Category: मध्य प्रदेश

  • Gwalior News: मोहना में 11 सितंबर को जन-विश्वास शिविर, जनता और उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे अधिकारी

    Gwalior News: मोहना में 11 सितंबर को जन-विश्वास शिविर, जनता और उद्योग जगत से सीधा संवाद करेंगे अधिकारी

    ग्वालियर
    मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान” के तहत ग्वालियर जिले का पाँचवां जिला स्तरीय शिविर शुक्रवार 11 सितम्बर को प्रात: 10.30 बजे से मोहना स्थित नगर पालिका परिषद कार्यालय प्रांगण में आयोजित होगा।

    मंत्री कुशवाह की मौजूदगी में होगा शिविर का आयोजन
    सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह भी शिविर में शामिल होंगे। मंत्री कुशवाह की मौजूदगी में इस शिविर के माध्यम से नगर पंचायत मोहना के सभी वार्डों की सभी बस्तियों के निवासियों को लाभान्वित कराया जायेगा।

    उद्यमियों की समस्याओं का होगा समाधान
    शिविर शुरू होने से पहले विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ नगर पंचायत क्षेत्र में भ्रमण कर अपने-अपने विभाग की संस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। जिला स्तरीय जन-विश्वास शिविर में जन संवाद, उद्योग एवं इन्फ्लुएंसर संवाद आयोजित किए जाएंगे। उद्योग संवाद में वृहद, एमएसएमई तथा कुटीर उद्योगों से जुड़े उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे। साथ ही उद्यमियों की समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर सम्पूर्ण प्रदेश के साथ ग्वालियर जिले में भी जनता से सीधा संवाद व जुड़ाव स्थापित करने और समस्याओं का शतप्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभियान संचालित होने जा रहा है।

     

  • नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े पर हाईकोर्ट का कड़ा फैसला, डुप्लीकेट फैकल्टी पर 3 लाख का जुर्माना और पौधारोपण जरूरी

    नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े पर हाईकोर्ट का कड़ा फैसला, डुप्लीकेट फैकल्टी पर 3 लाख का जुर्माना और पौधारोपण जरूरी

    जबलपुर
     मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े बहुचर्चित फर्जीवाड़े मामले में हाईकोर्ट ने एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी पर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ तीन-तीन लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट की इस सख्ती से उन तमाम कालेजों की नींद उड़ गई है, जो नियमों को ताक पर रखकर फर्जीवाड़े में लिप्त पाए गए थे।

    एक महीने में जमा करना होगा जुर्माना
    हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कॉलेज प्रबंधन को जुर्माने की यह राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। अदालत के आदेश के अनुसार, प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी पर लगने वाले तीन लाख रुपये में से दो लाख रुपये एमपीएनआरसी (MPNRC) और एक लाख रुपये जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा कराने होंगे।

    निर्धारित अवधि में जुर्माने की राशि जमा करने वाले कॉलेजों को ही उपयुक्त माना जाएगा। इसके बाद ही उनके विद्यार्थियों को परीक्षाओं में शामिल होने और उनके रुके हुए रिजल्ट जारी करने की अनुमति मिलेगी।

    हालांकि, डुप्लीकेट टीचिंग फैकल्टी वाले कॉलेजों को प्रति डुप्लीकेट फैकल्टी 3 लाख रुपए का जुर्माना जमा करना होगा। जुर्माना जमा करने के बाद ही संबंधित कॉलेजों को पात्र माना जाएगा और उनके छात्रों की परीक्षाएं आयोजित हो सकेंगी। पहले हो चुकी परीक्षाओं के रोके गए रिजल्ट भी जारी किए जाएंगे।

    कोर्ट ने प्रत्येक संबंधित कॉलेज को परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के भी निर्देश दिए हैं। पौधारोपण की तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होंगी।

    मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित सभी संबंधित मामलों की सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।

    डुप्लीकेट फैकल्टी पर 3 लाख रुपए जुर्माना
    सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सूटेबल पाए गए 119 कॉलेजों और डिफिशिएंट पाए गए 153 कॉलेजों में टीचिंग फैकल्टी की डुप्लीकेसी मिली है। वहीं, 35 सूटेबल कॉलेज ऐसे हैं, जहां डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं मिली। हाईकोर्ट ने डुप्लीकेट फैकल्टी वाले कॉलेजों के लिए प्रति फैकल्टी 3 लाख रुपए जुर्माना तय किया है।

    इसमें 2 लाख रुपए एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) और 1 लाख रुपए जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा करने होंगे। कॉलेजों को यह राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। इसके बाद संबंधित कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा और रिजल्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। प्रदेश में करीब एक हजार डुप्लीकेट शिक्षक हैं।

    50 पौधे लगाने और देखरेख के निर्देश
    हाईकोर्ट ने संबंधित कॉलेजों को अपने परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने के निर्देश भी दिए हैं। कॉलेजों को इन पौधों की पेड़ बनने तक देखरेख करनी होगी। पौधारोपण के बाद उसकी तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होंगी। कोर्ट के इस निर्देश का पालन संबंधित कॉलेजों को परीक्षा संबंधी राहत हासिल करने की प्रक्रिया के तहत करना होगा।

    BSc, MSc और पोस्ट बेसिक BSc छात्रों को राहत

    हाईकोर्ट के आदेश से बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग और पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग के छात्रों को राहत मिलेगी। जिन छात्रों ने पहले परीक्षा दे दी है, उनके रिजल्ट भी जारी किए जाएंगे। वहीं, पात्र कॉलेजों के जिन छात्रों की परीक्षाएं रुकी हुई थीं, उनके लिए परीक्षा आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है।

    MPNRC को सख्त हिदायत
    हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को नए नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देते समय पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलेजों के निरीक्षण और तय मापदंडों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही होने पर संबंधित नियामक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने नए मान्यता प्राप्त सभी नर्सिंग कॉलेजों का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

    मामले में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आलोक बागरेचा और अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट के सामने कई तथ्य रखे। हाईकोर्ट ने मान्यता प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को लेकर संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

    सीबीआई जांच में सामने आया था बड़ा फर्जीवाड़े का जाल
    ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पहले सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई की जांच में प्रदेशभर के 695 नर्सिंग कॉलेजों की पड़ताल की गई थी, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जांच में पाया गया कि सूटेबल पाए गए 119 कॉलेजों और डिफिशिएंट पाए गए 153 कॉलेजों में बड़े पैमाने पर टीचिंग फैकल्टी की डुप्लीकेसी चल रही थी। केवल 35 सूटेबल कॉलेज ऐसे थे, जहां कोई डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं मिली।

        नर्सिंग कॉलेजों में डुप्लीकेट फैकल्टी मिलने पर प्रति फैकल्टी 3 लाख का जुर्माना।
        जुर्माने की राशि का दो हिस्सा: 2 लाख MPNRC और 1 लाख जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा होगा।
        कॉलेजों को अपने परिसर में लगाने होंगे 50-50 पौधे, निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होगी फोटो।
        जुर्माना जमा करने के बाद ही छात्रों को परीक्षा और रिजल्ट की मिलेगी अनुमति।
        हाईकोर्ट ने नए मान्यता प्राप्त सभी कॉलेजों का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

  • डबरा में बौद्ध भिक्षु बनकर रह रहे बांग्लादेशियों पर शिकंजा, सत्यापन में जुटे लोगों को नोटिस

    डबरा में बौद्ध भिक्षु बनकर रह रहे बांग्लादेशियों पर शिकंजा, सत्यापन में जुटे लोगों को नोटिस

    ग्वालियर
    बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हिंदू नाम से भारतीय पासपोर्ट जारी होने के मामले में जांच अब केवल पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों तक सीमित नहीं रही है. इस पूरे प्रकरण में पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी जांच के केंद्र में आ गई है. ग्वालियर के डबरा थाने से शुरू हुई सत्यापन प्रक्रिया एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल तक पहुंची और इसके बाद संबंधित दस्तावेज पासपोर्ट सेवा केंद्र भेजे गए. अब स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया में कथित फर्जी दस्तावेज और गलत पहचान आखिर किस स्तर पर नहीं पकड़ी गई। 

    एसटीएफ की टीम ग्वालियर एसपी कार्यालय पहुंची और पासपोर्ट से जुड़े रिकॉर्ड जुटाए. टीम दस्तावेजों की पड़ताल के साथ यह भी देख रही है कि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आवेदकों की पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया था. जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि थाना स्तर से क्लियर रिपोर्ट भेजे जाने के बाद एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में दस्तावेजों की स्क्रूटनी किस तरह की गई। 

     बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट जारी होने के मामले में एसटीएफ अब पुलिस सत्यापन की पूरी कड़ी खंगालेगी। पड़ताल में सामने आया है जिस समय 22 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट डबरा के पते पर बने, उस समय यह लोग सिमरिया ताल गांव स्थित बौद्ध विहार में ही बौद्ध भिक्षु बनकर रहते थे।

    पासपोर्ट केंद्र में आवेदन के बाद जब पुलिस वेरीफिकेशन की बारी आई, तब एसपी कार्यालय की पासपोर्ट शाखा से फाइल ऑनलाइन डबरा थाने भेजी गई। यहां डबरा थाने के तत्कालीन एचसीएम भूपेंद्र गुर्जर को भौतिक सत्यापन करना था, घर जाकर देखना था और आसपास के लोगों भी पूछताछ करनी थी, लेकिन यह पूरी कार्रवाई थाने में ही बैठकर कर दी। सीधे टीप लगा दी- सब सही है।

     

    डबरा थाने से शुरू हुई थी सत्यापन की प्रक्रिया
    जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार संदिग्ध पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन डबरा थाने के स्तर से किया गया था. उस अवधि में विनायक शुक्ला डबरा थाना प्रभारी के पद पर थे. वर्तमान में वे दतिया जिले में एसडीओपी बड़ौनी के पद पर पदस्थ हैं. थाना क्षेत्र में संबंधित आवेदकों के पते और पहचान के भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी बीट स्तर पर थी। 

    उस समय डबरा थाने के बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर थे. बताया जा रहा है कि बीट प्रभारी ने आवेदकों के बताए गए पते और पहचान का मौके पर सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर थाना स्तर से पासपोर्ट के लिए पुलिस क्लियरेंस दी गई और इसे आगे एसपी कार्यालय भेजा गया। 

    अब एसटीएफ का मुख्य सवाल यही है कि बीट प्रभारी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट वास्तव में किस आधार पर तैयार हुई. क्या आवेदकों के पते पर जाकर उनका भौतिक सत्यापन किया गया था या दस्तावेजों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई? एसटीएफ इस बिंदु पर रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। 

    एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की भूमिका भी जांच में
    थाना स्तर से पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में पहुंची थी. यहां दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट की स्क्रूटनी के बाद प्रकरण पासपोर्ट सेवा केंद्र तक गया. अब जांच एजेंसी इस पूरी कड़ी को जोड़कर देख रही है। 

    एसटीएफ यह पता कर रही है कि थाना स्तर से भेजी गई रिपोर्ट में ऐसी कौन-कौन सी जानकारियां थीं, जिनके आधार पर पासपोर्ट प्रक्रिया आगे बढ़ी. यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति थी तो वह एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की जांच में क्यों सामने नहीं आई. इसके साथ ही पासपोर्ट सेवा केंद्र के स्तर पर हुई जांच की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लिया गया है। 

    जांच एजेंसी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि एक व्यक्ति को भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने वाली अलग-अलग प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की विश्वसनीयता की जांच किस स्तर पर हुई. पुलिस सत्यापन, जिला स्तर की स्क्रूटनी और पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया के बीच यदि कोई खामी रही है तो उसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

    सात राज्यों तक पहुंची संदिग्धों की तलाश
    मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसटीएफ की जांच का दायरा ग्वालियर तक सीमित नहीं है. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों की तलाश में सात राज्यों में टीमें भेजी गई हैं. जांच में कुछ संदिग्धों के भारत से बाहर निकलकर थाईलैंड पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। 

    बताया जा रहा है कि इनमें कुछ संदिग्ध बौद्ध भिक्षु के रूप में रह रहे हैं. हालांकि विदेश में मौजूद संदिग्धों के संबंध में जांच एजेंसी उपलब्ध जानकारी और रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है. भारत में मौजूद अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है। 
    एसटीएफ अब यह भी जोड़ने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पहचान बदलने, पुलिस सत्यापन हासिल करने और पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया में कहीं कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था. अलग-अलग स्थानों से मिले दस्तावेज और रिकॉर्ड की कड़ियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। 

    फर्जी पासपोर्ट रद्द कराने की तैयारी
    जांच में जिन पासपोर्ट को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया हुआ पाया जाएगा, उन्हें रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. एसटीएफ के अनुसार ऐसे मामलों में विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा, ताकि संबंधित पासपोर्ट को निरस्त कराया जा सके। 

    जांच एजेंसी की चिंता उन संदिग्धों को लेकर भी है, जो अभी भारत में मौजूद हैं. फर्जी दस्तावेजों से तैयार पासपोर्ट का इस्तेमाल कर वे देश से बाहर न निकल सकें, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. वहीं जो संदिग्ध विदेश पहुंच चुके हैं, उनके संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कराने की कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जा सकती है। 

    अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान होंगे दर्ज
    एसटीएफ अब उन सभी लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट प्रक्रिया में रही. तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और तत्कालीन बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर को नोटिस देकर उनके बयान दर्ज किए जाने की बात कही गई है। 

    इसके अलावा एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जानकारी ली जाएगी. पासपोर्ट सेवा केंद्र के संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उनके स्तर पर हुई दस्तावेजी जांच को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। 

    एसटीएफ यह स्पष्ट करना चाहती है कि यदि आवेदकों की पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किया गया था तो उसकी पुष्टि करने वाले दस्तावेज और रिकॉर्ड क्या हैं. यदि सत्यापन रिपोर्ट में गलत जानकारी दर्ज की गई थी तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है, यह भी जांच के बाद सामने आएगा। 

    भारतीय पासपोर्ट लेकर घूम रहे बांग्लादेशियों को पकड़ना चुनौती
    एसटीएफ की अलग-अलग टीमें अब भारतीय पासपोर्ट लेकर घूम रहे बांग्लादेशियों को पकड़ने के लिए कई राज्यों में डेरा जमाए हुए हैं। दो टीमें असम और बंगाल में हैं। एक टीम दिल्ली है। भोपाल और ग्वालियर यूनिट इस पर काम कर रहे हैं। वर्जनइस मामले में अलग-अलग राज्यों में टीमें पहुंची हैं। जिससे भारतीय पासपोर्ट लेकर घूम रहे बांग्लादेशियों को पकड़ा जा सके। पुलिसकर्मियों को नोटिस देकर बयान के लिए बुलाया जाएगा। राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ

    पासपोर्ट को लेकर यह है जांच प्रक्रियाडाटा ट्रांसफर
    पासपोर्ट सेवा केंद्र पर दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आवेदन, सारे दस्तावेजों की फाइल आनलाइन डिजिटल संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक कार्यालय की पासपोर्ट शाखा को भेजी जाती है। यहां से फाइल संबंधित थाने को आनलाइन ट्रांसफर की जाती है।थाना प्रभारी और बीट प्रभारी की भूमिकाथाने में फाइल प्राप्त होते ही थाना प्रभारी इसे संबंधित बीट प्रभारी को जांच के लिए सौंपते हैं। बीट प्रभारी आवेदक के दिए गए पते पर जाते हैं या आवेदक को मूल दस्तावेजों के साथ थाने में उपस्थित होने का संदेश देते हैं।

    आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बिजली/पानी बिल आदि मूल प्रमाण-पत्रों का मिलान किया जाता है। बीट अधिकारी कम से कम दो स्थानीय पड़ोसियों/ गवाहों से पूछताछ करते हैं और उनके हस्ताक्षर लेते हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आवेदक पिछले एक वर्ष से उसी पते पर रह रहा है।

    बीट प्रभारी जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट थाना प्रभारी के समक्ष प्रस्तुत करता है। थाना प्रभारी रिपोर्ट का अवलोकन कर आवेदक से मिलता है। डिजिटल साइन/ स्वीकृति देकर वापस एसएसपी कार्यालय की पासपोर्ट शाखा को भेजते हैं।

    क्रिमिनल रिकॉर्ड चेक
    बीट प्रभारी थाने, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस सॉफ्टवेयर में आवेदक का नाम और पिता का नाम डालकर चेक करते हैं कि उसके खिलाफ कोई केस, वारंट या कोर्ट केस पेंडिंग तो नहीं है। जांच पूरी होने पर एसएसपी कार्यालय द्वारा पासपोर्ट पोर्टल पर तीन में से एक रिपोर्ट दर्ज की जाती है

        क्लियर : सभी दस्तावेज सही हैं और कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है।
        अपूर्ण : यदि कोई दस्तावेज अधूरा हो या आवेदक पते पर न मिला हो।
        प्रतिकूल : कोई गंभीर आपराधिक मामला पेंडिंग हो या पते का विवरण झूठा पाया गया हो।

    पुलिस सत्यापन पर उठे सवालों के जवाब तलाश रही एसटीएफ
    इस पूरे मामले ने पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस वेरिफिकेशन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. सामान्य तौर पर आवेदक की पहचान और उसके पते की पुष्टि के लिए पुलिस स्तर पर सत्यापन किया जाता है. इसके बाद रिपोर्ट संबंधित स्तर पर भेजी जाती है. ऐसे में यदि किसी विदेशी नागरिक ने कथित तौर पर भारतीय पहचान के आधार पर पासपोर्ट हासिल कर लिया, तो जांच का स्वाभाविक केंद्र यह बन गया है कि सत्यापन के दौरान उसकी वास्तविक पहचान सामने क्यों नहीं आई। 

    एसटीएफ इसी सवाल का जवाब रिकॉर्ड के जरिए तलाश रही है. फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है. एजेंसी दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान जुटाकर पूरे घटनाक्रम की कड़ी तैयार कर रही है। 

    दोषियों पर कार्रवाई का एसटीएफ का दावा
    एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार मामले में किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं मध्य प्रदेश एसटीएफ के एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि जाली दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने वालों की तलाश देशभर में की जा रही है. पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

    अब जांच की दिशा दो स्तरों पर आगे बढ़ रही है. एक ओर उन लोगों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय पहचान और पासपोर्ट हासिल किया. दूसरी ओर डबरा थाने से लेकर एसपी कार्यालय और आगे पासपोर्ट सेवा केंद्र तक पहुंची प्रक्रिया की जांच की जा रही है. एसटीएफ की पड़ताल से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस पूरे मामले में दस्तावेजी फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और सरकारी सत्यापन की कई परतों को पार कर संदिग्धों के लिए भारतीय पासपोर्ट हासिल करना कैसे संभव हुआ। 

  • मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

    मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

    मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

    निर्माण कार्य में गुणवत्ता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश

    शहडोल 
     नगर पालिका परिषद शहडोल द्वारा नगर में नागरिकों को बेहतर एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं।  मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती आशा जितेंद्र भंडारी ने पुराना नगर पालिका चौक से पुलिस लाइन होकर गुजरने वाली सीसी रोड के निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने निर्माणाधीन सड़क की कार्य-प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र बेहतर एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके।

    मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा झूला पुल के पास चल रहे निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने मौके पर उपस्थित संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार से कार्य की प्रगति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर में संचालित सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए तथा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

    नगर पालिका परिषद द्वारा नगर के विकास एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न निर्माण कार्य निरंतर कराए जा रहे हैं। निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हों।

    निरीक्षण के दौरान नगर पालिका के उपयंत्री श्री सुखेंद्र सिंह तोमर, संबंधित ठेकेदार एवं नगर पालिका के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा

    संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा

    संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा

    प्रमुख शरद कोल के नेतृत्व में हजारों लोगों ने लिया सामाजिक एकता एवं भाईचारे का संकल्प

    ब्यौहारी 
    संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर  ब्यौहारी में विशाल समरसता संकल्प यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का नेतृत्व ब्यौहारी विधायक श्री शरद कोल ने किया। यात्रा के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारे एवं समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।

    समरसता संकल्प अभियान के तहत यात्रा प्लाजा तिराहा, ब्यौहारी से प्रारंभ होकर विनायक पैलेस पहुंची, जहां यात्रा का समापन हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 
    यह कलश यात्रा संत शिरोमणि रविदास महाराज की जन्मभूमि वाराणसी से प्रारंभ होकर ब्यौहारी उपनगर तक पहुंची। यात्रा के दौरान संत रविदास महाराज के विचारों, सामाजिक एकता, भाईचारे एवं समरसता का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।

    कार्यक्रम में सदस्य जिला योजना समिति श्रीमती अमिता चपरा, नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गुप्ता राजन, राम लखन खटीक, रामदुलारे प्रजापति, एसपी साकेत, सुंदरलाल साकेत,  कृष्णा देवी चौधरी, दीना साकेत, सरपंच हीरालाल साकेत, देवीदीन प्रजापति एवं राधा साकेत सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित जनसमुदाय ने संत रविदास के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज में एकता, भाईचारे एवं सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

  • मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प

    मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प

    मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प

    मैदानी भ्रमण कर शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण करेंगे अधिकारी, लंबित प्रकरणों के निराकरण पर रहेगा विशेष जोर

    अनूपपुर 
     मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के अंतर्गत 11 सितम्बर 2026 को आईटीआई बदरा में कैम्प आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत आमजन की समस्याओं के निराकरण, शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा मैदानी स्तर पर शासकीय संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का भ्रमण एवं विभिन्न संस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा।

    कलेक्टर श्री रत्नाकर झा ने अभियान से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कैम्प के पूर्व संबंधित क्षेत्र में सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई एवं लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा कर अधिकाधिक प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित किया जाए। भ्रमण तिथि तक शेष रहने वाले प्रकरणों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए यथासंभव मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित कराया जाए।

    अभियान के तहत अधिकारी क्षेत्र की विभिन्न शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। इनमें स्कूल, महाविद्यालय, पुलिस थाना, राशन दुकान, आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र, छात्रावास, कृषि उपज मंडी तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं सहित अन्य संस्थाएं शामिल रहेंगी। निरीक्षण के दौरान संस्थाओं में उपलब्ध व्यवस्थाओं, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन तथा नागरिकों को प्रदान की जा रही सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया जाएगा और आवश्यक सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।

    कैम्प दिवस के प्रथम चरण में अधिकारी पूर्व निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार मैदानी क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे तथा दोपहर 12:30 बजे तक कैम्प स्थल पर पहुंचेंगे। कैम्प में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं मैदानी अमला उपस्थित रहकर नागरिकों से प्राप्त आवेदनों एवं समस्याओं के निराकरण की कार्यवाही करेंगे। कैम्प की समाप्ति तक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

    कैम्प में प्राप्त आवेदनों का संधारण एवं निराकरण जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया के अनुरूप किया जाएगा। प्राप्त आवेदनों को जनआकांक्षा पोर्टल पर दर्ज कर संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण की संक्षिप्त रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी।

    कैम्प के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सुश्री प्राची अग्रवाल को नोडल अधिकारी तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अनूपपुर श्री रवि गुप्ता को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

  • IAS निधि निवेदिता पर शासन का बड़ा फैसला, तबादले के बाद कार्यकाल के कई आदेश हुए निरस्त

    IAS निधि निवेदिता पर शासन का बड़ा फैसला, तबादले के बाद कार्यकाल के कई आदेश हुए निरस्त

    भोपाल

    महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त रहीं आईएएस निधि निवेदिता को हटाने के बाद अब उनके कार्यकाल में जारी किए गए कई आदेश भी शासन ने वापस ले लिए हैं। पांच सितंबर को उनका तबादला राजस्व विभाग में किया गया था। इसके कुछ दिन बाद शासन ने उनके कार्य विभाजन और स्थानांतरण से जुड़े आदेश निरस्त कर दिए। निधि निवेदिता ने तीन सितंबर को विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए 14 अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली थीं। अब उनके आदेश को निरस्त कर दिया गया। 

    महिला एवं बाल विकास विभाग में आयुक्त रहते निधि निवेदिता ने क्या किया जिसे बदला गया ?

        संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव को आधार और एमआईएस शाखा का प्रभार दिया जबकि पहले उनके पास पोषण आहार शाखा थी।
        जवाहर बाल भवन के संचालक पद को लेकर जारी आदेश भी शासन ने रद्द कर दिया है। 

        निधि निवेदिता ने राजेश प्रताप सिंह को जवाहर बाल भवन का संचालक और वहां पदस्थ उषा सोलंकी को संचालनालय भेजा था

    अधिकारियों का तर्क था कि जवाहर बाल भवन के संचालक की नियुक्ति शासन स्तर से होती है। इसके अलावा सहायक ग्रेड-1 और सहायक ग्रेड-2 के 66 कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद की गई पदस्थापना का आदेश भी निरस्त कर दिया गया है।

    बैठक के विवाद के बाद बदला था माहौल
    14 अगस्त को विभागीय बैठक के दौरान निधि निवेदिता और संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एकजुट होकर कार्यालय से बाहर आ गए और आईएएस के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया की मध्यस्थता मामला शांत हुआ था। जिसके बाद कर्मचारियों ने अपना प्रदर्शन बंद किया था।  

    क्या था थप्पड़ कांड जिससे आईं थीं चर्चा में  

        2020 में राजगढ़ कलेक्टर रहते हुए एक भाजपा नेता को थप्पड़ मारा 
        इसके बाद एक एएसआई ने भी थप्पड़ मारने आरोप लगाया
        सीएए के समर्थन में भाजपा नेताओं ने रैली का आयोजन किया था। इस रैली में ही कलेक्टर और भाजपा कार्यकर्ताओं का विवाद हुआ था। उन्होंने आईएएस के खिलाफ कोर्ट ने इस्तगासा लगाया था। बाद में एएसआई ने भी कलेक्टर पर थप्पड़ मारने का आरोप लगाया था।
        इसकी शिकायत के बाद जांच हुई थी, जिसमें शिकायत सही पाई गई थी। इस मामले में सरकार की तरफ से जांच कमेटी बनाई गई थी।
        2020 में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद आईएएस निधि निविदेता को हटा दिया गया था।  

    किस बैच की हैं आईएएस निधि निवेदिता ?
    भारतीय प्रशासन सेवा की आईएएस निधि निवेदिता 2012 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वह मूलत: झारंखड की रहने वाली हैं। उनकी पहली पोस्टिंग झाबुआ में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई थी। इसके बाद वह कई जिलो में अलग-अलग पद पर पदस्थ रही। पांच पांच सितंबर को निधि निवेदिता का तबादला राजस्व विभाग में कर दिया गया। उन्हें भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त, ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।   

  • सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, प्रतिमा देवी की आपत्ति पर आज कोर्ट में बड़ा फैसला

    सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, प्रतिमा देवी की आपत्ति पर आज कोर्ट में बड़ा फैसला

     ग्वालियर
     सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामले में गुरुवार को जिला कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। अदालत में प्रतिमा देवी की ओर से दर्ज आपत्ति और पूर्व में तैयार किए गए समझौते की वैधता पर बहस होनी है।

    वसीयत और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी नहीं दी गई
    पिछली सुनवाई में प्रतिमा देवी अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ कोर्ट पहुंची थीं और उन्होंने कहा था कि उन्हें न तो वसीयत की जानकारी दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां पद्मावती राजे सिंधिया संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी कर समझौता नहीं किया जा सकता।

    गलत पते पर नोटिस भेजने का आरोप
    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नेपाल के गलत पते पर नोटिस भेजे गए, जबकि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एकतरफा कार्रवाई से बाहर किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

    अंतिम चरण में आपत्ति उठाने का औचित्य स्पष्ट नहीं
    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से पहले ही प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब पेश किया जा चुका है। इन पक्षों की ओर से कहा गया है कि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और अंतिम चरण में आपत्ति उठाने का औचित्य स्पष्ट नहीं है। गुरुवार की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों से यह तय होगा कि संपत्ति विवाद के समझौते पर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।

    कौन हैं प्रतिमा देवी और कनिका देवी?
    प्रतिमा देवी और कनिका देवी, ग्वालियर के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सबसे बड़ी बेटी स्वर्गीय पद्मावती राजे की संतानें हैं.महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पांच संतानें थीं। 
    त्रिपुरा राजपरिवार से संबंध: पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के तत्कालीन राजपरिवार के महाराजा किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा बहादुर से हुआ था. वर्ष 1965 में कम उम्र में ही पद्मावती राजे का निधन हो गया था। 

    कौन हैं प्रतिमा देवी और कनिका देवी?
    प्रतिमा देवी और कनिका देवी, ग्वालियर के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सबसे बड़ी बेटी स्वर्गीय पद्मावती राजे की संतानें हैं.महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पांच संतानें थीं। 

    त्रिपुरा राजपरिवार से संबंध: पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के तत्कालीन राजपरिवार के महाराजा किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा बहादुर से हुआ था. वर्ष 1965 में कम उम्र में ही पद्मावती राजे का निधन हो गया था। 

    नेपाल के राणा परिवार से जुड़ाव: प्रतिमा देवी का विवाह नेपाल के प्रतिष्ठित राणा परिवार के डॉ. धवल शमशेर राणा से हुआ है। 

    क्या था ‘काबिज़ वही मालिक’ का फॉर्मूला?
    बता दें कि सिंधिया राजघराने की अचल संपत्तियों  जिनमें ग्वालियर का ऐतिहासिक जय विलास पैलेस, मुंबई के सिंधिया हाउस, दिल्ली में सिंधिया की अलग-अलग प्रॉपर्टी सहित देश भर के प्रमुख शहरों में फैली कोठियां और जमीनों की विशाल संपत्तियां शामिल हैं के अधिकार को लेकर विभिन्न अदालतों में करीब 12 मामले लंबित चल रहे हैं। 

    इसी संदर्भ में बीते दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच जो समझौता ड्राफ्ट हुआ था, उसका मुख्य आधार “जो सदस्य जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज है, वही उसका अंतिम मालिक रहेगा” तय किया गया था.इस फॉर्मूले के तहत ग्वालियर के ऐतिहासिक जय विलास पैलेस, शिवपुरी की कोठियों, मुंबई के सिंधिया हाउस और दिल्ली स्थित सिंधिया पॉटरीज की जमीनों के मालिकाना हक का निपटारा होना था। 

    यदि यह समझौता मंजूर हो जाता, तो देश की अलग-अलग अदालतों में लंबित करीब 12 मुकदमे एक साथ खत्म हो जाते. हालांकि इन मुकदमों में से एक में प्रतिमा देवी और कनिका देवी अपनी दिवंगत मां पद्मावती राजे के कानूनी उत्तराधिकार के तहत पहले से ही पक्षकार हैं. हालांकि जिस 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्तियों के राजीनामे का प्रारूप तैयार किया गया था, उसमें पद्मावती राजे के वारिसों को शामिल नहीं किया गया था. इसी कारण दोनों बहनों ने अदालत पहुंचकर समझौते की प्रक्रिया पर रोक लगाने और अपना हिस्सा तय करने की मांग की है.अब अगली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दशकों पुराना यह शाही संपत्ति विवाद समझौते से सुलझता है या नए कानूनी पचड़े में फंसकर लंबा खींचता है।

     

  • टैक्स असेसमेंट में पेट्रोल-डीजल-CNG पंप संचालकों को राहत, 30 दिन में आपत्ति नहीं तो आवेदन मान्य

    टैक्स असेसमेंट में पेट्रोल-डीजल-CNG पंप संचालकों को राहत, 30 दिन में आपत्ति नहीं तो आवेदन मान्य

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश सरकार ने पेट्रोल, डीजल और CNG पंप संचालकों को लंबित टैक्स असेसमेंट के मामलों में राहत दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के पात्र मामलों में व्यापारियों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर स्व-घोषणा के जरिए कर निर्धारण पूरा माना जाएगा। वाणिज्यिक कर विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी की है।

    यह व्यवस्था मध्यप्रदेश वैट अधिनियम 2002, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956, मोटर स्पिरिट उपकर अधिनियम 2018 और हाई स्पीड डीजल उपकर अधिनियम 2018 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगी। निर्धारित फॉर्म में आवेदन करने पर विभाग उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर असेसमेंट पूरा करेगा।

    किन पंप संचालकों को मिलेगा लाभ
    यह सुविधा उन्हीं पंजीकृत पेट्रोल पंप संचालकों को मिलेगी, जिन्होंने मध्य प्रदेश में अधिसूचित तेल कंपनियों या पंजीकृत व्यापारियों से टैक्स और उपकर चुकाकर पेट्रोल, डीजल या CNG खरीदा है। साथ ही वर्ष 2024-25 में उनके खिलाफ टैक्स चोरी का मामला नहीं होना चाहिए।

    इसके अलावा अतिरिक्त कर या ऑडिट से संबंधित लंबित नोटिस का अनुपालन बाकी नहीं होना चाहिए और संबंधित वर्ष के लिए रिफंड का दावा भी नहीं किया गया हो।

    आवेदन के साथ ये दस्तावेज जरूरी
    पंप संचालकों को आवेदन के साथ कर और ब्याज जमा करने की चालान कॉपी लगानी होगी। 2 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को CA की ऑडिट रिपोर्ट भी देनी होगी। CST में छूट या रियायती दर का लाभ लिया गया है तो फॉर्म-C, F, E आदि मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।

    फैसले का मकसद
    सरकार का कहना है कि यह कदम रिटेल कीमतों पर उपलब्ध ईंधन के डायवर्जन (दूसरी जगह बेचने) और दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। रिटेल पंपों पर बिकने वाला ईंधन अब मुख्य रूप से आम नागरिकों के उपयोग के लिए ही रहेगा। यह प्रतिबंध फिलहाल 90 दिन तक लागू रहेगा, हालांकि सरकार इसे पहले भी वापस ले सकती है या इसमें संशोधन कर सकती है।

    क्या होगा असर?
    बड़े संस्थानों, उद्योगों और व्यावसायिक वाहन मालिकों को ईंधन खरीदने में बदलाव करना पड़ेगा। तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) की थोक और रिटेल बिक्री की निगरानी बढ़ेगी। शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों पर भी इस फैसले का असर देखा जा सकता है।

    कीमतों का संदर्भ
    यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण घरेलू ईंधन कीमतें बढ़ाई गई हैं। दिल्ली में 15 मई के बाद पेट्रोल की कीमत में करीब 4.75 रुपये प्रति लीटर (लगभग 5%) और डीजल में 4.82 रुपये प्रति लीटर (लगभग 5.49%) की बढ़ोतरी हुई है।

    ज्ञात हो, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति समस्याओं के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें प्रभावित हुई हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम ईंधन के सही उपयोग को सुनिश्चित करने और अनावश्यक दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)

  • सागर शराब कांड में प्रशासन का सख्त रुख, आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजर; मचा हड़कंप

    सागर शराब कांड में प्रशासन का सख्त रुख, आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजर; मचा हड़कंप

     सागर 

    सागर के बंडा में  जहरीली शराब कांड के आरोपियों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस कांड से जुड़े आरोपियों की अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सरकारी अमला संपत्तियों की जांच परख करने गुरुवार सुबह से ही मौके पर पहुंच गया। 

    तीन विशेष टीमें  तैनात
    प्रशासन ने तीन अलग-अलग विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें आपसी समन्वय के साथ चिन्हित स्थानों पर कार्रवाई कर रही हैँ। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। 

    मकान और गोदाम पर चला बुलडोजर
    प्रशासन और पुलिस की ओर से खुफिया इनपुट तथा राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों की संपत्तियों को चिन्हित किया गया है। बताया जा रहा है कि अवैध अतिक्रमण और कथित अवैध शराब कारोबार से अर्जित संपत्तियों में शामिल मकान और गोदामों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।  

    पांच जगहों पर कार्रवाई 
    प्रशासन की ओर से कुल पांच स्थानों को कार्रवाई के लिए चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी बताए जा रहे चंद्रभान राजपूत, मनीष लोधी और आशीष साहू के मकान, गोदाम और अनधिकृत तरीके से अर्जित अन्य संपत्तियां शामिल हैं।

    शराब माफियाओं में हड़कंप
    जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति है। प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार कर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। चिन्हित संपत्तियों के संबंध में राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।