Category: मध्य प्रदेश

  • मध्यप्रदेश की बेटी अब विश्व मंच पर दिखाएगी दम

    मध्यप्रदेश की बेटी अब विश्व मंच पर दिखाएगी दम

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश राज्य ताइक्वांडो अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी मान्या मिश्रा का चयन ISF जिम्नेसियाड वर्ल्ड स्कूल गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। मान्या अंडर-63 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 3 से 8 दिसंबर 2026 तक रियो डी जेनेरियो, ब्राजील में आयोजित होगी।

    SGFI चयन ट्रायल में शानदार प्रदर्शन

    मान्या मिश्रा ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में स्थान बनाया। उनका चयन 14 एवं 15 सितंबर 2026 को रायपुर में आयोजित SGFI चयन ट्रायल के माध्यम से हुआ। प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव हासिल किया है।

    विश्व मंच पर दिखाएंगी प्रतिभा

    ISF जिम्नेसियाड वर्ल्ड स्कूल गेम्स विश्व स्तर की स्कूली खेल प्रतियोगिता है, जिसमें विभिन्न देशों के युवा खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। ब्राजील में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में मान्या भारत की ओर से ताइक्वांडो स्पर्धा में अपना कौशल प्रदर्शित करेंगी।

    खेल मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने मान्या मिश्रा के भारतीय टीम में चयन पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मान्या का चयन अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायी है। मंत्रीसारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि मान्या अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

     

     

  • विश्वकर्मा जयंती व पीएम मोदी के जन्मदिवस पर कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे मुख्यमंत्री

    विश्वकर्मा जयंती व पीएम मोदी के जन्मदिवस पर कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे मुख्यमंत्री

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही सीएम योगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर 'आशीर्वाद का दीया' भी प्रज्ज्वलित करेंगे। इसके साथ ही सीएम योगी अन्य कार्यक्रमों में भी उपस्थित रहेंगे। 

    विश्वकर्मा जयंती पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में समारोह का करेंगे उद्घाटन

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत विश्वकर्मा स्वरोजगार व स्वदेशी मेला 2026 पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान सीएम योगी मार्जिन मनी ऋण पोर्टल के शुभारंभ के साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक व टूलकिट का भी वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री के साथ एमएसएमई विभाग के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी व राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा भी मौजूद रहेंगे।

    जनभवन में राज्यपाल संग 'गंगासागर नमो नमः' का लोकार्पण करेंगे मुख्यमंत्री

    राज्यपाल महामहिम आनन्दी बेन पटेल के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनभवन में शाम को 'गंगासागर नमो नमः' का लोकार्पण करेंगे। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी उपस्थित रहेंगे। जनभवन में गंगोत्री से गंगा सागर थीम पर प्रतिकृति का निर्माण किया गया है, जिसमें चारों धाम की प्रतिकृति भी है। इसमें प्रयागराज, काशी के घाट व मंदिर आदि की छवि भी दिखेगी। राज्यपाल व मुख्यमंत्री प्रयागराज से लाए गए गंगाजल को यहां अर्पित करेंगे।

    राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर प्रज्ज्वलित करेंगे 'आशीर्वाद का दीया'

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाम को राष्ट्र प्रेरणा स्थल भी जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस (17 सितंबर) और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष के सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों के प्रति आभार जताने, उनके दीर्घ व स्वस्थ जीवन की मंगलकामना के लिए मुख्यमंत्री यहां 'आशीर्वाद का दीया' भी प्रज्ज्वलित करेंगे।

  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने आयुष की उत्कृष्ट पद्धतियां अपनाएगा मध्यप्रदेश

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने आयुष की उत्कृष्ट पद्धतियां अपनाएगा मध्यप्रदेश

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में तमिलनाडु एवं केरल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित आयुष सेवाओं और अपनाई जा रही उत्कृष्ट पद्धतियों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मई 2026 को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तमिलनाडु एवं केरल में संचालित आयुष सेवाओं का अध्ययन करने के लिए विभागीय दल भेजने के निर्देश दिए थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशों के अनुपालन में आयुष विभाग के चार सदस्यीय दल ने तमिलनाडु एवं केरल का अध्ययन भ्रमण किया। दल ने दोनों राज्यों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष चिकित्सा की भूमिका, सेवाओं के संचालन की व्यवस्थाओं तथा प्रभावी एवं उत्कृष्ट पद्धतियों का अध्ययन किया।

    अध्ययन भ्रमण से लौटने के बाद बुधवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में दल द्वारा उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार के समक्ष अध्ययन के निष्कर्षों एवं अनुशंसाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया।

    मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप बनेगी कार्ययोजना

    मंत्री श्री परमार ने अध्ययन के निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। आयुष चिकित्सा पद्धतियों की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए गर्भवती माताओं एवं नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

    श्री परमार ने निर्देश दिए कि तमिलनाडु एवं केरल में अपनाई जा रही आयुष क्षेत्र की उत्कृष्ट पद्धतियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का मध्यप्रदेश की भौगोलिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप अध्ययन कर व्यावहारिक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

    मंत्री श्री परमार ने कहा कि कार्ययोजना में ऐसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाए, जिनके माध्यम से गर्भावस्था के दौरान आवश्यक आयुष सेवाओं की उपलब्धता बढ़े, माताओं को स्वास्थ्य संबंधी उचित मार्गदर्शन मिले तथा सामान्य प्रसव को प्रोत्साहन देने के लिए प्रभावी सहयोग प्रदान किया जा सके।

    श्री परमार ने अध्ययन से प्राप्त अनुभवों को केवल रिपोर्ट तक सीमित न रखते हुए चरणबद्ध तरीके से मैदानी स्तर पर लागू करने तथा इसकी प्रभावशीलता की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।

    अनुभवों का उपयोग प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में होगा

    अध्ययन दल द्वारा दोनों राज्यों में संचालित आयुष सेवाओं की व्यवस्थाओं, उपचार पद्धतियों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित कार्यप्रणाली का अवलोकन किया गया। इन अनुभवों और अनुशंसाओं का उपयोग मध्यप्रदेश में आयुष सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा।

    बैठक में आयुष विभाग के प्रमुख सचिव श्री शोभित जैन एवं आयुक्त आयुष श्रीमती आर. उमा माहेश्वरी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • सेवा संकल्प अभियान में हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’, सेवा और समर्पण से जगमगाएगा छत्तीसगढ़

    सेवा संकल्प अभियान में हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’, सेवा और समर्पण से जगमगाएगा छत्तीसगढ़

    रायपुर

    प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा एवं समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर को शाम 7 बजे ‘आशीर्वाद का दीया’ पहल के माध्यम से प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़वासियों से आह्वान किया है कि वे 17 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ अवश्य जलाएं और सेवा, समर्पण, आभार एवं सकारात्मकता के इस साĀṢमूहिक संकल्प का हिस्सा बनें।

              पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि दीप भारतीय संस्कृति में केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आशा, सद्भाव, सकारात्मकता और सेवा की भावना का भी प्रतीक है। ‘आशीर्वाद का दीया’ के माध्यम से हम अपने परिवार और समाज में सेवा की भावना को और मजबूत करने का संकल्प ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर की शाम जब प्रदेश के घर-घर में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित होंगे, तब यह दृश्य जनभागीदारी की शक्ति और सामूहिक संकल्प की भावना का संदेश देगा।

              उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि ‘आशीर्वाद का दीया’ को केवल दीप जलाने की पहल तक सीमित न रखें, बल्कि इसे किसी जरूरतमंद की सहायता, बुजुर्गों के सम्मान, बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण अथवा समाज के लिए किए जाने वाले किसी सकारात्मक योगदान के संकल्प से जोड़ें। उन्होंने कहा कि सेवा के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि संवेदनशील मन और सहयोग की भावना की आवश्यकता होती है।

    सेवा और समर्पण के 25 वर्ष, जनभागीदारी का नया संकल्प

              ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा एवं समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में सेवा, जनभागीदारी और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी विभिन्न पहलें आयोजित की जाएंगी।

              अभियान का उद्देश्य सेवा और समर्पण की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना तथा नागरिकों को अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार जनकल्याण के कार्यों में सहभागी बनाना है। ‘आशीर्वाद का दीया’ इसी व्यापक भावना की शुरुआत का प्रतीक बनेगा।

    घर-घर का दीप बनेगा सेवा और सकारात्मकता का संदेश

              मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि एक दीपक का प्रकाश भले ही छोटा हो, लेकिन जब लाखों दीप एक साथ प्रज्ज्वलित होते हैं तो वह सामूहिक ऊर्जा और एकता का बड़ा संदेश बन जाता है। इसी भावना के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ पहल में प्रदेश के प्रत्येक परिवार की सहभागिता महत्वपूर्ण है।

              उन्होंने कहा कि 17 सितंबर की शाम 7 बजे जब गांवों, कस्बों और शहरों में घर-घर दीप जलेंगे, तो यह केवल रोशनी का उत्सव नहीं होगा, बल्कि सेवा के प्रति कृतज्ञता और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करने का सामूहिक अवसर होगा। यह दीप हमें प्रेरणा देगा कि हम अपने आसपास किसी एक व्यक्ति, परिवार या समुदाय के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपनी ओर से कुछ योगदान करें।

    सेवा को जीवन का संस्कार बनाने का आह्वान

              पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय परंपरा में सेवा को सदैव जीवन-मूल्य के रूप में देखा गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी भावना को जनभागीदारी से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि कोई विद्यार्थी अपनी प्रतिभा से, युवा अपने नवाचार से, महिला अपने अनुभव और सामुदायिक सहभागिता से, किसान जल एवं पर्यावरण संरक्षण से और कलाकार अपनी कला के माध्यम से समाज के लिए योगदान दे सकता है।

              उन्होंने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ पहल के माध्यम से हम अपने पूर्वजों, बुजुर्गों और समाज से मिले संस्कारों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ आने वाली पीढ़ी के लिए सेवा और संवेदनशीलता की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी ले सकते हैं।

    विभिन्न गतिविधियों से जुड़ेगा समाज का हर वर्ग

              ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ‘आशीर्वाद का दीया’ के साथ विभिन्न सामाजिक एवं जनभागीदारी आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ‘मेरे सपनों का भारत-चित्र सेवा’ के माध्यम से बच्चों और विद्यार्थियों को अपने सपनों के भारत की कल्पना को चित्र और भाषण के माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा। ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ के माध्यम से संगीत, नाटक और स्थानीय कला के जरिए सेवा एवं सामाजिक बदलाव की कहानियों को सामने लाया जाएगा।

              ‘आंगन मिलन सेवा’ के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों को समुदाय की सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करने, ‘सेवा की कहानी’ के माध्यम से सकारात्मक बदलाव की वास्तविक कहानियों को सामने लाने तथा ‘सेवा संकल्प यात्रा’ और ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ के माध्यम से सेवा एवं जनभागीदारी का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

              इसी प्रकार ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’, ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ और ‘सुशासन सेवा संवाद’ जैसी पहलें समाज के विभिन्न वर्गों को अपनी क्षमता और रचनात्मकता के साथ अभियान से जोड़ेंगी।

    हर परिवार बने सेवा संकल्प का सहभागी

              मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ किसी एक व्यक्ति, संस्था या विभाग का अभियान नहीं है। इसकी सफलता प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से सुनिश्चित होगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे 17 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाएं और अपने परिवार के साथ सेवा का एक संकल्प भी लें।

              उन्होंने कहा कि यह संकल्प किसी जरूरतमंद की सहायता करने, किसी बुजुर्ग का सम्मान करने, किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करने, पौधा लगाने, जल बचाने, स्वच्छता अपनाने या समाज के लिए अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य सकारात्मक कार्य करने का हो सकता है।

    आइए, एक दीप जलाएं, एक सेवा करें

              पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रज्ज्वलित होने वाला प्रत्येक ‘आशीर्वाद का दीया’ सेवा, आभार, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक बने। जब छत्तीसगढ़ के लाखों परिवार एक साथ इस पहल में सहभागी होंगे, तब यह जनभागीदारी की एक सुंदर मिसाल बनेगी।

              उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं और 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान की विभिन्न गतिविधियों में अपनी सुविधानुसार सहभागी बनें। एक दीप से निकला प्रकाश किसी दूसरे के जीवन में आशा जगा सकता है। एक छोटा-सा सेवा कार्य किसी जरूरतमंद के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। आइए, 17 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाएं, सेवा का संकल्प लें और मिलकर संवेदनशील, समर्थ एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

  • तकनीकी शिक्षा को समयानुकूल बनाकर विद्यार्थियों को बेहतर कौशल एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना प्राथमिकता : मंत्रीपरमार

    तकनीकी शिक्षा को समयानुकूल बनाकर विद्यार्थियों को बेहतर कौशल एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना प्राथमिकता : मंत्रीपरमार

    भोपाल 

    तकनीकी शिक्षा को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उन्नत तकनीकी सुविधाएं, बेहतर कौशल एवं रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय (JEC) को आधुनिक तकनीकी शिक्षा का सशक्त केंद्र बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों एवं अधोसंरचना का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्रीइन्दर सिंह परमार ने कही। मंत्रीपरमार ने बुधवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय की शासी निकाय की 29वीं बैठक एवं साधारण सभा की 15वीं बैठक की अध्यक्षता की।

    बैठक में महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं संस्थागत उन्नयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

    आधुनिक प्रयोगशालाओं और प्लेसमेंट सेल के लिए ₹12 करोड़ स्वीकृत

    बैठक में जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय के उन्नयन के लिए आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाओं के उपकरणों, विभिन्न विभागों के आवश्यक मरम्मत कार्यों तथा विद्यार्थियों के रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के आधुनिकीकरण हेतु कुल ₹12 करोड़ के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

    मंत्रीपरमार ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रह सकती। विद्यार्थियों को उद्योग एवं रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं, व्यावहारिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और प्रभावी प्लेसमेंट व्यवस्था आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय में सुविधाओं के उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के निर्देश

    मंत्रीपरमार ने महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे महाविद्यालय में बिजली की खपत एवं व्यय को कम करने के साथ-साथ हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा। शैक्षणिक संस्थानों में ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम होगा।

    श्री परमार ने महाविद्यालय की उपलब्ध सुविधाओं के बेहतर उपयोग, शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार तथा विद्यार्थियों के लिए अनुकूल शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर

    मंत्रीपरमार ने कहा कि जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा और पूर्व विद्यार्थियों की उपलब्धियां महाविद्यालय की महत्वपूर्ण पूंजी हैं। महाविद्यालय को नई तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित करते हुए विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक एवं व्यावहारिक वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे वे राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

    बैठक में जबलपुर इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक ने पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन, महाविद्यालय की प्रगति, शैक्षणिक गतिविधियों एवं प्रस्तावित कार्यों से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

    बैठक में पद्म भूषण डॉ. अजय चौधरी, आरजीपीवी के कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा, डॉ. संतोष गांधी, डॉ. मोहन सेन,प्रदीप मिश्रा सहित शासी निकाय एवं साधारण सभा के सदस्यगण तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

     

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर-उज्जैन संभागों के कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को वीसी से दिए दिशा-निर्देश

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर-उज्जैन संभागों के कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को वीसी से दिए दिशा-निर्देश

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 17 सितंबर को इंदौर और उज्जैन में 2 बड़े आयोजन होने हैं। दोनों ही कार्यक्रमों की सभी तैयारियां बारीकी से माइक्रो प्लानिंग के साथ कर ली जाएं। व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से इंदौर और उज्जैन संभाग के जनप्रतिनिधयों, कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स से वीडियो कान्फ्रेंसिंग से संवाद किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में सेवा-संकल्प अभियान के शुभारंभ सहित अन्य कार्यक्रमों तथा इसी दिन शाम को उज्जैन में होने वाले दीपोत्सव एवं अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रमों के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    वीसी में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सचिव डॉ. सुदाम खाड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। इंदौर और उज्जैन के कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स ने तैयारियों की जानकारी दी।

  • गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा का परिणाम: मध्य प्रदेश के शासकीय स्कूलों में लगातार सुधर रही है शिक्षा व्यवस्था।

    गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा का परिणाम: मध्य प्रदेश के शासकीय स्कूलों में लगातार सुधर रही है शिक्षा व्यवस्था।

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है।

    इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है। 

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमश्री एवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
    प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है।

    साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित
    प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं। 

    ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी

    प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है।

    व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी

    व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया।

    वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट

    शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।

    अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी

    प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। 

     

  • गणेश उत्सव पर अनोखी कलाकृति: केवल 70 मिलीग्राम वजन में तैयार की गई गणेश जी के अष्टविनायक रूपों की सूक्ष्म प्रतिमा।

    गणेश उत्सव पर अनोखी कलाकृति: केवल 70 मिलीग्राम वजन में तैयार की गई गणेश जी के अष्टविनायक रूपों की सूक्ष्म प्रतिमा।

    नीमच
    इन दिनों भारत सहित दुनिया भर में लोग गणेश उत्सव की आस्था में सराबोर हैं. इसी बीच नीमच के जावद कस्बे से कला और अध्यात्म का एक अनोखा संगम सामने आया है. स्थानीय माइक्रो आर्टिस्ट राजेश सोनी ने चांदी धातु से भगवान गणेश के अष्टविनायक स्वरूपों की बेहद सूक्ष्म और बारीक कलाकृति तैयार की है. पूरी कलाकृति का आकार मात्र 6 मिलीमीटर है और इसका कुल वजन केवल 70 मिलीग्राम दर्ज किया गया है. यह अष्टविनायक इतने सूक्ष्म हैं कि इन्हें चावल के एक दाने या भगवान गणेश को प्रिय दूर्वा घास के पत्ते पर आसानी से रखा जा सकता है.

    आठों स्वरूपों को शामिल किया गया
    आर्टिस्ट राजेश सोनी द्वारा बनाई गई इस सूक्ष्म कलाकृति में भगवान गणेश के प्रसिद्ध आठों स्वरूपों को शामिल किया गया है. इनमें श्री मयूरेश्वर, श्री सिद्धिविनायक, श्री बल्लालेश्वर, श्री वरदविनायक, श्री चिंतामणि, श्री गिरजात्मज, श्री विघ्नेश्वर और श्री महागणपति के रूप प्रदर्शित किए गए हैं. इन नन्हीं मूर्तियों की सुंदरता बढ़ाने के लिए शुद्ध हल्दी, कुंकुम और अक्षत का प्रयोग किया गया है. हरी-भरी दूर्वा पर रखी गई यह कलाकृति देखने में काफी आकर्षक लगती है.

    इस तरह जोड़े गए 2 से 3 मिलीमीटर के हिस्से

    ऐसी सूक्ष्म कलाकृति का निर्माण बेहद जटिल और धैर्य मांगने वाला काम होता है. आर्टिस्ट राजेश ने बताया, "अष्टविनायक के प्रत्येक स्वरूप को तैयार करने के लिए 2 से 3 मिलीमीटर के अलग-अलग हिस्से बनाए गए. इसमें भगवान गणेश का सिर, सूंड, उदर, हाथ, पैर और सूप जैसे कान अलग से तैयार किए गए हैं. इसके बाद गैस की बेहद हल्की आंच पर इन सभी बारीक हिस्सों को आपस में जोड़ा गया. इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती आंच के तापमान को संतुलित रखना था, क्योंकि थोड़ी सी भी तेज आंच चांदी के बेहद पतले तार को तुरंत पिघला सकती थी."

    सूक्ष्म कला के क्षेत्र 
    सूक्ष्म कला के क्षेत्र में राजेश सोनी का यह पहला प्रयोग नहीं है. इससे पहले भी वे अपनी बारीक कारीगरी का प्रदर्शन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं. वे दुनिया का सबसे छोटा सोने का अफीम डोडा, क्रिकेट वर्ल्ड कप की ट्रॉफी और सूक्ष्म ताजमहल जैसी कलाकृतियां बना चुके हैं. इन अद्भुत रचनाओं के लिए उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है. नीमच जिले में बनी यह नई कलाकृति इन दिनों लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बनी हुई है.

     

  • मध्यप्रदेश में बढ़ेगा पावर सेक्टर, सीमेंस एनर्जी की बड़ी निर्माण इकाई होगी स्थापित

    मध्यप्रदेश में बढ़ेगा पावर सेक्टर, सीमेंस एनर्जी की बड़ी निर्माण इकाई होगी स्थापित

    मध्यप्रदेश में स्थापित होगी सीमेंस एनर्जी इंडिया की बड़ी पॉवर ट्रांसफार्मर निर्माण इकाई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी को सौंपा 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र
    कंपनी ने दिया 2053 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव, 1500 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

    भोपाल

    मध्यप्रदेश को ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड को उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में 60.49 एकड़ भूमि का आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) प्रदान किया। सीमेंस कंपनी द्वारा यहां एक बड़ी क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर के निर्माण के लिए लगभग 2,053 करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया है। कंपनी की यूनिट स्थापना से 1500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीमेंस कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुइल्हर्मे मेंडोंका, मुख्य वित्तीय अधिकारी हरीश शेखर तथा हेड-रियल एस्टेट पुनीत बंसल को भूमि का आशय पत्र सौंपा। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी मौजूद थे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि बैंक, विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना और निवेशक अनुकूल वातावरण के कारण देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में तेजी से उभर रहा है। राज्य सरकार औद्योगिक निवेशों के त्वरित क्रियान्वयन तथा रोजगार सृजन के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्रस्तावित परियोजना मध्यप्रदेश को देश के उभरते ऊर्जा उपकरण एवं विद्युत अवसंरचना विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निवेश राज्य में उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक विकास तथा कुशल रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगा।

    कंपनी के बारे में

    सीमेंस एनर्जी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा संचरण, औद्योगिक विद्युतीकरण, ऊर्जा भंडारण तथा डीकार्बोनाइजेशन समाधानों से जुड़ी अग्रणी कंपनी है। कंपनी का दक्षिण एशिया क्षेत्र में व्यापक परिचालन है और यह वैश्विक स्तर की इंजीनियरिंग एवं अनुसंधान क्षमताओं के लिए जानी जाती है। कंपनी की इस प्रस्तावित इकाई में बड़ी क्षमता के पावर ट्रांसफार्मरों का निर्माण किया जाएगा, जो देश की बढ़ती विद्युत अवसंरचना आवश्यकताओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार तथा ऊर्जा क्षेत्र के आधुनिकीकरण में योगदान देंगे। परियोजना से क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और सहायक उद्योगों, लॉजिस्टिक्स तथा सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। परियोजना के क्रियान्वयन के साथ विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा उज्जैन और आसपास के क्षेत्र ऊर्जा उपकरण विनिर्माण के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होंगे। कंपनी का यह निवेश मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और ऊर्जा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

     

  • साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और गणवेश जैसी योजनाओं से मिल रहा है विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहन

    साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और गणवेश जैसी योजनाओं से मिल रहा है विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहन

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है।

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

    प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है।

    साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित

    प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं।

    ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी

    प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है।

    व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी

    व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया।

    वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट

    शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।

    अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी

    प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

    पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुआ पाठ्यपुस्तक वितरण

    शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार एक अप्रैल से निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध हो सके। वर्ष 2026-27 में पुस्तकों की प्रिंटिंग, बाइंडिंग एवं पेपर की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एसओपी निर्धारित की गई है।

    बोर्ड परीक्षा परिणामों में हुआ उल्लेखनीय सुधार

    विगत वर्षों में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हाई स्कूल स्तर पर वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार हायर सेकंडरी में वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा।

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां अब ऑनलाइन

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों को स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त करने में सुविधा के साथ ही प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिला है।

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का बढ़ा रूझान

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय अधोसंरचना के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। विद्यालयों में उपलब्ध बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधुनिक अधोसंरचना के कारण विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ा है। बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन की वजह से इन विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष और कई मामलों में बेहतर विकल्प के रूप में स्थापित किया है।

    प्रदेश में प्रथम चरण में आधुनिक भौतिक सुविधाओं से परिपूर्ण 368 सांदीपनि विद्यालयों का संचालन शुरू चुका है। इसमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय विभाग के सांदीपनि विद्यालय हैं। प्रदेश में 799 पीएमविद्यालय संचालित हैं, जिनमें 4 लाख 80 हजार छात्र नामांकित हैं। सभी पीएमस्कूलों में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से निर्धारित 21 इंडिकेटर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम से छात्रावास संचालन में पारदर्शिता

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा छात्रावासों के प्रभावी संचालन के लिए पहली बार ई-हॉस्टल एडमिशन एवं मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। इससे स्कूलों में प्रवेश एवं सीट आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ विद्यार्थियों के डिजिटल रिकॉर्ड का व्यवस्थित संधारण किया जा रहा है। विद्यालय एवं आवासीय कैचमेंट क्षेत्र की मैपिंग के साथ स्टोर, रसोई, उपस्थिति, वित्त एवं स्वास्थ्य जैसी विभिन्न गतिविधियों का भी डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है। इससे छात्रावास व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुगम एवं प्रभावी बनी है।

    गृह संपर्क अभियान से 3 लाख से अधिक बच्चे स्कूल लौटे

    आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने के लिए गृह संपर्क अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान अंतर्गत शिक्षक घर-घर जाकर सर्वेक्षण करते हैं और अप्रवेशित विद्यार्थियों की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार मौके पर ही प्रवेश दिलाते हैं। विद्यार्थियों के घर पर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसके विद्यालय छोड़ने के कारणों को भी दर्ज किया जाता है। अभियान के माध्यम से अब तक तीन लाख से अधिक बच्चों को पुनः स्कूल से जोड़ा गया है।

    पीएम जनमन अंतर्गत 106 छात्रावास स्वीकृत

    प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान पीएम-जनमन अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह पीवीटीजी के विद्यार्थियों के लिए 106 छात्रावासों को स्वीकृति दी गई है। छात्रावासों की यह सुविधा जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    धरती आबा अभियान के तहत 104 छात्रावास स्वीकृत

    धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 104 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। इन छात्रावासों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

    अब तक 6 लाख 47 हजार से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए मिली 25 हजार रुपये की राशि

    प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लैपटॉप प्रदान किये जा रहे है। वर्ष 2009-10 से संचालित योजना में माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए 25 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खाते में अंतरित की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 6 लाख 47 हजार 599 विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि प्रदान कर चुकी है।

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से लाखों विद्यार्थियों को लाभ

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2013-14 से संचालित इस योजना में छह विभागों की लगभग 20 प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाओं को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में किया जाता है। वर्ष 2024-25 में 63.72 लाख विद्यार्थियों को 352 करोड़ रुपये, जबकि वर्ष 2025-26 में 60.59 लाख विद्यार्थियों को 344 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

    सुपर 100 योजना में मेधावी विद्यार्थियों को करा रहे है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

    सुपर 100 योजना के माध्यम से शासकीय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराई जा रही है। कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों का चयन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं एवं 12वीं में भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा इंदौर के शासकीय मल्हार आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन के साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विशेष कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में दोनों संस्थाओं में कुल 304 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है।

    19 लाख छात्राओं के बैंक खातों में सैनिटरी नैपकिन के लिए सीधे पहुंच रही राशि

    प्रदेश में बालिकाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और विद्यालय में नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए सैनिटरी नैपकिन योजना संचालित की जा रही है। योजना अन्तर्गत कक्षा 7वीं से 12वीं तक अध्ययनरत सभी बालिकाओं को प्रतिवर्ष 300 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से प्रदान की जाती है। सितंबर 2025 में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 19 लाख बालिकाओं के खातों में कुल 57 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।

    डिजिटल शिक्षा से स्मार्ट हुई स्कूलों की पढ़ाई

    प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के स्कूलों में स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 तक मिडिल स्कूलों में 4,163 स्मार्ट क्लास, जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका शिक्षा छात्रावासों में शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्वीकृत की गई हैं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावासों में भी शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं। प्रदेश के 9,316 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में 8,870 (95%) स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं, जिनमें 7,405 कार्यशील हैं। इसी तरह 8,754 (94%) स्कूलों में आईसीटी लैब स्वीकृत हैं, जिनमें 3,706 कार्यशील हैं।

    निःशुल्क गणवेश से विद्यार्थियों को मिली है मदद

    प्रदेश की शासकीय शालाओं में अध्ययनरत बालिकाओं को वर्ष 2004-05 से प्रारम्भ इस योजना में 2 जोड़ी निःशुल्क गणवेश की सुविधा प्रदान की गई। वर्ष 2011-12 से इस योजना में छात्रों को भी शामिल किया गया। वर्तमान में प्रदेश की शासकीय शालाओं में कक्षा 1 से 8 में अध्ययनरत लगभग 60 लाख विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 2 जोड़ी गणवेश के लिए 600 रुपये की राशि के मान से लगभग 360 करोड़ प्रतिवर्ष का व्यय किया जा रहा है।