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  • ‘ मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन, 2,67,744 विद्यार्थियों ने भेजे निबंध और विचार

    ‘ मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन, 2,67,744 विद्यार्थियों ने भेजे निबंध और विचार

    देहरादून 

     मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने  हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित प्रेक्षागृह में ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ विषय पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में  प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर से जुड़े विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया और विकसित उत्तराखंड को लेकर उनके विचारों, सुझावों, सपनों तथा भविष्य की परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन भी किया।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों की ऊर्जा, उनकी सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है। प्रदेश की भावी पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज के विद्यार्थी ही कल के उत्तराखंड और भारत का नेतृत्व करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर से 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच, संवेदनशीलता और संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए निबंधों की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने इतनी अच्छी तरह अपने विचार व्यक्त किए हैं कि यह निर्णय करना कठिन है कि किसने अच्छा लिखा और किसने बहुत अच्छा लिखा।

    संवाद के दौरान रुद्रप्रयाग की कक्षा 11 की छात्रा सीमा सेमवाल ने पलायन विषय पर लिखे अपने निबंध के बारे में मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने इसे दो-तीन दिनों में लिखा है और पलायन को विषय इसलिए चुना, क्योंकि उन्होंने इसे स्वयं महसूस किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्य रूप से दो प्रकार का पलायन देखा जाता है—स्थायी और अस्थायी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के लिए घर से बाहर जाना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। बाहर जाकर पढ़ने, सीखने और अनुभव प्राप्त करने से युवाओं को बेहतर एक्सपोजर मिलता है। हालांकि, पहाड़ों में माताओं-बहनों को अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार और समाज को संभालते हुए स्वयं कार्य कर रही हैं तथा दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं।

    देवप्रयाग की छात्रा श्रेया सेमवाल ने ‘पहाड़ रहें, अपने रहें, मेरे सपने रहें’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने पहाड़ों में रोजगार और अवसरों के विस्तार के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर विचार रखे। वहीं जीईसी पौड़ी की छात्रा प्रिया ने विकसित उत्तराखंड को लेकर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब देश का प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिला और प्रत्येक राज्य विकास की मुख्यधारा से जुड़े और विकसित हो।

    छात्रा तमन्ना ने पलायन और खेती से होने वाली कम आय की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा—‘मेरा पहाड़, मेरा रोजगार, पत्थर की छाती पर बनेगा रोजगार।’ मुख्यमंत्री ने उनके विचार की सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक सोच का परिचायक है। परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन हमारा संकल्प मजबूत होना चाहिए कि जीवन में हमें कुछ बेहतर करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को अपनी परिस्थितियों को अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

    छात्रा सृष्टि ने सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के प्रति लोगों के भरोसे से जुड़े सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज की पीढ़ी अच्छे और बेहतर की समझ रखती है। युवाओं को अपने जनपद और प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों तथा विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी रखनी चाहिए और सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

    रुद्रप्रयाग की छात्रा अनुष्का ने पलायन रोकने से जुड़े अपने विचार साझा किए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, इसके बावजूद सरकार द्वारा गांव-गांव तक बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और सरकार निरंतर इस दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 500 से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित किए जा रहे हैं तथा रिवर्स माइग्रेशन भी हो रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का लक्ष्य रखें।

    इशिका नेगी और गौरव बिष्ट ने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा चारधाम यात्रा से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। विद्यार्थियों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी अपने विचार रखे।

    छात्र मुकेश कुशवाहा ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-छोटे गांवों तक हेलीकॉप्टर एंबुलेंस जैसी सुविधा पहुंचाने तथा विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की ट्रेनिंग उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इसे महत्वपूर्ण सुझाव बताते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा रखे गए सभी विचारों और सुझावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके लिए विशेष है, क्योंकि उन्हें विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों के विचारों से उनकी परिकल्पना, ज्ञान, संवेदनशीलता और भविष्य को लेकर उनकी सोच का पता चलता है। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों के भीतर आगे बढ़ने और कुछ बेहतर करने की तीव्र इच्छा दिखाई देती है। यही ऊर्जा विकसित उत्तराखंड के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवा हैं और भविष्य का उत्तराखंड एवं भारत युवाओं के सपनों, संकल्प और मेहनत से बनेगा। वर्ष 2047 में भारत कैसा हो, उसमें युवाओं का क्या योगदान हो, उनकी क्या भूमिका हो और व्यवस्थाएं कैसी होनी चाहिए—इन सभी विषयों पर युवाओं की सोच और सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में प्रत्येक युवा की भूमिका अहम है और युवाओं को अपने सपनों को लक्ष्य में बदलकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवा विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री युवा योजना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं के विरुद्ध भी राज्य सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं, ताकि योग्य युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष अवसर मिल सकें।

    कार्यक्रम के दौरान छात्रा अदिति गौतम ने मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी को उनके द्वारा बनाई गई एक चित्रकृति भेंट की। बेहतर सहभागिता के लिए नोडल अधिकारी शिक्षक अंकुश को सम्मानित किया गया। वहीं रुद्रप्रयाग जनपद से निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग  विशाल मिश्रा को भी सम्मानित किया गया।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने सपनों को अपना लक्ष्य बनाएं, निरंतर मेहनत करें और अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा का उपयोग प्रदेश तथा देश के निर्माण में करें। उन्होंने कहा कि आने वाला उत्तराखंड युवाओं के सपनों का उत्तराखंड होगा और इसके निर्माण में प्रदेश के प्रत्येक युवा की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

     कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल मती नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मती श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी मती वरुणा अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

  • सरकार  गांवों, पंचायतों, कस्बों सभी जगह पहुंचेंगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसें

    सरकार गांवों, पंचायतों, कस्बों सभी जगह पहुंचेंगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की बसें

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की लाडली बहनें लाभ लेने वाली नहीं बल्कि लाभ कमाने वाली बन रही है। नारी सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं हो सकता है, इसके लिये प्रदेश सरकार दृढ़ संकल्पित होकर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को आगर-मालवा से प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार से अधिक लाड़ली बहनों को लाड़ली बहना योजना की 40वीं किश्त के रूप में सिंगल क्लिक से 1835 करोड़ रुपए से अधिक की प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की। इसमें आगर-मालवा जिले की 1 लाख 13 हजार से अधिक लाड़ली बहनें भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

    मुख्यमंत्री ने आगर मालवा जिले को 254 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 50 विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 226 करोड़ रुपए से 33 विकास कार्यों का भूमिपूजन और क़रीब 28 करोड़ रुपए से 17 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने लगभग 118 करोड़ रुपए की लागत से 3 सड़क परियोजनाओं और 19 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाले शासकीय विधि महाविद्यालय का भूमिपूजन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगर में एक बड़ी गौशाला का निर्माण करने और आगर-मालवा जिले के हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मनुष्य की 'जैसी दृष्टि-वैसी सृष्टि'। विकास के लिए मन में संकल्प शक्ति होना जरूरी है और हम इसी संकल्प शक्ति से प्रदेश के विकास के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। हमने नागरिकों से विकास का जो भी वादा किया है, उसे पूरा करके भी दिखाया है। 'सच्चा वादा-पक्का काम' अब यही हमारी सरकार की मुख्य पहचान बन गया है।

    पट्टों की पक्की रजिस्ट्री कराकर पट्टेधारियों को नि:शुल्क देगी सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सितम्बर जनसेवा को समर्पित महीना है। आने वाली 17 सितम्बर से प्रदेश में जनसेवा से जुड़े दो बड़े काम प्रारंभ होने हैं। उन्होंने कहा कि 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन योजना-2026' के तहत हमारी सरकार 17 सितम्बर से एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऐसे सभी 50 लाख से अधिक पट्टेधारियों को, जिनके पास पट्टे तो हैं, परंतु इसकी रजिस्ट्री नहीं है, इन सभी को हमारी सरकार पक्की रजिस्ट्री कराकर नि:शुल्क रूप से पट्टेधारियों को प्रदान करेगी। इन 50 लाख पट्टों की पक्की रजिस्ट्री का शुल्क सरकार अपने खजाने से वहन करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूरे देश में मध्यप्रदेश ही सबसे पहले ऐसा नवाचारी और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है।

    25 सितम्बर से प्रारंभ होगी 'प्रदेश की अपनी सुगम बस सेवा'

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 17 सितम्बर से ही प्रदेश में अगले एक माह (17 अक्टूबर) की अवधि का 'सेवा संकल्प अभियान' प्रारंभ होने जा रहा है। इस अभियान में प्रदेशवासियों को जनसेवा और लोक कल्याण की नई-नई सौगातें दी जायेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान ही 25 सितम्बर (अनंत चतुर्दशी) से 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' का मंगल आरंभ कर 'प्रदेश की अपनी सुगम बस सेवा' की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सुगम बसें प्रदेश के गांव-गांव, पंचायत-पंचायत, कस्बे, ब्लॉक, तहसील सहित सभी छोटे-बड़े नगरों तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 लाख किमी का रोड़ नेटवर्क उपलब्ध है। प्रदेश में वर्ष 2030 तक 15 हज़ार से अधिक बसें चलाई जायेंगी।

    आशीर्वाद का दीपक जरुर जलाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन है। प्रधानमंत्री  मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा भारत अब विश्व के अग्रणी देशों में आ गया है। उनके अबतक के सफल कार्यकाल में हम विश्व की तीसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 'सेवा संकल्प अभियान' के पहले दिन अर्थात 17 सितम्बर को प्रदेश में एक साथ एक समय पर 58 लाख आशीर्वाद के दीपक जलाये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सभी लाड़ली बहनों और शासकीय योजनाओं का हितलाभ पाने वाले सभी लाभार्थियों से कहा कि वे सब 17 सितम्बर को शाम 7 बजे अपने-अपने घरों और प्रतिष्ठानों में आर्शीवाद का दीपक जलाकर प्रधानमंत्री  मोदी को उनके जन्मदिन का आर्शीवाद रूपी उपहार जरूर दें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की लाड़ली बहनों को तीज और गणेश चतुर्थी की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि बहनों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना हमारा लक्ष्य है। हम अपनी बहनों से किया हर वादा पूरी निष्ठा और समर्पण से निभायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहनों के मान सम्मान और सुरक्षा में कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। हमारी सरकार बहनों की आजीविका, स्व रोजगार और इनके आर्थिक स्वावलंबन के लिए सभी प्रबंध कर रही है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के सद्प्रयासों से हमारी बहनें अब सिर्फ़ हितलाभ पाने वाली ही नहीं, अपितु अपना हित स्वयं सृजित करने और लाभ कमाने वाली भी बन रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश की 4 लाख से अधिक बहनें अब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की वित्तीय और तकनीकी मदद और स्व-उद्मशीलता से अब उद्योगपति बन रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिलाओं के हित में लिए किये जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना सिर्फ़ आर्थिक सहायता का माध्यम न होकर महिलाओं के आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी बहनों के सुखद, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

    समारोह में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री तथा जिला प्रभारी मंत्री  नागर सिंह चौहान, सांसद  महेन्द्र सिंह सोलंकी, विधायक  माधव सिंह, मधु गहलोत, जिला पंचायत अध्यक्ष मती मुन्नाबाई चैहान, जिलाध्यक्ष  ओम मालवीय सहित जनप्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

     

  • प्रदेश का दूसरा साइंस प्ले पार्क नरसिंहपुर में होगा तैयार, डाइट में 30 लाख से होगा निर्माण

    प्रदेश का दूसरा साइंस प्ले पार्क नरसिंहपुर में होगा तैयार, डाइट में 30 लाख से होगा निर्माण

    नरसिंहपुर.

    जिले के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और प्रयोगात्मक सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल हुई है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के प्रयासों से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) नरसिंहपुर में मध्य प्रदेश के दूसरे साइंस प्ले पार्क की स्थापना की स्वीकृति मिली है।

    डाइट प्राचार्य राजीव किशोर श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग की वार्षिक कार्ययोजना 2026-27 के तहत इस पार्क के लिए 30 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।

    अध्ययन दल का भोपाल और अलीराजपुर का दौरा
    पार्क की स्थापना की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के लिए डाइट प्राचार्य के निर्देशन में गठित विज्ञान समिति के अध्ययन भ्रमण दल ने आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल और प्रदेश के पहले साइंस प्ले पार्क डाइट अलीराजपुर का दौरा किया। इस दल में वरिष्ठ व्याख्याता डॉक्टर अलका शर्मा, श्रद्धा शुक्ला, गोविंद बड़कुर, व्याख्याता संजय कुमार शर्मा और उच्च माध्यमिक शिक्षक पी.एस. पटेल शामिल रहे। दल ने राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों आर.के. त्रिपाठी और प्रेमसिंह सिसोदिया के मार्गदर्शन में वहां स्थापित विज्ञान मॉडलों, गतिविधियों और उपलब्ध संसाधनों का गहन अध्ययन किया।

    देखेंगे, छुएंगे, प्रयोग करेंगे और निष्कर्ष निकालेंगे विद्यार्थी
    प्रस्तावित साइंस प्ले पार्क में ऐसी गतिविधियां और मॉडल स्थापित किए जाएंगे, जिनसे विद्यार्थी देखकर, समझकर, छूकर और स्वयं प्रयोग करके विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को सरलता से समझ सकेंगे। इससे विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित न रहकर गतिविधि एवं प्रयोगात्मक अनुभव पर आधारित बनेगी। अध्ययन भ्रमण के बाद डाइट प्रशासन द्वारा 15 दिनों के भीतर साइंस प्ले पार्क की स्थापना की विस्तृत कार्ययोजना राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल को प्रस्तुत की जाएगी। इसमें पार्क के मॉडल, गतिविधियां, आवश्यक संसाधन और अन्य व्यवस्थाओं का पूर्ण विवरण होगा, जिसके बाद आगे की निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी।

    विद्यार्थी देख, समझकर निष्कर्ष निकाल सकेंगे –
    विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और प्रयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से डाइट नरसिंहपुर में प्रदेश का दूसरा साइंस प्ले पार्क विकसित किया जाएगा। भ्रमण दल के निरीक्षण के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे विद्यार्थी देखकर, समझकर, प्रयोग करके निष्कर्ष निकाल सकेंगे। 
    – राजीव किशोर श्रीवास्तव, प्राचार्य, डाइट नरसिंहपुर

    प्रायोगिक कार्य के प्रति रुचि विकसित होगी –
    जब विद्यार्थी साइंस प्ले पार्क से होकर प्रयोगशाला में प्रवेश करेंगे, तब उनमें प्रायोगिक कार्य के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होगी। गतिविधि आधारित मॉडल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और तर्क करने की क्षमता बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।
    – गोविंद बड़कुर, वरिष्ठ व्याख्याता एवं भ्रमण दल सदस्य

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह का किया शुभारंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह का किया शुभारंभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में सदैव मानवाधिकार आयोग का ध्येय वाक्य "हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार" चरितार्थ होता रहा है। हमारे वेद वाक्य में यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे अर्थात् जैसे मुझ में है, वैसा ही ब्रह्मांड में है, का भाव समाहित है। हमने सदैव प्रकृति सहित सभी के साथ यही भाव रखा है। सनातन संस्कृति में मनुष्य योनि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हमारे पुण्य कर्म मानव जाति के कल्याण के लिए हमें प्रेरित करते हैं। प्रसन्नता और गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग पिछले तीन दशकों से अपने ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा है। यह वाक्य हमारे लोकतंत्र की उस मूलभावना का प्रतीक है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समान गरिमा, समान अधिकार और न्याय का समान अवसर प्राप्त हो। मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग की तीन दशकों की यात्रा मानवाधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए समर्पित रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस पर प्रशासन अकादमी आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अजजा वर्ग के मानवाधिकारों पर केंद्रित स्मारिका एवं त्रैमासिक न्यूज लेटर का किया विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में स्मारिका, आयोग के त्रैमासिक न्यूज लेटर और आयोग की डायरी का विमोचन भी किया। मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानवाधिकारों के संरक्षण और शासकीय योजनाओं की उन तक पहुंच विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मिशन कर्मयोगी अंतर्गत श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मिशन कर्मयोगी स्थापना सप्ताह में जनजातीय कार्य विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।

    प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयोग ने यह विश्वास मजबूत किया है कि लोकतंत्र में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की है। मानवता यही है कि सभी के लिए समानता के भाव के साथ कार्य किया जाये। राज्य मानवाधिकार आयोग निष्पक्षता और अपने मूल्यों के आधार पर कार्य करता रहेगा। प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेशवासियों की सेवा में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी भारतीय संविधान में निहित लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों के प्रति पूर्णत: प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री  मोदी जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। कोविड 2019 महामारी के दौर में प्रधानमंत्री  मोदी ने कई देशों के नागरिकों को वैक्सीन उपलब्ध कराई और जियो और जीने दो के भाव को चरितार्थ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में अनेक वीर क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया। काकोरी कांड के बाद जब क्रांतिकारी पकड़े गए तो अंग्रेज अफसरों ने उन्हें यातनाएं दीं और कई अमानवीय कृत्य किए। प्रदेश में बालाघाट सहित देश के कई क्षेत्रों में नक्सलवाद की समस्या रही लेकिन तत्कालीन सरकारों ने नक्सलवादियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हमारी सरकार ने लाल सलाम को देश में सबसे पहले अंतिम सलाम किया। विश्व में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मानवाधिकारों के हनन से वर्तमान में भी कष्ट का वातावरण बना हुआ है।

    जनजातीय समाज का विकास हमारा सामाजिक और नैतिक दायित्वः जनजातीय कार्य मंत्री  विजय शाह

    मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए जनजातीय कार्य मंत्री  कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय समाज का विकास मात्र सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि हम सभी का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य भी है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आत्मसम्मान नहीं आता, तब तक हमारी विकास यात्रा अधूरी है। मंत्री  शाह ने प्रदेश में मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ नेतृत्व करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता के कारण ही प्रदेश में अंत्योदय की भावना के अनुरूप योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे पहले नक्सल मुक्त हुआ और अब विकास की सौगात नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप प्रदेश में विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह(पीवीटीजी) तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

    मंत्री  शाह ने बताया कि मध्यप्रदेश में जनजातीय विकास के लिए 8 हजार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके माध्यम से जनजातीय वर्ग, विशेष रूप से पीवीटीजी (बैगा, भारिया और सहरिया) को लाभान्वित करने के लिए उनके 14 गांवों में स्कूल, छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र, पक्के आवास और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    जीवन की स्वतंत्रता और गरिमा रखने वाले अधिकार ही मानवाधिकार

    आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि-उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। मानव अधिकारों से आशय उस पर्यावरण और परिस्थितियों से होता है, जो मानव को उसके जीवन की रक्षा, व्यक्तित्व के विकास और निर्माण के लिए अनिवार्य होती हैं। किसी व्यक्ति के जीवन की स्वतंत्रता और गरिमा रखने वाले अधिकार ही मानवाधिकार हैं। आजादी के बाद हमारे संविधान में मानवाधिकारों को प्रस्तावना के साथ ही नागरिकों के मूल अधिकारों के रूप में शीर्ष स्थान दिया गया है। आम नागरिकों में मानवाधिकारों के प्रति जागरुकता लाने के लिए आयोग ने जिले-जिले में जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों का त्वरित निराकरण करने के साथ ही अब तक जनजातीय वर्ग के पीड़ितों को अब तक 6 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं की जानकारी स्थानीय बोली में उपलब्ध कराना आवश्यक है

    ये अधिकारी एवं कर्मचारी हुये सम्मानित

    चिन्हित कुल 27 पुरस्कारों में से आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्री  शाह ने 09 अधिकारि/कर्मचारी/कार्यालयों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इनमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले चंबल संभाग के संभागीय उपायुक्त  बृजेश चन्द्र पाण्डेय, उज्जैन संभाग के संभागीय उपायुक्त  गणेश भांवर तथा इंदौर संभाग के संभागीय उपायुक्त  गणेश भांवर शामिल हैं। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले में बड़वानी की सहायक आयुक्त मती रंजना सिंह, जिला डिंडोरी के सहायक आयुक्त  राजेंद्र कुमार जाटव तथा जिला झाबुआ की सहायक आयुक्त मती सुचित्रा बिसेन शामिल रहे। व्यक्तिगत रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली सु साक्षी नरवरिया, शीघ्रलेखक, सु कामिनी कुपासिया, डाटा एंट्री ऑपरेटर और  रामदयाल चौधरी, निज सहायक शामिल हैं।

    जनजातीय समुदायों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध

    आयोग के प्रभारी सचिव  मुकेश कुमार वास्तव ने कहा कि 13 सितंबर 1995 को मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई थी। यह आयोग का 32वां स्थापना दिवस है। अनुसूचित जनजाति समुदाय ने प्रकृति और अपने सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को सदियों से संजो कर रखा है। यह उनके अधिकारों के संरक्षण पर गंभीर चिंतन का मंच है। जनजातीय समुदायों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध हैं। कार्यक्रम में मानवाधिकार आयोग, जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

     

  • नेशनल लोक अदालत में कुटुम्ब न्यायालय मुरैना में 60 पारिवारिक मामलों का निपटारा

    नेशनल लोक अदालत में कुटुम्ब न्यायालय मुरैना में 60 पारिवारिक मामलों का निपटारा

    मुरैना
     नेशनल लोक अदालत के अवसर पर जिला न्यायिक स्थापना मुरैना में आयोजित लोक अदालत में कुटुम्ब न्यायालय के लंबित भरण-पोषण एवं अन्य पारिवारिक मामलों में कुल 60 प्रकरणों का निपटारा किया गया। इनमें 24 प्रकरणों में पति-पत्नी के बीच आपसी सुलह कराई गई।
        कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री हितेंद्र द्विवेदी ने पक्षकारों को मध्यस्थता एवं आपसी राजीनामे के लाभ समझाते हुए कहा कि आपसी सहमति से मुकदमे के निपटारे में किसी की हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की जीत होती है। उन्होंने पति-पत्नी की समस्याओं को सुनकर आपसी मन-मुटाव दूर करने और सुखमय पारिवारिक जीवन के लिए समझाइश दी।
    लोक अदालत में गोपालपुरा, मुरैना के एक दंपति के वर्ष 2024 से लंबित भरण-पोषण विवाद का भी समाधान कराया गया। दोनों पक्ष वर्ष 2024 से अलग रह रहे थे तथा उनके बीच अन्य प्रकरण भी लंबित थे।

         प्रधान न्यायाधीश की समझाइश एवं आपसी संवाद के बाद दोनों पति-पत्नी साथ रहने के लिए सहमत हुए और खुशी-खुशी अपने घर लौटे। उन्हें आपसी प्रेम एवं सौहार्द का प्रतीक स्वरूप माला पहनाई गई तथा एक पौधा भेंट किया गया।
        इसी प्रकार बामौर, जिला मुरैना के एक दंपति के वर्ष 2022 से लंबित भरण-पोषण विवाद का भी आपसी सहमति से निराकरण किया गया। दोनों लंबे समय से अलग रह रहे थे और उनके बच्चे भी मां के साथ रह रहे थे। प्रधान न्यायाधीश की समझाइश के बाद दोनों के बीच सुलह हुई और वे साथ-साथ घर लौटे। इस अवसर पर उन्हें माला पहनाकर प्रेम एवं सौहार्द का संदेश दिया गया तथा पौधा भेंट किया गया।
        लोक अदालत में हुए इन समझौतों ने यह संदेश दिया कि संवाद, समझदारी और आपसी सहमति से पारिवारिक विवादों का सुखद समाधान संभव है।

  • अवैध शराब के विरुद्ध आबकारी विभाग की कार्रवाई

    अवैध शराब के विरुद्ध आबकारी विभाग की कार्रवाई

    मुरैना
     सागर जिले में जहरीली शराब की शिकायत के मद्देनजर कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ एवं उपायुक्त आबकारी संभागीय उड़नदस्ता ग्वालियर श्री संदीप शर्मा के निर्देशन में आबकारी विभाग द्वारा अवैध मदिरा के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।
        इसी क्रम में 11 सितम्बर को जिला आबकारी अधिकारी श्री पारस गौतम के नेतृत्व में वृत्त सबलगढ़ के ग्राम कोलिया, घुरजा, चंदपुरा सलाई, चंदपुरा, जारोली, रायपुर नहर एवं बंधरेंटा क्षेत्र में संयुक्त दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क) के तहत 3 प्रकरण दर्ज कर कुल 24.44 बल्क लीटर अवैध मदिरा जप्त की गई।
       आबकारी विभाग द्वारा अवैध एवं जहरीली शराब के विरुद्ध कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

  • रेलवे स्टेशन पर थूकने-कचरा फैलाने पर कार्रवाई, अब भरना होगा 1000 रुपये जुर्माना

    रेलवे स्टेशन पर थूकने-कचरा फैलाने पर कार्रवाई, अब भरना होगा 1000 रुपये जुर्माना

    भोपाल.

    ट्रेन से सफर करने वालों के लिए एक जरूरी खबर है। रेलवे स्टेशनों पर कचरा फेंकने या थूकने की आदत अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। रेल मंत्रालय ने स्वच्छता नियमों को सख्त करते हुए जुर्माने की रकम बढ़ा दी है। अगर कोई यात्री अब स्टेशन या रेल परिसर में गंदगी फैलाते पकड़ा जाता है, तो उसे 1000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।

    14 साल बाद नियमों में हुआ बदलाव
    आपको बता दें कि साल 2012 से रेलवे परिसर में गंदगी फैलाने वालों पर अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान था। अब पूरे 14 साल बाद रेलवे ने इस नियम की समीक्षा करते हुए बड़ा बदलाव किया है। नई अधिसूचना के तहत इस जुर्माने की राशि को दोगुना कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन ने इन नए नियमों को लागू भी कर दिया है, इसलिए अब सफर के दौरान खास सावधानी बरतने की जरूरत है।

    खानी पड़ेगी कोर्ट की हवा –
    अगर कोई यात्री सोचता है कि वह बहस करके या जुर्माना देने से इनकार करके बच निकलेगा, तो उसके लिए सख्त चेतावनी है। नए नियम साफ कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति मौके पर लगाया गया जुर्माना नहीं भरता है, तो उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
    ऐसे लोगों को सीधे सक्षम न्यायालय के सामने पेश किया जाएगा। इतना ही नहीं, कोर्ट में मामला जाने पर जज उस व्यक्ति पर 2000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकते हैं।

    स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना है असल मकसद –
    जुर्माने की राशि बढ़ाने के पीछे रेल मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य सिर्फ पैसा वसूलना नहीं है, बल्कि लोगों की आदतों में सुधार लाना है। रेलवे का मानना है कि स्टेशनों और परिसरों की साफ-सफाई व्यवस्था को तभी बेहतर बनाया जा सकता है, जब आम नागरिक भी इसमें सहयोग करें।

  • भोपाल-डबरा फर्जी पासपोर्ट मामले में STF की कार्रवाई तेज, 15 अफसर-पुलिसकर्मियों पर टिकी नजर

    भोपाल-डबरा फर्जी पासपोर्ट मामले में STF की कार्रवाई तेज, 15 अफसर-पुलिसकर्मियों पर टिकी नजर

    ग्वालियर/भोपाल.

    मध्य प्रदेश में जाली दस्तावेज से बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाने वाले नेटवर्क की कारगुजारियों ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच कर रही राज्य एसटीएफ ने अब तक जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से नागपुर से पकड़े गए एक आरोपित का पासपोर्ट गुजरात में कच्छ जिले के मथल गांव के पते पर बना पाया गया। कच्छ के पास पाकिस्तान बार्डर लगता है, इसलिए एसटीएफ ने इस आरोपित जाय चौधरी बरूआ से गहन पूछताछ कर रही है।

    बौद्ध विहार के पते पर बना प्रियान राय का पासपोर्ट
    वहीं महाराष्ट्र के उल्लासनगर से पकड़े गए प्रियान राय का पासपोर्ट ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर बना है। अब एसटीएफ के राडार पर सरकारी विभागों का वह सिस्टम है, जो सत्यापन से लेकर दस्तावेज बनाने वाली प्रक्रिया में शामिल है। यह वही दस्तावेज हैं, जिनके जरिये पासपोर्ट बने हैं। अब तक पुलिस और दूसरे विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर 15 लोगों के नाम सूची में हैं। इसमें ग्वालियर के डबरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला, एचसीएम भूपेंद्र गुर्जर सहित अन्य पुलिसकर्मी व पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी भी हैं।

    एसटीएफ ने की डबरा के पते पर बने पासपोर्टों की पड़ताल
    बता दें कि अभी तक मध्य प्रदेश के दतिया के डबरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर 17, भोपाल के अन्ना नगर स्थित बौद्ध मठ के पते पर 40, बैतूल से 11, छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिले से एक-एक फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला सामने आया है। एसटीएफ ने अभी डबरा के पते पर बने पासपोर्टों की पड़ताल की है। इसमें सामने आया था कि सभी के फर्जी तरीके से आधार कार्ड आरोपित रियाल चौधरी ने बनवाए थे। वह असम के कामरूप जिले का रहने वाला है। अन्य जिलों से बने पासपोर्ट में भी उसकी भूमिका हो सकती है। मामले में अभी तक चार आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। एसटीएफ की जांच के दायरे में प्रदेश के पांच जिले ग्वालियर, भोपाल, पांणूर्ना, छिंदवाड़ा, बैतूल के अलावा दूसरे जिले भी हैं। यहां बौद्ध विहार व आंबेडकर पार्क के पते पर कितने ऐसे लोगों के पासपोर्ट बने जो कुछ समय पहले ही यहां आए थे। इन सभी के दस्तावेज, पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं।

    200 तक पहुंच सकती है, पासपोर्ट की संख्या
    जांच अधिकारियों को आशंका है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर बने पासपोर्टों की संख्या 200 तक पहुंच सकती है। अभी अन्य पासपोर्ट की जांच जारी है, जो इन्हीं पते पर बने हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में अब तक ऐसे 70 फर्जी पासपोर्ट की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अभी 100 से ज्यादा पासपोर्ट और हैं, जिनकी जांच चल रही है। यह भी संदिग्ध हैं।

    सत्यापन कर्मचारियों की सूची तैयार –
    नागपुर से पकड़े गए बांग्लादेशी का पासपोर्ट गुजरात के कच्छ के पते पर बना था। वहां भी एक टीम भेजी जाएगी। सत्यापन प्रक्रिया में शामिल पुलिस अधिकारी, पुलिसकर्मी एवं दूसरे विभागों के सरकारी कर्मचारियों की सूची तैयार की है।
    – राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ।

  • मास्टर प्लान से बदलेगी 62 गांवों की तस्वीर? कृषि, ग्रीन बेल्ट और आवासीय जमीन पर टिकी निगाहें

    मास्टर प्लान से बदलेगी 62 गांवों की तस्वीर? कृषि, ग्रीन बेल्ट और आवासीय जमीन पर टिकी निगाहें

    जबलपुर.

    जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।

    पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा।

    इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर
    पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र
    शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी।

    धारा 16 के तहत विकास योजना अहम
    मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा।

    डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार
    62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं।

    देरी ने बढ़ाया असमंजस
    मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है।

  • Metro TDR Policy: भोपाल में मेट्रो के 500 मीटर दायरे को बनाया जाएगा रीसिविंग एरिया, जमीन-मकान पर असर की चिंता

    Metro TDR Policy: भोपाल में मेट्रो के 500 मीटर दायरे को बनाया जाएगा रीसिविंग एरिया, जमीन-मकान पर असर की चिंता

    भोपाल 

    भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना के आसपास विकास व्यवस्था को लेकर एक अहम बदलाव की तैयारी चल रही है। भोपाल विकास योजना 2005 के तहत मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500-500 मीटर के क्षेत्र को ‘रीसिविंग एरिया’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस व्यवस्था का सीधा संबंध हस्तांतरणीय विकास अधिकार यानी TDR से है। प्रस्ताव को लेकर आपत्तियां और चिंताएं सामने आई हैं, क्योंकि इसके लागू होने से मेट्रो कॉरिडोर के आसपास निर्माण क्षमता, व्यावसायिक गतिविधियों और जमीन-मकान के मूल्य पर असर पड़ सकता है।

    मेट्रो के आसपास होगा रीसिविंग एरिया विकसित
    प्रस्ताव के अनुसार मेट्रो लाइन के दोनों तरफ 500 मीटर तक के क्षेत्र को रीसिविंग एरिया के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके तहत संबंधित क्षेत्रों में अतिरिक्त विकास अधिकार का उपयोग करके भवन निर्माण की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। मौजूदा विकास व्यवस्था की तुलना में अतिरिक्त एफएआर उपलब्ध होने से मेट्रो के आसपास अधिक घनत्व वाला आवासीय और व्यावसायिक विकास संभव होगा। भोपाल की विकास योजना में भी मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर क्षेत्र को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट से जोड़ने की अवधारणा पहले से मौजूद है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मेट्रो के आसपास ऐसी शहरी संरचना तैयार करना है, जहां आवास, कारोबार और अन्य सुविधाएं सार्वजनिक परिवहन के करीब विकसित हों। इससे मेट्रो का उपयोग बढ़ाने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत भोपाल मेट्रो परियोजना में भी TDR और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को परियोजना से जुड़े मूल्य संवर्धन और शहरी विकास के साधन के रूप में शामिल किया गया था।

    रहवासियों के लिए चिंता का कारण
    हालांकि, प्रस्तावित बदलाव को लेकर रहवासियों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास निर्माण की अनुमति और एफएआर बढ़ने से जमीन तथा संपत्तियों की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसका असर उन मध्यम और निम्न-मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने की आशंका है, जो इन क्षेत्रों में पहले से रह रहे हैं। अधिक निर्माण क्षमता के कारण क्षेत्र में आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने पर यातायात, पार्किंग और बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अतिरिक्त विकास अधिकार खरीदने के बाद निर्माण क्षमता में कई गुना वृद्धि संभव होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा एफएआर की तुलना में यह क्षमता तीन से पांच गुना तक पहुंच सकती है। ऐसे में मेट्रो स्टेशनों के आसपास ऊंची इमारतों, अधिक आवासीय इकाइयों और व्यावसायिक परियोजनाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है।

    TDR व्यवस्था नई नहीं
    भोपाल में TDR की अवधारणा नई नहीं है। मध्यप्रदेश में हस्तांतरणीय विकास अधिकारों के लिए 2018 में नियम बनाए गए थे और भोपाल मेट्रो परियोजना के लिए उत्पादन क्षेत्र तथा TDR व्यवस्था से संबंधित अधिसूचनाएं पहले भी जारी की जा चुकी हैं। राज्य के नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के रिकॉर्ड में भोपाल मेट्रो के लिए TDR नियमों के तहत उत्पादन क्षेत्र अधिसूचित किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख मौजूद है। मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि और पुनर्वासन के मामलों पर भी प्रशासन की प्रक्रिया जारी है। जिला भोपाल की आधिकारिक वेबसाइट पर अगस्त 2026 में ऑरेंज लाइन के स्वीकृत मेट्रो मार्ग से जुड़े भूमि अधिग्रहण संबंधी नोटिस प्रकाशित किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि परियोजना के विभिन्न हिस्सों में भूमि और विकास से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी भी आगे बढ़ रही हैं।

    आपत्तियों और सुझावों पर हो सकती है सुनवाई
    अब प्रस्तावित रीसिविंग एरिया को लेकर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में आपत्तियों और सुझावों पर सुनवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सुनवाई के बाद प्राप्त आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा और उसके आधार पर मास्टर प्लान में संशोधन का अधिसूचना प्रस्ताव आगे बढ़ सकता है। यदि संशोधन लागू होता है तो भोपाल मेट्रो कॉरिडोर के आसपास भविष्य के निर्माण और भूमि उपयोग की तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।