Category: मध्य प्रदेश

  • CM मोहन यादव के निर्देश पर देवास में छापा, रक्षाबंधन से पहले संदिग्ध एनालॉग मावा जब्त

    CM मोहन यादव के निर्देश पर देवास में छापा, रक्षाबंधन से पहले संदिग्ध एनालॉग मावा जब्त

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार देवास में रक्षाबंधन से पूर्व एनालॉग मावा किया गया जब्त

    न्यू स्वदेशी स्वीट्स और जोधपुर स्वीट्स पर पड़ी रेड
    972 किलो प्रतिबंधित एनालॉग मावा और मिठाइयां ज़ब्त
    ट्रेंचिंग ग्राउंड में किया गया नष्ट

    देवास

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार देवास में कलेक्टर ऋतु राज सिंह के नेतृत्व में मिलावट विरोधी अभियान लगातार जारी है। जिला और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने देवास के भोपाल चौराहा स्थित 'जोधपुर स्वीट्स' और नयापुरा में स्थित 'न्यू स्वदेशी स्वीट्स' की दुकान एवं कारखानों का औचक निरीक्षण कर कुल 972 किलोग्राम प्रतिबंधित एनालॉग मावा तथा इससे निर्मित मिठाइयाँ ज़ब्त की। जांच में पाया गया कि जोधपुर स्वीट्स के गोदाम से यह अमानक सामग्री उसकी तीन अलग-अलग आउटलेट्स पर विक्रय हेतु भेजी जानी थी।

    बुधवार को जब्त किये गए भारी मात्रा में मिलावटी एवं अमानक एनालॉग मावे और मिठाइयों को गुरुवार को नगर निगम के शंकरगढ़ पहाड़ी स्थित ट्रेन्चिंग ग्राउंड ले जाया गया, जहाँ नियमानुसार गड्ढा खुदवाकर संपूर्ण अमानक सामग्री को पूरी तरह नष्ट करने की वैधानिक कार्रवाई पूर्ण की गई। शासन से जारी निर्देशानुसार एनालॉग मावा एवं एनालॉग पनीर वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं। इन्हें पाम ऑयल, घटिया वनस्पति तेल, मिल्क पाउडर एवं हानिकारक केमिकल्स के मिश्रण से तैयार किया जाता है।

    शासन के आदेशानुसार ऐसे सभी उत्पादों के निर्माण, भण्डारण एवं विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। ये उत्पाद जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। आने वाले दिनों में भी जिले भर में दूषित, मिलावटी और एनालॉग मावा, पनीर तथा अन्य दुग्ध उत्पादों के विरुद्ध जांच व जब्ती की सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

  • खेलों से सशक्त युवा, मजबूत भारत का लक्ष्य; भोपाल में गूंजा ‘खेल की बात पीएम के साथ’ का संदेश

    खेलों से सशक्त युवा, मजबूत भारत का लक्ष्य; भोपाल में गूंजा ‘खेल की बात पीएम के साथ’ का संदेश

    खेलों से सशक्त युवा, देश का गौरव बढ़ाने का संकल्प — भोपाल में गूंजा ‘खेल की बात पीएम के साथ’ का संदेश

    नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में आयोजित हुआ ‘खेलो इंडिया डायलॉग: खेल की बात पीएम के साथ’ कार्यक्रम

    भोपाल

              नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, स्थित राजीव गांधी साइबर लॉ सेंटर में माय भारत के संयुक्त तत्वाधान में ‘खेलो इंडिया डायलॉग: खेल की बात पीएम के साथ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के देशभर के खिलाड़ियों एवं युवाओं के साथ संवाद का सीधा प्रसारण किया गया। 

        कार्यक्रम का सफल संचालन एवं मॉडरेटर की भूमिका यशस्वी अग्रवाल द्वारा प्रभावी ढंग से निभाई गई। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा खेल के माध्यम से अनुशासन, समर्पण, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना को बढ़ावा देना रहा।
    इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ऑनलाइन माध्यम से देशभर के खिलाड़ियों एवं युवाओं को संबोधित करते हुए खेलों के प्रति समर्पण, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को खेलों में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा अपनी प्रतिभा के माध्यम से देश का गौरव बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री के संवाद से उपस्थित युवाओं एवं विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला और उन्होंने खेलों को केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

       कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री मनोज श्रीवास्तव, आयुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग,  श्री प्रवीण शर्मा, अध्यक्ष, राज्य युवा आयोग, डॉ एस सूर्यप्रकाश, कुलपति, एन एल आई यू, डॉ राका आर्या, डिन, छात्र कल्याण, एन एल आई यू,  श्रीमती गुंजन चौकसे, सुप्रीम कोर्ट लॉयर एवं श्रीमति निक्की राठौर, उपनिदेशक, माय भारत की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने उपस्थित खिलाड़ियों, यूथ आइकन्स, विद्यार्थियों एवं युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जिले में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि युवा अपनी प्रतिभा को पहचानें, नियमित अभ्यास करें और उपलब्ध अवसरों का बेहतर उपयोग करते हुए जिला, प्रदेश एवं देश स्तर पर अपनी पहचान बनाएं।

    कार्यक्रम को विशेष रूप से प्रेरणादायी बनाने में जिले के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की सहभागिता महत्वपूर्ण रही। इस अवसर पर सुश्री वैष्णवी खलाने, अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी, उपस्थित रहीं जिनकी उपलब्धियों एवं संघर्षपूर्ण खेल यात्रा ने उपस्थित विद्यार्थियों और युवाओं को यह संदेश दिया कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
    इसके साथ ही यूथ आइकन के रूप में सुश्री यशस्वी अग्रवाल, सुश्री संजना पाल एवं श्री शैलेंद्र श्रीवास, श्री देवेंद्र वर्मा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। उनकी उपस्थिति ने युवाओं को खेलों के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता, रचनात्मक गतिविधियों एवं युवा नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

          प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के उपरांत कार्यक्रम का महत्वपूर्ण एवं संवादात्मक चरण आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित बच्चों एवं युवाओं को जिले के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने खिलाड़ियों से उनके खेल जीवन के अनुभव, नियमित अभ्यास की दिनचर्या, खेल के दौरान आने वाली कठिनाइयों, प्रतियोगिताओं के दबाव, असफलताओं से सीखने तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किए गए संघर्षों के बारे में जानकारी प्राप्त की। खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए युवाओं को बताया कि खेल के क्षेत्र में सफलता के लिए प्रतिभा के साथ-साथ निरंतर अभ्यास, अनुशासन, धैर्य, सकारात्मक सोच और खेल भावना अत्यंत आवश्यक है।

      कार्यक्रम के दौरान आइडिया बॉक्स के माध्यम से उपस्थित युवाओं ने पांच  प्रमुख विषयों पर अपने विचार एवं सुझाव साझा किए। इनमें देश में खेल पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार, 2036 ओलंपिक के लिए प्रतिभा विकास, शासन में युवा नेतृत्व एवं भागीदारी, विकसित भारत के लिए युवाओं का सशक्तिकरण तथा नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत प्रमुख रहे। युवाओं ने खेल सुविधाओं के विस्तार, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान एवं प्रशिक्षण, युवाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी तथा कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर बढ़ाने से संबंधित अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इन विचारों के माध्यम से युवाओं ने विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी की भावना व्यक्त की।
    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी युवाओं एवं विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। युवाओं ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खेल एवं सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने तथा अपने आसपास के अन्य युवाओं को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का ।

            संकल्प व्यक्त किया। खिलाड़ियों ने भी युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहने।असफलताओं से निराश न होने तथा निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित अतिथियों, खिलाड़ियों, यूथ आइकन्स, एवं युवाओं का आभार व्यक्त किया गया। राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ। ‘खेल की बात पीएम के साथ’ संवाद ने भिंड के युवाओं को खेलों के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा देने के साथ यह संदेश दिया कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, अनुशासित युवा शक्ति और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का प्रभावी साधन है। आयोजन ने युवाओं में ‘खेलेंगे तो खिलेंगे और आगे बढ़ेंगे तो देश का नाम रोशन करेंगे’ जैसी सकारात्मक भावना को और मजबूत किया।

     

  • अभियान संचालित कर विद्यालयों में मूलभूत आवश्यकताओं की करें पूर्ति: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    अभियान संचालित कर विद्यालयों में मूलभूत आवश्यकताओं की करें पूर्ति: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    ई-अटेंडेंस व्यवस्था के मिल रहे अच्छे नतीजे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार रखे जाएं जारी
    अभियान संचालित कर विद्यालयों में मूलभूत आवश्यकताओं की करें पूर्ति
    गत 2 वर्ष में सवा करोड़ विद्यार्थियों को 696 करोड़ रुपए का हुआ ऑनलाइन भुगतान
    प्रदेश के 2 विद्यालय स्वच्छ और हरित विद्यालय कार्यक्रम में हुए पुरस्कृत
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर चल रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार सराहनीय हैं, इन्हें जारी रखा जाए। इसके साथ ही छात्रों के हित में विद्यालयों में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए विभिन्न पक्षों का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालयों में सभी व्यवस्थाएं बेहतर बनाने का कार्य निरंतर किया जाए। इसके लिए अभियान संचालित कर कार्यों को पूरा किया जाए। शालाओं में नवीन निर्माण कार्यों की पूर्णता को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में शासकीय शालाओं में अधोसंरचना, संधारण और संचालन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से संबंधित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    तकनीक के अधिकतम उपयोग से प्रबंधन को बनाएं आसान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक का अधिकतम उपयोग विभिन्न तरह के प्रबंधन को आसान बना देता है। सभी जिले इस दिशा में सक्रियतापूर्वक कार्य किया जाना सुनिश्चित करें। आवश्यकता के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी जैसे सिपरी सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर क्षेत्र के पेयजल स्रोतों और जल स्तर की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। ऐसी जानकारियां विभिन्न कार्यों को जल्दी पूरा करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।

    ई- अटेंडेंस व्यवस्था से मिले बेहतर परिणाम

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने के अच्छे परिणाम मिले हैं। "हमारे शिक्षक" ऐप के माध्यम से शिक्षकों की ऑनलाइन एआई संचालित व्यवस्था का अन्य राज्यों द्वारा भी अध्ययन किया जा रहा है। कर्मचारियों के लिये ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने के बाद ई-अटेंडेंस 95 प्रतिशत तक हो गई है। न्यूनतम शिक्षण अवधि के अनुसार पठन-पाठन सुनिश्चित करने के कार्य में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन कर रहा है। स्वच्छ और हरित विद्यालय कार्यक्रम में प्रदेश के 2 विद्यालय रतलाम जिले के जावरा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और भोपाल के शासकीय कमला नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया है।

    छात्रवृत्ति का ऑनलाइन भुगतान

    विगत 2 वर्ष में समेकित छात्रवृत्ति योजना का क्रियान्वयन कर लगभग सवा करोड़ छात्र हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने नोडल विभाग के रूप में कार्य करते हुए योजना अंतर्गत राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा विद्यार्थियों के खातों में किया गया है। गत 2 वर्ष में विद्यार्थियों को 696 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है।

    जिला स्तर पर कलेक्टर होंगे समन्वयक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला स्तर पर विद्यालयवार अधोसंरचनात्मक विकास की विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। विभिन्न विभागों के अंतर्गत उपलब्ध बजट से शाला भवनों में आवश्यक अधोसंरचना, अनुरक्षण एवं संधारण के कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यालयों में नियमित साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था तथा क्रियाशील शौचालयों की उपलब्धता स्थानीय निकायों के माध्यम से सुनिश्चित की जाए। इसी तरह उद्योग जगत और निवेशकों का सहयोग भी विद्यालयों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर समन्वय एवं पर्यवेक्षण करेंगे।

    पूर्व छात्र सम्मेलन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव पहल करते हुए पूर्व छात्रों के सम्मेलन भी होना चाहिए। अनेक पूर्व छात्र अपनी पुरानी शिक्षण संस्था के विकास में सहयोगी होते हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि अधोसंरचनात्मक विकास के लिए सीएसआर, डीएमएफ, सांसद, विधायक निधि, स्थानीय संस्थाओं, जनभागीदारी तथा अन्य वैकल्पिक स्रोतों से सहयोग लिया जा रहा है। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह वर्चुअल जुड़े।मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • भोपाल में 1 लाख लोगों की राह होगी आसान, 16 किमी रोड पर बनेंगे 18 अंडरपास

    भोपाल में 1 लाख लोगों की राह होगी आसान, 16 किमी रोड पर बनेंगे 18 अंडरपास

    भोपाल
    राजधानी भोपाल के रत्नागिरी तिराहा से आशाराम तिराहा तक 16 कि.मी की अयोध्या बायपास 10-लेन रोड को पार करने व्हीकल अंडरपास का निर्माण शुरू हुआ है। रोड में पौन किमी के अंतराल में 18 अंडरपास बनेंगे। आसपास रहने वाली व सर्विस रोड का उपयोग करने वाली एक लाख आबादी को इससे मदद मिलेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इसे 1000 करोड़ रुपए के बजट से तैयार कर रहा है। प्रोजेक्ट का शुरुआती बजट 832 करोड़ रुपए था, लेकिन काम शुरू होने में देरी की वजह से बजट में 170 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो गई। 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसमें सिक्सलेन मुख्यमार्ग के साथ दो-दो लेन सर्विस रोड का हिस्सा है।

    कॉलोनियां, अब ढाई फीट तक रोड से नीचे रोड ने आसपास की कॉलोनियों के लिए अजीब स्थिति बनाई है। रत्नागिरी से आशाराम तिराहा तक 60 कॉलोनियां है। रोड को जमीन से काफी ऊंचाई पर बनाया गया, इससे ये कॉलोनियां रोड से ढाई फीट तक नीचे हो गई है। अब इनके सामने बारिश के पानी की निकासी के साथ कॉलोनी के सीवेज की निकासी की समस्या है। रोड किनारे बड़ी डक्ट से कॉलोनियों के सामने अघोषित दीवार बन गई है।

    जमीन से दो फीट तक ऊंची रोड, अंडरपास ही नाला भी
    प्रोजेक्ट ने बायपास के दोनों तरफ के पानी की निकासी पूरी तरह बांध दी है। इसकी सुगम निकासी बनी रहे, इसके लिए कोई अलग से इंतजाम नहीं किए गए। निर्माणाधीन अंडरपास ही एकमात्र विकल्प है, जिससे बारिश का पानी गुजर सकेगा। यानी बारिश के दौरान यहां पानी रहेगा और आमजन को आवाजाही में दिक्कत होगी। समय के साथ रोड के दोनों तरफ भूजल स्तर में भी बदलाव नजर आने की बात एक्सपर्ट कह रहे हैं।

    ऐसे समझें प्रोजेक्ट
    इसमें 11 फ्लाइओवर-एलीवेटेड सेक्शन है। एक रेलवे ओवरब्रिज भी बनेगा। प्रोजेक्ट एयरपोर्ट, करोंद, रायसेन रोड, कानपुर की ओर भारी वाहनों की आवाजाही के लिए इसे बेहतर बताया जा रहा है।

    इस बात का रखना चाहिए ध्यान
    टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार, प्रोजेक्ट के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए। अंडरपास समेत ब्रिज का काम चल रहा है। आसपास की कॉलोनियां भी नीची हुई है। इससे कोई पर्यावरणीय संकट न बने, इसका ध्यान रखना चाहिए।

  • 29 अगस्त को सभी जिलों में जन-विश्वास अभियान, बालाघाट में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    29 अगस्त को सभी जिलों में जन-विश्वास अभियान, बालाघाट में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 29 अगस्त को बालाघाट में जन-विश्वास अभियान में होंगे शामिल

    सभी जिलों में इस बार 29 अगस्त को जन-विश्वास अभियान

     बालाघाट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 अगस्त शनिवार को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में बालाघाट जिले में शामिल होंगे। शुक्रवार को रक्षाबंधन का अवकाश होने के कारण इस बार 29 अगस्त शनिवार को संपूर्ण प्रदेश में जनविश्वास अभियान आयोजित होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागाध्यक्ष के अलावा कलेक्टर्स और कमिश्नर सहित मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत को इस संबंध में निर्देश जारी किए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बालाघाट में जिला स्तरीय समाधान ऑनलाइन में चिन्हित शिकायतकर्ताओं की शिकायतें समक्ष में सुनी जाएँगी। इस दौरान बैठक और समीक्षा के साथ मीडिया संवाद तथा उद्योग संवाद भी होगा। प्रदेश के सभी जिलों में भी जन विश्वास अभियान 29 अगस्त 2026 को आयोजित किया जाएगा।

    जनविश्वास अभियान के दौरान विभिन्न शासकीय आवासीय संस्थाएं, उदाहरणार्थ आवासीय विद्यालय, आश्रम, छात्रावास आदि का भ्रमण तथा निरीक्षण अनिवार्यत: किया जाएगा। इन संस्थाओं में रहने वाले छात्र छात्राओं और युवाओं से संवाद के साथ ही महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा भी की जाएगी।

     

  • CM मोहन यादव का मेगा चिंतन शिविर, मंत्रियों से लेकर अफसरों तक के साथ तय होगा भविष्य का रोडमैप

    CM मोहन यादव का मेगा चिंतन शिविर, मंत्रियों से लेकर अफसरों तक के साथ तय होगा भविष्य का रोडमैप

    भोपाल 
    सीएम डॉ मोहन यादव पहली बार चिंतन शिविर का आयोजन करने जा रहे हैं। सितंबर में सीएम सभी मंत्रियों के साथ दो दिनों तक चिंतन-मंथन करेंगे। सीएम के निर्देश पर इस चिंतन शिविर की तैयारियां की जा रही हैं।

    ग्रुप में मंत्रियों के साथ मंथन का प्लान
    अगले महीने में प्रस्तावित चिंतन शिविर में मंत्रियों के समूह बनाकर ढाई साल में हुए विभागीय कामों, योजनाओं की प्रोग्रेस की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही संकल्प पत्र के मुताबिक अगले ढाई साल के रोडमैप पर भी चर्चा होगी। इस बार के चिंतन शिविर में तीन-चार विभागों के मंत्रियों के ग्रुप बनाकर चिंतन-मंथन किया जाएगा।

    जिलों से लेकर राज्य तक के मुखिया रहेंगे मौजूद
    चिंतन शिविर के दौरान कलेक्टर-कमिश्नर से लेकर विभागों के एसीएस, पीएस भी मौजूद रहेंगे। सीएम की इच्छा है कि मंत्रियों के साथ होने वाली समीक्षा बैठक में प्रभार के जिलों की स्थिति पर भी चर्चा हो और वहां की स्थानीय चुनौतियों, कामों को लेकर रिव्यू में अफसरों से सवाल-जवाब किए जा सकें।

    आर्थिक बचत के लिए चिंतन शिविर भोपाल में होगा
    आमतौर पर चिंतन शिविर राजधानी से दूर एकांत क्षेत्र में आयोजित किए जाते रहे हैं। लेकिन, मंत्रियों से लेकर तमाम अफसरों को भोपाल के बाहर शिविर में आने-जाने ठहरने में काफी खर्च होता है। सीएम ने यह सुझाव दिया है कि राजधानी में ही यह चिंतन शिविर आयोजित किया जाए। ताकि मंत्री-अफसर सब आसानी से रात्रि विश्राम के लिए अपने घर जा सकें। और आने-जाने ठहरने की व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च से बचा जा सके।

    शिवराज करते रहे हैं चिंतन शिविर का आयोजन
    शिवराज सिंह चौहान अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में चिंतन शिविरों का आयोजन करते रहे हैं। 2022 में शिवराज कैबिनेट ने दो दिनों तक पचमढ़ी में चिंतन-मंथन किया था। इस चिंतन शिविर में 2023 के विधानसभा चुनाव के हिसाब से रणनीति पर चर्चा हुई थी।

    अगले साल से शुरु हो जाएंगे चुनाव
    अगले साल यानी 2027 में एमपी में नगरीय निकायों के चुनाव हैं। इसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव भी होंगे। चिंतन शिविर में प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों के हिसाब से योजनाओं के क्रियान्वयन और आगामी योजना पर मंथन होगा। कोर्ट के आदेश पर होने वाले छात्र संघ चुनाव से लेकर सहकारिता, मंडी, जल उपभोक्ता संस्थाओं के चुनाव भी होने हैं इस चिंतन शिविर में इन मुद्दों पर भी रणनीति बनेगी।

    चिंतन शिविर के बाद बदले जा सकते हैं प्रभार के जिले
    लंबे समय से अधिकांश मंत्री अपने प्रभार के जिलों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। कई मंत्रियों के प्रभार के जिलों की दूरी 500 किलोमीटर से लेकर एक हजार किलोमीटर तक है। ऐसे में अधिकांश मंत्री अपने प्रभार के जिले बदलने की मांग कर चुके हैं। सीएम और संगठन के निर्देश के बाद भी मंत्री प्रभार के जिलों में प्रवास में रूचि नहीं ले रहे हैं। इस चिंतन शिविर के बाद मंत्रियों के प्रभार के जिलों में बदलाव किया जा सकता है।

    कलेक्टर-कमिश्नर से सीधे सवाल करेंगे मंत्री
    इस बार चिंतन शिविर में जमीनी स्तर के अधिकारियों को भी शामिल किया जा रहा है। जिलों के कलेक्टर और संभागीय कमिश्नर के अलावा विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिव (PS) भी शिविर में मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंशा है कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों की वास्तविक स्थिति पर अधिकारियों के साथ सीधे चर्चा करें। स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल-जवाब भी किए जाएंगे।

    पचमढ़ी की जगह भोपाल में होगा आयोजन
    पहले सरकारों के चिंतन शिविर राजधानी से दूर पचमढ़ी जैसे स्थानों पर आयोजित होते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2022 में पचमढ़ी में चिंतन शिविर आयोजित किया था। हालांकि इस बार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आयोजन भोपाल में ही कराने का फैसला किया है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्च में बचत करना बताया जा रहा है। राजधानी में आयोजन होने से मंत्रियों और अधिकारियों के ठहरने, यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।

    2027 के चुनावों को लेकर भी बनेगी रणनीति
    चिंतन शिविर में आगामी चुनावों को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। वर्ष 2027 में मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव और इसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके अलावा कोर्ट के आदेश के बाद छात्र संघ चुनाव तथा सहकारिता, मंडी और जल उपभोक्ता संस्थाओं के चुनाव भी होने हैं। ऐसे में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और चुनावी तैयारियों को लेकर भी रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

  • तेंदुओं के अवैध शिकार और अंगों की तस्करी मामले में एक और आरोपी मुरैना से गिरफ्तार अब तक 3 राज्यों से 15 आरोपी गिरफ्तार

    तेंदुओं के अवैध शिकार और अंगों की तस्करी मामले में एक और आरोपी मुरैना से गिरफ्तार अब तक 3 राज्यों से 15 आरोपी गिरफ्तार

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में अंतर्राज्यीय शिकार एवं तस्करी गिरोहों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने 10 तेंदुओं के अवैध शिकार एवं तस्करी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ एवं उनके बयानों के आधार पर एसटीएसएफ ने 26 अगस्त 2026 को मुरैना निवासी सुखदेव, पिता सर्वेश को गिरफ्तार किया। आरोपी को विशेष न्यायालय, शिवपुरी में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

    यह प्रकरण मध्यप्रदेश शासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गिरोह द्वारा श्योपुर और मुरैना जिलों में 10 तेंदुओं का शिकार किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। ये क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील ‘चीता लैंडस्केप’ के अंतर्गत आते हैं। मामले में आगे की विवेचना जारी है। इस मामले में अब तक हरियाणा, मध्यप्रदेश और दिल्ली के निवासी कुल 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में तेंदुओं के अंग बरामद किए गए हैं। शिकार में प्रयुक्त कुल 6 लेग होल्ड ट्रैप और 1 चाकू भी जब्त किए जा चुके हैं।

     

  • 1 करोड़ 73 लाख रूपए नगद, 04 चार पहिया वाहन एवं 19 मोबाइल सहित लगभग 2 करोड़ 92 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्त

    1 करोड़ 73 लाख रूपए नगद, 04 चार पहिया वाहन एवं 19 मोबाइल सहित लगभग 2 करोड़ 92 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्त

    भोपाल 

    पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संगठित एवं अंतर्राज्यीय अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में राजगढ़ पुलिस ने ऑपरेशन मनीट्रेप के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए पैसे दोगुने करने का झांसा देकर लगभग 2 करोड़ रूपए की धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 1 करोड़ 73 लाख रूपए नगद, 04 चार पहिया वाहन एवं 19 एंड्रॉयड मोबाइल सहित लगभग 2 करोड़ 92 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है।

    24 जुलाई को ब्यावरा निवासी फरियादी द्वारा थाना ब्यावरा शहर में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि आरोपियों ने स्वयं को बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की राशि दोगुनी करने का लालच दिया। आरोपियों ने फर्जी ई-मेल, दस्तावेज एवं भुगतान संबंधी संदेश दिखाकर फरियादी का विश्वास हासिल किया और 2 करोड़ निवेश करने पर अधिक राशि वापस मिलने का झांसा दिया।

    आरोपियों द्वारा भोपाल में फरियादी से 2 करोड़ रूपए की नगद राशि प्राप्त की गई। इसके बाद उसे हवाला/आंगड़िया के माध्यम से राशि भेजने तथा भुगतान किए जाने का विश्वास दिलाने के लिए 4 करोड़ रूपए के RTGS का फर्जी स्क्रीन शॉट दिखाया गया। राशि वापस नहीं मिलने पर फरियादी को धोखाधड़ी का पता चला। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजगढ़ द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी एवं ठगी की राशि की बरामदगी के लिए 10 विशेष टीमों का गठन किया गया।

    10 राज्यों में करीब 30 हजार किलोमीटर तक पुलिस की लगातार कार्रवाई

    राजगढ़ पुलिस की टीमों ने आरोपियों के मूवमेंट एवं आपसी कनेक्शन की कड़ियां जोड़ने के लिए 3,000 से अधिक CCTV फुटेज का विश्लेषण किया। पुलिस टीमों ने लगभग 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए करीब 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई की तथा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा सहित 10 राज्यों में दबिश देकर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से कई स्तरों पर काम करता था। पहले ऐसे लोगों की पहचान की जाती थी, जिन्हें निवेश के नाम पर बड़ी राशि लगाने के लिए तैयार किया जा सके। इसके बाद बड़ी कंपनी का नाम, महंगी गाड़ियां, होटल में बैठक एवं व्यवस्थित दस्तावेजों के माध्यम से पीड़ित का विश्वास जीता जाता था। इसके बाद फर्जी ई-मेल, स्वीकृति-पत्र एवं भुगतान संदेशों के माध्यम से निवेश को वास्तविक बताया जाता था। पीड़ित से अधिकतम राशि नकद में प्राप्त करने के बाद उसे हवाला अथवा आंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तियों एवं शहरों तक पहुंचाया जाता था। राशि प्राप्त होने के बाद गिरोह के सदस्य आपस में रकम बांटकर अपने ठिकाने, मोबाइल नंबर एवं शहर बदल देते थे।

    गिरोह की विशेष कार्यप्रणाली यह थी कि प्रत्येक लिंक पर आरोपी अपना वास्तविक नाम छिपाकर ट्रेड नाम का उपयोग करते थे। गिरोह में प्रत्येक व्यक्ति सामान्यतः अपने से ऊपर एवं नीचे की लिंक से ही संपर्क में रहता था, जिससे पूरी नेटवर्क संरचना की जानकारी किसी एक व्यक्ति को नहीं होती थी।

    फर्जी कंपनी प्रतिनिधियों से लेकर आंगड़िया नेटवर्क तक फैला था नेटवर्क

    जांच में सामने आया कि गिरोह के कुछ सदस्य कंपनी कर्मचारी एवं एजेंट के रूप में पीड़ित की पहचान एवं संपर्क स्थापित करने का कार्य करते थे, जबकि अन्य सदस्य कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट, डायरेक्टर एवं अन्य प्रतिनिधियों के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर निवेश योजना को विश्वसनीय बताते थे।

    भोपाल एवं ब्यावरा के होटलों में बैठकों के माध्यम से पीड़ित को निवेश के लिए तैयार किया गया। इसके बाद भोपाल के जहांगीराबाद स्थित एक कोरियर कार्यालय पर पीड़ित से 2 करोड़ की नकद राशि प्राप्त की गई। गिरोह के सदस्यों ने राशि प्राप्त करने के बाद 4 करोड़ के RTGS का फर्जी स्क्रीन शॉट दिखाकर पीड़ित को भ्रमित किया और मौके से फरार हो गए। जांच में यह भी सामने आया कि राशि प्राप्त होने के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों द्वारा इसे महाराष्ट्र सहित विभिन्न स्थानों पर पहुंचाने, बांटने एवं खपाने का कार्य किया गया।

    विवेचना के दौरान पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरोह द्वारा इंदौर में भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी की योजना बनाई गई थी, जिसे राजगढ़ पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के कारण अंजाम नहीं दिया जा सका। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा पश्चिम बंगाल में लगभग 50 लाख रूपए तथा दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी के साथ भी लगभग 50 लाख की धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरोह से जुड़े व्यक्तियों के कार्यालय उदयपुर, पश्चिम बंगाल, इंदौर, भोपाल, दिल्ली एवं मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर संचालित होने की जानकारी प्राप्त हुई है।

    गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों, फर्जी कंपनियों एवं ई-मेल के संचालन, हवाला/आंगड़िया नेटवर्क, बैंक खातों तथा ठगी की राशि के लेन-देन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। जप्त मोबाइल एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच भी जारी है।

    अंतर्राज्यीय समन्वय से मिली सफलता

    इस पूरी कार्रवाई में राजगढ़ पुलिस की विशेष टीमों के साथ मुंबई, नांदेड़, लातूर, भदोही, पुणे, हैदराबाद, केरल, तेलंगाना एवं भोपाल सहित विभिन्न स्थानों की पुलिस इकाइयों ने आरोपियों की गिरफ्तारी एवं ठगी की राशि की बरामदगी में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

    मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि कम समय में पैसा दोगुना करने, अत्यधिक लाभ देने अथवा किसी बड़ी कंपनी के नाम पर निवेश का लालच देने वाले व्यक्तियों पर विश्वास न करें। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले संबंधित कंपनी, व्यक्ति एवं योजना का आधिकारिक माध्यम से सत्यापन अवश्य करें। संदिग्ध गतिविधि अथवा धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें।

     

  • उप मुख्यमंत्री ने जान जोखिम में डालकर गायों की रक्षा करने वाले गौ सेवकों को किया सम्मानित

    उप मुख्यमंत्री ने जान जोखिम में डालकर गायों की रक्षा करने वाले गौ सेवकों को किया सम्मानित

    भोपाल 

    विगत दिनों रीवा जिले में हुई मूसलाधार बारिश के कारण आए बाढ़ के संकट के दौरान लक्ष्मणबाग स्थित गौशाला जलमग्न हो गई थी। इस विकट स्थिति में अपनी जान की परवाह न करते हुए गौशाला के कर्मचारियों ने तत्परता से काम किया और एक-एक गाय को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। उप मुख्यमंत्री ने गौ सेवकों के इस अदम्य साहस और सेवा भाव की सराहना की। उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने लक्ष्मणबाग गौशाला के समस्त गौ सेवक कर्मचारियों को सम्मान राशि एवं अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बाढ़ की विभीषिका के समय जब हर व्यक्ति अपनी समस्याओं में व्यस्त था, उस समय इन कार्यकर्ताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर गायों को मंदिर परिसर के सुरक्षित स्थल पर पहुँचाया। चारों तरफ पानी से घिरे टापू जैसे हालात और घने अंधेरे में भी इन गौ रक्षकों ने पूरी रात बैठकर गायों की सुरक्षा की तथा मानव मात्र के कल्याण का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इनकी इसी अद्वितीय कार्यशैली और निष्ठा के लिए आज इन्हें सम्मानित किया गया है।

    सम्मान पाने वालों में गौशाला संचालन समिति के अध्यक्ष  घनश्याम ताम्रकार, गौशाला प्रबंधक  अंकित मिश्रा, डॉ. अनिल मिश्रा,  शिव कुमार गुड्डू,  विशाल सिंह तथा गौशाला के 15 अन्य समर्पित कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने लक्ष्मणबाग गौशाला परिसर में विधि-विधान से गौ पूजन किया और गायों को गुड़ खिलाया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में भागवत प्रवक्ता पंडित बाला व्यंकटेश शास्त्री, चिरहुलानाथ के प्रमुख सेवक स्वामी गोकर्णाचार्य, डॉ. राजेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गौ भक्त एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • T-72 टैंकों को मिलेगा नया दम, जबलपुर में 472 करोड़ से ओवरहॉलिंग; सालाना 12 टैंक होंगे अपग्रेड

    T-72 टैंकों को मिलेगा नया दम, जबलपुर में 472 करोड़ से ओवरहॉलिंग; सालाना 12 टैंक होंगे अपग्रेड

    जबलपुर 

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-72 टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। करीब 472 करोड़ रुपए की लागत से यहां इंडियन आर्मी के T-72 टैंकों की मरम्मत, जांच और तकनीकी अपग्रेड के लिए सुविधा तैयार की जाएगी।प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद जबलपुर में भी सेना के T-72 टैंकों को लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाएगा। पहले चरण में यहां हर साल 12 T-72 टैंकों का पूरा ओवरहॉल और अपग्रेड होगा। इसके लिए आधुनिक प्लांट के साथ टेस्टिंग ट्रैक भी बनाया जाएगा।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    राजनाथ सिंह बोले- ड्रोन के दौर में भी टैंक जरूरी
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- आज युद्ध का तरीका बदल रहा है। ड्रोन और मिसाइल का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैंकों की जरूरत खत्म हो गई है। टैंकों को नई तकनीक, बेहतर सेंसर और नई क्षमताओं से लैस करना जरूरी है।

    उन्होंने बताया- बदलते युद्ध के तरीके के हिसाब से काम कर सकें। मध्य प्रदेश रक्षा उत्पादन और निवेश में महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपए था। अब यह बढ़कर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

    रक्षा निर्यात करीब 1,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपए हो गया है। सरकार ने 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा है।

    अभी T-72 का ओवरहॉल कहां होता है?
    फिलहाल T-72 टैंकों के ओवरहॉल की मुख्य जिम्मेदारी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) की हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF), आवड़ी की है। नई सुविधा बनने के बाद जबलपुर में टैंकों के ओवरहॉल की क्षमता बढ़ेगी।

    इससे सेना के जिन T-72 टैंकों को बड़ी मरम्मत या तकनीकी सुधार की जरूरत होगी, उन्हें जल्द दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सकेगा।

    दो T-72 का पहले ही कर चुका है ओवरहॉल
    472 करोड़ की परियोजना शुरू होने से पहले ही व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने इसका ट्रायल किया था। फैक्ट्री ने दो T-72 टैंकों का ओवरहॉल पूरा करके भारतीय सेना को सौंपा। इस दौरान टैंकों की तकनीकी जांच की गई।

    जरूरत के मुताबिक मरम्मत और खराब या पुराने पुर्जों को बदलने का काम किया गया। सेना के तय तकनीकी और गुणवत्ता मानकों के अनुसार इनकी जांच की गई थी। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद जबलपुर में इस काम के लिए स्थायी सुविधा विकसित की जा रही है।

    ओवरहॉल का मतलब क्या है?
    ओवरहॉल सिर्फ टैंक की सामान्य सर्विसिंग नहीं है। लंबे समय तक चलने के बाद टैंक के जरूरी हिस्सों की गहराई से जांच और बड़ी मरम्मत की जाती है। इसमें इंजन, ट्रांसमिशन, हथियार सिस्टम, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और दूसरे जरूरी हिस्सों की जांच होती है।

    खराब पुर्जों को बदला या ठीक किया जाता है। इसके बाद टैंक को तैयार करके अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं। टेस्ट में सही पाए जाने के बाद टैंक को सेना के इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है।

    जबलपुर की 4 रक्षा फैक्ट्रियों ने बनाया रिकॉर्ड
    जबलपुर लंबे समय से रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र रहा है। यहां व्हीकल फैक्ट्री समेत कई रक्षा निर्माणियां सेना के लिए अलग-अलग उपकरण तैयार करती हैं। 2025-26 में जबलपुर की चार प्रमुख रक्षा निर्माणियों ने मिलकर 4,622 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड उत्पादन किया।

    इनमें व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का उत्पादन करीब 1,056 करोड़ रुपए रहा। T-72 ओवरहॉल परियोजना से जबलपुर की रक्षा क्षेत्र में भूमिका और बढ़ेगी। टैंकों की मरम्मत और अपग्रेड से स्थानीय उद्योगों और तकनीकी काम से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर बनने की उम्मीद है।

    T-72 'अजेय' की क्या खासियत है?
    T-72 भारतीय सेना के प्रमुख मेन बैटल टैंकों में शामिल है। इसे मूल रूप से सोवियत संघ में विकसित किया गया था और भारत में भी इसका निर्माण हुआ है। समय के साथ इन टैंकों में अलग-अलग तकनीकी सुधार और अपग्रेड किए गए हैं।

    T-72 में 125 मिमी स्मूथबोर गन और ऑटो-लोडर सिस्टम है। इसमें तीन सदस्यीय क्रू होता है। टैंक पारंपरिक गोला-बारूद के साथ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल भी दाग सकता है।

    जबलपुर में प्रस्तावित नई सुविधा के जरिए अब T-72 के ओवरहॉल और तकनीकी उन्नयन की क्षमता को स्थायी रूप से बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में हर साल 12 टैंकों के ओवरहॉल का लक्ष्य रखा गया है।