Category: मध्य प्रदेश

  • 4838 शिविरों में 2 लाख 15 हजार 035 बिजली संबंधी शिकायतों का मौके पर निराकरण

    4838 शिविरों में 2 लाख 15 हजार 035 बिजली संबंधी शिकायतों का मौके पर निराकरण

    भोपाल

    बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का उनके घर के नजदीक त्वरित समाधान उपलब्ध कराने तथा मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा संचालित "संपर्क अभियान 2026" को उल्लेखनीय सफलता मिली है। 14 मई से प्रारंभ हुए इस विशेष अभियान के अंतर्गत भोपाल एवं ग्वालियर रीजन के 16 जिलों में अब तक 4,838 विशेष शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 2 लाख 15 हजार 035 उपभोक्ताओं की शिकायतों का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया। अभियान के माध्यम से उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर सुविधाजनक एवं त्वरित समाधान उपलब्ध कराते हुए विद्युत सेवाओं में पारदर्शिता, सुगमता और उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    भोपाल रीजन के वृत्तों में लगे शिविर

    भोपाल रीजन के अंतर्गत शहर वृत्त भोपाल में 359 शिविरों में 21,569 शिकायतों का निराकरण किया गया। बैतूल (ओ एंड एम) वृत्त में 427 शिविरों में 24,684 शिकायतों का निराकरण, भोपाल (ओ एंड एम) वृत्त में 246 शिविरों में 9,593 शिकायतों का निराकरण, हरदा वृत्त में 127 शिविरों में 17,477 शिकायतों का निराकरण, नर्मदापुरम वृत्त में 326 शिविरों में 26,368 शिकायतों का निराकरण, रायसेन वृत्त में 244 शिविरों में 16,378 शिकायतों का निराकरण, राजगढ़ वृत्त में 351 शिविरों में 4,798 शिकायतों का निराकरण, सीहोर वृत्त में 312 शिविरों में 7,106 शिकायतों का निराकरण तथा विदिशा वृत्त में 204 शिविरों में 10,940 शिकायतों का निराकरण किया गया।

    ग्वालियर रीजन के वृत्तों में लगे शिविर

    ग्वालियर रीजन के अंतर्गत शहर वृत्त ग्वालियर में 287 शिविरों में 5,844 शिकायतों का निराकरण किया गया। वहीं अशोकनगर वृत्त में 143 शिविरों में 15,781, भिंड (ओ एंड एम) वृत्त में 274 शिविरों में 5,625, दतिया (ओ एंड एम) वृत्त में 169 शिविरों में 7,430, गुना वृत्त में 247 शिविरों में 9,138, ग्वालियर (ओ एंड एम) वृत्त में 239 शिविरों में 4,316, मुरैना वृत्त में 377 शिविरों में 15,757, श्योपुर (ओ एंड एम) वृत्त में 182 शिविरों में 5,046 तथा शिवपुरी वृत्त में 324 शिविरों में 7,185 शिकायतों का निराकरण किया गया।

    इन शिकायतों और सेवाओं पर हुआ त्वरित काम

    इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट समाधान करना है। शिविरों में मुख्य रूप से त्रुटिपूर्ण बिल, मीटर रीडिंग एवं अन्य बिलिंग संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया गया। साथ ही मात्र 5 रुपये में नवीन ग्रामीण घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन प्रदान किए गए। इसके अलावा भार वृद्धि, नाम परिवर्तन, श्रेणी परिवर्तन, स्थायी कनेक्शन विच्छेदन, अस्थायी कनेक्शन, ई-केवाईसी, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC), बंद/खराब मीटर बदलना, स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों का निराकरण, सर्विस केबल सुधार, वोल्टेज संबंधी समस्याओं का समाधान, ट्रांसफार्मर से जुड़ी शिकायतों का निराकरण, बिजली बिलों का आंशिक एवं पूर्ण भुगतान, अग्रिम भुगतान पर छूट, बकाया राशि जमा कराने सहित विभिन्न जनहितैषी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ प्रदान किए गए।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  पाटिल से की मुलाकात

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल से की मुलाकात

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल से मंगलवार को नई दिल्ली में मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रीय मंत्री के साथ चर्चा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में जल संरक्षण, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा विभिन्न जल परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश के विकास के लिए केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

    केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  पाटिल से मुलाकात के दौरान प्रदेश में जल प्रबंधन एवं सिंचाई सुविधाओं के विस्तार सहित जनहित से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से मध्यप्रदेश में जल संसाधनों के विकास एवं संरक्षण को नई गति मिल रही है। 

  • भोपाल-इंदौर एवं उज्जैन-झालावाड़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की प्रक्रियाएँ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश

    भोपाल-इंदौर एवं उज्जैन-झालावाड़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की प्रक्रियाएँ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश

    भोपाल 

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने मंगलवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा प्रदेश में किए जा रहे निर्माण कार्यों तथा भविष्य के लिए प्रस्तावित वृहद सड़क परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वर्तमान में प्रगतिरत परियोजनाओं की स्थिति तथा प्रस्तावित नई परियोजनाओं की कार्ययोजना की जानकारी दी।

    बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, सड़क सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता तथा वर्षाकाल के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    मंत्री  सिंह ने भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तथा उज्जैन-झालावाड़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण इन वृहद सड़क परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। संबंधित स्तरों पर सभी आवश्यक कार्रवाई तेजी से पूरी की जाए।

    जबलपुर रिंग रोड के चार पैकेज दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश

    मंत्री  सिंह ने बैठक में जबलपुर रिंग रोड के निर्माण कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। रिंग रोड का निर्माण कुल पाँच पैकेजों में किया जा रहा है। इनमें चार पैकेजों में कार्य की प्रगति संतोषजनक पाई गई, जबकि पाँचवें पैकेज में अपेक्षित गति से कार्य नहीं होने पर कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

    मंत्री  सिंह ने चार पैकेजों का कार्य दिसंबर 2026 तक तथा पाँचवें पैकेज का कार्य जून 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे संपूर्ण जबलपुर रिंग रोड का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में पूरा हो सके।

    शहपुरा (भिटौनी) टोल पर अस्थायी रूप से बंद होगा टोल संग्रह

    भोपाल-जबलपुर मार्ग पर शाहपुर रेलवे ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के कारण यातायात को डायवर्ट किया जा रहा है। इसके चलते शहपुरा स्थित टोल पर लिए जा रहे टोल को लेकर स्थानीय समुदाय में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। मंत्री  सिंह ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शहपुरा (भिटौनी) टोल नाके पर अस्थायी रूप से टोल संग्रह बंद करने के निर्देश दिए।

    राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और गुणवत्ता पर विशेष जोर

    एनएचएआई के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि प्राधिकरण के सभी राष्ट्रीय राजमार्ग किसी न किसी अनुबंध के अंतर्गत संधारित किए जा रहे हैं। जिन सड़कों की परफॉर्मेंस गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है अथवा जिनके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, उनके रखरखाव के लिए शॉर्ट टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट तथा लॉन्ग टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से मरम्मत एवं संधारण कार्य कराया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि वर्षाकाल के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। मंत्री  सिंह ने निर्देश दिए कि प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव के स्तर को बेहतर बनाया जाए तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत में किसी भी प्रकार की देरी नहीं हो। उन्होंने नई प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं से संबंधित प्रक्रियाओं को भी गति देने के निर्देश दिए।

    जबलपुर-दमोह मार्ग की शीघ्र मरम्मत के निर्देश

    मंत्री  सिंह ने जबलपुर-दमोह मार्ग पर आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने उज्जैन-गरोठ मार्ग के निर्माण में सामने आई गुणवत्ता संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा निर्माण गुणवत्ता की जाँच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास केवल नई सड़क परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता, समयबद्धता, नियमित रखरखाव और सड़क सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को इन सभी विषयों पर सतत निगरानी रखते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। 

  • पुलिस मुख्‍यालय में हुआ राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन

    पुलिस मुख्‍यालय में हुआ राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन

    भोपाल 

    पुलिस मुख्यालय में सितंबर माह के प्रथम कार्य दिवस 01 सितंबर, मंगलवार को राष्ट्रगान जन गण मन एवं राष्ट्रगीत वंदे मातरम का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्‍तव,  अनिल कुमार गुप्‍ता, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक  योगेश चौधरी,  डी. निवास वर्मा,  सोलोमन यश कुमार मिंज सहित पुलिस मुख्यालय के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • आईआईआईटी भोपाल के ‘दीक्षारंभ-2026’ में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का किया आह्वान

    आईआईआईटी भोपाल के ‘दीक्षारंभ-2026’ में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का किया आह्वान

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति और संपदा हैं। उनकी जिज्ञासा, ज्ञान, परिश्रम, अनुसंधान एवं नवाचार की क्षमता ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी पूर्ण करेगा, तब भारत कैसा होगा, यह आज की युवा पीढ़ी के ज्ञान, परिश्रम और संकल्प से तय होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। मंत्री  परमार मंगलवार को भोपाल स्थित रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागृह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण समारोह-2026 ‘दीक्षारंभ’ के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आईआईआईटी भोपाल में चयनित सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    जिज्ञासा को अनुसंधान और समाधान से जोड़ें

    मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके मन में निरंतर जिज्ञासा बनी रहनी चाहिए। जिज्ञासा ही ज्ञान की पहली सीढ़ी है और ज्ञान को अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़कर ही देश की समस्याओं के प्रभावी समाधान खोजे जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी प्रतिभा और तकनीकी दक्षता का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास के लिए करें।

    मंत्री  परमार ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार, उद्योग और समाज के अनेक क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। विद्यार्थियों को इन परिवर्तनों को समझते हुए तकनीकी ज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में स्वयं को निरंतर तैयार करना होगा। आईआईआईटी भोपाल विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार का उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    2047 का भारत आज की युवा पीढ़ी तय करेगी

    मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष 2047 में भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो – इसके लिए आज से ही मजबूत आधार तैयार करना होगा। आज की युवा पीढ़ी ही 2047 के भारत का निर्माण करेगी। राष्ट्र निर्माण के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि परिश्रम, अनुशासन, जिम्मेदारी, संस्कार और कर्तव्यबोध भी आवश्यक हैं।

    मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि वे ऐसे नागरिक बनें, जिनके ज्ञान और आचरण से देश का सम्मान बढ़े। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्व पटल पर भारत का सम्मान और प्रतिष्ठा और अधिक बढ़े, इसकी जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। विद्यार्थियों का प्रत्येक सकारात्मक प्रयास राष्ट्र की प्रगति में योगदान देगा।

    भाषाएं जोड़ने का माध्यम हैं, तोड़ने का नहीं

    मंत्री  परमार ने भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है, तोड़ने का नहीं। भारत की भाषाई विविधता हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न भारतीय भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आने वाले समय में विभिन्न भाषाओं के अध्ययन और शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थी देश की विविध भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित हो सकें। इस अनुक्रम में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विविध भारतीय भाषाओं को क्रेडिट से जोड़कर सिखाने की कार्ययोजना पर कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा को ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार और भारतीय भाषाओं से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

    समारोह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक प्रो. आशुतोष कुमार सिंह, मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक प्रो. के.के. शुक्ला एवं भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल की अनुसंधान एवं विकास प्रभारी डॉ. नेहा सिंह सहित संस्थान के अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित थे।

     

  • नौनिहालों की सेहत को योगी सरकार का पोषण कवच, आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिल रहा पौष्टिक आहार

    नौनिहालों की सेहत को योगी सरकार का पोषण कवच, आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिल रहा पौष्टिक आहार

    लखनऊ

    प्रदेश में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और मजबूत पोषण की दिशा में योगी सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे प्रयासों का असर आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिखाई दे रहा है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपी में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे नियमित लाभान्वित हो रहे हैं।

    साप्ताहिक मेन्यू में पौष्टिक व विविध भोजन

    बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार, बच्चों को अलग-अलग दिनों में रोटी-सब्जी, चावल-दाल, मौसमी सब्जियों से तैयार तहरी और अन्य पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। योगी सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों को नियमित गर्म भोजन उपलब्ध कराकर सरकार एक ओर उनके पोषण स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर कम उम्र से ही संतुलित आहार की आदत विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।

    भोजन की गुणवत्ता पर खास नजर, स्वच्छता के मानकों का पालन अनिवार्य

    योगी सरकार ने बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट मानक तय किए हैं। कोटेदार से मिलने वाला खा‌द्यान्न उत्तम गुणवत्ता का होना अनिवार्य है। भोजन तैयार करने से पहले अनाज की अच्छी तरह सफाई और हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोने की व्यवस्था है। इससे बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

    परोसने से पहले दो वयस्क करते हैं भोजन की जांच

    भोजन बच्चों को परोसने से पहले कम से कम दो वयस्क व्यक्तियों जैसे शिक्षक, रसोइया या माता समिति के सदस्य द्वारा रोस्टर के आधार पर भोजन की जांच की जाती है। इसमें भोजन के स्वाद और गुणवत्ता को परखा जाता है। विभागीय व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बर्चा तक पहुंचने वाला भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित भी हो।

    32.88 लाख बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार

    अपर मुख्य सचिव (महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग) लीना जौहरी ने बताया कि इसके जरिए नियमित 32.88 लाख बच्चों को गर्म और पौष्टिक आहार मिल रहा है। प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 70 ग्राम खा‌द्यान्न से तैयार भोजन दिया जाता है। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण योजना की रसोई और संसाधनों का उपयोग कर तैयार किया जाता है। वहीं नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों पर स्थानीय निकार्यों या ग्राम पंचायतों की ओर से उपलब्ध कराए गए बर्तनों, गैस चूल्हे आदि की मदद से भोजन तैयार कराया जाता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अध्यक्ष  नितिन नबीन से की सौजन्य भेंट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अध्यक्ष नितिन नबीन से की सौजन्य भेंट

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में मंगलवार को सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन से सौजन्य भेंट की।

    मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव और  नितिन नवीन के बीच समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने  नबीन को मध्यप्रदेश में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति और गतिविधियों की जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के विभिन्न विभागों द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए किए जा रहे नवाचारों और प्रयासों से भी  नबीन को अवगत कराया।

     

  • दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के लिए 2 हजार 973 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के लिए 2 हजार 973 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति प्रदान की। राज्य में ग्रामीण विकास के ढांचे को गति देने के लिए 'विकसित भारत: वीबी जी राम जी योजना' के क्रियान्वयन के लिये 29 हजार 619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। इसके साथ ही प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रुपये और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के लिए 3 हजार 272 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है, जिससे राज्य में औद्योगिक और सभी तरह के आवागमन को नई ऊर्जा मिलेगी।

    उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन और गुणवत्ता विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य के दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और 'सांची' ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी गई।

    प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चिकित्सा उपकरणों और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज के उपार्जन सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया। साथ ही नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सामाजिक न्याय और आयुष विभागों में नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

    वीबी जी राम जी योजना के क्रियान्वयन के लिए 29 हजार 619 करोड़ रूपये का अनुसमर्थन

    मंत्रि-परिषद ने "विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी जी राम जी योजना मध्यप्रदेश" और इसके 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का अनुसमर्थन किया। योजना के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 में अनुमानित लागत रुपये 3,183 करोड़ रूपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना की निरंतरता के लिए कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रूपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। केंद्र और राज्य का अंश 60:40 के अनुपात में होगा, जिसमें राज्यांश 10 हजार 574 करोड़ रूपये होगा। इन पाँच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रूपये का व्यय होगा, जो राज्य शासन वहन करेगा।

    निर्णय अनुसार नई योजना अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। रोजगार के दिनों में की गई यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

    नई योजना का मुख्य आधार 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण बुनियादी ढांचे को तैयार करना है। अब प्रत्येक ग्राम पंचायत जी आई एस आधारित तकनीक, 'पीएम गति शक्ति' लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी। इन योजनाओं को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' में समेकित किया जाएगा।

    योजना अंतर्गत जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और अत्याधुनिक आजीविका मॉडल जैसे तकनीकी कार्यों के प्रभावी संपादन के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद में एक समर्पित राज्य-स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी।

    भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में प्राप्त होने वाले वित्तीय आवंटन को पारदर्शी और आवश्यकता-आधारित बनाने के लिए ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख, ग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।

    योजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है। साथ ही त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों का निराकरण करेंगे।

    मंत्रि-परिषद ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नई परिषद के पूर्ण गठन/पंजीकरण तक वर्तमान 'मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद' को ही इस नई योजना के समस्त दायित्वों के निर्वहन के लिए अधिकृत किया है।

    दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के लिए 2 हजार 973 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के उद्देश्य से 2 हजार 973 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। डेयरी विकास योजना के माध्यम सेआगामी 05 वर्ष में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7331 ग्रामों से बढ़ाकर 26,000 ग्रामों तक किया जायेगा।दुग्ध संकलन को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन किया जाएगा।दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन किया जाएगा।दुग्ध पैकेट विक्रय 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन लीटर किया जाएगा।कृत्रिम गर्भाधान कवरेज 15% से बढाकर 50% किया जाएगा ।

    एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन और प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य सहकार्यता अनुबंध (कोलेबोरेशन एग्रीमेंट) 13 अप्रैल 2025 को निष्पादित किया गया है। निष्पादित सहकार्यता अनुबंध के तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा 2 हजार 973 करोड़ की प्रस्तुत डेयरी विकास योजना पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। राज्य शासन द्वारा 500 करोड़ रूपये अधोसंरचना के लिए अनुदान एवं इसके अतिरिक्त भारत सरकार की योजनाओं पर स्वीकृति के अनुरूप अनुमानित 241 करोड़ रूपये का राज्यांश तथा योजना विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन की स्वीकृति दी गई है।

    पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के लम्बाई 35.61 कि.मी., निर्माण कार्य के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) अंतर्गत कुल परियोजना वित्तीय लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप की राशि 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया। इस बायपास के निर्माण से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इन्दौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल से नहीं गुजरना पड़ेगा और 21 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। पूर्व में पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर सहित हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) अंतर्गत लम्बाई-40.90 कि.मी. के लिए 2,981 करोड़ 65 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति 4 सितंबर 2023 को प्रदान की गई थी। पश्चिम भोपाल बायपास का एक रेखण भोपाल-जबलपुर मार्ग पर मण्डीदीप के समीप इटायाकलाँ से प्रारंभ होकर भोपाल-देवास मार्ग के ग्राम फंदा के समीप तक निर्मित किया जाना था, जिसकी लंबाई-40.90 कि.मी. थी। पश्चिम भोपाल बॉयपास क्षेत्र में रातापानी टाईगर रिजर्व घोषित हो जाने, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन के प्रभाव का समावेश करने, राज्य पुरातत्व विभाग की प्राचीन धरोहर शिव मंदिर (समसगढ़) एक रेखण पर आने तथा बायपास को पूर्वी बायपास से जोड़कर संपूर्ण रिंग रोड बनाने के कारण एक रेखण में परिवर्तन किया गया। एक रेखण में परिवर्तन से परियोजना की लागत में पूर्व स्वीकृति से 8.18 प्रतिशत वृद्धि होने से पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद से प्राप्त की गयी है।

    मंत्रि-परिषद के निर्णय अनुसार परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत 599 करोड़ 44 लाख रुपये का भुगतान कंसेशन अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन प्राप्त करने पर 10 किश्तों में एवं नेट पॉजिटिव सीओएस की राशि का भुगतान निर्माण अवधि में अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, राज्य राजमार्ग निधि के माध्यम से किया जायेगा। परियोजना निर्माण लागत की शेष 60% राशि रुपये 1,910 करोड़ 42 लाख रूपये का भुगतान एन्यूटी, ओएण्डएम एवं ब्याज सहित संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जायेगा।

    आरजीपीवी का पुनर्गठन कर 3 नये प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के संवर्धन, क्षेत्रीय संतुलन और अधोसंरचना की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी)भोपाल के स्थान पर अब राज्य में 3 पृथक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति दी है। ये विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में स्थापित होंगे। इस व्यवस्था अंतर्गत भोपाल स्थित वर्तमान विश्वविद्यालय को 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय', उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' तथा जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के रूप में स्थापित किया जाएगा।

    वर्तमान में आरजीपीवी अंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाए और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते है। स्वीकृत व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश के सभी तकनीकी महाविद्यालयों को संभागवार विभाजित कर नवीन गठित तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में सौंपा गया है। भोपाल स्थित 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग आएंगे। उज्जैन स्थित 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अंतर्गत उज्जैन और इंदौर संभाग रहेंगे। इसी प्रकार जबलपुर स्थित 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के क्षेत्राधिकार में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकी संस्थान शामिल किए जाएंगे। तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए पृथक अधिनियम लागू किए जाएंगे।

    उज्जैन एवं जबलपुर में नवीन स्थापित होने वाले दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक संचालन के लिए प्रारंभिक स्तर पर कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव तथा वित्त अधिकारी के पदों को मंजूरी दी गई है। साथ ही अन्य सहायक व तकनीकी पदों को नियमानुसार आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाएगा। इन पदों का वेतन आहरण प्रारंभिक रूप से विश्वविद्यालय की उपलब्ध राशि से किया जाएगा और ये संस्थान स्व-वित्तीय आधार पर संचालित होंगे।

    मंत्रि-परिषद ने तीनों विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं अनुवर्ती कार्यवाही को गति देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय 'मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति' के गठन की भी स्वीकृति प्रदान की है। इस समिति में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त, उच्च शिक्षा और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवों एवं मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वद्यालय के कुलगुरु सहित आयुक्त तकनीकी शिक्षा को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।

    मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग निर्माण के लिए 3 हजार 272 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग लंबाई 67.116 कि.मी., 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल पर निर्माण के लिए कुल परियोजना वित्तीय लागत रूपये 2,776 करोड़ 83 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) की राशि 428 करोड़ 94 लाख रूपये तथा सुपरविजन चार्जेस की राशि 65 करोड़ 77 लाख रूपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया।

    मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन परियोजना निर्माण लागत रूपये 1,151 करोड़ है। कुल परियोजना निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि रूपये 543 करोड़ 27 लाख (जीएसटी सहित) निर्माण अवधि के दौरान भुगतान म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा लिये जा रहे ऋण के माध्यम से तथा कुल परियोजना निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि 1,738 करोड़ 85 लाख रूपये (जीएसटी सहित) का भुगतान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट से किया जाएगा।

    प्रस्तावित मार्ग एन.एच.-346 विदिशा-चंदेरी पर मेहलुआ चौराहा से प्रारंभ होता है एवं बीना में एन.एच-934 हीरापुर-बीना को क्रॉस करते हुये मालथौन में एन.एच-44 नार्थ साउथ कॉरीडोर को जोड़ता है। यह मार्ग क्षेत्रीय, अंतर-राज्यीय एवं औद्योगिक यातायात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीना शहरी क्षेत्र में बीपीसीएल रिफाइनरी, थर्मल पॉवर प्लांट, रेलवे यार्ड एवं प्रमुख उद्योग स्थित होने के कारण भारी वाहनों की संख्या अधिक है। यह मार्ग भविष्य में एक सशक्त आर्थिक व लॉजिस्टिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होने की उच्च क्षमता रखता है।

    स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण का अनुरक्षण के लिए 488 करोड़ रुपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण के अनुरक्षण से संबंधित योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में प्रदाय किये गये मशीन एवं उपकरणों के रख-रखाव, मरम्मत इत्यादि के कार्य किए जायेंगे।

    चिकित्सा संस्थानों में विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 916 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना को 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 915 करोड़ 77 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओ.टी. इत्यादि के मरम्मत कार्य किए जाते हैं।

    मैहर, मऊगंज एंव पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए 21 पदों की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने नवगठित मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा जिलों में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए प्रत्येक जिले में उप संचालक का एक पद, सहायक वर्ग-2 का एक पद एवं सहायक वर्ग-3 के तीन पद सहित कुल 15 नवीन नियमित पद सृजित किये जाने तथा प्रत्येक जिले के लिये चतुर्थ श्रेणी के दो-दो मानव संसाधन कुल 6 आउटसोर्सिंग से रखे जाने की स्वीकृति प्रदान की है।

    निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिला निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार चार जिला कार्यालयों में जिला आयुष अधिकारी के चार पद वेतन मान 15 हजार 600-39,100-6600 ग्रेड पे, सहायक ग्रेड-1 मुख्य लिपिक के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2800 ग्रेड पे, लेखापाल के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2,800 ग्रेड पे एवं सहायक ग्रेड-2 के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2400 ग्रेड पे की स्वीकृति दी है।

    पंजीकृत कृषकों से मूँग का 60 प्रतिशत उपार्जन किए जाने वाले निर्णय का अनुसमर्थन

    मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूँग एवं उडद का 1 जुलाई 2026 से उपार्जन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्णय का अनुसमर्थन किया है। रबी वर्ष 2025-26 (विपणन वर्ष 2026-27) में प्राइस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए मंत्रि-परिषद के 24 फरवरी 2026 के आदेश में पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत उत्पादन ही उर्पाजित करने के निर्णय को आंशिक रूप से संशोधन करते हुए मूंग का पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 60 प्रतिशत तक का उपार्जन किया जाने का निर्णय लिया गया था।

     

  • प्रतिभा को तकनीक से जोड़कर मेधावियों के सपनों को नई उड़ान दे रही MP सरकार: CM डॉ. यादव

    प्रतिभा को तकनीक से जोड़कर मेधावियों के सपनों को नई उड़ान दे रही MP सरकार: CM डॉ. यादव

    सफलता में रहें विनम्र और असफलता से सीखकर आगे बढ़ें विद्यार्थी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रतिभा को तकनीक से जोड़कर मेधावी विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दे रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री ने लगभग 1.22 लाख विद्यार्थियों के खातों में लैपटॉप के लिए 304.98 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की
    प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को मिली 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि
    शिक्षक मूर्तिकार की तरह विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभा को तराशते हैं
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम को किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विद्यार्थी की वास्तविक सफलता केवल अच्छे अंक अथवा प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में नहीं, बल्कि उसके संस्कार, विनम्रता, अनुशासन और व्यक्तित्व में निहित होती है। विद्यार्थी सफलता से उत्साहित हों, लेकिन अपने भीतर अहंकार नहीं आने दें। असफलता से निराश होने के बजाय उसके कारणों को समझें और उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाएँ। मैदान में उतरने वाला खिलाड़ी ही कभी हारता और कभी जीतता है। जीतने का सपना देखने और चुनौतियों का सामना करने का साहस रखने वाला ही सच्चा खिलाड़ी कहलाता है। संघर्षों से बचने वाले जीवन में कभी सफल नहीं होते। जीवन में कठिनाइयों और चुनौतियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। सफलता संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। परमात्मा ने प्रत्येक व्यक्ति को सीमित और मूल्यवान समय दिया है। विद्यार्थी इसका सदुपयोग करते हुए पूरी ईमानदारी से अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। आज किया गया परिश्रम ही कल की बड़ी सफलता का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राज्य स्तरीय ‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ के राशि अंतरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश के लगभग एक लाख 22 हजार मेधावी विद्यार्थियों के बैंक खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि अंतरित की। प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 12वीं की परीक्षा में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत अथवा उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है।

    लैपटॉप ज्ञान और संभावनाओं का प्रवेश-द्वार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से कहा कि लैपटॉप केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और भविष्य की नई संभावनाओं का प्रवेश-द्वार है। विद्यार्थी इसका उपयोग ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लाइब्रेरी, शोध तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करें। तकनीक के माध्यम से अपने ज्ञान का विस्तार करते हुए विद्यार्थी अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशिष्ट प्रतिभा अवश्य होती है। जिस प्रकार मूर्तिकार पत्थर के भीतर छिपी मूर्ति को पहचानकर अनावश्यक हिस्सों को हटाता है, उसी प्रकार शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उनके व्यक्तित्व को तराशते हैं। विद्यार्थियों की सफलता में उनके माता-पिता और शिक्षकों के त्याग, परिश्रम एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थी निरंतर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कर रहे हैं। मेरिट सूची में शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी शिक्षकों की मेहनत और शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तक, गणवेश, साइकिल, स्कूटी, छात्रवृत्ति और लैपटॉप जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी के सपनों की राह में बाधा न बने। प्रदेश का प्रत्येक बच्चा अपनी योग्यता के आधार पर डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, वैज्ञानिक, अधिकारी, उद्यमी अथवा अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़े।

    शिक्षा के लिए बजट में व्यापक प्रावधान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को प्रदेश के भविष्य में निवेश मानती है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 36 हजार 730 करोड़ रुपये, उच्च शिक्षा विभाग के लिए 4 हजार 247 करोड़ रुपये तथा तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के लिए 2 हजार 932 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में स्कूल, महाविद्यालय, तकनीकी शिक्षण संस्थान और चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की सीटों में निरंतर वृद्धि से प्रदेश के विद्यार्थियों को अपने ही राज्य में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिल रहे हैं। युवाओं के लिए शासकीय भर्तियों की प्रक्रिया भी निरंतर और पारदर्शी रूप से संचालित की जा रही है।

    द्वितीय बोर्ड परीक्षा से मिला सुधार का नया अवसर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले बोर्ड परीक्षा में अपेक्षित परिणाम नहीं आने पर विद्यार्थियों का पूरा वर्ष प्रभावित हो जाता था। विद्यार्थियों के हित में अब कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में द्वितीय मुख्य परीक्षा का अवसर उपलब्ध कराया गया है। इससे विद्यार्थी अपने अंकों में सुधार कर सकते हैं और असफल होने पर भी बिना वर्ष गँवाए पुनः प्रयास कर सकते हैं। यह व्यवस्था विद्यार्थियों को निराशा से बचाकर आगे बढ़ने का नया अवसर प्रदान करती है।

    शिक्षा और विद्यार्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्ववर्ती सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में प्रदेश में शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों का अपेक्षित विस्तार नहीं हो सका। वर्तमान राज्य सरकार ने विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च, तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा तक अधोसंरचना, बजट तथा संस्थानों का व्यापक विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विश्व में भारत का मान-सम्मान निरंतर बढ़ रहा है। देश की युवा शक्ति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सशक्त नेतृत्व ने भारत के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी शिक्षा, कौशल, तकनीक और रोजगार को युवा भविष्य के निर्माण का आधार बनाकर कार्य कर रही है।

    शासकीय स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षकों और विद्वानों को गुरु पूर्णिमा पर सम्मानित किया गया

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश युवाओं को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार भी इस विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर साथ चल रही है। विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और कौशल ही सफलता के दो मित्र हैं। राज्य सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिलाने वाले शासकीय स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षकों और विद्वानों को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सम्मानित किया है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें अपने मन में संकल्प और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए परिश्रम करें।

    राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक कुल 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार यूजी सीटों का लक्ष्य तय किया है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार स्कूल शिक्षा की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, साइकिलें, लैपटॉप और स्कूटी भी प्रदान की जा रही हैं। लेकिन प्रदेश के स्कूलों में कभी वह दौर भी था, जब बच्चों को स्कूलों में बैठने तक के इंतजाम नहीं हुआ करते थे। हमारी सरकार ने तेजी से नए मेडिकल कॉलेज खोलने प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में आजादी के बाद 55 साल में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे। अब निजी और शासकीय मिलाकर कुल 33 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। राज्य में अभी साढ़े 6 हजार से अधिक एमबीबीएस की सीटें हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक कुल 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार यूजी सीटों का लक्ष्य तय किया है।

    राज्य सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाते हुए प्रदेश का बजट बढ़ाकर 4 लाख 38 हजार करोड़ तक पहुंचाया

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाते हुए प्रदेश का बजट बढ़ाकर 4 लाख 38 हजार करोड़ तक पहुंचाया है। इसमें स्कूल शिक्षा पर 36 हजार 730 करोड़, चिकित्सा शिक्षा पर 24 हजार करोड़, उच्च शिक्षा पर 4200 करोड़, तकनीकी शिक्षा पर 2932 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सभी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती का अभियान निरंतर जारी है। अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ देकर राज्य सरकार अपने उत्तरदायित्वों को पूरा कर रही है। अगर पदोन्नति नहीं मिले तो जीवन में निराशा आ जाती है। हमारी सरकार ने सालों से लंबित पदोन्नतियों का मार्ग प्रशस्त किया है। पदोन्नति से सभी विभागों के कर्मचारियों में प्रसन्नता, उत्साह और सकारात्मकता का वातावरण बना है। 

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विद्यार्थियों से संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेधावी विद्यार्थियों से उनके भविष्य के सपनों को लेकर संवाद किया। मेधावी विद्यार्थी बुंदेला ने बताया कि वे एक सफल राजनेता बनकर देश-प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं। एक छात्रा ने बताया कि वर्तमान समय में युवाओं को स्किल की जरूरत है। हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए अथक परिश्रम करना चाहिए। अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रही छात्रा ने कहा कि यह लैपटॉप उन्हें ऑनलाइन एजुकेशन में काफी मददगार साबित होगा। एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही छात्रा तन्वी कुमावत ने बताया कि वे डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की सेवा करना चाहती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अगर आज LEARN करेंगे तो कल EARN करेंगे। निश्चित रूप से ये लैपटॉप पढ़ाई की दिशा में महत्वपूर्ण सहायक सिद्ध होगा।

    प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले 3 साल से प्रवेश दर बढ़ती जा रही है

    स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था बेहतर हो रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लैपटॉप की राशि दी जा रही है। लैपटॉप लेने वाले बच्चों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले 3 साल से प्रवेश दर बढ़ती जा रही है। हमारी सरकार के प्रयासों से स्कूली बच्चों की ड्रॉप आउट दर शून्य हो गई है। यह लैपटॉप विद्यार्थियों की कॉलेज की पढ़ाई को सरल और डिजिटल करेगा। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत डिजिटलीकरण को प्रोत्साहित किया गया है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना अंतर्गत अब तक कुल साढ़े 6 लाख विद्यार्थियों को 1620 करोड़ रुपए लैपटॉप के लिए विद्यार्थियों के खातों में भेजे गए हैं। राज्य में लगभग 18 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रक्रिया जारी है। हमारे बच्चे 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे। जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना आज वट वृक्ष का रूप ले चुकी है। मेधावी विद्यार्थियों को लगातार लैपटॉप क्रय के लिए राशि वितरित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार अपनी योजनाओं से जन-जन को लाभान्वित कर रही है।    

    कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी, विधायक विष्णु खत्री, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह सहित प्रदेशभर से आए मेधावी विद्यार्थी, शिक्षण एवं अभिभावक उपस्थित थे।

  • विभागीय समीक्षा बैठक में राज्यमंत्री कृष्णा गौर का फैसला, छात्रावासों में जल्द चालू होगी मेस व्यवस्था

    विभागीय समीक्षा बैठक में राज्यमंत्री कृष्णा गौर का फैसला, छात्रावासों में जल्द चालू होगी मेस व्यवस्था

    छात्रावासों में शीघ्र प्रारंभ होगा मेस संचालन – राज्यमंत्री  गौर

    राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने मंत्रालय में की विभागीय समीक्षा बैठक

    भोपाल 

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में विभागीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में विद्यार्थियों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए राज्य मंत्री  गौर ने निर्देश दिए कि पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिये संचालित 106 छात्रावासों में आगामी 8 सितंबर से मेस का संचालन अनिवार्य रूप से प्रारंभ किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं उच्च गुणवत्तायुक्त भोजन समय पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।

    विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना: वर्षभर खुला रहेगा पोर्टल, त्रैमासिक होंगे साक्षात्कार

    उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने के इच्छुक प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने 'विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' के पोर्टल को पूरे वर्ष संचालित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवेदन प्रक्रिया को सुगम और निरंतर बनाए रखने के लिए पोर्टल बंद नहीं होना चाहिए। चयन प्रक्रिया को तीव्र गति देने के उद्देश्य से उन्होंने व्यवस्था बनाई कि प्रत्येक तीन माह (त्रैमासिक) में अथवा न्यूनतम 25 आवेदन प्राप्त होते ही समिति की बैठक आयोजित कर अभ्यर्थियों के साक्षात्कार लिए जाएं, जिससे पात्र विद्यार्थियों को समय पर योजना का लाभ मिल सके।

    समस्त विभागीय कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने के दिये निर्देश

    राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गौर ने विभागीय अधिकारियों को कार्य-संस्कृति में गतिशीलता लाने तथा शासन की समस्त योजनाओं के क्रियान्वयन को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम छोर पर खड़े हितग्राही तक पारदर्शी एवं त्वरित रूप से प्राप्त होना आवश्यक है। बैठक में सचिव अनुराग चौधरी, आयुक्त सतेन्द्र सिंह, आरके यादव सलाहकार एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।