Category: मध्य प्रदेश

  • भोपाल से 351 सरकारी बसों की शुरुआत, 7 शहरों को मिलेगा परिवहन लाभ

    भोपाल से 351 सरकारी बसों की शुरुआत, 7 शहरों को मिलेगा परिवहन लाभ

    भोपाल
    मध्यप्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की वापसी हुई है। भोपाल के भेल दशहरा मैदान से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और CM मोहन यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया। 351 बसें 7 शहरों में इंटरसिटी और इंट्रासिटी सेवा देंगी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा" कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

    CM मोहन यादव ने कहा- नई सेवा के तहत 180 इलेक्ट्रिक बसें भी सड़कों पर उतारी गई हैं। इसका मकसद शहरों के साथ गांवों को भी बेहतर बस कनेक्टिविटी से जोड़ना है। सरकार ने 75% ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। बसों में आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षा और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी जी को "रोड नेटवर्क ऑफ मध्यप्रदेश विजन-2047" से अवगत कराया।इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में जारी विभिन्न विकास एवं सड़क परियोजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा" कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

    उन्होंने कहा- सरकार ने पहले साल 1,500 बसें चलाने और 2031 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा है। सेवा PPP मॉडल पर संचालित होगी, जिसमें निजी ऑपरेटर भी शामिल होंगे। उन्हें विज्ञापन और कार्गो से अतिरिक्त आय के अवसर भी मिलेंगे।

    – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज भोपाल के लालघाटी में अंत्योदय एवं एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता श्रद्धेय स्व. पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की एवं उन्हें नमन किया।

    – इस अवसर पर उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के राष्ट्रसेवा, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान एवं मानव कल्याण के प्रति समर्पित विचारों का स्मरण किया। साथ ही पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा –

    * प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के जरिए प्रदेशवासियों का सपना पूरा हो रहा है।

    * पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी के कर कमलों से 351 इंटरसिटी एवं इंट्रासिटी बसों की सौगात मिली है।

    * प्रदेश में 21 साल बाद फिर से राज्य परिवहन सेवा की शुरुआत हो रही है।

    * राज्य परिवहन सेवा की लंबे समय से मांग की जा रही थी, जो आज पूरी हो रही है।

    * आज का दिन प्रदेश के इतिहास में ऐतिहासिक है।

    * यह परिवहन सेवा प्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी।

    * मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनेगी।

    * इस सेवा की शुरुआत में बस मालिकों के हितों का भी ध्यान रखा गया है।

    * मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रदेशवासियों को बेहतर यात्री परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा –

    – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कनेक्टिविटी, मोबिलिटी और पर्यावरण संरक्षण के साथ सुगम यातायात सुविधा देने वाले देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

    * प्रदेश में परिवहन सुविधा के क्षेत्र में आज स्वर्णिम दिन है।

    * सर्वसुविधायुक्त बसें प्रदेश के यात्रियों के लिए बड़ी सौगात हैं।

    * लोक निर्माण विभाग सभी विभागों के साथ समन्वय कर कार्य कर रहा है।

    * सड़कों के गड्ढे सुधारने के लिए विभाग ने लोकपथ ऐप बनाया है।

    * लोकपथ ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल पार्टनर बन चुका है।

    * लोकपथ ऐप पर मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसों की समय-सारणी भी उपलब्ध होगी।

    * केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश में जारी हाईवे प्रोजेक्ट्स के निर्माण कार्यों की समीक्षा की है।

    * केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने शहपुरा टोल नाके को अस्थायी रूप से बंद करने की मंजूरी दी है।
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  • 225 करोड़ का हेलीकॉप्टर खरीदा, हर 50 KM पर बनेंगे हेलीपैड

    225 करोड़ का हेलीकॉप्टर खरीदा, हर 50 KM पर बनेंगे हेलीपैड

    भोपाल

    मध्य प्रदेश सरकार के हवाई बेड़े में जल्द ही दो नए विमान शामिल होने जा रहे हैं। सरकार ने करीब 225 करोड़ रुपए की लागत से एयरबस ACH160 हेलीकॉप्टर खरीदा है। वहीं, करीब 350 करोड़ रुपए की कीमत वाला बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 बिजनेस जेट भी सरकारी बेड़े में शामिल होने वाला है। जानकारी के मुताबिक, जेट की डिलीवरी सितंबर के आखिरी तक होने की संभावना है।

    नए हेलीकॉप्टर को राज्य सरकार के वीआईपी और आधिकारिक यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। एयरबस ACH160 आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस हेलीकॉप्टर है। इसके शामिल होने के बाद राज्य सरकार के पास मौजूद हेलीकॉप्टर बेड़े में एक और आधुनिक विमान जुड़ जाएगा।

    वहीं, बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट को लंबी दूरी की आधिकारिक यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। करीब 350 करोड़ रुपए की लागत वाले इस विमान की डिलीवरी सितंबर के अंत तक होने की संभावना बताई जा रही है। जेट के शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की लंबी दूरी की यात्राओं के लिए सरकारी स्तर पर एक नया विकल्प उपलब्ध होगा।

    सरकारी हवाई बेड़े में नए हेलीकॉप्टर और जेट को शामिल किए जाने के पीछे प्रशासनिक और आधिकारिक यात्राओं को सुगम बनाने का उद्देश्य बताया जा रहा है। मध्य प्रदेश का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नियमित रूप से दौरे करने पड़ते हैं। ऐसे में सरकारी विमान और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल यात्रा के समय को कम करने में मदद करता है।

    एयरबस ACH160 अपनी आधुनिक तकनीक के कारण दुनिया के नए पीढ़ी के हेलीकॉप्टरों में शामिल है। वहीं बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 को बिजनेस एविएशन श्रेणी के आधुनिक जेट के तौर पर जाना जाता है। इसमें लंबी दूरी की उड़ानों और यात्रियों की सुविधा से जुड़ी कई आधुनिक सुविधाएं होती हैं।

    दोनों विमानों की खरीद और बेड़े में शामिल होने की जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब सरकारी परिवहन व्यवस्था में आधुनिक संसाधनों को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इन विमानों के संचालन, रखरखाव और उपयोग से जुड़ी विस्तृत जानकारी तथा कुल वार्षिक खर्च अलग-अलग प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

    फिलहाल एयरबस ACH160 हेलीकॉप्टर करीब 225 करोड़ रुपए की लागत से खरीदे जाने की जानकारी है, जबकि बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट की अनुमानित कीमत करीब 350 करोड़ रुपए बताई जा रही है। जेट की डिलीवरी सितंबर के अंतिम सप्ताह तक होने की संभावना है। इसके बाद दोनों आधुनिक विमान मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक हवाई बेड़े का हिस्सा होंगे

    अधिकतम उड़ान अवधि 4 घंटे 30 मिनट
    मध्यप्रदेश सरकार फ्रांस की एयरबस से ACH160 हेलीकॉप्टर खरीद रही है। टैक्स और शुल्क समेत इसकी कीमत करीब 225 करोड़ रुपए बताई गई है। इसकी डिलीवरी नवंबर में प्रस्तावित है। सरकार के लिए तैयार हेलीकॉप्टर में दो पायलट समेत 9 लोग बैठ सकेंगे।

    एयरबस के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक ACH160 को अधिकतम 10 यात्रियों की क्षमता के साथ तैयार किया जा सकता है। इसकी अधिकतम उड़ान अवधि 4 घंटे 30 मिनट और क्रूज स्पीड 155 नॉट है। हेलीकॉप्टर में आधुनिक तकनीक और कैमरों की सुविधा भी रहेगी।

    MP के पायलटों ने कनाडा में ली ट्रेनिंग
    नए जेट के संचालन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। मध्यप्रदेश के पायलट विश्वास राय और अरविंद सिंह जुलाई में कनाडा गए थे। दोनों ने बॉम्बार्डियर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया है।

    सरकार नए हेलीकॉप्टर और जेट को बेड़े में शामिल करने के साथ उनके इस्तेमाल के लिए एयर कनेक्टिविटी का ढांचा भी तैयार कर रही है। एक तरफ 63 नए हेलीपैड बनाने की योजना है, वहीं दूसरी तरफ करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी है।

    नए जेट के लिए कम से कम 1800 मीटर रनवे चाहिए
    सरकार के सामने नए बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट को ज्यादा से ज्यादा एयरफील्ड पर उतारने की चुनौती है। यह मिड-साइज जेट है। इसके लिए कम से कम करीब 1800 मीटर और बेहतर संचालन के लिए करीब 2100 मीटर लंबे रनवे की जरूरत है।

    विभागीय आकलन के मुताबिक प्रदेश के 28 एयरफील्ड में से करीब 10 जगहों पर यह जेट अभी उतर सकता है। इनमें 7 एयरपोर्ट और 3 हवाई पट्टियां शामिल हैं।

    सिर्फ 3 हवाई पट्टियों पर 1800 मीटर से लंबा रनवे
    प्रदेश की करीब 20 हवाई पट्टियों में फिलहाल सिर्फ तीन ऐसी हैं, जहां रनवे की लंबाई 1800 मीटर या उससे ज्यादा है। इनमें मंदसौर की नौलखा बीड, सिवनी और मंडला की कान्हा हवाई पट्टी शामिल हैं।

    सतना में एयरपोर्ट बन चुका है, लेकिन यहां रनवे करीब 1300 मीटर लंबा है। इसलिए नया चैलेंजर-3500 यहां नहीं उतर पाएगा। एयरपोर्ट बन जाना ही काफी नहीं है। इस जेट के लिए रनवे की लंबाई और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी बढ़ानी होंगी।

    वीआईपी यात्राओं के लिए किया जाएगा इस्तेमाल करीब 350 करोड़ रुपए का बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट सरकार के लिए तैयार कराया जा रहा है। इसमें 9 यात्री और 2 पायलट बैठ सकेंगे। इसका इस्तेमाल मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी यात्राओं के लिए किया जाएगा। विमान का इंटीरियर मध्यप्रदेश सरकार की जरूरत के हिसाब से तैयार कराया गया है।

    इसकी अधिकतम रेंज करीब 3500 समुद्री मील और क्रूज स्पीड करीब 870 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। विभागीय जानकारी के मुताबिक इसकी फ्यूल क्षमता लंबी दूरी की उड़ान के लिए पर्याप्त है, जिससे बीच में ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    20 हवाई पट्टियों के विस्तार पर 300 से 400 करोड़ खर्च
    विमानन विभाग ने हवाई पट्टियों वाले जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजकर विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध होने की जानकारी मांगी है। एक हवाई पट्टी के विस्तार में औसतन 10 से 15 करोड़ रुपए खर्च हो सकते हैं।

    विभाग के अनुमान के मुताबिक, अगर निजी जमीन लेनी पड़ी तो खर्च करीब 30 से 40 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। रनवे बढ़ाने के साथ जमीन, एप्रोच रोड, सुरक्षा क्षेत्र और दूसरी जरूरी विमानन सुविधाओं पर काम करना होगा। करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार पर 300 से 400 करोड़ रुपए तक खर्च का अनुमान है।

    हर साल बचेंगे 60-70 करोड़ रुपए
    ढाई साल में मोहन सरकार को विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर औसतन 60-70 करोड़ रुपए सालाना खर्च करने पड़े। नया जेट और हेलीकॉप्टर आने के बाद यह किराया बचेगा।

    सरकार के पास 13 साल पुराना हेलीकॉप्टर
    मप्र सरकार का मौजूदा एयरबस EC155 B1 हेलीकॉप्टर 2011 में खरीदा गया था। करीब 13 साल पुराने इस हेलीकॉप्टर के बढ़ते मेंटेनेंस खर्च के चलते सरकार अब बेड़ा अपग्रेड कर रही है।

     

  • 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से निगरानी, महिलाओं ने संभाली कमान

    2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से निगरानी, महिलाओं ने संभाली कमान

    महिलाओं ने संवारा हरित अभियान, 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग से होगी निगरानी

    -निवी ट्रंचिंग ग्राउंड और देवरी गौशाला में लगाए गए पौधों की लोकेशन होगी दर्ज, जीवित पौधों की स्थिति भी सामने आएगी

    मुरैना
     शहर को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से अमृत हरित महा अभियान एवं वूमेन फॉर ट्री योजना के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए 2170 पौधों की अब जियो ट्रैकिंग की जाएगी। नगर निगम द्वारा लगाए गए पौधों को अमृत मित्र पोर्टल के माध्यम से जियो टैग किया जाएगा। इससे पौधों की वास्तविक लोकेशन दर्ज होने के साथ उनकी स्थिति की निगरानी भी की जा सकेगी। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की महिलाओं को सौंपी गई है।
    नगर निगम क्षेत्र में वूमेन फॉर ट्री अभियान के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को कुल 2170 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। महिलाओं ने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करते हुए निवी ट्रंचिंग ग्राउंड में 1070 और देवरी गौशाला में 1000 पौधे लगाए हैं। पौधरोपण के बाद अब नगर निगम प्रशासन इनकी निगरानी और संरक्षण पर जोर दे रहा है।

    तीन माह बाद होगी स्थिति की निगरानी
    नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र धाकरे ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार लगाए गए पौधों की जियो ट्रैकिंग किया जाना अनिवार्य है। लगाए गए पौधे करीब तीन माह पुराने हो चुके हैं। ऐसे में इनकी जियो ट्रैकिंग कर लोकेशन दर्ज की जा रही है। इससे भविष्य में यह पता लगाने में आसानी होगी कि पौधरोपण वाले स्थान पर कितने पौधे मौजूद हैं और कितने पौधे जीवित हैं।

    महिलाओं के जिम्मे पौधों की देखभाल
    अभियान के तहत केवल पौधे लगाने तक ही जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि पौधों की देखभाल का जिम्मा भी स्व सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। महिलाओं द्वारा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है। नगर निगम का उद्देश्य पौधरोपण के साथ इन पौधों को संरक्षित कर उन्हें पेड़ के रूप में विकसित करना है।

     जियो ट्रैकिंग से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
    जियो ट्रैकिंग के बाद प्रत्येक पौधे की लोकेशन डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी। आगे पौधों के बड़े होने के बाद उनकी स्थिति की दोबारा निगरानी की जाएगी। इससे पौधरोपण अभियान के परिणामों का आकलन करने और पौधों के जीवित रहने की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।

  • भारत-वेस्टइंडीज T20 के टिकट ₹1,000 से ₹12,500 तक, बिक्री तेज

    भारत-वेस्टइंडीज T20 के टिकट ₹1,000 से ₹12,500 तक, बिक्री तेज

    इंदौर 
     इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को प्रस्तावित भारत-वेस्टइंडीज T20 मुकाबले के टिकटों की ऑनलाइन बिक्री शुक्रवार सुबह 6 बजे शुरू हो गई। बिक्री शुरू होने के पहले दो घंटे में सामान्य गैलरी कैटेगरी के करीब 80% टिकट बिक गए। टिकटों की बिक्री अधिकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म District by Zomato के जरिए की जा रही है।

    टिकट बिक्री शुरू होते ही क्रिकेट प्रेमियों ने बुकिंग शुरू कर दी। शुरुआती घंटों में कई कैटेगरी के टिकटों की मांग तेजी से बढ़ी। अलग-अलग स्टैंड की लाइव उपलब्धता मांग के अनुसार लगातार बदल रही है।

    एक हजार से 12,500 तक टिकट
    मैच के लिए टिकटों की कीमत अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार तय की गई है। सामान्य गैलरी के टिकट करीब 1,000 से 1,800 रुपए तक है। पवेलियन की टिकट कीमत ₹5,500 से ₹8,500 तक रखी गई है, जबकि हॉस्पिटैलिटी कैटेगरी के टिकट ₹11,000 और ₹12,500 तक हैं। एक व्यक्ति अधिकतम 4 टिकट खरीद सकता है।

    स्टूडेंट टिकट के लिए भी रही जबरदस्त मांग
    स्टूडेंट और विशेष रूप से दिव्यांग दर्शकों के लिए आरक्षित रियायती टिकटों की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। स्टूडेंट कोटे के करीब 1,200 रजिस्ट्रेशन कुछ ही समय में पूरे हो गए। दस्तावेज सत्यापन के बाद करीब 1,000 छात्रों को टिकट दिए जाने हैं। ऑनलाइन बिक्री शुरू होने के बाद टिकटों की उपलब्धता मांग के अनुसार बदल रही है।

    11 अक्टूबर को होगा मुकाबला
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच यह T-20 मुकाबला 11 अक्टूबर को शाम 7 बजे इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच को लेकर शहर में क्रिकेट प्रेमियों के बीच खासा उत्साह है और ऑनलाइन टिकट बिक्री शुरू होने के साथ स्टेडियम में मुकाबला देखने की होड़ भी बढ़ गई है।

  • एक साल में 85 हजार युवाओं को रोजगार, CM यादव ने दिए नियुक्ति पत्र

    एक साल में 85 हजार युवाओं को रोजगार, CM यादव ने दिए नियुक्ति पत्र

    मध्यप्रदेश सरकार ने विगत एक वर्ष में उपलब्ध कराये है 85 हजार युवाओं को रोजगार और सेवा के अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनि निरीक्षकों को दिए नियुक्ति पत्र

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खनिज के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। प्रदेश की धरती से हीरा भी निकलता है। कोयले के मामले में भी प्रदेश समृद्ध हैं। खनिज महत्वपूर्ण विभाग है जिसमें पारदर्शिता और दक्षता के साथ कार्य करने वाले प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में भी सहायक होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास में नवनियुक्त 62 खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्य सरकार ने बीते एक वर्ष में 85 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया है। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित थी।  

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रत्नगर्भा, वसुंधरा से जुड़कर नवनियुक्त खनि निरीक्षकों का भाग्योदय हो रहा है। आज का दिन इन युवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, साथ ही उनके जीवन में नया प्रकाश लाने वाला दिन भी है। नवनियुक्त खनि निरीक्षक शासन से जुड़कर सिर्फ नौकरी ही प्राप्त नहीं कर रहे बल्कि सेवा का एक नया अवसर प्राप्त कर अपनी नई पहचान भी प्रारंभ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नवनियुक्त खनि निरीक्षक आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसमें उनके माता-पिता और परिजन का आशीर्वाद एवं सहयोग भी शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राष्ट्र आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश भी प्रगति के मार्ग पर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी युवाओं को शासकीय सेवा में आने पर कर्मचारी नहीं बल्कि कर्मयोगी मानते हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र के साथ ही विश्वास पत्र भी सौंपा है। सुशासन और लोक कल्याण के उद्देश्य से कार्य करते हुए ये युवा निश्चित ही सभी के लिए गर्व का कारण बनेंगे।  

    खनिज आय में वृद्धि

    प्रमुख सचिव खनिज साधन विवेक पोरवाल ने कहा कि प्रदेश में खनिजों से होने वाली आय आठ-नौ हजार करोड़ से बढ़कर 12 हजार करोड़ रुपए हो गई है। वित्त वर्ष 2026-27 में 72 खनि निरीक्षकों की नियुक्ति की पहल की गई। नवनियुक्त खनि निरीक्षक प्रदेश के खनिज राजस्व को बढ़ाने का कार्य करेंगे। प्रमुख सचिव पोरवाल ने बताया कि भारत सरकार ने नीलामी के माध्यम से 33 कोयला खनन ब्लॉक आवंटित किए, जिसमें से 8 ब्लॉक में कोयला का उत्पादन शुरू हो गया हैं। छह अन्य कोयला खनन ब्लॉक में उत्पादन प्रारंभ करने के लिए माइन डेवलपमेंट का कार्य प्रारंभ किया गया है। छतरपुर जिले में 2 नए क्षेत्रों में हीरे की खोज के लिए अन्वेषण कार्य चल रहा है।

    पन्ना जिले के अंतर्गत एक हीरा ब्लॉक आवंटित किया गया है। स्वर्ण अयस्क की प्रोसेसिंग के लिए सिंगरौली में ग्रीनफील्ड गोल्ड कंसंट्रेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। सिंगरौली और कटनी में 6 स्वर्ण ब्लॉक नीलाम किए गए हैं। भारत सरकार ने खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए मध्यप्रदेश को सम्मानित किया है। नीलामी प्रक्रिया और खनन क्षेत्र में सुधारों के लिए मध्यप्रदेश ने अग्रणी राज्य की पहचान बनाई है।

    नवनियुक्त खनि निरीक्षक बोले-"हमारे लिए आज होली और दीपावली दोनों की खुशी है"

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त खनि निरीक्षकों में से 5 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया और नवनियुक्त खनि निरीक्षकों के साथ छायाचित्र खिंचवाया। कार्यक्रम में नवनियुक्त खनि निरीक्षकों ने कहा कि आज उनके लिए होली और दीपावली जैसा खुशी का दिन है। वे अपने दायित्व को पूरी लगन से पूरा करेंगे।      

  • राजस्व समीक्षा बैठक में CM यादव का फोकस, आय बढ़ाने के दिए निर्देश

    राजस्व समीक्षा बैठक में CM यादव का फोकस, आय बढ़ाने के दिए निर्देश

    विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं विभागों के आय वृद्धि के प्रयास

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की राजस्व प्राप्ति की समीक्षा

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विकास के लिए आय अर्जित करने वाले सहयोगी विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभागों ने राजस्व में वृद्धि के लिए आवश्यक प्रयास किए हैं, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा वित्त वर्ष के अंतर्गत अर्जित राजस्व आय की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न मदों में अर्जित आय की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने राजस्व प्राप्ति के लिये निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न विभागों द्वारा आय वृद्धि के लिए किए गए प्रयासों, नवाचारों और अर्जित उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वित्त वर्ष के अंत तक शत्-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि अनेक विभागों द्वारा वित्त वर्ष में निर्धारित राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सतत् प्रयास किए जा रहे हैं।

    इन क्षेत्रों में अग्रणी है मध्यप्रदेश

    बैठक में बताया गया कि वाणिज्य कर, खनिज, आबकारी, परिवहन, वन, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में प्रदेश कर संग्रहण में अग्रणी है। विभागों ने आय के निर्धारित वार्षिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वित्त वर्ष के प्रारंभिक पांच महीनों में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। आयकर फाइल रिटर्न करने के क्षेत्र में देश में, मध्यप्रदेश कभी 14 वें क्रम पर था। इस कार्य में प्रदेश अब पांचवें स्थान पर आ गया है। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • NSS दिवस पर किले में श्रमदान, धरोहर संरक्षण का दिया संदेश

    NSS दिवस पर किले में श्रमदान, धरोहर संरक्षण का दिया संदेश

    ग्वालियर किले पर राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस पर चलाया स्वच्छता अभियान

     माधव महाविद्यालय के स्वयंसेवकों ने श्रमदान कर दिया स्वच्छता एवं धरोहर संरक्षण का संदेश

    ग्वालियर
    राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) दिवस के अवसर पर माधव महाविद्यालय, ग्वालियर के तत्वावधान में ऐतिहासिक ग्वालियर किले स्थित मानसिंह पैलेस परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों की स्वच्छता एवं संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ ही युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना को प्रोत्साहित करना था।

    इस अवसर पर बड़ी संख्या में NSS स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए किले के विभिन्न क्षेत्रों में श्रमदान किया। स्वयंसेवकों ने परिसर में स्वच्छता कार्य करते हुए पर्यटकों एवं आम नागरिकों को ऐतिहासिक स्थलों को स्वच्छ रखने और उनकी गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया।

    कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिव कुमार शर्मा, वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संजय कुमार पांडे तथा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सरिता दीक्षित विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त पूर्व कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपक शिंदे तथा पूर्व NSS स्वयंसेवक अनिरुद्ध शर्मा दिलीप चौहान और *गरिमा झा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने कहा कि NSS युवाओं को सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारी ऐतिहासिक धरोहरें केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं। इनके संरक्षण में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    स्वच्छता अभियान के माध्यम से स्वयंसेवकों ने यह संदेश दिया कि ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। अभियान ने किले की स्वच्छता में योगदान देने के साथ-साथ पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के बीच भी स्वच्छता एवं धरोहर संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश पहुंचाया।

    कार्यक्रम के अंत में NSS स्वयंसेवकों ने ऐतिहासिक स्थलों को स्वच्छ रखने तथा समाज में स्वच्छता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

  • ‘अपनी बस’ के लिए तैयार MP, CM ने रात में व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    ‘अपनी बस’ के लिए तैयार MP, CM ने रात में व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार की शाम गोविंदपुरा, बीएचईएल क्षेत्र में स्थित दशहरा मैदान पहुंचकर शुक्रवार को होने वाली "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा'' के शुभारंभ कार्यक्रम की तैयारी का जायजा लिया। प्रदेश में शहरों-गांवों में डायरेक्ट बस कनेक्टिविटी की शुरुआत के शुभारंभ का कार्यक्रम भव्य रूप में होगा। इस कार्यक्रम की तैयारियां पूर्ण हो गई हैं।भोपाल, इंदौर समेत 7 शहरों में कुल 351 बसें चलेंगी। परिवहन विभाग ने इंटरसिटी सेवा के लिए 2 रुपए प्रति किलोमीटर किराया तय किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बसों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेशवासियों को सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर नई बसों की विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की और बसों में बैठकर भी आधुनिक तकनीक और यात्रियों के लिए की गई सुविधाओं का जायजा लिया। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम से जुड़ी आवश्यक जानकारियों से अवगत करवाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाएंगे।

    सेवा शुरू होने से पहले गुरुवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीएचईएल दशहरा मैदान पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच, सभा स्थल और अन्य व्यवस्थाएं देखीं। इसके बाद बसों का निरीक्षण भी किया और ड्राइवरों से बातचीत की। इस दौरान परिवहन सचिव मनीष सिंह मौजूद रहे।

    सीएम बोले- बेहतर सुविधा मिलेगी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 21 साल बाद प्रदेश में लोक परिवहन बस सेवा फिर शुरू होना ऐतिहासिक निर्णय है। आधुनिक ई-बसों और सुविधायुक्त बसों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से नगरों और जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत बस स्टॉप, बस स्टैंड, इलेक्ट्रॉनिक सुविधाओं और बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए मंच, सभा स्थल सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित संबंधित विभागों के  उपस्थित थे।

    7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें जिसमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, भोपाल में 106 बसें जिसमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें जिसमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी, रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। 

    एक विभाग के अंडर में आएंगी बसें
    सुगम परिवहन सेवा के तहत अलग-अलग बस एजेंसियों की सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत लाया जाएगा। भोपाल में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ पीएम बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत अन्य शहरों में भी बस सेवाएं एक विभाग के अंडर में होंगी।

    बसों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में पेंट या स्टीकर लगाने का काम किया गया है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े फोटो और वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने बताया कि संबंधित बस एजेंसियों ने ही यह काम किया है।

    इलेक्ट्रिक बसें भी चलेंगी

    सुगम परिवहन सेवा में ईजी मायट्रिप की सहायक कंपनी ईएमटीईवी/ईजी ग्रीनमोबिलिटी की बसें भी शामिल हैं। कंपनी की 12 मीटर इलेक्ट्रिक सीटर बस को लंबी दूरी के सार्वजनिक परिवहन के लिए तैयार किया गया है।

    बस में प्रीमियम और एर्गोनॉमिक सीटिंग, व्यक्तिगत एयर वेंट और यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह दी गई है। प्रवेश और आवागमन को भी सुविधाजनक बनाने की व्यवस्था की गई है।

    पहले चरण में 7 शहरों में 351 बसों से शुभारंभ
    योजना के पहले चरण में 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। 

    शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें चलेंगी। इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी रूट पर दौड़ेगी। भोपाल से 106 बसें (23 इंटरसिटी-83 इंट्रासिटी), जबलपुर के लिए 67 बसें (14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी), रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें दौड़ेंगी।

    3-पीपीपी मॉडल.. ट्रेनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मॉडर्न सुविधाएं
    बसों का संचालन पप्बिलक- प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉड
    ल पर होगा। इसके लिए अलग- अलग एजेंसियों से 3 सेवाओं और सुविधाओं के विकास के लिए अनुबंध किए हैं। पहला- निजी ऑपरेटरों से अनुबंध किया। दूसरा, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए अनुबंध किया है। इसके तहत बसों की लाइव लोकेशन, स्पीड, ड्राइविंग ट्रेनिंग आदि शामिल है। तीसरे मॉडल में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अनुबंध है। इसके तहत बस टर्मिनल, डिपो, बस स्टॉप और सड़क किनारे सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी।

    सरकार की त्रिस्तरीय निगरानी
    बसों के सुगम संचालन के लिए सरकार ने राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी बनाई है। यह रणनीति और नीति तय करेगी। निगरानी करेगी। इसके अधीन 7 क्षेत्रीय कंपनियां इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन और सागर में बनाई गई हैं। इसके साथ ही कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति भी बनाई है। यह जमीनी निगरानी करेगी। मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा के तहत हर साल बढ़ाई जाएंगी 2,500 से 3,000 बसें।

    ऐसी सुविधाएं-सुरक्षा
    इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से बसों का संचालन, लोकेशन, टाइमिंग की रियल टाइम निगरानी होगी।
    मप्र यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं 7 सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर बनाए हैं।
    यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर बस में सीसीटीवी कैमरे।
    इमरजेंसी में तुरंत सहायता देने के लिए पैनिक बटन।
    व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से बस की लाइव लोकेशन।
    यात्रियों को बस संचालन एवं यात्रा से जुड़ी जानकारी देने पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम।

  • तलाक केस में पत्नी के मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं, ग्वालियर हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का आदेश

    तलाक केस में पत्नी के मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं, ग्वालियर हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का आदेश

    ग्वालियर
    ग्वालियर खंडपीठ की सिंगल बेंच ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में ऐसा फैसला सुनाया है जिसने तलाक की कार्यवाही को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। हाईकोर्ट में एक मामला पहुंचा जहां, निचली कोर्ट ने तलाक की कार्यवाही के दौरान महिला का मेडिकल टेस्ट कराने की अनुमति दे दी थी। इस मामले में जरुरी बात ये है कि कोर्ट द्वारा यह अनुमति तब दी गई थी जब, पति-पत्नी अपनी गवाही दे चुके थे और साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। पत्नी ने निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनती देते हुए अपनी दलील रखी।

    मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं दी सकती- हाईकोर्ट का फैसला
    हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वैवाहिक विवाद और शारीरिक स्वायत्तता से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने अशोकनगर जिला अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत तलाक के मुकदमे में पत्नी का मेडिकल परीक्षण कराने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब दोनों पक्षों की गवाही पूरी हो चुकी हो और मामला अंतिम बहस के स्तर पर पहुंच गया हो, तब किसी पक्षकार को अपनी खामियां छिपाने या नए सबूत जुटाने के लिए मेडिकल टेस्ट की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    यह है मामला
    याचिकाकर्ता का विवाह 28 अप्रैल 2004 को हुआ था। जुलाई 2011 में अलग होने के बाद पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की। पति का आरोप था कि पत्नी के तीन ऑपरेशन हो चुके है और शारीरिक स्थिति के कारण वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं है। वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को नकारते हुए साथ रहने की इच्छा जताई थी और बताया कि शादी के बाद अपेंडिक्स का इलाज हुआ था, जिसकी जानकारी पति को पहले से थी।

    निचली अदालत दी थे अनुमति, पत्नी ने दी चुनौती
    निचली अदालत में दोनों पक्षों की गवाहियां और साक्ष्य दर्ज होने के बाद जब केस अंतिम बहस के लिए तय हुआ, तब 22 जून 2012 को पति ने धारा 151 सीपीसी के तहत पत्नी के मेडिकल परीक्षण के लिए आवेदन दिया। जिला अदालत अशोकनगर ने 2 जुलाई 2012 को इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था, जिसके खिलाफ पत्नी ने अधिवक्ता मधुर भार्गव के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

     

  • सिंधु कला केंद्र में दिखेगी 1800 साल पुरानी धरोहर, दुर्लभ सिक्कों का होगा खास संग्रह

    सिंधु कला केंद्र में दिखेगी 1800 साल पुरानी धरोहर, दुर्लभ सिक्कों का होगा खास संग्रह

    इंदौर 

     सिंध की प्राचीन संस्कृति, कला और ऐतिहासिक धरोहरों से आज की युवा पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए इंदौर शहर में एक भव्य 'सिंधु कला केंद्र' का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। लगभग 10 हजार वर्गफीट के विशाल क्षेत्र में आकार ले रहे इस प्रोजेक्ट पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    इस कला केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि यहां सिर्फ पुरानी चीजें ही नहीं रखी जाएंगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए लोगों को उस पुराने दौर की जिंदगी का साक्षात अहसास कराया जाएगा।

    ऑडिटोरियम से लेकर सिंधी फूड जोन तक की सुविधा

        सांसद एवं सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष शंकर लालवानी के मुताबिक, समाज के सहयोग से बन रहे इस प्रोजेक्ट को अगले 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परिसर में एक भव्य संग्रहालय के साथ-साथ 270 सीटों वाला एक सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम भी तैयार किया जाएगा।

    यहां सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ वर्कशॉप और प्रदर्शनियां भी आयोजित की जा सकेंगी। इसके अलावा, सिंधी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए एक खास 'सिंधी फूड जोन' भी बनाया जाएगा। आने वाले समय में यह केंद्र सभी समाज के लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

    एआई और 3D तकनीक से जीवंत होगा सिंध का पुराना दौर
        इस म्यूजियम को बेहद आधुनिक तरीके से डिजाइन किया जा रहा है। 3D और इमर्सिव तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुराने सिंध क्षेत्र के रहन-सहन, व्यापार, पहनावे और संस्कृति को डिजिटल रूप में पर्दे पर उतारा जाएगा। इसका मकसद दर्शकों को सिर्फ किताबी जानकारी देना नहीं है।

    उन्हें उस युग में होने का जीवंत अनुभव कराना है। इस पूरे काम के लिए इतिहास में रुचि रखने वाले जानकारों की एक अलग टीम बनाई जा रही है, जो देशभर में मौजूद सिंध की प्राचीन वस्तुओं और जानकारियों को एक जगह इकट्ठा करेगी।

    सहेजे जा रहे 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के और पुश्तैनी धरोहरें

        प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट अर्जुन हबलानी ने बताया कि विभाजन से पहले के सिंध की यादों को संजोने के लिए वरिष्ठ नागरिकों और इतिहास प्रेमियों की मदद ली जा रही है। यहां तक कि पाकिस्तान में रह रहे सिंधी समुदाय के लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है।

        लोगों ने स्वेच्छा से पुराने बर्तन, ताले, हाथ वाले पंखे और कई ऐतिहासिक वस्तुएं उपलब्ध कराई हैं। संग्रहालय का मुख्य आकर्षण सिंध क्षेत्र के राजाओं के 1700 से 1800 साल पुराने दुर्लभ सिक्के होंगे। इनमें चच वंश के राजा यशादित्य (लगभग 679-712 ईस्वी) के समय के वे सिक्के भी शामिल हैं, जिन पर मुकुट पहने हुए राजा और त्रिशूल की आकृति उकेरी गई है।