Category: मध्य प्रदेश

  • RSS@100: ग्वालियर में युवाओं से संवाद, राष्ट्रबोध और नेतृत्व पर मंथन

    RSS@100: ग्वालियर में युवाओं से संवाद, राष्ट्रबोध और नेतृत्व पर मंथन

     ग्वालियर
    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष में ग्वालियर में आज ‘युवा संवाद’ का आयोजन किया जा रहा है। सिटी सेंटर स्थित बाल भवन में दोपहर 3 बजे होने वाले कार्यक्रम में संघ के मध्य क्षेत्र के क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त युवाओं से संवाद करेंगे। 

    आयोजकों के अनुसार संवाद का उद्देश्य समाज से जुड़े समसामयिक और संवेदनशील मुद्दों पर युवाओं के साथ विचार-विमर्श करना है। संघ का मानना है कि युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान में भी समाज और देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी सोच के साथ युवाओं में कर्तव्यबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

    छात्र-युवा और शिक्षाविदों में उत्सुकता
    कार्यक्रम को लेकर छात्र-छात्राओं, युवा पेशेवरों और शैक्षणिक जगत से जुड़े लोगों में उत्सुकता है। आयोजकों का कहना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं के साथ खुला संवाद उन्हें विभिन्न मुद्दों को समझने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका तय करने का अवसर देता है।

    शिक्षाविदों के मुताबिक, सामाजिक विषयों पर चर्चा से युवाओं में तर्कपूर्ण सोच और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

    शताब्दी वर्ष में युवाओं पर फोकस
    RSS के 100वें वर्ष में आयोजित इस कार्यक्रम को युवा केंद्रित गतिविधियों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इसमें भारतीय जीवन-मूल्यों, राष्ट्रसेवा और सामाजिक भागीदारी से जुड़े विचारों पर चर्चा होगी। आयोजकों को उम्मीद है कि संवाद के जरिए युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने की दिशा में नई पहल को गति मिलेगी।

     

  • MP में मानसून मेहरबान: कोटे की 68% बारिश पूरी, कई संभागों में आज तेज बारिश के आसार

    MP में मानसून मेहरबान: कोटे की 68% बारिश पूरी, कई संभागों में आज तेज बारिश के आसार

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में मानसून का दौर जारी है, लेकिन प्रदेश में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इस मानसूनी सीजन में प्रदेश में 25.5 इंच यानी 648.7 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे की करीब 68% है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 28.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी करीब 3.1 इंच बारिश कम हुई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक अब मानसून का एक्टिव सिस्टम प्रदेश के पूर्वी हिस्से से खिसककर उत्तरी, पश्चिमी और मध्य मध्यप्रदेश में सक्रिय होगा। अगले दो दिनों में भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है।

    भिंड-दतिया-सागर में ऑरेंज अलर्ट
    मौसम केंद्र भोपाल ने बुधवार को भिंड, दतिया और सागर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में भारी बारिश के साथ कई स्थानों पर बहुत ज्यादा पानी गिरने की संभावना है।इसके अलावा ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सीहोर, शाजापुर, राजगढ़, आगर-मालवा, उज्जैन, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, दमोह, मैहर और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान ढाई इंच से ज्यादा बारिश होने का अनुमान है।

    भोपाल समेत इन जिलों में भी बारिश का दौर
    बुधवार को भोपाल, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, देवास और रतलाम में भी बारिश हो सकती है।इसके अलावा नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    इन जिलों में भी बारिश का अनुमान बुधवार को भोपाल, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का अनुमान है।

    प्रदेश में अगले तीन दिन तक बारिश की संभावना मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि प्रदेश में सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल रही है। इस वजह से लगातार तेज बारिश हो रही है। अगले तीन दिन तक कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है।

    अब तक 28.6 इंच पानी गिरना था IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 648.7 मिमी यानी, 25.5 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 28.6 इंच (727.9 मिमी) की तुलना में 3.1 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 7% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 14% बारिश कम हुई है।

    40 जिलों में 3% से 50% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी, निवाड़ी में 3% से 50% तक कम बारिश हुई है।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी,रायसेन, रतलाम, खंडवा, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 2% से 49% कम पानी गिरा है।

    15 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन और राजगढ़ में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    तीन दिन तक सक्रिय रह सकता है बारिश का सिस्टम
     प्रदेश में सिस्टम की एक्टिविटी बनी हुई है। इसी वजह से कई जिलों में लगातार तेज बारिश हो रही है।उनके अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने इसी को देखते हुए अलग-अलग जिलों के लिए चेतावनी जारी की है।

    40 जिलों में सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी तक 40 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। वहीं केवल 15 जिले ऐसे हैं, जहां औसत से ज्यादा पानी गिर चुका है।ओवरऑल प्रदेश में सामान्य के मुकाबले बारिश करीब 11% कम है। पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश 7% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 14% कम दर्ज की गई है।

    अब तक 25.5 इंच बारिश, सामान्य 28.6 इंच होनी थी
    IMD के अनुसार मध्यप्रदेश में अब तक 648.7 मिमी यानी 25.5 इंच बारिश हो चुकी है। इस अवधि तक सामान्य बारिश का आंकड़ा 727.9 मिमी यानी 28.6 इंच है।इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 79.2 मिमी यानी 3.1 इंच कम बारिश हुई है। मानसून के आगे बढ़ने के साथ अब पश्चिमी और मध्य हिस्सों में बारिश बढ़ने की उम्मीद है।

    किन संभागों में बढ़ेगी बारिश?
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले दो दिनों में भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश होने के कारण स्थानीय प्रशासन और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले किया संबोधित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले किया संबोधित

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश का महाभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। जुलाई में आदित्य टेक्नो कंपनी, लियोन इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास हुआ है। इसी प्रकार पीथमपुर में 850 करोड़ रुपए लागत की दो नई इंडस्ट्रीज का शुभारंभ भी किया गया है। यह इंडस्ट्री राजस्थान से मध्यप्रदेश आकर अपना व्यवसाय शुरू कर रही हैं। ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए दिल्ली में आयोजित रोड शो में लगभग 5000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव और अहमदाबाद में हुए रोड शो में 8 हजार 635 करोड रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक के पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन पर्व की बधाई दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी सभी क्षेत्रों में स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन दे रहे हैं। स्पेस टेक्नोलॉजी क्षेत्र में सैटेलाइट लॉन्चिंग के लिए विदिशा निवासी  विभोर जैन को भी अवसर मिला है। मध्यप्रदेश की युवा प्रतिभा ने अपने स्टार्ट-अप के माध्यम से एक नया इतिहास रचा है।  जैन की स्टार्ट-अप कंपनी व्योमिक भी अंतरिक्ष में सैटेलाइट लांच करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके लिए  जैन को बधाई दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में मानसून का अंतिम दौर चल रहा है। उन्होंने पिछले दिनों रीवा पहुंचकर जबलपुर और शहडोल में बाढ़ और अति वृष्टि से हुए नुकसान की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अत्यधिक बारिश होने से कई नगरीय निकायों और पंचायत क्षेत्रों में नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं जिससे गलियों और घरों में पानी भर जाता है। बैठक में जल निकासी की व्यवस्था की भी समीक्षा करने और वर्षा ऋतु के बाद अभियान चलाकर नालों के प्रवाह को निर्बाध बनाने के लिए कार्य योजना बनाने तथा उसके क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार कौशल विकास को लेकर युवाओं को 5 भागों में बांटा है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थी, कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी, संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले नागरिक एवं ऐसे युवा जो शिक्षा, रोजगार और स्व रोजगार दोनों से वंचित है। ये ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आकर आईटीआई या अन्य रोजगार आधारित प्रशिक्षण ले रहे होते हैं लेकिन धन अभाव या किसी अन्य कारण से उन्हें सफलता नहीं मिल पाती है। नीति आयोग ने कहा है कि ऐसे युवाओं के लिए उच्च शिक्षा विभाग और युवा कल्याण विभाग के माध्यम से कार्य योजना तैयार कर ठोस कार्रवाई की जायें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों की फार्मर आईडी बनाने के लिए 20 अगस्त से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह आईडी किसानों को खाद और बीज वितरण सहित सभी प्रकार के लाभ दिलवाले में सहायक होगी। सभी जनप्रतिनिधि किसानों को फार्मर आईडी बनाने के लिए प्रेरित करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन हफ्ते से निरंतर मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। विशेष पर्व और त्यौहारों के चलते अगर शुक्रवार को अवकाश रहता है तो जनविश्वास शिविर अगले दिन शनिवार को आयोजित किया जाए। सभी जिला कलेक्टर मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान शिविर के संबंध में पहले से जानकारी दें। इससे नागरिकों के साथ कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को भी तैयारी के लिए समय मिल सकेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी मंत्रीगण अपने विभागीय अधिकारियों के साथ ढाई वर्ष में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों और योजनाओं पर विस्तृत चर्चा के लिए सितंबर में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन करें। 

  • प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना में ग्रामीण आबादी को पट्टे देकर करें लाभान्वित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना में ग्रामीण आबादी को पट्टे देकर करें लाभान्वित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    आम जनता के कार्य समय-सीमा में हों पूरे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    आमजन के काम हेल्प लाइन तक पहुंचने से पहले हो जाएं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना में ग्रामीण आबादी को पट्टे देकर करें लाभान्वित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान : वर्ष 2026 की साप्ताहिक गतिविधि के लिए अगले एक महीने की योजना पहले ही की जाए तैयार
    मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा के अधिकारियों-कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटैंडेंस व्यवस्था
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की 21 प्रमुख कार्यों की समीक्षा, विभागों को दिए निर्देश

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आम जनता से जुड़े कार्यों का समय-सीमा में निराकरण किया जाए। आमजन के कार्य हेल्प लाइन तक पहुंचने से पहले ही पूरे हो जाएं, ऐसे प्रयास किए जाएं। जनता से जुड़े सभी प्राथमिक कार्यों का समय पर निपटारा आवश्यक है। राज्य शासन ने मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान: 2026 के माध्यम से साप्ताहिक शिविर और संवाद के आयोजन प्रारंभ किए हैं। गत तीन सप्ताह में इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। त्योहार या अन्य कारणों से जब शुक्रवार को जन विश्वास अभियान के तहत शिविर और संवाद का आयोजन नहीं हो सके तो आगामी दिवस अर्थात शनिवार को यह कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से एक विशेष बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    मंत्रालय सहित विंध्याचल-सतपुड़ा में अधिकारियों कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटैंडेंस व्यवस्था

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य शासन ने उत्तरदायी प्रशासन के लिए मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान: 2026 प्रारंभ किया है। इस अभियान के संचालन से बड़ी संख्या में आमजन के लंबित कार्यों और समस्याओं का समाधान हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जन विश्वास अभियान की आगामी एक माह की तैयारी रखी जाए, ताकि जनता को संवाद और शिविर का पूरा लाभ प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी में मंत्रालय सहित विंध्याचल और सतपुड़ा भवनों में बायोमैट्रिक अटैंडेंस की व्यवस्था प्रारंभ की जा रही है। यह प्रदेश के जिलों में भी लागू की जाएगी। अधिकारी-कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचें और समय पर कार्यों को पूर्ण करें, इस पर वरिष्ठ अधिकारी नजर रखेंगे।

    ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्क रजिस्ट्री

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की भूमि नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए अधिकार अभिलेखों के पंजीयन, जिला स्तर पर राजस्व और पंचायत ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी गठित करने और ग्राम की दखल रहित भूमि का चिन्हांकन का कार्य पूर्ण किया जाए। ग्रामीण आबादी को बैंक ऋण आसानी से मिले इसके लिए सभी को नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ दिलवाने की अभियान के संचालन के लिए रूपरेखा तैयार कर अंतिम रूप दिया जाए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित कर भूमिहीनों को आवास पट्टे प्रदान करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया संचालित की जाए।

    नर्मदा समग्र मिशन (नमन)

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग नर्मदा समग्र मिशन (नमन) के गठन और क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण किया जाए। प्रदेश की जीवन रेखा मां नर्मदा को निर्मल और प्रवहमान बनाए रखने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण रोकथाम, सांस्कृतिक, सामाजिक सहभागिता और विभागों के परस्पर समन्वय के साथ समग्र विकास के कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए मिशन सक्रिय रूप से कार्य करेगा।

    महानगरों में पानी और सीवरेज का प्रबंधन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों में पेयजल और सीवरेज के कार्यों का उचित प्रबंधन नगरीय निकायों का दायित्व है। जहां आमजन को पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जाए वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का पर्याप्त तकनीकी अमला पदस्थ किया जाए, ताकि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में नगरीय क्षेत्र में आवश्यकता के अनुसार प्रतिनियुक्ति पर लेने की कार्यवाही की जाए। निकायों की आदर्श कार्मिक संरचना में उपलब्ध पदों पर कार्यरत पीएचई के इच्छुक तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का वन टाइम संविलियन किया जाए।

    चित्रकूट और अन्य धार्मिक पर्यटन महत्व के स्थलों का विकास

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन महत्व के स्थानों के समुचित विकास के कार्य तेजी से पूरे हों। भगवान श्रीराम के वन गमन पथ के दस कार्यों पर 160 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है। मार्ग के 20 अन्य स्थानों पर कार्यों का चिन्हांकन किया गया है। चित्रकूट में कामदगिरी परिक्रमा मार्ग के विकास के लिए वन विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त हो गई है। पर्यटन विकास के विस्तार के लिए 12.50 हैक्टेयर वन भूमि चिन्हित की गई है। गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर और अन्य स्थानों के विकास के लिए आवश्यक कार्य पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदाकिनी नदी जोड़ो योजना और संयुक्त तीर्थ विकसित करने के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दतिया, ओरछा के साथ ही ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर मंदिर के प्रांगण विकास के लिए स्वीकृत कार्यों को क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण पाथेय के अंतर्गत 225 करोड़ रुपए के विकास कार्य विभिन्न स्तरों पर क्रियान्वित किए जा रहे हैं।

    सिंहस्थ के दृष्टिगत भीड़ प्रबंधन के उपाय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जहां सिंहस्थ: 2028 के लिए विभिन्न कार्य तेजी से पूरे करने पर हमारा फोकस रहे वहीं ऐसे उपायों पर भी अमल करें, जिससे भीड़ प्रबंधन आसान हो। इसके तहत उज्जैन स्थित अनेक मंदिर और प्रदेश के प्रमुख धर्म स्थलों पर ऐसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं जो श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी होंगी। उज्जैन में टेंपल बॉन्ड के माध्यम से प्रमुख धार्मिक स्थलों के समग्र विकास के कार्य होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के धार्मिक लोकों पर विकसित की जा रही सुविधाओं की जानकारी भी प्राप्त की।

    होमगार्ड और सुरक्षा बल के जवानों की व्यवस्था

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की क्षमता में वृद्धि, बैगा, भारिया, सहरिया विशेष पिछड़ी जनजाति के युवकों के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सेवाएं लेने, होमगार्ड भर्ती नियम को अंतिम रूप देकर भर्ती परीक्षा करवाने की प्रक्रिया की भी जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही मध्यप्रदेश राज्य द्रुतगति बल की उपयोगिता और उसके गठन से संबंधित विषयों पर भी बैठक में चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग द्वारा इस संबंध में अपनाई गई प्रक्रिया की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रस्तावित कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    प्रमुख 21 कार्यों की हुई समीक्षा

    राजस्व-

        प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की नि:शुल्क रजिस्ट्री।

        ग्रामों में आगामी दस वर्ष की आवासीय आवश्यकता को देखते हुए दखलरहित भूमि का चिन्हांकन। आबादी भूमि घोषित कर भूमिहीनों को आवास पट्टे वितरित करना।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास –

        नर्मदा समग्र मिशन का गठन। गुजरात, सूरत जल भंडारण मॉडल, कर्मभूमि से जन्म भूमि अभियान के समान प्रदेश में अभियान प्रारंभ करने के निर्देश।

    नगरीय विकास एवं आवास –

        जल प्रदाय और सीवरेज परियोजनाओं का क्रियान्वयन।

    संस्कृति-पर्यटन विभाग

        कामदगिरी परिक्रमा मार्ग का विकास।

        पर्यटन सुविधाओं के लिए 12.50 हैक्टयर वन भूमिका का चिन्हांकन।

        सती अनसूइया मंदिर, मल्टी फैसिलिटी सेंटर और गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर का विकास।

        ममलेश्वर मंदिर प्रांगण विकास।

        भगवान श्रीराम वनगमन पथ परियोजना में 30 कार्यों का क्रिन्यान्वयन।

        यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में 3 वर्ष में 15 स्थल जुड़वाए गए। ऐसे स्थानों में 6 अन्य सांस्कृतिक स्थल जोड़ने की पहल।

        दतिया, ओरछा सहित 20 आध्यात्मिक और धार्मिक लोकों का विकास।

        पर्यटन अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पर्यटन निगम के अलावा अन्य सक्षम ऐजेंसियों को उनके क्षेत्र के बाहर कार्य करने की छूट देने की कार्यवाही।

        भगवान श्रीकृष्ण पाथेय परियोजना के कार्य।

        सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत उज्जैन में टेंपल बॉन्ड के माध्यम से प्रमुख धार्मिक स्थलों का विकास।

    गृह विभाग –

        महाकालेश्वर मंदिर की भांति विभिन्न मंदिरों में होमगार्ड के पदों का सृजन कर समिति के व्यय पर नियुक्ति।

        राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की क्षमता 2 हजार से बढ़ाकर 5 हजार करना।

        वीआईपी ड्यूटी पर तैनात स्टॉफ के लिए जोखिम भत्ता।

        बैगा, भारिया, सहरिया के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया।

        काउंटर टेररिस्ट ग्रुप की संख्या 50 से बढ़ाकर 250 करना।

        मध्यप्रदेश राज्य द्रुतगति बल का गठन करना।

    सामान्य प्रशासन विभाग –

        पदोन्नतियों का शेष कार्य पूर्ण करना। इसके लिए सितम्बर और अक्टूबर माह में डीपीसी की कार्यवाही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश

        आमजन के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

        ग्रामीण आबादी में नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ नागरिकों को दिलवाया जाए। आबादी भूमि घोषित कर भूमिहीनों को आवास पट्टे दिए जाएं।

        नर्मदा समग्र मिशन से संबंधित कार्यवाही पूर्ण की जाए।

        नगरों में पीने के पानी और सीवरेज प्रबंधन के कार्य समय पर पूरे हों।

        चित्रकूट और ओरछा, दतिया धार्मिक स्थलों के विकास, राम वन गमन पथ, श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़े कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए।

        औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा बल उपलब्ध करवाने का कार्य समय-सीमा में पूर्ण करें।

        पदोन्नतियों का कार्य जारी रहे, सितंबर अक्टूबर में आवश्यकता अनुसार कार्यों को पूर्ण करें।

        केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय के साथ विभाग आवश्यक समन्वय बढ़ाकर कार्यों को तेजी प्रदान करें।

     

  • ऐशबाग ओवरब्रिज का खतरनाक मोड़ होगा दुरुस्त, PWD ने संभाला मोर्चा; डिजाइन का इंतजार

    ऐशबाग ओवरब्रिज का खतरनाक मोड़ होगा दुरुस्त, PWD ने संभाला मोर्चा; डिजाइन का इंतजार

     भोपाल

    अजूबे मोड़ के कारण देशभर में किरकिरी करा चुके ऐशबाग 90 डिग्री आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) के सुधार कार्य की हलचल शुरू हो गई है। मौके पर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और बुलडोजर भी तैनात कर दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वास्तविक निर्माण कार्य अभी भी फाइनल डिजाइन और सामग्री के इंतजार में अटका हुआ है। जब डिजाइन को लेकर मुख्य अभियंता गोपाल सिंह से पूछा तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली और कार्यपालन यंत्री एआर से बात करने का कह कर पल्ला झाड़ लिया।

    ग्राउंड पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि अभी तक उनके पास डिजाइन नहीं पहुंचा है। फिलहाल केवल जमीन समतल करने के निर्देश मिले हैं। इसके बाद ले-आउट डाला जाएगा और फिर पीडब्ल्यूडी और रेलवे के इंजीनियरों के संयुक्त मुआयने के बाद ही खोदाई का काम शुरू हो सकेगा।

    2.5 मीटर तक बढ़ेगा रेडियस

    ब्रिज के खतरनाक मोड़ को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान से नया डिजाइन तैयार कराया गया है। इसके तहत मोड़ के इनर और आउटर रेडियस को 2 से 2.5 मीटर तक बढ़ाया जाएगा, जो वर्तमान में 10.5 मीटर है। इसके अलावा मोड़ के प्रवेश और निकास द्वार पर कैरिजवे को 3 से 3.5 फीट तक चौड़ा किया जाएगा। वहीं अतिरिक्त स्लैब का भार संभालने के लिए दो नए पिलर बनाए जाएंगे। स्ट्रक्चरल बदलाव की जद में आ रहे नाले को डायवर्ट किया जा चुका है।

    डिजाइन पर साधी चुप्पी, ईई ने नहीं दिया जवाब

    ब्रिज के मुख्य अभियंता गोपाल सिंह ने बताया कि सुधार कार्य की सभी तकनीकी अड़चनें दूर कर ली गई हैं। हालांकि डिजाइन की विस्तृत जानकारी के लिए जब संबंधित कार्यपालन यंत्री (ईई) एआर मोरे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही मैसेज का जवाब दिया। मुख्य अभियंता के अनुसार मूल निर्माण एजेंसी ही करीब एक करोड़ रुपये की लागत से यह सुधार करेगी। रेलवे ट्रैक और ओवरहेड इक्विपमेंट की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरा काम रेलवे की सीधी निगरानी में होगा।

     

  • भोपाल के यात्रियों के लिए खुशखबरी! E-Bus के बेड़े में 10 नई बसें, अब देर रात तक मिलेगी सेवा

    भोपाल के यात्रियों के लिए खुशखबरी! E-Bus के बेड़े में 10 नई बसें, अब देर रात तक मिलेगी सेवा

     भोपाल 
    राजधानी भोपाल की सड़कों पर ई-बस का परिवहन और मजबूत होता जा रहा है। बता दें कि, ई-बसों के बेड़े में 10 और नई बसें जोड़ीं गई हैं। इससे शहर में चलने वाली बसों का बेड़ा अब 30 का हो गया है। इस विसतार से बस सेवाओं की फ्रीक्वेंसी बेहतर हुई है और यात्रियों को अब हर 10 से 15 मिनट के अंतराल पर बसें उपलब्ध होंगी।

    मुख्य रूटों पर कनेक्टिविटी और न्यूनतम किराया
    यह नया ई-बस बेड़ा मुख्य रूप से कोलार, बैरागढ़ और अशोका गार्डन को जोड़ने वाले तीन प्रमुख रूटों (बी35, बी-36 और बी-37) पर चलाया जा रहा है। सभी बसों को एमपी नगर बोर्ड ऑफिस से होकर गुजारा जा रहा है, जो तीनों रूटों का मुख्य जंक्शन है। इससे नौकरीपेशा और विद्यार्थियों को सीधी आवाजाही में बड़ी राहत मिली है। यात्रा का न्यूनतम किराया 6 से 7 रुपए और अधिकतम 40 रुपए तय किया गया है।

    शहर के ये इलाके भी सेवा से जुड़े
    इन बसों के जरिए शहर के प्रमुख केंद्र, जैसे न्यू मार्केट, बावड़ियाकला, सलैया, रोहित नगर, सुभाषनगर, कोहेफिजा, पीर गेट, हमीदिया अस्पताल, नादरा बस स्टैंड, बिट्टन मार्केट और आइएसबीटी जुड़ गए हैं।

    सुबह 6:30 से रात 9 बजे तक मिलेगी सेवा
    बीसीएलएल से मिली जानकारी के अनुसार, ई-बसों
    का समय सुबह 6:30 बजे से बढ़ाकर रात 9:00 बजे तक कर दिया गया है। बीसीएलएल सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि, शहर में कुल 100 ई-बसों के संचालन की योजना है, जिसके तहत नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में रोजाना 10 से 12 हजार यात्री इन ई-बसों में सुगम सफर का लाभ उठा रहे हैं।

    हजारों यात्रियों को होगा फायदा

    पीएम ई-बस की संख्या में बढ़ोतरी के साथ शहर में ये सेवा और सुलभ हो गई है। शुरुआत में 20 बसों के संचालन ही यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी, जिसे देखते हुए अब शहर की ई बसों के बेड़े में 10 और बसें जोड़ी गई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, फिलहाल रोजाना करीब 10 से 15 हजार यात्री इन बसों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बसों की संख्या बढ़ने से पीक आवर्स में बसों के बीच का अंतर कम होगा और स्टॉप पर इंतजार करने का समय भी घटेगा।

    दिव्यांग यात्रियों के लिए रहेगी विशेष व्यवस्था
    इन ई-बसों में दिव्यांग यात्रियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसों में हाइड्रोलिक डोर/लिफ्ट और व्हीलचेयर के लिए निर्धारित स्थान दिया गया है। इससे व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल के साथ बस में चढ़ना या उतरना आसान रहेगा। बसों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। शुरुआती संचालन में तीन प्रमुख रूट पर सेवा शुरू हुई थी, लेकिन अब यात्रियों की जरूरत को मद्देनजर रखते हुए शहर में बसों का नेटवर्क बढ़ाया गया है। हालांकि, इस सेवा का यात्रियों की जरूरत के हिसाब से आगे औरर विस्तार किया जाएगा।

  • नर्सिंग घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से छात्रों को राहत नहीं, कुछ कॉलेजों ने हाईकोर्ट में CBI जांच की अंडरटेकिंग दी

    नर्सिंग घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से छात्रों को राहत नहीं, कुछ कॉलेजों ने हाईकोर्ट में CBI जांच की अंडरटेकिंग दी

    जबलपुर

     मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अलग-अलग प्रकरणों पर सुनवाई हुई। ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग काॅलेजों के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा। वहीं, हाई कोर्ट में कुछ काॅलेजों ने सीबीआई जांच कराने की वचनबद्धता (अंडरटेकिंग) पेश की है।

    सुप्रीम कोर्ट में छात्रों की याचिका निरस्त

    ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग काॅलेजों के कुछ छात्रों ने 13 अगस्त के हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने इन काॅलेजों के छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

    जांच में फैकल्टी डुप्लीकेसी नहीं जांची गई थी

    छात्रों की ओर से तर्क दिया गया कि संबंधित काॅलेजों की सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन है, इसलिए उन्हें पूर्व वर्षों की तरह परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए। हाई कोर्ट ने पाया था कि वर्ष 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय समिति की जांच में फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं हुई थी। ऐसे में बिना सीबीआई जांच के राहत देने से इनकार किया गया था।
    फीस, डोनेशन या अन्य राशि दी है

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने छात्रों से कहा कि वे उस कालेज प्रबंधन से सवाल करें, जिसे उन्होंने फीस, डोनेशन या अन्य राशि दी है। कोर्ट ने कहा कि काॅलेज प्रबंधन सीबीआई जांच का सामना करे। यदि काॅलेज नियमों के अनुरूप है तो जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज करते हुए छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति के लिए हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।
    हाई कोर्ट में कुछ कालेजों ने दी अंडरटेकिंग

    इधर, हाई कोर्ट में लाॅ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित नर्सिंग से जुड़े अन्य मामलों पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के काॅलेजों को बिना सीबीआई जांच के राहत देने से इनकार किया।
    परीक्षा आयोजित कराने पर विचार किया जा सकता

    हाई कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित काॅलेज सीबीआई जांच कराने की वचनबद्धता (अंडरटेकिंग) प्रस्तुत करते हैं और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण लेकर आते हैं, तो उनकी सीबीआई जांच कराई जा सकती है। इसके बाद काॅलेज की श्रेणी के आधार पर उनके छात्रों की परीक्षा आयोजित कराने पर विचार किया जा सकता है।

    क्लेरिफिकेशन आदेश लेकर आने के निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रुख के बाद कुछ कॉलेजों की ओर से मंगलवार को हाई कोर्ट में सीबीआई जांच कराने की अंडरटेकिंग पेश की गई। हाई कोर्ट ने अंडरटेकिंग को रिकार्ड पर लेते हुए संबंधित कालेजों को सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में क्लेरिफिकेशन आदेश लेकर आने के निर्देश दिए हैं।

  • सागर-जबलपुर फोरलेन को हरी झंडी, 5 घंटे की यात्रा अब ढाई घंटे में; जानें पूरा रूट

    सागर-जबलपुर फोरलेन को हरी झंडी, 5 घंटे की यात्रा अब ढाई घंटे में; जानें पूरा रूट

    सागर

     वीर बुंदेलाओं की धरती बुंदेलखंड और संस्कारधानी जबलपुर और भी नजदीक आने वाले हैं. क्योंकि बुंदेलखंड के सागर और महाकौशल की जबलपुर के बीच नया फोर लाइन बनाने को लेकर मंजूरी मिली है. यह फोर लाइन सागर से शुरू होकर रहली होते हुए पाटन के आसपास से जबलपुर तक जाएगा. यह नया फोर लाइन के निर्माण होने से इन दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर कम हो जाएगी. इस फोर लाइन निर्माण के लिए फाइनल डीपीआर बनाकर तैयार हो रहा है। 

    मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को इस फोर लाइन बनने के लिए नूडल एजेंसी चुना गया है, जिसमें 1486 करोड़ की लागत से ग्रीन फील्ड हाईवे को बनाया जाएगा. इसमें 1230 करोड़ की लागत से सिविल वर्क किया जाएगा. 40 करोड़ रुपए में अधिग्रहण का काम होगा और 28 करोड रुपए शिफ्टिंग सहित अन्य कार्यों में खर्च किए जाएंगे। 

    बता दें कि सागर से जबलपुर तक जाने के लिए तीन रास्ते हुआ करते हैं जिसमें अधिकांश लोग सागर से दमोह होते हुए जबलपुर तक जाना पसंद करते हैं. क्योंकि यह स्टेट हाईवे है, सड़क अच्छी कंडीशन में है और टोल टैक्स में भी कम पैसे लगते हैं जिसकी दूरी लगभग 180 किलोमीटर है. वहीं, दूसरा रास्ता नेशनल हाईवे 44 से होकर गुजरता है, जिसमें देवरी के आगे राजमार्ग चौराहा से होते हुए जाते हैं. लेकिन इसमें टोल टैक्स नेशनल के हिसाब से लगता है. इसलिए कम लोग इससे सफर करते हैं। 

    नए सिरे से बनेगा फोर लाइन
    वहीं, तीसरा रास्ता सागर से रहली होते हुए जबलपुर तक जाते हैं, जिसकी दूरी लगभग 155 किलोमीटर है. लेकिन इसमें नौरादेही टाइगर रिजर्व का लगभग 22 किलोमीटर का रास्ता सिंगल पटरी है और 22 किलोमीटर में ही ब्रेकर बने हुए हैं, जिसमें काफी समय लगता है साथ ही ईंधन की भी बर्बादी होती हैं. यह रास्ता अंग्रेजों के जमाने से ही उपयोग में है और जो नए सिरे से फोर लाइन बनेगा उसमें लगभग 20 किलोमीटर की दूरी कम होकर 135 किलोमीटर का रास्ता रह जाएगा. ऐसे में सागर से दमोह होकर जबलपुर जाने वाली लोग अगर इस रास्ते का इस्तेमाल करेंगे तो लगभग 40 से 45 किलोमीटर का चक्कर बचने लगेगा. ऐसे में समय और ईंधन की भी बचत होगी. इसके साथ ही अभी जबलपुर तक जाने के लिए जो 4 से 5 घंटे का समय लगता है, वह ढाई से 3 घंटे में पूरा होना लगेगा। 

    अब सागर से बनाए जाने वाली फोर लाइन को इसी टाइगर रिजर्व के किसी नए से से गुजरने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई भी हो सकती है. लेकिन इसके लिए ग्रीन फील्ड डीटेल्ड रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसमें पेड़ों को काटने के बदले नई जगह पर लगाए जाने की भी जिम्मेदारी होगी। 

    इन गांव से होकर गुजर सकता है हाईवे
    सागर की यूनिवर्सिटी घाटी से शुरू होकर यह 4 लाइन पथरिया जाट, बम्होरी बीका, ढाना, जामघाट, पटना होते हुए रहली बाईपास से पंढरपुर, मोहार, तिखी तिराहा, रजवास के बाद यह लगभग 20 किलोमीटर मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से होकर गुजरते हुए तेंदूखेड़ा तक पहुंचेगी और इसके लिए लगभग 27 हैकटेयर वन भूमि को अधिगृहित किया जाएगा. इसके बाद पाटन को जोड़ते हुए जबलपुर तक पहुंचेगी. हालांकि, टाइगर रिजर्व और रहली के किस हिस्से से यह फोर लाइन निकलेगा. यह फाइनल डीपीआर आने के बाद ही तय हो सकेगा। 

  • सागर-जबलपुर फोरलेन को हरी झंडी, 5 घंटे का सफर होगा ढाई घंटे का; जानें हाईवे का पूरा रूट

    सागर-जबलपुर फोरलेन को हरी झंडी, 5 घंटे का सफर होगा ढाई घंटे का; जानें हाईवे का पूरा रूट

    सागर

    वीर बुंदेलाओं की धरती बुंदेलखंड और संस्कारधानी जबलपुर और भी नजदीक आने वाले हैं. क्योंकि बुंदेलखंड के सागर और महाकौशल की जबलपुर के बीच नया फोर लाइन बनाने को लेकर मंजूरी मिली है. यह फोर लाइन सागर से शुरू होकर रहली होते हुए पाटन के आसपास से जबलपुर तक जाएगा. यह नया फोर लाइन के निर्माण होने से इन दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर कम हो जाएगी. इस फोर लाइन निर्माण के लिए फाइनल डीपीआर बनाकर तैयार हो रहा है। 

    मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को इस फोर लाइन बनने के लिए नूडल एजेंसी चुना गया है, जिसमें 1486 करोड़ की लागत से ग्रीन फील्ड हाईवे को बनाया जाएगा. इसमें 1230 करोड़ की लागत से सिविल वर्क किया जाएगा. 40 करोड़ रुपए में अधिग्रहण का काम होगा और 28 करोड रुपए शिफ्टिंग सहित अन्य कार्यों में खर्च किए जाएंगे। 

    बता दें कि सागर से जबलपुर तक जाने के लिए तीन रास्ते हुआ करते हैं जिसमें अधिकांश लोग सागर से दमोह होते हुए जबलपुर तक जाना पसंद करते हैं. क्योंकि यह स्टेट हाईवे है, सड़क अच्छी कंडीशन में है और टोल टैक्स में भी कम पैसे लगते हैं जिसकी दूरी लगभग 180 किलोमीटर है. वहीं, दूसरा रास्ता नेशनल हाईवे 44 से होकर गुजरता है, जिसमें देवरी के आगे राजमार्ग चौराहा से होते हुए जाते हैं. लेकिन इसमें टोल टैक्स नेशनल के हिसाब से लगता है. इसलिए कम लोग इससे सफर करते हैं। 

    नए सिरे से बनेगा फोर लाइन
    वहीं, तीसरा रास्ता सागर से रहली होते हुए जबलपुर तक जाते हैं, जिसकी दूरी लगभग 155 किलोमीटर है. लेकिन इसमें नौरादेही टाइगर रिजर्व का लगभग 22 किलोमीटर का रास्ता सिंगल पटरी है और 22 किलोमीटर में ही ब्रेकर बने हुए हैं, जिसमें काफी समय लगता है साथ ही ईंधन की भी बर्बादी होती हैं. यह रास्ता अंग्रेजों के जमाने से ही उपयोग में है और जो नए सिरे से फोर लाइन बनेगा उसमें लगभग 20 किलोमीटर की दूरी कम होकर 135 किलोमीटर का रास्ता रह जाएगा. ऐसे में सागर से दमोह होकर जबलपुर जाने वाली लोग अगर इस रास्ते का इस्तेमाल करेंगे तो लगभग 40 से 45 किलोमीटर का चक्कर बचने लगेगा. ऐसे में समय और ईंधन की भी बचत होगी. इसके साथ ही अभी जबलपुर तक जाने के लिए जो 4 से 5 घंटे का समय लगता है, वह ढाई से 3 घंटे में पूरा होना लगेगा। 

    अब सागर से बनाए जाने वाली फोर लाइन को इसी टाइगर रिजर्व के किसी नए से से गुजरने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई भी हो सकती है. लेकिन इसके लिए ग्रीन फील्ड डीटेल्ड रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसमें पेड़ों को काटने के बदले नई जगह पर लगाए जाने की भी जिम्मेदारी होगी। 

    इन गांव से होकर गुजर सकता है हाईवे
    सागर की यूनिवर्सिटी घाटी से शुरू होकर यह 4 लाइन पथरिया जाट, बम्होरी बीका, ढाना, जामघाट, पटना होते हुए रहली बाईपास से पंढरपुर, मोहार, तिखी तिराहा, रजवास के बाद यह लगभग 20 किलोमीटर मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से होकर गुजरते हुए तेंदूखेड़ा तक पहुंचेगी और इसके लिए लगभग 27 हैकटेयर वन भूमि को अधिगृहित किया जाएगा. इसके बाद पाटन को जोड़ते हुए जबलपुर तक पहुंचेगी. हालांकि, टाइगर रिजर्व और रहली के किस हिस्से से यह फोर लाइन निकलेगा. यह फाइनल डीपीआर आने के बाद ही तय हो सकेगा। 

  • उज्जैन में इंजीनियरिंग की बड़ी गलती! सिंहस्थ पुल का एलाइनमेंट बिगड़ा, सड़क की बजाय शिप्रा पर बना ब्रिज

    उज्जैन में इंजीनियरिंग की बड़ी गलती! सिंहस्थ पुल का एलाइनमेंट बिगड़ा, सड़क की बजाय शिप्रा पर बना ब्रिज

    उज्जैन 

    उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच एक बड़ी इंजीनियरिंग गड़बड़ी सामने आई है. इंदौर से आने वाली गाड़ियों को सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए बन रहे बायपास में सड़क और ब्रिज का अलाइनमेंट ही आपस में नहीं मिल रहा है. डीमार्ट के सामने से एमआर-21 तक बन रही रोड और शिप्रा नदी पर बन रहे ब्रिज के बीच करीब 30 डिग्री का अंतर पाया गया है. नतीजा यह है कि ब्रिज सड़क की जगह खेत में उतर रहा है. अब इस गलती को सुधारने के लिए और भी जमीन लेकर सड़क को मोड़कर ब्रिज से मिलाने की तैयारी की जा रही है, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं। 

    दो विभाग, दो काम और तालमेल गायब
    दरअसल, 23.26 करोड़ रुपये की सड़क नगर निगम बना रहा है, जबकि 13.38 करोड़ रुपये के ब्रिज की जिम्मेदारी सेतु विभाग के पास है. अब मौके पर सड़क का अर्थ वर्क और ब्रिज के पिलर तैयार हो चुके हैं. ड्रोन फोटो और सैटेलाइट इमेज में एप की मदद से मापने पर दोनों के बीच करीब 30 डिग्री का अंतर सामने आया. नगर निगम गड़बड़ी सुधारने के लिए सेतु विभाग को लेटर भी लिख चुका है. वहीं, सेतु निगम के इंजीनियर पीएस पंत का कहना है कि ब्रिज वैसा ही बन रहा है, जैसा बनना चाहिए. गड़बड़ी कहां हुई, यह तो अब नगर निगम बताएगा। 

    ऐसे बनना था ब्रिज, अब मोड़नी पड़ेगी सड़क
    योजना के मुताबिक, ब्रिज को सीधा सिकंदरी-दाऊदखेड़ी रोड पर मिलना था, जहां सिंहस्थ और देवास-बदनावर हाईवे के बायपास भी जुड़ेंगे. लेकिन अलाइनमेंट बिगड़ने से अब ब्रिज तक सड़क को मोड़ना पड़ेगा. इसके लिए एक्सट्रा जमीन का अधिग्रहण करना होगा, जिस पर किसानों की नाराजगी बढ़ रही है. यह बायपास सिंहस्थ-2028 के लिए बेहद जरूरी है. इंदौर की ओर से आने वाले ट्रैफिक को इसी रास्ते से चिंतामण गणेश मंदिर और मेला क्षेत्र तक पहुंचाया जाना है. इससे गाड़ी शहर में एंट्री किए बिना सीधे सिंहस्थ क्षेत्र पहुंच सकेंगे. फिलहाल, नगर निगम का कहना है कि रोड को टर्न देकर ब्रिज से मिलाया जाएगा और इसके लिए अतिरिक्त जमीन ली जाएगी।