Category: मध्य प्रदेश

  • हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा नरेला, मंत्री विश्वास सारंग की अगुवाई में निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी

    हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा नरेला, मंत्री विश्वास सारंग की अगुवाई में निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी

    भोपाल 

    सावन के पावन महीने में भगवान शिव की भक्ति से सराबोर नरेला विधानसभा का वातावरण उस समय भक्तिमय हो उठा, मंत्री श्री विश्वास सारंग की अगुवाई में बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी निकाली गई। सवारी में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। स्टेशन क्षेत्र से अशोका गार्डन तक निकली भव्य सवारी में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे उत्साह के साथ शामिल हुए। सवारी के मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाबा महाकाल का स्वागत किया। जगह-जगह धार्मिक वातावरण, भक्ति संगीत और भगवान शिव के जयकारों ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया।

    इस अवसर पर मंत्री सारंग ने बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और आस्था का पर्व है। बाबा महाकाल की शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नरेला विधानसभा में बाबा महाकाल की शाही सवारी में जिस उत्साह और श्रद्धा के साथ हजारों लोग शामिल हुए, वह क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है। बाबा महाकाल की कृपा सभी पर बनी रहे और प्रदेश निरंतर विकास एवं समृद्धि की ओर आगे बढ़े, यही कामना है।

    शाही सवारी के दौरान पूरा मार्ग भगवा ध्वजों, पुष्पवर्षा और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से सजा नजर आया। श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी ने इस आयोजन को भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

  • विकसित भारत की अंतरिक्ष दृष्टि पर मेपकॉस्ट में विशेष व्याख्यान  इसरो वैज्ञानिक स्वप्निल त्रिवेदी ने साझा की भारत की उपलब्धियां और भावी योजनाएं

    विकसित भारत की अंतरिक्ष दृष्टि पर मेपकॉस्ट में विशेष व्याख्यान इसरो वैज्ञानिक स्वप्निल त्रिवेदी ने साझा की भारत की उपलब्धियां और भावी योजनाएं

    भोपाल 

    राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकॉस्ट) द्वारा एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की मुख्य थीम “विकसित भारत की ओर: नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की प्रेरणा” पर आधारित इस कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख वैज्ञानिक  स्वप्निल त्रिवेदी ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। व्याख्यान के दौरान  त्रिवेदी ने "आर्यभट्ट से गगनयान तक" के सफर को रेखांकित करते हुए बताया कि इसरो ने उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान, पृथ्वी अवलोकन तथा चंद्र एवं सौर मिशनों में सफलता प्राप्त कर अब मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में महत्वपूर्ण और आत्मनिर्भर क्षमताएं विकसित कर ली हैं।

    चंद्रयान-3 केवल चंद्रमा पर उतरने का मिशन नही, बल्कि वास्तविक विज्ञान निष्पादित करने का मिशन

    चंद्रयान-3 मिशन के वैज्ञानिक निष्कर्षों की जानकारी साझा करते हुए वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने बताया कि LIBS उपकरण ने चंद्रमा की सतह पर सल्फर की उपस्थिति की प्रामाणिक पुष्टि की है, जबकि APXS ने विभिन्न रासायनिक तत्वों का विस्तृत अध्ययन किया। इसके साथ ही RAMBHA-LP द्वारा प्लाज्मा वातावरण तथा ILSA द्वारा लैंडिंग क्षेत्र की भूकंपीय गतिविधियों का गहन अध्ययन किया गया। उन्होंने रेखांकित किया कि चंद्रयान-3 केवल चंद्रमा पर उतरने का मिशन नहीं था, बल्कि वहां वास्तविक विज्ञान निष्पादित करने का मिशन था।

    वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने गगनयान मिशन पर चर्चा करते हुए मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया। क्रू मॉड्यूल, जीवन-समर्थन प्रणाली, क्रू एस्केप सिस्टम, पैराशूट और तापीय सुरक्षा प्रणालियों के कड़े परीक्षणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव अंतरिक्ष उड़ान का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न केवल अंतरिक्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है।

    भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने बताया कि भारत अब चंद्रमा से आगे बढ़कर शुक्र और मंगल अन्वेषण, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना, अंतरिक्ष डॉकिंग तथा सर्विसिंग की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने नासा-इसरो (NASA-ISRO) के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अंतरिक्ष मलबे से निपटने की आवश्यकता और टिकाऊ अंतरिक्ष गतिविधियों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

    विशेष आकर्षण के रूप में "अंतरिक्ष और हमारा भोपाल" विषय पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि उपग्रह तकनीक का उपयोग केवल दूरस्थ ग्रहों तक सीमित नहीं है। उपग्रहों के माध्यम से भोपाल की ऊपरी झील, शहरी विस्तार, हरियाली और बदलते भू-उपयोग का अध्ययन कर शहर के सुव्यवस्थित और बेहतर विकास की रूपरेखा तैयार की जा सकती है।

    वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने अंत में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को विकसित भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान का अंतिम उद्देश्य केवल नई सीमाओं तक पहुंचना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से प्राप्त ज्ञान और तकनीक का उपयोग पृथ्वी तथा समाज के बेहतर भविष्य के लिए करना है।

     

  • मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग और सतत प्रयासों से मोबाइल रिकवरी में बड़ी उपलब्धि

    मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग और सतत प्रयासों से मोबाइल रिकवरी में बड़ी उपलब्धि

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की पहचान, निगरानी तथा उनके वास्तविक धारकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में Central Equipment Identity Register (CEIR) पोर्टल के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश में वर्ष 2019 से अब तक 70,107 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक धारकों को वापस लौटाने में सफलता प्राप्त की है।

    यह उपलब्धि केवल तकनीकी प्रणाली के उपयोग का परिणाम नहीं, बल्कि प्रदेशभर की पुलिस इकाइयों द्वारा मोबाइल फोन की पहचान, तकनीकी विश्लेषण, संदिग्ध उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने, संबंधित व्यक्तियों से संपर्क करने तथा मोबाइल की बरामदगी के लिए किए जा रहे निरंतर पुलिस प्रयासों का परिणाम है। मोबाइल फोन की रिकवरी के लिए पुलिस द्वारा प्राप्त तकनीकी जानकारी का सत्यापन कर आवश्यकतानुसार मैदानी स्तर पर कार्रवाई की जाती है।

    CEIR क्या है और कैसे करता है मदद?

    CEIR (Central Equipment Identity Register) भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित एक केंद्रीय प्रणाली है, जिसका उपयोग मोबाइल उपकरणों के IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर के आधार पर गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन की पहचान और निगरानी में किया जाता है। मोबाइल फोन गुम या चोरी होने पर संबंधित व्यक्ति द्वारा आवश्यक विवरण एवं IMEI नंबर के आधार पर CEIR प्रणाली में रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है। इसके बाद संबंधित मोबाइल उपकरण के नेटवर्क पर दोबारा सक्रिय होने की स्थिति में उसकी तकनीकी जानकारी के आधार पर उसका पता लगाने में पुलिस को सहायता मिलती है।

    पुलिस द्वारा CEIR से प्राप्त जानकारी का विश्लेषण कर मोबाइल के उपयोग, संबंधित नेटवर्क एवं उपलब्ध तकनीकी विवरणों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। मोबाइल की लोकेशन अथवा उपयोग से संबंधित जानकारी मिलने के बाद संबंधित पुलिस इकाई द्वारा आवश्यक सत्यापन एवं कार्रवाई करते हुए मोबाइल बरामद किया जाता है तथा पहचान एवं आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उसे उसके वास्तविक स्वामी को वापस सौंपा जाता है।मोबाइल फोन बरामद होने अथवा वास्तविक धारक को वापस मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत Unblock Request की जाती है, जिससे मोबाइल का पुनः वैध उपयोग किया जा सके।

    जिलों का उल्लेखनीय प्रदर्शन

    मोबाइल रिकवरी के मामले में प्रदेश की विभिन्न पुलिस इकाइयों द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया गया है। उपलब्ध CEIR आंकड़ों के अनुसार शीर्ष 10 जिले/यूनिट इस प्रकार हैं—

            भोपाल नगरीय — 4,684 मोबाइल

            ग्वालियर — 4,293 मोबाइल

            मंडला — 3,667 मोबाइल

            जबलपुर — 3,539 मोबाइल

            रीवा — 2,784 मोबाइल

            विदिशा — 2,672 मोबाइल

            इंदौर नगरीय — 2,613 मोबाइल

            छतरपुर — 2,584 मोबाइल

            सिंगरौली — 2,466 मोबाइल

            भिंड — 2,375 मोबाइल

    तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ तकनीकी एवं डिजिटल पुलिसिंग को लगातार मजबूत किया जा रहा है। CEIR पोर्टल के माध्यम से मोबाइल के IMEI नंबर को आधार बनाकर संदिग्ध मोबाइल की पहचान, नेटवर्क पर उसकी गतिविधि तथा उसके संबंध में उपलब्ध तकनीकी जानकारी का उपयोग पुलिस कार्रवाई में किया जाता है।इस व्यवस्था से मोबाइल फोन से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई अधिक सटीक, त्वरित और तकनीक आधारित हुई है। साथ ही मोबाइल फोन के अवैध उपयोग एवं चोरी के बाद उसके पुनः नेटवर्क पर इस्तेमाल की संभावनाओं को रोकने में भी सहायता मिलती है।

    नागरिकों के लिए भी उपयोगी डिजिटल व्यवस्था

    मध्यप्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि मोबाइल फोन गुम अथवा चोरी होने की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें तथा मोबाइल का IMEI नंबर सुरक्षित रखें। मोबाइल फोन बरामद होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसे अनब्लॉक कराया जा सकता है।

    CEIR जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का अधिक से अधिक उपयोग करने से न केवल नागरिक अपने गुम अथवा चोरी हुए मोबाइल की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि पुलिस को भी उसकी तलाश एवं बरामदगी में महत्वपूर्ण तकनीकी आधार उपलब्ध होता है।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा तकनीक का उपयोग केवल अपराध की जांच तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि आम नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा और उन्हें बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी किया जा रहा है।

     

  • राज्य मंत्री  लोधी ने हज़ारों कांवड़ियों संग किया भगवान जागेश्वरनाथ का जलाभिषेक

    राज्य मंत्री लोधी ने हज़ारों कांवड़ियों संग किया भगवान जागेश्वरनाथ का जलाभिषेक

    भोपाल 

    संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के नेतृत्व में पंचवटी धाम, भेड़ाघाट से प्रारंभ हुई 121 किलोमीटर लंबी पांच दिवसीय भव्य कांवड़ यात्रा का प्रसिद्ध देव  जागेश्वर नाथ धाम, बांदकपुर पहुँचने पर अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ समापन हुआ। बांदकपुर धाम में राज्य मंत्री  लोधी, उनके अनुज  नीतेन्द्र सिंह तथा यात्रा के नेतृत्वकर्ता  सत्येंद्र सिंह ने स्वजनों एवं हज़ारों कांवड़ियों के साथ माँ नर्मदा के पवित्र जल से भगवान जागेश्वरनाथ का विधि-विधानपूर्वक जलाभिषेक कर लोक-कल्याण की प्रार्थना की।

    राज्य मंत्री  धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि यह कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और जन-कल्याण को समर्पित एक पवित्र प्रयास रही है। यात्रा के नेतृत्वकर्ता  सत्येंद्र सिंह ने बताया कि भेड़ाघाट से बांदकपुर तक की इस यात्रा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या और उत्साह बढ़ता गया। उन्होंने इस भव्य आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों एवं कांवड़ यात्रियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।

    धार्मिक आस्था और सामाजिक दायित्वों के अनुपम संगम के रूप में आयोजित यह पदयात्रा पांच प्रमुख संकल्पों—शिक्षा संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, गौ-संरक्षण और स्वच्छता अभियान—को समर्पित रही। यात्रा के दौरान इन सामाजिक सरोकारों को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए गए। शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यात्रा मार्ग में स्थित शालाओं के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठ्य सामग्री वितरित की गई। वहीं प्रकृति संवर्धन के लिए विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण किया गया तथा श्रद्धालुओं को नशामुक्त जीवन अपनाने, गौ-सेवा करने और स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प दिलाया गया।

    इस पांच दिवसीय यात्रा के दौरान संपूर्ण मार्ग में स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों द्वारा कांवड़ियों का अभूतपूर्व स्वागत किया गया। कांवड़ यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए राज्य मंत्री  लोधी की ओर से प्रतिदिन दोपहर के सहभोज, रात्रिकालीन विश्राम तथा त्वरित चिकित्सा देखभाल के लिए मेडिकल टीमों की व्यवस्थाएं की गईं। इस पुण्य यात्रा में हज़ारों कांवड़ियों के साथ सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

     

  • केंद्रीय संस्थानों के सहयोग से 2047 तक समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने की तैयारी

    केंद्रीय संस्थानों के सहयोग से 2047 तक समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने की तैयारी

    भोपाल

    ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047: केंद्रीय संस्थानों की भूमिका’ विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के दीर्घकालीन विकास के लिए केंद्रीय एवं शैक्षणिक संस्थानों, राज्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया गया। कॉन्क्लेव में संस्थानों ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप शोध, कौशल विकास, तकनीकी नवाचार, कृषि, उद्योग, पर्यटन, स्वास्थ्य, शहरी नियोजन और डिजिटल गवर्नेंस में सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    कार्यक्रम के स्वागत भाषण में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA) के उपाध्यक्ष प्रो राजीव दीक्षित ने कॉन्क्लेव की रूपरेखा और इसके प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ के विज़न को सात प्रमुख श्रेणियों—कृषि एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, रक्षा एवं सुरक्षा तथा प्रबंधन, शिक्षा, कौशल, डिजाइन, पर्यटन एवं खेल—में विभाजित किया गया है। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रत्येक केंद्रीय संस्थान को एक स्पष्ट ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ के साथ जोड़ना है, ताकि संस्थान अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप ठोस योगदान दें और 2047 के विकास लक्ष्य को साकार करने में भागीदार बनें।

    दूसरे सत्र में कॉन्क्लेव में विभिन्न केंद्रीय संस्थानों ने अपने सहयोग की ठोस संभावनाएँ प्रस्तुत कीं। आईआईटी इंदौर ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने तथा आगामी 4-5 वर्षों में 10,000 युवाओं को विशेषीकृत क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आईआईएसईआर भोपाल ने ड्रोन टेक्नोलॉजी, खनन और कृषि अनुसंधान में सहयोग की जानकारी दी। आईआईएम इंदौर ने कृषि सुधार, पर्यटन और पंचायती राज के डिजिटलीकरण में सहयोग का प्रस्ताव रखा।

    एनआईटीटीटीआर भोपाल ने सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग के लिए स्थापित क्लीन-रूम लैब और शिक्षक प्रशिक्षण के प्रयासों की जानकारी दी। आईआईआईटी भोपाल ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता उपलब्ध कराने की बात कही। मेनिट भोपाल ने ऊर्जा संक्रमण, कौशल एवं उच्च शिक्षा में चल रही पहलों की जानकारी दी। एलएनआईपीईयू ग्वालियर ने खेल, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता को जोड़ने तथा जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। सीएसआईआर-एएमपीआरआई भोपाल ने कौशल विकास, महत्वपूर्ण खनिजों, पर्यावरणीय तकनीक और स्मार्ट विलेज पहल का उल्लेख किया। एसपीए भोपाल ने शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, पर्यावरण और विरासत संरक्षण में सहयोग की जानकारी दी, जबकि एनआईडी मध्यप्रदेश ने राज्य के लिए मानव-केंद्रित ‘डिज़ाइन इंजन’ की भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    सत्र में ‘2047 तक समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण’ विषय पर चर्चा हुई। सतत औद्योगिक गतिवर्धन, बहु-उत्पाद औद्योगिक क्लस्टर, उद्योग-अकादमिक समन्वय, कौशल विकास केंद्र, आर&डी इकोसिस्टम और उत्कृष्टता केंद्रों को प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया। कृषि क्षेत्र में प्रिसीजन फार्मिंग, कृषि निर्यात पार्क, कोल्ड-चेन, एग्रीटेक, बायोटेक और ग्रीनटेक पर बल दिया गया। सेवा क्षेत्र में पर्यटन, आईटी, एवीजीसी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विस्तार की संभावनाएँ रेखांकित की गईं।

    सामाजिक क्षेत्र में विश्वस्तरीय शिक्षा एवं कौशल, एआई-संचालित मूल्यांकन, स्थानीय एवं जनजातीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री, अनुसंधान केंद्र, बौद्धिक संपदा को बढ़ावा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ, नवीकरणीय ऊर्जा, ईवी चार्जिंग तथा सतत शहरी एवं ग्रामीण अवसंरचना को प्राथमिकता दी गई।

    कॉन्क्लेव में नीतिगत समन्वय, डिजिटल नॉलेज रिपॉजिटरी एवं विशेषज्ञ डेटाबेस तथा केंद्रीय संस्थानों और राज्य सरकार के विभागों के बीच निरंतर सहयोग विकसित करने पर सहमति बनी। प्रतिभागियों ने विज़न को मिशन, परियोजनाओं, रणनीतियों और मापनीय परिणामों में बदलने तथा ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ को ठोस कार्ययोजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कार्यक्रम में संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विभाष कुमार ठाकुर, संचालक श्री स्वरोचिष सोमवंशी, प्रो संतोष विश्वकर्मा चीफ साइंटिफिक एडवाइजर के साथ संस्थान के समस्त अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • वन विभाग के कुल 4 हजार 506 अधिकारी-कर्मचारियों को मिली है पदोन्नति

    वन विभाग के कुल 4 हजार 506 अधिकारी-कर्मचारियों को मिली है पदोन्नति

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल, जंगल, वानस्पतिक संपदा और वन्यप्राणियों की रक्षा करने में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि परमेश्वर ने नैसर्गिक सुंदरता के साथ मध्यप्रदेश को वनों का अनुपम साम्राज्य दिया है। ये वन भारत और दुनियाभर में मध्यप्रदेश की पहचान हैं। हमारे वनकर्मी पूरी लगन से इसकी रक्षा करते हैं। प्रदेश के शासकीय सेवकों को पदोन्नति के फैसले का लाभ वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को भी मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुशासन की सरकार है। सुशासन के लिए हर क्षेत्र में युवाओं की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति शासकीय सेवक का उसके काम के प्रति लगन और समर्पण का सम्मान है। वन विभाग के 4 हजार 506 शासकीय सेवकों को पदोन्नत किया गया है। सभी विभागों में कर्मचारियों को मिली पदोन्नति से मन संतोष से भरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन विभाग के लिए 25 हजार 389 पद स्वीकृत हैं। अभी 18 हजार से अधिक कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। हम वन प्रबंधन को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहते हैं। इसीलिए हमने पदोन्नति के साथ ही खाली हुए पदों को भरने के लिए नई भर्ती के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में वन विभाग में पदोन्नत शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा आयोजित आभार एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों को ‘प्रकृति पुत्र' और 'ग्रीन सोल्जर्स' की संज्ञा देते हुए कहा कि उनके बीच आकर मन हर्ष से भर गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को भारत जैसे मेगा-बायोडायवर्स देश और समृद्ध जैव-विविधता की विरासत मिली है। वन अमले के पुरुषार्थ से मध्यप्रदेश वन एवं वन्यजीव संरक्षण का रोल मॉडल बना है। प्रदेश की पहचान जल, जंगल और जीव से है और वन विभाग ने इनके संरक्षण में मिसाल कायम की है। इसी पुरुषार्थ के कारण मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, घड़ियाल स्टेट, गिद्ध स्टेट और अब चीता स्टेट का गौरव मिला है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से वन विभाग में वर्षों के इंतजार का फल मिला है। जिन्हें पदोन्नति मिली है उनमें 188 सहायक वन संरक्षक, 2,821 वनपाल, 761 उप वन क्षेत्रपाल तथा अन्य संवर्ग के 736 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी पदोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए उनके परिजनों के सहयोग और त्याग के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश वन्य जीवों के संरक्षण के मामले में पूरे देश अव्वल है। प्रदेश के जंगलों में अब भैंसें भी वापस आ चुके हैं। मध्यप्रदेश के वन और वन्यजीवों की दुनिया मुरीद है। हमारे वनकर्मी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जंगल, पहाड़, वन और नदियों की रक्षा करते हैं। वनकर्मी हमारी वन संपदा की सुरक्षा की मजबूत दीवार की तरह हैं, जो वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ वन क्षेत्र में निवासरत आबादी की भी चिंता करते हैं। मनुष्य का जीवन और जंगल एक दूसरे पर निर्भर हैं। हमारा प्रयास है कि जैसा हमने पाया है, उससे और बेहतर हम भावी पीढ़ी को सौंपें। ईश्वर की कृपा से मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। कोई ग्लेशियर नहीं होने पर भी हमारी नदियां जलराशि से सदैव समृद्ध रहती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास अगली पीढ़ी को सबसे अच्छा तोहफा सौंपने का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि विकास तभी पूर्ण होगा, जब जंगल और जैव-विविधता सुरक्षित रहें, नदियां संरक्षित रहें और भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित हो।

    प्रमुख सचिव, वन  राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दृढ़ इच्छाशक्ति के बलबूते अन्य विभागों की तरह वन विभाग में कुल 4 हजार 506 अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की वन सम्पदा और वन्यप्राणियों का संरक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विशेष रुचि का विषय है। मध्यप्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र का 30.72 प्रतिशत वनों के आच्छादित है। यहां 9 टाइगर रिजर्व, 26 वाइल्ड लाइफ सेंचुरी मध्यप्रदेश की पहचान हैं। पर्यटन क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का हृदय क्षेत्र है। इतनी बड़ी संख्या में वन और वन्यप्राणियों की संख्या के आधार पर मध्यप्रदेश लंग्स ऑफ इंडिया भी है। कुछ महीने पहले रातापानी (सर वीएस वाकणकर) और माधव टाइगर रिजर्व, डॉ. भीमराव आम्बेडकर अभारण्य सहित प्रदेश के पहले ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का गठन हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के चीता प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने, गज रक्षक (एआई प्रणाली) से हाथियों की निगरानी, पीएम गतिशक्ति परियोजना के लिए वन मानचित्रों का प्रयोग, आधुनिक तकनीक और नवाचार लगातार संचालित हो रहे हैं। एक पेड़ मां के नाम योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में इस वर्ष अब तक 5 करोड़ 62 लाख से अधिक पौधे रोपे गए हैं। प्रदेश के 43 जिलों में 94 वन वाटिकाओं की स्वीकृति मिल गई है। प्रदेश में तेंदुपत्ता संग्राहकों को लगातार राशि वितरित की जा रही है।

    समारोह में पदोन्नत सहायक वन संरक्षक  रजनीश शुक्ला ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पदोन्नति के निर्णय से विभाग के हजारों कर्मचारियों में काम के प्रति लगन और मेहनत की एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। पदोन्नत वनपाल  दिनेश नागर, उप वन क्षेत्रपाल  सीमा राजगौंड, वनपाल  कल्पना गौड़ ने भी रक्षाबंधन से पहले उन्हें पदोन्नति का उपहार देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। पदोन्नत वनपाल  रामदास सोलंकी ने कहा कि उसकी पदोन्नति से उसके समाज, परिवार और रिश्तेदारों में बेहद खुशी का माहौल है।

    कार्यक्रम के अंत में विभाग द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह भी दिया गया। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन)  अजय यादव सहित विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी एवं पदोन्नत अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनकल्याण योजना (संबल) 2.0 के हितग्राहियों को मुख्यमंत्री निवास से जारी की 11वीं किश्त

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनकल्याण योजना (संबल) 2.0 के हितग्राहियों को मुख्यमंत्री निवास से जारी की 11वीं किश्त

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रमिकों की सेवा, कल्याण और खुशी हमारे लिए सबसे पहले है। हमारे श्रमिक अपने खून-पसीने से विकसित मध्यप्रदेश की नींव तैयार कर एक-एक ईंट जोड़ रहे हैं। हर परिस्थिति में श्रमिकों की कठिनाई को दूर करना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों पर विपत्ति आने, घर चलाने वाले के असामयिक निधन, अचानक आर्थिक संकट आने पर लोग साथ छोड़ दें, परंतु हमारी सरकार कभी आपका साथ नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री संबल योजना 2.0 मुश्किल समय में श्रमिकों को आर्थिक सहारा भी देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से प्रदेश के श्रमिक बंधुओं को वीडियो कान्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्षाबंधन से पहले श्रावण के अंतिम सोमवार को श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के तहत दी जाने वाली अनुग्रह सहायता राशि की 11वीं किश्त के रूप में 203 करोड़ रुपये की सहायता राशि सिंगल क्लिक से पात्र हितग्राहियों के खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रदेश के 9 हज़ार 149 संबल हितग्राहियों को मिली यह राशि इन सभी परिवारों में आनंद लेकर आई है। उन्होंने कहा कि संबल योजना ने प्रदेश के 1 करोड़ 84 लाख से अधिक श्रमिकों को सहारा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कठिन समय में जब सभी रास्ते बंद होंगे, तब भी सरकार उनके साथ खड़ी है। यह राशि दु:ख की घड़ी में बड़ी राहत लेकर आती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर जेब में पैसे हों, तो अनेक विपत्तियों का सामना करने की हिम्मत भी आ जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पिछला बैकलॉग खत्म करते हुए निर्बाध रूप से श्रम सहित सभी विभागीय योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों से वीसी से जुड़े श्रमिक हितग्राहियों को श्रावण सोमवार और आने वाले रक्षाबंधन पर्व की मंगलकामनाएं दी।

    श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रख रही है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश, देश का पहला ऐसा राज्य बना है, जहां 'श्रम शक्ति संहिता' लागू की गई है। इसके साथ ही सरकार ने 'श्रम स्टार रेटिंग' की शुरुआत भी हमने की है, ताकि श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा कि हम श्रमिकों को उनके हुनर परिष्कृत कर मेहनत से आगे बढ़ना चाहते हैं। श्रमिकों को सहकारिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'श्रमणा' योजना की शुरुआत की गई है।

    अंत्योदय ही हमारी सरकार का संकल्प

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते दौर में काम करने का तरीका बदल रहा है। प्रदेश के नौजवान अब ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रोजगार पा रहे हैं। इनकी आर्थिक सुरक्षा की चिंता करते हुए हमारी सरकार ने गिग और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना 2.0 में शामिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार की सबसे बड़ी चिंता इलाज की होती है, ऐसे में संबल हितग्राहियों को भी आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जोड़ा गया है। इसके साथ ही जिन श्रमिक हितग्राहियों के बच्चे मेडिकल, कानून, इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी फीस की चिंता भी हमारी सरकार कर रही है।

    गर्भवती श्रमिक बहनों को 16 हजार की सहायता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब संबल योजना की लाभार्थी श्रमिक बहनों को गर्भावस्था में आर्थिक चिंता नहीं करनी पड़ती है और मां-बच्चे को बेहतर पोषण मिल रहा है। राज्य सरकार पात्र गर्भवती श्रमिक बहनों को 16 हजार रुपये की सहायता राशि दे रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई श्रमिक अस्थायी रूप से दिव्यांग हो जाए, तो उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा न हो जाए, इसीलिए उसे अस्थायी दिव्यांगता हो जाने पर 1 लाख रुपये और स्थायी दिव्यांगता होने पर 2 लाख रुपये की सहायता संबल योजना के माध्यम से दी जा रही है।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल ने कार्यक्रम में वर्चुअली सहभागिता की। उन्होंने कहा कि संबल योजना के हितग्राहियों का बैकलॉग खत्म करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। आज 11वीं किश्त के रूप में उन्हें 1 जनवरी 2026 तक का भुगतान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमारी संवेदनशील सरकार हर गरीब और श्रमिक के साथ हमेशा खड़ी है।

    मिली सहायता

    मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना 2.0 की 11वीं किश्त के लाभार्थियों में सामान्य मृत्यु अनुग्रह सहायता के 8027 हितग्राही, दुर्घटना मृत्यु अनुग्रह सहायता के 1034, आंशिक स्थायी दिव्यांगता के 66 और स्थायी दिव्यांगता के 22 हितग्राही शामिल हैं। राज्य सरकार संबल योजना के पात्र श्रमिकों को अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रुपए, सामान्य मृत्यु के लिए 2 लाख रुपए, दुर्घटना में मृत्यु के लिए 4 लाख रुपए, आंशिक स्थायी दिव्यांगता के लिए 1 लाख रुपए और स्थायी दिव्यांगता के लिए 2 लाख रुपए की अनुग्रह सहायता राशि संबंधित हितग्राहियों या उनके निकटतम परिजन को उपलब्ध कराती है।

    संबल योजना की सहायता राशि वितरण के इस कार्यक्रम में सचिव श्रम  रानी बाटड़ सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

     

  • बालाघाट में चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय मैनपावर सर्वोच्च प्राथमिकता से सुदृढ़ करें : उप मुख्यमंत्री  शुक्ल

    बालाघाट में चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय मैनपावर सर्वोच्च प्राथमिकता से सुदृढ़ करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन, चिकित्सा उपकरणों की कार्यक्षमता और निर्माणाधीन स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने मौसम की वर्तमान स्थिति को देखते हुए वल्नरेबल (संवेदनशील) क्षेत्रों में सुनियोजित कार्ययोजना के अनुसार चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्परता से आवश्यक प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील एवं आवश्यकता वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने बालाघाट जिले में चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय मैनपावर के सुदृढ़ीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक चिकित्सकों, नर्सिंग एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आईपीएचएस-12 के अंतर्गत प्रावधानित पदों पर नियुक्ति के लिए आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने रिक्त पदों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार पदस्थापना एवं भर्ती संबंधी कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध चिकित्सकीय उपकरणों की कार्यक्षमता की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य उपकरणों का उचित रख-रखाव किया जाए और खराब अथवा अनुपयोगी उपकरणों की समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपकरणों की उपलब्धता के साथ-साथ उनकी कार्यशील स्थिति की भी नियमित निगरानी हो, ताकि मरीजों को आवश्यक जांच एवं उपचार की सुविधा निर्बाध रूप से मिल सके।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्माणाधीन स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो और कार्य पूर्ण होने के बाद स्वास्थ्य संस्थानों को शीघ्र जनसेवा के लिए उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग और संस्थानों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करना भी विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण एवं प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए।

    बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  सुखवीर सिंह, आयुक्त स्वास्थ्य  धनराजू एस, अपर संचालक स्वास्थ्य  मनोज सरियाम सहित लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • एमपी ट्रांसको ने सीहोर में किया 50 एमवीए क्षमता का दूसरा पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत: ऊर्जा मंत्री  तोमर

    एमपी ट्रांसको ने सीहोर में किया 50 एमवीए क्षमता का दूसरा पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत: ऊर्जा मंत्री तोमर

    भोपाल 

    ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने सीहोर जिले की पारेषण व्यवस्था को और अधिक विश्वसनीय बनाते हुए 132 केवी सब स्टेशन, गोपालपुर में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर उसे ऊर्जीकृत किया है। साथ ही सब स्टेशन की ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 90 एमवीए हो गई है।

    ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि अब तक इस सब स्टेशन में केवल एक पॉवर ट्रांसफार्मर कार्यरत था। बढ़ते विद्युत भार तथा पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए दूसरा ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। दो पॉवर ट्रांसफार्मरों की उपलब्धता से लोड प्रबंधन बेहतर होगा तथा किसी एक ट्रांसफार्मर के रखरखाव अथवा तकनीकी कारणों से बंद रहने की स्थिति में भी विद्युत पारेषण प्रभावित नहीं होगा।

    ऊर्जीकृत हुआ 27वां एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज पॉवर ट्रांसफार्मर

    एमपी ट्रांसको भोपाल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  राजेश शांडिल्य ने जानकारी दी कि इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही सीहोर जिले में कार्यरत एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज पॉवर ट्रांसफार्मरों की संख्या 27 हो गई है। जिले में एमपी ट्रांसको 11 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण कार्य संचालित कर रही है। इनमें 400 केवी आष्टा, 220 केवी बुधनी तथा 132 केवी गोपालपुर, शाहगंज, सलकनपुर, इछावर, सीहोर, श्यामपुर और नसरुल्लागंज सहित अन्य सब स्टेशन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नए ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2607 एमवीए हो गई है।

    एमपी ट्रांसको की ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 85,398 एमवीए

    एमपी ट्रांसको प्रदेश में 417 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण कार्य संचालित कर रही है, जिनमें 400 केवी के 14, 220 केवी के 88 तथा 132 केवी के 315 सब स्टेशन शामिल हैं।

    कंपनी के प्रदेशभर में कुल 1,055 पॉवर ट्रांसफार्मर क्रियाशील हैं, जिनमें 400 केवी स्तर के 41, 220 केवी स्तर के 220 तथा 132 केवी स्तर के 794 पॉवर ट्रांसफार्मर शामिल हैं। गोपालपुर में 50 एमवीए क्षमता का नया पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत होने से एमपी ट्रांसको की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 85,398 एमवीए हो गई है।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि संकाय के विद्यार्थियों, किसानों और कृषि स्टार्ट-अप प्रतिनिधियों से किया संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि संकाय के विद्यार्थियों, किसानों और कृषि स्टार्ट-अप प्रतिनिधियों से किया संवाद

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवा शक्ति को उन्नत खेती से जोड़ने, किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि उत्पादों के निर्यात पर राज्य सरकार विशेष ध्यान दे रही है। बदलते दौर में खेती का भी समय बदला है। नई तकनीक और नई फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ा रहना आवश्यक है। युवा कृषि संकाय की पढ़ाई कर अपने लिए भविष्य के लिए नए रास्ते बनाएं। किसान, वेयरहाउस, पॉली हाउस स्थापित करें। मध्यप्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ एमओयू किया गया है। राज्य सरकार मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाना चाहती है। दुग्ध उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने में विशेष रूप से सहायक है। राज्य सरकार के प्रयासों से किसानों को अब दूध के दाम 8 से 10 रुपए प्रति लीटर अधिक मिलने लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश युवा आयोग द्वारा आयोजित कृषि नवाचार संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवीन्द्र भवन में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रतिवर्ष एक लाख गिर नस्ल की बछिया तैयार करने की योजना शीघ्र ही क्रियान्वित की जाएगी, इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा। पशुपालकों को उन्नत नस्लें उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की है। किसान खेती के माध्यम से कई लोगों को आजीविका का साधन उपलब्ध करता है और प्रकृति की सेवा भी करता है। किसान का हित राज्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, युवा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रवीण शर्मा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, कृषि स्टार्ट-अप प्रतिनिधियों, एग्रीकल्चर इन्फ्लुएंसर्स तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार कर रहे व्यक्तियों से संवाद किया।

    युवा कृषि की नई तकनीक अपनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने अगले 5 साल में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हमारी कोशिश है कि हर गांव तक स्वच्छ पेयजल और हर खेत तक सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाए। उन्होंने कहा कि हजारों सालों से हमारी पहचान कृषि प्रधान देश की है। राज्य सरकार खेती में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर प्रकार से मदद कर रही है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय की पढ़ाई शुरू करवाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में समृद्ध बनाने के लिए संभाग और जिला स्तर पर कृषि नवाचार संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक और जैविक खेती से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को फसल के लिए एमएसपी पर उचित मूल्य मिले, इसके लिए राज्य सरकार निरंतर किसान हितैषी निर्णय ले रही है। राज्य सरकार ने किसानों को एमएसपी पर हर साल बोनस देकर गेहूं खरीदा है। मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक गेहूं का उपार्जन करने वाला राज्य बना है। सोयाबीन की फसल पर भी किसानों को भावांतर योजना अंतर्गत लाभ दिया गया है।

    खेती को लाभ का व्यवसाय बनाना हमारा लक्ष्य

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आय बढ़ाने के उद्देश्य से युवाओं को बहुफसलीय खेती करने, कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसान कृषि यंत्रों की नई तकनीक को आत्मसात करते हुए नवाचारी तरीकों को आगे बढ़ाएं। पहले किसान एक ही फसल लेते थे, अब दो से तीन फसलें लेने और वैकल्पिक खेती से किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के हित में प्रतिबद्धतापूर्वक निर्णय लेते हुए कृषक कल्याण वर्ष की शुरुआत की है। इसमें फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता के विकास पर विशेष जोर है। उन्होंने कहा खेती को लाभ का व्यवसाय बनाना हमारा लक्ष्य है।

    कृषि क्षेत्र में नवाचार पर हुआ संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कृषि संकाय के विद्यार्थियों, कृषि क्षेत्र में नवाचार कर रहे उद्यमियों और कृषकों ने संवाद किया। इसके अंतर्गत उद्यानिकी फसलों, मोती और मशरूम, एवाकाडो, सोना मोती गेहूं की खेती, पॉलीहाऊस, मधुमक्खी पालन, जैसे नवाचारों, कृषि तकनीक पर विकसित ऐप, शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों आदि पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खेत-खलिहान से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए युवाओं को सकारात्मकता के साथ कृषि क्षेत्र में गतिविधियां संचालित करने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले बंगाल से मछली का बीज मध्यप्रदेश लाकर मछुआरे भाई उत्पादन करते थे। प्रदेश में तालाब और जलाशयों की संख्या पर्याप्त है। राज्य सरकार ने मछली के बीज तैयार करने के लिए तीन हैचरी की शुरुआत की है। मत्स्य पालन के माध्यम से भी युवा बेहतर लाभ कमा रहे हैं।

    प्रदेश में युवाओं को कृषि और कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने की मुहिम जारी

    खेल, युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री श्री सारंग ने कहा कि विकसित भारत के लिए मूल आधार कृषि ही है। भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने 4 वर्गों- गरीब, किसान, युवा और नारी के कल्याण की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि और किसान को समृद्धशाली बनाने के लिए यह वर्ष कृषक कल्याण को समर्पित किया है। प्रदेश में युवाओं को कृषि और कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने की मुहिम जारी है। युवा ही परिवर्तन का आधार बनते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वर्णिम मध्यप्रदेश और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थी, कृषि महाविद्यालयों के फैकल्टी मेंबर, कृषि वैज्ञानिक, कृषि स्टार्ट-अप प्रतिनिधि, युवा सरपंच, कृषि शोधकर्ता, कृषि क्षेत्र में नवाचारों के साथ कार्य करने वाले युवा साथी और कृषि प्रभावक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।