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  • दिवाली-छठ पर टिकट की मारामारी खत्म! स्पेशल ट्रेनों के रूट-टाइमिंग चेक करें

    दिवाली-छठ पर टिकट की मारामारी खत्म! स्पेशल ट्रेनों के रूट-टाइमिंग चेक करें

    नई दिल्ली
    दिवाली और छठ पूजा पर घर जाने की तैयारी कर रहे लोगों को उस वक्त निराशा हाथ लगी, जब त्योहारों के लिए ट्रेनों में टिकट बुकिंग खुलते ही सीटें तेजी से भर गईं. अब देश के विभिन्न शहरों से उत्तर प्रदेश और बिहार आने वाली नियमित ट्रेनों में टिकट स्टेटस 'रिग्रेट' दिखा रहा है, जबकि कुछ ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि कंफर्म होने की उम्मीद न के बराबर समझिए. ऐसे में यात्रियों के लिए रेलवे की स्पेशल ट्रेनें एक विकल्प बन सकती हैं। 

    इस बार दिवाली 8 नवंबर को है. छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक है. त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए रेलवे ने फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की 1000 से अधिक ट्रिप्स की घोषणा की है. ये सेवाएं 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 के बीच 61 दिनों के दौरान अलग-अलग रेलवे जोन द्वारा उन रूट्स पर चलाई जाएंगी, जिन पर यात्रियों का दबाव ज्यादा रहेगा. रेलवे का मकसद उन यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प देना है, जिन्हें त्योहारों में घर जाने के लिए नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है। 

    13 रेलवे जोन में चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

    रेलवे के मुताबिक, 43 जोड़ी ट्रेनें और 1,053 ट्रिप्स की योजना है. ये सेवाएं अलग-अलग रेलवे जोन के जरिए संचालित होंगी. कुछ ट्रेनें पूरे अवधि में सीमित संख्या में चलेंगी, जबकि कुछ ट्रेनें सप्ताह में एक या दो दिन चलेंगी. इन स्पेशल ट्रेनों से कोलकाता, प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, नई दिल्ली और पलवल जैसे प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी मिलेगी. इसके अलावा आनंद विहार टर्मिनल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, ग्वालियर और दादरी जैसे रेलवे स्टेशनों से भी कई ट्रेनें इस नेटवर्क में शामिल हैं. यात्रियों के लिए पुणे, हडपसर, खजुराहो, तिरुचनूर और आगरा कैंटोनमेंट जैसे रूट भी रेलवे की लिस्ट में हैं। 

    इन रूट पर सबसे ज्यादा स्पेशल ट्रेनें
    वेस्टर्न रेलवे 13 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें और नॉर्दर्न रेलवे के 10 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाएंगे. नॉर्दर्न रेलवे की बात करें तो प्रयागराज जंक्शन से दिल्ली के शकूरबस्ती रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रेन नंबर 02417, 1 से 14 अक्टूबर तक रोज चलेगी. इसके बाद 15 अक्टूबर से 14 दिसंबर तक यह सोमवार, रविवार, गुरुवार और शुक्रवार को चलेगी. इसकी वापसी ट्रेन 02418 भी अलग-अलग तारीखों में इसी अवधि के दौरान चलाई जाएगी. कानपुर सेंट्रल से नई दिल्ली के बीच 02455 और वापसी में 02456 ट्रेन 2 अक्टूबर से 30 नवंबर तक सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को चलेगी. वहीं आगरा कैंट से पलवल के बीच 01941 और वापसी में 01942 ट्रेन 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक रोज चलेगी। 

    ईस्टर्न रेलवे में इन रूट पर विकल्प
    ईस्टर्न रेलवे की सूची में आगरा कैंट से कोलकाता के बीच 01911 और वापसी में 01912 शामिल हैं. 01911 के 9 फेरे और 01912 के 9 फेरे निर्धारित हैं. कानपुर सेंट्रल से कोलकाता के बीच 04157 और वापसी में 04158 ट्रेन दी गई है. दोनों दिशाओं में 8-8 फेरे निर्धारित हैं. वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी से आसनसोल के बीच 04185 और वापसी में 04186 सप्ताह में दो दिन चलेंगी. दोनों दिशाओं में 16-16 फेरे दिए गए हैं। 

    दूसरे रेलवे जोन में भी कई विकल्प
    सदर्न रेलवे की सूची में कानपुर सेंट्रल से मदुरै के बीच 01925 के 8 फेरे और प्रयागराज जंक्शन से कन्याकुमारी के बीच 04171 के 2 फेरे शामिल हैं. साउथ वेस्टर्न रेलवे में प्रयागराज जंक्शन से हुबली, कानपुर सेंट्रल से सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु, सूबेदारगंज से यशवंतपुर और प्रयागराज जंक्शन से यशवंतपुर के बीच स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं. नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में कानपुर सेंट्रल से गुवाहाटी के बीच 04127 और वापसी में 04128 ट्रेन के 9-9 फेरे निर्धारित किए गए हैं। 

    भीड़ को देखते हुए बढ़ सकती हैं ट्रेनें
    रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की मांग और वेटिंग लिस्ट पर लगातार नजर रखी जा रही है. टिकट बुकिंग और अलग-अलग प्लेटफॉर्म से मिलने वाले डिमांड डेटा के आधार पर जरूरत पड़ने पर और स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा सकती है. स्टेशनों पर भीड़ को संभालने के लिए अतिरिक्त कमर्शियल और RPF स्टाफ तैनात किया जा रहा है. सफाई व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

    टिकट नहीं मिला तो देखें ये विकल्प
    अगर आप दिवाली या छठ पूजा पर घर जाने की तैयारी कर रहे हैं और नियमित ट्रेन में टिकट नहीं मिल रहा, तो सिर्फ वेटिंग लिस्ट पर निर्भर रहने के बजाय इन स्पेशल ट्रेनों में सीट तलाशना एक विकल्प हो सकता है. खासकर जिन यात्रियों के रूट पर नियमित ट्रेनों में 'रिग्रेट' या बहुत लंबी वेटिंग दिख रही है, उन्हें अपने स्टेशन से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों की सूची जरूर देखनी चाहिए. यात्रियों को हमारा सुझाव है कि वे टिकट बुक करने से पहले संबंधित रेलवे जोन की अपडेटेड लिस्ट और ट्रेन का रनिंग शेड्यूल जरूर चेक करें…

     

     

    अलग-अलग रेलवे जोन से चलने वाली स्पेशल ट्रेनें

    नॉर्दर्न रेलवे (Northern Railway)

     

    क्र. ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    1 02417 प्रयागराज जंक्शन → शकूरबस्ती रोजाना 1 अक्टूबर–14 अक्टूबर 2026 14
      02417 प्रयागराज जंक्शन → शकूरबस्ती सोमवार, रविवार, गुरुवार, शुक्रवार 15 अक्टूबर–14 दिसंबर 2026 28
      02418 शकूरबस्ती → प्रयागराज जंक्शन रोजाना 1 अक्टूबर–15 अक्टूबर 2026 15
      02418 शकूरबस्ती → प्रयागराज जंक्शन बुधवार, गुरुवार, शनिवार, रविवार 17 अक्टूबर–17 दिसंबर 2026 26
    2 04163 नारायणपुर बाजार → शकूरबस्ती मंगलवार, बुधवार, शनिवार 17 अक्टूबर–16 दिसंबर 2026 19
      04164 शकूरबस्ती → नारायणपुर बाजार सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार 16 अक्टूबर–15 दिसंबर 2026 20
    3 02455 कानपुर सेंट्रल → नई दिल्ली सोमवार, बुधवार, शुक्रवार, शनिवार 2 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 35
      02456 नई दिल्ली → कानपुर सेंट्रल सोमवार, बुधवार, शुक्रवार, शनिवार 2 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 35
    4 02457 कानपुर सेंट्रल → आनंद विहार टर्मिनल मंगलवार, गुरुवार, रविवार 1 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 26
      02458 आनंद विहार टर्मिनल → कानपुर सेंट्रल मंगलवार, गुरुवार, रविवार 1 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 26
    5 04123 प्रयागराज जंक्शन → हजरत निजामुद्दीन बुधवार, रविवार 4 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 17
      04124 हजरत निजामुद्दीन → प्रयागराज जंक्शन सोमवार, गुरुवार 1 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 17
    6 04183 प्रयागराज जंक्शन → हजरत निजामुद्दीन मंगलवार 20 अक्टूबर–1 दिसंबर 2026 7
      04184 हजरत निजामुद्दीन → प्रयागराज जंक्शन बुधवार 21 अक्टूबर–2 दिसंबर 2026 7
    7 02275 प्रयागराज जंक्शन → दादरी शुक्रवार 2 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 9
      02276 दादरी → प्रयागराज जंक्शन शनिवार 3 अक्टूबर–28 नवंबर 2026 9
    8 04117 सूबेदारगंज → दादरी गुरुवार 1 अक्टूबर–26 नवंबर 2026 9
      04118 दादरी → सूबेदारगंज शुक्रवार 2 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 9
    9 01941 आगरा कैंट → पलवल रोजाना 1 अक्टूबर–31 अक्टूबर 2026 31
      01942 पलवल → आगरा कैंट रोजाना 1 अक्टूबर–31 अक्टूबर 2026 31

    सेंट्रल रेलवे (Central Railway)

     

    ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    01921 पुणे → वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) गुरुवार 22 अक्टूबर से 19 नवंबर 2026 5
    01922 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) → पुणे बुधवार 21 अक्टूबर से 18 नवंबर 2026 5
    01923 हडपसर (HDP) → वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) रविवार 18 अक्टूबर से 22 नवंबर 2026 6

    वेस्टर्न रेलवे (Western Railway)

    क्र. ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    1 01905 कानपुर सेंट्रल (CNB) → असारवा (ASV) सोमवार 5 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 9
      01906 असारवा (ASV) → कानपुर सेंट्रल (CNB) मंगलवार 6 अक्टूबर–1 दिसंबर 2026 8
    2 01907 आगरा कैंट (AGC) → उधना (UDN) मंगलवार 6 अक्टूबर–24 नवंबर 2026 8
      01908 उधना (UDN) → आगरा कैंट (AGC) बुधवार 7 अक्टूबर–25 नवंबर 2026 8
    3 01909 असारवा (ASV) → आगरा कैंट (AGC) मंगलवार 6 अक्टूबर–24 नवंबर 2026 8
      01910 आगरा कैंट (AGC) → असारवा (ASV) सोमवार 5 अक्टूबर–23 नवंबर 2026 8
    4 02199 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) → बांद्रा टर्मिनस (BDTS) गुरुवार 1 अक्टूबर–26 नवंबर 2026 9
      02200 बांद्रा टर्मिनस (BDTS) → वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) शनिवार 3 अक्टूबर–28 नवंबर 2026 9
    5 04105 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → उधना (UDN) गुरुवार, रविवार 1 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 18
      04106 उधना (UDN) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) शुक्रवार, सोमवार 2 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 18
    6 04179 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → साबरमती बीजी (SBIB) शनिवार, मंगलवार 3 अक्टूबर–28 नवंबर 2026 17
      04180 साबरमती बीजी (SBIB) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) रविवार, बुधवार 4 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 17
    7 04119 सूबेदारगंज (SFG) → बांद्रा टर्मिनस (BL) शनिवार 3 अक्टूबर–28 नवंबर 2026 9
      04120 बांद्रा टर्मिनस (BL) → सूबेदारगंज (SFG) रविवार 4 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 9
    8 04139 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → दादर (DDR) शुक्रवार 2 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 9
      04140 दादर (DDR) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) रविवार 4 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 9
    9 04155 सूबेदारगंज (SFG) → उधना (UDN) सोमवार, गुरुवार 19 अक्टूबर–26 नवंबर 2026 12
      04156 उधना (UDN) → सूबेदारगंज (SFG) मंगलवार, शुक्रवार 20 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 12
    10 04169 सूबेदारगंज (SFG) → इंदौर (INDB) शुक्रवार, सोमवार 2 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 17
      04170 इंदौर (INDB) → सूबेदारगंज (SFG) शनिवार, मंगलवार 3 अक्टूबर–28 नवंबर 2026 17
    11 04173 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → वेरावल (VRL) गुरुवार 1 अक्टूबर–26 नवंबर 2026 9
      04174 वेरावल (VRL) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) शुक्रवार 2 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 9
    12 04175 सूबेदारगंज (SFG) → दादर (DDR) रविवार 4 अक्टूबर–22 नवंबर 2026 8
      04176 दादर (DDR) → सूबेदारगंज (SFG) मंगलवार 6 अक्टूबर–24 नवंबर 2026 8
    13 04177 सूबेदारगंज (SFG) → बांद्रा टर्मिनस (BL) मंगलवार 6 अक्टूबर–24 नवंबर 2026 8
      04178 बांद्रा टर्मिनस (BL) → सूबेदारगंज (SFG) बुधवार 7 अक्टूबर–25 नवंबर 2026 8

    ईस्टर्न रेलवे (Eastern Railway)

     

    ट्रेन संख्या रूट दिन अवधि कुल फेरे
    01911 आगरा कैंट (AGC) → कोलकाता (KOAA) गुरुवार 1 अक्टूबर–20 नवंबर 2026 9
    01912 कोलकाता (KOAA) → आगरा कैंट (AGC) शुक्रवार 2 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 9
    04157 कानपुर सेंट्रल (CNB) → कोलकाता (KOAA) मंगलवार 6 अक्टूबर–24 नवंबर 2026 8
    04158 कोलकाता (KOAA) → कानपुर सेंट्रल (CNB) बुधवार 7 अक्टूबर–25 नवंबर 2026 8
    04185 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) → आसनसोल (ASN) बुधवार और रविवार 7 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 16
    04186 आसनसोल (ASN) → वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) सोमवार और गुरुवार 8 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 16

    साउथ वेस्टर्न रेलवे (South Western Railway)

    ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    04113 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → हुबली (UBL) शनिवार 3 अक्टूबर–12 दिसंबर 2026 9
    04114 हुबली (UBL) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) मंगलवार 6 अक्टूबर–15 दिसंबर 2026 8
    04131 कानपुर सेंट्रल (CNB) → सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु (SMVB) रविवार 4 अक्टूबर–15 नवंबर 2026 7
    04132 सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु (SMVB) → कानपुर सेंट्रल (CNB) बुधवार 7 अक्टूबर–18 नवंबर 2026 7
    04135 सूबेदारगंज (SFG) → यशवंतपुर (YPR) शुक्रवार 2 अक्टूबर–4 दिसंबर 2026 9
    04136 यशवंतपुर (YPR) → सूबेदारगंज (SFG) सोमवार 5 अक्टूबर–7 नवंबर 2026 9
    04149 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → यशवंतपुर (YPR) बुधवार 7 अक्टूबर–9 दिसंबर 2026 8
    04150 यशवंतपुर (YPR) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) शनिवार 3 अक्टूबर–12 दिसंबर 2026 9

    सदर्न रेलवे (Southern Railway) 

     

    ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    01925 कानपुर सेंट्रल (CNB) → मदुरै (MDU) बुधवार 7 अक्टूबर–25 नवंबर 2026 8
    01926 मदुरै (MDU) → कानपुर सेंट्रल (CNB) शनिवार 3 अक्टूबर–28 नवंबर 2026 9
    04171 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → कन्याकुमारी (CAPE) शनिवार 3 अक्टूबर–10 अक्टूबर 2026 2
    04172 कन्याकुमारी (CAPE) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) मंगलवार 5 अक्टूबर–12 अक्टूबर 2026 2

    नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (North East Frontier Railway)

    ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    04127 कानपुर सेंट्रल (CNB) → गुवाहाटी (GHY) गुरुवार 1 अक्टूबर–10 दिसंबर 2026 9
    04128 गुवाहाटी (GHY) → कानपुर सेंट्रल (CNB) शुक्रवार 2 अक्टूबर–11 दिसंबर 2026 9

    नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे (North Western Railway) 

    ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    04161 प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) → सीकर (SIKR) सोमवार 5 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 9
    04162 सीकर (SIKR) → प्रयागराज जंक्शन (PRYJ) मंगलवार 6 अक्टूबर–1 दिसंबर 2026 8
    04193 सूबेदारगंज (SFG) → भगत की कोठी (BGKT) सोमवार, गुरुवार 1 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 18
    04194 भगत की कोठी (BGKT) → सूबेदारगंज (SFG) मंगलवार, शुक्रवार 2 अक्टूबर–1 दिसंबर 2026 17

    ईस्ट सेंट्रल रेलवे (East Central Railway)

    ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    04137 ग्वालियर (GWL) → बरौनी जंक्शन (BJU) शनिवार, मंगलवार 3 अक्टूबर–28 नवंबर 2026 17
    04138 बरौनी जंक्शन (BJU) → ग्वालियर (GWL) रविवार, बुधवार 4 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 17

    ईस्ट कोस्ट रेलवे (East Coast Railway) 

    ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे
    01929 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) → खुर्दा रोड (KUR) शुक्रवार 2 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 9
    01930 खुर्दा रोड (KUR) → वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ) रविवार 4 अक्टूबर–27 नवंबर 2026 9
  • Bank Holiday: बुधवार को बैंकों में नहीं होगा कामकाज, जानें किस वजह से छुट्टी

    Bank Holiday: बुधवार को बैंकों में नहीं होगा कामकाज, जानें किस वजह से छुट्टी

    नई दिल्ली

     कल बुधवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आप कल 23 सितंबर को बैंक ब्रांच जाकर अपना काम निपटाने का प्लान कर रहे हैं तो पहले जान लीजिए कि आपके राज्य में बैंक खुले हैं या नहीं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कैलेंडर के मुताबिक कल बुधवार को बैंक कुछ राज्यों में बंद रहने वाले हैं। यहां जानिये कल किस राज्य में और क्यों बैंक बंद रहने वाले हैं।

    कल बुधवार 23 सितंबर को क्यों बंद रहेंगे बैंक?
    कल बुधवार 23 सितंबर को बैंक महाराजा हरि के जन्मदिवस के कारण बंद रहेंगे। कल बैंक इसके कारण जम्मू-कश्मीर में नहीं खुलेंगे। यहां सभी सरकारी और प्राइवेट सेक्टर बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा, एक्सिस, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसे तमाम बैंक बंद रहेंगे। जम्मू-कश्मीर के अलावा बैंक देश के बाकी सभी राज्यों में खुले रहेंगे।

    जम्मू-कश्मीर रियासत के अंतिम डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह जी का जन्म 23 सितंबर 1895 को जम्मू में हुआ था। उन्हें एक दूरदर्शी और समाज सुधारक राजा के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपने शासनकाल के दौरान शिक्षा, बाल विवाह उन्मूलन, अस्पृश्यता विरोधी कानूनों और न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव किए। 26 अक्टूबर 1947 को उन्होंने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर इस राज्य को भारत का हिस्सा बनाया।

    देश के बाकी राज्यों में कल खुली रहेंगी बैंक ब्रांच?
    कल जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के बाकि सभी राज्यों दिल्ली, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र,कर्नाटक,ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, झारखंड, मध्यप्रदेश, तेलांगना आदि में बैंक खुले रहेंगे।

    आज 22 सितंबर को यहां बंद हैं बैंक
    आज मंगलवार 22 सितंबर को झारखंड में करमा पूजा की वजह से बैंक बंद है। झारखंड में करमा पूजा प्रकृति और कृषि से जुड़ा लोकल त्योहार है। इस दिन करम वृक्ष की डाली की पूजा की जाती है। मान्यता है कि करम देवता परिवार को सुख-समृद्धि, खुशहाली और रक्षा करते हैं।

    सितंबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

    22 सितंबर – करमा पूजा के कारण रांची में बैंक बंद रहने वाले हैं।

    23 सितंबर – महाराजा हरि सिंह जी के जन्मदिन के कारण जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे।

    25 सितंबर – इंद्रजात्रा के कारण गंगटोक में बैंक बंद रहने वाले हैं।

    26 सितंबर – चौथे शनिवार के कारण बैंक बंद रहेंगे।

    27 सितंबर – रविवार

  • ₹15 हजार की जगह ₹25 हजार बेस पर कटेगा PF? कर्मचारियों की सैलरी पर असर

    ₹15 हजार की जगह ₹25 हजार बेस पर कटेगा PF? कर्मचारियों की सैलरी पर असर

     नई दिल्‍ली

    सरकार ने अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कवरेज के लिए सैलरी लिमिट को 17 सितंबर से 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है. सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे। 

    इस नियम के बदलने का क्या मतलब है? 
    यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो पहली बार EPFO में शामिल हो रहे हैं. सितंबर 2014 से कर्मचारी भविष्‍य निधि (EPFO) के अंतर्गत आने वाले किसी कंपनी में 15,000 रुपये तक कमाने वाले कर्मचारियों को पेंशन में योगदान देना जरूरी था. अब ये लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है. ऐसे में अब 15 से 25 हजार रुपये के बीच कमाने वाले कर्मचारियों की खुद से पीएफ पेंशन के दायरे में रख दिया जाएगा और उन्‍हें पेंशन का लाभ दिया जाएगा। 

    अगर 20,000 रुपये है सैलरी तो क्‍या होगा असर? 
    पुरानी सीमा के तहत ₹20,000 प्रति माह की बेसिक सैलरी पर किसी कंपनी में शामिल होने वाला कर्मचारी वैधानिक सीमा से ऊपर था और खुद ही इसके दायरे में नहीं आता था, लेकिन अब लिमिट बढ़ने के बाद ₹20,000 नई सीमा से कम है, इसलिए अब वह कर्मचारी लागू नियमों के अधीन अनिवार्य कवरेज के अंतर्गत आता है यानी उसका पीएफ पेंशन में योगदान शुरू हो जाएगा। 

    इसका मतलब है कि कर्मचारी को रिटायरमेंट के लिए जमा किए गए PF का लाभ मिलेगा, ईपीएस के तहत पेंशन की पात्रता होगी और कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा कवर मिलेगा। 

    10 हजार महीना कमाने वालों पर क्‍या होगा असर? 
    अगर आपकी 10 हजार रुपये सैलरी है तो आपके लिए कुछ भी नहीं बदलने वाला है. आपका जितना पहले पेंशन में योगदान जा रहा था, उसी हिसाब से आज भी जा रहा होगा. क्‍योंकि आप पहले भी सैलरी लिमिट के दायरे में थे और अब भी सैलरी लिमिट के दायरे में हैं। 

    अगर आपकी 25,000 रुपये से ज्‍यादा सैलरी तो क्‍या होगा? 
    अगर आपकी सैलरी 25 हजार रुपये से ज्‍यादा है तो मंथली कटौती में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. जहां कटौती वैधानिक सीमा पर लिमिटेड है, वहां कर्मचारियों का अधिकतम कंट्रीब्‍यूशन 15,000 रुपये का 12 फीसदी यानी 1800 रुपये प्रति माह था. नई लिमिट के अनुसार यह ₹25,000 का 12%, यानी ₹ 3,000 प्रति माह हो जाएगा. जिससे कर्मचारी की कटौती ₹1,200 तक बढ़ सकती है. इन कर्मचारियों के लिए इसका मतलब होगा कि उन्हें हर महीने कम वेतन मिलेगा और उनके पीएफ बचत खाते में अधिक राशि जमा होगी। 

  • ड्रोन से मिलिट्री सिस्टम तक सुरक्षा कड़ी, चीनी मूल के साइबर बग्स पर सेना की नजर; 6 लैब होंगी तैयार

    ड्रोन से मिलिट्री सिस्टम तक सुरक्षा कड़ी, चीनी मूल के साइबर बग्स पर सेना की नजर; 6 लैब होंगी तैयार

     नई दिल्ली

    भारतीय सेना विदेशी मूल के साइबर अटैक से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंतित है. इसलिए वह 6 आश्वस्त (AASHVAST) प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बना रही है. इन लैब्स का मकसद ड्रोन और अन्य सैन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में छिपी कमजोरियों का पता लगाना है. इनमें खराब कोड, छिपे हुए एक्सेस मैकेनिज्म और फर्मवेयर स्तर की खामियों की जांच की जाएगी, जो सैन्य अभियानों को बाधित कर सकती हैं। 

    दिल्ली में लैब पहले ही शुरू हो चुकी है. देशभर में कम से कम पांच और लैब्स लगाने की योजना है. शुरुआत में इनका फोकस ड्रोन पर रहेगा. बाद में सेना द्वारा खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जाएगी. यह पहल ऐसे समय में आई है जब सैन्य उपकरणों में चीनी मूल के पुर्जों को लेकर चिंता बढ़ रही है. खासकर पूर्वी सीमाओं पर तैनात ड्रोनों में चीनी साइबर अटैक की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।  

    भारत ने पहले भी घरेलू सैन्य ड्रोन निर्माताओं को चीनी मूल के पुर्जों का इस्तेमाल सीमित करने के निर्देश दिए थे. 2025 में आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने रक्षा मंत्रालय को एक फ्रेमवर्क सौंपा था, जिसका उद्देश्य यूएवी से चीनी मूल के साइबर अटैक को पूरी तरह हटाना था. आश्वस्त लैब्स इस प्रक्रिया में एक और परत जोड़ेंगी. वे सिर्फ यह नहीं देखेंगी कि कोई हिस्सा कहां से खरीदा गया, बल्कि उसकी असली उत्पत्ति और उसमें क्या छिपा हो सकता है, इसकी भी जांच करेंगी। 

    फर्मवेयर स्तर की छिपी खतरों की जांच
    आश्वस्त सिस्टम को क्विकपे प्राइवेट लिमिटेड ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स महानिदेशालय के लिए विकसित किया है. यह सिर्फ फिजिकल जांच पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम का एनालिसिस करेगा. यह सिस्टम करीब 14 तरह की कमजोरियों का पता लगा सकता है. इनमें छिपे हुए कोड और कमांड शामिल हैं, जो ड्रोन के कामकाज में बाधा डाल सकते हैं। 

    लोकेशन या समय आधारित खराबी भी पता चलेगी, जो किसी खास इलाके या समय पर मिशन को खराब कर सकती है. एम्बेडेड पासवर्ड, एन्क्रिप्शन कुंजी और रिमोट एक्सेस टूल भी स्कैन किए जाएंगे. कुछ खराबियां ऐसी हो सकती हैं जो यूएवी को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने या मिशन पूरा करने से रोक दें। 

    अप्रैल 2026 में सेना ने फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम वैलिडेशन के लिए कस्टमाइज्ड लाइसेंस्ड सॉफ्टवेयर खरीदने का आरएफपी जारी किया था. इससे साफ है कि सेना इस दिशा में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भूमिका बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है. अगर किसी सिस्टम में छिपा बैकडोर या दुर्भावनापूर्ण कोड हो, तो दुश्मन उसे दूर से नियंत्रित या बाधित कर सकता है. इसलिए ऐसी जांच जरूरी है। 

    सीसीटीवी कैमरे भी जांच के दायरे में
    स्क्रीनिंग कार्यक्रम आगे चलकर भविष्य में खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों तक भी फैलेगा. इन जांचों में संभावित रूप से कमजोर प्रॉप्राइटरी प्रोटोकॉल और एम्बेडेड तकनीकों को देखा जाएगा, खासकर विदेशी मूल की प्रणालियों से जुड़ी तकनीकों को. व्यापक उद्देश्य साइबर लचीलापन बढ़ाना, बाहरी हस्तक्षेप का खतरा कम करना। 

    सैन्य प्लेटफॉर्म को विवादित परिचालन वातावरण में भरोसेमंद बनाए रखना है. यह पहल आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत रक्षा तकनीक में अधिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी योगदान देगी. सेना की यह कोशिश दिखाती है कि वह सिर्फ हार्डवेयर खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहती. वह सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर स्तर पर भी पूरी तरह सुरक्षित सिस्टम चाहती है। 

    ड्रोन और सीसीटीवी जैसे उपकरणों में छिपी कमजोरियां युद्ध के मैदान में गंभीर परिणाम ला सकती हैं. आश्वस्त लैब्स इन जोखिमों को कम करने में मदद करेंगी. इससे भारतीय सेना की तकनीकी सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य के संघर्षों में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा घटेगा. कुल मिलाकर यह कदम आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप है, जहां साइबर सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी पारंपरिक सैन्य क्षमता। 

  • पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से की भेंट

    पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से की भेंट

    जम्मू। पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू की छह दिवसीय यात्रा पर पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने आज जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से भेंट की। मध्य प्रदेश के पत्रकारों का स्वागत करते हुए सु नेहा जलाली ने बताया कि वर्तमान में जम्मू क्षेत्र में कई विकास परीयोजनाएं चल रही हैं। धारा 370 के रद्द होने के बाद से यहां की विकास योजनाओं में गुणात्मक बदलाव और तेजी आई है। जम्मू एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है, वहीं कई राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और  चौडीकरण हो रहा है। उन्होंने अध्ययन दल को बताया कि वह आने वाले दिनों में जम्मू क्षेत्र की कई विकास योजनाओं और सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रूबरू होंगे। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश शर्मा भी उपस्थित थे, जिनका स्वागत पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल द्वारा किया गया। पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के उपनिदेशक शारिक नूर ने सुनेहा जलाली, मीडिया एवं संचार अधिकारी जाकिर मलिक और मुशर्रफ वाणी को स्मृति चिन्ह भेंट किए।

  • आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम: उत्तर भारत का गौरव है जम्मू का ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर

    आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम: उत्तर भारत का गौरव है जम्मू का ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर

    जम्मू। उत्तर भारत के सबसे भव्य और विशाल धार्मिक स्थलों में शुमार जम्मू का प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। भगवान विष्णु (रघुनाथ जी) को समर्पित यह ऐतिहासिक मंदिर अपनी समृद्ध डोगरा विरासत, बेजोड़ वास्तुकला और दुर्लभ आध्यात्मिक धरोहरों के लिए दुनिया भर में विशिष्ट पहचान रखता है।

    डोगरा शासकों की ऐतिहासिक देन
    मंदिर की नींव डोगरा राजवंश के संस्थापक महाराजा गुलाब सिंह ने वर्ष 1835 में रखी थी। उनके विज़न को साकार करते हुए उनके सुपुत्र महाराजा रणबीर सिंह ने वर्ष 1860 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण कराया। लगभग 25 वर्षों के अथक प्रयासों के बाद यह भव्य परिसर अपने वर्तमान स्वरूप में सामने आया।

    वास्तुकला और दुर्लभ आध्यात्मिक वैभव
    रघुनाथ मंदिर परिसर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता बल्कि स्थापत्य कला के लिए भी जाना जाता है:
    सात भव्य शिखर: पूरे परिसर में सात अलग-अलग मंदिर स्थापित हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना ऊंचा और नक्काशीदार शिखर है।
    स्वर्ण जड़ित गर्भगृह: मुख्य मंदिर के गर्भगृह की तीन तरफ की दीवारें सोने की चमकदार चादरों से सुसज्जित हैं, जो इसकी भव्यता में चार चांद लगाती हैं।
    समस्त देव स्वरूपों का वास: भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ-साथ यहाँ सनातन धर्म के लगभग सभी प्रमुख देवी-देवताओं व रामायण कालीन पात्रों की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं।
    अद्वितीय शिवलिंग व प्रतिमाएं: पंडित राकेश शास्त्री के अनुसार, मंदिर में सवा बारह लाख शालिग्राम शिलाओं की परिक्रमा मौजूद है। इसके अलावा, यहाँ जर्मनी से लाया गया विश्व का पहला दुर्लभ स्फटिक शिवलिंग और भारत की सबसे बड़ी भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित है।
    ज्ञान का खजाना: परिसर में स्थित ऐतिहासिक पुस्तकालय में शारदा लिपि, संस्कृत और विभिन्न भारतीय भाषाओं की हज़ारों दुर्लभ पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं।

    सुरक्षा का कड़ा पहरा
    अतीत में आतंकी हमलों का निशाना बनने के बाद भी इस पावन धाम की महिमा और भक्तों के विश्वास में कोई कमी नहीं आई। वर्तमान में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत चाक-चौबंद रखी गई है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु कड़े सुरक्षा घेरे के बीच निर्भय होकर प्रभु श्रीराम के दर्शन करते हैं।

  • IIT बॉम्बे ने मांगी माफी, छात्र की मौत मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला सस्पेंड

    IIT बॉम्बे ने मांगी माफी, छात्र की मौत मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला सस्पेंड

    मुंबई 

    आईआईटी बॉम्‍बे में छात्र की आत्‍महत्‍या के कुछ द‍िनों बाद बड़ी खबर सामने आ रही है. पि‍छले 3 द‍िनों से लगातार धरने पर बैठे छात्रों की मांगों को मानते हुए संस्‍थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्‍ला को न‍िलंब‍ित कर द‍िया है. डूल्‍ला पर छात्र को प्रताड‍़‍ित करने के आरोप लगाए गए हैं. पुल‍िस ने छात्र के माता-प‍िता की श‍िकायत पर प्रोफेसर डूल्‍ला के ख‍िलाफ मामला भी दर्ज क‍र लि‍या है। 

    मुंबई पुल‍िस की ओर से दी गई जानकारी के मुताब‍िक आईआईटी बॉम्‍बे में छात्र की आत्‍महत्‍या के मामले को अब मुंबई क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर द‍िया गया है. अब इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच ही करेगी। 

    बता दें क‍ि हाल ही में आईआईटी बॉम्बे में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी, जिस पर परीक्षा में नकल करने का आरोप था. इस घटना के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए थे और तीन दिनों से कैंपस के मुख्य गेट पर धरना दे रहे थे. छात्रों की मांग थी कि छात्र की सुसाइड के लिए जिम्मेदार प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्‍ला पर कार्रवाई की जाए और उन्‍हें तत्‍काल सस्‍पेंड क‍िया जाए. इसके साथ ही प्रदर्शनकार‍ियों की मांग थी क‍ि उनकी 18 सूत्रीय मांगों को माना जाए. करीब 3 दिन तक चले लंबे तनाव के बाद आखिरकार छात्रों की मांगें मान ली गई हैं। 

    आखिर क्या था पूरा मामला?

    IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के दूसरे साल के BTech स्टूडेंट साहिल रवींद्र वाकोडे (22) शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में छत के पंखे से लटके हुए पाए गए थे. यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और ChatGPT का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई। 

    उनके परिवार का आरोप है कि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले वाकोडे को यह कदम उठाने से पहले संस्थागत उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वाकोडे पर भारी दबाव था और उन्हें एकेडमिक सस्पेंशन की धमकियां दी जा रही थीं। 

    छात्र के माता-पिता की शिकायत पर, पुलिस ने शनिवार को भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में FIR दर्ज की। 

    घटना के तुरंत बाद, जब पुलिस मामले की शुरुआती तहकीकत ही कर रही थी, तब आईआईटी प्रशासन ने एक बयान जारी कर दिया था. उस बयान में घटना से जुड़ी कुछ ऐसी परिस्थितियों का जिक्र कर दिया गया था, जो आधिकारिक तौर पर साबित नहीं हुई थीं। 

    जांच जारी रहने के बीच ही संस्थान के इस रवैये और जल्दबाजी में दिए गए बयान पर सवाल उठने लगे, जिसके बाद बैकफुट पर आए प्रशासन को 'X' (ट्विटर) पर आकर आधिकारिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी। 

    IIT बॉम्बे ने माफीनामे में क्या लिखा?
    संस्थान ने अपने आधिकारिक 'X' हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा:

    'हम साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में अपने पिछले संचार (Communication) में दिए गए कथनों के लिए माफी मांगते हैं। 

    प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकारते हुए आगे कहा, 'इस घटना तक ले जाने वाले विवरण और परिस्थितियां फिलहाल संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच का विषय हैं. जारी जांच को ध्यान में रखते हुए, उचित जांच प्रक्रिया के जरिए तथ्य स्थापित होने से पहले घटनाओं का विवरण देना या उन्हें परिभाषित करना अनुचित था। 

    क्यों बड़ा है यह यू-टर्न?
    किसी भी कैंपस में ऐसी अप्रिय घटना होने के बाद पुलिस फॉरेंसिक और आधिकारिक जांच के जरिए ही सच तक पहुंचती है. ऐसे में बिना रिपोर्ट आए संस्थान का कोई भी बयान जांच की दिशा को प्रभावित कर सकता है। 

    प्रोफेसर पर भी एक्शन
    छात्र साहिल की मौत के मामले में जहां एक तरफ आईआईटी बॉम्बे को अपने शुरुआती बयान पर बैकफुट पर आते हुए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी है, वहीं दूसरी तरफ कैंपस में बढ़ते जनाक्रोश और विरोध के बीच प्रशासन ने सख्त कदम भी उठाए हैं.  मामले से जुड़े विवाद और सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बाद संबंधित विभाग के प्रोफेसर के खिलाफ भी प्रशासनिक स्तर पर एक्शन लिया गया है. छात्रों का आरोप था कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीन रवैये के कारण स्थिति बिगड़ी, जिसके बाद संस्थान ने निष्पक्ष जांच का भरोसा देते हुए यह कदम उठाया है। 

    डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर झूठी: IIT बॉम्बे
    कैंपस में मचे बवाल और विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर के इस्तीफे को लेकर तमाम तरह की अफवाहें चल रही थीं. इन अटकलों पर विराम लगाते हुए संस्थान ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि डायरेक्टर आईआईटी बॉम्बे ने इस्तीफा नहीं दिया है. संस्थान ने बयान जारी कर कहा कि आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है. हम स्पष्ट रूप से यह कहते हैं कि इससे जुड़ी खबरें पूरी तरह से गलत हैं। 

    बता दें कि साह‍िल की सुसाइड से मौत के बाद कैंपस में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र अपने 18 पॉइंट चार्टर के साथ डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग भी कर रहे थे. फिलहाल स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही हैं. साहिल की मौत की असली वजह क्या थी, यह आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा। 

    अब मुंबई क्राइम ब्रांच ने 22 वर्षीय आईआईटी बॉम्बे छात्र की कथित आत्महत्या की जांच अपने हाथ में ले ली है और प्रोफेसर डूल्ला व अन्य को पूछताछ के लिए बुलाने की संभावना है. डूल्‍ला पर छात्र को प्रताड़ि‍त करने का आरोप है. हालांक‍ि आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूल्ला के साथ एकजुटता जताई है. फोरम ने कहा कि उन्होंने संस्थागत प्रोटोकॉल का पालन करते हुए परीक्षा के दौरान स्मार्टफोन के अनधिकृत इस्तेमाल की रिपोर्ट की थी। फोरम ने कहा कि डूल्ला मिड-सेमेस्टर परीक्षा की निगरानी कर रहे थे और उन्होंने कथित अकादमिक कदाचार की रिपोर्ट संस्थान अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए दी। 

  • TMC फंड पर ममता का नियंत्रण जारी, हाईकोर्ट ने दी बैंक अकाउंट एक्सेस की अनुमति

    TMC फंड पर ममता का नियंत्रण जारी, हाईकोर्ट ने दी बैंक अकाउंट एक्सेस की अनुमति

    कलकत्ता

    चुनाव आयोग की तरफ से 'जोड़ाफूल' सिंबल फ्रीज किए जाने के झटके के बीच 'कालीघाट तृणमूल' (ममता बनर्जी गुट) को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने साफ किया है कि चुनाव चिन्ह में बदलाव का बैंक खातों के इस्तेमाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने तीनों बैंक खातों का संचालन पूर्व आदेश के तहत ही करती रहेगी।

    अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिह्न में किया गया बदलाव केवल आगामी उपचुनावों तक ही सीमित है। इसलिए फिलहाल यह बैंक खातों के वित्तीय प्रबंधन पर लागू नहीं होगा।

    कैसे निकाल सकेंगे बैंक अकाउंट से पैसा?
    हाईकोर्ट के नए आदेश के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट के संचालन के लिए तय की गई अंतरिम व्यवस्था को अब 29 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है।

    पैसा निकालने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी:
    दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता: ममता तृणमूल गूट के कोई भी दो अधिकृत व्यक्ति चेक पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।

    स्पेशल ऑफिसर की स्क्रूटनी: अदालत की तरफ से नियुक्त विशेष अधिकारी पूर्व जज सुब्रत तालुकदार इन चेकों की जांच करेंगे। स्पेशल ऑफिसर की मंजूरी के बाद ही बैंक संबंधित राशि का भुगतान करेगा।

    जुलाई के अंतरिम आदेश को कोर्ट ने फिर बढ़ाया
    यह मामला सबसे पहले जुलाई में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने आया था, जब पार्टी के तीन खातों को फ्रीज किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।

    उस समय हाईकोर्ट ने रिटायर जज सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 सितंबर तक खातों के अस्थायी प्रबंधन का आदेश दिया था। अब बेंच ने 9 जुलाई के उसी आदेश की अवधि को 29 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया है, जिससे पार्टी को अपने दैनिक और कानूनी खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिलेगी।

    28 साल पुरानी पार्टी दो धड़ों में बंटी, हाथ से छूटा 'जोड़ाफूल'
    ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर 'तृणमूल कांग्रेस' (TMC) की नींव रखी थी। पिछले 28 वर्षों से 'जोड़ाफूल' (घास पर दो फूल) और 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का नाम ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान का आधार रहा है।

    हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनावों के महज चार महीने के भीतर ममता बनर्जी की बनाई यह पार्टी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है और व्यावहारिक रूप से दो धड़ों में टूट चुकी है।

    ममता बनर्जी गुट (कालीघाट कैंप): चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह धड़ा आगामी उपचुनावों में 'ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा।

    बागी गुट (ऋतब्रत बनर्जी कैंप): इस धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ है।

    पार्टी के नाम और 28 साल पुराने ऐतिहासिक चुनाव चिन्ह के छिन जाने के बाद ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर इसी हफ्ते सुनवाई होने की उम्मीद है।

  • अमेरिकी की हनुमान जी पर टिप्पणी पर भड़के थरूर के बेटे, सोशल मीडिया पर दिया जवाब

    अमेरिकी की हनुमान जी पर टिप्पणी पर भड़के थरूर के बेटे, सोशल मीडिया पर दिया जवाब

    नई दिल्ली

    केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान ने हिंदू धर्म के खिलाफ टिप्पणी को लेकर अमेरिकी की जमकर क्लास लगा दी। उन्होंने इतिहास से आंकड़े पेश कर बताया है कि अमेरिका में ईसाई धर्म आने से सैकड़ों साल पहले इसकी एंट्री भारत में हो चुकी थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर हनुमान जी की प्रतिमा साझा कर यूजर उसे गिराने की बात क रहा था।

    जैसी ह्यू नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने हनुमान जी की प्रतिमा की तस्वीर साझा की थी। सात ही लिखा, 'जब हम जीतेंगे, तो इसे गिराने वाले हैं।' इसपर ईशान थरूर ने जवाब दिया, 'पता नहीं इस बेवकूफ को यह पता है या नहीं कि भारत में ईसाई धर्म, अमेरिका में ईसाई धर्म के आने से 1500 साल से भी ज्यादा पहले आ गया था। भारत में हजारों चर्च हैं। फिर भी अमेरिका हनुमान जी की एक मूर्ति बर्दाश्त नहीं कर पा रहा? हर जगह धार्मिक राष्ट्रवादी ही दुनिया के सबसे कमजोर और कम आत्मसम्मान वाले लोग होते हैं।'

    कौन हैं ईशान थरूर
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1984 में जन्मे ईशान अमेरिका में पत्रकार हैं। उनका नाम सिंगापुर में हुआ था। उनके जुड़वा भाई का नाम कनिष्क है। वह केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं। वह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मामलों और वैश्विक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहे हैं। हाल ही में वॉशिंगटन पोस्ट में छंटनी के बाद वह चर्चा में आ गए थे।

    न्यूयॉर्कर के अनुसार, साल 2026 में संस्था के साथ शुरुआत करने वाले ईशान ग्लोबल नोट्स नाम से एक इंटरनेशनल पॉलिटिक्स कॉलम लिखते हैं। इससे पहले वह करीब 1 दशक तक वॉशिंगटन पोस्ट में रहे और वर्ल्ड व्यू कॉलम लिखते रहे। साल 2021 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ डिल्पोमैसी ने उन्हें आर्थर रॉस मीडिया अवॉर्ड फॉर कॉमेंट्री से नवाजा था।

    2024 में उन्हें टेड सोरेन्सन अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही वह काउंसिल ऑन फॉरिन रिलेशन्स में 2026-27 एड्वर्ड आर मरो प्रेस फैलो हैं। इससे पहले वह 8 सालों तक टाइम में सीनियर एडिटर और संवाददाता रहे थे। उन्होंने सिंगापुर और न्यूयॉर्क में संस्था के लिए काम किया है।

    उन्होंने साल 2006 में येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। खास बात है कि येल में पढ़ाई के दौरान उन्हें सड्लर फैलोशिप मिली थी। उन्होंने अपनी पत्रकारिता की पारी की शुरुआत साल 2006 से टाइम मैगजीन से की थी। साल 2014 में उन्होंने संस्थान को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में द वॉशिंगटन पोस्ट पहुंचे थे।

  • कुर्मी समुदाय के लिए शुभेंदु सरकार का बड़ा पैकेज, ₹50 करोड़ विकास फंड और पुराने केस वापस लेने का ऐलान

    कुर्मी समुदाय के लिए शुभेंदु सरकार का बड़ा पैकेज, ₹50 करोड़ विकास फंड और पुराने केस वापस लेने का ऐलान

    कलकत्ता
    पश्चिम बंगाल
    के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बीते पुरुलिया में एक बड़ा ऐलान किया। पुरुलिया के कराडी मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुर्मी समुदाय के लोगों के खिलाफ सितंबर 2025 में दर्ज किए गए केस वापस लेने का ऐलान किया। ये मामले कुर्मी समुदाय के लोगों के अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग को लेकर किए गए आंदोलन से जुड़े थे। सरकार के इस फैसले को जंगल महल क्षेत्र में कुर्मी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    पुरुलिया के कराडी मैदान में आयोजित बड़े कुर्मी करम फेस्टिवल में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कुर्मी समुदाय के आंदोलन के दौरान पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने जो भी केस दर्ज किए थे, उन्हें अब वापस लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह दुर्गापुर में हुई एक बैठक में पहले ही केस वापस लेने के फैसले की घोषणा कर चुके थे। इसके बाद पश्चिमी जिलों को लेकर हुई प्रशासनिक बैठक में भी उन्होंने अधिकारियों को इस फैसले की जानकारी दे दी थी।

    सीएम शुभेंदु ने किया ये बड़ा ऐलान
    शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि जब कुर्मी समुदाय ने अपना आंदोलन शुरू किया था, तब पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने उसे दबाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर हमला किया गया, पुलिस की तैनाती की गई और उनके खिलाफ केस दर्ज किए गए। सुवेंदु ने कहा कि इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। सुवेंदु ने आगे कहा कि सरकार ने इस साल के बजट में कुर्मी समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस राशि को और बढ़ाया जाएगा। साथ ही, कुरमाली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा भी पूरा किया जाएगा।

    साल 2025 में हुए थे प्रदर्शन
    बता दें कि, यह घोषणा 20 सितंबर 2025 को हुए कुर्मी आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। उस समय कुर्मी संगठनों ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने और संविधान की आठवीं अनुसूची में ‘कुरमाली’ भाषा को शामिल करने की मांग की थी। मांगों के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर रेलवे ट्रैक और सड़कें जाम कर दी थीं। आंदोलन शुरू होने से पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस तरह की नाकाबंदी को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कई जगह रेलवे ट्रैक पर धरना देकर रास्ता रोक दिया। इससे ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई।

    बंगाल में कुर्मी समुदाय का प्रभाव
    बंगाल के पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय का आंदोलन कई बार राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन चुका है। कुर्मी समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग कर रहा है। इसी मांग को लेकर 2022, 2023 और 2024 में भी कई जगहों पर रेलवे ट्रैक और सड़कें जाम की गई थीं। आम लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कई बार लंबे समय तक चलने वाली नाकाबंदी के मामलों में दखल दिया है। बता दें कि, कुर्मी समाज बंगाल के साथ साथ झारखंड, ओडिशा में भी बसा है। बंगाल में इनकी आबादी 40 लाख है। कुर्मी संगठनों का दावा है कि बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र की 35 विधानसभा सीटों पर इनका प्रभाव है।