Category: मध्य प्रदेश

  • CM के लिए नया लग्जरी जेट तैयार, कुछ दिन विदेशी पायलट उड़ाएंगे विमान

    CM के लिए नया लग्जरी जेट तैयार, कुछ दिन विदेशी पायलट उड़ाएंगे विमान

    भोपाल
     मध्य प्रदेश सरकार के लिए कनाडा से भोपाल आ रहा बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 विमान को लेकर हर दिन नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं। डीजीसीए के कड़े नियमों, पायलटों की री-ट्रेनिंग और इस हाई-टेक विमान के प्रोटोकॉल को लेकर यह बात सामने आई है कि फिलहाल भारतीय पायलटों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    जमीनी स्तर पर एक्टिव रहते हैं सीएम
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मंत्रालय के वल्लभ भवन में बैठने की बजाए जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने और जायजा लेने अक्सर निकल जाया करते हैं। वे अक्सर ही अलग-अलग जिलों के प्रवास पर रहते हैं, इसलिए त्वरित गति का इस्तेमाल करने के लिए इस विमान का भी उपयोग किया जाएगा।

    सुपर-मिड साइज है यह बिजनेस जेट
    6,297 किलोमीटर की नॉन-स्टॉप रेंज, हवा में उड़ता आलीशान विमान और 250 करोड़ की कीमत वाला सुपर-मिड साइज बिजनेस जेट 'बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500' अब मध्य प्रदेश के आसमान पर उड़ते रहेगा। मुख्यमंत्री जैसे अति-विशिष्ट और संवेदनशील पद की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य सरकार हर कदम बेहद फूंक-फूंक कर उठा रही है। कनाडा से उड़ान भरने को तैयार यह विमान 30 सितंबर तक भोपाल पहुंचने वाला है, लेकिन इससे पहले इसकी हर तकनीकी बारीकी को परखा जा रहा है।

    विमानन संचालनालय में नियमित पद पर पदस्थ सीनियर पायलट विश्वास राय इस नए प्लेन को उड़ाने के लिए कनाडा में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्लेन को उड़ाने के लिए तीन पायलटों की व्यवस्था रहेगी, लेकिन एक बार में दो पायलट ही प्लेन उड़ाएंगे।

    जब तक पायलट की ट्रेनिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक विमान निर्माता कंपनी एक साल के लिए अपने एक पायलट की सेवाएं मध्य प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराएगी। तीसरे पायलट की नियुक्ति के लिए निजी एविएशन कंपनियों से दरें मांगी गई हैं।

    राज्य सरकार ने इस नए स्टेट जेट प्लेन की खरीदी के लिए अपने बजट में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर से अत्याधुनिक चैलेंजर 3500 जेट विमान खरीदा जा रहा है।

    वर्तमान में, राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर किराए के विमानों पर निर्भर रहती है। नए विमान के आने के बाद यह निर्भरता समाप्त हो जाएगी। सरकार अभी किराए के विमान का उपयोग करने के लिए प्रति घंटा दो से पांच लाख रुपये किराया देती है।

    इसके अलावा, प्लेन का उपयोग हो या न हो, स्टेट हैंगर पर खड़े रहने का प्रतिदिन 10 लाख रुपये भुगतान करना होता है। इसके लिए अलग-अलग 12 विमान कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया है। पिछले लंबे समय से यही व्यवस्था है, जिस वजह से राज्य का एक बड़ा बजट किराया भरने में ही चला जाता है।

    यह जेट प्लेन केवल छह शहरों की हवाई पट्टियों पर ही उतरने लायक है। इन शहरों में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और सिंगरौली शामिल हैं। इन शहरों के अलावा मुख्यमंत्री इस प्लेन का उपयोग प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंचने में नहीं कर पाएंगे।

    इस प्लेन की सीटिंग कैपेसिटी आठ प्लस टू है, जिसका अर्थ है कि प्लेन में आठ यात्री बैठ सकेंगे और दो पायलट रहेंगे।

    देसी पायलट अटक रहे
    फिलहाल यह जानकारी सामने आई है कि इस हाई-टेक जेट को आसमान में उतारने के लिए भेजे गए दोनों भारतीय पायलट जब अपनी पहली कोशिश में कठिन टेस्ट पूरी तरह पास नहीं कर पाए, तो सुरक्षा से कोई समझौता न करते हुए उन्हें दोबारा गहन ट्रेनिंग दिलाई गई। अब ये दोनों पायलट सह-पायलट की भूमिका निभाएंगे। जबकि विमान की मुख्य कमान एक अनुभवी विदेशी पायलट के हाथों में होगी।

    विदेशी पायलट फिलहाल उड़ाएंगे
    विमानन नियमों के मुताबिक इसके लिए 'फॉरेन एयरक्रू टेम्परेरी ऑथराइजेशन' (FATA) की मंजूरी ली गई है। विमान नियम 1937 और डीजीसीए के कड़े मानकों के तहत 65 वर्ष से कम आयु और बड़े विमानों का कम से कम दो हजार घंटे का अनुभव रखने वाले विदेशी पायलट ही ऐसे विमानों को संभाल सकते हैं, जिसकी वैधता दिसंबर 2026 तक है।

    टर्बुलेंस को भी देता है मात
    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पुराने टर्बोप्रॉप विमान के मुकाबले यह नया विमान लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह जेट 45 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़कर टर्बुलेंस को मात देता है। इसकी 870 किमी/घंटा की रफ्तार इसे भोपाल से सीधे टोक्यो तक पहुंचाने में सक्षम है। सुरक्षा और तकनीकी जांच के तमाम कड़े दौर से गुजरने के बाद यह वीवीआईपी जेट मुख्यमंत्री के सुरक्षित और आरामदायक दौरों का नया सारथी बनने जा रहा है। पुराने टर्बोप्रॉप विमान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तेज और आधुनिक सुविधाओं से लैस इस जेट को उतरने के लिए कम से कम 5,500 फीट लंबे रनवे की जरूरत होगी, जिससे यह भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और खजुराहो सहित चुनिंदा हवाई पट्टियों पर ही संचालित हो सकेगा।

     

  • उज्जैन वालों का सफर होगा आसान, 12 रूट पर उतरेंगी 100 ई-बसें

    उज्जैन वालों का सफर होगा आसान, 12 रूट पर उतरेंगी 100 ई-बसें

    उज्जैन
     
    महाकाल की नगरी उज्जैन में सरकारी परिवहन सेवा का इंतजार खत्म हो गया है। दो-तीन दिनों में सिटी 2 बस सेवा फिर शुरू होने वाली है। इसके लिए शुक्रवार-शनिवार को 10 ई-बसें (Ujjain e-buses service) शहर पहुंच जाएंगी। इन बसों को सबसे पहले उज्जैन दर्शन रूट पर उतारकर सिटी बस सेवा की शुरुआत की जाएगी।

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना में शुक्रवार को सीएम डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में भोपाल से कुछ जिलों में संचालन के लिए 351 बसों को झंडी दिखाई। उज्जैन की 10 सिटी बसें भी शामिल थीं। ये बसें शुक्रवार देर रात या शनिवार सुबह तक शहर पहुंच जाएंगी। इन बसों को 27 किलोमीटर से अधिक लंबे उज्जैन दर्शनी रूट पर संचालित किया जाएगा। संभावना है कि दो-तीन दिन में बसों का संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद यात्रियों को आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस इन ई-बसों मैं सुलभ सफर की सुविधा मिल सकेगी। हालांकि, अभी इसका किराया घोषित नहीं किया गया है। जल्द ही किराया और फेरों की संख्या निर्धारित की जाएगी।

    यूसीटीएसएल को सौंपी संचालन की कमान
    मप्र में बसों के संचालन के लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (एमपीवायपीआइएल) नाम से राज्य स्तरीय कंपनी बनाई जा रही है। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री है। परिवहन सचिव मनीष सिंह है। जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत उज्जैन में सिटी बस संचालन के लिए उज्जैन नई व्यवस्था में यूसीटीएसएल अब सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (यूसीटीएसएल) थी। एमपीवायपीआइएल के अधीन सहायक कंपनी के रूप में कार्य करेगी। इसका कार्य क्षेत्र भी बढ़ाया है। अब यूसीटीएसएल के अधीन संभाग के सभी सातों जिलों की बस सेवा रहेगी। उज्जैन से ही संभाग के जिलों की बस सेवा पर नियंत्रण रखा जाएगा। उज्जैन में संचालित ई-सिटी बसों का संचालन यूसीटीएसएल के पूर्व माध्यम से होगा। संचालन के लिए में ही निजी ऑपरेटर का चयन किया जा चुका है। शासन ने उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी को जिम्मेदारी भी सौंपी है।

    इस रूट पर चलेगी उज्जैन दर्शन सेवा
    है। उज्जैन दर्शन रूट की लंबाई 27.01 किलोमीटर है। यह सिटी बस के आंतरिक शहर के लिए निर्धारित 12 रूट में तीसरे नंबर का सबसे बड़ा रूट इसमें मेघदूत वन से बस मिलेगी। उज्जैन दर्शन रूट मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा, जो महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, शिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर, भर्तृहरि गुफाएं, गढ़कालिका, काल भैरव, सिद्धवट मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, चिंतामन गणेश मंदिर से होते हुए पुनः मेघदूत वन पर समाप्त होगा। शुरुआत में इस रूट पर 10 बसें उतारी जाएंगी। कुछ दिनों में इस रूट पर बसों की संख्या 15 भी हो सकती है।

    तीन महीने में 12 रूट पर दौड़ेंगी 100 बसें
    शहर को सिटी बस के लिए केंद्र से कुल 100 ई-बसें आवंटित हुई है। मक्सी रोड पुराने डिपो पर ई-बस डिपो तैयार किया जा रहा है। यहां चार्जिग स्टेशन का निर्माण जारी है। एक-दो दिन में 100 में से 20 बसें उज्जैन पहुंच जाएंगी। इससे यूसीटीएसएल उज्जैन दर्शन के बाद एक-दो और रूट पर ई-बस सेवा शुरू कर देगा। संभावना है कि तीन महीने में सभी 100 बसें उज्जैन को उपलब्ध हो जाएंगी। ऐसा होने पर इस वर्ष के अंत या नए साल की शुरुआत में सभी 100 बसें निर्धारित सभी 12 रूट पर दौड़ती नजर आएंगी। ये रूट शहर के एक से दूसरे छोर को जोड़ने के साथ ही आसपास के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों को भी उज्जैन से जोड़ रहे है।

    जल्द ऑन रोड होंगी बसें
    बस सुविधा के लिए उज्जैन की बसों को भोपाल में हरी झंडी दिखाई गई है। 10 ई-बसें उज्जैन के लिए रवाना हो गई हैं। दो तीन दिन में इन्हें ऑनरोड कर दिया जाएगा। शुरुआत उज्जैन दर्शन रूट से की जा रही है। चरणबद्ध रूप से सभी 100 ई-बसें ऑनरोड हो जाएंगी।-संदीप सोनी, सीईओ, यूसीटीएसएल

    11 रूट पर मिलेंगी बसें 
    उज्जैन दर्शन के बाद चरणबद्ध रूप से शेष 11 रूट पर सिटी बस सेवा शुरू की जाएगी। बसें इलेक्ट्रिक होंगी. 7 सीसीटीवी कैमरों संग अन्य सुरक्षा से लैस होंगी।

    रूट-यू1: तपोभूमि से पान बिहार, लंबाई 33.35 किमी।

    रूट-यू2: रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, लंबाई 9.48 किमी।

    रूट-यूः कानीपुरा से अभिलाषा कॉलोनी, लंबाई 12.94 किमी।

    रूट-यू 4: देवासगेट से तपोभूमि, लंबाई 16.78 किमी।

    रूट-यूडः देवासगेट से ताजपुर, लंबाई 16 किमी।

    रूट-यू 6: देवासगेट से सांवराखेड़ी नए आरटीओ, लंबाई 8.97 किमी।

    रूट-यू महाकाल चौराहे से अभिलाषा कॉलोनी, 11.52 किमी।

    रूट-यू४: देवासगेट से नानाखेड़ा, लंबाई 4.25 किमी।

    रूट-यू9: अवंतिका विवि जवासिया से नानाखेड़ा, लंबाई 17.84 किमी।

    रूट-यू 10: देवासगेट से मरलीपुरा, लंबाई 5.03 किमी।

    रूट-यू11: तपोभूमि से नजरपुर, लंबाई 28.44 किमी।

    रूट-यू 12: उज्जैन दर्शन, लंबाई 27.01 किमी।

    (अभी किराया दर व रूट पर बसों की संख्या घोषित नहीं की गई

  • Bhopal Master Plan 2047: ग्रोथ कॉरिडोर से मिक्स लैंड यूज तक, जानें ड्राफ्ट में क्या-क्या खास

    Bhopal Master Plan 2047: ग्रोथ कॉरिडोर से मिक्स लैंड यूज तक, जानें ड्राफ्ट में क्या-क्या खास

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। नए मास्टर प्लान में शहर के विकास के साथ पर्यावरण, रोजगार, यातायात और नागरिक सुविधाओं पर खास जोर दिया गया है। अब प्रशासन इस ड्राफ्ट पर जनता से दावे-आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। मास्टर प्लान का ड्राफ्ट चार प्रमुख आधारों पर तैयार किया गया है। इनमें प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण, आधुनिक और नागरिक हितैषी विकास, शहर में जरूरी बदलावों को बढ़ावा देना और रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप प्रकाशित किया गया है। इसमें भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, आसान आवाजाही और आर्थिक विकास के अवसर देने का प्रयास किया गया है।

    51 किलोमीटर का होगा ग्रोथ कॉरिडोर
    मास्टर प्लान में करीब 3000 हेक्टेयर जमीन ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर ईकेएआई सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्र सहित विभिन्न उपनगरों को जोड़ेगा। ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई और डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और आवास जैसी गतिविधियां विकसित की जा सकेंगी। यहां मिश्रित उपयोग और ज्यादा घनत्व वाले विकास का प्रस्ताव है। इस कॉरिडोर में लोक परिवहन के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर का प्रस्ताव है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में बदला जा सकेगा। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्गों को भी ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है।

    एक ही इलाके में मकान और दुकान
    मास्टर प्लान में मिश्रित भूमि उपयोग का प्रस्ताव रखा गया है। यानी सड़क की चौड़ाई के आधार पर कुछ क्षेत्रों में आवासीय उपयोग के साथ दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य लोगों के घर और काम की जगह के बीच दूरी कम करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। चौड़ी सड़कों पर स्थित जमीनों के लिए एफएआर और भवन की ऊंचाई को लेकर अधिक छूट देने का प्रस्ताव है। विकास के नियमों को भी आसान बनाने की बात कही गई है।

    हरित क्षेत्र 16 से बढ़कर 27 प्रतिशत
    भोपाल मास्टर प्लान-2005 में हरित क्षेत्र करीब 16 प्रतिशत था। नए भोपाल विकास योजना-2047 में इसे बढ़ाकर करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए यहां गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र को भी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। योजना में भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, जंगल, तालाबों, जलाशयों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

    डिजिटल ट्विन सिटी से होगी निगरानी
    शहर के विकास और निर्माण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य अवैध निर्माण, यातायात और दूसरी शहरी समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई करना है। सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगे निजी सीसीटीवी कैमरों की नेटवर्किंग, सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल को पारदर्शी रखने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।

    पार्किंग की समस्या दूर करने पर जोर
    मास्टर प्लान में मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। सामुदायिक खुले क्षेत्रों के नीचे, आरओबी और फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग की व्यवस्था भी की जा सकेगी। बेसमेंट पार्किंग के लिए जमीन के संयुक्त उपयोग की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है।

    भौंरी में बनेगी एजुकेशन हब
    भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ईकेएआई) सिटी विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और एआई से जुड़े संस्थानों को बढ़ावा देना है।

    अनाथ आश्रम, मूक-बधिर विद्यालय, छात्रावास, दिव्यांग विशेष विद्यालय, वृद्धाश्रम और रैन बसेरा जैसी चैरिटेबल गतिविधियों को भी कई तरह के भूमि उपयोग क्षेत्रों में अनुमति देने का प्रस्ताव है।

    45 लाख आबादी के हिसाब से तैयार योजना
    भोपाल विकास योजना-2047 को 1016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। इसमें 254 गांव शामिल हैं और इसे करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। योजना में विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल 61,017.02 हेक्टेयर रखा गया है। अब इस प्रारूप पर प्रशासन जनता से दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर
    मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मेट्रो के तहत भोपाल विकास योजना-2047 के प्रस्ताव में करीब तीन हजार हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित है. इसमें निवेश के लिए माहौल बनाने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है. यह ग्रोथ कॉरिडोर एजुकेशन, नॉलेज, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिक्षेत्र के साथ-साथ विभिन्न उपनगरों को भी जोड़ता है। .

    रेडियल मार्ग से ग्रोथ कॉरिडोर से जुड़ेंगे ये रोड
    ग्रोथ कॉरिडोर में नगर के बाहर विभिन्न दिशाओं से आने वाले क्षेत्रीय मार्ग जैसे विदिशा मार्ग, रायसेन मार्ग, नर्मदापुरम मार्ग एवं इन्दौर मार्ग को ग्रोथ कॉरीडोर के जरिए शहर से जोड़ा जाएगा. इसमें मेट्रेपोलिटन क्षेत्र के विभिन्न भागों से बेहतर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया है. ग्रोथ कॉरिडोर एवं इसके रेडियल मार्गों का विकास नगर विकास स्कीम के माध्यम से भोपाल विकास प्राधिकरण करेगा. निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित नवीन प्रस्तावित बायपास मार्ग को ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है. ये मार्ग के दोनों ओर 50-50 मीटर भूमि हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित की गई है। 

    मास्टर प्लान में मिक्स लैंड यूज भी प्रस्तावित
    भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मिक्स लैंड यूज के प्रस्ताव राज्य की टीओडी नीति के अनुरूप आवासीय उपयोग के तहत मार्ग की चौड़ाई के आधार पर मिक्स लैण्ड यूज प्रस्तावित किए गए हैं. जिससे कि वर्क स्पेस और रेजिडेंशियल एरिया में कॉर्डिनेशन हो सके. असीमित एफएआर एवं भवन ऊंचाई नगरीय क्षेत्र की भूमि का अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा निवेश मित्र वातावरण तैयार करने के उ‌द्देश्य से मार्ग की चौड़ाई के आधार पर एफएआर का निर्धारण किया गया है। 

    अधिक चौड़े मार्गों पर स्थित भूमियों को एफएआर एवं भवन की ऊंचाई की सीमा से मुक्त रखा गया है. यानि भोपाल में भी अब गगनचुंबी इमारतें होंगी. मास्टर प्लान ड्राफ्ट में भूतल कवरेज को हटाया गया है, जिससे नागरिकों एवं विकासकर्ताओं को लाभ होगा एवं डिजाइन विकल्प उपलब्ध होंगे। 

    शहर की हरियाली बढ़ाने प्लान में ये किए गए उपाय
    भोपाल मास्टर प्लान 2005 में ग्रीन एरिया 16 प्रतिशत था, जिसको बढ़ाकर भोपाल विकास योजना-2047 में लगभग 27 प्रतिशत किया गया है. जो यूआरडीपीएफआई गाइडलाइन के मानकों से कहीं अधिक है. भानपुर खंती के पुर्नविकास के लिए इस पर गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है. इसके अतिरिक्त कॉलोनी स्तर पर भी खुला क्षेत्र 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है. इससे हरित क्षेत्र में अतिरिक्त वृद्धि होगी. इसके अलावा सर्विस एरिया हेतु भी 2 प्रतिशत का क्षेत्रफल रखा जाना आवश्यक होगा। 

    भोपाल मास्टर प्लान के महत्वपूर्ण पाइंट

        शहर में साथ-साथ हो सकते हैं मकान-दुकान, मिक्स लैंड यूज का प्रस्ताव
        भोपाल के ग्रीन एरिया को 16 फीसदी से बढ़ाकर 27% करने का प्रस्ताव
        2047 तक 3000 हेक्टेयर का ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित
        पहली बार FAR और ऊंचाई की सीमा मुक्त भवन का प्रावधान, होंगी गगनचुंबी इमारतें.
        भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में एजुकेशन हब और गोल्फ कोर्स भी
        रेडियल मार्ग से ग्रोथ कॉरिडोर से जुड़ेंगे विदिशा-रायसेन-इंदौर रोड
        निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित नवीन प्रस्तावित बायपास ग्रीन फील्ड कॉरिडोर 

     

  • रामप्रसाद विश्वकर्मा की मैकेनिकल वोटिंग मशीन को भोपाल विज्ञान मेले में द्वितीय पुरस्कार

    रामप्रसाद विश्वकर्मा की मैकेनिकल वोटिंग मशीन को भोपाल विज्ञान मेले में द्वितीय पुरस्कार

    विज्ञान भारती, मध्यभारत प्रांत के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री शिवकुमार जी द्वारा किया गया सम्मान
    भोपाल

    भोपाल में आयोजित 13वें भोपाल विज्ञान मेले–2026 में राजगढ़ जिले के पचोर निवासी 76 वर्षीय श्री रामप्रसाद विश्वकर्मा द्वारा विकसित Pure Mechanical Voting Machine (MVM) को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

    समापन समारोह में विज्ञान भारती, मध्यभारत प्रांत के राष्ट्रीय संगठन मंत्री माननीय श्री शिवकुमार जी द्वारा श्री रामप्रसाद विश्वकर्मा को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। समापन समारोह में मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री श्री राकेश सिंह भी उपस्थित रहे।

    श्री रामप्रसाद विश्वकर्मा ने लगभग 14 वर्षों के प्रयास, प्रयोग और तकनीकी कार्य के बाद Mechanical Voting Machine का प्रोटोटाइप विकसित किया। इस आविष्कार के लिए उन्हें वर्ष 2024 में पेटेंट प्राप्त हुआ है। भोपाल विज्ञान मेले में MVM का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इनोवेटर्स एवं आम नागरिकों ने मशीन की कार्यप्रणाली को देखा और समझा।

    MVM एक Mechanical Voting System की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें मतदान की मुख्य प्रक्रिया यांत्रिक प्रणाली द्वारा संचालित होती है। वर्तमान प्रोटोटाइप में मतदान के बाद परिणाम प्रदर्शित करने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया। इस परियोजना में उनके पुत्र श्री कमलेश विश्वकर्मा, सह-आविष्कारक, ने पेटेंट प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण एवं तकनीकी प्रस्तुति में सहयोग किया।

    श्री रामप्रसाद विश्वकर्मा ने इस उपलब्धि पर विज्ञान भारती, MPCST (मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद), भोपाल विज्ञान मेला आयोजन समिति तथा सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। 

    उन्होंने कहा कि “यह पुरस्कार हमारे लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि आगे और बेहतर तकनीकी विकास एवं परीक्षण के लिए प्रेरणा है।” “उम्र नवाचार की सीमा नहीं है। 

  • मध्य प्रदेश निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव! बढ़ी जमानत राशि, प्रत्याशियों को देना होगा खर्च का लेखा-जोखा

    मध्य प्रदेश निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव! बढ़ी जमानत राशि, प्रत्याशियों को देना होगा खर्च का लेखा-जोखा

    भोपाल

    महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षद का चुनाव लड़ने वालों को अब सिक्योरिटी डिपॉजिट (जमानत राशि) के रूप में ज्यादा रकम जमा करनी होगी। अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने महापौर के लिए जमानत राशि 32 हजार रुपए कर दी है, जबकि नपा अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वालों को 24 हजार रुपए जमा करने होंगे।

    इसके साथ ही नामांकन जमा करने की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब यह अवधि सात दिन से कम नहीं होगी। सातवें दिन अवकाश होने पर अगले कार्यदिवस तक नामांकन जमा किए जा सकेंगे। चुनावी खर्च का हिसाब रखने और प्रस्तुत करने के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन किया है। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष के निर्वाचन, नामांकन, जमानत राशि, चुनावी खर्च और पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।

    महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों के चुनाव खर्च के लिए अलग बैंक खाता खोलने और निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करने से संबंधित प्रावधान भी किए गए हैं।

    नामांकन के लिए सात दिन से कम की समय-सीमा नहीं
    संशोधित नियमों के अनुसार महापौर, अध्यक्ष या किसी वार्ड के पार्षद के निर्वाचन के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख, समय और स्थान निर्धारित किया जाएगा। इसकी सूचना प्रकाशित होने के सातवें दिन को नामांकन की अंतिम तारीख माना जाएगा। यदि सातवां दिन सार्वजनिक अवकाश है तो उसके अगले कार्यदिवस को अंतिम तारीख माना जाएगा।

    एक पद के लिए एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं होंगे
    एक ही पद के निर्वाचन के लिए किसी प्रत्याशी की ओर से दो या अधिक नामांकन-पत्र प्रस्तुत किए जाने पर एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन-पत्र स्वीकार नहीं करेगा।

    चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता जरूरी
    महापौर, नपा और नपं अध्यक्ष तथा पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित सभी आय-व्यय का रिकॉर्ड रखने के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग और स्वतंत्र खाता खोलना होगा। नामांकन-पत्र पेश करते समय इस खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। चुनाव से संबंधित प्राप्तियों और खर्च का पूरा विवरण इसी खाते के माध्यम से रखना होगा।

    नामांकन से मतगणना तक के खर्च का देना होगा हिसाब
    उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसमें नामांकन-पत्र दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक किया गया संबंधित चुनावी खर्च शामिल होगा। निर्धारित समय में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर उम्मीदवार के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई हो सकती है।

    महापौर-अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया भी शामिल
    संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया भी शामिल की गई है। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 और मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 के संबंधित प्रावधानों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    यदि महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद मृत्यु, त्यागपत्र, निर्वाचन रद्द होने या अन्य कारण से रिक्त होता है, तो इसकी सूचना निर्धारित समय-सीमा में जिला निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।

    चुनावी खर्च का हिसाब नहीं दिया तो हो सकती है कार्रवाई
    यदि कोई उम्मीदवार निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करता है या निर्धारित अवधि में खर्च का हिसाब देने में विफल रहता है, तो राज्य निर्वाचन आयोग उसे निर्धारित अवधि के लिए संबंधित पद का चुनाव लड़ने से निरर्हित कर सकता है।

    खर्च से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे
    महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित खर्च का पूरा हिसाब और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे। अलग बैंक खाते की व्यवस्था से निर्वाचन व्यय से जुड़ी प्राप्तियों और खर्च का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने का प्रावधान किया गया है।

  • मुख्यमंत्री सुगम परिवहन और PM ई-बस सेवा शुरू, CM यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन और PM ई-बस सेवा शुरू, CM यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

    हम जो कहते हैं,करके भी दिखाते हैं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित मांग (शासकीय बसों का संचालन) पूरी होने पर इस स्वर्णिम सौगात के लिए प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि हम जो कहते हैं, वो करके भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' एवं 'पीएम ई-बस सेवा' के जरिए हमने अनंत चतुर्दशी के मंगल अवसर पर प्रदेशवासियों को खुशियों की अनंत सौगात दी है। उन्होंने कहा कि 25 सितम्बर को मध्यप्रदेश के नागरिकों, विशेष रूप से दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों में रहने वाले हमारे भाई-बहनों के जीवन में सुगम परिवहन से सहज परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले दो दशकों में शासकीय बसों का संचालन बंद होने के कारण हमारे ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा अभाव बना हुआ था। दूर-दराज के कई गांव मुख्य सड़कों से कट गए थे। गांव-देहात के हमारे गरीबों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं को आने-जाने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने अपने 'संकल्प पत्र' में भी यह सेवा प्रारंभ करने का उल्लेख किया था। गत दिवस शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ इस सेवा का मंगल आरम्भ करते हुए संकल्प को धरातल पर साकार कर दिया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि शुक्रवार को राज्यभर में 1,500 बसों से शुरू हुई इस सेवा को हमने वर्ष 2029 तक 15,000 बसों तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, ताकि प्रदेश के हर व्यक्ति तक सुगम बस परिवहन की सुविधा पहुंच सके।

     

  • डीपफेक से कोर्ट तक बढ़ी चुनौती! ग्वालियर में जजों का सम्मेलन, AI और नए कानूनों पर हुई चर्चा

    डीपफेक से कोर्ट तक बढ़ी चुनौती! ग्वालियर में जजों का सम्मेलन, AI और नए कानूनों पर हुई चर्चा

    ग्वालियर 

    ग्वालियर में मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन का शनिवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि न्यायदान केवल कानून की धाराओं को जानने तक सीमित नहीं है। न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचने वाले लोगों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। उनके अनुसार, केवल जानना अमूर्त है, जबकि समझना उस ज्ञान का वास्तविक उपयोग है।

    उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है। सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (बॉम्बे), गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक, रजिस्ट्री के अधिकारी और चारों राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    अनुभव से ज्यादा जरूरी नई परिस्थितियों को समझना

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि न्यायिक शिक्षा किसी निश्चित पाठ्यक्रम या सिलेबस तक सीमित नहीं है। इसका दायरा न्यायाधीश की सोच और समझ पर निर्भर करता है। वर्षों का अनुभव यह बताता है कि अतीत में क्या देखा है, लेकिन सच्ची शिक्षा यह सिखाती है कि अब तक सामने नहीं आई परिस्थितियों से कैसे निपटना है।

    उन्होंने कहा कि समाज लगातार बदल रहा है, इसलिए न्यायपालिका को भी अपने वैचारिक दायरे का विस्तार करते रहना होगा।

    डीपफेक के दौर में असली-नकली साक्ष्य पहचानना चुनौती

    तकनीक के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि आज अदालतों के सामने ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना अधिकांश न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर की शुरुआत में नहीं किया था। सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है।

    उन्होंने कहा कि साक्ष्य कृत्रिम हो सकते हैं और उन्हें अदालत में पेश करने वाले भी तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में न्यायपालिका को आधुनिक डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं को समझना होगा।

    पुराने कानूनों की नई व्याख्या की जरूरत

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि अपराधी जब तकनीक के इस्तेमाल में अधिक सक्षम और शातिर हो रहे हैं, तो न्यायाधीशों को भी दशकों पुराने कानूनों की व्यावहारिक और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या तलाशनी होगी।

    उन्होंने भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश और समाज के सामने जब भी नई चुनौतियां आई हैं, न्यायपालिका ने मजबूती से उनका सामना किया है और लोकतंत्र की रक्षा में अपनी भूमिका निभाई है।

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश, मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक दिनेश चंद्र लाल सहित जिला एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और चारों राज्यों के न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।

    इन मुद्दों पर चल रहा मंथन

    •     न्यायिक शिक्षा को बदलती कानूनी और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर।
    •     जजों को कानून के साथ सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को समझने की जरूरत।
    •     न्यायिक प्रशिक्षण में निष्पक्षता, समानता और संवेदनशीलता को शामिल करने की बात।
    •     जजों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखते रहने की जरूरत।
    •     न्यायिक शिक्षा में Ethics, Logic और Psychology को शामिल करने पर जोर।
    •     DNA रिपोर्ट, वॉयस सैंपल और डिजिटल सबूतों की समझ के लिए तकनीकी प्रशिक्षण जरूरी।
    •     डिजिटल दौर में अपराधों की जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट अहम सबूत।
    •     इलेक्ट्रॉनिक सबूत की विश्वसनीयता समझने के लिए जांच और न्यायिक अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण जरूरी।
    •     फॉरेंसिक लैब, पुलिस जांच और जेल व्यवस्था समझने के लिए ज्यूडिशियल अधिकारियों की फील्ड ट्रेनिंग का सुझाव।
    •     मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का उल्लेख।
    •     Judicial Academy में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर।
    •     ADR और Mediation को बढ़ावा देने की जरूरत।
  • रामबरन पाल की शानदार उपलब्धि, इंग्लिश चैनल पार कर बढ़ाया देश का मान

    रामबरन पाल की शानदार उपलब्धि, इंग्लिश चैनल पार कर बढ़ाया देश का मान

    बैतूल

    मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के विक्रम अवॉर्डी दिव्यांग अंतरराष्ट्रीय तैराक रामबरन पाल ने इंग्लिश चैनल पार कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने इंग्लैंड के डोवर से फ्रांस तक 42 किलोमीटर से अधिक का समुद्री सफर तैरकर पूरा किया। रामबरन ने 21 घंटे 20 मिनट तक लगातार तैरते हुए यह चुनौती पूरी की।

    रामबरन का यह अभियान 24 सितंबर को सुबह 8 बजकर 58 मिनट पर इंग्लैंड के डोवर तट से शुरू हुआ था। समुद्र के पानी का तापमान 15 डिग्री से कम था। कड़ाके की ठंड, तेज हवाओं और उफनती लहरों के बीच उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 21 घंटे 20 मिनट तक लगातार तैरने के बाद वे 25 सितंबर की सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर फ्रांस के तट पर पहुंचे और तिरंगा लहराकर अपनी सफलता दर्ज की।

    इस ऐतिहासिक अभियान में पद्मश्री और अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक डॉ. सतेन्द्र सिंह लोहिया भी शामिल रहे। उन्होंने अपनी तीसरी इंग्लिश चैनल क्रॉसिंग पूरी की। भिंड के तैराक गजेंद्र सिंह कुशवाह भी टीम का हिस्सा रहे। समुद्र में यह रिले तैराकी थी, जिसमें सभी तैराकों ने बारी-बारी से तैरकर अभियान पूरा किया।

    पिछले साल खराब मौसम ने नहीं दिया था साथ
    रामबरन पाल का इंग्लिश चैनल पार करने का सपना पिछले साल खराब मौसम के कारण अधूरा रह गया था। वे इंग्लैंड तक पहुंचे थे, लेकिन मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण उन्हें बिना तैरे ही वापस लौटना पड़ा। इसके बाद बैतूल लौटकर उन्होंने एक साल तक कड़ी मेहनत की। उन्होंने ठंडे पानी में लगातार अभ्यास किया और इस बार पूरी तैयारी के साथ इंग्लिश चैनल पार करने में सफलता हासिल की।

    रामबरन पाल अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 22 पदक जीत चुके हैं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें वर्ष 2006 में प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित किया था। वर्तमान में वे बैतूल नगर पालिका के स्विमिंग पूल में कोच के तौर पर बच्चों को तैराकी सिखा रहे हैं। रामबरन की यह उपलब्धि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत से बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।

     

  • निवाड़ी-टीकमगढ़-छतरपुर में ऑरेंज अलर्ट, MP में भारी बारिश का दौर

    निवाड़ी-टीकमगढ़-छतरपुर में ऑरेंज अलर्ट, MP में भारी बारिश का दौर

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के जिलों में अगले 48 घंटे तेज बारिश का दौर बना रहेगा। IMD (मौसम केंद्र) के अनुसार, शनिवार को जबलपुर-रीवा समेत 18 जिलों में अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट है। निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    मूसलधार बारिश की चेतावनी को देखते हुए शनिवार को सतना में नर्सरी से कक्षा 8वीं तक और मैहर में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक की सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।

    इसके अलावा भिंड, दतिया, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, दमोह, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, मंडला और डिंडौरी में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर में बूंदाबांदी हो सकती है।

    इसी तरह शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर और पन्ना में भी बूंदाबांदी का अनुमान है।

    पूर्वी MP में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश का मौसम एक बार फिर एक्टिव है। गहरे अवदाब की तीव्रता भले ही लगातार कम हो रही हो, लेकिन इसकी उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में गति और इससे जुड़ी नमी पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।

    इसलिए अगले 48 घंटे विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, किसान और आम नागरिक स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखें। साथ ही नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले इलाकों में अनावश्यक आवागमन से बचें।

    मानसून की विदाई को 5 दिन बचे
    एमपी में दक्षिण-पश्चिम मानसून का पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक है। यानी, मानसून की विदाई को पांच दिन बचे हैं। आने वाले दिनों में मानूसन की विदाई होने लगेगी। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    सामान्य बारिश से 2.2 इंच नीचे चल रहा प्रदेश
    IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 880.5 मिमी यानी, 34.7 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.9 इंच (937.9 मिमी) की तुलना में 2.2 इंच कम है।

    वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बराबर और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा बराबर है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 4% से 21% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। शुक्रवार को भी आंकड़ा बराबर पर आ गया।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% कम पानी गिरा है।

    इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
    IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

  • MP में सड़कों का होगा कायाकल्प, 940 KM सड़कें 4-लेन में तब्दील होंगी

    MP में सड़कों का होगा कायाकल्प, 940 KM सड़कें 4-लेन में तब्दील होंगी

    भोपाल 

     मप्र में 43 हजार करोड़ की सड़कें बनेंगी। 940 किमी 2-लेन सड़कों को 4-लेन में बदला जाएगा। 41 हजार करोड़ रुपए खर्च आएगा। जबकि 50 जिलों की 200 किमी पुरानी हो चुकी सिंगल व डबल लेन खस्ताहाल सड़कों को सीसी रोड में बदला जाएगा।इस काम पर 4200 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन दोनों कामों से प्रदेश के करीब 2 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इनमें कई सड़कें ऐसी भी हैं, जो 25 से 30 साल से खस्ताहाल है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने अनंत चतुर्दशी पर मप्र को ये सौगात दी। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि मप्र की 940 किमी सड़कों के प्रस्ताव को वे 18 सितंबर को ही स्वीकृति कर चुके हैं। यह काम एनएचएआइ को सौंपा है। कम समय में अच्छी गुणवत्ता वाला काम हो, यह पहली प्राथमिकता है।

    सीएम आवास पर की प्रोजेक्ट की समीक्षा
    असल में केंद्रीय मंत्री गडकरी लोक परिवहन सेवा की बसों का शुभारंभ करने शुक्रवार को भोपाल आए थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनके निवास पर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्टों की समीक्षा की। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह मौजूद रहे। जबकि एमपीआरडीसी के एमडी भरत यादव ने आगामी कार्य योजना का प्रजेंटेशन भी दिया।

    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह भी कहा
    पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का बटेश्वर (यूपी) से विशेष संबंध रहा है। अटल एक्सप्रेस-वे का निर्माण बटेश्वर तक करेंगे।

    सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत उज्जैन को जोड़ने वाले सभी मार्गों को तेजी से पूरा करें।

    कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की सड़क कनेक्टिविटी नागपुर जबलपुर और रायपुर से बढ़ाने के लिए कार्य योजना बनाए।

    बालाघाट जिले में बेहतर रोड नेटवर्क के लिए कार्य योजना बनाएं।

    पीडब्ल्यूडी को मिलेंगी 200 किमी सड़कें
    असल में एनएचएआइ ने बीते 25 से 30 सालों में नए व पुराने सड़क मागर्गों का विस्तार किया है। शहरों व ग्रामीण आबादी को राहत देने के लिए बायपास बनाए हैं लेकिन मुख्य शहरों व ग्रामीण आबादी के अंदर से गुजरने वाले पुराने मार्गों का नए सिरे से निर्माण नहीं कराया, जो कि आज भी बायपास तक पहुंचने पहुंचने का का मुख्य जरिया है। जबकि ये मार्ग अभी भी एनएचएआइ के पास ही है।

    मप्र के करीब 50 जिलों को मिला लें तो इनकी लंबाई करीब 200 किमी के आसपास है और जिन्हें बनाने में 4200 करोड़ का खर्च आ रहा है। मप्र पहले ही केंद्र को प्रस्ताव भेज चुका है। ये बन जाए तो बड़ी राहत मिलेगी। गडकरी ने उक्त प्रस्ताव को मंजूर करने का भरोसा दिया। साथ में यह भी कहा कि इन्हें सीसी रोड बनाकर पीडब्ल्यूडी को दे देंगे। बता दें कि शहरों के अंदर व आसपास के क्षेत्रों में वर्षों पहले 2-लेन बनाए थे। ट्रैफिक के दयाव व जाम के चलते अब उन पर आरओबी बना दिए है इसके कारण इन सड़कों का विस्तार नहीं हो पाया. जो कि समय की जरुरत है।

    जबलपुर के पास टोल वसूली रोकने के निर्देश
    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने जबलपुर के पास खस्ताहाल शहपुरा आरओबी के ठीक होने तक टोल वसूली बंद करने के निर्देश दिए हैं। उक्त आरओबी की एप्रोच रोड खराब है, जिसके कारण मार्ग डायवर्ट किया है। इस तरह राहगीर उक्त मार्ग पर बहुत कम चलते हैं, तब भी उनसे टोल वसूला जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से यह बात केंद्रीय मंत्री के सामने रखी गई। जिस पर उन्होंने तत्काल निर्णय लिया और अफसरों को निर्देश दिए।