Category: मध्य प्रदेश

  • रिहायशी भवनों में कारोबार करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, भोपाल हाईकोर्ट का सख्त रुख; 7 दिन में पेश करें कागजात

    रिहायशी भवनों में कारोबार करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, भोपाल हाईकोर्ट का सख्त रुख; 7 दिन में पेश करें कागजात

    भोपाल 

    भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं शहर में आवासीय और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण व गैर-कानूनी व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल व व्यावसायिक संचालकों को वैधानिक अनुमति पत्र नगरनिगम को दिखाने का निर्देश दिया है। जिस पर निगम विधि पूर्वक उनकी पड़ताल करेगा। दूसरी ओर, शहर के लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से 10 गुना तक ज्यादा अवैध निर्माण हो चुके हैं। नगर निगम की नोटिस व सीलिंग कार्रवाई के बीच अफसर अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने का रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।

    मास्टरप्लान नियमित करने की प्लानिंग
    शहर के जिन क्षेत्रों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डॅसिटी तय कर निर्माण की लिमिट तय कर रखी है, वहां बेशुमार व बड़े निर्माण हो गए है। अब इन निर्माणों को मास्टर प्लान के रास्ते नियमित कराने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों से व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने नगर निगम नोटिस और सीलिंग कर रहा है। दोनों ही पक्ष इसके लिए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे है। प्लानिंग एरिया के लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने बीते पंद्रह दिन से टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अफसर बैठकें कर रहे हैं। गौरतलब है कि लो-डेंसिटी एरिया में 10 हजार वर्गफीट जमीन पर 0.06 एफएआर से महज 600 वर्गफीट तक के निर्माण की अनुमति है, जबकि यहां दस गुना ज्यादा 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो गए।

    ये हैं लो-डेंसिटी के नियम
    ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ व मिंडोरी में लो-डेंसिटी तय है। इनमें 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर डेंसिटी तय है। इनमें निर्माण के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर यानि 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल जरूरी है। यहां निर्माण की अनुमति पर 0.06 एफएआर तय है। यानि 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 600 वर्गफीट निर्माण ही हो सकता है। इससे अधिक अवैध है। इसमें भी जमीन पर कुल अनुमति का छह फीसदी ही निर्मित किया जा सकता है।

    कार्रवाई का रास्ता साफ
    कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं।

    ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी
    रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है।

    संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    ये हैं स्थिति

    -कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास से अंदर के के क्षेत्र में निर्मित वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट के बंगले बना लिए। मामला कोर्ट में चला गया।

    -चार इमली, श्यामला हिल्स पर अवैध तौर पर बंगले बन गए।
    -नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी में 12 बड़ी कॉलोनियां बन गईं।
    -मिंडोरी और संबंधित क्षेत्र में बड़े मकान, रेस्टोरेंट विकसित हो गए।
    -केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी है, लेकिन इसकी ओर जाने वाली रोड किनारे अवैध तौर पर कॉलोनियां विकसित हो गईं।

    कोर्ट ने कहा-कागजात दिखाएं नगर निगम करेगा सभी के परीक्षण
    आवासीय क्षेत्र के मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अनुमति और वैधानिकता की जांच नगरनिगम भोपाल करेगा। हाईकोर्ट में सोमवार को 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। वहीं, मंगलवार को दस नम्बर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने सम्बंधी आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। शोकॉज नोटिस की याचिकाओं का निराकरण करते हुए कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब का विधि के अनुसार परीक्षण कर कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। मकानों को तोड़ने के मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने मकान तोड़ने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है।

    सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
    हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि अब अनुमति के नाम पर टालमटोल या बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि असली परीक्षा भोपाल नगर निगम की है, जिसे यह साबित करना होगा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति।

    शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई
    रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदा हो रही ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। रहवासियों का कहना हैं कि वे वर्षों से इन दिक्कतों को झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

  • डिजिटल नुकसान से जूझ रहे महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में पहल, साइबर वेलनेस सेंटर में मिलेगी नि:शुल्क सहायता

    डिजिटल नुकसान से जूझ रहे महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में पहल, साइबर वेलनेस सेंटर में मिलेगी नि:शुल्क सहायता

    महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में शुरू हुआ साइबर वेलनेस सेंटर

    साइबर अपराध और डिजिटल नुकसान के पीड़ितों को मिलेगी मुफ्त तकनीकी और कानूनी सहायता – महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया

     इंदौर

    साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल नुकसान का सामना कर रही महिलाओं और बच्चों को अब इंदौर में एक ही स्थान पर काउंसलिंग से लेकर कानूनी और तकनीकी सहायता तक मिल सकेगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को केंद्र का उद्घाटन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अहान फाउंडेशन के प्रोजेक्ट रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म और कोगटा फाउंडेशन के सहयोग से साइबर वेलनेस सेंटर का  इंदौर में शुभारंभ किया गया है। केंद्र का उद्देश्य साइबर घटनाओं के पीड़ितों और सर्वाइवर्स को तत्काल, मुफ्त और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के लिए मजबूत सहायता तंत्र तैयार करना है।

    केंद्र में साइबर नुकसान से प्रभावित लोगों को मुफ्त काउंसलिंग, मनो-सामाजिक एवं भावनात्मक सहायता, तकनीकी और कानूनी मार्गदर्शन तथा साइबर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराने में सहयोग मिलेगा। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों और समुदायों के लिए साइबर वेलनेस, डिजिटल रेजिलिएंस और साइबर अधिकारों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

    मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मामलों में पीड़ितों को मानसिक और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है।

     

  • MP हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधिपति बने न्यायमूर्ति कोगजे, राज्यपाल पटेल ने दिलाई शपथ

    MP हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधिपति बने न्यायमूर्ति कोगजे, राज्यपाल पटेल ने दिलाई शपथ

    राज्यपाल पटेल ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को दिलाई शपथ

    न्यायमूर्ति कोगजे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के बने 30वें मुख्य न्यायाधिपति

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने मध्य प्रदेश के 30 वें मुख्य न्यायाधीपति की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गुरूवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे।

    राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शपथ ग्रहण के बाद नव नियुक्त मुख्य न्यायाधिपति कोगजे को पुष्प-गुच्छ भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने शपथ ग्रहण समारोह का संचालन किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को नियुक्त किए जाने की अधिसूचना का वाचन किया। समारोह का प्रारंभ और समापन राष्‍ट्रीय गीत वंदे मातरम् तथा राष्‍ट्र गान जन-गण-मन के गायन के साथ हुआ।

    शपथ ग्रहण समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्‍द्र सिंह तोमर, उप मुख्‍यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्‍ल, कौशल विकास एवं रोजगार राज्‍यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्‍यक्ष अवधेश प्रताप सिंह, पूर्व राज्‍यपाल कप्‍तान सिंह सोलंकी, न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर, न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट, न्यायमूर्ति विनय सराफ, न्यायमूर्ति रमेश फड़के, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, अपर मुख्‍य सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्‍ला और संजय शुक्‍ल, राज्‍यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विधायक, सांसद मध्‍यप्रदेश, गुजरात और उत्तरप्रदेश राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालयों के न्‍यायमूर्तिगण, वरिष्‍ठ प्रशासनिक, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और आयोगों के पदाधिकारी मौजूद थे।

     

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आई 100 साल पुरानी मस्जिद, हाईकोर्ट से याचिका खारिज

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आई 100 साल पुरानी मस्जिद, हाईकोर्ट से याचिका खारिज

     इंदौर 

    उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत सड़कों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। कंठाल से बड़े गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रही करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने बुधवार को खारिज कर दिया। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाएं निरस्त कर दीं।
     उज्जैन की 100 साल पुरानी शाही मस्जिद के तोड़ने पर फिलहाल कोई रोक नहीं है। सिंहस्थ 2028 के तहत किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण के दायरे में यह मस्जिद भी आ रही है।उज्जैन नगर निगम ने इसे हटाने के लिए नोटिस दिया था जिसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर किसी तरह की रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका निराकृत कर दी।

    हाई कोर्ट में प्रस्तुत इन याचिकाओं में मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, भवन अधिकारी और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने याचिका निरस्त करने और कार्रवाई पर किसी तरह का स्टे नहीं दिए जाने की पुष्टि की है।

    मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत याचिका में नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा जारी सूचना पत्र को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी। कहा था कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और मुगलकालीन मस्जिद है।

    क्या है वजह

    प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मस्जिद को 100 वर्ष से अधिक पुराना और ऐतिहासिक बताया गया। पंचायत ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें कुछ भूमि के अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

    पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान के प्रतिनिधि और वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से दायर की गई थी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था।

    दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अशान हुसैन की अपर से लगाई गई थी। इसमें मप्र दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगाई गई थी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन नगर निगम और मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।

    याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि अभी विस्तृत लिखित आदेश आना बाकी है। याचिकाएं खारिज की गई हैं, लेकिन आदेश का अध्ययन करने के बाद फैसले के खिलाफ डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मस्जिद ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की है, इसलिए इसे हटाया नहीं जाना चाहिए।मस्जिद प्रबंधन ने पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया था।

    प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भीड़ का दबाव कम करने के लिए इस मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई मास्टर प्लान और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।

    अनवर कादरी की पार्षदी खत्म करने का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, दायर हुई याचिका

    इंदौर :नगर निगम वार्ड 58 से पार्षद रहे अनवर कादरी की पार्षदी समाप्त करने के मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है। याचिका कादरी की पत्नी ने दायर की है।याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने शासन से कहा कि वह दो दिन में स्पष्ट करे कि कादरी की ओर से की गई अपील की क्या स्थिति है। एडवोकेट विभोर खंडेलवाल के मुताबिक कादरी की पार्षदी खत्म करने के संभागायुक्त के निर्णय को प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन के समक्ष चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी जो अब भी लंबित है।

    अपील लंबित रहने के दौरान प्रमुख सचिव ने निर्वाचन आयोग से चुनाव के लिए अनुशंसा कर दी। इसी को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत हुई है। बुधवार को हुई सुनवाई में शासन कोर्ट को बताया कि फिलहाल वार्ड में चुनाव स्थगित कर दिए हैं।

    इस पर कादरी के वकील ने सवाल उठाया कि अपील लंबित है तो फिर ऐसी स्थिति में चुनाव कराए कैसे जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने अपील की स्थिति के बारे में पूछा जिस पर सरकारी वकील ने जानकारी लेने की बात कही। इस पर कोर्ट ने शासन को दो दिन का समय दिया है। शासन को बताना है कि कादरी की ओर से दायर अपील की क्या स्थिति है। मामले में अब 11 सितंबर को सुनवाई होगी।

    शाही मस्जिद 100 वर्ष पुरानी, ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध
    याचिकाओं में मस्जिद कमेटी ने उज्जैन नगर निगम के नोटिस को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रबंधन का दावा है कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्पूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख था। इसके अलावा 13 सितंबर 1985 के मप्र शासन के राजपत्र में भी मस्जिद और उसकी पैमाइश का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

    वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी
    प्रबंधन का यह भी कहना है कि वर्ष 1975 में यातायात सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दी गई थी। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं है। इसलिए धार्मिक स्थल को हटाने की कार्रवाई को गलत बताया था। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं ओर सरकार का पक्ष सुनने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अश्हार अली वारसी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हम विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश को देखने के बाद उसके खिलाफ हम अपील दायर करेंगे।

  • सीधी में पटवारी की शर्मनाक हरकत का वीडियो वायरल, 65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पार किया नाला; कार्रवाई

    सीधी में पटवारी की शर्मनाक हरकत का वीडियो वायरल, 65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पार किया नाला; कार्रवाई

    सीधी 
    जिले में एक पटवारी को जूतों की चिंता भारी पड़ गई और उन्हें निलंबित कर दिया गया है। पूरा मामला जिले के माटा गांव का है जहां से एक पटवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में पटवारी एक बुजुर्ग की पीठ पर लदकर नाला पार करते दिख रहे थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद बवाल मचा और अब जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है।

    जूते बच गए, पटवारी नहीं
    माटा गांव में बुजुर्ग व्यक्ति की पीठ पर सवार होकर पटवारी द्वारा पानी से भरे नाले को पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देश पर अपर कलेक्टर बीपी पाण्डेय ने माटा गांव पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं। वहीं मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गोपद बनास प्रिया पाठक द्वारा पटवारी हल्का माटा नीलेश नामदेव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रथम दृष्टया असंवेदनशील एवं अपमानजनक व्यवहार पाए जाने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत यह कार्रवाई की गई है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    बुजुर्ग की पीठ पर लदकर किया था नाला पार
    पूरा मामला माटा गांव से जुड़ा है, यहां रहने वाले ललवा केवट के घर और जमीन तक एक छोटे से नाले को पार कर ही जाना पड़ता है। पूरे साल इस नाले में थोड़ा बहुत पानी रहता है। करीब एक साल पहले किसान ललवा केवट की फसल और घर को जंगली जानवरों ने नुकसान पहुंचाया था। जंगली जानवरों के कारण हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए माटा गांव के पटवारी नीलेश नामदेव पहुंचे थे। जूते गीले न हों इस कारण नाले को पार करने के लिए पटवारी बुजुर्ग ललवा केवट की पीठ पर लद गए थे और नाला पार किया था। इसका वीडियो सामने आया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

  • जनजातीय छात्रावास का भी निरीक्षण: बच्चों से किया संवाद

    जनजातीय छात्रावास का भी निरीक्षण: बच्चों से किया संवाद

    संभागायुक्त ने बालाघाट के पाथरी ग्राम में की रात्रि चौपाल

    बैगा जनजातीय परिवारों के साथ संवाद, अधिकारियों को योजनाओं के लाभ के त्वरित निराकरण के निर्देश
    जनजातीय छात्रावास का भी निरीक्षण: बच्चों से किया संवाद
    हेल्थ स्क्रीनिंग कैम्प व्यवस्थाओं का लिया जायजा
    वनाधिकार पट्टा के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही के वन विभाग को निर्देश
    विभागीय योजनाओं में प्रगति संतोषजनक नहीं पाए जाने पर अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही के दिए निर्देश

    बालाघाट

    संभागायुक्त धनंजय सिंह ने बालाघाट जिले अंतर्गत बैहर विकासखंड के बैगा जनजातीय बाहुल्य ग्राम पाथरी में रात्रि चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनके त्वरित निराकरण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, वनाधिकार पट्टा, आहार अनुदान, पेयजल, रोजगार एवं आजीविका सहित शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की मैदानी स्थिति की समीक्षा की।

    संभागायुक्त सिंह ने कहा कि बैगा जनजाति को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर मिले और दूरस्थ क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। रात्रि चौपाल में संभागायुक्त द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र की योजनाओं की विभागीय अधिकारियों से विस्तृत समीक्षा करते हुए उपस्थित ग्रामीण जनों से वस्तुस्थिति का जायजा लिया।

    मौसमी एवं वर्षाजनित संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं उपचार, दस्तक-सह-स्टॉप डायरिया अभियान, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की समीक्षा की गई। आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति एवं पोषण आहार वितरण, छात्रावासों और आश्रमों की व्यवस्थाओं तथा स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की स्थिति की जानकारी भी विस्तार से ली गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों और परिवारों के पोषण एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए वर्षाजनित संक्रामक बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रभावी रूप से त्वरित कार्यवाही की जावे।

    महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और पोषण संबंधी कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली गई। विभागीय योजनाएं की प्रगति संतोषजनक नहीं पाए जाने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा करते हुए संभागायुक्त ने ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता, पेयजल स्रोतों के नियमित परीक्षण और क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संभागायुक्त ने जनजातीय विभाग के अधिकारियों को आहार अनुदान योजना का लाभ सभी बैगा परिवारों को सुनिश्चित कराने एवं योजना अंतर्गत राशि समय पर हितग्राहियों तक मिलने के लिए प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। संभागायुक्त सिंह ने ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत व्यक्तिगत शौचालय, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और आवास योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। संबल पंजीयन एवं अनुग्रह सहायता के लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की। राजस्व विभाग से अविवादित नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के प्रकरणों की जानकारी लेते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, जाति प्रमाण-पत्र की प्रगति ली तथा खाद्य विभाग को मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना तथा उज्ज्वला योजना का लाभ ग्रामीणों को सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। वन विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान वनाधिकार पट्टा और पशु हानि के मुआवजे की जानकारी ली। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड और उससे मिलने वाली सुविधाओं के संबंध में भी विभागीय अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर मिले इस हेतु एसडीएम और विभागीय अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की सतत मॉनिटरिंग करें।

    छात्रावास का निरीक्षण, विद्यार्थियों की सुविधाओं का लिया जायजा

    रात्रि चौपाल से पहले संभागायुक्त सिंह ने पाथरी स्थित शासकीय सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर टीकाकरण, छात्रवृत्ति, ठहरने संबधी व्यवस्थाएं, भोजन व्यवस्था और शैक्षणिक गुणवत्ता का जायजा लिया।उन्होंने सभी विद्यार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। टीकाकरण की व्यवस्था में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।

    पाथरी प्रवास के दौरान संभागायुक्त ने पंचायत भवन में आयोजित आयोजित हेल्थ कैंप स्क्रीनिंग का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और टीकाकरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को वर्षाजनित बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए आवश्यक उपाय प्रभावी रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संभागायुक्त धनंजय सिंह ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे अपने विभाग की सभी शासकीय योजनाओं का सैचुरेशन मोड में शत प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करावें।

    इस दौरान कलेक्टर कुमार सत्यम, सीसीएफ गौरव चौधरी सहित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

     

  • कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहे, असामाजिक तत्वों पर हो कठोर कार्रवाई  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहे, असामाजिक तत्वों पर हो कठोर कार्रवाई : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    आमजन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, सागर के अवैध शराब मामले की होगी न्यायिक जांच : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    लापरवाही और अनियमितता पर ज़ीरो टालरेंस, सबकी जवाबदेही तय की जाएगी
    सागर के अवैध शराब मामले में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा और कड़ा एक्शन
    इरशाद वली बनाए गए सागर संभाग के नए आईजी

    सागर 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को विदेश दौरे से लौटते ही सागर में अवैध शराब से मृत्यु के मामले में बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर के अवैध शराब मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि आमजन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मामले में सभी दोषियों पर कठोरतम  कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही और अनियमितता पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। सभी की जवाबदेही तय की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर दिलीप कुमार ने सागर संभाग के आयुक्त पद की कमान संभाल ली है। इस गंभीर मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त और निर्णायक प्रशासनिक निर्णय लेते हुए इरशाद वली को सागर पुलिस रेंज के नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की जिम्मेदारी सौंपी है।

    जिम्मेदारों पर कठोरतापूर्वक कार्रवाई की जाए सुनिश्चित

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब से लोगों की हुई मृत्यु के प्रकरण में कठोरतापूवर्क कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाए। जिले में नशा मुक्ति अभियान भी चलाया जाए जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने मृतकों के प्रति अपनी शोक संवेदना भी व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज सागर के बुन्देलखंड मेडिकल चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अपराध और असामाजिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिले के साथ-साथ आस-पास और सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा जहाँ कहीं भी शंका या संदिग्ध गतिविधि की गुंजाइश हो, वहाँ तत्परता से पड़ताल की जाए और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कहा कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा अपराधियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी निर्दोष के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो।

    अफवाह फैलाने वालों पर करे सख्त कार्रवाई
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की मंशा से सो
    शल मीडिया या अन्य विभिन्न माध्यमों पर अनावश्यक अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

    समाज को साथ लेकर चलेगा नशा विरोधी अभियान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में नशा विरोधी अभियान को गति देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। साथ ही, नशा मुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जनजागरूकता और नशा मुक्ति के प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जाएं।

    प्रदेश में कठोर कानून का है प्रावधान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार के रहते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय कठोर कानून बनाया गया कि इसमें धारा 49 और बाकी 304 जोड़ते हुए हत्या से लेकर आजीवन कारावास और फांसी तक की सजा देने का प्रावधान है। इस प्रकार की घटना में लिप्त है, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हमने प्रशासन को फ्री हैंड दिया है कि वह उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई करें, जिनके अवैध अतिक्रमण हैं या अलग से किसी ने इस प्रकार से अपना साम्राज्य चलाया है, उस पर भी काम करें।

    नशा मुक्ति के लिए सबको मिलकर प्रयास करने की जरूरत
    हमने पूरे राज्य में निर्देश जारी किए हैं कि नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए धार्मिक संस्थाओं के साथ, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ अलग-अलग स्तर पर शासन की ओर से भी नशा मुक्ति के अभियान चलाने की आवश्यकता है। हम सबको इससे निपटने के लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रतिबद्धता की जरूरत पड़ेगी।

    मुख्यमंत्री ने अस्पताल के वार्डों में जाकर जाना बंडा के प्रभावितों का हाल, परिजन को बंधाया ढांढस
    बंडा के अवैध शराब मामले के प्रभावितों को त्वरित राहत देने और उनका ढांढस बंधाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों का कुशलक्षेम जाना और पीड़ित परिवारों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने परिजन से कहा कि सरकार हर स्थिति में आपके साथ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रत्येक मरीज के पास जाकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति देखी। पीड़ितों के परिजनों से पूछा—"परिवार में कौन-कौन है? चिंता मत करिए, सरकार हर स्थिति में आपके साथ खड़ी है।" निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीएमसी के प्रभारी डीन, अधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सकों से पीड़ितों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। साथ ही आवश्यक दवाओं, टेस्ट और विशेषज्ञों की तैनाती 24 घंटे सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

    इस दौरान दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी, रहली विधायक गोपाल भार्गव, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, बंडा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमती निर्मला सप्रे, देवरी विधायक ब्रज बिहारी पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, श्याम तिवारी, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, डाक्टर्स, मौजूद थे।

     

  • मोदी के जन्मदिन पर BJP का मेगा प्लान, 17 सितंबर से निकलेंगी 20 यात्राएं; MP के 55 जिले होंगे कवर

    मोदी के जन्मदिन पर BJP का मेगा प्लान, 17 सितंबर से निकलेंगी 20 यात्राएं; MP के 55 जिले होंगे कवर

    भोपाल

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा 17 सितंबर से वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक 10-10 यात्राएं निकालने जा रही है। इन यात्राओं के लिए ऐसे रूट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि एक यात्रा का मार्ग दूसरी यात्रा से न टकराए।

    मध्यप्रदेश से होकर गुजरने वाले अलग-अलग मार्गों के जरिए प्रदेश के सभी 55 जिलों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी स्तर पर इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक के रूप में तैयार किया जा रहा है।

    इन यात्राओं में उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा कवर होगा। गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और दिल्ली से होकर ये यात्राएं गुजरेंगी।

    अलग-अलग नेताओं को दी जिम्मेदारी अब तक 13 रूट फाइनल किए जा चुके हैं, जबकि बाकी रूट को लेकर मंथन चल रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी है।

    यात्राओं का उद्देश्य केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा। इनमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने, सेवा गतिविधियों और 2047 के संकल्प को भी शामिल किया जाएगा।

    आम लोगों के सुझाव लेंगे बीजेपी नेता यात्रा की कार्ययोजना में जनभागीदारी, विकास, सेवा और सांस्कृतिक जुड़ाव को प्रमुखता दी गई है। हर प्रमुख पड़ाव पर स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, लाभार्थियों और समुदाय के दूसरे वर्गों को गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। सरकारी योजनाओं से जुड़ी व्यावहारिक सहायता और नागरिकों के सुझाव दर्ज करने की भी योजना है।

    25 आइकॉन में चुने जाएंगे मेधावी '25 आइकॉन' अभियान में हर पड़ाव से किसान, शिक्षक, महिला उद्यमी, युवा या खिलाड़ी जैसे स्थानीय प्रेरक व्यक्ति को चुना जाएगा।

    इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की छोटी वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप पर दिखाने का प्रस्ताव है। साथ ही 'चिट्ठी 2047 के नाम' के जरिए लोगों से पूछा जाएगा कि वे 2047 तक अपने क्षेत्र को किस रूप में देखना चाहते हैं।

    हर पड़ाव पर 'मेरे लिए भारत की प्रगति…' जनवाणी के जरिए नागरिकों की बात रिकॉर्ड की जाएगी। वाराणसी में इन आवाजों को जोड़कर 90 सेकेंड की फिल्म बनाने का प्रस्ताव है। स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों और सामग्री निर्माताओं को भी यात्रा से जोड़ा जाएगा।

    शहीदों की मिट्टी से लेकर चिकित्सा शिविर तक यात्रा के दौरान जिन क्षेत्रों का संबंध स्वतंत्रता सेनानियों या देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से है, वहां उनके गांव, स्मारक या समाधि स्थल की मिट्टी कलश में एकत्र करने की योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी।

    इसके अलावा चयनित पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सामान्य स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और शुगर की जांच तथा परामर्श होगा। हर पड़ाव पर सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण एवं सहायता डेस्क लगाने का भी प्रस्ताव है।

    2001 से 2026 तक की विकास यात्रा भी दिखाई जाएगी यात्रा में बुजुर्गों के अनुभव रिकॉर्ड किए जाएंगे। 'पहले और अब' प्रदर्शनी दीवार के जरिए पुरानी और मौजूदा तस्वीरों व दस्तावेजों के माध्यम से सड़क, स्कूल, घर और बिजली जैसी सुविधाओं में आए बदलाव दिखाने की योजना है।

    वहीं, 'विकास की यात्रा' नुक्कड़ नाटक में 2001 से 2026 तक एक परिवार की कहानी के जरिए बिजली, गैस कनेक्शन, आवास और शिक्षा जैसी सुविधाओं में हुए बदलाव को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा।

    नारी शक्ति सम्मेलन और क्विज भी होंगे स्थानीय योजनाओं के लाभार्थियों का सम्मान, नारी शक्ति सम्मेलन, पोस्टर प्रतियोगिता और नमो ऐप के पीपल्स कॉर्नर पर विजेता प्रविष्टियां प्रदर्शित करने का प्रस्ताव भी है।

    इसके साथ चलती-फिरती 'विकसित भारत 2047' संकल्प एवं हस्ताक्षर दीवार यात्रा के साथ चलेगी और अंत में वाराणसी में प्रस्तुत की जाएगी।

    जहां रात्रि पड़ाव, वहां 25 दीप जलाएंगे लाभार्थी रात्रि पड़ावों पर '25 साल, 25 दीप' कार्यक्रम होगा, जिसमें 25 लाभार्थी 25 दीप जलाकर दिन का सांस्कृतिक और भावनात्मक समापन करेंगे।

    प्रमुख पड़ावों पर पौधारोपण भी किया जाएगा और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय व्यक्ति, संस्था या विद्यालय को देने का प्रस्ताव है।

  • लाड़ली बहना की 40वीं किस्त कब आएगी? ₹1500 के लिए जानें संभावित तारीख और पेमेंट से जुड़ा बड़ा अपडेट

    लाड़ली बहना की 40वीं किस्त कब आएगी? ₹1500 के लिए जानें संभावित तारीख और पेमेंट से जुड़ा बड़ा अपडेट

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं के आधार लिंक और DBT-enabled बैंक खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह ट्रांसफर किए जाते हैं।अब महिलाओं को योजना की 40वीं किस्त का इंतजार है। सामान्य तौर पर सरकार हर महीने 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी करती है। ऐसे में इस बार भी 15 सितंबर से पहले राशि खाते में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    19 अगस्त को जारी हुई थी 39वीं किस्त
    इससे पहले सरकार ने रक्षाबंधन से पहले 19 अगस्त को लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त जारी की थी। उस दौरान पात्र महिलाओं के बैंक खातों में नियमित 1500 रुपये की किस्त के साथ 250 रुपये अतिरिक्त गिफ्ट के तौर पर भी ट्रांसफर किए गए थे।अब अगली किस्त को लेकर महिलाओं की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर बनी हुई है।

    किन महिलाओं को मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ?
    लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को दिया जाता है। योजना में विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।पात्रता के अनुसार आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र कम से कम 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए।

    इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ
    योजना के तहत कुछ श्रेणियों को अपात्र रखा गया है। यदि महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो वह योजना का लाभ नहीं ले सकती।इसके अलावा परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी पात्रता नहीं होगी। सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थायी कर्मचारी या संविदाकर्मी के रूप में काम करने वाले सदस्य वाले परिवार भी योजना से बाहर हैं।सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त करने वाले परिवारों को भी योजना का लाभ नहीं दिया जाता।

    दूसरी सरकारी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की पात्रता
    यदि कोई महिला किसी अन्य सरकारी योजना के माध्यम से हर महीने 1250 रुपये या उससे अधिक की राशि प्राप्त कर रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होगी।

    जमीन और वाहन को लेकर भी नियम
    योजना की पात्रता में परिवार की कृषि भूमि और वाहन की स्थिति को भी शामिल किया गया है। 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकते।इसी तरह ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं।

    महिलाओं को आधिकारिक घोषणा का इंतजार
    फिलहाल 40वीं किस्त को लेकर 15 सितंबर से पहले भुगतान की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, राशि ट्रांसफर की अंतिम तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी। 

    किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ?
    लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को मिलता है। इसमें विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं। आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए।

    किन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ?

    जिस महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, वह पात्र नहीं होगी। परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थाईकर्मी या संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत सदस्य वाले परिवार भी अपात्र होंगे। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं।

    इसके अलावा, जो महिला किसी अन्य सरकारी योजना से प्रतिमाह 1250 रुपये या उससे अधिक प्राप्त कर रही है, वह पात्र नहीं होगी। वर्तमान या भूतपूर्व सांसद/विधायक के परिवार, चयनित या मनोनीत बोर्ड, निगम, मंडल या उपक्रम के अध्यक्ष, संचालक अथवा सदस्य के परिवार भी अपात्र हैं।

    स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (पंच और उपसरपंच को छोड़कर) के परिवार, 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार और ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना का लाभ नहीं ले सकते।

     

  • मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को मिलेगा नया विस्तार, निवेश-रोजगार और उद्योग को बढ़ावा; गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा

    मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को मिलेगा नया विस्तार, निवेश-रोजगार और उद्योग को बढ़ावा; गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा

    यात्री परिवहन विजन समिट-2026
    मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन के विस्तार से निवेश, रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

    प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को करेंगे सुदृढ़
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को प्राथमिकता

    भोपाल 

    प्रदेश के नागरिकों को स्मार्ट, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल लोक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा यात्री परिवहन विजन समिट-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस समिट में प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और उद्योग के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर भी मंथन होगा।

    इसमें पूरे देश से आने वाले परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस ऑपरेटर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नीति-निर्माता प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यात्री परिवहन का रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किेया जायेगा।

    लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित

    मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड अंतर्गत ‘मोबिलिटी विज़न: 2030’ का लक्ष्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करना है। इसके अंतर्गत प्रदेश में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान की जायेगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा।

    इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर दिया जाएगा विशेष जोर

    पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से समिट में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। वर्तमान में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें प्रदेश में संचालित हैं। इसके साथ आगामी 6 महीनों में 486 पीएम ई-बसें और 34 इंटरसिटी बसें जोड़ी जाएंगी, जबकि वर्ष 2027 तक यह संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य है। प्रदेश में 100 बसों की क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग डिपो और सोलर इंफ्रॉस्ट्रक्चर भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे सालाना 70,000 टन से अधिक कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी।

    यात्री सुरक्षा, स्मार्ट तकनीक और 24×7 निगरानी

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सभी बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों से बसों के संचालन, लोकेशन, टाइमिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।

    पीपीपी मॉडल के जरिए निजी ऑपरेटरों की सशक्त भागीदारी

    आमजन के आवागमन को सुगम बनाने के लिये जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। यह समिट निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित कर मध्यप्रदेश को देश के सबसे उन्नत, पर्यावरण-अनुकूल और तकनीक-सक्षम सार्वजनिक परिवहन राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

    परिवहन क्षेत्र में निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    समिट से यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    कल दोपहर 12 बजे तक करा सकेंगे पंजीयन

    समिट में शामिल होकर अपने सुझाव देने के लिए इच्छुक प्रतिभागियों को ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। पंजीयन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है। इच्छुक प्रतिभागी दोपहर 12 बजे तक https://forms.gle/f9wEvWb444JkzJgX6 लिंक पर जाकर पंजीयन करा सकेंगे। साथ ही https://events.eletsonline.com/mpyatriparivahansummit/ लिंक पर जाकर समिट से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।