Category: मध्य प्रदेश

  • यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में तय होगी मोबिलिटी की नई दिशा, 8 सत्रों में होगा मंथन

    यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में तय होगी मोबिलिटी की नई दिशा, 8 सत्रों में होगा मंथन

    भोपाल 

    इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 11 एवं 12 सितंबर को आयोजित होने वाली यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को अधिक सुगम, सुरक्षित, स्मार्ट और प्रदूषणरहित बनाने की दिशा में वृहद स्तर पर मंथन किया जाएगा। दो दिवसीय समिट में विशेषज्ञों, बस ऑपरेटरों, उद्यमियों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद होगा। 8 सत्रों के माध्यम से यात्री परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    समिट में मुख्यमंत्री सुगम यात्री परिवहन सेवा अंतर्गत मध्यप्रदेश मोबिलिटी विजन-2030 को केंद्र में रखते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देने, रोजगार एवं उद्यमिता सृजन के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय रूप से सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर सार्वजनिक बस संचालन की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके साथ ही बस संचालन एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा, विश्वसनीयता एवं यात्री सुरक्षा को मजबूत करने, हरित मोबिलिटी के लिए स्वच्छ ईंधन और भविष्य के लिए तैयार बस बेड़े को विकसित करने के विषय पर भी विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे।

    समिट में यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एकीकृत टिकटिंग एवं स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली लागू करने और निर्बाध यात्रा अनुभव विकसित करने पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और एआई विश्लेषण के माध्यम से इंट्रा-सिटी एवं इंटर-सिटी बस मार्गों और संचालन की बेहतर योजना तैयार करने के विकल्पों पर भी मंथन किया जाएगा।

    समिट का उद्देश्य प्रदेश में ऐसी यात्री परिवहन व्यवस्था विकसित करना है, जो आधुनिक तकनीक, निजी निवेश, पर्यावरण संरक्षण और यात्री सुविधाओं के समन्वय से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सके।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश के यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग द्वारा परिवहन विजन समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है।

     

  • म्यूल खाते में 5 करोड़ रूपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा

    म्यूल खाते में 5 करोड़ रूपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधियों के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है। इसी दिशा में पुलिस मुख्यालय द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सूचनाओं, साइबर अपराध संबंधी राष्ट्रीय डेटाबेस और संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की निगरानी के आधार पर चलाए जा रहे ऑपरेशन MATRIX के तहत इंदौर क्राइम ब्रांच ने संगठित अंतर्राज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है।

    क्राइम ब्रांच ने म्यूल बैंक खाते और बैंकिंग OTP से जुड़े सिम कार्ड उपलब्ध कराकर मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड में सहयोग करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों से जुड़े एक यूको बैंक खाते में 5 करोड़ रूपए से अधिक का संदिग्ध लेन-देन पाया गया है तथा यह खाता देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से जुड़ा हुआ है

    राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी तथा I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre), गृह मंत्रालय, भारत सरकार, NCRP एवं Cyber Crime Portal से प्राप्त डेटा के आधार पर संदिग्ध म्यूल खातों की जांच की जा रही थी।

    इसी क्रम में यूको बैंक, महू शाखा, इंदौर के एक संदिग्ध खाते की जांच में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जांच में इस म्यूल खाते से 5 करोड़ रूपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। इस खाते से संबंधित साइबर अपराध की शिकायतें देश के विभिन्न राज्यों से सामने आई हैं, जिनमें तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्य शामिल हैं।

    जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा अपने बैंक खाते को म्यूल अकाउंट के रूप में उपलब्ध कराया गया था। साथ ही उसके नाम पर पंजीकृत सिम, जिस पर बैंकिंग संबंधी OTP प्राप्त होते थे, अन्‍य आरोपी को उपलब्ध कराई गई थी।

    दोनों आरोपियों द्वारा इस व्यवस्था का उपयोग संगठित रूप से मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड एवं आर्थिक धोखाधड़ी में किए जाने की जानकारी सामने आई है। क्राइम ब्रांच द्वारा आरोपियों से पूछताछ कर उनके संपर्क में रहे अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड तथा साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े नेटवर्क की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। इस मामले में क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    आरोपियों के कब्जे से 04 मोबाइल फोन, 08 एक्टिव सिम कार्ड, 10 बैंक अकाउंट पासबुक, 11 एटीएम कार्ड, यूको बैंक का मुख्य म्यूल बैंक खाता, जिसमें 5 करोड़ से अधिक का संदिग्ध लेन-देन पाया गया, जब्त किए गए हैं।

    प्रकरण की विवेचना में आरोपियों से प्राप्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य संदिग्ध व्यक्तियों तथा अंतर्राज्यीय साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े नेटवर्क के संबंध में पूछताछ एवं वैधानिक कार्रवाई जारी है।

    मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन में सावधानी बरतें। अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड, OTP अथवा बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करें अथवा National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। 

  • सहारनपुर के अवैध ढांचे के बहाने धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश- भूपेंद्र चौधरी

    सहारनपुर के अवैध ढांचे के बहाने धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश- भूपेंद्र चौधरी

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर योगी सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने तीखा पलटवार किया है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस अवैध ढांचे को लेकर अखिलेश यादव के बयान को भाजपा नेताओं ने निंदनीय बताया।

    कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने सहारनपुर मामले पर कहा कि प्रशासन ने माननीय न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी वास्तव में इस मामले को लेकर गंभीर है और जनता को गुमराह नहीं कर रही है तो उसके नेताओं को न्यायालय जाना चाहिए और आदेश के खिलाफ अपील करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल झूठ को आधार बनाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सपा 10 साल से सत्ता से बाहर है और उसकी परेशानी समझी जा सकती है, लेकिन ऐसे बयान नहीं देने चाहिए, जिन्हें जनता गंभीरता से लेना ही छोड़ दे। उन्होंने इसे विपक्ष की ओर से डाली जा रही एक गलत परिपाटी बताया।

    अवैध मस्जिद के बहाने धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश- भूपेंद्र चौधरी

    कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी अवैध मस्जिद के बहाने धार्मिक उन्माद पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई किसी धार्मिक ढांचे के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ की गई है। प्रशासन ने यह कदम मनमाने तरीके से नहीं उठाया है। अदालत से आदेश की पुष्टि के बाद ही प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी वोट बैंक की राजनीति के चलते अवैध अतिक्रमण का बचाव कर रही है और धार्मिक उन्माद पैदा करने की कोशिश कर रही है।

    अखिलेश यादव गलत नैरेटिव गढ़ते हैं- बृजलाल

    राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने भी अखिलेश यादव के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव हमेशा गलत नैरेटिव गढ़ते हैं। सहारनपुर का संबंधित अवैध मस्जिद ढांचा सरकारी जमीन पर था और कार्रवाई प्रशासन के मनमाने आदेश से नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई। पहले मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में गया और उसके बाद न्यायिक अदालत में सुनवाई हुई। जिला जज की अदालत के निर्णय के बाद सरकारी जमीन पर बने ढांचे को हटाया गया। उन्होंने कहा कि जब कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत हुई है तो अखिलेश यादव को इस मामले में लोगों को भ्रमित करने वाला नैरेटिव नहीं गढ़ना चाहिए।

    असीम अरुण ने बुद्ध से जुड़े जिलों के नाम बदलने का उठाया मुद्दा

    राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अखिलेश यादव के भगवान बुद्ध के प्रति प्रेम को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते भगवान बुद्ध से जुड़े जिलों के नाम बदले गए। उन्होंने कहा कि महामाया जी भगवान बुद्ध की माता थीं और उनके नाम पर बने महामाया नगर का नाम बदल दिया गया। इसी तरह पंचशील नगर और प्रबुद्ध नगर के नाम बदले जाने का भी उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज जब उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया है, तब उन्हें भगवान बुद्ध की याद आ रही है।

    कलेक्ट्रेट परिसर की इमारत पूरी तरह अनाधिकृत थी- दिनेश सिंह

    प्रदेश के मुख्य भाजपा प्रवक्ता दिनेश सिंह ने कहा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी इमारत के मामले में प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया है। उन्होंने अखिलेश यादव और विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने तथा धार्मिक उन्माद पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार है और किसी को भी धार्मिक उन्माद पैदा करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।

  • परीक्षा और मूल्यांकन में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश, राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

    परीक्षा और मूल्यांकन में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश, राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम में समयबद्धता शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता की मूल आवश्यकता है। समय पर प्रवेश, नियमित अध्ययन-अध्यापन, निर्धारित समय पर परीक्षा एवं परिणाम तथा अकादमिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किए बिना विद्यार्थियों का समग्र एवं न्यायसंगत मूल्यांकन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इस सत्र से ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाएगी।

    मंत्री  परमार ने भोपाल स्थित एलएनसीटी विश्वविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, जीवन-मूल्यों और दृष्टिकोण के अनुरूप विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का राष्ट्रीय संकल्प है। इसी भावना के अनुरूप हमारी परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था भी पारदर्शी, समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित और परिणामोन्मुख होनी चाहिए।

    मंत्री  परमार ने कहा कि परीक्षा केवल विद्यार्थी के ज्ञान को मापने का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, क्षमता, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और संभावनाओं को पहचानने का अवसर बननी चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि विद्यार्थी के समग्र व्यक्तित्व विकास पर बल देती है। इसके लिए शिक्षकों को विद्यार्थियों के प्रत्येक पहलू को समझना और उनके साथ निरंतर शिक्षक-विद्यार्थी संवाद स्थापित करना आवश्यक है।

    मंत्री  परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली एवं एलएनसीटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा दृष्टि के समन्वय से परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था में सकारात्मक, सार्थक एवं दूरगामी परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध ऐसी आदर्श परीक्षा एवं मूल्यांकन पद्धति विकसित करेगा, जो देश के लिए भी अनुकरणीय बने।

    मंत्री  परमार ने कहा कि देशभर से आए कुलगुरुओं, कुलसचिवों, परीक्षा नियंत्रकों, शिक्षाविदों एवं विषय-विशेषज्ञों का सामूहिक मंथन ऐसी मूल्यांकन व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा, जिसमें विद्यार्थी के ज्ञान के साथ उसकी प्रतिभा, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और समग्र क्षमता का न्यायसंगत आकलन हो सके।

    कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, मध्यप्रदेश प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. रविंद्र कान्हेरे, महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल, हरियाणा के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद् डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. खेम सिंह डेहरिया, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एलएनसीटी समूह के सचिव  अनुपम चौकसे सहित देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, शिक्षाविद एवं विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।

     

  • मध्यप्रदेश और रूसी गणराज्य तातारस्तान के बीच B2B और G2G सहयोग को मिलेगा नया आयाम

    मध्यप्रदेश और रूसी गणराज्य तातारस्तान के बीच B2B और G2G सहयोग को मिलेगा नया आयाम

    भोपाल 

    दुबई विजिट- दूसरा दिन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने रूसी गणराज्य तातारस्तान के प्रमुख (रईस) महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की।

    बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश और तातारस्तान के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को प्रगाढ़ करना, सेक्टर-विशिष्ट रणनीतिक साझेदारियों की पहचान करना तथा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 (GIS) में तातारस्तान की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव को मध्यप्रदेश की समृद्ध औद्योगिक क्षमताओं और निवेश अनुकूल वातावरण से अवगत कराते हुए आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सम्मिलित होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। तातारस्तान के प्रमुख ने इस निमंत्रण का स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि वे एक सशक्त निवेशक प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ समिट में भाग लेंगे तथा राज्य में निवेश की ठोस संभावनाओं को आगे बढ़ाएंगे।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, कृषि एवं इनोवेशन-आधारित आधुनिक तकनीकों में सहयोग पर विस्तृत विमर्श हुआ। भारत और तातारस्तान के प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश के साथ बीटूबी और जीटूजी स्तर पर दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

    तातारस्तान की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और राज्य के व्यापारिक प्रतिनिधियों को “टाइम: रूस–भारत” फोरम तथा संबंधित प्रदर्शनी में सहभागिता के लिये आमंत्रित किया गया। बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय बिजनेस मिशन आयोजित करने, संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को धरातल पर उतारने और त्वरित समन्वय के लिए अधिकृत नोडल ऑफिसर्स को नामित करने पर भी सहमति व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी से की वन-टू-वन मीटिंग

    मध्यप्रदेश में निवेश के लिए किया आमंत्रित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी के साथ उच्च स्तरीय वन-टू-वन बैठक की। बैठक में दोनों पक्षों के बीच भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (India-UAE CEPA) के तहत गैर-तेल व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला और सीमा-पार निवेश को गति देने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

    मध्यप्रदेश को यूएई निवेशकों के पसंदीदा गंतव्य के रूप में किया पेश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश के निवेश अवसरों और आदर्श निवेश गंतव्य की विशेषताओं से अवगत कराया, जिनमें रणनीतिक केंद्रीय अवस्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, उपलब्ध औद्योगिक भूमि और स्थापित अवसंरचना को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख बाजारों तक सीधी और सुगम पहुंच प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों और सिंगल विंडो सुविधा का उल्लेख करते हुए यूएई निवेशकों को समयबद्ध राज्य-स्तरीय सहायता का पूर्ण भरोसा दिलाया।

    प्राथमिकता वाले सेक्टर्स और खाद्य प्रसंस्करण में साझेदारी का आह्वान

    बैठक में मध्यप्रदेश में निवेश के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई, जिनमें विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, नवकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्मार्ट विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूड पार्क, मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर, कोल्ड चेन, हरित ऊर्जा और निर्यात प्लेटफॉर्म्स के विकास में यूएई की सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

    ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए दिया न्योता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाले आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण दिया। यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री ने इस आमंत्रण को स्वीकारते हुए आश्वस्त किया कि वे यूएई के प्रमुख निवेशकों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ सहभागिता करेंगे।

    अगला कदम: 3 माह में समीक्षा और नोडल ऑफिसर की नियुक्ति

    द्विपक्षीय संबंधों और औद्योगिक साझेदारी को व्यावहारिक रूप देने के लिए 5 से 10 क्रियान्वयन-तैयार परियोजनाओं की पहचान करने और संयुक्त समीक्षा व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति बनी। इसके तहत 'मध्यप्रदेश-यूएई इन्वेस्टमेंट राउंड टेबल' का आयोजन किया जाएगा तथा चयनित परियोजनाओं के लिए समर्पित नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जिनकी पहली प्रगति समीक्षा तीन माह के भीतर सुनिश्चित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व बैंक के उपाध्यक्ष से की उच्च स्तरीय बैठक

    प्रदेश में एआई परियोजनाओं के लिए फंडिंग पर हुआ संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'एआईएम कांग्रेस-2026' सम्मेलन के दौरान विश्व बैंक के डिजिटल एवं एआई (Digital and AI) मामलों के वाइस प्रेसिडेंट  सांगबु किम तथा उनकी टीम के साथ बैठक की।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच मध्यप्रदेश में डिजिटल और तकनीकी विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद में विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार की नीतियों के तहत संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल गवर्नेंस से संबंधित परियोजनाओं में फंडिंग और वित्तीय सहयोग देने में रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में उभरती तकनीकों, नवाचार और निवेश के अनुकूल वातावरण की जानकारी साझा करते हुए राज्य के विकास में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर बल दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री निवेश की संभावनाओं पर हुई बैठक

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दुबई स्थित अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्रालय में यूएई कैबिनेट सदस्य एवं अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एचई अल मर्री को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' (GIS) में सहभागिता के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने आश्वस्त किया कि होटल एवं हॉस्पिटैलिटी इंवेस्टमेंट के क्षेत्र में संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए दुबई से एक विशेष निवेश प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मध्यप्रदेश का दौरा करेगा।

    प्रमुख क्षेत्रों में निवेश और नीतिगत सहयोग पर गहन विमर्श

    उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के मध्य खनन (माइनिंग), टेक्सटाइल, वन (फॉरेस्ट) एवं पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश सरकार की पारदर्शी नीतियों, भूमि स्वामित्व नियमों, श्रम सुधारों और विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध सुरक्षा तंत्र (प्रोटेक्शन मैकेनिज्म) से अवगत कराया। उन्होंने राज्य में पहले से सक्रिय यूएई कंपनियों के सकारात्मक अनुभवों को साझा करते हुए नए निवेशकों के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की नई एविएशन पॉलिसी के प्रमुख प्रावधानों को रेखांकित किया। एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री, जो यूएई की जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी के चेयरमैन भी हैं, ने सिविल एविएशन मंत्री के रूप में भरोसा दिलाया कि वह मध्यप्रदेश और यूएई के मध्य एविएशन ऑपरेशन्स के विस्तार में पूरा सहयोग करेंगे। इस कदम से दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटन, कार्गो और व्यापारिक आवागमन को उल्लेखनीय गति मिलेगी।

    हट्टा इकोनॉमिक ज़ोन और दुबई फ्यूचर फाउंडेशन मॉडल पर विमर्श

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के 'हट्टा इकोनॉमिक ज़ोन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (Hatta Economic Zone Development Project) और विशेष औद्योगिक पार्कों के विकास मॉडल के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश भी आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर व विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके साथ ही, 'दुबई फ्यूचर फाउंडेशन' के सीईओ के रूप में एचई अल मर्री ने मध्यप्रदेश में भी इसी प्रकार के नवाचार और भविष्योन्मुखी फाउंडेशन स्थापित करने की दिशा में तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

     

  • ‘गिरिबाला के क्लासमेट ने किया पोस्टमार्टम…’ ट्विशा शर्मा केस में वकील ने रिपोर्ट पर खड़े किए सवाल

    ‘गिरिबाला के क्लासमेट ने किया पोस्टमार्टम…’ ट्विशा शर्मा केस में वकील ने रिपोर्ट पर खड़े किए सवाल

    भोपाल

    भोपाल शहर में सबसे चर्चित ट्विशा शर्मा मौत (Twisha Sharma Case) मामले में बड़ी उलझन सामने आई है। बीत दिनों ट्विशा केस में सीबीआइ ने चार्जशीट पेश कर दी है लेकिन ट्विशा पक्ष के वकील अंकुर पांडेय ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आई दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारण को लेकर एकमत हैं। शरीर पर मिली चोटों की वजह को लेकर भोपाल एम्स और दिल्ली एम्स की रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया है।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी आधार
    सीबीआइ के कोर्ट में पेश किए गए को अंतिम निष्कर्ष में एम्स दिल्ली की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को प्रमुख आधार बनाया गया है। वकील अंकुर पांडेय ने विरोध करते हुए कहा कि शुरुआती पोस्टमार्टम में शरीर पर सात एंटी-मॉर्टम चोटें, यानी मौत से पहले लगी चोटें दर्ज की गई थीं। 18 मई एम्स भोपाल ने एसीपी मिसरोद को भेजे जवाब में इन चोटों का अलग-अलग परीक्षण किया था। इसमें गर्दन पर मिले दो छोटे लाल निशान फंदे के रगड़ने या खिसकने से बने हो सकते है। ये नाखून या उंगलियों के दबाव के निशान नहीं थे। वहीं बाएं हाथ और कलाई पर मिले नीले निशान एक से तीन दिन पुराने बताए गए थे।

    पहले पोस्टमार्टम में यह भी दर्ज
    वकील का दावा है कि पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कलाई और उंगलियों पर कुछ चोटें ताजा थीं और मौत से कुछ समय पहले लगी प्रतीत हुईं। एम्स भोपाल ने इन चोटों के किसी संघर्ष या हाथापाई के दौरान लगने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये चोटें मौत से पहले की थीं, इसलिए शव को उतारने या बाद में ले जाने के दौरान नहीं लग सकतीं।

    क्लासमेट्स ने किया पोस्टमार्टम
    ट्विशा की मां ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी कोई गलत कदम नहीं उठा सकती है। सास गिरिबाला ने उससे कहा था कि अगर तुम यहां से गई तो कोई तुमसे बात नहीं करेगा। न ही तुम वापस आ पाओगी। आगे उन्होंने कहा कि दूसरी पोस्टमर्टम रिपोर्ट गिरिबाला के क्लासमेट ने की थी इसलिए रिपोर्ट में कोई खुलासा नहीं हुआ है।

    दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पहले जैसी
    जानकारी के लिए बता दें कि ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी पहले ही जैसी है। दोनों पोस्टमार्टम में मौत का कारण दम घुटना बताया गया। एम्स दिल्ली की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मानसिक क्रूरता का आरोप चार्जशीट का मुख्य आधार है। वहीं दहेज की मांग और दहेज मृत्यु के पहलू की आगे जांच जारी है। ट्विशा का आईफोन, घर के डीवीआर और आरोपियों की आवाज के फोरेंसिक परीक्षण भी कई बड़े राज खोल सकते हैं।

    ये है पूरा मामला
    जानकारी के लिए बता दें कि ट्विशा शर्मा की 12 मई को मौत हुई थी। शव कटारा हिल्स थाना क्षेत्र स्थित ससुराल में मिला था। पिता और मायके पक्ष की शिकायतों पर दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था। जांच सीबीआइ को सौंपी गई। तब से गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह केंद्रीय जेल में बंद हैं।

  • सर्पदंश से मासूम की मौत पर बवाल, परिजनों ने वेंटिलेटर के लिए पैसे मांगने का लगाया आरोप

    सर्पदंश से मासूम की मौत पर बवाल, परिजनों ने वेंटिलेटर के लिए पैसे मांगने का लगाया आरोप

    ग्वालियर

    सांप के काटने के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रही चार वर्षीय कासवी की जया आरोग्य अस्पताल के कमलाराजा अस्पताल में मौत हो गई। बच्ची को गंभीर हालत में बाल रोग विभाग के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया था। मासूम की मौत के बाद स्वजन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार को लेकर हंगामा किया। स्वजन का आरोप है कि बच्ची को समय पर वेंटीलेटर नहीं मिल सका और वेंटीलेटर लगाने के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग की गई।

    वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बच्ची की हालत अस्पताल पहुंचने से पहले ही बेहद गंभीर थी और चिकित्सकों ने उसे बचाने के हरसंभव प्रयास किए।
    पीएम के बाद बच्ची का शव स्वजन को सुपुर्द

    बेहट रनगवां निवासी कोमल सिंह कुशवाह की चार वर्षीय बेटी कासवी को रविवार की रात सांप ने काट लिया था। मासूम की मौत के बाद स्वजन का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्वजन को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया।

    नाना बोले-समय पर वेंटीलेटर मिलता तो बच सकती थी जान

    बच्ची के नाना रामसहाय ने आरोप लगाया कि कासवी की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी और उसे वेंटीलेटर की जरूरत थी। उनका कहना है कि वेंटीलेटर लगाने के एवज में डाक्टरों द्वारा पांच हजार रुपये की मांग की गई। स्वजन का आरोप है कि यदि बच्ची को समय रहते वेंटीलेटर मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी।

    वेंटीलेटर के लिए रुपये मांगने के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि बच्ची की हालत पहले से ही अत्यंत गंभीर थी। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया और उसे बचाने के लिए आवश्यक प्रयास किए गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। – डॉक्टर अजय गौड़, विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग केआरएच

     

  • सतत एवं सघन मॉनिटरिंग प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला : प्रमुख सचिव  सुखवीर सिंह

    सतत एवं सघन मॉनिटरिंग प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला : प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह

    भोपाल 

    प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  सुखवीर सिंह ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में विभिन्न बीमारियों की रिपोर्टिंग व्यवस्था और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मीजल्स, डायरिया, मलेरिया, डेंगू, सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिशन (सैम), स्नेक बाइट सहित विभिन्न रोगों एवं असामान्य स्वास्थ्य घटनाओं की समयबद्ध रिपोर्टिंग, निगरानी, उपचार एवं नियंत्रण की कार्यवाही की समीक्षा की। प्रमुख सचिव  सिंह ने कहा कि सघन और समयबद्ध रिपोर्टिंग प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला है। सही समय पर प्राप्त होने वाली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं, मानव संसाधन, दवाओं एवं अन्य संसाधनों का योजनाबद्ध तरीके से सुदृढ़ीकरण किया जा सकता है एवं किसी बीमारी अथवा प्रकोप की स्थिति को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है।

    प्रमुख सचिव  सिंह ने निर्देश दिए कि प्रदेश में किसी भी असामान्य स्वास्थ्य घटना, रोग क्लस्टर, मृत्यु अथवा मामलों में असामान्य वृद्धि की शीघ्र पहचान सुनिश्चित की जाए। सूचना प्राप्त होते ही समयबद्ध रिपोर्टिंग, वैज्ञानिक तरीके से आउटब्रेक इन्वेस्टिगेशन तथा त्वरित उपचार, नियंत्रण एवं रोकथाम की गतिविधियां समानांतर रूप से प्रारंभ की जाएं। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संबंधी सूचना को किसी भी स्तर पर रोका नहीं जाए। यदि किसी असामान्य घटना अथवा मामलों में क्षेत्र विशेष में अचानक वृद्धि की जानकारी प्राप्त होती है तो इसकी सूचना तत्काल जिला सर्विलांस इकाई को दी जाए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर एंट्री पूर्ण होने की प्रतीक्षा में सूचना देने में विलंब नहीं होना चाहिए। आवश्यकता होने पर फोन अथवा संदेश के माध्यम से तत्काल सूचना दी जाए तथा इसके बाद पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टि पूर्ण की जाए। गंभीर असामान्य स्वास्थ्य घटना की स्थिति में सत्यापन की कार्यवाही के साथ-साथ स्टेट सर्विलांस यूनिट, आयुक्त कार्यालय एवं जिला प्रशासन को भी तत्काल सूचित किया जाए।

    प्रमुख सचिव  सिंह ने असामान्य स्वास्थ्य घटना अथवा संभावित प्रकोप की स्थिति में पहले 24 घंटे की कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए समयबद्ध कार्ययोजना के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 0–2 घंटे: क्लिनिकल स्टेबिलाइजेशन, तत्काल सूचना एवं प्रारंभिक लाइन-लिस्ट तैयार करना। 2–6 घंटे: रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) को क्षेत्र में सक्रिय करना, ऐक्टिव केस सर्च, सैंपल कलेक्शन तथा एक्सपोज़र की जानकारी एकत्र करना। 6–12 घंटे: टाइम-प्लेस-पर्सन एनालिसिस, संभावित कारणों की पहचान तथा कंट्रोल मेजर्स प्रारंभ करना। 12–24 घंटे: अपडेटेड लाइन-लिस्ट, लेबोरेटरी स्टेटस की समीक्षा, प्रीलिमिनरी रिपोर्ट तैयार करना एवं आगामी 72 घंटे की कार्ययोजना निर्धारित करना। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में "पहचान–सूचना–जांच–नियंत्रण" की प्रक्रिया पहले दिन से ही प्रारंभ होनी चाहिए।

    बैठक में रोग निगरानी एवं रिपोर्टिंग व्यवस्था में विभिन्न स्तरों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की गईं। जिला स्तर पर कलेक्टर के मार्गदर्शन में सीएमएचओ/डीएसओ द्वारा समग्र निगरानी, विभागीय समन्वय, आरआरटी को सक्रिय करने तथा दैनिक समीक्षा की जाएगी। ब्लॉक स्तर पर बीएमओ द्वारा केस सत्यापन, लाइन-लिस्टिंग, ऐक्टिव केस सर्च, सैंपल कलेक्शन, ट्रीटमेंट/रेफरल तथा आवश्यक लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य संस्थाओं में संस्था प्रभारी/नोडल अधिकारी द्वारा केस आइडेंटिफिकेशन, ट्रीटमेंट, आइसोलेशन, पोर्टल एंट्री, सैंपलिंग एवं रेफरल की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। मैदानी स्तर पर एएनएम, सीएचओ, एमपीडब्लू, आशा एवं एएमडब्ल्यू द्वारा घर-घर निगरानी, रिस्क आइडेंटिफिकेशन, हेल्थ एजुकेशन एवं फॉलो-अप की गतिविधियां की जाएंगी।

    जननी सुरक्षा एवं प्रसूति सहायता योजनाओं की समीक्षा

    प्रमुख सचिव  सिंह ने बैठक में जननी सुरक्षा योजना एवं प्रसूति सहायता योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना है और पात्र हितग्राहियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना इसका महत्वपूर्ण पक्ष है। उन्होंने कहा कि त्वरित हितलाभ अंतरण इन योजनाओं की मूल भावना है। ये योजनाएं सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इनके क्रियान्वयन में पूर्ण संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाए।प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर हितलाभ अंतरण सुनिश्चित किया जाए। पेंडिंग प्रेग्नेंसी एंट्री के प्रकरणों पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने इन्हें प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लंबित प्रकरण की समीक्षा की जाए, लंबित रहने के कारणों की पहचान कर उसका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र हितग्राहियों को समय पर भुगतान मिले। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।

    सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पानी की गुणवत्ता की करें जांच

    प्रमुख सचिव  सिंह ने प्रदेश के समस्त स्वास्थ्य संस्थानों में एक सप्ताह के भीतर पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में पानी की गुणवत्ता अथवा संबंधित व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है, वहां उसका तत्काल निराकरण प्राथमिकता से कराया जाए। जांच एवं सुधारात्मक कार्रवाई की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए और भुगतान से संबंधित किसी भी लंबित प्रकरण का शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रशासनिक एवं वित्तीय स्तर पर आवश्यक समन्वय करते हुए भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, मेडिकल कॉलेजों के डीन, अधीक्षक, क्षेत्रीय संचालक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा संबंधित विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

     

  • कार पर पेड़ गिरने से मची चीख-पुकार, डिप्टी कलेक्टर की मां की मौत; परिवार के दो लोग घायल

    कार पर पेड़ गिरने से मची चीख-पुकार, डिप्टी कलेक्टर की मां की मौत; परिवार के दो लोग घायल

     इंदौर

     मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सोमवार शाम को भारी बारिश के बीच एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। सेंट्रल जेल के समीप मुख्य सड़क से गुजर रहे वाहनों पर अचानक एक विशाल पेड़ आ गिरा। इस दर्दनाक दुर्घटना में कार सवार नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की डिप्टी कलेक्टर पूर्णिमा सिंघी की बुजुर्ग मां की जान चली गई, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
    मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराकर लौट रहा था परिवार, डेढ़ घंटे तक कार में दबे रहे लोग

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बुजुर्ग महिला की पहचान 75 वर्षीया राधा देवी सिंघी के रूप में हुई है, जो हाल ही में मोतियाबिंद का इलाज कराकर लौट रही थीं। हादसे में उनकी भतीजी वैशाली जायसवाल (55) और पोते/भतीजे प्रखर सिंघी (25) घायल हो गए हैं। दोनों घायलों को तत्काल उपचार के लिए पास के निजी गोकुलदास अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

     

  • लापरवाही करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    लापरवाही करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने सोमवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के बंडा क्षेत्र में अवैध शराब सेवन से प्रभावित मरीजों से मिले। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।  देवड़ा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं तथा पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

    उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे प्रकरण में कठोर कार्रवाई करने की बात की है।  देवड़ा ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी शराब दुकानों की जांच, स्टॉक की नियमित निगरानी तथा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच करें और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें।

    उपमुख्यमंत्री  देवड़ा को जानकारी दी गई कि अवैध शराब से प्रभावित एवं उपचाररत मरीजों का ध्यान रखा जाये। ईलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाये। एक गंभीर मरीज को भोपाल एम्स भेजा गया है। अधिकांश मरीजों की स्थिति अब स्थिर है।

    जानकारी दी गई की थाना बंडा में भारतीय न्याय संहिता और मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 30 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।  

    उप मुख्यमंत्री मरीज और उनके परिजनों से मिले

    उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने सोमवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचकर आईसीयू एवं क्रिटिकल केयर वार्ड में भर्ती मरीजों मिले। उन्होंने उनके स्वास्थ्य की जानकारी डॉक्टरों से प्राप्त कर निर्देश दिये कि ईलाज की सभी व्यवस्था की जाये। मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिजनों से भी चर्चा कर उन्हें आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है।

    उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम 24 घंटे उपलब्ध रहे तथा दवाओं, उपकरणों और अन्य चिकित्सा संसाधनों की कोई कमी न होने दी जाए।