Category: मध्य प्रदेश

  • इंदौर कलेक्टर का बड़ा एक्शन! बिना हेलमेट पहुंचे कर्मचारियों को लौटाया वापस, सुरक्षा नियमों पर सख्ती

    इंदौर कलेक्टर का बड़ा एक्शन! बिना हेलमेट पहुंचे कर्मचारियों को लौटाया वापस, सुरक्षा नियमों पर सख्ती

    इंदौर

    इंदौर में यातायात नियमों के पालन को लेकर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों और आम आगंतुकों के लिए एक सख्त गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब कलेक्टर कार्यालय में आने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। इन नियमों की अनदेखी करने वालों को परिसर में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा।

    सुरक्षा कर्मियों को सौंपी गई जांच की कमान
    प्रशासन ने इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए परिसर के सभी प्रवेश द्वारों पर मुस्तैदी बढ़ा दी है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशों के अनुसार दोपहिया वाहन से आने वाले सभी लोगों को हेलमेट लगाना होगा, वहीं चार पहिया वाहनों में सवार अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य की गई है। मुख्य द्वारों पर तैनात सुरक्षा कर्मचारियों को स्पष्ट कहा गया है कि वे नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश न करने दें।

    सड़क सुरक्षा और जन-जागरूकता का संदेश
    इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल शासकीय परिसर में अनुशासन बनाए रखना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के जरिए समाज को एक सकारात्मक संदेश देना भी है। प्रशासन का मानना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी स्वयं यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करेंगे, तो इससे आम जनता में भी सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और लोग नियमों के प्रति सजग होंगे। 

  • ‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’, अवैध शराब मामले में उप मुख्यमंत्री शुक्ल सख्त; अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

    ‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’, अवैध शराब मामले में उप मुख्यमंत्री शुक्ल सख्त; अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

    लापरवाही करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    अवैध शराब प्रभावितों की स्वास्थ्य सुविधाओं एवं कारवाई की समीक्षा की

    भोपाल

    बंडा क्षेत्र में अवैध व जहरीली शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के मामले में उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बुन्देलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रभावितों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं एवं पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिले में अवैध शराब की बिक्री पर पूर्णतः रोक लगाई जाए। सभी शराब दुकानों की जांच, उनके स्टॉक की निगरानी और अवैध कारोबार की गहन जांच की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले एवं जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को जिला पुलिस प्रशासन में कसावट और नशा मुक्ति अभियान को प्रभावी रूप से चलाने के निर्देश दिए।

      कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि अवैध शराब से प्रभावित कुल 84 मरीज वर्तमान में उपचाररत हैं, जिनमें 59 मरीज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में, 17 मरीज जिला चिकित्सालय में, 7 मरीज बंडा सिविल हॉस्पिटल में भर्ती हैं, जबकि 1 गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर एम्स भोपाल भेजा गया है। अधिकांश मरीजों की हालत अब स्थिर है और सभी के लिए आवश्यक दवाएं, डायलिसिस और जांच की सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। जहरीली शराब के स्रोत की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह शराब बाहर से बनकर सप्लाई हुई है, जिसमें मेथेनॉल की मिलावट पाई गई है।

      पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बताया कि प्रकरण मे थाना बण्डा मे पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 20 आरोपियों के विरूद्ध नामजद अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई है जिन पर अवैध लाभ के उद्देश्य से संदिग्ध नकली एवं अवैध शराब के निर्माण, सप्लाई एवं बिक्री से जुड़े होने के संबंध में आरोप हैं। इसके अतिरिक्त थाना विनायका मे भी 10 आरोपियों के विरूद्ध नामजद प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। पुलिस टीमों द्वारा विभिन्न संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश देते हुए 20 नामजद आरोपियों में से अब तक 10 आरोपियों को अभिरक्षा मे लिया गया है जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के स्रोत की जांच एवं संलिप्त अपराधियों की लगातार धर-पकड़ जारी है। डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि प्रभावित मरीजों का उपचार लक्षणों की तीव्रता के अनुसार किया जा रहा है, प्रभावितों के आने की दर में कमी आई है और गंभीर मरीजों का डायलिसिस जारी है।

    बीएमसी में मरीजों का जाना हाल और परिजनों को बंधाया ढांढस

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को पीड़ितों के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। शुक्ल ने बीएमसी के आईसीयू और क्रिटिकल केयर वार्डों में भर्ती उपचाररत मरीजों के पास पहुंचकर उनसे बातचीत की और उनके स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने वहां मौजूद मरीजों के परिजनों से भी चर्चा की, उनका ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस कठिन घड़ी में पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सर्वोत्तम संभव इलाज मुहैया कराया जाए। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम 24 घंटे तैनात रहे और दवाओं व संसाधनों की कोई कमी न होने दी जाए। निरीक्षण के दौरान सागर विधायक शैलेंद्र जैन, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह कमिश्नर अनिल सुचारी, डीआईजी  शशीन्द्र चौहान , कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया, बीएमसी के प्रभारी डीन डॉ गंगवानी, इमरजेंसी मेडिसिन से डॉ सौरभ जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

     

    नशामुक्त समाज के लिए ग्रामीणों से की अपील

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भ्रमण के दौरान ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संवाद करते हुए गांवों को पूर्णतः नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार और समाज को तबाह कर देती है। इसलिए सभी नागरिक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए नशे की लत से दूर रहें। उन्होंने रेखांकित किया कि क्षेत्र में पूर्व में भी नशामुक्ति के लिए जनसहयोग से प्रयास हुए हैं; भविष्य में भी अवैध नशे के कारोबार पर पूर्ण विराम लगाने और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शासन-प्रशासन पूरी कड़ाई और गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दौरान बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजनिया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जगदीश गोमे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी अधिकारी मौजूद रहे। 

     

  • कटनी के छात्र की दिल्ली हादसे में मौत, सत्य निकेतन में हुआ हादसा; B.Com का था छात्र

    कटनी के छात्र की दिल्ली हादसे में मौत, सत्य निकेतन में हुआ हादसा; B.Com का था छात्र

    कटनी
     दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस स्थित सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे में कटनी का भी एक छात्र शिकार हो गया। मृतक छात्र की पहचान दुबे कॉलोनी निवासी 19 वर्षीय अक्षत यादव के रूप में हुई है, जो दिल्ली में रहकर दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था।

    मंगलवार सुबह पहुंचेगा शव
    घटना की खबर मिलते ही कटनी स्थित उनके निवास स्थान पर शोक की लहर दौड़ गई और स्वजन रोते-बिलखते दिल्ली के लिए रवाना हो गए। स्वजनों ने दिल्ली पहुंचकर उसके शव की शिनाख्त की है और शव सड़क मार्ग से कटनी लाया जा रहा है, जो मंगलवार की सुबह कटनी पहुंचेगा।

    अब तक 6 लोगों की मौत
    रविवार को दिल्ली में हुए हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, रविवार को सत्य निकेतन स्थित 40 साल पुरानी इमारत ढहने के दौरान अक्षत भी हादसे की चपेट में आ गया था। मलबे में दबने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

    क्षेत्र में दौड़ी शौक की लहर
    शिनाख्त के दौरान अक्षत की पहचान हुई। अक्षत यादव की असामयिक मौत की खबर मिलते ही दुबे कॉलोनी स्थित उसके निवास पर लोग, स्वजन और पड़ोसी जमा हो गए। दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त कर बेहतर भविष्य की तैयारी कर रहे अक्षत की अचानक हुई मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त है।

     

  • भोपाल में महापौर की कार बनी निशाना! कर्मचारी ने कार की छत पर जलाए कागज, पुलिस जांच में जुटी

    भोपाल में महापौर की कार बनी निशाना! कर्मचारी ने कार की छत पर जलाए कागज, पुलिस जांच में जुटी

     भोपाल
     भोपाल नगर निगम कार्यालय परिसर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक नाराज कर्मचारी ने हंगामा करते हुए महापौर मालती राय की गाड़ी में आग लगाने का प्रयास किया। कर्मचारी ने कुछ कागजों में आग लगाकर उन्हें महापौर की गाड़ी की छत पर रख दिया।

    मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए जलते कागजों को तुरंत हटा दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आग बुझाने के दौरान एक कर्मचारी रामसिंह यादव के हाथ झुलस गए।

    बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी अपनी मांगों के निराकरण नहीं होने और अन्य समस्याओं को लेकर नाराज था। वह कुछ समय से बीमार चल रहा है और अस्पताल में भर्ती रहकर इलाज भी करा रहा था। जानकारी के अनुसार, सोमवार को वह सीधे अस्पताल से नगर निगम कार्यालय पहुंचा था।

    हाथ में पर्चे लेकर की नारेबाजी
    कार्यालय पहुंचने के बाद कर्मचारी ने हाथ में पर्चे लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वह महापौर मालती राय की गाड़ी के पास पहुंच गया। यहां उसने कुछ कागजों में आग लगाई और उन्हें गाड़ी की छत पर रख दिया।

    गाड़ी में आग लगने की आशंका को देखते हुए वहां मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल जलते हुए कागजों को हटा दिया। इस दौरान आग बुझाने की कोशिश में कर्मचारी रामसिंह यादव के हाथ झुलस गए। समय रहते आग पर काबू पा लेने से वाहन को बड़े नुकसान से बचा लिया गया।

    पर्चों पर कर्मचारी संगठन का नाम
    कर्मचारी ने परिसर में जो पर्चे फेंके, उन पर कर्मचारी नगर निगम भोपाल के साथ सम्राट अशोक संगठन का नाम लिखा हुआ है। पर्चों पर सुनील गायकवाड़, कर्मचारी अध्यक्ष, नगर निगम भोपाल का नाम भी अंकित है।

    घटना के बाद नगर निगम कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल कर्मचारी के हंगामे और महापौर की गाड़ी में आग लगाने के प्रयास के मामले में आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है।

     

  • ‘₹14,337 नहीं, ₹30 हजार चाहिए’, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन

    ‘₹14,337 नहीं, ₹30 हजार चाहिए’, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे इंटर्न डॉक्टरों का सब्र अब जवाब दे गया है। सरकार के कोरे आश्वासनों से नाराज होकर इंटर्न डॉक्टरों ने 7 सितंबर को राजधानी भोपाल में मोर्चा खोल दिया है।

    अपनी मांगों को लेकर ये चिकित्सक हमीदिया अस्पताल से सीधे मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच कर रहे हैं। डॉक्टरों ने दो टूक कह दिया है कि अब उन्हें कोई मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि स्टाइपेंड वृद्धि का लिखित आदेश चाहिए।

    डेढ़ माह के इंतजार के बाद टूटा सब्र

        आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि शासन ने करीब एक महीने पहले स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने का मौखिक भरोसा दिया था।

        सरकार के इस वादे का सम्मान करते हुए इंटर्न डॉक्टरों ने डेढ़ महीने तक शांतिपूर्वक इंतजार किया। लेकिन जब इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक अधिसूचना या लिखित आदेश जारी नहीं हुआ, तो उन्हें मजबूरन सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराना पड़ा।

    14 हजार नहीं, 30 हजार रुपये प्रतिमाह की मांग
    वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने महज 14,337 रुपये बतौर स्टाइपेंड दिए जा रहे हैं। डॉक्टरों की प्रमुख मांग है कि इस सम्मान राशि को बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। अपनी इसी मांग को सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रखने और अब तक मिले आश्वासनों की वास्तविक स्थिति पर चर्चा करने के लिए यह मार्च निकाला जा रहा है।

    हमीदिया के गेट नंबर 1 से सीएम हाउस तक शांतिपूर्ण मार्च
        अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए इंटर्न डॉक्टरों ने भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल के गेट क्रमांक 1 से मुख्यमंत्री निवास तक पैदल मार्च शुरू किया है।
        प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है। '14,337 नहीं, 30,000 चाहिए… अब आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहिए' जैसे नारों के साथ डॉक्टर लगातार सरकार से अपनी जायज मांगें जल्द से जल्द पूरी करने की अपील कर रहे हैं। आगे की रणनीति भी इसी मार्च के दौरान तय की जाएगी।

     

  • दुबई में मध्यप्रदेश का ग्लोबल शोकेस! निवेश, व्यापार और उद्योग के साथ सांस्कृतिक विरासत का हुआ प्रदर्शन

    दुबई में मध्यप्रदेश का ग्लोबल शोकेस! निवेश, व्यापार और उद्योग के साथ सांस्कृतिक विरासत का हुआ प्रदर्शन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में मध्यप्रदेश पवेलियन का किया उद्घाटन

    निवेश, व्यापार और औद्योगिक अवसरों के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का हुआ प्रदर्शन

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दूसरे दिन एआईएम कांग्रेस-2026 में स्थापित मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन किया और उपस्थित निवेशकों से चर्चा की।मध्यप्रदेश पवेलियन में प्रदेश की निवेश एवं व्यापार संभावनाओं, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश-अनुकूल नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रदर्शित किया गया है। इससे वैश्विक निवेशकों, सॉवरेन फंड्स, मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन, व्यापार संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों को प्रदेश में निवेश संभावनाओं की जानकारी मिलेगी।पवेलियन के माध्यम से मध्यप्रदेश को “द लैंड ऑफ इनफिनिट पॉसिबिलिटी” के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश की निवेश संभावनाओं को किया गया प्रस्तुत

    मध्यप्रदेश पवेलियन में राज्य की रणनीतिक केंद्रीय अवस्थिति, औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, लैंड बैंक, अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियों को प्रदर्शित किया गया है। विनिर्माण, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरते उद्योगों में उपलब्ध क्षेत्र-विशिष्ट निवेश अवसरों की जानकारी भी पवेलियन में दी जा रही है।

    प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन

    पवेलियन में निवेश एवं व्यापार के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक एवं आर्थिक पहचान को भी वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्य के जीआई टैग प्राप्त एवं ओडीओपी उत्पादों चंदेरी, महेश्वरी, बाटिक, जरी-जरदोजी, बेल मेटल और ग्वालियर कारपेट का चयनित प्रदर्शन किया गया है। इसके माध्यम से प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं के साथ हस्तशिल्प, वस्त्र, निर्यात, पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों में उपलब्ध अवसरों को भी प्रदर्शित किया गया है।

    डिजिटल माध्यमों से निवेश अवसरों की दी जा रही जानकारी

    मध्यप्रदेश पवेलियन में व्यावसायिक संवाद स्थलों, डिजिटल डिस्प्ले, सेक्टरवार प्रस्तुतियों और निवेश सुविधा क्षेत्रों को एकीकृत किया गया है। इसके माध्यम से भारत में नए निवेश गंतव्यों की तलाश कर रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी दी जा रही है।

    निवेशकों के साथ संवाद और व्यावसायिक बैठकों पर जोर

    पवेलियन में व्यावसायिक बैठकें, नेटवर्किंग सेशन और उत्पाद प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। इनके माध्यम से वैश्विक बाजारों के साथ मध्यप्रदेश की सहभागिता को सुदृढ़ करने तथा निवेश, व्यापार साझेदारी और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के के अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

     

  • ‘कर्मचारियों ने ट्रांसफर की धमकी दी, शिकायत की तो मुझे ही हटाया’, 50 दिन में फिर IAS नेहा का तबादला

    ‘कर्मचारियों ने ट्रांसफर की धमकी दी, शिकायत की तो मुझे ही हटाया’, 50 दिन में फिर IAS नेहा का तबादला

     भोपाल

    एमपी में एक IAS अधिकारी के लगातार ट्रांसफर का मामला चर्चा में है. IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह ने एक साल के भीतर चौथी बार अपना नाम ट्रांसफर लिस्ट में आने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने IAS अधिकारियों के ग्रुप में अपना दर्द साझा करते हुए सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 

    5 सितंबर 2026 की ट्रांसफर लिस्ट का जिक्र करते हुए नेहा मारव्या सिंह ने लिखा कि वह बेहद परेशान हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा पद पर ज्वाइन करने के महज 50 दिन के भीतर ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक IAS अधिकारी इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि उसके साथ काम करने वाले कर्मचारी ही उसे ट्रांसफर कराने में सफल हो जाएं? नेहा मारव्या सिंह का यह संदेश IAS अधिकारियों के ग्रुप में साझा किया गया है. इसमें उन्होंने अपने साथ हुए घटनाक्रम का सिलसिलेवार जिक्र करते हुए कहा कि वह लंबे समय से चुप्पी और धैर्य बनाए हुए थीं, लेकिन अब स्थिति इस स्तर तक पहुंच गई है कि उनके मातहत उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी देने लगे हैं। 

    एक साल में चौथी बार मेरा नाम ट्रांसफर लिस्ट में

    IAS अधिकारी ने अपने संदेश की शुरुआत सीनियर अधिकारियों और सहयोगियों को संबोधित करते हुए की. उन्होंने कहा कि वह समझती हैं कि IAS अधिकारी होने के नाते राज्य सरकार उन्हें जहां चाहे वहां ड्यूटी करने के लिए कह सकती है और उन्होंने हमेशा सरकारी आदेशों को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया है. लेकिन इस बार उन्हें यह ट्रांसफर बेहद निराशाजनक लग रहा है. अपने संदेश में नेहा मारव्या सिंह ने ट्रांसफर की वजह को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके साथ काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ ‘mutiny’ यानी विद्रोह जैसा माहौल बनाया. उनका कहना है कि इन कर्मचारियों का प्रशासनिक नियंत्रण सीधे उनके पास नहीं था, बल्कि उनका स्थापना संबंधी नियंत्रण विभाग के पास था। 

    नेहा के मुताबिक, इन कर्मचारियों ने उनकी टेबल पर आकर कथित तौर पर धमकी दी कि उनका ट्रांसफर करा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि उन्होंने मातहतों की कथित अनुशासनहीनता, फाइलें रोककर रखने और विभाग में उनके साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार की जानकारी उचित माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस पर जरूरी कार्रवाई होगी. लेकिन उनके मुताबिक, कार्रवाई होने के बजाय उनका ही ट्रांसफर कर दिया गया। 

    क्या IAS अधिकारी इतना कमजोर है 
    अपने संदेश में नेहा मारव्या सिंह ने सबसे बड़ा सवाल इसी बात को लेकर उठाया. उन्होंने पूछा कि इस तरह के फैसले से नीचे तक क्या संदेश जाएगा? उनके शब्दों में, क्या एक IAS अधिकारी इतना कमजोर है कि उसके मातहत कर्मचारी भी उसके खिलाफ विद्रोह कर उसे ट्रांसफर कराने में सफल हो सकते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि किसी अधिकारी के ज्वाइन करने के एक महीने के भीतर ही उसके खिलाफ इस तरह का माहौल बन जाना सामान्य बात नहीं है. उनके मुताबिक, किसी अधिकारी को नई जगह के कामकाज को समझने में ही समय लगता है। 

    उन्होंने अपने साथ हुए घटनाक्रम को अपमानजनक बताते हुए कहा कि मातहतों के कथित विद्रोह के कारण उनका ट्रांसफर किया गया. नेहा ने अपने संदेश में अपने छोटे कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उनकी पोस्टिंग का कार्यकाल कई बार सिर्फ 2-3 महीने का रह जाता है. ऐसे में जब तक वह किसी पद की जिम्मेदारी और कामकाज को समझ पाती हैं, तब तक उन्हें हटा दिया जाता है. उन्होंने लिखा कि ऐसी स्थिति में वह प्रभावी तरीके से काम कैसे कर सकती हैं  उन्होंने दावा किया कि उनके मातहतों को भी यह महसूस होने लगा है कि अगर वह उनके हिसाब से काम नहीं करेंगी तो वे उनका ट्रांसफर करा सकते हैं. यही बात उन्हें सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। 

    बनाए रखी चुप्पी और धैर्य 
    IAS अधिकारी ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने लंबे समय तक चुप्पी और धैर्य बनाए रखा. उन्होंने दावा किया कि उन्हें लंबे समय तक किनारे रखा गया और पर्याप्त काम नहीं दिया गया. उन्हें उम्मीद थी कि समय के साथ परिस्थितियां बेहतर होंगी. लेकिन उनके मुताबिक, स्थिति सुधरने के बजाय और खराब होती चली गई. अब स्थिति यह हो गई है कि उनके मातहत कर्मचारी ही उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी देने लगे हैं. अपने संदेश के अंत में नेहा मारव्या सिंह ने बेहद तल्ख टिप्पणी की. उन्होंने लिखा कि ‘Always conspirators win and I fail’, यानी उनके मुताबिक हर बार साजिश करने वाले जीत जाते हैं और वह असफल हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि सिस्टम उन्हें विफल कर चुका है. उन्होंने यह भी लिखा कि आज वह निशाने पर हैं और कल कोई दूसरा IAS अधिकारी भी इसी तरह निशाना बन सकता है. उनका यह संदेश अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 

  • MP जहरीली शराब कांड में बढ़ा मौतों का आंकड़ा, 10 गिरफ्तार; CM मोहन यादव बोले- दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    MP जहरीली शराब कांड में बढ़ा मौतों का आंकड़ा, 10 गिरफ्तार; CM मोहन यादव बोले- दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    सागर 
    सागर में जहरीली शराब पीने से मौतों का आंकड़ा 18 पहुंच गया है। सोमवार सुबह महेश रावत (55) निवासी धुरमार ने बंडा अस्पताल, छापरी गांव की रहने वाली श्याम बाई अहिरवार (50) ने जिला अस्पताल और पापेट गांव निवासी कृष्ण कुमार लोधी ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा।

    फिलहाल, 109 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने मामले में 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे शराब के नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है। लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और यशवंत ठाकुर को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं।

     सीएम मोहन यादव ने कहा-कड़ी कार्रवाई करेंगे

    सागर में मिलावटी शराब से मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 18  लोगों की मौतों की सूचना है। कई प्रभावित अस्पताल में भर्ती ​हैं जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। सागर की कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अस्पताल पहुंचकर प्रभावितों का हाल जाना और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस बीच मिलावटी शराब मामले में कई प्रतिष्ठित लोगों के शामिल होने की आशंका है। हालांकि सीएम मोहन यादव ने मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कही है। सागर में शराब पीनेवालों की स्क्रीनिंग भी कराने की अपील की जा रही है।

    सागर में हुए शराब कांड पर बीजेपी सरकार पर विपक्षी हमलावर हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकार के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है।

    परिजन बोले- शराब पीने के बाद बिगड़ी तबीयत
    महेश के भतीजे श्रवण कुमार रावत ने बताया कि चाचा ने कल शाम को शराब पी थी‌‌, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी थी। वहीं, श्याम बाई के बेटे विट्ठल अहिरवार ने कहा- हम मामा के घर गमी में गए थे। मां घर में अकेली थी। उन्होंने गांव में किसी से मंगवाकर शराब पी ली।

    देर रात उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। सुबह उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान मौत हो गई।

    राजेंद्र ने पूछा था- जहरीली शराब तो नहीं है
    बंडा थाने में दर्ज FIR के अनुसार, फरियादी अनूप सिंह लोधी ने बताया कि उसके गांव में करीब 8 लोग अवैध रूप से शराब बेचते हैं। 4 सितंबर को वह अपने भतीजे राजेंद्र लोधी के साथ जुझार लोधी की दुकान पर गया था।

    जुझार ने बताया कि बरेठी के लाइसेंसी शराब ठेकेदार यशवंत सिंह, मनीष लोधी और बंडा निवासी आशीष साहू ने आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रविंद्र, रोहित, अनिकेत गंधर्व और माखन के माध्यम से अपनी गाड़ी से नया सस्ता ब्रांड भेजा है। उसने कहा कि यह शराब दुकान से 20 रुपए सस्ती मिलेगी। अनूप ने कहा कि उसे आज शराब नहीं पीनी है। राजेंद्र ने पूछा कि नकली जहरीली शराब तो नहीं है।

    प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित
    अभी तक की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि सागर में यूपी का रैकेट मिलावटी शराब की सप्लाई कर रहा था। सीएम मोहन यादव ने सागर जिले के प्रभारी मंत्री को तुरंत मौके पर पहुंचने को कहा है। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जांच कमेटी भी गठित कर दी गई है।

    जुझार ने कहा- 20 रुपए सस्ती मिलेगी
    जुझार लोधी ने कहा- ब्रांड वही है और इसे मनीष व आशीष ने शराब के फार्मूले से बनाया है। उसने कहा कि यह बाजार से 20 रुपए सस्ती मिलेगी। राजेंद्र ने जुझार की दुकान से 70 रुपए में एक क्वार्टर देशी शराब खरीदी और पी।

    रात में घर लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे बंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां से सागर रेफर किया गया। इलाज के दौरान राजेंद्र की मौत हो गई। करतार सिंह लोधी और दिग्विजय सिंह लोधी की भी शराब पीने से मौत हुई।

    पुलिस ने इन लोगों पर दर्ज की एफआईआर
    पुलिस ने जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक, विशाल लोधी और राजा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

    लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, राम सिंह लोधी, चंद्रभान राजपूत, अरविंद यादव, भगवान सिंह और मान सिंह अहिरवार समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।

    ग्रामीण बोले- ततरवारा गांव से होती थी शराब की सप्लाई
    नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि नौराज ग्राम पंचायत के ततरवारा गांव में लंबे समय से अवैध शराब बनाई जा रही है। यहां से आसपास के गांवों में शराब की सप्लाई होती है।

    ग्रामीणों के मुताबिक, शराब बनाने के काम में कई प्रभावशाली और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग जुड़े हैं। उनकी दहशत के कारण ग्रामीण खुलकर नाम लेने से डरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय पुलिस भी ततरवारा गांव में शराब के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती है।

    10 आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रहे
    एसपी अनुराग सुजानिया ने बताया कि शराब मामले में बंडा और विनायका थाने में 25 से अधिक नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें थाने लाकर पूछताछ की जा रही है।

    उनसे शराब के नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें अलग-अलग स्थानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। मामले के सभी बिंदुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।

  • उज्जैन में महाकाल की दूसरी सवारी की भव्य तैयारी, 15 किलो के आभूषण-पोशाक में निकलेगी राजसी सवारी

    उज्जैन में महाकाल की दूसरी सवारी की भव्य तैयारी, 15 किलो के आभूषण-पोशाक में निकलेगी राजसी सवारी

    उज्जैन 

    भादौ के दूसरे सोमवार पर आज उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकाली जाएगी। इसका मार्ग करीब साढ़े पांच किलोमीटर का होगा। सवारी में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु आएंगे। इससे पहले सावन की चार और भादौ की एक सवारी निकल चुकी है। ये छठी और आखिरी सवारी है। इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादत्य सिंधिया पालकी का पूजन करेंगे।

    महाकाल की सवारी में 5 कलाकारों की एक ऐसी टोली भी शामिल होती है, जिनकी वेशभूषा और अंदाज श्रद्धालुओं का ध्यान खुद-ब-खुद खींच लेता है। खास तरह की पगड़ी, आभूषण और पारंपरिक हथियार वाले इस रूप में तैयार होने के लिए करीब दो घंटे तक मेकअप किया जाता है। इसके बाद 11 से 15 किलो तक की राजसी पोशाक पहनकर ये किरदार पूरी सवारी में पैदल चलते हैं।

    शिक्षक ने शुरू की परंपरा, 39 साल से निभा रहे किरदार
    महाकाल की सवारी में शामिल होने वाली इस टोली में स्वामी मुस्कुराके, स्वामी खिलखिलाके, स्वामी दिलमिलाके, स्वामी गुदगुदाके और पप्पू तलवार शामिल हैं। बाबा की पालकी के आगे चलने वाली यह टोली अलग-अलग राजसी किरदारों में नजर आती है। हर साल इनका लुक अलग होता है।

    इस टोली के मुखिया शैलेंद्र व्यास उर्फ ‘स्वामी मुस्कुराके’ 39 साल से लगातार महाकाल की सवारी में शामिल हो रहे हैं। वे उज्जैन के ही रहने वाले हैं। 1989 में शिक्षक की नौकरी के दौरान उन्हें पता चला कि पुराने समय में राजा अपनी राजसी वेशभूषा में महाकाल की सवारी में शामिल होते थे।इसी परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने पहली बार धोती-कुर्ता और साफा पहनकर सवारी में हिस्सा लिया। इसके बाद यह सिलसिला कभी नहीं टूटा।

    राणौजी सिंधिया ने परंपरा को दिया नया स्वरूप
    करीब सवा दो सौ वर्ष पहले मराठा शासनकाल में सिंधिया वंश के संस्थापक राणौजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और महाकाल की सवारी की परंपरा को नया स्वरूप दिया। उन्होंने सवारी में नए रथ, गजराज और लोक परंपराओं को शामिल किया, जिससे आयोजन और अधिक भव्य बन गया।

    राणौजी सिंधिया स्वयं भी सवारी में शामिल होते थे और पालकी के आगे चलकर भगवान महाकाल को राजाधिराज का सम्मान देते थे। इसके बाद स्वतंत्रता पूर्व काल तक सिंधिया और होलकर राजवंशों के प्रमुख भी महाकाल की सवारी में राजकीय रूप से शामिल होते रहे। पालकी के आगे चलना इस बात का प्रतीक माना जाता था कि राज्य के वास्तविक शासक स्वयं भगवान महाकालेश्वर हैं।

    सावन-भादौ में निकलती है महाकाल की सवारी
    विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की सवारी हर वर्ष सावन और भादौ माह में सोमवार को निकलती है। सावन के सोमवारों के साथ भादौ माह के दो सोमवार भी भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं। भादौ माह के दूसरे सोमवार को निकलने वाली सवारी को अंतिम और राजसी सवारी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।

    इस दौरान विभिन्न कलाकार, संगीतकार और लोक कलाकार शामिल होते हैं। भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और सवारी के मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूरी उज्जैन नगरी महाकाल के जयकारों से गूंज उठती है। 

    भक्तों की आस्था का प्रतीक है सवारी
    महाकाल की सवारी को भगवान महाकाल के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भगवान को फल, मिठाई, दूध और अन्य भोग अर्पित करते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु सवारी में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं और बाबा महाकाल के जयकारों के साथ नगर भ्रमण में सहभागी बनते हैं।

    करीब 1100 साल पुरानी इस परंपरा ने राजा भोज के राजकीय उत्सव से लेकर सिंधिया और होलकर राजवंशों के दौर तक कई बदलाव देखे हैं। हालांकि, समय के साथ स्वरूप बदलने के बावजूद भगवान महाकाल की सवारी आज भी उज्जैन की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का सबसे भव्य आयोजन बनी हुई है।

  • जहरीली शराब प्रकरण के पीड़ित परिवारों से मिले डिप्टी CM शुक्ल, बंधाया ढांढस; माफियाओं पर एक्शन का भरोसा

    जहरीली शराब प्रकरण के पीड़ित परिवारों से मिले डिप्टी CM शुक्ल, बंधाया ढांढस; माफियाओं पर एक्शन का भरोसा

    माफियाओं के विरुद्ध होगी सख्त कारवाई, दोषियों को मिलेगी कड़ी से कड़ी सजा: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    जहरीली शराब प्रकरण के मृतकों एवं प्रभावितों के परिजनों से मिले, बंधाया ढांढस

    प्रभावित गांवों का दौरा कर जानी स्थिति

     सागर

    उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बंडा क्षेत्र में अवैध, जहरीली शराब हादसे से प्रभावित गांवों का सघन दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि दुख की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बंडा, शाहगढ़ तहसील के ग्राम बमूरा भेड़ा, नौराज, गूगरा खुर्द, धुरमार, चौका, हनौती एवं पापेट पहुंचकर पीड़ित तथा मृतक परिवारों के सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हृदय विदारक घटना है और प्रभावित परिवार कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने परिजनों को सांत्वना देते हुए स्पष्ट किया कि शासन की ओर से नियमानुसार सभी प्रभावित परिवारों को हरसंभव राहत  उपलब्ध कराई जाएगी।

      उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अवैध शराब के कारोबार में लिप्त शराब माफियाओं और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। परिजनों द्वारा की गई मांग पर उन्होंने जानकारी दी कि पुलिस एवं प्रशासन द्वारा अब तक 10 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और वितरण के मुख्य स्रोत  तक पहुंचकर जड़ों को पूरी तरह समाप्त किया जाए, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

    नशामुक्त समाज के लिए ग्रामीणों से की अपील

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भ्रमण के दौरान ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संवाद करते हुए गांवों को पूर्णतः नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार और समाज को तबाह कर देती है। इसलिए सभी नागरिक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए नशे की लत से दूर रहें। उन्होंने रेखांकित किया कि क्षेत्र में पूर्व में भी नशामुक्ति के लिए जनसहयोग से प्रयास हुए हैं; भविष्य में भी अवैध नशे के कारोबार पर पूर्ण विराम लगाने और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शासन-प्रशासन पूरी कड़ाई और गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दौरान बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजनिया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जगदीश गोमे  सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी अधिकारी मौजूद रहे।