Category: मध्य प्रदेश

  • आँगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, शिक्षा और सम्मान के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर

    आँगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, शिक्षा और सम्मान के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर

    भोपाल 

    सेवा-संकल्प अभियान के तहत झाबुआ जिले में आयोजित ‘आँगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम ने आँगनवाड़ी केंद्रों को केवल शासकीय सेवाओं के वितरण स्थल से आगे बढ़ाकर पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करने का संदेश दिया। जिला स्तरीय कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और विभिन्न योजनाओं की हितग्राही महिलाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट सहित जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

    26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक जिले के सभी आँगनवाड़ी केंद्रों पर चल रहे इस अभियान में महिलाओं और बच्चों को केंद्र में रखकर स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण, पोषण जागरूकता, मातृ संवाद, महिला हितग्राहियों की सफलता की कहानियां तथा विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। जिले ने 5 अक्टूबर तक एक लाख बच्चों को विभिन्न गतिविधियों और सेवाओं से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    ‘सेवा’ को सरकारी दायित्व से आगे सामाजिक जिम्मेदारी बनाने का आह्वान

    मंत्री  भूरिया ने कहा कि सेवा-संकल्प अभियान का उद्देश्य शासन की योजनाओं को समाज की व्यापक भागीदारी से जोड़ना है। गांव, फलिये और मोहल्ले के विकास में प्रत्येक नागरिक की भूमिका है। उन्होंने कहा कि आँगनवाड़ी भवन और उप स्वास्थ्य केंद्र जैसी संस्थाएं केवल सरकारी परिसंपत्तियां नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी हैं। उन्होंने आँगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और संस्कारों की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर देने के साथ कुपोषण से लड़ाई और विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आँगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं की सराहना की तथा महिला हितैषी योजनाओं से महिलाओं के जीवन में आए बदलावों का उल्लेख किया।

     

  • मस्जिद तोड़ने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे याचिकाकर्ता, याचिका खारिज; उज्जैन में तनाव के बाद FIR

    मस्जिद तोड़ने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे याचिकाकर्ता, याचिका खारिज; उज्जैन में तनाव के बाद FIR

    उज्जैन 
     प्रदेश की पावन नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मार्ग चौड़ीकरण की मुहिम के तहत शहर के कंठाल मार्ग पर स्थित शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने को लेकर जहां सोमवार को बवाल हो गया, वहीं इस बीच इस संदर्भ में हाई कोर्ट का अहम फैसला भी आया है।

    उज्जैन की शाही मस्जिद पर नगर निगम की कार्रवाई को उचित ठहराते हुए हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई की युगलपीठ ने भोजनावकाश के बाद मामले में सुनवाई करते हुए मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। विस्तृत आदेश देर शाम तक जारी होगा।

     शाही मस्जिद मामले में दायर याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुए समझौते के आधार पर मामले को डिस्पोज ऑफ कर दिया।

    याचिकाकर्ता शाही मस्जिद कमेटी के एडवोकेट कुलदीप पाठक ने कहा- कमेटी और प्रशासन के बीच समझौते के तहत सड़क के लिए 3 फीट जगह के साथ कुछ दुकानें हटाने पर सहमति बनी है। बड़ी मीनार को दूसरी ओर शिफ्ट किया जाएगा। दुकानों के लिए दूसरी जगह दी जाएगी।

    इससे पहले सोमवार सुबह मस्जिद का एक हिस्सा तोड़े जाने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। पुलिस पर पथराव किया गया। जवाब में लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़ी गई। भीड़ को हटाने के दौरान महिला थाना प्रभारी घायल हो गईं।

    विवाद के बाद फोर्स तैनात कर दी गई, लेकिन दोपहर होते-होते फिर पथराव होने लगा। पुलिस ने दोबारा लाठीचार्ज कर आंसू गैस छोड़ी। हंगामे के बीच कार्रवाई जारी रही। हालांकि, नमाज के समय इसे रोक दिया गया। इसके बाद मामला शांत हो गया।

    पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया है। 7 लोगों के खिलाफ FIR की गई है, इनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शामिल हैं। इन पर माहौल बिगाड़ने का आरोप है।

    सड़क के दायरे में आए 15 धर्मस्थल, 12 हटाए

    सिंहस्थ प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक डेढ़ किलोमीटर एरिया की सड़क 15 मीटर चौड़ी की जाएगी। इसके लिए 323 मकान तोड़े जाएंगे। इनमें 15 धर्मस्थल हैं। अब तक 12 धर्मस्थल हटाए जा चुके हैं।

    सड़क के दायरे में शाही मस्जिद का भी करीब 9 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा हिस्सा आ रहा है। दस्तावेज में इस मस्जिद के 100 साल से ज्यादा पुरानी होने की पुष्टि होती है। हालांकि, इमाम का दावा है कि यह 600 साल से ज्यादा पुरानी है।

    गौरतलब है कि शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के विरोध में मस्जिद कमेटी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह 100 साल से अधिक पुरानी ऐतिहासिक इमारत है और इसके समर्थन में दस्तावेज भी मौजूद हैं।

    करीब 15 दिन पहले एकलपीठ में याचिका खारिज होने के बाद मस्जिद कमेटी ने युगलपीठ के समक्ष यह मामला प्रस्तुत किया। मस्जिद पक्ष का तर्क था कि वर्ष 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी और उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क बनी हुई है। अब हाई कोर्ट की युगलपीठ के फैसले से उज्जैन नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई पर मुहर लग गई है।

    भोपाल में भी पुलिस अलर्ट, सोशल मीडिया पर निगरानी
    उज्जैन में पथराव-हंगामे के चलते भोपाल में भी पुलिस अलर्ट मोड पर है। शहर के संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में फोर्स तैनात की गई है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा- सभी थानों को अलर्ट रखा गया है। पुलिस अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी निगरानी है। आपत्तिजनक या भ्रामक पोस्ट करने वालों पर नजर रखी जा रही है।

    मस्जिद कमेटी के वकील ने क्या कहा?
    मस्जिद कमेटी की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अज़हर वारसी ने बताया कि इससे पहले 9 सितंबर को सिंगल बेंच ने याचिका पर आदेश जारी किया था। 

    उन्होंने बताया, "उस आदेश में मास्टर प्लान के अनुरूप कार्रवाई और उसके पालन की बात कही गई थी. इसके बाद कमेटी की ओर से डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की गई। 

    सुनवाई के दौरान वैकल्पिक मार्ग तलाशने का सुझाव भी अदालत के सामने रखा गया। 

    वारसी के अनुसार, "प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुई चर्चा में मस्जिद के करीब तीन फीट हिस्से को यथावत रखने का मुद्दा भी उठाया गया था. वहीं नगर निगम ने अपने शपथ पत्र में कहा था कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान लिए जाने वाले हिस्से के बदले नियमानुसार एफ़एआर और टीडीआर का लाभ दिया जाएगा। 

    डिवीजन बेंच ने निगम को उसके शपथ पत्र में दी गई शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। 

    कोर्ट के आदेश के बाद उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई आगे जारी रहेगी. मस्जिद कमेटी की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था और प्रभावित हिस्से से जुड़े मुद्दे सुनवाई के दौरान प्रमुखता से रखे गए। 

    सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद

    उज्जैन नगर निगम के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण का काम उज्जैन विकास योजना 2035 के तहत किया जा रहा है। शाही मस्जिद भी सड़क के उसी हिस्से में मौजूद है, जिसे 15 मीटर तक चौड़ा करने की योजना है. मस्जिद का एक हिस्सा इस प्रस्तावित सड़क की जद में आ रहा है। क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय सिंहस्थ का विरोध नहीं करता। 

    उन्होंने पत्रकारों से कहा, "सिंहस्थ पहले भी हुआ था आगे भी होगा. मुस्लिम समुदाय हमेशा उसका पक्षधर रहा है. हम बस ये कह रहे हैं कि वैकल्पिक व्यवस्था तलाशी जाए और किसी भी धार्मिक स्थल को न तोड़ा जाए. क्योंकि इनमें से कई तो हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट्स हैं. अब शाही मस्जिद को ही ले लीजिए, यह लगभग 650 साल पुरानी है। 

     

  • कलेक्टर सिंह के नेतृत्व में देवास का नवाचार चमका, जॉब पोर्टल को मिला स्कॉच गोल्ड सम्मान

    कलेक्टर सिंह के नेतृत्व में देवास का नवाचार चमका, जॉब पोर्टल को मिला स्कॉच गोल्ड सम्मान

    देवास जॉब पोर्टल को मिला प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड

    कलेक्टर सिंह के नेतृत्व में देवास के नवाचार की देश में सराहना

    देवास

    देवास में रोजगार के क्षेत्र में शुरू किए गए अभिनव नवाचार “देवास जॉब पोर्टल” ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में इस डिजिटल पहल को प्रतिष्ठित ‘स्कॉच अवार्ड – गोल्ड कैटेगरी’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार कलेक्टर ऋतु राज सिंह के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में युवाओं को रोजगार के सुगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मिली बड़ी उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को देवास जिले के बागली विकासखंड में “देवास जॉब पोर्टल” का विधिवत शुभारंभ किया गया था। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं और उद्योगों को एक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी डिजिटल मंच पर जोड़ते हुए रोजगार के अवसरों को सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। देवास जॉब पोर्टल युवाओं और स्थानीय औद्योगिक इकाइयों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है। सितंबर 2026 तक पोर्टल पर 12,600 से अधिक युवाओं ने पंजीयन कराया है। पोर्टल पर 258 उद्योगों और संस्थानों ने भागीदारी करते हुए 4600 रोजगार के अवसर सृजित किए, इनमें से 1,000 से अधिक स्थानीय अभ्यर्थियों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ।

    स्थानीय प्रशासन, उद्योग और युवाओं के बीच सशक्त डिजिटल संपर्क स्थापित करने वाला यह मॉडल रोजगार की खोज और उपलब्धता के बीच के अंतर को समाप्त करने में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल साबित हुआ है।

     

  • पंचायतों के उप निर्वाचन क्षेत्रों एवं नगर परिषद सुसनेर में मतदान दिवस पर रहेगा अवकाश

    पंचायतों के उप निर्वाचन क्षेत्रों एवं नगर परिषद सुसनेर में मतदान दिवस पर रहेगा अवकाश

    पंचायतों के उप निर्वाचन क्षेत्रों एवं नगर परिषद सुसनेर में मतदान दिवस पर रहेगा अवकाश

    मतदान 29 सितम्बर को होगा 

    भोपाल

    राज्य शासन द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन वर्ष 2026 पूर्वाध के घोषित कार्यक्रम अनुसार मतदान दिवस 29 सितम्बर, 2026 को सामान्य अवकाश घोषित किया गया है। जिला आगर-मालवा की नगर परिषद सुसनेर के अध्यक्ष पद का निर्वाचन होगा।

    पंचायतों में मतदान 29 सितम्बर को सुबह 7 से अपरान्ह 3.00 बजे तक होगा। पंच पद के लिये मतगणना मतदान के तुरंत बाद मतदान केन्द्र पर ही होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी।

    जिला पंचायत के 7, जनपद पंचायत के 28 और सरपंच के 110 पदों के लिये होगा उप निर्वाचन

    पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 7, जनपद पंचायत सदस्य के 28, सरपंच के 110 और 4090 पंच पद के लिये उप निर्वाचन होगा।

     

  • श्रीअन्न और धान उपार्जन के लिए समय रहते पंजीयन करायें किसान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    श्रीअन्न और धान उपार्जन के लिए समय रहते पंजीयन करायें किसान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश को मिलेट स्टेट बनाने में अनूपपुर का महत्वपूर्ण योगदान है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसान चौपाल बनें किसानों से संवाद का माध्यम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    श्रीअन्न और धान उपार्जन के लिए समय रहते पंजीयन करायें किसान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सेवा-संकल्प अभियान से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ें
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनूपपुर के किसानों से किया वर्चुअल संवाद
    मुख्यमंत्री निवास से किया बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को मिलेट स्टेट बनाने में अनूपपुर का बड़ा योगदान है। अनूपपुर जिला जल संपदा से संपन्न है। जिले में केवई उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में तकनीक और नवाचार से कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही 100 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई क्षमता का विस्तार करना हमारा लक्ष्य है। प्रदेश में किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में जारी सेवा-संकल्प अभियान के अंतर्गत किसान हितैषी योजनाओं की जानकारियां अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा की जायें। राज्य सरकार युवाओं, गरीबों, महिलाओं और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ज्वार, बाजरा जैसे श्रीअन्न के साथ धान उपार्जन के लिए पंजीयन शुरू हो गया है। उन्होंने किसानों से समय रहते पंजीयन कराने का आह्वान किया। ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के अंतर्गत आज मुख्यमंत्री निवास से अनूपपुर में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में वर्चुअली जुड़कर किसानों से संवाद किया।

    राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान चौपालें लगाकर किसान हितैषी योजनाओं का प्रसार-प्रचार किया जाए। किसान चौपालों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का भी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अनूपपुर में धान, गेंहू, दलहन और तिलहन के उत्पादन के साथ हमारे किसान नई तकनीक और नई फसलों को अपना रहे हैं। किसानों द्वारा मशरूम और स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को पशुपालन, दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियां अपनाते हुए नवीन तकनीक और नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि का भविष्य उज्ज्वल है, किसान अपने बच्चों को कृषि उद्योगों से जोड़े। राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ है।

    ग्रामीणों को मिलेंगे सुगम परिवहन सेवा और नि:शुल्क रजिस्ट्री के लाभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में आरंभ हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना का लाभ दूरदराज के गांव वालों को मिलेगा। ग्रामीणों के लिए नि:शुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा आरंभ की गई है। राज्य सरकार बच्चों की बेहतर पढ़ाई और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया प्रगतिशील किसानों से संवाद

    बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनूपपुर जिले के प्रगतिशील किसानों से वर्चुअल संवाद किया। किसानों ने कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा पशुपालन से संबंधित गतिविधियों की जानकारी साझा की। पुष्पराजगढ़ के रमेश सिंह एवं अरुण कुमार चन्द्रवंशी ने आधुनिक कृषि यंत्रों एवं सिंचाई सुविधाओं से प्राप्त लाभ बताए। प्रेमलाल केवट ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जबकि रामभजन ने फसल प्रदर्शन एवं किसान खेत पाठशाला की जानकारी दी। पशुपालक माधव सिंह राठौर ने उन्नत पशुपालन एवं कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से बढ़े दुग्ध उत्पादन की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को प्रोत्साहित किया।

    उन्नतशील किसान एवं मेधावी विद्यार्थी हुए सम्मानित

    बलराम कृषि महोत्सव कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उन्नतशील किसानों एवं शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों का सम्मानित किया गया। उन्नतशील किसानों में रामप्रमोद साहू, ओम प्रकाश जोगी, फत्तेलाल जयसवाल, जीवनलाल एवं जगदीश सिंह को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इसी क्रम में शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अनूपपुर के मेधावी विद्यार्थियों दुर्गेश्वरी कोल, दुर्गा सिंह, धनश्वरी देवी, शुभा द्विवेदी एवं आकाश सिंह मरावी को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

    प्रदर्शनी के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की दी गई जानकारी

    बलराम कृषि महोत्सव के दौरान कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों एवं गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत कृषि यंत्रों, उद्यानिकी फसलों, उन्नत पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन तथा शासन की विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी दी गई। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को अपनाकर आय में वृद्धि के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

    कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह, कलेक्टर रत्नाकर झा, पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती पार्वती वाल्मीकि राठौर जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम सहित कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन विभाग के अधिकारी जनप्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।

     

  • Master Plan-2047: चौड़ी सड़क के नाम पर कमर्शियल नहीं होगा प्लॉट, 12% खुली जगह अनिवार्य

    Master Plan-2047: चौड़ी सड़क के नाम पर कमर्शियल नहीं होगा प्लॉट, 12% खुली जगह अनिवार्य

    भोपाल
    भोपाल के मास्टर प्लान-2047 के प्रस्तावित ड्राफ्ट में शहर के विकास और नई कॉलोनियों के स्वरूप को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी नई कॉलोनी में महज सड़क चौड़ी होने से कोई प्लॉट कमर्शियल नहीं मान लिया जाएगा।

    इसके लिए लेआउट में स्पष्ट मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, कॉलोनियों में हरियाली और बच्चों के लिए खेल मैदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खुली जगह (ओपन स्पेस) का दायरा भी 10% से बढ़ाकर 12% कर दिया है।

    चौड़ी सड़क का मतलब सीधे कमर्शियल प्लॉट नहीं
        मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के अनुसार, नई कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के आधार पर दुकान, ऑफिस, अस्पताल या मॉल खोलने की गुंजाइश तो दी है, लेकिन लेआउट पास करते समय ही यह तय करना होगा कि कमर्शियल या मिक्स लैंड यूज के प्लॉट कहां होंगे।

    नई कॉलोनी में कुल आवासीय क्षेत्र के अधिकतम 5% हिस्से में ही स्थानीय जरूरतों वाली दुकानें खोलने की अनुमति होगी। हालांकि, अगर सड़क 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी है, तो इस 5% की सीमा के अलावा भी मिक्स लैंड यूज वाले प्लॉट मंजूर किए जा सकेंगे।
    पहले से बसी पुरानी कॉलोनियों में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से कमर्शियल गतिविधियों की छूट मिलेगी, लेकिन आवासीय परिसरों में गैर-आवासीय उपयोग स्वीकृत एफएआर (FAR) के अधिकतम 50% तक ही सीमित रहेगा।

    हरियाली और खेल मैदानों पर विशेष जोर
    नए प्रस्ताव में पर्यावरण और खुले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नई कॉलोनियों में अब 12 प्रतिशत सामुदायिक खुली जगह छोड़ना अनिवार्य होगा, जिसमें से आधी जगह एक साथ (सिंगल पैच में) रखनी होगी। इस कुल खुले क्षेत्र का 30 फीसदी हिस्सा पेड़-पौधों के लिए और 30 फीसदी बच्चों के खेल मैदान के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा, सर्विस सुविधाओं के लिए अलग से 2% जमीन छोड़ना भी अनिवार्य किया गया है।

    शहर के बाहर व्यक्तिगत मकान बनाने पर सख्त हुए नियम
        अक्सर लोग शहर के बाहर शांत इलाकों में बड़ी जमीन लेकर अपना अलग मकान बना लेते हैं, जिससे वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का दबाव बढ़ जाता है। अब ऐसे व्यक्तिगत मकानों के लिए नियम सख्त कर दिए गए हैं।

        इनके लिए कम से कम 9 मीटर चौड़ी सड़क का होना जरूरी है। साथ ही अधिकतम 25% ग्राउंड कवरेज, 10 मीटर ऊंचाई और 1.25 एफएआर (FAR) का प्रस्ताव रखा गया है। मकान मालिक को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उसकी जमीन किसी अवैध कॉलोनी का हिस्सा तो नहीं है।

        नक्शा पास कराते समय प्लॉट के चारों ओर छोड़ी जाने वाली जगह (मार्जिन) के नियमों में छोटे प्लॉट वालों को काफी राहत दी गई है है। 517 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सिर्फ सामने की तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। पीछे या अगल-बगल कोई जगह छोड़ने की जरूरत नहीं है।

        517 से 1615 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर और पीछे 1.5 मीटर जगह छोड़नी होगी। 1615 से 2422 वर्ग फीट तक के प्लॉट में सामने 3 मीटर, पीछे 1.5 मीटर और एक तरफ 3 मीटर जगह छोड़नी होगी। इससे बड़े आकार (5382 वर्ग फीट तक) के प्लॉट्स के लिए साइज के हिसाब से चारों तरफ जगह छोड़ने के अलग-अलग नियम तय किए गए हैं।

    दूसरी ओर, सामान्य आवासीय प्लॉट्स पर निर्माण की अच्छी छूट दी गई है। मसलन, 5000 वर्ग फीट के प्लॉट पर सभी मंजिलों को मिलाकर 7500 वर्ग फीट तक निर्माण किया जा सकता है। इसकी अधिकतम ऊंचाई 12.50 मीटर हो सकती है और इसमें ज्यादा से ज्यादा 6 फ्लैट बनाने की इजाजत होगी।

    अतिरिक्त निर्माण के लिए टीडीआर (TDR) और शुल्क का फॉर्मूला
    अगर कोई व्यक्ति तय सीमा से अधिक निर्माण करना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त एफएआर का 50% हिस्सा शुल्क देकर और बाकी 50% हिस्सा टीडीआर (यानी दूसरे की जमीन से मिला निर्माण अधिकार) के जरिए हासिल करना होगा। वहीं, 12.50 मीटर तक की ऊंचाई वाले मकानों में एफएआर को 1.25 से बढ़ाकर 1.50 तक ले जाने के लिए पूरा अतिरिक्त अधिकार शुल्क देकर मंजूरी प्राप्त की जा सकती है।

  • पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन का शेड्यूल जारी, जबलपुर से गया के लिए 3 ट्रिप

    पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन का शेड्यूल जारी, जबलपुर से गया के लिए 3 ट्रिप

     ग्वालियर
     पितृपक्ष के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए बिहार के गया पहुंचते हैं। इस दौरान रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर जगह-जगह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई देती है। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन चलाने की व्यवस्था की है।

    उपलब्ध रेलवे शेड्यूल के अनुसार रेल प्रशासन ने जबलपुर–गया–जबलपुर के बीच पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। गाड़ी संख्या 01701/01702 के 3-3 ट्रिप चलाए जाएंगे।

    24 कोच वाली होगी ट्रेन
    पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन में 24 कोच लगाए जाएंगे। ट्रेन में ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु सफर कर सकेंगे।

    पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन में 4 सामान्य श्रेणी, 12 शयनयान श्रेणी, 4 वातानुकूलित तृतीय श्रेणी और 2 वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के कोच होंगे।

    इसके अलावा 2 एलएलआरडी कोच लगाए जाएंगे। ट्रेन में कुल 24 कोच रहेंगे।

    ठहराव और विस्तृत समय-सारिणी की जानकारी के लिए भारतीय रेल की वेबसाइट या एनटीईएस ऐप का उपयोग किया जा सकता है।

    जबलपुर से गया जाने वाली ट्रेन का शेड्यूल
    गाड़ी संख्या 01701 जबलपुर–गया एक्सप्रेस स्पेशल 29 सितंबर, 4 अक्टूबर और 9 अक्टूबर 2026 को जबलपुर स्टेशन से रात 9:25 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन सिहोरा रोड (9:50/9:52), कटनी (12:10/12:15), मैहर (1:40/1:42), सतना (2:00/2:05), मानिकपुर (4:10/4:12), प्रयागराज छिवकी (6:00/6:05), मिर्जापुर (8:18/8:20), पंडित दीन दयाल उपाध्याय (10:10/10:20), भभुआ रोड (10:58/11:00), सासाराम (11:30/11:32), डेहरी-ऑन-सोन (11:50/11:52) और अनुग्रह नारायण रोड (12:10/12:12) होते हुए दोपहर 2:30 बजे गया पहुंचेगी।

    गया से जबलपुर जाने वाली ट्रेन का शेड्यूल
    गाड़ी संख्या 01702 गया–जबलपुर एक्सप्रेस स्पेशल 28 सितंबर, 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर 2026 को गया स्टेशन से दोपहर 3:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन अनुग्रह नारायण रोड (4:15/4:17), डेहरी-ऑन-सोन (4:32/4:34), सासाराम (4:50/4:52), भभुआ रोड (5:23/5:25), पंडित दीन दयाल उपाध्याय (6:55/7:05), मिर्जापुर (8:43/8:45), प्रयागराज छिवकी (10:15/10:20), मानिकपुर (1:30/1:32), सतना (3:25/3:30), मैहर (3:50/3:52), कटनी (5:25/5:30) और सिहोरा रोड (7:20/7:22) होते हुए सुबह 8:10 बजे जबलपुर पहुंचेगी।

  • मोहन सरकार की नई उधारी, ₹1500 करोड़ कर्ज लेकर इन कामों में होगा इस्तेमाल

    मोहन सरकार की नई उधारी, ₹1500 करोड़ कर्ज लेकर इन कामों में होगा इस्तेमाल

    भोपाल
     मध्य प्रदेश सरकार अनुपूरक बजट के पहले एक बार फिर 1500 करोड़ का बजट लेने जा रही है. यह कर्ज सरकार विकास से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए लिया जा रहा है. ओपन मार्केट से लिए जा रहा यह कर्ज राज्य सरकार दो हिस्सो में ले रही है, इसे आगामी 18 और 30 सालों में चुकाया जाएगा. इस कर्ज के साथ मध्य प्रदेश पर कर्ज को बोझ बढ़कर 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ हो जाएगा. इसके पहले राज्य सरकार ने 16 सितंबर को भी 2500 करोड़ का कर्ज लिया था। 

    सरकार लगातार ले रही कर्ज
    वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है. राज्य सरकार सितंबर माह में तीसरी बार कर्ज ले रही है. यह कर्ज सरकार सड़क सहित दूसरे विकास के कामों के लिए ले रही है. 1 सितंबर 2026 को राज्य सरकार ने 3600 करोड़ का कर्ज लिया था. यह कर्ज सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के जरिए दो अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटी की नीलामी से लिया गया था. इसमें 1600 करोड़ का कर्ज 18 साल के लिए और 2000 करोड़ का कर्ज 30 साल के लिए लिया गया था। 

    16 सितंबर को 2500 करोड़ का कर्ज लिया है. तीन अलग-अलग किस्तों में लिया गया यह कर्ज 8, 12 और 22 सालों में चुकाया जाएगा. अब राज्य सरकार 1500 करोड़ का लोन लेने जा रही है. यह कर्ज सरकार दो किस्तों 800 करोड़ और 700 करोड़ के रूप में ले रही है. पहला कर्ज सरकार 18 सालों के लिए ले रही है, जबकि 700 करोड़ का लोन सरकार 30 साल के लिए ले रही है। 

    मध्यप्रदेश पर कर्ज पहुंच 5.42 लाख करोड़
    लगातार लिए जा रहे कर्ज से मध्य प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता रहा है. वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पर कर्ज 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ करोड़ रुपए था. जबकि पिछले छह माह में राज्य सरकार 54 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज ले चुकी है. सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर कांग्रेस ने वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया है। 

    कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अविनीश बुंदेला ने आरोप लगाया है कि, ''सरकार के पास वित्तीय प्रबंधन नहीं है. सरकार लगातार कर्ज लेकर फिजूलखर्जी कर रही है. सुख सुविधाओं और सरकारी आयोजनों में कर्ज का पैसा उड़ाया जा रहा है. सरकार को जनता को बताना चाहिए कि पिछले सालों में लिया गया कर्ज कहां कहां खर्च किया गया है। 

  • उज्जैन में ई-बस सेवा का शुभारंभ, एक टिकट में 17+ मंदिर और ऐतिहासिक स्थल

    उज्जैन में ई-बस सेवा का शुभारंभ, एक टिकट में 17+ मंदिर और ऐतिहासिक स्थल

    उज्जैन
     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  उज्जैन के श्री महाकाल लोक अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर से ‘उज्जैन दर्शन’ और ‘पीएम ई-बस सेवा’ की शुरूआत हरी झंडी दिखाकर की। इसके साथ ही उज्जैन में धार्मिक पर्यटन और सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देने की पहल शुरू हुई।

    महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालु अब 200 रुपये के एक ही टिकट पर शहर के 17 से अधिक प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों की इलेक्ट्रिक एसी बसों में बैठकर सैर कर सकेंगे। 27 किलोमीटर लंबे रूट पर संचालित इन बसों की सबसे बड़ी सुविधा हॉप-ऑन हॉप-ऑफ है। मतलब- यात्री किसी एक मंदिर पर उतरकर दर्शन कर सकता है और उसी टिकट पर अगली उपलब्ध बस से आगे जा सकता है।

    एक ही टिकट पर सभी बसों में यात्रा
    हरी झंडी दिखाने के बाद शक्ति पथ पर मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ स्वयं बस में सफर कर परिवहन व्यवस्था का जायजा लिया। बस संचालन पर निगरानी रखने वाली कंपनी- उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक संदीप सोनी ने बताया कि ‘उज्जैन दर्शन’ बस सेवा की सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को हर मंदिर तक पहुंचने के लिए अलग-अलग वाहन की व्यवस्था नहीं करनी होगी।

    200रु में उज्जैन दर्शन, 27.01 किलोमीटर का पूरा सर्किट
    उज्जैन दर्शन सेवा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका निर्धारण धार्मिक पर्यटन सर्किट है. सेवा मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगी और महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋण मुक्तेश्वर महादेव, भर्तहरि गुफा, गढ़कालिका माता मंदिर, कालभैरव, सिद्धि वट, अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता, चिंतामन गणेश, अष्टविनायक, शनि नवग्रह, इस्कॉन मंदिर बस स्टैंड और उज्जैन रेलवे स्टेशन से होते हुए वापस मेघदूत वन पार्किंग पहुंचेगी। 

    200 रुपये के टिकट पर यात्री निर्धारित स्टाप पर उतरकर दर्शन कर सकेंगे और फिर उसी टिकट से अगली उपलब्ध बस में बैठकर आगे की यात्रा जारी रख सकेंगे।

    ये है खास
    इस हॉप-ऑन हॉप-ऑफ व्यवस्था से श्रद्धालुओं को अपनी सुविधानुसार प्रमुख स्थलों पर रुकने का अवसर मिलेगा। टिकट का भुगतान डिजिटल माध्यम और यूपीआई से किया जा सकेगा। बस में यात्रियों को गाइड की सुविधा भी मिलेगी। बसों में जीपीएस आधारित लाइव ट्रैकिंग, सीसीटीवी कैमरे और रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा है। डिजिटल असिस्टेंट सह गाइड यात्रियों को प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों के पौराणिक महत्व की जानकारी देगा।

    27 किमी के दायरे में इन स्थलों को यात्रा के लिए जोड़ा
    27 किलोमीटर लंबे उज्जैन दर्शन मार्ग पर 17 से अधिक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ा गया है। मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होने वाली बस महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, शिप्रा नदी के घाट, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव, सिद्धवट, अंगारेश्वर, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता, चिंतामण गणेश, अष्ट विनायक, शनि नवग्रह मंदिर और इस्कान मंदिर होते हुए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगी। इसके बाद बस वापस मेघदूत वन पार्किंग पर लौटेगी।

    शहर के 12 अन्य मार्ग भी सक्रिय
    उज्जैन शहर में कुल 12 मार्गों में जो शैक्षणिक, धार्मिक, आवासीय और व्यवसायिक क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ेंगे उसमें तपोभूमि-पानविहार, उज्जैन रेलवे स्टेशन-कालियादेह महल, कानीपुरा-अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट-तपोभूमि, देवास-ताजपुर, देवास गेट-नए आरटीओ, महाकाल चौराहा-अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट-नानाखेड़ा, अवंतिका विश्वविद्यालय-नानाखेड़ा, देवास गेट-मुरलीपुरा, तपोभूमि-नजरपुर और उज्जैन दर्शन मार्ग शामिल हैं।

    इन 12 मार्गों से गुजरेगी बस
    शहर में स्थानीय परिवहन को सुगम बनाने के लिए 12 बस मार्ग भी निर्धारित किए गए हैं। इनमें तपोभूमि से पान विहार, रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, कानीपुरा से अभिलाषा कालोनी, देवास गेट से नानाखेड़ा और अवंतिका विश्वविद्यालय से नानाखेड़ा जैसे मार्ग शामिल हैं। इनसे आवासीय, व्यावसायिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान बनाने का लक्ष्य है।

    सिंहस्थ से पहले महत्वपूर्ण कदम
    सिंहस्थ 2028 में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए यह व्यवस्था निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और शहर के धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित करने की दिशा में अहम पहल है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता नियमित संचालन, बसों की उपलब्धता और यात्रियों को समय पर सुविधा मिलने पर निर्भर करेगी।

    कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ महाराज, डा. लता वानखेड़े, महापौर मुकेश टटवाल, हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ओम जैन, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

    बस सरकार की, संचालन ग्रीन सेल का
    बस सेवा की पूरी व्यवस्था कई स्तरों पर काम करेगी। राज्य स्तर पर मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवाईपीएल) व्यवस्था देखेगी। इसके तहत उज्जैन संभाग के लिए यूसीटीसीएल काम करेगी। यूसीटीसीएल के एमडी मनीष सिंह और कार्यकारी निदेशक संदीप सोनी हैं।

    नगर निगम आयुक्त, लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी भी व्यवस्था से जुड़े हैं। बसों का प्रत्यक्ष संचालन ग्रीन सेल कंपनी करेगी। ड्राइवर-कंडक्टर उपलब्ध कराने से लेकर बस के मेंटेनेंस तक की जिम्मेदारी ग्रीन सेल की रहेगी। इसके बदले यूसीटीसीएल द्वारा ऑपरेटर को 58 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।

    ये रहेगी संचालन की व्यवस्था
    यात्रियों से किराया लेने और फेयर कलेक्शन की जिम्मेदारी ‘चलो’ कंपनी को दी गई है। टिकट से मिलने वाली पूरी आय यूसीटीसीएल के पास जाएगी। ‘चलो’ कंपनी को बस संचालन के हिसाब से 8 रुपये प्रति किलोमीटर के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

    महाकाल लोक पुलिस स्टेशन शुरू
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने श्री महाकाल लोक पुलिस स्टेशन का भी शुभारंभ किया. महाकाल क्षेत्र में बढ़ती श्रद्धलुओं की संख्या और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को देखते हुए क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

    14.42 किलोमीटर सड़क, आरओबी और पुल का निरीक्षण
    मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत चल रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया. लोक निर्माण विभाग द्वारा सीआईआरएफ के तहत निर्मित की जा रही 42.14 किलोमीटर लंबी सड़क और आरओबी व पुल निर्माण कार्यो को देखा. मुख्यमंत्री ने कहा, ''अवंतिका प्राचीन काल से गौरवशाली नगरी है. उज्जैन के सौंदर्यीकरण में नागरिक भी अपना योगदान दे रहे हैं. उज्जैन में मेट्रो ट्रेन की सौगात जल्द मिलने वाली है.'' प्रदेश में उद्योगिक विकास और अलग अलग शहरों के विकास से जुड़े प्रयासों के बारे में बताया। 

    172.87 करोड़ की 15 विकास परियोजनाएं
    मुख्यमंत्री ने उज्जैन जिले को 172.87 करोड़ के 15 वि
    कास कार्यों की भूमिपूजन व लोकार्पण कर सौगात दी है. जिसमें 12 कार्य भूमिपूजन व 3 लोकार्पण है. भूमिपूजन में गौशाला मार्ग से शिप्रा विहार मार्ग निर्माण, महाकाल लोक क्षेत्र में पार्किंग, श्री महाकाल मंदिर परिसर का विकास और क्षिप्रा नदी के घाटों का जीर्णोद्धार शामिल है. साथ ही महाकाल मंदिर के पीछे लैंडस्केप, चिंतामण जवासिया में पुलिस आवास, उन्हेल में थाना भवन, पर्यटन विभाग से सबंधित कार्य. जिनकी लागत 153.31 करोड़ है. वहीं, 19.56 करोड़ के लोकार्पण में नीलगंगा और उन्हेल में निर्मित पुलिस आवास व थाना भवन, बड़नगर में निर्मित 33/11 के.वी विद्युत उपकेंद्र शामिल हैं। 

     

  • अमित शाह के दौरे से पहले पुलिस अलर्ट, PHQ में DGP ने ली तैयारियों की बैठक

    अमित शाह के दौरे से पहले पुलिस अलर्ट, PHQ में DGP ने ली तैयारियों की बैठक

    भोपाल
     केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित मध्य प्रदेश दौरे और तीन अक्टूबर से आयोजित होने वाली नवीन आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी की तैयारियों की डीजीपी कैलाश मकवाणा ने रविवार को पुलिस मुख्यालय में समीक्षा की।

    बैठक में साइबर अपराध, कानून-व्यवस्था, आतंकवाद प्रतिरोध, माओवादी समस्या उन्मूलन, पुलिस आधुनिकीकरण और पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय सहित पुलिसिंग के विभिन्न विषयों पर अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण दिए।

    अधिकारियों ने ई-जीरो एफआईआर, 1930 साइबर हेल्पलाइन, साइबर कमांडो प्रशिक्षण और सेफ क्लिक अभियान की जानकारी दी। सेफ क्लिक के माध्यम से 8.6 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाए जाने की जानकारी दी गई। ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, ई-समन, फॉरेंसिक सेवाओं और 57 मोबाइल फोरेंसिक वैन की जानकारी भी दी गई।

    विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव ने प्रदर्शनी की तैयारियों की जानकारी दी। इसमें अपराध घटित होने से नागरिक को न्याय मिलने तक की प्रक्रिया को पुलिस, एफएसएल, अभियोजन और जेल की भूमिका के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी करीब पांच दिन चलेगी और तीन अक्टूबर से आम नागरिकों के लिए शुरू होगी।