Category: मध्य प्रदेश

  • भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत 16 कॉलेजों में प्रमोशन, कर्मचारियों को मिली रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी

    भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत 16 कॉलेजों में प्रमोशन, कर्मचारियों को मिली रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी

    भोपाल
     प्रदेश के 16 महाविद्यालयों में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को पदोन्नति देकर द्वितीय श्रेणी के रजिस्ट्रार(पंजीयक) के पद पर पदस्थ किया गया।इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने सोमवार को आदेश जारी कर दिया है।इन कर्मचारियों को वर्षों इंतजार के बाद पदोन्नति दी गई है।

    विभिन्न महाविद्यालयों और संस्थानों में जिम्मेदारी
        आदेश के अनुसार संबंधित कर्मचारियों को पदोन्नति
    के बाद आगामी आदेश तक विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों एवं संस्थानों में रजिस्ट्रार के पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश के तहत एमएल. मंगरोलिया को शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल में ही पदस्थ किया गया है।

    दिलीप तिवारी को उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल, जबकि तरूलता शर्मा को सरोजनी नायडू शासकीय कन्या पीजी महाविद्यालय, भोपाल में पदस्थ किया गया है। राकेश शर्मा को शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, भोपाल में जिम्मेदारी दी गई है।

    इंदौर, उज्जैन सहित अन्य जिलों में भेजे गए रजिस्ट्रार
        इसी क्रम में केएल उपाध्याय को शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय, इंदौर और आनंद कुमार चौधरी को शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन भेजा गया है। संतोष कुमार सक्सेना को चन्द्रशेखर आजाद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सीहोर और ज्योति केने को शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल में पदस्थ किया है।

        अन्य पदस्थापना में डॉ. के.वी. बुनकर को गुना, किशोरीलाल चढ़ार को टीकमगढ़, नारायण प्रसाद संजोदिया को राजगढ़, तारा बिलवाल को झाबुआ, पीएस उईके को छिंदवाड़ा, शारदा प्रसाद सोनी को रीवा, राकेश कुमार दुबे को जबलपुर और छोटेलाल प्रजापति को दमोह में पदस्थ किया गया है।

     

  • सोन नदी उफान की आशंका! बाणसागर के आठ गेट खुले, हजारों क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा

    सोन नदी उफान की आशंका! बाणसागर के आठ गेट खुले, हजारों क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा

    शहडोल
     बाणसागर बांध का जलस्तर लगभग भराव के करीब पहुंच गया है। बांध में पानी की लगातार आवक को देखते हुए सोमवार से ही आठ रेडियल गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    98.42 प्रतिशत तक भर चुका है बांध
    जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 01 सितंबर को सुबह 08 बजे तक बांध का जलस्तर 341.58 मीटर* दर्ज किया गया है, जबकि पूर्ण भराव स्तर 341.64 मीटर है। इस प्रकार बांध 98.42 प्रतिशत तक भर चुका है। पिछले साल आज के दिन जलस्तर 341.50 मीटर था। बांध में वर्तमान में 5343.89 एमसीएम जल का जीवित भंडारण है।

    आवक और निकासी की स्थिति
    बांध में वर्तमान में 2466.83 क्यूमेक पानी की आवक हो रही है, जबकि कुल निकासी 3458.84 क्यूमेक है। निकासी में बिजली घर क्रमांक-3 से 174.84 क्यूमेक, दांई मुख्य नहर से 01 क्यूमेक, भितरी नहर से 01 क्यूमेक और वाष्पीकरण हानि 05 क्यूमेक शामिल है।

    स्पिलवे के माध्यम से छोड़ा जा रहा पानी
    सबसे अधिक पानी स्पिलवे के माध्यम से छोड़ा जा रहा है। बांध के 8 रेडियल गेट क्रमांक 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और 13 को 2-2 मीटर तक खोला गया है जिनसे कुल 3277 क्यूमेक पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है। विभाग के अनुसार कल से ही आठ गेट से लगातार पानी निकाला जा रहा है।

    निचले क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की संभावना
        देवलोंद स्टेशन पर आज सुबह 8 बजे तक 40
    .64 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस सीजन की अब तक की कुल वर्षा 789.09 मिलीमीटर हो चुकी है। बांध के गेट खुले होने से सोन नदी के निचले क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

     

  • पुराने शिक्षकों की TET परीक्षा का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, TWTA ने मांगी परीक्षा से छूट

    पुराने शिक्षकों की TET परीक्षा का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, TWTA ने मांगी परीक्षा से छूट

    भोपाल 

    शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आवेदन बुलाए जाने और परीक्षा तिथि का ऐलान किए जाने के बीच एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में विविध आवेदन दायर किया गया है। 

    ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से पुनर्विचार याचिका में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बहस के दौरान उठाया गया था, लेकिन वह आधार पुनर्विचार याचिका में उसी मजबूती और विस्तार से लिखित रूप में सामने नहीं आया।

    न्यायालय में मौखिक रूप से कही गई बात और याचिका में विधिवत उठाए गए कानूनी आधार का प्रभाव अलग होता है। सिंगौर ने कहा कि सरकार एक प्रतिवादी के रूप में कानून, प्रशासनिक व्यवस्था और अपने निर्णयों के दायरे में रहकर ही अपना पक्ष रख सकती है।

    इसके विपरीत प्रभावित शिक्षक अपने व्यक्तिगत अधिकारों, नियुक्ति की परिस्थितियों, वर्षों की सेवा, अर्जित अधिकारों और नौकरी पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव को सीधे और व्यापक रूप से न्यायालय के समक्ष रख सकते हैं। यह याचिका नई दिल्ली में 30 अगस्त को शिक्षकों के देशव्यापी प्रदर्शन के बीच लगाई गई है।

    ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन की याचिका में शिक्षकों का पक्ष
    एसोसिएशन का कहना है कि मध्यप्रदेश शासन की पुनर्विचार याचिका और ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन द्वारा दायर विविध आवेदन में अंतर है। दोनों के उद्देश्य में कुछ समानता दिखाई दे सकती है, लेकिन प्रभावित पक्ष की स्थिति, नियुक्ति की वैधानिकता, उस समय प्राप्त पात्रता और बाद में लागू किए गए शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रावधानों के प्रभाव जैसे मुद्दों को एसोसिएशन ने शिक्षकों के दृष्टिकोण से व्यापक रूप से उठाया है।

    डीके सिंगौर ने कहा कि “हमारा उद्देश्य शिक्षक पात्रता परीक्षा का विरोध करना नहीं, बल्कि उन शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना है, जिन्होंने उस समय लागू वैधानिक व्यवस्था के अनुसार नियुक्त होकर वर्षों तक शिक्षक के रूप में सेवा दी है। उनके ऊपर बाद में लागू व्यवस्था को किस सीमा तक प्रभावी किया जा सकता है, यही इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण प्रश्न है।”

    एसोसिएशन का कहना है कि जिन शिक्षकों ने उस समय लागू व्यवस्था के अंतर्गत पात्रता हासिल कर नियुक्ति पाई, वर्षों तक सेवा दी और अपने दायित्वों का निर्वहन किया, उनके मामले को बाद में लागू पात्रता व्यवस्था के संदर्भ में अलग दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। जनजातीय कार्य विभाग और शिक्षा विभाग के लगभग 70 हजार शिक्षक इस कानूनी प्रयास से लाभान्वित हो सकते हैं, यदि सर्वोच्च न्यायालय प्रभावित शिक्षकों के पक्ष में उचित राहत प्रदान करता है।

     

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में केस ट्रांसफर, अब उसी कोर्ट में होगी रिटायर्ड जज के मामले की सुनवाई

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में केस ट्रांसफर, अब उसी कोर्ट में होगी रिटायर्ड जज के मामले की सुनवाई

    भोपाल 

     एमपी के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ अब उसी कोर्ट में ट्रायल चलेगा, जहां से पहले गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिली थी. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को विशेष न्यायाधीश (ओएडब्ल्यू) पल्लवी द्विवेदी के कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है। 

    ट्विशा शर्मा मौत केस गिरिबाला को जिस अदालत ने दी थी जमानत, वहीं चलेगा ट्रायल
    एडवोकेट अंकुर पांडे के अनुसार, इसी अदालत ने पहले रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी. हालांकि, बाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने जिला अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया और गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज कर दी.  इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद से ही गिरिबाला सिंह जेल में हैं। 

    इस मामले में अब ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, चार्जशीट दाखिल होने के बाद निचली अदालतों को प्राथमिकता के आधार पर 60 से 90 दिनों के भीतर आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करना है. ऐसे में इस मामले में भी आरोप तय करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। 

    17 अगस्त को CBI ने दाखिल किया था चालान
    ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल कोर्ट में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे, ट्विशा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ चालान पेश किया था. चालान में जांच के दौरान सामने आए कई महत्वपूर्ण फैक्ट्स का जिक्र किया गया है. सीबीआई के दस्तावेजों के अनुसार, एम्स दिल्ली में की गई पोस्टमार्टम जांच की रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर गंभीर चोट के निशान नहीं मिले थे. वहीं, एम्स भोपाल की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा की मौत से पहले उसके शरीर पर चोट के 6 निशान पाए जाने की बात सामने आई थी। 

    सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल अदालत में गिरिबाला, उनके बेटे व ट्विशा के पति समर्थ के खिलाफ चालान दाखिल किया था। चार्जशीट के अनुसार, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर किसी भी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए थे। हालांकि, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पूर्व शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज थे।
    सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल अदालत में गिरिबाला, उनके बेटे व ट्विशा के पति समर्थ के खिलाफ चालान दाखिल किया था। चार्जशीट के अनुसार, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर किसी भी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए थे। हालांकि, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पूर्व शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज थे।

    अब कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान इन दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्टों समेत सीबीआई की ओर से पेश किए गए अन्य सबूतों पर भी विचार किया जाएगा. इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। 

    एम्स की दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर
    सीबीआई की चार्जशीट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर गंभीर चोट के निशान नहीं मिले। वहीं, इससे पहले एम्स भोपाल की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज किए गए थे।

    पहले भी जमानत को लेकर बदली थीं अदालतें
    गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनकी नियमित जमानत अर्जी पर भोपाल जिला अदालत में लगातार तीन दिनों तक सुनवाई नहीं हो सकी थी। बताया गया कि मामला अलग-अलग अदालतों में भेजे जाने के बाद संबंधित न्यायाधीशों ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इसका कारण बताया कि वे पहले गिरिबाला सिंह के अधीनस्थ या उनके सहकर्मी के रूप में काम कर चुके हैं। बाद में मामला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रामप्रताप मिश्रा की अदालत में पहुंचा, जहां उनकी पहली नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। 

    परिजनों ने बाहर केस ट्रांसफर करने की मांग की
    केस उसी अदालत में ट्रांसफर होने के बाद ट्विशा के परिजनों और उनके वकीलों में नाराजगी बढ़ गई है। परिजनों ने भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताते हुए मामले को किसी अन्य स्थान पर ट्रांसफर करने की मांग की है।

    हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई टली
    गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई नहीं हो सकी। दैनिक कार्यसूची में जमानत आवेदन का नंबर काफी पीछे होने के कारण उपलब्ध समय में मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। अब जमानत याचिका पर आने वाले दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।

     

  • बढ़ता जा रहा MP पर कर्ज का बोझ! आज ₹3,600 करोड़ और उधार लेगी मोहन सरकार

    बढ़ता जा रहा MP पर कर्ज का बोझ! आज ₹3,600 करोड़ और उधार लेगी मोहन सरकार

    भोपाल 

    राज्य सरकार विकास और उत्पादक योजनाओं एवं परियोजनाओं के नाम पर आज एक बार फिर कुल ₹3,600 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए सरकार 1 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), मुंबई कार्यालय के माध्यम से दो अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटी की नीलामी करेगी।

    अब कर्ज का कुल आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में 51400 करोड़ रुपए हो जाएगा। वहीं नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।

    राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दोनों कर्ज की अवधि, राशि, नीलामी और भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। पहला कर्ज ₹1,600 करोड़ 18 साल के लिए होगा। नीलामी प्लेटफॉर्म RBI का Core Banking Solution (E-Kuber) होगा। इस राशि की ब्याज के साथ अदायगी सरकार जुलाई 2044 तक 7.61 प्रतिशत सालाना

    ब्याज पर करेगी। ब्याज का हर साल भुगतान 8 जनवरी और 8 जुलाई को किया जाएगा।

    दूसरा कर्ज ₹ 2,000 करोड़ रुपए का 30 साल के लिए लिया जा रहा है। इसकी मूलधन वापसी सितंबर 2056 तक नीलामी में तय होने वाली कट-ऑफ यील्ड ब्याज के जरिये की जाएगी। हर साल 2 मार्च और 2 सितंबर को ब्याज राशि का भुगतान होगा।

    दोनों कर्ज की पूरी शर्तें
    सरकार ने कर्ज की अवधि और ब्याज दर से जुड़ी जानकारी साफ कर दी है। पहला कर्ज 1600 करोड़ रुपए का होगा। यह कर्ज 18 साल के लिए लिया जाएगा। इसकी नीलामी RBI के कोर बैंकिंग सिस्टम यानी E-Kuber (Electronic Kuber) प्लेटफॉर्म से होगी।

    सरकार इस राशि पर जुलाई 2044 तक 7.61 प्रतिशत सालाना ब्याज चुकाएगी। ब्याज का भुगतान हर साल 8 जनवरी और 8 जुलाई को किया जाएगा। दूसरा कर्ज 2000 करोड़ रुपए का होगा। यह कर्ज 30 साल के लिए लिया जा रहा है।

    इसकी मूलधन वापसी सितंबर 2056 तक होगी। इस कर्ज पर ब्याज दर नीलामी में तय होने वाली कट-ऑफ यील्ड से तय होगी। इसका भुगतान हर साल 2 मार्च और 2 सितंबर को किया जाएगा।

    किन लोगों से जुटाया जाएगा पैसा
    सरकारी सिक्योरिटी की इस नीलामी में बैंक और वित्तीय संस्थान बोली लगा सकेंगे। इसके अलावा पात्र निवेशक भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं। सरकार ने आम निवेशकों के लिए भी रास्ता खुला रखा है। इसके लिए नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडिंग की व्यवस्था की गई है।

    इस श्रेणी में पात्र लोगों और संस्थाओं को कुल राशि का 10 प्रतिशत तक सिक्योरिटी दी जा सकती है। हालांकि एक बोलीदाता को अधिकतम 1 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकेगा। सरकार को इस कर्ज की पूरी राशि का भुगतान 2 सितंबर 2026 को करना होगा।

    इस साल अब तक कितना कर्ज लिया गया
    यह इस वित्त वर्ष में सरकार का नया कर्ज नहीं है। इससे पहले भी सरकार कई बार कर्ज ले चुकी है। 18 अगस्त को सरकार ने दो अलग कर्ज लिए थे। इनमें 1400 करोड़ रुपए का कर्ज 7.58 प्रतिशत ब्याज पर लिया गया था। वहीं 1000 करोड़ रुपए का कर्ज 7.39 प्रतिशत ब्याज पर लिया गया था। इन दोनों कर्ज की अवधि क्रमशः 12 साल और 8 साल है।

    इससे पहले 4 अगस्त को भी सरकार ने कर्ज लिया था। उस दिन 1600 करोड़ और 2000 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए थे। यानी अगस्त महीने में ही सरकार ने कई बार कर्ज उठाया है। आज होने वाली नीलामी के बाद इस वित्त वर्ष में लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 51 हजार 400 करोड़ रुपए हो जाएगा।

    कितना बढ़ जाएगा राज्य पर कुल कर्ज
    राज्य सरकार पर पहले से भी भारी कर्ज है। 31 मार्च 2026 की स्थिति में सरकार पर चार लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए का कर्ज था। अब नए 3600 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज पांच लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।

    यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। हर महीने नई नीलामी के जरिए सरकार बाजार से पैसा जुटा रही है। यह पैसा विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में खर्च किया जाता है।

    यह खबर क्यों जरूरी है
    यह खबर आम जनता के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि सरकारी कर्ज का सीधा असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। जब सरकार बार बार कर्ज लेती है तो जनता को इसकी जानकारी होना जरूरी है। संविधान हर नागरिक को सूचना का अधिकार देता है, इसलिए सरकारी खर्च और कर्ज से जुड़े आंकड़े पारदर्शी तरीके से सामने आने चाहिए।

    कर्ज का बढ़ता आंकड़ा भविष्य में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के लिए जरूरी मानी जाती है। यह खबर पाठकों को राज्य की आर्थिक सेहत समझने में मदद करती है।

    किससे लिया जाएगा कर्ज
    यह कर्ज किसी एक बैंक से सीधे नहीं लिया जा रहा है। प्रदेश सरकार सरकारी सिक्योरिटीज बेचकर निवेशकों से पैसा जुटाएगी। इनकी नीलामी RBI के मुंबई कार्यालय से होगी। इसमें बैंक, वित्तीय संस्थान और पात्र निवेशक बोली लगा सकेंगे। इसके अलावा नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडर्स के लिए भी सरकारी प्रतिभूतियों में हिस्सा लेने की व्यवस्था रखी गई है।

    नॉन-कॉम्पिटिटिव श्रेणी में पात्र व्यक्तियों और संस्थाओं को कुल नोटिफाइड राशि के 10% तक सिक्योरिटीज आवंटित की जा सकती हैं, जबकि एकल बोलीदाता के लिए अधिकतम सीमा नोटिफाइड राशि की 1% रखी गई है। सरकार को कर्ज की राशि का भुगतान 2 सितंबर 2026 को भुगतान करना होगा।

    18 अगस्त को लिया था 2400 करोड़ का कर्ज
    इसके पहले मोहन सरकार ने 18 अगस्त को सिक्योरिटी की नीलामी के बाद 7.58% और 7.39% ब्याज दर पर 1,400 करोड़ और 1,000 करोड़ रुपए के दो कर्ज उठाए हैं। इन दोनों कर्ज की राशि पर सरकार जनवरी और जुलाई में छमाही आधार पर ब्याज का भुगतान करेगी।

    दोनों कर्ज की अवधि क्रमशः 12 साल और 8 साल है। अगस्त महीने में ही 4 अगस्त को 1,600 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपए के कुल 3,600 करोड़ रुपए कर्ज लिए गए थे। 31 मार्च 2026 की स्थिति में राज्य सरकार पर 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए का कर्ज था। एक सितम्बर को होने वाली नीलामी के बाद लिए गए कर्ज का कुल आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में 51400 करोड़ रुपए हो जाएगा।

    नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।

     

  • MP हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस की तैयारी, कॉलेजियम ने केंद्र को भेजा जस्टिस कोगजे का नाम

    MP हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस की तैयारी, कॉलेजियम ने केंद्र को भेजा जस्टिस कोगजे का नाम

    भोपाल
    देश की न्यायपालिका से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के तीन महत्वपूर्ण उच्च न्यायालयों, राजस्थान, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) की नियुक्ति की सिफारिश कर दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने सोमवार को हुई बैठक में इन नामों पर मुहर लगाई।
    राजस्थान हाईकोर्ट को मिला नया मुख्य न्यायाधीश

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज जस्टिस संजय के अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राजस्थान हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के कामकाज को लेकर वकीलों का कड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा था। जोधपुर और जयपुर की बार एसोसिएशनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का ऐलान किया था।

    वकीलों का विरोध और विवाद की पृष्ठभूमि
    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ चल रहे इस विवाद के पीछे सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता द्वारा सीजेआई को लिखे गए तीन पत्र भी अहम रहे। इन पत्रों में प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग और केस लिस्टिंग में हस्तक्षेप के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद से राज्य में माहौल काफी गर्माया हुआ था। बढ़ते तनाव को देखते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस ने खुद 1 सितंबर से 5 सितंबर तक न्यायिक कार्य से अलग रहने का फैसला किया था।

    गुजरात हाईकोर्ट में लंबे समय से न्यायिक सेवा
    जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे वर्तमान में गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें 6 अप्रैल 2016 को गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। बाद में 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जस्टिस कोगजे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे। उनकी नियुक्ति के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था में नए नेतृत्व की शुरुआत होगी। 

    कॉलेजियम की सिफारिश अब केंद्र सरकार के पास जाएगी। केंद्र की मंजूरी और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति की अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद जस्टिस कोगजे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का कार्यभार संभालेंगे।

    कॉलेजियम ने तीन जजों के नाम सुझाए

        जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे — गुजरात हाईकोर्ट से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
        जस्टिस संजय के. अग्रवाल — छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राजस्थान हाईकोर्ट
        डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी — राजस्थान हाईकोर्ट से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

    क्या है सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम?
    सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की
    नियुक्ति और तबादले की सिफारिश करने वाली व्यवस्था को कॉलेजियम सिस्टम कहा जाता है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। कॉलेजियम की सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजी जाती हैं। केंद्र सरकार आपत्ति होने पर प्रस्ताव पुनर्विचार के लिए लौटा सकती है, लेकिन कॉलेजियम दोबारा वही नाम भेज दे तो सरकार को नियुक्ति करनी होती है।

        कॉलेजियम में सीजेआई के अलावा जस्टिस विक्रम नाथ, बीवी नागरथना, एमएम सुंदरेश और पीएस नरसिंहा शामिल थे।

        मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के नाम की सिफारिश की गई है।

        जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी का नाम तय हुआ है।

        छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए जस्टिस कृष्णा राम महापात्रा के नाम की सिफारिश पहले ही 6 अगस्त को की जा चुकी है।

    सरकार की मंजूरी के बाद लागू होगी सिफारिशें
    कॉलेजियम द्वारा की गई ये सभी सिफारिशें अब केंद्र सरकार के पास भेजी जाएंगी। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ये सभी नियुक्तियां प्रभावी होंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इन नए नामों के आने से अदालतों में प्रशासनिक कामकाज और न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी।

     

  • चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात! मंदाकिनी उफान पर, सड़क बंद और रामघाट में घुसा पानी

    चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात! मंदाकिनी उफान पर, सड़क बंद और रामघाट में घुसा पानी

    सतना /चित्रकूट 

    सतना जिले में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति है। सिमरावल नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए 36 गांवों को अलर्ट किया गया है।मझगवां के पालदेव में घरों और सड़कों में पानी भर गया है, जबकि डेंगरहट-खोड़री पुल धंसने और मझगवां-पहाड़ीखेड़ा संपर्क मार्ग अवरुद्ध होने से आवागमन प्रभावित हुआ है।

    चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर बह रही है। रामघाट की करीब 300 दुकानें पानी में डूब गई हैं। प्रशासन और पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं।

    मैहर में भारी बारिश और नदी-नालों के उफान को देखते हुए आज यानी 1 सितंबर को सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।

    इस मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में 74% यानी, औसत 27.7 इंच बारिश हो चुकी है। अकेले अगस्त महीने में ही 12 इंच पानी गिरा। अब सितंबर में 9.6 इंच पानी की जरूरत है। इसके बाद प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच का आंकड़ा पार होगा। हालांकि, अगले 4 दिन प्रदेश के कई जिलों में अति भारी और भारी बारिश का अलर्ट है। ऐसे में आंकड़े में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और ट्रफ की वजह से 4 सितंबर तक जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश होगी।

    आज इन जिलों में अलर्ट
    मौसम विभाग ने मंगलवार को उमरिया और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, कटनी, मैहर, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होगी।

  • हर्रवाह-बिलासपुर मार्ग पर सरइया नाला के पास बोलेरो अनियंत्रित होकर पलटी

    हर्रवाह-बिलासपुर मार्ग पर सरइया नाला के पास बोलेरो अनियंत्रित होकर पलटी

    हर्रवाह-बिलासपुर मार्ग पर सरइया नाला के पास बोलेरो अनियंत्रित होकर पलटी

    उमरिया
     जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत बिलासपुर से हर्रवाह की ओर जाने वाले मार्ग पर हर्रवाह के समीप सरइया नाला के पास बीती रात करीब 2 बजे एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया।

    घटना के बाद बोलेरो सड़क किनारे पलटी हुई मिली। मौके पर वाहन के आसपास कोई व्यक्ति दिखाई नहीं दिया। फिलहाल हादसे में किसी जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है। हादसे के समय बोलेरो में कितने लोग सवार थे और वाहन पलटने के बाद वे कहां गए, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जनहानि एवं हादसे के कारणों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।

  • पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में पत्रकारों की बड़ी पहल, जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने पूरा किया संकल्प

    पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में पत्रकारों की बड़ी पहल, जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने पूरा किया संकल्प

    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पत्रकारों की ऐतिहासिक पहल, दोनों राज्यों के जिलाध्यक्षों व पदाधिकारियों ने संकल्प पूरा कर पेश की मिसाल

    भोपाल/रायपुर:
    पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकार को सर्वोपरि रखते हुए 'अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति' ने एक ऐतिहासिक पहल की है। समिति द्वारा चलाए गए वृहद वृक्षारोपण अभियान के तहत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे लगाकर हरियाली और जीवन संरक्षण का एक नया संदेश दिया गया है।
    इस पुनीत महा-अभियान का सफल नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी. कुमार सोनी, मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम बर्मन, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष द्रोणाचार्य दुबे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष कैलाश वास्तुकार सहित समिति के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया।
    संकल्प से सिद्धि तक का सफर
    इस अभियान की शुरुआत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने कम से कम एक वृक्ष लगाने का दृढ़ संकल्प लिया था। सभी ने अपने सामाजिक दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते हुए, पहले से सुनिश्चित किए गए स्थानों पर पौधे रोपे। समिति की एकजुटता और सुनियोजित कार्ययोजना का ही परिणाम रहा कि मध्य प्रदेश में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया।
    राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताया आभार, कहा- "यह प्रयास अत्यंत सराहनीय"
    इस महा-अभियान की शानदार सफलता पर अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी. कुमार सोनी ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्षों, प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्षों, प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, संभाग के संभागीय अध्यक्षों, सभी जिलों के जिलाध्यक्षों, जिला कार्यवाहक अध्यक्षों और समिति के एक-एक सदस्य का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन किया।
    सोनी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा, "आप सभी ने इस पर्यावरण संरक्षण अभियान का हिस्सा बनकर जिस जिम्मेदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया है, वह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। पत्रकारों की कलम के साथ-साथ प्रकृति के प्रति उनका यह योगदान समाज में एक नई चेतना लेकर आएगा"
    समिति के इस कदम की हर तरफ जमकर प्रशंसा हो रही है और इसे पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

  • MP से गुजरात की दूरी होगी कम, इंदौर-अहमदाबाद सुपरफास्ट रूट से बदलेगी कनेक्टिविटी

    MP से गुजरात की दूरी होगी कम, इंदौर-अहमदाबाद सुपरफास्ट रूट से बदलेगी कनेक्टिविटी

    इंदौर 

    मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होने वाली है. क्योंकि इंदौर से झाबुआ होते हुए गुजरात की सीमा तक जाने वाला नेशनल हाईवे-47 फोरलेन का हिस्सा पूरा हो चुका है. जिससे इंदौर और अहमदाबाद जैसे शहरों की दूरी भी कम हो जाएगी. जबकि इंदौर से धार, झाबुआ, दाहोद, गोदरा और अहमदाबाद तक यह फोरलेन हाईव स्पीड कनेक्टिविटी देने वाला है. 162 किलोमीटर लंबे इस हाईवे को 4 लेन में अपग्रेड किया गया है. जिससे बड़े वाहनों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. राष्ट्रीय राजमार्ग-47 का इंदौर-गुजरात सीमा खंड पूरी तरह तैयार हो चुका है. इंदौर के लिए भी यह उपयोगी साबित होने वाला है, क्योंकि इंदौर गुजरात से और तेजी से कनेक्ट हो जाएगा। 

    इंदौर से अहमदाबाद की दूरी होगी कम
    राष्ट्रीय राजमार्ग-47 का इंदौर-गुजरात सीमा खंड फोरलेन का सबसे ज्यादा फायदा इंदौर और अहमदाबाद के लिए अहम साबित होगा. अभी दोनों शहरों के बीच 380 से 400 किलोमीटर दूरी तय करने में 8 से 9 घंटे का समय लगता है. अभी अहमदाबाद जाने वाले वाहनों को संकरी सड़कों और जंगलों के बीच बने खतरनाक मोड़ों से गुजरना पड़ता था, लेकिन इसे फोरलेन में अपग्रेड होने से यह दूरी अब महज 5 से 6 घंटे में ही पूरी हो रही है. जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रियों के अलावा मालवाहनों को सबसे ज्यादा फायदा होना शुरू हो गया है। 

    मध्य प्रदेश-गुजरात के ये शहर होंगे कनेक्ट 
        मध्य प्रदेश के शहर: इंदौर से शुरू होकर यह हाईवे धार और झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल और औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरेगा. 
        गुजरात के शहर: बॉर्डर पार करते ही यह हाईवे सीधे दाहोद, गोधरा और फिर अहमदाबाद तथा बामनबोर राजकोट के पास तक जुडे़गा. 
        इस प्रोजेक्ट के कारण इंदौर से धार, झाबुआ, दाहोद और गोधरा के बीच का सफर बेहद संक्षिप्त और सुरक्षित हो गया है. 

    NH-47 का हिस्सा
    दरअसल, NH-47 गुजरात के बामनबोर से शुरू होकर मध्य प्रदेश से गुजरते हुए महाराष्ट्र के नागपुर तक जाता है. जिसकी कुल लंबाई लगभग 1006 किलोमीटर है. इस हाईवे का इंदौर से एमपी-गुजरात सीमा खंड लगभग 150 से 160 किलोमीटर के दायरे को कवर करता है. इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत हाल ही में NHAI की तरफ से 16 किलोमीटर लंबे मुख्य बाईपास और री-अलाइंड खंड का काम पूरा कर लिया है. जिसने सबसे कठिन रास्तों को आसान बना दिया है, जो इन शहरों को कवर कर रहा है। 

        इंदौर
        बेतमा 
        धार
        सरदापुर
        झाबुआ
        पिटोल
        दाहोद 
        लिमखेड़ा 
        गोदरा 

    7 नए व्हीकल अंडरपास भी बने 
    इस हाईवे को पूरी तरह 'एक्सीडेंट-फ्री' बनाने के लिए सरकार इस खंड पर 168.58 करोड़ की लागत से 07 नए व्हीकल अंडरपास और सर्विस रोड का निर्माण भी करवा रही है. इससे स्थानीय गांवों का ट्रैफिक मुख्य हाईवे पर सीधे नहीं आएगा. जबकि वाहन इस हाईवे पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकल सकेंगे।