Category: मध्य प्रदेश

  • जच्चा-बच्चा मृत्यु मामला: 4 स्वास्थ्यकर्मियों पर गिरी गाज, जांच समिति गठित

    जच्चा-बच्चा मृत्यु मामला: 4 स्वास्थ्यकर्मियों पर गिरी गाज, जांच समिति गठित

    वा में जच्चा-बच्चा की मृत्यु के प्रकरण में दो चिकित्सक एवं दो नर्सिंग ऑफिसर निलंबित, जांच समिति गठित

    चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के पालन और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होगी स्वीकार : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    रीवा
    उप मुख्यमं
    त्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में श्रीमती कल्पना मिश्रा एवं उनके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा है कि मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तथ्यों के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक प्रावधान किए जाएंगे। प्रथम दृष्टया प्राप्त शिकायत एवं संबंधित तथ्यों के आधार पर दो चिकित्सा शिक्षकों और दो नर्सिंग ऑफिसरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि श्रीमती कल्पना मिश्रा पति अमित मिश्रा, निवासी ग्राम हटवा, थाना बैकुण्ठपुर, जिला रीवा को गांधी स्मारक चिकित्सालय, रीवा के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में 26 अगस्त 2026 को प्रातः लगभग 2:38 बजे भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसी दिन रात्रि 11:55 बजे उनकी एवं उनके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई। चिकित्सकीय अभिलेखों के अनुसार, भर्ती के समय मरीज का प्लेटलेट काउंट लगभग 30 हजार प्रति माइक्रोलिटर था। रक्तचाप अत्यधिक बढ़ा हुआ तथा लीवर एंजाइम भी बढ़े हुए पाए गए थे। मरीज को निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार एवं आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाएं प्रारंभ की गई थीं। चिकित्सकीय जांच के आधार पर मरीज में टर्म प्रेग्नेंसी के साथ गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया एवं हेल्प सिंड्रोम का निदान किया गया था।

    परिजनों द्वारा चिकित्सकों पर दुर्व्यवहार एवं उपचार में लापरवाही के आरोप लगाते हुए शिकायत की गई। शिकायत के आधार पर वरिष्ठ चिकित्सकों की जांच समिति गठित की गई है। ड्यूटी चिकित्सक डॉ. सोनल अग्रवाल, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा डॉ. निधि पाण्डेय, निश्चेतना विभाग को प्रथम दृष्टया कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं गंभीर अनुशासनहीनता के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। नर्सिंग ऑफिसरों के संबंध में प्राप्त दुर्व्यवहार की शिकायत के आधार पर निलंबन की कारवाई की गई है। परिजनों की मांग पर मृतिका एवं उनके गर्भस्थ शिशु का शव परीक्षण जिला चिकित्सालय एवं चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा की संयुक्त टीम द्वारा किया गया। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद दोनों शवों को उनके गृह ग्राम पहुंचाया गया।

     

  • उज्जैन में रक्षाबंधन की खुशियां: बहनों ने CM डॉ. यादव को बांधा रक्षासूत्र, लगाया तिलक

    उज्जैन में रक्षाबंधन की खुशियां: बहनों ने CM डॉ. यादव को बांधा रक्षासूत्र, लगाया तिलक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से बंधवाया रक्षा सूत्र

    रक्षाबंधन पर्व पर बहनों ने उज्जैन में मुख्यमंत्री को तिलक लगाकर रक्षासूत्र बांधा
    मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं देकर उपहार भेंट किए

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शुक्रवार को उज्जैन के वीवीआईपी गेस्ट हाउस एवं पुलिस सामुदायिक भवन में उपस्थित महिला पुलिस अधिकारी कर्मचारी बहनों के साथ त्यौहार मनाया। गृह विभाग की बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को रक्षाबंधन पर्व पर महाकालेश्वर मंदिर समिति की महिला कर्मचारी, सुरक्षा कर्मचारी, महिला सफाई मित्र तथा नगर निगम की महिला सफाई मित्रों ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राखी बांधी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी बहनों से संवाद कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्षाबंधन पर उपस्थित सभी बहनों को उपहार भी भेंट किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी बहनों के साथ पर्व की खुशियां साझा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित बहनों को रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, विश्वास और आपसी संबंधों को मजबूत करने वाला पवित्र पर्व है। उन्होंने इस अवसर पर सभी बहनों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

    कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेडा, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ओम जैन, उज्जैन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष मुकेश यादव,नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल,राकेश पंड्या, विवेक गुप्ता, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • फार्मर आईडी में होगी किसानों से संबंधित समग्र जानकारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    फार्मर आईडी में होगी किसानों से संबंधित समग्र जानकारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    फार्मर्स आईडी से किसानों को मिलेगी डिजिटल पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश में जारी है फार्मर आईडी बनाने का अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    फार्मर आईडी में होगी किसानों से संबंधित समग्र जानकारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का किसानों को मिलेगा लाभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 20 अगस्त से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जारी देश की डिजिटल क्रांति ने हाल के वर्षों में डिजिटल पहचान, सुरक्षित भुगतान और लेनदेन के माध्यम से शासन और सेवा वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। प्रदेश के किसानों की फार्मर आईडी बनवाने का अभियान आरंभ किया है। शासकीय दल स्वयं किसानों के पास जाकर उनकी फार्मर आईडी बनवा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी किसानों से अपनी फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन के प्रयासों ने वित्त, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा सहित जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में एक संपन्न डिजिटल वातावरण का निर्माण किया है। कृषि क्षेत्र में ऐसे ही बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर डिजिटल कृषि मिशन को एक व्यापक योजना के रूप में क्रियान्वित किया गया है। इनमें डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना का निर्माण, डिजिटल फसल अनुमान सर्वेक्षण लागू करना और केंद्र व राज्य सरकारों तथा कृषि से जुड़ी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक स्तर पर डिजिटल पहल को अपनाना शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रॉस्ट्रक्चर का ग्राम और किसान स्तर तक लगतार विस्तार किया जा रहा है। इसके अंर्तगत कृषि से संबंधित जानकारियां और सेवाएं समय पर व्यक्तिगत तरीके से और पूर्ण विश्वसनीयता के साथ उपलब्ध कराने के लिए आधार कार्ड के समान 'किसान आईडी' की शुरुआत की गई है। यह आईडी किसानों के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान के रूप में काम करती है। फार्मर आईडी, भूमि अभिलेखों, पशुधन स्वामित्व, बोई गई फसल और प्राप्त लाभ सहित विभिन्न किसान-संबंधित डेटा से जुड़ी होंगी। उल्लेखनीय है कि किसान आईडी के निर्माण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण का परीक्षण करने के लिए छह राज्यों क्रमश: उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु में पायलट परियोजनाएं संचालित की गई थीं।

     

  • नेत्रदान में इंदौर की बड़ी मिसाल, 19 हजार कॉर्निया से देशभर के जरूरतमंदों को मिली नई रोशनी

    नेत्रदान में इंदौर की बड़ी मिसाल, 19 हजार कॉर्निया से देशभर के जरूरतमंदों को मिली नई रोशनी

    इंदौर
     अंगदान के क्षेत्र में देश में पहचान बना चुका इंदौर अब नेत्रदान में भी मिसाल कायम कर रहा है। शहरवासियों की पहल से पिछले 16 वर्षों में करीब 19 हजार कार्निया एकत्र किए गए हैं। इनमें से कई कार्निया मध्य प्रदेश के अलावा देश के दूसरे शहरों के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे हैं। इनके माध्यम से दृष्टिहीनता से जूझ रहे लोग फिर से दुनिया और अपने प्रियजनों को देख पा रहे हैं। नेत्रदान की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में मुस्कान ग्रुप परमार्थिक ट्रस्ट और एमके इंटरनेशनल आई बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    आठ लोगों से शुरू हुआ कारवां
    इंदौर में करीब 32 वर्ष पहले आठ लोगों ने द्वारकापुरी क्षेत्र की एक गरीब परिवार की कन्या के विवाह में सहयोग के लिए पहल की थी। धीरे-धीरे यह प्रयास व्यापक सामाजिक सेवा अभियान में बदल गया और इसी से मुस्कान ग्रुप की नींव मजबूत हुई। वर्ष 2002 में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर महाशब्दे और डॉ. सुहास बांडे ने इंदौर में नेत्रदान को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू किए।

    16 साल में डोनेट कराए 19000 कॉर्निया
    मुस्कान ग्रुप के सदस्य जीतू बागानी, संदीपन आर्य और अन्य सदस्यों ने वर्ष 2002 में कालानी नगर निवासी एक व्यक्ति के निधन के बाद उनका कॉर्निया दान करवाया। यही पहल आगे चलकर नियमित अभियान में बदल गई। ग्रुप के सहयोग से 2010 से 2026 तक करीब 19 हजार कॉर्निया एकत्र किए जा चुके हैं। इसमें सामान्य मृत्यु के साथ ब्रेन डेड अंगदानियों के कॉर्निया भी शामिल हैं।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 2237 और वर्ष 2025 में 2748 कार्निया एकत्र किए गए। इससे स्पष्ट है कि शहर में नेत्रदान के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर का आई बैंक भी बना
    इंदौर में वर्ष 2010 में एमके इंटरनेशनल आई बैंक की शुरुआत हुई। इसके संस्थापक संपत झंवर ने नेत्रदान को व्यवस्थित स्वरूप देने और जरूरतमंदों तक कार्निया पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की। आई बैंक का शुभारंभ तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने इंदौर में किया था। यहां एकत्र कार्निया को केवल इंदौर या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि आवश्यकता के अनुसार देश के विभिन्न शहरों में भी भेजा जाता है। इस तरह इंदौर में किया गया नेत्रदान दूसरे शहरों के लोगों के जीवन में भी रोशनी लौटा रहा है।

     

  • हेरिटेज ट्रेन की सीटों पर मारामारी! 21 सितंबर तक फुल बुकिंग, नॉन-एसी में भी सिर्फ एक दिन की वेटिंग

    हेरिटेज ट्रेन की सीटों पर मारामारी! 21 सितंबर तक फुल बुकिंग, नॉन-एसी में भी सिर्फ एक दिन की वेटिंग

     इंदौर
     हेरिटेज ट्रेन को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। 21 सितंबर तक इस ट्रेन की लगभग सभी सीटें बुक हो चुकी हैं। यह ट्रेन पातालपानी और कालाकुंड के बीच चलती है। नॉन एसी में सिर्फ एक दिन 18 सितंबर को 52 वेटिंग हैं, बाकी दिन बुकिंग बंद है। वहीं एसी कोच की बात की जाए तो हर दिन वेटिंग की स्थिति बनी है।

    कई मौकों पर यह वेटिंग 73 तक पहुंच गई है। हेरिटेज ट्रेन में बुकिंग ज्यादा होने की वजह से वेटिंग के टिकट मिलना बंद हो गया है। यह ट्रेन दो एसी और चार नॉन एसी कोच के साथ संचालित हो रही है। दरअसल, आठ महीने बाद मीटरगेज ट्रैक पर शनिवार से ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। शनिवार-रविवार दोनों दिन ट्रेन में वेटिंग भी काफी ज्यादा रही। यह ट्रेन हर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को चलेगी।

    ट्रेन में बढ़ाई जाए कोचों की संख्या- एक्सपर्ट
    रेलवे सलाहकार समिति से जुड़े सदस्य और रेलवे एक्सपर्ट का कहना है कि इस ट्रेन को समय पर संचालित करना चाहिए था। मानसून सीजन की शुरुआत में ही इसे चलाना चाहिए था। रेलवे ने करीब दो महीने की देरी से ट्रेन को चलाया है। ट्रेन में लंबी वेटिंग देखने को मिल रही है।

    इसके अलावा स्थायी नहीं तो कम से कम अस्थायी तौर पर कोच की संख्या बढ़ाई जाना चाहिए। सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य जगमोहन वर्मा ने रेलवे से जल्द ट्रेन का नियमित संचालन करने को कहा है। इससे यात्रियों को काफी लाभ मिलेगा। हेरिटेज को लेकर इस समय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

     

  • मध्यप्रदेश में निवेश का बड़ा मिशन, 8 देशों के निवेशकों को GIS-2027 के लिए आमंत्रित करेंगे CM

    मध्यप्रदेश में निवेश का बड़ा मिशन, 8 देशों के निवेशकों को GIS-2027 के लिए आमंत्रित करेंगे CM

    भोपाल

    एमपी में "बड़ा" कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मोहन यादव सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (जीआइएस) 2027 के आयोजन की तैयारियों में जुट गई है, इसका पहला न्योता यूएई के निवेशकों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद न्योता देने 6 सितंबर को दुबई जा रहे है, जहां वे एक स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। निवेशकों से मिलेंगे और उन्हें मप्र आने का न्योता देंगे। 2 जनवरी 2027 में प्रस्तावित इस कार्यक्रम में शामिल होने पीएम नरेंद्र मोदी के भोपाल आने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं 7 अन्य देशों के निवेशकों को न्योता देने स्वयं जाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य देशों के निवेशकों भी संपर्क शुरू कर दिया है। जीआइएस- 1 के समय भी मुख्यमंत्री ने स्वयं यूनाइटेड किंगडम (यूके), जर्मनी, जापान समेत अन्य देशों की यात्राएं की थी और निवेशकों को मप्र आने का न्योता दिया था।

    जीआइएस-1 फरवरी 2025 में हुई थी, उसके पहले मुख्यमंत्री नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच इन देशों में गए थे। जीआइएस-2 जनवरी 2027 में प्रस्तावित है, जो भोपाल में होनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका शुभारंभ कर सकते हैं। इसमें अब चार महीने ही बाकी है। सरकार ने जीआइएस में रेकॉर्ड निवेश हासिल करने की लगभग सभी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है।

    दावा- 9 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर
    पिछली जीआइएस के दौरान 34 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे, इनमें से करीब 9 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर काम भी शुरू हो गया है। यह दावा प्रदेश सरकार का है। सीएम डॉ. मोहन यादव हाल में दिल्ली में हुए एक संवाद कार्यक्रम में यह बात कह चुके हैं। उद्योग एवं एमएसएमई विभाग के अधिकारी भी यही दावा कर रहे हैं। इन निवेश प्रस्तावों को विभिन्न केंद्रीय प्लेटफार्मों पर रेकॉर्ड कराया जा चुका है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

    फोकस वाले क्षेत्रों में दूध उत्पादन भी जोड़ा
    सरकार का फोकस कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, खनन, आइटी/आइटीइएस, भंडारण और लॉजिस्टिक्स, वाहन, दवा और फार्मास्युटिकल्स, रक्षा और वैमानिकी नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी विकास और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व की तुलना में अब दूध उत्पादन तेजी से उभरा है। दूध से कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिनकी दुनिया भर में मांग बढ़ी है। स्वभाविक है मप्र दूध उत्पादन करने वाले शीर्ष राज्यों में शामिल है।

    इस बार 70 देशों के उद्योगपति बुलाए जाएंगे
    जीआइएस-2027 में 70 से अधिक देशों के निवेशक, उद्योगपतियों को बुलाए जाने की तैयारी है। बीते साल 60 देशों के निवेशकों को आमंत्रित किया था जिसमें कई देशों के प्रमुख उद्योगपति, निवेशक, नीति निर्माता, विशेषज्ञ, 13 देशों के राजदूत, 6 देशों के उच्चायुक्त और वाणिज्य दूतावास प्रमुख शामिल हुए थे। देश व राज्य के लिए औद्योगिक गतिविधियों काफी अहम मानी जाती रही है। कई राज्य इस दिशा में तेजी से बढ़े हैं। पिछले वर्षों में महाराष्ट्र का काम काफी प्रभावी रहा है। मप्र भी इस देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

  • फाइल अटकाई तो कार्रवाई तय! MP के नए ‘ऑटो एस्कलेशन’ कानून में अफसरों पर सख्ती

    फाइल अटकाई तो कार्रवाई तय! MP के नए ‘ऑटो एस्कलेशन’ कानून में अफसरों पर सख्ती

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में अब कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी उद्योग या व्यापार से जुड़ी फाइल को दबाकर नहीं बैठ सकेगा। एमपी सरकार के नए 'मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' के तहत एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। 

    अगर किसी अफसर ने तय समय में फाइल क्लियर नहीं की, तो कंप्यूटर सिस्टम उस फाइल को खुद-ब-खुद उसके सीनियर अफसर के पास भेज देगा और लेटलतीफी करने वाले अफसर की जेब से जुर्माना भी कट सकता है।

    अब कैसे बदलेगा काम का तरीका
    अब तक व्यवस्था यह थी कि यदि किसी व्यापारी या निवेशक को अपना काम शुरू करना होता था, तो उसे एनओसी (NOC) या मंजूरी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। फाइल महीनों तक एक ही टेबल पर अटकी रहती थी।

    नए कानून ने इस 'टेबल-टेबल' के खेल को पूरी तरह खत्म कर दिया है। सरकार ने इस कानून के जरिए पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन 'एकल खिड़की प्रणाली' (सिंगल विंडो सिस्टम) पर शिफ्ट कर दिया है।

    अब किसी भी विभाग के अधिकारी के पास फाइल को अटकाने का कोई कानूनी या तकनीकी बहाना नहीं बचेगा।

    इस नए कानून की सबसे बड़ी ताकत इसकी समय-सीमा यानी डेडलाइन और स्वतः ट्रांसफर होने की तकनीक है, जिसने नौकरशाही की मनमानी पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

    जब सिस्टम खुद कम करेगा अफसर की पावर
    इस कानून का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक 'ऑटो एस्कलेशन' का नियम है। मान लीजिए किसी विभाग के छोटे या मध्यम स्तर के अधिकारी को 15 दिनों के भीतर आपकी फाइल पर फैसला लेना है। अगर वह 15 दिनों तक फाइल पर कुंडली मारकर बैठा रहता है, तो 16वें दिन सुबह वह फाइल उसके कंप्यूटर से अपने आप (ऑटोमेटिकली) गायब हो जाएगी।

    वह फाइल सीधे उसके ऊपर के 'हायर अथॉरिटी' (वरिष्ठ अधिकारी) के डिजिटल डेस्क पर पहुंच जाएगी। यानी फाइल रोकने वाले अफसर के पास से उस फाइल को मंजूर या नामंजूर करने का अधिकार नहीं रहेगा। साथ ही लापरवाही रिकॉर्ड में भी दर्ज हो जाएगी।

    गजट के अध्याय-पांच की धारा 13 (1) में 'स्वतः वृद्धि' यानी Auto-Escalation का स्पष्ट कानूनी प्रावधान है। मूल प्रावधान: गजट के अनुसार, “जहां कोई आवेदन विहित समय सीमा के भीतर निपटाया नहीं जाता है, वहां वह, ऐसी रीति में जो विहित की जाए, संबंधित विभाग में अगले उच्चतर प्राधिकारी को स्वतः प्रकरण-वर्धित (Automatically Escalated) माना जाएगा।”

    'सिर्फ एक बार सवाल' का नियम – बार-बार अड़ंगा लगाने पर रोक
    अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी एक कमी आज बताते हैं, और जब व्यापारी उसे ठीक कर देता है, तो चार दिन बाद दूसरी कमी निकाल देते हैं। नए कानून की धारा 12 ने इस पर ताला लगा दिया है। अब कोई भी सक्षम अधिकारी आवेदन मिलने के केवल 7 दिनों के भीतर और सिर्फ एक ही बार कोई अतिरिक्त जानकारी या सवाल पूछ सकता है। इसके बाद उसे तय समय में फाइल पास करनी ही होगी, वह बार-बार नए ऑब्जेक्शन नहीं उठा सकता।

    लापरवाही पर कटेगा पैसा
    नए कानून की धारा 20 के तहत, यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी तय समय-सीमा के भीतर किसी मंजूरी या आवेदन का निपटारा करने में फेल रहता है, तो उसे भारी खामियाजा भुगतना होगा।

    ऐसे लापरवाह अधिकारी पर 'मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010' के तहत व्यक्तिगत रूप से जुर्माना (पेनाल्टी) लगाया जाएगा। यह जुर्माना सरकारी खाते से नहीं, बल्कि सीधे उस अधिकारी की जेब (सैलरी) से कटेगा, जिससे अधिकारियों में जवाबदेही तय होगी।

    दंडित करने का प्रावधान
    गजट के अध्याय-आठ की धारा 20 में समय पर काम न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को दंडित करने का प्रावधान है।

    मूल प्रावधान: गजट के अनुसार, "जहां राज्य नोडल एजेंसी का कोई सक्षम प्राधिकारी, अधिकारी अथवा कर्मचारी, समय-सीमा के भीतर किसी स्वीकृति पर कार्यवाही अथवा निपटान करने में विफल रहता है, वहां ऐसा प्राधिकारी, अधिकारी, कर्मचारी, 'मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010' (क्रमांक 24 सन् 2010) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार शास्ति (Penalty) के अधिरोपण का दायी होगा।"

    मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत यह कड़ा नियम है कि यदि कोई अधिकारी तय समय में सेवा या मंजूरी नहीं देता है, तो उस पर प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि यह जुर्माना विभाग पर नहीं, बल्कि कसूरवार अधिकारी, कर्मचारी पर व्यक्तिगत रूप से लगाया जाता है और यह राशि सीधे उसकी सैलरी (जेब) से कटती है।

    विभागों की मनमानी खत्म – अब 'सिंगल पॉइंट' कंट्रोल
    इस अधिनियम की धारा 7 के अनुसार, मध्यप्रदेश के सभी सरकारी विभागों (जैसे पर्यावरण, श्रम, ऊर्जा, राजस्व आदि) को अगले 6 महीने के भीतर उद्योगों को दी जाने वाली अपनी मंजूरियों की शक्तियां सीधे 'राज्य नोडल एजेंसी' (MPIDC) को सौंपनी होंगी।

    अब कोई भी विभाग यह नहीं कह सकता कि "हमारे विभाग के नियम अलग हैं।" अब सारी कमान राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर के हाथ में होगी, जो इन अधिकारियों के काम की रफ्तार पर सीधे नजर रखेंगे।

  • टैलेंट खोजने से मेडल जीतने तक नया प्लान! MP में खेलों पर 5 साल में 1,965 करोड़, जानें 6 बड़े बदलाव

    टैलेंट खोजने से मेडल जीतने तक नया प्लान! MP में खेलों पर 5 साल में 1,965 करोड़, जानें 6 बड़े बदलाव

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश में खेल सुविधाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब हर जिले में एक जैसी सुविधाएं देने के बजाय इलाके की खेल के हिसाब से पैसा लगाया जाएगा. यानी पहले यह पता लगाया जाएगा कि किस इलाके में किस खेल के अच्छे खिलाड़ी हैं और वहां की सुविधाओं में क्या कमी है. इसी बेस पर कोचिंग, ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जाएगा. प्रदेश के 52 खेलो इंडिया सेंटर इस योजना की पहली कड़ी होंगे और जरूरत पड़ने पर नए सेंटर भी खोले जाएंगे। 

    5 साल में 1,965 करोड़ खर्च
    इस योजना पर अगले 5 साल में 1,965 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केंद्र सरकार 60% और राज्य सरकार 40% राशि देगी. मध्य प्रदेश का हिस्सा 565 करोड़ रुपये है. खेल मंत्री विश्वास सारंग के मुताबिक, प्रदेश के 230 विधानसभा क्षेत्रों में अभी 90 स्टेडियम हैं और 140 से ज्यादा नए स्टेडियम बनाए जाएंगे. हर स्टेडियम पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च होंगे. गौरतलब है कि केंद्र की 2026-31 की नई खेलो इंडिया योजना पर देशभर में 29,054 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 

    ये 6 बड़े बदलाव होंगे
    नई व्यवस्था में सबसे पहले टैलेंट मैपिंग होगी, यानी प्रदेश में टैलेंट क्लस्टर बनाकर देखा जाएगा कि कहां किस खेल के खिलाड़ी हैं. दूसरा, मेडल मैपिंग के तहत ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े खेलों में मेडल की संभावना वाली सुविधाएं बनेंगी और बड़े खेल परिसर अपग्रेड होंगे. तीसरा, स्कूलों से प्रतिभा खोजकर खेलो इंडिया सेंटर, साई ट्रेनिंग सेंटर और अकादमियों तक पहुंचाया जाएगा, जिसमें भोपाल अहम कड़ी बनेगा. चौथा, एलीट लेवल तक नहीं पहुंचे खिलाड़ियों को E-KIA (इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट) से जोड़ा जाएगा। 

    5वां खिलाड़ियों को डाइट, रहना, किट, पढ़ाई और मेडिकल सपोर्ट के साथ डॉक्टर, फिजियो, साइकोलॉजिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट जैसे एक्सपर्ट की टीम मिलेगी. छठा, एआई-वीडियो से टैलेंट स्काउटिंग होगी और वेयरेबल डिवाइस से खिलाड़ियों का प्रदर्शन ट्रैक किया जाएगा. इसके साथ ही स्कूल से यूनिवर्सिटी लेवल तक मुकाबले बढ़ाए जाएंगे। 

     

  • करोड़ रुपए की लागत से एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मिली सरकार की मंजूरी

    करोड़ रुपए की लागत से एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मिली सरकार की मंजूरी

    विदिशा 
    मध्य प्रदेश के विदिशा से राजस्थान के कोटा के बीच आवागमन को आसान बनाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। कोटा से विदिशा के बीच नया एक्सप्रेस-वे बनाने को हरी झंडी मिल गई है। एनएचएआइ की ओर से इसका डीपीआर तैयार कराया जा रहा है। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे कोटा से शुरू होकर झालावाड़, अकलेरा, मकसूदनगढ़ और बैरसिया होते हुए विदिशा पहुंचेगा। करीब 275 किमी लंबे इस मार्ग के निर्माण पर लगभग 5500 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

    तीन घंटे कम हो जाएगा सफर
    वर्तमान में विदिशा-कोटा एक्सप्रेस-वे की सड़क मार्ग से दूरी करीब 349 किमी है। मौजूदा मार्ग से सफर पूरा करने में 7 घंटे 40 मिनट का समय लगता है। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद दूरी घटकर 275 किलोमीटर रह जाएगी। यानी दोनों शहरों के बीच करीब 75 किलोमीटर की दूरी कम होगी। वहीं यात्रा का समय भी लगभग तीन घंटे कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद अधिकतम साढ़े चार घंटे में विदिशा से कोटा का सफर पूरा किया जा सकेगा।

    केंद्रीय कृषि मंत्री की मांग पर अमल
    वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के शहर आगमन पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा से कोटा एक्सप्रेस-वे की मांग की थी। नितिन गडकरी ने आश्वासन भी दिया था, जो अब अमल शुरू हो गया है। विविशा विधायक मुकेश टंडन के अनुसार उन्हें स्वीकृति मिलने और डीपीआर को लेकर कार्य शुरू करने की सूचना मिली है। एक्सप्रेस-वे विदिशा के लिए कई मायनों में लाभकारी होगा।

    व्यापार-आवागमन को भी मिलेगा फायदा
    बता दें कि नया एक्सप्रेस-वे बनने से केवल यात्रा का समय ही कम नहीं होगा, बल्कि विदिशा और आसपास के क्षेत्रों से राजस्थान की ओर होने वाले व्यापारिक आवागमन को भी गति मिलने की उम्मीद है। कोटा शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। ऐसे में सीधी और तेज कनेक्टिविटी का लाभ व्यापारियों के साथ विद्यार्थियों को विशेष रूप से मिलेगा।

    20 करोड़ रुपए प्रति किमी का अनुमान
    प्रस्तावित परियोजना की लागत करीब 20 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से आने का अनुमान है। करीब 275 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे पर करीब 5500 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है। यह मार्ग बनने के बाद विदिशा सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को राजस्थान के कोटा और झालावाड़ क्षेत्र तक पहुंचने के लिए तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी।

    विदिशा-कोटा एक्सप्रेस वे को विस्तार से जाने

    प्रस्तावित लंबाई: करीब 275 किमी

    वर्तमान दूरीः करीब 349 किमी

    दूरी में कमीः लगभग 75 किमी

    मौजूदा यात्रा समयः 7 घंटे 40 मिनट

    के बादः एक्सप्रेस-वे अधिकतम साढ़े 4 घंटे

    अनुमानित लागतः करीब 5500 करोड़ रुपए

    अनुमानित लागत प्रति किमीः करीब 20 करोड़ रुपए

    प्रस्तावित रूटः कोटा-झालावाड़, अकलेरा-मकसूदनगढ़-बैरसिया-विदिशा

  • मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं देकर उपहार भेंट किए

    मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं देकर उपहार भेंट किए

    भोपाल T

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शुक्रवार को उज्जैन के वीवीआईपी गेस्ट हाउस एवं पुलिस सामुदायिक भवन में उपस्थित महिला पुलिस अधिकारी कर्मचारी बहनों के साथ त्यौहार मनाया। गृह विभाग की बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को रक्षाबंधन पर्व पर  महाकालेश्वर मंदिर समिति की महिला कर्मचारी, सुरक्षा कर्मचारी, महिला सफाई मित्र तथा नगर निगम की महिला सफाई मित्रों ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राखी बांधी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी बहनों से संवाद कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्षाबंधन पर उपस्थित सभी बहनों को उपहार भी भेंट किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी बहनों के साथ पर्व की खुशियां साझा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित बहनों को रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, विश्वास और आपसी संबंधों को मजबूत करने वाला पवित्र पर्व है। उन्होंने इस अवसर पर सभी बहनों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

    कार्यक्रम में विधायक  अनिल जैन कालूहेडा, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष  रवि सोलंकी, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष  जगदीश अग्रवाल, मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष  ओम जैन, उज्जैन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष  मुकेश यादव,नगर अध्यक्ष  संजय अग्रवाल, राकेश पंड्या,  विवेक गुप्ता, संभागायुक्त  आशीष सिंह, एडीजी  राकेश गुप्ता, डीआईजी  नवनीत भसीन, कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह, एसपी  प्रदीप शर्मा सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।