Category: मध्य प्रदेश

  • उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान, वृक्षारोपण और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया संवाद

    उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान, वृक्षारोपण और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया संवाद

    भोपाल 

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा, समर्पण एवं राष्ट्रनिष्ठा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वाराणसी से वडनगर तक निकाली जा रही सेवा यात्रा का सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र में राज्य मंत्री  टेटवाल ने स्वागत किया। नागरिकों के साथ पचोर से सारंगपुर तक यात्रा में सहभागिता की।

    वाराणसी से प्रारंभ होकर वडनगर तक जा रही सेवा यात्रा में अलग-अलग समूह सहभागिता कर रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य पवित्र नदियों का जल लेकर काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी और हाटकेश्वर महादेव, वडनगर में जलाभिषेक करना है। यात्रा के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया जा रहा है।

    सेवा को जीवन का संकल्प बनाएं

    मंत्री  टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा, समर्पण और राष्ट्र के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के प्रेरणादायी वर्ष हैं। सेवा किसी एक अवसर या अभियान तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति निरंतर जिम्मेदारी है। सेवा संकल्प अभियान प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने जैसे कार्यों में जनभागीदारी बढ़ाना आवश्यक है।

    उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान

    उड़नखेड़ी में आयोजित कार्यक्रम में सेवा यात्रियों ने वाराणसी से वडनगर तक की यात्रा के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर यात्रियों का सम्मान किया गया। इसके बाद शिव मंदिर परिसर में वृक्षारोपण किया गया। राज्य मंत्री  टेटवाल ने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए।

    महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद

    राज्य मंत्री  टेटवाल ने स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं एवं लखपति दीदियों से संवाद किया। उन्होंने महिलाओं से उनके स्वरोजगार, समूह के माध्यम से किए जा रहे कार्यों और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी ली। महिलाओं ने भी आत्मनिर्भर बनने के अपने अनुभव साझा किए।

    राज्य मंत्री  टेटवाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार और समाज की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत करना भी है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और लखपति दीदियों की सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

    राज्य मंत्री  टेटवाल ने कौशल विकास और रोजगार के अवसरों के माध्यम से युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय संसाधनों और कौशल को रोजगार से जोड़ना सेवा और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर सांसद रोडमल नागर अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। 

  • एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री  तोमर

    एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल 

    ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने उत्तरी मालवा क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए रतलाम के 220 केवी सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की है। रतलाम सबस्टेशन में वर्ष 1988 में स्थापित सेकंड जेनरेशन के 160 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नये थर्ड जेनरेशन तकनीक आधारित 220/132 केवी वोल्टेज स्तर का 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है।

    रतलाम जिले का पहला 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर

    ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि रतलाम जिले में पहली बार इतनी उच्च क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इससे क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    मालवा क्षेत्र का 5 वां और प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर

    एमपी ट्रांसको रतलाम -मंदसौर के अधीक्षण अभियंता  वाय आर मांडलेकर ने बताया कि रतलाम में ऊर्जीकृत हुआ यह पावर ट्रांसफार्मर प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। मालवा क्षेत्र में इस क्षमता का यह पांचवां पावर ट्रांसफार्मर है। इसके स्थापित होने से रतलाम 220 केवी सबस्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 520 एमवीए हो गई है।

    जिले का 28 वां पावर ट्रांसफार्मर

    यह रतलाम जिले का 28वां पावर ट्रांसफार्मर है। एमपी ट्रांसको जिले में अपने 10 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण व्यवस्था का संचालन कर रही है। इनमें 220 केवी के रतलाम, जावरा एवं सैलाना सबस्टेशन तथा 132 केवी के रतलाम, सैलाना, शिवगढ़, ताल, आलोट और बिलपांक सबस्टेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगरा में एक स्विचिंग सबस्टेशन भी संचालित है।

    नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही रतलाम जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2165 एमवीए की हो गई है।

     

  • उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राज्य सरकार के सहयोग के लिए माना आभार

    उद्योगपतियों और व्यापारियों ने राज्य सरकार के सहयोग के लिए माना आभार

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महाकौशल और जबलपुर क्षेत्र के लिए समग्र विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। संस्कारधानी जबलपुर पर माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद है, जो जल, थल और भू-गर्भ में प्राकृतिक संपदाओं से  संपन्न है। हमारी सरकार ने महाकौशल क्षेत्र को तकनीकी विश्वविद्यालय और आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर की सौगात दी है। राज्य सरकार जबलपुर सहित मंडला , डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी,कटनी, पांढुर्णा, छिन्दवाड़ा और नरसिंहपुर में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। लगभग 25 नई नीतियों के माध्यम से उद्यमियों को अनेक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इस क्षेत्र के उद्यमियों के सपनों को साकार करने के लिए पंख लगाने का कार्य सरकार करेगी। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास के संवाद सभाकक्ष में महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स और जबलपुर व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों से क्षेत्र के विकास को लेकर चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव व्यापारी का बंधुओं ने क्षेत्र के विकास के लिए जनहितैषी निर्णयों और प्रदेश में व्यापारी कल्याण बोर्ड गठित करने की पहल के लिए अभिनंदन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल में उद्योग-व्यापार की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। जबलपुर में औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ जल्द ही विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसका ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के पहले जबलपुर अंचल को पूरा लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस प्रकार से ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है, उसी प्रकार से आईटी और माइनिंग सेक्टर में जबलपुर को भी अवसर मिलना चाहिए। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति प्रदान करने के लिए इंदौर-भोपाल-जबलपुर को विशेष इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। यह एक ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. निवास में हुई चर्चा में उद्यमियों और व्यापारियों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र, मेडिकल यूनिवर्सिटी, माइनिंग सेक्टर, लॉजिस्टिक, होटल इंडस्ट्री, टूरिज्म, ऑटोमोबाइल, अधोसंरचना विकास, एजुकेशन, अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को बताया कि हमारी सरकार भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित कर रही है। अब जबलपुर को भी मेट्रोपोलिटन सिटी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की दृष्टिगत रखते हुए जबलपुर के मास्टर प्लान के लिए व्यापारी बंधु अपने सुझाव दें। राज्य सरकार इन्हें मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट में शामिल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संघ ने महाकौशल में लॉजिस्टिक हब विकसित करने के सुझाव पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  कहा कि कटनी जिले में माइनिंग सेक्टर के विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए लॉजिस्टिक हब कटनी में बनाने से व्यवसायिक गतिविधियों को अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि महाकौशल क्षेत्र में स्थित कान्हा नेशनल पार्क टाइगर सफारी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं का विकास करने के साथ जबलपुर शहर में आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर तैयार किया जा रहा है। यहां भी पर्यटक टाइगर को देखकर रोमांचित हो सकेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे व्यापारी बदलते दौर में युवा पीढ़ी को पारंपरिक व्यवसाय में तो दक्ष बनाएं, साथ ही उन्हें नए कार्यों और रोजगार सृजन के प्रकल्पों के लिए भी प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जबलपुर शहर में डिफेंस प्रोडक्शन, आयरन प्रोडक्शन, माइनिंग, दूध उत्पादन और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपार क्षमताएं है। राज्य सरकार गरीब, किसान, युवाओं सहित सभी वर्गों के सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने व्यापारियों से आह्वान करते हुए कहा कि आइए, हम सभी मिलकर वीरांगना रानी दुर्गावती के जबलपुर अंचल को हर क्षेत्र में नंबर 1 बनाएं।

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जबलपुर और महाकौशल के विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ नर्मदा के प्रसिद्ध भेड़ाघाट के समग्र विकास के लिए 87 करोड़ रुपए की सौगात दी है। जबलपुर को ढाई साल में बहुत कुछ मिला है। राज्य सरकार महाकौशल क्षेत्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए संकल्पित है। शहरी अधोसंरचनात्मक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए स्वयं पैतृक मकान पर कुदाल चलाकर प्रदेशवासियों के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    उद्योगपति  रवि गुप्ता ने कहा कि जबलपुर और महाकौशल में औद्योगिक विकास को रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता है। किसी क्षेत्र की आर्थिक स्थिति ही विकास को मापने का पैमाना होती है। जबलपुर में विभिन्न सेक्टर्स की इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है। संवाद के दौरान व्यापारी संघ के अन्य पदाधिकारियों ने होटल इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने, रेरा नियमों को शिथिल करने, रेडिमेड कॉन्क्रीट मटैरियल को उद्योग का दर्जा देने, वन उत्पादों के प्रसंस्करण, पर्यटन सुविधाओं और रोड नेटवर्क को विस्तार देने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, एमपीआईडीसी के एमडी  चंद्रमौली शुक्ला, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क  मनीष सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • सीएसआर भागीदारी को नई गति देने 30 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव

    सीएसआर भागीदारी को नई गति देने 30 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों के समावेशी विकास में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की भागीदारी को व्यापक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 30 सितंबर को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राज्य स्तरीय सीएसआर भागीदारी कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। “महिलाओं और बच्चों में निवेश : मध्यप्रदेश के समावेशी विकास के लिए सीएसआर की संभावनाओं का उपयोग” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया करेंगी।

    कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों में कॉरपोरेट संस्थानों, सीएसआर फाउंडेशन, सामाजिक संगठनों और विकास संस्थाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से आँगनवाड़ी अधोसंरचना के आधुनिकीकरण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण तथा मैदानी कार्यबल की क्षमता निर्माण जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में सीएसआर निवेश की संभावनाओं को सामने लाया जाएगा।

    सरकार और कॉरपोरेट क्षेत्र के बीच मजबूत होगी विकास साझेदारी

    कॉन्क्लेव में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्राथमिकताओं, प्रदेश में सीएसआर की वर्तमान स्थिति तथा निवेश के संभावित क्षेत्रों पर प्रस्तुतीकरण होगा। सचिव महिला बाल विकास  जी.वी. रश्मि प्रदेश के मानव संसाधन विकास में कॉरपोरेट सीएसआर की भूमिका और संभावनाओं पर मुख्य वक्तव्य देंगी। आयुक्त महिला बाल विकास श्री संदीप जी.आर. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बीच विकास साझेदारी की आवश्यकता और संभावनाओं पर जानकारी देंगे।

    मध्यप्रदेश की सीएसआर नीति तथा महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में सीएसआर सहयोग के संभावित अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य कॉरपोरेट क्षेत्र को महिला एवं बाल विकास से जुड़े कार्यों में दीर्घकालिक और परिणाम आधारित साझेदारी के लिए प्रोत्साहित करना है।

    आँगनवाड़ी अधोसंरचना से पोषण और प्रारंभिक शिक्षा तक पर होगा मंथन

    कॉन्क्लेव में आँगनवाड़ी अधोसंरचना के आधुनिकीकरण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा पर विशेष चर्चा होगी। विशेषज्ञ और विभिन्न सामाजिक एवं विकास संस्थाओं के प्रतिनिधि आँगनवाड़ी केंद्रों को अधिक सक्षम, आधुनिक और बाल-अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक हस्तक्षेपों पर विचार साझा करेंगे।

    मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा तथा मैदानी कार्यबल की क्षमता निर्माण पर भी विशेष सत्र आयोजित होगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल के डॉ. अरुण कोंकणी मध्यप्रदेश में कुपोषण की स्थिति और उसके समाधान के उपायों पर प्रस्तुति देंगे। विभिन्न सीएसआर संस्थानों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपने अनुभव तथा सहयोग की संभावनाएं साझा करेंगे।

    मैदानी अमला बताएगा जमीनी जरूरतों और चुनौतियों की तस्वीर

    सम्मेलन में आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने मैदानी अनुभव साझा करेंगे। इससे सीएसआर क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को महिला एवं बाल विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, उपलब्ध संसाधनों और आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा।

    खनिज क्षेत्र फाउंडेशन निधि के उपयोग तथा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कानून से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा होगी। खुले संवाद सत्र में कॉरपोरेट और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे तथा महिला एवं बाल विकास के प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    साझेदारी के ठोस प्रस्तावों के साथ होगा सम्मेलन का समापन

    समापन सत्र में विभिन्न संस्थानों की ओर से सहयोग के संकल्प, सहयोग में रुचि-पत्र तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। कोल इंडिया की दक्षिण-पूर्वी कोयला क्षेत्र इकाई के कार्यों का सम्मान किया जाएगा तथा सिक्योरिटी पेपर मिल की ओर से सहयोग में रुचि-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।

     

  • समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 46 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री  राजपूत

    समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 46 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत

    भोपाल 

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 46 हजार 454 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं।

    जबलपुर संभाग में 21 हजार 333, नर्मदापुरम में 5 हजार 167, भोपाल में 2 हजार 272, रीवा में 10 हजार 939, शहडोल में 4 हजार 552 और सागर संभाग में 2 हजार 166 किसानों ने पंजीयन कराया है।

    पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा।

    सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

    उपार्जित फसल के भुगतान के लिये बैंक खाता

    किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें।

    सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा।

    आधार नंबर का वेरिफिकेशन

    पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।

    किसानों को करें एसएमएस

    विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।

     

  • मस्जिद हटाने की कार्रवाई के बीच उज्जैन में हंगामा, पथराव के बाद लाठीचार्ज; 10 पर केस

    मस्जिद हटाने की कार्रवाई के बीच उज्जैन में हंगामा, पथराव के बाद लाठीचार्ज; 10 पर केस

    उज्जैन

    कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक मार्ग चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद (Shahi Masjid Ujjain) का करीब 10 फीट बाधक हिस्सा हटाया जा रहा है। सोमवार सुबह प्रशासन और‌ मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाजजन खुद बाधक हिस्सा हटाने पहुंचे। इस दौरान नारेबाजी हुई और कुछ समाजजन ने कार्रवाई का विरोध भी किया।

    उपद्रव करने की कोशिश कर रहे लोगों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज का एक तबका आगर नाके पर जमा हो गया। दोपहर करीब 12 बजे उपद्रवियों ने फिर पत्थर फेंके। पुलिस ने लाठी चार्ज किया। 10 पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। दोपहर तक लाठीचार्ज के बाद स्थिति नियंत्रण में हुई। मस्जिद के बाधक हिस्से को मस्जिद कमेटी तोड़ रही है।

    मस्जिद पक्ष की अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त

    इसके साथ ही शाही मस्जिद मामले में मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई की युगलपीठ ने भोजनावकाश के बाद की मामले में सुनवाई। विस्तृत आदेश देर शाम तक जारी होगा।

    उल्लेखनीय है कि उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ा मार्ग प्रस्तावित है। शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा इस सड़क की निर्धारित सीमा में बाधक बन रहा था। इसी हिस्से को हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

    शहर काजी ने कहा- मस्जिद का मसला हल हो चुका है, अफवाहों पर ध्यान न दें

    उज्जैन में शादी मस्जिद का हिस्सा हटाने को लेकर उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा कि मस्जिद का मसला रात में ही हल हो चुका है। समाज के लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। बिना वजह बाजार में न खड़े हो और वहां न जाएं। ऐसी कोई बात नहीं है जिसके पीछे हम वहां जाएं। जिस बात के लिए वादा हुआ है वो काम पूरा होना है। वो लोग अपने काम को कर रहे हैं। अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। अफवाहों की वजह से घर से बाहर न निकलें।

        उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा- शाही मस्जिद का मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं। 

    उज्जैन प्रशासन और शहर काजी ने भी आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। इसे लेकर उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निर्माण कार्य चल रहे हैं, मास्टर प्लान के हिसाब से मार्गों का चौड़ीकरण चल रहा है। इसमें अच्छी बात यह है कि सभी धर्म-समुदाय के लोग स्वतः इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।

     उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें। https://t.co/3uv9WlGE7E#Ujjain 

    उनके मकान, धर्मस्थल जो भी बीच में आ रहे हैं, उन्हें वे स्वतः हटा रहे हैं। इसी क्रम में छत्री चौक पर आज शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें।

    उपद्रवियों ने पत्थर फेंके। क्राइम ब्रांच की महिला टीआई पुष्पा पांचाल को चोट लगी।

    यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को जोड़ता है। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बनाने के लिए मार्ग चौड़ीकरण किया जा रहा है।

    शाही मस्जिद के भीतर की तोड़ाई चल रही है। समाजजन खुद इसे हटा रहे हैं।
    हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला, आज सुनवाई

    शादी मस्जिद के हिस्से को हटाने के विरोध में मस्जिद कमेटी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंची थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मस्जिद 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और इसके ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं।

    आगर नाके पर विरोध-प्रदर्शन करने पहुंचे लोग।

    एकलपीठ में याचिका निरस्त होने के बाद इसे फिर से युगलपीठ के सामने प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने दावा किया था कि 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी। उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क है।

    शाही मस्जिद को हटाने की प्रशासनिक तैयारी के बीच मस्जिद पक्ष की याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर युगल पीठ में सोमवार को सुनवाई होगी। एकल पीठ याचिका को 15 दिन पहले निरस्त कर चुकी है, अब सबकी नजरें युगल पीठ की सुनवाई पर लगी हुई हैं।

    शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा (एक तरफ से चार फीट और दूसरी तरफ से नौ फीट) हटाया जा रहा है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम मस्जिद द्वारा मस्जिद 636 साल पुरानी होने का दावा करते कहा जा रहा है कि भवन का हिस्सा तोड़े जाने से पूरी संरचना को नुकसान पहुंचेगा और पूरी इमारत प्रभावित हो सकती है।

    वहीं, मस्जिद को हटाने की संभावित कार्रवाई को देखते हुए शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शाही मस्जिद के भीतर और बाहर एकत्रित रहे थे। रविवार को भी विरोध और नारेबाजी जारी रही थी। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए और पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती की गई।

    औवेसी ने जताया विरोध

    उधर, एआईएमआइएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शाही मस्जिद को हटाने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि वक्फ कानून में संशोधन इसीलिए किए गए ताकि कलेक्टर्स और राज्य सरकार को मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों, कब्रिस्तानों को मुसलमानों से छीन लिया जाए।

  • 100 से अधिक मानकों पर होगी जांच, पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स और यूरिया जैसी मिलावटों का चलेगा पता

    100 से अधिक मानकों पर होगी जांच, पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स और यूरिया जैसी मिलावटों का चलेगा पता

    भोपाल

    प्रदेशवासियों के लिए एक अच्छी खबर है। यदि आपको घर में आने वाले दूध या दुग्ध उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। मध्यप्रदेश में सहकारिता क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार हो गई है। मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल परिसर में स्थापित इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ताओं के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनवाई गई है।

    शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य

    परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों की सटीक जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे दूर करने के लिए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है।

    12.40 करोड़ की लागत, NABL और FSSAI से मिलेगी मान्यता

    यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' (NPDD) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग एवं मार्गदर्शन से बनाई गई है। इसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। प्रयोगशाला को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त होगी।

    100 से अधिक मानकों पर होगी जांच

    प्रयोगशाला में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं और जल्द ही जांच की सुविधा भी मिलनी शुरू हो जाएगी। राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी।

    आमजन और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ

    इस सुविधा का सीधा फायदा आम नागरिकों के साथ खाद्य उत्पादक संस्थाओं को मिलेगा। प्रयोगशाला के संचालन से राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की समग्र गुणवत्ता में सुधार आएगा, शुद्धता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य पर इसका अत्यंत सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

     

  • जनसेवा के साथ तकनीक और संवेदनशीलता को दें प्राथमिकता, तभी प्रभावी होगी पुलिसिंग : कैलाश मकवाणा

    जनसेवा के साथ तकनीक और संवेदनशीलता को दें प्राथमिकता, तभी प्रभावी होगी पुलिसिंग : कैलाश मकवाणा

    भोपाल 

    पुलिस मुख्यालय के कांफ्रेंस हॉल में उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से भेंट कर पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली, पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराध नियंत्रण, नक्सल समस्या के समाधान तथा कानून-व्यवस्था एवं प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षुओं से संवाद किया।डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक  के.एफ. रुस्तमजी के योगदान को स्मरण करते हुए उनके कार्यकाल के महत्वपूर्ण प्रसंगों पर चर्चा की। उन्होंने चंबल क्षेत्र में डकैती की समस्या तथा उसे समाप्त करने के लिए किए गए पुलिस प्रयासों की जानकारी भी प्रशिक्षुओं से साझा की।

    नक्सल समस्या से निपटने से लेकर कानून-व्यवस्था प्रबंधन तक दी जानकारी

    डीजीपी  मकवाणा ने बताया कि मध्यप्रदेश ने नक्सल समस्या के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने प्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने के लिए अपनाई गई पुलिसिंग और रणनीति के बारे में प्रशिक्षुओं को जानकारी दी। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिसिंग तथा संवेदनशील परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया।उन्होंने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके लिए प्रशिक्षण एवं अधोसंरचना से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, ई-समन जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं और पुलिसिंग को आधुनिक एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

    साइबर अपराध और नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियानों से कराया परिचित

    डीजीपी ने बताया कि नशा मुक्त भारत-2029 के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।  उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत विभिन्न अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं संवाद को और मजबूत करना है।

    तकनीक के माध्यम से पुलिसिंग को बनाया जा रहा आधुनिक

    डीजीपी  मकवाणा ने पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि डायल-112 एवं एफआरवी व्यवस्था, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस सहित विभिन्न तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस के माध्यम से पुलिस कार्यालयों को पेपरलेस बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं ईएचआरएमएस में लगभग एक लाख पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा चुका है।उन्होंने पुलिस बल की कार्यक्षमता और कल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि तनाव प्रबंधन के लिए पिछले वर्ष हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू किया गया है और इसके माध्यम से पुलिसकर्मियों के स्ट्रेस मैनेजमेंट पर कार्य किया जा रहा है।

    पुलिस अधिकारी संवेदनशील रहें, जनता की जरूरत के समय मदद करें : डीजीपी

    डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी का व्यवहार अच्छा और संवेदनशील होना चाहिए। जनता को जब पुलिस से मदद की आवश्यकता हो, तब उनकी सहायता के लिए तत्पर रहना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।  कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. विनीत कपूर, पीएसओ टू डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को डीजीपी  कैलाश मकवाणा के कार्यों एवं पुलिस सेवा के अनुभवों से परिचित कराया। इस अवसर पर सहायक पुलिस महानिरीक्षक  रामजी वास्तव ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस की मूलभूत जानकारी एवं पुलिस व्यवस्था से परिचित कराया।  प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ जागरूकता अभियान तथा ‘सेफ क्लिक’ साइबर जागरूकता अभियान पर आधारित वीडियो प्रस्तुतियां दिखाई गईं।

    कार्यक्रम के दौरान उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने भोपाल में अपने प्रशिक्षण एवं भ्रमण के अनुभव भी साझा किए और मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली एवं पुलिसिंग के विभिन्न नवाचारों के संबंध में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  रवि कुमार गुप्‍ता, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  एन.बी. वायंगणकर, उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण  मनीष अग्रवाल, एस.ओ. टू डीजीपी  मलय जैन एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  अंकित सोनी उपस्थित रहें। 

  • PM आवास की मांग पर शिवपुरी में हंगामा, मासूम संग पानी की टंकी पर चढ़ा परिवार; अफसरों के आश्वासन से माने

    PM आवास की मांग पर शिवपुरी में हंगामा, मासूम संग पानी की टंकी पर चढ़ा परिवार; अफसरों के आश्वासन से माने

     शिवपुरी

    शहर के मनीयर में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सरकारी जमीन पर पक्का निर्माण रोकने से नाराज एक युवक अपने पूरे परिवार और नौ माह के दुधमुंहे बच्चे को लेकर 70 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया।

    करीब दो घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे में नीचे खड़ी पुलिस-प्रशासन की सांसें अटकी रहीं। युवक टंकी से ही परिवार सहित कूदकर जान देने की धमकी देता रहा। अंत में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और कोतवाली टीआई रोहित दुबे ने मौके पर पहुंचकर उसे पीएम आवास दिलाने का आश्वासन दिया, तब जाकर वह नीचे उतरा।

    क्या है पूरा मामला?

    मनीयर में सर्वे नंबर 454 की सरकारी जमीन पर पवन जाटव पिछले 25-30 साल से झोपड़ी बनाकर रह रहा है। नगर पालिका द्वारा सड़क बनवाने के बाद उसकी झोपड़ी सड़क से नीची हो गई, जिसमें बारिश का पानी भरने लगा।

    परेशान होकर पवन ने उसी जगह बुनियाद भरकर दो पक्के कमरे बनाना शुरू कर दिया। इस पर पड़ोस में रहने वाले महेश धाकड़, बाबू धाकड़ सहित अन्य लोगों ने कोतवाली में शिकायत कर दी कि सरकारी जमीन पर जबरन पक्का कब्जा किया जा रहा है।

    शिकायत पर पुलिस पवन के घर पहुंची और जमीन के दस्तावेज मांगे। दस्तावेज न होने पर पुलिस पूछताछ के लिए उसके मामा रामभजन को थाने ले गई। इससे आक्रोशित होकर पवन अपनी मां रामश्री जाटव, पत्नी सपना जाटव और नौ माह के बेटे इशांक को लेकर मनीयर टोल टैक्स के पास बनी जलावर्धन योजना की टंकी पर चढ़ गया।
    फोन पर चली दो घंटे बात, फिर माना प्रशासन का आश्वासन

    सूचना मिलते ही तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और टीआई रोहित दुबे टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नीचे से फोन पर पवन को समझाने का दौर शुरू हुआ। पवन का एक ही कहना था कि, "मैं 30 साल से यहीं रह रहा हूं, मुझे यहीं घर बनाने दो, नहीं तो न्याय नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगा।"

    करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन ने उसे भरोसा दिलाया कि उसे अवैध कब्जे की जगह वैध मकान दिलाया जाएगा, तब कहीं जाकर वह नीचे उतरकर आया।
     

    पीएम आवास की कॉलोनी में करवाएंगे आवेदन

    तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने बताया, "पवन जाटव सर्वे नंबर 454 की शासकीय भूमि पर अतिक्रमित है। उसे समझाया गया है कि वह जितना पैसा यहां कच्चे-पक्के निर्माण में लगाएगा, उतने में मेडिकल कॉलेज के पीछे बनी पीएम आवास कॉलोनी में उसे पात्रता के अनुसार पक्का मकान मिल जाएगा। वह बीपीएल श्रेणी का है, उसके पास रहने की व्यवस्था नहीं है। कल उसका आवेदन करवा रहे हैं।"
    टंकियां क्यों बनीं आत्मघाती अड्डा?

    यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर में जलावर्धन योजना के तहत 8 से 10 बड़ी पानी की टंकियां बनी हैं, लेकिन एक पर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। किसी भी टंकी की सीढ़ियों पर लोहे का गेट या ताला नहीं है। चेतावनी बोर्ड, सीसीटीवी कैमरा और चौकीदार का कोई अता-पता नहीं।

    इसी का परिणाम है कि, शाम होते ही इन टंकियों पर नशेड़ी और आवारा तत्वों की महफिल सजती है। जब जिसके मन में आता है, वह टंकी पर चढ़कर प्रशासन को ब्लैकमेल करता है।

    नगर पालिका की जिम्मेदारी क्या है?

    मध्यप्रदेश म्युनिसिपल एक्ट और जल प्रदाय मैनुअल साफ कहता है कि, हर जल संरचना पर लोहे का गेट, ताला, खतरे का बोर्ड, सीसीटीवी और 24 घंटे कर्मचारी की तैनाती अनिवार्य है। इसका उद्देश्य पानी को दूषित होने से बचाना और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकना है। लापरवाही पर सीएमओ और जल शाखा प्रभारी पर आपराधिक मामला तक दर्ज हो सकता है। शिवपुरी नपा में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

  • “देवास जॉब पोर्टल” को मिला प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड

    “देवास जॉब पोर्टल” को मिला प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड

    भोपाल

    देवास में रोजगार के क्षेत्र में शुरू किए गए अभिनव नवाचार “देवास जॉब पोर्टल” ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में इस डिजिटल पहल को प्रतिष्ठित ‘स्कॉच अवार्ड – गोल्ड कैटेगरी’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार कलेक्टर  ऋतु राज सिंह के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में युवाओं को रोजगार के सुगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मिली बड़ी उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को देवास जिले के बागली विकासखंड में “देवास जॉब पोर्टल” का विधिवत शुभारंभ किया गया था। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं और उद्योगों को एक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी डिजिटल मंच पर जोड़ते हुए रोजगार के अवसरों को सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। देवास जॉब पोर्टल युवाओं और स्थानीय औद्योगिक इकाइयों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है। सितंबर 2026 तक पोर्टल पर 12,600 से अधिक युवाओं ने पंजीयन कराया है। पोर्टल पर 258 उद्योगों और संस्थानों ने भागीदारी करते हुए 4600 रोजगार के अवसर सृजित किए, इनमें से 1,000 से अधिक स्थानीय अभ्यर्थियों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ।

    स्थानीय प्रशासन, उद्योग और युवाओं के बीच सशक्त डिजिटल संपर्क स्थापित करने वाला यह मॉडल रोजगार की खोज और उपलब्धता के बीच के अंतर को समाप्त करने में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल साबित हुआ है।