Category: मध्य प्रदेश

  • छिंदवाड़ा कफ सिरप केस में बड़ा अपडेट, सिरप बेचने वाले दवा विक्रेता को मिली जमानत

    छिंदवाड़ा कफ सिरप केस में बड़ा अपडेट, सिरप बेचने वाले दवा विक्रेता को मिली जमानत

    छिंदवाड़ा 
     छिंदवाड़ा कप सिरप कांड के एक आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिल गया है. हाईकोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने दवा के थोक विक्रेता राजेश सोनी को जमानत का लाभ प्रदान किया है. गुरुवार को छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें से एक आरोपी की जमानत खारिज कर दी गई, तो वहीं राजेश सोनी को जमानत का लाभ मिला गया। 

    जहरीले कफ सिरप से हुई थी 24 बच्चों की मौत
    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप के कारण 24 बच्चों की मौत हो गई थी. पुलिस ने जांच में पाया था कि कफ सिरप में 46 प्रतिशत डीआईडी था. पुलिस ने जांच के बाद कफ सिरप बनने वाली कंपनी श्रीसन के मालिक रंगनाथन गोविंदन, केमिस्ट सहित तीन डॉक्टर सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था. पूर्व में प्रकरण में आरोपी बनाई गई ज्योति सोनी व सौरभ को जमानत का लाभ मिल गया था। 

    दवा विक्रेता को भी बनाया गया था आरोपी
    इस घटना में कई बच्चों की मौत के बाद दवा के थोक विक्रेता राजेश सोनी के खिलाफ भी पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया था. राजेश सोनी को पुलिस ने आरोपी बनाते हुए अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया था. दवा विक्रेता की ओर से पेश किए गए जमानत आवेदन में तर्क दिया गया कि दवा के निर्माण में उनकी कोई भूमिका नहीं थी. दवा का स्टॉक आने पर उन्होंने उसकी बिक्री की थी. वह विगत 11 माह से न्यायिक हिरासत में है. ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ दिया जाए। 

    एकलपीठ ने सुनवाई के बाद दवा विक्रता को जमानत का लाभ प्रदान कर दिया. हालांकि, प्रकरण में एक और आरोपी डॉ. एस एस ठाकुर को जमानत का लाभ नहीं दिया, जिसके बाद डॉ. एसएस ठाकुर की ओर से जमानत आवेदन वापस लेने का आग्रह किया गया. एकलपीठ ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया। 

  • निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया मामले में बड़ा अपडेट, 3 आरोपियों के वारंट जारी; 21 को हाईकोर्ट में सुनवाई

    निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया मामले में बड़ा अपडेट, 3 आरोपियों के वारंट जारी; 21 को हाईकोर्ट में सुनवाई

    कटनी
     निलंबित फरा
    र सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित दो अन्य आरोपितों के खिलाफ जिला न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। मामले की जांच और गिरफ्तारी का प्रयास कर रही एसआईटी ने जिला न्यायालय में निलंबित सीएसपी सहित उनके सहयोगी क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ मियादी वारंट जारी करने को लेकर आवेदन दिया था।

    शुक्रवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन तिवारी की अदालत ने तीनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं और  25 सितंबर तक की मियाद निर्धारित की है। निर्धारित तिथि तक न्यायालय ने पुलिस को तीनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं।

    भ्रष्टाचार और हत्यारोपित को बचाने के गंभीर आरोप
    निलंबित सीएसपी सहित तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार, हत्या के आरोपितों को बचाने साजिश करने और करोड़ों की जमीन को दवाब बनाकर महज 18 लाख रुपये में अपने नाम करा लेने का आरोप है। तीनों ने जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत अर्जी लगाई थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था।

    आरोपितों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने के साथ पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने गिरफ्तारी पर दस हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया है और एक माह का समय बीतने तक पुलिस तीनों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

    हाईकोर्ट में भी चल रही सुनवाई
    इधर निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया से संबंधित मामला हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में भी विचाराधीन है। उनकी ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने अगली सुनवाई से पहले जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    मामले में 21 सितंबर को अगली सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत पर विचार किया जाना है। मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा का कहना है कि कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध के मामले में जिला न्यायालय ने तीनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं।

    1 करोड़ की जमीन महज 15 से 20 लाख रुपये में खरीदी गई
    इसके एवज में उन्होंने आरोपियों की जमीन बहुत कम दर में अपने एजेंट के नाम पर खरीदी है. उक्त जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी. जबकि उसके बैंक खाते में जमीन खरीदने से पहले महज कुछ हजार रुपये थे. मारूफ के बैंक खाते में क्षितिज राज पात्रे ने राशि ट्रांसफर की थी, जिसके बाद एक करोड़ रुपये की जमीन को महज 15 से 20 लाख रुपये में खरीदी गयी थी. विभागीय स्तर पर जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। 

    निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया तथा क्षितिज राज पात्रे ने अग्रिम जमानत के लिए जिला न्यायालय में आवेदन दायर किया था. जिला न्यायालय द्वारा आवेदन खारिज किये जाने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी. याचिका की सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से दर्ज एफआईआर पर रोक लगाये जाने की मांग करते हुए आवेदन दायर किया गया था. एकलपीठ ने आवेदन पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने का आदेश जारी किया है।  

  • मेधावी छात्रों को ई-स्कूटी की सौगात, CM मोहन यादव ने छात्रा के साथ की स्कूटी की सवारी

    मेधावी छात्रों को ई-स्कूटी की सौगात, CM मोहन यादव ने छात्रा के साथ की स्कूटी की सवारी

    भोपाल 
    MP के मेधावी छात्रों को आज बड़ी सौगात मिली है। इन छात्र छात्राओं को सरकार की ओर स्कूटी दी जा रही है। भोपाल के शिवाजी नगर के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव ने ऐसे कुछ बच्चों को सांकेतिक रूप से स्कूटी की चाबी दी। स्टूडेंट के खातों में वाहन की राशि भी ट्रांसफर की। कार्यक्रम में एक छात्रा ने सीएम मोहन यादव को पीछे बैठाकर स्कूटी दौड़ाई, उनके साथ साथ सुरक्षाकर्मी भी भागते दिखे।कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, मंत्री कृष्णा गौर और मंत्री विजय शाह भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

    स्कूटी पर बैठे सीएम
    छात्र और छात्राएं स्कूटी पाकर बेहद खुश थे। सीएम मोहन यादव भी स्कूटी पर बैठे और एक छात्रा ने स्कूटी चलाई। सीएम हेलमेट लगाकर स्कूटी पर बैठे थे। सीएम मोहन यादव ने बच्चों को स्कूटी देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। 

    मुख्यमंत्री ने स्कूटी प्राप्त करने वाली छात्रा से बातचीत की
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूटी प्राप्त करने वाली छात्रा खुशी राय से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि वह आगे की पढ़ाई के लिए किस विषय में एडमिशन ले रही हैं। खुशी ने बताया कि वह सीए की तैयारी कर रही हैं और साथ में बीकॉम कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने उसके परिवार के बारे में भी पूछा। खुशी ने बताया कि परिवार में उसके मम्मी-पापा हैं। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रा से हल्के-फुल्के अंदाज में परिवार को लेकर बातचीत की और उसे स्कूटी मिलने पर बधाई देते हुए आगे की पढ़ाई के लिए शुभकामनाएं दीं।

    पेंटिंग्स देख खुश हुए सीएम
    सीएम मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान बच्चों की ओर से बनाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इसमें बच्चों ने आकर्षक पेंटिंग्स बनाई थी। सीएम ने बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा और कल्पनाशीलता की सराहना की। सीएम ने बच्चों से पेंटिंग्स के बारे में अनेक प्रश्न किए, जिसके बारे मे बच्चों ने उन्हें इसके बारे में बताया।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, मंत्री कृष्णा गौर और मंत्री विजय शाह मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान विद्यार्थियों के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।

    मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के पात्रता नियमों में इस साल बदलाव किया गया है। वर्ष 2026 से योजना का लाभ लेने के लिए 12वीं में कम से कम 70% अंक हासिल करना जरूरी है। इसके साथ ही विद्यार्थी का अपने स्कूल में प्रथम स्थान पर होना भी अनिवार्य किया गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को प्रदेशभर के 7400 से ज्यादा मेधावी विद्यार्थियों को बड़ी सौगात दी। शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को ये ई-स्कूटी दी जा रहीं हैं। राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण का कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर में आयोजित किया गया।

    प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में ही 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान आना जरूरी है। प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत विद्यार्थी को दिया जाता है।

    योजना में सभी संकायों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपए और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपए की राशि प्रदान की जाती है।

    95% अंक वाले शब्द अहिरवार से भी सीएम ने की बात मुख्यमंत्री ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालय सुभाष के विद्यार्थी शब्द अहिरवार से भी संवाद किया। शब्द ने बताया कि उसने 12वीं में 95% अंक हासिल किए हैं। परिवार के बारे में पूछने पर उसने बताया कि उसके पिता और मां नहीं हैं और वह चाचा-चाची के साथ रहता है। मुख्यमंत्री ने पूछा कि उसे किसी तरह की परेशानी तो नहीं है, जिस पर शब्द ने कहा कि उसे कोई परेशानी नहीं है। शब्द ने बताया कि वह सीए की तैयारी कर रहा है। परिवार में किसी के सर्विस या बिजनेस में होने के सवाल पर उसने बताया कि ऐसा कोई नहीं है। उसने कहा कि फाइनेंस और अकाउंट्स में उसकी रुचि है, इसलिए उसने सीए बनने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने उसकी रुचि और लक्ष्य की सराहना की।

    आकाश साहू ने कहा- एग्रीकल्चर स्टार्टअप शुरू करूंगा मुख्यमंत्री ने विद्यार्थी आकाश साहू से भी बातचीत की। आकाश ने बताया कि उसके परिवार में माता-पिता, दो भाई और एक बहन हैं और उसके पिता कार्यक्रम में आए हैं। स्कूटी मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए उसने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री ने उससे पूछा कि क्या यह उसकी पहली गाड़ी है। आकाश ने बताया कि घर में उसके पिता के पास पहले से वाहन है। मुख्यमंत्री ने उसे वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करने की सलाह भी दी।

    आगे के लक्ष्य के बारे में पूछने पर आकाश ने बताया कि वह अपना एग्रीकल्चर स्टार्टअप शुरू करना चाहता है। उसने बताया कि वह एग्रीकल्चर का छात्र है और 12वीं में उसके 95.2% अंक आए हैं। उसके पिता गेहूं और सोयाबीन की खेती करते हैं और सालाना करीब 4 से 5 लाख रुपए की कमाई होती है।

    आकाश ने बताया कि वह ऑनलाइन क्विक कॉमर्स के माध्यम से फल और सब्जियों की सप्लाई का काम शुरू करना चाहता है। उसने इसके लिए ब्लिंकिट जैसी कंपनी के माध्यम से फल-सब्जी सप्लाई का काम करने की योजना बताई। मुख्यमंत्री ने उसकी जानकारी और उद्यम शुरू करने के विचार की सराहना करते हुए उसे शुभकामनाएं दीं।

    अब तक 23000 से अधिक विद्यार्थी हो चुके लाभान्वित
    प्रदेश सरकार द्वारा योजना अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के 7400 से अधिक पात्र विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का वितरण किया जा रहा है। मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना से अब तक प्रदेश के 23000 से अधिक पात्र विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर अब तक लगभग 246 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं।

  • सेना-पुलिस भर्ती की तैयारी का मौका, पार्थ योजना में युवाओं को मिलेगी शारीरिक ट्रेनिंग

    सेना-पुलिस भर्ती की तैयारी का मौका, पार्थ योजना में युवाओं को मिलेगी शारीरिक ट्रेनिंग

    खेल मैदान से सुरक्षा बलों की भर्ती तक, युवाओं को तैयार करेगा खेल एवं युवा कल्याण विभाग

    पार्थ योजना के अंतर्गत युवाओं को सेना-पुलिस भर्ती की शारीरिक तैयारी का अवसर
    तात्या टोपे स्टेडियम भोपाल में शुरू होगा शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम, करीब 100 सीटें प्रस्तावित; आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितंबर

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के युवाओं को भारतीय सेना, पुलिस एवं अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए शारीरिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा पार्थ योजना (Police-Army Recruitment Training for Humanity and Hunnar) के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। योजना के तहत युवाओं को भर्ती परीक्षाओं में निर्धारित शारीरिक मापदंडों एवं दक्षता की तैयारी के लिए प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। तात्या टोपे राज्य खेल परिसर, भोपाल में शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब 100 सीटें प्रस्तावित की गई हैं।

    25 सितंबर तक आवेदन, करीब 100 सीटों का प्रस्ताव

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 25 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में करीब 100 सीटें उपलब्ध होंगी, जिनकी संख्या आवश्यकता के अनुसार इससे अधिक भी हो सकती है। प्रशिक्षण की अवधि शारीरिक परीक्षा की अवधि के अनुरूप निर्धारित की जाएगी।

    सुबह और शाम दो सत्रों में होगी शारीरिक तैयारी

    प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत अभ्यर्थियों को प्रतिदिन दो सत्रों में शारीरिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। सुबह का प्रशिक्षण समय प्रातः 8 से 10:30 बजे तक तथा शाम का प्रशिक्षण समय शाम 6 से 8 बजे तक निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में निर्धारित शारीरिक मापदंडों एवं दक्षता संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप अभ्यर्थियों को तैयार करना है।

    पुलिस मुख्यालय से संबद्ध प्रधान आरक्षक देंगे प्रशिक्षण

    पार्थ योजना के अंतर्गत तात्या टोपे स्टेडियम, भोपाल में शारीरिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश से प्रधान आरक्षक क्रमांक 972 बालेश यादव को छह माह की अवधि के लिए संबद्ध किया गया है। पुलिस विभाग के आदेश क्रमांक पुमु/विसबल/7(4)/1048/2026, दिनांक 31 अगस्त 2026 के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण कार्य के लिए नियुक्त किया गया है। 9 सितंबर 2026 को 23वीं वाहिनी विसबल, भोपाल से कार्यमुक्त कर उन्हें टाट्या टोपे स्टेडियम में प्रशिक्षण देने के लिए रवाना किया गया।

    10 संभागीय जिला मुख्यालयों से योजना शुरू करने का प्रावधान

    पार्थ योजना के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में विभागीय अधोसंरचना का उपयोग करते हुए 10 संभागीय जिला मुख्यालयों में योजना शुरू करने का प्रस्ताव है। जिला खेल अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दिए जाने का प्रावधान है। प्रशिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है।

    योजना का संचालन विभागीय खिलाड़ी प्रशिक्षक कल्याण समिति के माध्यम से किए जाने का प्रस्ताव है। प्रशिक्षणार्थियों का रिकॉर्ड भी संधारित किया जाएगा, जिससे प्रशिक्षण की प्रगति एवं परिणामों का मूल्यांकन किया जा सके।

    400 मीटर ट्रैक से लेकर हाई जंप उपकरण तक की व्यवस्था

    पार्थ योजना के अंतर्गत शारीरिक प्रशिक्षण केंद्रों के लिए आवश्यक खेल अधोसंरचना की व्यवस्था का प्रावधान है। इसके अंतर्गत 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, सिंथेटिक, सिंडर एवं मड ट्रैक की उपलब्धता, लॉन्ग जंप पिट तथा आवश्यक उपकरण और उपयुक्त स्थान की व्यवस्था शामिल है। हाई जंप के लिए राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई गई है।

    एक से 12 माह तक के प्रशिक्षण विकल्प का प्रावधान

    पार्थ योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण की अवधि को तीन स्तरों में विभाजित किया गया है—

    01 वर्ष का प्रशिक्षण : गहन तैयारी के लिए।

    06 माह का प्रशिक्षण : मध्यम अवधि की तैयारी के लिए।

    01 से 03 माह का प्रशिक्षण : त्वरित तैयारी के लिए।

    प्रशिक्षण शुल्क स्थानीय परिस्थितियों एवं जिला स्तरीय समिति के निर्णय के अनुसार निर्धारित किए जाने का प्रावधान है। योजना के अंतर्गत तीन माह के प्रशिक्षण के लिए 4 हजार रुपये, बालिकाओं के लिए तीन माह के प्रशिक्षण के लिए 2 हजार रुपये तथा छह माह के प्रशिक्षण के लिए 8 हजार शुल्क का उल्लेख किया गया है।

    युवाओं में अनुशासन, फिटनेस और रोजगार के अवसर बढ़ाने का उद्देश्य

    पार्थ योजना का उद्देश्य मध्यप्रदेश के युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए शारीरिक रूप से तैयार करना है। योजना के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवं राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया है। योजना के अपेक्षित लाभों में युवाओं की शारीरिक क्षमता में वृद्धि, सुरक्षा बलों में भर्ती की सफलता दर को बढ़ावा देना, स्थानीय अधोसंरचना का उपयोग एवं रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहन देना शामिल है।

    नियमित मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन की व्यवस्था

    पार्थ योजना के अंतर्गत योजना की प्रगति की नियमित रिपोर्टिंग एवं मूल्यांकन के लिए संचालनालय स्तर पर अधिकारी नामांकित किए जाने का प्रावधान है। सभी जिलों की प्रगति रिपोर्ट संचालक, खेल एवं युवा कल्याण, मध्यप्रदेश को प्रस्तुत की जाएगी। प्रशिक्षणार्थियों की भर्ती सफलता दर को प्रमुख सफलता मानदंड के रूप में मापने का प्रस्ताव है। योजना की त्रैमासिक एवं वार्षिक समीक्षा भी की जाएगी।

     

  • तीसरी बार इंग्लिश चैनल पार करने का लक्ष्य, CM डॉ. यादव से लोहिया ने की सौजन्य भेंट

    तीसरी बार इंग्लिश चैनल पार करने का लक्ष्य, CM डॉ. यादव से लोहिया ने की सौजन्य भेंट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पद्मसम्मानित लोहिया ने की सौजन्य भेंट

    तीसरी बार इंग्लिश चैनल पार करने के अभियान पर लंदन रवाना होंगे लोहिया

    भोपाल 
    अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग तैराक एवं पद्मपुरस्कार से सम्मानित सत्येंद्र सिंह लोहिया ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से नई दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने तीसरी बार इंग्लिश चैनल पार करने के आगामी अभियान की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोहिया को अभियान के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल प्रयास की कामना की।

    दिव्यांग तैराक सत्येंद्र सिंह लोहिया 19 सितंबर 2026 को अपनी टीम के साथ दिल्ली से लंदन रवाना होंगे। उनकी टीम द्वारा 24 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच मौसम एवं समुद्री परिस्थितियों के अनुकूल होने पर इंग्लिश चैनल पार करने का प्रयास किया जाएगा। टीम 6 अक्टूबर को भारत वापस लौटेगी। मध्यप्रदेश की टीम में ग्वालियर के रामबरन पाल और भिंड के गजेंद्र सिंह टीम सदस्य तथा श्योपुर के मुजीब खान कोच के रूप में शामिल हैं।

    दिव्यांग तैराक लोहिया को मध्यप्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित विक्रम पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मसे सम्मानित किया। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए प्रदेश और देश का नाम गौरवान्वित किया है। उनके नाम लगभग 40 राष्ट्रीय पदक हैं। हाल ही में 12 फरवरी 2026 को उन्होंने न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप और दक्षिणी द्वीप को अलग करने वाली कुक स्ट्रेट को 9 घंटे 22 मिनट में पार कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट में लोहिया ने कहा कि इंग्लिश चैनल पार करने का यह अभियान प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय है। उनका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने के साथ ही युवाओं एवं दिव्यांग खिलाड़ियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करना है।

     

  • ऋषिगालव महाविद्यालय में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता व्याख्यान, पूर्व एनसीसी कैडेट के लेफ्टिनेंट बनने पर भव्य स्वागत

    ऋषिगालव महाविद्यालय में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता व्याख्यान, पूर्व एनसीसी कैडेट के लेफ्टिनेंट बनने पर भव्य स्वागत

    मुरैना
     ऋषिगालव महाविद्यालय में शुक्रवार को टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुरैना स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य अधिकारी अवधेश शर्मा (District Coordinator TB PMDT), योगेंद्र सिंह कुशवाहा (incharge sts tu morena) एवं Govind senthiya (District Coordinator Hindustan wellness ngo ) ने विद्यार्थियों को टीबी रोग के लक्षण, बचाव, जांच एवं उपचार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से टीबी के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य आई. ए. गौरी, एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुश्ताक अली, प्रोफेसर डॉ. पी. के. चतुर्वेदी, चीफ ऑफिसर प्रदीप शर्मा एवं केयरटेकर अजय कुमार राजपूत और लगभग 150 से अधिक एनसीसी कैडेट उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित एवं लीड करने के लिए 8 एमपी बटालियन एनसीसी के कमान अधिकारी कर्नल सुमित दुआ के आदेश अनुसार  ग्वालियर से हवलदार प्रभु सिंह एवं हवलदार चिरेंद्र सिंह मुरैना पहुंचे। हवलदार प्रभु सिंह ने बताया कि वह अभी मुरैना शहर में दो दिन रहेंगे और एनसीसी कैडेट के साथ और अपनी टीम के साथ मुरैना शहर के हर एक ब्लॉक में घर-घर जाकर टीबी मुक्त भारत अभियान चलाएंगे। 

    इसके पश्चात महाविद्यालय के लिए गौरव का क्षण उस समय आया, जब महाविद्यालय के पूर्व एनसीसी कैडेट सीनियर अंडर ऑफिसर शिवकुमार सिकरवार लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार कॉलेज पहुंचे। उनके आगमन पर महाविद्यालय परिवार एवं एनसीसी कैडेटों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।

    महाविद्यालय के प्राचार्य आई. ए. गौरी, प्रोफेसर डॉ. पी. के. चतुर्वेदी एवं एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुश्ताक अली ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर एनसीसी से जुड़े कैडेटों एवं विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    वक्ताओं ने कहा कि किसी पूर्व एनसीसी कैडेट का लेफ्टिनेंट बनकर अपने महाविद्यालय में लौटना वर्तमान कैडेटों के लिए प्रेरणा का विषय है। यह उपलब्धि युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती है।

    महाविद्यालय में आयोजित दोनों कार्यक्रमों में एनसीसी एवं महाविद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता रही।

  • हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी मंडी समिति को पड़ी भारी, श्रमिक को ₹6.44 लाख देने के निर्देश

    हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी मंडी समिति को पड़ी भारी, श्रमिक को ₹6.44 लाख देने के निर्देश

    ग्वालियर
     बहाली का आदेश होने के बावजूद श्रमिक को सेवा में वापस नहीं लेने के मामले में कृषि उपज मंडी समिति को अब 6 लाख 44 हजार 137 रुपये का भुगतान करना होगा।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंडी समिति की रिट अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने 17 सितंबर को कृषि उपज मंडी समिति की अपील पर सुनवाई की।

    श्रम न्यायालय ने दिया था बहाली का आदेश
    मामला राकेश सक्सेना से जुड़ा है। श्रम न्यायालय क्रमांक-1, ग्वालियर ने एक फरवरी 2003 को आदेश जारी कर राकेश सक्सेना को बिना पिछले वेतन के सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया था। यह आदेश हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन बरकरार रहा। इसके बावजूद उनकी बहाली नहीं की गई और वे 31 अगस्त 2007 को सेवानिवृत्त हो गए।

    वेतन के लिए श्रम न्यायालय में दिया आवेदन
    इसके बाद राकेश सक्सेना ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33-सी(2) के तहत श्रम न्यायालय में आवेदन देकर बहाली के आदेश से सेवानिवृत्ति तक के वेतन की मांग की। उन्होंने इसकी गणना भी प्रस्तुत की। मंडी समिति ने श्रम न्यायालय में लिखित जवाब दिया, लेकिन गणना पर कोई आपत्ति नहीं की।

    हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
    श्रम न्यायालय ने 6 लाख 44 हजार 137 रुपये भुगतान का आदेश दिया। मंडी समिति ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान उसके अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि गणना पर श्रम न्यायालय में कोई विवाद नहीं किया गया था। अब अलग गणना पत्र के जरिए आपत्ति की जा रही है।

     

  • SC विद्यार्थियों के लिए बड़ा सहारा, 12 साल में ₹7,788 करोड़ से ज्यादा की छात्रवृत्ति वितरित

    SC विद्यार्थियों के लिए बड़ा सहारा, 12 साल में ₹7,788 करोड़ से ज्यादा की छात्रवृत्ति वितरित

    पिछले 12 वर्षों में 2.24 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित

    प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन तक विद्यार्थियों को मिल रहा आर्थिक सहायता का संबल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च, तकनीकी, व्यावसायिक एवं विदेश अध्ययन तक विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    प्रदेश में वर्ष 2014-15 से वर्ष 2025-26 तक अनुसूचित जाति के कुल 2 करोड़ 24 लाख 59 हजार 478 विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। छात्रवृत्ति की राशि डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।

    राज्य छात्रवृत्ति से 1 करोड़ 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ

    अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही शिक्षा से जोड़ने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक कक्षा पहली से आठवीं तक के 1 करोड़ 40 लाख 41 हजार 131 विद्यार्थियों को 466 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत कक्षा पहली से पांचवीं तक की बालिकाओं को 10 माह की अवधि के लिए 250 रुपये प्रतिमाह, कक्षा छठवीं से आठवीं तक के बालकों को 200 रुपये प्रतिमाह और बालिकाओं को 600 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। यह राशि शत-प्रतिशत राज्य शासन द्वारा वहन की जाती है।

    प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति से 35 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला शैक्षणिक संबल

    कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक योजना के अंतर्गत 35 लाख 73 हजार 613 विद्यार्थियों को 993 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है। योजना के अंतर्गत 2.50 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले पालकों के बालकों को 600 रुपये और बालिकाओं को 1,200 रुपये 10 माह के लिए प्रदान किए जाते हैं। वहीं 2.50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय सीमा वाले परिवारों के छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है।

    कक्षा 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को 620 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

    उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तथा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति समूह-4 संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत अब तक 21 लाख 11 हजार 249 छात्र-छात्राओं को 620 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। केंद्र एवं राज्य शासन के 60:40 अनुपात में संचालित इस योजना के अंतर्गत कक्षा 11वीं-12वीं के गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 2 हजार 500 रुपये और छात्रावासी विद्यार्थियों को 4 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जा रहा है।

    उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति

    अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों की उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत महाविद्यालयीन एवं विश्वविद्यालयीन स्तर के 27 लाख 33 हजार 485 छात्र-छात्राओं को 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति एवं शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया गया है।

    समूह-1 में एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, एमडी, एमएस, एमबीए, एमसीए, एमफिल, पीएचडी आदि पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क के साथ गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा छात्रावासी विद्यार्थियों को 13 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। समूह-2 में बी.फार्मा, नर्सिंग, होटल मैनेजमेंट, एमएससी, एमकॉम, एमएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार 500 रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 9 हजार 500 रुपये तथा समूह-3 में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। शासकीय शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए शुल्क भुगतान के संबंध में आय सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है।

    विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति से विद्यार्थियों को मिल रहे उच्च शिक्षा के वैश्विक अवसर

    अनुसूचित जाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ‘विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु छात्रवृत्ति योजना’ संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 50 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। पात्र विद्यार्थियों के पालकों की वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपये तक निर्धारित है।

    योजना के माध्यम से अब तक 150 से अधिक शोधार्थी एवं विद्यार्थी अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, रूस, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, चीन, मलेशिया और सिंगापुर सहित विभिन्न देशों में अध्ययन कर चुके हैं। योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्योर एवं एप्लाइड साइंस, एग्रीकल्चर, मेडिकल, मैनेजमेंट, इंटरनेशनल कॉमर्स, लॉ, फॉरेस्ट्री एवं मानविकी विषयों में अध्ययन के लिए शिक्षण शुल्क, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क, निर्वाह भत्ता एवं हवाई यात्रा का किराया राज्य शासन द्वारा वहन किया जाता है।

     

  • पिछड़ा वर्ग के छात्रों को बड़ी आर्थिक मदद, 15 साल में 5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभांवित

    पिछड़ा वर्ग के छात्रों को बड़ी आर्थिक मदद, 15 साल में 5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभांवित

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णयों के फलस्वरूप प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के हर स्तर पर अभूतपूर्व प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग मिल रहा है। पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन के लिये छात्रवृत्ति, नि:शुल्क कोचिंग और प्रशिक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पिछले 15 वर्षों में 13 हजार 156 करोड़ 51 लाख से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई है। योजनाओं से लगभग 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार 54 से अधिक विद्यार्थी लाभांवित हुए।

    प्री एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से शिक्षा का सशक्तिकरण

    स्कूली स्तर पर ड्रॉप-आउट दर को समाप्त करने और बच्चों की पढ़ाई निरंतर बनाए रखने के लिए संचालित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक पिछड़ा वर्ग के 4 करोड़ 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों को ₹ 2,535 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा में उत्कृष्ट अंक लाने वाले होनहारों को 'प्रावीण्य (मेधावी) छात्रवृत्ति योजना' के तहत पिछड़ा वर्ग के 2,185 विद्यार्थियों को 1 करोड़ 69 लाख रूपये की राशि दी गई है। उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में कॉलेज स्तर के छात्रों को राहत देते हुए 'पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना' के तहत वर्ष 2012-13 से 2026-27 के दौरान इसी वर्ग के 84.22 लाख विद्यार्थियों को ₹10,467 करोड़ की राशि से संबल प्रदान किया गया है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग, प्रोत्साहन और कौशल विकास

    पिछड़ा वर्ग के युवाओं को प्रशासनिक और प्रतियोगी सेवाओं में सफलता दिलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2021-22 में प्रारंभ की गई 'सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना' के तहत 11,174 शिक्षित युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 23 करोड़ 9 लाख रूपये के व्यय से निशुल्क कोचिंग दी गई है। इसी प्रकार संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले 3,354 पिछड़ा वर्ग अभ्यर्थियों को 'सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना' के तहत 7 करोड़ 64 लाख रूपये की राशि प्रदान की गई। इसके अलावा वर्ष 2026-27 से युवाओं के सर्वांगीण प्रशिक्षण के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' के अंतर्गत रू 4 करोड़ 83 लाख राशि का व्यय कर 3,827 युवाओं को सफलता पूर्वक प्रशिक्षित किया गया है।

    विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' से वैश्विक पटल पर साकार होते सपने

    'पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' में प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वर्ष 2008-09 से लेकर अब तक पिछड़ा वर्ग के कुल 341 विद्यार्थियों को 122 करोड़ 9 लाख रूपये का वित्तीय अनुदान देकर विदेशों में पढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

     

  • ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ का दिखेगा भव्य नजारा, MP के 6 शहरों में जुटेंगे हजारों नागरिक

    ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ का दिखेगा भव्य नजारा, MP के 6 शहरों में जुटेंगे हजारों नागरिक

    मध्यप्रदेश में बनेगी ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ की विराट तस्वीर 

    भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में हजारों नागरिक बनाएंगे ह्यूमन रंगोली
    ड्रोन कैमरे से दर्ज होगा जनभागीदारी का भव्य दृश्य

    भोपाल

    सेवा, सहभागिता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के अवसर पर 9 और 10 अक्टूबर को विशेष आयोजन किया जाएगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ थीम पर प्रदेश के छह जिलों में बड़े मैदानों पर विशाल ह्यूमन रंगोली बनाई जाएगी। इस अनूठे आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता होगी और मानव रंगोली के माध्यम से सेवा, राष्ट्रभावना, स्थानीय संस्कृति तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जाएगा।

    भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में जनभागीदारी को प्रमुख आधार बनाया गया है। हजारों नागरिक एक निर्धारित स्वरूप में एक साथ खड़े होकर ऐसी जीवंत मानव रंगोली का निर्माण करेंगे, जिसे ऊपर से देखने पर एक विशाल चित्र और संदेश के रूप में देखा जा सकेगा। आयोजन के दौरान ड्रोन कैमरों के माध्यम से इस पूरे दृश्य को रिकॉर्ड किया जाएगा।

    सेवा से राष्ट्र निर्माण तक पहुंचेगा संदेश

    ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम का उद्देश्य सेवा को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है। आयोजन में स्थानीय कला और लोक-संस्कृति को भी स्थान दिया जाएगा। इसके साथ विकसित भारत के संकल्प और देश की प्रगति का संदेश भी मानव रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

    स्थानीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम

    आयोजन में मध्यप्रदेश की स्थानीय कला एवं लोक-संस्कृति को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की योजना है। विशाल मानव रंगोली के निर्माण के दौरान ड्रोन शूटिंग के जरिए ऊपर से पूरे आयोजन की तस्वीर सामने आएगी। इससे अलग-अलग जिलों में होने वाली जनभागीदारी का व्यापक दृश्य तैयार होगा और सेवा संकल्प का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा।

    ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम के लिए राज्य स्तर पर नोडल अनुसूचित जाति मंत्री श्री नागर सिंह चौहान रहेंगे। राज्य प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि को दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि जनसंपर्क विभाग और संबंधित छह जिलों का जिला प्रशासन आयोजन में सहयोगी भूमिका निभाएगा।