Category: मध्य प्रदेश

  • न्याय तक पहुंच होगी आसान, ‘संबल’ के जरिए सामुदायिक सहभागिता को मिलेगा नया विस्तार

    न्याय तक पहुंच होगी आसान, ‘संबल’ के जरिए सामुदायिक सहभागिता को मिलेगा नया विस्तार

    ‘संबल’ से न्याय तक पहुंच और सामुदायिक सहभागिता को मिलेगा नया आयाम

    पुलिस, सिविल सोसायटी एवं एनजीओ के समन्वय से न्याय सुलभता और जनसुरक्षा को और प्रभावी बनाने पर मंथन

    मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘न्याय सुलभता, समाज कार्य और सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित

    भोपाल
    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आज 08 सितंबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में ‘संबल—न्याय सुलभता, समाज कार्य एवं सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव रहे। विशिष्ट अतिथियों में कमिश्नर उच्च शिक्षा विभाग प्रबल शिपहा, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव, कानूनविद् एवं विशेष वक्ता श्रीमती रचना त्यागी, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा की प्रो. सारिका सिन्हा, मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर,  पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार तथा उप पुलिस महानिरीक्षक, सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर उपस्थित रहे।

    उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘संबल’ नाम से सामुदायिक सुरक्षा पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें आपराधिक न्याय क्षेत्र में कार्यरत समुदाय-आधारित गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के कार्यों व अनुभवों को साझा किया गया था। इस पहल में सामाजिक कार्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी जोड़ा गया, ताकि पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के बीच स्थायी समन्वय एवं सहयोग का मॉडल विकसित किया जा सके। UNFPA के सहयोग से आयोजित वर्तमान सम्मेलन उसी दिशा में एक अगला कदम है, जिसका उद्देश्य पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था, विधिक सेवाओं, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय विकसित कर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं अपराध के पीड़ितों तक न्याय और सहायता की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाना है।
        सम्मेलन में मध्यप्रदेश के 75 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों, बाल संरक्षण से जुड़े पुलिस अधिकारियों, जिला पुलिस प्रमुखों, सामुदायिक पुलिसिंग अधिकारियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, अभियोजन अधिकारियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्य एवं विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

    सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव ने सामुदायिक पुलिसिंग को पुलिसिंग का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा पुलिस एवं गैर-शासकीय संगठनों के बीच स्थायी एवं संस्थागत समन्वय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। 

     उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के कार्यक्रम के बाद प्रदेश में सक्रिय गैर-शासकीय संगठनों की जानकारी संकलित कर पुलिस अधिकारियों एवं इकाइयों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिला, बच्चे, बुजुर्ग, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर तथा अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को पुलिस कार्रवाई के साथ आश्रय, उपचार, पुनर्वास एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।     

          उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कमजोर एवं वंचित वर्गों की सुरक्षा, सामाजिक सहयोग और विश्वास निर्माण से भी जुड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास, महिला-बाल सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनजीओ पुलिस के प्रभावी सहयोगी बन सकते हैं। 

    उन्होंने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए एनजीओ के प्रयासों को आंतरिक सुरक्षा एवं विश्वास निर्माण का उदाहरण बताया तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित व्यक्तियों के संरक्षण-पुनर्वास और घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को सहायता में पुलिस-एनजीओ समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। महिला सशक्तिकरण योजनाओं के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कर घरेलू हिंसा एवं महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में कमी का आकलन करने की आवश्यकता भी बताई।

    उन्होंने ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों तथा प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बड़े धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं जनसुरक्षा में उनकी सहभागिता को आवश्यक बताया। वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ के लिए अभी से प्रशिक्षण, योजना एवं समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

    पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार ने कहा कि पुलिस जब थाने या कार्यालय में होती है, तो सामान्यतः उसके सामने किसी विवाद के दो पक्ष होते हैं—पीड़ित और आरोपी। दोनों पक्षों को संतुष्ट करना कठिन होता है। इसके विपरीत, समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने से ऐसी कई स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल जाती है, जिनका समाधान कम प्रयास में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि मोहल्लों में खुले में नशा करना, अवैध शराब की गतिविधियां, महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थान, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा अथवा किसी स्थान पर लगातार होने वाली दुर्घटनाएं जैसी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी शिकायत प्रायः थाने या पुलिस कार्यालय तक नहीं पहुंचती। समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहभागिता से पुलिस को इन समस्याओं की जमीनी जानकारी मिलती है और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    संजय कुमार ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग में पुलिस, नागरिक, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संगठन तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर कार्य करते हैं। इससे जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने, आपसी गलतफहमियां दूर करने और पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।

    उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, कम्युनिटी सेफ्टी वॉलंटियर्स, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों एवं लगभग 93 गैर-शासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। 
    उन्होंने कहा कि न्याय की सुलभता केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध की संभावना कम करने तथा पीड़ित एवं जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है।

    डॉ कपूर ने POCSO Act एवं किशोर न्याय व्यवस्था में सपोर्ट पर्सन, चाइल्ड केयर संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिक समाज की सहभागिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए महिलाओं एवं अन्य वंचित वर्गों के लिए सहयोग तंत्र मजबूत करने तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के उन्मूलन के साथ प्रभावित बालिकाओं के लिए संरक्षण एवं वैकल्पिक सहयोग व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। 

    डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि हाल ही में संचालित “सेफ क्लिक” एवं “नशे से दूरी है जरूरी” अभियानों में ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, गैर-शासकीय संगठनों तथा पुलिस के विभिन्न प्रभागों ने सक्रिय सहभागिता की। इन अभियानों के माध्यम से समाज में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को अपराध एवं नशे से जुड़े दुष्प्रभावों के प्रति सजग करने में सामुदायिक सहभागिता की प्रभावी भूमिका सामने आई। 

    उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से न केवल लोगों में कानून एवं सुरक्षा संबंधी जागरूकता बढ़ती है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पुलिस एवं अन्य सहायता एजेंसियों से मदद लेने की प्रवृत्ति भी मजबूत होती है।

    राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव ने न्याय तक पहुंच को प्रत्येक नागरिक का अधिकार बताते हुए कानूनी सहायता को सरल, सुलभ और जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस एवं विधिक सेवा संस्थाओं के बीच समन्वय को पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    कानूनविद् श्रीमती रचना त्यागी ने कानून की जानकारी और अधिकारों के प्रति जागरूकता को न्याय सुलभता की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि कानून तभी प्रभावी बनता है जब नागरिक अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी उपायों से परिचित हों। उन्होंने जनजागरूकता और कानूनी साक्षरता के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया।

    मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस, महिला आयोग, सामाजिक संस्थाओं एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय को आवश्यक बताते हुए कहा कि पीड़ित महिला को केवल शिकायत दर्ज कराने तक नहीं, बल्कि पूरी न्याय प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन मिलना चाहिए।

    प्रो. सारिका सिन्हा, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय एवं सामुदायिक दृष्टिकोण से नागरिक समाज की भूमिका पर विचार रखते हुए पुलिसिंग में समुदाय आधारित दृष्टिकोण, संवाद एवं साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

    UNFPA एवं अन्य विशेषज्ञों द्वारा भी युवाओं, महिलाओं, बच्चों एवं संवेदनशील समुदायों के साथ संवाद, जागरूकता तथा संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के सुझाव दिए गए।

    महिला एवं बाल सुरक्षा में NGOs की भूमिका
    सम्मेलन के प्रथम पैनल में ‘सामुदायिक सुरक्षा एवं न्याय क्षेत्र में गैर-शासकीय संस्थाओं की सहभागिता एवं चुनौतियां—महिला एवं बाल सुरक्षा के विशेष संदर्भ में’ चर्चा की गई। इस सत्र की चेयर कानूनविद् श्रीमती कल्पना यादव रहीं तथा मॉडरेटर कोडी इंस्टीट्यूट की प्रो. सारिका सिन्हा रहीं।
        पैनल में उमनि शिकायत, पुलिस मुख्यालय श्रीमती किरणलता केरकेट्टा,  सचिव, मध्यप्रदेश महिला आयोग सुरेश तोमर,  संयुक्त संचालक, NHM डॉ. अर्चना मिश्रा, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, UNICEF एस.आर. लोलीचेन तथा निबसिड बचपन संस्‍था श्रीमती दीप्ति दीवान ने भाग लिया।
    चर्चा में विशेष रूप से यह विचार सामने आया कि महिला एवं बाल अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं हो सकती। पीड़ितों को कानूनी सहायता, मनो-सामाजिक सहयोग, पुनर्वास, परिवार एवं समुदाय का सहयोग तथा समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने में NGOs और सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
    पैनल में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे संगठनों के अनुभवों को पुलिस एवं न्याय व्यवस्था के साथ जोड़ा जाए तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में रेफरल सिस्टम, सूचना साझा करने, पीड़ित सहायता और पुनर्वास के लिए बेहतर समन्वय तंत्र विकसित किया जाए।

    मल्टी एजेंसी मॉडल से न्याय की राह होगी आसान
    द्वितीय पैनल में ‘न्याय सुलभता हेतु मल्टी एजेंसी कार्यप्रणाली
    —स्वरूप, संभावनाएं एवं जनसंवाद के विशेष संदर्भ में चर्चा की गई। इस सत्र की चेयर सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सुसुमन श्रीवास्तव रहीं तथा मॉडरेटर उप पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल राजेश सिंह चंदेल रहे।
        पैनल में NLIU भोपाल के प्रो. बीरपाल सिंह तथा स्टेट हेड, UNFPA दीपेश गुप्ता  सहित आमंत्रित सामाजिक कार्य संस्थाओं, जिला नोडल अधिकारियों एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों ने सहभागिता की।
        इस सत्र में पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण, अभियोजन, प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा नागरिक समाज के बीच मल्टी एजेंसी कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने पर चर्चा की गई।
        सत्र में जनसंवाद को न्याय सुलभता का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए पुलिस और नागरिक समाज के बीच नियमित संवाद, जागरूकता कार्यक्रम तथा स्थानीय स्तर पर सहायता तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

    सामुदायिक सहभागिता से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था
    सम्मेलन में इस बात पर विशेष रूप से चर्चा की गई कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में नागरिकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी के बिना सुरक्षा, न्याय एवं कल्याण से जुड़े उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना कठिन है। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, मानवाधिकारों का संरक्षण, कानून के प्रति जागरूकता तथा अपराध पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए पुलिस एवं सरकारी संस्थाओं का समुदाय के साथ निरंतर संवाद आवश्यक है।
    चर्चा में यह भी सामने आया कि समाज के अलग-अलग वर्गों की सामाजिक एवं व्यक्तिगत परिस्थितियां न्याय तक उनकी पहुंच को प्रभावित करती हैं। ऐसे में नागरिक समाज, NGOs, सामुदायिक समूह और सामाजिक कार्यकर्ता पुलिस एवं न्याय व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। सम्मेलन में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले संगठनों को अपने अनुभव, उपलब्धियों, चुनौतियों एवं सुझाव साझा करने का अवसर दिया गया।

    खुली परिचर्चा में सामने आए जमीनी अनुभव और सुझाव
    सम्मेलन में स्टेकहोल्डर्स के लिए ओपन डिस्कशन का भी आयोजन किया गया। इसमें NGOs, पुलिस अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विधिक सेवाओं से जुड़े प्रतिनिधियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधान साझा किए।
        चर्चा में विशेष रूप से अपराध पीड़ितों को त्वरित एवं समुचित सहायता, महिला एवं बाल सुरक्षा, कानूनी सहायता तक आसान पहुंच, NGOs और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, सामाजिक संस्थाओं की विशेषज्ञता का उपयोग, पीड़ितों के पुनर्वास एवं संरक्षण, जनसंवाद एवं जागरूकता, मल्टी एजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम तथा पुलिस सेवाओं को अधिक संवेदनशील एवं जवाबदेह बनाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

    सम्मेलन से तैयार होगा साझा एक्शन प्लान
    सम्मेलन के विभिन्न सत्रों एवं ओपन डिस्कशन से प्राप्त सुझावों के आधार पर पुलिस, नागरिक समाज, विधिक सेवा संस्थाओं तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच सहयोग की संभावनाओं का नीति विश्लेषण किया जाएगा। प्राप्त अनुशंसाओं को एक साझा एक्शन प्लान के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ‘पुलिस, न्यायिक/विधिक संस्थाएं, प्रशासन, सामाजिक संगठन, समुदाय’ के बीच समन्वय को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
        इसका अंतिम लक्ष्य अपराध पीड़ितों को बेहतर सहायता, नागरिकों को न्याय तक आसान पहुंच, महिला एवं बाल सुरक्षा को मजबूत करना तथा पुलिस और समुदाय के बीच विश्वास एवं सहभागिता को और सुदृढ़ करना है।

    संबल : संवाद से सहयोग और सहयोग से सुरक्षित समाज की ओर
    ‘संबल’ पहल के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस का प्रयास है कि सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था को केवल संस्थागत प्रक्रिया न मानकर समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर आधारित व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाए।
    यह सम्मेलन इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस और नागरिक समाज के बीच संवाद को सहयोग में तथा सहयोग को प्रभावी कार्रवाई और बेहतर न्याय परिणामों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
     

  • मध्यप्रदेश की निवेश नीति का डंका, MPIDC को मिला एशिया की सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी का सम्मान

    मध्यप्रदेश की निवेश नीति का डंका, MPIDC को मिला एशिया की सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी का सम्मान

    दुबई में तीसरे दिन 53 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त

    एमपीआईडीसी को एशिया की सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी का ‘Winner Asia’ सम्मान

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई दौरे के तीसरे दिन निवेश प्रोत्साहन, औद्योगिक साझेदारी, शहरी विकास, हरित ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सतत विकास से जुड़े अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया। दिनभर आयोजित गतिविधियों में निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें, शारजाह चैंबर के साथ संवाद, बीईईएएच की अत्याधुनिक सुविधाओं का अवलोकन, एमार समूह की प्रमुख हस्तियों के साथ बैठक, मीडिया संवाद तथा "इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश: इंटरैक्टिव सेशन" प्रमुख रहे।

    एआईएम कांग्रेस : 2026 में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम को एआईएम इन्वेस्टमेंट अवॉर्ड्स 2026 में विनर एशिया के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार निवेश संवर्धन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन, नवाचार और सतत विकास में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है। यह सम्मान यूएई के विदेश व्यापार मंत्री एवं एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयौदी ने प्रदान किया।

    निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तीसरे दिन पूर्वान्ह सत्र में विभिन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स एवं उद्योग समूहों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को क्षेत्रवार प्रस्तुत करना तथा निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाना था। बैठकों में राणा होल्डिंग्स, जेम्स एजुकेशन, क्रेसेंट ग्रुप, प्योर हेल्थ, शराफ ग्रुप, चोइथराम्स, डीपी वर्ल्ड, ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन, वेस्ट ज़ोन, केजीके ग्रुप, विस्टास मीडिया कैपिटल, वीएफएस ग्लोबल तथा एनआईडीआई सर्विसेज/एससीएनईएलएलएलएलसी-एफजेड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    वन-टू-वन बैठकों से प्राप्त हुए 53 हज़ार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. दर्शन सिंह राणा के साथ विस्तृत चर्चा में मध्यप्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, डेटा सेंटर, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, ई-मोबिलिटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। कंपनी ने राज्य में 2,000 मेगावॉट सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो, 200 मेगावॉट ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र, 50 मेगावॉट क्षमता के एआई एवं कंप्यूट डेटा सेंटर (जिसे 200 मेगावॉट तक विस्तारित किया जा सकेगा), 30,000 एमटीपीए क्षमता के क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी एवं रीसाइक्लिंग कॉम्प्लेक्स तथा एकीकृत स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने में रुचि प्रदर्शित की। इन प्रस्तावित परियोजनाओं में लगभग 35,200 करोड़ रुपये (4 बिलियन अमेरिकी डॉलर)के निवेश की संभावना है। इससे मध्यप्रदेश में ऊर्जा संक्रमण, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में वृहद स्तर परिवर्तन आयेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एनआईडीआई सर्विसेज डीएमसीसी/एससीएनईएलएलके इन्वेस्टर्स के साथ औद्योगिक स्तर के एआई कंप्यूट कैंपस एवं सॉवरेन एआई फैक्ट्री परियोजना पर चर्चा की। कंपनी ने 50 मेगावॉट क्षमता वाले एआई फैक्ट्री प्रोजेक्ट में लगभग 1.5 से 2 बिलियन डॉलर निवेश संबंधी (लगभग 18 हज़ार करोड़)  कॉन्सेप्ट प्रस्तुत किया, जिसे भविष्य में 100 मेगावॉट से अधिक तक विस्तारित किया जा सकता है। वन-टू-वन चर्चा में जेम्स एजुकेशन के चेयरमैन सनी वर्की के साथ अंतर्राष्ट्रीय मानकों अनुसार के-12 स्कूल, शिक्षक प्रशिक्षण, एडटेक और भविष्य उन्मुख शिक्षा परिसरों की स्थापना पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम बद्र जाफर, विशेष दूत, यूएई तथा क्रेसेंट ग्रुप की लीडरशिप के साथ नवकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्टार्टअप निवेश, सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालिक निवेश साझेदारी पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने प्योर हेल्थ के प्रतिनिधियों के साथ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल, डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन, मेडिकल एवं नर्सिंग शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शराफ ग्रुप के साथ मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, कोल्ड-चेन, सप्लाई चेन नेटवर्क, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने चोइथराम्स के साथ खाद्य प्रसंस्करण, रिटेल, कृषि उत्पादों की खरीद, वितरण नेटवर्क और कोल्ड-चेन अवसंरचना के विस्तार पर बातचीत की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डीपी वर्ल्ड के सीईओ रिज़वान सूमार के साथ पवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कॉम्पोजिट हब, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स, निर्यात संवर्धन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से मध्यप्रदेश को जोड़ने के लिये विस्तार से चर्चा की। उन्होंने ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ अवसंरचना, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और हरित विकास परियोजनाओं में दीर्घकालिक निवेश तथा इक्विटी भागीदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वेस्ट ज़ोन के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट निवेश तथा मध्यप्रदेश उत्पादों की यूएई बाजार में मार्केटिंग और सेलिंग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने मध्यप्रदेश में केजीके ग्रुप के साथ डायमंड प्रोसेसिंग, जेम्स एवं ज्वेलरी विनिर्माण, डिजाइन, स्किल डेवलपमेंट और निर्यात आधारित इकाइयों की स्थापना पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विस्टास मीडिया कैपिटल के साथ फिल्म, एवीजीसी, एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग एवं डिजिटल कंटेंट उत्पादन हब स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया। वीएफएस ग्लोबल के साथ भोपाल और इंदौर में वीजा सेवा विस्तार, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी कौशल विकास कार्यक्रमों पर चर्चा हुई।

    शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ हुई बैठक

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह में चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन हिज हाईनेस अब्दुल्ला सुल्तान अल ओवैस के साथ मीटिंग की। दोनों प्रतिनिधि मंडलों में मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, एसएमई सहयोग, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन एवं नवकरणीय ऊर्जा सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह के इन्वेस्टर्स को मध्यप्रदेश में निवेश के लिये आमंत्रित करते हुए जीआईएस-2027 में भागीदारी का आमंत्रण दिया। बैठक के बाद चैंबर एवं आईबीपीसी प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल चर्चा भी हुई।

    बीईईएएच सस्टेनेबिलिटी एवं इनोवेशन फेसिलिटिज का भ्रमण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शारजाह स्थित बीईईएएच के मुख्यालय एवं उसकी विश्वस्तरीय सस्टेनेबिलिटी सुविधाओं का अवलोकन किया। समूह के सीईओ एवं वाइस चेयरमैन खालिद अलहुरैमल के साथ हुई बैठक में वेस्ट-टू-एनर्जी, इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सर्कुलर इकोनॉमी, स्मार्ट सिटी, हरित ऊर्जा तथा इंदौर मॉडल आधारित सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समूह को मध्यप्रदेश में शहरी स्वच्छता एवं ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं में भागीदारी तथा जीआईएस-2027 में शामिल होने का निमंत्रण दिया

    एमार समूह की लीडरशिप के साथ बैठक एवं डाउनटाउन दुबई का अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमार प्रॉपर्टीज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक हिज हाईनेस मोहम्मद अलाब्बार से भेंट की। बैठक में इंदौर की एमार कॉन्टिनेंटल सिटी परियोजना का उल्लेख करते हुए मध्यप्रदेश में एमार के योगदान की सराहना की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमार को इंदौर-पीथमपुर-उज्जैन डेवलपमेंट कॉरिडोर सहित राज्य में एकीकृत मिश्रित उपयोग शहरी परियोजनाओं, टाउनशिप, हॉस्पिटैलिटी तथा विश्वस्तरीय शहरी विकास परियोजनाओं में निवेश के लिये आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमार ग्रुप के संस्थापक एवं एमडी को जीआईएस-2027 में विशिष्ट अतिथि के रूप में भागीदारी के लिये आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डाउनटाउन दुबई, बुर्ज खलीफा, दुबई मॉल तथा आसपास के एकीकृत शहरी विकास मॉडल का भी अवलोकन किया और माडर्न टाइन प्लानिंग एवं डेस्टिनेशन डेवलपमेंट के कांसेप्ट की जानकारी ली।

    मीडिया संवाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ताज दुबई में आयोजित मीडिया संवाद में दुबई दौरे की उपलब्धियों, यूएई निवेशकों की सकारात्मक रुचि तथा मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश सुगमता, औद्योगिक अवसंरचना, भूमि उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स और नीति समर्थन निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।

    "इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश" इंटरैक्टिव सेशन

    दुबई में हुए “इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश : इंटरैक्टिव सेशन” में यूएई के उद्योगपति, निवेशक, व्यापारिक संगठन, आईबीपीसी, सीआईआई यूएई तथा प्रवासी भारतीय उद्यमियों ने सहभागिता की। अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं पर प्रेजेंटेशन दिया। सेशन को विशिष्ट अतिथि के रूप में हिज एक्सीलेंसी बद्र जाफर ने भी संबोधित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संबोधन के प्रमुख बिंदु

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस प्रकार दुबईवासियों ने अपने परिश्रम से वैश्विक उपलब्धियों में बदला है, उसी प्रकार मध्यप्रदेश भी संभावनाओं को अवसरों और उपलब्धियाँ हासिल की हैं, उसी प्रकार मध्यप्रदेश भी संभावनाओं को अवसरों और उपलब्धियों में बदलने के लिए तैयार है। उन्होंने निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश आज 11 प्रतिशत से अधिक आर्थिक विकास दर के साथ भारत के प्रमुख विकास इंजनों में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य को 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतर चुके हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, हरित ऊर्जा, आईटी, एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा पर्यटन क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में उपलब्ध पर्याप्त लैंड बैंक, मजबूत सड़क एवं रेल नेटवर्क, 8 एक्टिव हवाई अड्डों, निवेश-अनुकूल नीतियों तथा सिंगल विंडो प्रणाली की जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी निवेशकों को जनवरी 2027 में भोपाल में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2027) में भाग लेने का औपचारिक निमंत्रण दिया और कहा कि “मध्यप्रदेश भारत का हृदय है और निवेशकों का स्वागत हृदय से करेगा।”

     

  • पोषण और आंगनवाड़ी सेवाओं पर रहेगा फोकस, 9 सितंबर से शुरू होगा राष्ट्रीय पोषण माह; मंत्री भूरिया करेंगी उद्घाटन

    पोषण और आंगनवाड़ी सेवाओं पर रहेगा फोकस, 9 सितंबर से शुरू होगा राष्ट्रीय पोषण माह; मंत्री भूरिया करेंगी उद्घाटन

    हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक होगा राष्ट्रीय पोषण माह

    महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को इंदौर में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का करेंगी शुभारंभ
    पोषण मेले, रेसिपी प्रदर्शनी से लेकर बच्चों की शारीरिक माप और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के शत-प्रतिशत लाभ तक चलेंगे विशेष अभियान

    भोपाल 

    प्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर किया जाएगा। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया बुधवार को 9वें राज्य स्तरीय पोषण माह का इंदौर से शुभारंभ करेंगी। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को इंदौर में एक माह तक चलने वाले इस अभियान में स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों, पर्याप्त प्रोटीन, आहार विविधता, बच्चों के पोषण एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने पर विशेष जोर रहेगा। जिला, परियोजना, सेक्टर और आंगनवाड़ी स्तर पर गतिविधियों का आयोजन कर अधिक से अधिक समुदाय को इससे जोड़ा जाएगा।

    पोषण मेले में दिखेगी स्थानीय खाद्य विविधता

    पोषण माह के दौरान पंचायत भवनों, स्कूलों और सामुदायिक भवनों में पोषण मेले एवं रेसिपी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इनमें टेक होम राशन (THR), गर्म पका भोजन (HCM), क्षेत्रीय पौष्टिक व्यंजन, स्थानीय दालें, चना, मूंगफली, सोया, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मिलेट्स और मौसमी सब्जियों से तैयार व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा। ‘Know Your Protein—अपने प्रोटीन को पहचानें’ अभियान के माध्यम से परिवारों को प्रोटीन के विभिन्न स्थानीय स्रोतों और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

    आंगनवाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्थानीय एवं विविधतापूर्ण ताजा नाश्ता और गर्म पका भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता की निगरानी में मातृ सहयोगिनी समितियों, पंचायतों और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों पर साप्ताहिक मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे और समुदाय को उपलब्ध भोजन एवं निर्धारित मेन्यू की जानकारी दी जाएगी।

    11 सितंबर से बच्चों की शारीरिक माप, कुपोषित बच्चों की पहचान

    पोषण माह के दौरान 11 सितंबर से शारीरिक माप दिवसों का आयोजन कर जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन, लंबाई/ऊंचाई सहित आवश्यक शारीरिक माप लेकर पोषण ट्रैकर में प्रविष्टि की जाएगी। गंभीर तीव्र कुपोषण, मध्यम तीव्र कुपोषण और गंभीर रूप से कम वजन वाले श्रेणी के बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा। नवीन चिन्हित बच्चों का c-MAM प्रोटोकॉल में पंजीयन कर साप्ताहिक फॉलोअप किया जाएगा। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दौरान कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य जांच तथा आवश्यकता वाले बच्चों का समय पर रेफरल सुनिश्चित किया जाएगा।

    पोषण पुनर्वास केन्द्र से उपचार के बाद लौटे बच्चों का भी नियमित फॉलोअप किया जाएगा। 6 से 60 माह के गंभीर तीव्र कुपोषण बच्चों की भूख की जांच कर आवश्यकता अनुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाएगा।

    पहले 1000 दिनों और बाल विकास पर विशेष फोकस

    अभियान में गर्भावस्था से बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों तक पर्याप्त पोषण, स्तनपान, शिशु देखभाल और संवेदनशील पालन पोषण पर विशेष परामर्श दिया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा संशोधित गृह भेंट मॉड्यूल के अनुसार 0 से 3 वर्ष के बच्चों वाले परिवारों से संपर्क कर बच्चों के वृद्धि-विकास, प्रारंभिक उद्दीपन और खेल आधारित गतिविधियों के संबंध में अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा।

    बाल चौपाल, कहानी, गीत, चित्रकला, रोल-प्ले, पपेट शो, कविता और खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के संज्ञानात्मक, भाषा, मोटर तथा सामाजिक-भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। अभिभावकों को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट बच्चों के साथ बात करने, खेलने, कहानी सुनाने और गाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    PMMVY के शत-प्रतिशत लाभ के लिए चलेगा विशेष अभियान

    राष्ट्रीय पोषण माह में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के शत-प्रतिशत हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए विशेष नामांकन एवं संतृप्ति अभियान चलाया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की पहचान कर उनका पोर्टल पर समय सीमा में पंजीयन सुनिश्चित करेंगे। लंबित नेशनल पेमेंटस कॉपरेशन ऑफ इंडिया, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम, सत्यापन, स्वीकृति और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर से संबंधित प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता से किया जाएगा।

    पहले बच्चे की द्वितीय किश्त के लिए समय पर टीकाकरण की पोर्टल पर प्रविष्टि कराने तथा दूसरे प्रसव में बालिका जन्म होने पर पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन हेतु प्रेरित किया जाएगा। पीएमएमवीवीई की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, किश्त एवं आवेदन प्रक्रिया की जानकारी गांव-गांव और आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी। योजना से लाभान्वित महिलाओं की सफलता की कहानियों के माध्यम से भी जन-जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

     ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ बनेगा जनभागीदारी का अभियान

    पोषण माह को केवल विभागीय गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, मातृ सहयोगिनी समितियों, आशा कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्थानीय रसोइयों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाएगा। समुदाय को आंगनवाड़ी केंद्रों की स्वच्छता, रखरखाव, कूड़ेदान एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में श्रमदान और सहयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    आंगनवाड़ी केंद्रों के बाहर बच्चों की ऊंचाई के अनुरूप दर्पण लगाने जैसे छोटे-छोटे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। ‘खेलो, सीखो और बढ़ो’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक विकास में परिवार और समुदाय की भूमिका मजबूत की जाएगी। किशोरी बालिकाओं के लिए किशोरावस्था में पोषण की आवश्यकता पर विशेष परामर्श सत्र भी आयोजित होंगे।

    विभागों के समन्वय से होगा व्यापक आयोजन

    राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियां महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, कृषि, आयुष, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण, पर्यावरण एवं वन, उद्यानिकी, नगरीय आजीविका मिशन, जनसंपर्क तथा जनजातीय कार्य विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के समन्वय से आयोजित की जाएंगी।

    अभियान की गतिविधियों की जन आंदोलन डैशबोर्ड पर समयबद्ध प्रविष्टि की जाएगी। प्रत्येक गतिविधि की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भी अपलोड की जाएंगी, जिससे अभियान की गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग और मूल्यांकन किया जा सके।

     

  • ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और बाजार का व्यंग्य

    ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और बाजार का व्यंग्य

    ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ में दिखा प्रेम, महत्वाकांक्षा और बाजार का व्यंग्य

    टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन ‘संभव’ आर्ट ग्रुप, दिल्ली ने किया संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों का मंचन

    भोपाल
     टैगोर नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को रवीन्द्र भवन में कथाकार संतोष चौबे की दो चर्चित कहानियों ‘उनके हिस्से का प्रेम’ और ‘लेखक बनाने वाले’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रख्यात रंग निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में हुई इन प्रस्तुतियों को दिल्ली के ‘संभव’ आर्ट ग्रुप ने मंच पर साकार किया। इसके अलावा कार्यक्रम में रंगसंवाद पत्रिका का विमोचन भी किया गया। वहीं मंच का संचालन अविजित सोलंकी ने किया। आयोजन टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, विश्वरंग फाउंडेशन और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। 
    पहली प्रस्तुति ‘उनके हिस्से का प्रेम’ में एक संस्थान के बॉस के प्रेम संबंधों को अनूठे रंगमंचीय प्रयोग के माध्यम से सामने लाया गया। कहानी में ऑफिस की मेज, कलम, शीशा, कुर्सी और डायरी जैसे निर्जीव दिखाई देने वाले उपकरण उसके प्रेम संबंधों के साक्षी और पड़ताल करने वाले पात्रों की तरह उभरते हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से बॉस के आधे-अधूरे प्रेम संबंधों की कहानी जिस तरह दर्शकों के सामने आती है, वह प्रस्तुति का विशेष आकर्षण रही।

    दूसरी प्रस्तुति ‘लेखक बनाने वाले’ में लेखकीय महत्वाकांक्षा और उसके बाजारू दोहन पर व्यंग्य किया गया। कहानी का मुख्य पात्र बैंक में नौकरी करने वाला व्यक्ति है, जो लिखता रहता है और लेखक बनने की इच्छा रखता है। अखबार में दिल्ली के एक ‘लेखक बनाओ केंद्र’ का विज्ञापन देखकर वह वहां पहुंचता है। केंद्र उससे पैसे लेकर उसकी एक सामान्य कविता को तैयार करवाने और उसकी झूठी प्रशंसा करने का प्रयास करता है। इस अनुभव से निराश और आक्रोशित होकर वह वहां से लौटता है और महसूस करता है कि लेखक बनाने के नाम पर ऐसे केंद्र लोगों की भावनाओं और लेखकीय आकांक्षा को पैसा कमाने का जरिया बना रहे हैं। कहानी इसी विडंबना और धोखे को व्यंग्यात्मक ढंग से सामने रखती है।

    दोनों प्रस्तुतियों में संतोष चौबे की कहानियों की विशिष्ट संवेदना और व्यंग्य को देवेन्द्र राज अंकुर की रंगमंचीय दृष्टि के माध्यम से प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया। वस्तुओं को कथानक का हिस्सा बनाना और सामान्य जीवन की स्थितियों के भीतर छिपे सामाजिक द्वंद्व को मंच पर उभारना इन प्रस्तुतियों की खास विशेषता रही।

    लेखक : संतोष चौबे
    कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन विरल साहित्यकारों में हैं, जो साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय रहे हैं। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—और चार उपन्यास—‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ तथा ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है तथा उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।

    निर्देशक : देवेन्द्र राज अंकुर
    दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता प्राप्त देवेन्द्र राज अंकुर देशभर की अनेक व्यावसायिक एवं शौकिया नाट्य मंडलियों के साथ निर्देशन कर चुके हैं। ‘संभव’ ग्रुप के संस्थापक सदस्य और ‘कहानी का रंगमंच’ के प्रणेता अंकुर अध्यापक, कैंप निर्देशक और नाट्य निर्देशक के रूप में देशभर की कार्यशालाओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया है और रंगमंच विषयक लेखन भी किया है। रंग आलोचना पर उनकी सात से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। टैगोर फेलोशिप प्राप्त प्रो. अंकुर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक रह चुके हैं। रंगमंच के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

    मंच पर
    अमिताभ श्रीवास्तव, अमित सक्सेना, प्रकाश झा, गौरी देवल, रचिता वर्मा एवं सहज हरजाई

    मंच परे
    संगीत संचालन: आदित्य पटेल
    प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन: राघव प्रकाश एवं राहुल चौहान
    लेखक: संतोष चौबे
    निर्देशन: देवेन्द्र राज अंकुर

  • सपोर्ट विंग्स की ‘न्यू माइंड, न्यू इंडिया’ पहल, भोपाल में 45 से अधिक बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

    सपोर्ट विंग्स की ‘न्यू माइंड, न्यू इंडिया’ पहल, भोपाल में 45 से अधिक बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

     सपोर्ट विंग्स की 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' पहल, भोपाल में 45 से अधिक बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

    भोपाल 
    युवाओं के नेतृत्व में सामाजिक बदलाव की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए सपोर्ट विंग्स ने 6 सितंबर 2026 को भोपाल के न्यू अंबेडकर नगर, कोलार रोड में 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' पहल का सफल आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता, शिक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना था।
    इस कार्यक्रम में सपोर्ट विंग्स के 15 वालंटियर्स ने 45 से अधिक बच्चों के साथ समय बिताया। बच्चों के साथ इंटरैक्टिव गतिविधियों, शैक्षिक संवाद और जागरूकता सत्रों के माध्यम से उन्हें कई महत्वपूर्ण विषयों के बारे में सरल और बाल-सुलभ तरीके से जानकारी दी गई। बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा, गुड टच और बैड टच, व्यक्तिगत सीमाओं और आत्म-जागरूकता जैसे अहम विषयों से अवगत कराया गया।
    कार्यक्रम के दौरान बच्चों में सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर भी जोर दिया गया। वालंटियर्स द्वारा बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री वितरित की गई और उनके लिए नींबू पानी, व्हाइट सॉस पास्ता, समोसे और बिस्किट सहित भोजन और जलपान की व्यवस्था भी की गई।
    खेल, बातचीत और मित्रवत संवाद के माध्यम से वालंटियर्स ने एक खुशनुमा और स्वागत भरा माहौल बनाया, जहां बच्चे खुलकर भाग ले सके, सीख सके और अपनी बात कह सके। इस पहल ने बच्चों को अधिक आत्मविश्वासी, जागरूक और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया।
    इस पहल के बारे में सपोर्ट विंग्स की डायरेक्टर राजलक्ष्मी बानिक ने कहा,
    “हर बच्चे को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां वह सीख सके, आगे बढ़ सके और आत्मविश्वास महसूस कर सके। 'न्यू माइंड, न्यू इंडिया' के माध्यम से हमारा लक्ष्य सीखने और जागरूकता को बच्चों के लिए रोचक बनाना है, साथ ही उन्हें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और आत्म-मूल्य को समझने के लिए प्रेरित करना है। हमें विश्वास है कि आज के छोटे और सकारात्मक प्रयास कल एक उज्जवल और आत्मविश्वासी भविष्य का निर्माण करेंगे।”
    यह कार्यक्रम शिक्षा, जागरूकता, देखभाल और सामुदायिक जुड़ाव को एक साथ लाने वाला एक सार्थक अनुभव रहा, जो बच्चों और वालंटियर्स दोनों के लिए यादगार बना।
    सपोर्ट विंग्स के बारे में:
    सपोर्ट विंग्स एक युवा-नेतृत्व वाला संगठन है जो भारत के 80 से अधिक शहरों में सक्रिय है। यह संगठन लीडरशिप प्रोग्राम, इंटर्नशिप, वालंटियरिंग के अवसरों और समुदाय-आधारित पहलों के माध्यम से युवाओं को सशक्त बना रहा है, ताकि वे जिम्मेदार चेंजमेकर बन सकें।

  • संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि

    संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि

    संतोष चौबे को मानद डॉक्टरेट की उपाधि

    शिक्षा, विज्ञान संचार और सामाजिक उद्यमिता में योगदान के लिए बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर को प्रदान की जाएगी मानद उपाधि

    भोपाल
     शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, साहित्य, विज्ञान संचार और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संतोष चौबे को बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा, झारखंड द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में 21 सितंबर 2026 को उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। समारोह विश्वविद्यालय के गुरुपद संभवन रामजी ऑडिटोरियम में आयोजित होगा।

    विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी ने शिक्षा, साहित्य, सामाजिक उद्यमिता, विज्ञान संचार और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में चौबे के विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए इस सम्मान के लिए उनका चयन किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह उपाधि उनके उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के प्रति सम्मान और सराहना का प्रतीक है।

    शिक्षा और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में चार दशक से अधिक का योगदान

    संतोष चौबे ने वर्ष 1985 में ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना की। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण भारत के बीच डिजिटल विभाजन को कम करना तथा शिक्षा और तकनीक की पहुंच को व्यापक बनाना था। उनके नेतृत्व में आईसेक्ट ने ग्रामीण, आदिवासी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया।
    एनआईटी, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियर चौबे ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तीकरण के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके मार्गदर्शन में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय वैशाली, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय खंडवा, एआईएसईसीटी विश्वविद्यालय हजारीबाग और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों का विकास हुआ। इन संस्थानों में शिक्षा को कौशल विकास, शोध, नवाचार, उद्यमिता और उद्योगोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।

    हिंदी में विज्ञान संचार के अग्रणी हस्ताक्षर

    संतोष चौबे की पहचान एक प्रतिष्ठित विज्ञान लेखक और विज्ञान संचारक के रूप में भी रही है। उनकी वर्ष 1986 में प्रकाशित पुस्तक ‘कंप्यूटर: एक परिचय’ ने हिंदी में तकनीकी शिक्षा और कंप्यूटर जागरूकता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने साहित्य और विज्ञान के बीच संवाद को मजबूत करते हुए कविता, कथा, उपन्यास और लोकप्रिय विज्ञान लेखन के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है।

    साहित्य की विविध विधाओं में सक्रिय

    कवि, कथाकार और उपन्यासकार संतोष चौबे हिंदी के उन साहित्यकारों में हैं, जिन्होंने साहित्य और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके छह कथा-संग्रह—‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्रां में दोपहर’, ‘नौ बिंदुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गांधी’, ‘प्रतिनिधि कहानियां’ तथा ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’—प्रकाशित एवं चर्चित हैं।
    उनके चार उपन्यास ‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ और ‘सपनों की दुनिया में ब्लेकहोल’ प्रकाशित हुए हैं। उनके कविता-संग्रहों में ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’, ‘इस अ-कवि समय में’ और ‘घर बाहर’ शामिल हैं। उनकी कहानियों का मंचन भारत भवन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली सहित विभिन्न मंचों पर हो चुका है और उनकी रचनाएं देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।
    भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। विश्वविद्यालय की मानद उपाधि के लिए तैयार प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक और वैज्ञानिक लेखन के साथ भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित

    शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक उद्यमिता और साहित्य के क्षेत्र में संतोष चौबे के योगदान को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से मान्यता मिली है। उन्हें राष्ट्रीय नवाचार पुरस्कार, श्वाब फाउंडेशन सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

  • नकल करते पकड़े गए छात्रों के मोबाइल बंद, जांच में जुटेगा DAVV; मोबाइल इन्वेस्टिगेशन कमेटी का होगा गठन

    नकल करते पकड़े गए छात्रों के मोबाइल बंद, जांच में जुटेगा DAVV; मोबाइल इन्वेस्टिगेशन कमेटी का होगा गठन

     इंदौर
     देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में नकल प्रकरणों की जांच अब नई व्यवस्था के जरिए की जाएगी। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों से जब्त किए गए मोबाइल महीनों तक बंद पड़े रहने से उनकी बैटरी डिस्चार्ज हो जाती हैं।

    ऐसे में अनुचित संसाधनों की जांच समिति के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह रहती है कि मोबाइल में यह पता नहीं चल पाता कि विद्यार्थी ने परीक्षा के दौरान कितने प्रश्नों के उत्तर फोन देखकर लिखे थे। इससे नकल प्रकरणों पर उचित निर्णय लेने में देरी होती है। अब इस समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय अलग से मोबाइल जांच समिति बनाएगा।

    कार्यपरिषद ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय में सालभर स्नातक और स्नातकोत्तर की 780 से अधिक वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाएं होती हैं। इनमें औसतन 250 से 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। कई मामलों में विद्यार्थियों के पास गाइड, पाठ्यपुस्तक या अन्य सामग्री के पन्ने मिलते हैं। इन पन्नों के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि परीक्षा में किस तरह नकल की गई। इसलिए ऐसे मामलों में निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान होता है।

    फोन में क्या देखा, कितने सवालों के जवाब मिले
    सबसे ज्यादा परेशानी मोबाइल से जुड़े मामलों में आती है। परीक्षा केंद्र से जब्त मोबाइल विश्वविद्यालय में जांच होने तक लंबे समय तक बंद रखे जाते हैं। इस दौरान बैटरी खत्म हो जाती है। मोबाइल चालू नहीं होने पर समिति यह देख नहीं पाती कि विद्यार्थी ने फोन में क्या देखा और उससे कितने सवालों के जवाब लिखे।

    कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि परीक्षा में मोबाइल लेकर आना ही नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद यदि प्रश्नपत्र हल करते समय किसी विद्यार्थी के पास मोबाइल मिलता है तो उड़नदस्ता या केंद्राध्यक्ष नकल प्रकरण बनाता है। इसी को देखते हुए नई समिति बनाई जा रही है। नई समिति का काम सिर्फ जब्त मोबाइल की तुरंत जांच कर नकल से जुड़े तथ्य जुटाना होगा। इससे प्रकरणों की जांच में तेजी आएगी।

  • इंदौर-नागपुर से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बैतूल-खंडवा फोरलेन बनेगा नई लाइफलाइन

    इंदौर-नागपुर से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बैतूल-खंडवा फोरलेन बनेगा नई लाइफलाइन

    इंदौर 

    बैतूल से खंडवा के बीच फोरलेन प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. यह प्रोजेक्ट इंदौर और नागपुर के बीच की दूरी को बेहद कम कर देगा. दोनों शहरों के बीच का सफर 6 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह परियोजना बैतूल-खंडवा-वडोदरा कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे मध्य प्रदेश की गुजरात और महाराष्ट्र से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी. इस फोरलेन के बनने से नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली, नांदेड़ जैसे शहर कनेक्ट होंगे. वहीं गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा जैसे बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. इसलिए यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के लिए अहम है, क्योंकि आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा। 

    इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में होगा
    बैतूल से खंडवा फोरलेन बनने से सबसे बड़ा फायदा इंदौर नागपुर रूट पर होगा. केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट दस्तावेज में इस कॉरिडोर को इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट, इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जोड़ने वाली कड़ी बताया गया है. इंदौर से पहले सीधे बैतूल तक का सफर होगा. इसके बाद बैतूल से नागपुर का सफर तय किय जाएगा. पहले इंदौर से नागपुर जाने में 13 से 14 घंटे का समय लगता था. क्योंकि पूरा रूट 2 लेन हाईवे था. यह नया मार्ग सीधे नेशनल NH-47, NH-753 और NH-52 जैसी बड़ी सड़कों को आपस में इंटरलिंक करदेगा. इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को इस अपग्रेडेशन से सीधी मदद मिलेगी. इस फोरलेन के बनने से पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो जाएगा. जिससे इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. इसलिए इंदौर से नागपुर और दक्षिण भारत के बीच का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा। 

    एमपी की गुजरात और महाराष्ट्र तक कनेक्टिविटी
        मध्य प्रदेश: बैतूल खंडवा फोरलेन हाईवे से इंदौर, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी जैसे शहर सीधे कनेक्ट हो जाएंगे. 
        महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों के लिए भी राह आसान हो जाएगी. 
        गुजरात: इस प्रोजेक्ट से एमपी के खंडवा का सीधा कनेक्शन अहमदाबाद, वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों से भी हो जाएगा. 

    मध्य प्रदेश के शहरों को फायदा
    यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के भीतर एक मजबूत कनेक्टिविटी जाल तैयार करेगा, क्योंकि इससे एमपी के कई बड़े शहर आपस में कनेक्ट होंगे. बैतूल, छिंदवाड़ा और नागपुर की तरफ से आने वाला ट्रैफिक खंडवा होते हुए इंदौर और भोपाल की तरफ बेहद आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सकेगा. खंडवा, खरगोन और बड़वानी: निमाड़ अंचल के ये तीनों प्रमुख जिले इस हाईवे के जरिए सीधे बैतूल और छिंदवाड़ा से कनेक्ट हो जाएंगे। 

    सिंहस्थ-2028 में भी फायदा
    बैतूल-खंडवा-जुलवानिया फोरलेन से मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ की कनेक्टिविटी भी मजबूत हो जाएगी. उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के आयोजन के हिसाब से यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा. क्योंकि उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के मंधाता में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से प्रबंधित करने में मदद करेगा. जिससे सिंहस्थ में महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ से आने वाले यात्रियों को इस फोरलेन का फायदा होगा. इसलिए यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। 

    बैतूल-खंडवा फोरलेन को केंद्र की मंजूरी 
    बैतूल से खंडवा के बीच बनने वाले इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने जून 2026 में मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के लिए 4415.60 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. जिसकी कुल दूरी 233.653 किलोमीटर होगी. फिलहाल इसे 4 लेन में विकसित किया जाएगा. जबकि भविष्य में इसे 6 लेन बनाने की योजना है. ताजा अपडेट के मुताबिक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है. जिसे मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा. जनवरी 2027 से इसका काम शुरू होने की संभावना है. खास बात यह है कि सभी ब्लैक स्पॉट्स खत्म होंगे, जिससे गाड़ियां 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी. वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2029 के अंत तक या 2030 की शुरुआत में यह हाईवे पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। 

  • MP में शिक्षा का डिजिटल विस्तार, 9 सितंबर को लॉन्च होगा ‘ई-ज्ञानसेतु’ YouTube चैनल; छात्रों को मिलेंगे ई-वीडियो

    MP में शिक्षा का डिजिटल विस्तार, 9 सितंबर को लॉन्च होगा ‘ई-ज्ञानसेतु’ YouTube चैनल; छात्रों को मिलेंगे ई-वीडियो

    ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल पर विद्यार्थियों को मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-वीडियो कंटेंट

    मंत्री परमार 9 सितंबर को करेंगे ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल का शुभारंभ
    उच्च शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में शासकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों से तैयार कराया गया है कंटेंट

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ई-वीडियो कंटेंट अब 9 सितंबर 2026 से e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध होंगे। ई- वीडियो कंटेंट के प्रकाशन का उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार द्वारा 9 सितंबर को शाम 5 बजे शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण Google Meet एवं e-GyanSetu YouTube Channel के माध्यम से होगा।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 की भावना के अनुरूप तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्री परमार के मार्गदर्शन में प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 2,305 वीडियो शूट किए जा चुके हैं, जिनमें से 954 वीडियो का एडिटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है ।

    ई-वीडियो कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स एवं डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया गया है। वीडियो की शैक्षणिक एवं विषयगत गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ये वीडियो प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं।

    वीडियो की प्रमाणिकता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार ई-कंटेंट का विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जाता है। सत्यापन के बाद ही वीडियो को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा।

    ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी तथा संस्कृत सहित क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए गए हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुँचाने में मदद मिलेगी।

    मंत्रालय में आयोजित बैठक में मंत्री परमार के समक्ष तैयार ई-कंटेंट वीडियो प्रदर्शित किए गए थे। बैठक में हुई चर्चा के दौरान मंत्री द्वारा वीडियो को शीघ्र e-GyanSetu YouTube Channel पर अपलोड एवं प्रकाशित किए जाने के निर्देश दिए गए।

    e-GyanSetu पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अध्ययन कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को विषयवस्तु को दोहराने, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझने तथा अपनी सीखने की गति के अनुसार अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी। ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।

     

  • लाखों बहनों का भाई होना मेरा सौभाग्य : मंत्री सारंग

    लाखों बहनों का भाई होना मेरा सौभाग्य : मंत्री सारंग

    भोपाल 

    भाई-बहन के अपार स्नेह और विश्वास के प्रतीक विश्व के सबसे बड़े 'नरेला रक्षाबंधन महोत्सव' का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग को इस वर्ष 1 लाख 89 हजार 159 बहनों ने रक्षासूत्र बांधकर आशीर्वाद प्रदान किया। बहनों की इस विराट सहभागिता ने पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2025 में 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने सारंग को राखी बांधी थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 1 लाख 89 हजार 159 हो गई। इस प्रकार महोत्सव ने एक बार फिर अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया। उल्लेखनीय है कि नरेला रक्षाबंधन महोत्सव पहले ही विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हो चुका है। इस वर्ष बड़ी संख्या में विभिन्न धर्मों की बहनों की सहभागिता रही। मंत्री सारंग ने बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि लाखों बहनों का भाई होना मेरा सबसे बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि बहनों का यही विश्वास और स्नेह मुझे क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करने की शक्ति और प्रेरणा देता है। आगे उन्होंने कहा कि बहनों के आशीर्वाद से हर वर्ष इस महोत्सव का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है और यह महोत्सव अब विश्वव्यापी रक्षाबंधन महोत्सव के रुप में अपनी पहचान बना चुका है।

    18 वर्षों से कायम है स्नेह और विश्वास की परंपरा

    मंत्री सारंग ने कहा कि नरेला रक्षाबंधन महोत्सव भाई-बहन के रिश्ते में निहित प्रेम, विश्वास और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। पिछले 18 वर्षों से नरेला विधानसभा के सभी 17 वार्डों सहित भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों की बहनें इस आयोजन में उत्साहपूर्वक शामिल होती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बढ़ती बहनों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन अब एक पारिवारिक परंपरा का स्वरूप ले चुका है। आगे उन्होंने कहा कि लाखों बहनें अपने ‘भैया’ विश्वास के प्रति स्नेह व्यक्त करने के लिए उत्साह के साथ पहुंचती हैं और रक्षासूत्र बांधकर अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

    विभिन्न धर्मों की बहनों ने की सहभागिता

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव-2026 में विभिन्न धर्मों की बहनों ने मंत्री सारंग को रक्षासूत्र बांधकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। मंत्री सारंग ने कहा कि विविधता में एकता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।

    बड़ी संख्या में GenZ बहनें हुई शामिल

    नरेला रक्षाबंधन महोत्सव में बड़ी संख्या में GenZ बहनों की उत्साहपूर्वक भागीदारी की। GenZ बहनों ने पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ मंत्री सारंग को राखी बांधकर आशीर्वाद दिया। महोत्सव में युवा पीढ़ी का भारतीय परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव की झलक दिखाई दी।

    लाखों बहनों का आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत

    समापन अवसर पर मंत्री विश्वास कैलाश सारंग बहनों के अपार स्नेह और आत्मीयता से भाव-विभोर नजर आए। उन्होंने कहा कि लाखों बहनों का आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि नरेला परिवार की बहनें हर वर्ष लाखों की संख्या में पहुंचकर मुझे अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करती हैं। बहनों का यही विश्वास और स्नेह मुझे नरेला क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य करने की शक्ति और प्रेरणा देता है। मंत्री सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल रक्षासूत्र बांधने का पर्व नहीं बल्कि एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी, सम्मान, सुरक्षा और विश्वास का संकल्प लेने का भी अवसर है। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव ने इसी भावना को व्यापक सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसमें जनप्रतिनिधि और जनता के बीच का रिश्ता एक आत्मीय पारिवारिक रिश्ते में बदल जाता है।

    बहनों के आशीर्वाद से टूटा पिछला रिकॉर्ड

    वर्ष 2025 में 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने सारंग को राखी बांधी थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 1 लाख 89 हजार 159 हो गई। पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए स्थापित हुआ यह नया कीर्तिमान केवल संख्या का रिकॉर्ड नहीं बल्कि बहनों के अटूट स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद का प्रमाण है। 18 वर्षों की इस स्नेहिल परंपरा ने यह संदेश दिया है कि जब रिश्तों में विश्वास और समाज में अपनत्व हो, तो कोई भी आयोजन जनआंदोलन का स्वरूप ले सकता है। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव इसी आत्मीयता, विश्वास और सामाजिक समरसता की भावना के साथ एक बार फिर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

    अंतिम दिन भी हज़ारों बहनों ने बांधे रक्षासूत्र

    महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को वार्ड क्रमांक 38 एवं 77 में आयोजित कार्यक्रमों में भी बहनों का उत्साह देखते ही बनता था। अपने ‘भैया’ विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधने के लिए बहनें बड़ी संख्या में पहुंचीं और लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। अंतिम दिन आयोजित कार्यक्रम में 28 हजार 742 बहनों ने सारंग को रक्षासूत्र बांधा। मंत्री सारंग ने भी प्रत्येक बहन से रक्षासूत्र बंधवाकर उनका आशीर्वाद लिया और सभी बहनों के प्रति आभार व्यक्त किया।