Category: मध्य प्रदेश

  • लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन के विस्तार से स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन के विस्तार से स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स और नगरीय विकास के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश, देश के मध्य में स्थित है और यहां का सड़क सम्पर्क, रेल तथा एयर कनेक्टिविटी देश के सभी स्थानों से सुगम है। देश के किसी भी कोने में मध्यप्रदेश से अपने उत्पाद पहुंचाना सरल और त्वरित है। प्रदेश में उपलब्ध बेहतर औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा तथा स्किल्ड मैनपॉवर के कारण मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास की दृष्टि से हर तरह की संभावनाओं से परिपूर्ण प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' (एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग) के तीसरे दिन 8 सितंबर को यूएई के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग की। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के बिजनेस-फिलैंथ्रॉपी के लिए स्पेशल एनवॉय और क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  बद्र जाफर, डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  रिजवान सूमार, राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा, जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर  सनी वर्की, ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ  सिद्धार्थ बालाचंद्रन, शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ  श्याम कपूर, वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख  अमित साइचर तथा सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष  एल.टी. पगरानी से विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को अगले वर्ष होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 का निमंत्रण भी दिया।

    तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप को राज्य सरकार कर रही है प्रोत्साहित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  बद्र जाफर को प्रदेश के प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स के लिए वेयर हाऊसिंग, लॉजिस्टिक्स आदि के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप के क्षेत्र में निवेश को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।  जाफर ने शहरी अधोसंरचना विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में दीर्घ अवधि निवेश के संबंध में रूचि प्रकट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा  जाफर के बीच मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को  जाफर ने बताया कि क्रेसेंट ग्रुप ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना और दीर्घकालिक निवेश में रुचि रखने वाला बहुआयामी व्यापारिक समूह है। पेट्रोलियम और उद्यमिता क्रेसेंट के प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं। कंपनी का मुख्यालय शारजाह में है।

    पोवारखेड़ा अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में होगा विकसित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  रिजवान सूमार के साथ चर्चा में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहित कई विषयों पर बातचीत की। उल्लेखनीय है कि डीपी वर्ल्ड की इकाईयां मध्यप्रदेश में पहले से ही संचालित है तथा वह प्रदेश में गतिविधियों के विस्तार का इच्छुक है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  सूमार ने बताया कि डीपी वर्ल्ड कंपनी एंड-टू-एंड सप्लाई चेन और व्यापार समाधानों की एकीकृत वैश्विक प्रदाता है। यह दुबई सरकार की 100% स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी भारत सहित 80 देशों में काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना है। प्रमुख औद्योगिक और कृषि क्लस्टरों को सेवा देने वाली मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन सुविधाओं से व्यापार-व्यवसाय गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। कुशल रेल-आधारित माल ढुलाई के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत और ट्रांसपोर्ट का समय कम करते हुए किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों के लिए कार्गो समेकन, मूल्य संवर्धन और निर्यात सहायता प्रदान करने से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा सकेगा, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में निवेश पर हुई चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा से मुलाकात की। दोनों के बीच मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और एग्रीकल्चरल मशीनरी पर फोकस किया गया।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस होंगे स्थापित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर  सनी वर्की से मुलाकात के दौरान उन्हें प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के नवाचारों और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि जेम्स एजुकेशन कंपनी स्कूल शिक्षा, एजुकेशनल मैनेजमेंट और एज्युकेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करती है। जेम्स एजुकेशन कंपनी ने मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों और विकासशील शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रूचि प्रदर्शित की। इन स्कूलों में विद्यार्थियों में कौशल विकसित करने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी। कंपनी स्थानीय जरूरतों और भविष्य की लर्निंग आवश्यकताओं के अनुसार नेशनल और इंटरनेशनल करिकुलम को लागू करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को  सनी वर्की ने बताया कि उनकी कंपनी की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। कंपनी मिडिल ईस्ट, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में काम कर रही है। कंपनी का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार पर है। इसका मुख्यालय दुबई में है।

    ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन प्रदेश में निवेश का इच्छुक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ  सिद्धार्थ बालाचंद्रन से वन-टू-वन मीटिंग की।  बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ केयर, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी सहित कई सेक्टर में निवेश की इच्छा प्रकट की।

    शराफ ग्रुप मध्यप्रदेश में संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए इच्छुक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ  श्याम कपूर से मुलाकात की। दोनों के बीच शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग युक्त लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 30 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से लगभग 300 से 600 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। कंपनी इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में निवेश के लिए इच्छुक है। बैठक में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, आधुनिक वेयरहाउसिंग और रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स का विकास किए जाने पर चर्चा हुई। कंपनी के प्रेसिडेंट  कपूर ने बैठक में बताया कि कंपनी भारत में अपनी भारतीय सहायक कंपनी हिंद टर्मिनल्स प्राइवेट लिमिटेड (HTPL) के माध्यम से मौजूद है जो इनलैंड कंटेनर डिपो के संचालन के साथ-साथ ताजे कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड-चेन समाधान भी उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत में 35 माल वाहक ट्रेनों और लगभग 900 ट्रकों का संचालन कर रही है। कंपनी मध्यप्रदेश में अपना संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए विशेष रूप से इच्छुक है।

    भोपाल और इंदौर में वीज़ा सेवाओं का होगा विस्तार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख  अमित साइचर की सौहार्दपूर्ण एवं परिणामोन्मुखी बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य में निवेश, रोजगार, वीज़ा सेवाओं की सुलभता, पर्यटन तथा युवाओं के कौशल विकास को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीएफएस ग्लोबल को भोपाल और इंदौर में वीज़ा आवेदन सेवाओं का दायरा बढ़ाने तथा क्षेत्रीय पहुंच को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं की रोजगार-योग्यता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। चर्चा के दौरान स्थानीय युवाओं के लिए उद्योग-उन्मुख यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने पर विचार किया गया।

    चोइथराम समूह सुपरमार्केट और आधुनिक किराना रिटेल केन्द्रों की स्थापना का इच्छुक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष  एल. टी. पगरानी से प्रदेश की निवेश नीतियों और व्यापारिक संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। दुबई मुख्यालय वाला चोइथराम समूह वर्ष 1943 से कार्यरत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समूह है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में मजबूत उपस्थिति रखने वाला यह समूह रिटेल, खाद्य सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और ब्रांड वितरण में विशेषज्ञता रखता है।बैठक के दौरान राज्य में आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना के विकास पर सहमति बनी। समूह प्रदेश के प्रमुख शहरों में सुपरमार्केट और आधुनिक किराना-रिटेल प्रारूपों की स्थापना का इच्छुक है। औद्योगिक साझेदारी के तहत समूह मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादकों और किसानों से सीधे कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की खरीद करेगा। स्थानीय कच्चे माल का उपयोग कर राज्य में खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निजी लेबल विनिर्माण को गति दी जाएगी।

     

  • टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों का मंचन

    टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों का मंचन

    भोपाल।

     टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को रवीन्द्र भवन में कथाकार संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रख्यात रंग निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में हुई इन प्रस्तुतियों को दिल्ली के ‘संभव’ आर्ट ग्रुप ने मंच पर साकार किया। इसके अलावा कार्यक्रम में रंगसंवाद पत्रिका का विमोचन भी किया गया। वहीं मंच का संचालन अविजित सोलंकी ने किया। आयोजन टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, विश्वरंग फाउंडेशन और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। 
    पहली प्रस्तुति ‘उनके हिस्से का प्रेम’ में एक संस्थान के बॉस के प्रेम संबंधों को अनूठे रंगमंचीय प्रयोग के माध्यम से सामने लाया गया। कहानी में ऑफिस की मेज, कलम, शीशा, कुर्सी और डायरी जैसे निर्जीव दिखाई देने वाले उपकरण उसके प्रेम संबंधों के साक्षी और पड़ताल करने वाले पात्रों की तरह उभरते हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से बॉस के आधे-अधूरे प्रेम संबंधों की कहानी जिस तरह दर्शकों के सामने आती है, वह प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रही।

    दूसरी प्रस्तुति ‘लेखक बनाने वाले’ में लेखकीय महत्वाकांक्षा और उसके बाजारू दोहन पर व्यंग्य किया गया। कहानी का मुख्य पात्र बैंक में नौकरी करने वाला व्यक्ति है, जो लिखता रहता है और लेखक बनने की इच्छा रखता है। अखबार में दिल्ली के एक ‘लेखक बनाओ केंद्र’ का विज्ञापन देखकर वह वहां पहुंचता है। केंद्र उससे पैसे लेकर उसकी एक सामान्य कविता को तैयार करवाने और उसकी झूठी प्रशंसा करने का प्रयास करता है। इस अनुभव से निराश और आक्रोशित होकर वह वहां से लौटता है और महसूस करता है कि लेखक बनाने के नाम पर ऐसे केंद्र लोगों की भावनाओं और लेखकीय आकांक्षा को पैसा कमाने का जरिया बना रहे हैं। कहानी इसी विडंबना और धोखे को व्यंग्यात्मक ढंग से सामने रखती है।

    दोनों प्रस्तुतियों में संतोष चौबे की कहानियों की विशिष्ट संवेदना और व्यंग्य को देवेन्द्र राज अंकुर की रंगमंचीय दृष्टि के माध्यम से प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया। वस्तुओं को कथानक का हिस्सा बनाना और सामान्य जीवन की स्थितियों के भीतर छिपे सामाजिक द्वंद्व को मंच पर उभारना इन प्रस्तुतियों की खास विशेषता रही।

    कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन विरल साहित्यकारों में हैं, जो साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय रहे हैं। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—और चार उपन्यास—‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ तथा ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है तथा उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।

    दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता प्राप्त देवेन्द्र राज अंकुर देशभर की अनेक व्यावसायिक एवं शौकिया नाट्य मंडलियों के साथ निर्देशन कर चुके हैं। ‘संभव’ ग्रुप के संस्थापक सदस्य और ‘कहानी का रंगमंच’ के प्रणेता अंकुर अध्यापक, कैंप निर्देशक और नाट्य निर्देशक के रूप में देशभर की कार्यशालाओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया है और रंगमंच विषयक लेखन भी किया है। रंग आलोचना पर उनकी सात से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। टैगोर फेलोशिप प्राप्त प्रो. अंकुर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक रह चुके हैं। रंगमंच के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
    मंच पर

    अमिताभ श्रीवास्तव, अमित सक्सेना, प्रकाश झा, गौरी देवल, रचिता वर्मा एवं सहज हरजाई

     

  • शिक्षा, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर को प्रदान की जाएगी मानद उपाधि

    शिक्षा, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर को प्रदान की जाएगी मानद उपाधि

    भोपाल

     शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, साहित्य, विज्ञान संचार और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संतोष चौबे को बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा, झारखंड द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर 2026 को उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। समारोह विश्वविद्यालय के गुरुपद संभवन रामजी ऑडिटोरियम में आयोजित होगा।

    विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी ने शिक्षा, साहित्य, सामाजिक उद्यमिता, विज्ञान संचार और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में चौबे के विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए इस सम्मान के लिए उनका चयन किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह उपाधि उनके उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के प्रति सम्मान और सराहना का प्रतीक है।

    शिक्षा और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में चार दशक से अधिक का योगदान

    संतोष चौबे ने वर्ष 1985 में ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना की। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण भारत के बीच डिजिटल विभाजन को कम करना तथा शिक्षा और तकनीक की पहुंच को व्यापक बनाना था। उनके नेतृत्व में आईसेक्ट ने ग्रामीण, आदिवासी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया।
    एनआईटी, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियर चौबे ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तीकरण के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके मार्गदर्शन में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय वैशाली, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय खंडवा, एआईएसईसीटी विश्वविद्यालय हजारीबाग और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों का विकास हुआ। इन संस्थानों में शिक्षा को कौशल विकास, शोध, नवाचार, उद्यमिता और उद्योगोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।

    हिंदी में विज्ञान संचार के अग्रणी हस्ताक्षर

    संतोष चौबे की पहचान एक प्रतिष्ठित विज्ञान लेखक और विज्ञान संचारक के रूप में भी रही है। उनकी वर्ष 1986 में प्रकाशित पुस्तक ‘कंप्यूटर: एक परिचय’ ने हिंदी में तकनीकी शिक्षा और कंप्यूटर जागरूकता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने साहित्य और विज्ञान के बीच संवाद को मजबूत करते हुए कविता, कथा, उपन्यास और लोकप्रिय विज्ञान लेखन के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है।

    साहित्य की विविध विधाओं में सक्रिय

    कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन साहित्यकारों में हैं, जिन्होंने साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं।
    उनके चार उपन्यास ‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ और ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’ प्रकाशित हुए हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है और उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।
    भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। विश्वविद्यालय की मानद उपाधि के लिए तैयार प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक और वैज्ञानिक लेखन के साथ भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित

    शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक उद्यमिता और साहित्य के क्षेत्र में संतोष चौबे के योगदान को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से मान्यता मिली है। उन्हें राष्ट्रीय नवाचार पुरस्कार, श्वाब फाउंडेशन सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

  • MP के उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक आसान होगी पहुंच, बेहतर लॉजिस्टिक्स पर CM डॉ. यादव का जोर

    MP के उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक आसान होगी पहुंच, बेहतर लॉजिस्टिक्स पर CM डॉ. यादव का जोर

    हतर लॉजिस्टिक व्यवस्था से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में होगा नवाचार
    लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन के विस्तार से स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआईएम कांग्रेस-2026 के तीसरे दिन निवेशकों और उद्यमियों से की वन-टू-वन मीटिंग
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के लिए किया आमंत्रित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स और नगरीय विकास के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश, देश के मध्य में स्थित है और यहां का सड़क सम्पर्क, रेल तथा एयर कनेक्टिविटी देश के सभी स्थानों से सुगम है। देश के किसी भी कोने में मध्यप्रदेश से अपने उत्पाद पहुंचाना सरल और त्वरित है। प्रदेश में उपलब्ध बेहतर औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा तथा स्किल्ड मैनपॉवर के कारण मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास की दृष्टि से हर तरह की संभावनाओं से परिपूर्ण प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' (एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग) के तीसरे दिन 8 सितंबर को यूएई के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग की। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के बिजनेस-फिलैंथ्रॉपी के लिए स्पेशल एनवॉय और क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बद्र जाफर, डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार, राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा, जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की, ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन, शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर, वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर तथा सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष एल.टी. पगरानी से विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को अगले वर्ष होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 का निमंत्रण भी दिया।

    तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप को राज्य सरकार कर रही है प्रोत्साहित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बद्र जाफर को प्रदेश के प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स के लिए वेयर हाऊसिंग, लॉजिस्टिक्स आदि के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप के क्षेत्र में निवेश को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। जाफर ने शहरी अधोसंरचना विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में दीर्घ अवधि निवेश के संबंध में रूचि प्रकट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा जाफर के बीच मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाफर ने बताया कि क्रेसेंट ग्रुप ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना और दीर्घकालिक निवेश में रुचि रखने वाला बहुआयामी व्यापारिक समूह है। पेट्रोलियम और उद्यमिता क्रेसेंट के प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं। कंपनी का मुख्यालय शारजाह में है।

    पोवारखेड़ा अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में होगा विकसित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार के साथ चर्चा में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहित कई विषयों पर बातचीत की। उल्लेखनीय है कि डीपी वर्ल्ड की इकाईयां मध्यप्रदेश में पहले से ही संचालित है तथा वह प्रदेश में गतिविधियों के विस्तार का इच्छुक है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूमार ने बताया कि डीपी वर्ल्ड कंपनी एंड-टू-एंड सप्लाई चेन और व्यापार समाधानों की एकीकृत वैश्विक प्रदाता है। यह दुबई सरकार की 100% स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी भारत सहित 80 देशों में काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना है। प्रमुख औद्योगिक और कृषि क्लस्टरों को सेवा देने वाली मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन सुविधाओं से व्यापार-व्यवसाय गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। कुशल रेल-आधारित माल ढुलाई के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत और ट्रांसपोर्ट का समय कम करते हुए किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों के लिए कार्गो समेकन, मूल्य संवर्धन और निर्यात सहायता प्रदान करने से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा सकेगा, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में निवेश पर हुई चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा से मुलाकात की। दोनों के बीच मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और एग्रीकल्चरल मशीनरी पर फोकस किया गया।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस होंगे स्थापित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की से मुलाकात के दौरान उन्हें प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के नवाचारों और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि जेम्स एजुकेशन कंपनी स्कूल शिक्षा, एजुकेशनल मैनेजमेंट और एज्युकेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करती है। जेम्स एजुकेशन कंपनी ने मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों और विकासशील शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रूचि प्रदर्शित की। इन स्कूलों में विद्यार्थियों में कौशल विकसित करने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी। कंपनी स्थानीय जरूरतों और भविष्य की लर्निंग आवश्यकताओं के अनुसार नेशनल और इंटरनेशनल करिकुलम को लागू करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सनी वर्की ने बताया कि उनकी कंपनी की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। कंपनी मिडिल ईस्ट, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में काम कर रही है। कंपनी का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार पर है। इसका मुख्यालय दुबई में है।

    ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन प्रदेश में निवेश का इच्छुक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन से वन-टू-वन मीटिंग की। बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ केयर, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी सहित कई सेक्टर में निवेश की इच्छा प्रकट की।

    शराफ ग्रुप मध्यप्रदेश में संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए इच्छुक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर से मुलाकात की। दोनों के बीच शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग युक्त लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 30 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से लगभग 300 से 600 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। कंपनी इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में निवेश के लिए इच्छुक है। बैठक में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, आधुनिक वेयरहाउसिंग और रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स का विकास किए जाने पर चर्चा हुई। कंपनी के प्रेसिडेंट कपूर ने बैठक में बताया कि कंपनी भारत में अपनी भारतीय सहायक कंपनी हिंद टर्मिनल्स प्राइवेट लिमिटेड (HTPL) के माध्यम से मौजूद है जो इनलैंड कंटेनर डिपो के संचालन के साथ-साथ ताजे कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड-चेन समाधान भी उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत में 35 माल वाहक ट्रेनों और लगभग 900 ट्रकों का संचालन कर रही है। कंपनी मध्यप्रदेश में अपना संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए विशेष रूप से इच्छुक है।

    भोपाल और इंदौर में वीज़ा सेवाओं का होगा विस्तार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर की सौहार्दपूर्ण एवं परिणामोन्मुखी बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य में निवेश, रोजगार, वीज़ा सेवाओं की सुलभता, पर्यटन तथा युवाओं के कौशल विकास को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीएफएस ग्लोबल को भोपाल और इंदौर में वीज़ा आवेदन सेवाओं का दायरा बढ़ाने तथा क्षेत्रीय पहुंच को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं की रोजगार-योग्यता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। चर्चा के दौरान स्थानीय युवाओं के लिए उद्योग-उन्मुख यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने पर विचार किया गया।

    चोइथराम समूह सुपरमार्केट और आधुनिक किराना रिटेल केन्द्रों की स्थापना का इच्छुक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष एल. टी. पगरानी से प्रदेश की निवेश नीतियों और व्यापारिक संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। दुबई मुख्यालय वाला चोइथराम समूह वर्ष 1943 से कार्यरत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समूह है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में मजबूत उपस्थिति रखने वाला यह समूह रिटेल, खाद्य सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और ब्रांड वितरण में विशेषज्ञता रखता है।बैठक के दौरान राज्य में आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना के विकास पर सहमति बनी। समूह प्रदेश के प्रमुख शहरों में सुपरमार्केट और आधुनिक किराना-रिटेल प्रारूपों की स्थापना का इच्छुक है। औद्योगिक साझेदारी के तहत समूह मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादकों और किसानों से सीधे कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की खरीद करेगा। स्थानीय कच्चे माल का उपयोग कर राज्य में खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निजी लेबल विनिर्माण को गति दी जाएगी।

     

  • इंदौर की 132 KV बिजली लाइनों का होगा अपग्रेड, HTLS कंडक्टर से करीब तीन गुना बढ़ेगी क्षमता: मंत्री तोमर

    इंदौर की 132 KV बिजली लाइनों का होगा अपग्रेड, HTLS कंडक्टर से करीब तीन गुना बढ़ेगी क्षमता: मंत्री तोमर

    इंदौर के पावर नेटवर्क को मिलेगी नई ताकत, एम पी ट्रांसको ने शुरू किया एचटीएलएस कंडक्टर से क्षमता उन्नयन- ऊर्जा मंत्री तोमर

    मौजूदा 132 केवी लाइनों की क्षमता होगी करीब तीन गुना, बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए बढ़ेगा पावर ट्रांसफर

    इंदौर

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती विद्युत मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ते पावर फ्लो को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने इंदौर के महत्वपूर्ण 132 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्नयन कार्य शुरू कर दिया है। इस कार्य में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों के एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग   एच टी एल एस कंडक्टरों से बदला जा रहा है।

     ऊर्जा मंत्री ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक के एचटीएलएस कंडक्टरों की करंट वहन क्षमता मौजूदा पैंथर कंडक्टरों की तुलना में काफी अधिक है। इसके परिणामस्वरूप मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के उसी कॉरिडोर में करीब तीन गुना अधिक विद्युत पावर ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए मौजूदा नेटवर्क की पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा रही है।

    इंदौर साउथ जोन से चंबल तक दोनों सर्किट का उन्नयन

    उन्नयन कार्य की शुरुआत खंडवा रोड स्थित 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन से 132 केवी चंबल सबस्टेशन तक जाने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में की गई है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स तथा सत्य साईं सर्किट शामिल हैं।

    साथ ही 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, सांवेर रोड से 132 केवी चंबल सबस्टेशन, पोलोग्राउंड को जोड़ने वाली 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के दोनों सर्किट में भी एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को एचटीएलएस कंडक्टरों से बदलने का कार्य शुरू किया गया है।

    14 फीडर बे भी होंगे अपग्रेड

    ट्रांसमिशन लाइनों के कंडक्टर बदलने के साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े 14 फीडर बे के उन्नयन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है। इनमें 132 केवी चंबल सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन, 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन, 132 केवी इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स सबस्टेशन तथा 132 केवी सत्य साईं सबस्टेशन से संबंधित फीडर बे शामिल हैं।

    ट्रांसमिशन लाइनों की बढ़ी हुई करंट वहन क्षमता के अनुरूप संबंधित स्विचयार्ड एवं फीडर बे उपकरणों को भी अपग्रेड किया जाएगा। इससे केवल कंडक्टर की क्षमता बढ़ने तक सीमित न रहकर उससे जुड़े नेटवर्क में भी बढ़ी हुई विद्युत क्षमता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    अधिक तापमान पर भी कम सैग के साथ काम करते हैं एचटीएलएस  कंडक्टर

    एचटीएलएस कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम होते हैं और उच्च तापमान पर भी इनका सैग अपेक्षाकृत कम रहता है। यही तकनीकी विशेषता इन्हें मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी बनाती है।

    कंडक्टर की बढ़ी हुई थर्मल करंट वहन क्षमता के कारण मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क से अधिक विद्युत शक्ति का पारेषण किया जा सकता है। इससे नई ट्रांसमिशन लाइन के लिए अलग कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता कम होती है और मौजूदा लाइन के माध्यम से ही अधिक पावर फ्लो संभव होता है।

    बढ़ते शहरी विस्तार के बीच मौजूदा कॉरिडोर का होगा बेहतर उपयोग

     ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि इंदौर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ती निर्माण गतिविधियों के कारण नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे  (आर ओ डब्ल्यू )उपलब्ध कराना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के कॉरिडोर में ही कंडक्टर की क्षमता बढ़ाना एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प है।

    एचटीएलएस कंडक्टरों के माध्यम से मौजूदा 132 केवी नेटवर्क में अधिक विद्युत शक्ति के पारेषण के साथ महत्वपूर्ण लाइनों पर लोडिंग का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इससे पावर फ्लो के लिए अतिरिक्त ऑपरेशनल मार्जिन भी उपलब्ध होगा।

    इस क्षमता उन्नयन से इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं के अनुरूप ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और उससे जुड़े स्विचयार्ड एवं फीडर बे इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।

  • बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत, RDSS से 24 जिलों में अधोसंरचना विकास तेज; उपकेंद्रों-ट्रांसफॉर्मर की बढ़ेगी क्षमता

    बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत, RDSS से 24 जिलों में अधोसंरचना विकास तेज; उपकेंद्रों-ट्रांसफॉर्मर की बढ़ेगी क्षमता

    आरडीएसएस से मजबूत हो रहा विद्युत नेटवर्क, 33/11 केवी उपकेंद्रों और ट्रांसफॉर्मर क्षमता वृद्धि के कार्यों में तेजी

    पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 24 जिलों में अधोसंरचना विकास को मिल रही गति

    भोपाल 
    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने और भविष्य की विद्युत मांग को ध्यान में रखते हुए आरडीएसएस योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। योजना के तहत नए 33/11 केवी उपकेंद्रों के निर्माण, पावर ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता वृद्धि तथा 33 केवी लाइनों के विस्तार के कार्य प्रगति पर हैं।

    कंपनी के विभिन्न सर्किलों में 31 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का कार्य प्रस्तावित है, जिनमें से 10 उपकेंद्रों का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष उपकेंद्रों पर भी निर्माण एवं संबंधित कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

    332.6 किलोमीटर 33 केवी लाइन का कार्य पूर्ण

    आरडीएसएस के तहत कंपनी द्वारा विद्युत नेटवर्क के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए कुल 722.6 किलोमीटर 33 केवी लाइन का प्रावधान किया गया है। इसमें से अब तक 332.6 किलोमीटर लाइन का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। नई 33 केवी लाइनों से आगामी समय में विभिन्न क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

    ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाकर भविष्य की मांग के लिए तैयारी

    योजना के तहत विभिन्न 33/11 केवी उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने के कार्य भी किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 3.15 एमवीए क्षमता वृद्धि के 78 कार्यों में 60, 5 एमवीए के 17 में से 16, जबकि 3.15 से 5 एमवीए क्षमता वृद्धि के 80 में से 63 कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

    इसी प्रकार 5 से 8 एमवीए के सभी 4, 8 से 10 एमवीए के सभी 5 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 5 से 10 एमवीए क्षमता वृद्धि के 92 कार्यों में से 73 कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं।

    उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ

    आरडीएसएस के अंतर्गत किए जा रहे ये कार्य विद्युत प्रणाली की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ओवरलोडिंग कम करने, वोल्टेज सुधारने, नए क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने तथा आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    कंपनी द्वारा उपकेंद्र, ट्रांसफॉर्मर और 33 केवी लाइन के कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। आगामी चरण में शेष कार्यों को गति देकर मजबूत, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विद्युत वितरण नेटवर्क तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    मुख्य उपलब्धियां एक नजर में

          31 नए 33/11 केवी उपकेंद्र प्रस्तावित, 10 पूर्ण 

          722.6 किमी 33 केवी लाइन में 332.6 किमी कार्य पूर्ण 

          3.15 एमवीए क्षमता वृद्धि के 60 कार्य पूर्ण 

          5 एमवीए के 16 कार्य पूर्ण 

          3.15 से 5 एमवीए के 63 कार्य पूर्ण 

          5 से 8 एमवीए के सभी 4 कार्य पूर्ण 

          8 से 10 एमवीए के सभी 5 कार्य पूर्ण 

          5 से 10 एमवीए के 73 कार्य पूर्ण

  • शारजाह के उद्योग जगत से MP की बढ़ेगी साझेदारी? CM डॉ. यादव की चेयरमैन से मुलाकात में निवेश पर चर्चा

    शारजाह के उद्योग जगत से MP की बढ़ेगी साझेदारी? CM डॉ. यादव की चेयरमैन से मुलाकात में निवेश पर चर्चा

    दुबई विजिट "तीसरा दिन"

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन से की भेंट, एमपी में बड़े निवेश की संभावना

    शारजाह और मध्यप्रदेश के बीच आर्थिक साझेदारी सुदृढ़ करने पर गहन विचार-विमर्श
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह के प्रतिनिधिमंडल को जीआईएस 2027 के लिए किया आमंत्रित
    फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित 'एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग' (एआईएम कांग्रेस-2026) के दौरान शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं एक्सपो सेंटर के चेयरमैन अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस से सौजन्य भेंट की। बैठक में मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओवैस को अगले साल होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2027') में सहभागिता के लिये मध्यप्रदेश आमंत्रित किया।

    व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल और बी-2-बी फोरम का प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह चैंबर के साथ एक सुव्यवस्थित और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने चेयरमैन ओवैस से मध्यप्रदेश में एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का आग्रह किया। साथ ही, दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों के बीच सेक्टर-आधारित बी-2-बी बैठकों के आयोजन हेतु 'मध्यप्रदेश-शारजाह बिजनेस फोरम' का प्रस्ताव भी रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य के एमएसएमई और निर्यातकों को खाड़ी देशों के प्रमुख खरीदारों व वितरकों से जोड़ने के लिए शारजाह चैंबर से सहयोग का आह्वान किया। बैठक में शारजाह की अग्रणी कंपनियों को प्रदेश के फूड पार्क, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवकरणीय ऊर्जा और पर्यटन परियोजनाओं में पूंजी निवेश के लिए आमंत्रित किया गया।

    मध्यप्रदेश में निवेश-अनुकूल नीतियां और सुदृढ़ इंफ्रॉस्ट्रक्चर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी रणनीतिक केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, विशाल औद्योगिक लैंड बैंक, विश्वस्तरीय इंफ्रॉस्ट्रक्चर और देश के बड़े बाजारों से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी के साथ देश का प्रमुख निवेश केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी नीतियों, त्वरित सिंगल-विंडो सिस्टम और उद्योग-अनुकूल वातावरण के माध्यम से निवेशकों को संपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। शारजाह का विस्तृत व्यापारिक नेटवर्क और कनेक्टिविटी मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों के निर्यात, कौशल संवर्धन, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

    शारजाह-भारत के मजबूत आर्थिक संबंध

    शारजाह-भारत के व्यापारिक संबंधों को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी और सीईपीए का समर्थन प्राप्त है। चैंबर ने भारत में मुंबई सहित, ट्रेड मिशन और बिज़नेस फोरम आयोजित किए हैं। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, एसएमई, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, फूड इंडस्ट्रीज़, टूरिज़्म और रियल एस्टेट शामिल हैं। गौरतलब है कि अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस मई 2014 से शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एक्सपो सेंटर शारजाह के चेयरमैन हैं। वे यूएई फेडरेशन ऑफ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वाइस चेयरमैन भी हैं। उन्हें सरकार, उद्योग, बैंकिंग, फूड प्रोडक्शन, एजुकेशन, एग्रीकल्चर और द्विपक्षीय बिज़नेस संस्थाओं में नेतृत्व का व्यापक अनुभव है।

     

  • इंदौर मेट्रो का रीजनल विस्तार तेज, उज्जैन-देवास-महू-पीथमपुर जुड़ेंगे; बनेगा बड़ा मेट्रो नेटवर्क

    इंदौर मेट्रो का रीजनल विस्तार तेज, उज्जैन-देवास-महू-पीथमपुर जुड़ेंगे; बनेगा बड़ा मेट्रो नेटवर्क

    इंदौर

    मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, देवास जैसे शहरों को मेट्रो या रैपिड मेट्रो कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है. मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के साथ लगभग 84 से 95 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के लिए DPR और सर्वे का काम तेज कर दिया है. वहीं इंदौर-उज्जैन रैपिड रेल कॉरिडोर को सिंहस्थ 2028 के पहले पूरा करने का लक्ष्य है. वहीं इंदौर-पीथमपुर मेट्रो, इंदौर-महू मेट्रो और देवास-मक्सी मेट्रो रूट भी प्लान में है। 

    इंदौर मेट्रो का रिंग कॉरिडोर
    इंदौर मेट्रो में येलो लाइन का 31.55 किमी लंबा रिंग कॉरिडोर है, जिसमें 29 स्टेशन प्रस्तावित हैं. इसमें गांधी नगर और सुपर कॉरिडोर के प्रारंभिक चरण के बाद सुपर कॉरिडोर-3 में मालवीय नगर (रेडिसन चौराहा) तक लगभग 17 किमी लंबे और ₹2,850 करोड़ की लागत वाले नए खंड को मेट्रो नेटवर्क 5 सितंबर को जोड़ा गया है. जबकि लवकुश चौराहे से बड़ा गणपति, राजवाड़ा और रेलवे स्टेशन होते हुए राजेंद्र नगर तक का हिस्सा घनी आबादी में भूमिगत स्टेशन बनाए जाएंगे। 

    1. इंदौर-उज्जैन रीजनल रैपिड मेट्रो कॉरिडोर
    मध्य प्रदेश सरकार इंदौर और मालवा क्षेत्र के चारों प्रमुख शहरों और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड मेट्रो नेटवर्क की तैयारी भी कर रही है. यह मध्य प्रदेश का सबसे हाई प्रायोरिटी रीजनल मेट्रो यानी नमो भारत रैपिड रेल प्रोजेक्ट है. 48 किलोमीटर के रूट पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च आ सकता है.महाकुंभ सिंहस्थ 2028 (मार्च–मई 2028) से पहले इसे शुरू करने का लक्ष्य है. इंदौर के लवकुश चौराहा, एयरपोर्ट से यह इंदौर-उज्जैन 4-लेन हाईवे के समानांतर उज्जैन महाकाल मंदिर तक जाएगा। 

    प्रस्तावित स्टेशन 
      1. लवकुश चौराहा (इंदौर इंटरचेंज)
      2. भंवरसला, सांवेर रोड
      3. बारोली
      4. धरमपुरी, सांवेर
      5. निनौरा
      6. त्रिवेणी घाट
      7. नानाखेड़ा ISBT बस स्टैंड
      8. उज्जैन रेलवे स्टेशन
      9. श्री महाकालेश्वर मंदिर स्टेशन (उज्जैन)

    एमपी के नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि इंदौर मेट्रो परियोजना का विस्तार किया जाएगा. इसमें पीथमपुर, महू, देवास, मक्सी, उज्जैन शामिल होगा. इंदौर मेट्रो में अगले 10-15 साल में काफी विस्तार हो सकता है। 

    2. इंदौर-पीथमपुर मेट्रो 
    इंदौर-पीथमपुर मेट्रो मध्य प्रदेश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल, फार्मा और इंडस्ट्रियल हब को जोड़ने वाला रूट बनेगा. ये 30 से 35 किलोमीटर लंबा है. फिजिबिलिटी रिपोर्ट और सर्वे के बाद 2029-2030 तक ये तैयार हो सकता है. इंदौर मेट्रो की येलो लाइन (राजेंद्र नगर, एबी रोड) से होकर राऊ होते हुए पीथमपुर सेज (SEZ) तक एलिवेटेड ट्रैक बनाने की योजना है। 

    प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन
      1. राजेंद्र नगर स्टेशन (इंटरचेंज)
      2. राऊ चौराहा
      3. पिगडंबर
      4. पीथमपुर एंट्री गेट, इंडस्ट्रियल एरिया-1
      5. पीथमपुर सेज (SEZ)
      6. स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क स्टेशन
    3. इंदौर-महू मेट्रो विस्तार 

    इंदौर के मास्टर प्लान (फेज-2) के तहत सैन्य छावनी और डॉ. भीमराव अंबेडकर नगर (महू) को मेट्रो कॉरिडोर जोड़ेगा. 18 से 20 किलोमीटर ये रूट 2029-2031 तक पूरा किया जाना है. देवास नाका, जूनी इंदौर से आगे एबी रोड के साथ वाई शेप ट्रैक के जरिए महू छावनी तक पहुंचेगा। 

    प्रस्तावित स्टेशन 

      1. राजेंद्र नगर
      2. रेती मंडी
      3. आईपीएस एकेडमी 
      4. श्रमिक कॉलोनी
      5. इंदौर बाईपास-2
      6. पिगडंबर, उमरिया
      7. मां वैष्णोदेवी हॉस्पिटल
      8. हरण्याखेड़ी, IIT  इंदौर 
      9. चिनार रेजीडेंसी
      10. महू (डॉ. अंबेडकर नगर स्टेशन)
    4. देवास-मक्सी रैपिड मेट्रो विस्तार 

    औद्योगिक शहर देवास, विक्रम उद्योगपुरी और रेलवे जंक्शन मक्सी को इंदौर रीजनल मेट्रो ग्रिड से जोड़ने की योजना है. इसमें 50 से 55 किलोमीटर लंबा रूट होगा. ये 2031-2033 के रीजनल मेट्रोपॉलिटन मास्टर प्लान का आखिरी चरण का प्लान है. इंदौर के देवास नाका से मांगलिया, क्षिप्रा होते हुए देवास शहर, चामुंडा माता टेकरी की तलहटी, विक्रम उद्योगपुरी औद्योगिक क्षेत्र और मक्सी रेलवे जंक्शन तक ये कॉरिडोर बनेगा। 

    प्रमुख प्रस्तावित स्टेशन

      1. देवास नाका (इंदौर)
      2. मांगलिया गांव
      3. क्षिप्रा
      4. देवास इंडस्ट्रियल एरिया (टाटा एक्सपोर्ट, रसूलपुर)
      5. देवास बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन
      6. विक्रम उद्योगपुरी SEZ (उज्जैन-देवास बॉर्डर)
      7. मक्सी जंक्शन 

  • सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि में उत्कृष्ट योगदान के लिए कलेक्टर रत्नाकर झा सम्मानित

    सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि में उत्कृष्ट योगदान के लिए कलेक्टर रत्नाकर झा सम्मानित

    सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि में उत्कृष्ट योगदान के लिए कलेक्टर रत्नाकर झा सम्मानित

    अनूपपुर 
    सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि वर्ष 2024-25 में जिले द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक धनराशि एकत्रित कर सराहनीय योगदान देने पर कलेक्टर रत्नाकर झा को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कर्नल अरुण शुक्ला, सैनिक कल्याण अधिकारी, शहडोल एवं विशाल आमने, कल्याण संयोजक द्वारा कलेक्टर रत्नाकर झा को प्रशंसा पत्र भेंट किया गया।

    उल्लेखनीय है कि अनूपपुर जिले ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि वर्ष 2024-25 में निर्धारित लक्ष्य 3 लाख 63 हजार रुपये के विरुद्ध 4 लाख 23 हजार 550 रुपये की धनराशि एकत्रित कर लक्ष्य से अधिक योगदान दिया है। इस उपलब्धि के लिए जिले के प्रयासों की सराहना की गई है।

  • साइबर ठगी की शिकायत अब नजदीकी थाने में, जिले के सभी 14 थानों में शुरू हुई साइबर डेस्क सुविधा

    साइबर ठगी की शिकायत अब नजदीकी थाने में, जिले के सभी 14 थानों में शुरू हुई साइबर डेस्क सुविधा

    जिले के सभी 14 थानों में शुरू हुई साइबर डेस्क

    अब साइबर अपराध की शिकायत के लिए जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं, नजदीकी थाने में ही मिलेगी पुलिस सहायता

    शहडोल 
     जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं साइबर ठगी से पीड़ित नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के सभी 14 थानों में साइबर डेस्क की शुरुआत की गई है। साइबर डेस्क के माध्यम से नागरिक अपने नजदीकी थाने में ही साइबर अपराध एवं ऑनलाइन ठगी से संबंधित शिकायत दर्ज कराकर आवश्यक पुलिस सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

    पुलिस अधीक्षक शहडोल डॉ. संजय अग्रवाल ने बुढार थाने में फीता काटकर साइबर डेस्क का शुभारंभ किया। इस पहल से साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के लिए नागरिकों को जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित थाना स्तर पर ही शिकायत प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    साइबर डेस्क के माध्यम से ऑनलाइन ठगी, साइबर धोखाधड़ी, सोशल मीडिया से संबंधित अपराध एवं अन्य साइबर अपराधों की शिकायतों पर प्राथमिक स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इससे साइबर अपराधों की सूचना पुलिस तक शीघ्र पहुंचने के साथ ही पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    पुलिस विभाग द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराएं नहीं और तत्काल नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें। साथ ही ऑनलाइन लेन-देन करते समय सतर्कता बरतें और किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी अथवा अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।

    जिले के सभी थानों में साइबर डेस्क की शुरुआत से साइबर अपराधों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई को थाना स्तर तक और अधिक प्रभावी बनाने तथा आमजन को त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।