Category: मध्य प्रदेश

  • मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र में प्रधानमंत्री धरती आबा-जन जातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत अब तक 5 हजार से अधिक घर हुए रोशन

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र में प्रधानमंत्री धरती आबा-जन जातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत अब तक 5 हजार से अधिक घर हुए रोशन

    भोपाल

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा "प्रधानमंत्री धरती आबा-जन जातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत कंपनी कार्यक्षेत्र के 14 जिलों में अब तक 5050 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवारों के घरों एवं सार्वजनिक संस्थानों को रोशन किया है। इस योजना में आदिवासी बहुल गांवों के विभिन्न जनजाति के अविद्युतीकृत  घरों को ऊर्जीकृत किया जा रहा है जिसमें कंपनी के अंतर्गत अशोकनगर में 37, बैतूल में 642, गुना में 960, भोपाल में 119,  ग्वालियर में 10, हरदा में 528, मुरैना में 38, नर्मदापुरम में 332, रायसेन में 650, राजगढ़ में 156, सीहोर में 350, श्योपुर में 151, शिवपुरी में 94 एवं विदिशा में 983 घरों में बिजली पहुंचाई गई है।

    उल्लेखनीय है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा " प्रधानमंत्री धरती आबा-जन जातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत अब 519 पात्र हितग्राहियों के घरों को जल्दी ही विद्युतीकृत कर रोशन किया जाएगा। यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रमुख योजनाओं में शामिल है जिस पर तीव्र गति से काम किया जा रहा है।

    धरती आबा-जन जातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत कंपनी कार्यक्षेत्र के 14 आदिवासी बहुल जिलों के पात्र परिवारों के घर रोशन होने से एक ओर जहाँ आदिवासी परिवारों के बच्चों को पढ़ने-लिखने के साथ ही घरेलू कामकाज और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं वहीं दूसरी ओर पीने के पानी, सड़क बत्ती और मूलभूत सुविधाएं मिलने से उनके रहन-सहन के स्तर में सुधार दिखाई दे रहा है।

     

  • सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति  सप्रे की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक

    सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सप्रे की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक

    भोपाल 

    सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति  अभय मनोहर सप्रे ने सड़कों पर पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और मृत्यु को रोकने के लिए समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर समितियों का गठन कर उनसे मदद लेने और उन्हें प्रोत्साहन राशि भी प्रदाय करने की आवश्यकता बतायी है। उन्होंने पशुओं आदि के कारण होने वाली सड़क दुर्घटना को रोकने के लिये लघु और दीर्घ कालीन योजना बनाकर समय-सीमा मे क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है। बैठक में इंदौर भोपाल और उज्जैन में जीरो फेटिलिटी डिस्ट्रीक प्रोग्राम प्रारंभ करने पर सहमति बनी। वर्तमान में 6 जिलों धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर एवं खरगौन के साथ उज्जैन, भोपाल एवं इन्दौर जिलों में भी जीरो फेटलिटी डिस्ट्रिक प्रोग्राम का क्रियान्वयन  किया जा रहा है। मुख्य सचिव कार्यालय में सम्पन्न हुई बैठक में मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल और पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    बैठक मे यह भी तय किया गया है कि प्रदेश में होने वाली सड़क दुर्घंटनाओ का विश्लेषण कर भविष्य में उक्त स्थलों और कारणों से दुर्घटना नहीं हो, इसके संबंध में कार्य-योजना तैयार कर उसका समुचित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जायेगा।

    बैठक में अध्यक्ष  सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं और इससे होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाए जाने के लिए निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाये जाने के लिए 4 ई यानि इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर,इंफोर्समेंट और एजुकेशन  पर विशेष ध्यान दिए जाने पर जोर दिया। राज्य शासन कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए उक्त जिलों के लिये जरूरी वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित करे। क्रियान्वयन के लिए सी.एस.आर. और तकनीकी का भी सहारा लिया जाये।

    बैठक में बताया गया कि भारत सरकार के परिवहन और राजमार्ग के अधिकारियों और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ के साथ एक बैठक हुई है। इस बैठक में बीमा नहीं ईंधन नहीं के संबंध में चर्चा हुई। यह इसलिए आवश्यक है ताकि सड़कों पर चल रहे हजारों की संख्या में गैर-बीमित वाहनों का बीमा सुनिश्चित किया जा सकें। जो आमजन के सड़क सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति  सप्रे द्वारा राज्य शासन को यथाशीघ्र एक जिले में इस संबंध में पायलट परियोजना क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में विशेषकर पेट्रोल पम्प  पर  कैमरे लगाये जायें   जिन्हें वाहन पोर्टल से जोड़कर गैर-बीमित वाहनों को ईंधन प्रदाय नहीं किया जाएगा। प्रदेश में ऐसे जिले का चयन किया जायेगा जहाँ पर सर्वाधिक गैर-बीमित वाहन संचालित हैं, उस जिले में सर्वप्रथम पायलट परियोजना का क्रियान्वयन किया जाकर, उससे प्राप्त अनुभवों के आधार पर अन्य जिलों में भी क्रमशः परियोजना का विस्तार किया जायेगा।

    सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए जन-जागरूकता लायी जायेगी

    बैठक में निर्णय लिया गया कि सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए शिक्षा विभाग का सहयोग प्राप्त किया जाये तथा इस संबंध में विभिन्न शिक्षण संस्थानों तथा अन्य एजेंसियों द्वारा सड़क दुर्घटना के संबंध में जन-जागरूकता सुनिश्चित की जाये। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को अस्पताल पहुँचाने के लिए औसतन समय 16 मिनट लगता है। प्रयास किया जाए कि इस अंतराल को यथासंभव कम किया जाये। प्रदेश में औसतन प्रतिवर्ष 13 हजार मृत्यु सड़क दुर्घटना से होती है। राज्य शासन के विशेष प्रयासों से वर्ष 2026 की प्रथम 6 माह एवं वर्ष 2025 की प्रथम 06 माह की तुलना में सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु में लगभग 800 की कमी आयी है। राज्य शासन का यह प्रयास है  कि विगत वर्षों की तुलना में वर्ष 2026 में दुर्घटना में कमी आये।

    बैठक के प्रारंभ में मुख्य सचिव  बर्णवाल ने सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी द्वारा समय-समय पर प्रदाय निर्देशों, भारत सरकार की रोड सेफ्टी के संबंध में योजनाओं तथा प्रदेश सरकार द्वारा सड़क दुर्घटना को रोकने के संबंध में लिये गये दीर्घ और लघु कालीन निर्णयों एवं प्रस्तावित कार्य योजना के संबंध में जानकारी दी। बैठक में सचिव, परिवहन  मनीष सिंह ने प्रदेश में सड़क दुर्घटना के आँकड़ों और सड़क दुर्घटना को रोकने के लिये राज्य शासन द्वारा लिये गये सुरक्षा उपायों के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण में मुख्यतः सड़क दुर्घटना के संबंध में तुलनात्मक ऑंकडे, ब्लेक स्पॉट्स, हिट एण्ड रन, विभिन्न विभागों द्वारा सड़क सुरक्षा के संबंध में लिये गये उपायों, राहवीर योजना और पी.एम. राहत योजना उपायों को प्रदर्शित किया गया।

    बैठक में प्रमुख सचिव लोक निर्माण,लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सचिव-परिवहन, प्रबंधनिदेशक-एमपीआरडीसी, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास, आयुक्त-लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, एडीजी-पीटीआरआई, मिशन संचालक-एनएचएम, सीईओ-आयुष्मान, सीईओ-एमपीआरआरडीए, डीआइजी-पीटीआरआई, एनएचएआई, एमओआरटीएच एवं एनआईसी से संबंधित अधिकारी भी उपस्थित थे। 

  • अब हर घर रोशन, भोपाल के 5050 जनजातीय परिवारों को जल्द मिलेगी बिजली

    अब हर घर रोशन, भोपाल के 5050 जनजातीय परिवारों को जल्द मिलेगी बिजली

     भोपाल

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने प्रधानमंत्री धरती आबा-जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत अपने कार्यक्षेत्र के 14 जिलों में अब तक 5050 अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति परिवारों के घरों और सार्वजनिक संस्थानों को बिजली से रोशन किया है। योजना के तहत आदिवासी बहुल गांवों में अविद्युतीकृत पात्र घरों को ऊर्जीकृत किया जा रहा है।

    कंपनी के अनुसार अशोकनगर में 37, बैतूल में 642, गुना में 960, भोपाल में 119, ग्वालियर में 10, हरदा में 528, मुरैना में 38, नर्मदापुरम में 332, रायसेन में 650, राजगढ़ में 156, सीहोर में 350, श्योपुर में 151, शिवपुरी में 94 और विदिशा में 983 घरों तक बिजली पहुंचाई गई है।

  • उच्चदाब कनेक्शन बंद होने के बाद सुरक्षा निधि की वापसी अब ऑनलाइन उपभोक्ताओं को नहीं लगाना पड़ेगा कार्यालयों के

    उच्चदाब कनेक्शन बंद होने के बाद सुरक्षा निधि की वापसी अब ऑनलाइन उपभोक्ताओं को नहीं लगाना पड़ेगा कार्यालयों के

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने उच्चदाब विद्युत कनेक्शन के स्थायी विच्छेदन के बाद सुरक्षा निधि अथवा अस्थायी अग्रिम मद में बची राशि की वापसी की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। इससे पात्र उपभोक्ताओं को राशि वापसी के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।

    कंपनी द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार उपभोक्ता स्मार्ट बिजली पोर्टल अथवा कंपनी की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की पूरी प्रक्रिया OTP आधारित लॉगिन के माध्यम से होगी।

    ऐसे मिलेगी जमा राशि

    उपभोक्ता को ऑनलाइन आवेदन के दौरानअपने उपभोक्ता विवरण का सत्यापन करना होगा।लागू रिफंड श्रेणी का चयन कर बैंक खाते का विवरण दर्ज करना होगा।कैंसिल चेक, पहचान/पैन प्रमाण, हस्ताक्षरित आवेदन-पत्र एवं शपथ-पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बाद उपभोक्ता को Application ID एवं Acknowledgement प्राप्त होगा।संबंधित आवेदन अधीक्षण अभियंता कार्यालय को ऑनलाइन उपलब्ध होगा।

    अधिकतम 3 दिन में दस्तावेज की जांच

    कंपनी के निर्देश के अनुसार यदि उपभोक्ता द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेज अधूरे, कम या त्रुटिपूर्ण पाए जाते हैं, तो संबंधित अधीक्षण अभियंता कार्यालय द्वारा पोर्टल पर आवश्यक आपत्ति/उत्तर दर्ज किया जाएगा। दस्तावेज पूर्ण होने के बाद संबंधित कार्यालय द्वारा अधिकतम 3 दिवस के भीतर उपभोक्ता के विवरण एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के बाद आवश्यक टिप्पणियों सहित प्रकरण केंद्रीय बिलिंग प्रकोष्ठ (CBC Cell) को भेजा जाएगा।

    बैंक खाते का भी होगा सत्यापन

    केंद्रीय बिलिंग प्रकोष्ठ द्वारा उपभोक्ता के बैंक विवरण एवं संबंधित वित्तीय अभिलेखों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद ERP प्रणाली में सुरक्षा निधि/अस्थायी अग्रिम राशि की Invoice Preview Report तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इसके आधार पर मुख्य वित्तीय अधिकारी कार्यालय द्वारा बैंक खाते में राशि वापस करने की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा

    कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा निधि अथवा अस्थायी अग्रिम मद में शेष राशि की वापसी के लिए केवल ऑनलाइन माध्यम से आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन माध्यम से दिए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    कंपनी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ता द्वारा दस्तावेजों की पूर्ति अथवा संशोधन किए जाने के बाद प्रकरण पर अधिकतम तीन दिवस के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए, ताकि पात्र उपभोक्ताओं को उनकी जमा राशि जल्द वापस मिल सके।

    मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की इस व्यवस्था से विशेष रूप से उन उच्चदाब उपभोक्ताओं को सुविधा मिलेगी, जिनका विद्युत कनेक्शन स्थायी रूप से विच्छेदित हो चुका है और उनकी सुरक्षा निधि अथवा अस्थायी अग्रिम राशि में कोई शेष रकम जमा है।

     

  • जन्माष्टमी पर कृष्णमय होगा प्रदेश, 29 स्थलों पर मनाया जाएगा ‘कृष्ण पर्व’

    जन्माष्टमी पर कृष्णमय होगा प्रदेश, 29 स्थलों पर मनाया जाएगा ‘कृष्ण पर्व’

    भोपाल 

    कृष्‍ण पाथेय न्‍यास, मध्‍यप्रदेश शासन, संस्‍कृति विभाग द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशभर के 29 ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व के स्थलों पर ‘कृष्ण पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित आयोजन आस्था और कला का अद्भुत संगम बनेगा।  भगवान कृष्ण के जीवन -दर्शन, उन की लीलाओं, लोकमंगल की भावना  एवं भारतीय संस्कृति में  रचे-बसे उनके  विविध स्वरूपों को प्रदेश  एवं देश के ख्यातिलब्ध  कलाकारअपनी सशक्त और  मनोहारी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत  करेंगे।

    संगीत, नृत्य, नाट्य एवं अन्य पारंपरिक कला रूपों के माध्‍यम से इन स्थलों की ऐतिहासिकता, पौराणिकता और सांस्कृतिक विशिष्टता को रेखांकित किया जाएगा। यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि कृष्ण के जीवन-संदेश, सांस्कृतिक चेतना और भारत की समृद्ध कला परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का एक अभिनव प्रयास होगा, जिसमें हर स्थल अपनी विशिष्ट पहचान के साथ कृष्णमय वातावरण में रंगा नजर आएगा।

    संचालक, संस्कृति  एन.पी. नामदेव ने बताया कि कृष्ण पर्व के लिए चयनित 29 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएं सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान कृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम – उज्जैन, नारायणा धाम – उज्जैन, अमझेरा, जानापाव – महू एवं जामगढ़ – रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।

    उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान कृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान कृष्‍ण के जीवन के विभिन्‍न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्‍यापीकरण, सनातन संस्‍कृति के विस्‍तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्‍यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्‍यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप कृष्‍ण पर्व के माध्‍यम से सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।

    इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष कृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्‍थानीय गतिविधियों को विस्‍तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्‍व के स्थलों को चिन्हित कर वहां आयोजन किए जा रहे हैं।

    भगवान कृष्‍ण से जुड़े मध्‍यप्रदेश के स्‍थल

    सांदीपनि आश्रम, उज्‍जैन

    उज्‍जैन का नाम आते ही बाबा महाकाल का नाम ध्‍यान में आ जाता है, लेकिन यही वह भूमि भी है जहां भगवान कृष्‍ण ने अपने जीवन का सबसे महत्‍वपूर्ण अध्‍याय लिखा। मान्‍यता है कि भगवान कृष्‍ण सांदीपनि आश्रम में 64 दिवस तक रहे। इस अवधि में उन्‍होंने 64 विद्याओं और 16 कलाओं का ज्ञान प्राप्‍त किया। परंपराओं के अनुसार उन्‍होंने चार दिनों में चार वेद, 18 दिनों में 18 पुराण ओर छह दिनों में छह शास्‍त्रों का अध्‍ययन किया। मान्‍यता है कि इसी आश्रम में भगवान शिव और भगवान कृष्‍ण का दिव्‍य मिलन हुआ था। भारतीय संस्‍कृति में इसे हरि और हर के पावन मिलन के रूप में देखा जाता है। उज्‍जैन वह स्‍थान है, जहां ज्ञान ने व्‍यक्तित्‍व को आकार दिया, जहां गुरु ने शिष्‍य को दिशा दी, जहां मित्रता ने आदर्श स्‍थापित किया और जहां से योगेश्‍वर कृष्‍ण की यात्रा ने नई ऊंचाईयों की ओर कदम बढ़ाया। सांदीपनि आश्रम के आसपास ‘सांदीपनि लोक’ विकसित करने की योजना को भगवान कृष्ण से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देने वाली परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भगवान कृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा, लगभग 9 थीम आधारित जोन तथा आधुनिक डिजिटल/AR-VR अनुभव जैसी अवधारणाएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को केवल दर्शन तक सीमित न रखते हुए कृष्ण के जीवन, शिक्षा, गुरुकुल परंपरा और भारतीय ज्ञान-विरासत का अनुभवात्मक परिचय देना है। प्रदेश में भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों को एक व्यापक सांस्कृतिक-तीर्थ पर्यटन श्रृंखला से जोड़ने के लिए ‘कृष्ण पाथ’ विकसित किया जा रहा है। यह पहल मध्यप्रदेश की ‘विरासत से विकास’ की व्यापक सोच के अनुरूप है। सांदीपनि आश्रम पहले से ही उज्जैन के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।

     नारायणा धाम, उज्जैन

     नारायणा धाम मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के ग्राम नारायणा में स्थित भगवान कृष्ण और सुदामा की मैत्री से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह स्थल उज्जैन की उस व्यापक कृष्ण-परंपरा का हिस्सा है, जिसमें सांदीपनि आश्रम को कृष्ण की विद्यास्थली और नारायणा धाम को कृष्ण-सुदामा की मैत्री एवं प्रवास की स्मृति से जुड़े स्थल के रूप में देखा जाता है। नारायणा धाम से जुड़ी लोक-परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण और सुदामा ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करते समय यहां रात्रि विश्राम किया था। कथा के अनुसार, गुरु माता के निर्देश पर कृष्ण और सुदामा वन से लकड़ियां लेने गए थे। अचानक वर्षा होने के कारण वे वापस आश्रम नहीं लौट सके और एक वृक्ष के नीचे रात्रि बिताई। इसी प्रसंग को नारायणा धाम की धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है। स्थानीय परंपरा में यहां स्थित वृक्षों को भी इसी प्रसंग की स्मृति से जोड़ा जाता है। नारायणा धाम की विशिष्टता यह है कि यहां भगवान कृष्ण के साथ उनके बालसखा सुदामा की आराधना की जाती है। इस कारण यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में मित्रता, समानता, स्नेह और मानवीय संबंधों के आदर्श का प्रतीक भी बन गया है। वहां स्थित गोमती कुंड, अंकपात क्षेत्र और अन्य स्मृति-स्थल कृष्ण की शिक्षा-परंपरा से जुड़े हैं। नारायणा धाम के विकास को अब केवल स्थानीय मंदिर विकास तक सीमित न रखकर कृष्ण पाथेय की व्यापक अवधारणा से जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने भगवान कृष्ण से संबंधित स्थलों को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए “कृष्ण पाथेय न्यास” का गठन किया गया है। भगवान कृष्ण से संबंधित क्षेत्रों का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण-संवर्धन, मंदिरों एवं संरचनाओं का प्रबंधन, सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना के लिए परामर्श तथा कृष्ण पाथेय के स्थलों का सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जा रहा है।

    अमझेरा, धार

    मध्‍यप्रदेश के धार जिले में स्थित अमझेरा में इतिहास, आस्‍था और पौराणिक स्‍मृतियों की अनगिनत परतें समाई हुई हैं। लोक परंपराओं के अनुसार यही वह स्‍थान है, जहां भगवान कृष्‍ण और रुक्मिणी की दिव्‍य कथा का निर्णायक मोड़ आया था। अमझेरा का सबसे प्रमुख धार्मिक केंद्र मां अमका-झमका माता का प्राचीन मंदिर है। श्रद्धालुओं का विश्‍वास है कि यही वह स्‍थल है, जहां विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने अपने जीवन के सबसे महत्‍वपूर्ण क्षणों में प्रार्थना की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी अत्‍यंत गुणवान, धर्मपरायण और तेजस्विनी थीं। उन्‍होंने भगवान कृष्‍ण के गुण, पराक्रम और लोककल्‍याणकारी व्‍यक्तित्‍व के बारे में सुना था। उनके मन में कृष्‍ण के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का भाव उत्‍पन्‍न हो चुका था। वे उन्‍हें अपना पति मान चुकी थीं। किन्‍तु परिस्थितियां अनुकूल नहीं थी। रुक्मिणी के भाई रुक्‍मी ने उनका विवाह चेदि नरेश शिशुपाल के साथ निश्चित कर दिया था। यह निर्णय रुक्मिणी की इच्‍छा के विपरीत था। जब रुक्मिणी के भाई रुक्‍मी को इस घटना का समाचार मिला, तब वह क्रोधित हो उठा। उसने अपनी सेना के साथ कृष्‍ण का पीछा किया। अमझेरा से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित भोपावर क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच भीषण युद्ध हुआ। युद्ध में भगवान कृष्‍ण ने रुक्‍मी को पराजित कर दिया। मध्यप्रदेश सरकार ने अमझेरा को कृष्ण से जुड़े प्रमुख तीर्थ-स्थलों में शामिल करते हुए इसे विकसित करने की विशेष पहल की गई है। अमझेरा को तीर्थ नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह विकास व्यापक “कृष्ण पाथेय” की अवधारणा के अंतर्गत किया जा रहा है।

    जामगढ़ – रायसेन

    रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम जामगढ़ के निकट विंध्याचल क्षेत्र में स्थित जामवंत गुफा भगवान कृष्ण, जामवंत और स्यमंतक मणि से जुड़े पौराणिक प्रसंग के कारण विशेष महत्व रखती है। स्यमंतक मणि के प्रसंग में भगवान कृष्ण और जामवंत के बीच इसी गुफा में 27 दिनों तक युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान जामवंत को यह अनुभूति हुई कि कृष्ण ही उनके आराध्य भगवान राम हैं; इसके बाद उन्होंने स्यमंतक मणि कृष्ण को सौंपकर अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह उनसे किया। जामगढ़ क्षेत्र का महत्व केवल कृष्ण-परंपरा तक सीमित नहीं है। यहां प्राचीन शिव उपासना से जुड़े स्थल, गुफाएं तथा अन्य पुरातात्विक अवशेष भी पाए जाते हैं और हाल के क्षेत्रीय सर्वेक्षणों में जामगढ़ के जंगलों में लगभग 800 मीटर लंबी पत्थरों पर पदचिह्नों वाली एक प्राचीन पगडंडी तथा प्रारंभिक नागरी लिपि का शिलालेख मिलने की जानकारी मिली है। मध्यप्रदेश सरकार ने जामगढ़ को भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों की व्यापक विकास अवधारणा ‘कृष्ण पाथेय’ में शामिल करने की दिशा में पहल की है। जामगढ़ के संबंध में इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्थल का शोधपरक परीक्षण और दस्तावेजीकरण है।

    जुगल किशोर एवं  बलदेव जी मंदिर, पन्‍ना

    पन्ना को प्राचीन मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के कारण “मंदिरों की नगरी” के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित  जुगल किशोर जी मंदिर और  बलदेव जी मंदिर पन्ना की धार्मिक एवं स्थापत्य विरासत के दो प्रमुख केंद्र हैं।  जुगल किशोर जी मंदिर का निर्माण पन्ना के चौथे बुंदेला शासक राजा हिंदूपत सिंह ने अपने शासनकाल (1758–1778) में कराया था। मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित भगवान  जुगल किशोर जी की प्रतिमा के संबंध में स्थानीय परंपरा है कि इसे वृंदावन से ओरछा के मार्ग से पन्ना लाया गया था। मंदिर की स्थापत्य शैली में बुंदेला वास्तुकला की विशिष्ट विशेषताएं – नट मंडप, भोग मंडप और प्रदक्षिणा पथ – स्पष्ट दिखाई देती हैं तथा भगवान के आभूषण एवं वस्त्रों में बुंदेलखंडी परंपरा की झलक मिलती है।  बलदेव जी मंदिर पन्ना की धार्मिक विरासत के साथ-साथ अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर रोमन वास्तुकला से प्रेरित तथा गॉथिक प्रभाव वाला है। विशाल स्तंभों से युक्त इसका महा-मंडप ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है, जिससे मुख्य द्वार के बाहर से भी श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यहां भगवान बलदेव जी की आकर्षक प्रतिमा काले शालिग्रामी पत्थर से निर्मित है और यह मंदिर पन्ना की स्थापत्य कला की विशिष्ट उपलब्धियों में गिना जाता है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा पन्ना के इन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से महत्व दिया गया है।

    नारायणा धाम, उज्‍जैन में पांच दिवसीय आयोजन

    नारायणा धाम मंदिर प्रांगण, नारायणा (उज्जैन) में 02 से 06 सितम्बर तक पांच दिवसीय आयोजन होगा। यहां प्रथम दिवस गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े उस प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें भगवान कृष्ण और सुदामा जंगल में लकड़ियां चुनने गए थे एवं सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने की कथा को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर सु गौरी प्रिया, ग्वालियर द्वारा भरतनाट्यम एवं सु माधवी मधुकर झा, वृंदावन द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। द्वितीय दिवस सु प्रशस्ति मानेसर, मुंबई द्वारा कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका एवं  नितिन अग्रवाल, दमोह द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। तृतीय दिवस  रोजलिन सुंदराय, भुवनेश्वर द्वारा ओडिसी शैली में कृष्ण पर आधारित नृत्‍यनाटिका और सु वाणी राव, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। चतुर्थ दिवस  मुकेश दरबार, बुरहानपुर द्वारा कृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग एवं सु आस्था गोस्वामी, लखनऊ द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। पंचम दिवस सु अभिलाषा तिवारी, भोपाल द्वारा गीता उपदेश पर केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं  विवेक अग्रवाल, इंदौर द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। आयोजन के सभी पांचों दिवस गिरधर गोपाल शर्मा, वृंदावन द्वारा रासलीला का मंचन भी किया जाएगा।

    सांदीपनि आश्रम, उज्‍जैन में गुरु-शिष्य परंपरा पर केंद्रित प्रस्तुतियां

    सांदीपनि आश्रम, उज्जैन में 02 से 04 सितम्बर तक तीन दिवसीय आयोजन होगा। प्रथम दिवस डॉ. लता मुंशी, भोपाल द्वारा ‘कर्षति इति कृष्ण’ एवं  चरणजीत सिंह सौंधी, मुंबई द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। द्वितीय दिवस  अनुराग त्रिपाठी, भोपाल द्वारा बघेली लोकगायन एवं  अखिलेश तिवारी, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। तृतीय दिवस भगवान कृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने, 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका सु गीता पिल्लई, इंदौर द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही सु इशिता विश्वकर्मा, मुंबई द्वारा भजन गायन होगा।

    महिदपुर, उज्‍जैन में कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत की छटा

    रामलीला चौक, महिदपुर (उज्जैन) में 02 से 04 सितम्बर तक तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रथम दिवस सु कल्याणी-वैदेही फगरे द्वारा राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति तथा  ओमप्रकाश वास्तव, मुंबई द्वारा भजन गायन होगा। द्वितीय दिवस  गयाप्रसाद प्रजापति, रायसेन द्वारा बुंदेली गायन और  दविंदर सिंह ग्रोवर द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। तृतीय दिवस  बृजेन्द्र ब्रज, इंदौर द्वारा भजन गायन के साथ महिदपुर की कृष्ण पाथेय से जुड़ी परंपरा को केंद्र में रखकर सु नूपुर माहौर, भोपाल द्वारा कृष्ण जन्म पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।

    पन्ना और अमझेरा में कृष्ण के विविध प्रसंग होंगे साकार

     बलदेवजी मंदिर परिसर, पन्ना में 02 सितम्बर को सु मिली वर्मा, भोपाल द्वारा बलदेव-कृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका एवं  विकास सिरमोलिया, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। जुगल किशोर मंदिर प्रांगण, पन्ना में 03 एवं 04 सितम्बर को दो दिवसीय आयोजन में सु दामिनी पठारिया, नर्मदापुरम द्वारा भजन गायन एवं कृष्ण भक्ति की प्रणामी परंपरा पर केंद्रित नृत्य-नाटिका सु जान्हवी सिंह, रीवा द्वारा भरतनाट्यम शैली में प्रस्तुत की जाएगी। द्वितीय दिवस सु अंकिता कैलासिया, ग्वालियर द्वारा भक्ति गायन एवं रंग त्रिवेणी सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा कृष्ण नृत्य-नाटिका का मंचन होगा।

    अमझेरा में रुक्मिणी हरण पर नृत्‍य-नाटिका

    थाना परिसर के पीछे, अमझेरा (धार) में 03 एवं 04 सितम्बर को  हरीश शर्मा, भोपाल द्वारा कृष्ण लीला पर आधारित नृत्य-नाटिका एवं शर्मा बंधु, उज्जैन द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। द्वितीय दिवस सु आकृति सोनी, इंदौर द्वारा भजन गायन और अमझेरा से जुड़े रुक्मिणी हरण एवं विवाह प्रसंग पर सु दुर्गा मिश्रा, भोपाल द्वारा नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।

    एक दिवसीय आयोजनों में प्रदेशभर में गूंजेगी कृष्ण भक्ति

    माँ बिरासनी क्रिकेट स्टेडियम, पाली (उमरिया) में 04 सितम्बर को सु शर्मिष्ठा रानी पांडा, भुवनेश्वर द्वारा मथुरा प्रवेश प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति तथा  दीन भगत और अखिलेश राजा, जबलपुर द्वारा भजन गायन होगा। मानस भवन सभागार, शहडोल में सु मणिमाला सिंह – रीवा द्वारा बघेली गायन, सु शांभवी शुक्ला – सागर द्वारा कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर नृत्य-नाटिका एवं  प्रभंजय चतुर्वेदी, दुर्ग द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। महिष्मती घाट, मंडला में नेहा विश्वकर्मा, जबलपुर द्वारा गोवर्धन धारण तथा मोहिनी मोघे, जबलपुर द्वारा सुदामा मिलन प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी।  रूद्रकांत ठाकुर, सिवनी द्वारा भजन गायन होगा।

    जानापाव में परशुराम-कृष्ण प्रसंग और अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शनी

    परशुराम जन्मस्थली, जानापाव (महू) में भगवान परशुराम एवं भगवान कृष्ण के प्रसंग पर आधारित विशेष प्रस्तुति होगी। जानापाव की पावन भूमि पर भगवान कृष्ण में भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्‍त किया। इसी प्रसंग पर केंद्रित नृत्‍यनाटिका की प्रस्‍तुति यहां होगी, जिसे सु पूर्वी नगाइच, नर्मदापुरम द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।  अभिषेक गावड़े एवं समूह, इंदौर द्वारा भजन गायन एवं वीर भारत न्यास द्वारा अस्त्र-शस्त्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

    लोकगायन, भजन और नृत्य-नाटिकाओं का होगा अद्भुत संगम

    कृष्‍ण पर्व के अंतर्गत मानस भवन सभागार, दमोह में 04 सितम्‍बर को  पवन तिवारी – टीकमगढ़ द्वारा भजन गायन, सु अनामिका पांडेय – छतरपुर द्वारा बुंदेली गायन एवं सु बिथिका मिष्ठी, भोपाल द्वारा कालियानाग वध पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम, रीवा में सु कल्याणी मिश्रा द्वारा बघेली लोकगायन, सु वैशाली रायकवार, भोपाल द्वारा भजन गायन एवं सु आस्था सिजारिया, कटनी द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। राधा-कृष्ण मंदिर, खातेगांव (देवास) में सु मुस्कान चौरसिया, बालाघाट द्वारा भजन गायन एवं सु शालिनी खरे, जबलपुर द्वारा जामवंत एवं कृष्ण प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति दी जाएगी। गोपाल मंदिर, उज्जैन में द्वारकाधीश्वर स्वरूप में प्रतिष्ठित भगवान कृष्ण की लोकआस्था से जुड़े इस प्रमुख मंदिर में गीत गोविंद पर केंद्रित नृत्य-नाटिका तेजस फाउंडेशन, मुंबई द्वारा तथा सु आकृति मेहरा, भोपाल द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा।

    अन्य स्थलों पर भी सजेगा कृष्णमय सांस्कृतिक उत्सव

    कृष्‍ण पर्व के अंतर्गत 04 सितम्‍ब्‍र, 2026 को रणछोड़ मंदिर, आगर-मालवा में  सुंदरलाल मालवीय, उज्जैन द्वारा भक्ति गायन एवं सु कशिश सितलानी, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। जामगढ़, जिला रायसेन में  शिरीष राजपुरोहित, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित महानाट्य एवं  मोहित शेवानी एवं दल, भोपाल द्वारा स्टोरी टेलिंग ‘कृष्णायन’ की प्रस्‍तुति होगी। वहीं, राधेश्यामजी मंदिर, राघौगढ़, जिला गुना में सु हीना वासन एवं साथी, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं  नितिन अखंड, उज्जैन द्वारा भजन गायन होगा। कृष्ण मंदिर, तराना, उज्जैन में सु शीला त्रिपाठी द्वारा लोकगायन एवं  करण सिंह गुर्जर द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। राधाकृष्ण मंदिर, भितरवार, जिला ग्वालियर में  ईशान मिनोचा, जबलपुर द्वारा भजन गायन एवं सु दीपिका पुरोहित, भोपाल द्वारा गायन प्रस्तुत किया जाएगा। राधा-माधव मंदिर, बिजावर, जिला छतरपुर में  मनीष कुमार चौधरी, कटनी द्वारा भजन गायन एवं  अनुष्काम जोशी, देवास द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। राधा-कृष्ण मंदिर, बदरवास, जिला शिवपुरी में सु दीक्षा अस्थाना, भोपाल द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं  मनीष अग्रवाल, जबलपुर द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। नाथद्वारा जी मंदिर, झाबुआ में सु गीता शर्मा, इंदौर द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं सु संजो बघेल, जबलपुर द्वारा भजन गायन होगा। नाथद्वारजी मंदिर, जावद, जिला नीमच में सु पूर्णिमा चतुर्वेदी, भोपाल द्वारा लोकगायन तथा सु पल्लवी तिवारी, सिवनी द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। द्वारकाधीश मंदिर, मनासा, जिला नीमच में सु प्रतिमा गोस्वामी, भोपाल द्वारा भजन गायन एवं सु दीपिका सिंह, इंदौर द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। राधाकृष्ण मंदिर, मल्हारगढ़, जिला मंदसौर में सु सन्नाली शर्मा एवं समूह द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं  दीपक कुमार राव द्वारा भजन गायन होगा। चक्रधारी मंदिर, अम्बाह, जिला मुरैना में सु संघमित्रा तायवाड़े, भोपाल द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं सु साधना जेजुरीकर, उज्जैन द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा।  कल्याणरायजी की हवेली, खिलचीपुर, जिला राजगढ़ में सु अदिति तिवारी, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं  राहुल गंधर्व, उज्जैन द्वारा भजन गायन होगा। वहीं, गोपाल-कृष्ण जी मंदिर, देपालपुर, जिला इंदौर में  कपिल शर्मा एवं समूह, भोपाल द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं डॉ. वाणी साठे जोशी, उज्जैन द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी।

     

  • सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं

    सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं

    रायपुर

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

    मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

    सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।

    ‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है – ‘आपका अच्छा गांव’।

    उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।

    शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।

    युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।

    नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

    “किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”

    कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।

    उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।

    कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • BNYS में दाखिले को लेकर बड़ा फैसला, MP में अब NEET के बिना मिलेगा प्रवेश

    BNYS में दाखिले को लेकर बड़ा फैसला, MP में अब NEET के बिना मिलेगा प्रवेश

    भोपाल

    मध्यप्रदेश के निजी प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान महाविद्यालयों में बैचलर ऑफ नैचुरोपैथी एंड यौगिक साइंस (बीएनवायएस) में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए सरकार ने नए नियम जारी किए हैं। अब इस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए नीट अनिवार्य नहीं होगा।

    विद्यार्थियों का चयन 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (पीसीबी) में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार मेरिट सूची से किया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन के आयुष पोर्टल के माध्यम से केंद्रीकृत ऑनलाइन काउंसिलिंग से पूरी होगी।
    अंकों के आधार पर होगा चयन

    नए नियमों के अनुसार अभ्यर्थी का 10 प्लस 2 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों से अलग-अलग पास होना जरूरी है। अनारक्षित और ईडब्ल्यूएस वर्ग के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे।

    प्रवेश वर्ष की 31 दिसंबर तक अभ्यर्थी की उम्र कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए। मेरिट सूची 12वीं के फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी। यानी प्रवेश में नीट स्कोर के बजाय 12वीं की मार्कशीट महत्वपूर्ण होगी।
    काउंसलिंग चार चरणों में

    प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। इसके लिए 600 रुपये शुल्क निर्धारित है। पंजीयन के बाद कॉलेज की पसंद भरने के लिए 50 रुपये शुल्क देना होगा।

    ऑनलाइन आवेदन के बाद मूल दस्तावेजों का सत्यापन प्रदेश के किसी भी सरकारी आयुर्वेद, होम्योपैथी या यूनानी कॉलेज में उपस्थित होकर कराना होगा। काउंसलिंग प्रक्रिया चार चरणों में होगी।

    इसमें प्रथम चरण, द्वितीय चरण, तृतीय चरण और अंत में स्ट्रे वैकेंसी राउंड शामिल है।

    आरक्षण में महिलाओं को 33 प्रतिशत

    प्रवेश में राज्य शासन के प्रचलित आरक्षण नियम लागू होंगे। एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को निर्धारित आरक्षण मिलेगा।

    इसके अलावा क्षैतिज आरक्षण के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 6 प्रतिशत, सैनिक संवर्ग के बच्चों के लिए तीन प्रतिशत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों के लिए तीन प्रतिशत और महिला अभ्यर्थियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

    कॉलेज सीधे प्रवेश नहीं दे सकेंगे

    नियमों में कालेजों को सीधे प्रवेश देने से भी रोक दिया गया है। किसी कॉलेज ने काउंसिलिंग प्रक्रिया से बाहर जाकर सीधे प्रवेश दिया तो उसकी एनओसी रद की जा सकती है और प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

    वहीं अभ्यर्थी द्वारा आवेदन में गलत जानकारी देने या आपराधिक मामला सामने आने पर प्रवेश निरस्त करने के साथ एफआईआर की कार्रवाई भी की जा सकती है।

     

  • जल संसाधन मंत्री ने पुनर्वास स्थल करौंदिया पहुंचकर हितग्राहियों से किया संवाद, निर्माणाधीन मकानों का किया निरीक्षण ग्रामीणों के बीच बैठकर मंत्री ने सुनी समस्याएं

    जल संसाधन मंत्री ने पुनर्वास स्थल करौंदिया पहुंचकर हितग्राहियों से किया संवाद, निर्माणाधीन मकानों का किया निरीक्षण ग्रामीणों के बीच बैठकर मंत्री ने सुनी समस्याएं

    भोपाल

    जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत पुनर्वास स्थल करौंदिया का भ्रमण कर पुनर्वासित परिवारों से संवाद किया। उन्होंने निर्माणाधीन मकानों का निरीक्षण किया तथा ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं, प्राप्त मुआवजा एवं पुनर्वास राशि की जानकारी ली।

    मंत्री  सिलावट ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का स्वप्न, प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अथक प्रयास इस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें ग्रामीणों की समस्याओं से रूबरू होने तथा पुनर्वास कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए भेजा है, ताकि पुनर्वास का कार्य जन अपेक्षाओं के अनुरूप हो और परियोजना का निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय में पूरा किया जा सके।

    अनुसूचित जनजातीय परिवार के घर पहुंचकर मंत्री ने किया भोजन

    मंत्री  सिलावट ने अनुसूचित जनजाति के एक परिवार के घर पहुंचकर महिला मती उमा आदिवासी से आत्मीयता से पूछा कि भोजन में क्या बनाया है। महिला ने रोटी बनाए जाने की बात बताई। इस पर मंत्री ने परिवार के साथ बैठकर आम के अचार के साथ रोटी खाई। उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठकर प्राप्त मुआवजा एवं पुनर्वास राशि के संबंध में चर्चा की और उनकी समस्याएं सुनीं।

    पात्र हितग्राहियों को पुनर्वास पैकेज से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा

    मंत्री  सिंह ने कहा कि जो भी व्यक्ति पात्र है, वो पुनर्वास पैकेज की राशि से वंचित नहीं रहेगा। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र व्यक्ति छूटना नहीं चाहिए तथा करौंदिया में पुनर्वासित परिवारों को सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं।

    पुनर्वास स्थल पर बिजली, पेयजल और सड़क सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    मंत्री  सिलावट ने बताया कि पुनर्वास स्थल पर बिजली के खंभे लगाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। पेयजल व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए एक अतिरिक्त नलकूप कराया जाएगा। पुनर्वास स्थल पर बिजली, पेयजल, सड़क सहित सभी स्थायी मूलभूत सुविधाओं का विकास शीघ्र पूरा किया जाएगा।

    महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों से किया संवाद

    मंत्री  सिलावट ने महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों से भी बातचीत की तथा उनके स्वास्थ्य और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव और पूरी सरकार पुनर्वासित परिवारों के साथ है। शासन-प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि विस्थापित परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी नही हो।

    दस जिलों को मिलेगा परियोजना का लाभ, शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील

    मंत्री ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रदेश के 10 जिले लाभान्वित होंगे और बुंदेलखंड के विकास को नई गति मिलेगी। परियोजना अंतर्गत मध्यप्रदेश के कुल 10 एवं उत्तर प्रदेश के कुल 4 जिले लाभान्वित होंगे, जिसमें 10.62 लाख हेक्टेयर प्रति वर्ष सिंचाई की सुविधा किसानों को मिलेगी। इससे 62 लाख लोगों के लिए पेयजल की सुविधा मिलेगी। साथ ही 103 मेगावॉट जल विद्युत एवं 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।

    क्षेत्रीय विधायक  राजेश शुक्ला, कलेक्टर  मृणाल मीना, एसपी  रजत सकलेचा, जिला पंचायत सीईओ  नमः शिवाय अरजरिया सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

     

  • अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, अगस्त में जब्त हुई 1.10 करोड़ की संपत्ति

    अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, अगस्त में जब्त हुई 1.10 करोड़ की संपत्ति

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जुआ एवं सट्टा जैसी अवैध गतिविधियों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस द्वारा सूचना तंत्र, सतर्कता एवं मैदानी कार्रवाई के माध्यम से जुआ फड़ों तथा सट्टा गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। अगस्त माह में विभिन्न जिलों में कार्रवाई कर 1 करोड़ 10 लाख रूपए से अधिक मूल्य की नगदी एवं अन्य संपत्ति जब्त की गई है। इनमें नगदी के साथ मोबाइल फोन, वाहन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, वाई-फाई मॉडेम एवं अन्य उपकरण शामिल हैं।

    प्रमुख कार्यवाहियां

    छिंदवाड़ा : अमरवाड़ा पुलिस ने ग्राम बिछुआ के जंगल में जुआ खेलते हुए 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर 1 लाख 53 हजार रूपए नगद, 13 मोबाइल एवं 05 वाहन सहित लगभग 60 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    बालाघाट : थाना नवेगांव पुलिस ने अंतर्राज्यीय जुआरियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए मौके से 1 लाख 50 हजार रूपए  नगद, 14 एंड्रॉयड मोबाइल एवं 03 चारपहिया वाहन सहित लगभग 38 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    नर्मदापुरम : थाना कोतवाली पुलिस ने कालिका नगर में अवैध जुआ फड़ पर कार्रवाई करते हुए 09 आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया। कार्रवाई में लगभग 2 लाख 40 हजार रूपए की संपत्ति जब्त की।

    विदिशा : गंजबासौदा देहात पुलिस ने सट्टे के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 07 आरोपियों को गिरफ्तार कर 21 हजार रूपए की नगद, 01 मोटरसाइकिल, 06 एंड्रॉयड मोबाइल, सट्टा पर्ची एवं लीड पेन सहित लगभग 2 लाख 11 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    उमरिया : पुलिस ने ग्राम निमहा में संचालित जुआ फड़ पर छापा मारकर 07 आरोपियों को गिरफ्तार कर 5 हजार 330 रूपए नगद, 07 मोबाइल फोन एवं 02 दोपहिया वाहन सहित लगभग 1 लाख 62 हजार रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।

    दतिया : थाना भाण्डेर पुलिस ने चिरगांव-भाण्डेर रोड स्थित बिछौदना में जुआ फड़ पर दबिश देकर 07 जुआरियों को गिरफ्तार किया। मौके से 40 हजार 100 रूपए  नगद जब्त किए हैं। वहीं थाना इंदरगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा खिलाते हुए 04 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 01 लैपटॉप , 06 मोबाइल एवं 01 रजिस्टर जब्त किए गए।

    थाना उनाव पुलिस ने खाती बाबा मंदिर के पास जुआ फड़ पर दबिश देकर 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 3 हजार 900 रूपए नगद सहित लगभग 93 हजार 900 रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    इस प्रकार पुलिस ने 1 लाख 34 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    छतरपुर : थाना कोतवाली पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान बड़ी कुंजरहटी मोहल्ला में संचालित जुआ फड़ पर दबिश देकर 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर 1 लाख 27 हजार रूपए नगद जब्‍त किए।

    झाबुआ : चौकी पिटोल पुलिस ने होटल में जुआ खेलते होटल संचालक सहित 06 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मौके से पुलिस ने 26 हजार 700 रूपए नगद, 05 मोबाइल एवं ताश की गड्डी सहित लगभग 81 हजार 700 रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    एक अन्‍य कार्रवाई में पुलिस ने 06 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्‍जे से 10 हजार 700 रूपए नगद, 03 मोबाइल फोन एवं ताश के पत्ते जब्त किए। इस प्रकार झाबुआ पुलिस ने 92 हजार 400 रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    खंडवा : मान्धाता पुलिस ने जुआ खेलते हुए 09 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 68 हजार रूपए नगद जब्त किए। वहीं शिवाजी नगर, खंडवा में भी जुआ खेलते 09 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 हजार 120 रूपए नगद जब्त किए। दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 78 हजार 120 रूपए से अधिक की नगद राशि जब्‍त की है।

    खरगोन की बड़वाह पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर 54 हजार 150 रूपए नगद, इंदौर पुलिस ने 40 हजार 350 रूपए नगद, ग्वालियर की थाना मुरार पुलिस ने 11 जुआरियों को गिरफ्तार कर 52 हजार 700 रूपए, गुना की थाना कोतवाली पुलिस ने 10 जुआरियों को गिरफ्तार कर 19 हजार 600 रूपए , अशोकनगर पुलिस ने 15 जुआरियों को गिरफ्तार कर 37 हजार 800 रूपए, उज्जैन के थाना बिरलाग्राम पुलिस ने 12 जुआरियों को गिरफ्तार कर 21 हजार 300 रूपए, बैतूल की सारनी पुलिस ने 05 जुआरियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 10 हजार 610 रूपए, शिवपुरी की कोतवाली पुलिस ने 3 हजार 500 रूपए तथा सिंगरौली जिले की थाना बैढ़न पुलिस ने 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 6 हजार 800 रूपए नगद जब्‍त किए।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जुआ एवं सट्टा जैसी अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई निरंतर जारी है। पुलिस का उद्देश्य ऐसे अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाते हुए इनके माध्यम से होने वाली आर्थिक एवं सामाजिक क्षति को रोकना है। 

  • नई पीढ़ी आधुनिक सोच के साथ सनातन परंपरा का कर रहीं निर्वहन : मंत्री  सारंग

    नई पीढ़ी आधुनिक सोच के साथ सनातन परंपरा का कर रहीं निर्वहन : मंत्री सारंग

    भोपाल 

    सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को विश्व के सबसे बड़े नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का वार्ड क्रमांक 44 सुभाष नगर, खेल मैदान से शुभारंभ किया। पहले दिन वार्ड क्रमांक 44, 78 एवं 69 में आयोजित रक्षाबंधन महोत्सव में 22 हज़ार 432 बहनों ने अपने भैया विश्वास की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर आशीर्वाद दिया। वहीं वार्ड क्रमांक 44 में आयोजित कार्यक्रम में हज़ारों जेन ज़ी यानी युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाली बहनों ने भी मंत्री  विश्वास सारंग को राखी बांधी। मंत्री  सारंग द्वारा कार्यक्रम में बहनों के लिए सावन के गीतों का आयोजन, मेंहदी लगाने की व्यवस्था, भोजन, उपहार सहित अन्य व्यवस्था की गई। मंत्री  सारंग ने बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं कि हर वर्ष मुझे लाखों की संख्या में बहनें रक्षासूत्र बांधती है। उन्होंने कहा कि बहनों का यह अपार स्नेह और आशीर्वाद मेरे जीवन की अमूल्य निधि है। मंत्री  सारंग ने कहा कि युवा बहनों द्वारा भारतीय संस्कृति और परंपराओं का निर्वहन करना इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी आधुनिक सोच के साथ सनातन परंपरा का भी निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की युवा पीढ़ी नई उमंग और ऊर्जा के साथ राष्ट्र के नवनिर्माण में जुटी है।

    बड़ी संख्या में GenZ बहनों ने बांधी राखी

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के पहले दिन वार्ड क्रमांक 44 में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जेन ज़ी यानी युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाली बहनों ने मंत्री  विश्वास सारंग को राखी बांधी। इस दौरान मंत्री सारंग ने कहा कि देश का युवा सकारात्मक सोच और नई ऊर्जा के साथ राष्ट्र के नवनिर्माण में अपनी भूमिका निभा रहा है।

    नरेला विधानसभा नहीं यह मेरा नरेला परिवार

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव में बहनों को संबोधित करते हुए मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला क्षेत्र को उन्होंने कभी भी राजनैतिक नजरिए से नहीं देखा बल्कि हमेशा अपना परिवार माना है। नरेला विधानसभा में हर त्यौहार बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव नरेला परिवार का सबसे भव्य महोत्सव है। इस महोत्सव में प्रतिवर्ष लाखों बहनें मुझे रक्षासूत्र बांधकर अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

    मंत्री  सारंग ने सभी बहनों से बंधवाई राखी

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के पहले दिन नरेला विधानसभा के वार्ड क्रमांक 44, 78 एवं 69 में हज़ारों की संख्या में बहनें राखी बांधने पहुंची। समारोह में स्वयं कतारबद्ध होकर बहनों ने अपनी बारी का इंतजार किया और अपने भैया विश्वास सारंग को राखी बांधकर आशीर्वाद प्रदान किया। तो वहीं बुजुर्ग बहनों ने भी रक्षासूत्र बांधकर मंत्री  सारंग के सिर पर हाथ रखकर आशीष प्रदान किया।

    इस वर्ष भी टूटेगा पिछले वर्ष का रिकॉर्ड

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव विगत 18 वर्षों से हर रक्षाबंधन के अवसर पर नरेला विधानसभा में आयोजित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने मंत्री  सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। वहीं इस बार भी पिछले वर्ष का रिकॉर्ड टूटने की संभावना जताई जा रही है।

    शुभारंभ से पूर्व  खेड़ापति हनुमान मंदिर में किए दर्शन

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव-2026 के शुभारंभ से पूर्व मंत्री  विश्वास सारंग ने छोला स्थित प्राचीन  खेड़ापति हनुमान मन्दिर में पहुंचकर दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया एवं सफल आयोजन की कामना की। यहां भी बहनों ने मंत्री  सारंग को रक्षासूत्र बांधे।

    रहवासियों ने किया भव्य स्वागत

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव स्थल पहुँचने पर क्षेत्रवासियों ने मंत्री  सारंग का भव्य स्वागत किया। यहां मंत्री  सारंग को बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक डीजे और ढोल-ताशो के साथ मंच तक ले जाया गया। इस अवसर पर जमकर आतिशबाजी भी की गई। मुख्य कार्यक्रम स्थल आगमन पर बहनों ने मंत्री  सारंग पर पुष्पवर्षा कर उनका स्नेहिल स्वागत किया।

    1 सितंबर को वार्ड 39-40 और 75 में होगा रक्षाबंधन महोत्सव

    दिनांक 1 सितंबर 2026 को वार्ड क्रमांक 39 व 40 (दोप 02:00 बजे) एवं वार्ड क्रमांक 75 (शाम 04:00 बजे) में कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यहां भी हजारों की संख्या में बहनें मंत्री  विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधकर आशीर्वाद प्रदान करेंगी।