Category: मध्य प्रदेश

  • अवैध शराब के नेटवर्क पर MP पुलिस का करारा प्रहार, बड़ी मात्रा में शराब जब्त

    अवैध शराब के नेटवर्क पर MP पुलिस का करारा प्रहार, बड़ी मात्रा में शराब जब्त

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध प्रदेशभर में लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत दस दिनों के दौरान विभिन्न जिलों में कार्यवाही कर बड़ी मात्रा में अवैध शराब के साथ परिवहन में प्रयुक्त वाहन एवं अन्य सामग्री सहित लगभग कुल 1 करोड़ 23 लाख रूपये से अधिक की सामग्री जब्त की गई है तथा कई आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

    प्रमुख कार्यवाही

    सीहोर

    कोतवाली पुलिस ने बिलकिसगंज-झागरिया रोड पर ग्राम बरखेड़ी के पास घेराबंदी कर भोपाल से गुजरात ले जाई जा रही अवैध अंग्रेजी शराब से भरे ट्रक को पकड़ा। ट्रक की तलाशी लेने पर 325 पेटी अंग्रेजी शराब प्राप्त हुई। शराब ट्रक की बॉडी के दो हिस्सों में बांटकर अंदर बने गुप्त कंपार्टमेंट में छिपाकर रखी गई थी। पुलिस ने ट्रक सहित लगभग 41 लाख रूपये की संपत्ति जब्त की।

    एक अन्य कार्यवाही में शाहगंज पुलिस ने अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक आरोपी  से 72 लीटर अंग्रेजी शराब जब्त की। जब्त शराब की अनुमानित कीमत 44 हजार है। इस प्रकार दोनों कार्यवाही में पुलिस ने  लगभग 41 लाख 44 हजार रूपये की संपत्ति जब्त की।

    टीकमगढ़

    बड़ागांव पुलिस ने अवैध शराब के परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए आयशर ट्रक से 281 पेटी देशी शराब सहित लगभग 28 लाख 75 हजार रूपये की संपत्ति जब्त की। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

    नीमच

    पुलिस चौकी नयागांव, थाना जावद ने  कार्रवाई करते हुए टाटा कंपनी के ट्रक से 335 पेटी अंग्रेजी शराब सहित लगभग 20 लाख 10 हजार रूपये की संपत्ति जब्त की है।

    आलीराजपुर

    सोरवा पुलिस ने अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 306 पेटी शराब जब्त की है। जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख 97 हजार रूपये है।

    उज्जैन

    उज्जैन पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 405 बल्क लीटर अवैध शराब व स्कॉर्पियो सहित लगभग 10 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है। आरोपियों के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

    कटनी

    बिलहरी पुलिस ने अवैध शराब परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक अर्टिगा कार से 20 पेटी देशी शराब बरामद की। शराब परिवहन में प्रयुक्त अर्टिगा कार सहित लगभग 7 लाख 98 हजार रूपये की संपत्ति जब्त की है।

    विदिशा

    कोतवाली पुलिस ने अनुपम मेगा सिटी स्थित एक मकान पर कार्रवाई करते हुए 87 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब एवं 02 डीप फ्रीजर बरामद किए। जब्त संपत्ति की कुल कीमत लगभग 2 लाख 50 हजार रूपये है।

    पन्ना

    कोतवाली पुलिस ने अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 93 लीटर 930 मिलीलीटर अवैध अंग्रेजी एवं देशी शराब सहित लगभग 1 लाख रूपये की संपत्ति जब्त की है।

    भिंड

    थाना कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर शराब की डिलीवरी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर 54 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब सहित लगभग 1 लाख 10 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध शराब के नेटवर्क, तस्करी एवं अवैध परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है।

     

  • बारिश को लेकर MP में अलर्ट, 16 जिलों में भारी बारिश का अनुमान

    बारिश को लेकर MP में अलर्ट, 16 जिलों में भारी बारिश का अनुमान

    भोपाल

    प्रदेश में वर्षा का सिलसिला जारी है। मंगलवार को दिन में खरगोन में 24 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा जबलपुर में नौ मिलीमीटर, सतना में सात मिलीमीटर और बैतूल में छह मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। वहीं भोपाल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, इंदौर, छतरपुर जिले के खजुराहो, मंडला, रतलाम, सीधी और उज्जैन में बूंदाबांदी और बौछारें पड़ीं।

    प्रदेश में रुक-रुक कर हो रही वर्षा के कारण दिन का अधिकतम तापमान सामान्य या उससे कम रिकॉर्ड किया गया। उज्जैन और उमरिया को छोड़कर बाकी सभी जिलों में रात का तापमान भी सामान्य रहा। राजधानी भोपाल में दोपहर को कुछ समय के लिए धूप निकली, लेकिन बाद में कहीं-कहीं बूंदाबांदी के साथ बौछारें पड़ीं।

    दतिया, भिंड और सागर में अति भारी बारिश की चेतावनी

    मौसम केंद्र के अनुसार, बुधवार को दतिया, भिंड और सागर में अति भारी वर्षा के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं विदिशा, रायसेन और सीहोर समेत 16 जिलों में भारी वर्षा के साथ गरज-चमक के आसार हैं। भोपाल, नर्मदापुरम और बैतूल समेत कई अन्य जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा होगी।

    शाम 5:30 बजे तक प्रमुख शहरों में दर्ज वर्षा (मिलीमीटर में)

        बैतूल: 6.0
        भोपाल: 1.0
        ग्वालियर: 0.7
        नर्मदापुरम: 1.0
        इंदौर: 1.0
        जबलपुर: 9.0
        खजुराहो: 4.0
        मंडला: 0.8
        रतलाम: 2.0
        सीधी: 1.0
        उज्जैन: 4.0

    प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में)

    भोपाल: अधिकतम 27.2 | न्यूनतम 23.4

    इंदौर: अधिकतम 28.4 | न्यूनतम 23.3

    ग्वालियर: अधिकतम 32.4 | न्यूनतम 26.3

    जबलपुर: अधिकतम 30.2 | न्यूनतम 23.5

  • आजादी के बाद पहली बार खेल बजट में 8 गुना बढ़ोतरी! मंत्री सारंग ने नई खेलो इंडिया योजना की दी जानकारी

    आजादी के बाद पहली बार खेल बजट में 8 गुना बढ़ोतरी! मंत्री सारंग ने नई खेलो इंडिया योजना की दी जानकारी

    मंत्री सारंग ने नई खेलो इंडिया योजना की दी जानकारी

    आजादी के बाद पहली बार 8 गुना बढ़ा खेल का बजट
    नई योजना से 10 गुना ज्यादा खिलाड़ी होंगे लाभान्वित
    ज़मीनी स्तर से लेकर ओलंपिक स्तर तक होगा प्रतिभा विकास
    मध्यप्रदेश में योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये होंगे सार्थक प्रयास

    भोपाल 

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई खेलो इंडिया योजना के लिये वर्ष 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिये ₹36,441 करोड़ राशि की मंज़ूरी प्रदान की है। इसको लेकर खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में योजना के संबंद्ध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। मंत्री सारंग कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस योजना का लक्ष्य जमीनी स्तर से लेकर ओलंपिक स्तर तक खिलाड़ियों की पूरी विकास-श्रृंखला तैयार कर भारत को खेल महाशक्ति बनाना है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस योजना के माध्यम से खेल को युवा विकास, राष्ट्र निर्माण तथा भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जाएगा। मंत्री सारंग ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार खेल का बजट 8 गुना बढ़ा है। इस नई योजना के माध्यम से 10 गुना ज्यादा खिलाड़ी लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये सार्थक प्रयास करेगा।

    खेलो भारत और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को किया गया एकीकृत

    मंत्री सारंग ने बताया कि यह योजना खेलों को शिक्षा, फिटनेस, प्रौद्योगिकी एवं उच्च-प्रदर्शन प्रशिक्षण के साथ एकीकृत करते हुए खेलो भारत नीति 2025 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करेगा। मंत्री सारंग ने कहा कि स्कूलों से खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचान की जाएगी। इससे प्रारंभिक स्तर पर ही प्रतिभा विकास कर भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिये उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार किए जा सके।

    ज़मीनी स्तर से लेकर ओलंपिक स्तर तक होगा प्रतिभा विकास

    मंत्री सारंग ने बताया कि यह नई योजना प्रतिभा पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित प्रतिस्पर्द्धाओं, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव तथा ओलंपिक तैयारियों को सम्मिलित करते हुए खिलाड़ियों के लिये एक संरचित विकास मार्ग तैयार करेगा। इसमें ज़मीनी स्तर की प्रतियोगिताओं से प्रारंभ होकर खेलो इंडिया कार्यक्रम तथा टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) तक प्रगति का प्रावधान शामिल है।

     खेल से जुड़ी सभी संस्थाओं में आएगी एकरुपता

    मंत्री सारंग ने बताया कि इस नई योजना में देशव्यापी खेल पारिस्थितिकी तंत्र राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE), खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र (KISCE), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) प्रशिक्षण केंद्रों, मान्यता प्राप्त खेल अकादमियों, खेलो इंडिया केंद्रों तथा सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियों को सम्मिलित करते हुए विकसित किया जाएगा। इससे खेल से जुड़े सभी संस्थाओं में एकरुपता आएगी।

    स्कूल एवं प्रतिभा विकास पहल

    मंत्री सारंग ने बताया कि स्कूल टैलेंट सर्च का बहुत बड़ा आधार बने इसका लक्ष्य रखा गया है। नवीन खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय खेलों को शिक्षा प्रणाली के साथ एकीकृत करेंगे। वहीं इमरजिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (E-KIAs) श्रेणी के माध्यम से संरचित एथलीट पूल का लगभग 10 गुना तक विस्तार किया जाएगा।

    फिट इंडिया एवं नशामुक्त युवा कार्यक्रम का प्रावधान शामिल

    मंत्री सारंग ने बताया कि फिट इंडिया मूवमेंट का विस्तार सक्रिय एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने, महिलाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने, सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक खेल सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। मादक द्रव्यों के सेवन के विरुद्ध खेल-आधारित पहलों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह पैरा-एथलीटों, पारंपरिक खेलों तथा सामुदायिक विकास को भी बढ़ावा देगा।

    कोच, टेक्नोलॉजी एवं साझेदारी से खेल व्यवस्था होगी सुदृढ़

    मंत्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय कोच मान्यता बोर्ड, कोचिंग योग्यताओं के मानकीकरण में सहायता करेगा। साथ ही एकीकृत डिजिटल खेल मंच तथा निजी खेल अकादमियों एवं कॉर्पोरेट संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से योजना निर्माण, शासन व्यवस्था, खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा एथलीट सहायता प्रणाली को सुदृढ़ किया जाएगा।

    योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में तैयार होगी विशेष रणनीति 

    मंत्री सारंग ने बताया कि खेलो इंडिया योजना के नए चरण में मध्यप्रदेश को खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में खेलों के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जाएगा। भोपाल में स्पोर्ट्स हब विकसित करने की दिशा में काम होगा। प्रदेश में पहले से संचालित 52 खेलो इंडिया सेंटर को और मजबूत किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खेल प्रतिभा और क्षमता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।

    विकसित भारत 2047 का संकल्प होगा मजबूत

    मंत्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) को बढ़ी हुई सहायता के माध्यम से कोचिंग, खेल उपकरण, खेल विज्ञान, विदेशी विशेषज्ञों की सेवाओं तथा अंतर्राष्ट्रीय अनुभव के लिये वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना वर्ष 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के लिये भारत की तैयारियों, ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेलों की मेज़बानी की आकांक्षाओं तथा विकसित भारत 2047 का संकल्प होगा मजबूत।

  • सभी वर्गों के सहयोग और संत-महात्माओं के मार्गदर्शन से होगा सिंहस्थ का ऐतिहासिक आयोजन

    सभी वर्गों के सहयोग और संत-महात्माओं के मार्गदर्शन से होगा सिंहस्थ का ऐतिहासिक आयोजन

    भोपाल 

    बाबा महाकाल की कृपा से सिंहस्थ-2028 महापर्व का आयोजन भव्य, दिव्य, अद्भुत और अलौकिक होगा। सिंहस्थ के दृष्टिगत उज्जैन में किए जा रहे विकास कार्यों से महापर्व के पूर्व उज्जैन का सुंदर और सुव्यवस्थित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष  जगदीश अग्रवाल के दायित्व ग्रहण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के लिए संत, प्रशासन, संगठन सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी भूमिका का निर्वहन करे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत-महात्माओं के मार्गदर्शन में शासन-प्रशासन द्वारा सिंहस्थ महापर्व के लिए श्रद्धालुओं एवं साधु-संतों की सुविधा और सेवा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सिंहस्थ का आयोजन सभी की सहभागिता से होगा। जिन किसानों के पास भूमि उपलब्ध है, वे अपनी भूमि पर स्कूल, अस्पताल और हॉस्टल जैसी सुविधाएं विकसित करें, इसमें सरकार सहयोग करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के साथ गौरव जुड़ा हुआ है और सनातन धर्म की पहचान संत-महात्माओं के कारण बनी है। उन्होंने सिंहस्थ की तैयारियों के लिए किए जा रहे विकास कार्यों में सभी वर्गों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न धर्मों के लोगों ने धर्मस्थलों के लिए अपनी जगह उपलब्ध कराकर सहयोग किया है। अनेक नागरिकों ने अपने मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जगह भी स्वेच्छा से उपलब्ध कराई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में उज्जैन के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी विकास किया जाएगा, जिससे ये धार्मिक स्थल और अधिक भव्य स्वरूप में नजर आएंगे।

    कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद संत बालयोगी  उमेश नाथ महाराज ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ध्यान सिंहस्थ को भव्य स्वरूप देने पर केंद्रित है। स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत  रामेश्वरदास महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं। वर्ष 2028 का कुंभ भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आगामी सिंहस्थ महापर्व का आयोजन अद्भुत होगा।

    सांसद  अनिल फिरोजिया ने संबोधित करते हुए कहा कि सिंहस्थ महापर्व सनातन धर्म का विश्व का सबसे बड़ा मेला है। आयोजन की तैयारियों भी उसी के अनुरूप की जा रही है।  फिरोजिया ने कहा कि महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल का आभा मंडल विश्व में प्रचारित हुआ है।

    सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष  संजय अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ पर्व की ऐतिहासिक आयोजन की तैयारी शुरू हो गयी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के विकास के लिए कृतसंकल्पित हैं। सिंहस्थ के आयोजन में हम सभी मेजबान की भूमिका में हैं।

    पूजन कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ग्रहण किया दायित्व

    सिंहस्थ मेला कार्यालय परिसर में आयोजित दायित्व ग्रहण समारोह में  जगदीश अग्रवाल ने संत-महंतों की उपस्थिति में अध्यक्ष कक्ष में भगवान महाकाल की तस्वीर का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने अध्यक्ष पद का दायित्व ग्रहण किया। कार्यक्रम में महापौर  मुकेश टटवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  रवि सोलंकी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। समारोह में महंत  भगवान दास महाराज निर्मोही अखाड़ा, महंत  दिग्विजय दास निर्वाणी अखाड़ा, महंत  दिग्विजय दास महाराज दिगंबर अखाड़ा, महंत  देवगिरी महाराज अटल अखाड़ा, महंत  करणपुरी महाराज आवाहन अखाड़ा, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष  ओम जैन, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष  सौभाग्य सिंह, उज्जैन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  मुकेश यादव, पूर्व विधायक  राजेंद्र भारती,  रामलाल मालवीय,  जगदीश पांचाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन  कमल बैरवा ने किया तथा आभार  जगदीश पांचाल ने

     

  • महिला सुरक्षा और न्याय में संवेदनशीलता पर जोर, पीड़ित को ‘केस’ नहीं व्यक्ति मानने की जरूरत

    महिला सुरक्षा और न्याय में संवेदनशीलता पर जोर, पीड़ित को ‘केस’ नहीं व्यक्ति मानने की जरूरत

    भोपाल 

    महिला सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग एवं जनसाहस फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को "सर्वाइवर सेन्ट्रिक स्ट्रेटजी एवं जस्टिस" विषय पर राज्य स्तरीय एक दिवसीय रणनीतिक संवाद कार्यशाला हुई। कार्यशाला में पुलिस, विधिक सेवा, चिकित्सा, बाल संरक्षण एवं महिला सुरक्षा से जुड़े विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने पीड़ित महिला को शिकायत से लेकर न्याय, उपचार, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग और सम्मानजनक पुनर्वास तक समग्र सहायता उपलब्ध कराने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

    पीड़िता की गरिमा और संवेदनशीलता को प्राथमिकता

    कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिला हिंसा से जुड़े किसी भी प्रकरण में पीड़िता को केवल एक ‘केस’ या प्रकरण के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में देखा जाए। उसकी सुरक्षा, गरिमा, गोपनीयता, मानसिक स्वास्थ्य, न्याय और आर्थिक आत्मनिर्भरता को समान प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय हो और पीड़िता को सहायता प्राप्त करने के लिए बार-बार अपनी पीड़ा दोहराने के लिए मजबूर न होना पड़े।

    स्वावलंबन और साइबर सुरक्षा पर बल

    आयोग की सदस्य मती साधना स्थापक ने कहा कि हिंसा के अनेक रूप हैं और समाज को हर प्रकार की हिंसा के विरुद्ध मजबूती से खड़ा होना होगा। महिलाओं का स्वावलंबी और सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों की चुनौती भी बढ़ रही है, इसलिए महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने पाठ्यक्रम में महिला क्रांतिकारियों और उनके संघर्षों को शामिल करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी महिलाओं के योगदान और संघर्ष से प्रेरणा ले सकेगी।

    संवेदनशील सुनवाई और पुनर्वास की आवश्यकता

    मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मती निवेदिता शर्मा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े किसी भी प्रकरण में सबसे पहले संवेदनशीलता के साथ पीड़ित की बात सुनी जानी चाहिए। प्रकरण की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए उसके सामाजिक और पारिवारिक परिवेश को जानना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के साथ पीड़ित के पुनर्वास को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने मामलों में आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया की कमियों को दूर करने तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े विभागों के संयुक्त प्रशिक्षण और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने काउंसलिंग को भी पीड़ित सहायता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

    जरूरतों के अनुरूप सहायता और संवेदनशील काउंसलिंग

    मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सु सुमन वास्तव ने कहा कि पीड़ित की वास्तविक जरूरतों को समझकर उसी के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अनावश्यक हस्तक्षेप या ओवरस्टेपिंग से बचना जरूरी है। विशेष रूप से दिव्यांग पीड़ितों के मामलों में उनकी परिस्थितियों को समझते हुए संवेदनशील काउंसलिंग और सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    संयुक्त प्रशिक्षण और ई-फाइलिंग पर जोर

    डीआईजी कम्युनिटी पुलिसिंग  विनीत कपूर ने महिला और बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस व्यवस्था के स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने पुलिस, महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े विभागों तथा विभिन्न पुलिस विंग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रभावी ई-फाइलिंग तथा पुलिस, चिकित्सा, विधिक सहायता और समुदाय के साथ काम करने वाली संस्थाओं के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि पीड़ित को मुख्यधारा में लौटने तक सहायता मिलती रहे।

    अस्पताल स्तर से ही सम्मानजनक व्यवहार की शुरुआत

    डीसीपी, पुलिस कमिश्नरेट भोपाल मती मंजू लता खत्री ने महिला हिंसा के मामलों में संवेदनशील पुलिस रिस्पोंस को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब कोई पीड़ित महिला अस्पताल पहुंचती है, तब उसके सम्मान और गरिमा की रक्षा की प्रक्रिया अस्पताल के गेट पर मौजूद सुरक्षा गार्ड से ही शुरू हो जानी चाहिए। पीड़िता के साथ व्यवहार के प्रत्येक स्तर पर संवेदनशीलता और सम्मान सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

    समयबद्ध न्याय और विभागों के बीच समन्वय

    कार्यशाला के प्रथम सत्र में मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव  सुरेश तोमर ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अन्याय एवं विभिन्न प्रकार की समस्याओं के समाधान के लिए समय पर सहायता और न्याय उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय महत्वपूर्ण है।

    आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही संभव है सम्मानजनक पुनर्वास

    कार्यशाला में महिला-केंद्रित मेडिको-लीगल सहायता, पुलिस रिस्पांस, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक परामर्श और आर्थिक पुनर्वास जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि चिकित्सा परीक्षण, पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान महिला की गरिमा, गोपनीयता और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सहायता की प्रक्रिया को सहज और निरंतर बनाया जाना चाहिए।

     

  • SC वर्ग के कल्याण पर सरकार का फोकस, मंत्री चौहान बोले- हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

    SC वर्ग के कल्याण पर सरकार का फोकस, मंत्री चौहान बोले- हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

    अनुसूचित जाति वर्ग का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता- मंत्री चौहान

    पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
    मंत्रालय में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के कार्यों और योजनाओं की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

    भोपाल 

    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग का कल्याण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक अनिवार्य रूप से पहुंचे, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन स्तर में प्रभावी सुधार लाया जा सके। मंत्री नागर ने मंत्रालय में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। 

    मंत्री चौहान ने भिंड, मुरैना, शाजापुर और विदिशा में स्वीकृत कन्या छात्रावासों का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में आ रही किसी भी तरह की कठिनाई का निराकरण स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला स्तरीय अधिकारियों से समन्वय बनाकर तुरंत किया जाए। उन्होंने आगामी बैठक में छात्रावास निर्माण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान पूर्व से निर्माणाधीन एवं नवीन स्वीकृत छात्रावासों के निर्माण कार्य की अद्यतन स्थिति तथा संत रविदास सामुदायिक भवनों के निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया गया।

    सीएम हेल्पलाइन पर छात्रवृत्ति से संबंधित प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निराकरण करे

    बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बजट आवंटन और व्यय की समीक्षा की गई। मंत्री नागर ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना, अत्याचार निवारण अधिनियम 1989, प्री और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, कक्षा 1 से 8 तक दी जाने वाली छात्रवृत्ति, दिल्ली छात्रवृत्ति, परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण और आवास सहायता योजना की समीक्षा की। मंत्री नागर ने निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन पर छात्रवृत्ति से संबंधित प्राप्त शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। शिकायतों को उनके कारणों के अनुसार श्रेणीवार विभाजित कर शीघ्रता से निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

    इसके अतिरिक्त, ज्ञानोदय विद्यालयों में इनडोर स्टेडियम के निर्माण, प्राचार्यों एवं शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने, शैक्षणिक एवं अधोसंरचना विकास की योजनाओं, स्वरोजगार योजनाओं, आकांक्षा योजना तथा विभाग द्वारा वितरित किए जाने वाले विभिन्न पुरस्कारों एवं सम्मान योजनाओं की भी समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह और अपर आयुक्त संजय वार्ष्णेय सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित

     

  • मुख्यमंत्री ने डबरा में आयोजित हुए “बलराम कृषि महोत्सव” को वर्चुअली संबोधित किया

    मुख्यमंत्री ने डबरा में आयोजित हुए “बलराम कृषि महोत्सव” को वर्चुअली संबोधित किया

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा ग्वालियर का नाम लेते ही गौरव की अनुभूति होती है। ग्वालियर की जितनी प्रसिद्धि संगीत सम्राट तानसेन से है, उतनी ही प्रसिद्धि यहाँ की गज़क, किसान और जवानों से भी है। शिक्षा, रक्षा, कृषि, फूड प्रोसेसिंग और दुग्ध उत्पादन में ग्वालियर संभाग पूरे प्रदेश में अग्रणी है। ग्वालियर कृषि के क्षेत्र में भी पंजाब और हरियाणा से आगे पहुँचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर जिले के डबरा तहसील प्रांगण में “बलराम कृषि महोत्सव” के तहत आयोजित हुए कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा वर्तमान वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी के तहत किसानों की सेवा व समृद्धि के लिये “बलराम कृषि महोत्सव” मनाए जा रहे हैं। भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण एवं सामाजिक न्याय मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर तेजी के साथ विकास की ओर अग्रसर है। ग्वालियर टेलीकॉम इंडस्ट्रीज का भी बड़ा हब बनने जा रहा है। उन्होंने कहा ग्वालियर क्षेत्र का सेंडस्टोन, पीला सोना यानि सरसों, कनक जैसे गेहूँ और मसूर व चने ने ग्वालियर जिले का परचम पूरे देश में लहराया है। ग्वालियर निश्चित ही कृषि के क्षेत्र में पंजाब और हरियाणा से भी आगे पहुँचेगा। मुख्यमंत्री ने ग्वालियर स्थित प्रदेश की सबसे बड़ी आदर्श गौशाला लाल टिपारा की भी सराहना की। उन्होंने कहा इस गौशाला से प्रेरणा लेकर प्रदेश में अन्य गौशालायें स्थापित हो रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों का आह्वान किया कि वे अपनी फार्मर आईडी अवश्य बनवाएं। यह आईडी किसान भाईयों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ उन्हें खेती किसानी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध करायेगी। किसान अपने खेत की ताकत पहचानें। केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रहकर फसल विविधीकरण व प्राकृतिक खेती अपनाएं और उन्नत पशुपालन करें। दुग्ध उत्पादन आर्थिक उन्नति का त्वरित माध्यम है।

    रबी फसलों की सिंचाई के लिये रात को भी मिलेगी बिजली

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान भाईयों को गेहूँ व चना इत्यादि रबी फसलों की सिंचाई के लिये अब दिन के समय भी बिजली उपलब्ध करायेगी। साथ ही कहा कि सरकार ने किसानों के हित में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत वृंदावन गाँव स्थापित करने का महात्वाकांक्षी निर्णय लिया है। इससे गाँव की प्रगति होगी। इसी तरह शहरों में गीता भवन बनवाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आह्वान किया कि किसान अपनी जमीन सुरक्षित रखें और विवाहों में होने वाले फिजूलखर्च से बचें। अपने पुत्र-पुत्रियों का विवाह सामूहिक विवाह सम्मेलन में करें। मुख्यमंत्री ने सभी को रक्षाबंधन एवं जन्माष्टमी की बधाई भी दी।

    किसानों एवं उनके मेधावी बच्चों का हुआ सम्मान, हितलाभ बँटे, प्रदर्शनी भी लगीं

    डबरा मंडी प्रांगण में आयोजित हुए “बलराम कृषि महोत्सव” में अपेक्स बैंक के प्रशासक  महेन्द्र सिंह यादव सहित अन्य अतिथियों ने भगवान बलराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मंच से जिले के प्रगतिशील किसानों एवं किसानों के मेधावी बच्चों को सम्मानित किया। साथ ही सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत हितलाभ भी वितरित किए गए। इस अवसर पर नवीन कृषि तकनीकों, जैविक खेती, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक व उन्नत पशुपालन पर प्रदर्शनी भी लगाई गई। साथ ही कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण एवं उन्नत कृषि की बारीकियां बताईं गईं।

    किसान कल्याण वर्ष में किसानों के हित में जुड़ रहे हैं नए-नए आयाम

    अपेक्स बैंक के प्रशासक  महेन्द्र सिंह यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मौजूदा साल को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उनकी यह किसान हितैषी पहल अत्यंत सराहनीय है। किसान कल्याण वर्ष के तहत किसानों के हित में प्रदेश में तमाम नए आयाम जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सहकारिता में सदस्यता दिलाने के लिये विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि सरकार की योजनायें किसानों तक पहुँचें।

    किसानों को मिली ड्रोन तकनीक से लेकर डिजिटल कृषि सेवाओं की जानकारी

    डबरा में “बलराम कृषि महोत्सव” के तहत आयोजित होने जा रहे कार्यक्रम में किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं, मौसम आधारित खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई, उन्नत कृषि यंत्रों एवं आधुनिक कृषि प्रबंधन प्रणालियों के संबंध में किसानों को प्रदर्शनी एवं विषय विशेषज्ञों के माध्यम से जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञ किसानों को बदलती जलवायु के अनुरूप खेती की नई पद्धतियों, फसल उत्पादन में आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा कृषि जोखिमों के प्रभावी प्रबंधन के उपायों से भी अवगत कराया। इस अवसर पर सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे बिलौआ के कृषक  प्राण सिंह सहित अन्य किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कृषि महोत्सव में मनोहारी व देशभक्तिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी हुई।

    “बलराम कृषि महोत्सव” में पूर्व मंत्री मती इमरती देवी, प्रदेश भर में आयोजित हो रहे बलराम महोत्सव एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के संयोजक  कपिल यार्दे,  प्रेम सिंह राजपूत, जनपद पंचायत डबरा की अध्यक्ष मती प्रवेश गुर्जर, जिला पंचायत की उपाध्यक्ष मती प्रियंका सिंह घुरैया, किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष  अमरदीप ओलख एवं जिला पंचायत के सदस्यगणों समेत अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा कलेक्टर मती रुचिका चौहान, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सोजान सिंह रावत, एसडीएम डबरा मती जुही गर्ग एवं उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास  भानु प्रकाश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जिले भर से आए प्रगतिशील कृषक मौजूद थे।

     

  • मध्यप्रदेश पुलिस की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

    मध्यप्रदेश पुलिस की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर जबलपुर में कार्यरत सु वर्षा पटेल ने 21 अगस्त 2026 को यूरोप महाद्वीप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस (18,510 फीट/5,642 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह कर शिखर पर भारत का तिरंगा और मध्यप्रदेश पुलिस का ध्वज फहराकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। कठिन मौसम, तेज हवाओं और कड़ाके की ठंड के बीच वर्षा पटेल ने साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए 21 अगस्त की सुबह 9 बजकर 7 मिनट पर माउंट एल्ब्रुस के शिखर पर पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की।

    पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सु वर्षा पटेल को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बीच माउंट एल्ब्रुस जैसी चुनौतीपूर्ण चोटी को फतह कर तिरंगा फहराना पूरे पुलिस विभाग के लिए गर्व का विषय है। वर्षा पटेल ने अपने साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से न केवल मध्यप्रदेश पुलिस, बल्कि प्रदेश और देश का नाम भी गौरवान्वित किया है। उनकी उपलब्धि पुलिस बल की महिला सदस्यों के साथ-साथ प्रदेश की बेटियों के लिए भी प्रेरणादायक है।

    माउंट एल्ब्रुस अभियान की शुरुआत 11 अगस्त 2026 को हुई थी। अभियान के दौरान लगातार बदलते मौसम, तेज हवाओं, अत्यधिक ठंड और प्रतिकूल पर्वतीय परिस्थितियों के कारण दल को कई दिनों तक अनुकूल मौसम का इंतजार करना पड़ा। 20 और 21 अगस्त को मौसम अनुकूल होने पर शिखर अभियान शुरू किया गया। रूस की कड़ाके की ठंड और तेज हवाओं के बीच वर्षा पटेल ने सभी चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना किया और 21 अगस्त की सुबह माउंट एल्ब्रुस के शिखर पर पहुंचकर तिरंगा फहराया।

    सु वर्षा पटेल को बचपन से ही खेलकूद और पर्वतारोहण में विशेष रुचि रही है। वे बेसबॉल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर 10 से अधिक पदक प्राप्त कर चुकी हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप की सर्वोच्च चोटी माउंट कोज़ियास्को पर भारत का तिरंगा फहराकर मध्यप्रदेश पुलिस की पहली महिला आरक्षक के रूप में यह उपलब्धि हासिल की थी।

    सु वर्षा पटेल की यह उपलब्धि महिला शक्ति, खेल प्रतिभा, अनुशासन, साहस और दृढ़ संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण है। मध्यप्रदेश पुलिस की वर्दी से लेकर दुनिया की ऊंची पर्वत चोटियों तक वर्षा पटेल ने अपने साहस, संघर्ष और संकल्प से तिरंगे को नई ऊंचाई दी है। उनकी यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस परिवार के साथ-साथ पूरे प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय है।

     

  • मंत्रालय में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के कार्यों और योजनाओं की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

    मंत्रालय में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के कार्यों और योजनाओं की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

    भोपाल 

    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग का कल्याण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक अनिवार्य रूप से पहुंचे, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन स्तर में प्रभावी सुधार लाया जा सके। मंत्री  नागर ने मंत्रालय में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। 

    मंत्री  चौहान ने भिंड, मुरैना, शाजापुर और विदिशा में स्वीकृत कन्या छात्रावासों का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में आ रही किसी भी तरह की कठिनाई का निराकरण स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला स्तरीय अधिकारियों से समन्वय बनाकर तुरंत किया जाए। उन्होंने आगामी बैठक में छात्रावास निर्माण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान पूर्व से निर्माणाधीन एवं नवीन स्वीकृत छात्रावासों के निर्माण कार्य की अद्यतन स्थिति तथा संत रविदास सामुदायिक भवनों के निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया गया।

    सीएम हेल्पलाइन पर छात्रवृत्ति से संबंधित प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निराकरण करे

    बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बजट आवंटन और व्यय की समीक्षा की गई। मंत्री  नागर ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना, अत्याचार निवारण अधिनियम 1989, प्री और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, कक्षा 1 से 8 तक दी जाने वाली छात्रवृत्ति, दिल्ली छात्रवृत्ति, परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण और आवास सहायता योजना की समीक्षा की। मंत्री  नागर ने निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन पर छात्रवृत्ति से संबंधित प्राप्त शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। शिकायतों को उनके कारणों के अनुसार श्रेणीवार विभाजित कर शीघ्रता से निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

    इसके अतिरिक्त, ज्ञानोदय विद्यालयों में इनडोर स्टेडियम के निर्माण, प्राचार्यों एवं शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने, शैक्षणिक एवं अधोसंरचना विकास की योजनाओं, स्वरोजगार योजनाओं, आकांक्षा योजना तथा विभाग द्वारा वितरित किए जाने वाले विभिन्न पुरस्कारों एवं सम्मान योजनाओं की भी समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव  गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह और अपर आयुक्त  संजय वार्ष्णेय सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित

     

  • अयोध्या में मछली की दावत सनातन आस्था का अपमान डॉ. विक्रमादित्य, पीतांबरा पीठाधीश एवं अध्यक्ष, विवेकानंद प्रतिष्ठान

    अयोध्या में मछली की दावत सनातन आस्था का अपमान डॉ. विक्रमादित्य, पीतांबरा पीठाधीश एवं अध्यक्ष, विवेकानंद प्रतिष्ठान

    हम जब भी सनातन आस्था और मर्यादा की बात करते हैं, बरबस ही अयोध्या का नाम आ जाता है। ऐसा इसलिए कि अयोध्या वह भूमि है, जिसे सदियों से मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जन्मस्थली के रूप में पूजा जाता रहा है और जो आज भी करोड़ों सनातनियों के लिए आस्था का सबसे संवेदनशील केंद्र है। राम मंदिर के निर्माण के बाद से अयोध्या पूरे हिंदू समाज के आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुकी है। इसीलिए रामनगरी में विशेष और अनुशासित आचरण की अपेक्षा की जाती है। लेकिन, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद कांवड़ मार्ग पर ही मछली-भात भोज में शामिल होकर ऐसा आचरण किया, जो सनातनियों को विचलित कर देने वाला है। सार्वजनिक जीवन जीने वाला कोई व्यक्ति य़दि इस तरह का कोई कृत्य करता है तो इसे अनायास नहीं माना जा सकता। मंदिर में दर्शन करने के बाद यदि कोई मछली-भात में शामिल होता है तो यह सायास है और इसके पीछे कोई न कोई तो मंशा होगी ही। 

    अपराध है जान-बूझकर किया गया पाखंड

    अजय राय के समर्थन में यह तर्क दिया जा सकता है कि मछली खाना कोई पाप नहीं, बल्कि भारत के कई हिस्सों की सांस्कृतिक परंपरा में शामिल है। बंगाल हो, पूर्वोत्तर हो या तटीय भारत, मछली वहां की भोजन का थाली का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन यहां सवाल मछली खाने का नहीं है। सवाल यह है कि क्या मंदिर में ‘राम-राम’ जपने के बाद धार्मिक नगरी अयोध्या में और वह भी कांवड़ यात्रियों के मार्ग पर मांसाहार परोसना उचित है?  हमारे धर्मग्रंथों में कहा गया है कि जो भोजन अशुद्ध, अनुचित समय और अनुचित परिस्थिति में ग्रहण किया जाए, वह तामसिक प्रवृत्ति का सूचक है। जो व्यक्ति एक राजनीतिक दल का है, प्रदेश अध्यक्ष जैसे पद पर बैठा है, वह मंदिर जाता है, दर्शन-पूजन करता है तो उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह देश-काल और धर्मग्रंथों का सम्मान करेगा। यह समझना ज़रूरी है कि भारतीय समाज में खान-पान पर कोई सार्वभौमिक प्रतिबंध कभी नहीं रहा। समस्या मांसाहार में नहीं, बल्कि ‘अवसर के चयन’ में है। कोई व्यक्ति अपने घर में जो चाहे खाए, यह उसका अधिकार है। परंतु कोई व्यक्ति जब धार्मिक यात्रा मार्ग पर, धार्मिक अवसर पर, ऐसा आयोजन करता है, तो वह निजी क्षेत्र से निकलकर सार्वजनिक क्षेत्र में आता है, जहां उसके विवेक पर सवाल उठेगा। यह भी पूछा जाएगा कि निषाद मतों के विभाजन के लिए क्या इतना नीचे गिरा जा सकता है।

    विपक्ष का पैटर्न है श्रद्धा के केंद्रों को निशाना बनाना

    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के इस कृत्य के संदर्भ में कई और घटनाएं भी प्रासंगिक हो उठी हैं। कुछ महीने पहले वाराणसी में मोक्षदायिनी गंगा की लहरों पर नाव में इफ्तार पार्टी आयोजित की गई, आरोप लगा कि नॉनवेज बिरयानी खाई गई और उसके अवशेष सीधे गंगा में फेंके गए। पुलिस को इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार करना पड़ा। इसके कुछ ही हफ्तों बाद सरयू में नाव पर डीजे की धुन पर बीयर पार्टी का वीडियो वायरल हुआ। इन दोनों ही घटनाओं में धार्मिक अस्मिता का वैसा ही प्रश्न खड़ा होता है, जैसा कि अयोध्या में मछली-भात भोज को लेकर खड़ा हुआ है। यह तीनों घटनाएं अलग-अलग व्यक्तियों और संगठनों से जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन इनका सामूहिक प्रभाव एक जैसा है। सनातन प्रतीकों की मर्यादा को बार-बार परखा जाना। यह उस विचारधारा का विस्तार लगता है जो सनातन प्रतीकों का अपमान कर प्रतिक्रिया पाना चाहती है। यह वोट बैंक के लिए आस्था को कुचलने की साजिश है। 

    जायज है संत समाज का गुस्सा

    इस तरह के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख किसी से छिपा नहीं है। इसीलिए उनकी तीखी प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक थी। यदि सीएम कहते हैं कि ऐसे लोगों के सामने गिरगिट भी शरमा जाए तो यह सिर्फ अलंकारिक तीखापन भर नहीं है। यह उस आम श्रद्धालु की भावना की अभिव्यक्ति है, जो यह देखता है कि जिस नेता ने अभी-अभी बजरंग बली के सामने दंडवत किया, कुछ घंटों बाद मछली की दावत उड़ा रहा है तो उसके दिल पर चोट पहुंचती है। यह दोहरा आचरण है, और दोहरे आचरण की सबसे बड़ी कीमत यह होती है कि वह आस्था को तमाशा बना देता है। संत समाज का गुस्सा भी जायज है। महामंडलेश्वर विष्णु दास, महंत सीताराम दास और सनातन रक्षक संघ जैसे संगठनों के प्रतिनिधि कोई राजनीतिक प्रवक्ता नहीं हैं। वे उस मर्यादा के रखवाले हैं, जिसे हर आस्थावान भारतीय अपने भीतर संजोए रखता है। जब वे कहते हैं कि कांग्रेस और अजय राय को अपने कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए तो वह किसी दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस मर्यादा के पक्ष में होती है, जो राम की पहचान है।
     
    जानबूझकर ऐसा किया तो मामला और गंभीर

    जिस देश में करोड़ों लोग सावन के महीने में स्वेच्छा से मांसाहार त्याग देते हैं, जिस देश में कांवड़िए हफ्तों नंगे पांव चलकर गंगाजल लाते हैं और रास्ते में मिलने वाली हर छोटी-बड़ी असुविधा को श्रद्धा से स्वीकार करते हैं, वहां एक राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष का आचरण यदि वाकई किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जैसा कि आरोप लग रहे हैं, तो यह और भी गंभीर है। इसका अर्थ है कि सनातन प्रतीकों से खिलवाड़ कर जानबूझकर उकसाने का एक ढांचा तैयार किया जा रहा है। एक ऐसा ढांचा जो हर कुछ महीनों में किसी नई नदी, नए नगर या नए अवसर पर दोहराया जाता है। अगर यह लापरवाही है, तो भी यह उतना ही चिंताजनक है, क्योंकि यह दिखाता है कि विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व में अयोध्या जैसी भूमि की संवेदनशीलता को लेकर बुनियादी समझ की कमी है। सार्वजनिक जीवन में पद जितना बड़ा होता है, दायित्व और सजगता की अपेक्षा भी उतनी ही बड़ी होती है।