Category: बिज़नेस

  • 19वीं बार डिविडेंड देने वाली कंपनी, 1 शेयर पर मिलेगा 30 रुपये का लाभ, रिकॉर्ड डेट करीब

    19वीं बार डिविडेंड देने वाली कंपनी, 1 शेयर पर मिलेगा 30 रुपये का लाभ, रिकॉर्ड डेट करीब

    मुंबई 

     Muthoot Finance Ltd ने एक बार फिर से डिविडेंड देने का फैसला किया है। कंपनी ने इस बार एक शेयर पर 30 रुपये डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इस डिविडेंड के लिए Muthoot Finance Ltd की तरफ से रिकॉर्ड डेट की जानकारी दे दी गई है। जोकि अगले हफ्ते ही है।

    किस दिन है रिकॉर्ड डेट? (Muthoot Finance Dividend Record date)
    Muthoot Finance Ltd ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया गया है कि एक शेयर पर 30 रुपये का डिविडेंड दिया जाएगा। इस डिविडेंड के लिए कंपनी ने 17 अप्रैल 2026 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। बता दें, कंपनी पहली बार इस साल एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने जा रही है।

    19वीं बार डिविडेंड देने जा रही है कंपनी
    इस कंपनी ने पहली बार 2012 में डिविडेंड दिया था। तब कंपनी ने एक शेयर पर 4 रुपये का डिविडेंड बांटा था। 2013 में कंपनी ने एक शेयर पर 4.5 रुपये का डिविडेंड दिया था। आखिरी बार Muthoot Finance Ltd के शेयर 25 अप्रैल 2025 को एक्स-डिविडेंड ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने हर एक शेयर पर 26 रुपये का डिविडेंड दिया था। बता दें, कंपनी ने अबतक एक बार भी निवेशकों को बोनस शेयर नहीं दिया है।

    शेयरों का प्रदर्शन कैसा है? (Muthoot Finance Stock Performance)
    यह स्टॉक बीएसई के क्लोजिंग के टाइम पर 2 प्रतिशत से अधिक की उछाल के बाद 3572.55 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। पिछले एक हफ्ते में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 12.41 प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं, 6 महीने में यह स्टॉक 13.13 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बता दें, एक साल में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 66 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। Muthoot Finance Ltd का बीएसई में 52 वीक हाई 4149 रुपये और 52 वीक लो लेवल 1964.35 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 1.43 लाख करोड़ रुपये का है।

    10 साल में 1896% की तेजी
    दो साल में Muthoot Finance Ltd ने 116 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। तीन साल में कंपनी के शेयरों का भाव 247 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, 10 साल से शेयरों को होल्ड करने वाले निवेशकों को अबतक 1896 प्रतिशत का फायदा मिला है।

  • सोने के सबसे बड़े मालिक कौन? चीन टॉप-5 से बाहर, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश का भी जानिए हाल

    सोने के सबसे बड़े मालिक कौन? चीन टॉप-5 से बाहर, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश का भी जानिए हाल

    इंदौर 

    सोना मुसीबत का सहारा होता है. परिवार हो या देश, दोनों सोना खरीदने से पीछे नहीं हटता. लेकिन क्या आप जानते दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास है? भारत के पास कितना सोना है? चीन के पास कितना सोना है? पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास कितना सोना है? और पिछले कुछ महीनों में किस देश ने सबसे ज्यादा सोना खरीदा है? 

    हालिया दौर में गोल्ड और सिल्वर के दाम में लंबी छलांग देखने को मिली है. सोने के साथ चांदी की कीमत आसमान छू रही हैं.  आंकड़े बताते हैं कि बीते 5 साल में ही इसमें 265 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है. चीन, पोलैंड और तुर्की से लेकर भारत ने गोल्ड रिजर्व में इजाफा किया है. यहां के सेंट्रल बैंक गोल्ड खरीदने में आगे रहे, जबकि कई देशों ने गोल्ड रिजर्व को घटाया है, इनमें फिलीपींस से लेकर श्रीलंका का नाम शामिल है.  आइए जानते हैं सोना खरीदने और बेचने में कौन से देश सबसे आगे हैं और भारत किस नंबर पर आता है। 

    किसने देश ने खरीदा सबसे ज्यादा सोना?
    वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच साल यानी 2020 से लेकर 2025 तक सोना खरीदने के मामले में चीन नंबर वन पर है. चीन ने बीते पांच साल में 357.1 टन गोल्ड की खरीदारी की है. हालांकि जानकारों की मानें तो यह इससे भी ज्यादा हो सकता है. चीन के बाद गोल्ड खरीदने में पोलैंड का दूसरा स्थान है, जिसने बीते पांच साल के भीतर 314.6 टन सोना खरीदा है. तीसरे नंबर पर तुर्की का नंबर आता है, जिसने 251.8 टन गोल्ड खरीदा है। 

    अमेरिका के पास सबसे ज्यादा सोना
    अब आइए जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास पड़ा है. अमेरिका सबसे बड़े सोने के भंडार पर बैठा है, अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा 8,133 टन सोना है,  यह भंडार मुख्य रूप से 'फोर्ट नॉक्स' में सुरक्षित है। 
     
    जर्मनी के पास अकूत सोना 
    अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा सोना जर्मनी के पास करीब 3,350 टन है, जो कि उसे यूरोप में सबसे बड़ा स्वर्ण धारक बनाता है. वहीं इटली 2,452 टन सोने के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है. फ्रांस के पास करीब 2,437 टन सोने का भंडार है।        

    चीन भी जमकर खरीद रहा है सोना
    सोने के भंडार में 5वें नंबर पर रूस का नंबर आता है, वर्तमान में रूस के पास करीब 2,330 टन सोना है. यानी टॉप-5 में अभी भी चीन नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चीन लगातार सोने का भंडार अपने यहां बढ़ा रहा है. चीन के पास वर्तमान में लगभग 2,313.5 टन सोना है. चीन पिछले 17 महीनों से लगातार अपने भंडार में सोना जोड़ रहा है. अगर चीन इसी गति से खरीदारी जारी रखता है, तो वह जल्द ही टॉप-5 देशों में शामिल हो सकता है।         
          
    भारत के पास सोने का बड़ा भंडार
    भारत का स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) साल 2026 में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास लगभग 880 टन सोना है. भारत लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहा है. भारत न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि निजी तौर पर भी दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है। 

    भारत भी खूब खरीद रहा है सोना
    दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी खरीदारी की रफ्तार तेज कर दी है. फरवरी 2026 में भारत ने करीब 18 टन सोना खरीदा है. भारत पिछले कई महीनों से लगातार सोना खरीद रहा है ताकि अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके और अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित किया जा सके. भारत, चीन और रूस जैसे देश डॉलर के प्रभाव को कम करने के लिए सोने को एक ठोस विकल्प के रूप में देख रहे हैं।       

    पाकिस्तान के पास महज इतना सोना 
    पाकिस्तान के पास बेहद कम सोने का भंडार है, वैसे भी देश आर्थिक तौर पर बदहाल है. फिलहाल पाकिस्तान के पास लगभग 64.77 टन सोना सुरक्षित है. जो कि भारत के मुकाबले काफी कम है. बांग्लादेश के पास महज लगभग 14.28 टन सोना है। 
                  
    पोलैंड (Poland) सोना खरीदने में आगे

    साल 2026 की शुरुआती आंकड़ों (फरवरी-मार्च 2026) के मुताबिक दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों में सोना खरीदने की होड़ मची हुई है. पिछले एक से दो महीनों में जिन देशों ने सबसे ज्यादा सोना खरीदा है, उसमें पोलैंड का नाम सबसे ऊपर है. फरवरी 2026 में पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने अकेले 20 टन सोना खरीदा है, पोलैंड का लक्ष्य अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 20% हिस्सा सोने में बदलना है।       

    उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) ने खरीदा सोना 
    उज्बेकिस्तान ने फरवरी-मार्च के दौरान लगभग 8 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा है. यह पिछले लगातार 5 महीनों से सोने का शुद्ध खरीदार बना हुआ है. कजाकिस्तान ने भी हाल ही में अपनी सक्रियता बढ़ाई है और पिछले महीने लगभग 8 टन सोना खरीदा है।  

    गोल्ड खरीदने में भारत किस नंबर पर?
    चौथे नंबर पर भारत है, जिसने 245.3 टन सोना खरीदा. इसके अलावा ब्राजील ने 105.1 टन, अजरबैजान ने 83.6 टन, थाईलैंड ने 80.6 टन, हंगरी ने 78.5 टन सोने और सिंगापुर ने 77.3 टन गोल्ड खरीदा है. ईरान ने 74.612, कतर ने 73.013, रूस ने 55.4 टन और यूएई ने 51.7 टन सोना खरीदा. टॉप-15 की लिस्ट में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 के बाद सोने के दाम में 265 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। 

    सोना बेचने में कौन से देश आगे?
    बीते पांच साल में गोल्ड बेचने के मामले में फिलीपींस पहले स्थान पर है, उसने 65.2 टन गोल्ड बेचा है. दूसरे नंबर पर कजाकिस्तान है, जिसने इस दौरान 52.4 टन सोना बेचा. श्रीलंका ने 19.1 टन गोल्ड की बिक्री की. जर्मनी का गोल्ड रिजर्व भी 16.3 टन घटा है. मंगोलिया ने 15.9 टन सोना बेचा. इसके अलावा ताजिकिस्तान ने 11.9 टन, कोलंबिया ने 9.2 टन और फिनलैंड ने 5.4 टन गोल्ड की बिक्री की। 

     

  • बाजार में निवेशकों की झटके में 6.40 लाख करोड़ की कमाई, आज था खुशियों का दिन!

    बाजार में निवेशकों की झटके में 6.40 लाख करोड़ की कमाई, आज था खुशियों का दिन!

    मुंबई 

    इस सप्‍ताह को शेयर बाजार ने शानदार तेजी पर खत्‍म किया है. आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्‍स और निफ्टी पॉजिटिव रहे. सेंसेक्‍स 918 अंक या 1.20 प्रतिशत चढ़कर 77,550 पर क्‍लोज हुआ, जबकि निफ्टी 275 अंक या 1.16 फीसदी चढ़कर 24,050 के ऊपर बंद हुआ. निफ्टी बैंक में 1091 अंकों की उछाल रही। 

    BSE के टॉप 30 शेयरों में से 25 शेयर तेजी पर बंद हुए और बाकी 5 शेयरों में गिरावट देखने को मिली. सनफार्मा के शेयर करीब 4 फीसदी तक गिरे हुए थे और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर 3 प्रतिशत से ज्‍यादा चढ़े हुए थे. इस तेजी के साथ ही बीएसई मार्केट कैप 444.79 लाख करोड़ से बढ़कर 451.20 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यानी सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन  निवेशकों को 6.40 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई। 

    बीएसई पर 4,449 स्‍टॉक ट्रेडेड में से 3,362 शेयर तेजी पर रहे. 944 शेयरों में गिरावट रही और 143 शेयर अनचेंज रहे. 110 शेयर 52 सप्‍ताह के ऊपर कारोबार कर रहे थे और 20 शेयर 52 वीक के लो पर थे. 85 शेयरों में लोअर सर्किट और 334 शेयरों में अपर सर्किट रहा। 

    क्‍यों आई शेयर बाजार में तेजी? 

        फाइनेंस कंपनियों के शेयरों में शानदार खरीदारी देखी जा रही है, जिसने आज मार्केट को सपोर्ट किया है. फाइनेंस सेक्‍टर आज 1.6 फीसदी चढ़कर और इस स्‍प्‍ताह 8.2 फीसदी चढ़ चुका है. निफ्टी पीएसयू बैंक और प्राइवेट सेक्‍टर बैंक इंडेक्‍स 1.80 फीसदी तक चढ़ गए।

         पूरे एशियाई बाजारों में हरियाली है. साउथ एशिया का कोस्‍पी, जापान का निक्‍केई, चीन का शंघाई और हॉन्‍गकांग का हैंग सेंग में अच्‍छी तेजी देखने को मिली थी. अमेरिकी बाजार में भी प्रमुख इंडेक्‍स डाऊ और एस एंड पी में भी शानदार तेजी रही थी। 

        सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन रुपये में भी उछाल रहा. रुपया 10 पैसा ऊपर चढ़कर 92.41 पर कारोबार कर रहा था. पिछले कुछ दिनों में डॉलर की तुलना में रुपये ने शानदार रिकवरी दिखाई है। 

    आईटी शेयरों में गिरावट 
    आईटी इंडेक्‍स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण टीसीएस का प्रदर्शन था. मार्च तिमाही में राजस्व में 9.7 प्रतिशत और नेट प्रॉफिट में 12.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. इसके बाद भी यह शेयर 2 प्रतिशत की गिर गया। 

  • Stock Market Update: सेंसेक्स में 785 अंक की बढ़त, निफ्टी 24,000 के ऊपर पहुंचा

    Stock Market Update: सेंसेक्स में 785 अंक की बढ़त, निफ्टी 24,000 के ऊपर पहुंचा

    मुंबई 

    बिजनेस डेस्कः एशियाई बाजारों से मिले पॉजिटिव संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार (10 अप्रैल) को मजबूती के साथ शुरुआत की। बैंकिंग और इंडेक्स हैवीवेट शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार को अच्छा सपोर्ट मिला, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।

    30 शेयरों वाला BSE Sensex बढ़त के साथ 77,198 अंक पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 76,631 अंक पर बंद हुआ था। खबर लिखे जाने के समय सेंसेक्स 785.40 अंक यानी 1.02% की तेजी के साथ 77,417.05 पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 ने भी मजबूती दिखाई और 23,880 पर ओपन हुआ। पिछले सत्र में यह 23,775 पर बंद हुआ था। इस समय निफ्टी 241.35  अंक यानी 1% की बढ़त के साथ 24,017.45 पर ट्रेड कर रहा था।

    ग्लोबल मार्केट का हाल
    एशियाई बाजारों में भी मजबूती का रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 2.18% चढ़ा, जबकि जापान का Nikkei 225 1.78% और हांगकांग का Hang Seng Index 1.11% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।

    अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए। S&P 500 0.62%, Dow Jones Industrial Average 0.58% और Nasdaq Composite 0.83% ऊपर बंद हुए।हालांकि, निवेशकों की नजर अब भी अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे सीजफायर पर बनी हुई है, जिसे फिलहाल नाजुक माना जा रहा है।

  • मार्क ज़करबर्ग का नया AI एंटरप्राइज: ‘Muse Spark’ ने शुरू की गूगल और ओपनएआई से टक्कर

    मार्क ज़करबर्ग का नया AI एंटरप्राइज: ‘Muse Spark’ ने शुरू की गूगल और ओपनएआई से टक्कर

    वाशिंगटन
    फेसबुक की पेरेंटल कंपनी मेटा ने बुधवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की इंडस्ट्री में बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने नए AI मॉडल को लॉन्च किया है, जिसका नाम म्यूज स्पार्क है. यह कंपनी के न्यू AI डिविजन का बनाया नया प्रोडक्ट है, जिसको लेकर कंपनी ने बीते करीब एक साल में बड़े स्तर पर इनवेस्टमेंट की है। 

    लॉन्चिंग से पहले इस प्रोजेक्ट को इंटरनल नाम दिया गया था, जो 'एवोकाडो' था. अब म्यूज स्पार्क को मेटा के स्टैंडअलोन AI ऐप पर लॉन्च कर दिया है. अब आने वाले दिनों में इसको को मेटा के ऐप के लिए जारी किया जाएगा, जिसमें वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और मेटा एआई स्मार्ट ग्लास के नाम शामिल हैं। 

    गूगल और ओपनएआई को देगा टक्कर 
    वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम में मिलने वाला मेटा एआई कई जगह पिछड़ने लगा था. अब म्यूज स्पार्क की मदद से कंपनी को बड़े फायदे की उम्मीद कर रही है. राइटिंग और रीजनिंग के मामले में म्यूज स्पार्क ने बेहतर रिजल्ट दिया है, जिसकी वजह से यह ओपनएआई, गूगल और एंथ्रोपिक के बेहतरीन मॉडल के लेवल के आसपास पहुंच चुका है। 

    रिपोर्ट्स में कोडिंग को लेकर बड़ा अंतर दिखाया गया है. मौजूदा समय में एआई रेस में कोडिंग काबिलियत एक जरूरी स्टैंडर्ड बन चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कोडिंग के मामले में म्यूज स्पार्क अपने राइवल्स से थोड़ा पीछे रह गया है। 

    मार्क जकरबर्ग ने बीते साल बनाई AI टीम
    मार्क जकरबर्ग AI को लेकर बीते करीब एक साल से बड़ी इनवेस्टमेंट कर रहे हैं और इंडस्ट्री के कई बड़े टैलेंट को उन्होंने अपनी AI टीम में मोटी रकम देकर शामिल किया है. जकरबर्ग ने 29 साल के एलेक्जेंटर वांग को मोटी रकम देकर कंपनी में शामिल कर चुके हैं और उनको चीफ एआई ऑफिसर की पोस्ट दी, साथ ही कंपनी ने लामा-4 मॉडल पर काम करने वाली पुरानी टीम को बदल दिया. नए टीम में ओपनएआई, गूगल और अन्य राइवल्स कंपनियों से नए लोगों को मोटी रकम देकर मेटा में शामिल किया गया। 

    म्यूज स्पार्क को अभी बंद मॉडल रखा 
    मेटा ने म्यूज स्पार्क के साथ एक बड़ा बदलाव किया है
    और इसके कोड को मौजूदा समय में प्राइवेट रखा है. इसको क्लोज्ड मॉडल भी कह सकते हैं. बताते चलें कि मेटा अपने एआई मॉडल्स को ओपेन सोर्स करता था, जिसकी मदद से डेवलपर्स को कोड यूज करने की परमिशन मिलती थी। 

    मेटा का बड़ा इनवेस्टमेंट 
    जकरबर्ग ने एआई डेवलपमेंट के लिए बड़े इनवेस्टमेंट की तैयारी करके रखी है. एआई डेवलपमेंट के नए डेटा सेंटर पर 600 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान बनाया हुआ है. साल 2026 में मेटा लगभग 135 अरब डॉलर तक खर्च करने का प्लान बनाया है, जो बीते साल की तुलना में लगभग दोगुना है. बीते साल कंपनी ने 72 अरब डॉलर की इनवेस्टमेंट की थी। 

    म्यूज स्पार्क को लेकर कंपनी ने बड़ा दांव लगाया है और इससे कंपनी अपने राइवल्स से आगे निकलना चाहती है. गूगल, ओपनएआई और एन्थ्रॉपिक जैसे नाम मेटा से काफी आगे निकल चुके थे. म्यूज स्पार्क कंपनी के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा। 

  • Stock Market में हड़कंप: सेंसेक्स 900 अंक गिरा, कल था रॉकेट जैसा उछाल

    Stock Market में हड़कंप: सेंसेक्स 900 अंक गिरा, कल था रॉकेट जैसा उछाल

    मुंबई 
    शेयर बाजार में लंबे समय बाद बीते काबोरारी दिन जोरदार रैली देखने को मिली थी. न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर मार्केट गदर मचाते नजर आए थे. सेंसेक्स-निफ्टी ने भी खूब उड़ान भरी और बड़ी बढ़त लेकर बंद हुए थे. लेकिन ये खुशी एक ही दिन की थी और गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होते ही दोनों इंडेक्स धड़ाम नजर आए। 

    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex खराब ओपनिंग के बाद अचानक कुछ ही देर में 900 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty भी रेड जोन में ओपन हुआ. गिरावट के बीच कई Adani Ports से लेकर Infosys तक कई दिग्गज कंपनियों के शेयर टूटकर कारोबार कर रहे थे। 

    सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी थमी
    बीते कारोबारी दिन बुधवार को बीएसई का सेंसेक्स 77,290 पर खुलने के बाद दिनभर रॉकेट की तरह भागा था और अंक में 2946.32 अंक या 3.95 फीसदी की तेजी लेकर 77,562.90 के लेवल पर क्लोज हुआ था. वहीं गुरुवार को ये 30 शेयरों वाला इंडेक्स सुस्ती में नजर आया और 200 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ ओपन होने के बाद कुछ ही देर में ये 900 अंक से ज्यादा की तगड़ी गिरावट के साथ 76,624 के स्तर पर आ गया।

    बात एनएसई निफ्टी की करें, तो ये भी बुधवार को तेजी से भागा था और 23,855 पर कारोबार की ओपनिंग करने के बाद अंक में 873.70 अंक या 3.78 फीसदी की उछाल के साथ 23,997.35 के लेवल पर बंद हुआ था. इसका हाल भी सेंसेक्स जैसा ही रहा और ये करीब 90 अंक फिसलकर 23,909 पर खुला, फिर 23,815 तक फिसल गया और इसके बाद इसमें भी गिरावट तेज हो गई. खबर लिखे जाने तक ये इंडेक्स 238 अंक की गिरावट लेकर 23,759 पर कारोबार कर रहा था। 

    1288 शेयर लाल निशान पर खुले
    शुरुआती कारोबार के दौरान शेयर बाजार में जहां 1215 कंपनियों के शेयरों ने बढ़त के साथ ग्रीन जोन में ओपनिंग की, तो वहीं दूसरी ओर 1288 कंपनियों के स्टॉक्स का हाल-बेहाल नजर आया और ये अपने पिछले बंद की तुलना में गिरावट के साथ खुले. इसके अलावा 174 कंपनियों के शेयर ऐसे रहे, जिनकी स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला यानी इनकी ओपनिंग फ्लैट मोड में हुई। 

    सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों की बात करें, तो बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share और Adani Ports Share 2 फीसदी से ज्यादा टूटकर खुले, तो वहीं IndiGo, HDFC Bank के शेयर भी कल की बढ़त गवांकर रेड जोन में ओपन हुए.  इसके अलावा मिडकैप में Hindustan Petroleum, Coforge, Bharat Forge Share भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. स्मॉलकैर की बात करें, तो Chola Holding Share (4%), PGEL Share (2.50%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  

    गिरावट के पीछे ये बड़ा कारण
    बात शेयर मार्केट में अचानक आई इस गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट टेंशन में फिर से इजाफा नजर आया है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर का ऐलान होने के बाद इसके टूटने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी. इसके चलते एशियाई मार्केट में भी ज्यादातर बाजार लाल निशान पर कारोबार करते दिखे। 

    निगेटिव ग्लोबल संकेतों के बीच भारत में भी सेंटीमेंट खराब हो गया और सेंसेक्स-निफ्टी भरभराकर टूट गए. क्रूड ऑयल की कीमतों में क्रैश के बाद फिर से मामूली तेजी देखने को मिली है, जिससे दबाव बढ़ा है। 

     

  • गौतम अडानी ने अमेरिकी कोर्ट में दाखिल की अर्जी, केस रद्द करने की मांग

    गौतम अडानी ने अमेरिकी कोर्ट में दाखिल की अर्जी, केस रद्द करने की मांग

     नई दिल्ली
    अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अमेरिका में सिक्योरिटीज धोखाधड़ी का केस रद्द करने की मांग की है. गौतम अडानी की ओर से अमेरिका की कोर्ट में प्री-मोशन पत्र दाखिल कर यह दलील दी गई है कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं होती है और यह अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में भी नहीं आता है. इसलिए अमेरिकन सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन की ओर से दायर सिक्योरिटीज धोखाधड़ी के मुकदमे को खारिज किया जाए। 

    उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी की ओर इसे लेकर कोर्ट में 30 अप्रैल को औपचारिक अर्जी दाखिल की जानी है. इससे पहले, प्री-मोशन पत्र दायर कर दिया गया है. अडानी के वकीलों ने इस पत्र के जरिये कहा है कि साल 2021 में अडानी ग्रुप की नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) की बॉन्ड बिक्री को लेकर अमेरिकन कमीशन के आरोप कानूनी तौर पर दोषपूर्ण हैं। 

    गौतम अडानी और सागर अडानी की ओर से कोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस मामले में व्यक्तिगत अधिकार क्षेत्र लागू नहीं होता, क्योंकि दोनों का अमेरिका से संबंध नहीं था और ना ही वह बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल ही थे. 75 करोड़ डॉलर के यह बॉन्ड अमेरिका के बाहर बिक्री किए गए थे. बॉन्ड्स की यह बिक्री रूल 144 ए और रेगुलेशन एस के तहत छूट का उपयोग करते हुए गैर-अमेरिकी अंडरराइटरों को की गई थी, बाद में इसका एक हिस्सा योग्य इंस्टीट्यूशनल बॉयर्स को दोबारा बेचा गया था। 

    याचिकाकर्ता के वकीलों ने यह भी दावा किया है कि अमेरिकन एक्सचेंज की शिकायत में यह नहीं बताया गया है कि गौतम अडानी ने बॉन्ड जारी करने की मंजूरी दी थी, मुख्य बैठकों में शामिल हुए थे या अमेरिकी निवेशकों को लक्ष्य कर किसी गतिविधि के निर्देश दिए थे. यह मामला अमेरिका की सीमा से बाहर का है. संबंधित सिक्योरिटीज अमेरिका में लिस्टेड नहीं हैं. इसे जारी करने वाली कंपनी भारत की है और यह पूरा काम भी भारत में ही हुआ है. अमेरिकी सिक्योरिटीज कानून लागू करने की जरूरी शर्त है घरेलू लेनदेन. अमेरिकी सिक्योरिटीज एक्सचेंज कमीशन यह साबित करने में फेल रहा है। 

    अडानी ग्रुप के वकीलों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया है और कहा है कि सिक्योरिटीज एक्सचेंज कमीशन ने किसी निवेशक को नुकसान होने के आरोप नहीं लगाए हैं. यह बॉन्ड 2024 में मैच्योर हो गए थे और ब्याज सहित इनका भुगतान भी कर दिया गया था. अडानी ग्रुप ने रिश्त के आरोप खारिज करते हुए कोर्ट में कहा है कि ये आरोप साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं हैं. ग्रुप की ओर से यह भी कहा गया है कि भ्रष्टाचार रोधी नीतियां और कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा के जिन बयानों का अमेरिकन एसईसी हवाला दे रही है, वे सामान्य कॉर्पोरेट आशावाद है. निवेशक इन पर कानूनी तरीके से भरोसा नहीं कर सकता। 

    गौतम अडानी और सागर अडानी की ओर से कोर्ट में यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ी तो वे खुद भी प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस में उपस्थित होने के लिए तैयार हैं. अमेरिकन सिक्योरिटी एक्सचेंज कमीशन ने नवंबर, 2024 में अडानी ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. अमेरिकन एजेंसी का आरोप था कि निवेशकों को गुमराह किया गया. अमेरिकी एजेंसी ने यह केस अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों के तहत दर्ज किया है। 

     

  • US-ईरान सीजफायर ने शेयर बाजार को दिया बड़ा झटका, सेंसेक्स 2700 अंक चढ़ा

    US-ईरान सीजफायर ने शेयर बाजार को दिया बड़ा झटका, सेंसेक्स 2700 अंक चढ़ा

    मुंबई 
    शेयर बाजार पर अमेरिका-ईरान में हुए दो हफ्ते के सीजफायर (US-Iran Ceasefire) का सीधा असर पड़ा है. खुलने के साथी ही बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2700 अंक से ज्यादा चढ़ गया, तो वहीं एनएसई निफ्टी ने भी ओपनिंग के साथ ही 800 अंकों की तगड़ी छलांग लगा दी. ग्लोबल मार्केट में बंपर तेजी के बीच शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव सिग्नल पहले से ही मिल रहे थे। 

    शेयर मार्केट में बुधवार को कारोबार की शुरुआत होने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 74,616.58 की तुलना में खुलने के साथ ही 77,290 के लेवल पर पहुंच गया और फिर कुछ सेकंड में ही ये अपनी रफ्तार को तेज करते हुए 77,392 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आने लगा।  

    बात नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स (NSE Nifty) की करें, तो अपने पिछले बंद 23,123.65 की तुलना में तेज उछाल के साथ ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स 23,855 पर ओपन हुआ और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए एक झटके में 800 अंक की तेजी के साथ 23,938 के लेवल पर जा पहुंचा। 

    युद्ध पर ब्रेक, तो हर ओर हरियाली
    युद्ध की टेंशन पर ब्रेक लगने के साथ ही शेयर बाजार में लौटी तूफानी तेजी के चलते सभी कैटेगरी में बुधवार को हरियाली देखने को मिली. BSE लार्जकैप में शामिल 30 में से 29 शेयरों बंपर उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे. IndiGo Share (10%), LT Share (8%), Bajaj Finance Share (7%), Adani Ports Share (7%), Bajaja Finserv Share (6.60%), M&M Share (5.90%). Eternal Share (5.30%). Titan Share (5.20%), Maruti Share (5.10%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे। 

    इसके अलावा HDFC Bank Share (4.80%). SBI Share (4%), ICICI Bank Share (4%), Kotak Bank Share (3.30%) और Reliance Share भी करीब 3 फीसदी की छलांग लगाता नजर आया। 

    शेयर बाजार में तेजी के ये बड़े कारण
    शेयर बाजार में तेजी के पीछे के बड़े कारणों की बात करें, तो अमेरिका और ईरान में जारी युद्ध की टेंशन (US-Iran War Tension End) कम होने और दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनने के बाद बाजारों के सेंटीमेंट में सुधार आया है. इसके अलावा तेल संकट गहराने से बढ़ी टेंशन को क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक आई गिरावट (Crude Oil Price Crash) ने कम किया है, जो इस तेजी के पीछे बड़ी वजह है। 

     

     

  • बाजार में अचानक बढ़ी रैली, ये 5 कारण बने इसके प्रमुख कारण

    बाजार में अचानक बढ़ी रैली, ये 5 कारण बने इसके प्रमुख कारण

    मुंबई 
    अचानक सोमवार को शेयर बाजार ने सबको हैरान कर दिया है. सुबह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी. लेकिन दोपहर 12.30 बजे मार्केट ने पलटी मार दी, और धीरे-धीरे बाजार अब मजबूती के संकेत दे रहे हैं। 

    दोपहर ढाई बजे सेंसेक्स 641.81 अंक चढ़कर 73,950 पर कारोबार रहा था. वहीं निफ्टी 190 अंक चढ़कर 22,906 पर कारोबार कर रहा था. एक्सपर्ट्स की मानें तो बाजार में इस अचानक आए उछाल के पीछे वैश्विक के साथ-साथ घरेलू कारण भी हैं. अब निवशेक धीरे-धीरे बाजार को लेकर सकारात्मक नजरिया अपना रहे हैं। 

    कारोबार के दौरान Trent के शेयर में 7 फीसदी, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस के शेयर में करीब 4 फीसदी, टाइटन के शेयर में 3.50 फीसदी, एक्सिस बैंक के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. मिडकैप कैटेगरी में कल्याण ज्वेलर्स के शेयर में 6.30 फीसदी की जोरदार तेजी है। 

    शेयर बाजार में इस तेजी के मुख्य तौर पर 5 कारण हैं.

    1. मिडिल-ईस्ट में तनाव कम होने के संकेत
    अमेरिका और ईरान में सुलह के संकेत से बाजार को बल मिला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 45 दिनों के युद्धविराम के लिए चर्चा कर रहे हैं. इस खबर ने बाजार में छाई अनिश्चितता को कम किया है. ईरान द्वारा ओमान के साथ मिलकर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'में आवाजाही के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने की घोषणा से भी निवेशकों ने राहत की सांस ली, क्योंकि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का डर कम हुआ। 

    2. आरबीआई (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक
    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है. बाजार के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी ब्याज दरों (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रख सकता है. महंगाई पर नियंत्रण और विकास दर को संतुलित रखने के आरबीआई के प्रयासों ने निवेशकों को भरोसा दिया है। 

    3. नए वित्त वर्ष से निवेश का आगाज
    इसके अलावा अप्रैल का महीना नए वित्त वर्ष की शुरुआत का समय होता है. पिछले महीने (मार्च) में भारी बिकवाली और सुधार के बाद, कई शेयरों के वैल्युएशन (Valuation) काफी आकर्षक हो गए थे. संस्थागत निवेशकों और रिटेल निवेशकों ने नए वित्त वर्ष के लिए नए सिरे से पूंजी निवेश शुरू कर दिया है. जिसे बाजार की तेजी का एक तकनीकी कारण माना जा रहा है। 

    4. आईटी और बैंकिंग सेक्टर में शानदार खरीदारी
    HDFC और Axis बैंक ने चौथी तिमाही के रिजल्ट से पहले अपडेट दिया है, जो कि बाजार को पसंद आया है. यही कारण है कि बाजार की इस रिकवरी को लीड बैंकिंग, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों ने किया है. बैंक निफ्टी में निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी देखी गई. इसके अलावा, आईटी सेक्टर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्थिर संकेतों के कारण सकारात्मक रुख बना रहा। 

    5. घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का समर्थन
    भले ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) बिकवाली कर रहे थे, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा है. एलआईसी (LIC) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स की ओर से की गई खरीदारी ने बाजार को बड़े क्रैश से बचाया है और सोमवार को रिकवरी का आधार तैयार किया। 

  • Gold and Silver Prices Decline: चांदी ₹2800 सस्ती, सोने का नया रेट क्या है?

    Gold and Silver Prices Decline: चांदी ₹2800 सस्ती, सोने का नया रेट क्या है?

     नई दिल्ली

    सोना-चांदी की कीमतों में जारी गिरावट (Gold-Silver Rates) का सिलसिला जारी है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स (MCX) पर वायदा कारोबार ओपन होने के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती हो गईं. चांदी एक झटके में अपने पिछले बंद के मुकाबले 2800 रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूट गई, तो वहीं सोने का भाव 1300 रुपये से ज्यादा कम हो गया। 

    इस गिरावट के बाद अब 1 Kg Silver Price अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से क्रैश (Silver Crash From High) होते हुए 2.09 लाख रुपये सस्ती हो गई है. अगर आप सोना-चांदी में निवेश का प्लान बना रहे हैं, तो फिर खरीदारी से पहले इनके लेटेस्ट रेट जान लेना आपके लिए जरूरी है. हालांकि, शुरुआती तेज गिरावट के दोनों कीमती धातुएं रिकवरी मोड में भी नजर आईं। 

    चांदी की कीमत में फिर गिरावट
    एमसीएक्स पर सोमवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही चांदी की कीमत धड़ाम हो गई. बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन गुरुवार को वायदा चांदी 2,32,495 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और जब लॉन्ग वीकेंड के बाद कमोडिटी मार्केट ओपन हुआ, तो Silver Price फिसलकर 2,29,651 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो चांदी अचानक 2844 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। 

    सोमवार को आई इस शुरुआती गिरावट के बाद अब चांदी अपने हाई लेवल से और भी ज्यादा कम कीमत पर मिल रही है. MCX Silver Price पर नजर डालें, तो इस कीमती धातु का लाइफ टाइम हाई लेवल 4,39,337 रुपये प्रति किलोग्राम है और ताजा भाव से तुलना करें, तो अब 1 Kg Silver Price 2,09,686 रुपये तक कम है। 

    सोने का भी चांदी जैसा हाल 
    न सिर्फ चांदी का भाव टूटा है, बल्कि सोने की कीमत में भी सप्ताह के पहले कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली है. बीते गुरुवार को सोने का वायदा भाव 1,49,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था और सोमवार को ये गिरावट के साथ 1,48,298 रुपये पर ओपन हुआ. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1382 रुपये कम हो गया।  

    सोना भी अपने हाई लेवल से अब काफी सस्ता हो चुका है. गोल्ड का लाइफ टाइम एमसीएक्स हाई 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है और ताजा भाव इस हाई के मुकाबले 54,686 रुपये सस्ता है। 

    ग्लोबल टेंशन, फिर भी टूटे सोना-चांदी 
    मिडिल ईस्ट युद्ध से ग्लोबल टेंशन चरम पर है और ट्रंप की ईरान को लेकर नई धमकियों ने इसे बढ़ाने का काम किया है. इन हालातों में भी सोना-चांदी की कीमतों में ये गिरावट चौंकाने वाली है, क्योंकि अक्सर किसी आपदा या जियो-पॉलिटिकल तनाव की स्थिति में कीमती धातुओं के दाम आसमान पर पहुंच जाते हैं। 

    वर्तमान हालात में सोना-चांदी की कीमतों पर कच्चे तेल के दाम में तेजी के चलते महंगाई के जोखिम ने दबाव बढ़ाया है, जो 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है. लोग अपने हाथ में कैश रखने को ज्यादा उचित मान रहे हैं. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी सोना-चांदी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं।