Category: मध्य प्रदेश

  • जन विश्वास अभियान पर CM मोहन यादव की सीधी नजर, निरीक्षण और निगरानी कार्यों की खुद करेंगे समीक्षा

    जन विश्वास अभियान पर CM मोहन यादव की सीधी नजर, निरीक्षण और निगरानी कार्यों की खुद करेंगे समीक्षा

    भोपाल
     मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत सभी निरीक्षण एवं निगरानी कार्यों की समीक्षा खुद मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव करेंगे। वह विभागवार तो समीक्षा करेंगे ही, जिला व संभागवार समीक्षा भी की जाएगी। मुख्यमंत्री के प्रभार वाले इंदौर संभाग में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत सभी निरीक्षण और निगरानी परख ऐप के माध्यम से ऑनलाइन शुरू कर दी गई है।

    इंदौर संभाग के कमिश्नर भास्कर लाक्षाकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिलाया है। अभियान की रिपोर्ट और फॉलोअप रिपोर्ट भी परख ऐप के माध्यम से होगी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य है कि अधिकारियों के कामकाज की निगरानी केवल निरीक्षण तक ही सीमित न रहे, बल्कि ऐप के माध्यम से भी की जा सके।

    चार जिलों में हो चुकी समीक्षा
    इधर, मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत मुख्यमंत्री मोहन यादव अब तक मध्य प्रदेश के चार जिलों में जाकर सीधे जनता के बीच सुशासन और विकास कार्यों का जमीनी निरीक्षण और समीक्षा कर चुके हैं। इस अभियान की शुरुआत सात अगस्त से हुई थी। हर शुक्रवार को मुख्यमंत्री स्वयं एक जिले में पहुंचकर बंद कमरों के बजाय सीधे फील्ड में जाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं।

    विभिन्न सरकारी संस्थाओं का औचक निरीक्षण
    छिंदवाड़ा (प्रथम दौरा – सात अगस्त) निरीक्षण: अभियान के पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा जिले से इस मुहिम की शुरुआत की। उन्होंने सरकारी योजनाओं की जमीनी समीक्षा की और आम जनता से सीधा संवाद किया।

    बड़वानी (दूसरा दौरा – 14 अगस्त) निरीक्षण: दूसरे चरण में उन्होंने बड़वानी जिले का दौरा किया। यहां उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया, फील्ड विजिट की और जनता से सीधे जुड़कर उनकी लंबित शिकायतों का निवारण किया। लापरवाही मिलने पर कुछ अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई भी की गई।

    टीकमगढ़ (तीसरा दौरा – 21 अगस्त) निरीक्षण: तीसरे शुक्रवार को मुख्यमंत्री टीकमगढ़ जिले पहुंचे। यहां उन्होंने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया।

    अस्पताल के ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर, लैब, ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्थाएं देखीं। पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कुपोषित बच्चों की माताओं से भेंट की और मरीजों का हालचाल जाना।

    बालाघाट (चौथा दौरा – 29 अगस्त) निरीक्षण: रक्षाबंधन पर्व के कारण मुख्यमंत्री का इस बार का दौरा शनिवार को बालाघाट जिले में आयोजित किया गया।

     

  • अब घर बैठे AIIMS भोपाल की 8 स्वास्थ्य सेवाएं, QR कोड से डॉक्टर की अपॉइंटमेंट और जांच रिपोर्ट पाएं

    अब घर बैठे AIIMS भोपाल की 8 स्वास्थ्य सेवाएं, QR कोड से डॉक्टर की अपॉइंटमेंट और जांच रिपोर्ट पाएं

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश के भोपाल एम्स में मरीजों को अब डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेने, जांच रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी हासिल करने सहित अन्य कामों के लिए बार-बार अस्पताल आने और कतार में लगने की जरूरत नहीं होगी। एम्स ने वाट्एसेप-स्वास्थ्य सेवा शुरू की है। मरीजों को अलग मोबाइल ऐप डाउनलोड करने या किसी नए पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं होगी। बस क्यूआर कोड स्कैन करना होगा और हाई लिखकर ओपीडी सबमिट करना होगा। अभी इसे परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। संस्थान के डॉ. बाबूलाल सोनी ने बताया कि इसमें और सुधार के साथ अन्य सेवाओं को भी जोड़ा जाएगा।

    एक वाट्एसेप, कई स्वास्थ्य सेवाएं
    -इस सुविधा के जरिए मरीज मोबाइल से ओपीडी के उपलब्ध समय और स्लाट देख सकेंगे और घर बैठे डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले सकेंगे। केवल डॉक्टर को दिखाने के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी।

    -प्रयोगशाला और अन्य नैदानिक जांचों की रिपोर्ट और अस्पताल से डिस्चार्ज होने की समरी रिपोर्ट भी वाट्एसेप पर देखी और डाउनलोड की जा सकेगी।

    -आभा पहचान संख्या बना सकेंगे और उसे उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ सकेंगे। अस्पताल द्वारा जारी जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र भी इससे प्राप्त और डाउनलोड किए जा सकेंगे।

    वाट्एसेप पर प्रमुख सुविधाएं

    -ओपीडी अपॉइंटमेंट और उपलब्ध स्लाट की जानकारी
    -प्रयोगशाला व अन्य जांच रिपोर्ट देखना और डाउनलोड करना
    -डिस्चार्ज समरी प्राप्त करना
    -आभा आइडी बनाना और जोड़ना
    -जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त व डाउनलोड करना
    -ओपीडी व अन्य मरीज सेवाओं की जानकारी

    एम्स ने किया सफल ऑपरेशन
    बीते दिनों पहले ही एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने 52 वर्षीय मरीज के दो अलग-अलग कैंसर का एक ही ऑपरेशन में सफल उपचार किया। मरीज लगातार बढ़ते पीलिया, पूरे शरीर में खुजली और तेजी से वजन घटने की शिकायत लेकर एम्स आया था। जांच में पता चला कि कैंसर के कारण पित्त नली जाम हो गई है और दाहिनी किडनी में 6.5 सेंटीमीटर का कैंसर ट्यूमर भी है। मरीज की स्थिति को देखते हुए यूरोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त सर्जरी की योजना बनाई। सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी टीम ने व्हिपल प्रक्रिया के जरिए पित्त नली और आसपास के कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाया। यूरोलॉजी टीम ने राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी कर कैसरग्रस्त दाहिनी किडनी को निकाल दिया।

     

  • MP में बारिश का असमान आंकड़ा, कहीं कोटे से ज्यादा तो इंदौर-उज्जैन अभी भी पीछे

    MP में बारिश का असमान आंकड़ा, कहीं कोटे से ज्यादा तो इंदौर-उज्जैन अभी भी पीछे

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में अगस्त के दौरान मानसून की सक्रियता से बारिश का आंकड़ा लगातार बढ़ा है। प्रदेश में अब तक औसत 30 इंच बारिश होनी थी, जबकि 27.3 इंच पानी गिर चुका है। यह सामान्य बारिश के कोटे से 2.7 इंच कम है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अब तक कोटे की 73 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई है। भिंड, निवाड़ी और सतना समेत 16 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हुई है।

    अगस्त में मेहरबान रहे मानसून की बदौलत मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की 73 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। भिंड, निवाड़ी और सतना ऐसे जिले हैं, जहां पर कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल में 93%, इंदौर-उज्जैन में 61%, जबलपुर में 68% और ग्वालियर में 83% पानी गिरा है।

    मौसम विभाग के अनुसार, निवाड़ी में सबसे ज्यादा 39.1 इंच पानी गिर चुका है, जो कोटे से 28 प्रतिशत ज्यादा है। डिंडौरी, मंडला में 37 इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    बता दें कि अगस्त के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में मानसून ट्रफ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया (निम्न दवाब क्षेत्र) एक्टिव रहे। इस वजह से पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना रहा। डिंडौरी, सतना, सिवनी समेत कई जिलों में तो बाढ़ आ गई।

    नर्मदा, मंदाकिनी नदियां उफान पर रही और झरने फूट पड़े। IMD (मौसम केंद्र) की माने तो सितंबर के पहले सप्ताह से भी तेज बारिश का दौर बना रहेगा। ऐसे में कई और जिलों में कोटा फुल हो सकता है। प्रदेश में अब तक औसत 30 इंच बारिश होना थी, लेकिन 27.3 इंच पानी ही गिरा है। यह कोटे से 2.7 इंच कम है।

    एमपी के डैम औसत 90% तक भरे प्रदेश के डैमों की स्थिति के बारे में बात करें तो जल भराव की स्थिति 70 प्रतिशत से ज्यादा है। इनमें इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाण सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वरर, और तवा 50 से 90 प्रतिशत तक भर चुके हैं। बरगी, जौहिला समेत कई डैमों के गेट भी खुल चुके हैं। हालांकि, इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति ठीक नहीं है।

    इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई।

    इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा, लेकिन तीसरे सप्ताह मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच पानी गिर गया। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो अब तक जारी है।

    एमपी में इन जिलों में कम/ज्यादा बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी, निवाड़ी में 1% से 50% तक कम बारिश हुई है।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 51% कम पानी गिरा है।

    16 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    निवाड़ी में सबसे ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, निवाड़ी में अब तक सबसे ज्यादा 39.1 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह जिले के सामान्य कोटे से 28 प्रतिशत ज्यादा है। डिंडौरी और मंडला में भी 37 इंच से ज्यादा बारिश हुई है।

    अगस्त के आखिरी सप्ताह में मानसून ट्रफ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया सक्रिय रहे। इसके चलते प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना रहा। डिंडौरी, सतना और सिवनी समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी। नर्मदा और मंदाकिनी नदियां भी उफान पर रहीं।

    मौसम विभाग के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में भी तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में कई और जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो सकता है।

    डैमों में बढ़ा जलस्तर, फसलों को फायदा
    बारिश का असर प्रदेश के डैमों पर भी दिखाई दे रहा है। डैमों में जलभराव 70 प्रतिशत से ज्यादा है। इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाण सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वर और तवा जैसे डैम 50 से 90 प्रतिशत तक भर चुके हैं।

    बरगी और जौहिला समेत कई डैमों के गेट भी खोले जा चुके हैं। हालांकि, इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति अभी ठीक नहीं है। बारिश से फसलों को भी फायदा मिला है।

    9 दिन की देरी से आया था मानसून
    इस साल मध्य प्रदेश में मानसून 9 दिन की देरी से 24 जून को पहुंचा था। इसके बाद अगले नौ दिनों में पूरे प्रदेश को मानसून ने कवर कर लिया था। देरी के कारण जून में प्रदेश में 30 प्रतिशत कम बारिश हुई थी।

    जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक हो गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा और कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस दौरान औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा।

    जुलाई के तीसरे सप्ताह में मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच बारिश हुई। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश दर्ज की गई। अगस्त के दूसरे सप्ताह से भारी बारिश का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।

    पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश की स्थिति
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 19 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में 1 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के मुताबिक अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

     

  • बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे CM मोहन यादव, रीवा-सतना की समीक्षा कर कलेक्टरों को दिए सख्त निर्देश

    बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे CM मोहन यादव, रीवा-सतना की समीक्षा कर कलेक्टरों को दिए सख्त निर्देश

    सतना
     चित्रकूट पहुंचे मुख्यमं
    त्री डॉ मोहन यादव,मंदाकिनी नदी बाढ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। हेलीकॉप्टर से मुख्यमंत्री जी के साथ विधायक चित्रकूट सुरेंद्र सिंह गहरवार कमिश्नर रीवा शीलेन्द्र सिंह भी, चित्रकूट पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव हेलीकॉप्टर से करेंगें हवाई सर्वे। हेलीपेड आरोग्यधाम में हेलीकॉप्टर उतरा।

    चित्रकूट में मंदाकिनी नदी 30 फीट उफान पर है। गोरगी बांध फूटने से कई इलाकों में पानी भर गया और रामघाट का बड़ा पुल तेज बहाव में बह गया। सीएम डॉ. मोहन यादव रविवार को चित्रकूट पहुंचे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया।

    सीएम ने आश्रय स्थल में बाढ़ प्रभावितों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित लोगों की जिंदगी पटरी पर लाने के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही, चित्रकूट में अतिक्रमण को भी बाढ़ की वजह मानते हुए रिकॉर्ड मंगाकर जरूरी कार्रवाई की बात कही।

    इधर, शनिवार को सतना, पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ में भी बाढ़ के हालात बने। सतना में रेलवे ट्रैक और थाने तक डूब गए, जबकि पन्ना में कई गांव टापू बन गए। रविवार को प्रदेश के 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।

    'हर प्रभावित तक पहुंचे मदद

    मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने स्थानीय सर्किट हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सतना एवं रीवा में बारिश के दौरान जलभराव एवं बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने सतना कलेक्टर को निर्देश दिए की सभी बाढ़ प्रभावित लोगों एवं चित्रकूट में रुके हुए श्रद्धालु एवं रहवासियों के भोजन वस्त्र एवं शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वे कराकर आरबीसी 6/4 के तहत राहत राशि भी प्रदान की जाए । मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश से कोई जनहानि एवं पशु हानि ना हो । मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए की जिन जिलों में बारिश का कम असर है वहां से बचाव के उपकरण बाढ़ प्रभावित जिलों में उपयोग में लाए जाएं।

    6 गांवों में किया गया रेस्क्यू
    बताया गया कि एनडीआरएफ की टीम मुस्दैती से बचाव कार्य संपादित करें। सतना कलेक्टर ने अवगत कराया कि छह गांव में रेस्क्यू किया गया है आज रात बारिश नहीं हुई तो स्थिति ठीक हो जाएगी। सात लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है ।

    उन्होंने बताया कि नया गांव डैम डैमेज हुआ है, इससे हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने निर्देश दिए कि चित्रकूट में आने वाले श्रद्धालु एवं रहवासियों को सुरक्षित रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्हें भोजन पैकेट दिया जाए। सद गुरू आश्रम में जो श्रद्धालु रुके हुए हैं उनका नंबर लेकर उनके परिजनों से संपर्क कर श्रद्धालुओं की बातचीत कराई जाए।

    जैतवारा में रूके सबसे ज्यादा लोग
    बताया गया कि जैतवारा गांव में सबसे ज्यादा लोग रुके हुए हैं उनके समुचित भोजन पानी एवं वस्त्र की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने रीवा सतना एवं सतना चित्रकूट मार्ग के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर रीवा ने बताया कि रीवा में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

    बाढ़ प्रभावितों के प्रकरण बनाए गए हैं, जो पशु हानि हुई है उसकी सहायता राशि दी जाएगी। सर्किट हाउस में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान रीवा संभाग कमिश्नर शीलेंद्र सिंह , पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत , कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी , सहित संबंधित अधिकारी गण उपस्थित रहे।

    मंदाकिनी नदी की तेज धारा में बहा पुल
    चित्रकूट में रामघाट में 300 मीटर बना बड़ा पुल मंदाकिनी नदी के तेज धारा में बहा,जल स्तर कम होने पर दिखा खंडहर हो चुका पुल चित्रकूट की मंदाकिनी नदी में बीते दिन आई सदी की सबसे भीषण बाढ़ के चलते सबकुछ तबाह और बर्बाद हो गया। 

    बाढ़ के पानी में डूबकर एक की मौत
    चित्रकूट स्थित शिवहरे धर्मशाला में चतुर्माशा करने के लिए रुके 50 लोगों के दल में से एक व्यक्ति कमला शरण निवासी ग्राम सुनैनी, जिला अरवल बिहार की बाढ़ के पानी में फसने के बाद डूबकर मौत हो गई है, साथ दो लोगो को बचा लिया गया है।

     

  • ग्राम जरही में कजलिया विसर्जन बड़ी धूमधाम से मनाया गया

    ग्राम जरही में कजलिया विसर्जन बड़ी धूमधाम से मनाया गया

    ग्राम जरही में कजलिया विसर्जन बड़ी धूमधाम से मनाया गया

    छबिलाल/राजेंद्रग्राम
    ग्राम पंचायत जरही में शिव मंदिर तालाब के पास आज कजलिया (भुजरिया / जवारा) पर्व बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

    सावन माह में बोए गए जवारे जब अंकुरित हो गए, तो आज सुबह से ही गांव की महिलाओं, बहनों और बच्चों में उत्साह देखा गया। सभी अपने-अपने घरों से कजलिया की टोकरियां सिर पर रखकर पारंपरिक गीत गाते हुए गांव के मंदिर और तालाब किनारे पहुंचे।

    वहाँ सभी ने विधि-विधान से कजलिया का विसर्जन किया और एक-दूसरे को कजलिया देकर "फूलो-फलो, बढ़ो" का आशीर्वाद दिया। भाइयों ने अपने कानों में कजलिया लगाए और बहनों को शगुन भेंट किया।

    इस अवसर पर गांव के बुजुर्गों ने बताया कि कजलिया अच्छी फसल और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। पूरे गांव में मेले जैसा माहौल रहा।

  • कलेक्टर गौरव बैनल ने छात्राओं से बंधवाई राखी

    कलेक्टर गौरव बैनल ने छात्राओं से बंधवाई राखी

    कलेक्टर गौरव बैनल ने छात्राओं से बंधवाई राखी

    ​सिंगरौली
     मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर गौरव बैनल ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चरगोड़ा एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय बधमनबा का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शैक्षणिक व्यवस्थाओं, पठन-पाठन और छात्र उपस्थिति का जायजा लिया।

    ​चरगोड़ा विद्यालय में निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने कलेक्टर गौरव बैनल एवं सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह को राखी बांधी। कलेक्टर ने अभिभूत होकर छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्मार्ट क्लास का अवलोकन कर परिसर में नियमित साफ-सफाई व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के निर्देश दिए।

    ​वहीं, बधमनबा विद्यालय के निरीक्षण में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। बिना स्वीकृत अवकाश के गैरहाजिर मिले शिक्षक महेश कुमार और शिक्षिका रूपाली राव धेकर का वेतन काटने के आदेश दिए गए।

    ​कलेक्टर ने मध्याह्न भोजन की व्यवस्था देखी और निर्देश दिए कि विद्यालय के बाहर प्रतिदिन का भोजन मीनू स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए, ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

  • इंदौरवासियों के लिए बड़ी खबर! MR-10 फ्लाईओवर का दूसरा हिस्सा कुछ दिनों में खुलेगा, सर्विस रोड भी सुधरेगी

    इंदौरवासियों के लिए बड़ी खबर! MR-10 फ्लाईओवर का दूसरा हिस्सा कुछ दिनों में खुलेगा, सर्विस रोड भी सुधरेगी

     इंदौर
     इंदौर-देवास बायपास पर एमआर-10 फ्लाईओवर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। फिलहाल मांगलिया से बिचौली की ओर एक हिस्से से वाहनों की आवाजाही शुरू है। अगले कुछ दिनों में दूसरा हिस्सा भी खोला जाएगा। एनएचएआइ फ्लाईओवर पर रोड मार्किंग, दिशा-सूचक संकेत और लाइटिंग का काम कर रहा है।

    एक तरफ की एप्रोच रोड भी बनाई जा रही है। निर्माण एजेंसी को सितंबर के पहले सप्ताह तक काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के अनुसार ट्रायल के बाद ट्रैफिक समीक्षा कर दोनों ओर आवाजाही शुरू की जाएगी।

    करीब 50 करोड़ की लागत वाले इस फ्लाईओवर का काम अगस्त 2023 में शुरू हुआ था। ट्रैफिक डायवर्शन और तकनीकी दिक्कतों से यह करीब एक साल लेट है। मुख्य निर्माण अक्टूबर 2025 में पूरा हो गया था। 180 मीटर लंबे फ्लाईओवर में छह स्पान पर गर्डर और स्लैब बिछाने का काम भी पूरा है।

    अंडरपास के लिए बंद होगी सर्विस रोड
    फ्लाईओवर के पूरी तरह शुरू होने के बाद आठ लेन अंडरपास का काम तेज होगा। सर्विस रोड पर खोदाई और नर्मदा लाइन का कनेक्शन जोड़ा जाना है। इससे विजय नगर, तुलसी नगर और निपानिया में पानी पहुंचेगा। अधिकारियों के मुताबिक फ्लाईओवर पर ट्रैफिक शुरू होने के बाद सर्विस रोड बंद कर मरम्मत होगी, फिर नर्मदा प्राधिकरण पाइपलाइन कनेक्शन करेगा। कनेक्शन में देरी से प्रोजेक्ट पहले ही सात-आठ महीने पिछड़ चुका है।

     

  • ₹3500 करोड़ से बदलेगी NH-347 की तस्वीर, छिंदवाड़ा-सिवनी फोर लेन से MP-महाराष्ट्र कनेक्टिविटी होगी मजबूत

    ₹3500 करोड़ से बदलेगी NH-347 की तस्वीर, छिंदवाड़ा-सिवनी फोर लेन से MP-महाराष्ट्र कनेक्टिविटी होगी मजबूत

    छिंदवाड़ा
    मध्य प्रदेश के महाकौशल अंचल के प्रमुख मार्ग नेशनल हाईवे 347 (छिंदवाड़ा से सिवनी) पर अब वाहनों की आवाजाही और सुगम होने जा रही है। राज्य सरकार छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच की सड़क को फोर लेन में अपग्रेड करने की तैयारी कर चुकी है, जिस पर लगभग ₹3,500 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में सड़क चौड़ीकरण के इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी पूर्व में इस महत्वपूर्ण मार्ग को फोर लेन बनाने की सहमति दे चुके हैं।

    टू-लेन की घुमावदार सड़क और हादसों से मिलेगी मुक्ति
    वर्तमान में छिंदवाड़ा और सिवनी के बीच टू-लेन सड़क है, जिस पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस मार्ग पर पैसेंजर कार यूनिट (PCU) की संख्या 10,000 के पार पहुंच चुकी है।

    आंकड़ों के अनुसार, इस रूट पर बीते छह महीनों में ही 556 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें लगभग 200 लोगों की अकाल मौत हुई है। फोर लेन बनने से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार होगा और यात्रा सुरक्षित बनेगी।

    लखनवाड़ा में बैनगंगा पर नया पुल और 3 किमी लंबा अंडरपास
        चौड़ीकरण परियोजना के तहत 70 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के एलाइनमेंट को दुरुस्त किया जाएगा ताकि घुमावदार मोड़ों को सीधा किया जा सके।

        लखनवाड़ा के पास बैनगंगा नदी पर नए विशाल पुल का निर्माण किया जाएगा, जबकि पेंच नदी पर स्थित पुराने पुल का चौड़ीकरण होगा।

        मार्ग के 13 किलोमीटर हिस्से में कान्हा कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसमें वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 3 किलोमीटर लंबा विशेष अंडरपास भी शामिल होगा।

    कैबिनेट बैठक में अन्य महत्वपूर्ण एजेंडे
    सड़क अधोसंरचना के विकास क्रम में राज्य सरकार ने हाल ही में भोपाल-विदिशा फोर लेन के लिए ₹1,757 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। इसके अतिरिक्त, कैबिनेट बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े एक विवादित बयान पर अभियोजन (Prosecution) स्वीकृति देने के बिंदु पर भी निर्णय लिया जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के उपरांत इस फाइल को अंतिम अनुमति के लिए राजभवन (राज्यपाल) भेजा जाएगा। इस पूरे मामले में 31 अगस्त को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में सुनवाई होनी तय है।

     

  • देश के 7 हाई-डेंसिटी रेल रूट में शामिल दिल्ली-मुंबई लाइन, रतलाम में फोरलेन से सफर होगा और तेज

    देश के 7 हाई-डेंसिटी रेल रूट में शामिल दिल्ली-मुंबई लाइन, रतलाम में फोरलेन से सफर होगा और तेज

    रतलाम
     देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई को जोड़ने वाला दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग को देश के उन 7 हाई डेंसिटी रेलमार्गों में शामिल किया गया है, जहां रेलवे तीसरी और चौथी लाइन बनाकर फोर लाइन रेलमार्ग तैयार कर रहा है. दिल्ली मुंबई के इस 1423 किमी रूट पर तीसरी और चौथी लाइन का कार्य भी शुरू हो चुका है. इस मार्ग पर अधिक मात्रा में माल ढुलाई और कम समय में यात्रा के लिए तीसरी एवं चौथी लाइन की डीपीआर रेलवे बोर्ड ने 2024 में तैयार करवाई थी। 

    इसके बाद इसे पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान में शामिल किया गया और कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद तीसरी और चौथी लाइन डालने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने X अकाउंट पर वीडियो जारी कर देश के 7 हाई डेंसिटी रेलमार्गों पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन की निर्माण प्रगति और इससे होने वाले फायदे की जानकारी दी है। 

    दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर कहां शुरू हुआ काम
    रेलवे के जंक्शन पर विभाग द्वारा जारी किए गए वीडियो में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, ''भारत के 7 हाई-डेंसिटी रेल रूट्स को फोरलेन करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है. जिसमें दिल्ली-मुंबई,दिल्ली–हावड़ा,हावड़ा–चेन्नई,चेन्नई-मुंबई,दिल्ली–चेन्नई,मुंबई–हावड़ा एवं दिल्ली–गुवाहाटी रेल मार्ग शामिल है. यह सभी रेलमार्ग करीब 11 हजार किलोमीटर में फैले देश के कुल रेल ट्रैफिक का लगभग 41% ट्रेफिक संभालते हैं. जबकि ये पूरे रेल नेटवर्क का केवल 16% हैं. वहीं, यदि दिल्ली मुंबई रेल मार्ग की बात करें तो इस रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। 

    देश के 7 हाइ डेंसिटी रेलरूट में शामिल हुआ दिल्ली मुंबई रेलमार्ग 
    रतलाम रेल मंडल में गोधरा से रतलाम तक जल्दी ही निर्माण कार्य शुरू होने वाला है. रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि, ''रतलाम रेल मंडल के गोधरा से रतलाम और रतलाम से नागदा के लिए तीसरी और चौथी लाइन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण की तैयाारियां पूर्ण की जा रही है. इसके लिए लिए 2030-31 तक की समय सीमा तय की गई है। 

    दिल्ली मुंबई रेलमार्ग फोरलेन बनने से रतलाम डिविजन को फायदा
    गौरतलब है कि, देश के दो सबसे बड़े रेल और सड़क प्रोजेक्ट रतलाम रेल मंडल से होकर गुजरते हैं. रतलाम रेल डिवीजन में दिल्ली मुंबई फोरलेन रेलमार्ग के साथ ही दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे भी बनकर तैयार हो चुका है. इस रेलमार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन बन जाने से रतलाम और आसपास के जिलों में औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स हब विकसित हो सकेगा. वहीं, इस रूट पर ट्रेनों की रफ्तार भी 160 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकेगी. दिल्ली और मुंबई के बीच सड़क मार्ग से और रेलमार्ग से भी दूरी घटेगा जो की मात्र 10 घंटे में पुरी की जा सकेगी। 

  • 28 करोड़ का ओवरब्रिज या हादसों का खतरा? सीहोर में घुमावदार डिजाइन पर उठे गंभीर सवाल

    28 करोड़ का ओवरब्रिज या हादसों का खतरा? सीहोर में घुमावदार डिजाइन पर उठे गंभीर सवाल

    सीहोर
     शहर के व्यस्ततम पुराने इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास रेलवे फाटक क्रमांक 104 पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज शुरू होने से पहले ही गंभीर विवादों और तकनीकी खामियों के घेरे में आ गया है। 28 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस ओवरब्रिज का अत्यधिक घुमावदार डिजाइन भविष्य में बड़े हादसों का सबब बन सकता है। हाल ही में राजगढ़ जिले के ब्यावरा बायपास पर बने एक घुमावदार ब्रिज पर हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

    वहां स्लीपर बस के तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर सेफ्टी वाल से घिसटने के कारण चार यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई और 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे के बाद अब सीहोर के निर्माणाधीन हाउसिंग बोर्ड ओवरब्रिज की सुरक्षा को लेकर भी शहरवासियों के बीच आक्रोश और भय व्याप्त हो गया है।

    इंजीनियरिंग की चूक या निजी जमीन बचाने की मजबूरी
    सीहोर का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 700 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है, जिसे 24 पिलरों पर खड़ा किया गया है। रेलवे ट्रैक से इसकी ऊंचाई करीब 7.30 मीटर रखी गई है। इस ब्रिज का मुख्य उद्देश्य हाउसिंग बोर्ड से चाणक्यपुरी को जोड़ना और भोपाल-इंदौर पुराने मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाना था। हैरानी की बात यह है कि ब्रिज की जो रूपरेखा धरातल पर उतारी गई है, उसमें अत्यधिक तीखा और असामान्य मोड़ दे दिया गया है। ड्रोन कैमरों से सामने आई तस्वीरों ने इस बड़ी लापरवाही की पोल खोल दी है।

    स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि ब्रिज की प्लानिंग के समय अधिकारियों ने जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज किया। जहां ब्रिज का ढलान नीचे उतरना था, वहां निजी जमीनों का पेंच फंस रहा था। निजी भूमि के अधिग्रहण से बचने या चहेतों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में ब्रिज के मूल अलाइनमेंट को बदलकर खतरनाक तरीके से घुमावदार बना दिया गया।

    ब्यावरा जैसी पुनरावृत्ति की आशंका
    स्थानीय नागरिकों और यातायात जानकारों का कहना है कि यह पुराना स्टेट हाईवे है, जहां दिन-रात भारी वाहनों, यात्री बसों और निजी गाड़ियों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में तेज गति से आने वाले वाहनों के लिए यह घुमावदार ब्रिज किसी ब्लैक स्पाट से कम साबित नहीं होगा। रात के समय या कोहरे के दिनों में तीखे मोड़ पर चालकों का संतुलन बिगड़ने का खतरा सबसे अधिक रहेगा।

    जिस तरह ब्यावरा में चालक घुमाव का सही अनुमान नहीं लगा सका और बस कंक्रीट बाउंड्री से टकरा गई, ठीक वैसा ही खतरा इस ब्रिज पर भी हर पल मंडराता रहेगा। ब्रिज कार्पोरेशन द्वारा हाल ही में इस पर लोड टेस्टिंग की औपचारिकता पूरी कर ली गई है, लेकिन धरातल पर सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी की जा रही है।