Category: मध्य प्रदेश

  • MP Rain Alert: इंदौर-जबलपुर-सागर-नर्मदापुरम में खास चेतावनी, सामान्य से 8% कम बारिश

    MP Rain Alert: इंदौर-जबलपुर-सागर-नर्मदापुरम में खास चेतावनी, सामान्य से 8% कम बारिश

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में कुछ दिनों के ब्रेक के बाद एक बार फिर मानसून एक्टिव हो गया है. प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार को बारिश हुई. मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मानसून सिस्टम का असर बना रहेगा। 

    शुक्रवार को भोपाल समेत कई जिलों में मौसम बदला और तेज बारिश हुई. भोपाल में बारिश के साथ तेज आंधी भी चली. इसके कारण कई इलाकों में कुछ समय के लिए विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई. सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा. दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। 

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया अब प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रहा है. इसी सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर दोबारा शुरू हुआ है. आने वाले दिनों में इस सिस्टम का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल सकता है। 

    भोपाल समेत कई जिलों में बारिश
    शुक्रवार को भोपाल में बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी। दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रह सकता है। 15 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव की समस्या हो सकती है। वाहन चालकों को कम विजिबिलिटी में धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी गई है। तेज आंधी के समय पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहना भी जरूरी है। आने वाले दिनों में बारिश से राहत तो मिलेगी, लेकिन खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी रहेगा।

    बारिश नहीं होने से गर्मी-उमस दोनों बढ़ी

    बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में पिछले 3 से 4 दिन बारिश नहीं हुई। इस वजह से गर्मी और उमस दोनों का असर बढ़ गया। बारिश शुरू होने से लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।

    प्रदेश में अब तक 31.5 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार, अब तक हुई बारिश की बात करें तो इस सीजन 801.3 मिमी यानी, 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 34.2 इंच (868.6 मिमी) की तुलना में 2.7 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 8 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में औसत से 14% बारिश कम हुई है।

    33 जिलों में 1% से 56% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 3% से 26% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। बीते एक सप्ताह से यहां के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन बुधवार तक आंकड़ा एक प्रतिशत हो गया।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 56% कम पानी गिरा है।

    इन 22 जिलों में ज्यादा बारिश

    IMD की मानें तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    15 सितंबर तक बारिश का दौर
    मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण प्रदेश में 15 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इस दौरान कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश भी होने का अनुमान है. कहीं-कहीं तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 

    तीन-चार दिन से थमी थी बारिश, अब फिर राहत
    प्रदेश के कई इलाकों में पिछले तीन-चार दिन से बारिश नहीं होने के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई थी। शुक्रवार को बारिश शुरू होने के बाद मौसम बदला और लोगों को राहत मिली। भोपाल में बारिश के दौरान तेज हवा के कारण सड़क पर दृश्यता काफी कम हो गई। दमोह में तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया। खंडवा में भी दोपहर में पहले तेज हवा चली और इसके बाद बारिश हुई। टीकमगढ़ में बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहाना हो गया।

    31.5 इंच बारिश, सामान्य आंकड़े से अभी 2.7 इंच पीछे
    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 801.3 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अभी 2.7 इंच यानी 8 प्रतिशत बारिश कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब एक प्रतिशत रह गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    33 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम
    प्रदेश के 33 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में कमी 3 से 26 प्रतिशत तक है। इनमें बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी शामिल हैं। पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में कमी ज्यादा है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम पानी गिरा है।

    22 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    दूसरी ओर अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। 

    इन इलाकों में ज्यादा असर
    इस समय भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम के जिलों में देखने को मिल सकता है. इसके अलावा भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है. बारिश के कारण तापमान में गिरावट आने से लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने लोगों से बारिश और तेज आंधी के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है. खासकर वाहन चालकों को कम विजिबिलिटी में स्लो स्पीड से गाड़ी चलाने और जरूरत न होने पर खुली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। 

  • चित्रकूट में मंदाकिनी ने बढ़ाई चिंता, घरों में घुसा पानी; अतिक्रमण ने बदली नदी की धारा

    चित्रकूट में मंदाकिनी ने बढ़ाई चिंता, घरों में घुसा पानी; अतिक्रमण ने बदली नदी की धारा

    चित्रकूट /सतना

    सतना मुख्यालय और तराई इलाके में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। शनिवार सुबह तक नदी का पानी लगातार बढ़ता रहा। रामघाट समेत दूसरे घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। 

    सावधानी के तौर पर प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग लगा दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को निचले इलाकों में जाने से रोका गया है। घाट किनारे के दुकानदारों को भी सतर्क रहने और नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए सामान सुरक्षित जगह पर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर रख रहा है।

    जलस्तर खतरे से करीब 3 मीटर नीचे फिलहाल राहत की बात यह है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3 मीटर नीचे है। हालांकि, रातभर हुई बारिश के बाद पानी तेजी से बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पिछले दिनों आई बाढ़ के बाद नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी को लेकर घाटों पर खास नजर रखी जा रही है।

    शुक्रवार को दिनभर बादल आते-जाते रहे। कभी हल्की बारिश हुई तो कुछ देर बाद तेज धूप निकल आई। इससे अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई और पारा 31.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से आधा डिग्री ज्यादा रहा। न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री रहा, जो सामान्य था।

    शाम को मौसम ने अचानक करवट बदली और करीब 15 मिनट तक हल्की से मध्यम बारिश हुई। इसके बाद रात 11.30 बजे से तेज बारिश शुरू हुई, जो रातभर रुक-रुककर जारी रही। 24 घंटे में आधा इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली।

    ये है मौसम सिस्टम मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र वर्तमान में ओडिशा के ऊपर बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से छत्तीसगढ़, दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश होते हुए राजस्थान तक बनी हुई है। इसके प्रभाव से सतना समेत रीवा संभाग में अगले दौर में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

    1000 करोड़ लीटर पानी घरों में घुसा

    सतना जिले के चित्रकूट में 5 दिनों में 3 बार आई बाढ़ के पीछे अतिक्रमण, अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 साल पहले मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण के सर्वे के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर आरोप ये भी है कि नदी संरक्षण के लिए बने रिवर फ्रंट कॉरिडोर की वजह से भी प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ है। 29 अगस्त की बाढ़ से चित्रकूट में 500 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान का अनुमान है, जबकि घरों और दुकानों में करीब 1 हजार करोड़ लीटर पानी घुसने का दावा किया गया है।

    अब कलेक्टर ने नदी के बहाव में बाधा बने अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए 5 सदस्यीय टीम बनाई है। भास्कर ने विशेषज्ञों से बात कर समझा कि अतिक्रमण से मंदाकिनी का बहाव कैसे प्रभावित हुआ, एनजीटी के निर्देश क्या थे और इतने वर्षों में प्रशासन ने क्या कार्रवाई की।

    कैसे घरों में घुसा 1000 करोड़ लीटर पानी? समझिए इसका वैज्ञानिक गणित

    पर्यावरणविद और प्रोफेसर घनश्यामदास गुप्ता ने इसका वैज्ञानिक आकलन समझाया। उनके मुताबिक चित्रकूट में मंदाकिनी की लंबाई करीब 5 किलोमीटर (5000 मीटर) है और दोनों किनारों पर कम से कम 100-100 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण व अतिक्रमण है।

    यदि अतिक्रमण वाले दोनों किनारों की लंबाई 5 किलोमीटर और चौड़ाई 100-100 मीटर मानें, तो कुल क्षेत्रफल 10 लाख वर्ग मीटर बनता है। 10 मीटर ऊंचाई मानने पर यह 1 करोड़ क्यूबिक मीटर यानी 1,000 करोड़ लीटर के बराबर होगा।

    विशेषज्ञ के इस आकलन के मुताबिक, यदि यह जगह उपलब्ध होती तो इतना पानी वहां समा सकता था। अतिक्रमण और निर्माण के कारण पानी के फैलाव की जगह कम होने से बाढ़ का असर बढ़ा।

    अतिक्रमण हटाने 5 सदस्यीय टीम
    कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने मंदाकिनी नदी के तटीय क्षेत्रों में हुए निर्माण कार्यों की जांच के लिए मझगवां एसडीएम के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम गठित की है।

    टीम सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन के आधार पर नदी किनारे के निर्माणों का परीक्षण कर जरूरी वैधानिक कार्रवाई करेगी।

    जांच टीम में चित्रकूट नगर परिषद के सीएमओ, नायब तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के एसडीओ तथा नगर परिषद के सब इंजीनियर को शामिल किया गया है। टीम नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधक सरकारी और निजी निर्माणों को चिन्हित करेगी।

    हाई फ्लड लेवल भी होगा तय
    जांच के दौरान मंदाकिनी नदी के हाई फ्लड लेवल को भी चिन्हित किया जाएगा। बता दें कि 28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ के दौरान आरोग्यधाम में नदी का जलस्तर तय हाई फ्लड लेवल 139.60 मीटर से काफी ऊपर पहुंच गया था।

    प्रशासन के अनुसार जलस्तर करीब 145.76 मीटर तक पहुंचने से चित्रकूट में बड़े पैमाने पर तबाही हुई।

  • MP Bus Service: यात्रियों को मिलेंगी स्मार्ट सुविधाएं, रूट से छेड़छाड़ पर अलार्म देगा सिस्टम

    MP Bus Service: यात्रियों को मिलेंगी स्मार्ट सुविधाएं, रूट से छेड़छाड़ पर अलार्म देगा सिस्टम

     इंदौर
     बस दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों में कई आधुनिक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। बस शुरू करने से पहले ड्राइवर को अपनी सीट पर लगे ब्रीथ एनालाइजर में फूंक मारनी होगी। यदि उसने शराब पी रखी है तो बस स्टार्ट ही नहीं होगी। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधाओं के लिए बस के टिकट ऑनलाइन मिलेंगे।

    ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर अलार्म के जरिये सचेत करेगा और बस के अपनी लेन से लहराने या रूट बदलने पर भी सुरक्षा सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। गुरुवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट में पुणे की एरो ईगल कंपनी की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए तैयार बस प्रदर्शित की गई। यह बस कंपनी ने संचालन के लिए रीवा को दी है।

    बसों में ये सुरक्षा इंतजाम

        80 किमी की तय रफ्तार : बस की अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित रहेगी। इससे ज्यादा गति से बस नहीं चलाई जा सकेगी।

        सीसीटीवी कैमरे : यात्रियों की निगरानी के लिए बस के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

        साइबर सुरक्षा : बस के इलेक्ट्रानिक सिस्टम को हैकिंग से बचाने के लिए गेटवे सॉफ्टवेयर के जरिये सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
        आग से सुरक्षा : बस निर्माण में अग्निरोधी प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है। बैटरी के लिए बस के निचले हिस्से में अलग कंपार्टमेंट है। इसके ऊपर फायर एक्टिंग्विशर लगा है। आग बुझाने के लिए केमिकल और पानी, दोनों की व्यवस्था होगी।

        झपकी आई तो अलार्म : ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर उसे अलर्ट करेगा। बस के लहराने पर भी सेंसर सक्रिय होगा, जिससे बस को सीधा रखने में मदद मिलेगी।

        दूसरे वाहनों से दूरी : आगे-पीछे करीब 1.5 मीटर की दूरी पर दूसरा वाहन आने पर ड्राइवर को अलर्ट मिलेगा। रिवर्स पार्किंग के लिए भी सेंसर लगाए गए हैं।

    इंदौर में अभी सात बसें पहुंचीं
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंदौर में अभी सात बसें पहुंची हैं। 45 सीटर इन बसों का डिपो में रंगरोगन किया जा रहा है। 25 दिसंबर से इंदौर में 23 रूट पर सेवा शुरू करने की योजना है। एआइसीटीएसएल के माध्यम से इंदौर से सागर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, नरसिंहपुर, छतरपुर, बीना, नर्मदापुरम और बालाघाट के लिए बसें चलाने की योजना है। इसके अलावा खंडवा-शाजापुर, धार-मंदसौर, धार-पचमढ़ी, झाबुआ-भोपाल, खरगोन-नीमच, बुरहानपुर-नीमच, बड़वानी-आगर मालवा, बड़वानी-शाजापुर और बुरहानपुर-रतलाम सहित अन्य मार्गों पर भी बस सेवा प्रस्तावित है।

    अंदर आरामदायक सफर पर चर्चा, बाहर बस में ठसाठस यात्री
    ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में यात्री परिवहन समिट के दौरान विशेषज्ञ पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए चार प्रमुख बिंदुओं- रीच, रिलायबिलिटी, कंफर्टेबिलिटी और अफोर्डेबिलिटी पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान विजयनगर क्षेत्र में एआईसीटीएसएल की अरविंदो से विजयनगर की ओर आने वाली बस में यात्री ठसाठस भरे थे। कई यात्रियों को बैठने की जगह तक नहीं मिली। खुली खिड़कियों से धूल भी यात्रियों को परेशान कर रही थी। इससे आधुनिक और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन की जरूरत साफ नजर आई।

    यात्रा परिवहन विजन समिट-2026 में विशेषज्ञों के मिले सुझाव
        ईवी ट्रांजिशन के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस हो।

        बस स्टेशनों को आधुनिक ‘बस पोर्ट’ के रूप में विकसित करें।

        छोटे व कम यात्री वाले रूट पर छोटी बसों का संचालन।
        बस डिपो पर कमर्शियल गतिविधि, रिटेल और लाजिस्टिक्स से गैर-किराया राजस्व अर्जित करें।

        स्मार्ट टिकटिंग और पैसेंजर इंफार्मेशन सिस्टम के माध्यम से बसों के आने-जाने व रूट की रियल टाइम जानकारी।

        डिजिटल फीडबैक एवं पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था।
        आरक्षित, अनारक्षित और नियमित यात्री पास डिजिटल मिलें।

    मप्र में परिवहन सेवा
        96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें संचालित हैं।
        6 महीनों में 486 नई पीएम ई-बसें व 34 नई इंटरसिटी बसें बढ़ेंगी।
        2027 तक बसों की संख्या बढ़कर 1,100 पहुंचेगी।
        7 डिपो हैं व अगले छह माह में सौ-सौ बस क्षमता के 9 नए अत्याधुनिक डिपो बनेंगे।
        प्रति वर्ष 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

    300 बसें चल रहीं, जरूरत तीन हजार की
    इंदौर में वर्तमान में करीब 300 बसें चल रही हैं, जबकि शहर की जरूरत करीब तीन हजार बसों की बताई गई है। प्रदेश में अभी निजी ऑपरेटर करीब 87 प्रतिशत बसों का संचालन कर रहे हैं। फिलहाल 11 हजार बसें प्रदेश में निजी आपरेटर चला रहे हैं और अगले चार वर्ष में 15 हजार बसें चलाने की योजना है। इंदौर में एआईसीटीएसएल के अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर, उज्जैन और सागर में अन्य परिवहन कंपनियां संचालन करेंगी।

    2030 तक प्रदेश के 30 प्रतिशत हिस्से में होगा पब्लिक ट्रांसपोर्ट
        वर्तमान में 87 फीसद बसे निजी ऑपरेटर चला रहे हैं । मप्र में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पुर्नजीवित होगा। पीएम ई सेवा व मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत फिलहाल 10 हजार बसे प्रदेश के शहरों में चलाई जा रही है। 2030 तक प्रदेश के 169 शहरों में 38 हजार बसें चलाई जाएगी। देश के 30 प्रतिशत सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा उपलब्ध होगी। – शेखर एन धोले, हेड टेक्नीकल सेक्रेटेरिएट, सेंट्रल इंस्टि्टयुट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट

     

  • जन्म-मृत्यु पंजीयन में राहत का फैसला, नई व्यवस्था आने तक पुराने नियमों से बनेंगे प्रमाण-पत्र

    जन्म-मृत्यु पंजीयन में राहत का फैसला, नई व्यवस्था आने तक पुराने नियमों से बनेंगे प्रमाण-पत्र

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों के विलंबित पंजीयन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति साफ हो गई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि आगामी आदेश तक ऐसे मामलों में पूर्ववत प्रक्रिया के तहत ही पंजीयन किया जाएगा। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी ने सभी कलेक्टरों और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं।

    दरअसल, जिलों से शिकायतें मिल रही थीं कि प्रशासनिक मजिस्ट्रेट यानी तहसीलदार 6 अगस्त 2026 के जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक के राजपत्र नोटिफिकेशन का हवाला देकर दो साल से अधिक पुराने मामलों के पंजीयन की अनुमति संबंधी आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कई लोक सेवा केंद्रों पर भी आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे लोगों को जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने में परेशानी हो रही थी और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें बढ़ रही थीं।

    रजिस्ट्रार जनरल ने अभी कोई नया आदेश नहीं दिया
    मुख्य रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, नई दिल्ली की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई नया आदेश या निर्देश जारी नहीं हुआ है। इसलिए 6 अगस्त के राजपत्र नोटिफिकेशन के आधार पर दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों का पंजीयन रोकने का कोई आधार नहीं है।

    धारा 13(3) के तहत पुरानी प्रक्रिया जारी
    पत्र में कहा गया है कि जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया फिलहाल पहले की तरह लागू रहेगी। यानी दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीयन कराने के लिए मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार ही आवेदन और कार्रवाई की जाएगी।

    सभी कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधीनस्थ अधिकारियों को इसकी जानकारी दें, ताकि लोगों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

    संशोधन लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
    2026 के संशोधन में विलंबित पंजीयन की व्यवस्था को और सख्त किया गया है। एक साल से अधिक और दो साल के भीतर सूचना देने पर पंजीयन जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से होगा। अधिकारी को घटना की सत्यता का सत्यापन भी करना होगा और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

    वहीं दो साल से अधिक पुराने मामले में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश जरूरी होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट भी पंजीयन का आदेश देने से पहले घटना की सत्यता का सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

    पहले और अब में अंतर
    पहले एक साल से अधिक देरी वाले जन्म-मृत्यु पंजीयन में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। 2026 के संशोधन में दो साल से अधिक पुराने मामलों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से हटाकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के स्तर पर कर दिया गया है। इससे दो साल बाद होने वाला पंजीयन अधिक सत्यापन आधारित और सख्त होगा।

    MP में अभी पुरानी व्यवस्था क्यों?
    नए प्रावधान के अनुसार संशोधन केंद्र सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की तारीख से लागू होगा। मध्यप्रदेश के मुख्य रजिस्ट्रार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई नया आदेश नहीं मिलने के कारण राज्य में दो साल से अधिक पुराने मामलों के लिए पुरानी प्रक्रिया ही जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    2023 के संशोधन में क्या बदला था?
    2023 के संशोधन में जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर जन्म-मृत्यु का डेटाबेस तैयार करना, राज्यों का एकीकृत डेटाबेस बनाना, उपलब्ध होने पर माता-पिता और सूचनादाता का आधार नंबर दर्ज करना तथा गोद लिए, सरोगेसी से जन्मे और एकल/अविवाहित मां से जन्मे बच्चों के मामलों में सूचना की व्यवस्था शामिल है।

    इसके अलावा जन्म प्रमाण-पत्र को जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में महत्वपूर्ण बनाया गया। शैक्षणिक प्रवेश, मतदाता सूची और सरकारी नौकरी सहित विभिन्न कामों में जन्म प्रमाण-पत्र के उपयोग का प्रावधान किया गया। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जोड़ी गई।

  • पंचायतों में भ्रष्टाचार पर शिकंजा, पांच सचिव सस्पेंड; मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान समेत कई गड़बड़ियां उजागर

    पंचायतों में भ्रष्टाचार पर शिकंजा, पांच सचिव सस्पेंड; मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान समेत कई गड़बड़ियां उजागर

    पंचायतों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, पांच सचिव निलंबित

    बिना काम कराए राशि आहरण से लेकर मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक मिलीं अनियमितताएं, 11 लोगों पर कार्रवाई

    मुरैना
     जिले की ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर हुई जांच के बाद पांच पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है। वहीं सरपंच, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

    जिला पंचायत के सीईओ कमलेश कुमार भार्गव के अनुसार इमलिया, शहदपुर, अगरोता, रंछोरपुरा, भदावली, बर्रेण्ड, ऐसाह और टिकटोली दूमदार सहित अन्य पंचायतों में जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आईं। प्रशासन ने संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की है।

    – मृतक के जॉब कार्ड पर भुगतान, सरपंच पर धारा 40 की कार्रवाई
    ग्राम पंचायत इमलिया में मृतक के जॉब कार्ड और परिवार के सदस्यों की पुष्टि किए बिना राशि का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। इस पर तत्कालीन रोजगार सहायक मधु रामपुरे और रोजगार सहायक व प्रभारी पंचायत सचिव आदिराम मावई को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं अनियमित भुगतान और अपूर्ण निर्माण कार्यों के मामले में सरपंच गुड्डी पत्नी राकेश बघेल के खिलाफ मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की गई है।

    – बिना निर्माण राशि निकालने पर सचिव निलंबित
    ग्राम पंचायत शहदपुर में मृत व्यक्ति के जॉब कार्ड पर डिमांड डालने और निर्माण कार्यों के नाम पर राशि आहरित करने के आरोप में रोजगार सहायक विनोद कुमार को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं बर्रेण्ड और वर्तमान में हुसेनपुर पंचायत में बिना निर्माण कार्य कराए राशि निकालने के मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव महेश चन्द्र जाटव को निलंबित किया गया है।

    – मृत व्यक्ति को पेंशन का लाभ दिलाने का मामला
    ग्राम पंचायत अगरोता में एक मृत व्यक्ति के संबंध में दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने और उनके आधार पर नियम विरुद्ध शासकीय पेंशन का लाभ दिलाने के आरोप में पंचायत सचिव रामाधार सिंह जाटव को निलंबित किया गया है।

    – निर्माण कार्यों में लापरवाही पर भी गिरी गाज
    रंछोरपुरा पंचायत में तालाब और पत्थर नाली का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं कराने पर तत्कालीन पंचायत सचिव नीरज कर्ण को निलंबित किया गया। रोजगार सहायक गजेन्द्र सिंह धाकड़ को भी शासकीय कार्य से विरत किया गया है। भदावली में जनसुनवाई नहीं करने, मुख्यालय पर अनुपस्थित रहने और हितग्राहीमूलक योजनाओं में लापरवाही के आरोप में पंचायत सचिव विनोद कुमार तोमर को निलंबित किया गया।

    – सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें नहीं सुलझाईं, सचिव निलंबित
    अम्बाह की ग्राम पंचायत ऐसाह में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का निराकरण नहीं कराने, मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहने, जनप्रतिनिधियों से अनुचित भाषा का प्रयोग करने और नोटिस का जवाब नहीं देने के आरोप में पंचायत सचिव दिनेश शर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं टिकटोली दूमदार में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी और तकनीकी मापदंडों की अनदेखी के मामले में क्षेत्रीय उपयंत्री मातादीन शाक्य को शासकीय कार्य से विरत किया गया है।

    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों में शासकीय राशि के उपयोग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि अथवा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    – इमलिया पंचायत की जांच पर उठे सवाल, पहले क्लीनचिट फिर कार्रवाई

    जांच करते अधिकारी 

    इमलिया पंचायत में अनियमितताओं को लेकर अब पूर्व की जांच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि जनपद पंचायत मुरैना की ओर से पूर्व में कराई गई जांच में पंचायत को क्लीनचिट दे दी गई थी। इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर टीम गठित कर दोबारा जांच कराई गई, जिसमें पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच की भूमिका में अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।
    अब सवाल यह है कि एक ही मामले की दो जांचों में इतना बड़ा अंतर कैसे आया? क्या जनपद पंचायत की पहली जांच में गंभीर तथ्यों की अनदेखी हुई थी या फिर जिला पंचायत की जांच के निष्कर्षों पर सवाल खड़े होते हैं? यदि पहली जांच में पंचायत को क्लीनचिट दी गई थी तो उस जांच में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा क्यों न हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिम्मेदारों को बचाने के लिए पहली जांच को प्रभावित किया गया हो? हालांकि इस संबंध में किसी मिलीभगत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दोनों जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • ग्वालियर में तिघरा डैम से पानी की निकासी शुरू, 9-9 इंच खुले 3 गेट

    ग्वालियर में तिघरा डैम से पानी की निकासी शुरू, 9-9 इंच खुले 3 गेट

    ग्वालियर
    तिघरा डैम का जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे इसके तीन गेट खोल दिए गए। तीनों गेट नौ-नौ इंच खोले गए और इनके जरिए 1040 क्यूसिक पानी सांक नदी में छोड़ा गया। खास बात यह है कि इस सीजन में मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार तिघरा डैम के गेट खोले गए हैं।

    गेट खोले जाने के दौरान निगम महापौर शोभा सिकरवार, एमआइसी सदस्य, जल संसाधन विभाग और नगर निगम के इंजीनियरों सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

    सुबह 739.40 फीट था जलस्तर, दिनभर बढ़ता रहा
    शुक्रवार सुबह आठ बजे तिघरा बांध का जलस्तर 739.40 फीट दर्ज किया गया था। दिन में तिघरा के कैचमेंट क्षेत्र में हुई वर्षा के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी और आगे संभावित वर्षा को देखते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने दोपहर करीब 1:30 बजे गेट खोले जाने की सूचना जारी की।

    शाम पांच बजे तक बांध का जलस्तर 739.50 फीट से अधिक पहुंच गया। इसके बाद भी जलस्तर बढ़ता रहा। भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने आखिरकार तीन गेट खोलने का निर्णय लिया। शाम साढ़े छह बजे गेट नौ-नौ इंच खोलकर सांक नदी में 1040 क्यूसिक पानी छोड़ा गया।

    इस सीजन में पहली बार खुले डैम के गेट
    इस बार मानसून के दौरान तिघरा डैम के गेट लंबे समय तक बंद रहे। पिछले वर्षों में जुलाई से अक्टूबर के बीच तिघरा डैम के गेट 17 बार खोले गए थे। इस बार मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार गेट खोलने की स्थिति बनी है।

    अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई बारिश से डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसके बाद रात में और शुक्रवार दिन में हुई बारिश ने जलस्तर को और ऊपर पहुंचा दिया। इसी के चलते डैम से पानी छोड़ना पड़ा।

    गेट खुलने की खबर से शहरवासियों में खुशी
    ग्वालियर शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से तिघरा डैम पर निर्भर है। इस मानसून के आधे सीजन तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण तिघरा डैम आधा भी नहीं भर पाया था। इसका असर शहर की जलापूर्ति पर भी पड़ा और लोगों को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा था।

    डैम के पर्याप्त नहीं भरने से आगे जलसंकट की चिंता भी बढ़ गई थी। हालांकि अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से तस्वीर बदल गई। तिघरा डैम के फुल होने के बाद अब गेट खोले जाने से शहरवासियों में खुशी है। लोगों को उम्मीद है कि अब ग्वालियर में रोजाना पानी की सप्लाई हो सकेगी।

    एम. विश्वेश्वरैया की देखरेख में मजबूत हुई इंजीनियरिंग
    तिघरा डैम का निर्माण सांक नदी पर वर्ष 1916 में कराया गया था। महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम ने बांध की योजना और उसकी तकनीकी बारीकियों को समझने के लिए भारत के महान इंजीनियर और भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया को आमंत्रित किया था।

    1917 में बांध के शुरुआती क्षतिग्रस्त होने के बाद इसके पुनर्निर्माण और आटोमैटिक फ्लड गेट्स की तकनीक को मजबूत बनाने में उनके सुझावों और इंजीनियरिंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

    निर्माण के ठीक एक साल बाद 19 अगस्त 1917 को भारी बारिश और नींव में बलुआ पत्थर के रिसाव के कारण बांध का एक हिस्सा टूट गया था। इसके बाद इसे अधिक मजबूत संरचना के साथ दोबारा तैयार किया गया।

    1927 में जीर्णोद्धार, 1970 में फिर आईं दरारें
    वर्ष 1927 के आसपास तिघरा डैम का जीर्णोद्धार पूरा हुआ। इसके बाद 1970 में अत्यधिक जलभराव और तकनीकी वजहों से इसके कुछ हिस्सों में फिर दरारें आईं। इसके बाद सरकार ने आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसे मजबूत कंक्रीट और चुनाई संरचना में बदला।

    तिघरा डैम से ग्वालियर शहर को जलापूर्ति की शुरुआत वर्ष 1916 से ही हुई थी। 1916 से अब तक यह शहर की लगभग 14 लाख आबादी के लिए पेयजल का प्राथमिक स्रोत बना हुआ है। मोतीझील वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में तिघरा का पानी साफ करने के बाद शहर की विभिन्न टंकियों तक पहुंचाया जाता है।

    24 मीटर ऊंचा और 1,341 मीटर लंबा है डैम
    तिघरा डैम की ऊंचाई लगभग 24 मीटर और लंबाई 1,341 मीटर है। इसका निर्माण ग्वालियर शहर की जलापूर्ति के साथ आसपास के 11 गांवों की सिंचाई के उद्देश्य से कराया गया था।

  • शहडोल में 4 दिन चलेगा बास्केटबॉल टूर्नामेंट, 10 टीमें और 240 खिलाड़ी; 48 मैचों में होगा जोरदार घमासान

    शहडोल में 4 दिन चलेगा बास्केटबॉल टूर्नामेंट, 10 टीमें और 240 खिलाड़ी; 48 मैचों में होगा जोरदार घमासान

    शहडोल
     शहडोल जिले में एक बार फिर से बास्केटबॉल का महाकुंभ लगने वाला है. जिसमें प्रदेश भर की 10 टीम में शामिल होंगी. वहीं, कई बड़े मुकाबले खेले जाएंगे. राज्य स्तरीय इस आयोजन की तैयारी के लिए आज शहडोल जिला मुख्यालय में बैठक का आयोजन किया गया. जिसमें कई आला अधिकारी शामिल हुए और इस आयोजन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई. क्योंकि इसमें प्रदेश के अलग-अलग संभाग की कई टीमें शामिल होंगी। 

    बास्केटबॉल के महाकुंभ की तैयारी
    संयुक्त संचालक लोक शिक्षण शहडोल संभाग उमेश कुमार धुर्वे ने बताया कि, ''70वीं शालेय राज्य स्तरीय बास्केटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया जाना है. जिसके तैयारी के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक ली गई है. बैठक में उन्होंने बताया कि विराट नगरी शहडोल में 70वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा बास्केटबाल प्रतियोगिता 16 से 19 सितम्बर 2026 तक आयोजित होगी. प्रतियोगिता में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले 17 साल के बालक एवं बालिकाएं अपना जौहर दिखाएंगी. बास्केटबॉल टूर्नामेंट में 120 बालक एवं 120 बालिका खिलाड़ी शामिल होंगे। 

    कहां-कहां खेले जाएंगे मुकाबले
    संयुक्त संचालक लोक शिक्षण शहडोल संभाग उमेश कुमार धुर्वे ने बताया कि, ''शहडोल के कान्वेंट स्कूल का खेल मैदान, महात्मा गांधी स्टेडियम एवं बीटीआई कॉलेज के खेल मैदान में सभी मुकाबले खेले जाएंगे. इस दौरान टोटल 48 मैच आयोजित किए जाएंगे. प्रतियोगिता में शहडोल, जबलपुर, सागर, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, नर्मदापुरम, रीवा, भोपाल एवं जनजातीय कार्य विभाग सहित 10 टीमों के खिलाड़ी शामिल होंगे। 

    तैयारी बैठक में सौंपी गई जिम्मेदारी
    अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंपे गए दायित्वों का कर्तव्यनिष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश तो दिए ही गए. साथ ही बास्केटबॉल टूर्नामेंट की तैयारी को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारी भी सौंपी गई. उमेश कुमार धुर्वे ने कहा कि, ''प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों एवं कोचों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। 

  • नई दिल्ली के BRICS बाजार में मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट का जलवा, विदेशी प्रतिनिधियों ने सीखी कला की बारीकियां

    नई दिल्ली के BRICS बाजार में मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट का जलवा, विदेशी प्रतिनिधियों ने सीखी कला की बारीकियां

    नई दिल्ली के ब्रिक्स बाजार में छाई मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट

    विदेशी प्रतिनिधियों ने स्वयं ठप्पे लगाकर जानी पारंपरिक कला की बारीकियां

    भोपाल

    नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर सजे ब्रिक्स बाजार में मध्यप्रदेश के धार जिले की विश्व प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला विदेशी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के बारीक नक्काशीदार ब्लॉक्स से तैयार होने वाली इस पारंपरिक हस्तशिल्प कला के जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। यहां पहुंचने वाले देश-विदेश के प्रतिनिधियों को बाग प्रिंट की विशिष्ट तकनीक, प्राकृतिक रंगों के उपयोग और लकड़ी के नक्काशीदार ब्लॉक्स से कपड़े पर छपाई की प्रक्रिया से परिचित कराया जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों ने स्वयं लगाए बाग प्रिंट के ठप्पे

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए विभिन्न देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स बाजार का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बाग प्रिंट स्टॉल पर पहुंचकर पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग की प्रक्रिया को करीब से देखा और इसकी बारीकियों को समझा।

    प्रतिनिधियों ने न केवल इस पारंपरिक कला की सराहना की, बल्कि स्वयं लकड़ी के नक्काशीदार ठप्पों को रंगों में डुबोकर कपड़े पर प्रिंट भी किया। इस अवसर के लिए विशेष रूप से ‘BRICS’ लोगो वाले ब्लॉक्स तैयार किए गए थे। प्रतिनिधियों ने इन ब्लॉक्स से ठप्पे लगाकर तैयार किए गए कपड़ों को स्मृति-चिह्न के रूप में अपने साथ ले गए।

    वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश की कला को मिली नई पहचान

    18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित धार जिले के मोहम्मद बिलाल खत्री द्वारा बाग प्रिंट का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों द्वारा इस पारंपरिक कला को करीब से समझना, स्वयं इसकी प्रक्रिया में भाग लेना और इसकी सराहना करना मध्यप्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    दुनिया तक पहुंच रही बाग प्रिंट की छाप

    प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के बारीक नक्काशीदार ब्लॉक्स से तैयार होने वाली बाग प्रिंट मध्यप्रदेश की विशिष्ट हस्तशिल्प पहचान है। अपनी पारंपरिक तकनीक, विशिष्ट डिजाइनों और प्राकृतिक रंगों के लिए देश-दुनिया में पहचान बनाने वाली यह कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी विशिष्ट छाप छोड़ रही है। ब्रिक्स बाजार में बाग प्रिंट के प्रदर्शन से मध्यप्रदेश की कला एवं शिल्प परंपरा को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर आयोजित ब्रिक्स बाजार में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, ईरान, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, बेलारूस और इथियोपिया सहित विभिन्न देशों के कलाकार एवं शिल्पकार भी भाग ले रहे हैं।

     

  • MP Transco की नई तकनीक ने कम की पक्षीजनित ट्रिपिंग, विंध्य क्षेत्र में बर्ड गार्ड से मिली बड़ी कामयाबी

    MP Transco की नई तकनीक ने कम की पक्षीजनित ट्रिपिंग, विंध्य क्षेत्र में बर्ड गार्ड से मिली बड़ी कामयाबी

    बर्ड गार्ड और बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से विंध्य क्षेत्र में पक्षीजनित ट्रिपिंग नियंत्रित करने में एम पी ट्रांसको को मिली सफलता

    भोपाल 

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि जंगलों, जलाशयों और नदी तटीय क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग को रोकने के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विंध्य क्षेत्र में विशेष तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। रीवा, सतना, पन्ना, सीधी और सिंगरौली जिलों के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली 132 केवी एवं 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों पर बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर (बीएफडी), बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं।

    20 ट्रिपिंग से न्यूनतम तक पहुंचा आंकड़ा

    एमपी ट्रांसको रीवा सतना के कार्यपालन अभियंता अमित कुमार के अनुसार वर्ष 2025-26 में पक्षियों के कारण रीवा क्षेत्र की ट्रांसमिशन लाइनों में लगभग 20 ट्रिपिंग दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं के तकनीकी विश्लेषण के बाद संवेदनशील स्थानों पर बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाने का निर्णय लिया गया। इनके उपयोग के बाद पक्षीजनित ट्रिपिंग की घटनाएं लगभग शून्य हो गई हैं। स्थानीय परिस्थितियों और पक्षियों के व्यवहार को ध्यान में रखकर किए गए ये तकनीकी उपाय प्रभावी साबित हो रहे हैं।

    टावर पर पक्षियों के बैठने से रोकता है बर्ड गार्ड

    जंगलों एवं जलाशयों के आसपास से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों के टावर पक्षियों के लिए बैठने और घोंसला बनाने का स्थान बन जाते हैं। टावर पर बैठकर पक्षियों द्वारा मलमूत्र त्यागने से यह पदार्थ इंसुलेटर डिस्क पर जमा हो सकता है। बारिश या अधिक नमी की स्थिति में इसकी विद्युत चालकता बढ़ने से फ्लैशओवर और लाइन ट्रिपिंग की स्थिति बन सकती है। इस समस्या को कम करने के लिए बर्ड गार्ड को टावर के क्रॉसआर्म के किनारों पर लगाया जाता है। इसकी संरचना पक्षियों को वहां बैठने और घोंसला बनाने में कठिनाई पैदा करती है। यह व्यवस्था कुछ स्थानों पर बंदरों को क्रॉसआर्म के किनारे तक पहुंचने से रोकने में भी सहायक होती है।

    बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से इंसुलेटर सुरक्षित

    बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर को डिस्क इंसुलेटर के ऊपरी हिस्से पर स्थापित किया जाता है। यदि पक्षी टावर के क्रॉसआर्म पर बैठकर मलमूत्र त्याग करता है, तो प्रिवेंटर के कारण यह सीधे इंसुलेटर डिस्क पर जमा नहीं हो पाता। इससे इंसुलेटर की इंसुलेशन क्षमता प्रभावित होने और परिणामस्वरूप ट्रिपिंग होने की संभावना काफी कम हो जाती है।

    सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने स्थानीय पक्षियों के व्यवहार के अनुसार किया तकनीकी संशोधन

    कार्यपालन अभियंता अमित कुमार की पहल पर रीवा ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में पदस्थ सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने विंध्य क्षेत्र में पक्षियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग की समस्या के तकनीकी अध्ययन के आधार पर महत्वपूर्ण पहल की। फील्ड की व्यवहारिक और तकनीकी आवश्यकता एवं क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों के व्यवहार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बर्ड प्रिवेंटर डिवाइसों में इन हाउस आवश्यक तकनीकी संशोधनों के साथ ट्रांसमिशन लाइनों पर उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप पक्षीजनित ट्रिपिंग में उल्लेखनीय कमी आई।

    व्यवधान मे कमी के साथ पक्षी सुरक्षा भी

    मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में एमपी ट्रांसको द्वारा पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों पर पक्षी सुरक्षा के विशेष उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत 05 नग 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 470 टावरों तथा 133.68 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 210 गार्ड एवं 50 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार 15 नग 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 1,530 टावरों तथा 440 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 1,600 गार्ड एवं 150 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन उपायों का उद्देश्य एक ओर पक्षियों के कारण ट्रांसमिशन लाइनों में होने वाली ट्रिपिंग की घटनाओं को कम करना, वहीं दूसरी ओर पक्षियों को विद्युत लाइनों के संपर्क में आने से बचाकर उनकी मृत्यु एवं घायल होने की घटनाओं को रोकना तथा क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देना है।

    विंध्य के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी

    विंध्य क्षेत्र के बाणसागर एवं रिहंद जलाशय, सोन एवं टमस नदी के तटीय क्षेत्र, संजयदुबरी टाइगर रिजर्व के आसपास के वन क्षेत्रों तथा अन्य जल निकायों में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या में आवाजाही रहती है। इन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियां अधिक होने के कारण एमपी ट्रांसको द्वारा संवेदनशील टावरों की पहचान कर चरणबद्ध रूप से बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन तकनीकी उपायों से एक ओर पक्षियों के ट्रांसमिशन लाइनों से टकराने और विद्युत संरचनाओं के संपर्क में आने की संभावना कम होगी, वहीं दूसरी ओर पक्षीजनित फॉल्ट, ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन में कमी आने से विंध्य क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता और उपलब्धता बेहतर होगी।

     

  • UFBU Bank Strike: देशभर में बैंक कर्मचारी हड़ताल पर, भोपाल में एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स में जोरदार प्रदर्शन

    UFBU Bank Strike: देशभर में बैंक कर्मचारी हड़ताल पर, भोपाल में एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स में जोरदार प्रदर्शन

    UFBU के आह्वान पर देशव्यापी बैंक हड़ताल, भोपाल के एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स में गूंजा एकजुटता का स्वर

    भोपाल
     यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर में अलग-अलग स्थानों पर बैंककर्मियों की हड़ताल व्यापक रूप से एवं प्रभावी ढंग से सम्पन्न हुई। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु सहित प्रमुख महानगरों से लेकर राज्य एवं जिला मुख्यालयों तक बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया।

    मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हड़ताल का प्रमुख केंद्र एमपी नगर स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स, पीएनबी के पास रहा, जहाँ बड़ी संख्या में बैंक के 5000 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। “5-दिवसीय बैंकिंग लागू करो”, “बैंककर्मियों के स्वास्थ्य और सम्मान से समझौता नहीं” जैसे गगनभेदी नारों के साथ आंदोलनकारियों ने सरकार एवं बैंक प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया कि अब टालमटोल की नीति स्वीकार्य नहीं है।

    हड़ताल का नेतृत्व UFBU के संयोजक श्री संजीव कुमार  मिश्रा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सुबीन सिन्हा एवं सेक्रेटरी दिनेश झा तथा भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ भोपाल सर्कल के अध्यक्ष अनिल कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर घटक दलों के वरिष्ठ कामरेड वीरू शर्मा, दीपकरत्न शर्मा, संजय कुदेशिया, नज़ीर कुरेशी, शोभित वादेल , प्रवीण मेघानी, वी.एस. नेगी एवं सुनील सिंह,संगठन मीडिया प्रभारी अरविंद पंडियार की सक्रिय भूमिका रही।

    इसके अतिरिक्त रजनीश पौराणिक, सुरेश बाबू मीणा,स्वप्निल चतुर्वेदी , क्षितिज तिवारी, निर्भय सिंह, मनीष भार्गव, नितिन बिखानी, विजय चौटानी, अंबरिश नंदा, राजेश नायक, जितेंद्र बग्गा, प्रियंका गुप्ता, दीपक नायर, अंकुर दुबे, सुखमीत कौर, राहुल करौलिया, कुलदीप स्वर्णकार, विजय राघवन, अमित गुप्ता, संजय सिंह, देवेंद्र दांगी, सुमित मिश्रा, हितेश कुमार, देवेश जैन, मोनिका भागवानी, कपिला मेघानी, प्रशांत रघुवंशी, रोहित यादव, अमित प्रजापति, जयंत सेन, सेतु पाठक, राहुल खरे, ब्रजेश कुशवाहा, अनिल कुमार, मुदित जोशी, कीर्ति खरे, विनीता दुबे, पूजा कुशवाहा, के के त्रिपाठी, मनीष चतुर्वेदी, विभु जोशी सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला साथियों ने बढ़-चढ़कर हड़ताल में भाग लिया, जिससे आंदोलन को और अधिक मजबूती मिली।

    साथ ही मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर भी  एवं AIBOC के बैनर तले बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एकजुट होकर हड़ताल में सहभागिता की। जिला एवं अंचल मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बैंककर्मियों की मांगें केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा और निर्णायक आवाज़ हैं।

    नेताओं ने अपने संबोधन में तर्कपूर्ण ढंग से कहा कि 5-दिवसीय बैंकिंग केवल कर्मचारियों की सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि बेहतर ग्राहक सेवा, प्रभावी जोखिम प्रबंधन एवं स्वस्थ कार्य-संस्कृति के लिए अनिवार्य सुधार है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बैंकिंग क्षेत्र की जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए कर्मचारियों की लंबित एवं न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, अन्यथा आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।UFBU के द्वारा भविष्य के दिए गए कॉल लागू रहेंगे।