Category: मध्य प्रदेश

  • देश के नए पासपोर्ट में होगा एमपी का पेपर, जापान-जर्मनी और इंग्लैंड पर खत्म होगी निर्भरता

    देश के नए पासपोर्ट में होगा एमपी का पेपर, जापान-जर्मनी और इंग्लैंड पर खत्म होगी निर्भरता

    नर्मदापुरम
     भारत के पासपोर्ट निर्माण में नर्मदापुरम की सिक्योरिटी पेपर मिल (एसपीएम) ने बड़ी पहल की है। भाई-बहन के स्नेह उत्सव रक्षाबंधन पर मिल ने देश को पासपोर्ट पेपर में आत्मनिर्भर कर दिया। इसके अंतर्गत देश का पासपोर्ट अब पूर्ण स्वदेशी पेपर पर बनाया जाएगा। मिल ने इसके लिए 50 टन पेपर तैयार किया है। इसे सरकार को सौंपने की कार्रवाई शुरू हो गई है। एसपीएम ने जापान, जर्मनी, इंग्लैंड जैसे देशों को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।

    एसपीएम देश की करेंसी का कागज, ज्युडिशियल स्टांप पेपर का निर्माण करती है। मेक इन इंडिया के तहत एसपीएम ने पूर्व मे पासपोर्ट पेपर का ट्रायल किया था। टेस्टिंग में पासपोर्ट के लिए निर्धारित सरकार के मापदंडों में खरा उतरा। सरकार से हरी झंड़ी मिलते ही एसपीएम ने पासपोर्ट पेपर का निर्माण किया है।

    कच्चा कागज अभी जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और जापान जैसे देशों से आयात
    देश में पासपोर्ट बनाने के लिए विशेष कच्चा कागज अभी जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और जापान जैसे देशों से आयात किया जाता है। अब नर्मदापुरम के कारखाना में 50 टन स्वदेशी पासपोर्ट पेपर तैयार कर सरकार को भेजने की तैयारी कर ली गई है।

    पेपर में वाटर मार्क, सुरक्षा धागा जैसे कई फीचर
    पासपोर्ट पेपर में विशेष प्रकार के वॉटरमार्क है। यह रोशनी में देखने पर ही स्पष्ट दिखाई देता है। पेपर के अंदर छोटे-छोटे दृश्य और अदृश्य फाइबर ए्बेडेड केवल अल्ट्रा- वायलेट प्रकाश में ही चमकते हैं। पासपोर्ट के हर पन्ने पर लेजर तकनीक, विशेष स्याही से यूनिक सीरियल नंबर उकेरा जाता है।

    पेपर की नकल करना किसी भी हाल में संभव नहीं
    खास बात यह है कि पेपर की नकल करना किसी भी हाल में संभव नहीं है। एसपीएम का यह पेपर फटने, पानी से गलने और आसानी से खराब नहीं होता है। इसमें कोई छेड़छाड़ होने पर उसका पता चल जाता है। पासपोर्ट का मुख्य पहचान विवरण वाला पेज मजबूत पॉलीकार्बोनेट सामग्री से बना होता है। इसमें बायोमेट्रिक माइक्रोचिप और हॉलोग्राम रहते हैं।

    डीजीएम एवं पीआरओ संजय भावसार बताते हैं कि पासपोर्ट पेपर का निर्माण कर एसपीएम ने देश को आत्मनिर्भर किया है। कर्मचारियों और प्रबंधन के बेहतर तालमेल के रक्षा बंधन पर्व पर एक उपलब्धि मिल गई है।

  • रीवा में जच्चा-बच्चा की मृत्यु के प्रकरण में दो चिकित्सक एवं दो नर्सिंग ऑफिसर निलंबित, जांच समिति गठित

    रीवा में जच्चा-बच्चा की मृत्यु के प्रकरण में दो चिकित्सक एवं दो नर्सिंग ऑफिसर निलंबित, जांच समिति गठित

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में मती कल्पना मिश्रा एवं उनके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा है कि मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तथ्यों के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक प्रावधान किए जाएंगे। प्रथम दृष्टया प्राप्त शिकायत एवं संबंधित तथ्यों के आधार पर दो चिकित्सा शिक्षकों और दो नर्सिंग ऑफिसरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि मती कल्पना मिश्रा पति  अमित मिश्रा, निवासी ग्राम हटवा, थाना बैकुण्ठपुर, जिला रीवा को गांधी स्मारक चिकित्सालय, रीवा के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में 26 अगस्त 2026 को प्रातः लगभग 2:38 बजे भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसी दिन रात्रि 11:55 बजे उनकी एवं उनके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई। चिकित्सकीय अभिलेखों के अनुसार, भर्ती के समय मरीज का प्लेटलेट काउंट लगभग 30 हजार प्रति माइक्रोलिटर था। रक्तचाप अत्यधिक बढ़ा हुआ तथा लीवर एंजाइम भी बढ़े हुए पाए गए थे। मरीज को निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार एवं आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाएं प्रारंभ की गई थीं। चिकित्सकीय जांच के आधार पर मरीज में टर्म प्रेग्नेंसी के साथ गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया एवं हेल्प सिंड्रोम का निदान किया गया था।

    परिजनों द्वारा चिकित्सकों पर दुर्व्यवहार एवं उपचार में लापरवाही के आरोप लगाते हुए शिकायत की गई। शिकायत के आधार पर वरिष्ठ चिकित्सकों की जांच समिति गठित की गई है। ड्यूटी चिकित्सक डॉ. सोनल अग्रवाल, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा डॉ. निधि पाण्डेय, निश्चेतना विभाग को प्रथम दृष्टया कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं गंभीर अनुशासनहीनता के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। नर्सिंग ऑफिसरों के संबंध में प्राप्त दुर्व्यवहार की शिकायत के आधार पर निलंबन की कारवाई की गई है। परिजनों की मांग पर मृतिका एवं उनके गर्भस्थ शिशु का शव परीक्षण जिला चिकित्सालय एवं चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा की संयुक्त टीम द्वारा किया गया। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद दोनों शवों को उनके गृह ग्राम पहुंचाया गया।

     

  • पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा? चंदेरी से भोपाल-इंदौर जैसे शहरों के लिए ई-बस सेवा की मांग तेज

    पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा? चंदेरी से भोपाल-इंदौर जैसे शहरों के लिए ई-बस सेवा की मांग तेज

    अशोकनगर
    पर्यटन नगरी चंदेरी को पर्यावरण हितैषी इलेक्ट्रिक बस सेवा से जोड़ने की मांग क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से की गई है। नागरिकों का कहना है कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा तथा मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत प्रदेश के विभिन्न शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। ऐसे में ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण चंदेरी को भी इस सुविधा से जोड़ा जाना चाहिए।

    दूरस्थ शहरों को जोड़ने के लिए भी प्रक्रिया चल रही
    मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत इंदौर, भोपाल, उज्जैन सहित अ
    न्य शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रस्तावित है। दूरस्थ शहरों को जोड़ने के लिए भी प्रक्रिया चल रही है। नागरिकों ने इसी योजना में चंदेरी को शामिल करने की मांग रखी है।

    सुझाव दिया गया है कि इंदौर-चंदेरी, भोपाल-चंदेरी, ग्वालियर-चंदेरी, जबलपुर-चंदेरी और सागर-चंदेरी के बीच इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू की जाएं। इससे स्थानीय नागरिकों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ चंदेरी आने वाले पर्यटकों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। नागरिकों का कहना है कि ई-बस सेवा शुरू होने से प्रदूषण कम करने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

     

  • रतलाम में ईद मिलादुन्नबी जुलूस पर कार्रवाई, तेज आवाज के साउंड सिस्टम को लेकर 14 लोगों पर मामला दर्ज

    रतलाम में ईद मिलादुन्नबी जुलूस पर कार्रवाई, तेज आवाज के साउंड सिस्टम को लेकर 14 लोगों पर मामला दर्ज

    रतलाम
     ईद मिलादुन्नबी पर बुधवार को शहर में निकले जुलूस के दौरान तेज आवाज में साउंड सिस्टम बजाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोशल मीडिया पर भी साउंड सिस्टम के वीडियो और रील वायरल हुई थीं। शिकायतों के बाद पुलिस ने शहर के चार थाना क्षेत्रों में 14 साउंड सिस्टम संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए हैं।

    जुलूस के दौरान वार्ड 47 के कांग्रेस पार्षद और सीरत कमेटी अध्यक्ष 64 वर्षीय नासिर कुरैशी की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी। कुरैशी के निधन के बाद गुरुवार को नगर निगम सभागृह में शोकसभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई।

    सोशल मीडिया पर शेयर की साउंड सिस्टम की रील
    जांच में यह भी सामने आया है कि जुलूस के लिए बड़े साउंड सिस्टम बुलाने की योजना पहले से बनाई गई थी। सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े साउंड सिस्टम वाहनों की रील भी वायरल की गई। जुलूस के दौरान कुछ स्थानों पर साउंड सिस्टम के वाहन पास-पास रखकर तेज बेस में साउंड बजाने का प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाया गया।

    पुलिस अब यह पता लगा रही है कि साउंड सिस्टम किसने बुक किए, किसके कहने पर बुलाए गए और आवाज कम करने के निर्देश के बावजूद किन लोगों ने संचालकों को ऐसा करने से रोका।

    गुरुवार रात प्रकरण दर्ज किए गए साउंड सिस्टम संचालकों के कथन लिए। सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया ने बताया कि संचालकों के कथनों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आयोजकों या अन्य लोगों ने साउंड की आवाज कम नहीं करने दी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। विरोध के बाद पुलिस ने फोरलेन और शहर में नाकाबंदी कर साउंड वाहनों को जब्त कर देर रात तक प्रकरण दर्ज किए।

     

  • आश्रम में   1008 सचिदानंद महाराज की पुण्यतिथि पर अर्पित की पुष्पांजलि

    आश्रम में 1008 सचिदानंद महाराज की पुण्यतिथि पर अर्पित की पुष्पांजलि

    भोपाल

     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर खाचरौद के ग्राम चिरोला फंटा में स्थित संत  निजानंद धाम आश्रम पहुंचे। आश्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजा-अर्चना कर   1008 सचिदानंद महाराज की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम स्थित शिव मंदिर में रुद्राभिषेक कर षोडशोपचार पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत  निजानंद जी महाराज के गादी पर पूजा-अर्चना कर आरती की। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम में उपस्थित संतों का वन्दन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्‍होंने आश्रम में प्रसादी ग्रहण की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का  निजानंद धाम सेवा समिति द्वारा स्वागत सम्मान भी किया गया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम में सचिदानंद जी महाराज जी के शिष्य  विवेक महाराज जी से भी मुलाकात की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संत  निजानंद आश्रम पर आकर दर्शन पूजा की है। यह स्थान देश, प्रदेश और मालवा में सनातन संस्कृति की ऐसी विभूतियों के अलौकिक आभा से परिचित कराता है। हम सब भी ऐसे संतों के आशीर्वाद से सद्कार्य की प्रेरणा पाते हैं।  निजानंद जी महाराज के पश्चातवर्ती स्वामी सचिदानंद जी महाराज ने इस स्थान को चेतना देते हुए पूरे क्षेत्र को चैतन्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी अपने कामों के साथ अपने संतों की मूल भावना सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सभी को लेकर चलने का जो कल्याण का भाव है, ये वेद वाक्य को अमरता के साथ धारण करते हुए हम सभी के कल्याण की कामना करें।

    आश्रम में नागदा-खाचरौद क्षेत्र के विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान,  राजेश धाकड़, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  रवि सोलंकी,  नरेश शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी उपस्थित थे।

    खाचरौद में बहनों ने बांधे रक्षा सूत्र

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को धार्मिक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए खाचरौद हेलीपेड पर पहुंचे। हेलीपेड पर नागदा निवासी मती माया तितलिया एवं मनीषा अखिलेश शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर राखी बांधकर शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आत्मीयता से बहनों का मुंह मीठा कराया और शुभकामनाएं दी।

     

  • लाड़ली बहनों के लिए शिवराज सिंह चौहान की नई तैयारी, 3 बड़े प्लान से बदलने की कवायद

    लाड़ली बहनों के लिए शिवराज सिंह चौहान की नई तैयारी, 3 बड़े प्लान से बदलने की कवायद

    भोपाल

    देश के कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान को एमपी में लाड़ली बहना योजना के लिए जाना जाता है। करीब ढाई साल पहले उन्होंने ही तत्कालीन सीएम के रूप में ​महिलाओं के बैंक खातों में हर माह पैसे डालने की यह स्कीम चालू की थी। लाड़ली बहनों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए शिवराजसिंह चौहान अभी भी जुटे हैं। उन्होंने महिलाओं को स्वसहायता समूह से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्लान बनाया है। राखी के मौके पर शिवराजसिंह चौहान ने ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने लखपति दीदी को अब ‘मिलेनियम दीदी’ बनाने का संकल्प भी जताया है।

    नई दिल्ली के कृषि भवन में शिवराजसिंह चौहान ने रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की बहनों से संवाद किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारी बहनें आत्मनिर्भर बनें, आर्थिक रूप से सशक्त हों और अपनी मेहनत से समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएं— इसी संकल्प के साथ हम निरंतर प्रयासरत हैं।

    केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भावुक होते हुए कहा कि रक्षाबंधन पर बहनों ने मेरी कलाई पर राखी बांधी है और इतनी सारी बहनों से वर्चुअली जुड़ा हूं। मैं सभी बहनों को प्रणाम करता हूं और रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सभी बहनों के सदैव सुखी रहने, कीर्ति और प्रतिष्ठा निरंतर आगे बढ़ने व उनके कल्याण की मंगलकामना भी व्यक्त की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

    स्व सहायता समूह से जुड़कर आय बढ़ाने का प्लान
    महिलाओं के लिए लाड़ली बहना योजना लानेवाले शिवराजसिंह चौहान ने अब स्व सहायता समूह से जुड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्लान बनाया है। इसके लिए 3 अलग अलग चरणों के लिए उन्होंने महिलाओं को संकल्प लेने का कहा।

    इस संबंध में अपने एक्स हेंडल पर केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने लिखा-

    मेरी बहनों, आज राखी की पूर्व संध्या पर हम सब तीन संकल्प लें…

    पहला संकल्प: जो बहनें स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी हैं, उन्हें समूह से जोड़ेंगे।

    दूसरा संकल्प: जो बहनें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और जिनकी आमदनी कम है, उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाएँगे।

    तीसरा संकल्प: जो बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं, उन्हें अब ‘मिलेनियम दीदी’ बनना है।

    क्या है लखपति दीदी योजना
    लखपति दीदी योजना भारत सरकार द्वारा 2023 में शुरु की गई। इसके अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक घरेलू आय को कम से कम ₹1 लाख तक पहुंचाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है। देश भर में 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना का लक्ष्य तय किया गया। इसके लिए महिलाओं को सिलाई, कृषि, एलईडी निर्माण और अन्य छोटे व्यवसायों का कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाता है। बैंकों के माध्यम जरूरत के अनुसार से कर्ज भी उपलब्ध कराया जाता है।

  • उज्जैन को मिलेगी रफ्तार! सिंहस्थ से पहले बड़े शहरों से हाई स्पीड कनेक्टिविटी का प्लान

    उज्जैन को मिलेगी रफ्तार! सिंहस्थ से पहले बड़े शहरों से हाई स्पीड कनेक्टिविटी का प्लान

    उज्जैन

    उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे मध्य प्रदेश के लिए अहम प्रोजेक्ट है. क्योंकि सिंहस्थ आयोजन को लेकर इस हाईवे को तैयार किया जा रहा है, ताकि उज्जैन की दिल्ली, मुंबई, जयपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों से कनेक्ट होगा. ताकि महाकु्ंभ में आने वाले यात्रियों को फायदा होगा. उज्जैन जावरा हाईवे की खासियत यह है कि यह सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ जाएगा. 103 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक हाईवे न सिर्फ मालवा के यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि उज्जैन के लिए सबसे अहम होगा. इसे 5017 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि साल 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ में ट्रैफिक के दवाब को कम किया जा सके। 

    उज्जैन से कैसे कनेक्ट होगी दिल्ली 
    उज्जैन-जावरा फोरलेन हाईवे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह जावरा के पास जाकर भारत के सबसे लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जो 8-लेन है, उससे इंटरचेंज से सीधे कनेक्ट हो जाएगा. फिलहाल उज्जैन से दिल्ली या मुंबई जाने के लिए वाहन चालकों को व्यस्त राज्य राजमार्गों से होकर गुजरना पड़ता है. लेकिन इस हाईवे का बाद स्थिति बदल जाएगी. अब उज्जैन से वाहन इस फोरलेन के जरिए जावरा पहुंचेंगे और सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर चढ़कर बिना किसी ट्रैफिक जाम के सीधे दिल्ली के डीएनडी फ्लाईवे और जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच जाएंगे. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से डायरेक्ट लिंक मिलने के कारण उज्जैन से दिल्ली का सफर मात्र 7 से 8 घंटे में पूरा हो जाएगा। 

    उज्जैन से जुड़ेगा मुंबई
    इसी तरह जावरा इंटरचेंज से दक्षिण की तरफ रुख करके वाहन सीधे सूरत, वडोदरा होते हुए देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रवेश कर सकेंगे. मुंबई में यात्रा का समय भी कम होगा जाएगा. जबकि सिंहस्थ में आने वाले यात्रियों को फायदा होगा. अभी उज्जैन से मुंबई जाने में 14 से 15 घंटे का समय लग जाता है. लेकिन इस हाईवे के बाद यह सफर 8 से 9 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। 

    उज्जैन से जुड़ेंगे राजस्थान के शहर 
    इसके अलावा इस हाईवे से उज्जैन की राजस्थान से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी. जावरा और रतलाम से राजस्थान का झालावाड़, बांसवाड़ा, कोटा और चित्तौड़गढ़ जिला काफी करीब है, इस हाईवे से एमपी और राजस्थान के बीच व्यापारिक वाहनों का आना-जाना आसान होगा. इसके अलावा यह हाईवे सीधे इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और राजस्थान सीमा के करीब होने के कारण जयपुर, अजमेर और कोटा जैसे शहरों के लिए भी एक सीधा लिंक प्रदान करेगा. जिससे इन शहरों की दूरी भी कम हो जाएगी।

    उज्जैन-जावरा हाईवे की सुविधाएं 

        5 फ्लाईओवर बनेंगे 
        7 इंटरचेंज जो हाईवे को गांवों से जोड़ेंगे 
        2 रेलवे ओवरब्रिज बनेंगे
        270 पुलिया बनेगी
        7 बड़े और 26 छोटे पुल

    क्यों खास है यह प्रोजेक्ट 
    उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे या हाईवे का मतलब होता है एक बिल्कुल नया रूट, जो पुरानी सड़कों को चौड़ा करने के बजाय नए खेतों, जंगलों या खाली जमीनों से होकर गुजरता है. यह फोरलेन हाईवे उज्जैन के मंगरोला गांव से शुरू होकर रतलाम जिले के जावरा के भूतेड़ा गांव तक जाएगा. हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर बन रहे इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत 5017 करोड़ है. फिलहाल उज्जैन से जावरा जाने में ढाई से तीन घंटे लगते हैं, जो घटकर मात्र 1 से 1.15 घंटे रह जाएंगे। 

    सिंहस्थ-2028 से पहले शुरुआत
    उज्जैन-जावरा फोरलेन का काम जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है. हाल ही में सीएम मोहन यादव ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी कामों को मंजूरी दे दी है. इसे पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर-2027 तक तय किया गया है. क्योंकि 2028 में होने वाले सिंहस्थ आयोजन से पहले इसे तैयार किया जाना है. क्योंकि इस आयोजन में इस फोरलेन का अहम काम है. सिंहस्थ के दौरान किसी भी आपातकालीन स्थिति या वीआईपी मूवमेंट के लिए यह हाईवे एक लाइफलाइन की तरह काम करेगा. इसलिए उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि मालवा के विकास का नया एक्सप्रेसवे है. जिस पर तेजी से काम हो रह है। 

  • जेल की दीवारों के बीच मना रक्षाबंधन, भोपाल सेंट्रल जेल में बहनों ने भाइयों को बांधी राखी

    जेल की दीवारों के बीच मना रक्षाबंधन, भोपाल सेंट्रल जेल में बहनों ने भाइयों को बांधी राखी

     भोपाल
     भोपाल सेंट्रल जेल ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के लिए खास इंतजाम किए, जिसके तहत बहनें जेल परिसर के अंदर अपने भाइयों से मिल सकीं और उन्हें राखी बांध सकीं। कई महिलाओं ने लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलकर खुशी जाहिर की और उनसे यह वादा भी लिया कि वे भविष्य में अपनी गलतियों को नहीं दोहराएंगे।

    जेल सुपरिटेंडेंट मनेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि जेल आने वाली बहनों के लिए खास इंतजाम किए गए थे, जिसमें जेल कैंटीन के जरिए राखी, मिठाई और कुमकुम की उपलब्धता भी शामिल थी।

    जेल कैंटीन से मिठाई, राखी और कुमकुम का इंतजाम
    परिहार ने कहा, रक्षाबंधन के मौके पर जो बहनें जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधना चाहती थीं, उनके लिए जेल कैंटीन के जरिए मिठाई, राखी, कुमकुम और दूसरी चीजों का इंतजाम किया गया। महिला गार्ड्स द्वारा ठीक से तलाशी लेने के बाद ही उन्हें अंदर जाने की इजाजत दी गई। 20-25 मिनट की मुलाकात के बाद उनके सुरक्षित बाहर निकलने का भी इंतजाम किया गया।

    भाई को सलाखों के पीछे देख छलक पड़े आंसू
    राखी बांधते समय कई बहनों के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी थी, लेकिन सलाखों के पीछे भाई को देखकर दर्द भी साफ नजर आया। कुछ बहनें भाई से मिलकर रो पड़ीं तो कुछ ने खुद को संभालते हुए उन्हें हिम्मत दी। बहनों ने भाइयों से कहा कि वे परेशान न हों और जेल से बाहर आने के बाद अच्छा जीवन जीने का संकल्प लें।

    बंदी भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं ममता और सलोनी ने कहा कि रक्षाबंधन पर भाई से मिलकर बहुत खुशी हुई। भगवान से उन्होंने यही प्रार्थना की है कि उनके भाई जल्द जेल से बाहर आएं और परिवार के साथ रहें।

    3600 पुरुष और 180 महिला बंदी
    जेल अधीक्षक मानवेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि रक्षाबंधन पर खुली मिलाई कराई गई। जेल प्रशासन की ओर से मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। भोपाल सेंट्रल जेल में करीब 3600 पुरुष बंदी और 180 महिला बंदी हैं। महिला बंदियों के लिए अलग समय पर मुलाकात की व्यवस्था की गई।

    उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े कैदियों को भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिजनों से मिलने की अनुमति दी गई। जेल प्रशासन की टीम पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था संभालती रही।

    अभी जेल में लगभग 3,648 कैदी बंद हैं
    आम कैदियों के लिए कोई अलग वर्गीकरण नहीं था और उनके परिवार के सदस्यों को मिलने का एक ही समय दिया गया था। हालांकि, प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े कैदियों के लिए शाम को मिलने का अलग समय तय किया गया था। अभी जेल में लगभग 3,648 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 1,100-1,200 कैदियों की मुलाकातें हो चुकी हैं और करीब 3,500 परिवार के सदस्य उनसे मिलने आए हैं।

    जेल में लगभग 180 महिला कैदी भी बंद हैं
    जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि जेल में लगभग 180 महिला कैदी भी बंद हैं और उनके भाइयों से मिलने के लिए भी अलग इंतजाम किए गए थे। वहां लगभग 180 महिला कैदी हैं। जो पुरुष अपनी कैदी बहनों से मिलने आएंगे, उन्हें शाम 3 बजे से 4 बजे के बीच मिलने की इजाजत दी गई थी। भीड़ कम होने के बाद उन्हें अलग से मिलने दिया जाएगा।

     

  • रक्षाबंधन पर उज्जैन में खास आयोजन, गणेशजी को बांधी जाएगी 51 फीट की राखी; दिनभर शुभ मुहूर्त

    रक्षाबंधन पर उज्जैन में खास आयोजन, गणेशजी को बांधी जाएगी 51 फीट की राखी; दिनभर शुभ मुहूर्त

    उज्जैन 
    धर्मनगरी उज्जैन में रक्षाबंधन का पर्व आस्था, संस्कृति और पारिवारिक भाव का अनूठा संगम बनकर उभरा है। विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर के समीप स्थित प्रसिद्ध बड़ा गणेश मंदिर में इस बार भी रक्षाबंधन पर एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगवान गजानन को अपना सगा भाई मानने वाली बहनों ने न केवल देश के विभिन्न राज्यों, बल्कि सात समंदर पार से भी रक्षासूत्र भेजे हैं।

    15 फीट ऊंची भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा वाले इस ऐतिहासिक मंदिर में वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। पंडित अक्षत व्यास के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती को जगत माता-पिता माना जाता है, इसी भाव से महिलाएं भगवान गणेश को अपना भाई मानती हैं। इस वर्ष विघ्नहर्ता के लिए मुंबई, बेंगलुरु, जयपुर, कोलकाता, भोपाल और इंदौर के अलावा अमेरिका, लंदन और हांगकांग से भी भव्य राखियां पहुंची हैं।

    रक्षाबंधन पर भगवान गणेश को 51 फीट लंबी बेहद भव्य और विशेष राखी अर्पित की जाएगी। मुंबई की श्रद्धालु राजकुमारी जैन द्वारा भेजी गई सोने की गिन्नी से सुसज्जित राखी भगवान की कलाई पर सजाई जाएगी। यह परंपरा केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि बहने पूरे परिवार के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करती हैं। 

    रिद्धि और सिद्धि के लिए आई साड़ी
    भगवान गणेश की पत्नियों रिद्धि और सिद्धि को भाभी का दर्जा देते हुए बहनों ने उनके लिए रेशमी साड़ियां भेजी हैं। गजानन के वाहन मूषक महाराज के लिए विशेष नक्काशीदार आसन भेंट स्वरूप भेजे गए हैं।

    भद्रामुक्त रक्षाबंधन, दिनभर रहेगा शुभ मुहूर्त
    ज्योतिषाचार्यों और पंचांग गणना के अनुसार, इस बार भद्रा का साया 27 अगस्त की रात को ही समाप्त हो जाएगा। 28 अगस्त (श्रावण शुक्ल पूर्णिमा) को पूरे दिन और प्रदोष काल में भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में श्रद्धालु बिना किसी विघ्न के शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश को रक्षासूत्र अर्पित कर रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मना सकेंगे। 

  • ‘हम नहीं बचेंगे, बच्चों का ख्याल रखना…’ नेपाल में फंसे भोपाल के परिवार की आखिरी कॉल, 29 रिश्तेदार लापता

    ‘हम नहीं बचेंगे, बच्चों का ख्याल रखना…’ नेपाल में फंसे भोपाल के परिवार की आखिरी कॉल, 29 रिश्तेदार लापता

     भोपाल
     नेपाल स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोसाईकुंड की धार्मिक यात्रा पर गए एक ही कुनबे के 29 श्रद्धालुओं के अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में लापता होने का हृदयविदारक मामला सामने आया है। भोपाल में निवासरत नेपाल मूल के एक परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, लापता हुए 29 लोग आपस में निकट संबंधी हैं। इस समूह में जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी समेत कई करीबी रिश्तेदार शामिल हैं जो पूर्णिमा के पावन अवसर पर दर्शन करने निकले थे।

    भोजन छोड़ जान बचाने को पहाड़ की ओर भागे, छत पर ली शरण
    भोपाल की रहने वाली देवकी अधिकारी ने बताया कि उनके अपने परिवार के चार सदस्य भी इस लापता समूह का हिस्सा हैं। उन्होंने दर्दनाक आपबीती साझा करते हुए बताया कि यात्रा के दौरान अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली।

        खतरे की आहट पाते ही सभी श्रद्धालु अपना भोजन और सामान वहीं छोड़कर जान बचाने के लिए पहाड़ी इलाके की तरफ भागे।

        सुरक्षित स्थान की तलाश में उन्होंने पहाड़ पर बने एक मकान की छत पर आश्रय लिया।
        श्रद्धालुओं ने फोन पर अपने परिजनों को सूचित किया कि जिस बस से वे आए थे, वह उफनती बाढ़ में बह चुकी है और वे स्वयं जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं।

    'घर डूब रहा है, अब हम नहीं बचेंगे'
    देवकी अधिकारी ने बताया कि बीते दिन प्रातः लगभग 9:30 बजे परिजनों से अंतिम बार बातचीत हो सकी थी। फोन पर डूबते हुए लोगों ने कहा, "मकान आधा जलमग्न हो चुका है, हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। हमारे पीछे हमारे मासूम बच्चों का ध्यान रखना।"

    बातचीत के दौरान ही दूसरी तरफ से आवाज आनी बंद हो गई, हालांकि कॉल तुरंत डिस्कनेक्ट नहीं हुआ था। उस समय के बाद से ही सभी 29 सदस्यों से संपर्क पूरी तरह से कटा हुआ है। न तो यात्रियों का कोई सुराग मिला है, न ही उनकी बस का पता चला है और न ही कोई पार्थिव शरीर बरामद हुआ है।

    त्रिशूली नदी का पुल टूटने से राहत एवं बचाव कार्य बाधित
    घटनास्थल तक पहुंचने के मार्गों का ठप हो जाना परिजनों और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। त्रिशूली नदी पर निर्मित मुख्य पुल बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जिस स्थान पर सामान्य परिस्थितियों में आधे घंटे में पहुंचा जा सकता था, वहां अब ऊबड़-खाबड़ ग्रामीण और पहाड़ी रास्तों से पहुंचने में 6 से 8 घंटे का समय लग रहा है।

    मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर गहराया संकट
    लापता श्रद्धालुओं के पीछे छूटे छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर भोपाल में रह रहे परिजन गहरे सदमे और चिंता में हैं। देवकी अधिकारी ने भारत और नेपाल सरकार से तत्काल व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने और खोजबीन तेज करने की भावुक अपील की है। परिजनों की मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द स्वजनों की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी दी जाए ताकि बच्चों और परिवार को संभाला जा सके।