Category: मध्य प्रदेश

  • खंडवा में सितंबर में सिर्फ 86 मिमी बारिश, गेहूं-चना की सिंचाई पर संकट

    खंडवा में सितंबर में सिर्फ 86 मिमी बारिश, गेहूं-चना की सिंचाई पर संकट

    भोपाल
    मानसून सीजन की विदाई अब लगभग तय हो चुकी है, आईएमडी एक सप्ताह में इसकी घोषणा कर सकता है। इस साल बारिश का औसत कोटा भी अब तक पूरा नहीं हुआ है। अब भी जिले की औसत बारिश के लिए चार इंच वर्षा की दरकार है। पिछले 15 साल में ये दूसरी बार है जब औसत से कम बारिश हुई है। कम बारिश से आगामी रबी सीजन में किसानों को गेहूं-चना की फसल में सिंचाई के लिए पानी की परेशानी हो सकती है। इस साल 15 वर्ष में पहली बार इंदिरा सागर बांध के गेट तक नहीं खुले।

    सितंबर में 86 मिमी ही बारिश हई
    जिले की औसत बारिश 808.8 मिमी है। इस साल मानसून सीजन में अब तक 708 मिमी बारिश ही दर्ज हो पाई है। इसके पूर्व वर्ष 2017 में सितंबर के अंत तक 758 मिमी बारिश हुई थी। सितंबर माह की देखी जाए तो इस साल सितंबर माह में कुल 86 मिमी बारिश ही हुई है। इसके पूर्व वर्ष 2015 में सितंबर माह में कुल 85 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। पिछलेे कुछ वर्षों में बारिश का ट्रैक रिकार्ड देखा जाए तो सितंबर में हुई बारिश से औसत बारिश का कोटा पूरा होता आया है। इस बार स्थिति नहीं बन रही है।

    कृषि विभाग कम पानी वाली फसल फसलों की दे रहा सलाह
    इस साल समय अंतराल में हुई बारिश से खरीफ की फसलों को तो फायदा पहुंचा है, लेकिन आगामी रबी सीजन में किसानों के सामने परेशानी आ सकती है। जिले के छोटे-बड़े कुल 49 तालाब 94.14 प्रतिशत भरे हैं। वहीं, दो प्रमुख बांधों में इंदिरा सागर बांध भी अपनी पूर्ण जल भराव क्षमता के करीब सवा मीटर नीचे है। हालांकि बरगी से छोड़े गए पानी से इसका एफआरएल पूरा होता दिख रहा है। ओंकारेश्वर बांध भी दो मीटर खाली है। आगामी रबी सीजन की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग अभी से किसानों को कम पानी वाली फसलों की बुआई की समझाइश दे रहा है।

    पांच साल में बारिश की स्थिति
    वर्ष मानसून सीजन सितंबर में बारिश
    2022 1049 मिमी 273 मिमी
    2023 918 मिमी 480 मिमी
    2024 964 मिमी 212 मिमी
    2025 866 मिमी 205 मिमी
    2026 708 मिमी 86 मिमी -28 सितंबर तक

    दोनों प्रमुख बांधों की स्थिति
    ओंकारेश्वर बांध जल भराव क्षमता 196.60 मी., वर्तमान में 294.57 मी., दो मीटर खाली
    इंदिरा सागर बांध जल भराव क्षमता 262.13 मी., वर्तमान में 261.07 मी., सवा मीटर खाली

    यह है जिले के तालाबों की स्थिति
    भगवंत सागर बांध कुल जल भराव क्षमता 78.06 एमसीएम, वर्तमान में 75.07 एमसीएम
    भाम मध्यम योजना कुल जल भराव क्षमता 29.73 एमसीएम, वर्तमान में 27.71 एमसीएम
    आवलियां तालाब कुल जल भराव क्षमता 22.199 एमसीएम, वर्तमान में 17.72 एमसीएम
    46 छोटी परियोजनाएं कुल जल भराव क्षमता 40.82, वर्तमान में 39.729 एमसीएम

    अब बारिश की संभावना एक प्रतिशत
    जिले में बारिश का कोई नया सिस्टम अब नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय सिस्टम से एक प्रतिशत बारिश की संभावना है। इस साल औसत से कम बारिश हुई है। गर्मियों की फसल को सिंचाई के लिए पानी की परेशानी आ सकती है।
    डॉ. सौरव गुप्ता, कृषि एवं मौसम विशेषज्ञ

    बिजली उत्पादन में कोई परेशानी नहीं
    इस बार डैम के गेट नहीं खुल है। बरगी बांध से छोड़े गए पानी से इंदिरा सागर बांध का जल स्तर 262 तक पहुंच जाएगा। सीजन में बिजली उत्पादन को लेकर कोई परेशानी नहीं आएगी।
    अरमेंद्र सिंह, डीजीएम, इंदिरा सागर परियोजना

  • जीवाजी विश्वविद्यालय में एनएसएस के विश्वविद्यालय स्तरीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ

    जीवाजी विश्वविद्यालय में एनएसएस के विश्वविद्यालय स्तरीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ

    ग्वालियर,
    जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित सात दिवसीय विश्वविद्यालय स्तरीय नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। जिसमें ग्वालियर चंबल संभाग के सभी जिलों से 315 स्वयंसेवक/प्रतिभागी/कार्यक्रम अधिकारी/जिला संगठक महोदय शामिल हुए।
    जिसका 28 सितम्बर 2026 को शिविर का विधिवत उद्घाटन गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। शिविर के प्रथम दिन का आरंभ प्रातः 5:00 बजे जागरण, प्रभात फेरी एवं शारीरिक प्रशिक्षण (पी.टी.) के साथ हुआ। तत्पश्चात स्वामी विवेकानंद केंद्र, ग्वालियर के संगठक श्री श्रवण जी ने स्वयंसेवकों को योग और प्राणायाम का अभ्यास कराया। शिविर के सुचारू संचालन व नेतृत्व कौशल संवर्धन के उद्देश्य से प्रतिभागियों को 5 कार्यदलों में विभाजित कर विभिन्न दायित्व सौंपे गए।

    सत्र के मुख्य अतिथि रामकृष्ण मिशन ग्वालियर के प्रमुख परम पूज्य स्वामी श्री कृष्णमित्रानंद पुरी जी महाराज ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक जीव की अंतर्निहित शक्ति को पहचानना ही जीवन का वास्तविक ध्येय है। उन्होंने युवाओं से चरित्र निर्माण, आत्मशक्ति और ध्यान के माध्यम से 'विकसित भारत' की कमान संभालने का आह्वान किया।

    मुख्य वक्ता हॉकी फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष श्री देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर ने कहा कि एनएसएस केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि चरित्र और राष्ट्र निर्माण की सुदृढ़ आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा विश्व के स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता हैं और स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का अनुसरण कर वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बढ़ा सकते हैं।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के क्षेत्रीय निर्देशालय (मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़) के उप सलाहकार डॉ. अशोक कुमार श्रोती ने शिविर को जीवन की वास्तविकता, सेवा, धर्म और अनुशासन का अद्भुत संगम बताया तथा स्वयंसेवकों को निरंतर समाज सेवा के लिए प्रेरित किया।
    इस अवसर पर जीवाजी विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य एडवोकेट भानु प्रताप सिंह एवं जीनियस इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर की डायरेक्टर श्रीमती रक्षणा सासोड़े विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    सत्र के दौरान अतिथियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया तथा डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना जी द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।  
    कार्यक्रम के समापन पर डॉ. मनोज अवस्थी जी ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 में बड़ा बदलाव, आवासीय सड़कों पर कारोबार को मिलेगी मंजूरी

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 में बड़ा बदलाव, आवासीय सड़कों पर कारोबार को मिलेगी मंजूरी

    भोपाल
    भोपाल में आवासीय में कारोबार की छूट के लिए मास्टर प्लान में मार्केट स्ट्रीट का मास्टर स्ट्रोक मारा गया है। जिन मुख्य मार्गों की चौड़ाई 18 मीटर या उससे अधिक है और जहां अवैध निर्माण के शमन से जुड़े अधिकांश मामले निपटाए जा चुके है, उन्हें राज्य सरकार विचार-विमर्श के बाद मार्केट स्ट्रीट घोषित कर सकती है। अरेरा कॉलोनी, अवधपुरी, गुलमोहर, शाहपुरा, कोलार, संतनगर, करोद समेत शहरभर में 80 से अधिक क्षेत्रों में इसका असर होगा। सरकार और संबंधित अफसर के विवेक पर छोड़ दिया गया है कि यदि इस चौड़ाई की सड़क किनारे कारोबार करने वाले कई घर हो गए हैं तो बचे हुए घरों को भी कारोबार की छूट दे दी जाए। मार्केट स्ट्रीट घोषित होने के बाद उन सड़कों पर स्थित आवासीय प्लॉटों पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की कानूनी अनुमति होगी। यह छूट मुख्य सड़क से सटे मूल प्लॉट की गहराई तक ही मान्य रहेगी। सरकार ऐसी सड़कों को मार्केट स्ट्रीट के तौर पर अधिसूचित कर आगामी समय में कानूनी जामा पहना देगी।

    ऐसे समझें स्थिति
    मास्टर प्लान में इस प्रावधान को महज चार लाइन में लिखा गया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेस एंड अर्बन मैनेजमेंट के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एचएम मिश्रा के अनुसार मार्केट स्ट्रीट के प्रावधान स्पष्ट करने चाहिए, ताकि पता चले इसमें किस तरह की मंशा है। गौरतलब है कि आवासीय क्षेत्र में अवैध तौर पर संचालित दुकानों वाले क्षेत्र को अचानक पूरी तरह से मार्केट स्ट्रीट बनाया जाता है तो व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेगी। गाड़ियों की आवाजाही बढ़ेगी, जाम और पार्किंग की दिक्कत के साथ इनके पास के आवासीय क्षेत्रों में लोगों की शांति भंग होगी। शोर-शराबा और भीड़भाड़ बढ़ेगी, जिससे वहां रह रहे वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों की निजता प्रभावित होगी। इतना ही नहीं, पानी की खपत् बिजली की मांग और कचरा प्रबंधन पर दबाव बढ़ जाएगा। यहां जमीनों के दाम तो काफी बढ़ जाएंगे, लेकिन ठीक पीछे की गलियों में रहने वाले लोगों के लिए शांति और सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। बाजार इन गलियों से पीछे की अपेक्षाकृत कम चौड़ाई वाली गलियों में सहजता के साथ फैल जाएगा।

    आपत्ति सुझाव 25 अक्टूबर तक कार्यालयों में नक्शे ही नहीं
    मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 पर 25 अक्टूबर तक आपत्ति सुझाव की समय सीमा है। लोग ड्राफ्ट, नक्शे, खसरे देखने टीएंडसीपी कार्यालय समेत कलेक्ट्रेट, संभागायुक्त कार्यालय पहुंच रहे। स्थिति ये है कि ड्राफ्ट जारी किए तीन दिन का समय बीत गया, अब तक टीएंडसीपी में खसरों के पैनल नहीं लगे हैं। सिर्फ दो नक्शे लगाए हुए है। इन्हें समझाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की। लोगों को सबसे अधिक आपत्ति ऑनलाइन सुनवाई को लेकर है। कोरोना के समय ऑनलाइन सुनवाई हुई थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। ऑफलाइन सुनवाई में बेहतर बात रखी जा सकती है। टीएंडसीपी की वेबसाइट पर अलग से विंडो ओपन कर आपत्ति देने का प्रावधान किया जा रहा है।

    गलियों में सड़कें छोटी की, ताकि निर्माण न टूटे
    स्थानीय सड़कें जिन्हें मास्टर प्लान में सब सेक्टर रोड का नाम दिया, मौजूदा ड्राफ्ट में इन्हें 15 मीटर से 25 मीटर किया गया, जबकि पिछले प्लान में ये 12 मीटर से 18 मीटर थी। इसका असर ये कि सड़क चौड़ाई बढ़ाने में होने वाली तोड़फोड़ को पूरी तरह खत्म कर सड़क किनारे के व्यावसायिक निर्माणों को बचाया जा सके।

    आर्किटेक्ट-प्लानर राजेश चौरसिया के अनुसार, मास्टर प्लान में बदलाव की जरूरत है। मिक्स्ड लैंडयूज होना चाहिए. लेकिन इसके लिए स्पष्ट तौर पर छोटे प्लॉट बनाने, अधोसंरचना से मजबूती से जुड़े प्रावधान करना जरूरी है। आवासीय और व्यवसायिक में किसी तरह का टकरान हो. इसपर योजना तय करना चाहिए।

    ड्राफ्ट पर इनकी बात
    बाघ भ्रमण क्षेत्र ग्राम बैरागढ़ व दौलतपुर की 425 हेक्टेयर भूमि राजस्व जंगल थी। पिछले साल ही इसे वन को ट्रांसफर की गई। चंदनपुरा में इसी तरह 357 हेक्टेयर जमीन मिलाकर 1200 एकड़ जमीन बनती है। ये पूरा बाघभ्रमण का क्षेत्र है, लेकिन यहां जिस तरह 60 मीटर 24 मीटर तक की सड़कें तय कर दी. उससे बाघ मानव संघर्ष का रास्ता खोल दिया है। मामले में मैंनें एनटीसीए को फोन पर व अब ईमेल से जानकारी दे रहा हूं।
    -प्रभाष जेटली, एक्सपर्ट बाघ संरक्षण व पर्यावरण

    पूरे ड्राफ्ट को पढ़कर सिर्फ इतना लग रहा है कि टीएंडसीपी के नियम कानून, प्रावधानों को मानने वाले पूरी तरह से ठगे गए हैं। जिन्होंने मनमर्जी की। तमाम तय नियम तोडे उन्हें इस ड्राफ्ट में उपकृत करने की कोशिश की है। आवासीय क्षेत्र की शांति के लिए कोई सौदा-समझौता कारोबार नहीं किया। 2005 में तय आवासीय क्षेत्र के रीडॅसिफिकेशन को तय कराने ये लेकर सड़कों की चौड़ाई कहीं घटाकर कहीं बढ़ाकर जो लाभदेने की मंशा स्पष्ट दिख रही है।- लवनीश भाटी, याचिकाकर्ता

    मास्टर प्लान के इस ड्राफ्ट ने रहवासी क्षेत्रों के साथ शहर के पर्यावरण को भारी चोट पहुंचाई है। असीमित एफएआर का क्या मतलब होता है? किसी शहर को नियोजित करने वाला ड्राफ्ट तो नहीं लग रहा है। कर्नाटक सरकार ने भी ऐसा ही प्लान तैयार किया था, जिसके प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया है। हम मॉनीटरिंग कर रहे हैं और ये मामला भी कोर्ट में मजबूती से रखेंगे। ग्रीन एरिया में अन्य गतिविधि तय की गई, स्पांज सिटी, रेंटल हाउसिंग जैसे शब्दों का उपयोग बता रहा है कि प्लानिंग में भोपाल से बाहर वालों की बड़ी भूमिका है।- पूर्णेदु शुक्ला, रहवासी

    गुलमोहर कॉलोनी में नौ मीटर की रोड पर होटल्स खुल हैं। 1800 घरों की कॉलोनी है सब परेशान हो रहे हैं। आवासीय प्लॉट में अस्पताल है, घरों में होटल है, रेस्टोरेंट है। रोजाना पार्किंग और अन्य विवाद बन रहे। असामाजिक तत्वों की आवाजाही हो रही है। मास्टर प्लान में इन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं किया। इन्हें नियमित करने के प्रावधान आवासीय में परेशानियां बढ़ाएंगे। 80 फीसदी या इससे चौड़ी सड़कों के किनारे प्रावधान करें तो ठीक होगा। अभी तो काफी गड़बड़ी प्लान है। सुधार होना चाहिए।- ललीत यावय, अध्यक्ष गुलमोहर समिति

  • प्रदेश को मिलेट स्टेट बनाने में अनूपपुर का महत्वपूर्ण योगदान है :- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश को मिलेट स्टेट बनाने में अनूपपुर का महत्वपूर्ण योगदान है :- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल
     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को मिलेट स्टेट बनाने में अनूपपुर का बड़ा योगदान है। हमारा अनूपपुर जल संपदा से संपन्न है। जिले में केवई उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में तकनीक और नवाचार से कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही 100 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई क्षमता का विस्तार करना हमारा लक्ष्य है। प्रदेश में कुछ समय बाद किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में जारी सेवा-संकल्प अभियान के अंतर्गत किसान हितैषी योजनाओं की जानकारियां अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा की जायें। राज्य सरकार युवाओं, गरीबों, महिलाओं और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ज्वार, बाजरा जैसे श्रीअन्न के साथ-साथ धान उपार्जन के लिए पंजीयन शुरू हो गया है। उन्होंने किसान भाइयों से समय रहते पंजीयन कराने का आह्वान किया।  ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के अंतर्गत आज मुख्यमंत्री निवास से अनूपपुर में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में वर्चुअली जुड़कर किसान बंधुओं से संवाद किया।

    राज्य सरकार हर कदम पर किसान भाईयों के साथ है
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान चौपालें लगाकर किसान हितैषी योजनाओं का प्रसार-प्रचार किया जाए। किसान चौपालों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का भी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अनूपपुर में धान, गेंहू, दलहन और तिलहन के उत्पादन के साथ हमारे किसान नई तकनीक और नई फसलों को अपना रहे हैं। किसानों द्वारा मशरूम और स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाइयों को पशुपालन, दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियां अपनाते हुए नवीन तकनीक और नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि का भविष्य उज्जव है, किसान भाई अपने बच्चों को कृषि उद्योगों से जोड़े। राज्य सरकार हर कदम पर किसान भाईयों के साथ है।

    ग्रामीण भाईयों को मिलेंगे सुगम परिवहन सेवा और नि:शुल्क रजिस्ट्री के लाभ
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में आरंभ हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना का लाभ दूरदराज के गांव वालों को मिलेगा। ग्रामीण भाईयों के लिए नि:शुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा आरंभ की गई है। राज्य सरकार बच्चों की बेहतर पढ़ाई और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया किसान भाईयों से संवाद
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाईयों क्रमश: रमेश सिंह, अरूणकुमार चंद्रवंशी, प्रेमलाल केवट, रामभजन और माधव सिंह राठौर से उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने, प्राकृतिक खेती, शासकीय योजनाओं और पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के संबंध में बातचीत की। अनूपपुर के कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में अपेक्स बैंक भोपाल के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव, विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति रमेश उपस्थित रहे

  • दिवंगत शिक्षकों-कर्मचारियों के परिवारों का पूरा ध्यान रख रहे सीएम डॉ. मोहन, किस बात पर कर रहे फोकस?

    दिवंगत शिक्षकों-कर्मचारियों के परिवारों का पूरा ध्यान रख रहे सीएम डॉ. मोहन, किस बात पर कर रहे फोकस?

    भोपाल
    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए राज्य के बच्चों की शिक्षा सर्वोपरि है। वे कई बार भगवान श्री कृष्ण का उदाहरण देकर शिक्षा के महत्व को दर्शा भी चुके हैं। इसलिए उन्होंने छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के विकास पर भी खासा ध्यान दिया है। उन्होंने नई शिक्षा नीति लागू कर इसकी व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया है। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार सुशासन की परिकल्पना को धरातल पर साकार करते हुए संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिक्षा विभाग के दिवंगत शिक्षकों-कर्मचारियों के परिवारों का भी ख्याल रख रहे हैं।  

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग ने दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। विभाग ने लंबे समय से लंबित अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाई है। विभाग के इस कदम से पात्र परिवारों को उनके अधिकार समय पर मिलेंगे और लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित होगा। सीएम डॉ. यादव के नेतृत्व में कर्मचारी कल्याण शिविर भी शुरू किए गए हैं। इन शिविरों के माध्यम से शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याएं ऑनलाइन मिल सकेंगी। साथ ही, उनका निराकरण भी जल्दी होगा। शिक्षा विभाग की सुदृढ़ व्यवस्था के चलते अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया गया। दो दिन पहले ही 251 और नियुक्ति आदेश जारी किए गए। इसके साथ ही पिछले 4-5 दिनों में कुल 851 अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। यह पहल दिवंगत शिक्षकों-कर्मचारियों के आश्रित परिवारों को सम्मानजनक जीवन का आधार और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    शिक्षा को नई दिशा देने पर जोर
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, तकनीक आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया है। राज्य सरकार स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने, शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के उपयोग को बढ़ाने और शिक्षकों की भूमिका को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है। सरकार के प्रयासों में विद्यार्थियों को फ्री किताबें, साइकिल, यूनिफॉर्म, लैपटॉप और स्कूटी जैसी सुविधाएं जी जा रही हैं। सरकार ने सांदीपनि स्कूलों के जरिये आधुनिक सुविधाओं और शिक्षा का बेहतर वातावरण विकसित किया है। शिक्षा विभाग ने प्रवेश से लेकर अन्य प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने के लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 और स्टूडेंट डायरेक्ट्री मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है।

    सरकार ने दिए लैपटॉप
    शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत 12वीं बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की राशि दी जाती है। इसी महीने 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खातों में 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में डिजिटल संसाधनों का उपयोग करने में मदद मिलेगी।

    उच्च शिक्षा में 55 पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस
    उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए गए हैं। इन संस्थानों में पारंपरिक विषयों के साथ रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर जोर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र शुरू करने, विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने और नए पाठ्यक्रमों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की है। इससे विद्यार्थियों को अपने जिले में ही उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास दिखाई देता है।

    शिक्षकों की भूमिका पर फोकस
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ शिक्षकों को भी महत्वपूर्ण भागीदार माना है। इसी साल जनवरी में राज्य सरकार ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान किया। इस दौरान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकारी स्कूलों के बेहतर परिणाम और बढ़ते नामांकन में शिक्षकों के योगदान पर अहम चर्चा की। सितंबर में शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के युवा शिक्षकों से सीधे संवाद कर शिक्षा नीति, तकनीक और विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों पर उनके विचार जाने।

    शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ डिग्री नहीं, कौशल भी
    सरकार की शिक्षा नीति में अब केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रहने के बजाय विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिखाई देता है। स्कूल स्तर पर डिजिटल संसाधनों और प्रोत्साहन योजनाओं से लेकर कॉलेज स्तर पर रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तक किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों के बुनियादी ढांचे, डिजिटल व्यवस्था, विद्यार्थी प्रोत्साहन, शिक्षकों के संवाद और उच्च शिक्षा में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया है।

  • 12 पेंशन-सहायता योजनाओं से 57,56,334 हितग्राही लाभान्वित, पात्र लोगों तक पहुंच रहा लाभ

    12 पेंशन-सहायता योजनाओं से 57,56,334 हितग्राही लाभान्वित, पात्र लोगों तक पहुंच रहा लाभ

    प्रदेश की 12 पेंशन और सहायता योजनाओं में 57 लाख 56 हजार 334 हितग्राही हो रहे है लाभान्वित

    मुख्यमंत्री प्रतिमाह डीबीटी से हितग्राहियों के खातों में करते है राशि अंतरित

    भोपाल 

    प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य सहायता योजनाएँ वृद्धजनों, विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं, दिव्यांगजनों तथा जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल दे रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रतिमाह विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित करते है। सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश के 57 लाख 56 हजार 334 पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं अन्य सहायता योजना में का लाभ दिया जा रहा है।

    आयुक्त सामाजिक न्याय, द्वियांगजन कल्याण के. जी. तिवारी के अनुसार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में 15 लाख 75 हजार 79, राष्ट्रीय विधवा पेंशन में 5 लाख 46 हजार 920 और राष्ट्रीय निःशक्त पेंशन में 84 हजार 623 हितग्राही लाभान्वित हैं। समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 18 लाख 63 हजार 632 और मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन के 15 लाख 29 हजार 490 हितग्राही हैं।

    मुख्यमंत्री अविवाहित पेंशन में 3 हजार 992, मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन में 63 हजार 590 और बहुदिव्यांग एवं बौद्धिक दिव्यांग सहायता अनुदान में 82 हजार 143 हितग्राही हैं। राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना में 1 हजार 413, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 4 हजार 908, मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना में 340 और दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना में 204 हितग्राही को दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार गरीब, निराश्रित और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। पेंशन राशि दैनिक खर्चों में मदद के साथ हितग्राहियों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आधार भी देती है। सरकार का संकल्प है कि सहायता समय पर प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचे।

     

  • अवैध निर्माण की शिकायत करने वाली संस्था ने मांगा पक्षकार बनने का अधिकार, हाईकोर्ट में आवेदन

    अवैध निर्माण की शिकायत करने वाली संस्था ने मांगा पक्षकार बनने का अधिकार, हाईकोर्ट में आवेदन

    इंदौर
    भवन के अवैध हिस्से को नियमित करने के लिए शासन द्वारा शुरू की गई कंपाउंडिंग योजना को लेकर नया पेच सामने आ गया है। इस योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में अब कालोनी बसाने वाली गृह निर्माण संस्था भी पक्षकार बनेगी। याचिका की सुनवाई के दौरान संस्था की ओर से प्रस्तुत हस्तक्षेप आवेदन को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

    संस्था का कहना है कि भवन में हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत उसी ने की थी, ऐसे में उसे सुने बिना फैसला दिया जाना गलत होगा। कोर्ट ने शासन और निगम को एक अक्टूबर से पहले जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    हाईकोर्ट में इस मामले में दो जनहित याचिकाएं लंबित हैं, जो कल्पना सेतपाल और वर्षा गुरनानी ने दायर की हैं। दोनों याचिकाओं में राज्य शासन द्वारा भवनों के अवैध हिस्से को नियमित करने के लिए लाए गए कंपाउंडिंग नियमों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2022 में शासन द्वारा लाए गए नियमों में भवन के ऊपरी हिस्से में किए गए निर्माण को कंपाउंडिंग में शामिल नहीं किया गया, जो गलत है।

    गृह निर्माण संस्था ने हस्तक्षेप आवेदन दिया
    एक याचिका केसरबाग रोड स्थित नेमानगर में बन रहे भवन को लेकर स्वामी कल्पना सेतपाल ने दायर की है। इस पर नेमानगर गृह निर्माण संस्था ने हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन में कोर्ट को बताया गया है कि भवन की शिकायत संस्था द्वारा ही की गई थी, इसलिए उसे भी सुना जाना चाहिए। संस्था ने कहा है कि कंपाउंडिंग के नियम को चुनौती देना ही गलत है।

     

  • रतलाम को बिजली व्यवस्था की बड़ी सौगात, 200 MVA ट्रांसफार्मर से बढ़ेगी विद्युत क्षमता

    रतलाम को बिजली व्यवस्था की बड़ी सौगात, 200 MVA ट्रांसफार्मर से बढ़ेगी विद्युत क्षमता

    एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

    रबी सीजन में मिलेगी बेहतर विद्युत व्यवस्था

    रतलाम 

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने उत्तरी मालवा क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए रतलाम के 220 केवी सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की है। रतलाम सबस्टेशन में वर्ष 1988 में स्थापित सेकंड जेनरेशन के 160 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नये थर्ड जेनरेशन तकनीक आधारित 220/132 केवी वोल्टेज स्तर का 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है।

    रतलाम जिले का पहला 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर

    ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि रतलाम जिले में पहली बार इतनी उच्च क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इससे क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    मालवा क्षेत्र का 5 वां और प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर

    एमपी ट्रांसको रतलाम -मंदसौर के अधीक्षण अभियंता वाय आर मांडलेकर ने बताया कि रतलाम में ऊर्जीकृत हुआ यह पावर ट्रांसफार्मर प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। मालवा क्षेत्र में इस क्षमता का यह पांचवां पावर ट्रांसफार्मर है। इसके स्थापित होने से रतलाम 220 केवी सबस्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 520 एमवीए हो गई है।

    जिले का 28 वां पावर ट्रांसफार्मर

    यह रतलाम जिले का 28वां पावर ट्रांसफार्मर है। एमपी ट्रांसको जिले में अपने 10 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण व्यवस्था का संचालन कर रही है। इनमें 220 केवी के रतलाम, जावरा एवं सैलाना सबस्टेशन तथा 132 केवी के रतलाम, सैलाना, शिवगढ़, ताल, आलोट और बिलपांक सबस्टेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगरा में एक स्विचिंग सबस्टेशन भी संचालित है।

    नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही रतलाम जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2165 एमवीए की हो गई है।

     

  • हवाई कनेक्टिविटी में MP की बड़ी छलांग, भोपाल-अयोध्या-शारजाह और इंदौर-बैंकॉक रूट जुड़ेंगे

    हवाई कनेक्टिविटी में MP की बड़ी छलांग, भोपाल-अयोध्या-शारजाह और इंदौर-बैंकॉक रूट जुड़ेंगे

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश के हवाई नेटवर्क के विस्तार की दिशा में तीन नई विमान सेवाएं शुरू करने की तैयारी है। भोपाल से अयोध्या और शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है। वहीं, इंदौर से बैंकॉक के लिए भी विमान सेवा शुरू करने की तैयारी है। फिलहाल इन तीनों शहरों के लिए मध्य प्रदेश से सीधी विमान सेवा उपलब्ध नहीं है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के दौरान भोपाल से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू करने को लेकर निजी निवेशकों से चर्चा हुई थी। इसके बाद एक निजी विमानन कंपनी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विमान सेवा के क्षेत्र में निवेश का प्रस्ताव रखा। अब राज्य शासन ने इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले उड़ान शुरू करने की तैयारी
    नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के निर्धारित मानकों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद भोपाल और इंदौर से प्रस्तावित उड़ानें शुरू करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य इन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले शुरू करने का है।

    नई विमान सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य की विमानन नीति के तहत संबंधित निजी विमानन कंपनी को अनुदान भी दिया जाएगा। इससे नई उड़ानों के संचालन को आर्थिक सहयोग मिलने की उम्मीद है।

    भोपाल को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा
    भोपाल से शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू होने के बाद राजा भोज विमानतल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन वाले हवाई अड्डों की सूची में शामिल हो जाएगा। इसके साथ ही भोपाल से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को दूसरे शहरों के एयरपोर्ट पर निर्भरता कम हो सकती है।

    ई-गेट से होगी यात्रियों की क्लीयरेंस
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरपोर्ट पर यात्रियों की क्लीयरेंस प्रक्रिया ई-गेट के माध्यम से पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए इमीग्रेशन और कस्टम विभाग के कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी।

    एयरपोर्ट को कस्टम दर्जा मिलने के बाद लाउंज के पास नया इंटरनेशनल विंग तैयार किया गया है। इस विंग में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच, क्लीयरेंस और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए आठ काउंटर स्थापित किए गए हैं।

    अयोध्या, शारजाह और बैंकॉक से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
    भोपाल से अयोध्या और शारजाह तथा इंदौर से बैंकॉक की सीधी उड़ान शुरू होने पर प्रदेश की धार्मिक, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को विस्तार मिलेगा। खासतौर पर भोपाल से शारजाह और इंदौर से बैंकॉक की उड़ानें प्रदेश के यात्रियों को विदेश यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएंगी।

     

  • भोपाल का नया मास्टर प्लान आया, मॉल-शोरूम पर रोक; 27% होगा ग्रीन एरिया

    भोपाल का नया मास्टर प्लान आया, मॉल-शोरूम पर रोक; 27% होगा ग्रीन एरिया

    भोपाल
     राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित महानगर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) का मसौदा जारी कर दिया है। करीब 21 साल की देरी से आए इस प्रारूप में शहर की 45 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार किया गया है।

    नए मास्टर प्लान में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब आवासीय इलाकों में शोरूम और शॉपिंग मॉल जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। वहीं, शहर में हरित क्षेत्र को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।भोपाल के मास्टर प्लान 2047 का प्रारूप आखिरकार जारी हो गया है। पिछला मास्टर प्लान 1995 में बना था और उसकी योजना अवधि 2005 तक थी। इसके बाद नया प्लान लागू नहीं हो सका। यानी कानूनी तौर पर तय ही नहीं था कि शहर के किस हिस्से में क्या बन सकता है। 

    विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल भी बढ़ाकर 61,017.02 हेक्टेयर कर दिया गया है। वर्ष 2005 की विकास योजना में यह क्षेत्रफल 25,351 हेक्टेयर प्रस्तावित था। यानी नए प्रारूप में विकास योग्य क्षेत्र करीब ढाई गुना हो गया है।

    1016 वर्ग किमी में फैलेगा निवेश क्षेत्र, 254 गांव होंगे शामिल
    मास्टर प्लान के नए प्रारूप में निवेश क्षेत्र का बड़ा विस्तार किया गया है। इसे बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर तक करने का प्रस्ताव है, जिसमें 254 गांव शामिल होंगे। इसके साथ ही शहर के विकास को गति देने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर और असीमित एफएआर का प्रावधान भी किया गया है।

    मास्टर प्लान के मसौदे पर अगले 30 दिनों तक आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से दावे-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इन पर विचार के बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

    21 साल की देरी से बढ़ी थीं विकास संबंधी जटिलताएं
    भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित था। इस देरी के कारण शहर में निर्माण, भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कई तरह की जटिलताएं पैदा हुईं। इस मुद्दे को लेकर दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया' ने अभियान चलाकर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की तो विवाद बढ़ गया। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मास्टर प्लान लाने की बात कही थी। अब मसौदा जारी होने के बाद शहर के विकास को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद है।

    सड़क की चौड़ाई तय करेगी व्यावसायिक गतिविधियां
        – 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकेंगी। ऐसे क्षेत्र में केवल डाक्टर, वकील, सीए, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, मैनेजमेंट प्रोफेशनल जैसी पेशेवर गतिविधियां ही सिर्फ एक मंजिल तक चलाई जा सकेंगी।

        – 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क पर भी शोरूम, होटल-कैफे नहीं खुलेंगे। यहां सिर्फ बैंक एटीएम, स्टेशनरी, मेडिकल आदि संचालित किए जा सकेंगे।

        – 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर नर्सिंग होम, सीमित क्षमता वाले रेस्टोरेंट, होटल-कैफे, कोचिंग संस्थान और शोरूम का संचालन किया जा सके।

        – 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर शापिंग काम्प्लेक्स संचालित किया जा सकेगा।

    हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर, व्यवस्थित विकास की तैयारी
    भोपाल विकास योजना-2047 में शहर के पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विस्तार को प्रमुखता दी गई है। हरित क्षेत्र को 12 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। निवेश क्षेत्र के विस्तार, नए ग्रोथ कॉरिडोर और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सड़क की चौड़ाई के आधार पर नियम तय होने से शहर के विकास को व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना है।

    मसौदे पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मास्टर प्लान सामने आएगा। इसके बाद ही प्रस्तावित प्रावधानों के अंतिम स्वरूप और उनके क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी।

    पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बड़ा बदलाव 51 किलोमीटर के 'ग्रोथ कॉरिडोर' से आएगा, जो शहर को एयरपोर्ट और बाहरी इलाकों से जोड़ेगा।

        इस पर BRT यानी सिर्फ बसों के लिए रिजर्व लेन बनेगी, ताकि बसें जाम में न फंसें।
        भविष्य में इसे मेट्रो जैसी सेवा में भी बदला जा सकता है।
        इसके इर्द-गिर्द 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) का कॉन्सेप्ट लगेगा यानी जहां बस या मेट्रो जैसी सुविधा होगी, वहीं आसपास घर, दफ्तर और बाकी जरूरी सुविधाएं भी पास-पास बसाई जाएंगी।
        यह सिर्फ आने-जाने की सड़क नहीं होगी, इसके आसपास होटल, अस्पताल, IT-AI-डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक बाजार, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और शिक्षा संस्थान भी विकसित होंगे।
        पूरे शहर की निगरानी के लिए 'डिजिटल ट्विन सिटी' सिस्टम भी बनेगा, यानी शहर का डिजिटल नक्शा बनाकर अवैध निर्माण या जाम जैसी समस्याएं समय रहते पकड़ी जा सकेंगी।

    18 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो गाड़ी रिपेयर शॉप, शोरूम, ऑडिटोरियम (100 सीट तक), कॉल सेंटर जैसी बड़ी गतिविधियां भी शुरू हो सकती हैं।

    यानी अगर आपका घर संकरी गली में है, तो आसपास सीमित सुविधाएं ही आएंगी। चौड़ी सड़क पर है, तो रोजमर्रा की जरूरत की हर चीज घर के पास मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। नए आवासीय इलाकों को शुरू से ही इसी सोच के साथ बसाने का प्रस्ताव है, ताकि स्कूल, दुकान, स्वास्थ्य सुविधा और पार्किंग घर के पास ही मिले।

    अगर आप पुराने शहर में रहते हैं और ऊंचाई-सीमा के चलते नई मंजिल नहीं जोड़ पा रहे, तो सरकार आपको 'हेरिटेज TDR' नाम का एक प्रमाणपत्र देगी। यह असल में एक निर्माण करने का हक है, जिसे आप बेच सकते हैं। अगर आप किसी पुरानी अपार्टमेंट सोसाइटी में रहते हैं और 70% पड़ोसी पुनर्विकास के लिए राजी हों, तो पूरी बिल्डिंग तोड़कर नई बनवाना अब कानूनी तौर पर आसान होगा।

    यह समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल का रोडमैप

        राजधानी की यह विकास योजना (मास्टर प्लान) भोपाल की प्राकृतिक धरोहर- भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। इसमें हरित टीडीआर का बेहतर प्रविधान किया गया है, इससे हरित क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों की क्षतिपूर्ति के साथ विकासकर्ताओं को टीडीआर के जरिये अतिरिक्त विकास की सुविधा भी मिल सकेगी। समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल के संकल्प की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रारूप पर नागरिकगण अपनी आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।

        – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश