Category: लाइफ स्टाइल

  • महंगी क्रीम छोड़िए, देसी घी से बनाएं नेचुरल फेस क्रीम

    महंगी क्रीम छोड़िए, देसी घी से बनाएं नेचुरल फेस क्रीम

    आपने टीवी पर महंगी-महंगी क्रीम के विज्ञापन जरूर देखे होंगे, जिनमें दावा किया जाता है कि इन्हें इस्तेमाल करके चेहरे पर निखार आ जाएगा और रंग भी निखर जाएगा. विज्ञापनों में किए गए इन बड़े-बड़े दावों को देखकर लोग बिना सोचे-समझे महंगी फेस क्रीम खरीद लेते हैं. लेकिन हर बार महंगी क्रीम ही स्किन के लिए सही हो, ये जरूरी नहीं. कई बार इनमें मौजूद अलग-अलग केमिकल्स स्किन को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. तो आखिर बिना महंगी क्रीम के चेहरे को मुलायम,

    मॉइश्चराइज्ड और ग्लोइंग कैसे रखा जाए?
    इसका जवाब आपकी दादी-नानी के पुराने स्किनकेयर नुस्खे में छिपा है. आपकी दादी-नानी के समय में स्किनकेयर के लिए बहुत सारे प्रोडक्ट्स नहीं हुआ करते थे. वे लोग घर में मौजूद तेल, मलाई और देसी घी जैसी चीजों से ही त्वचा की देखभाल की जाती थी. देसी घी भी इन्हीं चीजों में शामिल है. इसे सही तरीके से इस्तेमाल करने पर खासतौर पर रूखी त्वचा को नमी देने में मदद मिल सकती है. आइए जानते हैं घर पर देसी घी की क्रीम कैसे तैयार करें और इसे लगाने का सही तरीका क्या है.

      देसी घी से कैसे बनाएं फेस क्रीम?
    इसके लिए आपको बहुत ज्यादा सारे इंग्रेडिएंट्स की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद कुछ चीजों से ही आप नेचुरल क्रीम तैयार कर सकते हैं.

    इसके लिए आपको करीब 2 चम्मच शुद्ध देसी घी लें. इसमें थोड़ा एलोवेरा जेल और गुलाब जल मिलाएं. अब चम्मच की मदद से मिश्रण को लगातार एक ही डायरेक्शन में फेंटते रहें. मिश्रण को तब तक मिलाएं जब तक इसका टेक्शचर हल्का, क्रीमी और मुलायम न हो जाए. मिश्रण तैयार करते समय अगर इसमें से एक्स्ट्रा पानी अलग हो रहा है तो उसे निकाल दें. जब घी क्रीम जैसा दिखने लगे तो इसे एक साफ और सूखे कंटेनर में रख सकते हैं.

    रूखी स्किन के लिए हो सकती है मददगार
    अगर आपकी स्किन अक्सर खिंची-खिंची या रूखी महसूस होती है तो घर पर बनी घी की ये क्रीम एक ऑयल-बेस्ड मॉइस्चराइजर की तरह काम कर सकती है. घी स्किन पर एक लेयर बनाने में मदद करता है, जिससे नमी लॉक रहने में मदद मिल सकती है.

    खासकर जिन लोगों की स्किन बहुत ज्यादा ड्राई होती है उन लोगों को इससे स्किन ज्यादा सॉफ्ट महसूस हो सकती है. हालांकि, हर किसी की स्किन अलग होती है, इसलिए इसे सभी के लिए एक जैसा असरदार मानना सही नहीं होगा.

    चेहरे पर नेचुरल निखार लाने में कर सकती है मदद
    जब स्किन में नमी की कमी होती है तो चेहरा रूखा और बेजान नजर आने लगता है. मॉइस्चराइजिंग के बाद स्किन ज्यादा सॉफ्ट और हेल्दी दिख सकती है. इसी वजह से घी बेस्ड क्रीम लगाने के बाद चेहरे पर कुछ लोगों को नेचुरल ग्लो नजर आ सकता है. लेकिन इसे लगाने से दाग-धब्बे या झुर्रियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता है.

    रात में लगाना रहेगा बेहतर
    अगर आप इसे ट्राई करना चाहते हैं तो रात में चेहरा साफ करने के बाद थोड़ी सी मात्रा लेकर हल्के हाथों से लगाएं. सुबह चेहरे को पानी या अपने माइल्ड फेस क्लींजर से साफ कर लें. शुरुआत में रोज लगाने के बजाय हफ्ते में कुछ बार इस्तेमाल करके देखें कि आपकी स्किन पर इसका कैसा असर हो रहा है.

    चेहरे पर लगाने से पहले ये गलती न करें
    नेचुरल क्रीम होने का मतलब ये नहीं है कि वो हर स्किन पर सूट करेगी. घी कुछ लोगों की स्किन पर भारी या चिपचिपा महसूस हो सकता है और बहुत ऑयली या मुंहासे वाली स्किन पर ये हर किसी के लिए सही ऑप्शन नहीं हो सकता.

    इसलिए पहली बार चेहरे पर लगाने से पहले हाथ या कान के पीछे थोड़ी मात्रा लगाकर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, लालिमा, खुजली या किसी तरह की एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.

    ध्यान रखें ये बात: देसी घी की क्रीम को एक आसान घरेलू मॉइस्चराइजिंग उपाय की तरह देखा जा सकता है, लेकिन इसे हर तरह की स्किन समस्या का इलाज नहीं माना जाना चाहिए. अगर चेहरे पर लगातार मुंहासे, जलन, एलर्जी या कोई अन्य समस्या है तो घरेलू नुस्खों के बजाय किसी स्किन एक्सपर्ट की सलाह लेना ज्यादा बेहतर है. अगर आपकी स्किन सिर्फ रूखी रहती है और आप एक आसान घरेलू मॉइस्चराइजर ट्राई करना चाहते हैं, तो थोड़ी मात्रा में देसी घी से बनी ये क्रीम आजमाई जा सकती है.

  • हरियाली तीज पर चेहरे पर चाहिए नेचुरल ग्लो, अपनाएं ये आसान घरेलू नुस्खे

    हरियाली तीज पर चेहरे पर चाहिए नेचुरल ग्लो, अपनाएं ये आसान घरेलू नुस्खे

     करवाचौथ की तरह हरियाली तीज भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, राजस्थान, उत्तर प्रदेश से लेकर कई शहरों में महिलाएं इस पर्व को मनाती हैं. हरियाली तीज का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व बताया गया है, और यह सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है. हर महिला इस दिन सबसे सुंदर दिखना चाहते हैं और इसके लिए हफ्ते भर से पार्लर के चक्कर लगाने लगती हैं.

    इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए व्रत करती हैं और कुवांरी लड़कियां भी अच्छे पति के लिए इस व्रत को रखती हैं. इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनती हैं और सोलह शृंगार भी करती हैं. इस साल हरियाली तीज का त्योहार 15 अगस्त, शनिवार को पड़ रहा है. अब बस कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं. इस दिन अगर आपको भी अपने चेहरे पर नेचुरल चमक चाहिए तो टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि घर में मौजूद कुछ देसी चीजों से ही आप अपने चेहरे पर गुलाबी निखार ला सकती हैं.

    इन कुछ दिनों में ही आप अपने फेस को ग्लोइंग बना सकते हैं और इसके लिए आपको घर से बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा. आइए आपको इन देसी तरीकों के बारे में बताते हैं, जो आपके बहुत काम आएंगे.

     शहद वाला टोनर  
    चेहरे पर अधिकतर लोग नींबू का रस लगाते हैं, जबकि ऐसा करने से जलन और सन-सेंसिटिविटी बढ़ सकती है. इसकी बजाय गुलाब जल में थोड़ा शहद मिलाकर हल्का हाइड्रेटिंग फेस मिस्ट इस्तेमाल कर सकती हैं. जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव होती है, उन्हें इसे लगाने से पहले एक बार पैच टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए.

    नारियल तेल से मॉइस्चराइजिंग
    जिन महिलाओं की स्किन ड्राई होती है, वो  नारियल तेल की कुछ बूंदों से हल्की मसाज की जा सकती है. इससे उनकी स्किन का रूखापन काफी हद तक कम होता है और त्वचा मुलायम लगती है. अगर आपकी स्किन ऑयली या एक्ने-प्रोन है, तो चेहरे पर नारियल तेल लगाने से बचना बेहतर है.

    हल्दी और दूध का फेस मास्क
    हल्दी वाला दूध जैसे हमारी बॉडी के लिए अच्छा होता है, उसी तरह से हल्दी-दूध से बना फेस मास्क भी हमारी स्किन के लिए काफी गुणकारी माना जाता है. इसका सबसे कारण यह है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और दूध की मॉइस्चराइजिंग गुण त्वचा को निखरा हुआ लुक देने में मदद कर सकती है. 1 चम्मच दूध में चुटकीभर हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 10 से 15 मिनट बाद धो लें.

     ओटमील स्क्रब
    ओटमील को आप स्क्रब की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, इसे स्किन को हल्के हाथों से एक्सफोलिएट करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. बारीक ओटमील में थोड़ा दही या पानी मिलाकर चेहरे पर बिना रगड़े हल्के हाथों से लगाएं और कुछ देर बाद साफ पानी से अपना चेहरा धो लें.

    रोजाना 4 लीटर पानी पिएं
    त्योहार की तैयारियों के बीच पानी पीना बिल्कुल भी न भूलें, क्योंकि पर्याप्त फ्लूइड लेने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और त्वचा भी फ्रेश नजर आ सकती है. साथ में फल और पानी से भरपूर सब्जियां डाइट में शामिल करें, मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्जियों को खाने से बचें.

  • बेसन-हल्दी से बनाएं नेचुरल फेस वॉश, चेहरे की गंदगी और ऑयल होगा कम

    बेसन-हल्दी से बनाएं नेचुरल फेस वॉश, चेहरे की गंदगी और ऑयल होगा कम

    फेस वॉश स्किन केयर रूटीन का एक जरूरी हिस्सा है. चेहरे को साफ रखने के लिए ज्यादातर लोग बाजार में मिलने वाले फेस वॉश का इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप बेहद आसानी से शुद्ध और नेचुरल फेस वॉश घर पर भी तैयार कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए बेसन, कस्तूरी हल्दी, चंदन पाउडर, मुल्तानी मिट्टी और चावल के आटे जैसी चीजों की जरूरत होगी जो आसानी से मिल जाती हैं. तो आइए जानते हैं कि घर पर नेचुरल फेश वॉश कैसे बना सकते हैं और यह स्किन के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है.

    इंग्रेडिएंट्स (ingredients)
    2 चम्मच बेसन
    2 चम्मच चंदन पाउडर
    1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी
    1 चम्मच कस्तूरी हल्दी
    1 चम्मच चावल का आटा
    एक एयरटाइट कंटेनर

    घर पर फेस वॉश कैसे बनाएं?

    • नेचुरल फेस वॉश बनाने के लिए सबसे पहले एक साफ और सूखे बाउल में बेसन, कस्तूरी हल्दी, चंदन पाउडर, मुल्तानी मिट्टी और चावल का आटा डालकर अच्छी तरह मिला लें.
    • अब तैयार मिश्रण को एक एयरटाइट कंटेनर में रख लें.
    • जब भी इसका इस्तेमाल करना हो लगभग 2 चम्मच मिश्रण लें और इसमें जरूरत के अनुसार गुलाब जल डालकर पेस्ट बना लें. अगर आपकी स्किन ड्राई है तो गुलाब जल की जगह दूध या थोड़ा शहद मिला सकते हैं.
    • अब तैयार पेस्ट को चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और लगभग 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा अच्छी तरह धो लें.

    इस फेस वॉश के क्या फायदे हैं?
    बेसन चेहरे से गंदगी, पसीना और एक्स्ट्रा ऑयल हटाकर स्किन को गहराई से साफ करता है. वहीं, कस्तूरी हल्दी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण पिंपल्स और मुंहासों को कम करने के साथ स्किन को साफ और ग्लोइंग बनाते हैं. चंदन पाउडर त्वचा को ठंडक देने के साथ जलन और रेडनेस को कम करने में मदद कर सकता है.

    मुल्तानी मिट्टी पोर्स को साफ कर एक्स्ट्रा ऑयल को कंट्रोल करती है, जिससे ऑयली और पिंपल-प्रोन स्किन को फायदा मिलता है. वहीं, चावल का आटा स्किन को नेचुरली एक्सफोलिएट करता है, टैनिंग कम करता है और चेहरे की रंगत निखारने में मदद करता है.

    इन बातों का ध्यान

    • पहली बार चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, खुजली या लालिमा जैसी समस्या हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें.
    • फेस वॉश को हमेशा हल्के हाथों से चेहरे पर लगाएं और ज्यादा रगड़ने से बचें.
    • इसे रोजाना दो बार इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. अपनी स्किन के हिसाब से इसका इस्तेमाल करें.
    • फेस वॉश लगाने से पहले चेहरे को पानी से हल्का गीला कर लें, ताकि इसे आसानी से लगाया जा सके.

    डिस्क्लेमर: यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है. किसी भी घरेलू नुस्खे को स्किन केयर रूटीन में शामिल करने से पहले अपनी त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखें. अगर आपको स्किन से जुड़ी कोई समस्या है, तो एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

  • बच्चों के कान-नाक छिदवाने की सही उम्र क्या? डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

    बच्चों के कान-नाक छिदवाने की सही उम्र क्या? डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

    भारत में बच्चों के कान और कई परिवारों में नाक छिदवाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. कुछ लोग जन्म के कुछ महीनों बाद ही बच्चे का कान छिदवा देते हैं, जबकि कुछ बड़े होने का इंतजार करते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर बच्चों के कान या नाक छिदवाने की सही उम्र क्या है? इस बारे में डॉ. आर. के. चतुर्वेदी (Physician) ने कुछ जरूरी बातें बताईं.

    बच्चे के थोड़ा समझदार होने का इंतजार करें
    डॉ. आर. के. चतुर्वेदी के अनुसार, बहुत छोटे बच्चे का कान या नाक छिदवाने से बचना चाहिए. बेहतर होगा कि बच्चे का पियर्सिंग तभी कराया जाए, जब वह थोड़ा समझदार हो और नियमित रूप से ईयररिंग या नोज पिन पहन सके. बहुत छोटे बच्चे अक्सर कान की बाली पकड़कर खींच लेते हैं, जिससे खून निकल सकता है और घाव भी हो सकता है.

    बहुत छोटी उम्र में पियर्सिंग क्यों नहीं करानी चाहिए?
    डॉक्टर बताते हैं कि छोटे बच्चों में पियर्सिंग के दौरान अगर गलती से नस (नर्व) को नुकसान पहुंच जाए, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है. इसके अलावा, पियर्सिंग के समय होने वाला तेज दर्द बच्चे के मन में डर बैठा सकता है. छोटे बच्चों में डर जल्दी विकसित होता है और कई बार यही डर आगे चलकर ट्रॉमा का रूप भी ले सकता है.

    बरसात के मौसम में क्यों नहीं करानी चाहिए पियर्सिंग?
    डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, मानसून के दौरान कान या नाक छिदवाने से बचना चाहिए. इस मौसम में नमी अधिक रहती है, जिससे फंगल इंफेक्शन और घाव में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अगर संभव हो तो बारिश का मौसम निकलने के बाद ही पियर्सिंग कराना बेहतर माना जाता है.

    पियर्सिंग कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
    पियर्सिंग करवाने से पहले यह जरूर जांच लें कि जिस सुई या उपकरण का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह नया और स्टरलाइज्ड हो. अगर गन या कोई अन्य उपकरण इस्तेमाल हो रहा है, तो उसकी साफ-सफाई और गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए. खराब क्वालिटी के उपकरण या इस्तेमाल किए हुए सामान से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

    क्या है डॉक्टर की सलाह?
    डॉ. आर. के. चतुर्वेदी का कहना है कि बच्चों के कान या नाक छिदवाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए, चीजों को समझने लगे और खुद ज्वेलरी पहनने में सक्षम हो, तब पियर्सिंग कराना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है. साथ ही, साफ-सफाई और सही उपकरण का इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है.

  • शरीर दे रहा ये 6 संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

    शरीर दे रहा ये 6 संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

     हमारा शरीर समय-समय पर ऐसे संकेत देता है, जो किसी अंदरूनी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं. हालांकि, केवल किसी एक लक्षण के आधार पर बीमारी तय नहीं की जा सकती. ऐसे में इन संकेतों को समझना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. आइए जानते हैं ऐसे 6 सामान्य संकेतों के बारे में, जिन पर ध्यान देना चाहिए l

    1. गर्दन का रंग धीरे-धीरे काला पड़ना
    अगर गर्दन का रंग समय के साथ गहरा होता जा रहा है, तो इसे केवल गंदगी समझकर नजरअंदाज न करें. कई मामलों में यह शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है. ऐसे में मीठे का सेवन कम करना और संतुलित खानपान अपनाना फायदेमंद माना जाता है. दालचीनी को भी सीमित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है l

    2. ब्रश करने के बाद भी मुंह से बदबू आना
    अगर रोजाना ब्रश करने के बावजूद सांसों से बदबू आती रहती है, तो इसकी वजह सिर्फ दांतों की सफाई नहीं हो सकती. कई बार पाचन तंत्र से जुड़ी गड़बड़ी भी इसका कारण बनती है. ऐसे में पाचन को बेहतर रखने वाले प्रोबायोटिक फूड्स और लौंग का सीमित सेवन मददगार हो सकता हैl

    3. बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन होना
    यदि अक्सर पैरों या शरीर के अन्य हिस्सों में ऐंठन होती है, तो यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का संकेत हो सकता है. ऐसे में केले और नारियल पानी जैसे प्राकृतिक स्रोत शरीर में जरूरी मिनरल्स की पूर्ति करने में मदद कर सकते हैं. अगर समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें l

    4. थोड़ा खाने के बाद भी भारीपन महसूस होना
    अगर कम भोजन करने के बाद भी पेट भारी लगता है, तो यह पाचन क्षमता कमजोर होने का संकेत हो सकता है. ऐसे में पपीता और अनानास जैसे फल डाइट में शामिल किए जा सकते हैं. इनमें मौजूद प्राकृतिक एंजाइम पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं l

    5. बार-बार चेहरे पर पिंपल्स निकलना
    अगर त्वचा पर बार-बार मुंहासे हो रहे हैं, तो इसकी वजह केवल हार्मोनल बदलाव ही नहीं हो सकती. खराब खानपान और असंतुलित जीवनशैली भी इसका कारण बन सकते हैं. चुकंदर और आंवले का जूस शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है और त्वचा की सेहत को सपोर्ट कर सकता है l

    6. खाना खाने के बाद सीने में जलन होना
    अगर भोजन के बाद अक्सर सीने में जलन महसूस होती है, तो इसे सामान्य एसिडिटी मानकर बार-बार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. केला और एलोवेरा जैसे खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में पेट को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना सबसे जरूरी है l

    नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है. किसी भी लक्षण के आधार पर स्वयं बीमारी का निष्कर्ष न निकालें. यदि कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लें l

  • जींस और डेनिम में क्या है फर्क? जानिए दोनों के नाम और इतिहास की दिलचस्प कहानी

    जींस और डेनिम में क्या है फर्क? जानिए दोनों के नाम और इतिहास की दिलचस्प कहानी

    आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसकी अलमारी में जींस न हो. बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, जींस हर उम्र के लोगों की पसंद बन चुकी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जींस को अक्सर डेनिम क्यों कहा जाता है? क्या जींस और डेनिम एक ही चीज हैं या दोनों में कोई फर्क है? बहुत कम लोग इसका सही जवाब जानते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि डेनिम और जींस की कहानी क्या है.

    क्या डेनिम और जींस एक ही चीज है?
    सबसे पहले जानते हैं कि ज्यादातर लोग डेनिम और जींस को एक ही क्यों कहते हैं. आपको बता दें कि डेनिम एक तरह का मजबूत कपड़ा (फैब्रिक)होता है, जबकि जींस उस कपड़े से बनाई जाने वाली पैंट है. यानी हर जींस डेनिम से बन सकती है, लेकिन डेनिम से सिर्फ जींस ही नहीं, बल्कि जैकेट, शर्ट, स्कर्ट, बैग और कई दूसरे कपड़े भी बनाए जाते हैं.

    आसान शब्दों में समझें तो डेनिम कपड़ा है और जींस उस कपड़े से तैयार किए गए ड्रेस या परिधान.

    डेनिम नाम कहां से आया?
    सबसे पहले ये जान लें कि डेनिम शब्द की शुरुआत फ्रांस से हुई थी. फ्रांस के एक शहर Nîmes (नीम) में एक खास तरह का मजबूत कपड़ा बनाया जाता था. फ्रेंच भाषा में इसे 'Serge de Nîmes' कहा जाता था, जिसका मतलब था 'नीम शहर का मजबूत कपड़ा'. समय के साथ 'De Nîmes' छोटा होकर 'Denim' बन गया और यही नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया.

    जींस नाम की कहानी क्या है?
    जींस शब्द की कहानी भी यूरोप से जुड़ी है. इटली के जेनोआ शहर में नाविक मजबूत सूती पैंट पहनते थे. फ्रांस के लोग इस शहर को Genes कहते थे. धीरे-धीरे यही शब्द बदलकर Jeans बन गया. यानी डेनिम और जींस दोनों के नाम अलग-अलग यूरोपीय शहरों से आए हैं.

    जींस सबसे पहले किसने बनाई?
    19वीं सदी में अमेरिका में सोने की खदानों में काम करने वाले मजदूरों को ऐसे कपड़ों की जरूरत थी जो जल्दी फटे नहीं. साल 1873 में कारोबारी 'Levi Strauss' और दर्जी 'Jacob Davis' ने मिलकर मजबूत डेनिम कपड़े से ऐसी पैंट बनाई, जिसमें जेबों के किनारों पर तांबे के रिवेट लगाए गए थे ताकि पैंट ज्यादा मजबूत रहे. यहीं से आधुनिक जींस की शुरुआत मानी जाती है. शुरुआत में इसे मजदूर पहनते थे, लेकिन बाद में यह पूरी दुनिया का फैशन बन गई.

    डेनिम इतना मजबूत क्यों होता है?
    डेनिम की बुनाई सामान्य कपड़ों से अलग होती है. इसमें धागों को खास तरीके से बुना जाता है, जिसे ट्विल वीव (Twill Weave) कहा जाता है. इस वजह से डेनिम जल्दी नहीं फटता. यह लंबे समय तक चलता है. बार-बार पहनने पर भी मजबूत रहता है. समय के साथ इसका लुक और बेहतर लगने लगता है. इसी कारण यह मजदूरों के कपड़ों से निकलकर फैशन की दुनिया तक पहुंच गया.

    नीला रंग ही क्यों होता है?
    अगर आपने ध्यान दिया हो तो ज्यादातर जींस नीले रंग की होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि पहले डेनिम को इंडिगो नाम के प्राकृतिक रंग से रंगा जाता था. यह रंग कपड़े की ऊपरी सतह पर चढ़ता है और धीरे-धीरे इस्तेमाल के साथ हल्का होता जाता है. यही वजह है कि पुरानी जींस का फेडेड लुक लोगों को पसंद आता है.

    क्या आज भी सिर्फ डेनिम से ही जींस बनती है?
    आज के समय में ज्यादातर जींस डेनिम से ही बनाई जाती हैं, लेकिन उनमें आराम बढ़ाने के लिए इलास्टेन या दूसरे फाइबर भी मिलाए जाते हैं. इसके अलावा अब अलग-अलग तरह की डेनिम भी बाजार में उपलब्ध है, जैसे स्ट्रेच डेनिम, ऑर्गेनिक डेनिम, रिसाइकल्ड डेनिम, लाइटवेट डेनिम. डेनिम सिर्फ जींस तक सीमित नहीं है. आज इससे कई तरह के फैशन प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. जैकेट, शर्ट, स्कर्ट, शॉर्ट्स, बैग, कैप, जूते, एप्रन आदि. यानी डेनिम एक कपड़ा है, जिससे कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं.

    आज भी क्यों है सबसे ज्यादा लोकप्रिय?
    जींस की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी मजबूती और आराम है. यह लगभग हर मौसम में पहनी जा सकती है और हर उम्र के लोगों पर अच्छी लगती है. आज ऑफिस, कॉलेज, ट्रैवल, पार्टी और रोजमर्रा की जिंदगी में जींस सबसे ज्यादा पहने जाने वाले कपड़ों में शामिल है. फैशन बदलता रहता है, लेकिन जींस का ट्रेंड कभी खत्म नहीं होता.

    अगली बार जब कोई जींस को डेनिम कहे, तो आपको दोनों के बीच का फर्क पता होगा. डेनिम एक मजबूत कपड़ा है, जबकि जींस उसी कपड़े से बनी पैंट होती है. डेनिम का नाम फ्रांस के 'Nîmes' शहर से आया, जबकि जींस शब्द इटली के 'Genoa' शहर से जुड़ा है. यही वजह है कि दोनों शब्द साथ-साथ इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन दोनों का मतलब अलग है.

  • नींबू के छिलके फेंकें नहीं, स्किन से सफाई तक आएंगे इतने काम

    नींबू के छिलके फेंकें नहीं, स्किन से सफाई तक आएंगे इतने काम

    नींबू के छिलके आपके लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. खाना पकाने के अलावा भी ये कई चीजों में काम आते हैं. इनमें विटामिन C और विटामिन A भरपूर मात्रा में होता है जो आपकी स्किन के लिए बहुत अच्छा है और आपको बीमार होने से बचाने में मदद करता है. नींबू के छिलकों में पेक्टिन भी होता है, जो एक तरह का फाइबर है और शरीर को खाना पचाने में मदद करता है l

    इनमें कैल्शियम भी होता है जो आपकी हड्डियों के लिए अच्छा है. नींबू के छिलकों में पोटैशियम भी होता है जो आपके दिल के लिए अच्छा है और लिमोनीन नाम का तत्व भी होता है जो बीमारियों से लड़ने का एक नैचुरल तरीका है. नींबू के छिलकों में मौजूद ये सभी अच्छी चीजें इन्हें स्किन केयर, घर की सफाई और कीड़े-मकोड़ों को दूर रखने के लिए बेहतरीन बनाती हैं l  

    छिलके चमकाएंगे स्किन
    चूंकि नींबू के छिलकों में भी विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और नेचुरल एसिड होते हैं इसलिए ये भी त्वचा को साफ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं. आप नींबू के बचे छिलकों को धूप में सुखाकर पीस लें और पाउडर बना लें. इस पाउडर को दही, शहद, या गुलाब जल किसी में भी मिलाकर फेस पैक या स्क्रब की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.

    इसके अलावा नींबू के छिलके पर थोड़ा सा चीनी या नमक छिड़ककर अपनी कोहनी, घुटनों या पैरों पर हल्के हाथों से रगड़ें. यह नेचुरल स्क्रब का काम करता है और कालापन दूर करता है l

    छिलकों से नेचुरल क्लीनर बनाएं
    सूखे नींबू के छिलके असरदार नैचुरल डिसइंफेक्टेंट होते हैं क्योंकि इनमें साइट्रिक एसिड और जरूरी तेलों की मात्रा ज्यादा होती है. मल्टीपर्पस क्लीनर बनाने के लिए नींबू के छिलकों को दो हफ्ते तक सफेद सिरके में भिगोकर रखें. फिर इसे छान लें और सिरके को एक स्प्रे बोतल में भर लें. यह क्लीनर चिकनाई हटाता है, सतहों को कीटाणु-मुक्त करता है और इसमें नींबू जैसी ताजगी भरी खुशबू होती है. यह काउंटरटॉप, कांच और बाथरूम के सामान के लिए बहुत अच्छा है l

    दूर होगी घर की बदबू
    अगर आपके गार्बेज डिस्पोजल या फ्रिज से थोड़ी बदबू आ रही है तो नींबू के छिलके इसका सही उपाय हैं. बदबू दूर करने के लिए गार्बेज डिस्पोजल में थोड़े पानी के साथ कुछ छिलके डालें और उसे चला दें. या फिर छिलकों को सुखाकर एक छोटे खुले पाउच में रखें और अलमारी, लॉन्ड्री रूम या जिम बैग में रख दें ताकि वहां ताजगी बनी रहे. इनमें मौजूद एसेंशियल ऑयल तीखी बदबू को दूर करते हैं और नींबू जैसी अच्छी खुशबू छोड़ते हैं l

    कीड़े रहेंगे दूर
    नींबू के छिलके कीड़ों को दूर रखने का एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय हैं. इनकी तेज नींबू जैसी खुशबू चींटियों और मच्छरों समेत ज्यादातर कीड़ों को दूर रखती है. कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए दरवाजों, खिड़कियों और दरारों के आस-पास ताजे या सूखे नींबू के छिलके छिड़कें. घर से बाहर होने पर त्वचा पर नींबू के छिलके रगड़ने से मच्छरों से भी कुछ समय के लिए राहत मिलती है l

    घर पर स्किन एक्सफोलिएंट बनाएं
    नींबू के सूखे छिलकों में विटामिन C और साइट्रिक एसिड होता है, इसलिए ये स्किन के लिए बहुत अच्छे होते हैं. छिलकों को सुखाकर उनका पाउडर बना लें. नेचुरल बॉडी स्क्रब बनाने के लिए इस पाउडर में चीनी और नारियल का तेल मिलाएं. डेड सेल्स को हटाने, स्किन का रंग हल्का करने और लंबे समय में काले धब्बों को खत्म करने के लिए इसे गोल-गोल घुमाते हुए स्किन पर लगाएं. कुछ ही दिन में आपको चेंज नजर आएगा l

    महकेगा घर का कोना-कोना
    केमिकल वाले एयर फ्रेशनर के बजाय अपने घर को नेचुरल और ताजी खुशबू से महकाने के लिए नींबू के छिलकों का इस्तेमाल करें. कुछ छिलकों को पानी में उबालें और फिर और अच्छी खुशबू के लिए उसमें रोजमेरी की कुछ डंडियां या दालचीनी के टुकड़े डालें. इसे स्टोव पर उबालें और कुछ ही मिनटों में आपका पूरा घर एक प्यारी और ताजी खुशबू से भर जाएगा. यह एक आसान तरीका है जो केमिकल-फ्री और पर्यावरण के अनुकूल है l

  • हेपेटाइटिस को हल्के में न लें, समय पर इलाज नहीं हुआ तो लिवर को हो सकता है स्थायी नुकसान

    हेपेटाइटिस को हल्के में न लें, समय पर इलाज नहीं हुआ तो लिवर को हो सकता है स्थायी नुकसान

    लिवर शरीर का ऐसा अंग है, जो खुद को काफी हद तक ठीक कर सकता है. लेकिन अगर हेपेटाइटिस का समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह धीरे-धीरे लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है. भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस अक्सर बिना किसी खास लक्षण के बढ़ता रहता है. ऐसे में कई लोगों को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब लिवर काफी प्रभावित हो चुका होता है l  

    हेपेटाइटिस से लिवर को स्थायी नुकसान कैसे होता है?
    डॉ. अंतरिक्ष कुमार बताते हैं कि अगर हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी लंबे समय तक बना रहे, तो लिवर में लगातार सूजन रहती है. धीरे-धीरे स्वस्थ लिवर की जगह दागदार ऊतक (स्कार टिश्यू) बनने लगते हैं. इसे फाइब्रोसिस कहा जाता है. अगर यह समस्या और बढ़ जाए, तो यह सिरोसिस में बदल सकती है. इस स्थिति में लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता और हुए नुकसान को पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं होता. डॉक्टर के अनुसार, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी के मरीजों में मोटापा, फैटी लिवर और नियमित शराब का सेवन लिवर को होने वाले नुकसान की रफ्तार और बढ़ा सकता है l  

    किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
    प्रभात खबर से बातचीत में डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने बताया कि क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित लोगों, नियमित शराब पीने वालों, फैटी लिवर, मोटापे या डायबिटीज के मरीजों और जिनके परिवार में लिवर की बीमारी का इतिहास रहा हो, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए. समय पर इलाज न मिलने पर इनमें गंभीर लिवर क्षति का खतरा अधिक होता है l

    इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
        आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
        लगातार थकान या कमजोरी
        पेट या पैरों में सूजन
        भूख कम लगना और बिना किसी कारण वजन घटना
        मामूली चोट लगने पर भी आसानी से खून बहना या नीले निशान पड़ना

    क्या इससे बचाव संभव है?
    डॉ. अंतरिक्ष कुमार के मुताबिक, समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव है. साधारण ब्लड टेस्ट से हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का पता लगाया जा सकता है. इससे लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचने से पहले इलाज शुरू किया जा सकता है l  

    उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी से वैक्सीनेशन के जरिए बचाव किया जा सकता है. वहीं, हेपेटाइटिस सी का इलाज आज उपलब्ध एंटीवायरल दवाओं से अधिकांश मरीजों में पूरी तरह संभव है. नियमित फॉलो-अप, जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज, स्वस्थ वजन बनाए रखना और शराब से परहेज करने से सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है l  

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में करीब 25.4 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और लगभग 5 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस सी के साथ जीवन जी रहे हैं. चूंकि ये संक्रमण कई वर्षों तक बिना किसी लक्षण के रह सकते हैं, इसलिए समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है l

    डॉक्टर की सलाह
     डॉ. अंतरिक्ष कुमार ने कहा, "अगर हेपेटाइटिस का समय रहते पता चल जाए, तो लिवर को होने वाले गंभीर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. लिवर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है, लेकिन जब फाइब्रोसिस बढ़कर सिरोसिस में बदल जाता है, तो हुए नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता. इसलिए पीलिया या पेट में सूजन जैसे लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए. ये अक्सर बीमारी के गंभीर चरण के संकेत होते हैं. जोखिम वाले लोगों को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए, समय पर इलाज लेना चाहिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप कराना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए. इससे लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है और लिवर फेलियर व लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है."

  • घर पर बनाएं एंटी-एजिंग कोलेजन जेल, पाए ग्लोइंग और जवां त्वचा

    घर पर बनाएं एंटी-एजिंग कोलेजन जेल, पाए ग्लोइंग और जवां त्वचा

    बढ़ती उम्र में चेहरे पर झुर्रियां-झाइंया आना बहुत ही आम बात है, लेकिन अगर छोटी उम्र में आपके चेहरे पर बुढ़ापे के निशान दिख रहे हैं तो चिंता होना लाजमी है. आजकल बढ़ते प्रदूषण और बिगड़ी लाइफस्टाइल की वजह से लोगों की स्किन का ग्लो खोता जा रहा है और उस पर झुर्रियां-झाइयां आने के साथ ही त्वचा ढीली भी पड़ जाती है. इनसे छुटकारा पाने के लिए लोग महंगे-महंगे कोलेजन प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं.

    अगर आप भी झुर्रियों, फाइन लाइंस, ढीली पड़ती स्किन और चेहरे की खोई चमक से परेशान हैं, तो आपको हर बार बाजार से महंगे कोलेजन प्रोडक्ट्स खरीदने की जरूरत नहीं है. आपकी रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजों की मदद से आप घर पर ही सस्ते में एंटी-एजिंग कोलेजन जेल बना सकते हैं. इस जेल को नियमित रूप से इस्तेमाल करने से आप स्किन को हाइड्रेट, मुलायम और झुर्रियों-झाइयों से दूर रख सकते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने का तरीका और इसके फायदे.

    एंटी-एजिंग कोलेजन जेल बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?
    घर पर एंटी-एजिंग कोलेजन जेल बनाने के लिए आपको चाहिए:
        2 बड़े चम्मच भीगे हुए चावल
        2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल
        2 बड़े चम्मच गुलाब जल
        2 बड़े चम्मच अलसी (फ्लैक्ससीड) का जेल
        2 विटामिन ई कैप्सूल

    ऐसे बनाएं जेल
    घर पर एंटी-एजिंग कोलेजन जेल बनाने के लिए सबसे पहले भीगे हुए चावल और एलोवेरा जेल को मिक्सर में डालकर स्मूद पेस्ट बना लें. अब इसमें अलसी का जेल और गुलाब जल मिलाएं. आखिर में 2 विटामिन ई कैप्सूल का तेल डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर लें. आपका कोलेजन जेल तैयार है. अब इस तैयार जेल को कांच के साफ एयरटाइट जार में भरकर फ्रिज में स्टोर करें.

    चेहरे पर कैसे लगाएं?
    ये कोलेजन जेल रात को चेहरे पर लगाना ज्यादा अच्छा रहता है. चेहरा अच्छी तरह साफ करने के बाद जेल तो थोड़ा मात्रा में लें. फिर इसे पूरे चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से 2-3 मिनट मसाज करें. इसे रातभर लगा रहने दें और सुबह सादे पानी से चेहरा धो लें.

    इस जेल में मौजूद चीजें क्यों हैं खास?
    1. एलोवेरा जेल: एलोवेरा स्किन को गहराई से हाइड्रेट करता है और ड्राईनेस कम करने में मदद करता है.
    2. भीगे हुए चावल: चावल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और स्टार्च स्किन को स्मूद और ब्राइट लुक देने में मददगार माने जाते हैं. चावल कोरियन स्किनकेयर का अहम हिस्सा रहा है.
    3. अलसी का जेल: अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो स्किन को मॉइस्चराइज रखने में मदद करती है.
    4. गुलाब जल: गुलाब जल स्किन को ताजगी देता है और स्किन को फ्रेश महसूस कराता है.
    5. विटामिन ई: विटामिन ई स्किन की नमी बनाए रखने और फ्री-रैडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करता है.

  • कटरीना कैफ की फिटनेस का राज, जानें हेल्दी स्मूदी रेसिपी

    कटरीना कैफ की फिटनेस का राज, जानें हेल्दी स्मूदी रेसिपी

    कटरीना कैफ बॉलीवुड की सबसे फिट एक्ट्रेसेज में शुमार हैं. वो फिल्मी स्क्रीन पर एक से बढ़कर एक स्टंट्स करती नजर आती हैं. उनके स्टंट्स और उनकी काबिल-ए-तारीफ फिटनेस की तारीफ सभी करते हैं. कटरीना की कमाल की फिटनेस के पीछे उनकी हेल्दी लाइफस्टाइल है. बताया जाता है कि एक्ट्रेस अपनी डाइट और एक्सरसाइज को लेकर काफी सजग रहती हैं. उन्हें पिलाटे्स और हेल्दी फूड्स के अलावा स्मूदी भी काफी पसंद हैं.

    एक बार उन्होंने अपनी फेवरेट स्मूदी की रेसिपी शेयर की थी, जिसे कटरीना का क्रेजी कन्कॉक्शन (Katrina's Krazy Konkoktion) नाम दिया गया. खास बात ये है कि इस स्मूदी में एवोकाडो, केला और पालक जैसे हेल्दी फूड्स शामिल हैं. इस स्मूदी को बनाने में सभी सस्ती चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. कोई भी चीज ऐसी नहीं है, जो बहुत अलग या बहुत ज्यादा महंगी हो. आइए जानते हैं कटरीना की इस खास स्मूदी को कैसे बनाया जाता है और इसके क्या फायदे हो सकते हैं.

    क्या है कटरीना की 'क्रेजी कन्कॉक्शन'?
    कटरीना की 'क्रेजी कन्कॉक्शन' एक तरह की हेल्दी स्मूदी है. इसमें एवोकाडो, केला और पालक के साथ चिया सीड्स, नारियल तेल, कोको पाउडर और नींबू का रस मिलाया जाता है. ये स्मूदी स्वाद के साथ-साथ कई पोषक तत्वों से भी भरपूर मानी जाती है. एक इंटरव्यू में कटरीना कैफ ने बताया था कि ये स्मूदी रेसिपी उन्हें एक किताब से मिली थी. उन्होंने इसके बारे में बात करते हुए कहा था, 'ये एक स्मूदी रेसिपी है. मुझे ये रेसिपी एक बहुत अच्छी किताब से मिली थी.'

    कैसे बनाएं कटरीना कैफ की स्पेशल स्मूदी?
    इंग्रेडिएंट्स:
        1 एवोकाडो
        1 केला
        4-5 पालक के पत्ते
        1 चम्मच चिया सीड्स
        1 चम्मच नारियल तेल
        1 चम्मच नींबू का रस
        4-5 आइस क्यूब्स
        1 चम्मच कोको पाउडर

    बनाने का तरीका:
    कटरीना कैफ की पसंदीदा स्मूदी बनाने के लिए सबसे पहले एवोकाडो और केले को छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें. अब इन्हें पालक और चिया सीड्स के साथ ब्लेंडर में डालकर अच्छी तरह ब्लेंड कर लें. इसके बाद इसमें नारियल तेल, नींबू का रस, आइस क्यूब्स और कोको पाउडर डालें. सभी चीजों को एक बार फिर अच्छी तरह ब्लेंड कर लें. आपकी हेल्दी और स्वादिष्ट स्मूदी तैयार है.

    एवोकाडो से मिल सकते हैं ये फायदे
    एवोकाडो को हेल्दी फैट्स का अच्छा सोर्स माना जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन ई, विटामिन के, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं.

    एवोकाडो में फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, जिसकी वजह से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. कुछ रिसर्च के अनुसार, इसे डाइट में शामिल करने से कोलेस्ट्रॉल और हार्ट हेल्थ को भी सपोर्ट मिल सकता है.

    नारियल तेल भी है इस स्मूदी का हिस्सा
    इस स्मूदी में एक चम्मच नारियल तेल भी डाला जाता है. नारियल तेल में मौजूद फैट्स शरीर को एनर्जी देने में मदद कर सकते हैं. इसमें कुछ एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड्स भी पाए जाते हैं. हालांकि, नारियल तेल को हमेशा लिमिट में ही लेना चाहिए. इसे डाइट में शामिल करते समय बाकी हेल्दी फैट्स जैसे नट्स, सीड्स और प्लांट-बेस्ड ऑयल्स को भी बैलेंस्ड मात्रा में शामिल करना जरूरी है.

    चिया सीड्स देंगे फाइबर और ओमेगा-3
    कटरीना कैफ अपनी पसंदीदा स्मूदी में चिया सीड्स भी डालती हैं. ये इस स्मूदी को और भी पौष्टिक बना देते हैं. इनमें फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है. चिया सीड्स में मौजूद फाइबर डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए फायदेमंद हो सकता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है.

    चिया सीड्स में मौजूद अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) एक तरह का ओमेगा-3 फैटी एसिड है. ये शरीर में सूजन कम करने, हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करने और ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में मदद कर सकता है.

    क्या रोज पी सकते हैं कटरीना की ये स्मूदी?
    कटरीना की ये स्मूदी पोषक तत्वों से भरपूर है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इसे हर व्यक्ति रोजाना कितनी भी बार पी सकता है. एवोकाडो, केला, चिया सीड्स और नारियल तेल सभी हेल्दी चीजें हैं, लेकिन इनमें कैलोरी भी होती है. इसलिए इसे अपनी डाइट और शरीर की जरूरत के हिसाब से लेना अच्छा रहता है.

    अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं या आपकी कोई खास डाइट चल रही है, तो इस तरह की स्मूदी को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लेनी चाहिए.