Category: मध्य प्रदेश

  • मध्यप्रदेश पुलिस की मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई

    मध्यप्रदेश पुलिस की मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के अवैध कारोबार एवं तस्करी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत तीन दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 96 लाख 41 हजार रुपये से अधिक कीमत का अवैध मादक पदार्थ, तस्करी में प्रयुक्त वाहन एवं अन्य सामग्री भी जब्त की है।

    मंदसौर

    थाना भानपुरा की चौकी भैसोदामंडी पुलिस ने दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर 160 ग्राम एमडी, 6 किलो 800 ग्राम डोडाचूरा एवं मोटरसाइकिल सहित लगभग  16 लाख 83 हजार रुपए की संपत्ति जब्त की है। वहीं थाना शामगढ़ पुलिस ने बोलेरो पिकअप वाहन से 100 किलोग्राम डोडाचूरा सहित लगभग 10 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है। इसके अतिरिक्त थाना नई आबादी पुलिस ने एमडी ड्रग एवं डोडाचूरा जब्त कर लगभग 10 लाख 90 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की है। इस प्रकार तीनों कार्यवाही में पुलिस ने लगभग 37 लाख 73 हजार रुपये से अधिक का मादक पदार्थ एवं अन्य संपत्ति जब्‍त की  है।

    नीमच

    पुलिस ने थाना रतनगढ़ क्षेत्र में मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 1 क्विंटल 41 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा, जिसकी कीमत 21 लाख 27 हजार रुपये है, जब्त कर 1 आरोपी को गिरफ्तार किया है। 

    देवास

    पुलिस ने थाना खातेगांव क्षेत्र में ऑपरेशन प्रहार के तहत अनाज मंडी स्थित गोदाम पर दबिश देकर 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 2 लाख 40 हजार रुपये कीमत की 24 ग्राम ब्राउन शुगर जब्त की है।

    गुना

    थाना मृगवास क्षेत्र में राजस्थान की ओर से स्मैक की तस्करी कर रहे 2 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 50.86 ग्राम स्मैक तथा तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 6 लाख रुपये की संपत्ति जब्‍त की है।

    सिंगरौली

    पुलिस में थाना चितरंगी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए घर की बाउंड्री में अवैध रूप से उगाए गए गांजे के 11 हरे पौधे, कुल वजन 8 किलो 200 ग्राम अनुमानित कीमत 1 लाख 20 हजार रुपये, जब्त किए ।

    रीवा

    पुलिस ने थाना चोरहटा क्षेत्र में ऑपरेशन प्रहार 2.0 के तहत कार्रवाई करते हुए 62.388 किलोग्राम गांजा जब्त कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई में बोलेरो, टाटा बोल्ट कार एवं 7 मोबाइल सहित लगभग  22 लाख 73 हजार रुपये की संपति जब्त की है।

    जबलपुर

    क्राइम ब्रांच एवं थाना मदनमहल पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गांजे के अवैध कारोबार में लिप्त 1 आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से 10 किलो 168 ग्राम गांजा, एक एंड्रॉयड मोबाइल एवं दो बैग सहित लगभग 5 लाख 8 हजार 400 रुपये की संपत्ति जब्त की है।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत निरंतर कार्रवाई करते हुए तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

     

  • ग्वालियर सड़क घोटाले पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: फर्जी लैब टेस्ट का खुलासा, नगर निगम से मांगा जवाब

    ग्वालियर सड़क घोटाले पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: फर्जी लैब टेस्ट का खुलासा, नगर निगम से मांगा जवाब

    ग्वालियर

     ग्वालियर में सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए हाई कोर्ट द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आयोग ने कोर्ट को बताया कि श्मशान से गुड़ा तिराहा, कस्तूरबा चौक और गुड़ा-गुड़ी का नाका से बेटी बचाओ होते हुए हनुमान टाकीज तक की सड़कों से लिए गए नमूनों की जांच में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

    जांच के दौरान संबंधित सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में ऐसी प्रयोगशाला रिपोर्ट भी मिलीं, जिन्हें जांच आयोग ने कथित तौर पर फर्जी पाया है। आयोग ने 17 सितंबर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

    रिपोर्ट के अनुसार डीपीआर में लगी प्रयोगशाला रिपोर्टों की तुलना संबंधित प्रयोगशाला के मूल वर्षवार रजिस्टर और अभिलेखों से कराई गई। जांच में रिपोर्टों में दर्ज प्रयोगशाला क्रमांक मूल अभिलेखों से मेल नहीं पाए गए। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। इस दिन कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक लिए गए सड़क नमूनों की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।
    लैब प्रभारी का शपथपत्र भी रिपोर्ट में शामिल

    आयोग ने रिपोर्ट में बताया कि जोनल रिसर्च लैबोरेटरी, लोक निर्माण विभाग, ग्वालियर के प्रभारी ने 29 अगस्त 2026 को शपथपत्र दिया। इसमें उन्होंने कहा कि डीपीआर में लगी प्रयोगशाला रिपोर्टों पर दर्ज क्रमांक 165/02-2020, 551/02-2020 और 500/01-2015 मूल प्रयोगशाला रिपोर्ट या रजिस्टर की प्रविष्टियों से संबंधित नहीं हैं। लैब प्रभारी के अनुसार ये रिपोर्टें जोनल रिसर्च लैबोरेटरी द्वारा तैयार, जारी या प्रमाणित नहीं की गईं और न ही मूल प्रयोगशाला अभिलेखों का हिस्सा हैं। आयोग ने मूल वर्षवार प्रयोगशाला रजिस्टर के संबंधित पृष्ठों की प्रमाणित प्रतियां भी रिपोर्ट के साथ संलग्न की हैं।
    माप पुस्तिका भी गायब मिली

    जांच आयोग को एक सड़क की डीपीआर के साथ संबंधित माप पुस्तिका भी नहीं मिली। आयोग ने नगर निगम से माप पुस्तिका मांगी तो निगम ने बताया कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ 24 अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस माप पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराने या प्रस्तुत नहीं किए जाने के संबंध में है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित सड़क की पुरानी डीपीआर में पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ था।

    बाद में नगर निगम ने संबंधित ठेकेदार को गारंटी अवधि में सड़क की मरम्मत कराने के लिए नोटिस जारी किया था। जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि एक ही सड़क से संबंधित अलग-अलग डीपीआर में पुराने प्रयोगशाला प्रतिवेदन लगाए गए थे।

    हाई कोर्ट ने रिपोर्ट की प्रति नगर निगम के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र के साथ रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
    कोर्ट ने कहा- शहरवासियों के साथ भी धोखा!

    रिपोर्ट सामने आने पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि ग्वालियर के लोग खराब सड़कों की वजह से परेशान हैं, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि भुगतान हासिल करने के लिए कथित फर्जी प्रयोगशाला रिपोर्ट लगाकर उनके साथ भी धोखा किया गया। हालांकि, कोर्ट ने नगर निगम को जांच आयोग की रिपोर्ट पर जवाब देने का अवसर दिया है। निगम की ओर से अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जवाब नगर निगम आयुक्त के शपथपत्र के साथ ही दाखिल किया जाए।
    एनएचएआई ने कोर्ट की सख्ती के बाद दिए दस्तावेज

    सुनवाई के दौरान जांच आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने बताया कि 15 सितंबर को हाई कोर्ट ने कड़ा आदेश दिया था। इसमें निर्देशों की अवहेलना होने पर एनएचएआई के परियोजना निदेशक भरत सिंह जौया के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की संभावना जताई गई थी। इसके बाद एनएचएआई ने 16 सितंबर को आयोग द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए।

    आयोग ने बताया कि कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक लिए गए नमूनों की रिपोर्ट 18 सितंबर को पेश की जाएगी। वहीं एनएचएआई के अधीन अन्य सड़कों से संबंधित लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट और अंतिम एनएसवी रिपोर्ट 21 सितंबर को प्रस्तुत की जाएगी।

     

  • राज्यपाल  पटेल ने रक्तदान स्वास्थ्य शिविर का लोकभवन में किया शुभारंभ

    राज्यपाल पटेल ने रक्तदान स्वास्थ्य शिविर का लोकभवन में किया शुभारंभ

    भोपाल 

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत लोकभवन में आयोजित स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। शिविर के विभिन्न काउन्टरों पर जाकर परामर्श जाँच एवं परीक्षण व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने अपनी बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच कराकर शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दंत परीक्षण, फिजियोथेरेपी जाँच, बोन मिनरल डेनसिटी (बी.एम.डी.) जांच एवं नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं औषधि वितरण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने रक्तदाताओं को फलो की टोकरी भेंट कर, उनके सेवा संकल्प की सराहना की। रक्तदान करने आए छात्र-छात्राओं से चर्चा की। उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने प्रारंभ में लोक भवन में आयोजित नि:शुल्क परामर्श, जाँच और रक्तदान शिविर का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया।

    रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुवार को सुबह 10 बजे से एक बजे तक लोक भवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। शिविर में रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन  श्याम सिंह कुमरे एवं जनरल सेक्रेटरी  रामेंद्र सिंह सहित चिकित्सक, विशेषज्ञ एवं अन्य संबंधित जन उपस्थित रहे।

    लोक भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 370 आमजन शामिल हुए। रक्तदान के लिए 109 रक्तदाताओं ने पंजीयन कराया, जिनमें चिकित्सकीय परामर्श के बाद 77 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया। दंत परीक्षण शिविर में 74 व्यक्तियों ने जांच कराई। उन्हें उपचार संबंधी परामर्श और आवश्यक औषधियां प्रदान की गई। बी.एम.डी. जाँच शिविर 125 आमजन ने जांच कराई। जांच में 77 आमजन की हड्डियों की स्थिति सामान्य पाई गई, जबकि 45 व्यक्तियों में हड्डियों की मामूली कमजोरी ऑस्टियोपेनिया तथा 3 व्यक्तियों में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। सभी को चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक औषधियां प्रदान की गईं। फिजियोथेरेपी जाँच शिविर में 62 व्यक्तियों ने भाग लिया। उनकी फिजियोथेरेपी से संबंधित समस्याओं के संबंध में चिकित्सकों द्वारा आवश्यक परामर्श एवं व्यायाम बताए गए।

     

  • प्रतिभाओं को मिलेगी सफलता की नई उड़ान, गौलाना में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ शुरू; 1,751 विद्यार्थियों का सम्मान

    प्रतिभाओं को मिलेगी सफलता की नई उड़ान, गौलाना में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ शुरू; 1,751 विद्यार्थियों का सम्मान

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि गरीब और सामान्य परिवार के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सपनों के बीच आर्थिक परिस्थितियां बाधा नहीं बनें, यही ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ का मूल उद्देश्य है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध हो।

    मंत्री  परमार गुरुवार को शाजापुर जिले के गौलाना स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर शासकीय सांदीपनि विद्यालय में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ के शुभारंभ एवं प्रतिभा खोज परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने चयनित 1 हजार 751 विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

    गरीब पिता की पीड़ा से उपजा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संकल्प

    मंत्री  परमार ने कहा कि अच्छे विद्यालयों में पढ़ने का अवसर हर बच्चे का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक गरीब पिता की उस पीड़ा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया, जब उसकी बेटी ने शहर के बड़े और अच्छे विद्यालय को देखकर वहां पढ़ने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण पिता अपनी बेटी का सपना पूरा नहीं कर सका। इसी पीड़ा को समझते हुए सरकार ने ऐसे विद्यालयों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया, जहां गरीब परिवार के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।

     परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को व्यापक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में सीएम राइज एवं सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो रही है।

    महंगी कोचिंग के आर्थिक बोझ से विद्यार्थियों को मिलेगी मुक्ति

    मंत्री  परमार ने कहा कि JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनेक विद्यार्थी इंदौर, कोटा सहित बड़े शहरों का रुख करते हैं। महंगी कोचिंग और रहने-खाने का खर्च सामान्य एवं गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होता है। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

     परमार ने कहा कि ‘प्रतिभा मंदिर’ के माध्यम से इसी आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है। अब विद्यार्थियों को अपने जिले में ही निःशुल्क कोचिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।

    6,600 से अधिक पंजीयन, 1,751 विद्यार्थियों का चयन

    मंत्री  परमार ने बताया कि प्रतिभा खोज परीक्षा के लिए 6,600 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। परीक्षा के परिणाम में 1,751 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इनमें 937 विद्यार्थी कक्षा 9 की आधारभूत तैयारी, 347 JEE तथा 467 NEET की तैयारी करेंगे।

    विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी को देखते हुए प्रतिभा मंदिर केंद्रों की संख्या 3 से बढ़ाकर 9 की गई है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर आगे एक-दो केंद्र और बढ़ाए जाएंगे, ताकि चयनित किसी भी विद्यार्थी को तैयारी के अवसर से वंचित न होना पड़े।

    कोटा और नई दिल्ली के विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन

    प्रतिभा मंदिर की कक्षाएं कोटा एवं नई दिल्ली स्थित स्टूडियो से ऑनलाइन संचालित होंगी। विषय-विशेषज्ञ शिक्षक विद्यार्थियों को JEE और NEET की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देंगे। अध्ययन सामग्री डिजिटल माध्यमों के साथ मुद्रित स्वरूप में भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मंत्री  परमार ने कहा कि यह केवल कोचिंग की व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रतिभाओं के निर्माण की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ने का कार्य करते हैं। जिस प्रकार मंदिर के शिल्पकार पत्थर को तराशकर सुंदर प्रतिमा का निर्माण करता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के जीवन को आकार देते हैं।

    अब महाविद्यालयों में पीएससी की तैयारी की भी होगी व्यवस्था

    मंत्री  परमार ने कार्यक्रम में घोषणा की कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आने वाले समय में महाविद्यालयों में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यकता के अनुसार इस व्यवस्था पर संसाधन उपलब्ध कराएगी, ताकि विद्यार्थियों को प्रशासनिक एवं अन्य सेवाओं में जाने के लिए अपने ही संस्थानों में बेहतर मार्गदर्शन मिल सके। इसकी शुरुआत शाजापुर जिले से करने का प्रयास किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रयास

    मंत्री  परमार ने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के समान अवसर उपलब्ध कराने के राष्ट्रीय संकल्प को मध्यप्रदेश में धरातल पर उतारने की दिशा में ‘प्रतिभा मंदिर’ महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर विद्यार्थियों को यह प्रकल्प समर्पित करना इस संकल्प को सेवा और कार्य के रूप में आगे बढ़ाने का अवसर है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को भारतीय दृष्टि, ज्ञान और आत्मविश्वास से जोड़ने का कार्य किया गया है। विद्यार्थियों में यह भाव विकसित होना चाहिए कि वे केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माण के लिए भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    नवाचार और प्रतिभाओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन

    मंत्री  परमार ने बताया कि जिले में विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं के साथ विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को भी प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालय और महाविद्यालय स्तर की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर उन्हें प्रदेश और देश के विकास से जोड़ना है।

    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एकाग्रता, परिश्रम और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ें। सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक, ज्ञान आधारित और भारत-केंद्रित परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

    शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को मिलेगी गति

    मंत्री  परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे नवाचारों का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो ज्ञान, कौशल, संस्कार और राष्ट्रभाव से संपन्न हों। विद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने के स्थान नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिकों के निर्माण के केंद्र हैं।

    उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना भारत की विशेषता है। हमारे विद्यार्थी ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से देश की प्रतिष्ठा को विश्व स्तर पर नई ऊंचाई प्रदान करें, यही ‘प्रतिभा मंदिर’ जैसे प्रयासों की व्यापक सार्थकता है।

    ‘प्रतिभा मंदिर’ के माध्यम से शाजापुर से शुरू हुई यह पहल अब प्रतिभाओं को अवसर देने की व्यापक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का संकल्प है कि आर्थिक या भौगोलिक सीमाओं के कारण कोई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपने सपनों से वंचित न रहे।

    छात्र-छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान

    समारोह के दौरान वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से कोटा से आईआईटी के मुंबई के संचालक पूर्व भौतिक शास्त्री प्रोफेसर डॉ. एच.सी. वर्मा ने छात्र-छात्राओं से संवाद कार उनकी जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान किया।

     

  • तकनीकी शिक्षण संस्थाएं 266 से बढ़कर 1211 हुई

    तकनीकी शिक्षण संस्थाएं 266 से बढ़कर 1211 हुई

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा का विस्तार बीते दो दशकों में हुए व्यापक बदलावों की कहानी कहता है। वर्ष 2002 में प्रदेश में जहां शासकीय एवं निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 266 थी, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,211 हो गई। इस प्रकार दो दशकों में तकनीकी शिक्षण संस्थानों के नेटवर्क में लगभग 355 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

    इसी अवधि में पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों की संख्या भी वर्ष 2002 के 42 से बढ़कर वर्ष 2024 में 129 हो गई, अर्थात लगभग 212 प्रतिशत की वृद्धि। यह विस्तार प्रदेश में तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा के बढ़ते आधार और युवाओं के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों के व्यापक विस्तार को दर्शाता है।

    यह यात्रा केवल संस्थानों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है। तकनीकी शिक्षा के विस्तारित आधार ने विद्यार्थियों के लिए अध्ययन, कौशल-विकास, रोजगार, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के नए अवसरों की नींव तैयार की है। अब इसी आधार को गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    इसी विकसित आधार को नई दिशा और गति देने का कार्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार के नेतृत्व में किया जा रहा है। वर्तमान सरकार के विगत ढाई वर्षों में तकनीकी शिक्षा को केवल संस्थानों और प्रवेश संख्या के विस्तार तक सीमित न रखते हुए उसे भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था, रोजगार, उद्यमिता, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।

    विस्तार से गुणवत्ता और उपयोगिता की ओर

    वर्ष 2002 से 2024 तक तकनीकी शिक्षा के संस्थागत विस्तार ने प्रदेश में एक मजबूत आधार तैयार किया। अब इसी आधार पर तकनीकी शिक्षा को अधिक आधुनिक, रोजगारोन्मुख और कौशल-आधारित बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है।

    वर्तमान में प्रदेश में 138 इंजीनियरिंग महाविद्यालय संचालित हैं, जिनकी कुल प्रवेश क्षमता 74,722 है। वहीं 128 पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में 36,491 सीटों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

    इस परिवर्तन का अगला महत्वपूर्ण पक्ष है—तकनीकी शिक्षा को विद्यार्थियों की वास्तविक आवश्यकताओं और रोजगार बाजार से जोड़ना। शासकीय संस्थानों में सक्रिय ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के माध्यम से 40 से 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को रोजगार एवं प्लेसमेंट प्राप्त हो रहा है।

    इस प्रकार तकनीकी शिक्षा का विकास अब केवल ‘कितने संस्थान’ के प्रश्न से आगे बढ़कर ‘इन संस्थानों से विद्यार्थियों को क्या अवसर मिल रहे हैं’ के प्रश्न का उत्तर देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में बढ़ता विश्वास तकनीकी शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि का प्रभाव प्रवेश संख्या में भी दिखाई देता है।

    सत्र 2024-25 में 1 लाख 50 हजार 178 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जो सत्र 2025-26 में बढ़कर 1 लाख 89 हजार 210 हो गया। इस प्रकार कुल प्रवेश में 25.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप प्रवेश संख्या में 21.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह संकेत देता है कि तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा अब युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार की महत्वपूर्ण राह बन रही है।

    डिप्लोमा को 12वीं के समतुल्य मान्यता : तकनीकी शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने का कदम

    तकनीकी शिक्षा को सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से अधिक व्यापक अवसरों से जोड़ने के लिए पॉलिटेक्निक डिप्लोमा को कक्षा 12वीं के समतुल्य घोषित किया गया है।

    इस निर्णय से डिप्लोमा विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न रोजगार अवसरों का दायरा विस्तृत हुआ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप पॉलिटेक्निक डिप्लोमा उत्तीर्ण विद्यार्थी तकनीकी के साथ-साथ गैर-तकनीकी विषयों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकता है।

    अर्थात तकनीकी शिक्षा को अब एक अलग धारा के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सशक्त किया जा रहा है।

    प्रतिभा के साथ सरकार का आर्थिक संबल

    तकनीकी शिक्षा के विस्तार को तभी सार्थक बनाया जा सकता है, जब आर्थिक कारणों से कोई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अवसर से वंचित न हो। इसी दृष्टि से मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है।

    सत्र 2024-25 में 78 हजार 218 से अधिक विद्यार्थियों को लगभग 750 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 74 हजार 349 मेधावी विद्यार्थियों को लगभग 1,100 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी गई।

    इसी प्रकार मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14 हजार 447 विद्यार्थियों को 14.55 करोड़ रूपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 35 हजार से अधिक विद्यार्थियों को 127.50 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई।

    SGSITS इंदौर में ‘अटल वित्तीय सहायता योजना’ की शुरुआत भी इसी छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण का उदाहरण है। योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रतिवर्ष 1 करोड़ रूपये की आनुपातिक आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। डिप्लोमा से द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।

     मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा : ज्ञान के साथ आत्मविश्वास

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी माध्यम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बी.टेक. सिविल के हिंदी माध्यम विद्यार्थियों को विशेष प्रोत्साहन तथा अंतिम वर्ष में अधिकतम 2 लाख रूपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।

    इस पहल का उद्देश्य केवल भाषा का विकल्प देना नहीं, बल्कि हिंदी माध्यम से आने वाले विद्यार्थियों के लिए तकनीकी विषयों की समझ, आत्मविश्वास और अवसरों को मजबूत करना है।

    स्थानीय आवश्यकता से जुड़ी तकनीकी शिक्षा

    तकनीकी शिक्षा को स्थानीय अर्थव्यवस्था और उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में सिंगरौली में 76.56 करोड़ रूपये की लागत से अत्याधुनिक खनन प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का निर्माण प्रगति पर है।

    CSR सहयोग से विकसित हो रहा यह संस्थान स्थानीय खनन एवं ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    इस प्रकार तकनीकी शिक्षा को स्थानीय संसाधनों, उद्योगों और रोजगार की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से शैक्षणिक जुड़ाव

    IIT इंदौर एवं MANIT भोपाल के साथ शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से प्रदेश के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में अध्ययन, अनुसंधान एवं प्रोजेक्ट कार्य का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।

    आधुनिक प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञ फैकल्टी के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय तकनीकी वातावरण का अनुभव प्राप्त हो रहा है। इससे प्रदेश के तकनीकी संस्थानों और राष्ट्रीय स्तर की अकादमिक एवं अनुसंधान क्षमताओं के बीच जुड़ाव मजबूत हो रहा है।

    रक्षा तकनीक और साइबर सुरक्षा के नए अवसर

    राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की शुरुआत के माध्यम से साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, सिक्योरिटी मैनेजमेंट, पुलिस साइंस एवं मैनेजमेंट तथा राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित अनुसंधान के क्षेत्रों में नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

    यह पहल तकनीकी शिक्षा को देश की उभरती सुरक्षा एवं डिजिटल आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    क्षेत्रीय संतुलन के लिए विश्वविद्यालयों का विकेंद्रीकरण

    राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विकेंद्रीकरण की दिशा में *मालवा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उज्जैन, महाकौशल प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जबलपुर और मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक पहुंच मजबूत होने, स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित होने तथा अनुसंधान एवं नवाचार को गति मिलने की संभावनाएं हैं।

    रोजगार लेने वाले नहीं, रोजगार देने वाले युवा

    तकनीकी शिक्षा के अगले चरण का केंद्र केवल रोजगार नहीं, बल्कि उद्यमिता और रोजगार सृजन है। प्रदेश के 10 शासकीय इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं। जबलपुर, उज्जैन, रीवा, इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग महाविद्यालय और नौगांव इंजीनियरिंग महाविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए नवाचार एवं उद्यमिता का वातावरण विकसित किया गया है।

    भोपाल, इंदौर और शिवपुरी के विभिन्न पॉलिटेक्निक संस्थानों में भी इन्क्यूबेशन सेंटर युवाओं को स्टार्टअप, तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

    MSME-RAMP योजना के अंतर्गत 9 अतिरिक्त इन्क्यूबेशन सेंटर चिन्हित किए गए हैं। इनके माध्यम से विभिन्न जिलों की स्थानीय प्रतिभाओं को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    अत्याधुनिक तकनीक से भविष्य की तैयारी

    IIT दिल्ली के सहयोग से तकनीकी संस्थानों में अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए गए हैं। इंजीनियरिंग महाविद्यालय जबलपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं 5G-IoT, इंजीनियरिंग महाविद्यालय उज्जैन में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी तथा शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय भोपाल में AR/VR आधारित सेंटर संचालित हैं।

    शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय शाजापुर में 1.25 करोड़ रूपये की लागत से रिन्यूएबल एनर्जी लैब विकसित की जा रही है। इससे ग्रीन एनर्जी, सोलर टेक्नोलॉजी और उभरती तकनीकों में विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।

    कोडिंग से AI तक : नई तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी

    भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में कोडिंग लैब्स का विस्तार किया जा रहा है। रीवा में कोडिंग लैब संचालित है, जबकि सागर, जबलपुर एवं उज्जैन के इंजीनियरिंग महाविद्यालयों तथा नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, इंदौर, ग्वालियर एवं भोपाल के पॉलिटेक्निक संस्थानों में अत्याधुनिक कोडिंग लैब्स विकसित की जा रही हैं।

    AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    सार्थक ऐप आधारित रियल-टाइम उपस्थिति प्रणाली, स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, AICTE मानकों के अनुरूप अधोसंरचना तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तकनीकी शिक्षा को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाते हैं।

    विस्तार से परिवर्तन तक : तकनीकी शिक्षा की नई यात्रा

    वर्ष 2002 से 2024 के आंकड़े मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा के व्यापक संस्थागत विस्तार की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। शासकीय एवं निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 266 से बढ़कर 1,211 होना तथा पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों की संख्या 42 से बढ़कर 129 होना इस यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।

    वहीं वर्तमान सरकार के विगत ढाई वर्षों की पहल इस विस्तारित आधार को गुणवत्ता, कौशल, रोजगार, नवाचार, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा को सामने रखती हैं।

    अर्थात तकनीकी शिक्षा की यात्रा अब केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने से संस्थानों की उपयोगिता बढ़ाने, केवल डिग्री से कौशल, केवल रोजगार से रोजगार सृजन और केवल परंपरागत पाठ्यक्रमों से भविष्य की उभरती तकनीकों की ओर बढ़ रही है।

    विजन : तकनीक, कौशल और नवाचार से विकसित मध्यप्रदेश

    मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्रीधारी इंजीनियर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो तकनीकी रूप से दक्ष, कौशल-संपन्न, नवाचारी, आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप हों।

    वर्षों में विकसित हुए संस्थागत आधार को आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा, अनुसंधान, स्टार्टअप, मातृभाषा और कौशल से जोड़कर तकनीकी शिक्षा को प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है।

    2002 से शुरू हुई संस्थागत विस्तार की यात्रा आज आधुनिक तकनीक, कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता के नए चरण में प्रवेश कर रही है। तकनीक से कौशल, कौशल से रोजगार, नवाचार से उद्यमिता और उद्यमिता से आत्मनिर्भरता—यही विकसित मध्यप्रदेश के तकनीकी भविष्य की आधारशिला है।

     

  • स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वामित्व योजना शुरू होने से ग्रामीण आबादी को उनका अधिकार मिलेगा। हमारी सरकार द्वारा प्रदेश के 41 हजार से अधिक गांवों में एक माह तक अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का अभियान चलाया जा रहा है। पैतृक और अपनी संपत्ति हर परिवार का सपना होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद  नितिन नबीन की उपस्थिति में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना में निजी सम्पत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री दस्तावेज प्रदान करने के अभियान के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ हो रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन का पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर आगमन हुआ है। हम सभी उनका अभिनंदन करते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने दुनिया को भारत की शक्ति से परिचित करवाया है। हाल ही में नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट के दौरान दुनिया ने इसे महसूस किया है। प्रधानमंत्री  मोदी देशवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाओं के माध्यम से लगातार काम कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रधानमंत्री  मोदी का जन्मदिवस है और भगवान विश्वकर्मा की भी जयंती है। भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना के साथ-साथ सभी प्रकार के छोटे काम करने वालों को स्वावलंबन की राह दिखलाई। राज्य सरकार छोटे कामगारों के साथ खड़ी है। हमारी सरकार ने लाड़ली बहनों के कल्याण के लिए 55 हजार करोड़ से अधिक राशि अब तक उनके खातों में अंतरित की है। माताओं-बहनों के आशीर्वाद से प्रदेश समृद्ध हो रहा है। बहनों को रोजगार आधारित उद्योग में काम करने पर हर माह 5000 रुपए की प्रोत्साहन राशि का लाभ अलग से मिलेगा। हमारी सरकार उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही हैं, जहां भगवान कृष्ण और भगवान राम के चरण पड़े हैं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं राज्यसभा सांसद  नवीन ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के अंतर्गत तीन हितग्राहियों को निःशुल्क पंजीयन विलेख (रजिस्ट्री) प्रदान किए।

    स्वामित्व योजना एक अनमोल उपहार :  नितिन नबीन

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर स्वामित्व योजना के रूप में एक अनमोल उपहार दिया है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने सुशासन, धर्म संस्कृति और जनसेवा के लिए मजबूत नींव रखी थी। उन्होंने विधवा बहनों को संपत्ति का अधिकार और कानूनी सुरक्षा देने की पहल की थी। इसी से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामित्व योजना के माध्यम से गरीब के सपनों को जमीन पर उतारने का सराहनीय कार्य किया है। इस योजना की शुरुआत देवी अहिल्या की नगरी इंदौर से हो रही है। यह रजिस्ट्री केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण आबादी को स्वाभिमान से जीने का अधिकार है। दशकों से गांवों के लोगों को अपनी जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश में स्वामित्व योजना लागू की, जिसका सुखद परिणाम अब मध्यप्रदेश में देखने को मिल रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशभर में करीब 68 लाख भूखंडों का सर्वे किया है। आज से पचास लाख लोगों को नि:शुल्क रजिस्ट्री कर अधिकार दिलाने की शुरुआत हुई है। इसके लिए राज्य सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती है। देश के श्रमिक और मेहनतकश लोगों को भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद मिलता रहा है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस पर हमने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री  मोदी के संकल्प के बलबूते आज देश के 80 करोड़ घरों तक नि:शुल्क अनाज पहुंचाया जा रहा है। कोविड के दौर में नि:शुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराई गई। देशभर में गरीबों के जनधन बैंक खाते खोले गए। गरीब-जरूरतमंदों को स्वाभिमान से जीने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री जी ने पिछले 25 सालों से सेवा और समर्पण भाव से देश की सेवा की है। मध्यप्रदेश की धरती से हम सभी मिलकर प्रधानमंत्री  मोदी की दीर्घायु के लिए आशीर्वाद का दीया जलाएंगे। प्रधानमंत्री  मोदी जब किसी वैश्विक आयोजन में जाते हैं तो दुनिया में भारत का डंका बजता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने 17 सितंबर 2025 को स्वस्थ नारी शक्ति परिवार योजना का शुभारंभ किया। वर्ष 2023 में इसी दिन देश के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की। आज दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया-2026 का उद्घाटन हो रहा है। मध्यप्रदेश में 50 लाख लोगों को स्वामित्व योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने हर योजना में अंत्योदय के भाव को सर्वोपरि रखा है। प्रधानमंत्री के संकल्प से अयोध्या में भव्य राम मंदिर और उज्जैन में महाकाल महालोक का निर्माण हो चुका है। देश की 3 करोड़ से अधिक लखपति बहनें स्वावलंबी बनी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं 93 लाख बहनें आजीविका मिशन के माध्यम से देश के विकास में योगदान दे रही हैं। युवाओं के लिए स्टार्टअप योजना और मुद्रा योजना संचालित हैं। देश में 2 लाख स्टार्टअप आगे बढ़ रहे हैं, जो दूसरों को रोजगार के अवसर दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री  मोदी ने सीमावर्ती गांवों में विकास को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री  मोदी ने गरीब-जरूरतमंदों को केंद्र में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने विकसित भारत @2047 का सपना देखा है। देश का हर नागरिक अपना विकास करेगा तो देश भी निश्चित रूप से आगे बढ़ेगा।

    उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को सुशासन और जनकल्याण के कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। आज पूरे देश के साथ मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  मोदी का जन्मदिवस उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन भी पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर आए हैं। प्रधानमंत्री  मोदी का पूरा जीवन सेवा, समर्पण और अंत्योदय को समर्पित रहा है, उन्होंने राजनीति को कभी सत्ता का साधन नहीं माना। इसी पावन भावना को आधार बनाकर मध्यप्रदेश सरकार स्वामित्व योजना का शुभारंभ कर रही है। प्रधानमंत्री  मोदी का मानना है कि हर गरीब और जरूरतमंद के पास उसका पक्का मकान होना चाहिए। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 अभियान के पुनीत कार्य में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष सेवाभाव और समर्पण शामिल रहा है। यह सिर्फ कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि गरीब के स्वाभिमान और उनके स्वर्णिम भविष्य की पक्की मुहर है।

    प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन, बैंक खाते, पक्के मकान और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। इसी क्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से अपनी संपत्ति पर निवास कर रहे लोगों को उनके मकानों और भूमि के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश में लगभग 50 लाख लोगों को उनके घरों के दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का अधिकारिक दस्तावेज मिलेगा और आवश्यकता पड़ने पर बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ लेने में भी सहायता मिलेगी। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता लोककल्याण को माना था। उसी भावना के अनुरूप मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीणों के हित में कार्य कर रही है। बाबा महाकाल का आशीर्वाद, प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रारंभ यह पहल ग्रामीण भारत के भविष्य को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने किया।

    विकास प्रदर्शनी का किया अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  नितिन नबीन और अतिथियों ने कार्यक्रम स्थल पर शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं जिले में संचालित विकासात्मक गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

    स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निजी सम्पत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री

    कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री  मोदी के सपने को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान का शुरू किया है। अब प्रदेश के ग्रामीण भाइयों-बहनों को घरों की रजिस्ट्री के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। मध्यप्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में अब तक लगभग 68 लाख अधिकार पत्र तैयार किए गए हैं, इनमें 50 लाख निजी संपत्तियों के हैं। आज से इन्हीं मकान मालिकों को नि:शुल्क रजिस्ट्री देने के लिए राज्य सरकार लगभग 4 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

    पंचायत स्तर पर तीन चरणों में होंगे विशेष शिविर, स्थानीय स्तर पर पूरी होगी पंजीयन प्रक्रिया

    योजना के अंतर्गत हितग्राहियों की संपत्ति के आधार पर सुगमता से ऋण उपलब्ध कराने के लिए तैयार निजी अधिकार अभिलेखों का निःशुल्क पंजीयन किया जाएगा। पंजीयन के बाद नागरिक गृह निर्माण, व्यवसाय, कृषि एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण प्राप्त कर सकेंगे। प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ग्राम एवं पंचायत स्तर पर तीन चरणों में विशेष शिविर आयोजित होंगे। प्रथम चरण 17 से 19 सितंबर, द्वितीय चरण 24 से 26 सितंबर और तृतीय चरण 1 से 3 अक्टूबर तक होगा। आवेदन के लिए आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी से ई-केवाईसी अनिवार्य होगी। ‘सारा’ मोबाइल एप के माध्यम से निष्पादन और ‘संपदा’ एप पर विलेख (रजिस्ट्री) के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजीयन प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूर्ण करने के लिए पटवारी को निष्पादन अधिकारी तथा तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पीसीओ एवं एडीईओ को पंजीयन अधिकारी नियुक्त किया गया है। पंजीयन पूर्ण होने के बाद विलेख हितग्राही के मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। अभियान की जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग एवं मैदानी समीक्षा की जाएगी और इसे एक माह में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

    कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री  सावित्री ठाकुर, सांसद  शंकर लालवानी,  गजेंद्र पटेल तथा सु कविता पाटीदार, जिला पंचायत अध्यक्ष  रीना सतीश मालवीय,  महेंद्र सिंह, विधायकगण  रमेश मेंदोला,  गोलू शुक्ला,  मालिनी गौड़,  महेंद्र हार्डिया, सु उषा ठाकुर,  मधु वर्मा तथा  मनोज पटेल, सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष  प्रताप करोसिया,  सुमित मिश्रा तथा  श्रवण चावड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण और नागरिक भी उपस्थित रहें।

     

  • शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से किसानों को राहत, अब साल में एक ही बार चुकाना होगा कर्ज

    शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से किसानों को राहत, अब साल में एक ही बार चुकाना होगा कर्ज

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मना रही है। इसके तहत किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण, आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रोन तकनीक, सिंचाई सुविधाओं सहित कृषि विकास से जुड़ी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि खेती को लाभ का माध्यम बनाने के साथ किसान आय के अन्य स्रोतों को भी मजबूत किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर सागर जिले के किसानों से वर्चुअली जुड़कर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसान कल्याण वर्ष के तहत भगवान बलराम और अन्नदाताओं को समर्पित है। सागर में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की बेहतरी के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बड़ी सौगात है। करीब एक लाख करोड़ रुपये की इस योजना से सागर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और छतरपुर सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं बनेंगी। किसानों के हर खेत तक पानी पहुंचाने की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें बधाई देते हुए बुंदेलखंडवासियों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार काम कर रही है। क्षेत्र में धान, गेहूं और ज्वार के साथ नकदी फसलों का उत्पादन भी हो रहा है। कृषि उत्पादन के साथ फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना से किसानों को अपनी उपज के बेहतर मूल्य के अवसर मिलेंगे।

    शून्य प्रतिशत ब्याज ऋण से लेकर दिन में 10 घंटे बिजली तक किसानों को मिलेंगी सुविधाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। अब किसानों को वर्ष में एक बार ही ऋण चुकाना होगा। उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक ऋण चुकाने से जुड़ी परेशानी को समाप्त किया गया है। सरकार किसानों के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि आगामी फसल सीजन में किसानों को दिन के समय 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। किसानों की सिंचाई संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिजली व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाद को लेकर ई-टोकन की व्यवस्था की जा रही है, जिससे किसानों को खाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए भी सरकार प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाने से खेती में लगातार उन्नति हो रही है। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और ड्रोन तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से उद्यानिकी और फल उत्पादन को भी अपनाने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। गांव-गांव में सहकारी समितियां बनाकर किसान अपना दूध सांची को उपलब्ध करा सकते हैं। इससे उन्हें दूध का उचित मूल्य मिलने के साथ वार्षिक बोनस का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश वर्तमान में दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है और आने वाले समय में प्रदेश को पहले स्थान पर लाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी सीजन में किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। किसान सोलर पंप लगाकर सिंचाई की सुविधा प्राप्त करने के साथ बिजली बिल से भी राहत पा सकते हैं।

    सागर के विकास को नई गति देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान की आय केवल फसल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मछली पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने पर सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार बनने के बाद सागर में आयुर्वेदिक कॉलेज और विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी गई है। उन्होंने कहा कि सागर को विकास के नए आयामों तक ले जाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किसानों को दी जा रही किसान सम्मान निधि की राशि से किसानों की कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति समय पर हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की महत्वपूर्ण आवश्यकता बिजली और सिंचाई के लिए जल की व्यवस्था लगातार की जा रही है। सड़क, अधोसंरचना, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत की साख एवं भारतीयों का सम्मान बढ़ा है।

    मंत्री  राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में रबी उपार्जन के अंतर्गत इस वर्ष रिकॉर्ड 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं सरकार द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि अब मध्यप्रदेश में किसानों को उनकी भूमि का अधिग्रहण होने पर चार गुना मुआवजा प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने समस्त जिलेवासियों से अपील की कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मदिन के साथ प्रारंभ हुए सेवा संकल्प अभियान में भागीदार बनें और आज शाम सभी अपने घर-आंगन में आशीर्वाद का दीया अवश्य जलाएं।

    बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर नरयावली विधायक  प्रदीप लारिया ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच है कि शासन की योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा गरीब, किसान, महिला और युवा सहित सभी वर्गों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से संबल प्रदान किया जा रहा है। किसानों की खेती से जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार सतत कार्य कर रही है तथा बिजली और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में विद्युत उत्पादन में वृद्धि हुई है और मध्यप्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा  अन्न के उत्पादन से किसानों में समृद्धि आ रही है और बिजली, सड़क, सिंचाई, रेल, चिकित्सा, तकनीकी सहित सभी बुनियादी क्षेत्रों में प्रदेश प्रगति कर रहा है।

    कार्यक्रम में एपेक्स बैंक प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, सागर कलेक्टर मती प्रतिभा पाल, भोपाल से आए कृषि वैज्ञानिक  सतीश परसाई तथा प्रगतिशील किसान  आकाश चौरसिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

     

  • प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूर्ण होने पर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में हुई ‘चीता चौपाल’

    प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूर्ण होने पर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में हुई ‘चीता चौपाल’

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में चीतों के पुनर्स्थापन के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गुरुवार को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में ‘चीता चौपाल’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को चीता संरक्षण, पुनर्स्थापन की यात्रा और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।

    कार्यक्रम में प्रमुख सचिव वन  राघवेन्द्र कुमार सिंह ने वर्चुअली जुड़कर विगत 4 वर्षों में चीतों के संरक्षण, प्रजनन एवं उनके रहवास के संबंध में जानकारी प्रदान की। साथ ही चीतों के भविष्य के लिये किये जा रहे प्रबंधन एवं संरक्षण के प्रयासों से विद्यार्थियों एवं युवाओं से संवाद कर अवगत कराया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजोरा द्वारा विद्यार्थियों को चीता पुनर्वास, संरक्षण, प्राकृतिक आवास एवं वन्य-जीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

    चीता चौपाल में क्षेत्र संचालक कूनो राष्ट्रीय उद्यान  उत्तम शर्मा द्वारा कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़कर प्रोजेक्ट चीता के विगत 4 वर्षों में किये गये प्रबंधन के संबंध में विद्यार्थियों को जानकारी दी गई। चीता चौपाल में कूनो राष्ट्रीय उद्यान द्वारा चीता पर केन्द्रित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिये स्टोन पेंटिंग प्रतियोगिता एवं वुडन टाइल पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लगभग 90 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों की सहभागिता से उनमें वन्य-जीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होने के साथ चीता पुनर्वास एवं संरक्षण के प्रति जागरूकता का भी प्रसार हुआ। प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर वन विहार के अधिकारी-कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

     

  • DGP से मिले हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले ASP अधिकारी, बेहतर पुलिसिंग के लिए मिला मार्गदर्शन

    DGP से मिले हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले ASP अधिकारी, बेहतर पुलिसिंग के लिए मिला मार्गदर्शन

    भोपाल 

    पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके 10 सहायक पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) अधिकारियों ने आज पुलिस मुख्यालय भोपाल में सौजन्य भेंट की। इस दौरान डीजीपी  मकवाणा ने अधिकारियों से पुलिस नेतृत्व, पर्यवेक्षण एवं मैदानी कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया तथा उन्हें पुलिस सेवा में प्रभावी नेतृत्व के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। डीजीपी  मकवाणा ने अधिकारियों से कहा कि एसडीओपी पहला पर्यवेक्षण अधिकारी होता है, इसलिए पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। जनता की शिकायत का समाधान पुलिसिंग की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है। पीड़ित की शिकायत को पहले चरण में ही समझकर उसके निराकरण का प्रयास किया जाए, ताकि उन्‍हें त्वरित राहत मिल सके।

    डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि पुलिस नेतृत्व में ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ प्रभावी पर्यवेक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारी अपने अधीनस्थों के कार्यों की नियमित समीक्षा करें, उनकी समस्याओं को समझें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अधिकारी की जिम्मेदारी केवल कार्यों की निगरानी तक सीमित नहीं होती, बल्कि अधीनस्थों का मार्गदर्शन करना और उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना भी नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने थानों के निरीक्षण के संबंध में कहा कि निरीक्षण के दौरान पुलिस कार्यप्रणाली की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से निरुद्ध न रखा जाए तथा थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को थानों का नियमित एवं औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि मैदानी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त हो सके।

    डीजीपी  मकवाणा ने  कहा कि अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले नियमित निरीक्षणों का हिस्सा बनें और निरीक्षण के दौरान पुलिसिंग की बारीकियों को समझें। मैदानी अनुभव और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन से पुलिसिंग की व्यावहारिक समझ विकसित होती है, जिसका लाभ आगे की सेवा में मिलता है। उन्होंने तकनीक आधारित पुलिसिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अपराधों एवं प्रकरणों के निराकरण में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) के माध्यम से उपलब्ध फिंगरप्रिंट संबंधी तकनीकी सहायता का उपयोग कर अपराधों एवं प्रकरणों के निराकरण को और प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होंने थाने की कार्यप्रणाली के संदर्भ में थाना परेड को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नियमित परेड के माध्यम से बल की उपस्थिति, अनुशासन, वर्दी, टर्नआउट एवं आवश्यक निर्देशों की जानकारी सुनिश्चित की जा सकती है।

    डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि पुलिस सेवा में प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं। अधिकारी का दायित्व है कि वह समस्याओं को टालने के बजाय उनकी जड़ तक पहुंचे और उपलब्ध संसाधनों एवं नियमों के अनुरूप समाधान का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि अधीनस्थों की समस्याओं का समाधान करने वाला नेतृत्व ही संगठन में विश्वास और बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करता है।

    इस अवसर पर अधिकारियों ने पुलिसिंग एवं नेतृत्व से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार और जिज्ञासाएं साझा कीं। डीजीपी  मकवाणा ने अपने अनुभवों के आधार पर अधिकारियों के प्रश्नों का मार्गदर्शन किया तथा उन्हें सेवा के प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर एवं एसओ टू डीजीपी  मलय जैन भी उपस्थित थे।

     

  • भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के दिव्य शिल्पकार : राज्यमंत्री  गौर

    भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के दिव्य शिल्पकार : राज्यमंत्री गौर

    भोपाल 

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के दिव्य शिल्पकार के रूप में जाना जाता है। उनका अद्वितीय ज्ञान, कौशल और निर्माण क्षमता हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। भारतीय संस्कृति में भगवान विश्वकर्मा का विशेष महत्व है और उनकी जयंती हमें सृजन, परिश्रम एवं राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धर्म, संस्कृति और हमारी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य कर रही है। राज्यमंत्री  गौर विश्वकर्मा जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर गोविंदपुरा क्षेत्र के बागसेवनिया स्थित विश्वकर्मा मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में साकार हो रहा 'विकसित भारत' का संकल्प

    राज्यमंत्री  गौर ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को उनके जन्मोत्सव पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज का दिन अत्यंत शुभ है।प्रधानमंत्री   मोदी के कुशल मार्गदर्शन में देश में निर्माण और विकास की प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है। राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि 'विकसित भारत' के संकल्प के तहत प्रधानमंत्री  मोदी समाज के सभी वर्गों के कल्याण और देश के सर्वांगीण विकास के लिए अहर्निश कार्य कर रहे हैं।

    कार्यक्रम में स्थानीय पार्षद  प्रताप बारे,  प्रदीप पाठक,  रामबाबू पाटीदार,  सुरेंद्र पंडित सहित बड़ी संख्या में स्थानीय रहवासी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।