Category: मध्य प्रदेश

  • नई खेलो इंडिया योजना : पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में गाँव से विश्व तक भारत की नई खेल यात्रा- विश्वास कैलाश सारंग

    नई खेलो इंडिया योजना : पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में गाँव से विश्व तक भारत की नई खेल यात्रा- विश्वास कैलाश सारंग

    भोपाल 

    देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में नई खेलो इंडिया योजना का लक्ष्य गाँव से विश्व तक यानि जमीनी स्तर से लेकर ओलंपिक स्तर तक खिलाड़ियों की पूरी विकास-श्रृंखला तैयार कर भारत को खेल महाशक्ति बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से भारतीय खेल संस्कृति को गाँवों, स्कूलों और सामान्य परिवारों तक पहुँचाया है। प्रतिभा पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, बेहतर अधोसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर पर बढ़ते जोर ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहतर विकास मार्ग तैयार किया है। ओलंपिक और पैरालंपिक खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहन, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी व्यवस्थाओं को मजबूती तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों और प्रशिक्षण संस्थानों पर बढ़ता निवेश इस सोच को दर्शाता है कि भारत की खेल शक्ति केवल कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं की क्षमता को अवसर देने में निहित है। प्रधानमंत्री मोदी जी का खेलों के प्रति यह दृष्टिकोण आज पदक जीतने वाले भारत के साथ स्वस्थ, आत्मविश्वासी, अनुशासित और विश्व मंच पर नेतृत्व करने वाले भारत की कल्पना को साकार करेगा, जहाँ हर युवा विकसित भारत 2047 के निर्माण के महायज्ञ में अपनी सार्थक आहुति देगा।

    व्यापक दृष्टिकोण के फलस्वरुप प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वाकांक्षी नई खेलो इंडिया योजना के लिये वर्ष 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिये ₹36,441 करोड़ राशि की मंज़ूरी प्रदान की है। इससे 10 गुना ज्यादा खिलाड़ी लाभान्वित होंगे। यह केवल खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की योजना नहीं बल्कि भारत के युवा सामर्थ्य को खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल, अनुशासन, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मक उत्कृष्टता से जोड़ने की एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय परियोजना है। अब लक्ष्य केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोज लेना नहीं बल्कि उन्हें प्रतिभा पहचान से प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, उच्च स्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और ओलंपिक तैयारी तक निरंतर सहयोग उपलब्ध कराना है।

    नई खेलो इंडिया योजना से मध्यप्रदेश को खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये समस्त आवश्यक प्रयास करेगा। प्रदेश में 18 खेलों की 11 अकादमियां और पहले से संचालित है। खेलो इंडिया के 52 सेंटर्स को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खेल प्रतिभा और क्षमता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।

    किसी भी खिलाड़ी की यात्रा का पहला पड़ाव अक्सर उसका विद्यालय और स्थानीय खेल मैदान होता है। यह वह स्थान हैं जहाँ बच्चा सीखता भी है, खेलता भी है और अपनी क्षमता को पहचानता भी है। इसलिए खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय जैसी पहलें विद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि प्रतिभा पहचान और खेल विकास का आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। भारत खेलो नीति में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को समाहित करते हुए शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर शारीरिक क्षमता, रचनात्मकता, अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ने पर बल दिया गया है।

    भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विशाल युवा आबादी है, लेकिन प्रतिभा और पदक के बीच की दूरी अक्सर पर्याप्त प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, खेल विज्ञान और अवसरों की कमी से निर्धारित होती है। यह नई योजना इस अंतर को कम कर खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रदर्शन के लिये तैयार करेगी। एथलीट विकास मार्ग को इस प्रकार परिकल्पित किया गया है कि प्रतिभा पहचान के बाद खिलाड़ी को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित प्रतिस्पर्धा, उच्च स्तरीय कोचिंग, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और ओलंपिक तैयारी की क्रमिक सुविधाएँ मिलती रहें। इससे जमीनी प्रतियोगिताओं से शुरू होकर खेलो इंडिया और आगे टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम तक की प्रगति सुनिश्चित होगी।

    इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (ई-केआईएस) नई खेलो इंडिया योजना में शुरू की गई एक विशेष श्रेणी है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करके उन्हें आगे बढ़ाना और देश के एथलीट विकास तंत्र का लगभग 10 गुना विस्तार करना है। अब भारत का लक्ष्य केवल चैंपियन खोजने का नहीं बल्कि चैंपियन तैयार करने की प्रणाली विकसित करने का है।

    राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र, मान्यता प्राप्त खेल अकादमियाँ, खेलो इंडिया केंद्र तथा सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियाँ इस पूरी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं। इन संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय प्रतिभा को उसके खेल कैरियर के विभिन्न चरणों में आवश्यक अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में सहायक होगा।

    एक सशक्त राष्ट्र वह नहीं जिसमें कुछ महान खिलाड़ी हों बल्कि वह है जिसमें हर वर्ग को अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर मिले। इस योजना में फिट इंडिया मूवमेंट को व्यापक बनाने का उद्देश्य भारतीय समाज में सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है, जहां खेल की भूमिका पदक से कहीं बड़ी हो जाती है। खेल बच्चों में अनुशासन, युवाओं में आत्मविश्वास, समुदाय में सहभागिता और समाज में स्वास्थ्य-संस्कृति को बढ़ावा देता है।

    महिलाओं की खेलों में भागीदारी, सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक सुविधाएँ, मादक द्रव्यों के सेवन के विरुद्ध खेल-आधारित पहल तथा पैरा-एथलीटों और पारंपरिक खेलों को समर्थन ये सभी पहल खेल को समावेशी सामाजिक परिवर्तन के माध्यम में बदलेंगी।

    पारंपरिक खेलों को आधुनिक खेल पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ना सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक खेल के बीच एक सार्थक सेतु बनेगा। इससे भारत की खेल पहचान केवल वैश्विक मानकों को अपनाने वाली नहीं बल्कि अपनी परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने वाली बनेगी।

    किसी खिलाड़ी को उत्कृष्टता के स्तर तक पहुँचाने में प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड जैसी व्यवस्था कोचिंग योग्यताओं के मानकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अब भविष्य का प्रशिक्षक केवल तकनीक सिखाने वाला प्रशिक्षक नहीं बल्कि खेल विज्ञान, पोषण, मनोविज्ञान, डेटा, प्रदर्शन विश्लेषण और खिलाड़ी कल्याण की समझ रखने वाला विशेषज्ञ होगा।

    वर्तमान खेल केवल प्रतिभा और परिश्रम पर निर्भर नहीं है। आज स्पोर्ट्स साइंस, डेटा एनालिटिक्स, पोषण, रिकवरी, मनोविज्ञान, प्रदर्शन विश्लेषण और आधुनिक तकनीक खिलाड़ी की सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। एकीकृत डिजिटल खेल मंच की परिकल्पना इस परिवर्तन को और गति देगी। प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, खिलाड़ी का प्रदर्शन, खेल अवसंरचना और एथलीट सहायता एक डिजिटल व्यवस्था से जुड़े हों तो निर्णय अधिक डेटा-आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाए जा सकेंगे। इससे भविष्य का खिलाड़ी केवल मैदान पर मेहनत नहीं करेगा बल्कि विज्ञान और तकनीक उसके प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाने में साथ देंगे।

    नई खेलो इंडिया योजना का प्रभाव केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रहेगा। यह भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ी हुई योजना है। यह योजना वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों से लेकर भविष्य के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की आकांक्षा तथा विकसित भारत 2047 के संकल्प तक, खेल भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

    एक ऐसा भारत, जहाँ गाँव का प्रतिभाशाली बच्चा अपने सपने को केवल सपना न समझे बल्कि उसके पास उसे पूरा करने का स्पष्ट मार्ग हो जो उसे वैश्विक मंच तक पहुँचने का माध्यम बनें। यह केवल खेल नीति नहीं बल्कि भारत के युवाओं के सामर्थ्य को पहचानने, उसे अवसर देने और राष्ट्र निर्माण की शक्ति में बदलने का संकल्प है। प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की यह नई खेल यात्रा पदक जीतने के साथ खेल शक्ति से युवा शक्ति और युवा शक्ति से विकसित भारत के निर्माण की यात्रा बनेगी।

     

  • बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट का नगर निगम से सवाल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई

    बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट का नगर निगम से सवाल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई

     ग्वालियर
     ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंगलवार को नगर निगम को जमकर फटकार लगाई। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नगर निगम ने सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पेश नहीं की तो यह माना जाएगा कि निगम शहर की सड़कें ठीक करने में रुचि नहीं रखता और उसने ग्वालियरवासियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि जनहित याचिका लंबित होने का बहाना बनाकर नगर निगम सड़कों के निर्माण, पैचवर्क या मरम्मत से पीछे नहीं हट सकता।

    न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने कैलाशचंद अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम को एक सप्ताह में शहर की सड़कों के निर्माण के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों के पैचवर्क और मरम्मत की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि इस जनहित याचिका का मूल उद्देश्य ग्वालियर के लोगों को सुचारू और गुणवत्तापूर्ण सड़कें उपलब्ध कराना है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी।

    सड़क खराब है तो निर्माण से क्यों भाग रहा निगम
    सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पूछा गया कि क्या क्षतिग्रस्त सड़कों पर पैचवर्क या मरम्मत के लिए भी कोर्ट की अनुमति आवश्यक होगी। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निगम सड़कें ठीक करने का काम कर सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह यह बहाना नहीं बना सकता कि मामला अदालत में लंबित होने के कारण सड़क निर्माण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने नगर निगम को शहर की सड़कों का निर्माण मध्य प्रदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 8 नवंबर 2025 को जारी एसओआर के अनुसार करने की अनुमति दी है। लेकिन इसके साथ निगरानी की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।

    मेजरमेंट बुक में गड़बड़ी मिली तो आयुक्त भी जिम्मेदार
    हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सड़क निर्माण से संबंधित प्रत्येक मेजरमेंट बुक को नगर निगम आयुक्त स्वयं स्थल पर जाकर काम का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही प्रमाणित करेंगे। यदि मेजरमेंट बुक में दर्ज काम और मौके पर वास्तव में हुए निर्माण में अंतर पाया गया तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के साथ नगर निगम आयुक्त भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

    आठ से घटकर अब तीन नई सड़कों की जांच
    सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांच के लिए गठित आयोग ने कोर्ट को बताया कि हनुमान टॉकीज से गुढ़ा-गुड़ी का नाका तक सड़क से नमूने लेने में करीब 11 घंटे लगे। जांच प्रक्रिया में समय और संसाधन अधिक लगने को देखते हुए कोर्ट ने सभी पक्षों की सहमति से जांच के लिए प्रस्तावित आठ सड़कों की संख्या कम कर दी। अब नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की एक-एक सड़क की जांच होगी। पहले से एक सड़क से नमूने लिए जा चुके हैं। इस तरह आगे तीन विभागों की एक-एक सड़क को जांच के लिए चुना जाएगा।

    सड़क का नाम आधा घंटा पहले बताएगा आयोग
    कोर्ट ने यह भी व्यवस्था की कि जांच के लिए चुनी जाने वाली सड़कों का नाम पहले से सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया हाईकोर्ट परिसर से टीम के रवाना होने से महज आधा घंटा पहले संबंधित सड़कों की जानकारी देंगे। इसके लिए पहले से चिह्नित सात सड़कों में से आयोग तीन सड़कों का चयन कर सकेगा। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले कोर्ट के समक्ष सड़क की जांच से पहले ही उसके निर्माण या मरम्मत का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया था। कोर्ट ने ऐसे किसी भी हस्तक्षेप से जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका को गंभीरता से लिया था।

    बिना सड़क खोदे होगी एक्स-रे जैसी जांच
    एनएचएआई की ओर से नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) से सड़क की जांच कराने का सुझाव दिया गया। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए एनएचएआई को अपने खर्च पर वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। 30 अगस्त को एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की चुनी गई एक-एक सड़क को एनएसवी से स्कैन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर 3 और 6 सितंबर को नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की सड़कों से भौतिक नमूने भी लिए जाएंगे। एनएसवी तकनीक से सड़क को खोदे बिना उसकी अंदरूनी स्थिति और परतों की जांच की जा सकेगी। एनएचएआई की सड़क से भौतिक नमूने लिए जाएं या नहीं, इसका निर्णय बाद में किया जाएगा।

    रिपोर्ट आने के बाद तय होगी जिम्मेदारी
    कोर्ट ने साफ किया कि खराब सड़क निर्माण के लिए किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की दीवानी अथवा आपराधिक जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय की जा सकेगी। नमूनों की जांच के लिए दो नमूने पीडब्ल्यूडी टेस्टिंग लैब और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की प्रयोगशाला को भेजे जाएंगे। एक नमूना जिला न्यायालय ग्वालियर के मालखाने में सुरक्षित रखा जाएगा, जबकि एक नगर निगम को दिया जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्वालियर की जनता को अच्छी सड़कें मिलना जरूरी है। इसलिए निर्माण कार्य को अदालत की कार्यवाही के कारण रोका नहीं जा सकता। नगर निगम को अब एक सप्ताह में अपनी पूरी कार्ययोजना अदालत के सामने रखनी होगी।

  • डिंडौरी में सड़क घोटाले पर बड़ा एक्शन, पूर्व सरपंच को जेल; 2.65 लाख रुपये की वसूली

    डिंडौरी में सड़क घोटाले पर बड़ा एक्शन, पूर्व सरपंच को जेल; 2.65 लाख रुपये की वसूली

    डिंडौरी

    जनपद पंचायत डिंडौरी की ग्राम पंचायत कसईसोंढा में सीसी रोड निर्माण में वित्तीय अनियमितता के मामले में प्रशासन ने पूर्व सरपंच के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते से 2.65 लाख रुपये की वसूली के साथ 30 दिन कारावास में रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
    9 लाख रुपये स्वीकृत, 7 लाख रुपये का आहरण

    ग्राम पंचायत कसईसोंढा में आदिवासी विकास परियोजना अंतर्गत वर्ष 2021 में शासकीय प्राइमरी स्कूल भवन से अनुसुईया के घर से नीचे टोला तक सीसी रोड निर्माण के लिए 9 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके एवज में 7 लाख रुपये का आहरण कर लिया गया। लेकिन जांच और मूल्यांकन में मौके पर मात्र 1.70 लाख रुपये का ही निर्माण कार्य पाया गया।

     

  • डिंडौरी में सड़क घोटाले पर बड़ा एक्शन, पूर्व सरपंच को जेल; 2.65 लाख रुपये की वसूली

    डिंडौरी में सड़क घोटाले पर बड़ा एक्शन, पूर्व सरपंच को जेल; 2.65 लाख रुपये की वसूली

    डिंडौरी

    जनपद पंचायत डिंडौरी की ग्राम पंचायत कसईसोंढा में सीसी रोड निर्माण में वित्तीय अनियमितता के मामले में प्रशासन ने पूर्व सरपंच के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते से 2.65 लाख रुपये की वसूली के साथ 30 दिन कारावास में रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
    9 लाख रुपये स्वीकृत, 7 लाख रुपये का आहरण

    ग्राम पंचायत कसईसोंढा में आदिवासी विकास परियोजना अंतर्गत वर्ष 2021 में शासकीय प्राइमरी स्कूल भवन से अनुसुईया के घर से नीचे टोला तक सीसी रोड निर्माण के लिए 9 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके एवज में 7 लाख रुपये का आहरण कर लिया गया। लेकिन जांच और मूल्यांकन में मौके पर मात्र 1.70 लाख रुपये का ही निर्माण कार्य पाया गया।

     

  • बाढ़ प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचे उप मुख्यमंत्री : ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद

    बाढ़ प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचे उप मुख्यमंत्री : ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद

    भोपाल

    रीवा जिले में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के बाद पैदा हुई जल भराव की स्थिति का जायजा लेने के लिए उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के भ्रमण में हैं। आपदा की इस घड़ी में ग्राउंड जीरो पर जनता के बीच पहुंचकर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के क्रम में आज उन्होंने जिले के कई गंभीर रूप से प्रभावित ग्रामीण अंचलों का व्यापक भ्रमण किया।

    उप मुख्यमंत्री ने जल जमाव से प्रभावित ग्राम लक्ष्मणपुर, मैरहा टोला, लोही, भटलो और कोठी सहित आसपास के बाढ़ प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की और उनके नुकसान की जानकारी ली। संकटग्रस्त परिवारों से आत्मीयता के साथ चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कठिन समय है, लेकिन सरकार पूरी मजबूती के साथ आपके साथ खड़ी है। किसी भी नागरिक को बेसहारा नहीं रहने दिया जाएगा और हर संभव सहायता त्वरित गति से पहुंचाई जाएगी।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में बिजली, सड़क, संचार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को जल्द से जल्द बहाल करें। जलभराव के बाद बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को विशेष प्रबंध करने के निर्देश देते हुए कहा कि घर-घर स्वास्थ्य परीक्षण और पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं। शुद्ध पेयजल के टैंकरों की व्यवस्था और जल स्रोतों का क्लोरीनीकरण करें, ताकि संक्रामक बीमारियों से बचा जा सके।

     

  • नकली IAS बनकर 9.8 लाख ठगे, ‘भारत सरकार’ की इनोवा से जमाती थी रौब; भोपाल में पुलिस का छापा

    नकली IAS बनकर 9.8 लाख ठगे, ‘भारत सरकार’ की इनोवा से जमाती थी रौब; भोपाल में पुलिस का छापा

    भोपाल/अशोकनगर

    फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर ठगी करने और लोगों पर रौब जमाने वाली तृप्ति राजपूत के भोपाल कनेक्शन की जांच चंदेरी पुलिस ने तेज कर दी है। पुलिस तृप्ति और उसके भाई को लेकर भोपाल पहुंची, जहां बागमुगालिया स्थित उसके घर और अलकापुरी स्थित ससुराल में छापेमारी की गई।

    जांच के दौरान पुलिस ने फर्जी सीबीआई कार्ड, फर्जी लेटरहेड और ठगी से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।

    फर्जी आईएएस और एमपी टूरिज्म अधिकारी

    तृप्ति खुद को आईएएस अफसर और मध्य प्रदेश टूरिज्म की एडिशनल हेड बताकर लोगों पर प्रभाव जमाती थी। इसी फर्जी पहचान के दम पर उसने एक कारोबारी से 9.80 लाख रुपये की ठगी की और उससे शादी भी रचा ली।

     

  • डीजे की धमक से दहले घर, प्रतिबंधित कार्बाइड गन भी फोड़ी; जुलूस में नियमों की अनदेखी

    डीजे की धमक से दहले घर, प्रतिबंधित कार्बाइड गन भी फोड़ी; जुलूस में नियमों की अनदेखी

     ग्वालियर

    ईद मिलादुन्नवी पर मुस्लिम समाज के लोगों ने शहर में जुलूस निकाला। सुबह करीब 11.30 बजे सागरताल से जुलूस प्रारंभ हुआ और शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ फूलबाग स्थित मोती मस्जित पहुंचा। जुलूस में शामिल लोगों ने जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं। जुलूस में कई साउंड सिस्टम पर म्यूजिक बजाया गया। कई जगह तो साउंड सिस्टम की धमकी घरों के अंदर पहुंची और बर्तन तक गिर गए। इतना ही नहीं खुलेआम कार्बाइड गन से पटाखे फोड़े गए।

    लोग अभद्रता पर हुए उतारू

    सागरताल से जैसे ही जुलूस प्रारंभ हुआ तो साथ में साउंड सिस्टम लगी गाड़ियां चलने लगीं। काफी तेज आवाज में साउंड सिस्टम चलाया जा रहा था। जिससे यहां से निकल रहे लोगों से लेकर रहवासियों तक को असुविधा होने लगी। बहोड़ापुर इलाके में जैसे ही साउंड सिस्टम की आवाज धीमी करने के लिए बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक सिंह परिहार फोर्स के साथ पहुंचे और उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों को टोका तो यह लोग अभद्रता पर उतारू हो गए।

     

  • महिला सुरक्षा कर्मियों ने भी बांधी राखी

    महिला सुरक्षा कर्मियों ने भी बांधी राखी

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ग्वालियर की लाड़ली बहनों ने स्नेह और विश्वास से भरी राखियाँ बांधी। इन राखियों के पवित्र धागों ने जहां भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते को सुदृढ़ किया। वहीं प्रदेश की हर बहन के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और खुशहाली के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प को और मजबूत किया। रक्षाबंधन के उपहार स्वरूप लाडली बहना योजना के तहत अतिरिक्त धनराशि देने के लिए ग्वालियर की लाडली बहनों ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद पत्र भी भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ग्वालियर विमानतल पर तैनात सीआईएसएफ की दो महिला सुरक्षा कर्मियों ने राखियां बांधीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के ललाट पर लाड़ली बहनों ने रोली का तिलक लगाकर राखी बांधी मुख्यमंत्री ने  सभी बहनों को स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बहन और भाई का रिश्ता केवल एक पर्व तक सीमित नहीं है, यह जीवनभर के स्नेह, विश्वास और जिम्मेदारी का रिश्ता है। राखी का यह पवित्र धागा हमें निरंतर याद दिलाता रहेगा कि मध्यप्रदेश की प्रत्येक बहन उनके परिवार का हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की हर बहन के चेहरे पर मुस्कान हो, बेटियां सुरक्षित रहें, आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को पूरा करते हुए आगे बढ़ें, इसके लिए प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है।

    एयर टर्मिनल पर तैनात महाराष्ट्र निवासी सुश्री रासकर अश्विनी और राजस्थान निवासी सुश्री पूनम यादव इस बार रक्षाबंधन पर अपने घर नहीं जा पा रही हैं। अपनों से दूर होने की कसक उनके मन में थी, लेकिन मुख्यमंत्री की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते ही उनकी आंखें नम हो गईं। दोनों ने भावुक होकर कहा मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन पर्व पर हमें भाई की कमी महसूस नहीं होने दी।

    लाड़ली बहनों के  विश्वास और मुख्यमंत्री की आत्मीयता से रक्षाबंधन का यह अवसर स्नेहिल भावनाओं से भर उठा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भिंड जिले के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में गोदरेज की चौथी यूनिट का शुभारंभ करने आए थे। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ट्रांजिट विजिट पर विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के साथ ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयर टर्मिनल पहुंचे थे।

    इस अवसर पर कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष श्री केशव सिंह बघेल, जीडीए के अध्यक्ष श्री मधुसूदन सिंह भदौरिया, महर्षि पतंजलि बोर्ड के अध्यक्ष श्री कौशल शर्मा, नगर निगम सभापति श्री मनोज तोमर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

     

  • एकात्म धाम में प्राचीन नागर शैली का भव्य पंचायतन मंदिर, 100 नक्काशीदार स्तंभ होंगे खास आकर्षण

    एकात्म धाम में प्राचीन नागर शैली का भव्य पंचायतन मंदिर, 100 नक्काशीदार स्तंभ होंगे खास आकर्षण

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में स्थित 'एकात्म धाम' में गुरुवार 27 अगस्त को सुबह 6 बजे भव्य "पंचायतन मंदिर" का शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, भारत की दिव्य संन्यास परंपरा के प्रतिनिधियों, षड्दर्शन संत मंडल के पूज्य संतों तथा विशिष्ट अतिथियों के साथ 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर  वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् धर्मगिरि, आंध्रप्रदेश के प्राचार्य के.एस.एस. अवधानी, दक्षिणाम्नाय  शारदा पीठम् कर्नाटक एवं   गुरुकुल के आचार्यों द्वारा वैदिक अनुष्ठान से पंचायतन मंदिर का शिला पूजन का शुभ अनुष्ठान संपन्न होगा। 

    पंचायतन पूजन : विविध उपासना परंपराओं का अद्भुत समन्वय

    जगतगुरू  आदि शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों के मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए 'पंचायतन पूजन' का पुनरुद्धार किया था। भगवत्पाद के इस युगांतरकारी योगदान को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से 'एकात्म धाम' में इस भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। सनातन परंपरा में पंचदेव पूजा का मूल दर्शन विविध स्वरूपों के माध्यम से एक ही 'परम ब्रह्म' की अनुष्ठानिक उपासना करना है।

    पंचायतन मन्दिर के केंद्र में होगा भगवान शिव का देवालय

    प्राचीन पंचायतन शैली पर आधारित इस मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा। चारों कोनों पर उप-देवालय स्थित होंगे। ईशान कोण में भगवान विष्णु, आग्नेय कोण में भगवान सूर्य, नैऋत्य कोण में भगवान गणेश और वायव्य कोण में भगवती शक्ति का स्थान नियत है। मुख्य देवालय का शिखर 'सोमतिलक' शैली का होगा। मंदिर का गर्भगृह 'सर्वतोभद्र' शैली में निर्मित है, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश द्वार होंगे। परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 लघु 'संवर्णा' (सामरण) स्थापित किए जाएंगे। भव्य तोरण-द्वार स्थापत्य की सुंदरता को द्विगुणित करेंगे।

    पंचायतन मंदिर के मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का एक विशाल कलात्मक गुंबद होगा, जो मंदिर की भव्यता का मुख्य आकर्षण बनेगा। यह पूरा मन्दिर 16 फीट ऊँचे आधारभूत अधिष्ठान यानी 'जगति' पर टिका हुआ है। इसका बाह्य ऊर्ध्वाधर वास्तु-विन्यास (मंडोवर) भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और अलंकृत पट्टिकाओं के क्रमबद्ध संयोजन से सजाया गया है। संपूर्ण मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा। इसके निर्माण में 80,000 घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जा रहा है। पंचायतन मन्दिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला के पुनरुत्थान का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करता है। यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किया जा रहा है, जो भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक गरिमा का जीवंत प्रतीक होगा।

    पंचायतन उपासना दर्शन

    भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसार, ईश्वर जगत के सृजनहार हैं और स्वयं चराचर जगत के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। उपनिषदों में वर्णित सृष्टि के विविध रूपों की उपासना के विधान को स्थापत्य शास्त्र में मंदिर के आकार, शिखर और विग्रह निर्माण के माध्यम से परिभाषित किया गया है। आदि शंकराचार्य ने शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य संप्रदायों के मध्य समरसता स्थापित करने के लिए पञ्चायतन पद्धति को पुनः प्रतिष्ठित किया। यह दर्शन सिखलाता है कि प्रत्येक देवता एक ही अनंत सत्ता के विभिन्न स्वरूप हैं। जैसे स्वर्ण से निर्मित आभूषणों का मूल तत्व स्वर्ण ही रहता है, उसी प्रकार पंचदेव एक ही निराकार ब्रह्म के साकार स्वरूप हैं।

     

  • सिंधिया राजघराने की संपत्ति पर नया विवाद, प्रतिमा देवी ने वसीयत में बराबर हिस्से का किया दावा

    सिंधिया राजघराने की संपत्ति पर नया विवाद, प्रतिमा देवी ने वसीयत में बराबर हिस्से का किया दावा

    ग्वालियर
     सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ प्रतिमा देवी पहली बार अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ जिला न्यायालय पहुंचीं। करीब डेढ़ घंटे तक अदालत में मौजूद रहीं प्रतिमा देवी ने न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें न तो वसीयत की जानकारी दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

    प्रतिमा देवी ने कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वसीयत की प्रति भी उनके पास नहीं है। उन्होंने मुंबई की एक अदालत में उपलब्ध वसीयत की कॉपी का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी के माध्यम से उन्हें कुछ जानकारी मिल सकी। उन्होंने संपत्ति में बराबर का अधिकार दिए जाने की मांग भी अदालत के समक्ष रखी।

    प्रतिमा देवी ने नोटिस को लेकर उठाए सवाल
    प्रतिमा देवी ने नोटिस को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि उन्हें नेपाल के नेपालगंज पते पर नोटिस भेजे गए, जबकि उनका निवास काठमांडू में है। इस वजह से उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला और उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया गया। उन्होंने अपनी छोटी बहनों का भी जिक्र करते हुए कहा कि वे भी अपनी मां के हिस्से पर दावा कर रही हैं। यहां बता दें कि प्रतिमा देवी सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्माराजे की बेटी हैं।

    नेपाल के पते पर नोटिस भेजने पर भी आपत्ति
    प्रतिमा देवी ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मामले से जुड़े नोटिस कभी प्राप्त नहीं हुए। उनके मुताबिक नोटिस नेपालगंज के ऐसे पते पर भेजे गए, जहां वह रहती ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं और उनका निवास पशुपतिनाथ मंदिर के पास है।

    उन्होंने अपनी तीन छोटी बहनों का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े सभी पक्षों को उचित तरीके से सूचना दिए बिना संपत्ति के मामले में समझौता नहीं किया जा सकता। प्रतिमा देवी ने खुद को एक्स पार्टी बनाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

    अधिवक्ता ने मांगा समय 
    प्रतिमा देवी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत से विस्तृत बहस के लिए समय मांगा। न्यायालय ने आवेदन स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 तय की है। इस दिन प्रतिमा देवी की आपत्ति और संपत्ति विवाद के समाधान के लिए तैयार किए गए समझौते की वैधता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बहस होने की संभावना है।

    वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ एवं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे की ओर से भी अधिवक्ता अदालत पहुंचे। उनके वकीलों ने भी अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा।

    बंटवारे में शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति
    बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच संपत्तियों के बंटवारे का विवाद चल रहा है। सभी पक्षों के बीच बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी थी। सिंधिया परिवार की संपत्तियों के बंटवारे के लिए हुए आपसी समझौते (आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट) में प्रतिमा देवी को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले में कानूनी विवाद बढ़ गया।

    10 सितंबर को अगली सुनवाई
    पिछली सुनवाई पर प्रतिमा देवी के आवेदन पर सभी पक्षों ने जवाब पेश कर दिए थे। मंगलवार को इन आवेदनों पर बहस होनी थी, लेकिन सभी पक्ष बहस के लिए तैयार नहीं थे। इसके चलते बहस नहीं हो सकी। अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। ज्ञात हो कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से प्रतिमा देवी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग भी की गई है। इन आवेदनों पर भी अगली सुनवाई में बहस होगी।

    पिछली सुनवाई में ये हुआ था
    वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी की मौजूदगी और उनकी लिखित सहमति रिकॉर्ड में है, दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर भी हैं। बंटवारे के दौरान हस्ताक्षर किए जाने का फोटो भी कोर्ट में पेश किया गया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी जवाब पेश किया जा चुका है, जिसमें कहा गया है कि बंटवारा कानून के तहत हुआ है।

    पहले की सहमति पर भी उठे थे सवाल
    इससे पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब अदालत में पेश किया गया था। जवाब में कहा गया था कि यदि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और खुद को प्रक्रिया से अलग रखा था, तो अंतिम चरण में आपत्ति दर्ज कराने का औचित्य क्या है।

    पिछली सुनवाई में बंद लिफाफे में दस्तावेज पेश किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि सभी पक्षों को सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और आगे से दस्तावेज बंद लिफाफे में पेश नहीं किए जाएं।

    मां के हिस्से का हवाला देकर मांगा अधिकार
    प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां दिवंगत पद्मावती राजे, जो राजमाता विजयाराजे सिंधिया की सबसे बड़ी पुत्री थीं, संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी कर किया गया कोई समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद सिंधिया राजघराने की विशाल संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर पेचीदा हो गई है। अब 10 सितंबर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत उनकी आपत्तियों और समझौते की वैधता को लेकर आगे किस दिशा में बढ़ती है।