Category: मध्य प्रदेश

  • इंदौर हनी ट्रैप-2 में बड़ा खुलासा, 600 पन्नों की चार्जशीट में श्वेता जैन पर गिरोह चलाने का आरोप

    इंदौर हनी ट्रैप-2 में बड़ा खुलासा, 600 पन्नों की चार्जशीट में श्वेता जैन पर गिरोह चलाने का आरोप

    इंदौर 
    इंदौर में मई में सामने आए चर्चित हनी ट्रैप पार्ट-2 मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में करीब 600 पन्नों का चालान पेश कर दिया है। पुलिस के चालान में साल 2019 के चर्चित हनी ट्रैप मामले की आरोपित रह चुकी श्वेता विजय जैन को इस कथित गिरोह का सरगना बताया गया है। वहीं, सागर निवासी रेशू चौधरी को उसकी सहयोगी बताते हुए आरोप लगाया गया है कि वह फोटो और वीडियो के जरिए लोगों पर दबाव बनाने की कथित योजना में शामिल थी।

    इस मामले में पुलिस ने कुल सात लोगों को आरोपित बनाया है। हालांकि, जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन, पेनड्राइव और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों से नए तथ्य सामने आने पर मामले में पूरक चालान भी न्यायालय में पेश किया जा सकता है।

    कारोबारी की शिकायत से सामने आया मामला
    मामला शराब और प्रापर्टी कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद सामने आया था। उन्होंने 18 मई को क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 28 अप्रैल को उन्हें रास्ते में रोका गया और प्रापर्टी कारोबार में हिस्सेदारी देने या एक करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कथित रूप से दबाव बनाया गया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया था कि फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उन्हें दबाव में लेने का प्रयास किया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

    शुरुआती एफआईआर में नहीं था श्वेता का नाम
    प्रारंभिक एफआईआर में श्वेता विजय जैन का नाम शामिल नहीं था। हालांकि, जांच और बाद में दर्ज किए गए बयानों के दौरान उसका नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ और अन्य आरोपितों के बयानों के आधार पर सागर निवासी रेशू चौधरी का नाम भी जांच में जुड़ा। पुलिस का दावा है कि आरोपितों से हुई पूछताछ और अब तक जुटाए गए अन्य साक्ष्यों के आधार पर कारोबारी पर दबाव बनाने की कथित योजना के बारे में जानकारी मिली है।

    सागर की रेशू को बनाया हनीट्रैप गर्ल
    पुलिस जांच के अनुसार, श्वेता जैन ने सागर की रहने वाली रेशू को गिरोह में शामिल किया था। आरोप है कि उसे नेताओं और रसूखदार लोगों से नजदीकी बढ़ाने की सलाह दी गई थी। इसके जरिए इंदौर, उज्जैन समेत अन्य बड़े शहरों के ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की योजना थी।

    हालांकि, शराब ठेकेदार की शिकायत के बाद इंदौर पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने सागर स्थित श्वेता के घर पर छापा मारकर 9 मोबाइल फोन, कैमरे, मेमोरी कार्ड, पेन कैमरे और बटन कैमरे समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। पुलिस के अनुसार, इन उपकरणों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों के वीडियो बनाने के लिए किया जाता था।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में अन्य कितने लोग शामिल थे और किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।

    फोटो और वीडियो के जरिए दबाव बनाने का आरोप
    पुलिस के अनुसार, चालान में यह उल्लेख किया गया है कि श्वेता और उसके साथियों ने संगठित तरीके से लोगों को निशाना बनाने और फोटो-वीडियो के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल कर अवैध वसूली की कथित योजना बनाई थी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपितों पर फोटो और वीडियो के माध्यम से लोगों को डराने और आर्थिक लाभ लेने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।

    9 मोबाइल और दो पेनड्राइव की फॉरेंसिक रिपोर्ट बाकी
    मामले में पुलिस ने नौ मोबाइल फोन, दो पेनड्राइव सहित अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण जब्त किए हैं। इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। जांच एजेंसियां इन उपकरणों से फोटो, वीडियो, चैट, अन्य डिजिटल डाटा और संभावित ब्लैकमेलिंग से जुड़े प्रमाण तलाश रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इलेक्ट्रानिक उपकरणों में कोई आपत्तिजनक, परिवर्तित या डीपफेक सामग्री मौजूद है या नहीं। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

    नए सबूत मिले तो पेश होगा पूरक चालान
    पुलिस अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रानिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के बाद यदि कोई नया और महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलता है तो उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। ऐसी स्थिति में न्यायालय में पूरक चालान पेश किया जा सकता है। मामले में संगठित अपराध से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस का कहना है कि अब चालान पेश होने के बाद न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। आरोप तय होने के बाद मामले का नियमित विचारण शुरू होगा।

    चार साल पहले भी आया था श्वेता का नाम
    चार साल पहले सामने आए चर्चित हनीट्रैप मामले में भी श्वेता जैन का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था। पुलिस जांच में आरोप लगा था कि श्वेता ने अपने संपर्क में आई आरती दयाल को गिरोह में शामिल किया और उसके जरिए इंदौर नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को हनीट्रैप में फंसाया गया।

    बताया गया कि हरभजन सिंह ने आरती के लिए इंदौर के एक होटल में कमरा बुक कराया था। आरोप है कि वहां उनका वीडियो बनाया गया और बाद में पैसों की मांग शुरू कर दी गई। इसके बाद हरभजन सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी। उस समय पुलिस ने इंदौर और भोपाल से हनीट्रैप गिरोह से जुड़ी चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। यह मामला पूरे प्रदेश में काफी चर्चित रहा था। बाद में डेढ़ साल पहले हरभजन सिंह रीवा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे।

    अब आगे क्या होगा?
    पुलिस ने इस मामले में करीब 600 पेज का पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। अब गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपों को साबित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस गिरोह के कथित मददगारों की भी तलाश कर रही है। जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह के संपर्क में कौन-कौन है। 

    अब तक सात आरोपितों पर कार्रवाई
    हनी ट्रैप पार्ट-2 मामले में पुलिस अब तक कुल सात लोगों को आरोपित बना चुकी है। पुलिस का चालान मुख्य रूप से कारोबारी चिंटू ठाकुर की शिकायत, आरोपितों के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए अन्य साक्ष्यों पर आधारित है।

  • फेफड़ों पर डबल अटैक! MP में वायरल और निमोनिया के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

    फेफड़ों पर डबल अटैक! MP में वायरल और निमोनिया के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में बदलते मौसम के चलते बीमारियों का स्वरूप भी बदलता जा रहा है। इस मौसम में जहां वायरल संक्रमण से लोग पीड़ित हो रहे हैं, वहीं दूसरी और बैक्टीरियल निमोनिया के मामले भी सामने आ रहे हैं। यानी कई मरीजों के फेफड़ों पर संक्रमण की दोहरी मार पड़ रही है। ऐसे मरीज सांस फूलने, ऑक्सीजन लेवल कम होने और तेज बुखार की शिकायत लेकर राजधानी भोपाल के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। खासतौर पर बुजुर्ग और बच्चे तथा वैसे मरीज जिन्हें पहले से सांस, ह्रदय या डायबिटीज की बीमारी है, उनमें इस तरह के संक्रमण का जोखिम ज्यादा है।

    आरआरआई में रोजाना 4-5 मरीज

    रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज (आरआइआरडी) की ओपीडी में रोजाना 4-5 मरीज निमोनिया की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। संस्थान के अधीक्षक डॉ. लोकेन्द्र दवे के अनुसार, इनमें हर दिन तीन से चार मामले वायरल निमोनिया के हैं। कुछ मरीजों में वायरल संक्रमण के साथ बैक्टीरियल संक्रमण भी पाया जा रहा है। जेपी अस्पताल में भी रोज 2-3 निमोनिया के मरीज पहुंच रहे हैं।

    दोनों फेफड़ों को प्रभावित करता है संक्रमण
    बाइलेट्रल निमोनिया में संक्रमण दोनों फेफड़ों में सूजन और तरल पदार्थ जमा हो सकता है। नतीजतन शरीर को पर्याह्रश्वत ऑक्सीजन नहीं मिलती। मरीज को बुखार, खांसी, बलगम, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऑक्सीजन स्तर लगातार कम होना गंभीर स्थिति का संकेत है। बुजुर्ग और बीमार मरीज विशेष सावधानी बरतें: अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोग, डायबिटीज और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। भीड़ में मास्क लगाएं, हाथों की स्वच्छता रखें और धूम्रपान से बचें। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें।

    ऐसे मामले आ रहे सामने
    -केस- : 58 वर्षीय राजेंद्र बीते चार दिन से बुखार – खांसी से पीडि़त थे। सांस फूलने लगी तो वे अस्पताल पहुंचे। वहां सीटी स्कैन में दोनों फेफड़ों में संक्रमण मिला।

    -केस-2: जवाहर नगर में रहने वाली संगीता को बुखार के बाद खांसी और सांस फूलने की समस्या हुई। ऑक्सीजन स्तर 92 फीसद हो गया। सीटी स्कैन में दोनों फेफड़ों में संक्रमण के पैच दिखाई दिए।

    इनके लिए हो सकता है गंभीर
    इस संबंध में गांधी मेडिकल कॉलेज के सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत श्रीवास्तव का कहना है कि, संक्रमण के बाद फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसे सेकंडरी बैक्टीरियल निमोनिया कहा जाता है। बुजुर्ग व फेफड़ों की बीमारी के मरीजों में संक्रमण गंभीर हो सकता है।

  • कर्नल सोफिया केस में मंत्री विजय शाह को राहत, अभियोजन की अनुमति का प्रस्ताव खारिज

    कर्नल सोफिया केस में मंत्री विजय शाह को राहत, अभियोजन की अनुमति का प्रस्ताव खारिज

    भोपाल
     ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह को बड़ी राहत मिल गई है. मोहन यादव कैबिनेट ने विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा न चलाने की अनुशंसा की थी जिसपर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मुहर लगा दी है. बीते 25 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अभियोजन की अनुमति न देने की अनुशंसा का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा गया था। 

    वहीं, सोमवार 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम ने बताया था कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश की जा चुकी है. आगे की कार्रवाई के लिए अभियोजन की मंजूरी का इंतजार है, जिस पर अंतिम फैसला राज्यपाल के स्तर पर लंबित है। 

    अब दाखिल होगी क्लोजर रिपोर्ट
    मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या जांच पूरी होने के बाद अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार है. इस पर सरकार की ओर से हां में जवाब दिया गया. कोर्ट को बताया गया कि अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद जांच रिपोर्ट संबंधित सक्षम अदालत में पेश की जाएगी. वहीं, यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी. वहीं, अब राज्यपाल द्वारा अभियोजन की अनुमति न देने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जायेगी। 

    राज्यपाल ने पुनर्विचार का भरोसा दिया है
    नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की कथनी और करनी में अंतर है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि वे इस मामले में पुनर्विचार करें और सरकार को मंत्री के खिलाफ केस चलाने के निर्देश दें। सिंघार ने बताया कि राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वे मामले में पुनर्विचार करेंगे और सरकार से चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल इस मामले में उचित निर्णय लेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए सिंघार ने सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सरकार कोर्ट के आदेश की भी परवाह नहीं करती है तो क्या भाजपा की सरकार कोर्ट से बड़ी हो गई है? क्या वह सर्वोच्च न्यायालय से भी बड़ी हो गई है? उन्होंने कहा कि इस सवाल को वह देश और विदेश की जनता के सामने छोड़ रहे हैं।

    कांग्रेस का आरोप है कि विजय शाह के विवादित बयान के मामले में सरकार ने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय अभियोजन की मंजूरी के प्रस्ताव को मंजूरी देकर मामले को राज्यपाल के पाले में डाल दिया है। पार्टी अब राज्यपाल से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रही है।

    केके मिश्रा बोले- ऐसे फैसले में राज्यपाल का शामिल होना पद की गरिमा के खिलाफ
    पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने विजय शाह मामले में राज्यपाल मंगू भाई पटेल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी पर अपमानजनक टिप्पणी के मामले में गैर-जमानती धाराओं में दर्ज संज्ञेय अपराध के बावजूद अभियोजन की स्वीकृति से जुड़े सरकार के फैसले में राज्यपाल का शामिल होना उनके संवैधानिक और निष्पक्ष पद की गरिमा के विपरीत है।

    मिश्रा ने कहा कि यह मामला देश की संप्रभुता, एकता-अखंडता और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है। न्यायपालिका के स्वतः संज्ञान के बाद एफआईआर दर्ज हुई है, ऐसे में लोकभवन को न्यायपालिका और संविधान को चुनौती देने वाले प्रतिष्ठान का रूप नहीं लेना चाहिए। उन्होंने व्यापमं मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि 2015 में तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव के खिलाफ भी हाईकोर्ट के निर्देश पर एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज की थी। मिश्रा ने राज्यपाल से लोकभवन की प्रतिष्ठा और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

    कैबिनेट ने यह बनाया था आधार
    कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों ने कहा था कि विजय शाह इस मामले में सार्वजनिक मंचों पर और लिखित रूप में चार बार माफी मांग चुके हैं. उनकी मंशा सेना या महिला अधिकारी का अपमान करने की कतई नहीं थी. इसलिए अब उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं बनता है. इस आधार पर विधिक सलाह लेकर राज्यपाल से अनुशंसा की गई थी। 

    विजय शाह का विवादित बयान क्या था
    बता दें कि 11 मई 2025 को विजय शाह ने महू के एक कार्यक्रम में विवादित बयान दिया था. जहां उन्होंने कहा कि "मोदीजी समाज के लिए जी रहे हैं. जिन्होंने हमारी बेटियों के सिंदूर उजाड़े. वो कटे पिटे लोगों को हमने उन्हीं की बहन भेजकर ऐसी की तैसी करवाई. उन्होंने कपड़े उतारकर कर हमारे हिंदूओं को मारा मोदीजी ने उनकी बहन को उनकी एसी की तैसी करने उनके घर पर भेजा." आगे ये बयान इतना आपत्तिजनक है कि इसे यहां कोट नहीं किया जा सकता। 

  • पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया 13 दिनों से लापता, हालात ऐसे कि खाना-पीना भी हुआ मुश्किल

    पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया 13 दिनों से लापता, हालात ऐसे कि खाना-पीना भी हुआ मुश्किल

    कटनी 

     कटनी की बहुचर्चित सीएसपी जमीन सौदा प्रकरण में कार्रवाई की रफ़्तार को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। एफआईआर दर्ज हुए 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामले में निलंबित पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीनों आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ़्त में नहीं आए हैं। सोमवार को मामले से जुड़े कुछ गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज हुए, जिससे जांच को आगे बढ़ाने की उम्मीद बनी है। दूसरी ओर एएसपी जबलपुर अंजना तिवारी की अगुवाई में गठित एसआईटी की जांच और आरोपितों की तलाश की गति धीमी नजर आ रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी नेहा पच्चीसिया की अरेस्टिंग की पूरी कोशिश की जा रही है। इसके लिए कई टीमें लगी हैं, उसे बार बार अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। इससे नेहा पच्चीसिया का खाना पीना तक मुहाल हो गया है। केस दर्ज होने पर सीएम मोहन यादव के सख्त रुख के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। इसके बाद से ही पूर्व सीएसपी फरार है।

    मामले में सोमवार को कुछ गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज किए गए। माना जा रहा है कि इन बयानों से जमीन सौदे और प्रकरण से जुड़े घटनाक्रम की कडिय़ां जोडऩे में मदद मिल सकती है। हालांकि बयान में क्या तथ्य सामने आए, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    अब कार्यालय के नए प्रभार पर नजर-
    दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद माना जा रहा है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी को सीएसपी कार्यालय का प्रभार देकर इसे दोबारा विधिवत शुरू कराया जा सकता है। हालांकि मामले की जांच और कार्यालय को लेकर जिले के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल कुछ भी कहने से बच रहे हैं। गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज होने के बावजूद अब बड़ा सवाल यही है कि तीनों आरोपियों की अरेस्टिंग कब होगी।

    13 दिन बाद भी तीनों भूमिगत
    मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। आरोप है कि हत्या के आरोपितों को डिफाल्ट बेल का लाभ दिलाने के साथ एक करोड़ से अधिक कीमत की जमीन को करीबी के नाम कम कीमत में कराने और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में उनकी भूमिका रही। एफआईआर के बाद से तीनों भूमिगत हैं। पुलिस ने अरेस्टिंग के लिए इनाम भी घोषित किया है, अब तक सफलता नहीं मिली। इस बीच अधिकारियों ने आरोपियों को जल्द पकड़ने का दावा किया है। पुलिस की कई टीमें उनके पीछे लगी हैं जिससे उन्हें बार बार ठिकाना बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दावों के उलट पुलिस अब तक तीनों को पकड़ नहीं लगा सकी है।

    सीएसपी कार्यालय में फिर लगा ताला
    एफआईआर दर्ज होने के बाद 21 अगस्त को सीएसपी कार्यालय सील किया गया था, ताकि प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों से छेड़छाड़ न हो। दो दिन पहले एसआईटी की टीम कार्यालय पहुंची और सील खोलकर रिकॉर्ड की जांच की। जरूरी दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कार्यालय में दोबारा ताला लगा दिया गया। दस्तावेजों से क्या अहम जानकारी मिली, इसकी जानकारी जांच एजेंसी ने सार्वजनिक नहीं की है।

  • मोहन सरकार के अहम फैसले: RGPV का होगा पुनर्गठन, 35 किमी लंबे पश्चिमी बाइपास को मंजूरी

    मोहन सरकार के अहम फैसले: RGPV का होगा पुनर्गठन, 35 किमी लंबे पश्चिमी बाइपास को मंजूरी

    भोपाल
     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। सरकार ने भोपाल में पश्चिमी बाइपास की पुनरीक्षित लागत को अपनी स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही, एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी की सलाहकार के पद पर नियुक्ति और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई है।

    35 किलोमीटर का होगा पश्चिमी बाइपास
    भोपाल में पश्चिमी बाइपास के निर्माण से जबलपुर से होकर इंदौर जाने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें 21 किलोमीटर का फेरा कम लगाना होगा। पहले इस मार्ग की कुल लंबाई 41 किलोमीटर तय की गई थी, लेकिन पुनरीक्षित योजना के तहत अब यह दूरी घटकर 35 किलोमीटर रह जाएगी। वन्य जीवों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रातापानी वन क्षेत्र में अंडरपास बनाए जाएंगे।

    के. साईं मनोहर बने सलाहकार, दिल्ली में रहेगा मुख्यालय
    प्रशासनिक कसावट और समन्वय के उद्देश्य से कैबिनेट ने सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी के. साईं मनोहर को सलाहकार नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है। इस नई जिम्मेदारी के तहत उनका मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रहेगा।

    तीन हिस्सों में बंटेगा आरजीपीवी, कौशल विकास से भी जुड़ेगा
    तकनीकी शिक्षा के विस्तार और विकेंद्रीकरण के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को अब तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। इसके तहत विश्वविद्यालय के तीन अलग-अलग मुख्यालय भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में बनाए जाएंगे। इसके अलावा, कैबिनेट ने इन तीनों विश्वविद्यालयों की शिक्षा प्रणाली के साथ कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को भी अनिवार्य रूप से जोड़ने की अनुमति प्रदान कर दी है।

    7,331 से 26 हजार गांवों तक पहुंचेगी डेयरी सहकारी समितियां
    कैबिनेट ने पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के लिए करीब 2,973 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक किया जाएगा। दूध संकलन की क्षमता 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं दूध प्रसंस्करण क्षमता 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन और दुग्ध पैकेट की बिक्री 7 लाख लीटर से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है।

    ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी 25 से बढ़कर 60 प्रतिशत
    किसानों के लिए भी कैबिनेट ने अहम फैसला लिया है। ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी का लक्ष्य 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह खरीदी निर्धारित उपार्जन लक्ष्य के भीतर होगी, इसलिए किसानों को उपज बेचने में परेशानी नहीं होगी।

    पश्चिमी भोपाल बायपास की लागत बढ़कर 3,225 करोड़
    लोक निर्माण विभाग के प्रस्तावों में पश्चिमी भोपाल बायपास फोरलेन परियोजना की लागत को बढ़ाकर करीब 3,225 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी गई है। पहले इसकी लागत 2,981 करोड़ रुपये थी। भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में बदलाव और रातापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अतिरिक्त अंडरपास बनाए जाने के कारण लागत बढ़ी है। हालांकि परियोजना की लंबाई करीब 40 किलोमीटर से घटकर 35.61 किलोमीटर हो गई है। इसके बनने के बाद जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर जाने वाले वाहनों को करीब 21 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी। वहीं  बीमना खिमालसा बायपास को भी फोरलेन बनाने का फैसला हुआ है। क्षेत्र में रिफाइनरी और रेलवे यार्ड के कारण यातायात बढ़ने को देखते हुए करीब 2,670 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण किया जाएगा। 

    जनविश्वास अभियान अब 11 सितंबर से
    मुख्यमंत्री मोहन यादव का जनविश्वास अभियान लगातार जारी रहेगा। चार सप्ताह में मुख्यमंत्री छिंदवाड़ा, बड़वानी, टीकमगढ़ और बालाघाट में कार्यक्रम कर चुके हैं। बालाघाट के नक्सल प्रभावित रहे दूरस्थ क्षेत्रों में भी मुख्यमंत्री ने पहुंचकर स्थानीय लोगों से संवाद किया। जन्माष्टमी के कारण अभियान की अगली तारीख में बदलाव किया गया है। पहले 4 और 5 सितंबर को कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन अब जनविश्वास अभियान 11 सितंबर से फिर शुरू होगा।

    ग्रामीण विकास में 60:40 का फॉर्मूला
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े प्रस्ताव में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तीय व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई। इसमें राज्य का हिस्सा करीब 10,574 करोड़ रुपये होगा। प्रत्येक जिले में शिकायतों के निराकरण के लिए एक लोकपाल की नियुक्ति भी की जाएगी।

    तीन नए जिलों में खुलेंगे सामाजिक न्याय विभाग के कार्यालय
    2023 में गठित मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा जिलों में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के कार्यालय संचालित नहीं थे। कैबिनेट ने इन जिलों में कार्यालय शुरू करने के लिए पदों की स्वीकृति दी है। प्रत्येक जिले में कार्यालय संचालन के लिए अमले की नियुक्ति की जाएगी। 

    प्रदेश का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) अब तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। मोहन यादव सरकार मध्य भारत, महाकौशल और मालवा रीजन के लिए अलग-अलग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बनाने जा रही है। मंजूरी के बाद प्रदेश में तीन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हो जाएंगे।तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक भोपाल का मौजूदा RGPV मध्य भारत प्रांत का विश्वविद्यालय होगा। वहीं जबलपुर में महाकौशल विश्वविद्यालय और उज्जैन में मालवा क्षेत्र का विश्वविद्यालय मुख्यालय बनाया जाएगा।

    सरकार ने अपने दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर आयोजित 45 सूत्रीय विशेष एजेंडा बैठक में प्रदेश की मेडिकल और इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी को तीन भागों में बांटने का निर्णय लिया था। पिछली कैबिनेट बैठक में जबलपुर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी को विभाजित करने का फैसला हो चुका है। अब इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के विभाजन का प्रस्ताव लाया जा रहा है।

    डेयरी विकास योजना को भी मंजूरी की तैयारी
    कैबिनेट बैठक में पशुपालन विभाग की डेयरी विकास योजना से जुड़ा प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इसमें नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) और राज्य सरकार के स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के बीच हुए एमओयू को आगे बढ़ाने के लिए योजना को मंजूरी दी जाएगी। योजना का उद्देश्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के विकास और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना है।

    ईओडब्ल्यू में विधि सलाहकार की नियुक्ति
    आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में रिक्त विधि सलाहकार के पद पर सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देव नारायण शुक्ल के चयन को मंजूरी दी गई। यह पद एक मार्च से रिक्त था और इसके लिए विज्ञापन जारी कर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। 

    भ्रष्टाचार के दोषी वनकर्मी की पूरी पेंशन रोकने का प्रस्ताव
    वन विभाग में पदस्थ रहे उप वन क्षेत्रपाल अब्दुल तनवीर खान को रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले में न्यायालय ने चार साल के कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। वे 2024 में निलंबन की स्थिति में सेवानिवृत्त हुए। कैबिनेट ने उनकी संपूर्ण पेंशन स्थायी रूप से रोकने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

    इंदौर बाल गृह मामले में अधिकारी की पेंशन में कटौती
    इंदौर के विशेष गृह बालक से बच्चों के पलायन के मामले में अधीक्षक राजीव जिवेदी को निलंबित किया गया था। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए। कैबिनेट ने उनकी पेंशन में से एक वर्ष तक 5 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय लिया। इस पर लोक सेवा आयोग की सहमति भी प्राप्त हो चुकी है।

    जून तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत
    कैबिनेट बैठक में देश की आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 6.9 प्रतिशत थी। बैठक में इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन के रूप में रेखांकित किया गया। 

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल सख्त, बोले- निर्धारित समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहें चिकित्सक

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल सख्त, बोले- निर्धारित समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहें चिकित्सक

    ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक निर्धारित समय पर उपस्थित रहें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने तथा आमजन को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक निर्धारित समय पर उपस्थित रहें, इसे सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निगरानी व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से लागू की जाएं। चिकित्सकों की उपस्थिति एवं कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में विभाग में अन्य रिक्त पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया को गति देने और मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह, आयुक्त धनराजू एस उपस्थित रहे।

     

  • भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का प्रमाण 7.8% GDP ग्रोथ, CM डॉ. यादव ने PM मोदी को दिया श्रेय

    भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का प्रमाण 7.8% GDP ग्रोथ, CM डॉ. यादव ने PM मोदी को दिया श्रेय

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत होना गर्व का विषय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प से भारत विश्व की सबसे तेज गति से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में गिना जाने लगा है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व की सभी अनिश्चतताओं और चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है, यह भारतवासियों के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में समान रूप से आगे बढ़ रहा है। जनकल्याणकारी योजनाएं और जनहितैषी गतिविधियां देश में आर्थिक समृद्धि बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही भारत की वैश्विक स्तर पर भी कीर्ति और प्रसिद्धि भी बढ़ रही है।

     

  • सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन में कार्रवाई, केडी गेट स्थित मदीना मस्जिद का हिस्सा हटाया गया

    सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन में कार्रवाई, केडी गेट स्थित मदीना मस्जिद का हिस्सा हटाया गया

    उज्जैन 

    शहर में सुगम यातायात और विकास कार्यों को गति देने के लिए नगर पालिक निगम द्वारा चलाए जा रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। गाड़ी अड्डा चौराहा से केडी गेट होते हुए सोमवरिया तक बनने वाले 2.2 किलोमीटर लंबे और 18 मीटर चौड़े मार्ग के निर्माण में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया जारी है।

    सड़क की जद में आए धार्मिक स्थलों के हिस्से हटाए
    इसी क्रम में नगर निगम की टीम ने जोन-1 के अंतर्गत केडी गेट स्थित मदीना मस्जिद (जमीयतुल कुरेश कस्साबान कसाई वाड़ा) और शिया दाऊदी बोहरा जमात की दाऊल इमारत के चौड़ीकरण की जद में आ रहे प्रभावित हिस्सों को हटाया। 

    पोकलेन और जेसीबी से हटाए गए निर्माण
    चौड़ीकरण की जद में आ रहे निर्माणों को नगर नि
    गम की रिमूवल गैंग ने पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त किया। कार्रवाई के दौरान टीम ने सड़क निर्माण में बाधा बन रहे हिस्सों को हटाने का काम किया। 

    अधिकारियों की निगरानी में चला अभियान
    पूरी कार्रवाई सहायक आयुक्त घनश्याम मचार, भवन अधिकारी राजकुमार राठौर और भवन निरीक्षक शिवम गुप्ता की देखरेख में संपन्न हुई। अधिकारियों की मौजूदगी में नगर निगम की टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया।

    सुरक्षा के लिए तैनात रहा पुलिस बल
    कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा। पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम की टीम ने प्रभावित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की। 

    18 मीटर चौड़ा मार्ग बनने से घटेगा ट्रैफिक दबाव
    नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, 18 मीटर चौड़े इस मार्ग के बनने से केडी गेट और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा और आवागमन सुचारू हो सकेगा। प्रभावित हिस्सों को हटाने के बाद आगे के निर्माण कार्य को तेजी से पूरा किया जाएगा। 

  • 1.21 लाख छात्रों को बड़ी सौगात, CM बोले- असफलता से सीखें और आगे बढ़ें

    1.21 लाख छात्रों को बड़ी सौगात, CM बोले- असफलता से सीखें और आगे बढ़ें

    भोपाल

    क्या आपके बैंक खाते में 25000 रुपये आए? मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने आज 1 सितंबर को 'प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना' के अंतर्गत 1.21 लाख छात्रों के खाते में 340 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं। यह पैसा मेधावी छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए दिए गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में "प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना" अंतर्गत एक विद्यार्थी के माध्यम से प्रदेश के 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन छात्रों को लैपटॉप के लिए पैसा दिया है, जिन्होंने इस साल 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे ज्यादा नंबर हासिल किए हैं।

    मुख्यमंत्री ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब वे गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाले लड्डू के लिए भी तरस जाते थे। आज परिस्थितियां बदल गई हैं। उन्होंने बच्चों से कहा- "आज लर्न करोगे तो कल अर्न करोगे।" कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए गए, जबकि 1.21 लाख विद्यार्थियों के खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए।

    पत्थर और मूर्तिकार का उदाहरण देकर समझाया
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस पत्थर में छेनी-हथौड़ी की चोट सहने की क्षमता होती है, वही आगे चलकर सुंदर मूर्ति बनता है और मंदिर में सम्मान पाता है। इसी तरह जिंदगी की कठिनाइयां व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी मैदान में उतरेगा, वही हार सकता है और वही जीतने का सपना भी देख सकता है।

    धीरेंद्र बोले- UPSC के बाद राजनीति में आऊंगा
    12वीं में 97.2% अंक हासिल करने वाले धीरेंद्र सिंह मुंडेला ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनका लक्ष्य पहले यूपीएससी की तैयारी करना और आगे राजनीति में आकर देश के विकास में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि घूमने के दौरान लोगों की परेशानियां देखने के बाद उन्होंने राजनीति में जाने का फैसला किया।

    95% अंक हासिल करने वाली हिमांशी पाठक ने एंटरप्रेन्योर बनने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में एयर होस्टेस के रूप में काम करने के बाद खुद का बिजनेस शुरू करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य नौकरी पाने के बजाय नौकरी देने वाली बनना है।

    लड्डू भी नहीं मिलते थे
    कांग्रेस के शासन काल की बात करते हुए सीएम बोले कि आज तो अच्छा दौर है। आप लोगों को लैपटॉप मिल रहा है। हम तो गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर लड्‌डू लेने को भी तरस जाते थे।

    473 विद्यार्थियों से शुरू हुई योजना, अब 1.21 लाख तक पहुंची

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की योजना की शुरुआत 473 विद्यार्थियों से हुई थी। इस बार 1 लाख 21 हजार 804 विद्यार्थी इसके दायरे में आए हैं। कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए गए, जबकि पात्र विद्यार्थियों के खातों में 25-25 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए।

    उन्होंने कहा कि लैपटॉप केवल उपकरण नहीं, बल्कि डिजिटल लर्निंग, ई-लाइब्रेरी और उच्च शिक्षा में ज्ञान बढ़ाने का माध्यम है।

    विद्यार्थियों को लैपटॉप दिया
    सीएम मोहन यादव ने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की कामना की और उनके साथ सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई।

    मुख्यमंत्री ने दिया खास संदेश
    इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छात्रों को खास संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों से ये कहना चाहता हूं कि आपकी इस सफलता को कभी सिर पर नहीं चढ़ने देना, और जब कभी असफलता भी आए तो उसे दिल पर मत लगाना। हर परिस्थिति में सामान्य रहकर आगे बढ़ते रहना। अच्छा इंसान कागज के नंबर से नहीं बल्कि अच्छे मन से बढ़ता है। आपका ज्ञान और दक्षता आपकी सफलता में सदैव सहायक रहेंगे। गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं में मैरिट सूची में 50% से अधिक विद्यार्थी शासकीय स्कूलों से आ रहे हैं।

    9वीं कक्षा से ही शिक्षक कर रहे मेहनत
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आगे कहा कि ऐसे विद्यालय, जहां शिक्षक कक्षा 9वीं से ही विद्यार्थियों के साथ निरंतर मेहनत करते हैं। उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करते हैं और न केवल 10वीं, बल्कि 12वीं बोर्ड परीक्षा में भी सभी विद्यार्थियों को प्रथम श्रेणी में लाने का लक्ष्य हासिल करते हैं। ऐसे विद्यालय वास्तव में शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं। विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता और लगातार तीन वर्षों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर ऐसे विद्यालयों को सम्मानित करने का हमारी सरकार ने निर्णय लिया। मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हो रही यह उपलब्धि मेरे लिए गर्व का विषय है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और हमारे शिक्षकों की इस सफलता से आज मेरी छाती गर्व से चौड़ी हो रही है।

    इन छात्रों को लैपटॉप के लिए मिला पैसा
    मध्य प्रदेश के जिन छात्र-छात्राओं के एमपी बोर्ड 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे जयादा नंबर आए थे, वे इस योजना के पात्र हैं। पिछले साल करीब 92 हजार छात्र-छात्राओं को लैपटॉप के लिए पैसा मिला था। इस बार यह संख्या बढ़कर 1.21 लाख हो गई है। अगर आप यह चेक करना चाहते हैं कि आपके खाते में पैसा आया है या नहीं तो आपको कुछ नहीं करना है। बस आधार से लिंक अपना वही खाता चेक करना है, जिसकी जानकारी स्कूल में दी गई थी। इसी खाते में डीबीटी के माध्यम से पैसा ट्रासंफर हो जाएगा।

    मुख्यमंत्री का विद्यार्थियों संग संवाद
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर ही विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। छात्र वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि मैं राजनेता बनना चाहता हूं। इस पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि यह भी हमारे लिए जरूरी है। बच्चे राजनेता बनकर देश को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक सवाल के जवाब में बुंदेला ने कहा कि मैंने लोगों की परेशानी देखी है। एक राजनेता उन परेशानियों को दूर कर सकता है।

    इसके बाद सीएम डॉ. मोहन ने बच्चों से पूछा कि किस-किस के घर में खेती-किसानी होती है और कौन-कौन किसान बनना चाहता है। उन्होंने छात्रों की प्रतिक्रिया देखने के बाद कहा कि हमारी जड़ खेती-किसानी है। बच्चे कहते हैं डॉक्टर बनेंगे, वकील बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे, लेकिन कोई नहीं कहता कि मैं किसान बनना चाहता हूं। आप बताइए खेती के बिना काम चलेगा क्या। उन्होंने कहा कि किसान अगर मेहनत करके अन्न नहीं उगाएगा, तो क्या होगा। इसी तरह अगर हम राजनीति करने के लिए खड़े नहीं होंगे, तो अच्छे राजनेता कहां से आएंगे। छात्रा हिमांशी पाठक ने कहा कि मैं शुरुअात एयर होस्टेस बनकर करना चाहती हूं, लेकिन मेरा अंतिम उद्देश्य एंटरप्रिन्योर बनना है।

    बच्चे छोटे, लेकिन सपने और प्रयास बड़े हैं
    छात्रा मान्यता साहू ने कहा कि मैं इस लैपटॉप से बहुत काम करूंगी। ये लैपटॉप मेरी बहुत मदद करेगा। अरिमा इमरान ने कहा कि मैं नीट का एग्जाम दूंगी और मेरा उद्देश्य डॉक्टर बनना है। मैं गरीबों की सेवा करना चाहती हूं। उसके बाद कीर्ति ने माइक हाथ में थामा। उसके हाथ में लगी मेहंदी देखकर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि मैं भी मेहंदी लगा लेता हूं। अपनी बहन को मैं ही मेहंदी लगाता था।

    सरकारी स्कूल में शून्य हुआ ड्रॉप आउट
    स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था बेहतर हो रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लैपटॉप राशि दी जा रही है। पिछले साल भी लगभग 92 हजार विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए थे। माता-पिता और बच्चों का परिश्रम तथा शिक्षकों का बेहतर प्रबंधन के कारण ही इस वर्ष 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थी लैपटॉप प्राप्त करने के लिए पात्र बने हैं।

    यह लैपटॉप विद्यार्थियों की कॉलेज की पढ़ाई को सरल और डिजिटल करेगा। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत डिजिटलीकरण को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले ढाई साल में लगभग पौने 3 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि वितरित की है। लैपटॉप खरीदने के लिए प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब तक कुल साढ़े 6 लाख विद्यार्थियों को 1620 करोड़ रुपए विद्यार्थियों के खातों में भेजे गए हैं।

    प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले 3 साल में प्रवेश दर बढ़ती जा रही है। हमारी सरकार के प्रयासों से स्कूली बच्चों की ड्रॉप आउट दर शून्य हो गई है। स्कूलों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। हमारे स्कूलों में 70 से 72 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। राज्य सरकार लगभग 18 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चे हमारे देश का भविष्य और प्रदेश की आशा हैं। हमारे बच्चे 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे।

     

  • भोपाल में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन, सीलिंग के विरोध में CM हाउस कूच; बंद की चेतावनी

    भोपाल में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन, सीलिंग के विरोध में CM हाउस कूच; बंद की चेतावनी

    भोपाल 

    भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी के खिलाफ मंगलवार सुबह 9 बजे से नगर निगम की कार्रवाई फिर शुरू हो गई। कोहेफिजा स्थित चाय लीला कैफे समेत होटल, बुक शॉप और बैकरी पर सीलिंग की कार्रवाई की गई।रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ मंगलवार को भोपाल में व्यापारी सड़कों पर उतर आए। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारी सुबह 11 बजे न्यू मार्केट स्थित नानके पेट्रोल पंप पर जुटे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने सीएम हाउस की ओर बढ़े। रोशनपुरा चौराहे से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।

    बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़े व्यापारी, धक्का-मुक्की
    व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने सख्ती की और प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। धक्का-मुक्की के बीच कुछ व्यापारी नीचे भी गिर गए। प्रदर्शन में व्यापारी लगातार सीलिंग कार्रवाई रोकने और सरकार से राहत देने की मांग कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि चाहे लाठी खानी पड़े, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा।

    'कारोबार बंद हुआ तो रोजी-रोटी पर संकट'
    व्यापारियों का कहना है कि शहर में कई दुकानें 50 से 60 साल पुरानी हैं। सरकार ने इन्हें जीएसटी नंबर, गुमाश्ता लाइसेंस और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन तक दिए हैं। ऐसे में अब अचानक सीलिंग की कार्रवाई से हजारों कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बैंक से लिए गए कर्ज की किस्त, कर्मचारियों की तनख्वाह और परिवार की जिम्मेदारियां भी प्रभावित होंगी। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अजय देवनानी ने कहा कि व्यापारियों की मांग है कि व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। इसके लिए मिश्रित भू-उपयोग और क्षेत्रवार योजना लागू की जा सकती है। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर तत्काल राहत देने की मांग की है।

    चार दिन से नोटिस नहीं, सीधे कार्रवाई का आरोप
    व्यापारियों का आरोप है कि पिछले चार दिनों से प्रतिष्ठानों को नए नोटिस नहीं दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई की जा रही है। निगम अधिकारियों का कहना है कि नोटिस देने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों का परीक्षण किया जा रहा है और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

    दूसरे दिन भी कैफे-होटल समेत कई प्रतिष्ठान बंद
    इधर, व्यापारियों के प्रदर्शन के बीच मंगलवार सुबह 9 बजे से नगर निगम ने दूसरे दिन भी कार्रवाई शुरू कर दी। कोहेफिजा स्थित चाय लीला कैफे सहित होटल, बुक शॉप और बेकरी पर कार्रवाई की गई। कई संचालकों ने निगम की टीम पहुंचने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान स्वैच्छिक रूप से बंद कर दिए। बैरागढ़ के चंचल चौराहे पर होटल प्रेस्टिसाइड और शैक बार, इकबाल मैदान में स्वीट बुक, करोंद में फ्रेश बेकरी और कोहेफिजा में चाय लीला को बंद कराया गया। कई प्रतिष्ठानों के बाहर संचालकों ने खुद ही बंद होने के पोस्टर लगा दिए थे। इससे पहले सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में 7 प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, जबकि 102 दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान स्वैच्छिक रूप से बंद कर दिए थे।

    किन इलाकों में नगर निगम की कार्रवाई?
    नगर निगम की टीमें मंगलवार को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कार्रवाई कर रही हैं। इनमें उत्तर विधानसभा के कोहेफिजा, सिंधी कॉलोनी और कबाड़खाना; नरेला विधानसभा के करोंद और सुभाष नगर; दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के न्यू एमपी-एमएलए कॉलोनी; मध्य विधानसभा के जहांगीराबाद, शादी हॉल और करबला रोड; गोविंदपुरा के बाग मुगालिया, अमराई, सहयोग विहार, रघुनाथ नगर, रोहित नगर और ज्योतिनगर, जबकि हुजूर विधानसभा के चंचल नगर, सीहोर नाका, गांधी नगर और सीटीओ क्षेत्र शामिल हैं।

    शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
    आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति में व्यवधान पैदा हो रहा है। उनका आरोप है कि कुछ इलाकों में असामाजिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। स्कूलों के आसपास बढ़ते यातायात से बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कार्रवाई सिर्फ छोटे कारोबारियों तक सीमित है और बड़े व रसूखदार लोगों को छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि निगम की पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाई जाएगी।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई सीलिंग
    आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को है। इस दौरान नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है। इसी के चलते शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई है।

    व्यापारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
    व्यापारियों ने रहवासी इलाकों में पुरानी दुकानों और कारोबार के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने, मिश्रित भू-उपयोग और क्षेत्रवार योजना लागू करने, वर्षों से चल रहे कारोबार को अचानक सील नहीं करने, सरकार द्वारा दिए गए लाइसेंस और व्यावसायिक सुविधाओं को ध्यान में रखने तथा छोटे कारोबारियों को राहत देने की मांग की है। साथ ही बड़े और प्रभावशाली व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी समान कार्रवाई की मांग उठाई है।