Category: मध्य प्रदेश

  • भोपाल NITTTR में जागरूकता दौड़ आयोजित, युवाओं ने नशामुक्ति का संदेश दिया

    भोपाल NITTTR में जागरूकता दौड़ आयोजित, युवाओं ने नशामुक्ति का संदेश दिया

     भोपाल
    NITTTR भोपाल में भारत सरकार के "नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान" के अंतर्गत आज एक भव्य जागरूकता दौड़ का आयोजन किया गया।
    इस दौड़ का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशा-मुक्त भारत के संकल्प को सुदृढ़ करना था।

    कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के माननीय निदेशक प्रोफेसर सी. सी. त्रिपाठी जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्य, अधिकारीगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि विज्ञान मंथनके अंतर्गत देशभर से NITTTR भोपाल में आए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने भी इस दौड़ में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने "नशा मुक्त युवा, विकसित भारत" के नारों के साथ दौड़ लगाकर जनमानस को नशे के विरुद्ध जागरूक किया।
    संस्थान निदेशक ने कहा कि युवा शक्ति ही देश का भविष्य है और नशा-मुक्त समाज के निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • सिल्वर मेडल जीतकर चमके MP के यामिनी और अजय बाबू, सरकार ने किया ₹25-25 लाख और नौकरी का ऐलान

    सिल्वर मेडल जीतकर चमके MP के यामिनी और अजय बाबू, सरकार ने किया ₹25-25 लाख और नौकरी का ऐलान

    भोपाल.

    ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। एक तरफ जहां भारतीय मुक्केबाजों ने 7 गोल्ड जीतकर इतिहास रचा, वहीं मध्य प्रदेश के दो होनहार खिलाड़ियों सागर की जूडो स्टार यामिनी मौर्य और भोपाल के वेटलिफ्टर अजय बाबू वल्लुरी ने रजत पदक जीतकर देश व प्रदेश का नाम रोशन किया है।

    दोनों खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता पर मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ी घोषणा की है। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का ऐलान किया है कि यामिनी और अजय बाबू ने इतिहास रचा है। राज्य सरकार की खेल नीति के तहत दोनों पदक विजेताओं को 25-25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और सरकारी विभाग में नौकरी दी जाएगी।

    किसान की बेटी यामिनी ने जूडो में लहराया परचम
    सागर जिले के एक साधारण किसान परिवार से आने वाली यामिनी मौर्य ने महिला 57 किलोग्राम वर्ग जूडो स्पर्धा के फाइनल तक का सफर तय किया। कड़े मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से हार का सामना करना पड़ा और उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
    मुश्किलों भरा सफर: यामिनी के पिता हरिओम मौर्य खेती करते हैं। आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकोच के बावजूद कोच दीपक रजक ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और परिवार को प्रशिक्षण के लिए राजी किया।
    पारिवारिक गर्व: यामिनी के चाचा श्रीनाथ मौर्य ने कहा कि यामिनी ने यह साबित कर दिया है कि अगर बेटियों को अवसर मिले, तो वे देश का सिर ऊंचा कर सकती हैं।

    महज 1 किलो से गोल्ड से चूके अजय बाबू, स्नैच में बनाया रिकॉर्ड
    पुरुषों के 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में अजय बाबू वल्लुरी ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक पर कब्जा जमाया। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले अजय के पिता भोपाल में पदस्थ हैं, जिस वजह से वे लंबे समय से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। गेम्स रिकॉर्ड बनाया: अजय ने स्नैच स्पर्धा में 149 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड कायम किया और शीर्ष पर रहे।
    रोमांचक मुकाबला: क्लीन एंड जर्क में अजय ने 181 किलोग्राम उठाकर रिकॉर्ड की बराबरी की। हालांकि, मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने अंतिम प्रयास में 184 किलोग्राम (कुल 331 किग्रा) उठाकर महज 1 किलोग्राम के अंतर से गोल्ड मेडल हासिल कर लिया।

    पदक तालिका व प्रदर्शन एक नजर में
    खिलाड़ी का नाम     खेल / स्पर्धा     हासिल पदक     उपलब्धि / विशेष प्रदर्शन
    यामिनी मौर्य     जूडो (महिला 57 किग्रा)     रजत पदक (Silver)     फाइनल तक का सफर तय किया, सागर (मप्र) की निवासी
    अजय बाबू वल्लुरी     वेटलिफ्टिंग (पुरुष 79 किग्रा)     रजत पदक (Silver)     कुल 330 किग्रा भार उठाया, स्नैच में बनाया नया गेम्स रिकॉर्ड (149 किग्रा)
    प्रमुख बिंदु

    इनाम की घोषणा: दोनों एथलीटों को 25-25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार और शासकीय सेवा।
    मुक्केबाजी का इतिहास: भारतीय बॉक्सिंग दल ने पहली बार एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में 7 स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

    सामाजिक संदेश: अभावों के बीच सागर की बेटी की सफलता प्रदेश भर के युवा एथलीटों और बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

  • MP Monsoon Update: जुलाई में बारिश का कोटा पूरा, लेकिन 42 जिलों में कम हुई बारिश; अगले 4 दिन राहत के आसार

    MP Monsoon Update: जुलाई में बारिश का कोटा पूरा, लेकिन 42 जिलों में कम हुई बारिश; अगले 4 दिन राहत के आसार

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में जुलाई के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया, लेकिन जून में कम वर्षा होने के कारण प्रदेश अब भी 13% बारिश की कमी दर्ज कर रहा है। 55 में से 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना नहीं है। वहीं मालवा-निमाड़ के कई जिलों में हालिया तेज बारिश से जलभराव, फसलों को नुकसान और SDRF को रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा।जुलाई में दो लंबे ब्रेक के बावजूद मध्य प्रदेश में बारिश का मासिक कोटा पूरा हो गया। हालांकि, जून में कम बारिश होने के कारण प्रदेश में अब तक सामान्य से 13% कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी वजह से 55 में से 42 जिलों में औसत से कम बारिश हुई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, चार दिन प्रदेश में भारी बारिश की संभावना कम है, लेकिन अगस्त में बारिश का कोटा पूरा होने की उम्मीद है।

    मालवा-निमाड़ में सबसे ज्यादा असर
    48 घंटे के दौरान इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश हुई। खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, रतलाम और धार सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई। खंडवा में लगातार बारिश से कपास और मक्का की फसलें खेतों में बिछ गईं।

    सबसे ज्यादा बारिश कहां हुई
    मौसम विभाग के मुताबिक, खरगोन के गोगावां में सबसे अधिक 7.6 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके बाद बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई।

    रतलाम में अब तक 13 इंच बारिश
    रतलाम में शनिवार सुबह से बारिश का दौर जारी है। जिले में अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। इसके चलते शहर का हनुमान ताल भर गया है। लगातार बारिश के कारण जिले में जुलाई महीने का वर्षा कोटा पूरा हो गया है।

    हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक कम बारिश हुई है। पिछले साल इसी अवधि तक जिले में करीब 22 इंच बारिश दर्ज हुई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा हुई है, यानी पिछले साल की तुलना में अब तक करीब 9 इंच कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    आज से थमेगा दौर मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में पिछले दो दिन से 3 स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। इस वजह से भारी बारिश का दौर जारी रहा, लेकिन अब यह सिस्टम कमजोर होगा और भारी बारिश का दौर थम जाएगा। मौसम विभाग ने अगले चार दिन तक कहीं भी तेज बारिश का अनुमान नहीं जताया है। हालांकि, यदि सिस्टम की एक्टिविटी जारी रही तो भारी या अति भारी बारिश होने का अनुमान भी है।

    प्रदेश में अब तक 15.4 इंच बारिश मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसत 15.4 इंच (390.3 मिमी) बारिश हुई है। हालांकि, 17.6 इंच (448.4 मिमी) पानी गिर जाना था। इस तरह 2.3 इंच यानी, 13 प्रतिशत बारिश कम हुई है। दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से में 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। लगातार बारिश होने से यह तस्वीर सुधर सकती है।

    इन 42 जिलों में औसत से कम बारिश अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, सीधी, सिंगरौली, आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, भोपाल, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा।

    वहीं, 13 जिले- मऊगंज, उमरिया, शहडोल, टीकमगढ़, खंडवा, बड़वानी, खरगोन, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, राजगढ़ और सीहोर में औसत से ज्यादा पानी गिर चुका है।

  • दिग्विजय सिंह को 14 साल बाद मिली कानूनी राहत, हाजीपुर कोर्ट ने मानहानि केस में किया बरी

    दिग्विजय सिंह को 14 साल बाद मिली कानूनी राहत, हाजीपुर कोर्ट ने मानहानि केस में किया बरी

    भोपाल
     मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को बिहार के हाजीपुर की अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने 14 साल पुराने मानहानि के मामले में उन्हें बरी कर दिया है। अवर मुख्य न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार ने मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया। दिग्विजय सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालती कार्यवाही में शामिल हुए।

    दिग्विजय सिंह की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता युवराज सुनील सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 2012 में बाबा रामदेव को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा था। उस समय हाजीपुर के भाजपा नेता प्रो. अजीत कुमार सिंह ने स्थानीय सिविल कोर्ट में दिग्विजय सिंह के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया था।

    बाबा रामदेव पर टिप्पणी को लेकर दर्ज हुआ था केस
    अधिवक्ता के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव के खिलाफ कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर उनके खिलाफ मानहानि की कार्रवाई शुरू की गई थी।

    करीब डेढ़ दशक तक चले इस मामले में अदालत ने अंतिम सुनवाई के बाद दिग्विजय सिंह को आरोपों से बरी कर दिया। फैसले के बाद उनके पक्ष की ओर से इसे महत्वपूर्ण कानूनी राहत बताया गया है।

    वीसी से सुनवाई में जुड़े दिग्विजय 
    मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल रहे। उनके अधिवक्ता ने अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि 2012 में दर्ज हुए इस मानहानि प्रकरण का अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत पटाक्षेप हो गया है।

     

  • भोपाल में युवती से फर्जी नाम से दोस्ती का आरोप, निकाह की बात पर खुला राज; पुलिस जांच में जुटी

    भोपाल में युवती से फर्जी नाम से दोस्ती का आरोप, निकाह की बात पर खुला राज; पुलिस जांच में जुटी

    भोपाल 

    सोशल मीडिया पर नाम बदलकर युवती को प्रेमजाल में फंसाने और जबरन निकाह का दबाव बनाने वाले एक जालसाज का पर्दाफाश हुआ है। इंस्टाग्राम पर खुद को ‘क्रिश जैन‘ बताने वाला लखनऊ निवासी आरोपी दिल्ली पहुंचते ही ‘जुम्मन अंसारी‘ निकला। जब आरोपी ने दिल्ली की एक मस्जिद में निकाह करने की जिद की, तब जाकर पीड़िता को उसके असली नाम और मजहब की भनक लगी। युवती के विरोध करने पर दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए हंगामे के बाद सक्रिय हुई भोपाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    निशातपुरा थाना पुलिस के अनुसार, क्षेत्र की रहने वाली युवती की करीब एक साल पहले इंस्टाग्राम पर आरोपी से पहचान हुई थी। उसने खुद को क्रिश जैन बताया और बातचीत के जरिए युवती को अपने जाल में उलझा लिया। युवती का विश्वास पक्का करने के लिए आरोपी लखनऊ से भोपाल आकर करोंद इलाके में रहने लगा और छोटा-मोटा काम करने लगा। बीते दिनों वह युवती को बहाने से करोंद चैराहे पर बुलाकर भोपाल रेलवे स्टेशन ले गया, जहां से दोनों ट्रेन पकड़कर दिल्ली पहुंच गए।

    मस्जिद पहुंचते ही टूटा भ्रम, स्टेशन पर हंगामा
    दिल्ली रेलवे स्टेशन उतरते ही आरोपी युवती को सीधे मस्जिद ले जाने लगा और निकाह करने का दबाव बनाने लगा। इस अचानक हुए मोड़ और क्रिश के जुम्मन बनने के सच से स्तब्ध युवती ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच दिल्ली स्टेशन पर ही तीखी बहस शुरू हो गई। इधर युवती के लापता होने की गुमशुदगी परिजनों ने दर्ज कराई थी, जिसके बाद जीआरपी थानों को अलर्ट मैसेज भेजा गया था।

    दिल्ली पुलिस ने जब हंगामा कर रहे युवक-युवती को पकड़ा और पूछताछ की तो वह भोपाल की निकली। इसके बाद अलर्ट मैसेज के बाद भेजी गई तस्वीर से युवकी की पहचान हुई। इसके बाद दिल्ली जीआरपी ने भोपाल पुलिस को सूचना दी और दोनों को थाने में बैठा लिया। 

    इधर, युवती के घर नहीं लौटने पर स्वजन ने गुमशुदगी दर्ज कराई। संदेह के आधार पर पुलिस को युवक और युवती के फोटो उपलब्ध कराए गए, जिन्हें विभिन्न जीआरपी थानों के साथ साझा किया गया।

    दिल्ली स्टेशन पर बोला- मस्जिद में करना होगा निकाह-दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आरोपित ने युवती से मस्जिद में निकाह करने की बात कही। इससे उसकी वास्तविक पहचान उजागर हो गई।

    युवक और युवती के बीच विवाद होने लगा। इस पर मौके पर मौजूद दिल्ली जीआरपी ने उन्हें हिरासत में लिया। पूछताछ और पुलिस के साझा किए गए फोटो के आधार पर दोनों की पहचान की।

    संगीन धाराओं में मामला दर्ज
    निशातपुरा थाना प्रभारी अनिल यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही निशातपुरा पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची और युवती को सुरक्षित भोपाल वापस लाई। पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपी जुम्मन अंसारी के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। उसे अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

     

  • MP Building Permission: NOC की बाध्यता समाप्त, अब ऑनलाइन मिलेगी मंजूरी; जानें नए नियम

    MP Building Permission: NOC की बाध्यता समाप्त, अब ऑनलाइन मिलेगी मंजूरी; जानें नए नियम

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में घर या व्यावसायिक भवन बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन (भवन अनुज्ञा) की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इस फैसले के बाद अब शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज होगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को नए निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार का उद्देश्य अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाना है।

    अब नहीं लगाने होंगे अलग-अलग विभागों के चक्कर
    अब तक भवन निर्माण की अनुमति लेने के लिए आवेदकों को हाउसिंग सोसायटी, नजूल, बिजली विभाग समेत कई कार्यालयों से अलग-अलग एनओसी प्राप्त करनी पड़ती थी। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था और लोगों को कई बार विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन मामलों में अलग-अलग एनओसी प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल होगी।

    अलग-अलग कार्यालयों से NOC लाने की जरूरत घटी
    नई व्यवस्था में सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से संबंधित कई मामलों में आवेदक को खुद NOC प्राप्त करके जमा नहीं करनी होगी। मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, विकास प्राधिकरण और रक्षा प्रतिष्ठानों से संबंधित प्रकरणों में भी जहां विभागीय राय की आवश्यकता होगी, वहां इसकी प्रक्रिया संबंधित सक्षम प्राधिकारी के स्तर से पूरी की जाएगी।

    यानी भवन निर्माण की अनुमति मांगने वाले व्यक्ति पर विभिन्न कार्यालयों में जाकर दस्तावेज जमा करने और NOC हासिल करने की जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी। आवश्यक होने पर बिल्डिंग परमिशन से जुड़ा प्रकरण संबंधित विभाग को सीधे भेजा जाएगा।

    7 दिन में भेजना होगा प्रकरण, 21 दिन में जवाब
    किसी भवन अनुमति के लिए दूसरे विभाग की सहमति जरूरी होने पर सक्षम अधिकारी को आवेदन मिलने के सात दिनों के भीतर प्रकरण उस विभाग तक भेजना होगा। इसके बाद संबंधित विभाग के पास अपनी आपत्ति या अनापत्ति दर्ज कराने के लिए 21 दिन का समय रहेगा।

    निर्धारित अवधि में संबंधित विभाग की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आने पर केवल NOC के इंतजार में बिल्डिंग परमिशन का मामला अनिश्चित समय तक नहीं रोका जाएगा। नियमानुसार अनुमति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे ऐसे मामलों में देरी कम होने की उम्मीद है, जो अलग-अलग विभागों से जवाब नहीं मिलने के कारण लंबे समय तक अटके रहते थे।

    AAI और NMA की मंजूरी हर आवेदन में नहीं
    एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), नेशनल मॉन्यूमेंट्स अथॉरिटी (NMA) और हेरिटेज क्षेत्र से संबंधित अनुमति के नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। इन संस्थाओं की NOC प्रत्येक भवन निर्माण आवेदन के साथ अनिवार्य नहीं होगी।

    ऑनलाइन GIS आधारित जांच में यदि संबंधित जमीन एयरपोर्ट, संरक्षित स्मारक या हेरिटेज से जुड़े प्रतिबंधित अथवा प्रभावित क्षेत्र के दायरे में आती है, तभी संबंधित NOC की जरूरत होगी। सामान्य क्षेत्र में स्थित भूखंडों के आवेदकों से अनावश्यक रूप से ऐसी अनुमति नहीं मांगी जाएगी।

    डिजिटल दस्तावेजों पर होगी पूरी प्रक्रिया
    नई व्यवस्था में भवन अनुज्ञा सिस्टम को पेपरलेस बनाने पर भी जोर दिया गया है। आवेदन और उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा होंगे। इससे आवेदन की स्थिति डिजिटल रूप से ट्रैक की जा सकेगी और फाइलों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचाने की पुरानी प्रक्रिया कम होगी।

    ऑनलाइन सिस्टम के जरिए संबंधित अधिकारी आवेदन और दस्तावेजों की जांच करेंगे। सरकार का उद्देश्य बिल्डिंग परमिशन में लगने वाला समय घटाने के साथ प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना भी है।

    पर्यावरण मंजूरी भी तय प्रोजेक्ट में जरूरी
    पर्यावरणीय अनुमति के नियम भवन और परियोजना के निर्धारित क्षेत्रफल के आधार पर लागू होंगे। हर छोटे निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। जो परियोजनाएं निर्धारित सीमा या श्रेणी के अंतर्गत आएंगी, उन्हीं पर संबंधित पर्यावरण नियम लागू किए जाएंगे।

    इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति केवल उन मामलों में जरूरी होगी, जहां निर्माण के लिए वास्तव में पेड़ काटने की आवश्यकता हो। भूखंड पर पेड़ नहीं होने या निर्माण से पेड़ प्रभावित नहीं होने की स्थिति में इसकी अनावश्यक अनुमति नहीं मांगी जाएगी।

    फायर सेफ्टी के नियम रहेंगे लागू
    भवनों की अग्नि सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों में छूट नहीं दी गई है। जिन भवनों के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता और लागू नियमों के अनुसार फायर NOC जरूरी है, वहां यह व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी। भवन की ऊंचाई, उपयोग और श्रेणी समेत निर्धारित मानकों के आधार पर अग्निशमन संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना होगा।

    पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
    सरकार ने भवन अनुमति प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। अब आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन तक अधिकांश कार्य डिजिटल माध्यम से किए जाएंगे। इसके तहत केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। इससे कागजी कार्यवाही कम होगी और आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी।

    समय की बचत के साथ बढ़ेगी पारदर्शिता
    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से भवन निर्माण अनुमति मिलने में लगने वाला समय कम हो सकता है। साथ ही अलग-अलग विभागों में फाइलों के लंबित रहने की समस्या भी घटेगी। डिजिटल व्यवस्था से आवेदक अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    कई विभागों की NOC से मिली राहत
    नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

    यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

    किन लोगों को मिलेगा फायदा?

    सरकार के इस फैसले का लाभ मुख्य रूप से—

        शहरी क्षेत्रों में घर बनाने वाले लोगों को
        आवासीय भवन निर्माण कराने वालों को
        व्यावसायिक भवन परियोजनाओं के आवेदकों को
        बिल्डर और डेवलपर्स को मिल सकता है।

    हालांकि, जिन मामलों में किसी विशेष कानून या सुरक्षा मानक के तहत अलग अनुमति आवश्यक होगी, वहां संबंधित नियम लागू रहेंगे।

    सरकार का क्या है उद्देश्य?
    राज्य सरकार का कहना है कि भवन निर्माण अनुमति की प्रक्रिया को आसान बनाकर नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना और 'ई-गवर्नेंस' को बढ़ावा देना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। साथ ही इससे शहरी विकास परियोजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।

        मध्य प्रदेश सरकार ने कई विभागों की NOC की अनिवार्यता समाप्त की।
        भवन अनुमति प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
        केवल डिजिटल दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे।
        अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
        नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए।

     

  • CM डॉ. यादव बोले- भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव मिला सर्वोच्च सम्मान, गुरु पूर्णिमा पर दिया प्रेरक संदेश

    CM डॉ. यादव बोले- भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव मिला सर्वोच्च सम्मान, गुरु पूर्णिमा पर दिया प्रेरक संदेश

    भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव उच्च स्थान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मंदसौर में आयोजित कार्यक्रम में वीसी से हुए शामिल

    भोपाल :

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। गुरु की महिमा अपार है गुरुओं के प्रति हम सदैव कृतज्ञ रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मंदसौर में आयोजित गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में गुरुओं की गौरवशाली परंपरा रही है। आदि शंकराचार्य, वेदव्यास जी जैसे गुरुओं के माध्यम से हमारी संस्कृति में शिक्षा के साथ प्रेम भक्ति दया करुणा अनुशासन आदि संस्कार पुष्पित पल्लवित हुए हैं। गुरु की गादी से ही चरित्र निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि उज्जैन के सांदीपनि आश्रम की महता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश में संचालित किये जा रहे सांदीपनि स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में देश में सर्वश्रेष्ठ स्थान बनाए हुए हैं अब प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थी भी सांदीपनि विद्यालयों की ओर आ रहे हैं। प्रदेश में 25 हजार करोड रुपए राशि के प्रावधान के साथ स्थान पर सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदसौर कार्यक्रम में उपस्थित गुरु पंडित भीमाशंकर शास्त्री जी के गौ संरक्षण कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए उनके संकल्प के लिये बधाई दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे अवसर मिलते ही आगामी दिनों मंदसौर आएंगे। श्रावण मास के दौरान धूमधाम से भगवान की सवारी आयोजित की जाएगी। सवारी के दौरान पुलिस बैंड की भी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरू पुर्णिमा की सभी को बधाई भी दी।

    मंदसौर कृषि मंडी प्रांगण में इस अवसर पर गुरुदेव पंडित भीमाशंकर शास्त्री जी, विधायक विपिन जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दूर्गा विजय पाटीदार, पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया, पूर्व मंत्री नरेन्द्र नाहटा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, महेन्द्र गुर्जर, कलेक्टर दिव्यांक सिंह, पुलिस अधिक्षक विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल एवं भक्तगण एवं शिष्यगण उपस्थित थे।

     

  • भोपाल किसान प्रोटेस्ट समाप्त, मूंग खरीदी पर सरकार के बड़े आश्वासन से खत्म हुआ गतिरोध

    भोपाल किसान प्रोटेस्ट समाप्त, मूंग खरीदी पर सरकार के बड़े आश्वासन से खत्म हुआ गतिरोध

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में मूंग खरीद पर सरकार और किसानों के बीच बात नहीं बन पाई. इसके बाद देर रात किसानों ने अपना प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया. इससे पहले बुधवार रात MP सरकार और किसानों के बीच 3 घंटे तक बैठक चली थी. इसमें सरकार के 25% की जगह 60% मूंग खरीदी का फैसला किया था। 

    बैठक में मौजूद किसानों ने इसपर संतुष्टि भी जताई थी. लेकिन थोड़ी बार आधिकारिक बयान में सहमति नहीं बनने की बात कही. ऐलान के बाद प्रदर्शनकारी किसान और पुलिस आमने-सामने भी आ गई. वहां हल्की झड़प भी हुई. पुलिस ने लाउडस्पीकर से किसानों से शांति बनाए रखने की अपील करती दिखी। 

    किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा के बाद MP सरकार का बयान भी आया है. इसमें बताया गया था कि मध्यप्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि अब हर पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है. इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है। 

    सरकार ने किसानों से बातचीत के लिए बनाई थी समिति
    बताते चलें कि किसानों के आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार ने कमेटी का गठन किया था. किसानों से बातचीत के लिए समिति बनाई गई थी. मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री कृष्णा गौर और राकेश सिंह को समिति का सदस्य बनाया गया. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार किसानों के साथ हमेशा खड़ी हुई है. जनता को दिक्कत न आए, इसके लिए भी दोनों पक्षों को चिंता करनी चाहिए. सभी किसान संगठन मिलकर समस्या का हल निकालेंगे। 

    किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया था. कहा गया था कि अब किसान 30 जुलाई की जगह 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। 

    इसी तरह उपार्जन की आखिरी तारीख भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की गई थी. साथ ही खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की गई थी। 
    राज्य के कृषि और किसान कल्याण मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया है. यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं पेश करेगी. समिति की अनुशंसाओं के आधार पर जरूरी सुधार तत्काल किए जाएंगे. सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है। 

    सरकार के फैसले से किसान सहमत नहीं
    भारतीय किसान यूनियन के संतोष बटवारे ने कहा, हमने किसानों के सामने अपनी बात रखी, लेकिन वे सहमत नहीं हुए, इसलिए विरोध-प्रदर्शन जारी है. स्थिति यह है कि सरकार को किसानों के हित में फैसला लेना चाहिए. अगर किसानों के पास लगभग 4 से 6.5 क्विंटल उपज बचती है, तो उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भी लगभग 2,800 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है. हमने समझौता करने की कोशिश की और कम से कम 10,000–12,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे का प्रस्ताव रखा, लेकिन सरकार सहमत नहीं हुई। 

    किसान सुबोध राय ने कहा, हमारी मांग मूंग की 100% खरीद की थी, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना. वे केवल 60% खरीद के लिए सहमत हुए हैं. टोकन सिस्टम को तुरंत हटा दिया गया है, लेकिन हम इसे किसानों को शांत करने और विरोध खत्म करने का सिर्फ एक अस्थायी उपाय मानते हैं. लगभग 19 किसान संगठन एक साथ आ रहे हैं और बातचीत के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. हम 100% खरीद की अपनी मांग पर अडिग हैं। 

    विरोध-प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक किसान बोले, बातचीत प्रति एकड़ 3 क्विंटल के बारे में हुई है और किसानों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही हम तय करेंगे कि प्रस्ताव स्वीकार करना है या नहीं. मैं राष्ट्रीय किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष भी हूं और किसानों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां गया था. हम अगला कदम तभी उठाएंगे जब किसान सहमत होंगे… सरकार 3 क्विंटल पर सहमत हो गई है और अगर हमारे साथी किसान इससे संतुष्ट हैं, तो हम इसे स्वीकार कर लेंगे; वरना, हम अपनी मांग पर अड़े रहेंगे। 

     भोपाल में किसानों के प्रदर्शन की वजह?
    – ⁠सरकार ने प्रति एकड़ केवल 1 क्विंटल 20 किलो मूंग ही समर्थन मूल्य MSP पर खरीदने की सीमा तय की है, जबकि किसानों के मुताबिक 1 एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल मूंग की उपज होती है.
    – ⁠किसानों के मुताबिक सरकार प्रति क्विंटल 8668 रुपये की दर से केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही खरीद रही
    – ⁠बची हुई 3 से 4 क्विंटल मूंग किसानों को खुले बाजार (मंडी) में मजबूरीवश 4000 से 5500 रुपये प्रति क्विंटल के कम दाम पर बेचनी पड़ रही
    – ⁠इससे किसानों को प्रति क्विंटल 3000 से 4000 रुपये तक का सीधा नुकसान हो रहा है. 

    कांग्रेस ने सरकार को घेरा
    किसान आंदोलन और सरकार द्वारा कमेटी बनाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेशभर से भोपाल पहुंचे हजारों किसान भाई शांतिपूर्वक अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन अहंकार में डूबी सरकार सुनने को तैयार नहीं है. मुख्यमंत्री जी कमेटी बनाकर समय टालने से समाधान नहीं होगा. किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए. प्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की गारंटी मिले. खाद वितरण की बदहाल व्यवस्था में तुरंत सुधार हो. किसानों से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का ठोस समाधान किया जाए. लोकतंत्र में पदयात्रा करना अपराध नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है. सरकार अहंकार से नहीं संवाद और संवेदनशीलता से चलती है. मध्य प्रदेश कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी हर जायज मांग का पूरा समर्थन करती है। 

  • MP में MSP को लेकर किसानों का हल्ला बोल, भोपाल की सड़कों पर आंदोलन तेज; CM हाउस घेराव की चेतावनी

    MP में MSP को लेकर किसानों का हल्ला बोल, भोपाल की सड़कों पर आंदोलन तेज; CM हाउस घेराव की चेतावनी

    भोपाल
     एमपी में मूंग खरीदी और अन्य मांगों को लेकर प्रदेशभर से पहुंचे किसानों का प्रदर्शन भोपाल में जारी है. किसान सावरकर सेतु के पास डटे हुए हैं और मुख्यमंत्री निवास तक मार्च की तैयारी कर रहे हैं. उनकी प्रमुख मांगें 100% मूंग खरीदी, खाद की व्यवस्था और भावांतर योजना से जुड़ी समस्याओं का समाधान है. बड़ी संख्या में किसान बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के पास नर्मदापुरम रोड पर इक्ठ्टा होकर अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं. किसानों के मुताबिक, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 

    स्कूलों में छुट्टी

     मोहन यादव की सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखी है। तो वहीं किसान सीएम आवास तक मार्च करने की तैयारी में हैं। इसके अलावा प्रभावित इलाकों के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है।

    किसानों की मुख्य मांग 100 प्रतिशत मूंग की सरकारी खरीदी और खाद के लिए ई-टोकन व्यवस्था को आसान बनाना है. इसके अलावा किसान खाद-बीज की समस्या और भावांतर योजना को लेकर भी सरकार से समाधान की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि मूंग खरीदी में किसी भी किसान को परेशानी नहीं होनी चाहिए और सभी किसानों की उपज सरकार को खरीदनी चाहिए। 

    अलग-अलग जिलों से आए किसान
    इस अंदोलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से किसान पहले ही भोपाल पहुंच गए थे. किसानों ने आंदोलन वाली जगह पर रात भी गुजारी और देर रात वहीं खाना बनाकर खाना भी किया. किसानों का कहना है कि वे पूरी तैयारी के साथ राशन-पानी लेकर पहुंचे हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन से नहीं हटेंगे। 

    किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. मुख्यमंत्री निवास और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई जगह बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में बसों की व्यवस्था कर रास्तों को भी कंट्रोल्ड किया जा रहा है। 

    किसानों के आंदोलन पर ताजा अपडेट के लिए पेज रिफ्रेश करें:
    – भोपाल में प्रदर्शन कर रहे एक किसान ने कहा कि किसान मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकले हैं. उन्होंने कहा कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें हर स्तर पर रोकने की कोशिश की और आगे बढ़ने से रोककर उनके साथ अन्याय किया. किसान ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में मूंग की 100 फीसदी खरीद और ई-टोकन व्यवस्था को खत्म करना शामिल है। 

    – भोपाल में प्रदर्शन कर रहे एक किसान ने कहा कि उनकी मांग है कि मूंग की 100 फीसदी फसल की खरीद की जाए और ई-टोकन व्यवस्था को या तो सही तरीके से लागू किया जाए या फिर पूरी तरह खत्म किया जाए. किसान ने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक वे भोपाल में ही डटे रहेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है और उम्मीद कर रही है कि किसान कोई गड़बड़ी करें ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके. किसान ने कहा कि उनका सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या किसी प्रशासनिक अधिकारी को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने सरकार से अपील की कि उन्हें हर कदम पर न रोका जाए, क्योंकि वे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें मनवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 

    – मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखी चिट्ठी में बताया है कि राज्य में 14 मई से 3 जुलाई 2026 के बीच करीब 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ है, जबकि फिलहाल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया गया है. उनका कहना है कि मौजूदा लक्ष्य के कारण बड़ी संख्या में किसान MSP का लाभ नहीं ले पाएंगे.

    – करीब 2,000 किसान अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और एक सप्ताह तक चलने वाला राशन लेकर भोपाल पहुंच चुके हैं. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले दर्जनों किसान संगठनों का यह मार्च पुलिस की कई बैरिकेडिंग पार करते हुए राजधानी के बाहरी इलाके तक पहुंचा. किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक मूंग की 100 फीसदी MSP पर खरीद और खाद वितरण से जुड़ी उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे भोपाल से वापस नहीं लौटेंगे। 

    बैरिकेडिंग के बावजूद आगे बढ़े किसान
    मंगलवार रात किसान भोपाल के बाहरी इलाकों तक पहुंच गए, जहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे. राजधानी में किसानों की मौजूदगी के साथ यह आंदोलन मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार के सामने इस साल की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक बनता नजर आ रहा है। 

    मुख्यमंत्री निवास का घेराव
    प्रशासन की कोशिश है कि स्थिति कंट्रोल में रहे, वहीं किसान आज मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की तैयारी में हैं. किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे। 

    किसान आंदोलन के कारण भोपाल-नर्मदापुरम और मंडीदीप रोड पर यातायात पर काफी असर हुआ है. रोड बंद होने से ऑफिस जाने वाले लोगों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और किसानों से बातचीत के प्रयास किए जा रहे हैं। 

    MP का देश के उत्पादन में 40% हिस्सा
    चिट्ठी में कृषि मंत्री ने यह भी जिक्र किया है कि मध्य प्रदेश देश के कुल मूंग उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है. ऐसे में किसानों के हितों को देखते हुए केंद्र सरकार को खरीद सीमा बढ़ाने पर विशेष निर्णय लेना चाहिए. गौरतलब है कि बीती रात राज्य कृषि मंत्री और किसानों के बीच एक घंटे बातचीत हुई लेकिन बेनतीजा रही थी। 

    किसानों से मिले कृषि मंत्री
    इससे पहले मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात की. उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि मूंग खरीदी समेत सभी मुद्दों पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। 

    किसानों की प्रमुख मांगें
    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन की प्रमुख मांगों में मूंग की 100 फीसदी MSP पर खरीद, ई-टोकन व्यवस्था की समस्याओं का समाधान और समय पर उचित दर पर खाद उपलब्ध कराना शामिल है. किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 

    चिट्ठी में और क्या कहा गया?
    कृषि मंत्री ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि इस साल औसत उत्पादकता बढ़ने से मूंग का उत्पादन अनुमान से अधिक हुआ है. ऐसे में राज्य सरकार ने केंद्र से खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 8 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके. उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 4.19 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो चुकी है और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए तय लक्ष्य जल्द पूरा होने की संभावना है। 

  • प्रशासनिक बदलाव: MP में 8 IAS अधिकारियों के तबादले, 3 जिलों के कलेक्टर बदले

    प्रशासनिक बदलाव: MP में 8 IAS अधिकारियों के तबादले, 3 जिलों के कलेक्टर बदले

    भोपाल
     मध्य प्रदेश के नए प्रशासनिक मुखिया अशोक वर्णवाल मुख्य सचिव पद को संभालने के बाद अब अपनी प्रशासनिक जमावट कर रहे हैं. राज्य शासन ने अब तीन जिलों के कलेक्टरों सहित 8 आईएएस अधिकारियों की नई पद स्थापना की है. राज्य शासन ने छतरपुर, बालाघाट और शहडोल जिले के कलेक्टरों को बदल दिया है. ग्वालियर में अपर कलेक्टर और 2017 बैच के आईएएस कुमार सत्यम को बालाघाट जिले की कमान सौंपी गई है। 

    बदले गए इन जिलों के कलेक्टर

        सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक छतरपुर जिले के कलेक्टर पार्थ जायसवाल को अब शहडोल जिले की कमान सौंपी गई है. पार्थ जायसवाल 2015 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। 

        बालाघाट जिले की कलेक्टर 2015 बैच की मृणाल मीणा को छतरपुर जिले का कलेक्टर बनाया गया है। 

        रतलाम जिले की कलेक्टर और 2016 बैच की आईएएस मिशा सिंह को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में अपर आयुक्त बनाया गया है। 

        उधर ग्वालियर में अपर कलेक्टर और 2017 बैच के आईएएस कुमार सत्यम को बालाघाट जिले का कलेक्टर बनाया गया है। 

    इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

    2011 बैच के आइएएस दिनेश जैन को नई जिम्मेदारी दी गई है. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अपर सचिव की भूमिका संभाल रहे दिनेश जैन को खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का आयुक्त बनाया गया है. इसके अलावा उन्हें खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का अपर सचिव पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

    2011 बैच के आईएएस गिरीश शर्मा अभी तक परियोजना संचालक, मध्य प्रदेश स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, भोपाल तथा अपर सचिव, मध्य प्रदेश शासन, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड तथा संचालक, रोजगार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. अब उनसे अतिरिक्त प्रभार और स्किल डेवलपमेंट का काम वापस लिया गया है. अब वे तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के अपर सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। 

    2014 बैच के आईएएस अंकित अस्थाना अभी तक औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग उप सचिव और अपर प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल का अतिरिक्त प्रभार के रूप में काम देख रहे थे. अब उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव और कर्मचारी चयन मंडल में संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 

    2015 बैच की आईएएस और मंदसौर कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रही अदिति गर्ग को मध्य प्रदेश स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, भोपाल में परियोजना संचालक की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा वे मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड में सीईओ का काम भी देखेंगी. उन्हें ग्लोबल स्किल पार्क के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। 

    वहीं, अपर सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास दिनेश जैन को आयुक्त सह संचालक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण बनाया गया है। परियोजना संचालक स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट गिरीश शर्मा अब अपर सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार होंगे।

    अजय कटेसरिया को रतलाम कलेक्टर बनाए जाने से रिक्त हुए संचालक कर्मचारी चयन मंडल के पद का अतिरिक्त प्रभार उप सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन अंकित अस्थाना को दिया है। वह उप सचिव सामान्य प्रशासन भी रहेंगे।

    आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी स्वरोचिष सोमवंशी को राज्य योजना आयोग के सदस्य सचिव के साथ संचालक अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान का अतिरिक्त प्रभार दिया है। इनके कार्यभार ग्रहण करने पर ऋषि गर्ग इन दायित्वों से मुक्त होंगे।