Category: मध्य प्रदेश

  • मध्यप्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग का पायलट परीक्षण शुरू : मंत्री  सिंह

    मध्यप्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग का पायलट परीक्षण शुरू : मंत्री सिंह

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में टोल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुगम और निर्बाध बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा एक महत्वपूर्ण नवाचार की शुरुआत की गई है। भोपाल–देवास मार्ग के फंदा टोल प्लाजा पर प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (SLFF) का पायलट परीक्षण शुरू किया गया है। इस व्यवस्था में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और पारंपरिक बूम बैरियर के कारण होने वाली अनावश्यक ब्रेकिंग एवं समय की बर्बादी से भी यात्रियों को राहत मिलेगी।

    मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अधिकारियों ने इस नवाचार और इसके क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया का लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह के समक्ष प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तुतीकरण के बाद मंत्री  सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में लागू किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि पायलट परीक्षण के दौरान प्राप्त परिणामों का विधिवत मूल्यांकन किया जाए और इसके आधार पर इसे प्रदेश में वृहद स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में सड़क अधोसंरचना के विकास के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। सड़क निर्माण और यातायात व्यवस्था का उद्देश्य केवल बेहतर सड़क उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और समय की बचत वाली यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना भी है। बैरियर-लेस टोलिंग इसी सोच के अनुरूप किया जा रहा एक महत्वपूर्ण नवाचार है।

    मंत्री  सिंह ने कहा कि जनता की सुविधा की दृष्टि से यह एक उपयोगी पहल है। वर्तमान व्यवस्था में टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के कारण रुकना पड़ता है, जिससे कई बार वाहनों की कतार और अनावश्यक यातायात दबाव की स्थिति बनती है। नई व्यवस्था में वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय और ईंधन की बचत होगी तथा टोल प्लाजा पर लगने वाली अनावश्यक भीड़ को कम करने में मदद मिलेगी।

    चलते वाहन से स्वतः होगा टोल संग्रह

    नई तकनीक में चलते हुए वाहन की स्वतः पहचान, वर्गीकरण और फास्टेग के विवरण के आधार पर टोल राशि का संग्रह किया जाएगा। वाहन लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजरते हुए भी टोल प्लाजा को पार कर सकेगा। इससे बूम बैरियर के कारण होने वाली ब्रेकिंग और समय की बर्बादी समाप्त होगी।

    SLFF लेन में फास्टेग/RFID रीडर, हाई-रिजॉल्यूशन ANPR कैमरे, वाहन डिटेक्शन एवं क्लासिफिकेशन सेंसर, लेन कंट्रोलर तथा ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं। वाहन के लेन से गुजरते ही सिस्टम फास्टेग को स्वतः रीड कर वाहन की पहचान करता है, वाहन की श्रेणी के अनुसार टोल राशि की गणना करता है और फास्टेग खाते से राशि काटने की प्रक्रिया पूरी करता है।

    फास्टेग में समस्या होने पर ई-चालान

    नई व्यवस्था में फास्टेग से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान की व्यवस्था भी की गई है। यदि फास्टेग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, वाहन का पंजीकरण नंबर गलत दर्ज है अथवा किसी अन्य तकनीकी कारण से टोल राशि तत्काल प्राप्त नहीं हो पाती है, तो संबंधित वाहन को ई-चालान के माध्यम से टोल राशि की सूचना दी जाएगी। निर्धारित तीन दिवस में राशि जमा नहीं करने पर नियमानुसार पेनल्टी सहित वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    सफल परीक्षण के बाद होगा व्यापक विस्तार

    वर्तमान में फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में इस व्यवस्था का पायलट परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के परिणामों का विधिवत मूल्यांकन करने के बाद सफल पाए जाने पर 1 जनवरी 2027 से भोपाल–देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इसे लागू करने की योजना है।

    मंत्री  सिंह ने निर्देश दिये कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर इस तकनीक की उपयोगिता, कार्यक्षमता और यात्रियों को मिलने वाली सुविधा का आकलन किया जाए। इसके बाद प्रदेश के अन्य उपयुक्त टोल प्लाजा पर भी बैरियर-लेस टोलिंग लागू करने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा शुरू किया गया यह नवाचार प्रदेश में टोलिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का प्रयास है कि सड़क पर नागरिकों को कम से कम रुकना पड़े, यात्रा में कम समय लगे और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उन्हें अधिकतम सुविधा मिले। बैरियर-लेस टोलिंग जैसी तकनीक आधारित व्यवस्थाएं भविष्य में प्रदेश की सड़क यात्रा को और अधिक सुगम एवं निर्बाध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

     

  • डबरा में आग का रहस्य गहराया: बिना वजह जल रहे सामान, नई बहू की साड़ी भी नहीं बची

    डबरा में आग का रहस्य गहराया: बिना वजह जल रहे सामान, नई बहू की साड़ी भी नहीं बची

    डबरा

    भितरवार अनुविभाग की ग्राम पंचायत पुरा बनवार में पिछले तीन दिनों से एक परिवार के घर में अचानक आग लगने की घटनाओं ने ग्रामीणों को हैरान कर दिया है। घर में रखे कपड़े, बिस्तर, बक्से, साड़ियां और अन्य सामान अचानक आग की चपेट में आ रहे हैं।

    परिवार का कहना है कि रोजाना पहनने वाले कपड़ों से लेकर घर में रखे सामान तक में अचानक आग लग रही है। चार माह पहले हुई बेटे की शादी के बाद घर में आई नई बहू की साड़ी भी अचानक आग की चपेट में आ चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं से परिवार भय और चिंता के माहौल में है।

    परिवार को उठाना पड़ रहा है भारी नुकसान

    परिवार के अनुसार पुरा बनवार निवासी इंदर कुशवाह के घर में मंगलवार से आग लगने का सिलसिला शुरू हुआ। मंगलवार को अलग-अलग स्थानों पर करीब चार से पांच बार आग लगी। इसके बाद बुधवार को दो बार और गुरुवार को भी तीन से चार बार आग लगने की घटना बताई गई है। खास बात यह है कि आग घर में रखे अलग-अलग सामान में लग रही है, जिससे परिवार के सदस्य लगातार सतर्क रहकर सामान को सुरक्षित करने और आग बुझाने में जुटे हुए हैं। हालांकि इस रहस्यमई आग की घटना में संबंधित परिवार का भारी नुकसान हो चुका है।

    ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं

    लगातार आग लगने की जानकारी गांव में फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवार के घर पहुंच रहे हैं। लोग अपनी आंखों से घटनाक्रम को देखने का प्रयास कर रहे हैं। आग लगने का कारण सामने नहीं आने से ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। घटना की जानकारी मिलने पर ग्राम पंचायत सरपंच नीतू परिहार, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा जिला ग्रामीण अध्यक्ष बनवारी सिंह परिहार और पंचायत सचिव भरोसी कुशवाहा, ग्राम पटवारी के साथ मौके पर पहुंचे।

    उन्होंने परिवार के सदस्यों से घटनाओं की जानकारी ली और स्थिति का जायजा लिया। साथ ही मामले से प्रशासन को अवगत कराया गया है, ताकि आग लगने के वास्तविक कारण की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जा सके।

     

  • डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय डिलीवरी करें सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय डिलीवरी करें सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में ई-एचएमआईएस (e-HMIS) की प्रगति एवं क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी प्रबंधन का सशक्त डिजिटल माध्यम बनाया जाए, जिससे मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलें और विभागीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस. ने ई-एचएमआईएस के वर्तमान क्रियान्वयन, विभिन्न मॉड्यूल्स की प्रगति, डिजिटल सेवाओं के एकीकरण और आगामी कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  सुखवीर सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    मरीजों की डिजिटल केस हिस्ट्री हो उपलब्ध

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस में प्रत्येक मरीज का समुचित डिजिटल डेटाबेस और केस हिस्ट्री तैयार हो। मरीज के पूर्व उपचार, जांच, दवाओं और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से चिकित्सकों को उपचार संबंधी निर्णय लेने में सुविधा होगी और मरीज को बार-बार अपनी पिछली चिकित्सा जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को इस प्रकार विकसित किया जाए कि मरीज के उपचार की निरंतरता बनी रहे और आवश्यकता के अनुसार अधिकृत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं को संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके।

    लैब सेवाओं को ई-एचएमआईएस से जोड़ा जाए

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध लैब सेवाओं एवं जांच प्रक्रियाओं को ई-एचएमआईएस से इंटरकनेक्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीज की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार होने की प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली से जुड़ी हो, जिससे जांच रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध हो और चिकित्सक उसे उपचार के दौरान तत्काल देख सकें।उन्होंने जांच रिपोर्ट की समयबद्धता, शुद्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी डिजिटल माध्यम से प्रभावी रूप से प्रबंधित की जा सके।

    दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की रियल टाइम निगरानी

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा के लिए ई-एचएमआईएस को दवा वितरण एवं स्टॉक प्रबंधन प्रणाली से प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, वितरण, खपत और स्टॉक की स्थिति की नियमित एवं रियल टाइम निगरानी हो, ताकि किसी भी स्वास्थ्य संस्था में आवश्यक दवाओं की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि दवा स्टॉक की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड एवं आवश्यक अलर्ट आधारित व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक जानकारी समय पर प्राप्त हो सके और आवश्यकता के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जा सके।

    डेटा संकलन से आगे बढ़कर बने प्रबंधन का प्रभावी माध्यम

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि ई-एचएमआईएस का उद्देश्य केवल डेटा संकलन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं की योजना, निगरानी, विश्लेषण और बेहतर प्रबंधन के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली, मरीजों को उपलब्ध सेवाओं, जांच, दवा वितरण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम स्थिति की जानकारी प्राप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाएं समय पर उपलब्ध हों, इसके लिए डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। उपलब्ध डेटा के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो।

    स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच डिजिटल इंटरकनेक्टिविटी पर जोर

    उपमुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि ई-एचएमआईएस के विभिन्न मॉड्यूल्स के बीच बेहतर इंटरकनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए। मरीज का पंजीयन, उपचार, जांच, रिपोर्ट, दवा एवं अन्य संबंधित सेवाओं का डेटा एकीकृत डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध होने से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस के क्रियान्वयन में आने वाली तकनीकी एवं व्यावहारिक कठिनाइयों की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान किया जाए तथा स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

    रियल टाइम मॉनिटरिंग से बेहतर होगी जवाबदेही

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि डिजिटल प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण लाभ रियल टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य संस्थाओं से प्राप्त डिजिटल जानकारी के आधार पर अधिकारियों को सेवाओं की स्थिति का नियमित आकलन करने में सुविधा होनी चाहिए। इससे समस्याओं की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया अधिक तेज होगी। उन्होंने कहा कि ई-एचएमआईएस के माध्यम से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं एवं नीतिगत निर्णयों के लिए भी किया जाए, ताकि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि ई-एचएमआईएस को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल रीढ़ के रूप में विकसित किया जाए, ताकि तकनीक के माध्यम से मरीजों को तेज, पारदर्शी, सुगम और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी पॉवर की नई इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर का करेंगे रोल-आउट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी पॉवर की नई इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर का करेंगे रोल-आउट

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 4 सितंबर को सीहोर में सीजी (क्रॉम्पटन एंड ग्रीव्स) पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई के प्रथम ट्रांसफॉर्मर के रोल-आउट का शुभारंभ करेंगे। करीब 50 एकड़ में स्थापित यह इकाई एक ही स्थान पर स्थित भारत की सबसे बड़ी पॉवर ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण इकाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अगस्त 2025 में इस संयंत्र का भूमि-पूजन किया था और अब करीब 13 से 14 महीने में यहां उत्पादन प्रारंभ हो गया है।

    सीहोर में स्थापित यह आधुनिक इकाई देश में बढ़ती विद्युत जरूरतों को देखते हुए उच्च क्षमता वाले पॉवर ट्रांसफॉर्मर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यहां 220 केवी से लेकर 1200 केवी श्रेणी के पॉवर ट्रांसफॉर्मर बनाए जाएंगे। इकाई की उत्पादन क्षमता हर माह 35 पॉवर ट्रांसफॉर्मर तैयार करने की होगी। इतनी बड़ी क्षमता वाली इकाई एक ही स्थान पर स्थापित होने से देश में उच्च वोल्टेज ट्रांसमिशन उपकरणों के निर्माण को मजबूती मिलेगी।

    सीहोर में तैयार होने वाले उच्च क्षमता के ट्रांसफॉर्मर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ वैश्विक बाजारों तक भी पहुंचेंगे। इकाई में तैयार होने वाले ट्रांसफॉर्मर विद्युत क्षेत्र के साथ डेटा सेंटर, रेलवे, नवकरणीय ऊर्जा, तेल एवं गैस तथा ट्रांसमिशन अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं में उपयोग किए जाएंगे। सीजी की इस इकाई से सीहोर में 2000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

     

  • मध्यप्रदेश में फिर बदला मौसम का मिजाज, दमोह-टीकमगढ़ में रेड अलर्ट; 30 जिले भीगे

    मध्यप्रदेश में फिर बदला मौसम का मिजाज, दमोह-टीकमगढ़ में रेड अलर्ट; 30 जिले भीगे

    भोपाल

    पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश के ऊपर बने स्पष्ट निम्न दबाव के क्षेत्र और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से आ रही ट्रफ लाइनों के कारण पूरे प्रदेश में मानसूनी हलचल तेज कर दी है। गुरुवार को प्रदेश के कई अंचलों में झमाझम वर्षा हुई। शाम 5:30 बजे तक सबसे ज्यादा 33 मिलीमीटर पानी नरसिंहपुर और छतरपुर के नौगांव में बरसा।

    इसके अलावा ग्वालियर और टीकमगढ़ में 27 मिलीमीटर, रायसेन में 15 मिलीमीटर, दतिया में 13 मिलीमीटर और शिवपुरी में 10 मिलीमीटर वर्षा हुई। राजधानी भोपाल में दिनभर काले घने बादल छाए रहे, सिटी क्षेत्र में जहां फुहारें पड़ीं, वहीं बैरागढ़ इलाके में 2.0 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई।

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार स्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र दक्षिण की ओर झुका हुआ है और अगले 24 घंटों में दक्षिण उत्तर प्रदेश व उससे लगे उत्तर मप्र से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर आगे बढ़ेगा। इसके चलते मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए दमोह और टीकमगढ़ में अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है।

    ग्वालियर-सागर समेत 13 जिलों में ऑरेंज, 17 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी

    मौसम विभाग ने रायसेन, गुना, अशोकनगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, सागर, छतरपुर, निवाड़ी और पांढुर्णा में अति भारी वर्षा का आरेंज अलर्ट जारी किया है। विदिशा, सीहोर और राजगढ़ समेत 17 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। राजधानी भोपाल, हरदा और बुरहानपुर समेत अन्य 17 जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा के आसार जताए हैं।
    शाम साढ़े बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा (मिलीमीटर में)

    छिंदवाड़ा — 1.0, गुना — 2.0, नर्मदापुरम — 6.0, जबलपुर — 2.0, मंडला — 9.0, राजगढ़ — 1.0, रीवा — 0.3, सागर — 2.0, सिवनी — 3.0, श्योपुर — 9.0।

    प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में)

    भोपाल — अधिकतम: 27.0, न्यूनतम: 22.8।

    इंदौर — अधिकतम: 27.9, न्यूनतम: 21.9।

    ग्वालियर — अधिकतम: 28.0, न्यूनतम: 25.9।

    जबलपुर — अधिकतम: 24.5, न्यूनतम: 22.6।

  • बांधवगढ़ में टूरिज्म को नई उड़ान, 29 गाइड्स प्रशिक्षित; अगले महीने से कोर जोन में सफारी शुरू

    बांधवगढ़ में टूरिज्म को नई उड़ान, 29 गाइड्स प्रशिक्षित; अगले महीने से कोर जोन में सफारी शुरू

    उमरिया
     उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों कोर जोन में पर्यटन पूरी तरह से बंद है. इसी बीच मानसून सीजन के दौरान गाइड्स की स्पेशल ट्रेनिंग चल रही है. यह ट्रेनिंग इसलिए दी जा रही है जिससे कि नए सीजन की शुरुआत के साथ ही वे पर्यटकों को और बेहतर तरीके से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का भ्रमण करा सकें. पहले बैच में 29 गाइड ने दो दिवसीय ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। 

    गाइड्स के लिए दो दिवसीय ट्रेनिंग
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया "बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले बैच की दो दिवसीय ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी हुई. ट्रेनिंग में 29 गाइड्स ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के दौरान गाइड्स को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की जैव विविधता, वन्यजीव, सरीसृपों, पक्षियों, वनस्पतियों, कीटों तथा वन्यजीवों के विभिन्न अनुकूलनों से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने जानकारी दी गई। 

    साथ ही गाइडों के व्यक्तित्व विकास, ग्रूमिंग, भूमिका एवं दायित्व और ईको-टूरिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी सत्र आयोजित किए गए. प्रशिक्षण के दूसरे दिन ताला पर्यटन क्षेत्र में फील्ड विजिट आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवास का मैदानी स्तर पर अवलोकन कराया गया. साथ ही प्रकृति व्याख्या के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया गया। 

    ट्रेनिंग में 29 गाइड्स ने लिया हिस्सा
    दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान सभी निर्धारित सत्र एवं व्याख्यान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुए. प्रशिक्षण में शामिल 29 गाइड्स ने कार्यक्रम की तारीफ करते हुए इसे अपने ज्ञान एवं व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाने की दिशा में उपयोगी पहल बताया. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के गाइड के इस विशेष ट्रेनिंग का मकसद गाइड्स को केवल पर्यटकों को वन्यजीव दिखाने तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण और बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता के प्रभावी व्याख्याकार के रूप में और अधिक सक्षम बनाना रहा। 

  • उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश की मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए संचालित नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। लखनऊ में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030 में सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) के अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा विकसित सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस एवं अन्य राज्यों में लागू किए जाने वाले स्केलेबल इंटरवेंशन के रूप में मान्यता मिली है।

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ समुदाय की भागीदारी, डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट जैसे नवाचार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन पहलों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने में सहायता मिल रही है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की इन पहलों का राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में स्वीकार किया जाना प्रदेश में किए जा रहे नवाचारों की प्रभावशीलता का प्रमाण है।

    लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यशाला में हुआ प्रदर्शन

    2 एवं 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030 में मध्यप्रदेश की सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट पहलों को प्रदर्शित किया गया। कार्यशाला में इन पहलों को समुदाय से जुड़ाव मजबूत करने, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक पहुंच आसान बनाने तथा महिलाओं एवं उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं को समझने और प्राप्त करने में सहायता देने के लिए सराहा गया। राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के समक्ष मध्यप्रदेश की इन पहलों की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता को प्रस्तुत किया गया। इनके प्रभावी मॉडल को देखते हुए इन्हें अन्य राज्यों में भी स्केलेबल इंटरवेंशन के रूप में अपनाया जाएगा। मध्यप्रदेश के दल में एमडी एनएचएम डॉ सलोनी सिडाना, वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ अर्चना मिश्रा सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

    सुमन रोडमैप 2030 में मध्यप्रदेश की पहलें शामिल

    मध्यप्रदेश की इन दोनों पहलों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सुमन रोडमैप 2030 गाइडलाइंस में भी शामिल किया गया है। इससे मध्यप्रदेश के सफल मॉडलों को राज्य की सीमाओं से बाहर ले जाने और अन्य राज्यों में आवश्यकता एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का अवसर मिलेगा।

    सुमन पंचायत—समुदाय को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की पहल

    सुमन पंचायत का उद्देश्य पंचायत स्तर पर समुदाय की भागीदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित मातृत्व एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से स्थानीय स्तर पर गर्भवती महिलाओं, उनके परिवारों और समुदाय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चर्चा और सामुदायिक सहभागिता बढ़ने से गर्भवती महिलाओं की आवश्यक सेवाओं तक पहुंच, समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात देखभाल तथा नवजात की देखभाल के प्रति जागरूकता को मजबूत करने में सहायता मिलती है। सुमन पंचायत का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी न मानकर समुदाय और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी से सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाया जाता है। सुमन पंचायत' (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पंचायत) पहल के अंतर्गत, यदि कोई ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में लगातार एक साल तक मातृ और शिशु मृत्यु दर को शून्य (जीरो) बनाए रखती है, तो सरकार द्वारा उसे ₹1 लाख (एक लाख रुपये) की प्रोत्साहन/पुरस्कार राशि दी जाती है।

    सुमन सखी चैटबॉट—डिजिटल माध्यम से जानकारी तक आसान पहुंच

    सुमन सखी चैटबॉट डिजिटल तकनीक के माध्यम से महिलाओं एवं परिवारों को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अभिनव पहल है। चैटबॉट के माध्यम से गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल तथा उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी तक आसान पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं एवं परिवारों को सही समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए सक्षम बनाना है। डिजिटल माध्यम के उपयोग से जानकारी को अधिक सुलभ एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल तरीके से उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। यह पहल विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं और समुदाय के बीच सूचना के अंतर को कम करने की दिशा में उपयोगी है।

    अनमोल 2.0 डैशबोर्ड भी रहा कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण

    राष्ट्रीय कार्यशाला में अनमोल 2.0 डैशबोर्ड का भी प्रदर्शन किया गया। यह डैशबोर्ड हाई-रिस्क प्रेग्नेंट वोमेन (एचआरपी) की पहचान, ट्रैकिंग एवं फॉलोअप को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। डैशबोर्ड में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इससे स्वास्थ्य तंत्र के मैदानी एवं पर्यवेक्षण स्तर के अधिकारियों को ऐसी महिलाओं की पहचान करने, उनकी नियमित निगरानी करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से समय पर जोड़ने में सहायता मिलती है। अनमोल 2.0 में विशेष रूप से संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर फोकस किया गया है। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और निरंतर फॉलोअप से प्रसव के दौरान संभावित जोखिमों को कम करने तथा आवश्यकता पड़ने पर समय रहते उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्था में रेफरल सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

     

  • अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न

    अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न

    भोपाल 

    अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक एवं पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), द्वारा आयोजित 03 दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रभावी उपयोग, साक्ष्यों के संकलन एवं उनके न्यायालयीन प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

    समापन अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी)  पंकज वास्‍तव ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति दिन-प्रतिदिन जटिल होती जा रही है, ऐसे में विवेचना को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है।

     वास्तव ने बताया कि किसी विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में अनुसंधान अधिकारी को किस प्रकार दक्षतापूर्वक कार्य संपादित करना चाहिए तथा विभाग द्वारा प्रदाय अत्याधुनिक उपकरणों का अधिक से अधिक व्यावहारिक उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    उन्होंने डीएनए एवं डिजिटल साक्ष्य संकलन के संबंध में विस्तृत एवं इंटरेक्टिव सत्र भी लिया, जिसमें उन्होंने स्वयं प्रशिक्षणार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर एवं संवाद किया।  वास्तव ने सीआईडी में पदस्थापना के दौरान समस्त कर्मचारियों को अपना व्यावसायिक स्तर औरों की तुलना में ऊँचा बनाए रखने हेतु प्रेरित किया, जिससे उनकी व्यावसायिक दक्षता में वृद्धि हो और वे पीड़ितों को त्वरित एवं सटीक न्याय दिलाने में अपनी सही भूमिका निभा सकें।

    उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि वे कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता का अपने-अपने क्षेत्राधिकार में समुचित उपयोग करें, जिससे विवेचना की गुणवत्ता में सुधार हो तथा प्रकरणों में न्यायालयीन साक्ष्य अधिक सुदृढ़ एवं प्रामाणिक बन सकें। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए समस्त आयोजक टीम, विशेषज्ञ वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    कार्यशाला में उप पुलिस अधीक्षक (फोटो), अपराध अनुसंधान विभाग, भोपाल  अमिताभ तिवारी एवं निरीक्षक  जाम सिंह ने अपराध घटनास्थल फोटोग्राफी के तकनीकी एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटनास्थल की फोटोग्राफी विवेचना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील हिस्सा है, जिसमें साक्ष्यों को उनकी मूल स्थिति में, व्यवस्थित क्रम (Overall, Mid-range एवं Close-up Photography) में तथा बिना किसी छेड़छाड़ के दस्तावेजीकृत किया जाना आवश्यक है। सत्र में घटनास्थल की वीडियोग्राफी, मृत शरीर, अस्त्र-शस्त्र, रक्त के धब्बे, पद-चिन्ह एवं अन्य भौतिक साक्ष्यों के फोटोग्राफिक साक्ष्यीकरण की मानक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) पर चर्चा की।

     तिवारी ने फोटोग्राफिक साक्ष्यों के न्यायालयीन प्रमाणीकरण (Court Authentication) की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया, जिसमें फोटोग्राफ की चेन ऑफ कस्टडी (Chain of Custody) बनाए रखना, समय-दिनांक एवं जियो-लोकेशन का उल्लेख तथा न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुतीकरण के दौरान बरती जाने वाली विधिक सावधानियाँ शामिल हैं। उन्होंने डिजिटल फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी में साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने के तकनीकी उपायों पर भी प्रकाश डाला, जिससे विवेचना अधिकारी न्यायालय में मजबूती से साक्ष्य प्रस्तुत कर सकें।

    कार्यशाला के अंतिम सत्र में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों, विषय-वस्तु एवं व्यावहारिक उपयोगिता के संबंध में फीडबैक लिया गया।

    समापन कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक  साकेत पाण्डेय एवं  प्रशांत खरे, सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री के अतिरिक्त FSL, डॉक्यूमेंट, फिंगरप्रिंट, कम्प्यूटर्स एवं फोटो शाखा के विषय-विशेषज्ञ तथा समस्त प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

    वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रभावी पुलिसिंग का आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में पुलिसिंग एवं अपराध अनुसंधान से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिभागियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी एवं व्यावहारिक दक्षता को बढ़ाना तथा अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक साक्ष्यों के अधिक प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा।

    कार्यशाला के सफल समापन के साथ प्रतिभागियों को अपराध घटना स्थल के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, फोटोग्राफिक साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा न्यायालयीन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक, तकनीक आधारित एवं साक्ष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिसिंग की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की प्रभावशीलता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

     

     

  • इंदौर वार्ड 60 में नहीं होगा उपचुनाव, सुनेहरा अंसारी का चुनाव निरस्त करने के आदेश पर हाई कोर्ट का स्टे

    इंदौर वार्ड 60 में नहीं होगा उपचुनाव, सुनेहरा अंसारी का चुनाव निरस्त करने के आदेश पर हाई कोर्ट का स्टे

     इंदौर 

     वार्ड 60 की पार्षद सुनेहरा अंसारी की पार्षदी बरकरार रहेगी। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सुनेहरा अंसारी के निर्वाचन को शून्य घोषित करने वाले जिला कोर्ट के 17 जुलाई 2026 को सुनाए गए फैसले पर गुरुवार को रोक लगा दी।

    न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने गुरुवार को जिला कोर्ट के आदेश पर स्टे देते हुए इस वार्ड में निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा को भी रोक दिया है। वार्ड में चुनावी प्रक्रिया, किसी अन्य के पदभार ग्रहण करने पर भी अंतरिम रोक लगा दी गई है।

    वर्ष 2022 में हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड 60 से सुनेहरा अंसाफ अंसारी ने लगभग पांच हजार मतों से जीत हासिल की थी। उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए इफ्तेखार (मुन्ना) अंसारी ने जिला कोर्ट में चुनाव याचिका प्रस्तुत की थी। इस याचिका में आरोप लगाया था कि सुनहरा अंसारी ने नामांकन फार्म के साथ अपनी संपत्ति के संबंध में जो नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है वह गलत है।

    टैक्स की गणना भी कम की गई। आरोप यह भी था कि अंसारी ने भ्रामक प्रचार किया और मतदाताओं को भ्रमित किया। 17 जुलाई 2026 को जिला कोर्ट ने याचिका स्वीकारते हुए सुनेहरा अंसाफ अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था। सुनेहरा ने इस फैसले को चुनौती देते हुुए हाई कोर्ट में सीविल अपील प्रस्तुत की है जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनेहरा अंसारी की ओर से अधिवक्ता विशाल बाहेती ने तर्क रखे।
    यह तर्क रखे अंसारी के वकील ने

    एडवोकेट बाहेती ने तर्क रखे और कहा कि चुनाव के वक्त नगर निगम ने नियमानुसार अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था। बाद में एक निगम कर्मचारी ने कोर्ट में रजिस्टर पेश कर दावा कर दिया कि अंसारी पर संपत्ति कर बकाया था, जबकि वह विवादित संपत्ति थी और उस वक्त याचिकाकर्ता के श्वसुर के नाम पर दर्ज थी। जिला कोर्ट में अंसारी के निर्वाचन को चुनौती देने वाले मुन्ना अंसारी की ओर से तर्क रखा गया कि सुनेहरा अंसारी के पास घोषित संपत्तियों के अलावा अन्य संपत्ति भी है। इसे छुपाया गया है।
    यह कहा शासन की ओर से

    शासन की ओर से तर्क रखे गए कि निर्वाचन आयोग ने वार्ड 60 की सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। साथ ही यहां उप चुनाव की तारीख भी घोषित हो चुकी है। ऐसी स्थिति में कोर्ट को दखल नहीं करना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। इस संबंध में कई न्याय दृष्टांत भी कोर्ट में प्रस्तुत किए गए।

    यह कहा कोर्ट ने

    सभी पक्षकारों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनेहरा अंसाफ अंसारी को राहत देते हुए उनकी ओर से प्रस्तुत अंतरिम आवेदन स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने जिला कोर्ट के आदेश के निष्पादन और क्रियान्वयन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि इस याचिका के अंतिम निराकरण तक चुनाव आयोग या प्रशासन द्वारा उपचुनाव कराने, किसी अन्य व्यक्ति को निर्वाचित घोषित करने जैसी कोई भी परिणामी कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले में अब चार सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

    यह भी माना कोर्ट ने

    हाई कोर्ट ने माना कि मामला केवल चुनावी प्रक्रिया के बीच दखल देने का नहीं है, बल्कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि को बिना किसी गलती के हटाने का है। कानूनन अगर किसी निर्वाचित उम्मीदवार की अपनी कोई व्यक्तिगत गलती या भ्रष्ट आचरण सिद्ध न हुआ हो, तो उसके निर्वाचन को निरस्त कर उस क्षेत्र को बिना प्रतिनिधित्व रखना मतदाताओं के साथ अन्याय है। अंसारी मतदाताओं के लोकतांत्रिक जनादेश के अनुसरण में वार्ड 60 की विधिवत निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं और मतदाताओं की इच्छा को इस प्रकार विफल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

     

  • फर्जी IAS का पर्दाफाश: तृप्ति सिंह ने युवतियों को बनाया मोहरा, वायरल वीडियो में अफसर बताने से पहले रटवाई थी स्क्रिप्ट

    फर्जी IAS का पर्दाफाश: तृप्ति सिंह ने युवतियों को बनाया मोहरा, वायरल वीडियो में अफसर बताने से पहले रटवाई थी स्क्रिप्ट

    भोपाल

    फर्जी आईएएस बनकर लोगों से ठगी करने वाली तृप्ति सिंह के मामले में अब एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। उसके साथ वायरल वीडियो में खुद को आइएएस बताने वाली दोनों युवतियां भी उसकी पीड़िता निकली हैं।

    बैतूल निवासी ख्याति और विशाखा ने पुलिस को शिकायत देकर बताया है कि तृप्ति ने उन्हें आईएएस बनाने और नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब तीन-तीन लाख रुपये लिए थे। दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें तृप्ति के साथ तीन युवतियां खुद को आईएएस बताती नजर आ रही थीं।

    दावा किया गया था कि वीडियो विधानसभा के भीतर का है और युवतियां वहां की कार्यवाही अटेंड करने पहुंची थीं। अब पुलिस जांच में सामने आया है कि वीडियो विधानसभा का नहीं, बल्कि मानव संग्रहालय की संकुल वीथी का है।
    पहले दी स्क्रिप्ट, फिर अफसर बनने का दिखाया सपना

    ख्याति और विशाखा ने पुलिस को बताया कि तृप्ति ने उन्हें पहले से एक स्क्रिप्ट दी थी। उसने कहा था कि आईएएस बनने से पहले ही अफसर जैसा एटीट्यूड बनाकर रखो। इसी तैयारी के नाम पर उन्हें अपने साथ कार्यक्रमों और अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया।

    वीडियो में दोनों युवतियों ने तृप्ति के बताए अनुसार खुद को आईएएस बताया। बाद में उन्हें नौकरी और अफसर बनाने का झांसा देकर रकम ली गई। जब न नौकरी मिली और न तृप्ति के दावे पूरे हुए तो दोनों को उसके फर्जीवाड़े का अहसास हुआ।
    चार दिन की रिमांड पर तृप्ति और सुधांशु

    बागसेवनिया पुलिस बुधवार को अशोकनगर से तृप्ति सिंह और उसके भाई सुधांशु सिंह को भोपाल लाई थी। दोनों को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने चार दिन की रिमांड ली है।

    पूछताछ में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तृप्ति ने फर्जी आईएएस की पहचान बनाने के लिए कितने लोगों और युवतियों का इस्तेमाल किया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है। पुलिस उसके मोबाइल, दस्तावेज और लेनदेन की भी जांच कर रही है।
    पति की शिकायत में अचल गवाह बनेगा

    तृप्ति के पति अचल सिंह ने भी पत्नी पर फर्जी आईएएस बनकर उससे शादी करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। हालांकि पुलिस इस शिकायत पर अलग से केस दर्ज करने के बजाय मौजूदा प्रकरणों की जांच में अचल को गवाह बनाएगी।

    पुलिस का कहना है कि तृप्ति के फर्जी आईएएस बनने से जुड़े तथ्य पहले से दर्ज मामलों की विवेचना में ही सामने आ रहे हैं।

    तृप्ति के खिलाफ अशोकनगर के चंदेरी में नौकरी लगवाने के नाम पर करीब 10 लाख रुपये की ठगी का केस दर्ज है। चंदेरी पुलिस ने उसे और उसके भाई सुधांशु को गिरफ्तार किया था।

    भोपाल में भी एमपीटी के होटल-रिसार्ट की लीज दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के मामले सामने आ चुके हैं।

    अब नौकरी के नाम पर ठगी की शिकार युवतियों की शिकायत से यह साफ हो रहा है कि तृप्ति ने फर्जी आईएएस की पहचान सिर्फ लोगों को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क के तौर पर इस्तेमाल की।

        वायरल वीडियो में खुद को आईएएस बताने वालीं ख्याति और विशाखा नामक युवतियों ने नौकरी के नाम पर ठगी की शिकायत की है। पुलिस उनके बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। फिलहाल रिमांड पर लेकर 39 और 49 लाख रुपये की ठगी के संबंध में पूछताछ की जा रही है।- रजनीश कश्यप, एसीपी मिसरोद