Category: मध्य प्रदेश

  • जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी शिकायत पर एक्शन, सतर्कता शाखा ने शुरू की मामले की जांच

    जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी शिकायत पर एक्शन, सतर्कता शाखा ने शुरू की मामले की जांच

    जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर सतर्कता शाखा की कार्रवाई

    निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध, विवेचना प्रारंभ

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत होकर आरक्षित वर्ग का लाभ प्राप्त करने तथा जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा कार्रवाई की गई है। शिकायत की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में संबंधित निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। यह प्रकरण आवेदक श्री हरवीर सिंह रघुवंशी, निवासी राघौगढ़, जिला गुना द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर पंजीबद्ध किया गया है।

    उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाणपत्र की जांच

    प्रकरण से संबंधित जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की “अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति”, भोपाल द्वारा की गई थी। समिति द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच के उपरांत क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।

    समिति की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उपलब्ध अभिलेखों में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी जांच में प्रश्न सामने आए हैं।

    विवेचना के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह भी सामने आया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति से पूर्व संबंधित अधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति तथा शासकीय सेवा में पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभ प्राप्त किया।

    उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन अभिलेखों एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप कार्यवाही हुई थी अथवा नहीं, इस संबंध में भी पुलिस द्वारा विवेचना की जा रही है।

    उपलब्ध तथ्यों एवं जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में 18 सितंबर 2026 को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी, 167 एवं 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों एवं अन्य के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।

    प्रकरण में दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की जा रही है। विवेचना में प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

     

  • MP-UP के लिए नई लाइफलाइन बनेगा जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे, सतना से प्रयागराज तक आसान होगा सफर

    MP-UP के लिए नई लाइफलाइन बनेगा जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे, सतना से प्रयागराज तक आसान होगा सफर

    जबलपुर
     मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे महाकौशल से विंध्य और उत्तर प्रदेश तक तेज कनेक्टिविटी देने वाला अहम प्रोजेक्ट होगा। इसके बनने के बाद जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर कटनी, मैहर, सतना, रीवा और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों को भी बेहतर तरीके से जोड़ेगा।

    5 घंटे में पूरा होगा जबलपुर-वाराणसी का सफर
    फिलहाल जबलपुर से वाराणसी की दूरी करीब 460 से 480 किलोमीटर है। मौजूदा 2 लेन मार्ग से सफर करने में लगभग 10 से 12 घंटे लग जाते हैं। नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद 4 लेन हाई-स्पीड रास्ता उपलब्ध होगा। वाहनों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने की उम्मीद है।

    इससे यात्रा के समय में करीब 5 से 6 घंटे की कमी आ सकती है। यानी जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों को भी काफी सुविधा मिलेगी।

    ये शहर होंगे सीधे कनेक्ट
    जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे के जरिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इनमें जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। यह रूट मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से शुरू होकर विंध्य क्षेत्र के रास्ते उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक पहुंचेगा। कॉरिडोर रीवा-सतना बेल्ट के साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और प्रयागराज के बाहरी हिस्सों को टच करते हुए वाराणसी रिंग रोड से जुड़ेगा।

    MP-UP की नई लाइफलाइन बनेगा कॉरिडोर
    जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर को रणनीतिक रूप से तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए महाकौशल, विंध्य और पूर्वांचल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। व्यापार के साथ धार्मिक पर्यटन को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। जबलपुर सीधे प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा।

    करीब 30 हजार करोड़ की लागत
    जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है। यह आधुनिक, ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल हाईवे नेटवर्क का हिस्सा होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 30,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

    DPR और सर्वे का काम अंतिम दौर में
    इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक मंजूरियों और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और तकनीकी दल ने एलाइनमेंट को लेकर शुरुआती सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है।

    प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अहम चुनौती है, क्योंकि एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के कई जिलों से होकर गुजरेगा। माना जा रहा है कि अगले साल तक इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकती है।

  • MP में इंजीनियर भर्ती की नई प्रक्रिया, 357 पदों पर परीक्षा कराएगी केंद्रीय एजेंसी

    MP में इंजीनियर भर्ती की नई प्रक्रिया, 357 पदों पर परीक्षा कराएगी केंद्रीय एजेंसी

    भोपाल

    मध्य प्रदेश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में इंजीनियरों के 357 खाली पद जल्द भरे जाएंगे। अगले महीने से इनकी सीधी भर्ती शुरू होगी। इस बार परीक्षा मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल नहीं कराएगा। यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की कंपनी Ed-CIL को दी गई है।

    Ed-CIL क्यों चुनी गई
    नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह फैसला लिया है। विभाग चाहता है कि भर्ती जल्दी और बिना विवाद के पूरी हो। इसके लिए 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी हुआ। भर्ती की निगरानी के लिए दो अलग कमेटियां भी बनाई गई हैं।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने भर्ती प्रक्रिया में कानूनी अड़चन से बचने और इसे तेजी से पूरा करने के लिए Ed-CIL को परीक्षा एजेंसी चुना है। विभाग ने 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर भर्ती संचालन और तकनीकी निगरानी के लिए दो कमेटियां भी गठित की हैं।

    नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने इस फैसले की वजह बताई। उनका कहना है कि विभाग के पास दो साल तक इंतजार करने का समय नहीं है। इसी वजह से केंद्रीय एजेंसी को चुना गया है।

    पुराना भर्ती विवाद क्या था
    चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा हुई लेकिन मेरिट लिस्ट अलग बनी।

    सहायक नगर निवेशक पद की मेरिट लिस्ट बिना डिग्री-डिप्लोमा सत्यापन के जारी हो गई। इससे कई अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी सूची में आ गए। 

    मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया रुक गई।
    मेरिट लिस्ट की वैधता सिर्फ एक साल थी। इससे समस्या और बड़ी हो गई। अब कोर्ट ने सभी 7 हजार 205 उम्मीदवारों के दस्तावेज दोबारा जांचने के निर्देश दिए हैं। इसी विवाद के बाद विभाग ने इस बार Ed-CIL को चुना।

    Ed-CIL का अनुभव कैसा है
    बता दें कि Ed-CIL शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली मिनी रत्न कैटेगरी-1 कंपनी (CPSE – Central Public Sector Enterprise) है। यह कंपनी पहले भी मध्य प्रदेश में परीक्षा करा चुकी है।

    फरवरी 2023 में इसने राज्य की छह बिजली कंपनियों के 453 पदों के लिए परीक्षा कराई थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी इसका अनुभव है।

    ESB को क्यों किया बाहर? 4 साल पुराने विवाद के बाद बदली परीक्षा एजेंसी
    मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा और रिजल्ट जारी किया गया, लेकिन मेरिट लिस्ट अलग-अलग बनाई गई।

    सहायक नगर निवेशक पद के लिए डिग्री-डिप्लोमा का सत्यापन किए बिना मेरिट लिस्ट जारी होने से उसमें अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हो गए। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया अटक गई। मेरिट लिस्ट की वैधता एक साल होने से समस्या और बढ़ी।

    अब कोर्ट ने परीक्षा में शामिल सभी 7,205 उम्मीदवारों के डिग्री-डिप्लोमा के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इसी विवाद के बाद इस बार परीक्षा के लिए Ed-CIL को चुना है। हालांकि, अफसरों का इस फैसले के पीछे अलग ही तर्क है।

    कौन है Ed-CIL और क्या है उसका अनुभव?
    Ed-CIL (एजुकेशनल कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड) केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन 'मिनी रत्न कैटेगरी-1' की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (CPSE) है। मध्य प्रदेश में यह कंपनी पहले भी भर्ती परीक्षा करा चुकी है।

    फरवरी 2023 में उसने राज्य की छह बिजली कंपनियों में 453 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना समेत कई राज्यों में सरकारी परीक्षाएं कराने का अनुभव भी उसके पास है।

    खाली पदों का गणित: 295 उपयंत्री और 62 सहायक यंत्री पदों पर भर्ती
    भर्ती 'मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015' और 'मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000' के तहत होगी। निकायों में उपयंत्री के 295 पद रिक्त हैं, जिनमें 228 पद सिविल के हैं।

    चयन प्रक्रिया क्या होगी?

    Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया संभालेगी। चयन प्रक्रिया इस प्रकार होगी..

        ऑनलाइन परीक्षा (CBT): परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी।
        उपयंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट जारी होगी और उसी के आधार पर नियुक्ति होगी।
        सहायक यंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट बनेगी। इसके आधार पर प्रत्येक पद के लिए तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग विशेष इंटरव्यू बोर्ड बनाएगा, जो उम्मीदवारों की डिग्री और डिप्लोमा का सत्यापन करेगा।

    भर्ती की निगरानी के लिए दो कमेटियां

    भर्ती प्रक्रिया की निगरानी के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने 18 अगस्त को दो कमेटियां गठित की हैं..

    1. परीक्षा संचालन एवं समन्वय समिति: अपर आयुक्त मिशा सिंह की अध्यक्षता वाली समिति में उप संचालक भविष्य खोब्रागड़े, उप संचालक आनंद कुमार, सहायक यंत्री सुधीर गर्ग, सहायक यंत्री संजय तिवारी, लेखा अधिकारी सिद्धांत अवस्थी और उपयंत्री अनीता मोर शामिल हैं। समिति विज्ञापन को मंजूरी देने, परीक्षा केंद्र तय करने और एजेंसी के साथ समन्वय का काम करेगी।

    2. तकनीकी समिति (IT विंग): सहायक संचालक अजय कुमार गोयल, आईटी एक्सपर्ट गजेंद्र रघुवंशी, आईटी एक्सपर्ट पलक श्रीवास्तव और लेखा अधिकारी सुनीता तिवारी इस समिति में हैं। यह टीम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे, SMS अलर्ट और तकनीकी सुरक्षा की निगरानी करेगी।

    कितने पद खाली हैं
    कुल 692 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 397 भरे जा चुके हैं। फिलहाल 295 पद खाली हैं। यह भर्ती उपयंत्री और सहायक यंत्री, दोनों पदों के लिए होगी।

    उपयंत्री के कुल 295 पद खाली हैं। इनमें 228 पद सिविल, 50 पद विद्युत और 17 पद मैकेनिकल विभाग के हैं। इसके अलावा सहायक यंत्री के 62 पद भी सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। इनमें 51 पद सिविल, 7 पद इलेक्ट्रिकल और 4 पद मैकेनिकल के हैं।

    यह भर्ती मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015 और मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000 के तहत होगी।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी
    Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तक की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी।

    उपयंत्री पद के लिए
    लिखित परीक्षा के बाद सीधे मेरिट लिस्ट जारी होगी। इसी सूची के आधार पर नियुक्ति दी जाएगी।

    सहायक यंत्री पद के लिए
    लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट बनेगी। हर पद के लिए तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। एक विशेष इंटरव्यू बोर्ड डिग्री और डिप्लोमा की जांच करेगा।

    निगरानी के लिए दो कमेटियां
    बता दें कि 18 अगस्त को भर्ती की निगरानी के लिए दो कमेटियां बनाई गई।

    पहली कमेटी परीक्षा संचालन और समन्वय देखेगी। इसकी अध्यक्ष अपर आयुक्त मिशा सिंह हैं। इस समिति में उप संचालक भविष्य खोब्रागड़े, उप संचालक आनंद कुमार, सहायक यंत्री सुधीर गर्ग, सहायक यंत्री संजय तिवारी, लेखा अधिकारी सिद्धांत अवस्थी और उपयंत्री अनीता मोर शामिल हैं।

    यह समिति विज्ञापन को मंजूरी देने, परीक्षा केंद्र तय करने और परीक्षा कराने वाली एजेंसी के साथ तालमेल का काम करेगी।

    दूसरी तकनीकी कमेटी IT विंग की है। इस समिति में सहायक संचालक अजय कुमार गोयल, आईटी एक्सपर्ट गजेंद्र रघुवंशी, आईटी एक्सपर्ट पलक श्रीवास्तव और लेखा अधिकारी सुनीता तिवारी शामिल हैं। यह टीम ऑनलाइन पेमेंट, SMS अलर्ट और परीक्षा से जुड़ी तकनीकी सुरक्षा पर नजर रखेगी।

  • विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर CM यादव का बड़ा संदेश, संसाधनों की कमी नहीं आने देंगे

    विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर CM यादव का बड़ा संदेश, संसाधनों की कमी नहीं आने देंगे

    विद्यार्थियों के सपनों को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने को सरकार है संकल्पित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    स्कूटी केवल वाहन नहीं, विद्यार्थियों की प्रतिभा, परिश्रम और आत्मविश्वास का है पुरस्कार
    सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिल रहे आगे बढ़ने के बेहतर अवसर
    बेटियों को अवसर मिलने से परिवार और समाज दोनों होते हैं सशक्त
    प्रदेश में शिक्षा का बजट बढ़कर हुआ 38 हजार करोड़ रुपये
    युवाओं के सामर्थ्य से साकार होगा विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत का सपना
    मुख्यमंत्री स्कूटी योजना अंतर्गत 7,400 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को मिली स्कूटी की सौगात
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेधावी विद्यार्थियों से किया संवाद

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धियों को पुरस्कृत करना परिवार , समाज और सरकार का दायित्व है। विद्यार्थियों के सपनों को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। आर्थिक कठिनाइयों अथवा संसाधनों की कमी के कारण किसी भी प्रतिभावान विद्यार्थी की प्रगति नहीं रुकनी चाहिए। मेधावी विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही स्कूटी केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा और परिश्रम के पुरस्कार के साथ आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रोत्साहन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के सुभाष स्कूल में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में कक्षा-12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री स्कूटी योजना अंतर्गत स्कूटी वितरण के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12 वीं में प्रथम प्रयास में ही 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान पर आना जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शनिवार को समारोहपूर्वक प्रदेश के 7400 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी वितरित की गई।

    कक्षा की सफलता से कैरियर के सपनों तक, विद्यार्थियों को सतत प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री स्कूटी योजना उन विद्यार्थियों के परिश्रम और प्रतिभा का सम्मान है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अध्ययन कर के बीच अपने परिवार और समाज को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विद्यार्थियों को नि:शुल्क किताबें, गणवेश और साइकिलें भी उपलब्ध करा रही है, ताकि आर्थिक परिस्थितियां उनकी पढ़ाई में बाधा न बनें। आज प्रदेश के बच्चे पढ़-लिखकर पारंपरिक व्यवसायों और खेती-किसानी में भी नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। कई विद्यार्थी एग्रीकल्चर स्टार्ट-अप शुरू कर परिवार की आय बढ़ाने का सपना देख रहे हैं। आधुनिक तकनीक और नवाचार से कृषि को लाभ का बेहतर माध्यम बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति उनकी स्पष्ट सोच की सराहना करते हुए कहा , हमारे लिए प्रसन्नता की बात है कि किसान और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थी भी आज चार्टेड एकांटेंट, चिकित्सक, अधिवक्ता, कृषि वैज्ञानिक और उद्यमी बनने के सपने देख रहे हैं। विद्यार्थियों की यह सोच नए और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की पहचान है। देश और प्रदेश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार करने के लिए परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    बेटियों को स्कूटी मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटियों को शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर मिलने से केवल उनका जीवन नहीं बदलता, बल्कि पूरे परिवार और समाज का वातावरण सकारात्मक बनता है। मेधावी बेटियों को स्कूटी मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने की राह अधिक सुगम होगी। राज्य सरकार विद्यार्थियों को न्यूनतम आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर और समर्थ बनाना चाहती है।

    राज्य सरकार शिक्षा, विद्यार्थियों और प्रदेश के सर्वांगीण विकास को दे रही है सर्वोच्च प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए बजट में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। आजादी के बाद 1956 में मध्यप्रदेश की स्थापना हुई। राज्य का कुल बजट 55 साल में केवल 22 हजार करोड़ रुपए था और वर्ष 2002-03 तक स्कूल शिक्षा विभाग का बजट मात्र 2600 करोड़ रुपए था। हमारी सरकार ने वर्ष 2025-26 में कुल 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया , इसमें स्कूल शिक्षा के लिए 38 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान है। यह वृद्धि बताती है कि राज्य सरकार शिक्षा, विद्यार्थियों और प्रदेश के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर काम कर रही है।

    सांदीपनि विद्यालय सुविधाओं और पढ़ाई में निजी स्कूलों को पीछे छोड़ रहें हैं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 2002-03 तक प्राथमिक स्कूलों में ड्रॉप आउट दर 16 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में शून्य हो चुकी है। प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं, जो सुविधाओं और पढ़ाई के मामले में निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे हैं। इन विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। अब बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत विद्यार्थी सांदीपनि और शासकीय स्कूलों से आ रहे हैं। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना और उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर देना है।

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हो रहा है डिजिटल सुविधाओं का विस्तार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कठिनाई के दौर से निकले और तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। हम सबने 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक जन्मोत्सव मनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनधन खातों, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), डिजिटल भुगतान व्यवस्था और कोविड-19 टीकाकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डीबीटी के माध्यम से सरकारी योजनाओं की सहायता सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

    सभी चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम है भारत की युवा शक्ति

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश-प्रदेश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। हमारे बच्चे पढ़-लिखकर सीए बनना चाहते हैं, यह देश की निरंतर बेहतर होती अर्थव्यवस्था का संकेत है। भारत आज दुनिया में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है, कुछ वर्षों में भारत, दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरेगा। दुनिया के समाने बड़ी से बड़ी चुनौती से निपटने के लिए भारतवासी पूरी तरह सक्षम हैं। राज्य सरकार युवाओं की शक्ति और प्रतिभा का सम्मान करते हुए अमृतकाल में विकसित भारत @2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

    सभी स्कूली बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है मेधावी विद्यार्थियों को मिली स्कूटी

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आज शासकीय स्कूलों के 7400 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी मिल रही है। बच्चों ने अपने अथक परिश्रम से अपने परिवार और समाज को गौरवान्वित किया है। यह प्रदेशभर के अन्य स्कूली बच्चों के लिए एक प्रेरणा भी है। यह स्कूटी बच्चों के भविष्य को पंख लगाएगी और उनके सपनों को पूरा करने में सहायक बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निरंतर कार्य कर रहे हैं। वे बच्चों के बीच किसी कार्यक्रम में आने और संवाद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमारी कोशिश सदैव बच्चों के चेहरे पर खुशी लाने की रही है। राज्य सरकार प्रदेश के सभी बच्चों के स्वर्णिम भविष्य के लिए दृढ़ संकल्पित है।

    युवाओं का चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, वकील और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का है सपना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूटी वितरण कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद कर उनके भावी लक्ष्यों के बारे में जाना। प्रदेश की की मेरिट सूची में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाली टॉपर खुशी राय ने बताया कि स्कूटी मिलने से उन्हें कॉलेज आने-जाने में सुविधा होगी। वे चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रही हैं। किसान परिवार के आकाश साहू ने एग्रीकल्चर स्टार्ट-अप शुरू करने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि इसके लिए आवश्यक लाइसेंस और अन्य तैयारियां जारी हैं। रवि केवट और मरियम खान ने भी बताया कि वह भी सीए बनने का लक्ष्य लेकर तैयारी कर रहे हैं। मिनी जैन ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर न्यूरो सर्जन बनने की इच्छा व्यक्त की। छात्रा रानी सांपले ने उच्च शिक्षा हासिल कर वकील बनने की बात कही, जबकि खुशी यादव ने एमबीबीएस कर डॉक्टर बनने की इच्छा व्यक्त की। छात्र शिव कुमार कौल ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़कर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की इच्छा व्यक्त की। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग की राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक विष्णु खत्री, महापौर श्रीमती मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सचिव स्कूल शिक्षा संजय गोयल, आयुक्त अभिषेक सिंह सहित स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

     

  • मेधावी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में 10 छात्रों को मिली स्कूटी

    मेधावी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में 10 छात्रों को मिली स्कूटी

    मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के अंतर्गत 10 मेधावी विद्यार्थियों को प्रदान की गई स्कूटी

    अनूपपुर 
     कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश शासन की मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के अंतर्गत संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर अनूपपुर में मेधावी विद्यार्थी स्कूटी वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने जिले के 136 मेधावी विद्यार्थियों में से 10 विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान की। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए मेहनत, लगन और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता उनकी मेहनत, लगन और प्रतिभा का परिणाम है। जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ उनकी आगे की पढ़ाई के लिए आवागमन में सुविधा उपलब्ध हो रही है। यह सुविधा विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की ओर आगे बढ़ने में सहयोगी बनेगी।

    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज मिली यह स्कूटी आपकी मेहनत और प्रतिभा का सम्मान है। इसे केवल सुविधा के रूप में न देखते हुए अपने सपनों को पूरा करने के साधन के रूप में उपयोग करें। विद्यार्थी अपने समय का सदुपयोग करते हुए शिक्षा के साथ अपने व्यक्तित्व का विकास करें और अपने परिवार एवं जिले का नाम रोशन करें।

    मंत्री जायसवाल ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे उसके माता-पिता और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। अभिभावकों ने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं और शिक्षकों ने उन्हें ज्ञान एवं सही दिशा प्रदान की है। मेधावी विद्यार्थियों की यह उपलब्धि उनके परिवार और शिक्षकों के लिए भी गौरव का विषय है।

    स्कूटी प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में उत्साह और खुशी का माहौल रहा। विद्यार्थियों ने कहा कि स्कूटी मिलने से आगे की पढ़ाई के लिए आवागमन आसान होगा और समय की भी बचत होगी। विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों से उच्च शिक्षा के लिए आने-जाने वाले विद्यार्थियों को इससे सुविधा मिलेगी। विद्यार्थियों ने अपनी सफलता के लिए माता-पिता एवं शिक्षकों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी पूरी मेहनत के साथ अध्ययन जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के माध्यम से कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही स्कूटी उनकी शैक्षणिक उपलब्धि का सम्मान होने के साथ ही आगे की शिक्षा के लिए सुविधा और प्रेरणा का माध्यम बन रही है।

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सिंह, कलेक्टर रत्नाकर झा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी, अपर कलेक्टर बलबीर रमन, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग सुसरिता नायक, जिला शिक्षा अधिकारी तुलाराम आर्मों सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहे।

  • रतलाम सर्किल जेल में अचानक पहुंचे प्रमुख सचिव, व्यवस्थाओं और सुरक्षा का किया निरीक्षण

    रतलाम सर्किल जेल में अचानक पहुंचे प्रमुख सचिव, व्यवस्थाओं और सुरक्षा का किया निरीक्षण

    प्रमुख सचिव जेल विभाग मुकेश चन्द गुप्ता ने किया सर्किल जेल रतलाम का आकस्मिक निरीक्षण

    सुरक्षा व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य, भोजन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और बंदी सुविधाओं का लिया जायजा

    रतलाम

    जेल विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश चन्द गुप्ता ने गुरुवार को सर्किल जेल रतलाम का आकस्मिक निरीक्षण कर जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने जेल प्रशासन को व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन तथा बंदियों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने जेल के मुख्य द्वार की सुरक्षा व्यवस्था एवं सीसीटीवी कंट्रोल रूम का अवलोकन किया। इसके साथ ही जेल अस्पताल एवं नशामुक्ति वार्ड का भ्रमण कर बीमार बंदियों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने जेल चिकित्सक से बंदियों को उपलब्ध कराए जा रहे उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी लेने के साथ अस्पताल में उपलब्ध औषधियों का भी निरीक्षण किया।

    गुप्ता ने जेल में निरुद्ध बंदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालयीन पेशी की व्यवस्था का अवलोकन किया। उन्होंने बंदियों के लिए संचालित इनकमिंग टेलीफोन बूथ एवं मुलाकात सुविधा के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

    प्रमुख सचिव ने जेल स्कूल एवं लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए बंदियों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक एवं पठन-पाठन संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। जेल लाइब्रेरी में उपलब्ध धार्मिक पुस्तकों का अवलोकन कर उन्होंने इस व्यवस्था पर प्रसन्नता व्यक्त की।

    निरीक्षण के दौरान गुप्ता ने पुरुष बंदी वार्ड एवं महिला वार्ड का भ्रमण कर बंदियों से सीधे संवाद किया तथा उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने बंदियों को उनकी समस्याओं के शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया।

    निरीक्षण के अंत में प्रमुख सचिव जेल विभाग मुकेश चन्द गुप्ता ने सर्किल जेल रतलाम में विराजित गणेश जी की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर सर्किल जेल रतलाम के अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया सहित जेल विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

     

  • MP Weather: 33.2 इंच बारिश दर्ज, मानसून सीजन के 11 दिन बाकी; 21 सितंबर तक बरसेंगे बादल

    MP Weather: 33.2 इंच बारिश दर्ज, मानसून सीजन के 11 दिन बाकी; 21 सितंबर तक बरसेंगे बादल

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम पड़ाव में है। सीजन खत्म होने में महज 11 दिन बाकी हैं और प्रदेश में अब तक 33.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। यानी करीब 4.1 इंच पानी की कमी अभी बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद महीने के आखिरी सप्ताह में किसी मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय होने पर कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है। इससे प्रदेश बारिश के सामान्य आंकड़े के करीब पहुंच सकता है ।हालांकि, सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की कमी बनी है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अभी सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों में सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए मानसून के बचे दिनों में लगातार बारिश की जरूरत होगी। वहीं, मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से अधिक पानी गिर चुका है।

    37 जिलों में अभी सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके उलट बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच है। इस लिहाज से सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए अब करीब 4.1 इंच बारिश की जरूरत है।

    मऊगंज और निवाड़ी में दोगुने से ज्यादा पानी
    दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से काफी आगे निकल चुकी है। मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे की तुलना में दोगुनी बारिश हो चुकी है। यानी जहां कुछ जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं इन जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी गिर चुका है।

    इन जिलों में सामान्य या ज्यादा बारिश
    प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है।

    इसके अलावा प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अब मानसून के अंतिम 11 दिन इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो कई जिलों का बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है।

    22 सितंबर तक होगी हल्की बारिश
    मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर बना रह सकता है। पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने से कुछ जिलों में बारिश हो रही है। वहीं, 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इसके असर से प्रदेश में मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

    जून की कमी अब तक पूरी नहीं हुई
    इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया और कई दिन बारिश थमी रही। जुलाई और अगस्त में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। सितंबर में बारिश होने के बावजूद पूरे मानसून में अब तक करीब 7 प्रतिशत की कमी बनी हुई है।

    22 सितंबर तक हल्की बारिश का दौर मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी, 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, इस समय पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम (चक्रवात) एक्टिव है। इस वजह से पश्चिमी हिस्से के जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इस सिस्टम से एमपी के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकती है।

    जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।

    आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी कोटा फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि अब तक भी प्रदेश में 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

    प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

    भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

    इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

     

  • इंदौर में UPI MDR का विरोध तेज, व्यापारियों ने लगाए पोस्टर; सरकार पर लगाए आरोप

    इंदौर में UPI MDR का विरोध तेज, व्यापारियों ने लगाए पोस्टर; सरकार पर लगाए आरोप

    इंदौर/ग्वालियर
    केंद्र सरकार द्वारा जब से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की घोषणा की गई है, तब से ही देश भर में व्यापारियों की नाराजगी जाहिर हो रही है. एक तरफ लोग इस नई व्यवस्था से परेशान हैं तो वहीं विपक्ष भी सरकार को निशाने पर लिए हुए है. ग्वालियर में कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों ने दुकानों पर इस संबंध में पोस्टर लगाए हैं। 

    इंदौर में व्यापारियों ने लगाए पोस्टर, 125 संगठनों की बैठक
    इंदौर में एमडीआर के खिलाफ मैदान में उतरे व्यापारियों का कहना है कि, ''यदि ऐसे भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इससे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि, ''अभियान के अगले चरण में सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी है. संगठन की ओर से चार दिनों में करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जरिए व्यापारियों की आपत्ति और उनकी मांग को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। 

    इंदौर निकलने से पहले सरकार पर निशाना
    इंदौर में शनिवार को राहुल गांधी के आने से पहले ही प्रदेश भर से कांग्रेस विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी द्वारा बुलाया गया है. ग्वालियर से कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार भी इंदौर पहुंच रहे हैं. लेकिन ग्वालियर से रवाना होने से पहले विधायक सतीश सिकरवार मीडिया से मुखातिब हुए. इस दौरान उन्होंने 15 अक्टूबर को लागू होने जा रहे यूपी ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को लेकर सरकार पर हमला बोला। 

    अलग-अलग टैक्स लगाकर सरकार कर रही जनता को परेशान
    विधायक सतीश सिकरवार का कहना है कि, ''जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से ही कोई ना कोई टैक्स लगाकर जानता को परेशान किया जा रहा है. पहले के समय में जैसे जज़िया कर लगा करता था, अंग्रेजों के जमाने में भी टैक्स लगते थे. उसी तरह सरकार हिटलरशाही चला रही है और आम आदमी को परेशान करने का काम कर रही है।

    एक तरफ ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दूसरी और टैक्स की मार
    कांग्रेस ने विधायक का कहना है कि, सरकार एक तरफ आम आदमी से ऑनलाइन पेमेंट करने की बात कह रही है. सारा काम नगद में बंद करने की बात कहती है. वहीं दूसरी तरफ इस टैक्स लगाकर जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है. ये निंदनीय है आने वाले समय में जनता इसका जवाब जरूर देगी। 

    एमपी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने की एमडीआर स्थगित करने की मांग
    मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का भी कहना है कि, ''डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के चक्कर में पहले ही कई व्यापारी वर्ग कई बार यूपीआई ट्रांजेक्शन से साइबर फ्रॉड्स, उनकी वजह से अकाउंट फ्रीज और फिर रिकवरी जैसी परेशानियों से गुजर रहे हैं. ऐसे में MDR भी व्यापारियों के लिए एक नए टैक्स की तरह होगा. कई बार छोटे व्यापारी को तो एक लाख तक का माल बेचने पर बमुश्किल 500-700 रुपये का ही मुनाफा होता है. ऐसे में एमडीआर की वजह से वह मुनाफा भी एमडीआर में चला जाएगा. इन हालातों को अगर देखा जाए तो व्यापारियों के हित में सरकार को यह नया शुल्क स्थगित करना चाहिए। 

     

  • जहरीली शराब केस में आरोपी के घर बुलडोजर चलाने पर रोक, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

    जहरीली शराब केस में आरोपी के घर बुलडोजर चलाने पर रोक, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

    जबलपुर 
     सागर जिले में जहरीली शराब कांड में प्रशासन व पुलिस विभाग द्वारा आरोपियों के घरो पर बुलडोजर कार्रवाई व परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की है। 

    मामले में आरोपी बनाया गया था शराब ठेकेदार
    दरअसल, जहरीली शराब कांड के आरोपी सिद्धार्थ कुशावाहा व उसकी मां की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस व प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ अवैधानिक तरीके से कार्रवाई की जा रही है. इसी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. याचिका में कहा गया था कि पुलिस द्वारा दर्ज 36 एफआईआर में से सिर्फ एक एफआईआर में याचिकाकर्ता सिद्धार्थ कुशवाहा को आरोपी बनाया गया है. उस पर आरोप है कि उसकी दुकान से शराब खरीदकर पीने के कारण एक व्यक्ति की मौत हुई है। 

    बुलडोजर कार्रवाई में निर्देशों का पालन नहीं
    याचिका में आगे बताया गया कि प्रशासन द्वारा उसकी शराब दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा पत्थर के क्रशर की लीज को भी निरस्त कर दिया है. याचिका में कहा गया था कि प्रशासन द्वारा बुलडोजर एक्शन के तहत उसके घर की बाउंड्री वॉल और प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा भी गिराया दिया गया है. इसके अलावा पुलिस परिवार के सदस्यों को भी पूछताछ के नाम पर कभी भी थाने बुलाती है या जबरदस्ती ले जाती है. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अंषुमान सिंह ने एकलपीठ को बताया कि प्रशासन द्वारा की जा रही बुलडोजर कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए 'डायरेक्शन ऑफ मैटर इन डिमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स' मामले में जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। 

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी राहत
    इसके अलावा पुलिस द्वारा पूछताछ के नाम पर परिजनों को अनावश्यक रूप से परिजनों को परेशान किया जाना भी अवैधानिक है. याचिका पर जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने गुरुवार व शुक्रवार को सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए अपने आदेश में कहा है कि नियम विरुद्ध तरीके से याचिकाकर्ता की प्रॉपर्टी को क्षतिग्रस्त नहीं किया जाए और अनावश्यक रूप से परिजनों को भी परेशान न किया जाए। 

  • नलखेड़ा में बड़ा हादसा, नाले में बही श्रद्धालुओं से भरी कार; 8 की मौत

    नलखेड़ा में बड़ा हादसा, नाले में बही श्रद्धालुओं से भरी कार; 8 की मौत

    आगर-मालवा 

    आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के पास शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। मंदिर के समीप बरसाती नाले में श्रद्धालुओं से भरी कार बह गई। हादसे में कार सवार 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। मृतकों में 3 बच्चे, 2 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल है। 

    जानकारी के मुताबिक, श्रद्धालु मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए नलखेड़ा पहुंचे थे। बरसाती नाले को पार करते समय उनकी कार तेज बहाव की चपेट में आकर पानी में बह गई। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। बचाव अभियान शुरू किया गया। फिलहाल मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है।

    कार सवार श्रद्धालु नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान मंदिर के पास मौजूद बरसाती नाले को पार करते समय उनकी कार अचानक तेज पानी के बहाव की चपेट में आ गई. देखते ही देखते पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि कार नाले में बह गई। 

    तेज बहाव के आगे नहीं टिक सकी कार
    बताया जा रहा है कि बारिश के बाद बरसाती नाले में पानी का बहाव काफी तेज था. इसी दौरान कार चालक ने नाले को पार करने की कोशिश की. पानी की तेज धार में वाहन असंतुलित हो गया और बह गया. हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई. जिस कार के हादसे का शिकार होने की जानकारी सामने आई है, उसका नंबर मध्य प्रदेश का ही है। 

    सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम
    हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई. नाले में बही कार और उसमें सवार लोगों की तलाश के लिए तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया. रेस्क्यू टीम ने नाले के आसपास के हिस्से में भी तलाशी अभियान चलाया. एक अधिकारी ने बताया कि शवों को बाहर निकाल लिया गया है. उनकी पहचान की जा रही है. सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा. प्रशासन ने अपील की है नाले के आसपास न आएं। 

    हादसे की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए. मौके पर लोगों की भीड़ जुटने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया. प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और राहत-बचाव अभियान को व्यवस्थित तरीके से चलाने का प्रयास किया जा रहा है। 

    बरसाती नाले में बह गई कार
    बताया जा रहा है कि बारिश के बाद बरसाती नाले में पानी का बहाव तेज था। श्रद्धालुओं की कार नाले के पास पहुंची। तेज बहाव में संतुलन बिगड़ने के बाद बह गई। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    हादसे में कार सवार सभी 8 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अभी तक मृतकों की आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है। प्रशासन की टीम शवों को बाहर निकालने और पहचान की प्रक्रिया में जुटी है।

    प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर
    हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। नाले में बही कार और उसमें सवार लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस और प्रशासन की टीम ने राहत-बचाव कार्य संभाला।

    बताया जा रहा है कि कार सवार श्रद्धालु नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। मां बगलामुखी मंदिर आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।