Category: मध्य प्रदेश

  • मीथेन के बढ़ते उत्सर्जन से MP पर मंडरा रहा खतरा, कई जिलों में बढ़ेगी गर्मी; जानें रिपोर्ट

    मीथेन के बढ़ते उत्सर्जन से MP पर मंडरा रहा खतरा, कई जिलों में बढ़ेगी गर्मी; जानें रिपोर्ट

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में कार्बन डाई ऑक्साइड के बाद मीथेन गैस हवा को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रही है। सैटेलाइट विश्लेषण में राज्य में चार अलग-अलग प्रदूषण क्षेत्रों की पहचान की गई है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में उद्योग परिवहन प्रमुख स्रोत हैं। सिंगरौली कोयला खनन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है।

    सागर, मुरैना, व में रीवा, खरगोन और छिंदवाड़ा सहित अन्य जिलों में पशुधन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास जलाने से ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन हो रहा है। इन प्रदूषकों के चलते 2030 के दशक तक मप्र के औसत अधिकतम तापमान में 1.8-2.0 डिग्री सेल्सिसयस और न्यूनतम तापमान में 2.0-2.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभावित है। राज्य का पूर्वी हिस्सा तेजी से गर्म हो रहा है। डिंडोरी, भिंड और सीधी जैसे जिले कम अनुकूलन क्षमता के कारण विशेष रूप से जोखिम में हैं।

    गैर कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी ऐसे
    एक बहु-क्षेत्रीय आकलन के नाम से पर्यावरण विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन केंद्र, एप्को, इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट और दी एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट- टेरी के विशेषज्ञों ने तैयार की है। प्रदूषकों की समस्याओं से निपटने के रास्ते बताए गए हैं। कहा गया है कि शॉर्ट लिव्ड क्लाइमेट पॉल्यूटेंट्स को कम करना जरूरी है। स्थानीय जरूरतों के मुताबिक प्रभावी उपाय लागू किए जाएं तो 2047 तक सामान्य स्थिति की तुलना में सल्फर डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 80%, नाइट्रोजन ऑक्साइड में 78%, नॉन मीथेन वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड में 61% ब्लैक कार्बन में 56% तक कमी लाई जा सकती है।

    यह सुझाए तात्कालिक रास्ते
    रिपोर्ट में नॉन सीओटू प्रदूषकों को कम करने रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ाने, बिजली क्षेत्र में गैस के इस्तेमाल, इंडस्ट्री में साफ़ ईंधन और ट्रांसपोर्ट में ईवी अपनाने, पुरानी गाड़ियां हटाने का सुझाव है। प्राकृतिक तरीके से धान की खेती में मीथेन उत्सर्जन 65% तक कम हो सकता है। चारे के सही प्रबंधन से पशुपालन से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में 10-15% की कमी तेजी से और कम लागत में हो सकती है। कम्युनिटी-लेवल पर बायोगैस, एंटरिक फर्मेंटेशन रोकने वाले उपाय, कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन को पकड़ने, जलाने जैसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने से ये तीनों सेक्टर 2030 के बाद उत्सर्जन में और ज़्यादा और लंबे समय तक कमी लाने में अहम साबित होंगे।

    भविष्य के लिए बताई यह योजना
    -अलग-अलग सेक्टर की एसएलसीपी रणनीतियों को राज्य के जलवायु लक्ष्यों के साथ जोड़ने के लिए सेक्टर और विभागों के बीच तालमेल के सिस्टम को मजबूत करना चाहिए।

    -खनन, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक रोडमैप बनाया जाए, जिसमें उत्सर्जन कम करने के लिए समय-सीमा वाले लक्ष्य तय हों।

    -पशुपालन, खेती और कोयला खनन जैसे सेक्टर्स में खास तौर पर उत्सर्जन कम करने की रणनीतियां लागू करना चाहिए। ये राज्य में गैर सीओटू उत्सर्जन के ऐसे स्रोत हैं, जिनमें सुधार की सबसे ज्यादा गुंजाइश है, लेकिन जिन पर अब तक कम ध्यान दिया गया है।

    -ग्रीन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए राष्ट्रीय मिशनों और केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए और कम-कार्बन वाले इंफास्ट्रक्चर के लिए क्लाइमेट फाइनेंस और सीएसआर फंड जुटाना चाहिए।

    -नियम लागू करने और हालात के हिसाब से प्रबंधन के लिए मज़बूत मॉनिटरिंग और मूल्यांकन सिस्टम बनाना जरूरी है, जिसमें रियल-टाइम उत्सर्जन ट्रैकिंग और रिमोट सेंसिंग शामिल हो।

  • विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएं: मंत्री  परमार

    विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएं: मंत्री परमार

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को मंत्रालय में ई-ज्ञानसेतु यूट्यूब चैनल पर ई-कंटेंट वीडियो के अपलोड एवं प्रकाशन कार्य का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों की गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणिक एवं सत्यापित डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी।

    इस अवसर पर मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदेश को देश में अग्रणी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं। ई-ज्ञानसेतु गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी सुविधा के अनुसार विश्वसनीय अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है।

    मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आधुनिक तकनीक के साथ विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषा और संस्कृति से जोड़ना भी आवश्यक है। इसी दृष्टि से ई-कंटेंट में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विषयों को स्थान दिया जा रहा है। संस्कृत एवं मराठी सहित आंचलिक एवं क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कंटेंट तैयार किया जाना विद्यार्थियों के लिए अध्ययन को अधिक सहज और प्रभावी बनाएगा।

    मंत्री  परमार ने कहा कि “हमारा प्रयास है कि मध्यप्रदेश का विद्यार्थी आधुनिक ज्ञान और तकनीक से जुड़े, साथ ही अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जुड़ा रहे।” उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को आंचलिक एवं क्षेत्रीय भाषाओं में अधिकाधिक गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करने के निर्देश दिए।

    डिजिटल शिक्षा से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ

    अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि डिजिटल माध्यम शिक्षा की पहुंच को व्यापक बनाने का प्रभावी साधन है। e-GyanSetu के माध्यम से विद्यार्थी कहीं भी, कभी भी और अपनी सुविधा एवं अपनी गति के अनुसार पाठ्यक्रम से संबंधित अध्ययन सामग्री देख सकेंगे। विशेष रूप से दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल उपयोगी होगी।

     राजन ने कहा कि डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य केवल सामग्री को ऑनलाइन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणिक सामग्री पहुंचाना है, इसलिए ई-कंटेंट की गुणवत्ता एवं प्रामाणिकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने डिजिटल स्टूडियो का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करने और सत्यापन प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए।

    आयुक्त उच्च शिक्षा ने ई-ज्ञानसेतु की अवधारणा पर विस्तृत प्रकाश डाला और कार्यक्रम का संचालन प्रो. स्नेहा खरे ने किया। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की वर्चुअल सहभागिता रही।

    10 डिजिटल स्टूडियो में तैयार हो रहे वीडियो व्याख्यान

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में 10 डिजिटल स्टूडियो स्थापित किए गए हैं। इनमें शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अतिथि विद्वान एवं जनभागीदारी शिक्षक विषय विशेषज्ञ के रूप में वीडियो व्याख्यान तैयार कर रहे हैं। अब तक 2 हजार से अधिक वीडियो रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। वीडियो की विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं तथ्यात्मक शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए विषय विशेषज्ञों से गठित वैलिडेशन बोर्ड द्वारा इनका परीक्षण किया जा रहा है। सत्यापन के उपरांत वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध कराया जाएगा।

    ई-कंटेंट कला, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, गृह विज्ञान, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के लिए तैयार किया जा रहा है। विद्यार्थियों को अवधारणाएं सरलता से समझाने के लिए आवश्यकतानुसार ग्राफिक्स एवं डिजिटल विजुअल्स का भी उपयोग किया जा रहा है।

     

  • पोषण मेले से लेकर बच्चों की शारीरिक माप और मातृ वंदना योजना के लाभ तक विशेष अभियान

    पोषण मेले से लेकर बच्चों की शारीरिक माप और मातृ वंदना योजना के लाभ तक विशेष अभियान

    भोपाल

    प्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का बुधवार को इंदौर से राज्य स्तरीय शुभारंभ हुआ। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम के साथ 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण एवं स्वास्थ्य को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि स्वस्थ बच्चे ही प्रदेश और देश के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप पोषण को केवल सरकारी कार्यक्रम न बनाकर समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की जरूरत है।

    मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को अभिभावकों, सरपंचों, पार्षदों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों तथा सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से जोड़ा जाए। समाज की सक्रिय भागीदारी से आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से स्थानीय जरूरतों के अनुसार नए प्रयोग करने तथा सफल नवाचारों को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करने का भी आह्वान किया, जिससे दूसरे केंद्र भी उनसे प्रेरणा ले सकें।उन्होंने कहा कि पोषण माह के दौरान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा दिया जाएगा। गर्भवती और धात्री माताओं को पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और बच्चों की देखभाल के प्रति जागरूक करने के साथ कुपोषण की रोकथाम पर विशेष ध्यान रहेगा। मंत्री ने बताया कि विभाग ने आंगनवाड़ी भवनों की उपलब्धता बढ़ाने, मिनी आंगनवाड़ियों को मुख्य आंगनवाड़ी में उन्नयन करने और कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के प्रयास किए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

    चार संस्थाओं के साथ एमओयू

    पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए चार संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन भी किए गए। अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन , एम्स , आईपीई ग्लोबल और नई दिशा फाउंडेशन के साथ हुए एमओयू के माध्यम से बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों की भागीदारी से पोषण एवं बाल विकास के अभियान को नई ताकत मिलेगी।

    राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार ने कहा कि ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश के साथ बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पोषण को केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि भोजन की गुणवत्ता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों पर भी बराबर ध्यान जरूरी है। उन्होंने पोषण ट्रैकर, वन स्टॉप सेंटर और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और सांसद श्री शंकर लालवानी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    स्थानीय अनाज और पारंपरिक व्यंजनों पर जोर

    पोषण माह के शुभारंभ पर लता मंगेशकर सभागृह परिसर में पोषण मेला और रेसिपी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। यहां टेक होम राशन (THR), गर्म पका भोजन (HCM), स्थानीय दालों, चना, मूंगफली, सोया, दूध एवं दुग्ध उत्पादों, मिलेट्स और मौसमी सब्जियों से तैयार पौष्टिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। ‘नो योर प्रोटीन —अपने प्रोटीन को पहचानें’ अभियान के जरिए परिवारों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रोटीन के स्रोतों और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी गई।

    पोषण माह के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्थानीय और विविधतापूर्ण ताजा नाश्ता तथा गर्म पका भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता की निगरानी में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। केंद्रों पर साप्ताहिक मेन्यू बोर्ड भी लगाए जाएंगे, इससे अभिभावकों और समुदाय को बच्चों को दिए जा रहे भोजन की जानकारी मिल सके। अभियान के तहत बच्चों की शारीरिक माप, पोषण संबंधी जागरूकता, रेसिपी प्रदर्शन और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का अधिकतम लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के लिए विशेष गतिविधियां भी संचालित होंगी।

     

  • बेटियां अपने परिवार, मातृभूमि, समाज और राष्ट्र के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखें : मंत्री  परमार

    बेटियां अपने परिवार, मातृभूमि, समाज और राष्ट्र के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखें : मंत्री परमार

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और संवेदना के साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझना भी है। बेटियां अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से आगे बढ़ते हुए परिवार, मातृभूमि, समाज एवं राष्ट्र के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। मंत्री  परमार बुधवार को भोपाल स्थित शासकीय गीतांजलि कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय में आयोजित ‘प्राचार्य पदक वितरण समारोह’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्राचार्य पदक प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    मंत्री  परमार ने कहा कि हमारी बेटियों की उपलब्धियां केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति का गौरवपूर्ण अध्याय हैं। उत्कृष्टता का सम्मान विद्यार्थियों को और बेहतर करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए करें और अपने जीवन में कर्तव्य, संस्कार तथा राष्ट्रभाव को सर्वोच्च स्थान दें।

    भारतीय ज्ञान परंपरा को शोध और अनुसंधान से आगे बढ़ाएं

    मंत्री  परमार ने भारतीय पुरातन ज्ञान परंपरा की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का ज्ञान सदैव सार्वभौमिक और मानव कल्याण की भावना से युक्त रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से संबंधित समृद्ध ज्ञान विद्यमान है। आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी इस ज्ञान को समझे और उसके युगानुकूल परिप्रेक्ष्य में शोध, अनुसंधान एवं दस्तावेजीकरण के माध्यम से आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने स्वत्व के जागरण, भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने और राष्ट्र के पुनर्निर्माण में योगदान देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल, संस्कार और समग्र व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित है।

     परमार ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय भावना की वैश्विक प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए इस भावना को सार्थक किया। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाती है।

     मंत्री  परमार ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि ज्ञान, सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता से युक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। भारत वर्ष 2047 तक विश्व के अन्य देशों की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी सक्षम और सामर्थ्यवान बनेगा। इस संकल्प को साकार करने में युवा शक्ति और विशेषकर बेटियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    महाविद्यालय के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं

    इस अवसर पर मंत्री  परमार ने महाविद्यालय को 100 कंप्यूटर उपलब्ध कराने तथा छात्रावास एवं ऑडिटोरियम के अनुरक्षण के लिए ₹1 करोड़ की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने महाविद्यालय की कैंटीन का नाम ‘अन्नपूर्णा’, छात्रावास का नाम ‘मैत्रेयी’, क्रीड़ा भवन का नाम ‘पी.टी. उषा भवन’ तथा विज्ञान भवन का नाम ‘गार्गी भवन’ किए जाने की घोषणा भी की।

    समारोह में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. जय मिश्रा ने महाविद्यालय की उपलब्धियों एवं शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय को वर्ष 2011 में स्वशासी का दर्जा प्राप्त हुआ है तथा वर्तमान में 13 विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित हैं। महाविद्यालय में बी.ए. नृत्य एवं मनोविज्ञान विषय प्रारंभ करने तथा कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

    कार्यक्रम में वार्ड पार्षद  मनोज राठौर एवं अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा डॉ. मथुरा प्रसाद सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्राएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

    कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संचालन डॉ. सुनीता जैन तथा आभार प्रदर्शन डॉ. जया शर्मा ने किया। पुरस्कार वितरण समिति की संयोजक डॉ. शैलजा सोनी का आयोजन में विशेष योगदान रहा।

     

  • गोविंदपुरा दशहरा मैदान से मैनिट परिसर तक निकली इलेक्ट्रिक वाहन जनजागरूकता रैली

    गोविंदपुरा दशहरा मैदान से मैनिट परिसर तक निकली इलेक्ट्रिक वाहन जनजागरूकता रैली

    भोपाल 

    विश्व ईवी दिवस

    विश्व ईवी दिवस के अवसर पर बुधवार को भोपाल में मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) द्वारा नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सहयोग तथा 'सिटीज फोरम' के तकनीकी समन्वय से इलेक्ट्रिक वाहन जागरूकता रैली तथा ईवी एक्सपो का आयोजन हुआ। रैली का शुभारंभ गोविंदपुरा दशहरा मैदान से हुआ, जो नगर के प्रमुख व्यावसायिक एवं आवासीय मार्गों से होकर मैनिट परिसर पहुंची। रैली में पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करते हुए 50 से अधिक विविध इलेक्ट्रिक वाहनों ने सहभागिता की। इनमें दोपहिया वाहन, व्यक्तिगत कारें, ई-ऑटो, वाणिज्यिक ई-ऑटो, इलेक्ट्रिक पिकअप वाहन तथा पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बसें सम्मिलित थीं। इस आयोजन का मूल ध्येय शून्य-उत्सर्जन परिवहन के लाभों से नागरिकों को परिचित कराना एवं नगरीय वायु गुणवत्ता में सुधार के लिये जन-सहभागिता को जागृत करना था।

    अपर आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास श्री अभिषेक सराफ ने कहा कि राज्य शासन 'मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025' के माध्यम से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक सुदृढ़, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल मोबिलिटी इकोसिस्टम के निर्माण के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नीतिगत प्रोत्साहनों से न केवल स्वच्छ परिवहन को बल मिल रहा है, अपितु राज्य में औद्योगिक निवेश और नवीन संभावनाओं का भी विस्तार हो रहा है। इसी क्रम में भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं भोपाल नगर निगम अपर आयुक्त सुश्री अंजू अरुण कुमार ने नागरिक सहभागिता और नवाचार को नगरीय परिवहन की रीढ़ बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार और आधुनिक तकनीकों का अंगीकार नगरों को प्रदूषण-मुक्त बनाने तथा राष्ट्रीय जलवायु एवं पर्यावरण संरक्षण लक्ष्यों को पूर्ण करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

    मैनिट परिसर में आयोजित ईवी एक्सपो में अग्रणी वाहन निर्माताओं का प्रदर्शन

    मैनिट परिसर में आयोजित ईवी एक्सपो में ऑटोमोबाइल क्षेत्र की प्रतिष्ठित निर्माण कंपनियों द्वारा अपनी नवीनतम इलेक्ट्रिक गाड़ियों, उन्नत तकनीकों एवं बैटरी समाधानों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। इस एक्सपो में महिंद्रा, टाटा मोटर्स, हुंडई, मारुति सुजुकी, किआ, बीवाईडी, एमजी मोटर, ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी और सिंपल एनर्जी जैसी प्रमुख कंपनियों ने सहभागिता की। इस समन्वित आयोजन ने मैनिट भोपाल और नगरीय विकास एवं आवास विभाग की स्वच्छ, हरित एवं सतत नगरीय परिवहन व्यवस्था निर्मित करने की साझा संकल्पबद्धता को गरिमामय रूप से प्रदर्शित किया।

    मध्यप्रदेश ईवी नीति-2025 से संवर रहा हरित एवं सतत परिवहन का भविष्य

    पर्यावरण-अनुकूल, स्वच्छ एवं सतत् नगरीय परिवहन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू की गई 'मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025' प्रदेश को ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रही है। इस दूरदर्शी नीति के अंतर्गत प्रदेश के पांच प्रमुख महानगरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन—को मॉडल ईवी शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। नीति के माध्यम से ई-वाहनों के पंजीयन शुल्क एवं रोड टैक्स में छूट, सार्वजनिक तथा निजी चार्जिंग अधोसंरचना के विस्तार के लिए प्रोत्साहन, बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं की स्थापना तथा हरित परिवहन क्षेत्रों का निर्धारण कर ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम को अभूतपूर्व गति प्रदान की जा रही है। साथ ही, नागरिकों एवं निवेशकों की सुविधा के लिए 'ईवी तरंग' पोर्टल के माध्यम से एकीकृत सूचना प्रणाली उपलब्ध कराई गई है, जो वर्ष 2030 तक हरित परिवहन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हो रही है।

    मध्यप्रदेश में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 के एकल माह में 15,838 नए इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीयन दर्ज किया गया, जो संपूर्ण देश के कुल ईवी बाजार का 5 प्रतिशत से अधिक का योगदान दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, विगत पांच वर्षों के निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश भर में 1,400 से अधिक आधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। यह विस्तृत नेटवर्क प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के सुगम संचालन और उपभोक्ताओं में विश्वास सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत आधारशिला बनकर उभरा है। 

  • हत्या के मामले में 5 साल से फरार आरोपी इटारसी से गिरफ्तार, रीठी पुलिस ने रेलवे स्टेशन के पास दबोचा, चरसलाल की हत्या कर फरार हो गया था आरोपी

    हत्या के मामले में 5 साल से फरार आरोपी इटारसी से गिरफ्तार, रीठी पुलिस ने रेलवे स्टेशन के पास दबोचा, चरसलाल की हत्या कर फरार हो गया था आरोपी

    कटनी

    अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत रीठी पुलिस ने हत्या के मामले में करीब पांच साल से फरार चल रहे आरोपी को इटारसी से गिरफ्तार किया है। आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस ने इटारसी रेलवे स्टेशन के पास से की।

    पुलिस के अनुसार, 2 फरवरी 2022 को मर्ग क्रमांक 12/22 में मृतक चरसलाल पारधी पिता रामरस पारधी, निवासी ललितपुर बूढ़ा की मृत्यु की जांच की गई थी। जांच में सामने आया कि जोनस लाल पारधी, रूलबाबू पारधी और चंसूर उर्फ बिस्किटलाल पारधी ने लोहे की रॉड और बरछी से मारपीट कर चरसलाल पारधी की हत्या कर दी थी। बीच-बचाव करने पहुंचे अजूबा पारधी और टन्नी पारधी के साथ भी मारपीट की गई थी। मामले में थाना रीठी में अपराध क्रमांक 33/22 के तहत धारा 302 और 324 भादवि में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए थे। पुलिस ने उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी, लेकिन आरोपी एक स्थान पर स्थायी रूप से निवास नहीं करने के कारण गिरफ्तारी में कठिनाई आती रही। आरोपियों के नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध न्यायालय में फरारी चालान भी प्रस्तुत किया गया था।

    इसी बीच रीठी पुलिस को सूचना मिली कि हत्या के मामले में फरार आरोपी रूलबाबू पारधी इटारसी, जिला नर्मदापुरम में मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम को तत्काल इटारसी रवाना किया गया। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को इटारसी रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। कार्रवाई में निरीक्षक मोहम्मद शाहिद, उप निरीक्षक दिनेश चौहान, प्रधान आरक्षक अजय मेहरा, प्रधान आरक्षक नितेश दुबे, आरक्षक शमशेर सिंह, आरक्षक अमन सिंह थाना रीठी तथा साइबर सेल के शुभम गौतम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

  • बरही पुलिस की अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, अलग अलग ठिकानों में दबिश, 34 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त

    बरही पुलिस की अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, अलग अलग ठिकानों में दबिश, 34 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त

    कटनी

    जिले में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ बरही पुलिस ने लगातार दो दिनों में कार्रवाई करते हुए 7 अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर कुल 34 लीटर अवैध कच्ची महुआ शराब जब्त की। साथ ही ग्राम पिपरियाकला के पारधी टोला में रेलवे स्टेशन के पीछे करीब 540 किलो महुआ लाहन नष्ट कराया गया।

    पुलिस के अनुसार, 7 सितंबर 2026 को ग्राम पिपरियाकला पारधी टोला रेलवे स्टेशन के पीछे करीब 36 कंटेनरों में रखा लगभग 540 किलो महुआ लाहन बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 54 हजार रुपये बताई गई। पुलिस ने मौके पर ही लाहन को नष्ट कराया। इसी कार्रवाई के दौरान चार अलग-अलग स्थानों से सुशील आदिवासी से 5 लीटर, कोमल प्रसाद कोल से 5 लीटर, रामदयाल साहू से 2 लीटर और प्रेमलाल प्रजापति से 2 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की गई। सभी मामलों में आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत कार्रवाई की गई।

    वहीं 8 सितंबर 2026 को बरही पुलिस ने तीन अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर 20 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की। पुलिस ने दुःखी बाई भूमिया से 5 लीटर, राजू कोल से 5 लीटर और रामचरण कोल से 10 लीटर शराब बरामद की। इन मामलों में भी धारा 34(1) आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य तथा एसडीओपी विजयराघवगढ़ वीरेंद्र धार्वे के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी बरही निरीक्षक अरविंद कुमार चौबे के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई में बरही पुलिस टीम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रखने की बात कही है

  • स्कूल वैन से गिरकर मासूम छात्र की मौत, विजयराघवगढ़ थाना क्षेत्र की घटना, निजी स्कूल वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल

    स्कूल वैन से गिरकर मासूम छात्र की मौत, विजयराघवगढ़ थाना क्षेत्र की घटना, निजी स्कूल वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल

    कटनी

     विजयराघवगढ़ थाना क्षेत्र में बुधवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूल वैन से गिरकर एक मासूम छात्र की मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई, वहीं पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। घटना ने स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और निजी शिक्षण संस्थानों की परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्र रोजाना की तरह स्कूल वैन से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में वैन का दरवाजा अचानक खुलने अथवा वाहन के अनियंत्रित होने से बच्चा सड़क पर गिर पड़ा। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और राहगीरों ने तत्काल घायल छात्र को उपचार के लिए नजदीकी शासकीय अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    बच्चे की मौत की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे और उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की खबर फैलते ही क्षेत्र में भी शोक की लहर दौड़ गई।

    स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

    हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में निजी स्कूलों की परिवहन व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में संचालित कई निजी स्कूल वाहनों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया जा रहा है।
    अभिभावकों का कहना है कि कुछ वाहनों में दरवाजों के सुरक्षित लॉक सिस्टम, बच्चों की निगरानी के लिए अटेंडेंट तथा वाहन की फिटनेस जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर लापरवाही बरती जाती है। वहीं, अनफिट या क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इस घटना के बाद लोगों ने प्रशासन से स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट, क्षमता और सुरक्षा मानकों की सघन जांच कराने की मांग की है।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    घटना की सूचना मिलते ही विजयराघवगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल में भी आवश्यक कार्रवाई की। पुलिस द्वारा हादसे के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। वाहन चालक की भूमिका, वाहन की फिटनेस तथा स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी समेत विभिन्न पहलुओं पर पुलिस जानकारी और साक्ष्य जुटा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर यदि किसी की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    हादसे ने छोड़ा बड़ा सवाल

    एक मासूम की जान जाने की इस घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि स्कूली बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाने वाले वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी आखिर कितनी गंभीरता से की जा रही है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के सभी स्कूल वाहनों की तत्काल जांच कराकर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच, निष्पक्ष जांच के निर्देश

    दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच, निष्पक्ष जांच के निर्देश

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज भोपाल में इंटर्न्स, जूडा एवं एमटीए के प्रतिनिधियों से विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना की जानकारी मिलते ही नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रकरण की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने जीएमसी भोपाल में प्रेस वार्ता में संबोधित कर रहे थे।

    छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी, घायलों के उपचार की समुचित व्यवस्था की जाएगी

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि शांतिपूर्वक अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ इस प्रकार की घटना नहीं होनी चाहिए। मेडिकल कैंपस में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्र-छात्राओं पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी। घायल छात्रों के समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

    स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत वृद्धि का निर्णय

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्तमान स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत वृद्धि करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की इस मांग पर पहले से ही चर्चा चल रही थी। मुख्यमंत्री डॉ यादव सतत संवाद कर रहे थे। उन्होंने मेडिकल कॉलेज परिसर में कहा कि सकारात्मक चर्चा का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। प्रतिनिधिमंडल ने निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की।

    ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा भाव से कार्य करें युवा चिकित्सक

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने युवा चिकित्सकों से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा भाव और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सेवा से चिकित्सकों को वास्तविक परिस्थितियों को समझने और व्यापक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है। राज्य सरकार डॉक्टरों को तैयार करने में पूरा सहयोग कर रही है और अपेक्षा है कि चिकित्सक अपने बॉन्ड की अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी प्रतिबद्धता के साथ सेवाएं देंगे चिकित्सक समाज के लिए महत्वपूर्ण एसेट हैं। मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार और मुस्कुराकर बात करना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों को सकारात्मक समाधान के लिए बधाई दी।

     

  • कृषि क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और सबकी समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है

    कृषि क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और सबकी समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है

    भोपाल 

    बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर निवाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि विकास, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से संवाद कर कृषि से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है तथा किसानों को उन्नत तकनीक, बेहतर सुविधाएं और शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों से कहा कि कृषि क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और सबकी समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे दुग्ध उत्पादन, अन्न उत्पादन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी जिसमें भी उनकी रुचि है, एक नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ें। हमारी सरकार फील्ड से लेकर फैक्ट्री तक हमेशा किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी किसान इस बलराम कृषि महोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि किसान कल्याण वर्ष के माध्यम से पूरे वर्ष किसानों के हित में निरंतर कार्य किया जाए। किसानों की आय बढ़ाना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में नई तकनीक, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग बढ़ाने से किसानों को उत्पादन एवं आय में वृद्धि का लाभ मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने, उन्नत कृषि यंत्रों, नवीन तकनीकों और बेहतर कृषि उत्पादन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलता है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उन्नत बीजों के साथ आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम हो और उत्पादन में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार परंपरागत कृषि पद्धतियों के साथ प्राकृतिक एवं जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रही है। प्राकृतिक खेती को अपनाकर किसान कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर सकते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। किसानों को पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के साथ कृषि क्षेत्र में आवश्यक अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं, महिलाओं, गरीबों और किसानों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के साथ पशुपालन, पर्यटन और अन्य रोजगारपरक गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गौशाला एवं पशुपालन से संबंधित योजनाओं के माध्यम से भी ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तथा प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि यंत्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों के हित में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा दी जा रही है। खरीफ एवं रबी फसलों के लिए ऋण चुकाने की अवधि 6-6 माह निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब एक वर्ष कर दिया गया है। अब किसान जिस दिन ऋण लेगा, उस दिनांक से एक वर्ष की अवधि में ऋण चुका सकेगा। प्रदेश में ढाई करोड़ किसानों को सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराया गया है।

    कार्यक्रम में अध्यक्ष अपेक्स बैंक भोपाल के प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, प्रदेश प्रभारी बलराम कृषि महोत्सव  कपिल दार्दे और विधायक निवाड़ी  अनिल जैन, सांसद प्रतिनिधि  राजेश पटेरिया, कलेक्टर मती जमुना भिड़े, पुलिस अधीक्षक डॉ राय सिंह नरवरिया द्वारा अन्य अतिथियों की उपस्थिति में देवेन्द्रपुरा निवासी कृषक  उदयभान कुशवाहा को संरक्षित खेती, पठाराम के कृषक  सतीश बंशकार को औषधिय खेती, तरीचर कलां के कृषक  सुरेश कुमार साहू को निजी कस्टम हायरिंग केंद्र, मड़िया खास के  कुलदीप सिंह दांगी को ई कृषि यंत्र अनुदान, टीला के कृषक  अरविंद घोष को डेयरी प्लस, सुजानपुरा के कृषक  सुरेन्द्र कुमार यादव को गौ-मैत्री योजना, चचावली के कृषक  लालाराम सूत्रकार को प्राकृतिक खेती एवं थौना निवासी  कैलाश नारायण केवट को मत्स्य बीज उत्पादन के लिये सम्मानित किया गया। साथ ही शासकीय कन्या उ. मा. वि निवाड़ी की छात्रा कु. शिवानी कुशवाहा ने कक्षा 10वीं परीक्षा में प्रदेश की प्रवीण सूची में 9वां स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया एवं जिले के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।