Category: मध्य प्रदेश

  • तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन भौतिकी, रसायन, विष विज्ञान, डीएनए, क्राइम सीन किट एवं बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

    तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन भौतिकी, रसायन, विष विज्ञान, डीएनए, क्राइम सीन किट एवं बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

    भोपाल 

    अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक और पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित 03 दिवसीय विशेष फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी व वैज्ञानिक सत्रों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव के निर्देशन में तथा पुलिस उप महानिरीक्षक  साकेत पाण्डेय,  प्रशांत खरे एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री के सतत मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है।

    कार्यशाला के दूसरे दिन राज्य के क्षेत्रीय एवं राज्य फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों ने अलग-अलग विषयों पर गहन व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

    फॉरेंसिक भौतिकी एवं वॉयस साक्ष्य प्रबंधन

    क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (RFSL), भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने फॉरेंसिक भौतिकी और वॉयस में भौतिक साक्ष्य प्रबंधन तथा FSL की भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ध्वनि नमूनों, भौतिक अवशेषों के वैज्ञानिक संकलन, उनके संरक्षण एवं प्रयोगशाला अग्रेषण की मानक कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया।

    फॉरेंसिक रसायन एवं विष विज्ञान (Toxicology)

    आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. राजीव दुआ ने रासायनिक नमूनों, मादक पदार्थों, विषाक्त पदार्थों के संकलन तथा रखरखाव की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विधिक साक्ष्य के रूप में रासायनिक नमूनों की शुद्धता बनाए रखना विवेचना की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    फॉरेंसिक बायोलॉजी, सीरोलॉजी एवं डीएनए (DNA) साक्ष्य प्रबंधन

    आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. कमलेश कैथोलिया ने जैविक साक्ष्यों—जैसे रक्त, वीर्य, बाल, लार व अन्य शारीरिक द्रव्यों के वैज्ञानिक संकलन, पैकेजिंग, चेन ऑफ कस्टडी तथा डीएनए प्रोफाइलिंग में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की भूमिका पर विस्तृत तकनीकी जानकारी दी।

    अपराध स्थल अन्वेषण, प्रबंधन एवं क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन किट का उपयोग

    सत्र में जिला सीन क्राइम ऑफ मोबाइल यूनिट, भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड ने क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन (CSI) किट के व्यावहारिक उपयोग, घटनास्थल के प्रबंधन, साक्ष्यों की प्राथमिकता आधारित पहचान और सुरक्षित जब्ती प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। उन्होंने घटनास्थल को दूषित होने से बचाने और संकलित साक्ष्यों के सही प्रलेखन के व्यावहारिक गुर सिखाए।

    बैलिस्टिक्स शाखा एवं शंका समाधान सत्र

    अंतिम सत्र में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL), सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी  रामदा कनेश ने बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। इसमें आग्नेयास्त्रों, प्रयुक्त कारतूसों, गोलियों (बुलेट्स), गनशॉट रेजीड्यू (GSR) के संकलन, संरक्षण तथा एफएसएल परीक्षण की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्र के अंत में प्रतिभागियों की व्यावहारिक शंकाओं का भी समाधान किया गया।

    कार्यशाला का समापन 03 सितंबर को विशेष पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग  पंकज वास्‍तव की उपस्थित में होगा। अंतिम दिन सीआईडी फोटोग्राफी शाखा के उप पुलिस अधीक्षक (फोटो)  अमिताभ तिवारी द्वारा अपराध घटना स्थल फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुतीकरण और उसके न्यायालयीन प्रमाणीकरण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

     

  • पीडब्ल्यूडी की परियोजनाओं में आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ निर्माण सामग्री अपनाने के निर्देश

    पीडब्ल्यूडी की परियोजनाओं में आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ निर्माण सामग्री अपनाने के निर्देश

    भोपाल 

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बुधवार को सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल का भ्रमण किया। उन्होंने संस्थान में अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से विकसित आधुनिक तकनीकों एवं नवीन निर्माण सामग्रियों का अवलोकन किया तथा उनकी उपयोगिता एवं तकनीकी विशेषताओं की जानकारी ली।

    मंत्री  सिंह ने लोक निर्माण विभाग की सड़क, पुल एवं भवन निर्माण परियोजनाओं में स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ एवं लागत-किफायती निर्माण तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण कर इन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। भ्रमण के दौरान जिओपॉलीमर कंक्रीट की तकनीक को विशेष रूप से समझा। जिओपॉलीमर कंक्रीट से निर्मित सड़क में सामान्य कंक्रीट की तरह पानी से तराई की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी की बचत होती है। साथ ही, कम मोटाई में भी एम-40 के अनुरूप मजबूती प्राप्त की जा सकती है। इस तकनीक का एम्स भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उपयोग किया जा चुका है। मंत्री  सिंह ने इस तकनीक को मध्यप्रदेश की सड़क परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

    मंत्री  सिंह ने फ्लाई ऐश और रेड मड सहित औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्टों से तैयार सड़क निर्माण सामग्री, पेवर ब्लॉक, कर्ब स्टोन तथा ड्रेनेज ब्लॉक जैसे प्रीकास्ट कंपोनेंट्स का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने बताया कि सीएसआईआर-एम्प्री द्वारा लगभग 16 वर्ष पूर्व लगाए गए पेवर ब्लॉक आज भी मजबूत स्थिति में हैं और उन पर काई भी नहीं लगी है। इससे इन सामग्रियों की दीर्घकालिक मजबूती एवं टिकाऊपन का पता चलता है।

    संस्थान की प्रदर्शनी एवं प्रयोगशालाओं के भ्रमण के दौरान मंत्री  सिंह को बैम्बू कंपोजिट एवं हाइब्रिड वुड, रेड मड आधारित रेडिएशन शील्डिंग टाइल्स, एंटी-कोरोसिव एवं फायर-रेसिस्टेंट कोटिंग्स तथा कृषि अवशेषों से तैयार किए जाने वाले ग्रीन बाइंडर्स जैसी नवीन तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्होंने इन तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की।

    सीएसआईआर-एम्प्री बनेगा पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार

    मंत्री  सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में आधुनिक तकनीक के उपयोग से मजबूत, टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण सरकार की प्राथमिकता है। सीएसआईआर-एम्प्री में विकसित तकनीकों का लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं में अधिक व्यापक रूप से उपयोग करने के लिए संस्थान को पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी इंजीनियर्स डे के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में सीएसआईआर-एम्प्री के साथ एमओयू करने की योजना है। इस एमओयू के माध्यम से आधुनिक निर्माण तकनीकों, नवीन निर्माण सामग्रियों, गुणवत्ता परीक्षण एवं तकनीकी परामर्श के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि जिओपॉलीमर कंक्रीट जैसी तकनीकों से जहां निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन बढ़ाया जा सकता है, वहीं पानी की बचत और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएसआईआर-एम्प्री के साथ समन्वय कर उपयुक्त तकनीकों का तकनीकी परीक्षण किया जाए तथा पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर पीडब्ल्यूडी की परियोजनाओं में उनका उपयोग प्रारंभ किया जाए।

    मंत्री  सिंह ने एम्प्री की मटेरियल कैरेक्टराइजेशन प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया, जहां निर्माण सामग्री की मजबूती, टिकाऊपन एवं गुणवत्ता की जांच के लिए उपलब्ध आधुनिक परीक्षण मशीनों की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की।

    इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव  सुखबीर सिंह, सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक  सी.बी. चक्रवर्ती, प्रमुख अभियंता  आर.एल. वर्मा, प्रमुख अभियंता  एस.आर. बघेल, सड़क विकास निगम के प्रमुख अभियंता  के.पी.एस. राणा, भवन विकास निगम के प्रमुख अभियंता  अजय वास्तव, मुख्य अभियंता  एस.सी. वर्मा एवं मुख्य अभियंता  बी.पी. बोरासी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सीएसआईआर-एम्प्री की ओर से अपर निदेशक  शुक्ला, वरिष्ठ वैज्ञानिक  मनीष मुद्गल, वैज्ञानिकगण एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • एमपीएसईडीसी और आईआईएसईआर भोपाल ने ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ इंडस्ट्री राउंडटेबल की आयोजित

    एमपीएसईडीसी और आईआईएसईआर भोपाल ने ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ इंडस्ट्री राउंडटेबल की आयोजित

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश को ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा आईआईएसईआर भोपाल एवं ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ उच्चस्तरीय इंडस्ट्री राउंडटेबल आयोजित किया गया। प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेल्वेंद्रन ने चर्चा में सहभागिता करते हुए ड्रोन क्षेत्र के विकास, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन की प्राथमिकताओं को साझा किया।

    राउंडटेबल में ड्रोन क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप्स, उद्योग संगठनों, अनुसंधान संस्थानों और इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें गरुड़, डीएफआई, आइडियाफोर्ज, एनएफएसयू, प्रखर और आईजेडआई सहित अनेक कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिभागियों ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के लिए सशक्त इकोसिस्टम विकसित करने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में ड्रोन क्षेत्र के लिए आवश्यक अधोसंरचना, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं, कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई।

    मध्यप्रदेश को बनाया जाएगा ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र

    बैठक में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और प्रगतिशील नीतिगत ढांचे का लाभ उठाते हुए मध्यप्रदेश को ड्रोन प्रौद्योगिकी के लिए देश के पसंदीदा गंतव्यों में शामिल करने के रोडमैप की जानकारी दी गई। इसमें ड्रोन निर्माण के लिए अधोसंरचना, साझा परीक्षण सुविधाएं, फ्लाइट टेस्टिंग क्षमताएं, नवाचार प्लेटफॉर्म और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिभा एवं कौशल विकास को शामिल किया गया है।

    आईआईएसईआर भोपाल में स्थापित होगा ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

    राउंडटेबल में आईआईएसईआर भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के राज्य शासन के निर्णय को सराहा गया। इसका उद्देश्य उन्नत अनुसंधान, उत्पाद विकास, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, प्रौद्योगिकी सत्यापन और नई पीढ़ी के ड्रोन अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है। जुलाई 2026 में मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने लगभग 85.51 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति दी है। इसमें एआई, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन्स, यूएवी डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्य किया जाएगा। साथ ही प्रोटोटाइप परीक्षण, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को भी सहयोग मिलेगा।

    ग्वालियर में विकसित होगा एकीकृत ड्रोन क्लस्टर

    ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर में ड्रोन निर्माण, प्रोटोटाइपिंग, कंपोनेंट टेस्टिंग, प्रमाणन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एकीकृत अधोसंरचना विकसित की जाएगी। हितधारकों ने कॉमन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं, कंपोनेंट टेस्टिंग लैब, फ्लाइट टेस्टिंग अधोसंरचना और उद्योग आधारित कौशल विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कई प्रतिभागियों ने ड्रोन निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार, पायलट प्रोजेक्ट्स और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में राज्य के साथ साझेदारी में रुचि व्यक्त की।

    सुझावों को ड्रोन रोडमैप में किया जाएगा शामिल

    इंडस्ट्री राउंडटेबल से प्राप्त सुझावों को प्रदेश के ड्रोन इकोसिस्टम के विकास के लिए तैयार किए जा रहे रोडमैप में शामिल किया जाएगा। ये सुझाव ग्वालियर क्लस्टर, आईआईएसईआर भोपाल के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ड्रोन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करने की आगामी पहलों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे। बैठक में मध्यप्रदेश ड्रोन प्रमोशन एंड यूसेज पॉलिसी-2025 के महत्व को भी रेखांकित किया गया। नीति का उद्देश्य निवेश, नवाचार, कौशल विकास, प्रमाणन सहयोग तथा कृषि, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना, सुशासन, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक अनुप्रयोगों में ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है।

     

  • Indore में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी, रॉन्ग साइड चलने पर 4 पर FIR; ड्रोन से निगरानी

    Indore में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी, रॉन्ग साइड चलने पर 4 पर FIR; ड्रोन से निगरानी

    इंदौर
     देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था की स्थिति को सुधारने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। पहली बार इंदौर में रॉन्ग साइड वाहन चलाने पर एफआईआर दर्ज की गई है। एक ही दिन में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके जरिए ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को सख्त संदेश दिए हैं।

    चाणक्यपुरी चौराहे पर की गई कार्रवाई
    इंदौर के चाणक्यपुरी चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से चेकिंग अभियान चलाया गया है। इस दौरान ड्रोन सर्विलांस की भी मदद ली जा रही थी। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का चालान काटा जा रहा था।

    दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे चालक
    चेकिंग के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ लोग विपरीत दिशा में वाहन चलाने के दौरान फोन पर बात कर रहे थे। उन्हें इस बात की परवाह नहीं थी कि इससे दूसरों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इंद्रप्रस्थ चौराहे पर एक ऐसे ही स्कूटी सवार को पकड़ा गया जो रॉन्ग साइड में चल रहा था।

    जांच के दौरान यह भी पाया गया कि उसने हेलमेट भी नहीं पहन रखा था। साथ ही उसके पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था। इन लापरवाहियों की वजह से पुलिस ने उसकी स्कूटी जब्त कर ली। साथ ही 4500 रुपए का चालान काटा है।

    एफआईआर भी दर्ज की गई
    अलग-अलग मामलों में रॉन्ग साइड वाहन चलाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की गई है। ऐसे चालकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। मीडिया से बात करते हुए ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने कहा है कि रॉन्ग साइड में वाहन चलाकर लोग दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। ऐसे मामलों में अब सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी।

    बचना है मुश्किल
    वहीं, ट्रैफिक चेकिंग के दौरान लोग अभी तक पुलिस को चकमा देकर निकल जाते हैं। मगर इंदौर ट्रैफिक पुलिस ड्रोन से लैस है। चेकिंग प्वाइंट पर ड्रोन से निगरानी की जाती है। अगर आपने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया है तो आपकी तस्वीर खींचकर चालान काटा जाएगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

  • मध्यप्रदेश पुलिस की नशे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई

    मध्यप्रदेश पुलिस की नशे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री एवं अवैध रूप से मादक पदार्थों की खेती के विरुद्ध पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लगभग 2 करोड़ 10 लाख रूपए से अधिक के मादक पदार्थ एवं अन्य संपत्ति जब्‍त की है।

    प्रमुख कार्यवाहियां

    नीमच

    जिले की पुलिस चौकी कंजार्डा ने मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 424 किलो अवैध डोडाचूरा, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 63 लाख 60 हजार है, जप्त कर 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    एक अन्‍य कार्यवाही थाना जीरन पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करों के पदार्थ तस्करों के विरूद्व कार्यवाही करते हुए 12 क्विंटल 70 किलो अवैध डोडाचुरा एवं ट्रक सहित लगभग 65 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त कर 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 01 करोड़ 28 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।

    इंदौर

    थाना चंदन नगर पुलिस ने नशा तस्‍कर के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए विदेशी महिला आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 57.18 ग्राम कोकीन, मोबाइल फोन सहित लगभग 29 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    शिवपुरी

    थाना कोतवाली पुलिस ने नशीले पदार्थों के विक्रय के विरुद्ध तीन अलग-अलग कार्यवाहियों में स्मैक का विक्रय करते हुए तीन आरोपियों को पकड़ा। आरोपियों के कब्जे से 48.36 ग्राम स्मैक, मोटरसाइकिल एवं बुलेरो वाहन सहित लगभग 22 लाख 10 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    बालाघाट

    पुलिस ने थाना चांगोटोला के एनडीपीएस एक्ट के अपराध में पुलिस रिमांड पर लिए गए आरोपी से पूछताछ के बाद ओडिशा में दबिश देकर एक गांजा तस्कर को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से 31.570 किलोग्राम गांजा, कीमत लगभग 16 लाख रूपए, का जब्‍त किया।

    विदिशा

    पुलिस ने अवैध मादक पदा‍र्थों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए गंजबासौदा क्षेत्र से 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 18 ग्राम ब्राउन शुगर, 147 लीटर अवैध शराब, 500 एबल के इंजेक्शन, 70 सिरिंज, 32 मोबाइल एवं 01 मोटरसाइकिल सहित लगभग 9 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    उज्जैन

    थाना जीवाजीगंज पुलिस ने नशे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए वाहन चेकिंग के दौरान ई-रिक्शा चालक को रोककर उसके कब्जे से 255 ग्राम अवैध चरस कीमत लगभग 2 लाख रूपये जब्‍त कर आरोपी को गिरफ्तार किया।

    वहीं थाना खाचरोद पुलिस ने बुरानाबाद जंगल में अवैध रूप से गांजे की खेती का पर्दाफाश करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया तथा कुटिया के पास पेड़-पौधों की आड़ में उगाए गए 26 किलो 96 ग्राम गांजा कीमत लगभग 4 लाख रूपये का जप्त किया। दोनों कार्रवाइयों में लगभग 6 लाख रूपए का मादक पदार्थ जप्त किया।

    मैहर

    पुलिस ने थाना कोतवाली क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 152 शीशी नशीली कफ सिरप के साथ आरोपी को गिरफ्तार किया।

    इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्रवाई कर रही है। मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री एवं इनके स्रोतों पर प्रहार करते हुए पुलिस द्वारा लगातार निगरानी, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा आरोपियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

     

  • उप मुख्यमंत्री  शुक्ल को ब्रह्माकुमारी बहन ने बांधा शिव बाबा का रक्षा सूत्र

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल को ब्रह्माकुमारी बहन ने बांधा शिव बाबा का रक्षा सूत्र

    भोपाल 

    रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल को शिव बाबा का पवित्र रक्षा सूत्र बांधा गया। भोपाल जोन राजयोग भवन की डायरेक्टर राजयोगिनी बीके निर्मला बहन ने माउंट आबू से लाए गए रक्षा सूत्र से उप मुख्यमंत्री को पवित्रता, आत्मिक प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने ब्रह्माकुमारीज़ की बहनों द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज को जोड़ने वाली सेवा सबसे पुनीत सेवा है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के पारंपरिक संबंध का पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक प्रेम, पवित्रता और सद्भाव का संदेश देता है। “सच्चा रक्षाबंधन वही, जब आत्मा पांच विकारों से सुरक्षित हो।” उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों से स्वयं की रक्षा करना ही वास्तविक आत्मिक रक्षा है। पवित्र विचार और श्रेष्ठ संस्कार व्यक्ति के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी सकारात्मक योगदान देते हैं। 

  • मुख्‍यमंत्री निवास पर श्रीकृष्ण पर्व 101 बच्‍चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में होंगे शामिल

    मुख्‍यमंत्री निवास पर श्रीकृष्ण पर्व 101 बच्‍चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में होंगे शामिल

    भोपाल

    भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्‍कृति विभाग के श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्‍य स्‍तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि राज्‍य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहाँ श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। जन्‍मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्‍चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति, श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित पुस्‍तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्‍ण लोक का भूमि-पूजन किया जायेगा।  

    राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण आस्था और भक्ति के साथ भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश की धरती का भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। श्रीकृष्ण के जीवन से हमें मित्रता, करुणा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसी गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का व्यापक आयोजन किया जा रहा है। 

    राज्य मंत्री लोधी ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएँ सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम-उज्जैन, नारायणा धाम-उज्जैन, अमझेरा-धार, जानापाव-महू एवं जामगढ़-रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्‍व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।

    श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जीवन के विभिन्‍न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्‍यापीकरण, सनातन संस्‍कृति के विस्‍तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्‍यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्‍यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप श्रीकृष्‍ण पर्व के माध्‍यम से सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष श्रीकृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्‍थानीय गतिविधियों का विस्‍तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्‍व के स्थलों को चिन्हित कर वहाँ आयोजन किए जा रहे हैं। 

    कृष्णमय होगा मध्यप्रदेश, 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ

    ‘श्रीकृष्ण पर्व’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे। नारायणा धाम, सांदीपनि आश्रम, महिदपुर, पन्ना, अमझेरा और जानापाव सहित प्रदेश के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल सहभागिता करेंगे। 

    नारायणा धाम में पांच दिवसीय आयोजन

    उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर प्रांगण में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर पहले दिन गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ियां चुनने तथा सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने के प्रसंग को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और ‘रासलीला : श्रीकृष्ण की दान लीला’ का मंचन होगा। दूसरे दिन कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका, भजन गायन तथा ‘श्रीकृष्ण की माखन चोरी’ रासलीला होगी। तीसरे दिन ओडिसी शैली में कृष्ण आधारित नृत्य-नाटिका, भजन गायन और ‘श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल लीला’ प्रस्तुत की जाएगी। चौथे दिन श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग पर नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। पांचवें दिन गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिका तथा भजन गायन होगा। सभी पांचों दिनों रासलीला का मंचन भी किया जाएगा। 

    सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की झलक

    उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक शाम 4 बजे से तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसमें ‘कर्षति इति कृष्ण’, भजन गायन और बघेली लोकगायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

    महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत

    महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से कार्यक्रम होंगे। पहले दिन राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर नृत्य प्रस्तुति और भक्ति गायन होगा। दूसरे दिन बुंदेली गायन तथा भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भजन गायन के साथ श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी महिदपुर की परंपरा पर केंद्रित श्रीकृष्ण जन्म आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

    पन्ना और अमझेरा में साकार होंगे कृष्ण के विविध प्रसंग

    पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर परिसर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। श्री जुगल किशोर मंदिर में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय आयोजन में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन तथा प्रणामी परंपरा पर केंद्रित भरतनाट्यम प्रस्तुति होगी। धार जिले के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। साथ ही भजन गायन भी होगा। अमझेरा को श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी वरण से जुड़े प्राचीन स्थल के रूप में आयोजन की विषयवस्तु में विशेष स्थान दिया गया है। 

    जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग

    महू के जानापाव में 4 सितंबर को शाम 4 बजे भगवान परशुराम द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद भजन गायन होगा। आयोजन स्थल पर भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 

    प्रदेश के अनेक जिलों में कृष्ण भक्ति का रंग

    श्रीकृष्ण पर्व के अंतर्गत पाली (उमरिया), शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित अनेक स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा प्रसंग, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। लोकगायन और भजन के साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर साकार किया जाएगा। उज्जैन के गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को गीत गोविंद केंद्रित नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। तराना स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में भी लोक एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। आगर-मालवा, रायसेन, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर सहित अनेक जिलों में भी 4 सितंबर को शाम 7 बजे से कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें नृत्य-नाटिका, भजन और लोकगायन के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़ा जाएगा। 

    1500 से अधिक स्थानीय कलाकार होंगे सहभागी

    ‘श्रीकृष्ण पर्व’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों की व्यापक भागीदारी है। 1500 से अधिक कलाकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों के कलाकार मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रस्तुतियां देंगे। इस सांस्कृतिक श्रृंखला में लोकगायन, भजन, नृत्य-नाटिका और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन एवं दर्शन के विविध आयाम सामने आएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने और प्रदेश की विविध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ने का व्यापक प्रयास बनकर सामने आएगा।

     

  • सफलता की पहली सीढ़ी है मजबूत संकल्प, राज्यमंत्री गौर ने बढ़ाया उत्साह

    सफलता की पहली सीढ़ी है मजबूत संकल्प, राज्यमंत्री गौर ने बढ़ाया उत्साह

    भोपाल 

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा कि जीवन में लिया गया प्रत्येक सकारात्मक संकल्प व्यक्ति को सफलता की दिशा में आगे बढ़ाता है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्यों को हासिल करने का आह्वान किया।

    राज्यमंत्री गौर बुधवार को बंसल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में आयोजित दीक्षारंभ समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने समारोह का शुभारंभ करते हुए संस्थान में प्रवेश लेने वाले नवागत विद्यार्थियों को सफल, सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि आज विद्यार्थियों के जीवन में एक नए सफर की शुरूआत हुई है। यह समय अपने सपनों को आकार देने और भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर है। युवा शक्ति हर चुनौती और परिवर्तन के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि युवाओं में उत्साह, क्षमता और जिम्मेदारी का भाव है। यही ऊर्जा उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जाने की शक्ति देती है।

    राज्यमंत्री गौर ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज का युवा बड़े सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने का जज्बा भी रखता है। दुनिया में अपनी पहचान बनाने की क्षमता युवाओं में है, जरूरत केवल सही दिशा, निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प की है। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए न करें, बल्कि परिवार, संस्थान और देश के विकास में भी योगदान दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बंसल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने अनुशासन, प्रतिभा और उपलब्धियों से संस्थान एवं प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

    समारोह में नवागत विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दौरान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ अपने व्यक्तित्व और भविष्य को बेहतर दिशा देने के लिए प्रेरित किया गया।

     

  • अगले ढाई साल में प्रदेश की 100 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बनाएंगे सिंचित

    अगले ढाई साल में प्रदेश की 100 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बनाएंगे सिंचित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिसके हाथ में हल है, वही इस देश का असली बल है। उन्होंने किसानों के पसीने को मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का “फ्यूल” बताते हुए कहा कि सरकार खेत से लेकर खातों तक और बीज से लेकर बाजार तक हर कदम पर प्रदेश के किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बलराम, बल के देवता ही नहीं, श्रम के सम्मान और कृषि गौरव के जीवंत प्रतीक हैं। हलधर के रूप में उन्होंने देश में खेती-किसानी को विस्तार दिया और इसे लोककल्याण का माध्यम भी बनाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को हल षष्ठी के अवसर पर ग्वालियर में हुए बलराम जयंती महोत्सव एवं सहकारी किसान समागम कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां बड़ी संख्या में मौजूद किसानों और अन्नदाताओं को बलराम जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बलराम जयंती हमारे खेतों की हरियाली और किसानों की समृद्धि का पुनीत उत्सव है। आयोजकों ने मुख्यमंत्री को खेती-किसानी के पुण्य प्रतीक के रूप में हल भेंट किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक शिवपुरी को अपनी वर्तमान अवस्था से उबरने के लिए राज्य शासन की ओर से जरूरी मदद देने की घोषणा की।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण से जुड़े चार महत्वपूर्ण कार्यों का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल से किसान अब घर बैठे आवेदन कर सकेंगे। इस अवसर पर शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण योजना के सरलीकरण का भी शुभारंभ हुआ। इसके तहत खरीफ और रबी कृषि ऋण की अलग-अलग अदायगी की बाध्यता समाप्त करते हुए किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार 12 माह में ऋण चुकाने की सुविधा दी गई है। मुख्यमंत्री ने किसान कृषक कवच योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना में ऐसे किसानों को भी ऋण और शासकीय योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिनके खातों की जांच लंबित होने से वे अब तक शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित थे। मुख्यमंत्री ने गांवों में सहकारिता गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 200 नई पैक्स संस्थाओं के कार्यालयों का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपेक्स बैंक की ग्वालियर में संभागीय शाखा का शुभारंभ भी इस अवसर पर किया।

    किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बीज से बाजार तक और खेत से निर्यात तक किसान की पूरी यात्रा को मजबूत कर रही है। उन्होंने मध्यप्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की मंशा व्यक्त करते हुए कहा कि हम प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनायेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है और चारा अनुदान 20 से बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि हमारी विरासत है, एग्री-टेक और एग्री-बिजनेस हमारा भविष्य है। प्रदेश में तकनीक, प्रसंस्करण और बाजार के माध्यम से नई कृषि क्रांति लाई जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, जैविक खेती, मत्स्य पालन और नई फसलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों से पानी की हर बूंद का सदुपयोग करने, प्राकृतिक खेती अपनाने, उत्पादन की ग्रेडिंग-प्रोसेसिंग-पैकेजिंग कर सीधे बाजार से जुड़ने, फसल विविधीकरण अपनाने और युवाओं को कृषि उद्यमिता से जोड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि में ही मध्यप्रदेश की समृद्धि है। उन्होंने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि इससे शासकीय योजनाओं, समर्थन मूल्य के भुगतान तथा सब्सिडी पर खाद-बीज की सुविधा आसान होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान  बलराम ने कृषि को प्रकृति के साथ जोड़कर स्वावलंबन का नया अध्याय शुरू किया था। भारतीय संस्कृति में खेती को सर्वोत्तम माना गया है। खेती से प्रकृति समृद्ध होती है और मनुष्य को अनाज मिलता है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने चार श्रेणियों- गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण का संकल्प लिया है। हमारे लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों बराबर सम्मान रखते हैं। अन्नदाता अपने अथक परिश्रम से देश को समृद्ध बनाता है। राज्य सरकार खेतों से लेकर खातों तक किसानों के कल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को पैक्स समितियों के माध्यम से लाभ दिया जा रहा है। किसान कवच योजना के माध्यम से हमारी सरकार किसानों के साथ खड़ी है। प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए 24 घंटे बिजली मिल रही है। अब दिन में भी बिजली मिलेगी। मध्यप्रदेश बिजली उत्पादन में अब देश का अग्रणी राज्य बना है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा अभी 60 लाख हेक्टेयर से अधिक है, जिसे अगले ढाई वर्ष में 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को कर्ज चुकाने की सुविधा दी है। अब उन्हें 6-6 माह में खाता पलटने की जरूरत नहीं है। नई व्यवस्था के मुताबिक, अब किसान वर्ष में किसी भी समय कर्ज की राशि भर सकते हैं। किसान अनाज के साथ उद्यानिकी फसलों से लाभ कमाएं। इसके लिए "एक बगिया मां के नाम'' योजना की शुरुआत की गई है। प्रदेश सरकार पशुपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। दूध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए नई गौपालन योजना की शुरुआत की है। इस योजना में पशुपालकों को 40 लाख के ऋण पर 10 लाख का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और बकरी पालन जैसी योजनाओं से भी जोड़ा गया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में युवा कल्याण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटे गए है। हमारे बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर बनें। लेकिन खेती से रिश्ता बनाए रखें। कृषि हमारी समृद्ध संस्कृति की गौरवशाली विरासत है। शासकीय स्कूलों के बच्चों को किताबें, ड्रेस, साइकिलें बांटी जा रही हैं। प्रदेशभर में भव्य सांदीपनि विद्यालय बन रहे हैं। युवाओं को उद्योग और रोजगार से जोड़ा जा रहा है। हम समृद्ध मध्यप्रदेश में रोजगार देने वाले युवा तैयार करने पर काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की धरती पर सबसे पहले केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। मध्यप्रदेश बदल रहा है, किसान अपनी जमीन नहीं बेचें। मध्यप्रदेश खेती में अब पंजाब-हरियाणा से भी आगे निकलने वाला है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में चहुंओर एक्सप्रेसवे, हाईवे और ग्रीन फील्ड रोड बनाए जा रहे हैं। प्रदेश में एविएशन और रेल कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जा रही है। गरीब-जरूरतमंदों को नि:शुल्क एयर एम्बुलेंस की सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। हमारी सरकार के लिए व्यक्ति की जान बचाना जरूरी है। राहवीर योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। हमने प्रदेश के सहकारिता विभाग से जुड़े 16 बैंकों को डिफॉल्टर होने से बचाया है। उन्हें पर्याप्त राशि दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का इसी माह जन्मदिन आने वाला है। उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने अनेकों चुनौतियों के बीच आशा का दीपक हम सबके लिए जलाए रखा है। भारत दुनिया में अपनी अलग साख बना रहा है। भारत की आर्थिक विकास दर 7.8 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ रही है। यह अमेरिका और जापान जैसे देशों के कही अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में करीब 1 लाख 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत से रेल विकास के अनेक कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पास करा लिया है। अब हम इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रदेश के विकास के लिए और मजबूती से काम कर रहे हैं।

    केंद्रीय दूरसंचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है। आज भगवान बलराम की जयंती के अवसर पर महोत्सव ग्वालियर में हो रहा है। यहां सहकारिता सम्मेलन का भी आयोजन हो रहा है। सहकारिता से देशभर के किसानों को लाभ मिल रहा है। किसानों का सम्मान ग्वालियर अंचल की विरासत रही है। ग्वालियर-चंबल में बने बांध और जलाशयों से खेती समृद्ध हो रही है। श्योपुर क्षेत्र को नैरोगेज रेल लाइन से जोड़ा गया ताकि किसान ग्वालियर में अपना अनाज बेंच पाएं। अब इस रेलवे लाइन को ब्रॉड गेज करने पर तेजी से काम हो रहा है। बहुत जल्द यह लाइन ग्वालियर से कोटा तक पहुंचेगी। अक्षय ऊर्जा भविष्य में किसानों को समृद्ध बनाएगी। भगवान बलराम का नाम शंकरषण भी था। भगवान ने नंद और वासुदेव जी के परिवार को एक किया था। उन्होंने हल से बनी रेखाओं के माध्यम से समाज को संगठित होने का संदेश दिया था। प्रधानमंत्री  मोदी ने ड्रोन जैसी अन्य आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से किसानों को समृद्ध बनाने का संकल्प लिया है। हमारे किसान अन्न उगाते हैं, तभी देशवासियों को अनाज मिलता है। प्रदेश के किसानों को किसान सम्मान निधि के रूप में प्रतिवर्ष 12 हजार रुपए मिलते हैं। इस योजना के माध्यम से अब तक पौने 5 लाख करोड़ रुपए किसानों के खातों में पहुंचे हैं। प्रदेश में अब 60 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मध्यप्रदेश गेहूं उत्पादन में पंजाब से आगे निकल गया है। किसानों को माइक्रो एटीएम मिलेगा, कृषक कवच योजना का लाभ मिलेगा, नवीन पंजीकृत 200 पैक्स समितियों को कार्यालय मिले हैं।

    विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ग्वालियर में लगभग 20 वर्षों से भगवान  बलराम जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी जिलों में बलराम जयंती मनाने की शुरुआत की है। किसान समृद्ध होंगे, तो देश समृद्ध होगा। सहकारिता के माध्यम से भी किसान भाइयों को लाभ दिया जा रहा है। खेती में पहले कभी पंजाब और हरियाणा को अग्रणी माना जाता था, लेकिन अब मध्यप्रदेश खेती में नंबर 1 राज्य बन गया है। देश में पहली बार किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण मध्यप्रदेश सरकार ने दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में किसानों को मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में जैविक खेती का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश जैविक खेती के मामले में भी देश का नंबर 1 प्रदेश है।

    खेल एवं युवक कल्याण तथा सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि राज्य सरकार ने विकास और जनकल्याण की अवधारणा को स्थापित किया है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। सहकारिता विभाग के माध्यम से मध्यप्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर एग्रीकल्चर लोन मिल रहा है। सहकारिता के माध्यम से किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलवाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बलराम जयंती पर हम सब यह संकल्प लें कि किसान की खेती को लाभ का जरिया बना कर रहेंगे और किसानों को उनकी फसलों का समुचित मूल्य दिलवाएंगे।

    अपेक्स बैंक अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह यादव ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धरती पुत्र भगवान बलराम की जयंती को भव्य रूप में मनाने की शुरुआत की है। बलराम जयंती प्रदेश के किसानों के लिए गहरी आस्था का विषय है। राज्य सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष में प्रदेशभर में अब तक 22 जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा चुके हैं। मध्यप्रदेश, किसान कल्याण, नारी कल्याण, युवाओं और गरीब कल्याण के क्षेत्र में औरों से कई आगे बढ़कर काम कर रहा है। उन्होंने पैक्स से जुड़े क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए बीमा कवर की राशि बढ़ाने सहित क्षेत्र के विकास के लिए अन्य महत्वपूर्ण मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।

    कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, म.प्र. राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष  जयभान सिंह पवैया, म.प्र. राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत, सांसद  भारत सिंह कुशवाहा, विधायक  मोहन सिंह राठौड़, विधायक  नरेन्द्र सिंह कुशवाहा, पूर्व सांसद  विवेक शेजवलकर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से बड़ी संख्या में आए किसान बंधु उपस्थित थे।

     

  • अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर मंथन, लोक स्वास्थ्य विभाग ने की समीक्षा

    अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर मंथन, लोक स्वास्थ्य विभाग ने की समीक्षा

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विभाग के अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि 15 अगस्त 2026 तक लक्षित निर्माण कार्यों में से शेष कार्यों को आगामी 15 दिवस में पूर्ण किया जाए। बैठक में बताया गया कि 15 अगस्त तक कुल 53 स्वास्थ्य संस्थाओं को संचालन के लिए तैयार किया गया है। इनमें 37 उप स्वास्थ्य केंद्र (SHC), 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), 4 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) तथा 3 क्रिटिकल केयर ब्लॉक (CCHB) शामिल हैं। संभागवार इनमें जबलपुर 30, रीवा 8, इंदौर 6, भोपाल 3, उज्जैन 3, ग्वालियर 2 तथा सागर की 1 संस्था शामिल है।

    बैठक में बताया गया कि आगामी 15 दिवसों में 220 स्वास्थ्य संस्थाओं तैयार किया जाएगा। इनमें 167 SHC, 42 PHC, 6 BPHU, 2 BPHU/PHU, 2 CCHB तथा 1 MCH/DH शामिल है। प्रस्तावित संस्थानों में से 179 संस्थाओं में मानव संसाधन उपलब्ध है, जबकि 163 संस्थाओं में उपकरण उपलब्ध किए जा चुके हैं। 61 संस्थाओं में उपकरण एवं मानव संसाधन की उपलब्धता के लिये कार्यवाही प्रचलन में है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि शेष कार्यों, विशेष रूप से फर्नीचर, उपकरण एवं मानव संसाधन की उपलब्धता को योजनाबद्ध तरीके से शीघ्र पूर्ण किया जाए ताकि निर्धारित समय सीमा में संस्थाओं का संचालन सुनिश्चित हो सके। बैठक में एमडी एमपीपीएचएससीएल  मयंक अग्रवाल, अपर संचालक स्वास्थ्य  मनोज सरियाम सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।