Category: मध्य प्रदेश

  • PM मोदी पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान, बोले- भगवान विश्वकर्मा के आदर्शों पर आगे बढ़ रहे

    PM मोदी पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान, बोले- भगवान विश्वकर्मा के आदर्शों पर आगे बढ़ रहे

    भगवान विश्वकर्मा के सच्चे अनुयायी हैं प्रधानमंत्री  मोदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    तपोनिष्ठ प्रधानमंत्री  मोदी की राष्ट्र निर्माण के प्रति कमर्ठता और सृजनशीलता सभी के लिए प्रेरणादायी
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी विश्वकर्मा जयंती पर दी बधाई

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर भगवान महाकाल और भगवान विश्वकर्मा से उनके दीर्घायु होने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वकर्मा जयंती पर प्रदेशवासियों को मीडिया के माध्यम से बधाई देते हुए यह भाव व्यक्त किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने अपनी सृजनशीलता और कौशल से सृष्टि के निर्माण को सुंदर स्वरूप प्रदान किया। आज का दिन इसलिए भी विशेष है कि क्योंकि प्रधानमंत्री श्री मोदी का जन्मदिन भी है। भारत जिस सामर्थ्य और गौरव के साथ विश्व पटल पर खड़ा है, उसमें प्रधानमंत्री श्री मोदी का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रधानमंत्री के रूप में अपनी यात्रा में उन्होंने भारत की प्रतिभा, सामर्थ्य और शक्ति को हर क्षेत्र में विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया है। हम सबकी आस्था और श्रद्धा, सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा में है। सच्चे अर्थों में प्रधानमंत्री श्री मोदी भगवान विश्वकर्मा के अनुयायी हैं। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखते हुए गरीबों को आवास से लेकर उनके भोजन तक की व्यवस्था सुनिश्चित की है। विश्व भारत की ओर उम्मीद और विश्वास से देख रहा है। राष्ट्र निर्माण के प्रति तपोनिष्ठ प्रधानमंत्री श्री मोदी की कर्मठता और सृजनशीलता सभी के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश के हर घर में दीप प्रज्ज्वलित करने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी के लिए आज का दिन विशेष है। आज राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन प्रदेश में पधार रहे हैं। उज्जैन में आज व्यापक स्तर पर दीप प्रज्जवलन का भव्य और दिव्य कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही इंदौर से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों के लिए आवासों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराने के स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना का शुभारंभ भी किया जाएगा।

  • PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    इंदौर
    लायनिस्टिक वर्ष 2026–27 के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में लायन तिलोकचंद बरडिया को चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति 5 सितम्बर को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई।

    मल्टीपल काउंसिल चेयरपर्सन लायन प्रवीण वशिष्ठ द्वारा लायन तिलोकचंद बरडिया को यह जिम्मेदारी प्रदान करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लायन बरडिया अपनी लगन, निष्ठा, नेतृत्व क्षमता एवं अनुभव के माध्यम से इस जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन करेंगे।

    इस अवसर पर लायन तिलोकचंद बरडिया ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए मल्टीपल काउंसिल चेयरपर्सन लायन प्रवीण वशिष्ठ एवं मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि Leo एवं युवा नेतृत्व को सशक्त बनाना, युवाओं को Lions की सेवा गतिविधियों से जोड़ना तथा Lions और Leo सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।

    ‘LEO-Lion Liaison’ की भूमिका के अंतर्गत Lions और Leo सदस्यों के बीच संवाद एवं समन्वय को मजबूत करने, युवाओं को नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने, नेतृत्व विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा Leo से Lion बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। Lions Clubs International के अनुसार यह एक वर्षीय liaison भूमिका युवा नेतृत्व को Lions संगठन के साथ प्रभावी रूप से जोड़ने और Leo कार्यक्रम को मजबूत करने में सहयोग करती है।

    लायनतिलोकचंद बरडिया लंबे समय से Lions गतिविधियों एवं सामाजिक सेवा कार्यों से जुड़े रहे हैं। नई जिम्मेदारी के साथ उनसे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में युवा नेतृत्व को नई दिशा देने और Lions तथा Leo समुदाय के बीच मजबूत सहभागिता विकसित करने की अपेक्षा है।

    लायनिस्टिक वर्ष 2026–27 के लिए मिली यह जिम्मेदारी लायन तिलोकचंद बरडिया के सामाजिक एवं संगठनात्मक दायित्वों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।

    लायन राहुल अग्रवाल 
    सेकटरी 
    लायन क्लब सेंट्रल रायपुर छत्तीसगढ़

  • रीवा में सेवा संकल्प अभियान के तहत रक्तदान शिविर, डिप्टी CM बोले- रक्तदान है महादान

    रीवा में सेवा संकल्प अभियान के तहत रक्तदान शिविर, डिप्टी CM बोले- रक्तदान है महादान

    रक्तदान महादान, पीड़ित मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    सेवा संकल्प अभियान के तहत रीवा में वृहद रक्तदान शिविर

    कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम में उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने रक्तदान कर किया शिविर का शुभारंभ

    रक्तदान का किया आह्वान 

    कमिश्नर, अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जागरूक नागरिकों ने किया रक्तदान

    भोपाल 

    सेवा संकल्प अभियान के तहत संभागीय मुख्यालय रीवा के कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में वृहद स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वयं रक्तदान कर शिविर का शुभारंभ किया। पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, वीरेंद्र गुप्ता सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी रक्तदान किया।

      उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर में रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। रक्तदान महादान है और पीड़ित मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। दुर्घटना में घायल व्यक्तियों तथा गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के उपचार में रक्त की आवश्यकता होती है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि स्वस्थ एवं पात्र व्यक्ति स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं और जरूरतमंदों की जीवन रक्षा में अपना योगदान दें।

      उन्होंने कहा कि सामान्यतः स्वस्थ 18 से 65 वर्ष आयु वर्ग के पात्र व्यक्ति चिकित्सकीय जांच के उपरांत रक्तदान कर सकते हैं। नियमित रक्तदान के लिए निर्धारित अंतराल एवं रक्त केंद्र की चिकित्सकीय सलाह का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वयं रक्तदान करने से उन्हें आत्मिक प्रसन्नता हुई और अधिक से अधिक नागरिकों को इस सेवा कार्य में सहभागी बनना चाहिए। शिविर में रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह सहित अधिकारियों, कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रक्तदान किया।

    रीवा जिले में यहां भी रक्तदान शिविर

    रीवा जिले में इच्छुक एवं पात्र नागरिक मनगवां, जवा, सिरमौर, सेमरिया, गंगेव एवं गोविंदगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा त्योंथर के सिविल अस्पताल में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों में पहुंचकर रक्तदान कर सकते हैं। नागरिकों से अपील है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर पीड़ित मानवता की सेवा में अपना योगदान दें।

  • रूबी गुर्जर हत्याकांड:   प्रेमी के साथ कॉल पर कनेक्ट थी रूबी, चीखें रिकॉर्ड होने के बाद छा गई खामोशी; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    रूबी गुर्जर हत्याकांड: प्रेमी के साथ कॉल पर कनेक्ट थी रूबी, चीखें रिकॉर्ड होने के बाद छा गई खामोशी; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    रूबी गुर्जर हत्याकांड:   प्रेमी के साथ कॉल पर कनेक्ट थी रूबी, चीखें रिकॉर्ड होने के बाद छा गई खामोशी; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    मुरैना
    10 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के घाट उतारी गई रूबी गुर्जर मामले में एक चौकाने वाला ऑडियो खुलासा सामने आया है। हरदोई (यूपी) निवासी रूबी के कथित प्रेमी अनुज सिंह के अनुसार, जब परिजन रूबी को मुरैना से गांव ले जा रहे थे, तब अनहोनी की आशंका के चलते रूबी ने उन्हें फोन पर कनेक्ट कर रखा था। गांव पहुंचने पर रूबी ने वाहन से उतरने से इनकार किया था, लेकिन साथ मौजूद महिलाओं द्वारा सुरक्षा का भरोसा देने पर वह उतरी। इसके कुछ ही देर बाद फोन पर रूबी की दर्दनाक चीखें सुनाई दीं और फिर अचानक सन्नाटा छा गया। माना जा रहा है कि फोन गिरने के बाद आरोपियों को कॉल चालू होने का पता चल गया था। मुरैना के एडवोकेट राकेश दुबे ने भी इस ऑडियो रिकॉर्डिंग की पुष्टि की है।

    इस वारदात के बाद अब नूराबाद थाना पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के समय ऑडियो रिकॉर्डिंग में जिन महिलाओं की आवाजें सुनाई दे रही हैं, उनके खिलाफ अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई? क्या पुलिस उन महिलाओं को बचाने का प्रयास कर रही है?

    रूबी ने नूराबाद पुलिस से लगाई थी गुहार 
    फोटो -नूराबाद थाने का फोटो लगाना है 

    गौरतलब है कि रूबी गुर्जर ने अपनी हत्या से कुछ ही दिन पूर्व, 24 अगस्त 2026 को 'वन स्टॉप सेंटर' के माध्यम से नूराबाद थाना पुलिस को आवेदन देकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उसने पूर्व में अपने मकान मालिक सोहन राजपूत (न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी) पर ब्लैकमेलिंग, जबरदस्ती और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बावजूद समय पर सख्त कदम न उठाए जाने और अब ऑडियो में शामिल महिलाओं पर कार्रवाई न होने से पुलिस प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।

  • हैदराबाद को लेकर ओवैसी-रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, BJP विधायक बोले- ‘मैं भी हैदराबाद आऊंगा’

    हैदराबाद को लेकर ओवैसी-रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, BJP विधायक बोले- ‘मैं भी हैदराबाद आऊंगा’

    ओवैसी को रामेश्वर शर्मा का दो टूक जवाब: हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं, भारत का है, मैं भी हैदराबाद आऊंगा

    भोपाल
     काजी कैंप पर मिसाइल वाले बयान पर शुरू हुआ सियासी संग्राम अब भोपाल से हैदराबाद तक पहुंच गया है। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के "माई के लाल हो तो मिसाइल चलाओ" वाले चैलेंज पर BJP विधायक रामेश्वर शर्मा ने करारा पलटवार किया है और कहा है – "मैं भी हैदराबाद जाऊंगा।"
    रामेश्वर शर्मा ने कहा, "हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं है, हैदराबाद भारत का हिस्सा है। बैरिस्टर हो तो बदतमीजी की भाषा छोड़ दो।" 
    क्या बोले रामेश्वर शर्मा?
    ओवैसी की चुनौती के बाद शर्मा ने कहा:
    "मैं अपने बयान पर आज भी कायम हूं। मैंने काजी कैंप बोला था तो इस्लामाबाद वाले काजी कैंप की बात की थी, भोपाल वाले की नहीं। भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल गिराई है, आतंकवाद पर कार्रवाई जारी रहेगी।" 
    उन्होंने आगे कहा, "अब तुम छाती पीटो या इस्लामाबाद से अपने तार जोड़ो, UCC लागू होकर रहेगा।" 
    शर्मा ने ओवैसी को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें आपत्ति है तो वो कोर्ट जा सकते हैं, लेकिन "पांच बीवी और 25 बच्चों की फैक्ट्री अब नहीं चलेगी"।
    कल भोपाल में क्या हुआ था?
    15 सितंबर को सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में ओवैसी ने कहा था – "रामेश्वर शर्मा, तुम माई के लाल हो तो बताओ कब लॉन्च करोगे मिसाइल? मैं अकेला काजी कैंप में खड़ा मिलूंगा, शहीद होने को तैयार हूं।" 
    अब इस बयान के बाद लड़ाई आर-पार की हो गई है। एक तरफ ओवैसी काजी कैंप में डटे हैं, दूसरी तरफ रामेश्वर शर्मा हैदराबाद जाने की बात कह रहे हैं।

  • गऊ रक्षा के लिये जनप्रतिनिधि एवं आम जन आगे आये

    गऊ रक्षा के लिये जनप्रतिनिधि एवं आम जन आगे आये

    गऊ रक्षा के लिये जनप्रतिनिधि एवं आम जन आगे आये

    ग्वालियर
     शहर की यातायात व्यवस्था में बाधा बन रही एवं अचानक आमजनों को अपने सीगों से चोटिल कर रही भूखी,प्यासी, पॉलीथिन की पन्नीयों को खाकर जगह जगह से भगाये जाने से बदहवास सड़कों पर लड़ रहे बेजुवान जानवर ग्वालियर की जनता का ध्यान खींच रहे हैं कि नगर निगम का इतना बड़ा अमला होने के बावजूद भी शहर के मुख्य मार्गों पर घूम रहे आवारा पशु आखिर इतनी बड़ी संख्या में क्यों दिख जाते हैं कांग्रेस शासित नगर निगम प्रशासन इस और ध्यान क्यों नहीं दे रहा ?

    अपनी चरनोइ की जमीनों पर कब्जा हो जाने से बेचारे बेजुबान जानवर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो रहे हैं और दूध देना बंद कर देने से किसान उनको छुट्टा छोड़ देता है यहाँ तक की रात के अँधेरे में ट्राली मे भरकर शहर किनारे छोड़ देता है और वही जानवर शहर में घुसकर फिर यातायात को प्रभावित करते हैं और राहगीरों को चोटिल भी कर देते हैं जिससे देखने में आया है कि कभी कभी  तो राहगीर परमात्मा को भी प्यारा हो जाता है l
    अपने जीवन के अंतिम समय में गऊ दान करने एवं गोमाता की पूँछ पकड़कर वैतरणी पार करने का ख्याल रखने वाले आमजनों एवं शहर के हिंदूवादी संगठनों को भी शायद अब आगे आना होगा और इस गहन समस्या का निराकरण करने की पहल करना होगी और सभी मिलजुल कर संकल्प लें कि प्रत्येक धर्मप्रेमी एवं पशु प्रेमी नागरिक सड़कों पर आवारा घूम रहे जानवरों को खाने के लिये अपने एवं अपने परिवार के सदस्यों के जन्म दिवसों एवं निर्वाण दिवसों पर पशुओं के खाने के लिये चारे की व्यवस्था गौशाला में जाकर दान करेंगे साथ ही शहर के सभी साधु,संतों एवं सभी राजनैतिक दलों के जनप्रतिनिधियों को भी दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण कार्य को करने का संकल्प लेना होगा तभी भगवान श्रीकृष्ण एवं शनि क्षेत्र ग्वालियर में खुशहाली एवं बेजुवान जानवरों की लम्पी वायरस जैसी गंभीर बीमारियों से हो रही अकाल मोतों के लिये यह कार्य मील का पत्थर साबित हो जिससे गऊ माताओं के सहारे वैतरणी पार होने कि जगह गऊ माता के कोप का भाजन होने से भी बचा जा सकेगा l
     

     

  • 10 डिजिटल स्टूडियो से तैयार हो रही पढ़ाई की सामग्री, क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होगा ई-कंटेंट

    10 डिजिटल स्टूडियो से तैयार हो रही पढ़ाई की सामग्री, क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होगा ई-कंटेंट

    उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार, विद्यार्थियों तक पहुंचेगा गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट

    अब डिजिटल माध्यम से घर बैठे पढ़ सकेंगे विद्यार्थी, ई-ज्ञानसेतु पर मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट

    कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान होंगे उपलब्ध

    10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं में भी तैयार की जा रही डिजिटल अध्ययन सामग्री

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ई-कंटेंट वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। तैयार किए गए वीडियो विद्यार्थियों को विभाग के e-GyanSetu YouTube Channel पर मिलेंगे। विभाग की इस पहल से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल माध्यम से विभिन्न विषयों की अध्ययन सामग्री का लाभ ले सकेंगे।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 की भावना के अनुरूप प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं।

    ई-कंटेंट वीडियो को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी एवं रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स और डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया जा रहा है। वीडियो की विषयगत एवं शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह ई-कंटेंट प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किया जा रहा है।

    Validation Board करेगा ई-कंटेंट का परीक्षण एवं सत्यापन

    ई-कंटेंट की प्रमाणिकता, विषयवस्तु और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार वीडियो का Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जा रहा है। वीडियो की विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता का परीक्षण करने के बाद ही सत्यापित ई-कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा।

    क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किए जा रहा ई-कंटेंट

    ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी विशेष ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी एवं संस्कृत सहित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुंचाने में सुविधा होगी।

    अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकेंगे विद्यार्थी

    e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अपनी सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सकेंगे। विद्यार्थी आवश्यकता के अनुसार विषयवस्तु को दोहरा सकेंगे, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझ सकेंगे और अपनी सीखने की गति के अनुरूप अध्ययन कर सकेंगे।

    सत्यापन के बाद चरणबद्ध रूप से प्रकाशित होंगे वीडियो

    ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।

     

  • गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा को नई दिशा, MP में 23 साल बाद प्राथमिक शिक्षा का ड्रॉपआउट शून्य

    गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा को नई दिशा, MP में 23 साल बाद प्राथमिक शिक्षा का ड्रॉपआउट शून्य

    प्राथमिक शिक्षा में स्तर का ड्रॉप आउट दर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को मिल रही नई दिशा
    स्कूल शिक्षा में मध्यप्रदेश में हुई ऐतिहासिक प्रगति 23 साल बाद शून्य पर
    साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और गणवेश जैसी योजनाओं से मिल रहा है विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहन

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है।

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

    प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है।

    साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित

    प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं।

    ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी

    प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है।

    व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी

    व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया।

    वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट

    शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।

    अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी

    प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

    पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुआ पाठ्यपुस्तक वितरण

    शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार एक अप्रैल से निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध हो सके। वर्ष 2026-27 में पुस्तकों की प्रिंटिंग, बाइंडिंग एवं पेपर की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एसओपी निर्धारित की गई है।

    बोर्ड परीक्षा परिणामों में हुआ उल्लेखनीय सुधार

    विगत वर्षों में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हाई स्कूल स्तर पर वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार हायर सेकंडरी में वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा।

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां अब ऑनलाइन

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों को स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त करने में सुविधा के साथ ही प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिला है।

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का बढ़ा रूझान

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय अधोसंरचना के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। विद्यालयों में उपलब्ध बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधुनिक अधोसंरचना के कारण विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ा है। बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन की वजह से इन विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष और कई मामलों में बेहतर विकल्प के रूप में स्थापित किया है।

    प्रदेश में प्रथम चरण में आधुनिक भौतिक सुविधाओं से परिपूर्ण 368 सांदीपनि विद्यालयों का संचालन शुरू चुका है। इसमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय विभाग के सांदीपनि विद्यालय हैं। प्रदेश में 799 पीएमविद्यालय संचालित हैं, जिनमें 4 लाख 80 हजार छात्र नामांकित हैं। सभी पीएमस्कूलों में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से निर्धारित 21 इंडिकेटर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम से छात्रावास संचालन में पारदर्शिता

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा छात्रावासों के प्रभावी संचालन के लिए पहली बार ई-हॉस्टल एडमिशन एवं मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। इससे स्कूलों में प्रवेश एवं सीट आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ विद्यार्थियों के डिजिटल रिकॉर्ड का व्यवस्थित संधारण किया जा रहा है। विद्यालय एवं आवासीय कैचमेंट क्षेत्र की मैपिंग के साथ स्टोर, रसोई, उपस्थिति, वित्त एवं स्वास्थ्य जैसी विभिन्न गतिविधियों का भी डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है। इससे छात्रावास व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुगम एवं प्रभावी बनी है।

    गृह संपर्क अभियान से 3 लाख से अधिक बच्चे स्कूल लौटे

    आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने के लिए गृह संपर्क अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान अंतर्गत शिक्षक घर-घर जाकर सर्वेक्षण करते हैं और अप्रवेशित विद्यार्थियों की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार मौके पर ही प्रवेश दिलाते हैं। विद्यार्थियों के घर पर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसके विद्यालय छोड़ने के कारणों को भी दर्ज किया जाता है। अभियान के माध्यम से अब तक तीन लाख से अधिक बच्चों को पुनः स्कूल से जोड़ा गया है।

    पीएम जनमन अंतर्गत 106 छात्रावास स्वीकृत

    प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान पीएम-जनमन अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह पीवीटीजी के विद्यार्थियों के लिए 106 छात्रावासों को स्वीकृति दी गई है। छात्रावासों की यह सुविधा जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    धरती आबा अभियान के तहत 104 छात्रावास स्वीकृत

    धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 104 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। इन छात्रावासों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

    अब तक 6 लाख 47 हजार से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए मिली 25 हजार रुपये की राशि

    प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लैपटॉप प्रदान किये जा रहे है। वर्ष 2009-10 से संचालित योजना में माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए 25 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खाते में अंतरित की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 6 लाख 47 हजार 599 विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि प्रदान कर चुकी है।

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से लाखों विद्यार्थियों को लाभ

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2013-14 से संचालित इस योजना में छह विभागों की लगभग 20 प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाओं को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में किया जाता है। वर्ष 2024-25 में 63.72 लाख विद्यार्थियों को 352 करोड़ रुपये, जबकि वर्ष 2025-26 में 60.59 लाख विद्यार्थियों को 344 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

    सुपर 100 योजना में मेधावी विद्यार्थियों को करा रहे है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

    सुपर 100 योजना के माध्यम से शासकीय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराई जा रही है। कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों का चयन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं एवं 12वीं में भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा इंदौर के शासकीय मल्हार आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन के साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विशेष कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में दोनों संस्थाओं में कुल 304 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है।

    19 लाख छात्राओं के बैंक खातों में सैनिटरी नैपकिन के लिए सीधे पहुंच रही राशि

    प्रदेश में बालिकाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और विद्यालय में नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए सैनिटरी नैपकिन योजना संचालित की जा रही है। योजना अन्तर्गत कक्षा 7वीं से 12वीं तक अध्ययनरत सभी बालिकाओं को प्रतिवर्ष 300 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से प्रदान की जाती है। सितंबर 2025 में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 19 लाख बालिकाओं के खातों में कुल 57 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।

    डिजिटल शिक्षा से स्मार्ट हुई स्कूलों की पढ़ाई

    प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के स्कूलों में स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 तक मिडिल स्कूलों में 4,163 स्मार्ट क्लास, जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका शिक्षा छात्रावासों में शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्वीकृत की गई हैं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावासों में भी शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं। प्रदेश के 9,316 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में 8,870 (95%) स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं, जिनमें 7,405 कार्यशील हैं। इसी तरह 8,754 (94%) स्कूलों में आईसीटी लैब स्वीकृत हैं, जिनमें 3,706 कार्यशील हैं।

    निःशुल्क गणवेश से विद्यार्थियों को मिली है मदद

    प्रदेश की शासकीय शालाओं में अध्ययनरत बालिकाओं को वर्ष 2004-05 से प्रारम्भ इस योजना में 2 जोड़ी निःशुल्क गणवेश की सुविधा प्रदान की गई। वर्ष 2011-12 से इस योजना में छात्रों को भी शामिल किया गया। वर्तमान में प्रदेश की शासकीय शालाओं में कक्षा 1 से 8 में अध्ययनरत लगभग 60 लाख विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 2 जोड़ी गणवेश के लिए 600 रुपये की राशि के मान से लगभग 360 करोड़ प्रतिवर्ष का व्यय किया जा रहा है।

     

  • मध्यप्रदेश में 19 सितंबर के बाद बदलेगा मौसम, भारी बारिश के आसार

    मध्यप्रदेश में 19 सितंबर के बाद बदलेगा मौसम, भारी बारिश के आसार

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य से पीछे है। ऐसे में सितंबर के आखिरी दौर में सक्रिय होने वाला मौसम तंत्र प्रदेश के लिए अहम रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है। तंत्र मजबूत रहा तो मानसून का सामान्य कोटा पूरा हो सकता है। प्रदेश में मंगलवार तक 33 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन का सामान्य औसत 37.3 इंच है। यानी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अब करीब 4.3 इंच बारिश और चाहिए। फिलहाल प्रदेश में सामान्य से करीब 6% कम बारिश हुई है।

    17 से 19 सितंबर तक बढ़ेगी बारिश की गतिविधि
    मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश में बारिश का एक और दौर ला सकता है। इसकी ताकत और सक्रियता पर यह निर्भर करेगा कि मानसून के विदा होने से पहले प्रदेश में कितनी बारिश होती है।मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में निम्न दाब क्षेत्र सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधियां भी बनी रहीं, लेकिन इसका असर प्रदेश में तेज बारिश के रूप में नहीं दिखा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन में धूप खिली रही। मैहर में शाम के समय तेज बारिश हुई।

    17 से 19 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा गतिविधि के अधिक व्यापक होने की संभावना है। 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मंगलवार को पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) एक्टिव रहा। मानसून ट्रफ की एक्टिविटी भी देखने को मिली, लेकिन प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश नहीं हुई। भोपाल में धूप खिली रही। इंदौर, उज्जैन में भी ऐसा ही मौसम रहा।

    अब तक कोटे की 88.5% बारिश बता दें कि मानसूनी सीजन को अब 14 दिन बाकी बचे हैं। मंगलवार तक प्रदेश में 33 इंच यानी, 88.5% बारिश हुई है। भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

    इन जिलों में अब जो भी बारिश होगी, वह बोनस रहेगी। 18 जिलों में भोपाल, राजगढ़्र, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया भी शामिल हैं।

    इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 37 जिलों में कम बारिश हुई है। आलीराजपुर में तो सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है।

    88.5% बारिश पूरी, 14 दिन बाकी
    मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा हो चुका है।18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इन जिलों में आगे होने वाली बारिश  सामान्य आंकड़े से अतिरिक्त होगी। वहीं इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले सामान्य बारिश से पीछे हैं। अलीराजपुर में सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हो सकी है। इसके उलट निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है। 

    जून की कमी ने बिगाड़ा पूरा हिसाब
    इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से आंकड़े में सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक आया। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हुआ और बारिश बढ़ी, फिर भी पूरे जुलाई में सामान्य से 13% कम बारिश दर्ज हुई। अगस्त में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती महीनों की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसून सीजन खत्म होने में दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और प्रदेश अभी भी सामान्य बारिश से 6% पीछे है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इसके मुकाबले अब तक 33 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच के बीच है। 

  • मंत्रीपरमार ने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ एवं ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप का किया विमोचन

    मंत्रीपरमार ने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ एवं ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप का किया विमोचन

    भोपाल 

    भारतीय ज्ञान परम्परा में ज्ञान और विज्ञान का समृद्ध भंडार निहित है। इस ज्ञान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। परम्परा, ज्ञान और तकनीक का समन्वय नवाचार के साथ-साथ युवाओं को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकता है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्रीइन्दर सिंह परमार ने कही।

    मंत्रीपरमार ने बुधवार को भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, जबलपुर द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ एवं ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप का विमोचन किया।

    भारतीय ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की अभिनव पहल

    मंत्रीपरमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान नहीं है, बल्कि इसमें जीवन को सार्थक एवं संतुलित बनाने वाले ज्ञान और अनुभव का व्यापक भंडार है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से इस ज्ञान को सरल, सहज और युवाओं के अनुकूल स्वरूप में प्रस्तुत करना नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

     परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, ज्ञान परंपरा और मूल्यों से जोड़ते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना भी है। जब तकनीक का उपयोग भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए किया जाता है, तो नवाचार का स्वरूप और अधिक सार्थक हो जाता है।

    ‘सनातन कैलेंडर एआई’ में पंचांग एवं धार्मिक ज्ञान की डिजिटल सुविधा

    जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा विकसित ‘सनातन कैलेंडर एआई’ के माध्यम से पंचांग, व्रत-पर्व, पूजा-विधि एवं धार्मिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। इसके माध्यम से भारतीय परंपराओं और धार्मिक ज्ञान से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यम से सहज एवं सुगम रूप में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

    ‘अंतर्-गीता’ से नई पीढ़ी तक पहुंचेगा गीता का जीवनोपयोगी ज्ञान

    ‘अंतर्-गीता’ मोबाइल ऐप के माध्यम से मद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी ज्ञान को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। आधुनिक डिजिटल माध्यम के जरिए गीता के जीवन-दर्शन एवं संदेश को युवाओं के लिए अधिक सहज और संवादात्मक बनाने की दिशा में यह अभिनव पहल है।

    मंत्रीपरमार ने इस नवाचारी प्रयास के लिए जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास शिक्षा, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय को नई दिशा देने के साथ विद्यार्थियों में नवाचार एवं अनुसंधान की भावना को भी प्रोत्साहित करेंगे।

     परमार ने कहा कि प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी प्रयोगों के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली ऐसी पहलें इसी उद्देश्य को सार्थक करती हैं।

    इस अवसर पर जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव चांडक, अनुसंधान एवं विकास अधिष्ठाता डॉ. कमल कुमार कुशवाहा, कंप्यूटर विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. सौरभ सिंह, छात्र अभय बैरागी एवं छात्रा अविशा गुप्ता सहित टीम के अन्य सदस्य उपस्थित थे।