Category: मध्य प्रदेश

  • नशे के खिलाफ मजबूत हुआ जनसंकल्प, पुनर्वास और सामूहिक प्रयासों से नशामुक्त मध्यप्रदेश की ओर कदम

    नशे के खिलाफ मजबूत हुआ जनसंकल्प, पुनर्वास और सामूहिक प्रयासों से नशामुक्त मध्यप्रदेश की ओर कदम

    भोपाल

    भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और प्रतिभा को सही दिशा देना राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ी एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में नशामुक्त भारत अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति के माध्यम से नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास उपलब्ध कराकर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना भी है।

    मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नशामुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक सहभागिता, जनजागरूकता, उपचार, पुनर्वास और संस्थागत समन्वय को अभियान का आधार बनाया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा नशे के विरुद्ध व्यापक स्तर पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

    नशे के खिलाफ जनजागरण से जनआंदोलन तक

    नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ ही उसके परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। युवा पीढ़ी को नशे से बचाना और नशे की चपेट में आ चुके लोगों को सम्मानपूर्वक नया जीवन देना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

    राज्य सरकार ने इस चुनौती को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं देखा है। अभियान में शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। यही सामूहिकता नशामुक्ति अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।

    राज्य में नशामुक्ति के संबंध में व्यापक जनजागरूकता के लिए 213 पंजीकृत संस्थाएं कार्यरत हैं। इन संस्थाओं की भूमिका नशे के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों तक सहायता पहुंचाने की भी है।

    मध्यप्रदेश के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

    नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा किए गए प्रभावी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। वर्ष 2023-24 के लिए संस्थागत पुरस्कार श्रेणी में शहीद भगत सेवा समिति, रीवा तथा व्यक्तिगत श्रेणी में  राजीव तिवारी, मुक्ति नशामुक्ति केंद्र, भोपाल को सम्मानित किया गया।

    13 अगस्त 2025 को भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय नशामुक्ति शपथ ग्रहण समारोह में इन प्रयासों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों की उपलब्धि है, बल्कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश की सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।

    पुनर्वास और उपचार की सुदृढ़ व्यवस्था

    नशामुक्ति अभियान का एक महत्वपूर्ण पक्ष उन लोगों को नई जिंदगी देना है, जो नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को केवल नशे से दूर करना नहीं, बल्कि उपचार, परामर्श और पुनर्वास के माध्यम से उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ना भी है।

    प्रदेश में 13 नशामुक्ति सह पुनर्वास केंद्र (IRCA) संचालित हैं। इसके साथ ही 7 आउटरीच एंड ड्रॉप इन सेंटर (ODIC) तथा 3 कम्युनिटी बेस्ड पीयर-लेड इंटरवेंशन सेंटर (CPLI) संचालित किए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से नशे से प्रभावित व्यक्तियों तक पहुंचकर उन्हें उपचार और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की स्थापना और संचालन के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के 11 केंद्रीय जिलों—भोपाल, सागर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, नरसिंहपुर, सतना, बड़वानी, नरसिंहपुर और उज्जैन में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। साथ ही नशामुक्ति से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।

    12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स बने बदलाव के सहभागी

    नशे के विरुद्ध लड़ाई को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश में 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। ये स्वयंसेवक प्रदेशभर में नशे के दुष्परिणामों के प्रति आमजन को जागरूक कर रहे हैं तथा नशामुक्त भारत अभियान से जुड़ी गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं।

    स्वयंसेवकों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नशे की समस्या का समाधान केवल कानून और प्रशासन के माध्यम से संभव नहीं है। परिवार, समाज और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। मास्टर वॉलंटियर्स स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, युवाओं से संवाद स्थापित करने और नशामुक्ति गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    युवाओं और विद्यार्थियों पर विशेष फोकस

    मध्यप्रदेश में अभियान के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों को विशेष रूप से जागरूक करने पर जोर दिया गया है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर नशामुक्ति से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए। 18 नवंबर 2025 को नशामुक्त भारत अभियान की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं और विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ा गया।

    डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए QR Code के माध्यम से लगभग 2.46 लाख ऑनलाइन ई-प्लेज भी कराए गए। यह अभियान में आधुनिक तकनीक के उपयोग और युवाओं की व्यापक भागीदारी का उदाहरण है।

    राज्य में 31 मई 2025 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस, 2 से 8 अक्टूबर तक मद्य निषेध सप्ताह तथा 30 जनवरी 2026 को मद्य निषेध संकल्प दिवस के अवसर पर विशेष जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक किया गया।

    “नशे से दूरी है बहुत जरूरी” : पुलिस की प्रभावी भागीदारी

    नशामुक्त समाज के निर्माण में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा “नशे से दूरी है बहुत जरूरी” जैसे विशेष अभियान संचालित कर नशे के खिलाफ जनजागरूकता का व्यापक संदेश दिया गया। पुलिस की सहभागिता से अभियान को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने में मदद मिली।

    इस तरह विभिन्न विभागों, पुलिस, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थाओं और नागरिक समाज के बीच समन्वय स्थापित कर नशे के विरुद्ध व्यापक वातावरण तैयार किया जा रहा है। नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण और समाज में नशे के प्रति जागरूकता—दोनों स्तरों पर प्रयास किए जाने से अभियान अधिक प्रभावी बनता है।

     नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में सामाजिक भागीदारी को बल

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में नशामुक्त भारत अभियान को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका मानना है कि नशे के विरुद्ध संघर्ष में समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे आवश्यक है। केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हो सकते; जब परिवार, शिक्षक, युवा, सामाजिक संस्थाएं और जनप्रतिनिधि एक साथ खड़े होते हैं, तभी स्थायी सामाजिक परिवर्तन संभव होता है।

    विभागीय प्रयासों के माध्यम से नशामुक्ति के क्षेत्र में जागरूकता के साथ-साथ उपचार एवं पुनर्वास की व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य नशे की चपेट में आए व्यक्ति को अपराधी या उपेक्षित व्यक्ति के रूप में देखने के बजाय उसे उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में सहयोग देना है।

    नशामुक्त मध्यप्रदेश : सामूहिक संकल्प की दिशा

    नशामुक्त समाज का निर्माण के लिए प्रत्येक परिवार और नागरिक को जिम्मेदारी निभानी होगी। युवाओं को नशे से दूर रखने, नशे की चपेट में आए लोगों को सहयोग देने और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

    मध्यप्रदेश का संदेश स्पष्ट है नशे से दूरी, स्वस्थ जीवन की मजबूरी। जनभागीदारी, जागरूकता और पुनर्वास के समन्वित प्रयासों से ही नशामुक्त, स्वस्थ और सशक्त मध्यप्रदेश का निर्माण संभव होगा।

  • MP हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, कॉलेज कर्मचारियों के स्थायीकरण का आदेश निरस्त

    MP हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, कॉलेज कर्मचारियों के स्थायीकरण का आदेश निरस्त

    जबलपुर.

    केवल लंबे समय तक काम करने से किसी कर्मचारी को स्थाई कर्मी बनने का अधिकार नहीं मिल जाता। जनभागीदारी समिति द्वारा नियुक्त व्यक्ति भी केवल नियुक्ति के आधार पर राज्य सरकार का नियमित कर्मचारी नहीं बन सकता।

    हाई कोर्ट की युगलपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सीधी के संजय गांधी स्मृति शासकीय महाविद्यालय के 11 कर्मचारियों को स्थाई कर्मी का दर्जा देने संबंधी एकलपीठ का आदेश निरस्त कर दिया।

    दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक
    प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने राज्य शासन की रिट अपील स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित कर्मचारियों को सरकारी नीति का लाभ लेने के लिए निर्धारित कट-आफ तिथि से निरंतर सेवा का विश्वसनीय दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक था।

    15 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत होने का दावा
    कर्मचारियों ने दावा किया था कि वे 15 वर्ष से अधिक समय से महाविद्यालय में कार्यरत हैं और सामान्य प्रशासन विभाग की सात अक्टूबर, 2016 की नीति के तहत स्थाई कर्मचारी का दर्जा पाने के हकदार हैं। सिंगल बेंच ने उनके पक्ष में आदेश दिया था, जिसे उच्च शिक्षा विभाग ने चुनौती दी। युगलपीठ ने पाया कि कर्मचारी 16 मई, 2007 से निरंतर सेवा का ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। रिकार्ड में केवल अक्टूबर 2010 के बाद के लेबर चार्ज बिल उपलब्ध थे।

    जनभागीदारी समिति को अधिकार नहीं
    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनभागीदारी समिति को राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नियमित पद सृजित करने अथवा सरकारी नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। समिति द्वारा किसी व्यक्ति की सेवाएं लेने मात्र से उसे नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल जाता।

  • कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

    कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

    भोपाल 

    कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों का आधुनिक तकनीक से जुड़ने का सपना जल्द ही पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि का अंतरण करेंगे। विद्यार्थियों को यह राशि 1 सितंबर को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में आयोजित लैपटॉप क्रय के लिये राशि वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रदान की जाएगी।

    प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत कक्षा 12वीं की परीक्षा में पहले ही प्रयास में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

    प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का संबल

    प्रदेश सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में 25 हजार रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इस प्रकार विद्यार्थियों को कुल 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि का अंतरण किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की यह पहल प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लैपटॉप के माध्यम से विद्यार्थी ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लर्निंग और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अपनी शिक्षा को और बेहतर बना सकेंगे।

  • अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति का महा-वृक्षारोपण अभियान: मध्य प्रदेश में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे रोपे गए

    अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति का महा-वृक्षारोपण अभियान: मध्य प्रदेश में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे रोपे गए

    भोपाल
    पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकार को सर्वोपरि रखते हुए 'अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति' ने एक ऐतिहासिक पहल की है। समिति द्वारा चलाए गए वृहद वृक्षारोपण अभियान के तहत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे लगाकर हरियाली और जीवन संरक्षण का एक नया संदेश दिया गया है।
    इस पुनीत महा-अभियान का सफल नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री डी. कुमार सोनी, मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रीतम बर्मन, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष श्री द्रोणाचार्य दुबे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष श्री कैलाश वास्तुकार सहित समिति के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया।

    संकल्प से सिद्धि तक का सफर
    इस अभियान की शुरुआत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने कम से कम एक वृक्ष लगाने का दृढ़ संकल्प लिया था। सभी ने अपने सामाजिक दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते हुए, पहले से सुनिश्चित किए गए स्थानों पर पौधे रोपे। समिति की एकजुटता और सुनियोजित कार्ययोजना का ही परिणाम रहा कि मध्य प्रदेश में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताया आभार, कहा- "यह प्रयास अत्यंत सराहनीय
    इस महा-अभियान की शानदार सफलता पर अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री डी. कुमार सोनी ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्षों, प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्षों, प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, संभाग के संभागीय अध्यक्षों, सभी जिलों के जिलाध्यक्षों, जिला कार्यवाहक अध्यक्षों और समिति के एक-एक सदस्य का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन किया।
    श्री सोनी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा, "आप सभी ने इस पर्यावरण संरक्षण अभियान का हिस्सा बनकर जिस जिम्मेदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया है, वह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। पत्रकारों की कलम के साथ-साथ प्रकृति के प्रति उनका यह योगदान समाज में *एक नई चेतना लेकर आएगा*"
    समिति के इस कदम की हर तरफ जमकर प्रशंसा हो रही है और इसे पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

  • फरीदाबाद स्टेशन पर निर्माण कार्य, मालवा एक्सप्रेस समेत अमृतसर-इंदौर ट्रेन प्रभावित

    फरीदाबाद स्टेशन पर निर्माण कार्य, मालवा एक्सप्रेस समेत अमृतसर-इंदौर ट्रेन प्रभावित

    इंदौर.

    उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के हजरत निजामुद्दीन-पलवल रेल खंड पर फरीदाबाद स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक दो और तीन पर निर्माण कार्य के लिए ब्लाक प्रस्तावित है। इस कारण पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के विभिन्न स्टेशनों से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा।

    पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार कुछ ट्रेनों का ठहराव अस्थायी रूप से निरस्त किया गया है। 31 अगस्त से 14 अक्टूबर तक डॉ. अंबेडकर नगर से चलने वाली डॉ. अंबेडकर नगर-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा मालवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, 31 अगस्त से 14 अक्टूबर तक लक्ष्मीबाई नगर से चलने वाली लक्ष्मीबाई नगर-योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस प्रभावित रहेगी।

    यह ट्रेनें भी रहेंगी प्रभावित
    एक सितंबर से 15 अक्टूबर तक अमृतसर से चलने वाली अमृतसर-इंदौर एक्सप्रेस, एक सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 तक श्री माता वैष्णोदेवी कटड़ा से चलने वाली श्री माता वैष्णोदेवी कटड़ा-डॉ. अंबेडकर नगर मालवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और एक सितंबर से 15 अक्टूबर तक ऊना हिमाचल से चलने वाली ऊना हिमाचल-इंदौर एक्सप्रेस प्रभावित रहेगी। रेलवे के अनुसार इंदौर से चलने वाली उक्त ट्रेनों के यात्रियों को असुविधा न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। यात्रियों से अनुरोध है कि यात्रा से पहले ट्रेनों की स्थिति की जानकारी ले लें। इसके अलावा अतिरिक्त कोई बदलाव नहीं किया गया है।

  • शहडोल में बढ़ा बाढ़ का खतरा! बाणसागर बांध के 8 गेट खोलकर छोड़ा गया पानी

    शहडोल में बढ़ा बाढ़ का खतरा! बाणसागर बांध के 8 गेट खोलकर छोड़ा गया पानी

    शहडोल.

    जिले का बाणसागर बांध इस सीजन में पहली बार अपनी पूरी क्षमता पर पहुंच गया है। रविवार सुबह 8 बजे तक बांध का जलस्तर 341.64 मीटर दर्ज किया गया, जो कि फुल रिजर्वायर लेवल (एफआरएल) के बराबर है। बांध 100 प्रतिशत भर चुका है। पिछले साल इसी दिन जलस्तर 341.47 मीटर था।

    बांध प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, बांध में लगातार पानी की आवक बनी हुई है। सोमवार की सुबह तक इनफ्लो 3373.89 क्यूमेक दर्ज किया गया है। वहीं सुरक्षा को देखते हुए कुल 3373.89 क्यूमेक पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा है। इसमें पावर हाउस-3 से 89.89 क्यूमेक, स्पिलवे से 3277 क्यूमेक, आरबीस और भितरी से 1-1 क्यूमेक और वाष्पीकरण से 5 क्यूमेक पानी की निकासी हो रही है।

    8 गेट 2-2 मीटर खोले गए
    बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बांध के 8 रेडियल गेट नंबर 6,7,8,9,10,11,12 और 13 को 2-2 मीटर तक खोल दिया गया है। इन 8 गेटों से ही 3277 क्यूमेक पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है।

    गांवों में किया गया अलर्ट
    देवलौंद स्टेशन पर सोमवार सुबह 8 बजे तक 17.78 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस सीजन की कुल बारिश 748.45 मिमी हो चुकी है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों से नदी के करीब न जाने की अपील की है। कार्पलन यंत्री एसके शर्मा ने बताया कि सोमवार को सुबह दो गेट और खोल दिए गए हैं। अब 8 गेटों से पानी की निकासी हो रही है और सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है।

  • चित्रकूट में प्रकृति का डबल अटैक! बाढ़ के बाद बारिश, नेशनल हाईवे धंसा

    चित्रकूट में प्रकृति का डबल अटैक! बाढ़ के बाद बारिश, नेशनल हाईवे धंसा

    सतना.

    सदी की सबसे भीषण बाढ़ की त्रासदी से अभी चित्रकूट उबर भी नहीं पाया था कि रविवार रात से एक बार फिर शुरू हुई तेज बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर आरोग्य धाम के पास सोमवार सुबह 137.05 मीटर दर्ज किया गया और इसमें लगातार बढ़ोतरी बताई जा रही है।

    नदी के दोबारा बढ़ते जलस्तर और आसमान से बरस रही बारिश ने बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीते शनिवार मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ ने चित्रकूट में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद लोग अपने घरों और दुकानों को संभालने में जुटे ही थे कि दोबारा बारिश शुरू हो गई। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को फिर से जलस्तर बढ़ने की आशंका सताने लगी है। लोगों का कहना है कि पिछले दिनों की तबाही के दृश्य अभी आंखों के सामने हैं और दोबारा बारिश ने भय का माहौल पैदा कर दिया है।

    भोजन और साफ पानी का संकट
    बाढ़ के बाद कई प्रभावित इलाकों में भोजन, पीने के साफ पानी और कपड़ों तक की समस्या सामने आ रही है। प्रभावित परिवार राहत और बचाव दलों से मदद की उम्मीद लगाए हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्यमंत्री के चित्रकूट दौरे के बावजूद जमीनी स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों में अपेक्षित तेजी नजर नहीं आ रही है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद सामने आई तबाही ने प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा कर दिया है।

    सतना में 1043.5 मिमी औसत बारिश
    उधर, सतना जिले में भी बारिश का दौर जारी है। सोमवार सुबह 8 बजे तक जिले में 23.8 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई। 1 जून से 31 अगस्त तक जिले में कुल औसत वर्षा 1043.5 मिमी पहुंच गई है, जबकि जिले की सामान्य औसत वर्षा 891.7 मिमी है। यानी सामान्य से करीब 151.8 मिमी अधिक बारिश हो चुकी है।

  • वंदे मातरम् के 150 साल पर भव्य आयोजन! भोपाल में एक मंच से 3 वर्ल्ड रिकॉर्ड का होगा प्रयास

    वंदे मातरम् के 150 साल पर भव्य आयोजन! भोपाल में एक मंच से 3 वर्ल्ड रिकॉर्ड का होगा प्रयास

     भोपाल

    राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के मौके पर भोपाल में भारतीय संस्कृति और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। विविधा कलायम सांस्कृतिक समिति की ओर से 1 सितंबर को डीबी सिटी मॉल में ऐसा सांस्कृतिक आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम शाम 4 बजे से शुरू होगा। आयोजन में संगीत, सामूहिक गायन और शास्त्रीय कथक नृत्य के जरिए ‘वंदे मातरम्’ को केंद्र में रखते हुए भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना को विश्व मंच तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    40 से ज्यादा वाद्य यंत्रों से ‘वंदे मातरम्’
    पहले रिकॉर्ड प्रयास के तहत इंटरनेशनल म्यूजिशियन अभय तिवारी 40 से अधिक अलग-अलग वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल करते हुए ‘वंदे मातरम्’ की विशेष संगीतमय प्रस्तुति देंगे। एक ही प्रस्तुति में इतने वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा।

    200 से ज्यादा विद्यार्थी एक साथ गाएंगे राष्ट्रीय गीत
    दूसरे रिकॉर्ड प्रयास में विविधा अकादमी के 200 से अधिक विद्यार्थी एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि इसके जरिए बच्चों और युवाओं को राष्ट्रीय गीत, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    150 से ज्यादा छात्राएं करेंगी कथक
    तीसरे रिकॉर्ड प्रयास में 150 से अधिक छात्राएं ‘वंदे मातरम्’ पर सामूहिक कथक नृत्य की प्रस्तुति देंगी। खास बात यह होगी कि कथक की प्रस्तुति लाइव म्यूजिक के साथ होगी। शास्त्रीय नृत्य, संगीत और देशभक्ति को एक मंच पर पिरोकर प्रस्तुति तैयार की गई है।

    रिकॉर्ड से ज्यादा संस्कृति और राष्ट्रभावना पर जोर
    आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम का मकसद केवल विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र हासिल करना नहीं है। इसके जरिए ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, युवाओं में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक गौरव की भावना मजबूत करने तथा भारतीय संगीत और शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।

    कार्यक्रम की प्रोफेशनल वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी और रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इससे पूरे प्रयास को प्रमाणिक रूप से दर्ज कर डिजिटल और मीडिया माध्यमों के जरिए व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा।

  • महाकाल सवारी से पहले उज्जैन को नई सौगात, कंठाल-छत्रीचौक मार्ग बनेगा हेरिटेज रोड

    महाकाल सवारी से पहले उज्जैन को नई सौगात, कंठाल-छत्रीचौक मार्ग बनेगा हेरिटेज रोड

    उज्जैन 
    सिंहस्थ महापर्व 2028 को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इसी क्रम में शहर के प्राचीन और व्यस्ततम मार्गों में शामिल कंठाल चौराहा से छत्रीचौक तक 450 मीटर से अधिक लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है।

    खास बात यह है कि इसी मार्ग से 7 सितंबर को बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकलेगी। सवारी से पहले मार्ग और आसपास के प्रमुख स्थलों को नया स्वरूप देने का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है।

    नगर निगम के मुताबिक 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। कंठाल से छत्रीचौक तक सड़क निर्माण का काम पूरा कर लिया गया है। अब कंठाल चौराहा और सती गेट के सौंदर्यीकरण के बाकी काम को पूरा करने के लिए निगम की टीम ठेकेदार के साथ रात में भी काम कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि राजसी सवारी से पहले पूरा काम पूरा कर लिया जाएगा, ताकि सवारी के दौरान मार्ग आकर्षक और व्यवस्थित नजर आए।

    कंठाल चौराहे पर अंडरग्राउंड लाइटिंग
    कंठाल चौराहे को नया और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए यहां पेपर ब्लॉक लगाए जा रहे हैं। चौराहे पर अंडरग्राउंड लाइटिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। इससे बिजली के तारों के जाल से चौराहे को राहत मिलेगी और इसका स्वरूप अधिक साफ-सुथरा नजर आएगा।

    निगम के अनुसार शहर में इस तरह की अंडरग्राउंड लाइटिंग का काम पहली बार इस स्वरूप में किया गया है।

    सती गेट को मिलेगा हेरिटेज लुक
    ऐतिहासिक सती गेट को भी उसकी विरासत के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। गेट के आसपास करीब 50 मीटर क्षेत्र में कोबल स्टोन लगाए जाएंगे। वहीं गेट पर किए गए पुराने पेंट को हटाकर उसमें लगे ऐतिहासिक एरण पत्थरों को उनके मूल स्वरूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

    पत्थरों पर ट्रांसपेरेंट वाटर रिपेलेंट कोटिंग की जाएगी, जिससे उनकी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे। इस काम के पूरा होने के बाद सती गेट क्षेत्र को हेरिटेज लुक मिलने की उम्मीद है।

    सवारी से पहले रात-दिन काम
    बाबा महाकाल की राजसी सवारी के लिए अब समय कम बचा है। ऐसे में निगम की टीम सड़क निर्माण के साथ सौंदर्यीकरण के बचे हुए काम को भी तेजी से पूरा करने में जुटी है। कंठाल से छत्रीचौक तक तैयार हो रहा यह मार्ग सवारी के दौरान श्रद्धालुओं के लिए न सिर्फ सुगम होगा, बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिक पहचान को भी नए स्वरूप में सामने लाएगा।

  • केन-बेतवा परियोजना को लेकर CM मोहन यादव ने कांग्रेस को घेरा, ‘नाटक’ करने का लगाया आरोप

    केन-बेतवा परियोजना को लेकर CM मोहन यादव ने कांग्रेस को घेरा, ‘नाटक’ करने का लगाया आरोप

    भोपाल
     नर्मदा घाटी के बांध कांग्रेस ने अटकाए, अब केन- बेतवा नदी जोड़ो प्रोजेक्ट में नाटक कर रही है। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश और यहां के किसानों के साथ अन्याय किया। उसने नर्मदा नदी के माध्यम से जनकल्याण को प्राथमिकता नहीं दी। कांग्रेस के मुख्यमंत्री और मंत्री कहते थे कि नर्मदा नदी नीचे हैं, मालवांचल ऊपर, तो पानी वहां तक कैसे पहुंचेगा? अब देख लीजिए हमने कर दिखाया। उज्जैन-इंदौर से लेकर पूरा मालवा अंचल नर्मदा जल का उपयोग कर रहा है। किसानों के खेत में पानी पहुंचा और पेयजल संकट का भी समाधान हुआ है। कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए यह बात मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने बातचीत में कही।

    कांग्रेस और उसके सहयोगी केवल झूठ बोलते हैं
    लाड़ली बहना जैसी योजना अब चुनौती बनती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष अधिक राशि देने की घोषणा कर रहा है?

    इसके जवाब में डा. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस हो या उसके सहयोगी दल, जब बोले तब झूठ ही बोले। वर्ष 2003 तक प्रदेश में कांग्रेस ने राज किया लेकिन गरीबी दूर करने पर सोचा भी नहीं। कांग्रेस चुनावी वादे करके पलट जाती है। इसके विपरीत देखिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के दुश्मनों को उनके घर में भी नहीं छोड़ेंगे तो सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक की। देश में अब आतंकी घटनाएं बंद हो गई हैं। कांग्रेस के राज में हमेशा दंगे होते थे। इकानामी पूरी बदल गई है। भाजपा की कथनी और करनी का उदाहरण भव्य श्रीराम मंदिर है, जिसका हिंदू- मुस्लिम सभी ने स्वागत किया।

    राजनीति में न आता तो शिक्षक बनता
    डा. मोहन यादव ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि उन्हें बच्चों के बीच जाकर लगता है कि मैं भविष्य के मध्य प्रदेश से संवाद कर रहा हूं। राजनीति में नहीं आता तो शिक्षा के क्षेत्र में काम करना निश्चित रूप से मुझे अच्छा लगता।

    कांग्रेस ने 55 वर्ष में मात्र साढ़े सात लाख हेक्टेयर रकबे को सिंचित बनाया
    सिंचाई सुविधाओं से जुड़े प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में 55 वर्ष राज करके भी कांग्रेस ने प्रदेश के हित में कुछ नहीं किया। वर्ष 2003 तक मध्य प्रदेश में मात्र साढ़े सात लाख हेक्टेयर रकबा ही सिंचित था, इसे भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार ने वर्ष 2023 तक 40 लाख हेक्टेयर और अब उनके कार्यकाल में 67 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा दिया है।

    मध्य प्रदेश की समृद्धि के लिए गुजरात माडल पर कर रहे काम
    डा. मोहन यादव कहते हैं कि मामला वित्तीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने का हो या प्रदेश के विकास की रूपरेखा का, हम सभी क्षेत्रों में समान रूप से काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यही काम गुजरात में किया था। औद्योगिकीकरण से राज्य की समृद्धि का रास्ता उन्होंने ही दिखाया। नर्मदा का पानी कच्छ तक पहुंचाकर गुजरात में क्रांति लाई। सरलीकृत, पारदर्शी और त्वरित गति से काम करने का ही परिणाम है कि हमारे राज्य में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतर चुका है।

    भूमि और अन्य सहूलियत पाकर निवेशक पीछे हट जाते हैं, इस प्रश्न के जवाब में डा. मोहन यादव ने कहा कि भूमि पूजन से लेकर लोकार्पण तक सभी काम इंटरनेट मीडिया पर दिख जाते हैं। हमारे आसपास समुद्र नहीं हैं। कोई पोर्ट नहीं है फिर भी हमारा निर्यात 76 हजार करोड़ रुपए को पार कर गया।