Category: मध्य प्रदेश

  • मध्य प्रदेश की बिजली व्यवस्था को हाईटेक बनाने की तैयारी! HT लाइनों में C-वेज कनेक्टर से होगा सुधार

    मध्य प्रदेश की बिजली व्यवस्था को हाईटेक बनाने की तैयारी! HT लाइनों में C-वेज कनेक्टर से होगा सुधार

    ग्वालियर
     प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए अब एचटी (हाईटेंशन) लाइनों के कनेक्शनों में आधुनिक तकनीक अपनाने की तैयारी है। विद्युत वितरण कंपनियां कंडक्टर जंपर और अन्य कनेक्शनों में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक बाइंडिंग पद्धति के स्थान पर सी-वेज कनेक्टर के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण करेंगी। महाराष्ट्र में इस तकनीक के बेहतर परिणाम सामने आने के बाद प्रदेश में भी इसे वितरण नेटवर्क में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

    तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक एचटी लाइन में कनेक्शन कमजोर होने पर ढीला संपर्क, स्पार्किंग, हॉट स्पॉट और जंपर फेल होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। कई बार यही छोटी तकनीकी खराबी लाइन फॉल्ट और लंबे समय तक बिजली गुल होने का कारण बन जाती है। सी-वेज कनेक्टर का उद्देश्य कनेक्शन को मजबूत और स्थायी बनाकर इन समस्याओं की संभावना को कम करना है।

    ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले चयनित क्षेत्रों में सी-वेज कनेक्टर लगा कर इनके प्रदर्शन का परीक्षण किया जाएगा। इसमें कनेक्शन की मजबूती, फाल्ट की स्थिति, स्पार्किंग और जंपर फेल होने की घटनाओं जैसे तकनीकी पहलुओं की निगरानी की जाएगी। परिणाम सकारात्मक रहे तो वितरण कंपनियां इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य क्षेत्रों में भी लागू कर सकती हैं।

    ब्रेकडाउन घटाने पर रहेगा जोर
    वितरण नेटवर्क में इस तकनीक के इस्तेमाल का सबसे बड़ा लक्ष्य अनियोजित बिजली व्यवधान और ब्रेकडाउन को कम करना है। मजबूत कनेक्शन होने से लाइन की विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। खासकर उन क्षेत्रों में जहां एचटी लाइनों में बार-बार जंपर या कनेक्शन संबंधी खराबी के कारण फाल्ट होते हैं, वहां यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।

    एमपी ट्रांसको में पहले से आधुनिक कनेक्टिविटी
    मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) अपने एक्स्ट्रा हाईटेंशन नेटवर्क में आधुनिक कनेक्टिविटी तकनीकों का उपयोग कर रही है। अब इसी तरह के तकनीकी सुधार वितरण नेटवर्क में किए जाने की तैयारी है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो आने वाले समय में पारंपरिक कनेक्शन पद्धति की जगह आधुनिक कनेक्टरों का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।

        वैसे एमपी ट्रांसको पहले से ही आधुनिक कनेक्टिविटी तकनीकों का उपयोग कर रही है। ट्रांसमिशन लाइनों में भी सी-वेज कनेक्टर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि सभी विद्युत वितरण कंपनियां इस तकनीक को अपनाती हैं, तो इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी और इसका सीधा लाभ आमजन को मिलेगा। – शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, एमपी ट्रांसको।

     

  • सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! CM मोहन यादव बोले- पेंडिंग प्रमोशन होंगे, हर साल होगी DPC

    सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! CM मोहन यादव बोले- पेंडिंग प्रमोशन होंगे, हर साल होगी DPC

    भोपाल
     मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने लंबित पड़े प्रमोशन के मामलों को निबटाने के लिए इस साल से सभी विभागों में विभागीय प्रमोशन कमेटियों (DPC) की प्रक्रिया शुरू करने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  स्पष्ट किया कि अब यह प्रक्रिया अटकी नहीं रहेगी, बल्कि हर साल नियमित रूप से आयोजित की जाएगी ताकि पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर उनका हक मिल सके।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार कर्मचारियों को सभी देय वेतन, भत्ते और प्रमोशन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इन लाभों को कर्मचारियों का अधिकार करार देते हुए कहा कि समय पर मिलने वाले इन फायदों से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और उनके परिवारों में खुशियां आती हैं। सरकार के इस कदम से लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों में एक नई उम्मीद जगी है।

    ग्वालियर को पंजाब-हरियाणा से आगे ले जाने का संकल्प
    एक अन्य कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री ने वर्चुअली रूप से ग्वालियर जिले के डबरा में आयोजित 'बलराम कृषि महाउत्सव' को भी संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के किसानों का आह्वान किया कि वे पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर प्राकृतिक खेती और उन्नत पशुपालन को अपनाएं ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके। सीएम ने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी जमीन की क्षमता का आकलन कर उसके अनुसार ही फसलों और सहायक गतिविधियों का चुनाव करें।

    •     मध्य प्रदेश सरकार ने सभी विभागों में पेंडिंग प्रमोशन क्लीयर करने के लिए DPC प्रक्रिया शुरू की।
    •     सीएम मोहन यादव ने कहा कि कर्मचारियों को समय पर प्रमोशन देना सरकार की प्राथमिकता है।
    •     डबरा (ग्वालियर) में बलराम कृषि महाउत्सव के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी गई।
    •     मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ग्वालियर संभाग कृषि, शिक्षा और डिफेंस के दम पर पंजाब-हरियाणा को भी पीछे छोड़ सकता है।

    कृषि के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों से मुकाबला
    ग्वालियर संभाग की संभावनाओं पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, रक्षा, कृषि, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उत्पादन के क्षेत्र में यह क्षेत्र बेहद मजबूत है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही दिशा में किए जा रहे प्रयासों के चलते आने वाले समय में ग्वालियर कृषि के मामले में पंजाब और हरियाणा जैसे अग्रणी राज्यों को भी कड़ी टक्कर देगा और उनसे आगे निकल जाएगा।

  • महू-पीथमपुर के बाद देवास तक मेट्रो की तैयारी! इंदौर से Y-शेप कॉरिडोर का प्रस्ताव तैयार

    महू-पीथमपुर के बाद देवास तक मेट्रो की तैयारी! इंदौर से Y-शेप कॉरिडोर का प्रस्ताव तैयार

    इंदौर 

     आर्थिक शहर इंदौर से धर्मनगरी उज्जैन और औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को जोड़ने के लिए मेट्रो प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। कुछ बदलाव के साथ नई रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी है। अगले चरण में देवास समेत मेट्रोपॉलिटन रीजन में आने वाले आसपास के शहरों को भी जोड़ा जा सकता है। पीथमपुर से इंदौर होकर उज्जैन और देवास की तरफ ट्रैक बनेगा जो वाय (Y) शेप में नजर आएगा। जल्द ही इसका प्रस्ताव शासन और कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।

    मेट्रो विस्तार में ट्रैक का डिजाइन भी खास रखा गया है। इसे वाय-शेप ले-आउट दिया जाएगा। घनी आबादी वाले हिस्सों में मेट्रो को भूमिगत और बाहरी इलाकों में एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलाया जाएगा। योजना के अनुसार, लवकुश चौराहे से बड़ा गणपति होते हुए राजेंद्र नगर तक मेट्रो भूमिगत चलेगी। इसके बाद राजेंद्र नगर से पीथमपुर की ओर जाने वाला मार्ग एलिवेटेड होगा। वहीं, एबी रोड के पास ट्रैक दो दिशाओं में बंटेगा। एक लाइन महू और दूसरी पीथमपुर की ओर जाएगी।

    पहले चरण के काम को भी मंजूरी का इंतजार
    मेट्रो के पहले चरण में सुपर कॉरिडोर से विजय नगर और आगे खजराना से भूमिगत कॉरिडोर का प्रावधान है। इस हिस्से के बजट को लेकर अभी निर्णय होना बाकी है। वहीं सुपर कॉरिडोर से शहीद पार्क के बीच तैयार एलिवेटेड कॉरिडोर में मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए मंत्रालय की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद इस हिस्से में संचालन शुरू किया जा सकेगा।

    तीसरे चरण का प्रस्ताव तैयार, मंजूरी के बाद बनेगी डीपीआर
    इंदौर मेट्रो के तीसरे चरण के विस्तार पर भी काम शुरू हो गया है। प्रस्तावित रूट में राजेंद्र नगर से आंबेडकर नगर (महू), सिरपुर से गलोंदा, पीपल्याहाना से होते हुए बिचौली मर्दाना तक मेट्रो कनेक्टिविटी देने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार इस चरण पर करीब 300 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत के हिसाब से काम प्रस्तावित है। इसका प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। मंजूरी के बाद डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

    84 कि.मी के कॉरिडोर में बदलाव
    इंदौर – उज्जैन – पीथमपुर मेट्रो कॉरिडोर की करीब 84 किलोमीटर लंबी योजना में कुछ बदलाव किए गए हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने संशोधित डीपीआर तैयार कर ली है। अब इसे शासन के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री के सामने भी प्रस्ताव रखा जाएगा। मंजूरी मिलने पर परियोजना के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू होगी।

    पूरा मेट्रोपॉलिटन रीजन जोड़ने की तैयारी
    मेट्रो कॉरपोरेशन पूरे मेट्रोपॉलिटन रीजन को जोडऩे की दिशा में काम कर रहा है। इसमें देवास सहित आसपास के प्रमुख शहरों को मेट्रो नेटवर्क से जोडऩे की संभावनाएं देखी जा रही हैं। उद्देश्य है कि, इंदौर के साथ जुड़े शहरों के बीच तेज और सुगम सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित हो और आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय स्तर पर मेट्रो का एकीकृत नेटवर्क तैयार किया जा सके।

  • ग्रीन एनर्जी में अदाणी का बड़ा दांव! राजस्थान-UP के बीच बनेगी 800 KV की हाई-पावर ट्रांसमिशन लाइन

    ग्रीन एनर्जी में अदाणी का बड़ा दांव! राजस्थान-UP के बीच बनेगी 800 KV की हाई-पावर ट्रांसमिशन लाइन

    भोपाल
     राजस्थान में 20 गीगावाट नवीनीकरण ऊर्जा भंडार की 800 केवी विद्युत ट्रांसमिशन लाइन राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं इसके ईको-सेंसेटिव जोन से होकर निकलेगी। इस प्रोजेक्ट को गुजरात के अहमदाबाद का अदाणी एनर्जी साल्यूशंस लिमिटेड (एइएसएल) कर रहा है। प्रोजेक्ट में विद्युत निकासी के लिए भडला से फतेहपुर व मध्य प्रदेश के बीच 800 केवी (एचवीडीसी) विद्युत ट्रांसमिशन लाइन (हेक्सा लेपिंग) निर्माण के लिए 25.5949 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार अदाणी कारपोरेट हाउस अहमदाबाद को उपयोग करने के लिए देगी।

    एमपी टाइगर फाउंडेशन को मिलेंगे 91 लाख रुपये
    इसके एवज में अदाणी कंपनी वन्यजीव मिटिगेशन शमन उपाय के 91 लाख रुपये की राशि मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसायटी के खाते में जमा कराएगी। राज्य वन्यप्राणी बोर्ड ने इसकी अनुशंसा कर दी है। अब इस प्रकरण में राष्ट्रीय वन्यप्राणी बोर्ड से अनुमति ली जाएगी।

    बता दें कि यह ट्रांसमिशन लाइन राजस्थान के प्रमुख सौर और पवन ऊर्जा केंद्रों (जैसे भादला या बाड़मेर काम्प्लेक्स) से उत्पादित होने वाली अतिरिक्त हरित ऊर्जा को देश के अन्य भारी मांग वाले औद्योगिक व परिवहन केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाएगी। लंबी दूरी तक बिना किसी बड़े बिजली नुकसान (ट्रांसमिशन लास) के बिजली भेजने के लिए इसमें उन्नत हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

    उन्नत तकनीक वाले कंडक्टरों का होगा उपयोग
    चम्बल अभयारण्य घड़ियाल, मगरमच्छ और दुर्लभ गंगा डाल्फिन जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। इस वजह से परियोजना में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। रात में काम बंद रहेगा। केवल दिन में कार्य होगा। अभयारण्य क्षेत्र और उसके आसपास से गुजरते समय वन्यजीवों व जलीय जीवों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए विशेष ऊंचे टावरों और उन्नत तकनीक वाले कंडक्टरों का उपयोग किया जाएगा।

    अदानी एनर्जी साल्यूशंस लिमिटेड करेगा काम
    अदानी एनर्जी साल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) राजस्थान को भारत के राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़कर नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को मजबूत करने के लिए इस ग्रीन एचवीडीसी ट्रांसमिशन बैकबोन के निर्माण का काम करेगा। 950 किलोमीटर लंबी एचवीडीसी लाइन राजस्थान के भादला को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और परिवहन केंद्र फतेहपुर से जोड़ेगी। 800 केवी लिंक छह गीगावाट (6,000 मेगावाट) नवीकरणीय ऊर्जा का परिवहन करेगा, जो लाखों घरों को रोशन करेगा। यह प्रोजेक्ट 2029 तक चालू होने की उम्मीद है।

  • मेधावी छात्रों को मिलेगा लैपटॉप का पैसा, 80 हजार से ज्यादा खातों में ट्रांसफर होंगे ₹25,000

    मेधावी छात्रों को मिलेगा लैपटॉप का पैसा, 80 हजार से ज्यादा खातों में ट्रांसफर होंगे ₹25,000

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में 1
    2वीं कक्षा के होनहार छात्रों के लिए अच्छी खबर है। 1 सितंबर को पात्र छात्रों के बैंक खाते में लैपटॉप खरीदने के लिए ₹25 हजार की राशि भेजी जाएगी। यह पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा। इस योजना का लाभ उन छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा पहले ही प्रयास में 75% या उससे ज्यादा अंकों के साथ पास की है। इसके अलावा अच्छे नंबर पाने वाले छात्रों को स्कूटी देने की तैयारी भी चल रही है। सरकार का लक्ष्य 15 सितंबर तक स्कूटी बांटने का है।

    प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत इस बार करीब 80,180 विद्यार्थी पात्र हैं। राशि विद्यार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी। योजना का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलता है, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा पहले प्रयास में 75% या उससे अधिक अंकों से पास की है।

    1 सितंबर को होगी राशि ट्रांसफर
    स्कूल शिक्षा विभाग 1 सितंबर को DBT के जरिए पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में ₹25 हजार ट्रांसफर करेगा। यह राशि लैपटॉप खरीदने के लिए दी जाती है। सरकार विद्यार्थियों को लैपटॉप सीधे नहीं देती। ₹25 हजार की सहायता राशि खाते में जमा की जाती है।

    पहले 85% अंक जरूरी थे
    मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए सहायता देने की योजना 2009-10 में शुरू हुई थी। शुरुआत में पात्रता के लिए 85% अंक जरूरी थे। बाद में सरकार ने यह सीमा घटाकर 75% कर दी। इसके बाद 12वीं में 75% या उससे ज्यादा अंक पाने वाले विद्यार्थी भी योजना के पात्र हो गए।

    स्कूटी योजना पर भी काम

    समीक्षा बैठक में विद्यार्थियों से जुड़ी दूसरी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी देने की योजना पर भी विभाग स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सरकार जल्द ही स्कूटी वितरण कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है।

  • CM डॉ. यादव का बड़ा संकल्प: नक्सल प्रभावित गांवों तक पहुंचेगा तेज विकास और बुनियादी सुविधाएं

    CM डॉ. यादव का बड़ा संकल्प: नक्सल प्रभावित गांवों तक पहुंचेगा तेज विकास और बुनियादी सुविधाएं

    नक्सल प्रभावित रहे गांवों में विकास सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बालाघाट जिले के ग्राम बोंदारी में विकास की हुई नई सुबह
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोंदारी में ग्रामीणों से किया संवाद
    बालाघाट जिले के सर्वांगीण विकास के लिए की 225 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा

     बालाघाट
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बालाघाट जिले के पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे ग्राम बोंदारी पहुंचकर ग्रामवासियों से संवाद किया और क्षेत्र के विकास तथा ग्रामीणों की आवश्यकताओं पर चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों से चर्चा के दौरान पशुपालन को बढ़ावा देने, आवास सुविधा, पोषण आहार के उपयोग की आदत विकसित करने के लिए जन-जागरूकता अभियान, वन विभाग के सहयोग, चिकित्सा एवं शिक्षा सुविधाओं तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इन सभी सुविधाओं को क्षेत्र में बेहतर ढंग से स्थापित करने और शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने तथा युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से 225 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र में सामाजिक एवं मूलभूत अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जाएगा। सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों सहित रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे सभी गांवों में विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ किया जाना सुनिश्चित किया जाए। स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं के आधार पर पशुपालन, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, वन आधारित आजीविका तथा अन्य रोजगारपरक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि बालाघाट अब नक्सलवाद को पीछे छोड़कर तेजी से विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को गति मिले। इसके लिए यहां के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

    इस अवसर पर स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री तथा बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पत्तिया उईके, बालाघाट की सांसद श्रीमती भारती पारधी, स्थानीय विधायक संजय उइके, विधायक मधु भगत, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अन्य जनप्रतिनिधिगण, ग्राम सरपंच एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। 

  • MP के परिवारों की बढ़ी चिंता: नेपाल में फंसे 7 में से 2 सुरक्षित, 5 लोगों की तलाश तेज

    MP के परिवारों की बढ़ी चिंता: नेपाल में फंसे 7 में से 2 सुरक्षित, 5 लोगों की तलाश तेज

     भोपाल/विदिशा/अनूपपुर

    मध्य प्रदेश के एक परिवार ने राहत की सांस ली जब बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल में फंसी दो बहनों का पता चल गया, जबकि राज्य के पांच अन्य परिवार शनिवार को भी अपने प्रियजनों की खबर का बेसब्री और बेचैनी से इंतजार करते रहे. मध्य प्रदेश के कम से कम सात लोग नेपाल में लापता हैं या फंसे हुए हैं, जिनमें अनूपपुर की बहनें पलक और पल्लवी मांझी और रायसेन के भाई विकास और हिमांशु राजपूत शामिल हैं 

    लापता लोगों में टोरंटो में रहने वाली इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी शामिल हैं, जो ईशा फाउंडेशन की 77 सदस्यों वाली तीर्थयात्रा के दौरान नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लापता हो गईं. इसके कारण विदिशा में उनके परिवार को लगातार चार दिनों तक बिना जवाब वाले फ़ोन कॉल्स का सामना करना पड़ा। 

    अनूपपुर की पलक और पल्लवी मिलीं सुरक्षित, पोखरा में हैं दोनों बहनें

    परिवार ने बताया कि अनूपपुर जिले की रहने वाली और ग्वालियर में पढ़ाई व नौकरी करने वाली बहनें पलक और पल्लवी मांझी छुट्टी मनाने के दौरान इस आपदा में फंस गई थीं और दो दिनों तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया था। 

    कोटमा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज रत्नाम्बर शुक्ला ने बताया कि शुक्रवार को परिवार को खबर मिली कि दोनों बहनें पोखरा में सुरक्षित हैं और रविवार को उनके घर लौटने की उम्मीद है। 

    रायसेन, देवास और इंदौर के 4 अन्य लोगों का भी सुराग नहीं
    परिवार ने बताया कि पता चलने के बाद उनके पिता ने भी उनसे फोन पर बात की. जहां मांझी परिवार ने उनके सुरक्षित मिलने का जश्न मनाया, वहीं पांच अन्य लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने राज्य की इमरजेंसी हेल्पलाइन से संपर्क किया है। 

    रायसेन में, हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में काम करने वाले भाई विकास और हिमांशु राजपूत का परिवार उनकी जानकारी का इंतजार करते हुए परेशान रहा। 

    देवास के शाहजहां अंसारी और इंदौर के शिबा प्रसाद मुखर्जी के रिश्तेदारों ने भी दिल्ली कंट्रोल रूम से संपर्क किया है, जिसे नेपाल में लापता या फंसे मध्य प्रदेश के लोगों की मदद के लिए बनाया गया था। 

    कनाडा की इंजीनियर स्वाति बागरेचा 4 दिन से लापता
    विदिशा में 50 वर्षीय स्वाति बागरेचा का परिवार चार दिनों से बेचैनी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि उनका मोबाइल फोन बजता तो है लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता। 

    टोरंटो में रहने वाली इंजीनियर स्वाति, 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यों वाले ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दिल्ली से निकली थीं. उनके भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया कि परिवार ने उनसे आखिरी बार 26 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे बात की थी, जब वह इमिग्रेशन की औपचारिकताओं के लिए नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर पहुंच गई थीं। 

    उन्होंने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "उनका मोबाइल अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल का जवाब नहीं दे रही हैं. हम उनकी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं। 

    परिवार के अनुसार, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का मुंबई में अपनी बड़ी बहन के साथ रुकी हुई थी। 

    प्रशांत ने बताया कि लोकेशन लॉग से पता चला कि स्वाति का मोबाइल फोन चीनी बॉर्डर के पास कहीं एक्टिव था, लेकिन उसे ट्रेस करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड था. उन्होंने कहा कि परिवार ने नेपाल में कनाडाई और भारतीय दूतावासों से संपर्क किया है और उन्हें खोजने में मदद मांगी है। 

    परिवार ने बताया कि स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के दखल के बाद, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी परिवार से बात की और स्वाति को खोजने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास शुरू किए.

    26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से अचानक बाढ़ आ गई थी; बाढ़ का पानी बाद में त्रिशूली और गंडक नदी प्रणालियों में बह गया और निचले इलाकों को प्रभावित किया। 

    जो परिवार अभी भी इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए बिना जवाब वाली हर कॉल ने डर और इस उम्मीद को और गहरा कर दिया है कि उनके अपने सुरक्षित हैं और जल्द ही घर लौट आएंगे। 

  • बालाघाट में विकास को नई रफ्तार, CM डॉ. यादव बोले- नई रोशनी की ओर बढ़ रहा जिला

    बालाघाट में विकास को नई रफ्तार, CM डॉ. यादव बोले- नई रोशनी की ओर बढ़ रहा जिला

    विकास की नई रोशनी की ओर बढ़ रहा है बालाघाट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा 225 करोड़ से एक साथ बदलेंगी 100 गांवों की तस्वीर
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहुंचे बालाघाट जिले के दूरस्थ गांव बोंदारी
    मुख्यमंत्री बैठे अपनों के बीच, लिया क्षेत्र के कल्याण का संकल्प
    जनजातीय समाज के साथ किया आत्मीय संवाद, समस्याओं का किया निवारण
    जिले के विकास के लिए जताई प्रतिबद्धता
    बैगा समाज के कल्याण का लिया संकल्प
    लाड़ली बहनों ने अपने भैया मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बांधी राखी, खिलाई मिठाई
     बालाघाट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को बालाघाट जिले के दूरस्थ गांव बोंदारी पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इस बोंदारी गांव में ग्रामवासियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ग्रामीणों के बीच ज़मीन पर बैठे, जनजातीय समाज की समस्याएं सुनीं और उन्हें मौके पर ही हल किया। उन्होंने पशुपालन में बढ़ावा, आवास सुविधा, पोषण आहार के उपयोग की आदत विकसित करने के लिए जन जागृति अभियान, वन विभाग के सहयोग, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को ये सभी सुविधाएं ग्रामीणों को मुहैया कराने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि इतिहास में पहली बार कोई मुख्यमंत्री बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित रहे बोंदारी और कोरका गांवों में ग्रामवासियों से मिलने पहुंचे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और यहां के बैगा समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बालाघाट जिले के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। इससे विकास कार्यों के साथ रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका सृजन के विभिन्न कार्य किया जा सकेंगे। इससे नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं और जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा। कार्यक्रम से पहले बालाघाट जिले की लाड़ली बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राखी भी बांधी और मिठाई खिलाई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प 'सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार' का है। नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 225 करोड़ रुपये की विकास पहल के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, शिक्षा, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, आयुष, खाद्य, मत्स्य, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, जनजातीय कार्य एवं पर्यटन सहित विभिन्न विभागों के माध्यम से अधोसंरचना विस्तार सहित सामाजिक एवं आर्थिक विकास के सभी कार्य किए जाएंगे।

    युवाओं को जोड़ना है अवसरों से

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अब केवल सड़क बनाने का ही नहीं, बल्कि सड़कों को बाजार से, गांव को रोजगार से और युवाओं को अवसरों से जोड़ने का है। बालाघाट जिले में एमएसएमई, ग्रामोद्योग तथा स्थानीय रोजगारपरक उद्योगों को और भी बढ़ावा देकर युवाओं के लिए अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे। कृषि, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण को ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का माध्यम बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास रहेगा कि गांव में तैयार होने वाले उत्पादों का स्थानीय स्तर पर ही मूल्य संवर्धन हो और उन्हें देश के बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों और छोटे उद्यमों से जोड़कर परिवारों की आय बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। यहां के युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला स्व-उद्यमी और उद्योगपति बनाने के लिए कौशल, प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट जिले की प्राकृतिक सम्पदा और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए यहां पर्यटन, ईको-टूरिज्म और ट्राइबल टूरिज्म को भी नई ऊंचाई देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

    नक्सल से विकास की ओर – सुरक्षित बालाघाट, समृद्ध बालाघाट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट जिला अब एक नई उम्मीद, नए संकल्प के साथ विकास की नई रोशनी की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ऐसा बालाघाट, जो नक्सलमुक्त भी हो और विकास एवं रोजगार के नए अवसरों से परिपूर्ण भी हो। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त बालाघाट यक़ीनन हमारी उपलब्धि है, लेकिन हमारा अगला लक्ष्य बालाघाट को समृद्ध, आत्मनिर्भर और खुशहाल ज़िला बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि यहां के हर गांव में विकास, हर युवा को अवसर, हर परिवार की आय में वृद्धि और हर समाज को मान-सम्मान मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरक्षित बालाघाट को समृद्ध बालाघाट में बदलने के लिए सामाजिक अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हुए क्षेत्रों में विकास की पहुंच को अंतिम व्यक्ति तक ले जाना सरकार की प्राथमिकता है। सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के अवसर भी विकसित किए जाएंगे।

    बैगा समाज के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम बोंदारी में बैगा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए विशेष संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि बैगा समाज मध्यप्रदेश की गौरवशाली जनजातीय विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। बैगा परिवारों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, सड़क, बिजली और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैगा युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बैगा समाज की पारम्परिक कला, संस्कृति, ज्ञान और स्थानीय उत्पादों को आजीविका तथा बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। हमारी सरकार का उद्देश्य बैगा "समुदाय को आदर, सम्मान, अधिकार और अवसर के साथ विकास की मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने कहा कि बैगा समुदाय के बच्चों का भविष्य बेहतर हो, युवाओं को रोजगार मिले, महिलाओं की आय बढ़े और प्रत्येक बैगा परिवार के जीवन में खुशहाली आए, इसके लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।

    कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री तथा बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उईके, बालाघाट की सांसद श्रीमती भारती पारधी, स्थानीय विधायक संजय उईके, विधायक मधु भगत, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, जनप्रतिनिधि, सरपंच एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

     

  • CM डॉ. यादव बोले- बालाघाट में विकास के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर करेंगे सृजित

    CM डॉ. यादव बोले- बालाघाट में विकास के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर करेंगे सृजित

    बालाघाट जिले का विकास और रोजगार के नये अवसरों का सृजन ही हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बैगा विकास प्राधिकरण की होगी स्थापना
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनविश्वास कार्यक्रम में हुए शामिल

    बालाघाट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने बालाघाट जिले में नक्सलवादी गतिविधियों को जड़ से खत्म कर दिया है। आज हमारा प्रशासन और अधिकारी उन इलाकों तक पहुंचे हैं, जहां बीते कई सालों तक कभी कोई नहीं पहुंच पाया। बालाघाट जिला वह क्षेत्र रहा है, जहां नक्सलियों ने दिसंबर 1999 में तत्कालीन सरकार के मंत्री की निर्मम हत्या कर दी थी। राज्य के लिए 30 से 35 साल का वह दौर अत्यधिक कष्टकारी समय था। अब हमारी सरकार नक्सलमुक्त हो चुके इन क्षेत्रों में विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट के 100 अति पिछड़े गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 225 करोड रुपए की राशि हमने आज ही मंजूर कर दी है। स्थानीयजन की आजीविका और रोजगार के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं विकसित करने का प्रबंध भी किया है। इसके अंतर्गत सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य प्रत्येक क्षेत्र में कार्य किए जाएंगे। आज मंजूर की गई राशि अस्पताल खोलने, शासकीय स्कूलों के उन्नयन, सामुदायिक भवनों के निर्माण पर खर्च की जाएगी। हमारे प्रशासनिक अधिकारी अलग-अलग इलाकों में शिविर लगाकर लोगों को जन कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को बालाघाट जिले के लांजी में जनविश्वास अभियान कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बैगा समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए बैगा विकास प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी। इस प्राधिकरण से बैगा समुदाय के लिए सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना विकास के कार्य प्राथमिकता से पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बैगा समुदाय को शिक्षा, आजीविका और कौशल विकास के साथ जोड़कर उन्हें भरपूर लाभ दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने के लिए पशुपालन एवं कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने तथा कान्हा नेशनल पार्क के समीप पर्यटन सुविधाओं के विकास की सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए हमने यहां होम-स्टे की संख्या बढ़ाने जैसे निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और नैसर्गिक सुंदरता में बालाघाट जिले के लांजी का यह पूरा क्षेत्र मेघालय के चेरापूंजी को भी पीछे छोड़ देगा। यहां इको टूरिज्म और ट्राइबल टूरिज्म के विकास की भी अपार संभावनाएं हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में दुग्ध एवं पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बड़ी संख्या में सहकारी समितियां निर्मित की जा रही है। उन्होंने कहा कि दूध से व्यक्ति रोज नगद आमदनी कर सकता है। स्व सहायता समूह की महिलाओं को पोषण आहार वितरण से जोड़ा गया है। सरकार की कोशिश है कि गांव का उत्पादन गांव से ही मूल्य संवर्धित होकर बड़े शहरों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह (पीवीटीजी) में आने वाले बैगा समुदाय के लिए विशेष कार्य करने की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बैगा समुदाय की संस्कृति काफी उत्कृष्ट है। बैगा समुदाय की कला, संस्कृति, ज्ञान और स्थानीय उत्पादों को जोड़कर समेकित विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है, ताकि बैगा समाज भी बाकी समाजों की तरह विकास की नई यात्रा से जुड़े। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पीएम जन-मन अभियान के अंतर्गत तीन विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों को विशेष रूप से लाभान्वित किया जा रहा है, इनमें मध्यप्रदेश की बैगा जनजाति भी शामिल है। बैगा समाज के युवाओं को रोजगार मिले, महिलाओं का जीवन बेहतर हो, प्रत्येक परिवार में खुशहाली आए इसके लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी। नक्सलमुक्त बालाघाट मध्यप्रदेश सरकार के लिए एक उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास है कि बालाघाट जिला अब आत्मनिर्भर भी बने। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार ने नक्सलवाद की एक बड़ी लड़ाई जीत ली है। हमारा प्रयास है कि नक्सलमुक्त हुए प्रत्येक गांव में विकास की नई रोशनी पहुंचे। प्रत्येक परिवार में समृद्धि आये और प्रत्येक समुदाय को सम्मान मिले। इसी उद्देश्य से अब सुरक्षित बालाघाट के बाद समृद्ध बालाघाट बनाने का संकल्प लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब हम नक्सलवाद से अवरुद्ध हुई बालाघाट जिले की विकास की धारा को समृद्धि और खुशहाली की ओर लेकर जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय सामाजिक संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों और सभी दलों के जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि बालाघाट क्षेत्र के विकास के लिए सभी को संवेदनशील होकर समन्वयपूर्वक कार्य करना होगा। सालों तक नक्सल प्रभावित रहने से इस इलाके में प्रशासन और कल्याणकारी योजनाएं नहीं पहुंच पाई। अब समय यहां की चुनौतियों को समाप्त करते क्षेत्र को विकास के मार्ग पर अग्रसर करने का है। बालाघाट और लांजी क्षेत्र के विकास के लिए हमने विपक्ष के निर्वाचित विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी साथ लेकर क्षेत्र के विकास की योजना तैयार की है। आने वाले समय में हम नेता प्रतिपक्ष और सभी दलों को भी साथ लेकर क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बालाघाट नंबर वन जिला बने इस कोशिश में हम कार्य कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों को भी बालाघाट जिले के दौरे पर भेजा जाएगा। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बालाघाट वह जिला है, जिसने पूरे देश में सबसे पहले नक्सलवाद को आखिरी सलाम किया।

     

  • भुजरिया पर्व पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे वाल्मीकि धाम, विधि-विधान से किया छड़ी-पूजन

    भुजरिया पर्व पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे वाल्मीकि धाम, विधि-विधान से किया छड़ी-पूजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वाल्मीकि धाम आश्रम में किया छड़ी-पूजन

    सभी को दी भुजरिया पर्व की शुभकामनाएं

    उज्जैन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार सुबह उज्जैन स्थित वाल्मीकि धाम सिद्धपीठ (आश्रम) पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम में अनंत विभूषित 1008 स्वामी सोहनदास जी की समाधि और प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ दर्शन-पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाल्मीकि धाम आए जाहरवीर गोगादेव के निशान ध्वज का भी विधि-विधान से छड़ी-पूजन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यसभा सदस्य एवं बालयोगी संत उमेशनाथ जी महाराज से भेंट कर उनका शुभाशीष भी प्राप्त किया। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष मुकेश यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित थे।

    मीडिया प्रतिनिधियों से की चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाल्मीकि धाम सिद्धपीठ आश्रम में दर्शन-पूजन के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। वर्तमान समय में यह जरूरी है कि हम साधु-संतों के आशीर्वाद से अपने अतीत के गौरव को पुनः स्थापित करें। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य महंत उमेश नाथ जी महाराज ने अनेक वर्षों से उज्जैन के वाल्मीकि धाम आश्रम को चैतन्य बनाया है। वाल्मीकि जी के आदर्श और कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बाबा जाहरवीर गोगा महाराज ने अपना सर्वस्व नौछावर कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हम सबके लिए सौभाग्य का विषय है कि बाबा महाकाल की नगरी में बाबा गोगा महाराज के ध्वज चिह्न निकलेंगे। इससे सामाजिक समरसता और एकात्मता का अद्भुत संदेश देशभर में पहुंचेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रदेशवासियों को भुजरिया पर्व, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गोगा नवमी की भी शुभकामनाएं दीं।