Category: मध्य प्रदेश

  • बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाओं को किया गया शामिल

    बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाओं को किया गया शामिल

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की गौरवशाली विरासत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भारत की कुल 78 अस्थायी धरोहरों में से 19 मध्यप्रदेश में होना प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत में समृद्धि को दर्शाता है।

    यूनेस्को की सूची में धरोहरों का शामिल होना मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता:  डॉ. इलैयाराजा टी.

    सचिव पर्यटन और पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में हमारे चार और ऐतिहासिक स्थलों का शामिल होना मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का एक बड़ा प्रमाण है। इस गौरवशाली मान्यता से अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मध्यप्रदेश के पर्यटन को एक नई ऊँचाई मिलेगी, जिससे दुनिया भर के सैलानी हमारी अनूठी संस्कृति और इतिहास से गहराई से परिचित हो सकेंगे।"

    बाग गुफाओं के भित्ति चित्र धार

    धार जिले में स्थित, बाग गुफाओं के भित्ति चित्र के यह स्थल विंध्याचल की पहाड़ियों के पास बाघ नदी के किनारे है। बाग गुफाएँ मध्य प्रदेश में नौ बौद्ध पाषाण-कृत (रॉक-कट) गुफाओं का एक उल्लेखनीय समूह हैं, जो मुख्य रूप से चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी की हैं। इनका सबसे बड़ा महत्व इनमें बचे हुए भित्ति चित्रों (मुरल्स) में है, विशेषकर गुफा संख्या 4 (रंग महल) में, जो शाही दरबारों, जुलूसों, संगीतकारों, नर्तकों और समकालीन सामाजिक जीवन के दृश्यों को दर्शाती हैं। यह चित्र अजंता के साथ तकनीकी जुड़ाव रखते हुए बौद्ध भित्ति चित्र परंपरा की एक विशिष्ट क्षेत्रीय अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं, साथ ही अपनी अनूठी कलात्मक शैली को बनाए रखते हुए गुप्त काल के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन की मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

     गिनौरगढ़ का किला सीहोर (रातापानी अभयारण्य क्षेत्र)

    मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में (भोपाल के पास रातापानी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी के वनों के भीतर पहाड़ी पर) स्थित है। रातापानी के परिदृश्य के भीतर स्थित गिनौरगढ़ का किला, एक स्वदेशी गोंड किलेबंद राजधानी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। गोंड साम्राज्य के एक प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित यह किला, मजबूत प्राकृतिक सुरक्षा को किलेबंदी की व्यापक प्रणाली, शाही संरचनाओं, जलाशयों, 65 सीढ़ीदार कुओं (बावड़ियों) और चार झीलों के साथ जोड़ता है। इसकी त्रि-स्तरीय स्थानिक व्यवस्था और आसपास के वनीकृती पहाड़ी परिदृश्य के साथ एकीकरण इसे गोंड राजनीतिक संगठन, सैन्य योजना, वास्तुकला और स्वदेशी जल-प्रबंधन प्रणालियों को समझने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

    बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह : मुरैना

    मध्यप्रदेश के चंबल क्षेत्र के मुरैना जिले में बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह पड़वली और बटेश्वर क्षेत्रो में स्थित है। बटेश्वर, पदावली और ककरामठ मंदिर समूह मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला के क्षेत्रीय विकास का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्य रूप से आठवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के इन मंदिरों का यह समूह एक प्रगतिशील वास्तुशिल्प विकास को दर्शाता है। बटेश्वर में 200 से अधिक मंदिरों के बड़े क्लस्टर से लेकर, पदावली के समृद्ध नक्काशीदार वास्तुशिल्प तत्वों और ककरामठ के स्मारकीय स्वरूप तक। ये सभी स्थल मिलकर केंद्रीय भारत में क्षेत्रीय शिल्प कौशल, राजवंशों के संरक्षण, सूखी चिनाई (ड्राय-स्टोन मैसनरी) की तकनीकों और मंदिर रूपों व मूर्तिकला के विकास को दर्शाते हैं।

    उदयगिरि गुफाएँ : विदिशा

    मध्यप्रदेश के विदिशा शहर के पास बेतवा और धसन नदियों के बीच उदयगिरि गुफाएँ स्थित हैं। उदयगिरि गुफाएँ गुप्त काल की धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति से जुड़ी सबसे शुरुआती प्रमुख जीवित पवित्र भू-आकृतियों (सेक्रेड लैंडस्केप) में से एक हैं। यहाँ की 20 खुदी हुई गुफाएँ पाषाण-कृत मंदिरों, स्मारकीय मूर्तियों, शिलालेखों, आवागमन के मार्गों और प्राकृतिक स्थलाकृति को आपस में जोड़ती हैं, जिसमें प्रसिद्ध वराह राहत (प्रतिमा) वैष्णव धर्मशास्त्र, राजत्व और ब्रह्मांडीय व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। यहाँ हिंदू, जैन और अन्य धार्मिक तत्वों की उपस्थिति, साथ ही गुप्त साम्राज्य का संरक्षण, उदयगिरि को हिंदू पवित्र वास्तुकला के शुरुआती चरण और अधिक विकसित मंदिर परंपराओं की ओर संक्रमण को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है

     यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में पहले ही शामिल हैं 15 स्थल

    यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में पहले से शामिल 15 प्रमुख स्थलों में साल 2025 के नवीनतम क्रमिक नामांकनों के तहत मौर्य मार्गों के साथ अशोक अभिलेख स्थल, चौसठ योगिनी मंदिर, उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेलों के महल-किलों का समूह शामिल हैं। इससे पहले साल 2024 में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, रामनगर (मंडला) के गोंड स्मारक और धामनार के ऐतिहासिक समूह को जोड़ा गया था। वहीं पूर्व के वर्षों में साल 2021 में नर्मदा घाटी का भेड़ाघाट-लामेताघाट व सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, साल 2019 में ओरछा का ऐतिहासिक समूह, साल 2014 में भारत के प्रतिष्ठित साड़ी बुनाई समूह तथा साल 1998 में मांडू के स्मारकों के समूह को इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान प्राप्त हुआ था।

    मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड का सफल प्रयास

    मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर कार्यक्रम के तहत विचार के लिए कई महत्वपूर्ण विरासत संपत्तियों का प्रस्ताव रखा। जिसके तहत भारत के विश्व धरोहर मामलों के लिए नोडल एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश की चार धरोहरों में बाग गुफाओं के भित्ति चित्र, गिनौरगढ़ का किला, चंबल घाटी के मंदिरों का समूह (बटेश्वर, पदावली और ककरामठ), और उदयगिरि की गुफाओं को भारत की यूनेस्को टेंटेटिव (अस्थायी) सूची में शामिल किया गया है।यूनेस्को की टेंटेटिव सूची उन संपत्तियों की राष्ट्रीय सूची है जिन्हें भविष्य में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की संभावना के रूप में देखा जाता है और यह नामांकन प्रक्रिया का एक आवश्यक प्रारंभिक चरण है।

     

  • लता मंगेशकर जैसी महान विभूति का जन्म इंदौर की धरती पर होना हम सभी के लिए गौरव की बात

    लता मंगेशकर जैसी महान विभूति का जन्म इंदौर की धरती पर होना हम सभी के लिए गौरव की बात

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वर्चुअली उपस्थिति में आज इंदौर में आयोजित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण सम्मान-2026 से सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक  शान्तनु मोइत्रा को विभूषित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में संचालक संस्कृति  एन.पी. नामदेव ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्रशस्ति पत्र का वाचन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर वर्चुअल रुप से संबोधित करते हुए कहा कि भारत रत्न से सम्मानित लता मंगेशकर के नाम पर स्थापित यह सम्मान अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित सम्मान के समान है। लता जी जैसी महान कलाकार की जन्मस्थली इंदौर होना पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आज का यह समारोह जिस महान कलाकार की स्मृति में आयोजित हो रहा है, उनके लिए हम सभी के मन में विशेष श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को देश और दुनिया ने केवल एक गायिका के रूप में नहीं, बल्कि संगीत की एक ऐसी महान विभूति के रूप में स्वीकार किया, जिनके सुरों में जीवन के हर भाव की अभिव्यक्ति मिलती है।

    भक्ति से देशभक्ति और प्रेम से विरह तक हर भाव को दिया स्वर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लता जी के गीतों को हम भक्ति में भी गुनगुनाते हैं, देशभक्ति में भी स्मरण करते हैं। दोस्ती, मस्ती, प्रेम और विरह जीवन के हर भाव को उन्होंने अपनी मधुर आवाज से अमर कर दिया। उनके गायन में मां सरस्वती की अद्भुत कृपा दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर जी का नाम लेते ही रोम-रोम में एक अलग तरह का रोमांच और आनंद उत्पन्न होता है। उन्होंने 30 से अधिक भाषाओं और बोलियों में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। शास्त्रीय संगीत से लेकर सुगम संगीत, भक्ति संगीत से लेकर लोक संगीत तक उनके गायन की विविधता अद्भुत रही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लता जी के सुरों में कभी विचलन नहीं आया और उनके उच्चारण की शुद्धता भी असाधारण रही। ऐसा प्रतीत होता था मानो साक्षात मां सरस्वती हमारे बीच गा रही हों।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सहित राष्ट्रीय पर्वों पर लता जी के देशभक्ति गीत आज भी लोगों की आंखों में देशप्रेम के भाव से आंसू ला देते हैं। गणेश उत्सव हो अथवा नवरात्रि जैसे पर्व, उनके गीतों के बिना देश के उत्सवों की कल्पना अधूरी सी लगती है।

    शांतनु मोइत्रा की संगीत साधना को सराहा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित  शांतनु मोइत्रा की संगीत साधना की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें प्रदान करते हुए स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि शांतनु मोइत्रा ने अपनी संगीत प्रतिभा से देश के संगीत जगत को समृद्ध किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनके चर्चित गीतों का उल्लेख करते हुए कहा कि फिल्म खेल खेल में का गीत युवाओं में नई ऊर्जा और आशा का संचार करता है। इसी तरह बावरा मन देखने चला एक सपना जैसी रचना ने श्रोताओं के मन पर गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि शांतनु मोइत्रा द्वारा प्रस्तुत शिव तांडव स्तोत्र और राम-सिया भजन भी उन्हें विशेष रूप से पसंद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली कलाकारों को सम्मानित किया जाना मध्यप्रदेश सरकार के लिए भी गौरव की बात है। मालवा की धरती सदैव प्रतिभाओं को सम्मान देती रही है और यह आयोजन इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

    मध्यप्रदेश सदैव कला और प्रतिभा की धरती रही है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती महाकवि कालिदास और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसे महान रचनाकारों की परंपरा से समृद्ध रही है। साहित्य, संगीत, कला और फिल्म जगत से भी अनेक महान प्रतिभाओं का संबंध मध्यप्रदेश से रहा है। महाकवि कालिदास की मेघदूत से लेकर आधुनिक रचनाधर्मिता तक मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक यात्रा अत्यंत समृद्ध रही है।

    सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक  शान्तनु मोइत्रा ने कहा कि गीत- संगीत के क्षेत्र में विश्व में अपनी एक विशेष पहचान रखने वाली लता मंगेशकर जी के जन्म दिवस पर, उनकी जन्मस्थली पर, उनके नाम से स्थापित यह सम्मान मिलना बेहद गौरव का पल है। संगीतकार  मोइत्रा ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित किए जाने पर मध्यप्रदेश शासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लता जी के नाम से सम्मानित होना उनके लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने लता जी के साथ स्टूडियो में काम करने का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि चार पंक्तियों के गीत के लिए भी उन्होंने पूरी गंभीरता, तैयारी और समर्पण के साथ काम किया था। उन्होंने कहा कि लता जी से सबसे बड़ी सीख अपने काम के प्रति ईमानदारी, अनुशासन और उत्कृष्टता की है। उन्होंने कहा कि आज भी हर गीत बनाते समय मन में यही भाव आता है कि लता जी इसे गातीं तो वह कैसा होता?।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वर्चुअली उपस्थिति में वर्ष 2026 का राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान सुप्रतिष्ठित संगीत निर्देशक  शान्तनु मोइत्रा (मुंबई) को प्रदान किया गया। अलंकरण के पश्चात संगीत संध्या का आयोजन हुआ जिसमें सचेत-परम्परा एवं उनके दल ने एक से बढ़कर एक मधुर गीतों की प्रस्तुतियां दीं और श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

    गीत-संगीत के इस महत्वपूर्ण आयोजन में जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  शंकर लालवानी, संभागायुक्त  भास्कर लाक्षाकार, कलेक्टर  शिवम वर्मा, विधायकगण  रमेश मेंदोला, मती मालिनी गौड़ तथा  मधु वर्मा,  श्रवण सिंह चावड़ा सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

     

  • ड्रोन कैमरों ने खोला अवैध गांजे की खेती का राज, पुलिस ने नो-नेटवर्क एरिया से जब्त किए 60 क्विंटल गांजे के 15 हजार पौधे

    ड्रोन कैमरों ने खोला अवैध गांजे की खेती का राज, पुलिस ने नो-नेटवर्क एरिया से जब्त किए 60 क्विंटल गांजे के 15 हजार पौधे

    खरगोन

     नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन 'प्रहार' के तहत पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। बड़ी पुलिस टीम ने जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के नो मोबाइल नेटवर्क एरिया (शेडो एरिया) में दो स्थानों पर कार्रवाई करते हुए गांजे के कुल 15 हजार पौधे जब्त किए हैं। जब्त पौधों का कुल वजन करीब 60 क्विंटल बताया गया है।

    मुखबिर की सूचना और ड्रोन से मैपिंग के बाद पुलिस की दबिश

    सोमवार को पुलिस कंट्रोल रूम में एसपी रविंद्र वर्मा ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम जामली और ग्राम गुवाड़ा ठाटा फलिया क्षेत्र में कुछ लोगों ने अपने खेतों में अवैध गांजे की खेती कर रखी है।

     

  • शाही मस्जिद छत्री चौक उज्जैन के प्रभावित हिस्‍से को समाज के लोग हटा रहे हैं स्‍वेच्‍छा से आमजन किसी भी अफवाह पर नहीं दें ध्‍यान

    शाही मस्जिद छत्री चौक उज्जैन के प्रभावित हिस्‍से को समाज के लोग हटा रहे हैं स्‍वेच्‍छा से आमजन किसी भी अफवाह पर नहीं दें ध्‍यान

    भोपाल 

    उज्जैनकलेक्टर  रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्‍थ: 2028 के लिए उज्‍जैन शहर में किए जा रहे सड़कों के चौडीकरण के लिये छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्‍से को समाज के लोग स्‍वेच्‍छा से हटा रहे है। उन्होंने बताया कि बीती रात उनकी एवं पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा की समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई और यह तय हुआ कि शाही मस्जिद के जो हिस्‍से सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे है समाज के लोग ही उन्‍हें हटाएंगे।

    कलेक्‍टर  सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार सुबह से ही उक्‍त धर्म स्‍थल के कुछ हिस्‍सों को हटाने का कार्य सहमति अनुसार समाज के लोग ही कर रहे है और इसमे किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं है। कलेक्‍टर ने बताया कि सुबह कुछ असामाजिक तत्‍वों द्वारा इस कार्य में व्‍यवधान पहुंचाने की कोशिश की गई, जिसे पुलिस द्वारा तुरंत नियंत्रित किया गया। मार्ग चौड़ीकरण के कार्य में हर वर्ग और हर धर्म के लोग मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आह्वान पर बढ़-चढ़कर हिस्‍सा ले रहे है। कलेक्‍टर उज्जैन ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्‍यान नहीं दें, स्थिति शांति‍पूर्ण और नियंत्रण में है।

    शहर काजी एवं समाज के पदाधिकारी एवं अन्य वरिष्ठजन ने जारी किये संदेश

    शहर काजी उज्जैन खलिकुर्रहमान, समाज के पदाधिकारी एवं अन्य वरिष्ठजन ने सोमवार को संदेश जारी कर मुस्लिम समाज से अ‍पील की है कि मस्जिद का मसला मिल बैठकर हल कर लिया गया है। किसी भी तरह की अफवाह पर ध्‍यान ना दिया जाए।

    वरिष्‍ठ अधिकारी मौके पर रखे हुए है नजर

    छत्री चौक पर चल रहे मार्ग चौडीकरण कार्य पर निगरानी रखने के लिए उज्जैन संभागायुक्‍त  आशीष सिंह, एडीजी  राकेश गुप्‍ता, डीआईजी  नवनीत भसीन, कलेक्‍टर  रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक  प्र‍दीप शर्मा, नगर निगम आयुक्‍त  अभिलाष मिश्रा लगातार टीम के साथ मौके पर मौजूद है।

     

  • सुरक्षित पशुपालन और समय पर उपचार का दिया संदेश

    सुरक्षित पशुपालन और समय पर उपचार का दिया संदेश

    भोपाल 

    विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर सोमवार को संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी विभाग और Jhpiego कंपनी के संयुक्त तत्वावधान में साइकिल रैली का आयोजन किया गया। रैली के माध्यम से रेबीज बीमारी की रोकथाम, बचाव के उपायों, समय पर उपचार और पशुओं के टीकाकरण के प्रति आमजन को जागरूक किया गया।

    साइकिल रैली संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी परिसर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए एमपीटी बोट क्लब पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। रैली में प्रतिभागियों ने रेबीज से बचाव और जागरूकता से संबंधित संदेशों के माध्यम से आमजन को बीमारी के प्रति सतर्क रहने तथा आवश्यक सावधानियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।

    समय पर उपचार और पशुओं का टीकाकरण जरूरी

    रेबीज से बचाव के लिए पशुओं का समय पर टीकाकरण कराने और संदिग्ध पशु के काटने की स्थिति में बिना विलंब चिकित्सकीय सलाह लेकर आवश्यक उपचार कराने के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही जागरूकता और समय पर उठाए गए कदम रेबीज की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसका संदेश भी दिया गया

    लुई पास्चर की स्मृति में मनाया जाता है विश्व रेबीज दिवस

    विश्व रेबीज दिवस प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को माइक्रोबायोलॉजिस्ट लुई पास्चर की पुण्यतिथि के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य रेबीज की रोकथाम के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना तथा बीमारी से बचाव के प्रभावी उपायों की जानकारी आमजन तक पहुंचाना है।

     

  • NCF-2023 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर जोर, राज्य स्तरीय SRG उन्मुखीकरण कार्यक्रम शुरू

    NCF-2023 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर जोर, राज्य स्तरीय SRG उन्मुखीकरण कार्यक्रम शुरू

    भोपाल

    राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ)-2023 और नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के अनुरूप कक्षा 6 से 8 की शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य स्रोत समूह (एसआरजी) का चार दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण सोमवार को भोपाल स्थित आइकफ आश्रम में प्रारंभ हुआ। प्रशिक्षण में गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों के 153 एसआरजी सदस्य भाग ले रहे हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के पाठ्यक्रम कक्ष के विषय विशेषज्ञों के साथ सहयोगी संस्था पीपल द्वारा प्रशिक्षण में अकादमिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करती है, जो विद्यार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करे। इसी दृष्टि को साकार करने के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न स्तरों और विषयों में आवश्यक बदलावों को दिशा दी गई है। कक्षा 6 से 8 के स्तर पर विद्यार्थियों की मूलभूत दक्षताओं को सुदृढ़ करते हुए उन्हें आगे के अध्ययन के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है। विकसित कक्षा 7 की नवीन NCERT पाठ्यपुस्तकों में विषय-वस्तु की संरचना और शिक्षण-अधिगम के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण संशोधन अंगीकृत किए गए हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य इन बदलावों, पाठ्यपुस्तकों की दृष्टि और उनके प्रभावी शिक्षण को समझने में एसआरजी सदस्यों की क्षमता को मजबूत करना है।

    पहले दिन राष्ट्रीय पाठ्यचर्या और नवीन पाठ्यपुस्तकों पर हुई चर्चा

    प्रतिभागियों के परिचय और प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों की जानकारी के साथ पहले दिन प्रशिक्षण की शुरुआत हुई। इसके बाद गत वर्ष के प्रशिक्षण का पुनरावलोकन, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 की अनुशंसाओं तथा नवीन पाठ्यपुस्तकों की विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों और

    विद्यार्थियों के सीखने को बेहतर बनाने के लिए अपनाई गई नई शिक्षण दृष्टि को समझने पर विशेष जोर दिया गया। इसके बाद गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के विषयवार सत्रों में अनुभवात्मक शिक्षण पर कार्य किया गया। गणित में भिन्न के साथ कार्य करने, विज्ञान में विद्युत परिपथ एवं उसके घटकों तथा सामाजिक विज्ञान में मौसम को समझने जैसे विषयों को गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया। साथ ही, वास्तविक कक्षा के अवलोकन के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को कक्षा की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

    अगले तीन दिन विविध विषयों पर होगी चर्चा

    प्रशिक्षण के पहले दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शिक्षण सहायक के रूप में उपयोग करने पर चर्चा हुई। अगले तीन दिनों में आनंदमय शिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिकता एवं मूल्य, कौशल बोध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दीक्षा एवं आईगॉट पोर्टल तथा पाठ योजना निर्माण सहित विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। राज्य शिक्षा केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के बाद प्रदेश के 10 संभागों में 1,932 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। इन मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से प्रदेश के लगभग 76 हजार शिक्षकों तक नई शिक्षण दृष्टि और पाठ्यपुस्तकों की समझ से संबंधित जानकारी प्रशिक्षण के माध्यम से पहुंचाई जाएगी। 

  • उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान, वृक्षारोपण और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया संवाद

    उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान, वृक्षारोपण और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया संवाद

    भोपाल 

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा, समर्पण एवं राष्ट्रनिष्ठा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वाराणसी से वडनगर तक निकाली जा रही सेवा यात्रा का सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र में राज्य मंत्री  टेटवाल ने स्वागत किया। नागरिकों के साथ पचोर से सारंगपुर तक यात्रा में सहभागिता की।

    वाराणसी से प्रारंभ होकर वडनगर तक जा रही सेवा यात्रा में अलग-अलग समूह सहभागिता कर रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य पवित्र नदियों का जल लेकर काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी और हाटकेश्वर महादेव, वडनगर में जलाभिषेक करना है। यात्रा के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया जा रहा है।

    सेवा को जीवन का संकल्प बनाएं

    मंत्री  टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा, समर्पण और राष्ट्र के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के प्रेरणादायी वर्ष हैं। सेवा किसी एक अवसर या अभियान तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति निरंतर जिम्मेदारी है। सेवा संकल्प अभियान प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने जैसे कार्यों में जनभागीदारी बढ़ाना आवश्यक है।

    उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान

    उड़नखेड़ी में आयोजित कार्यक्रम में सेवा यात्रियों ने वाराणसी से वडनगर तक की यात्रा के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर यात्रियों का सम्मान किया गया। इसके बाद शिव मंदिर परिसर में वृक्षारोपण किया गया। राज्य मंत्री  टेटवाल ने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए।

    महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद

    राज्य मंत्री  टेटवाल ने स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं एवं लखपति दीदियों से संवाद किया। उन्होंने महिलाओं से उनके स्वरोजगार, समूह के माध्यम से किए जा रहे कार्यों और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी ली। महिलाओं ने भी आत्मनिर्भर बनने के अपने अनुभव साझा किए।

    राज्य मंत्री  टेटवाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार और समाज की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत करना भी है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और लखपति दीदियों की सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

    राज्य मंत्री  टेटवाल ने कौशल विकास और रोजगार के अवसरों के माध्यम से युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय संसाधनों और कौशल को रोजगार से जोड़ना सेवा और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर सांसद रोडमल नागर अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। 

  • एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री  तोमर

    एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल 

    ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने उत्तरी मालवा क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए रतलाम के 220 केवी सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की है। रतलाम सबस्टेशन में वर्ष 1988 में स्थापित सेकंड जेनरेशन के 160 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नये थर्ड जेनरेशन तकनीक आधारित 220/132 केवी वोल्टेज स्तर का 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है।

    रतलाम जिले का पहला 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर

    ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि रतलाम जिले में पहली बार इतनी उच्च क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इससे क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    मालवा क्षेत्र का 5 वां और प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर

    एमपी ट्रांसको रतलाम -मंदसौर के अधीक्षण अभियंता  वाय आर मांडलेकर ने बताया कि रतलाम में ऊर्जीकृत हुआ यह पावर ट्रांसफार्मर प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। मालवा क्षेत्र में इस क्षमता का यह पांचवां पावर ट्रांसफार्मर है। इसके स्थापित होने से रतलाम 220 केवी सबस्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 520 एमवीए हो गई है।

    जिले का 28 वां पावर ट्रांसफार्मर

    यह रतलाम जिले का 28वां पावर ट्रांसफार्मर है। एमपी ट्रांसको जिले में अपने 10 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण व्यवस्था का संचालन कर रही है। इनमें 220 केवी के रतलाम, जावरा एवं सैलाना सबस्टेशन तथा 132 केवी के रतलाम, सैलाना, शिवगढ़, ताल, आलोट और बिलपांक सबस्टेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगरा में एक स्विचिंग सबस्टेशन भी संचालित है।

    नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही रतलाम जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2165 एमवीए की हो गई है।

     

  • उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राज्य सरकार के सहयोग के लिए माना आभार

    उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राज्य सरकार के सहयोग के लिए माना आभार

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महाकौशल और जबलपुर क्षेत्र के लिए समग्र विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। संस्कारधानी जबलपुर पर माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद है, जो जल, थल और भू-गर्भ में प्राकृतिक संपदाओं से  संपन्न है। हमारी सरकार ने महाकौशल क्षेत्र को तकनीकी विश्वविद्यालय और आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर की सौगात दी है। राज्य सरकार जबलपुर सहित मंडला , डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी,कटनी, पांढुर्णा, छिन्दवाड़ा और नरसिंहपुर में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। लगभग 25 नई नीतियों के माध्यम से उद्यमियों को अनेक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इस क्षेत्र के उद्यमियों के सपनों को साकार करने के लिए पंख लगाने का कार्य सरकार करेगी। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास के संवाद सभाकक्ष में महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स और जबलपुर व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों से क्षेत्र के विकास को लेकर चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव व्यापारी का बंधुओं ने क्षेत्र के विकास के लिए जनहितैषी निर्णयों और प्रदेश में व्यापारी कल्याण बोर्ड गठित करने की पहल के लिए अभिनंदन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल में उद्योग-व्यापार की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। जबलपुर में औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ जल्द ही विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसका ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के पहले जबलपुर अंचल को पूरा लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस प्रकार से ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है, उसी प्रकार से आईटी और माइनिंग सेक्टर में जबलपुर को भी अवसर मिलना चाहिए। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति प्रदान करने के लिए इंदौर-भोपाल-जबलपुर को विशेष इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। यह एक ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. निवास में हुई चर्चा में उद्यमियों और व्यापारियों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र, मेडिकल यूनिवर्सिटी, माइनिंग सेक्टर, लॉजिस्टिक, होटल इंडस्ट्री, टूरिज्म, ऑटोमोबाइल, अधोसंरचना विकास, एजुकेशन, अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को बताया कि हमारी सरकार भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित कर रही है। अब जबलपुर को भी मेट्रोपोलिटन सिटी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की दृष्टिगत रखते हुए जबलपुर के मास्टर प्लान के लिए व्यापारी बंधु अपने सुझाव दें। राज्य सरकार इन्हें मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट में शामिल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संघ ने महाकौशल में लॉजिस्टिक हब विकसित करने के सुझाव पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  कहा कि कटनी जिले में माइनिंग सेक्टर के विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए लॉजिस्टिक हब कटनी में बनाने से व्यवसायिक गतिविधियों को अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि महाकौशल क्षेत्र में स्थित कान्हा नेशनल पार्क टाइगर सफारी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं का विकास करने के साथ जबलपुर शहर में आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर तैयार किया जा रहा है। यहां भी पर्यटक टाइगर को देखकर रोमांचित हो सकेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे व्यापारी बदलते दौर में युवा पीढ़ी को पारंपरिक व्यवसाय में तो दक्ष बनाएं, साथ ही उन्हें नए कार्यों और रोजगार सृजन के प्रकल्पों के लिए भी प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जबलपुर शहर में डिफेंस प्रोडक्शन, आयरन प्रोडक्शन, माइनिंग, दूध उत्पादन और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपार क्षमताएं है। राज्य सरकार गरीब, किसान, युवाओं सहित सभी वर्गों के सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने व्यापारियों से आह्वान करते हुए कहा कि आइए, हम सभी मिलकर वीरांगना रानी दुर्गावती के जबलपुर अंचल को हर क्षेत्र में नंबर 1 बनाएं।

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जबलपुर और महाकौशल के विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ नर्मदा के प्रसिद्ध भेड़ाघाट के समग्र विकास के लिए 87 करोड़ रुपए की सौगात दी है। जबलपुर को ढाई साल में बहुत कुछ मिला है। राज्य सरकार महाकौशल क्षेत्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए संकल्पित है। शहरी अधोसंरचनात्मक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए स्वयं पैतृक मकान पर कुदाल चलाकर प्रदेशवासियों के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    उद्योगपति  रवि गुप्ता ने कहा कि जबलपुर और महाकौशल में औद्योगिक विकास को रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता है। किसी क्षेत्र की आर्थिक स्थिति ही विकास को मापने का पैमाना होती है। जबलपुर में विभिन्न सेक्टर्स की इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है। संवाद के दौरान व्यापारी संघ के अन्य पदाधिकारियों ने होटल इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने, रेरा नियमों को शिथिल करने, रेडिमेड कॉन्क्रीट मटैरियल को उद्योग का दर्जा देने, वन उत्पादों के प्रसंस्करण, पर्यटन सुविधाओं और रोड नेटवर्क को विस्तार देने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, एमपीआईडीसी के एमडी  चंद्रमौली शुक्ला, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क  मनीष सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • सीएसआर भागीदारी को नई गति देने 30 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव

    सीएसआर भागीदारी को नई गति देने 30 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों के समावेशी विकास में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की भागीदारी को व्यापक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 30 सितंबर को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राज्य स्तरीय सीएसआर भागीदारी कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। “महिलाओं और बच्चों में निवेश : मध्यप्रदेश के समावेशी विकास के लिए सीएसआर की संभावनाओं का उपयोग” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया करेंगी।

    कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों में कॉरपोरेट संस्थानों, सीएसआर फाउंडेशन, सामाजिक संगठनों और विकास संस्थाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से आँगनवाड़ी अधोसंरचना के आधुनिकीकरण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण तथा मैदानी कार्यबल की क्षमता निर्माण जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में सीएसआर निवेश की संभावनाओं को सामने लाया जाएगा।

    सरकार और कॉरपोरेट क्षेत्र के बीच मजबूत होगी विकास साझेदारी

    कॉन्क्लेव में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्राथमिकताओं, प्रदेश में सीएसआर की वर्तमान स्थिति तथा निवेश के संभावित क्षेत्रों पर प्रस्तुतीकरण होगा। सचिव महिला बाल विकास  जी.वी. रश्मि प्रदेश के मानव संसाधन विकास में कॉरपोरेट सीएसआर की भूमिका और संभावनाओं पर मुख्य वक्तव्य देंगी। आयुक्त महिला बाल विकास श्री संदीप जी.आर. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बीच विकास साझेदारी की आवश्यकता और संभावनाओं पर जानकारी देंगे।

    मध्यप्रदेश की सीएसआर नीति तथा महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में सीएसआर सहयोग के संभावित अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य कॉरपोरेट क्षेत्र को महिला एवं बाल विकास से जुड़े कार्यों में दीर्घकालिक और परिणाम आधारित साझेदारी के लिए प्रोत्साहित करना है।

    आँगनवाड़ी अधोसंरचना से पोषण और प्रारंभिक शिक्षा तक पर होगा मंथन

    कॉन्क्लेव में आँगनवाड़ी अधोसंरचना के आधुनिकीकरण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा पर विशेष चर्चा होगी। विशेषज्ञ और विभिन्न सामाजिक एवं विकास संस्थाओं के प्रतिनिधि आँगनवाड़ी केंद्रों को अधिक सक्षम, आधुनिक और बाल-अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक हस्तक्षेपों पर विचार साझा करेंगे।

    मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा तथा मैदानी कार्यबल की क्षमता निर्माण पर भी विशेष सत्र आयोजित होगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल के डॉ. अरुण कोंकणी मध्यप्रदेश में कुपोषण की स्थिति और उसके समाधान के उपायों पर प्रस्तुति देंगे। विभिन्न सीएसआर संस्थानों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपने अनुभव तथा सहयोग की संभावनाएं साझा करेंगे।

    मैदानी अमला बताएगा जमीनी जरूरतों और चुनौतियों की तस्वीर

    सम्मेलन में आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने मैदानी अनुभव साझा करेंगे। इससे सीएसआर क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को महिला एवं बाल विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, उपलब्ध संसाधनों और आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा।

    खनिज क्षेत्र फाउंडेशन निधि के उपयोग तथा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कानून से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा होगी। खुले संवाद सत्र में कॉरपोरेट और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे तथा महिला एवं बाल विकास के प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    साझेदारी के ठोस प्रस्तावों के साथ होगा सम्मेलन का समापन

    समापन सत्र में विभिन्न संस्थानों की ओर से सहयोग के संकल्प, सहयोग में रुचि-पत्र तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। कोल इंडिया की दक्षिण-पूर्वी कोयला क्षेत्र इकाई के कार्यों का सम्मान किया जाएगा तथा सिक्योरिटी पेपर मिल की ओर से सहयोग में रुचि-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।