Category: मध्य प्रदेश

  • प्री एशियन गेम्स ट्रेनिंग कैंप के लिए जापान जाएंगी MP राज्य बॉक्सिंग अकादमी की माही लामा

    प्री एशियन गेम्स ट्रेनिंग कैंप के लिए जापान जाएंगी MP राज्य बॉक्सिंग अकादमी की माही लामा

    भोपाल

    मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी की खिलाड़ी माही लामा का चयन प्री एशियन गेम्स ट्रेनिंग कैंप के लिए हुआ है। माही लामा 60 किलोग्राम भारवर्ग में जापान के निशियो सिटी में आयोजित होने वाले विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेंगी। यह प्रशिक्षण कैंप 09 सितंबर से 17 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

    60 किलोग्राम भारवर्ग में करेंगी प्रशिक्षण

    माही लामा इस प्रशिक्षण शिविर में 60 किलोग्राम भारवर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। एशियन गेम्स की तैयारियों के लिहाज से यह कैंप उनके लिए महत्वपूर्ण अवसर है। शिविर में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए अपनी तकनीक, फिटनेस और प्रदर्शन को और बेहतर करने का अवसर मिलेगा।

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण का मौका

    प्री एशियन गेम्स ट्रेनिंग कैंप में माही लामा को देश के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण लेने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अभ्यास का अनुभव प्राप्त होगा। जापान में होने वाला यह प्रशिक्षण शिविर आगामी एशियन गेम्स की तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    अकादमी में खुशी का माहौल

    माही लामा के प्री एशियन गेम्स ट्रेनिंग कैंप के लिए चयन पर मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी में खुशी का माहौल है। अकादमी के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने माही लामा को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए जापान में होने वाले प्रशिक्षण शिविर के लिए शुभकामनाएं दी हैं। माही लामा के चयन को उनकी मेहनत, निरंतर अभ्यास और अकादमी में मिल रहे उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम बताया गया है।

    एशियन गेम्स की तैयारियों में महत्वपूर्ण पड़ाव

    जापान में आयोजित होने वाला यह प्रशिक्षण कैंप माही लामा के लिए आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। 60 किलोग्राम भारवर्ग में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करने और अपनी तकनीक एवं प्रदर्शन को और निखारने का अवसर मिलेगा।

     खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने माही लामा के प्री एशियन गेम्स ट्रेनिंग कैंप के लिए चयनित होने पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण शिविर के लिए माही लामा का चयन मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने माही लामा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए जापान में होने वाले प्रशिक्षण कैंप में बेहतर प्रदर्शन करने और आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश एवं प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

     

  • विश्व ईवी दिवस पर भोपाल में निकलेगी इलेक्ट्रिक व्हीकल रैली

    विश्व ईवी दिवस पर भोपाल में निकलेगी इलेक्ट्रिक व्हीकल रैली

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में स्वच्छ, हरित एवं सतत परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ करने और पर्यावरण-अनुकूल मोबिलिटी के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 'विश्व ईवी दिवस' के अवसर पर 9 सितंबर को राजधानी भोपाल में एक विशाल इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) रैली का आयोजन किया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल के प्राविधिक सहयोग से इस पहल का आयोजन किया जा रहा है।

    गोविंदपुरा से मैनिट परिसर तक होगा मार्ग

    यह जनजागरूकता रैली 9 सितंबर को प्रातः 8 बजे गोविंदपुरा दशहरा मैदान से हरी झंडी दिखाकर रवाना की जाएगी। रैली शहर के प्रमुख व्यावसायिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों से गुजरते हुए चेतक ब्रिज, एमपी नगर, लिंक रोड नंबर-1, टीटी नगर तिराहा एवं माता मंदिर होते हुए मैनिट, भोपाल परिसर में गरिमामय ढंग से संपन्न होगी। इस रैली में ई-टू व्हीलर, ई-रिक्शा, अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कारें एवं ई-बसें एक साथ सम्मिलित होकर हरित मोबिलिटी का संदेश देंगी।

    पर्यावरण-अनुकूल कल के लिए नागरिक सहभागिता आवश्यक

    नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि ई-वाहनों का अंगीकार केवल परिवहन का आधुनिक विकल्प मात्र नहीं है, अपितु यह वायु गुणवत्ता में सुधार, कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में एक युगगामी कदम है।

    आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि ‘ईवी अपनाएं, स्वच्छ भविष्य बनाएं’ के केंद्रीय ध्येय वाक्य के साथ आयोजित यह रैली आम नागरिकों को दैनिक जीवन में पर्यावरण-मित्र साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। यह अनुठा प्रयास एक स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त और हरित मध्यप्रदेश के निर्माण में जन-भागीदारी को नई दिशा प्रदान करेगा।

     

  • मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘न्याय सुलभता, समाज कार्य और सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित

    मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘न्याय सुलभता, समाज कार्य और सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आज 08 सितंबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में ‘संबल—न्याय सुलभता, समाज कार्य एवं सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव रहे। विशिष्ट अतिथियों में कमिश्नर उच्च शिक्षा विभाग प्रबल शिपहा, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव, कानूनविद् एवं विशेष वक्ता श्रीमती रचना त्यागी, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा की प्रो. सारिका सिन्हा, मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार तथा उप पुलिस महानिरीक्षक, सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर उपस्थित रहे।

    उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘संबल’ नाम से सामुदायिक सुरक्षा पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें आपराधिक न्याय क्षेत्र में कार्यरत समुदाय-आधारित गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के कार्यों व अनुभवों को साझा किया गया था। इस पहल में सामाजिक कार्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी जोड़ा गया, ताकि पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के बीच स्थायी समन्वय एवं सहयोग का मॉडल विकसित किया जा सके। UNFPA के सहयोग से आयोजित वर्तमान सम्मेलन उसी दिशा में एक अगला कदम है, जिसका उद्देश्य पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था, विधिक सेवाओं, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय विकसित कर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं अपराध के पीड़ितों तक न्याय और सहायता की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाना है।

    सम्मेलन में मध्यप्रदेश के 75 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों, बाल संरक्षण से जुड़े पुलिस अधिकारियों, जिला पुलिस प्रमुखों, सामुदायिक पुलिसिंग अधिकारियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, अभियोजन अधिकारियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्य एवं विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

    सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव ने सामुदायिक पुलिसिंग को पुलिसिंग का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा पुलिस एवं गैर-शासकीय संगठनों के बीच स्थायी एवं संस्थागत समन्वय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के कार्यक्रम के बाद प्रदेश में सक्रिय गैर-शासकीय संगठनों की जानकारी संकलित कर पुलिस अधिकारियों एवं इकाइयों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिला, बच्चे, बुजुर्ग, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर तथा अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को पुलिस कार्रवाई के साथ आश्रय, उपचार, पुनर्वास एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कमजोर एवं वंचित वर्गों की सुरक्षा, सामाजिक सहयोग और विश्वास निर्माण से भी जुड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास, महिला-बाल सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनजीओ पुलिस के प्रभावी सहयोगी बन सकते हैं।

    उन्होंने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए एनजीओ के प्रयासों को आंतरिक सुरक्षा एवं विश्वास निर्माण का उदाहरण बताया तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित व्यक्तियों के संरक्षण-पुनर्वास और घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को सहायता में पुलिस-एनजीओ समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। महिला सशक्तिकरण योजनाओं के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कर घरेलू हिंसा एवं महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में कमी का आकलन करने की आवश्यकता भी बताई।

    उन्होंने ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों तथा प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बड़े धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं जनसुरक्षा में उनकी सहभागिता को आवश्यक बताया। वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ के लिए अभी से प्रशिक्षण, योजना एवं समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

    पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार ने कहा कि पुलिस जब थाने या कार्यालय में होती है, तो सामान्यतः उसके सामने किसी विवाद के दो पक्ष होते हैं—पीड़ित और आरोपी। दोनों पक्षों को संतुष्ट करना कठिन होता है। इसके विपरीत, समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने से ऐसी कई स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल जाती है, जिनका समाधान कम प्रयास में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि मोहल्लों में खुले में नशा करना, अवैध शराब की गतिविधियां, महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थान, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा अथवा किसी स्थान पर लगातार होने वाली दुर्घटनाएं जैसी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी शिकायत प्रायः थाने या पुलिस कार्यालय तक नहीं पहुंचती। समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहभागिता से पुलिस को इन समस्याओं की जमीनी जानकारी मिलती है और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    संजय कुमार ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग में पुलिस, नागरिक, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संगठन तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर कार्य करते हैं। इससे जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने, आपसी गलतफहमियां दूर करने और पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।

    उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, कम्युनिटी सेफ्टी वॉलंटियर्स, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों एवं लगभग 93 गैर-शासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।

    उन्होंने कहा कि न्याय की सुलभता केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध की संभावना कम करने तथा पीड़ित एवं जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है।

    डॉ कपूर ने POCSO Act एवं किशोर न्याय व्यवस्था में सपोर्ट पर्सन, चाइल्ड केयर संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिक समाज की सहभागिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए महिलाओं एवं अन्य वंचित वर्गों के लिए सहयोग तंत्र मजबूत करने तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के उन्मूलन के साथ प्रभावित बालिकाओं के लिए संरक्षण एवं वैकल्पिक सहयोग व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

    डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि हाल ही में संचालित “सेफ क्लिक” एवं “नशे से दूरी है जरूरी” अभियानों में ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, गैर-शासकीय संगठनों तथा पुलिस के विभिन्न प्रभागों ने सक्रिय सहभागिता की। इन अभियानों के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को अपराध एवं नशे से जुड़े दुष्प्रभावों के प्रति सजग करने में सामुदायिक सहभागिता की प्रभावी भूमिका सामने आई। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से न केवल लोगों में कानून एवं सुरक्षा संबंधी जागरूकता बढ़ती है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पुलिस एवं अन्य सहायता एजेंसियों से मदद लेने की प्रवृत्ति भी मजबूत होती है।

    राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव ने न्याय तक पहुंच को प्रत्येक नागरिक का अधिकार बताते हुए कानूनी सहायता को सरल, सुलभ और जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस एवं विधिक सेवा संस्थाओं के बीच समन्वय को पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    कानूनविद् श्रीमती रचना त्यागी ने कानून की जानकारी और अधिकारों के प्रति जागरूकता को न्याय सुलभता की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि कानून तभी प्रभावी बनता है जब नागरिक अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी उपायों से परिचित हों। उन्होंने जनजागरूकता और कानूनी साक्षरता के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया।

    मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस, महिला आयोग, सामाजिक संस्थाओं एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय को आवश्यक बताते हुए कहा कि पीड़ित महिला को केवल शिकायत दर्ज कराने तक नहीं, बल्कि पूरी न्याय प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन मिलना चाहिए।

    प्रो. सारिका सिन्हा, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय एवं सामुदायिक दृष्टिकोण से नागरिक समाज की भूमिका पर विचार रखते हुए पुलिसिंग में समुदाय आधारित दृष्टिकोण, संवाद एवं साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

    UNFPA एवं अन्य विशेषज्ञों द्वारा भी युवाओं, महिलाओं, बच्चों एवं संवेदनशील समुदायों के साथ संवाद, जागरूकता तथा संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के सुझाव दिए गए।

    महिला एवं बाल सुरक्षा में NGOs की भूमिका

    सम्मेलन के प्रथम पैनल में ‘सामुदायिक सुरक्षा एवं न्याय क्षेत्र में गैर-शासकीय संस्थाओं की सहभागिता एवं चुनौतियां—महिला एवं बाल सुरक्षा के विशेष संदर्भ में’ चर्चा की गई। इस सत्र की चेयर कानूनविद् श्रीमती कल्पना यादव रहीं तथा मॉडरेटर कोडी इंस्टीट्यूट की प्रो. सारिका सिन्हा रहीं।

    पैनल में उमनि शिकायत, पुलिस मुख्यालय श्रीमती किरणलता केरकेट्टा, सचिव, मध्यप्रदेश महिला आयोग सुरेश तोमर, संयुक्त संचालक, NHM डॉ. अर्चना मिश्रा, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, UNICEF एस.आर. लोलीचेन तथा निबसिड बचपन संस्‍था श्रीमती दीप्ति दीवान ने भाग लिया।

    चर्चा में विशेष रूप से यह विचार सामने आया कि महिला एवं बाल अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं हो सकती। पीड़ितों को कानूनी सहायता, मनो-सामाजिक सहयोग, पुनर्वास, परिवार एवं समुदाय का सहयोग तथा समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने में NGOs और सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    पैनल में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे संगठनों के अनुभवों को पुलिस एवं न्याय व्यवस्था के साथ जोड़ा जाए तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में रेफरल सिस्टम, सूचना साझा करने, पीड़ित सहायता और पुनर्वास के लिए बेहतर समन्वय तंत्र विकसित किया जाए।

    मल्टी एजेंसी मॉडल से न्याय की राह होगी आसान

    द्वितीय पैनल में ‘न्याय सुलभता हेतु मल्टी एजेंसी कार्यप्रणाली—स्वरूप, संभावनाएं एवं जनसंवाद के विशेष संदर्भ में चर्चा की गई। इस सत्र की चेयर सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सुसुमन श्रीवास्तव रहीं तथा मॉडरेटर उप पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल राजेश सिंह चंदेल रहे।

    पैनल में NLIU भोपाल के प्रो. बीरपाल सिंह तथा स्टेट हेड, UNFPA दीपेश गुप्ता सहित आमंत्रित सामाजिक कार्य संस्थाओं, जिला नोडल अधिकारियों एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों ने सहभागिता की।

    इस सत्र में पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण, अभियोजन, प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा नागरिक समाज के बीच मल्टी एजेंसी कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने पर चर्चा की गई।

    सत्र में जनसंवाद को न्याय सुलभता का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए पुलिस और नागरिक समाज के बीच नियमित संवाद, जागरूकता कार्यक्रम तथा स्थानीय स्तर पर सहायता तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

    सामुदायिक सहभागिता से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था

    सम्मेलन में इस बात पर विशेष रूप से चर्चा की गई कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में नागरिकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी के बिना सुरक्षा, न्याय एवं कल्याण से जुड़े उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना कठिन है। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, मानवाधिकारों का संरक्षण, कानून के प्रति जागरूकता तथा अपराध पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए पुलिस एवं सरकारी संस्थाओं का समुदाय के साथ निरंतर संवाद आवश्यक है।

    चर्चा में यह भी सामने आया कि समाज के अलग-अलग वर्गों की सामाजिक एवं व्यक्तिगत परिस्थितियां न्याय तक उनकी पहुंच को प्रभावित करती हैं। ऐसे में नागरिक समाज, NGOs, सामुदायिक समूह और सामाजिक कार्यकर्ता पुलिस एवं न्याय व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। सम्मेलन में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले संगठनों को अपने अनुभव, उपलब्धियों, चुनौतियों एवं सुझाव साझा करने का अवसर दिया गया।

    खुली परिचर्चा में सामने आए जमीनी अनुभव और सुझाव

    सम्मेलन में स्टेकहोल्डर्स के लिए ओपन डिस्कशन का भी आयोजन किया गया। इसमें NGOs, पुलिस अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विधिक सेवाओं से जुड़े प्रतिनिधियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधान साझा किए।

    चर्चा में विशेष रूप से अपराध पीड़ितों को त्वरित एवं समुचित सहायता, महिला एवं बाल सुरक्षा, कानूनी सहायता तक आसान पहुंच, NGOs और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, सामाजिक संस्थाओं की विशेषज्ञता का उपयोग, पीड़ितों के पुनर्वास एवं संरक्षण, जनसंवाद एवं जागरूकता, मल्टी एजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम तथा पुलिस सेवाओं को अधिक संवेदनशील एवं जवाबदेह बनाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

    सम्मेलन से तैयार होगा साझा एक्शन प्लान

    सम्मेलन के विभिन्न सत्रों एवं ओपन डिस्कशन से प्राप्त सुझावों के आधार पर पुलिस, नागरिक समाज, विधिक सेवा संस्थाओं तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच सहयोग की संभावनाओं का नीति विश्लेषण किया जाएगा।

    प्राप्त अनुशंसाओं को एक साझा एक्शन प्लान के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ‘पुलिस, न्यायिक/विधिक संस्थाएं, प्रशासन, सामाजिक संगठन, समुदाय’ के बीच समन्वय को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    इसका अंतिम लक्ष्य अपराध पीड़ितों को बेहतर सहायता, नागरिकों को न्याय तक आसान पहुंच, महिला एवं बाल सुरक्षा को मजबूत करना तथा पुलिस और समुदाय के बीच विश्वास एवं सहभागिता को और सुदृढ़ करना है।

    संबल : संवाद से सहयोग और सहयोग से सुरक्षित समाज की ओर

    ‘संबल’ पहल के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस का प्रयास है कि सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था को केवल संस्थागत प्रक्रिया न मानकर समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर आधारित व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाए।

    यह सम्मेलन इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस और नागरिक समाज के बीच संवाद को सहयोग में तथा सहयोग को प्रभावी कार्रवाई और बेहतर न्याय परिणामों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

     

  • उपभोक्ता संघ के माध्यम से मिलेगा ग्लूटेन फ्री गेहूं बीज : मंत्री  सारंग

    उपभोक्ता संघ के माध्यम से मिलेगा ग्लूटेन फ्री गेहूं बीज : मंत्री सारंग

    भोपाल 

    सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ता संघ के माध्यम से ग्लूटेन फ्री गेहूं बीज उपलब्ध कराया जाए। मंत्री  सारंग मंगलवार को मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित के संचालक मंडल की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में बीज संघ मुख्यालय के कार्यालय के लिए अन्यत्र स्थान पर भवन लेने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि 6 माह के अंदर बीज संघ का नया ऑफिस हो, इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए।

    मंत्री  सारंग ने संघ की वित्तीय गतिविधियों के आकलन के लिए आउटसोर्स से चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवाएं लेने को भी कहा। उन्होंने संघ के बायलॉज को समिति बनाकर रिव्यू करने के निर्देश दिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि बीज संघ बिजनेस मॉड्यूल पर काम करें। बीज संघ व्यावसायिक सोच के साथ आगे बढ़े, इसके लिए आकर्षित करने वाला प्लान तैयार करें। उन्होंने संघ की गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से भी एक्टिविटी करने के लिए एजेंसी हायर करने के निर्देश दिए।

    बैठक मे प्रबंध संचालक  एम.के. दीक्षित द्वारा बिन्दुवार विषयों को प्रस्तुत किया गया। बैठक के दौरान हाइब्रिड मक्का एवं उद्यानिकी (सब्जी) बीज तथा ग्लूटेन फ्री गेहूं के बीज उत्पादन, विपणन एवं निजी क्षेत्र की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कीमत पर उपलब्ध कराने के संबंध में संचालक मण्डल को अवगत कराया गया। संचालक मण्डल द्वारा उक्त कार्य की सराहना करते हुए और अधिक हाईब्रिड फसलों के उत्पादन कार्यक्रम लेने, ग्लूटेन फ्री गेहूं एवं सब्जी बीज के विक्रय के लिये उपभोक्ता सहकारी संघ एवं अन्य संस्थानों से एमओयू निष्पादित करने का निर्णय लिया गया। बैठक के दौरान मंत्री  सारंग द्वारा बीज संघ के नवीन क्षेत्रों में व्यवसाय विकसित करने के लिए निर्देशित किया गया।

    बीज संघ के व्यवसाय विविधीकरण के लिए व्यवसाय विशेषज्ञ एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों को शामिल करते हुए संघ की उपविधियों में वांछित संशोधन का सुझाव प्रस्तुत करने बाबत कमेटी गठित करने के निर्देश दिये गये, जिससे प्रदेश के कृषकों को प्रमाणित, हाइब्रिड एवं उघानिकी की फसलों के लिये सभी प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा सके। संचालक मंडल की बैठक में आगामी आमसभा मे प्रस्तुत किये जाने वाले विषयों का अनुमोदन किया गया। बैठक के दौरान बीज संघ में कार्यरत कर्मचारियों के हित मे भी विभिन्न निर्णय लिये गये।

     

  • आईईएस विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ छात्र-संवाद कार्यक्रम ‘आरोहण – स्व से राष्ट्र की ओर’

    आईईएस विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ छात्र-संवाद कार्यक्रम ‘आरोहण – स्व से राष्ट्र की ओर’

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि हमें स्वतंत्रता बड़े संघर्ष, त्याग और बलिदानों के बाद प्राप्त हुई है। इसकी अक्षुण्णता बनाए रखने और राष्ट्र की प्रगति को निरंतर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी पर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए भारतीय दृष्टि से आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। वर्ष 2047 के संकल्पित विकसित भारत के निर्माण में हम सभी को मिलकर अपना योगदान देना है। इसके लिए युवाओं का अपनी जिज्ञासाओं का समाधान करना और ज्ञान के प्रति निरंतर जिज्ञासु बने रहना आवश्यक है। हमारे पूर्वजों के ज्ञान और अनुभव के आधार पर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है। स्व का जागरण ही राष्ट्र जागरण का प्रथम सोपान है।

    मंत्री  परमार ने यह विचार मंगलवार को भोपाल स्थित आईईएस विश्वविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, आईईएस विश्वविद्यालय एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छात्र-संवाद कार्यक्रम ‘आरोहण-स्व से राष्ट्र की ओर’ में व्यक्त किए। कार्यक्रम में परम पूज्य आचार्य  मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ।

    मंत्री  परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल ज्ञान अर्जित करने की परम्परा नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र निर्माण और उसके ज्ञान, सामर्थ्य एवं ऊर्जा को राष्ट्रहित से जोड़ने की जीवनदृष्टि है। युवा शक्ति के विचार, ऊर्जा और संकल्प को राष्ट्र निर्माण की दिशा देना ही विकसित भारत के संकल्प की सशक्त आधारशिला है।

    विद्यार्थियों ने रखीं जिज्ञासाएं, आचार्य  एवं मंत्री  परमार ने दिए उत्तर

    कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से आए विद्यार्थियों ने शिक्षा, भारतीय ज्ञान परम्परा, राष्ट्र निर्माण, युवा दायित्व, व्यक्तित्व विकास सहित विविध विषयों से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं एवं प्रश्न रखे। परम पूज्य आचार्य  मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज एवं मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का आत्मीयता के साथ समाधान करते हुए उनके जिज्ञासाओं के उत्तर दिए। संवाद के दौरान विद्यार्थियों को अपने प्रश्नों पर चिंतन करने, भारतीय दृष्टि से विषयों को समझने तथा अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने की प्रेरणा मिली।

    ‘स्व’ के जागरण से ही राष्ट्र निर्माण की यात्रा

    परम पूज्य आचार्य  मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज ने व्यक्ति निर्माण की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब ‘स्व’ स्वस्थ और सशक्त होगा, तभी राष्ट्र निर्माण की यात्रा भी सुदृढ़ होगी। उन्होंने भारतीय गुरुकुल परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कालखंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल विषयों का ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थी को जीवन के प्रश्नों का समाधान स्वयं खोजने योग्य बनाना था। दीक्षांत के पश्चात विद्यार्थी अपने प्रश्नों का स्वयं समाधान खोजते हुए अपने जीवन की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते थे और यहीं से उनकी ‘स्व से राष्ट्र की ओर’ यात्रा प्रारंभ होती थी। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मचिंतन, चरित्र निर्माण, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने का आह्वान किया। उनके प्रेरणादायी संवाद ने विद्यार्थियों को अपने सामर्थ्य को पहचानकर उसे समाज एवं राष्ट्र के हित में लगाने की नई दृष्टि प्रदान की।

    कार्यक्रम में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, मध्यप्रदेश प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. रविंद्र कान्हेरे, महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल, हरियाणा के पूर्व कुलपति डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेम सिंह डेहरिया, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु  विजय मनोहर तिवारी, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के संचालक डॉ. मुकेश मिश्रा, न्यास के प्रांत संयोजक डॉ. भरत व्यास, सह-संयोजक डॉ. अभय गुप्ता, भोपाल संभाग संयोजक  अनीत राय एवं आईईएस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति  बादाम सिंह यादव सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण एवं विभिन्न संस्थानों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

     

  • शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय विदिशा में टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई के सहयोग से स्थापित कैंसर डे-केयर कीमोथेरेपी यूनिट का शुभारंभ

    शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय विदिशा में टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई के सहयोग से स्थापित कैंसर डे-केयर कीमोथेरेपी यूनिट का शुभारंभ

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में कैंसर उपचार की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ किया जा रहा है। लक्ष्य केवल कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कैंसर की पहचान से लेकर सटीक जांच, स्टेजिंग, विशेषज्ञ परामर्श, सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी तक समन्वित उपचार व्यवस्था विकसित करना है।विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई के सहयोग से स्थापित कैंसर डे-केयर कीमोथेरेपी यूनिट का केंद्रीय किसान कल्याण एवं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान एवं केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूनिट का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। यूनिट शुरू होने से विदिशा सहित आसपास के जिलों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी की सुविधा मिल सकेगी।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि विदिशा के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आज महत्वपूर्ण दिन है। डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर की शुरुआत से मरीजों और उनके परिवारों को बार-बार बड़े शहरों की यात्रा, उपचार पर होने वाले अतिरिक्त खर्च और मानसिक परेशानी से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार में समय पर जांच और प्रारंभिक अवस्था में उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि जून माह में आयोजित कैंसर स्क्रीनिंग अभियान में लगभग 3 हजार लोगों की स्क्रीनिंग एवं जांच की गई। इनमें करीब 600 मरीजों में कैंसर की पहचान हुई, जबकि लगभग 250 संभावित कैंसर मरीज चिन्हित किए गए। आगे के उपचार के लिए भोपाल के कैंसर अस्पतालों तथा टाटा मेमोरियल सेंटर की मुंबई स्थित इकाई ऐक्ट्रेक के सहयोग से आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। इसी दौरान विदिशा में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया गया।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान के सतत संपर्क से आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था, स्टाफ का समुचित वितरण तथा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई। सेंटर के संचालन के लिए मेडिसिन विभाग के दो चिकित्सकों और सात नर्सिंग अधिकारियों को ऐक्ट्रेक, मुंबई में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के स्टाफ को एम्स भोपाल में भी प्रशिक्षण दिलाया गया है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों की कीमोथेरेपी किसी ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा निर्धारित की गई है, उन्हें निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार विदिशा मेडिकल कॉलेज में उपचार दिया जा सकेगा। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में कैंसर विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण एम्स भोपाल और ऐक्ट्रेक के विशेषज्ञों के समन्वय से तैयार उपचार प्रोटोकॉल के अनुसार सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के पुराने पांच शासकीय मेडिकल कॉलेजों में उन्नत लीनियर एक्सीलरेटर मशीनों के माध्यम से आधुनिक रेडिएशन थेरेपी और ब्रेकीथेरेपी की सुविधाएं शीघ्र प्रारंभ की जा रही हैं। कैंसर की सटीक जांच और स्टेजिंग के लिए पेट स्कैन की सुविधा भी जल्द शुरू होगी। इससे कैंसर मरीजों को उपचार की विभिन्न सुविधाओं के लिए अलग-अलग शहरों पर निर्भरता कम होगी।

    उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना संभव हुआ है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता, नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और नशे से दूरी भी आवश्यक है।

    स्थानीय स्तर पर कैंसर मरीजों को मिलेगी उपचार की सुविधा – केंद्रीय मंत्री  चौहान

    केंद्रीय किसान कल्याण एवं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विदिशा में शुरू किया गया कैंसर डे-केयर सेंटर कैंसर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से अब मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कैंसर गंभीर बीमारी है, इसलिए उपचार के साथ समय पर जांच और जागरूकता भी आवश्यक है। विदिशा में कैंसर उपचार की सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से विकसित की जा रही हैं। इससे पहले आयोजित कैंसर जांच शिविर में लगभग 3 हजार लोगों की जांच की गई थी। अब विदिशा में कैंसर अस्पताल स्थापित करने की दिशा में भी तैयारियां की जा रही हैं। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने लोगों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।

    कैंसर उपचार को नई दिशा देगा डे-केयर सेंटर – केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सिंह

    केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि टाटा समूह द्वारा कैंसर के क्षेत्र में किए जा रहे शोध और प्रयास आने वाले समय में भारत सहित पूरी दुनिया के लिए उपयोगी साबित होंगे। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि भारत में होने वाला शोध पूरी मानवता के कल्याण के लिए उपयोगी हो। डॉ. सिंह ने बताया कि टाटा समूह द्वारा पिछले 11 वर्षों में 11 अस्पताल स्थापित किए गए हैं तथा 300 से अधिक ग्रिड स्थापित किए गए हैं, ताकि कैंसर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। विदिशा में डे-केयर सेंटर की शुरुआत इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सेंटर के संचालन के लिए दो डॉक्टरों और सात नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनीष निगम ने कीमोथेरेपी डे-केयर सेंटर की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सेंटर में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कीमोथेरेपी उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के आनंद विभाग के मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  लखन पटेल, कुरवाई विधायक  हरिसिंह सप्रे, बासौदा विधायक  हरिसिंह रघुवंशी, सांची विधायक  प्रभुराम चौधरी, बुधनी विधायक  रमाकांत भार्गव, विदिशा विधायक  मुकेश टंडन सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, चिकित्सा विशेषज्ञ एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • मध्यप्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश और तकनीकी साझेदारी पर हुई विस्तृत चर्चा

    मध्यप्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश और तकनीकी साझेदारी पर हुई विस्तृत चर्चा

    भोपाल 

    एआईएम कांग्रेस-2026

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिष्ठित 'एआईएम कांग्रेस-2026' के तीसरे दिन 8 सितंबर को शारजाह स्थित बी-आह (Bee’aH) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बी-आह फैसेलिटी के ग्रुप सीईओ एवं वाइस-चेयरमैन  खालिद अल हुरैमल के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट सिटी विकास, सर्कुलर इकोनॉमी और अत्याधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों को मध्यप्रदेश में लागू करने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सभी प्रकार के इंडस्ट्रियल वेस्ट, सीवेज वेस्ट, वेस्ट रिप्रोसेसिंग और इनर्ट मटेरियल के डिस्पोजल संबंधी ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि यहां विश्व की सर्वाधिक उन्नत तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश की संभावनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान बी-आह ग्रुप को मध्यप्रदेश के नगर निगमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट तथा वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीईईएएच की डिजिटल, एआई-सक्षम और सर्कुलर इकोनॉमी क्षमताएं मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी विजन और क्लीन एनर्जी मिशन के बिल्कुल अनुकूल हैं। राज्य में ईवी-आधारित फ्लीट और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार में यह साझेदारी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

    इंदौर के स्वच्छता मॉडल के साथ वैश्विक तालमेल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि इंदौर ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बायो-सीएनजी के क्षेत्र में देश और दुनिया के समक्ष एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने बी आह को इंदौर के स्थापित मॉडल के साथ जुड़कर नए आधुनिक समाधानों पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया, जिससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ जीरो-वेस्ट लैंडफिल के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

    जीआईएस-2027 के लिए दिया आमंत्रण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बी आह के ग्रुप के सीईओ  खालिद अल हुरैमल को अगले साल भोपाल में आयोजित होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि बी आह ग्रुप अपनी आगामी वैश्विक विस्तार योजनाओं में मध्यप्रदेश को एक प्रमुख और प्राथमिकता वाले गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में शामिल करे।

    अत्याधुनिक मुख्यालय का किया अवलोकन

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ज़ाहा हदीद द्वारा डिज़ाईन किए गए बी-आह के प्रतिष्ठित एआई-सक्षम व नेट-ज़ीरो-रेडी मुख्यालय तथा उनकी विभिन्न उन्नत सुविधाओं की सराहना की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित बी आह आज 46 राष्ट्रीयताओं के 13 हजार से अधिक कर्मचारियों और यूएई, सऊदी अरब व मिस्र में विस्तृत परिचालनों के साथ पर्यावरण, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी का अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय समूह बन चुका है। शारजाह में 90 प्रतिशत से अधिक लैंडफिल-डायवर्जन दर और कमर्शियल स्केल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के संचालन में समूह ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।

    एडवांस्ड सस्टेनेबल और एआई-सक्षम है बी आह फैसिलिटी का मुख्यालय

    बी आह सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन और एआई का वैश्विक मॉडल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में मुख्यालय वाला बी-आह (BEEAH) वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित यह संस्था एक वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से विकसित होकर आज एनवायरमेंटल सर्विसेज, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सस्टेनेबल रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

    बी-आह की पहचान एडवांस्ड वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी सॉल्युशन्स के लिए है। उच्च वेस्ट-डायवर्जन दर के साथ संस्था शारजाह के महत्वाकांक्षी सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसका उद्देश्य कचरे को केवल निपटान की वस्तु न मानकर उसे संसाधन में बदलते हुए एक ऐसे मॉडल को विकसित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे।

    बीईईएच का प्रतिष्ठित मुख्यालय इस सोच का जीवंत उदाहरण है। प्रसिद्ध वास्तुकार ज़ाहा हदीद द्वारा डिजाइन किया गया यह भवन दुनिया की अत्याधुनिक सस्टेनेबल और एआई-सक्षम इमारतों में शामिल है। भवन की डिजाइन, तकनीक और ऊर्जा दक्षता इसे भविष्य के स्मार्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरों के लिए एक प्रभावी मॉडल बनाती है।

    रणनीतिक साझेदारियों और नवाचार आधारित परियोजनाओं के माध्यम से बी-आह स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरों के विकास को नई दिशा दे रहा है। पर्यावरणीय उत्कृष्टता, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में इसके प्रयासों ने शारजाह को क्षेत्रीय स्तर पर ग्रीन इनोवेशन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री यात्री सुगम परिवहन सेवा योजना पर केंद्रित दो दिवसीय समिट का करेंगे शुभारंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री यात्री सुगम परिवहन सेवा योजना पर केंद्रित दो दिवसीय समिट का करेंगे शुभारंभ

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में यात्री सुविधाओं को स्मार्ट, सुगम और सुरक्षित बेहतर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा एक बड़ी पहल की जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार और उद्योग जगत को एक साझा मंच पर लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में यात्री परिवहन विज़न समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा यह समिट 11 व 12 सितंबर 2026 को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में आयोजित की जाएगी, जो मुख्य रूप से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना पर केंद्रित होगी। इस समिट में निजी बस ऑपरेटर, नीति निर्माता, विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे और प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मंथन करेंगे। समिट में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  राव उदय प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

    समिट का आयोजन मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा ईलेट्स टेक्नोमीडिया के सहयोग से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश में अधिक कनेक्टेड, वित्तीय रूप से साध्य, डिजिटल रूप से सक्षम और नागरिक-केंद्रित यात्री परिवहन इकोसिस्टम के निर्माण पर चर्चा और साझेदारी को बढ़ावा देना है।

    मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विज़न और राष्ट्रीय पहल (जैसे पीएम ई-बस सेवा) के अनुरूप सतत और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन मॉडल को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो यात्री परिवहन को राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण घटक के रूप में मजबूत करने की प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मंच राज्य के मोबिलिटी एजेंडे को केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित न रखते हुए, सरकारी निर्णयकर्ताओं और कार्यान्वयन में सहयोग करने वाली संस्थाओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद और साझेदारी को बढ़ावा देगा।

    मध्यप्रदेश की यात्री परिवहन परिकल्पना रहेगी चर्चा के केंद्र में

    मध्यप्रदेश की यात्री परिवहन परिकल्पना और भविष्य की मोबिलिटी व्यवस्था यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेगी। समिट में प्रदेश में यात्री परिवहन को आधुनिक, सुलभ और व्यापक बनाने के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यह यात्री परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाली मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख पहल है।

    समिट में प्रदेश में आधुनिक और भविष्य-केंद्रित मोबिलिटी व्यवस्था को गति देने वाले सात प्रमुख परिणामों की प्राप्ति की दिशा में काम करना सुनिश्चित किया जाएगा। इनमें मोबिलिटी विज़न 2030 रोडमैप, परिवहन क्षेत्र में पीपीपी को गति देना, डिजिटल-फर्स्ट मोबिलिटी फ्रेमवर्क, स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा, पायलट एवं निवेश अवसर और सरकार-उद्योग सहयोग को मजबूत करना शामिल है।

    रोजगार के अवसरों पर होगी चर्चा

    यात्री परिवहन समिट में यात्री परिवहन क्षेत्र में होने वाले नवाचार और निवेश से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावनाओं पर भी सार्थक चर्चा होगी। सार्वजनिक परिवहन को अधिक सक्षम बनाने के साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे।

    8 सत्रों में यात्री परिवहन के भविष्य पर होगा मंथन

    परिवहन समिट में 8 सत्र होंगे। इन सत्रों के माध्यम से यात्री परिवहन को सुगम, सुरक्षित, स्मार्ट और प्रदूषणमुक्त बनाने, एमपी मोबिलिटी विजन-2030 के तहत PPP मॉडल से निवेश, रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने, वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बस संचालन, यात्री सुरक्षा, ग्रीन मोबिलिटी, स्वच्छ ईंधन, एकीकृत टिकटिंग, स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली विषयों पर चर्चा होगी।

    समग्र और आधुनिक मोबिलिटी इकोसिस्टम विकसित करना उद्देश्य

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का उद्देश्य प्रदेश में एक समग्र और आधुनिक मोबिलिटी इकोसिस्टम विकसित करना है। इसके अंतर्गत बस निर्माण, इलेक्ट्रिक एवं हाइड्रोजन मोबिलिटी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई एवं एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस और परिवहन वित्त जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं विकसित होंगी। इस समिट के माध्यम से प्रदेश में यात्री परिवहन के भविष्य की दिशा तय करने के साथ निवेश, नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    देश के प्रमुख संस्थान समिट में होंगे शामिल

    समिट में ईकेए मोबिलिटी, टाटा मोटर्स, ग्रीनसेल मोबिलिटी, वोल्वो-आयशर प्राइवेट लिमिटेड, स्विच मोबिलिटी (हिंदुजा ग्रुप), एयरो ईगल ऑटोमोबाइल, यश टेक्नोलॉजीज, रैपिडो, चलो मोबिलिटी, एमनेक्स इन्फोटेक्नोलॉजीज, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, थिंक गैस जैसी प्रमुख कंपनियां सहभागिता करेंगी। इसके अलावा विभिन्न शिक्षण संस्थानों, थिंक टैंक एवं कंसल्टेंसी एजेंसियों के परिवहन विशेषज्ञ भी समिट में अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। इनमें BITS पिलानी, CEPT अहमदाबाद, WII इंडिया, ICCT, KPMG और DIMTS प्रमुख हैं।

     

  • सतर्कता, साहस और संवेदनशीलता की मिसाल बनी महिला पुलिसकर्मी

    सतर्कता, साहस और संवेदनशीलता की मिसाल बनी महिला पुलिसकर्मी

    भोपाल 

    देशभक्ति–जनसेवाके संकल्प के साथ मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी ड्यूटी के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आमजन की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इसी का प्रेरणादायी उदाहरण DCP ज़ोन-2 कार्यालय में पदस्थ महिला पुलिसकर्मीआरक्षक सुश्री निकिता जोशीने प्रस्तुत किया, जिनकी सजगता और साहस से एक 6 वर्षीय मासूम बालक की जान बच सकी।

    घटना उस समय की है जब निकिता जोशी ड्यूटी समाप्त कर शाम को अपने घर पहुंची थीं। इसी दौरान घर के सामने स्थित मंदिर परिसर से बच्चों के घबराए हुए चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए वे तत्काल मंदिर परिसर की ओर दौड़ीं।

    मंदिर के पीछे झाड़ियों में उन्होंने 6 वर्षीय बालक को अचेत अवस्था में पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर बालक के हाथ में बिजली का तार दिखाई दिया। बिना समय गंवाए निकिता जोशी ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए बालक का हाथ बिजली के तार से अलग किया।

    तार हटते ही बालक ने आंखें खोलीं। बालक की स्थिति को देखते हुए निकिता जोशी ने उसे तत्काल अपनी गोद में उठाया और परिजनों की सहायता से बिना विलंब अस्पताल पहुंचाया। समय पर उपचार मिलने से बालक की जान बच गई।

    बालक के परिजनों ने महिला पुलिसकर्मी कीतत्परता, साहस और मानवीय संवेदनशीलताके लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

     

  • प्रदेश में 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों के आधार हुए अपडेट

    प्रदेश में 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों के आधार हुए अपडेट

    भोपाल

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों का आधार अपडेट करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में विद्यार्थियों के आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) कराने के अभियान के अंतर्गत इस वर्ष अब तक 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों का बायोमेट्रिक अपडेट किया जा चुका है। जुलाई और अगस्त माह में चले इस अभियान को अब 1 सितंबर से मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है।

    संचालक राज्य शिक्षा केंद्र श्री हरजिंदर सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों को स्कूल में दाखिले, प्रवेश परीक्षाओं, छात्रवृत्ति तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सहित विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए विभाग द्वारा आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) कराया जा रहा है। प्रदेश में पिछले दो माह में 31 अगस्त 2026 तक 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने अपने आधार में बायोमेट्रिक अपडेट कराया है।

    5 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए ‍नि:शुल्क है एमबीयू प्रक्रिया

    बच्चों के आधार में बायोमेट्रिक अपडेट के दौरान फोटो, फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन अपडेट किए जाते हैं। पहला अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट 5 वर्ष की आयु पूरी होने पर एवं दूसरा 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर कराया जाना आवश्यक है। 5 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए एमबीयू प्रक्रिया निःशुल्क है।

    विद्यार्थियों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सहयोग से नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों के आधार में लंबित बायोमेट्रिक अपडेट पूरा कराने के लिए विशेष पहल शुरू की गई है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को एमबीयू की आवश्यकता के संबंध में जागरूक किया जा रहा है।

    शासकीय विद्यालयों में नियमित रूप से लक्षित आधार नामांकन एवं अपडेट शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यालयों के प्राचार्यों को UDISE+ पोर्टल से उन विद्यार्थियों की सूची प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनका आधार बायोमेट्रिक अपडेट लंबित है। संबंधित विद्यार्थियों को पहले से सूचित कर निकटतम आधार सेवा केंद्र पर जाकर लंबित एमबीयू पूरा कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    प्रदेश में 1 सितंबर से मिशन मोड में चलाया जा रहा अभियान

    प्रदेश में आधार कार्य की प्रगति एवं सुचारू संचालन के संबंध में अब 1 सितंबर 2026 से इस कार्य को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है। इस संबंध में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों एवं संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अभियान के दौरान ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले अधिक से अधिक विद्यार्थियों का लंबित बायोमेट्रिक अपडेट पूरा हो सके और उन्हें आधार से जुड़ी विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो