Category: मध्य प्रदेश

  • इंदौर के व्यस्त रेडिसन चौराहे पर बनेगा 4-लेन फ्लाईओवर, 60 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी

    इंदौर के व्यस्त रेडिसन चौराहे पर बनेगा 4-लेन फ्लाईओवर, 60 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी

    इंदौर 

     इंदौर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक रेडिसन चौराहे पर अकसर लगे रहने वाले ट्रैफिक जाम के हालात और जबाव को नियंत्रित करने के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने 60 करोड़ रुपए की लागत से 4-लेन का नया फ्लाईओवर प्लान तैयार किया है। इससे चौराहे के ट्रैफिक में 40 से 45 फीसदी तक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अनुमान के मुताबिक, करीब 60 करोड़ रुपए में बनने वाले इस फ्लाईओवर की कुल लंबाई 596 मीटर और चौड़ाई 15 से 16 मीटर होगी। चौराहे पर 70 मीटर चौड़ा स्टील गर्डर (बो-स्ट्रिंग) स्पैन तैयार किया जाएगा। ये फ्लाईओवर एमआर-10 पर विजय नगर से स्टार चौराहे की तरफ जाने वाले रास्ते पर मेट्रो ट्रैक के एक तरफ बनाया जाएगा। मौजूदा समय में रेडिसन चौराहे से रोजाना पौने दो लाख से ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं। भविष्य में ये दबाव और अदिक बढ़ जाएगा। ऐसे में नए प्लान से पीक आवर्स में जाम के हालातों से मुक्ति मिल सकेगी।

    ये है नया ट्रैफिक प्लान

    विजय नगर की तरफ बनने वाली फ्लाईओवर की भुजा मेट्रो ट्रैक के बाईं तरफ रहेगी। चौराहे से करीब 200 मीटर आगे ये मेट्रो ट्रैक के तीन पिलर के बीच से गुजरते हुए मुख्य मार्ग (कैरेज वे) में मिल जाएगा। वहीं, स्टार चौराहे की तरफ वाली भुजा एमआर-10 के सेंटर में उतरकर दो-दो लेन में बंट जाएगी।

    ग्रीन बेल्ट का होगा इस्तेमाल
    सड़क चौड़ीकरण के लिए विजय नगर से रेडिसन की तरफ स्थित 300 मीटर लंबे ग्रीन बेल्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे विजय नगर से खजराना और निपानिया जाने वाले वाहनों को नीचे बनी 3-लेन सड़क से निकाला जा सकेग। जबकि बायपास जाने वाली गाड़ियां ब्रिज के ऊपर से गुजर जाएंगी। ब्रिज के नीचे 10 से 12 मीटर की सड़क भी उपलब्ध रहेगी।

    खास डिजाइन का कारण
    बायपास के साथ साथ एमआर-10 क्रॉसिंग पर एनएचएआई का काम पूरा होने के साथ कुमेड़ी आईएसबीटी के चालू होने से भोपाल मार्ग की बसों के साथ-साथ अन्य वाहनों के कारण रेडिसन पर 20 से 30 फीसदी अतिरिक्त ट्रैफिक बढ़ने की उम्मीद है। खजराना चौराहे के पास मेट्रो स्टेशन की एंट्री-एग्जिट और 11 मीटर ऊंची मेट्रो लाइन की वजह से रिंग रोड के बराबर ब्रिज बनाना संभव नहीं था। वहीं, जमीन के नीचे 1200 एमएम व्यास की मुख्य ड्रेनेज लाइन और गैस पाइपलाइन बिछी है, जिसके चलते एमआर-10 पर अंडरपास निर्माण भी तकनीकी रूप से किया जाना संभव नहीं था। इसलिए इस खास डिजाइन के तहत निर्माण किया जा रहा है।

  • इंदौर में 50 हजार नोटरी संपत्तियों का होगा सर्वे, 50 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने की तैयारी

    इंदौर में 50 हजार नोटरी संपत्तियों का होगा सर्वे, 50 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने की तैयारी

     इंदौर
    राजस्व में बढ़ोतरी के लिए अब नगर निगम शहर में नोटरी वाली संपत्तियों के संपत्तिकर खाते खोलेगा। महापौर परिषद से हरी झंडी मिलने के बाद नगर निगम ने बिल कलेक्टरों को इन संपत्तियों का पता लगाकर खाते खोलने की जिम्मेदारी सौंपी है। निगम को उम्मीद है कि शहर में कम से कम 50 हजार ऐसी संपत्तियां हैं, जो नोटरी पर हैं और जिनके संपत्तिकर खाते अब तक नहीं खुले हैं।

    इन संपत्तियों के नए खाते खोले जाने पर निगम को 50 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि नोटरी वाली नई संपत्तियों के संपत्तिकर खाते में कर की गणना वर्ष 2000 से की जाएगी।

    शहर में 500 कॉलोनियां नोटरी पर
    नगर निगम में दो वर्ष पहले तक नोटरी वाली संपत्तियों के भी खाते खोलकर संपत्तिकर वसूला जाता था, लेकिन इसके बाद नोटरी वाली संपत्तियों के नए खाते खोलने पर रोक लगा दी गई। जिन संपत्तियों के खाते पूर्व में खोले जा चुके थे, उनसे जरूर अब भी कर वसूला जा रहा है।

    दो वर्ष से नोटरी वाली संपत्तियों के नए खाते नहीं खुलने का असर यह हुआ कि नोटरी वाली संपत्तियां तो बढ़ गईं, लेकिन निगम के खाते में अतिरिक्त राजस्व नहीं आया।

    आर्थिक तंगी से गुजर रहे नगर निगम ने अब नोटरी वाली नई संपत्तियों के खाते खोलने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि शहर में कम से कम 500 कालोनियां हैं, जहां आज भी नोटरी पर संपत्तियों का व्यवहार हो रहा है।

    वर्ष 2000 से ही होगी कर की गणना
    निगम सीमा में स्थित नोटरी वाली संपत्तियों के खाते भले ही नए खोले जाएंगे, लेकिन कर की गणना वर्ष 2000 से की जाएगी। अगर संपत्ति निगम सीमा में वर्ष 2014 के बाद शामिल हुए 29 गांवों में आती है तो गणना वर्ष 2014 से की जाएगी।

    खाता खोलने के लिए ये दस्तावेज लगेंगे
    संपत्तिकर का नया खाता खोलने के लिए संपत्ति स्वामी का आधार कार्ड, बिजली का बिल, शपथ पत्र, गूगल मैप से संपत्ति की लोकेशन और नोटरी की सत्यापित प्रति प्रस्तुत करना होगी। बिल कलेक्टर अपने-अपने जोन क्षेत्रों में ऐसी संपत्तियों की जानकारी जुटाकर सूची तैयार करेंगे।

    पहले चरण में निगम जोनवार शिविर लगाकर लोगों को स्वयं खाता खुलवाने के लिए प्रेरित करेगा। दूसरे चरण में ऐसी संपत्तियों को चिह्नित किया जाएगा, जिनके स्वामियों ने मौका दिए जाने के बावजूद खाता नहीं खुलवाया है। निगम ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई करेगा।

    संपत्तियों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं
        नोटरी वाली ऐसी संपत्तियां, जिनके संपत्तिकर खाते अब तक नहीं खुले हैं, उन्हें चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि ऐसी 50 हजार के लगभग संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों के खाते खुलने से निगम को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। अगले वर्ष से ये खाते नियमित हो जाएंगे। – निरंजन सिंह चौहान, राजस्व प्रभारी, नगर निगम इंदौर

     

  • भाइयों की कलाई पर सजेगी बुरहानपुर की खास राखी, केले के रेशे से बनी राखियों के विदेशों से भी ऑर्डर

    भाइयों की कलाई पर सजेगी बुरहानपुर की खास राखी, केले के रेशे से बनी राखियों के विदेशों से भी ऑर्डर

    बुरहानपुर
     आज यानि मंगलवार से तीन दिन बाद भाई-बहनों का त्योहार रक्षाबंधन है. राखी के त्योहार को देखते हुए बाजार सज गए हैं, वहीं अलग-अलग प्रकार और डिजाइन की राखियां बनाई जा रही है. जिसकी डिमांड भी बाजार में है. इसी तरह 'मेड इन बुरहानपुर' राखियों ने राजधानी भोपाल समेत लंदन तक धूम मचाई है. मोहम्मदपुरा स्थित RSETI प्रशिक्षण केंद्र से स्व सहायता समूह की 30 महिलाओं ने प्रशिक्षण हासिल किया, उन्होंने केले के रेशे से विभिन्न उत्पाद बनाने की कला सीखी, रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए खूबसूरत इको फ्रेंडली राखियां तैयार करना शुरू किया। 

    महिलाएं राखियों सहित कई तरह के उत्पाद भी तैयार कर रही हैं. खास बात यह है कि इन राखियों की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंच रही है. हाल ही में महिलाओं से लंदन में रहने वाले के एक मूल भारतीय शख्स ने राखियां खरीदी है. इससे महिलाओं का हौसला बढ़ा है. जैनाबाद गांव में 30 महिलाएं उत्साह और उमंग के साथ राखियां बनाने में जुटी हैं. थोक में 25 रुपए प्रति नग के हिसाब से राखी बिक रही है। 

    प्रशिक्षण लेकर केले के रेशे से महिलाएं बना रहीं राखी
    जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर स्थित जैनाबाद गांव में रहने वाली रंजना पवार ने वर्ष 2018 में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान और मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर प्रशिक्षण हासिल किया. इसके बाद स्व-सहायता समूह की नींव रखी, इस समूह में महिलाओं को जोड़ा गया, सभी महिलाओं को भी प्रशिक्षणl दिलाया. इन महिलाओं ने केले के रेशे से आकर्षक और इको फ्रेंडली उत्पाद बनाकर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। 

    केले को मिली पहचान, घर बैठे रोजगार
    खास बात यह है कि तत्कालीन कलेक्टर भव्या मित्तल के कार्यकाल में केला फसल को 'एक जिला एक उत्पाद' योजना में शामिल किया गया था. जिसके चलते केला फसल और इससे बने उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है. स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को घर बैठे रोजगार का अवसर मिला है. रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही उन्होंने केले के रेशे से राखियां बनाना शुरू किया है. राजधानी भोपाल समेत लंदन तक इको फ्रेंडली राखियां पहुंची है. धीरे-धीरे इस काम में महिलाओं की रुचि बढ़ रही है, उन्होंने एक से बढ़कर एक उत्पाद बनाए हैं. इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है. महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं, परिवार और गांव में उनका मान-सम्मान बढ़ गया है। 

    विदेशों से भी आ रहे ऑर्डर
    स्व-सहायता अध्यक्ष रंजना पवार ने बताया कि "केले के रेशे को अलग-अलग साइज में तैयार किया जाता है. उससे आकर्षक डिजाइन की राखियां बनाई जाती हैं. इसके बाद राखियों को सजाकर बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाते हैं. केले के रेशे से तैयार राखी पूरी तरह इको-फ्रेंडली है, राखी के धागे में केमिकल युक्त रंग नहीं है. इससे किसी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं होता. पर्यावरण के लिए अनुकूल है, इस काम में करीब 30 महिलाएं जुटी हैं. उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है, केले के रेशे से बनी राखियों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. विदेशों से भी उन्हें ऑर्डर मिल चुके हैं, लंदन तक उनकी बनाई राखियां पहुंच गई हैं। 

  • आर्मी डे पर भोपाल में होगा सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन, पहली बार सड़कों पर दौड़ेंगे लड़ाकू टैंक

    आर्मी डे पर भोपाल में होगा सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन, पहली बार सड़कों पर दौड़ेंगे लड़ाकू टैंक

    भोपाल 

     भोपालवासियों के लिए यह बेहद गौरव का क्षण होने वाला है, क्योंकि 15 जनवरी 2027 को 'आर्मी डे' (सेना दिवस) के मौके पर पहली बार शहर की सड़कों पर भारतीय सेना के लड़ाकू टैंक अपना शौर्य प्रदर्शित करेंगे। इस ऐतिहासिक परेड के गवाह करीब 50 हजार दर्शक बनेंगे।

    खास बात यह है कि सेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब 'आर्मी डे' की परेड किसी सैन्य छावनी (केंटोनमेंट) तक सीमित न रहकर किसी सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जा रही है। इस आयोजन के लिए भोपाल शहर का चयन इसी साल मार्च में ही कर लिया गया था।

    टैंकों का भार सहने के लिए मजबूत होगी 2.4 किमी लंबी सड़क
        पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के मुताबिक, परेड के लिए गोविंदपुरा थाने से लेकर जंबूरी मैदान तक की 2.4 किलोमीटर लंबी सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है।

        भारी-भरकम सैन्य टैंकों का वजन आसानी से सहने के लिए इस सड़क की विशेष रूप से स्ट्रेंथनिंग (मजबूतीकरण) की जाएगी। टैंकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूरे मार्ग से स्पीड ब्रेकर हटा दिए जाएंगे। इसके साथ ही, रास्ते में आने वाले कुछ पेड़ों और बिजली के खंभों को भी शिफ्ट किया जाएगा।

    अधिकारियों ने किया निरीक्षण
        इस भव्य आयोजन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शनिवार को सेना, भोपाल पुलिस, जिला प्रशासन, भेल (BHEL), पीडब्ल्यूडी, बिजली कंपनी और सीपीए के तमाम अधिकारी आयोजन स्थल पर पहुंचे। एडीएम महेंद्र कपचे ने पूरी टीम के साथ गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक के परेड रूट का बारीकी से निरीक्षण किया।

     

  • MP में निवेश के लिए दुबई जाएंगे CM मोहन यादव, GIS 2027 से पहले मेगा रोड शो की तैयारी

    MP में निवेश के लिए दुबई जाएंगे CM मोहन यादव, GIS 2027 से पहले मेगा रोड शो की तैयारी

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। निवेशकों को राज्य में कारोबार और उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के अभियान के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सितंबर में दुबई का दौरा करेंगे। उन्हें 7 से 9 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाली Annual Investment Meeting Congress-2026 में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। इस आयोजन में सतत निवेश, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्थिक विविधता, उभरते बाजार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी जैसे मुद्दों पर फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री के साथ उद्योग, ऊर्जा, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत निवेश से जुड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना है। दुबई के अलावा देश के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्रों में भी निवेशक संवाद, रोड शो और राउंड टेबल बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा। Invest MP के आधिकारिक इवेंट कैलेंडर में दुबई के साथ अंतरराष्ट्रीय निवेशक संपर्क कार्यक्रमों का उल्लेख भी किया गया है।

    2025 GIS के बाद निवेश का दावा
    मध्य प्रदेश सरकार के मुताबिक 2025 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और उससे जुड़े निवेश आयोजनों के दौरान करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए थे। राज्य सरकार का दावा है कि इनमें से 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं। जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री ने बताया था कि जनवरी से जून 2026 के बीच ही मध्य प्रदेश को 76,862 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश प्रस्ताव मिले, जिनसे करीब 82 हजार रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है। इस निवेश अभियान को केवल एक समिट तक सीमित रखने के बजाय सरकार अब लगातार investor outreach पर जोर दे रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक राज्य आने वाले महीनों में दुबई, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे बाजारों में वैश्विक कंपनियों के साथ संपर्क बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, बैटरी, फार्मास्युटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    दुबई दौरे से पहले बना निवेश का माहौल
    दुबई के साथ मध्य प्रदेश की निवेश नीतियों का यह पहला बड़ा प्रयास नहीं है। जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री मोहन यादव के दुबई और स्पेन दौरे के दौरान राज्य को 11,119 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी सामने आई थी। इन निवेशों में इंफ्रास्ट्रक्चर, बायोफ्यूल, खाद्य प्रसंस्करण, हॉस्पिटैलिटी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र शामिल थे। उसी दौरे के दौरान स्पेन की सबमर्सिबल टेक्नोलॉजीज के साथ AI-रेडी ग्रीन डेटा सेंटर की संभावनाओं को लेकर समझौता भी हुआ था। सरकार इस अनुभव को आगे बढ़ाते हुए अब बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने मध्य प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, उपलब्ध भूमि, संसाधन, कनेक्टिविटी और मानव संसाधन को प्रमुखता से पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। राज्य का लक्ष्य सिर्फ निवेश प्रस्ताव जुटाना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने और रोजगार सृजन से जोड़ने का है।

    Ease of Doing Business को बनाया बड़ा हथियार
    इंजीनियरों को आकर्षित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार अपनी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस व्यवस्था को भी प्रमुखता से पेश कर रही है। इन्वेस्ट एमपी पोर्टल को राज्य के सिंगल विंडो सिस्टम के तौर पर विकसित किया गया है, जहां अलग-अलग योजनाओं से जुड़ी स्वीकृतियों और सेवाओं को असमान तरीकों से उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार यह व्यवस्था नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से भी जुड़ी हुई है।

        राज्य की औद्योगिक नीति में ‘Start Your Business in 30 Days’ जैसी पहल भी शामिल है। Invest India के उपलब्ध नीति दस्तावेज के अनुसार 45 व्यावसायिक सेवाओं को निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराने और कई सेवाओं में deemed approval की व्यवस्था की गई है। इससे उद्योग स्थापित करने के दौरान अलग-अलग विभागों के बीच प्रक्रियात्मक देरी को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
        मध्य प्रदेश का मौजूदा निवेश मॉडल अब सड़क, बिजली, पानी और औद्योगिक जमीन जैसी आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ तेज प्रशासनिक मंजूरियों को भी निवेश प्रस्ताव की प्रमुख ताकत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

        सरकार की कोशिश है कि घरेलू और विदेशी कंपनियों को शुरुआती निवेश निर्णय से लेकर परियोजना स्थापना तक कम से कम प्रक्रियात्मक बाधाओं का सामना करना पड़े।

    जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव का दुबई दौरा इसी व्यापक निवेश रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ सरकार 2026 में मिले 76,862 करोड़ रुपये से अधिक के नए प्रस्तावों को परियोजनाओं में बदलने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ नए विदेशी निवेशकों को राज्य से जोड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रोड शो का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में मध्य प्रदेश की निवेश नीति और नए औद्योगिक प्रस्ताव देश की नजर में रहने वाले बड़े आर्थिक घटनाक्रमों में शामिल रह सकते हैं।

  • साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर, भोपाल में MRM-GRM पोर्टल की निगरानी होगी मजबूत

    साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर, भोपाल में MRM-GRM पोर्टल की निगरानी होगी मजबूत

    भोपाल
    साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की होल्ड राशि समय पर वापस कराने और बिना किसी संलिप्तता के बैंक खातों पर लगे होल्ड हटवाने के लिए भोपाल पुलिस ने एमआरएम और जीआरएम पोर्टल की निगरानी व्यवस्था मजबूत की है। क्राइम ब्रांच की साइबर सेल के चार सब-इंस्पेक्टर को शहर के चारों जोन का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    उनकी जिम्मेदारी पोर्टल की नियमित मॉनिटरिंग करने, लंबित मामलों का निराकरण कराने और जरूरत पड़ने पर संबंधित थानों की विवेचना में सहयोग करने की होगी। साइबर ठगी के मामलों में ठगी की राशि कई बार विभिन्न बैंक खातों में होल्ड हो जाती है। पीड़ितों को रकम वापस पाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इसी प्रक्रिया को सरल करने के लिए आइ4सी पोर्टल के तहत एमआरएम व्यवस्था लागू की गई थी। इसके माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के तहत 50 हजार रुपये तक की साइबर ठगी की होल्ड राशि पीड़ित को वापस कराने की कार्रवाई की जाती है।

    खातों की जांच के लिए की गई जीआरएम पोर्टल की व्यवस्था
    ठगी की रकम जिस बैंक खाते में पहुंचती है, उस खाते पर भी होल्ड लग जाता है। कई मामलों में खाताधारक का साइबर अपराध से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता और उसका खाता अनावश्यक रूप से लंबे समय तक होल्ड रहने से परेशानी होती है। ऐसे खातों की जांच और संबंधित बैंक से होल्ड हटवाने की प्रक्रिया के लिए जीआरएम पोर्टल की व्यवस्था की गई है।

    इस तरह काम करेंगे प्रभारी
    शुरुआत में दोनों व्यवस्थाओं में मामलों के लंबित रहने और निगरानी की कमी से पीड़ितों के साथ खाताधारकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब चारों जोन के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त कर जवाबदेही तय की गई है। प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि होल्ड राशि के पात्र मामलों में कार्रवाई तेजी से हो और सात दिन के भीतर राशि पीड़ित तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके। इसी तरह जांच में किसी संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिलने पर बैंक खातों से होल्ड हटवाने की कार्रवाई की निगरानी भी की जाएगी।

    पेंडिंग मामलों की समीक्षा करेंगे प्रभारी
    साइबर ठगी के पीड़ितों की सहायता के लिए एमआरएम और जीआरएम पोर्टल पुरानी व्यवस्था है, लेकिन इनके मामलों की नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध निराकरण के लिए चारों जोन में साइबर सेल के एसआइ को प्रभारी बनाया गया है। प्रभारी पेंडिंग मामलों की समीक्षा करेंगे, संबंधित थानों की विवेचना में सहयोग करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़ितों की राशि तथा अनावश्यक रूप से होल्ड खातों के मामलों का समय पर निराकरण हो।

    शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच
    एमआरएम: ठगी की रकम वापस पाने की प्रक्रिया

    •     साइबर ठगी की शिकायत 1930, साइबर पोर्टल या थाने में दर्ज कराएं।
    •     पुलिस जांच में ठगी की रकम किसी खाते में होल्ड मिलने पर एमआरएम में केस दर्ज करेगी।
    •     50 हजार रुपये तक की राशि के लिए पुलिस आवश्यक दस्तावेज और बैंक विवरण सत्यापित करेगी।
    •     पोर्टल पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशि पीड़ित के खाते में वापस भेजी जाएगी।

    जीआरएम: बैंक खाते से होल्ड हटवाने की प्रक्रिया

    •     खाते पर साइबर ठगी के कारण होल्ड लगने पर संबंधित थाने या साइबर सेल से संपर्क करें।
    •     खाताधारक आवेदन और आवश्यक दस्तावेज जमा करेगा।
    •     पुलिस खाते के लेनदेन और ठगी में संलिप्तता की जांच करेगी।
    •     संलिप्तता नहीं मिलने पर जीआरएम पोर्टल के माध्यम से बैंक को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
    •     बैंक जांच के आधार पर खाते से होल्ड हटाएगा।

     

  • एसएफआईसी डेटा एनालिटिक्स के आधार पर की कड़ी कार्रवाई

    एसएफआईसी डेटा एनालिटिक्स के आधार पर की कड़ी कार्रवाई

    भोपाल 

    राज्य में शासकीय निधियों के संरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही निगरानी के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेस सेल (एसएफआईसी) द्वारा डेटा एनालिटिक्स के आधार पर किए गए गहन विश्लेषण के बाद 530 से अधिक आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए एफ.आई.आर. दर्ज कराई जा चुकी है। गंभीर मामलों में संलिप्त 22 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस सख्त निगरानी और समानांतर जांच प्रणाली से अब तक गबन एवं अनियमित ट्रांसफर की कुल 223 करोड़ रूपये की राशि शासन की संचित निधि में सफलतापूर्वक वापस कराई जा चुकी है।

    अनियमित ट्रांसफर की प्रभावी वसूली

    एसएफआईसी द्वारा वर्ष 2011 से अब तक के वित्तीय लेनदेन का नियमित डेटा विश्लेषण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कुल 315 करोड़ रूपये की राशि को 'संदिग्ध श्रेणी' में चिन्हित कर जांच के अधीन रखा गया है। पुरानी अवधि के आंकड़ों के विश्लेषण से अद्यतन हुई इस राशि पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शासन द्वारा 61 करोड़ रूपये के प्रमाणित गबन की वसूली पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही 162 करोड़ रूपये शासकीय बैंक खाते से सरकारी खजाने में जमा कराया गया है।

    भ्रष्टाचार निवारण और आईटी एक्ट की कठोर धाराओं में मामले दर्ज

    मामलों की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा पुलिस महानिदेशक से निवेदन किया गया था कि जांच में प्रमाणित गबन के प्रकरणों में पुलिस एफ.आई.आर. दर्ज करते समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की कठोर एवं सुसंगत धाराएं जोड़े। इसके बाद पुलिस स्तर से आरोपियों के खिलाफ अत्यंत प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी है।

    भविष्य के लिए लागू और प्रस्तावित अभेद्य सुरक्षा तंत्र

    वित्तीय प्रणालियों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए बीते 3 वर्षों में कई निरोधात्मक उपाय लागू किए गए हैं। मैन्युअल सिस्टम खत्म कर ई-जीपीएफ और ई-डीपीएफ के लिए महालेखाकार कार्यालय और पेंशन संचालनालय से ऑनलाइन अप्रूवल की इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू की गई है। इसके अलावा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, डिजिटल सिग्नेचर, वेतन भत्तों में कैपिंग सिस्टम, आधार आधारित भुगतान, रोम्स पोर्टल और आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म को अनिवार्य किया गया है।

     

  • म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले आरोपी एवं कियोस्क संचालक सहित 3 आरोपी गिरफ्तार

    म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले आरोपी एवं कियोस्क संचालक सहित 3 आरोपी गिरफ्तार

    भोपाल

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं साइबर धोखाधड़ी में प्रयुक्त बैंक खातों के नेटवर्क को चिन्हित कर उसके विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में छतरपुर पुलिस ने दो अलग-अलग साइबर अपराध प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड एवं अन्य सामग्री बरामद की है। वहीं, ऑनलाइन ठगी के एक अन्य प्रकरण में 28 लाख रुपये की साइबर ठगी का खुलासा करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा

    थाना कोतवाली पुलिस को राजनगर रोड फोरलेन ओवरब्रिज के पास म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने संबंधी सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर संदेह के आधार पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। व्यक्ति की तलाशी लेने पर उसके पास से विभिन्न बैंकों की 20 पासबुक, 23 एटीएम कार्ड, विभिन्न कंपनियों की 104 सिम कार्ड और 2 मोबाइल फोन प्राप्त हुए, जिसे विधिवत जब्त किया गया।

    बरामद सामग्री एवं संबंधित पोर्टल की जांच करने पर कई बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम एवं मोबाइल फोन का संबंध बिहार, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल एवं पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज लगभग 35 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से संबंधित प्रकरणों से पाया गया है।

    जांच के दौरान तमिलनाडु में एक महिला के साथ लगभग 37 लाख 80 हजार रुपये की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के प्रकरण में भी बरामद बैंक खातों में से एक खाते का लिंक सामने आया। धोखाधड़ी की राशि का एक हिस्सा संबंधित खाते में ट्रांजैक्शन हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा लोगों को प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते एकत्र किए जाते थे तथा इन म्यूल बैंक खातों में फर्जी सिम उपलब्ध कराकर साइबर ठगी की राशि का ट्रांजैक्शन कराया जाता था। पुलिस द्वारा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों एवं लेन-देन की जानकारी भी एकत्र की जा रही है।

    प्रकरण में पुलिस द्वारा म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले आरोपी, कियोस्क संचालक सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के विरुद्ध थाना कोतवाली में प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    28 लाख रुपये की ऑनलाइन साइबर ठगी का खुलासा

    थाना खजुराहो में आवेदक के साथ टेलीग्राम ऐप पर रेटिंग बढ़वाने के नाम पर पैसे दोगुने करने का लालच देकर 28 लाख रुपये की ऑनलाइन साइबर ठगी किए जाने के संबंध में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था।

    प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित कर तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों, अपराध में प्रयुक्त संचार माध्यमों तथा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जांच मेंगोटेगांव, जिला नरसिंहपुर के एक गिरोह के इस साइबर ठगी में शामिल होने की जानकारी सामने आई। पुलिस टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एटीएम कार्ड, बैंक खाते खोलने में प्रयुक्त 2 मोबाइल फोन एवं 38 हजार रुपये नगद बरामद किए गए हैं। साथ ही संबंधित बैंक खातों में 1.50 लाख रुपये की राशि फ्रीज कराई गई है।

    जांच में सामने आया कि आरोपी Instagram पर विज्ञापनों के माध्यम से बैंक खाते किराए पर लेते थे। इन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त राशि डलवाकर उसे तत्काल अन्य खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता था। इसके बाद ठगी की राशि को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर देते थे।

    आरोपियों द्वारा उपयोग किए जा रहे तकनीकी साधनों एवं बैंक खातों के विश्लेषण में अब तक लगभग 80 लाख रुपये के संदिग्ध साइबर लेन-देनका पता चला है। इन लेन-देन से संबंधित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार एवं झारखंड सहित विभिन्न राज्यों में लगभग 50 साइबर शिकायतें पंजीबद्ध होना पाया गया है। जांच में आरोपियों के नेटवर्क के पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड एवं महाराष्ट्र से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है।

    छतरपुर पुलिस द्वारा दोनों प्रकरणों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर साइबर ठगी से जुड़े अन्य व्यक्तियों, म्यूल बैंक खातों, फर्जी सिम कार्ड, संदिग्ध बैंक लेन-देन तथा अंतरराज्यीय नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर अपराध से प्राप्त राशि के प्रवाह एवं उससे जुड़े अन्य खातों की भी तकनीकी जांच की जा रही है। प्रकरणों में विवेचना एवं अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि वे किसी भी व्यक्ति को प्रलोभन में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, बैंकिंग संबंधी जानकारी अथवा अन्य वित्तीय साधन उपलब्ध न कराएं। ऐसे खातों का उपयोग साइबर अपराधों में होने पर संबंधित व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई की जद में आ सकता है। साइबर अपराध होने पर तत्काल 1930 पर सूचना दें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

     

  • विद्यार्थी विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का भविष्य हैं : मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार

    विद्यार्थी विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का भविष्य हैं : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

    भोपाल

    भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आज लखनऊ में "चुनावी साक्षरता क्लब (ईएलसी 2.0) और ईसीआईएनईटी" पर दूसरा क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन का उद्देश्य युवा नागरिकों के बीच चुनावी साक्षरता और लोकतांत्रिक जागरूकता को मजबूत करना है। उत्तर प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों और शिक्षकों सहित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, विद्यार्थियों को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं के ज्ञान और समझ को आगे बढ़ाने और लोकतंत्र को समृद्ध करने के लिए चुनावी परिषदें अनिवार्य हैं।

    मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार ने बताया कि भारत में चुनाव संविधान, कानून और चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार ही कराए जाते हैं और राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की समवर्ती लेखापरीक्षा के तहत सभी चरणों में पारदर्शिता के साथ संचालित होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और युवा मतदाताओं को भारत की चुनावी प्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों, मतदाता पंजीकरण, मतदान और मतगणना प्रक्रियाओं तथा भारतीय चुनाव आयोग की भूमिका और कार्यप्रणाली से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया। युवा नागरिकों की भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में उनका विश्वास और सूचित भागीदारी लोकतंत्र के भविष्य में एक निवेश है। ईएलसी 2.0, जिसका ताना "लोकतंत्र सीखें। लोकतंत्र का नेतृत्व करें।" है, युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को न केवल लोकतंत्र को समझने के लिए बल्कि सार्थक रूप से भाग लेने और इसकी प्रगति में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य को सुदृढ़ करता है।

     ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को अपने पुराने विद्यालय, कोल्विन तालुकदार कॉलेज का दौरा किया और वहां के शिक्षकों और छात्रों से बातचीत की। कल, दौरे के दूसरे दिन मुख्य आयुक्त  ज्ञानेश कुमार उत्तर प्रदेश के बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के साथ बातचीत करेंगे।

    ईएलसी 2.0 चुनावी साक्षरता क्लबों को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संरचित, दृश्यमान और डिजिटल रूप से सक्षम प्लेटफार्मों के रूप में पुनर्परिभाषित करता है। इस पहल में युवा नागरिकों के बीच चुनावी साक्षरता और उनके परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों में चुनावी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर, वर्ष भर चलने वाली गतिविधियों की परिकल्पना की गई है। ईएलसी 2.0 व्यापक ईसीआईएनईटी डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाएगा, जो एक बटन के क्लिक पर नामांकन से लेकर मतदान तक सभी चुनाव संबंधी सेवाएं प्रदान करता है। ईसीआईएनईटी पर एक समर्पित ईएलसी पोर्टल का उपयोग करके ईएलसी का एक सुव्यवस्थित अखिल भारतीय नेटवर्क विकसित किया जाएगा। भारत के विशाल शैक्षिक तंत्र को देखते हुए यह पहल महत्वपूर्ण है, जिसमें लगभग 15 लाख स्कूल, लगभग 25 करोड़ विद्यार्थी और एक करोड़ से अधिक शिक्षक शामिल हैं। उच्च शिक्षा क्षेत्र में लगभग 1,500 विश्वविद्यालय और लगभग 70,000 शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें अनुमानित 4.33 करोड़ छात्र नामांकित हैं। इस व्यापक संस्थागत नेटवर्क के माध्यम से, ईएलसी 2.0 तथ्यात्मक और अनुभवात्मक चुनावी शिक्षा को बढ़ावा देना चाहता है, भारत की चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता, अखंडता और विश्वसनीयता के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहता है, और युवा नागरिकों को सूचित लोकतांत्रिक भागीदारी के राजदूत बनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है। ईएलसी (इलेक्ट्रॉनिक लीगल सेंटर) चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों, जिनमें चुनावी पंजीकरण, मतदान और मतगणना शामिल हैं, के बारे में जानकारी प्रसारित करने के लिए मंच के रूप में भी काम करेंगे, साथ ही ईसीआईएनईटी ऐप और भारत निर्वाचन आयोग की अन्य प्रमुख पहलों के माध्यम से भी जानकारी प्रसारित करेंगे।

     

  • हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा नरेला, मंत्री विश्वास सारंग की अगुवाई में निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी

    हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा नरेला, मंत्री विश्वास सारंग की अगुवाई में निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी

    भोपाल 

    सावन के पावन महीने में भगवान शिव की भक्ति से सराबोर नरेला विधानसभा का वातावरण उस समय भक्तिमय हो उठा, मंत्री श्री विश्वास सारंग की अगुवाई में बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी निकाली गई। सवारी में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। स्टेशन क्षेत्र से अशोका गार्डन तक निकली भव्य सवारी में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे उत्साह के साथ शामिल हुए। सवारी के मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाबा महाकाल का स्वागत किया। जगह-जगह धार्मिक वातावरण, भक्ति संगीत और भगवान शिव के जयकारों ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया।

    इस अवसर पर मंत्री सारंग ने बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और आस्था का पर्व है। बाबा महाकाल की शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नरेला विधानसभा में बाबा महाकाल की शाही सवारी में जिस उत्साह और श्रद्धा के साथ हजारों लोग शामिल हुए, वह क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है। बाबा महाकाल की कृपा सभी पर बनी रहे और प्रदेश निरंतर विकास एवं समृद्धि की ओर आगे बढ़े, यही कामना है।

    शाही सवारी के दौरान पूरा मार्ग भगवा ध्वजों, पुष्पवर्षा और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से सजा नजर आया। श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी ने इस आयोजन को भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।