Category: लाइफ स्टाइल

  • लंच में बनाएं स्वादिष्ट साबुदाना खिचड़ी, जानें खिली-खिली बनाने की आसान विधि

    लंच में बनाएं स्वादिष्ट साबुदाना खिचड़ी, जानें खिली-खिली बनाने की आसान विधि

    रोज-रोज वही साधारण दाल, चावल या रोटी-सब्जी खाकर अक्सर मुंह का स्वाद बेजान हो जाता है. ऐसे में लंच के समय कुछ ऐसा खाने का मन करता है जो झटपट बन जाए, स्वाद में भी जबरदस्त हो और पेट भी आसानी से भर दे. अमूमन साबुदाना खिचड़ी को सिर्फ व्रत या उपवास का खाना माना जाता है लेकिन यह एक ऐसा बेहतरीन और लाइट फूड है जिसे आप किसी भी आम दिन के लंच में बनाकर खा सकते हैं.

    कार्बोहाइड्रेट से भरपूर साबुदाना आपको दिनभर के लिए इंस्टेंट एनर्जी देता है, और जब इसमें क्रंची मूंगफली, उबले आलू और नींबू का रस मिलता है, तो इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. आइए जानते हैं बिना चिपचिपी एकदम खिली-खिली साबुदाना खिचड़ी बनाने की सबसे आसान विधि.

    सामग्री:
    साबुदाना – 1 कप
    मूंगफली के दाने – 1/2 कप

    आलू – 1 बड़ा (उबला हुआ, छोटे टुकड़ों में कटा हुआ)

    हरी मिर्च – 2-3 (बारीक कटी हुई)

    जीरा – 1 छोटा चम्मच

    कढ़ी पत्ता – 8-10

    नींबू का रस – 1 बड़ा चम्मच

    बारीक कटा हरा धनिया – 3 चम्मच

    तेल या देसी घी – 2 बड़े चम्मच

    नमक (या सेंधा नमक) – स्वादानुसार

    काली मिर्च पाउडर – आधा छोटा चम्मच (वैकल्पिक)

    बनाने की विधि:
    साबुदाना भिगोएं (सबसे जरूरी स्टेप): साबुदाने को साफ पानी से 2-3 बार अच्छी तरह धो लें ताकि उसका एक्स्ट्रा स्टार्च निकल जाए. अब इसमें सिर्फ इतना ही पानी डालें जिससे साबुदाना डूब जाए (साबुदाने के स्तर से बस आधा इंच ऊपर पानी होना चाहिए). इसे 4 से 5 घंटे के लिए ढककर छोड़ दें. भिगोने के बाद साबुदाना एकदम फूल जाएगा और छूने पर आसानी से मैश होगा.

    मूंगफली भूनें: एक कढ़ाई में आधा चम्मच घी या तेल डालें और मूंगफली के दानों को मध्यम आंच पर कुरकुरा होने तक भून लें. ठंडा होने पर इनमें से आधी मूंगफली को दरदरा पीस लें और आधी खड़ी रखें.

    तड़का लगाएं: अब उसी कढ़ाई में बचा हुआ तेल या घी गर्म करें. जीरा और कढ़ी पत्ता डालकर चटकाएं. इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च और उबले हुए आलू के टुकड़े डालकर आलुओं को हल्का सा सुनहरा होने तक भूनें.

    साबुदाना मिलाएं: अब कढ़ाई में भीगा हुआ साबुदाना, दरदरी पीसी हुई मूंगफली, खड़ी मूंगफली, काली मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें.

    धीमी आंच पर पकाएं: सभी सामग्रियों को हल्के हाथों से अच्छी तरह मिला लें ताकि साबुदाने के दाने टूटे नहीं. अब कढ़ाई को ढक्कन से ढक दें और धीमी आंच पर 3-4 मिनट के लिए पकने दें.

    खिला-खिला टेक्सचर: जब साबुदाने के दाने पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट दिखने लगें, तो समझें खिचड़ी पक गई है. अब गैस बंद कर दें.

    फाइनल टच: ऊपर से ताजा नींबू का रस और ढेर सारा बारीक कटा हरा धनिया डालकर मिक्स करें.

    आपकी गरमा-गरम, एकदम अलग-अलग दानों वाली टेस्टी साबुदाना खिचड़ी बनकर तैयार है. इसे दही या ठंडे रायते के साथ लंच में परोसें और मजे से खाएं.

  • मानसून में नीम खाने के फायदे, इम्यूनिटी से लेकर त्वचा तक रखेगा ध्यान

    मानसून में नीम खाने के फायदे, इम्यूनिटी से लेकर त्वचा तक रखेगा ध्यान

    बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली तो लाता है, लेकिन यही मौसम बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के तेजी से बढ़ने का भी समय होता है। मौसम बदलने के दौरान हमारे शरीर में दोषों (वात, कफ व पित्त) का स्तर ऊपर-नीचे होता रहता है, जिससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, मानसून के मौसम में शरीर में पित्त दोष स्वाभाविक रूप से जमा होने लगता है और जठराग्नि (पाचन शक्ति) धीमी पड़ जाती है। ऐसे में डॉ. राजेश बयारी (एमडी, चित्रकूट आयुर्वेद चिकित्सालय, कुंडपुरा) बताते हैं कि आप इस मौसम में नीम का सेवन कर सकते हैं। नीम का स्वाद कड़वा होता है और इसकी तासीर ठंडी होती है; इसलिए आयुर्वेद में इसे रक्तशोधक और बढ़े हुए पित्त व कफ दोषों को संतुलित करने के लिए एक रामबाण उपाय माना जाता है।

    मौसम बदलने पर नीम खाने के बारे में आयुर्वेद क्या कहता है?
    आयुर्वेद के अनुसार ऋतु परिवर्तन के दौरान शरीर में दोषों का संतुलन बिगड़ सकता है। मानसून में विशेष रूप से पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर होने लगती है। साथ ही, पित्त दोष प्रभावित हो सकते हैं। इस समय नीम जैसी कड़वी औषधियों का सीमित मात्रा में सेवन शरीर को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में नीम को रक्तशोधक, कृमिनाशक (पेट के कीड़े मारने वाले), त्वचा हितकारी और रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहयोग देने वाला पौधा बताया गया है। हालांकि इसका सेवन व्यक्ति की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होना चाहिए।

    आधुनिक रिसर्च नीम के बायोएक्टिव कंपाउंड्स के बारे में क्या कहती है?
    वहीं दूसरी ओर, आधुनिक मेडिकल रिसर्च के अनुसार नीम में बायोएक्टिव कंपाउंड्स, जैसे कि निम्बिडिन, अजादिराक्टिन और निम्बिन पाए जाते हैं। इन कंपाउंड्स में बेहतरीन एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर को मानसून के दौरान होने वाले इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं।

    मानसून में नीम खाने के क्या फायदे होते हैं?
    इम्यूनिटी बढ़ाए
    बारिश के मौसम में होने वाले मौसमी संक्रामक बुखार से लड़ने के लिए नीम व्हाइट ब्लड सेल्स (WBCs) को सक्रिय करता है और पूरे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। नीम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और बायोएक्टिव कंपाउंड्स शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य को सहयोग दे सकते हैं।

    त्वचा की समस्याओं से राहत
    इस मौसम में हवा में नमी ज्यादा होने के कारण मुंहासे, एलर्जी, खुजली और त्वचा की अन्य बीमारियां बढ़ जाती हैं। नीम खून को साफ करता है और त्वचा को अंदर से प्राकृतिक चमक देता है। यही वजह है कि स्किन की परेशानियों में आयुर्वेद में नीम का पाउडर लेने की सलाह दी जाती है।

    हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस को रोके
    मानसून के दिनों में उमस के कारण फंगस और बैक्टीरिया पनपने का जोखिम अधिक होता है। लेकिन, जो लोग बरसात में नीम का सेवन करते हैं उनको सूजन और फंगल इंफेक्शन का खतरा कम होता है। साथ ही, नीम में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण को रोकने में भी मदद करते हैं।

    पाचन तंत्र में करें सुधार
    मानसून में दूषित भोजन और पानी के कारण पेट संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। आयुर्वेद के अनुसार नीम का सीमित सेवन पाचन शक्ति को सहयोग देने और कृमियों (आंतों के कीड़े) के जोखिम को कम करने में उपयोगी मानी गई है। यही वजह है कि पहले के समय में पेट से जुड़ी समस्या में नीम का सेवन किया जाता था।
    मानसून में नीम का सेवन किस तरह से करें?
    मानसून के दौरान, आप रोज सुबह खाली पेट नीम की तीन से चार कोमल पत्तियां चबा सकते हैं या सीमित मात्रा में इसका रस पी सकते हैं। यह आपको मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है।

    आयुर्वेद के अनुसार मानसून में नीम का सीमित और सही तरीके से सेवन करने से मौसम में हुए बदलाव का असर शरीर पर कम पड़ता है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों की पुष्टि करते हैं, लेकिन अधिकांश साक्ष्य अभी प्रयोगशाला और प्रारंभिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इसलिए नीम को किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं, बल्कि संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के पूरक के रूप में ही अपनाना चाहिए।

  • जामुन की गुठली न फेंकें, ऐसे करें इस्तेमाल और पाएं कई फायदे

    जामुन की गुठली न फेंकें, ऐसे करें इस्तेमाल और पाएं कई फायदे

    बारिश के मौसम में जामुन बाजार में मिलना शुरू हो जाते हैं और इस खट्टे-मीठे फल को लोग बड़े चाव से खाना भी पसंद करते हैं. जामुन खाने में लाजवाब लगता है, लेकिन जामुन खाने के बाद लोग इसके बीजों को कूड़ा समझकर फेंक देते हैं. जामुन की गुठली  हल्की कड़वी और कसैली होती है, जिसकी वजह से लोग इसको कूड़ेदान में डाल देते हैं.

    मगर बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि इसके बीज भले ही कड़वे होते हैं, लेकिन यह बेहद गुणकारी होते हैं और इन बीजों का आप कई तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं. इसलिए जामुन के बीजों को दोबारा फेंकने से पहले इनको घर में कैसे इस्तेमाल में ला सकते हैं, यह जान लीजिए.

    जामुन के बीजों के फायदे
    जामुन के बीज ब्लड शुगर कंट्रोल करने में काम आते हैं और इसलिए इनको डायबिटीज के मरीजों के लिए बेस्ट माना जाता है.
    बीजों में जो कसैला गुण मौजूद होता है, उसकी वजह से यह डाइजेशन में भी काम आता है. इनसे डायरिया या दस्त जैसी पेट की समस्याओं को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.
    जामुन के बीज एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण त्वचा के लिए टॉनिक का काम करते हैं. इसमें फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक यौगिक मौजूद होते हैं जो शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं.

    जामुन के बीजों का ऐसे करें इस्तेमाल  
    जामुन का नया पौधा उगाएं: अगर आप बागवानी के शौकीन हैं, तो जामुन के बीजों से नया पौधा तैयार कर सकते हैं. ताजे बीजों को उपजाऊ मिट्टी में लगभग 1 से 2 इंच गहराई में बो दें. नियमित सिंचाई और पर्याप्त धूप मिलने पर कुछ हफ्तों में अंकुर निकल सकते हैं, इस तरह आप अपने घर या बगीचे में जामुन का पेड़ लगा सकते हैं.

    DIY क्राफ्ट और सजावट में आएंगे काम: सूखे जामुन के बीजों को कलर करके बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट, आर्ट एंड क्राफ्ट, हैंडमेड जूलरी, की-चेन, वॉल हैंगिंग और अन्य सजावटी सामान बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह बच्चों की आर्ट में दिलचस्पी बढ़ाने का भी अच्छा तरीका है.

    कंपोस्ट में करें इस्तेमाल: जामुन के बीजों को जैविक कचरे के साथ कंपोस्ट पिट में डाल सकते हैं. हालांकि ये धीरे-धीरे विघटित होते हैं, लेकिन समय के साथ जैविक खाद का हिस्सा बन जाते हैं. इससे घर का गीला कचरा भी कम होता है और पौधों के लिए प्राकृतिक खाद भी तैयार होती है.

    जामुन के बीज का पाउडर तैयार करें: जामुन के बीजों को अच्छी तरह धोकर 5 से 7 दिनों तक धूप में पूरी तरह सुखा लें. इसके बाद इन्हें हल्का भूनकर पीस लें और एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें. पारंपरिक आयुर्वेद में जामुन के बीजों का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य लाभ या बीमारी के इलाज के लिए इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. जामुन के पाउडर से आप हर्बल ड्रिंक, फेस पैक बनाकर इस्तेमाल में ला सकते हैं.

    पाउडर का कैसे करें यूज?
    जामुन के बीजों से बना पाउडर आपके काफी काम आ सकता है, इसको आप सुबह खाली पेट गर्म पानी में पी सकते हैं, इससे ब्ल्ड शुगर लेवल को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद मिलती है.
    जामुन के बीज के पाउडर को सरसों के तेल में मिलाकर दांतों और मसूड़ों पर मलने से पायरिया, दांत दर्द और मसूड़ों की सूजन में आराम मिलता है.
    खाने के बाद छाछ में इस पाउडर को मिलाकर पीने से डाइजेशन प्रोसेस बेहतर होता है.
    इस पाउडर में गुलाब जल या दही मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर 15 से 20 मिनट लगाने के बाद सादे पानी से धो लें. इससे मुंहासे और दाग-धब्बे कम होने लगते हैं.

    इन बातों का रखें ध्यान
    जामुन के बीजों का किसी भी तरह से इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें. नमी रहने पर उनमें फफूंदी लग सकती है, जिससे उनका इस्तेमाल सुरक्षित नहीं रहता.अगर आप जामुन के बीजों का सेवन किसी स्वास्थ्य समस्या, जैसे डायबिटीज या अन्य बीमारी के लिए करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

  • बच्चों के लिए बनाएं हेल्दी लसूनी सूजी रोल्स, स्वाद और सेहत दोनों

    बच्चों के लिए बनाएं हेल्दी लसूनी सूजी रोल्स, स्वाद और सेहत दोनों

    आजकल के बच्चे घर के बने देसी खाने को देखकर तुरंत मुंह बना लेते हैं, रोज-रोज पिज्जा-बर्गर और रोल्स की डिमांड करते हैं. सुबह हो या शाम उनकी जुबान पर बस जंक फूड ही रहता है. जो हर किसी के लिए बड़ी समस्या है, मगर आप चाहें तो घर पर ही बच्चों को हेल्दी और टेस्टी ब्रेकफास्ट बना सकती हैं, जिसे देखकर आपके बच्चे खुश हो जाएंगे. यह उनकी हेल्थ पर भी बुरा असर नहीं करता है और बनाने में भी आसान होता है.

    हल्की-फुल्की भूख के लिए कुछ हेल्दी और झटपट बनाना चाहते हैं, तो लसूनी सूजी रोल्स को अपनी लिस्ट में शुमार कर लें. इसमें न मैदा लगता है और न ही डीप फ्राई करने के लिए तेल. इसलिए यह बॉडी के लिए भी हेल्दी होता है और बच्चे इसे देखकर मुंह भी नहीं सड़ाते हैं.

    सबसे अच्छी बात यह है कि सूजी, दही और लहसुन से तैयार ये रोल्स स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हल्के भी होते हैं. इन्हें आप बच्चों के टिफिन, ऑफिस स्नैक या शाम की चाय के साथ भी सर्व कर सकते हैं.

    लसूनी सूजी रोल्स के लिए सामग्री
        1 कप सूजी
        ½ कप दही
        ¼ कप पानी (जरूरत अनुसार)
        5-6 लहसुन की कलियां (बारीक कटी या कुटी हुई)
        2 हरी मिर्च (बारीक कटी)
        2 बड़े चम्मच बारीक कटा हरा धनिया
        ½ छोटा चम्मच नमक
        ½ छोटा चम्मच काली मिर्च
        ½ छोटा चम्मच चिली फ्लेक्स
        ½ छोटा चम्मच फ्रूट सॉल्ट (ईनो)

    इस तरीके से बनाएं लसूनी सूजी रोल्स
        सबसे पहले आप एक कटोरा लीजिए और उसमें सूजी, दही और पानी मिलाकर एक गाढ़ा बैटर तैयार कर लें. पेस्ट को लगभग 5 मिनट के लिए ढककर रख दें.
        अब इसमें लहसुन, हरी मिर्च, हरा धनिया, नमक, काली मिर्च और चिली फ्लेक्स डालकर अच्छी तरह मिला लें.
        आखिर में फ्रूट सॉल्ट डालने के बाद हल्के हाथ से मिक्स करें. फिर आप एक स्टीमर या इडली कुकर को गर्म कर लें.
        जब स्टीमर या कुकर गर्म हो जाए तो बैटर को हल्का-सा ग्रीस किए हुए ट्रे या प्लेट में फैलाकर 8 से 10 मिनट तक स्टीम करें.
        स्टीम होने के बाद थोड़ा ठंडा कर लें और लंबी पट्टियों में काट लें.  हर पट्टी को सावधानी से रोल कर लें.
        आप चाहे तो चाहें तो ऊपर से थोड़ा लहसुन, हरा धनिया और चिली फ्लेक्स छिड़ककर गर्मागर्म सर्व करें.

    क्यों है यह हेल्दी?
        मैदा से पूरी तरह फ्री.
        डीप फ्राई नहीं, इसलिए कम फैट.
        सूजी से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट लंबे समय तक एनर्जी देते हैं.
        लहसुन स्वाद बढ़ाने के साथ कई पोषक तत्व भी देता है.

  • दादी-नानी के देसी नुस्खे, बालों को बनाएंगे मजबूत, घने और चमकदार

    दादी-नानी के देसी नुस्खे, बालों को बनाएंगे मजबूत, घने और चमकदार

    आज के समय में अनहेल्दी लाइफ्सटाइल, गलत खानपान और स्ट्रेस की वजह से बालों का झड़ना, रूखापन और समय से पहले सफेद होना आम समस्या बन गई है. इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए कई लोग महंगे शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ लोग पार्लर जाकर हेयर ट्रीटमेंट करवाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि बालों की हर समस्या का इलाज हमारी रसोई में ही छुपा है.

    हमारी दादी-नानी के समय में न तो महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स थे और न ही पार्लर, फिर भी उनके बाल लंबे, घने और चमकदार होते थे. ऐसा इसलिए था क्योंकि वे नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करती थीं. आइए जानते हैं दादी-नानी के पिटारे से निकले ऐसे ही 5 देसी नुस्खे के बारे में जो आपके बालों को बिना किसी साइड इफेक्ट के बालों से जुड़ी समस्याओं को कर बालों को सुंदर, काले और घने बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.

    करी पत्ता बालों को हेल्दी रखने में करता है मदद
    करी पत्ता बालों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसके रेगुलर इस्तेमाल से समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है. आप करी पत्ते को पीसकर पेस्ट बना सकते हैं या फिर इसे नारियल के तेल में गर्म करके बालों और स्कैल्प पर लगा सकते हैं. चाहें तो इसे दही में मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. यह डैंड्रफ कम करने, स्कैल्प को साफ रखने और बालों की जड़ों को पोषण देने में भी मदद कर सकता है.

    आंवला देगा बालों को मजबूती और चमक
    आंवला विटामिन C का बेहतर सोर्स है जो बालों की जड़ों को पोषण देने में मदद करता है. इससे बाल मजबूत और चमकदार बन सकते हैं तथा हेयर फॉल कम होने में भी मदद मिल सकती है. आप आंवला खा सकते हैं या फिर आंवला पाउडर को दही, गुनगुने पानी या नारियल के तेल में मिलाकर बालों में लगा सकते हैं. आंवला जूस या आंवला ऑयल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

    स्कैल्प मसाज से बाल रहता है हेल्दी
    दादी-नानी अक्सर सिर की तेल से मालिश करने की सलाह देती थीं. स्कैल्प मसाज सिर्फ आराम ही नहीं देती, बल्कि इससे सिर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है. रोजाना लगभग 5 मिनट हल्के हाथों से मसाज करने से बालों की ग्रोथ, मोटाई और स्कैल्प की सेहत बेहतर रखने में मदद मिल सकती है.

    तुलसी और ग्रीन टी से मिलेगा स्कैल्प को पोषण
    तुलसी और ग्रीन टी दोनों ही बालों की देखभाल में उपयोगी मानी जाती हैं. आप दोनों को अलग-अलग या साथ में इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए गुनगुने पानी में तुलसी की पत्तियां और ग्रीन टी डालकर कुछ देर रखें. ठंडा होने पर इस पानी को बालों और स्कैल्प पर लगाएं. इससे बालों की चमक बढ़ाने और स्कैल्प को पोषण देने में मदद मिल सकती है.

    गुलाब की पंखुड़ियां या रोज ऑयल का करें इस्तेमाल
    आयुर्वेद में गुलाब को बालों के लिए भी फायदेमंद माना गया है. बाल धोते समय गुनगुने पानी में गुलाब की पंखुड़ियां डाल सकते हैं या फिर रोज ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण स्कैल्प को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: ये खबर सिर्फ जानकारी के लिए है. अपने हेयर केयर रूटीन में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लेना न भूलें.

  • नारियल तेल लगाने का सही समय, शैंपू से पहले या बाद जानें फायदा

    नारियल तेल लगाने का सही समय, शैंपू से पहले या बाद जानें फायदा

    बालों की सेहत और मजबूती के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल हम सभी के घरों में सदियों से होता आ रहा है और इसके लिए लोग कई तरह के तेल लगाते हैं. लेकिन तेल लगाने का सही समय क्या है? क्या शैंपू से पहले तेल लगाना बेहतर है या बाद में? इस बात पर अक्सर लोगों के मन में कन्फ्यूजन रहता है. तो आइए आज आपको बताते हैं कि बालों के टेक्सचर और जरूरत के हिसाब से तेल कब लगाना चाहिए और कैसे लगाना चाहिए.

    प्री-वॉश ऑयलिंग: क्यों है बेस्ट?
    ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि शैंपू करने से पहले नारियल तेल लगाना बालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब का कहना है, हमारे बाल मुख्य रूप से केराटिन प्रोटीन से बने होते हैं. जब हम बालों को धोते हैं तो पानी के कारण बाल फूल जाते हैं जिससे क्यूटिकल्स को नुकसान पहुंच सकता है और प्रोटीन का लॉस होता है. नारियल तेल बालों की शाफ्ट में जाकर एक सुरक्षा कवच बना लेता है जो प्रोटीन के नुकसान को रोकता है.

    वहीं हेल्थलाइन के अनुसार, नारियल तेल बालों को हाइड्रेटेड रखने और धोने के दौरान होने वाले डैमेज से बचाने में बहुत मददगार साबित होता है. प्री-वॉश ऑयलिंग खास तौर पर उन लोगों के लिए बेस्ट है जिनके बाल ड्राई, केमिकल ट्रीटेड, कर्ली या कलर्ड हैं. यह शैंपू की कठोरता को भी कम कर देता है जिससे बालों के नेचुरल ऑयल पूरी तरह खत्म नहीं होते.

    शैंपू के बाद तेल लगाना कितना सही?
    यदि आप सोच रहे हैं कि क्या शैंपू के बाद नारियल तेल लगाया जा सकता है तो जवाब है हां, लेकिन तरीका अलग होना चाहिए. इसे सिर्फ गीले बालों के सिरों पर बहुत कम मात्रा में लगाया जा सकता है. यह फ्रिज को कंट्रोल करने, बालों में चमक लाने और नमी को लॉक करने का काम करता है.

    हालांकि, क्लीवलैंड क्लीनिक के एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि गीले बालों पर तेल लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए. यदि इसे स्कैल्प या बालों की जड़ों में लगाया जाए तो बाल चिपचिपे और ऑयली नजर आ सकते हैं. इसलिए बालों के किनारों पर ही इसका इस्तेमाल करें ताकि वे बाउंसी और शाइनी दिखें.

    एक्सपर्ट टिप: कैसे करें सही इस्तेमाल?
    सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप गुनगुने वर्जिन कोकोनट ऑयल को हल्के हाथों से स्कैल्प पर मसाज करें और कम से कम दो घंटे के लिए छोड़ दें. इसके बाद एक माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें. यदि आप बहुत ज्यादा फ्रिज़ से परेशान हैं तो बाल सूखने के बाद बस नाम मात्र का नारियल तेल हथेली पर घिसकर बालों के सिरों पर लगा सकते हैं.

  • 40 की उम्र में भी दमकेगी त्वचा, रोज पिएं ये एंटी-एजिंग लाल जूस

    40 की उम्र में भी दमकेगी त्वचा, रोज पिएं ये एंटी-एजिंग लाल जूस

    उम्र बढ़ना एक नेचुरल प्रोसेस है, लेकिन खराब लाइफस्टाइल, प्रदूषण और पोषण की कमी के कारण समय से पहले ही चेहरे पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और ढीलापन नजर आने लगता है. 40 की उम्र पार करते ही अक्सर महिलाएं एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट्स और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च करने लगती हैं. लेकिन सच तो यह है कि जब तक आपका शरीर अंदर से डिटॉक्स और हेल्दी नहीं होगा, चेहरे पर वो नेचुरल ग्लो नहीं आ सकता.

    ऐसे में यहां हम आपको बता रहे हैं एंटी-एजिंग लाल जूस जो ढेरों गुणों से भरपूर होता है. इसे रोज दिन में सिर्फ एक बार पीने से आपकी त्वचा को जरूरी विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं जो ढलती उम्र के लक्षणों को रोककर 40 की उम्र में भी आपको 25 जैसी खिली-खिली और गुलाबी निखरी त्वचा देते हैं. हालांकि इसके साथ ही आपको हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल भी फॉलो करनी चाहिए क्योंकि स्किन को जवान और सुंदर रखने के लिए बैलेंस डाइट और लाइफस्टाइल बेहद जरूरी होती है. आइए जानते हैं इसे बनाने का आसान तरीका.

    सामग्री:
    चुकंदर – 1 छोटा (एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर)
    गाजर – 1 बड़ी (विटामिन-ए और बीटा-कैरोटीन का सोर्स)

    टमाटर– 1 मध्यम (लाइकोपीन से भरपूर, जो स्किन टाइटनिंग में मदद करता है)

    पुदीना के पत्ते – 5-6 (स्किन को फ्रेश रखने के लिए)

    नींबू का रस – 1 चम्मच (विटामिन-सी बूस्ट के लिए)

    भुना जीरा पाउडर और काला नमक – स्वादानुसार

    बनाने की विधि:
    सफाई और कटिंग: सबसे पहले चुकंदर, गाजर और टमाटर को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें.

    ब्लेंड करें: कटे हुए चुकंदर, गाजर, टमाटर और पुदीने की पत्तियों को एक मिक्सी के जार या ब्लेंडर में डालें.

    स्मूथ पेस्ट बनाएं: इसमें आधा कप पानी मिलाएं और सभी चीजों को एकदम स्मूथ होने तक अच्छी तरह ब्लेंड कर लें.

    छानें (वैकल्पिक): इस तैयार गाढ़े जूस को एक बड़ी छलनी या सूती कपड़े की मदद से छान लें. (बिना छाने पल्प के साथ पीना त्वचा और पेट दोनों के लिए और भी ज्यादा फायदेमंद होता है).

    फ्लेवर जोड़ें: अब इस शानदार लाल ड्रिंक में नींबू का रस, थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें.

    आपका स्किन-ग्लोइंग और एंटी-एजिंग लाल जूस तैयार है. इसे रोजाना सुबह खाली पेट या दोपहर के लंच से एक घंटा पहले फ्रेश बनाकर पिएं.

  • बारिश में बालों की देखभाल, फिटकरी से डैंड्रफ और खुजली से राहत

    बारिश में बालों की देखभाल, फिटकरी से डैंड्रफ और खुजली से राहत

     बारिश के मौसम में चेहरे के साथ-साथ बालों का भी खास ख्याल रखना जरूरी होता है. हवा में नमी बढ़ने की वजह से स्कैल्प पर गंदगी, चिपचिपाहट, खुजली और डैंड्रफ की समस्या से काफी आम हो जाती है. ऐसे में बालों की सही सफाई न होने पर बाल कमजोर होकर टूटने भी लगते हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि बालों की सही देखभाल से इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

    भारतीय घरों में कई ऐसी चीजें मौजूद हैं जो बालों को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. उन्हीं में से एक है फिटकरी. यह डैंड्रफ, खुजली और बाल झड़ने की परेशानी को रोकने में मदद करती है. तो आइए जानते हैं कि बालों पर फिटकरी लगाने का सही तरीका क्या है और इसे इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

    नारियल तेल में मिलाकर लगाएं फिटकरी
    नारियल तेल में फिटकरी मिलाकर लगाने के लिए 1 चम्मच फिटकरी पाउडर को 2 बड़े चम्मच हल्के गुनगुने नारियल तेल में अच्छी तरह मिला लें. अब इस मिश्रण से स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करें. इसे 30 से 45 मिनट तक लगा रहने दें, फिर माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें. इस नुस्खे को हफ्ते में एक बार अपना सकते हैं. नारियल तेल स्कैल्प को मॉइस्चराइज करने में मदद करता है, जबकि फिटकरी स्कैल्प को साफ रखने में मदद करती है.

    पानी में मिलाकर लगाएं फिटकरी
    एक कप गुनगुने पानी में 1 चम्मच फिटकरी पाउडर या फिटकरी का छोटा टुकड़ा अच्छी तरह घोल लें. शैम्पू करने के बाद इस पानी को स्कैल्प पर लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें. कुछ मिनट बाद सादे पानी से बाल धो लें. इसका इस्तेमाल हफ्ते में 1 से 2 बार किया जा सकता है. यह स्कैल्प को गहराई से साफ करने और डैंड्रफ को कम करने में मदद कर सकता है.

    फिटकरी इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
        फिटकरी को सीधे स्कैल्प पर लगाने से बचें, क्योंकि इससे बाल और स्कैल्प रूखे हो सकते हैं.
        पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, खुजली, लालपन या किसी तरह की एलर्जी महसूस हो तो तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर दें.
        यदि स्कैल्प पर पहले से कोई गंभीर समस्या है या लगातार बाल झड़ रहे हैं तो बिना एक्सपर्ट की सलाह के फिटकरी का यूज बालों पर न करें.

     

  • नए जूतों के छालों से राहत देंगे ये घरेलू नुस्खे, दर्द होगा दूर

    नए जूतों के छालों से राहत देंगे ये घरेलू नुस्खे, दर्द होगा दूर

    बाजार से अपनी पसंद के नए जूते, सैंडल या चप्पल खरीदकर लाने की खुशी हर किसी को होती है. लेकिन यह खुशी तब काफूर हो जाती है, जब इन्हें पहली ही बार पहनने के बाद पैरों में जगह-जगह दर्दनाक छाले पड़ जाते हैं, जिसे आम भाषा में शू-बाइट कहा जाता है. कई बार फुटवियर का मटेरियल सख्त होने या फिटिंग सही न होने के कारण चमड़ी छिल जाती है, जिससे उठना-बैठना और चलना-फिरना तक मुहाल हो जाता है.

    लोग अक्सर दर्द से राहत पाने के लिए बाजार के महंगे ऑइंटमेंट या कड़क पट्टियां लगाने लगते हैं जो कई बार घाव को और बढ़ा देती हैं. लेकिन आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है.

    आपकी रसोई और घर में ही कुछ ऐसी जादुई चीजें मौजूद हैं, जो न सिर्फ छालों के दर्द और जलन को तुरंत शांत कर सकती हैं बल्कि आपके पैरों की त्वचा को फिर से पहले जैसा खूबसूरत बना सकती हैं. आइए जानते हैं इन असरदार ट्रिक्स के बारे में.

    छालों और दर्द से राहत पाने की अचूक ट्रिक्स
    नारियल तेल और कपूर का जादुई लेप: नारियल का तेल त्वचा को नमी देता है और कपूर में कूलिंग प्रॉपर्टीज होती हैं. थोड़े से नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर पीसकर मिला लें और इसे छालों वाले स्थान पर लगाएं. यह तुरंत जलन को शांत करेगा और घाव को तेजी से सुखाएगा.

    एलोवेरा जेल की कूलिंग थेरेपी: एलोवेरा जेल अपने हीलिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है. पैरों के छालों पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से न सिर्फ दर्द कम होता है, बल्कि वहां पड़ने वाले काले निशान भी धीरे-धीरे साफ हो जाते हैं.

    टूथपेस्ट का क्विक हैक: अगर पैरों में छाले पड़ने की वजह से पानी भर गया है या बहुत तेज जलन हो रही है, तो उस पर थोड़ा सा सफेद वाला टूथपेस्ट लगा लें. टूथपेस्ट में मौजूद मेंथॉल जलन को तुरंत कम करता है और छाले को जल्दी सुखाने में मदद करता है.

    शहद का एंटी-सेप्टिक इलाज: शहद एक बेहतरीन नेचुरल मॉइस्चराइजर और एंटी-सेप्टिक है. शू-बाइट के जख्म पर थोड़ा सा शहद लगाने से इन्फेक्शन का खतरा खत्म हो जाता है और छिला हुआ हिस्सा बहुत जल्दी रिकवर होता है.

    जूता पहनने से पहले का देसी जुगाड़: अगर आपको पता है कि नया जूता या सैंडल पीछे से टाइट है, तो उसे पहनने से आधे घंटे पहले उसके अंदरूनी किनारों पर थोड़ा सा वैसलीन (पेट्रोलियम जेली) या सरसों का तेल लगा दें. इससे फुटवियर का मटेरियल सॉफ्ट हो जाएगा और पैर में छाले नहीं पड़ेंगे.

  • मानसून में झड़ते और चिपचिपे बालों से पाएं छुटकारा, जावेद हबीब के ये टिप्स आएंगे काम

    मानसून में झड़ते और चिपचिपे बालों से पाएं छुटकारा, जावेद हबीब के ये टिप्स आएंगे काम

    बारिश का मौसम आते ही अक्सर हम सभी को अपने बालों की अधिक फिक्र होने लगती है. चिपचिपी स्कैल्प, झड़ते बाल और डैंड्रफ की समस्या इस मौसम में आम हो जाती है. अगर आप भी मानसून में अपने बालों की सेहत को लेकर परेशान हैं तो हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के ये कुछ आसान टिप्स आपके बहुत काम आ सकते हैं. उनका मानना है कि मानसून में बालों को थोड़ा और अधिक अच्छे से केयर करने और सही रूटीन की जरूरत होती है. इन सिंपल स्टेप्स को फॉलो करके आप अपने बालों को मानसून की नमी और धूल-मिट्टी के नुकसान से बचा सकते हैं और उन्हें हेल्दी बनाए रख सकते हैं.

    नियमित वॉश और सही रूटीन
    मानसून के दौरान पसीने और नमी की वजह से स्कैल्प जल्दी चिपचिपी हो जाती है. ऐसे में बालों को डेली धोना बहुत जरूरी है, इसलिए शैम्पू करने में बिल्कुल आलस न करें. इसके अलावा, बालों में कंडीशनर की जगह प्री-कंडीशनिंग पर फोकस करें.

    शैम्पू करने से 5 मिनट पहले बालों में तेल जरूर लगाएं. यह बालों को सॉफ्ट और हेल्दी रखने में मदद करेगा. साथ ही हफ्ते में एक बार क्लेरिफाइंग शैम्पू (Clarifying Shampoo) का इस्तेमाल करें भले ही आपके बाल ड्राई क्यों न हों, यह स्कैल्प को गहराई से साफ करने का काम करता है.

    स्टाइलिंग से बनाएं दूरी
    इस मौसम में बालों पर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से बचें. ये प्रोडक्ट्स स्कैल्प पर जम जाते हैं और बालों की जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं. साथ ही बालों को हर वक्त बांधकर न रखें. बालों को खुला छोड़ें ताकि उन्हें हवा मिल सके और स्कैल्प में पसीना कम जमा हो.

    इसके अलावा बालों को नेचुरल तरीके से सूखने के लिए न छोड़ें. धोने के बाद हेयर ड्रायर का लो-हीट सेटिंग पर इस्तेमाल करके बालों को तुरंत सुखा लें, ताकि डैंड्रफ और बालों के फ्लैट होने की समस्या न हो.

    ट्रिमिंग और नेचुरल केयर
    नियमित समय पर बालों की ट्रिमिंग जरूर करवाएं. इससे बालों के टिप्स हेल्दी रहते हैं और उन्हें अच्छी शेप मिलती है. बारिश में अगर बाल भीग जाएं, तो उन्हें बिना देरी किए सौम्य शैम्पू से धो लें. बारिश का पानी बालों में खुजली पैदा कर सकता है.

    इसके अलावा हफ्ते में 1 बार स्कैल्प पर फ्रेश एलोवेरा जेल का मास्क लगाएं. यह 5 मिनट का छोटा सा काम डैंड्रफ को दूर रखने, हेयर फॉल कंट्रोल करने और जड़ों को मजबूती देने में जादुई असर दिखा सकता है. बाहर निकलते समय भी इस बात का खास ख्याल रखें कि आपके बाल सूखे हों.