर GST लगाए जाने की बात को भी गलत बताया है. सरकारी सूत्रों ने कहा है कि MDR पर अलग से GST नहीं लगाया गया है. सरकार के मुताबिक, कारोबारी MDR के भुगतान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं. अगर इस व्यवस्था को लागू करने के दौरान GST से जुड़ी कोई समस्या सामने आती है, तो GST Council उस पर विचार कर सकती है। 

    कारोबारी ग्राहक से MDR ले सकते हैं?
    सरकार का कहना है कि MDR का अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. लेकिन कारोबारी स्तर पर इसे लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि मर्चेंट के लिए यह एक नई लागत होगी. ऐसी स्थिति में कुछ कारोबारी UPI लेने से इनकार कर सकते हैं, ग्राहक से अतिरिक्त रकम मांग सकते हैं या कैश पेमेंट की ओर जाने के लिए कह सकते हैं. हालांकि, ये संभावित व्यवहार हैं और 15 अक्टूबर से नियम लागू होने के बाद ही पता चलेगा कि जमीन पर इसका कितना असर होता है। 

    सरकार ने फिलहाल कहा है कि वह पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ मिलकर इस तरह के किसी भी गलत प्रैक्टिस की निगरानी करेगी. सरकार को यह भी उम्मीद है कि MDR लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शंस में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी या कैश पेमेंट में बड़ा उछाल नहीं आएगा. अब असली नजर 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले एमडीआर फ्रेमवर्क के रोलआउट पर होगी. अगर कहीं कारोबारी ग्राहक से MDR वसूलने की कोशिश करते हैं, तो यह देखना अहम होगा कि सरकार की निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है। 

  • TMC के ‘जोड़ाफूल’ पर रोक, ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और दूसरे गुट को मिला ‘लिफाफा’ सिंबल

    TMC के ‘जोड़ाफूल’ पर रोक, ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और दूसरे गुट को मिला ‘लिफाफा’ सिंबल

    कोलकाता/नई दिल्ली 
     चुनाव आयोग ने टीएमसी में टूट के बाद ममता बनर्जी गुट को नए नाम की मंजूरी दे दी है। ममता बनर्जी गुट ने तीन नामों का विकल्प पेश किया था, इस आधार पर आयोग ने ' ऑल इंडिया तृणमूल ममता कांग्रेस ( AITMC ) का नाम दिया है। उनका चुनाव चिन्ह फुटबॉल खिलाड़ी होगा। जबकि बागी रितब्रत गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम के साथ लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। रितब्रत गुट ने आयोग को दो नाम सुझाए थे। गुरुवार को विवाद पर सुनवाई के बाद निर्वाचन आयोग ने टीएमसी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया था।

    गुरुवार को फ्रीज हुआ था दो फूल वाला सिंबल
    गुरुवार को चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों के दावों पर विचार किया था। करीब एक सप्ताह पहले भी आयोग ने ममता बनर्जी गुट और रितब्रत बनर्जी से दावों के समर्थन में दस्तावेज देने को कहा था। रितब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि टीएमसी के संविधान के मुताबिक, ममता बनर्जी का अध्यक्ष पद का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका था। अब नई कार्यकारिणी ने अरुप रॉय को अध्यक्ष चुना है। ममता बनर्जी ने गुट ने कहा कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ममता बनर्जी ही पार्टी की अध्यक्ष हैं। उनके पास ही नई कार्यकारिणी और पदों पर नियुक्ति का अधिकार है। इसके बाद चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले सिंबल विवाद पर निर्णय सुरक्षित रख गया। गुरुवार को आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और चुनाव चिन्ह पत्तियों के साथ दो फूल को फ्रीज कर दिया था।

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निंदा
    चुनाव आयोग के फैसले से ममता बनर्जी गुट के सांसद कल्याण बनर्जी ने असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वीकार नहीं है, मगर परिस्थितियों के आगे कुछ किया नहीं जा सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी टीएमसी के सिंबल और नाम फ्रीज किए जाने पर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी वोट लूट के बाद अब पार्टी लूट रही है। यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर वोटर की लड़ाई है, जो निष्पक्ष चुनाव चाहता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि आयोग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह बीजेपी की कठपुतली है।

    11 बजे तक चुनाव आयोग ने मांगे थे नए नाम और चिन्ह
    तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी घमासान और पार्टी के टूटने के बाद चुनाव आयोग ने यह अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने स्पष्ट किया था कि ममता बनर्जी का गुट यानी 'कालीघाट-तृणमूल' और विरोधी गुट यानी 'ऋतब्रत-तृणमूल', दोनों में से कोई भी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम या पुराना 'जोड़ाफुल' सिंबल इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

    आयोग ने दोनों गुटों को आज सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन नए नाम और चुनाव चिन्हों की लिस्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।

    ममता और ऋतब्रत ने क्या-क्या नाम दिए?
    चुनाव आयोग की डेडलाइन से पहले दोनों धड़ों ने अपने-अपने नए नाम और प्रतीकों की लिस्ट आयोग को सौंप दी है।

    ममता बनर्जी ('कालीघाट-तृणमूल') गुट के विकल्प:
    3 संभावित नाम: 'ममता सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस', 'सरभारतीय तृणमूल कांग्रेस ममता', और 'तृणमूल ममता कांग्रेस'।

    चुनाव चिन्ह के विकल्प: सूत्रों के मुताबिक इस गुट ने फुटबॉल खिलाड़ी और क्रिकेट बैट जैसे प्रतीकों को अपनी पहली पसंद बताया है।

    ऋतब्रत गुट ('ऋतब्रत-तृणमूल') के विकल्प:
    3 चुनाव चिन्ह:
    इस गुट ने चुनाव आयोग के फ्री-सिंबल लिस्ट में से 'ब्लैक बोर्ड', 'लिफाफा' और 'टॉर्च' की मांग की है।

    तृणमूल की टूट पर मचा सियासी घमासान
    तृणमूल का नाम और सिंबल छिन जाने के बाद राज्य और देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, "तृणमूल पहले ही टूट चुकी थी, अब उसका नाम और सिंबल भी चला गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से पीएम मोदी को जन्मदिन का ये लेट-नाइट गिफ्ट है।"

    वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में जारी फूट और कानूनी स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग का यह फैसला पूरी तरह से तर्कसंगत और निष्पक्ष है।

    बहरहाल, 28 साल बाद अपने ही बनाए नाम और चुनाव चिन्ह से महरूम हुईं ममता बनर्जी के लिए यह उप-चुनाव एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनने जा रहा है।

     

  • भारत की GDP पर मूडीज का भरोसा बढ़ा, ग्रोथ अनुमान में 1% का बड़ा इजाफा

    भारत की GDP पर मूडीज का भरोसा बढ़ा, ग्रोथ अनुमान में 1% का बड़ा इजाफा

    नईदिल्ली 
    मूडीज रेटिंग्स ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अपना अनुमान बड़े पैमाने पर बढ़ा दिया है। पहले जहां 2026-27 में 6% वृद्धि का अनुमान था, अब उसे बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। इसकी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट के संघर्ष के झटके को भारत ने जितनी अच्छी तरह झेला है, उतना मूडीज को उम्मीद नहीं थी।

    आज 18 सितंबर यानी शुक्रवार को मूडीज की नियमित समीक्षा में यह अपग्रेड सामने आया। इसके पीछे मजबूत निजी खपत, अच्छा ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन, लगातार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी निवेश में सुधार के संकेत और सेवाओं की मजबूती जैसे कारण बताए गए हैं।

    पहले छह महीनों में 8.2% की वृद्धि
    मूडीज के मुताबिक, 2026 के पहले 6 महीनों में भारत की रियल GDP वृद्धि 8.2% रही, जबकि 2025 में पूरे साल की वृद्धि 7.3% थी। मूडीज ने कहा, "मिडिल ईस्ट के संघर्ष से पैदा हुए वैश्विक झटके को अर्थव्यवस्था ने जिस तरह झेला है, उसी वजह से हमने वित्त वर्ष 2026-27 (मार्च 2027 में खत्म) के लिए अपना अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% किया है।"

    आधिकारिक आंकड़े भी मजबूत
    मूडीज का संशोधित अनुमान ऐसे समय आया है जब आधिकारिक वृद्धि आंकड़े भी मजबूत हैं। FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% बढ़ी, जबकि एक साल पहले 7.1% थी। चौथी तिमाही की वृद्धि 7.8% रही।

    IMF, S&P और RBI से आगे निकला मूडीज
    मूडीज का यह संशोधित अनुमान इस साल की शुरुआत में दूसरी बड़ी संस्थाओं के अनुमानों से काफी ऊपर है।

        अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने जुलाई की अपनी वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में वित्तवर्ष 2027 के लिए 6.4% वृद्धि का अनुमान लगाया था। IMF ने कहा था, "भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है, निजी खपत और सेवाओं की मजबूत रफ्तार के सहारे 6.4% वृद्धि का अनुमान है।"

        S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने जून में 6.6% वृद्धि का अनुमान दिया था। S&P ने जून में ऊर्जा कीमतों, मिडिल ईस्ट संघर्ष, कमजोर मानसून और धीमी वैश्विक वृद्धि के जोखिमों के चलते FY27 का अनुमान 7.1% से घटाकर 6.6% किया था। उसे FY28 में 7.2% की वापसी की उम्मीद थी।

        भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी जून में FY27 का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया था। RBI ने भी पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊंची ऊर्जा कीमतों, सप्लाई में बाधा और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते FY27 का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% किया था।

    मूडीज का 7% अनुमान IMF से 0.6 प्रतिशत अंक और S&P तथा RBI दोनों से 0.4 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

    घरेलू मांग है रियल ताकत
    मूडीज का मानना है कि इस उम्मीद भरे अनुमान की मुख्य वजह घरेलू मांग है। निजी खपत मजबूत हुई है और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के सहारे ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन भी अच्छा बना हुआ है।

    एजेंसी को उम्मीद है कि निजी क्षेत्र का निवेश भी फिर से शुरू होगा, जो वृद्धि की एक और वजह बनेगा। सेवाओं का कामकाज भी मजबूत बना हुआ है। इन सबने मिलकर भारत को मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर सहने में मदद की, जिससे साल की शुरुआत में ऊर्जा कीमतों, व्यापार और विदेशी संतुलन को लेकर चिंताएं थीं।

  • HAL से वायुसेना को तेजस-HTT-40 की डिलीवरी, पवन हंस को भी मिलेंगे ध्रुव NG हेलिकॉप्टर

    HAL से वायुसेना को तेजस-HTT-40 की डिलीवरी, पवन हंस को भी मिलेंगे ध्रुव NG हेलिकॉप्टर

     बेंगलुरु 
    हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) आज 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में भारतीय वायु सेना (IAF) को लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस के फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) ट्विन सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपे जाएंगे। 

    पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) को ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन (एनजी) हेलिकॉप्टर दिए जाएंगे. यह कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू की उपस्थिति में होगा. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और HAL सीएमडी रवि के. सहित कई अधिकारी रहेंगे। 

    यह समारोह भारत की आत्मनिर्भरता यात्रा में एक मील का पत्थर है. यह दिखाता है कि HAL और उसके उद्योग साझेदार घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. देश अब सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों के लिए एडवांस प्लेटफॉर्म डिजाइन, विकसित और निर्माण करने में सक्षम हो रहा है। 

    क्या-क्या सौंपे जाएंगे
    LCA तेजस के ट्विन सीटर ट्रेनर अंतिम दो विमान हैं जो मूल 40 विमानों के ऑर्डर को पूरा करेंगे. यह ऑर्डर 2006 और 2010 में दिया गया था. इनमें 32 सिंगल सीटर और 8 ट्विन सीटर शामिल थे. अंतिम दो ट्रेनर एफओसी कॉन्फिगरेशन में हैं. इससे आईएएफ को लड़ाकू पायलटों के प्रशिक्षण के लिए स्वदेशी जेट मिलेंगे जो असली तेजस फाइटर जैसा अनुभव देते हैं। 

    HTT-40 बेसिक ट्रेनर भी पहली खेप में दिए जाएंगे. यह स्वदेशी टर्बोप्रॉप ट्रेनर है. इसके लिए 70 विमानों का ऑर्डर है. पहले इंजन सप्लाई में देरी हुई थी लेकिन अब डिलीवरी शुरू हो रही है. यह शुरुआती पायलट ट्रेनिंग के लिए महत्वपूर्ण है।  

    ध्रुव एनजी हेलिकॉप्टर नागरिक उपयोग के लिए हैं. पवन हंस ने 10 हेलिकॉप्टर ऑर्डर किए थे. इनमें से चार इस समारोह में दिए जाएंगे. ये ऑफशोर ऑपरेशन, इमरजेंसी मेडिकल सर्विस और यात्री परिवहन में काम आएंगे. इनमें आधुनिक ग्लास कॉकपिट और सुरक्षा फीचर हैं। 

    आत्मनिर्भरता और उद्योग का विस्तार
    सरकार एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को उच्च प्राथमिकता दे रही है. इन प्लेटफॉर्मों का शामिल होना विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में एक और कदम है. HAL अब सिर्फ सैन्य विमान नहीं बल्कि नागरिक हेलिकॉप्टर भी बना रहा है. इससे उद्योग की क्षमता बढ़ रही है। 

    तेजस प्रोग्राम लंबे समय से चल रहा है. एमके-1ए के बड़े ऑर्डर भी पाइपलाइन में हैं. HTT-40 पायलट ट्रेनिंग को स्वदेशी बनाएगा. ध्रुव एनजी नागरिक उड्डयन को मजबूत करेगा. यह सब मिलकर भारत को वैश्विक एयरोस्पेस हब बनाने में मदद करेगा। 

    18 सितंबर का समारोह सिर्फ डिलीवरी नहीं बल्कि देश की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है. रक्षा और नागरिक क्षेत्रों में स्वदेशी प्लेटफॉर्म आने से आत्मनिर्भरता मजबूत होगी. HAL और उसके साझेदार आगे और ज्यादा उन्नत विमान और हेलिकॉप्टर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. यह घटना भारतीय रक्षा और उड्डयन उद्योग के लिए गर्व का क्षण है। 

  • भारत की पहली बुलेट ट्रेन की तैयारी तेज, 508 KM ट्रैक पर बन रहे आधुनिक स्टेशन; देखें झलकियां

    भारत की पहली बुलेट ट्रेन की तैयारी तेज, 508 KM ट्रैक पर बन रहे आधुनिक स्टेशन; देखें झलकियां

    अहमदाबाद
    देश में पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) चलाने की तैयारी जोरों पर है. इसके लिए जो रेलवे स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं उनपर काम रॉकेट की रफ्तार से चल रहा है. रेलवे मंत्रालय से लेकर रेल मंत्री तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर इससे जुड़े अपडेट शेयर करते रहते हैं. Ministry Of Railway ने वापी-सूरत सेक्शन में बनाए जा रहे बुलेट ट्रेन रेलवे स्टेशन से लेकर इस ट्रैक पर सुरंगों के निर्माण से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया है, जो तेजी से वायरल (Railway Viral Video) हो रहा है। 

    रेलवे के Video में क्या खास? 
    मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे की ओर से एक एक्स पोस्ट में वापी-सूरत सेक्शन पर बुलेट ट्रेन के ट्रैक और स्टेशन पर जारी काम का वीडियो शेयर किया है. इसमें साफ देखने को मिल रहा है कि कैसे इस हाई स्पीड रेल रूट में ट्रैक पर तेज रफ्तार से बुलेट ट्रेन को चलाने के लिए पहाड़ों को काटकर सुरंगें बनाने का काम किया जा रहा है, कैसे नदी के ऊपर ब्रिज ट्रैक बिछाया जा रहा है और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम युद्धस्तर पर जारी है. इसके साथ ही बुलेट ट्रेन के मल्टी स्टोरी स्टेशन (Multi Story Bullet Train Station) की भी झलक रेलवे ने दिखाई है. इस वीडियो के कैप्शन में रेलवे ने लिखा, 'बुलेट ट्रेन का काम बहुत तेजी के साथ चल रहा है। 

    सूरत-वापी बुलेट ट्रेन सेक्शन कितना लंबा? 
    भारत की पहली बुलेट ट्रेन अगले साल संभावित 15 अगस्त से ट्रैक पर तेज रफ्तार से दौड़ती हुई नजर आएगी और इसके संकेत रेल मंत्री ने भी दिए हैं. ये देश की अपनी पहली Bullet Train होगी और ये पहली बार 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर शुरू की जाएगी. इसका 348 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में आता है और जिस वापी-सूरत सेक्शन का वीडियो रेलवे मिनिस्ट्री ने शेयर किया है, वो करीब 100 किलोमीटर का है। 

    बुलेट ट्रेन रूट पर 12 स्टॉपेज 
    अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जहां 508 किलोमीटर लंबा है, तो वहीं इस सेक्शन में रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन के 12 स्टॉपेज तय किए गए हैं. पहला Bullet Train स्टेशन साबरमती रखा गया है, तो वहीं आखिरी मुंबई है. इनमें साबरमती-मुंबई (BKC) के अलावा ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद शामिल हैं। 

    इस स्पीड से चलेगी बुलेट ट्रेन
    बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि अहमदाबाद से मुंबई के बीच औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बुलेट ट्रेन अगले साल से दौड़ेगी. बता दें, फिलहाल सबसे हाई स्पीड ट्रेनों के जरिये मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा करने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है. बुलेट ट्रेन की शुरुआत के बाद यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे न केवल यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ने वाली हैं। 

  • पाकिस्तान का PNS हुनैन कितना भरोसेमंद? ऑफशोर पेट्रोल वेसल की क्षमता पर चर्चा

    पाकिस्तान का PNS हुनैन कितना भरोसेमंद? ऑफशोर पेट्रोल वेसल की क्षमता पर चर्चा

    मुंबई 
    मंगलवार को जब अरब सागर में पाकिस्तान के PNS हुनैन की टक्कर भारतीय नौसेना के कोलकाता क्लास डिस्ट्रायर से हुई, तो यह कमजोर बनाम ताकतवर वाली स्थिति जैसी थी. एक और जहां PNS हुनैन 2,600 टन का ऑफशोर पेट्रोल वेसल (समुद्र में गश्त करने वाला जहाज़) है, वहीं INS कोलकाता भारत के सबसे ताकतवर और आधुनिक युद्धपोतों में से एक है और इसका वज़न PNS हुनैन से लगभग तीन गुना ज्यादा यानी कि 7,400 टन ज़्यादा है. साफ है कि पाकिस्तान ने भारत से पंगा लेने के लिए गलत और जहाज चुना था अगर उस वक्त भारत के युद्धपोत ने पलटकर पाकिस्तानी पोत को टक्कर मारी होती तो ये जहाज साफ डूब सकता था। 

    इस टक्कर का नतीजा सबके सामने था. पाकिस्तानी जहाज के अगले हिस्से में ज़बरदस्त टक्कर का निशान बन गया और उसे मरम्मत के लिए बंदरगाह लौटना पड़ा, जबकि भारतीय डिस्ट्रॉयर अपने ऑपरेशनल मिशन पर आगे बढ़ता रहा. विदेश मंत्रालय ने बताया कि INS कोलकाता को कोई ढांचागत नुकसान नहीं हुआ। 

    डिफेंस एनालिस्ट संदीप उन्नीथन ने इंडिया टुडे को बताया कि दोनों युद्धपोतों के बीच "बहुत बड़ा" अंतर है। 

    उन्नीथन ने कहा, "हुनैन एक ऑफशोर पेट्रोल वेसल है, जिसमें कुछ और मिसाइलें लगाकर उसकी मारक क्षमता थोड़ी बढ़ाई गई है. INS कोलकाता भारतीय नौसेना के सबसे बड़े फ्रंटलाइन जहाज़ों में से एक है. वह जहाज़ विशालकाय और शक्तिशाली है। 

    इस घटना से राजनयिक तनाव पैदा हो गया है और दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया है. भारत ने कहा कि युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था, तभी पाकिस्तानी जहाज ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया. PNS हुनैन पाकिस्तान नौसेना के 'सी स्पार्क' अभ्यास के तहत उस इलाके में मौजूद था। 

    सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा था, तभी बहुत पास से गुज़रने की कोशिश में वह INS कोलकाता से टकरा गया. खबरों के अनुसार, PNS हुनैन में एक बड़ा डेंट पड़ गया और शायद उसमें दरार भी आ गई. OSINT अकाउंट 'War and Gore' ने दावा किया कि इस घटना में पाकिस्तान के चार लोग घायल हुए. हालांकि पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। 

    उन्नीथन ने कहा कि यह घटना पाकिस्तान के लिए बहुत बुरी साबित हो सकती थी. उन्होंने कहा, "अगर INS कोलकाता अपने क्रू की सुरक्षा के लिए मुड़कर पाकिस्तानी जहाज़ को टक्कर मार देता, तो वह पलटकर डूब जाता. पाकिस्तान ने बहुत खतरनाक पैंतरेबाज़ी की थी। 
     
    दोनों जहाजों के बीच फ़र्क सिर्फ़ साइज़ का नहीं है, बल्कि इस बात का है कि ये जहाज़ किस तरह की लड़ाई के लिए बनाए गए हैं। 

    INS कोलकाता में हथियारों और सेंसर का एक एडवांस्ड सिस्टम लगा है, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक ज़मीन-से-ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं. इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली ज़मीन-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 360-डिग्री रडार, 76-mm की गन और AK-630 क्लोज़-इन वेपन सिस्टम भी लगे हैं। 

    दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए, इसमें टॉरपीडो लॉन्चर, रॉकेट लॉन्चर और आगे की तरफ़ लगा सोनार सिस्टम है. INS कोलकाता दो हेलीकॉप्टर (आमतौर पर सीकिंग और चेतक) भी ऑपरेट कर सकता है। 

    उन्नीथन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि INS कोलकाता को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि वह भारी हमले और कई बार टकराने के बावजूद लड़ाई में टिक सके। 

    इसकी ताकत और क्षमता 2021 में मुंबई से टकराए चक्रवात 'ताउते' के दौरान दिखी थी. चक्रवात के समय हवा की रफ़्तार 120 km/h तक पहुंच गई थी और लहरें नौ मीटर तक उठ रही थीं। 

    उन्नीथन ने बताया, "उस समय भारतीय नौसेना ने जो दो जहाज़ भेजे थे, वे INS कोलकाता और INS कोच्चि थे. इस साइज़ के यही दो जहाज़ ऐसे हैं जो तूफ़ान के बीच से गुज़रकर लोगों को बचा सकते हैं। 

    सीधे शब्दों में कहें तो INS कोलकाता बिल्कुल अलग तरह का जहाज़ है. जैसा कि X पर एक यूज़र ने बहुत सही बात कही, "आप डिस्ट्रॉयर से भागते हैं, उसकी तरफ़ नहीं दौड़ते!

    'माउंटेन रैट्स' (Mountain Rats) नाम के X हैंडल से पोस्ट करने वाले एक डिफेंस एनालिस्ट ने कहा, "कितनी बेवकूफ़ी है कि 2500 टन का जहाज 7500 टन के डिस्ट्रॉयर से भिड़ने का फ़ैसला करता है। 

    हालांकि, यह पहली बार नहीं था जब किसी पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज़ ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कोई दुस्साहस करने की कोशिश की हो. 16 जून, 2011 को अदन की खाड़ी में PNS बाबर भारतीय युद्धपोत INS गोदावरी के बहुत करीब से गुज़रा था. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान इससे कोई सबक नहीं सीख रहा है। 

  • तीसरी भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, CBSE से अगले साल लागू करने की बात

    तीसरी भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, CBSE से अगले साल लागू करने की बात

    नईदिल्ली 
    सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की 3 भाषा नीति को अचानक लागू करने पर एक बार फिर सवाल उठाया है. कोर्ट ने कहा कि छठी क्लास के बच्चों के लिए तीसरी भाषा को अगले साल से लागू किया जाना चाहिए. इससे बच्चों को मानसिक रूप से तैयार होने का समय मिलेगा. CBSE ने विचार के लिए समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई के दौरान कक्षा 9 के छात्रों को भी राहत देने की मांग उठी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हर कोई बिना कुछ पढ़े मुफ्त में डिग्री चाहता है। यही संस्कृति हम बढ़ावा दे रहे हैं… कक्षा 9 एक परिपक्व कक्षा है।”

    याचिका में क्या मांग की गई है?
    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है तथा कुछ राज्यों की भाषा नीतियों से भी टकरा सकती है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह कदम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

    यह मामला सीबीएसई की तीन भाषा नीति से जुड़ा है, जिसके तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई का प्रावधान किया गया है। मामले में कक्षा 6 के छात्रों के लिए भी राहत पर पहले अदालत ने सीबीएसई से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा था।

    छटी क्लास के बच्चों को मिले छूट: SC
    पीठ ने सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता से कहा, 'इस वर्ष कक्षा-छह पर विचार करें… यदि उन्हें कुछ समायोजन दिया जा सकता है।' एसजी मेहता ने अदालत से याचिकाओं की सुनवाई को टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं।

    हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे। एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में अधिक स्थगन के कारण देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को अंततः परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता में चिंता बढ़ रही है।

    सुप्रीम कोर्ट एक समूह की याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था जो कक्षा-नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने वाली सीबीएसई की नीति को चुनौती दे रही थीं, जिसमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, जो एक जुलाई से लागू होनी थीं।

    क्या है सीबीएसई की 3 भाषा नीति?
    20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई नीति से उत्पन्न समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर यह कहते हुए जोर दिया कि बच्चों को किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए।

    पीठ ने यह भी नोट किया कि एक पहलू जो विचार करने की आवश्यकता है, वह यह है कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के संबंध में पर्याप्त मानव संसाधन बुनियादी ढांचा कैसे बनाया जाए।

    उसने कहा, 'यदि आपने कक्षा-छह को प्रारंभिक बिंदु के रूप में चुना है, तो आप इस वर्ष इसके छात्रों को राहत देने पर विचार कर सकते हैं। आप इसे अगले वर्ष से लागू कर सकते हैं।'

    सीबीएसई द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार, कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है।

    क्या है मामला?

        सीबीएसई ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी है।
        इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
        याचिकाकर्ताओं ने नीति लागू करने के तरीके और सीबीएसई के अधिकार को लेकर सवाल उठाए।
        मामले में कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा और छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव को लेकर भी चर्चा हुई है।
        आज इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है।

     

  • UPI यूजर्स के लिए जरूरी खबर! नए चार्ज का ग्राहकों पर नहीं होगा असर, बड़े व्यापारियों पर लागू होगा शुल्क

    UPI यूजर्स के लिए जरूरी खबर! नए चार्ज का ग्राहकों पर नहीं होगा असर, बड़े व्यापारियों पर लागू होगा शुल्क

    नई दिल्‍ली

    केंद्र सरकार ने यूपीआई पेमेंट प्राप्‍त करने पर MDR चार्ज लागू कर दिया है. यह चार्ज चुनिंदा व्‍यापारियों पर लागू किया गया है. आम आदमी या ग्राहक और छोटे व्‍यापारियों पर यह चार्ज नहीं लगेगा. सर्कुलर के अनुसार, जिन कारोबारियों की मंथली यूपीआई से पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा का है, उनपर ये चार्ज लागू किया जाएगा. यूपीआई चार्ज का ये नया नियम 15 अक्‍टूबर से प्रभावी माना जाएगा। 

    सर्कुलर में कहा गया है कि अगर आप एक बड़े कारोबारी हैं तो आपको अधिकतम 300 रुपये का मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट (MDR) देना होगा. इससे ज्‍यादा का एमडीआर नहीं वसूला जाएगा. यहां आपको एक कैलकुलेशन के माध्‍यम से समझाया जा रहा है कि कितने रुपये के पेमेंट पर कितना MDR चार्ज देना होगा? 

    2000 रुपये का पेमेंट
    सरकार ने 2000 रुपये तक का पेमेंट हासिल करने पर किसी भी तरह का कोई भी MDR चार्ज नहीं लागू किया है. अगर आप इससे ज्‍यादा का पेमेंट प्राप्‍त करते हैं तो आपको एमडीआर देना पड़ेगा, जो आपके पेमेंट का 0.4 फीसदी होगा। 

    मान लीजिए आपने 2001 रुपये का पेमेंट रिसीव किया और आपकी मंथली QR कोड से पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा है तो आपको 8 रुपये का चार्ज देना होगा। 

    3000 रुपये के पेमेंट पर कितना चार्ज? 
    अगर आपको मंथली UPI पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा का मिला है और इस दौरान आपको 3000 रुपये का पेमेंट मिला है तो आपके 3000 रुपये के UPI पर MDR 12 रुपये का चार्ज देना होगा।  

    10 हजार रुपये के UPI पर चार्ज
    MDR नियमों के तहत आने वाले किसी व्‍यापारी को 10 हजार रुपये का ट्रांजेक्‍शन मिला है तो उसे 40 रुपये का चार्ज देना होगा। 

    50,000 रुपये के UPI पर चार्ज
    अगर आपकी भी QR कोड से पेमेंट 1 लाख रुपये से ज्‍यादा की होती है तो आप पर MDR चार्ज लागू होगा. यानी अगर आपको 50,000 रुपये का पेमेंट हासिल हुआ है तो उसपर एमडीआर चार्ज पर 200 रुपये लागू होगा। 

    ₹ 75,000 और उससे ज्‍यादा के पेमेंट पर चार्ज 
    अगर आपको 75000 रुपये का ट्रांजेक्‍शन हासिल हुआ है या उससे ज्‍यादा का ट्रांजेक्‍शन मिला है तो आपको अधिकतम 300 रुपये का एमडीआर चार्ज देना होगा. सरकार इससे ज्‍यादा का एमडीआर चार्ज नहीं लागू करेगी। 

  • दिशा सालियान केस में नया मोड़, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का नोटिस

    दिशा सालियान केस में नया मोड़, आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का नोटिस

    मुंबई

    सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस में दिशा के पिता सतीश सालियन ने दोनों से हर्जाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन दोनों नेताओं ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की।

    आपको बता दें कि दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची बिल्डिंग से गिरने से हुई थी। पुलिस ने इस घटना को दुर्घटना माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की। इसके छह दिन बाद एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत हो गई। दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और FIR दर्ज करने के साथ-साथ नए सिरे से जांच की मांग की थी। याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों पर आरोप लगाए गए। इस घटना के करीब छह साल बाद सीबीआई ने कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू कर दी है।

    500 करोड़ रुपये का नोटिस
    500 करोड़ रुपये के इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर सतीश सालियन के इरादों पर सवाल उठाने और उनकी इस कानूनी लड़ाई को राजनीति से प्रेरित बताने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने उनकी इस कानूनी लड़ाई को दुर्भावनापूर्ण बताया था।

    वकील द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस में लिखा है, “मेरे मुवक्किल सतीश सालिया पर ये सारे आरोप झूठे, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और गंभीर रूप से मानहानि करने वाले हैं। ये आरोप बिना किसी विश्वसनीय सबूत के आधार पर लगाए गए हैं। सतीश सालियान की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठाया गया। एक दुखी पिता को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया है जो गलत, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक मकसद के लिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। वह सिर्फ अपनी बेटी के कथित गैंगरेप और हत्या की कानूनी जांच चाहता हैं।”

    इस कानूनी नोटिस में आदित्य ठाकरे पर यह गलत दावा करने का भी आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने दिशा सालियन मामले की जांच पहले ही कर ली थी और उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। ठाकरे ने आरोप लगाया था कि सालियन का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा रहा था। अनिल देशमुख ने इस दावे का समर्थन किया। 23 मार्च 2025 को अनिल देशमुख ने कहा था कि दिशा सालियन केस आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की एक साजिश थी।

    सार्वजनिक माफी की मांग
    सतीश सालियन ने बिना शर्त, स्पष्ट और पूरी तरह से लिखित और सार्वजनिक माफी की मांग की है। इस माफीनामे को सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित किया जाना चाहिए। वीडियो माफीनामा कम से कम तीन मिनट लंबा होना चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया जाना चाहिए।